वन विभाग की अभनपुर आरामिल मे पकड़ी गई करोड़ों सराई (साल) काष्ठ की कार्यवाही मे बड़ा खेल का अंदेशा
अल्ताफ हुसैन
रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)राजधानी रायपुर का सर्वाधिक अति संवेदनशील वन मण्डल कार्यालय क्षेत्र जहाँ कार्य प्रणाली व्यवस्था मे तनिक गफलत हुई नही की विभागीय कार्यों का डंडा चलने का भय सभी अधिकारी कर्मचरियों पर सदैव बना रहता है उस की चपेट मे परिक्षेत्राधिकारी से लेकर मैदानी अमले के कर्मचरियों पर ऐसी विभागीय कार्यवाही की दो धारी तलवार लटकी रहती है कि जरा सी लिखा पढ़ी में ऊँच नीच की जुम्बिश हुई नही कि उन पर डंडा चलना लाजिमी है फिर भी मैदानी कर्मचारी रात दिन मेहनत कर प्लांटेशन से लेकर अन्य संपादित कार्य शत प्रतिशत करने के साथ ही विभागीय मैनेजमेंट तथा राजधानी के राजनैतिक, तीज त्योहार, पर्व धार्मिक व्यवस्था के साथ अनेक समावेशी व्यवस्थाओं का भार उपने सिर लेकर कई गुना मन वजन बढ़ा लेते है जिसकी वजह से बहुत से अधिकारी विशेष कर रायपुर वन मण्डल कार्य क्षेत्र से पलायन करने बाध्य रहते है उस पर वरिष्ठ अधिकारियों का आर्थिकी मैनेजमेंट का तांडव उन पर अलग बना रहता है इस संदर्भ में कुछ चर्चित विभागीय कार्यों का नजदीकी से समीक्षात्मक, अवलोकन किया तो पाया कि कुछ माह पूर्व कोरबा से कथित सरई (साल गोल्डन काष्ठ) काष्ठों की स्थानीय रायपुर डिविजन एवं कोरबा डिविजन के संयुक्त टीम द्वारा अभनपुर मिल के व्यवस्थापक द्वारा करोड़ों की प्रतिबंधित काष्ठ को कौड़ियों के दाम दो से दस रुपये प्रति किलों की दर मे कई टन माल का अवैध रूप से क्रय कर लिया गया था जिस पर रायपुर उड़न दस्ता द्वारा अभनपुर स्थित शर्मा सॉ आरामिल संचालक ममन चंद शर्मा के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही करते हुए वन मंडल रायपुर के उड़न दस्ता, एवं कोरबा वन मंडल के वन कर्मियों की उपस्थिति में क्रेता विक्रेता दोनों के उपर वन अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध कर कार्यवाही किया गया था
जिसमे यह बताया गया था कि दो ट्रक सेकडों वर्ष पुराने सरई (साल)इमारती कष्ठों का वन मंडल कोरबा के वन कर्मियों द्वारा राजसात कर कोरबा ले जाना बताया गया फिर ऐसी क्या वजह हुई कि कुछ सप्ताह मे ही सी सी एफ रायपुर द्वारा पुनः जांच प्रक्रिया करवाई गई जो अब तक जारी है उक्त पुनःरिक्षण जांच की चर्चा आम जन, और विभागीय वन कर्मी के मध्य बहुत जोरों शोर से हो रही है उक्त सी सी एफ द्वारा दुबारा जांच कार्यवाही को लेकर अनेक क्यास निकाले जा रहे है इस संदर्भ मे यह भी खबर उड़ रही थी कि रायपुर उड़न दस्ता टीम के द्वारा अभनपुर का अति चर्चित आरामिल जांच कार्यवाही को लेकर कुछ अधिकारियों पर उनके संदेहास्पद कार्य शैली को लेकर शंका व्यक्त की जा रही थी इसकी सत्यता ज्ञात करने के उद्देश्य से आरा मिल जाकर पुनः जांच की गई साथ ही यह भी चर्चा है कि कुछ अधिकारियों की टीम द्वारा कुछ अधिकारी से पूछताछ की गई थी अब इसमें कितनी सत्यता है इसकी पुष्टि फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ नही करता है परंतु सीसीएफ स्तर पर अभनपुर आरा मिल मे कथित कोरबा से तस्करी कर लाई गई सराई (साल) काष्ठ पर रायपुर वन मण्डल उड़न दस्ता द्वारा की जा चुकी कार्यवाही होने के बाद यह पुनः जांच प्रक्रिया क्यों और किस वजह से की गई वह अनेक संदेह और सवालों को खड़ा करता है एक वजह यह भी बताया जाता है कि राजनैतिक दबाव की वजह से दोबारा अभनपुर आरामिल मे ऐसी कार्यवाही की गई जिसकी पूरी चर्चा विभाग और बाहर होने लगी लोग सवाल उठाने लगे की जब उच्च स्तरीय कार्यवाही करना ही था तब दोबारा जांच क्यों ? इस संदर्भ मे अंदर खाने मे इस बात की चर्चा भी बड़े जोरों से गर्म है कि कोरबा वन मण्डल द्वारा दो ट्रक सरई काष्ठ राज सात कर ले जाया गया था परंतु सीसीएफ टीम के सघन जांच मे अभनपुर के शर्मा सॉ आरा मिल मे उतनी ही सरई (साल) इमारती काष्ठ पुनः पाई गई है जिसकी कीमत भी करोड़ों रुपए आंकी जा रही है क्योंकि यह सराइ(साल) काष्ठ भी उसी का हिस्सा माना जा रहा है जिसे जप्त कर राजसात कर कोरबा ले जाया जा चुका है ? अब सवाल खड़ा होता है कि जब संपूर्ण कार्यवाही होने के बाद सरई (साल)काष्ठ राजसात कर मूल कोरबा पहुंचाया जा चुका है तब रायपुर वन मंडल के अभनपुर स्थित शर्मा सॉ आरा मिल मे सराइ (साल) का दो ट्रक से अधिक काष्ठ किसका है ?
ज्ञात करने जब अभनपुर जा कर इसकी पतासाजी की गई तो ज्ञात हुआ कि वहां सीसीएफ वन कर्मी टीम द्वारा पुनः रिक्षण से प्राप्त सरई (साल) काष्ठ किसी भी वन मण्डल से टी. पी. अथवा जारी वैध दस्तावेज प्राप्त नही हुआ जो कई सवालों को खड़ा करता है कि जब यहां प्राप्त सरई (साल) का दस्तावेज यहां नही तो कोरबा ले जाया गया सरई साल किसका ? और यदि उसका दस्तावेज सही तो अभनपुर शर्मा सॉ मिल मे वर्तमान मिले सरई साल का दस्तावेज किस वन मंडल से क्रय कर लाया गया वह भी शर्मा सॉ मील मे यहां नही मिला दोनों स्थिति मे वन कर्मियों एवं सॉ मील मालिक की कार्य शैली पर संदेह और बढ़ जाता है हालांकि कोरबा से सरई (साल) काष्ठ लाने वाले ठेकेदार ने किस युक्ति से बगैर नीलाम काष्ठागार या विभागीय लिखा पढ़ी दस्तावेज के बगैर से फर्जी टी पी चालान के मध्यम से रायपुर अभनपुर सॉ मिल लाकर परिवहन किया गया था वह तो वन विभाग की टीम द्वारा कार्यवाही कर उतना काष्ठ वापस कोरबा ले गई अब यहाँ सीसीएफ टीम ने पुनः रिक्षण कर उतना ही मात्रा से अधिक काष्ठ का पाया जाना वह दोनों रायपुर, कोरबा वन मंडल वन कर्मियों को शक और कार्यवाही के कटघरे मे ला कर खड़े कर दिया है यहाँ तक सरई (साल) काष्ठ लाकर तस्करी करने वाले व्यक्ति मिल मालिक का फंसना तो तय है लेकिन दोनों वन मंडल कार्यालय के वन कर्मियों पर भी विभागीय कार्यवाही, निलंबन की तलवार लटकी हुई है जबकि इस संदर्भ मे कोई शक-ओ- शुबह नही कि रायपुर वन मण्डल के उड़न दस्ता टीम ने रात दिन एक कर के इंच घन मीटर नाप जोख उच्च अधिकारीयों के मार्ग दर्शन मे वन अधिनियम के तहत तत्कालिक सराइ (साल) कष्ठों पर त्वरित कार्यवाही कर प्रशंसा अर्जित की है इसके पूर्व भी खैर प्रकरण की अगुवाई कर वाह वाही बटोरी है परंतु उनकी गलती यह है कि वे कोरबा सरई साल काष्ठ की कार्यवाही के समय पूरे मिल का बारीकी से निरीक्षण न करते हुए केवल लाए गए कष्ठों की तरजीह दी तथा अन्य कष्ठों पर ध्यान नही दिया वही कोरबा वन मंडल के वन कर्मियों के बीच से कथित ठेकेदार द्वारा इतने टोल नाका सब को पार कर राजधानी रायपुर तक काष्ठ कैसे पहुंच गया वह भी फर्जी टी पी, बगैर विभागीय दस्तावेज, और चालान के माध्यम से जो बगैर किसी वन कर्मी के मिली भगत के असंभव है रायपुर सीसीएफ ऑफिस टीम द्वारा पुनःरिक्षण अभनपुर आरा मिल परिसर के क्षेत्र मे इतनी बड़ी मात्रा मे सराई (साल) काष्ठ का मिलना अचंभित और हैरान करने वाली बात है
बहुत से स्थानीय आरा सॉ मिलार्स से चर्चा करने पर यह बात छन का सामने आ रही है कि जिस प्रकार बड़ी मात्रा मे सरई साल काष्ठ सहित अन्य प्रजाति के इमारती कष्ठों का बगैर दस्तावेज के जखीरा बरामद हुआ है उससे यह बात स्पष्ट है कि आरामिल तो बंद होना तय है साथ ही उसका लाइसेंस भी रद्द होना तय माना जा रहा है जबकि कुछ वन अधिनियम कानूनी विद जानकार यह भी कहते है कि अभनपुर वन मालिक द्वारा कुछ किलोमीटर की दूरी पर अमोरा स्थित क्षेत्र के स्वयं के निजी भूमि मे आरामिल का लाइसेंस नए नाम पता के साथ स्थानांतरण करवा सकता है वह भी उस स्थिति मे जब हाल ही पकड़े गए काष्ठ मूल्यांकन का शासकीय दर से फाइन अदा करने के बाद वह भी सीसीएफ द्वारा उच्च स्तरीय जांच पर यदि चाहे तभी संभव हो सकता है नही तो रायपुर कोरबा वन कर्मियों पर कार्यवाही तो होगी ही साथ मिल मालिक को लंबी जेल यात्रा भी तय है यह भी चर्चा है कि मिल मालिक नाम मात्र काष्ठ छोड़ कर रात्रि में वह बेशकीमती काष्ठ का परीवहन गुपचुप तरीके से पिछले दरवाजे से कर सकता है तथा विभागीय कार्यों को भी प्रभावित कर सकता है जिस पर विभाग पैनी नज़र या एक सिपाही उसकी सुरक्षा मे रात दिन नियुक्त कर निगरानी बनाए रखना आवश्यक है परंतु विभाग केवल जांच की आंच मे वन कर्मियों को उलझा चुका है जबकि रायपुर उड़न दस्ता टीम ने आरा मिल के मशीन को वन अधिनियम के अनुसार विभागीय सील लगाकर लॉक कर दिया गया जो अनेक कही अनकही सवालों के जवाब गर्त में अब भी छुपा हुआ है अब देखना यह है कि भविष्य मे अभनपुर आरा मिल के इस बहुचर्चित सरई (साल) प्रकरण मे ओर क्या कार्यवाही होती है सब के सिर पर तलवार लटकी हुई उसकी जद मे अब वन मंडल के विभागीय वन कर्मी आते है या फिर मिल मालिक यह देखना होगा ?











































