गुरुवार, 29 जनवरी 2026

*डाॅ.सलीम राज ने कार्यालय, छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड व अन्य वक्फ संस्थानों पर किया ध्वजारोहण*

 


*डाॅ.सलीम राज ने कार्यालय, छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड व अन्य वक्फ संस्थानों पर किया ध्वजारोहण*




मिशन पॉलिटिक्स , रायपुर छ.ग। देश के 77 वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर डाॅ.सलीम राज, माननीय अध्यक्ष, छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड (केबिनेट मंत्री दर्जा, छ.ग.शासन) ने कार्यालय छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड में ध्वजारोहण किया, ध्वजारोहण उपरांत राष्ट्रगान का गायन किया गया तथा गणतंत्र दिवस की बधाई दी गई। इस अवसर पर छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड के माननीय सदस्यगण श्री मोहम्मद फिरोज खान, श्री फैसल रिजवी (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्री रियाज हुसैन के साथ छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिम्मी नाहिद, लेखा अधिकारी पवन कुमार व बोर्ड कार्यालय के समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। 


*वक्फ संस्थानों पर भी डाॅ.सलीम राज द्वारा किया गया ध्वजारोहण:-*


डाॅ.सलीम राज द्वारा बड़ी ईदगाह-दरगाह हजरत सैयद पहलवान शाह बाबा र.अ., मस्जिदे मोहम्म्दी, मोहम्म्दी पब्लिक स्कूल, लाखे नगर ईदगाहभाठा रायपुर, मस्जिद हजरत गरीब नवाज कमेटी मुस्लिम हाॅल आर.डी.ए.काॅलोनी संजय नगर रायपुर आदि में भी ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर सम्बंधित वक्फ संस्थानों के मुतवल्ली, कमेटी के पदाधिकारी, समाज प्रमुख व आम जनमानस व स्कूली बच्चे उपस्थित रहे। डाॅ. सलीम राज द्वारा राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर आपसी एकता, अमन, भाईचारा के साथ यह पर्व मनाने देश को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। इसके अतिरिक्त छ.ग.राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित वक्फ संस्थानों द्वारा भी सम्बंधित संस्था के मुतवल्ली व कमेटी द्वारा ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 






वविनि की यह कैसी कार्यवाही - सागौन खजाने की सुरक्षा भ्रष्ट, फर्जी डिप्टी के हाथों में मामला -बारनवपारा परियोजना वन मंडल का - फर्जी डिग्रीधारी डिप्टी लोकेश साहू पर क्यों नही कर रहे कार्यवाही

 वविनि की यह कैसी कार्यवाही - सागौन खजाने की सुरक्षा भ्रष्ट, फर्जी डिप्टी के हाथों में 

मामला -बारनवपारा परियोजना मंडल का

फर्जी डिग्रीधारी डिप्टी लोकेश साहू पर क्यों नही कर रहे कार्यवाही


 अलताफ़ हुसैन की कलम से

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)  बार नयापारा परियोजना मंडल वन विकास निगम रवान परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर लोकेश साहू पर अनेक भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला, अनियमितताएं  के गंभीर आरोप लगने के बाद भी उसे पुनः बार नवापारा परियोजना मंडल के आरंग परिक्षेत्र मे डिप्टी रेंजर के पद का प्रभार देकर वन विकास निगम के आला कमान ने उसे पुनः महिमा मंडित कर खुले स्तर पर भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला, अनियमितता,एवं फर्जीवाड़ा करने का निमंत्रण दे दिया है क्योंकि सेवाकाल प्रारंभ होने के पूर्व से ही उसकी बुनियादी नींव ही फर्जी स्कूल प्रमाण पत्र के दस्तावेज के आधार पर शासकीय सेवा काल में नियमितिकरण से ही प्रारंभ हुआ है अब जिसकी सेवा  काल ही फर्जी तरीके से हुई हो उसकी इतने लंबी अवधि में कितने भ्रष्टाचार,गड़बड़ ,घोटाले,  अनियामिताएं,एवं फर्जीवाड़ा, किया गया होगा उसका अनुमान कोई भी बड़ी सहजता से लगा सकता है क्योंकि प्राचीन कहावत है कि चांवल पकने पर केवल एक चांवल दाना के अन्न को दबा कर पता किया जाता है कि वह पूरी तरह से पका है या नही परंतु यहाँ तो डिप्टी रेंजर लोकेश साहू की भ्रष्ट कार्य प्रणाली से समूचा वन विकास निगम के अधिकारी कर्मचारी भली भाँति जानते और समझते है फिर भी उसको बार नवापारा परियोजना मंडल आरंग परिक्षेत्र में पुनः पदस्थापना कर उसे महिमा मंडित करने के पीछे अधिकारियों की दुधारू गाय वाली मंशा स्पष्ट नजर आ रही है

             दाखिला खारिज  का  छाया पत्र


जबकि फर्जी दस्तावेज की वजह से बारंबार उसकी उच्च स्तरीय अनेक शिकायत होने पर भी मुख्यालय पर बैठे उच्च अधिकारियों के कान मे जूं तक नही रेंगी तथा उसको  खुले वन में चारागाह की भाँति छोड़ दिया गया ताकि भ्रष्टाचार,गड़बड़ घोटलां कर  के अपने आकाओं को खुश कर सके परंतु ऐसे भ्रष्ठ निगम कर्मी पर नकेल कसने के लिए न्यायालय के दरवाजे अभी भी खुले हुए है जिस पर उच्च स्तर पर विभागीय कार्यवाही नही की जाती तब स्वतंत्र रूप से कोई भी व्यक्ति द्वारा विधिक न्यायालयीन कार्यवही करने बाध्य हो सकता है 


 सिरपुर, रायकेरा,वन क्षेत्र छताल - चांदादाई मंदीर के आगे वन क्षेत्र की भारी कटाई

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             स्पष्ट करते चले कि यदि इस प्रकार की न्यायालयीन विधिक कार्यवाही होती है तब इसमें उपर बैठे उच्च अधिकारी से लेकर जांच अधिकारी तत्कालीन डी एम से लेकर एस डी ओ तक पर गाज गिर सकती है जैसा की फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ ने पूर्व समाचार में उन पत्रों का हवाला भी दिया गया था जिसमें वन जलवायु  परिवर्तन विभाग के अवर सचिव द्वारा जारी पत्र क्रमांक/2917/दिनंक/,14/09/2023/ का हवाला देकर  क्षेत्रीय कार्यालय बार नवापारा परि. मंडल ने मंडल प्रबन्धक को लिखित पत्र में क्र.वविनि /2023/1360/दिनंक 06/12/2023  में स्पष्ट निर्देशित किया गया है कि रवान परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर लोकेश कुमार साहू के विरुद्ध एफ. आई. आर. करते हुए कार्यवाही की जाए परंतु उक्त लेखपत्र पर बार परियोजना मंडल के मंडल प्रबन्धक द्वारा क्या कार्यवाही किया गया यह अब तक स्पष्ट ज्ञात नही परंतु यह तो तय है कि यदि इस पर गंभीरता से कार्यवाही की जाती तो डिप्टी रेंजर लोकेश कुमार साहू का निगम से बर्खास्त होना तय माना जा रहा है क्योंकि वन अधिनियम  तो यही कहता है कि कोई भी वन कर्मचारी चाहे वह  वन विकास निगम का ही वन कर्मी क्यों न हो यदि किसी भी गंभीर अपराधिक  प्रकरण होने की दशा में उसे कार्य से पृथक किया जा सकता है परंतु ऐसे वन विकास निगम कर्मी जो अनेक फर्जी प्रमाण पत्र से शासकीय नौकरी प्राप्त कर भ्रष्टाचार, गड़बड़, घोटला,अनियमितता का  गर्द उडा रहा हो ऐसे  प्रकरण में तो  तत्काल कार्य से पृथक किया जा सकता है फिर भी छ्ग राज्य वन विकास निगम में ऐसे बहुत से भ्रष्ट, कुकर्मी निगम कर्मी  मौजूद है जिन्होंने पैसे की बदौलत आज भी नौकरी में न सिर्फ विद्यमान है बल्कि अपने परमोशन का लाभ लेकर वन अधिनियम कानून की धज्जिया उड़ाते हुए ठहाका लगाकर व्यवस्था को ठेंगा दिखा  हंस रहे है उन्ही मे से एक डिप्टी रेंजर लोकेश कुमार साहू भी है जिसे आरंग परिक्षेत्र का प्रभार दे दिया गया 


   प्राचार्य द्वारा सूचना के अधिकार में दी गई सत्यापित  बारहवीं 

    का पत्र
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        बताते चले कि पूर्व में भी एक आई एफ एस अधिकारी के कार्यकाल में आरंग परिक्षेत्र के  कोडार डेम के दूसरे हिस्से में लोहारडीह एवं परसाडीह  के कक्ष क्रमांक  860 जिसे निगम कर्मी कक्ष क्रमांक 859 बताते है में लगभग 15 हेकटेयर  वृहद भूभाग था जिसमे हरे भरे परिपक्व सघन वन क्षेत्र था वर्ष 2019 -2020 को उजाड़ कर पूरी तरह समतल कर दिया गया था जिसका विरोध परसाडीह के मूल वनवासी जिनकी कई पुश्ते द्वारा निवासरत  होते  हुए कृषि कार्य कर जीवन यापन कर रहे है उन्हे उक्त क्षेत्र से अतिक्रमण बता कर बेदखल किया गया था जिसका विरोध का सामना आज भी उनके द्वारा किया जा रहा है उस 859 - 860 क्षेत्र मे लगभग करोड़ों के सागौन सहित अन्य मिश्रित प्रजाति के कष्ठों का विदोहन किया गया था पश्चात वन विकास निगम ने उसी वित्तीय वर्ष को पुनः लाखों करोड़ों की  लागत  लगा कर उसी वन क्षेत्र में पुनः सागौन प्लांटेशन  किया गया था तत्कालिक स्थानीय ग्राम वासियों से पूछने पर उनका कथन था कि  अनेक वर्षों से परिपक्व भिन्न भिन्न प्रजाति के स्वस्थ्य पेडों की कटाई किया जाना यह समझ के परे था यही नही वर्ष 2019-2020 मे वविनि द्वारा लगाए गए  सागौन प्लांटेशन आज पूरी तरह बर्बाद हो चुके है


बार क्षेत्र में बगैर मेजरमेंट हुए काष्ठ का जखीरा


 यह तत्कालिक में आरंग के डिप्टी लोकेश साहू द्वारा संपादित कराए गए थे अब करोड़ों रुपये प्राप्त कर वन के हरियाली को उजडा चमन बना कर काष्ठ पातन करना फिर लाखों करोड़ों की राशि लगा कर सागौन प्लांटेशन कर पांच वर्षीय सागौन से वन विकास निगम को क्या आर्थिक लाभ मिला इसका विश्लेषण अधिकारियों को करना चाहिए क्योंकि प्रति   छ माह या वर्ष में केजयुवल्टी, जैविक,रसायनिक,खाद,डी.ए.पी. सहित सुरक्षा, चौकीदारी मे मंडल द्वारा परिक्षेत्रों के रेंज अधिकारी, कर्मियों में किश्तों में राशि जारी करती है जो तीन से पांच वर्ष की आवधि तक रहता है फिर भी कथित लोहारडीह,परसाडीह, वप्लांटेशन बर्बाद होना भ्रष्ट कार्यों की और सीधा इशारा करता है जबकि वविनि में होता यह है कि वनों को उजाड़ने के बजाए रिक्त पड़त भाटा बंजर भूमि में कार्य योजना बना कर प्लांटेशन किया जाता है फिर भी वन विकास निगम द्वारा कष्ठों की चाह में  हरे भरे लहलहते वनों पर कुल्हाड़ी, और आधुनिक आरी से समूल जड़ पर कुठारा घात करना, फिर सागौन प्लांटेशन  करना यह कौन सी नीति है यह समझ के परे है जबकि नियमावली में वही पेडों का पातन करना है जो बीमारू, अस्वस्थ, या पेडों के ग्रोथ में व्यवधान उत्पन्न कर सागौन के ,ग्यारह,इक्कीस, एकतीस,ईकचालीस वर्षीय आयु के पेड़  हो वैसे पेड़  काटे जाने का प्रावधान है  जबकि वनों में ऐसे भी बहुत से पेड़ है जो स्वयं के बीज धरा पर स्वमेव, अंधड़ तूफान हवा से गिर धाराशाही अवस्था में पहुँच जाते है तथा  नैसर्गिक प्रकृति रूप से विकसित एवं पुलकित हो कर उजड़ते वनों  एवं  प्राकृतिक को संतुलित करते रहते है उन्हे ही निशान बना कर वन विकास निगम वनों के विनाश का मूल कारण बनता जा रहा  है यही स्थिति आरंग परिक्षेत्र के कोडार जलाशय के समीप माँ खल्लारी मन्दिर के समीप हजारों पेडों का पातन गत वित्तीय वर्ष 2025 मई-जून में बड़ी बेरहमी से सागौन सहित भिन्न भिन्न प्रजाति के पेडों का पातन कर लिया गया इसके साथ ही कथित क्षेत्र में प्लांटेशन भी कर दिया गया अब सवाल यह उठता है कि इसके प्लांटेशन  में  वन विकास निगम ने कितनी राशि व्यय की है यह अब ज्ञात करना  बाकी है 



नाका पंजी में दर्ज किए बिना ट्रक पार होता हुआ 

       नाका में नाका बंदी

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      यह भी ज्ञात हुआ है कि डिप्टी लोकेश साहू, सहित अन्य डिप्टी रेंजर की अगुवाई  में  बार नवापारा परियोजना मंडल के सिरपुर, बार, रायतुम , रवान  क्षेत्र में बड़ी तबाही मचाते हुए कटाई कि है जिसमें अनेक भिन्न भिन्न प्रजाति के इमारती काष्ठों का दोहन किया गया है  इस सिलसिले में यह भी ज्ञात हुआ है कि प्रति वर्ष थिनिग के नाम पर चिंहित मार्किंग ग्यारह वर्षीय, इक्किस वर्षीय, इकतीस वर्षीय, एवं इकचालीस वर्षीय सागौन थिनिग का प्रारूप योजना तैयार की जाती है जिसमें प्रति वर्ष  सागौन काष्ठों का निर्धारित लक्ष्य घन मीटर अंकित रहता है उदाहरण स्वरूप जैसे सात हजार से दस हजार घन मीटर पातन का लक्ष्य बार नवापारा  परि योजना मंडल मे है तब उस लक्ष्य प्राप्ति को पूर्ण करने के पश्चात अन्य काष्ठों  का विदोहन कर अतिरिक्त आर्थिक लाभ कमाया जाता है इसके एवज में प्रति वर्ष राज्य शासन के सरकार को लाभांश राशि दी जाती है एक प्रकार से छ्ग राज्य वन विकास निगम वन क्षेत्र में किराये दार की भाँति है जो उपरोक्त लक्ष्य पूर्ण करनें विद्युत की गति से अप्रेल तक पातन कार्य संपादित किए जाते रहेंगे 





माँ खल्लारी आरंग के समीप कटाई एवं प्लांटेशन

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इसी की आड़ में बहुत से वन विकास निगम कर्मी भारी भ्रष्टाचार को अंजाम देकर अपने और अपने आकाओं को खुश कर पर्मोशन,पदोंन्नति, एवं मनचाही स्थान  व्यवस्था का लाभ उठाते है जिसका ताजा उदाहरण डिप्टी रेंजर लोकेश कुमार साहू का है जिसे कवर्धा जिले में ट्रांसफर किया गया था परंतु स्थानीय क्षेत्र एवं बाल गोपाल के शिक्षा, इत्यादि का हवाला देकर कथित बार नवापारा परियोजना मंडल का मोह वे त्याग नही रहे है और वर्षो से यहां जमे हुए है  वन विकास निगम की यह स्थिति यही नही बल्कि संपूर्ण छ्ग प्रदेश के निगम वन कर्मचारियों की है जिसकी वजह से बहुत से वविनि कर्मी अपने अपने क्षेत्र में पचीस से उपर वर्षों से जमे रह कर एक ही स्थान के कूप मंडुक बन गए है,,, शेष अगले अंक में जारी...... 


शनिवार, 10 जनवरी 2026

अभनपुर नयापारा आरामिल में प्रतिबंधित काष्ठ दिन रात पहुँच रहे

 अभनपुर नयापारा आरामिल में प्रतिबंधित काष्ठ 

  दिन रात पहुँच रहे


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छत्तीसगढ़ प्रदेश के वन क्षेत्र में बेतहाशा अवैध कटाई किसी से छुपा नही है आए दिन समाचार पत्रों की सुर्खियों में यह बात प्रकाशित होते रहती है कि साल, सागौन,बीजा, खैर, सहित भिन्न भिन्न प्रजाति के कहुआ,जैसे अन्य काष्ठ तस्करी करते वन विभाग की टीम ने पकडा परंतु वर्ष में एकाध बार किए जाने वाली ऐसी कार्यवाही एक प्रकार से ...ऊँट के मुँह मे जीरा...के समान नही लगता है क्योंकि लगातार प्रदेश के निस्तार  काष्ठ डिपो में उपरोक्त इमारती काष्ठ की बढ़ रही शासकीय मूल्य दर एवं ऑन लाइन नीलामी ने काष्ठ माफिया, तस्करों एवं आरा मिल,टिम्बर की नींद उडा कर रख दी है परिणामतः  काष्ठ तस्करों, दलालों ने किसान अथवा स्थानीय सरपंच की मिलीभगत कर लिखित में कटाई की अनुमति प्राप्त कर लेते है तथा अनुमति पत्र लेकर उसकी आड़ में कृषि, भूमि, क्षेत्र के प्राकृतिक रूप से पैदा,पीपल से लेकर नीम, बेर, इमली, एवं अन्य फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पेडों का पातन कर क्षेत्र के आरा मिल,टिम्बर में पहुँचा दिया जाता है जबकि उपरोक्त फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पेड़ एवं कहुआ तक पेड़ की कटाई बगैर सक्षम वन अधिकारी, एवं एस.डी.एम. की अनुमति पत्र लिए वनोपज धन का  पातन नही किया जा सकता यह सीधे सीधे काष्ठों की चोरी एवं तस्करी की श्रेणी  मे आता है जिससे  काष्ठ तस्कर और दलालों को इसके एवज में अच्छा खासा आर्थिक लाभ मिल जाता है जबकि वन अधिनियम यह कहता है कि छ्ग शासन द्वारा छुट बबूल किस्म के अन्य प्रजाति के वन संपदा काष्ठों का नाम आयु, एवं उसके काश्त कारी भूमि से हटाने का लिखित कारण बता  कर उसे सरपंच के द्वारा अनुमोदन कर वन विभाग के सक्षम अधिकारी से लिखित में अनुमति लेना अनिवार्य होता है जिसमें कम से कम तीन से छ माह का समय लगता है परंतु काष्ठ तस्कर एवं दलाल बगैर किसी लिखित प्रक्रिया के सरपंच की अनुमति जैसे वह वन विभाग का स्वामी या अधिकारी हो तथा मनमाने रूप से बबुल,जैसे अन्य काष्ठों की विभाग  को अनुमति, सूचना दिये बगैर सरपंच पद का लाभ उठाते हुए  खुले आम मन माफिक काष्ठों का विदोहन कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर शासन के राजस्व को चोट पहुंचा रहे है ज्ञात हुआ है कि बहुत से आरा मिलर्स स्वयं के दलाल नियुक्त कर ट्रैक्टर एवं बड़े ट्रकों में चोरी छिपे कृषि क्षेत्रों के काष्ठों का परिवहन कर लगातार हरियाली मय क्षेत्रों का विदोहन तेजी से किया जा रहा है इस संदर्भ में आशंका व्यक्त की जा रही  है कि बहुत से छोटे वन कर्मचारियों ने बकायदा होने वाली कटाई के एवज में प्रति गाड़ी के हिसाब से हजारों लाखों रुपये का लेनदेन कर विशेष छुट दे रखी है जिसकी वजह से काष्ठ तस्करों के हौसले और बुलंद है. 


इस तारतम्य में अभी लगातार समाचार मिल रहा है कि अभनपूर, राजिम नयापारा,सिमगा क्षेत्रों के आरा मिल काष्ठों कि बम्फर आमद से आरा मिल लालम लाल और गुलज़ार है जहाँ प्रतिबंधित कहुआ से लेकर भिन्न भिन्न प्रजाति के आम, नीम, कहुआ, सहित इमारती काष्ठों का अनवरत परिवहन हो रहा है परंतु इस संदर्भ में वन विभाग का उड़न दस्ता के द्वारा सारगर्भित कार्यवाही नही होना बताया जा रहा है जबकि अति विश्वसनीय सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि अभनपुर जो राजधानी रायपुर को जोड़ने वाला प्रमुख सेंटर क्षेत्र माना जाता है जहाँ एक ओर से, कुरुद, जो धमतरी वन मंडल के मेघा क्षेत्र से सिंगपुर नगरी को जोड़ता है वही धमतरी,वन मंडल के बहुत से वन क्षेत्रों का यह क्षेत्र खुला मार्ग है जहाँ से भारी मात्रा में वन क्षेत्र के काष्ठों का परिवहन निर्बाध गति से किया जाना बताया जा रहा है वही दूसरी ओर से पांडुका गरियाबंद से  बड़ी सहजता से भी काष्ठ परिवहन राजिम नयापारा  होते हुए अभनपुर हेतु आवगमन उपलब्ध  है जिसका दो दर्जन से उपर आरामिल तस्कर भरपूर लाभ उठा रहे है  इसकी जब सूत्रों से जानकारी ली तो अधिकांश आरा मिलर्स के कर्ता धर्ता का रटारटाया जवाब था कि   स्थानीय आरामिल  में उपलब्ध काष्ठ  महाराष्ट्र  वन क्षेत्र काष्ठागार से नीलामी से ली गई है  सवाल उठता है कि लाखों कि महाराष्ट्र क्षेत्र के इमारती काष्ठ नीलामी से लाखों रुपये व्यय कर एक या दो ट्रक ही लिया जा सकता है यहाँ तो कई ट्रक इमारती काष्ठ प्रत्येक आरा मिल मे उपलब्ध है जो कहाँ से यहाँ तक पहुंचा? यह विचारणीय पहलू है अभनपूर, राजिम  नयापारा, सिमगा, आरामिल में ऐसी स्थिति एक दो आरा मिल मे ही नही बल्कि दर्जनों आरा मिल में देखी जा सकती है यदि इसकी सूक्षमता से जांच की जाए तो बहुत बड़ा काष्ठ तस्करी का भंडाफोड़ यहाँ हो सकता है 


  लगातार अभनपुर, राजिम नयापारा आरा मिल क्षेत्रों में हो रही अवैध काष्ठ परिवहन के संदर्भ में नया रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र कुमार महोबिया से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में कथित क्षेत्र में लगातार लाव लश्कर के  साथ रात्रि गश्त किया जा रहा है  जिस का परिणाम रहा की अभनपुर के दो आरामिल पर कार्यवाही की गई परंतु यह पर्याप्त नही है उन्होंने आगे बताया कि जब तक  काष्ठ तस्करों पर बड़ी कार्य वाही नही हो जाती तब तक उसे वे सफलता नही मानते वही जिला उड़न दस्ता प्रभारी सामंत  राय  से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि आरंग सहित अभनपुर एवं अन्य क्षेत्र में  तस्करों पर कार्यवाही की गई है यह कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी लगातार काष्ठ माफियाओं पर कार्यवाही के लिए सतत गश्त की जा रही है शीघ्र ही इसके सार्थक परिणाम सामने आने की उम्मीद व्यक्त की गई है बताते चलें  कि कार्यवाही जो भी हो परंतु आरा मिल के खिलाफ फॉरेस्ट काइम  न्यूज़ उक्त अवैध  काष्ठ तस्करी पर  समय समय पर पाठकों को अवगत कराते रहेगा क्योंकि  इनके द्वारा काष्ठ लाए जाने वाले श्रोत,,नाम, आरा मिल की व्यवस्था सहित अन्य सैटिंग व्यवस्था लेनदेन इत्यादि का खुलासा किया जाएगा.