रविवार, 20 सितंबर 2026

रेंजर के खुले भ्रष्टाचार की अग्नि में वन विकास निगम का प्लांटेशन स्वाहा

 रेंजर के खुले भ्रष्टाचार की अग्नि में वन विकास निगम का प्लांटेशन स्वाहा

अलताफ़ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम प्रा. लि. द्वारा हरियाली प्रसार करने जैसे महती उद्देश्य एवं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सी एस आर.)के तहत अनेक औद्योगिक घरानों से मिलकर (आई पी डी) योजना के तहत रिक्त पड़त भाटा ओरेंज भूमि पर भिन्न भिन्न प्रजाति के पौधों का प्लांटेशन कर वातावरण को प्रदूषण मुक्त शुद्ध जलवायु एवं  ऑक्सिजन निर्मित कर आम जन के स्वस्थ्य हित जैसे पुनीत कार्य करता है एवं पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और सरकारी नियमों के साथ तीन से पांच  वर्षों के निर्धारित तिथि पूर्ण होने पर संबंधित उद्योगिक घराने या शहरी ग्रामीण क्षेत्र के परिषद, सरपंच या नगर निगम को  हस्तांतरित कर अपने नैतिक दायित्वों,कर्तव्यों का अनुपालन करते रहा है हस्तांतरण पश्चात उन ग्रामीण जनप्रतिनिधि संस्थान, नगर निगम , नगर परिषद का नैतिक दायित्व बनता है कि वह छ्ग वन विकास निगम द्वारा रोपित प्लांटेशन की कम से कम परिपक्व  अवस्था तक उनकी सुरक्षा व्यवस्था देख रेख समुचित माध्यम से करना अनिवार्य हो जाता है परंतु छ्ग वन विकास निगम द्वारा भिन्न भिन्न प्रजाति के रोपित प्लांटेशन को  नियत तिथि वर्ष के कुछ माह पूर्व यदि आगजनी दुर्घटना वश प्लांटेशन पूर्ण रूपेण समूल नष्ट हो जाता है तब  इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है ? वन विकास निगम की या स्वीकृत हस्तांतरित लिए गए संस्थान की ? जिसने लाखों की लागत से कराए गए प्लांटेशन को बगैर हरा भरा हरियाली युक्त अवस्था मे लेने के बजाए जली हुई ठूंठ और कोयले की राख जैसी अवस्था मे स्वीकार कर लिया जाए तो इसे क्या कहा जाएगा ? ऐसी दशा मे सीधा सीधा इस ओर यह संकेत मिलता है कि वन विकास निगम मे रेंजर से लेकर उपर बैठे अधिकारी गण की मिलीभगत से लाखों का प्लांटेशन बगैर व्यवस्था सुरक्षा देखरेखा के  हरियाली की जगह उजड़ा चमन बना दिया गया 

               यह प्राकृतिक एवं पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर देने वाला एक ऐसा ही सनसनीखेज प्रकरण जिसका प्लांटेशन तो छ्ग राज्य वन विकास निगम  बार नवापारा परियोजना मंडल रायपुर डिविजन द्वारा संपादित किया गया था जो रायपुर से मात्र पच्चीस किलोमीटर अंतरल पर स्थित ग्राम पिरदा भीमोरी मार्ग जिला बेमेतरा के दस हेक्टेयर के पड़त भाटा बंजर भूमि मे वर्ष 2023 को 11,000 भिन्न भिन्न मिश्रित प्रजाति पौधों का प्लांटेशन किया गया था जिसकी रोपित वर्ष,2023 प्लांटेशन से लेकर वर्ष 2025 के माह दिसंबर तक नियमित सुरक्षा केजयुवल्टी, उपचार लगातार की जाती रही थी परंतु ज्ञात हुआ है कि इन दो वर्षों के बीच भीषण गर्मी मे एकाध बार  अग्नि दुर्घटना  का सामना भी हुआ परंतु चाक चौबंद सुरक्षा चौकीदारों की तत्परता से  भयंकर अग्नि घटना से बचा लिया गया  बताया जाता है कि जब से बिलासपुर से नई रेंजर चंद्रानी बांधे ने चार्ज लिया  है तब से वह भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है  बार नवा पारा परियोजना मंडल रायपुर परिक्षेत्र का ऐसा कोई क्षेत्र नही जहाँ उसके भ्रष्टाचार की गाथा नही मिलती हो अब चाहे नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर 36 का वन महोत्सव हो या सेक्टर,16 स्थित पीपल वन क्षेत्र हो या फिर मंत्री बंगले  से लेकर सेक्टर 21 तक राज्य उत्सव  रेलवे स्टेशन क्षेत्र ही क्यों न हो  रेंजर चंद्रानी बांधे द्वारा भ्रटाचार का एक नया इतिहास रच चुकी है जिसमे श्रमिक भुगतान का प्रकरण जिसमे श्रमिकों के खाते मे ऑन लाइन सीधे बैंक अकाउंट मे डाले जाने की व्यवस्था शासन द्वारा की गई  है उसको दर किनार कर नगद  भुगतान किया गया वह भी जिसमे कलेक्टर दर की  बजाय दो सौ रुपये से लेकर ढाई सौ तीन सौ रुपये का भुगतान हो या फिर पथ रोपण मीडियन क्षेत्र मे गत वर्ष संपादित रोपण पश्चात  की जाने वाले निंदाई गूढाई,थाला गाला,केजयुवल्टी, उपचार की नियमित राशि का भुगतान क्यो न हो सभी कार्यों मे उसके द्वारा भ्रष्टाचार का खेल खेला गया यदि इस ओर सूक्षमता से जांच की जाए तो बहुत बड़ा  गड़बड़ झाला सामने आ सकता है परंतु ऐसा करेगा कौन ...सैंय्या भयो कोतवाल....तो अब डर काहे का... जैसी उक्ति को यहाँ चरितार्थ करते हुए मुक्त रूप से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है  उक्त समस्त व्यवस्था की राशि का उपयोग किया ही नही गया एवं अनेक श्रमिकों का भुगतान भी विगत तीन से छ माह तक नही दिया गया जिसकी वजह से श्रमिक नगद भुगतान की आशा मे ठेकेदार के मध्यम से कराए जा रहे है कार्यों को अल्प राशि मे करने विवश है जिसमे भी ठेकेदार द्वारा अन्य व्यय जैसे आवागमन व्यवस्था का हवाला देकर कलेक्टर दर से भुगतान नही की जा रही है बल्कि उन्हे तीन से साढ़े तीन सौ रुपये का भुगतान किया जा रहा है वही ठेकेदार द्वारा कलेक्टर दर के अनुसार बिल प्रस्तुत किया जाता है


जिसका भरपूर लाभ कथित रेंजर चंद्रानी  बांधे द्वारा  उठाया जा रहा है इन सब के वीडियो साक्ष्य हमारे पास अब भी उपलब्ध है अपनी इसी भ्रष्टाचार वाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वन विकास निगम की परिक्षेत्राधिकारी चंद्रानी बांधे ने ग्राम पिरदा के 2,023  प्लांटेशन का सत्यानाश कर दिया फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ ने स्थानीय पिरदा ग्रामीणों से जब चर्चा की तो उन्होंने बताया कि पूर्व मे घास खरपतवार के लिए नागर या कटाई जैसी व्यवस्था से उपचार कर लिया जाता था परंतु जब से रेंजर साहिबा आई है उक्त अंतिम वर्ष के निगम द्वारा जारी प्राप्त राशि का उपयोग  कथित प्लांटेशन मे नही किया गया और न ही चौकीदार नियुक्त किया गया परिणामतः ग्राम पिरदा मे वर्ष 2026 प्रारंभ  होते ही  जनवरी फरवरी मार्च के मध्य प्लांटेशन क्षेत्र मे विकराल अग्नि कांड हो गया जिसमे संपूर्ण प्लांटेशन जल कर स्वाहा हो गया जबकि यह भी ज्ञात हुआ है कि वर्ष 2026 अप्रेल से जून के मध्य पिरदा सरपंच को प्लांटेशन हस्तांतरण करना था सवाल उठता है जब अंतिम वन विकास निगम द्वारा जारी राशि  इसी सुरक्षा व्यवस्था कार्यों मे लगता है तब उन शेष राशि को परिक्षेत्राधिकारी द्वारा क्यों नही लगा कर प्लांटेशन को बचाया गया?


 इससे स्पष्ट होता है कि संपूर्ण राशि रेंजर द्वारा पूरी तरह गबन कर लिया गया जबकि पूछताछ मे ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इसकी शिकायत ग्राम पिरदा के सरपंच (संजू) संजीव परगनिहा द्वारा वन विकास निगम बार नवा पारा परियोजना मंडल के अधिकारयों को प्लांटेशन के जलने की लिखित मे की गई थी तथा इसकी जांच का जिम्मा एस डी ओ द्वारा किया गया था अब कौन से अधिकारी ने इसकी क्या जांच कर जवाब दिया गया यह तो ज्ञात नही चल पाया है परंतु लाखों रुपये का हरियर छत्तीसगढ़ के तहत प्लांटेशन किया गया था जो पूरी तरह जल कर स्वाहा हो गया यहाँ तक अब फैनसिंग, लाने वाले सीमेंट पोल भी निकाल कर ध्वस्त कर दिया गया ऐसी स्थिति मे जले ठूंठ से निकालने वाली नए  कोपल की संभावना भी नगण्य हो जाती है इस संदर्भ मे हमने पंचायत सरपंच से मिलने का प्रयास किया था हमे उपलब्ध नही हुए वही बार नवापारा परियोजना मंडल के डी एम. टिकरिहा जी से संपर्क कर वस्तुस्थिति ज्ञात करने देवेंद्र नगर स्थित कार्यालय भी पहुंचे थे परंतु वे भी बिलासपुर प्रवास मे थे अब सवाल उठता है हस्तांतरण होने के दो चार माह पूर्व हुए कथित अग्नि कांड जिसमे  लाखों का मिश्रित प्रजाति का पिरदा स्थित प्लांटेशन किया गया था उसकी भरपाई अब कौन करेगा ?



जबकि स्थानीय पिरदा ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि नशा करने वाले असमाजिक तत्वों द्वारा सूखे घास मे बीड़ी सीगरेट फेक कर आग लगाई गई और लाखों रुपये का प्लांटेशन मे घनघोरअग्नि कांड से सब कुछ स्वाहा हो गया यदि जिम्मेदार परिक्षेत्राधिकारी चंद्रानी बांदे समय रहते सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की होती तो इतना बड़ा जघन्य अग्नि कांड नही होता और पिरदा सरपंच को (हैंड वर्क) हस्तांतरण तिथि मार्च से मई जून के मध्य तक इसे बचाया जा सकता था 

मंगलवार, 15 सितंबर 2026

वन,पर्यटन,एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण संवर्धन मे जन भागीदारी बढ़ी- केदार कश्यप

 वन,पर्यटन,एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण संवर्धन मे जन भागीदारी बढ़ी- केदार कश्यप

अलताफ़ हुसैन

रायपुर(छत्तीसगढ़ वनोदय) छ्ग वन विभाग लगातार वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा विलुप्त होती भिन्न भिन्न प्रजाति के पेड़,पौधे, सूक्ष्म जीव जंतु, जैसी जैव विविधता के संतुलन के लिए लगातार बेहतर प्रयास कर वनवासी वनआदिवासीयों के समृद्धशाली संस्कृति विरासत, रोजगार मूलक व्यवस्थाओं की चिन्ता करते हुए  वनों मे स्थित प्राकृतिक क्षेत्रों मे पर्यटन के अवसर तलाश करते   भिन्न भिन्न योजना बद्ध तरीके से उनका चयन एवं चिन्हाकित कर   वनों के संरक्षण संवर्धन हेतु वन विभाग दृढ़ संकल्पित है इसके लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग बहुत से वन क्षेत्रों मे योजनाओं एवं उसके सफलता पूर्वक


क्रियान्वयन के साथ बढ़ती आबादी घटते वन के आंशिक क्षेत्रों के रकबा मे  बढ़ोतरी हुई है बल्कि  लगातार बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग के साथ परिवर्तित जलवायु परिवर्तन जैसी मूल धारणा पर भी शिकंजा कसने मे लगभग   सफलता प्राप्त हुआ है जिसका मुख्य कारण जन  भागीदारी के साथ विभाग द्वारा वृक्षारोपण वानिकी कार्य एवं एक पेड़ मां के नाम जैसी सफल योजनाओं के मध्यम से एक ऐतिहासिक लक्ष्य की ओर अग्रसर है जो विभाग के लिए बहुत बढ़ी उपलब्धि है 


उक्तशय की जानकरी छत्तीसगढ़ प्रदेश के  वन मंत्री केदार कश्यप ने  प्रेस वार्ता में यह बात कही उन्होंने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के वन क्षेत्रों का एक समृद्ध शाली इतिहास रहा है जिसके संरक्षण संवर्धन एवं  विस्तृत विरासत को सहज कर अक्षुषय बनाए रखने की दिशा मे  नवीन योजनाओं के मध्यम से विभाग लगातार कार्य कर रहा है इसी कड़ी मे विगत तीन वर्षों से एक पेड़ मां के नाम जैसी देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के  अह्वान पर  जन भागीदारी के तहत प्रत्येक व्यक्ति को मां जैसी भावनात्मक स्मृति को संजोने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के प्रेरणा दायी योजना का जन भागीदारी के तहत पौधे वितरण जैसी बहु उद्देशीय कार्य जारी है जिसमे वर्षानुसर वर्ष 2024 मे 2.50 करोड़ पौधों के वितरण के  लक्ष्य के साथ एक करोड़ अधिक अर्थात साढ़े तीन करोड़ पौधों का जो 140℅ उपलब्धि प्राप्त किया गया उसी प्रकार वर्ष 2025 मे 1.65 करोड़ पौधे वितरण से अधिक 3.50जो लक्ष्य से 1.90 करोड़ अधिक के साथ 215 ℅ अधिक रहा उसी प्रकार जारी वित्तीय वर्ष 2026 मे 2.73 करोड़ पौधों का वितरण 2 करोड़ 23 लाख 65 हजार पौधों का रोपण एवं वितरण अभियान जारी है जो भविष्य मे इससे अधिक का लक्ष्य प्राप्ति किया जाएगा ऐसी आशा छ्ग के वन मंत्री  ने व्यक्त की है वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आगे बताया कि नवा रायपुर अटल नगर मे शहरी वृक्षारोपण के तहत नवागांव तूता क्षेत्र मे लगभग 80.080 हेक्टेयर भूभाग के वर्ष 2024 मे एक पेड़ मां के नाम योजना का प्रारंभ किया गया था जहाँ लगभग बीस  हजार मिश्रित प्रजाति के पौधे रोपे गए थे जिसमे  मुख्यतः नीम, आंवला, बेहड़ा, सागौन, बीजा, साजा, बांस, जैसी इमारती काष्ठ सहित औषधि गुण वाले पौधे विकसित किए गए है जो आज वृक्ष का स्वरूप मे आकार ले रहे है यहाँ आज भी पाइप लाइन बिछा कर आधुनिक तकनीक ड्रिप पद्धति से सिंचाई कर सुरक्षा देख रेख  एवं उपचार की जा रही है जो पर्यावरण सुरक्षा का सजीव उदाहरण माना जा रहा है उन्होंने आगे बताया कि प्रदेश की गोद मे विकसित प्राकृतिक आभा एवं 

नैसर्गिक पर्यावरणीय छटा को संरक्षित करने की उद्देश्य से अनेक पर्यटन स्थल का उन्नयन करने छत्तीसगढ़  सरकार पूर्ण रूप से कटिबद्ध है इस दिशा मे पूरे राज्य मे लगभग 240 प्राकृतिक पर्यटन स्थल विकसित किए गए है जिनमे पचास से अधिक स्व सहायता समूह द्वारा वन क्षेत्रों के पर्यटन का संचालन किया जा रहा है जिससे वन क्षेत्र के वन वासी एवं वन आदि वासियों  के वन समितियों को रोजगार, एवं आय का सशक्त मध्यम बन चुका है  इनमे बुका, सतरेंगा, कोडार, टाटामारी, एवं घुड़माराम, जैसे इको टूरिजम प्रमुख है इनके अलावा बस्तर लोमनी पार्क सरगुजा संजय वाटिका, कटघोरा बुका विहार, महासमुंद मे कोडार कैंप जलाशय धमतरी सत्कार सरोवर, कांकेर मे दुधावा,सरगुजा मे जलजली, सरगुजा रामगढ़, नारायण पुर इको पार्क वन मन्दिर, मनेंद्र गढ़ स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क जैसे वन क्षेत्रों मे नैसर्गिक वन पर्यटन क्षेत्रों का लगभग प्रस्तावित लक्ष्य दो करोड़ साठ लाख एवं सकल आय दो करोड़ इक्कीस लाख माना गया है जो विकास के साथ ही आदिवासी वर्ग की विरासत भी मानी जा रही है उन्होंने पर्यटन की  विकसित सड़क मार्ग उन्नयन की दिशा के  संदर्भ मे आगे बताया कि  कवर्धा सफारी मॉडल मे 35 किलोमीटर लंबा नया सफारी मार्ग विकसित किया गया चक्रीय निधि से 4×4 सफारी वाहन का संचालन भी किया जा रहा है वही रायपुर से चालीस किलोमीटर के अंतराल स्थित मोहरेंगा प्राकृतिक वन दर्शन केंद्र मे जल  संरक्षण,वन जीव संरक्षण, मार्ग संरचनाओं के विकास के साथ ही , प्राकृतिक भ्रमण, एवं समृद्ध जैव विविधता पर्या वरण शिक्षा का केंद्र बिंदु बनता जा रहा है यहाँ दो सर्व सुविधा युक्त आकर्षक कॉटेज का निर्माण किया गया है जो शहर के भीड़ भाड़ प्रदूषण मुक्त एवं स्वच्छ वातावरण मे परिवारिक माहौल को खुशनुमा बनाता है जो प्रकृति प्रेम और वन संरक्षण के प्रति जन जागरुकता बढ़ाने का सशक्त मध्यम बन रहा है वन मंत्री केदार कश्यप ने पर्यटन के बारे मे आगे जानकारी देते हुए बताया ठेमली आईलैंड धमतरी का यह पर्यटन बहुत अधिक आकर्षक का केंद्र बिंदु है गंगरेल बांध के शांत वातावरण जल के बीच ठेमरी आईलैंड को इको पर्यटन के रूप मे विकसित किया गया है जहाँ प्रकृति संरक्षण के साथ इको फ्रेडली  विकास के साथ औषधीय पौधों का संरक्षण एवं स्थानीय रोजगार के अवसर मिल रहा है इसके अलावा बिलासा ताल वसुंधरा उद्यान बिलासपुर मे प्राकृतिक सौंदर्य और रचनात्मक विकास के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षक बन चुका है यहाँ पारंपरिक चित्रकारी से सजे रंग बिरंगे पुल, जलाशय के समीप आकर्षक हट, और कलात्मक इको फ्रेंडली मार्ग बच्चों के लिए जुरासिक थीम पर डायनासोर जोन सबको अपनी ओर आकर्षित करता है वन मंडल बिलासपुर के कोटा परिक्षेत्र मे वन चेतना केंद्र पटैत के तहत घोंघा जलाशय मे कॉटेज कैंटीन का निर्माण किया गया जहाँ नौका विहार, कयाकिंग जैसी एंडवांचर गतिविधियां संचालित होती है जो लोगों को खूब आकर्षित कर रही है आसपास क्षेत्र मे नजर डाली जाए तो उन्होंने महासमुंद वन मंडल के अंतर्गत जिले के सरायपाली शिशुपाल इको ट्रेल बुढ़ा डोंगर ऐतिहासिक धरोहर साहसिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर बड़ी तेजी से उभरा है पैतालिस लाख रुपये की लागत से कथित इको ट्रेल पर अब तक बाईस हजार से उपर पर्यटक भ्रमण कर चुके है जिसमे अब तक चार लाख बियालिस हजार का शुद्ध आय प्राप्त हुआ है परियोजना के मध्यम से 832 मानव दिवस का रोजगार सृजन हुआ है 15 स्थानीय लोगों को नियमित आजीविका प्राप्त हुई है यहाँ कैन्पिग, नेचर ट्रेल, ट्रैकिंग तीन मीटर ऊँचा घोड़ाधार जल प्रपात तथा प्राचीन दुर्ग, मंदिरों के अवशेष क्षेत्र को प्रकृति और ऐतिहासिक महत्व को बढ़ाता है

 

 बस्तर क्षेत्र मे प्रगति विकास के नए आयाम स्थापित किये जा रहे इस संदर्भ मे वन मंत्री ने बताया की बस्तर सदैव प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ आदिवासी परंपरा का केंद्र बना रहा है जिनकी विरासत को सहेजने के उद्देश्य से  अनेक स्थल का विकास किया गया जिनमे मुख्यतः जन जातीय वाटिका जगदलपुर, डंपिंग ग्राउंड से प्रकृति के आंगन तक,जैसे क्षेत्रों की हरियाली और जैव विविधता पर संरक्षण कर विशेष ध्यान दिया गया एवं पर्यटन के रूप मे विकसित किया गया वही बस्तर जिले के धुड़माराम गाँव अपनी समृद्ध धुर्वा आदिवासी संस्कृति पारंपरिक जीवन शैली, और प्राकृतिक परिवेश के साथ छ्ग के प्रमुख ग्रामीण एवं एको पर्यटन के रूप मे पहचान बना लिया है जहाँ चालीस परिवार और दो सौ पंद्रह लोगो की आबादी निवास करती है यहाँ पर्यटकों को उनके बीच पहुँच का धुर्वा संस्कृति व्याख्या, हस्तशिल्प कला, आदिवासी रहन सहन, एवं पर्यटन विरासत का सीधा साक्षातकार संवाद का अवसर प्राप्त होता है


वन मंत्री ने आगे बताया कि इसके अलावा ढोलकल गणेश ट्रैकिंग का शुभारंभ, तुंगल डैम, जहाँ नक्सल प्रभावित महिलाओं के रोजगार सृजन का मध्यम बना हुआ है वही वन मंदिर, दंतेवाड़ा टेकनार रोड  विश्व धारोहर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, को भी पर्यटन के रूप मे विकसित ख्याति प्राप्ति हुई है उन्होंने वन्य प्राणियों की संरक्षण की दिशा मे बाघों की संख्या मे निरंतर वृद्धि देखी जा रही है होना बताया जिसकी वर्ष 2022 मे 18 बाघ थे जो वर्ष 2026 में इनकी संख्या 35 पहुँच गई है जो अच्छे संकेत माना जा रहा है बार नवापारा अभ्यारण्य मे 77 काले हिरण का पुनर्वास किया गया था जिनकी वर्तमान  संख्या लगभग 200 के करीब पहुँच चुकी है जो वन विभाग द्वारा वन्य प्राणियों की सुरक्षा पूर्ण प्रतिबद्धता, उनके संरक्षण संवर्धन के संकल्प को दोहराता है  बार अभ्यारण्य मे लगातार बढ़ रही काले हिरण की संख्या की प्रशंसा देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने अपने मन की बात कार्यक्रम मे भी की थी वन्य प्राणी जो छत्तीसगढ़ राज्य की धरोहर मानी जाती है उनके संरक्षण एवं पुनर्स्थापन हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे है जिनमे राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, प्रमुख है हाथियों के संरक्षण के लिए जन जागरुकता सामुदायिक भागीदारी और आधुनिक तकनीक से गजसंकेत एवं गज रथ यात्रा के मध्यम से लोगों मे अभियान चलाया जा रहा है गज एप के मध्यम से हाथियों की विचरण, गतिविधियों की जानकारी मोबाइल से प्राप्त कर समय पर चेतावनी पहुंचाई जाती है ताकि प्रभावित होने वाले ग्राम क्षेत्र के ग्रामीण सतर्क रह सके और किसी भी प्रकार की जान माल की क्षति को बचाया जा सके वन मंत्री केदार कध्याप ने बताया मानव हाथी द्वंद मे काफी गिरावट देखी जा रही है वर्ष 2022 मे जहां 76 जन हानि हुई थी  उसकी तुलना मे वर्ष 2026 मे यह घटते हुए मात्र 53 हो गई जो वन विभाग के लिए बहुत बढ़ी उपलब्धि है 

रविवार, 30 अगस्त 2026

वन विभाग की अभनपुर आरामिल मे पकड़ी गई करोड़ों सराई (साल) काष्ठ की कार्यवाही मे बड़ा खेल का अंदेशा

 वन विभाग की अभनपुर आरामिल मे  पकड़ी गई करोड़ों सराई (साल) काष्ठ की कार्यवाही मे बड़ा खेल का अंदेशा 

अल्ताफ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)राजधानी रायपुर का सर्वाधिक अति संवेदनशील  वन मण्डल कार्यालय क्षेत्र जहाँ  कार्य प्रणाली व्यवस्था मे तनिक गफलत हुई नही की विभागीय कार्यों का डंडा चलने का भय सभी अधिकारी कर्मचरियों पर सदैव बना रहता है उस की चपेट मे परिक्षेत्राधिकारी से लेकर मैदानी अमले के कर्मचरियों पर ऐसी विभागीय कार्यवाही की  दो धारी तलवार लटकी रहती है कि जरा सी लिखा पढ़ी में ऊँच नीच की जुम्बिश हुई नही कि उन पर डंडा चलना लाजिमी है फिर भी मैदानी कर्मचारी रात दिन मेहनत कर प्लांटेशन से लेकर अन्य संपादित कार्य शत प्रतिशत करने के साथ ही विभागीय मैनेजमेंट तथा राजधानी के राजनैतिक, तीज त्योहार, पर्व धार्मिक व्यवस्था के साथ अनेक समावेशी व्यवस्थाओं का भार उपने सिर लेकर कई गुना मन वजन बढ़ा लेते है जिसकी वजह से बहुत से अधिकारी विशेष कर रायपुर वन मण्डल कार्य क्षेत्र से पलायन करने बाध्य रहते है उस पर वरिष्ठ अधिकारियों का आर्थिकी मैनेजमेंट का तांडव उन पर अलग बना रहता है  इस संदर्भ में कुछ चर्चित विभागीय कार्यों का नजदीकी से समीक्षात्मक, अवलोकन किया तो  पाया कि कुछ माह पूर्व कोरबा से कथित सरई (साल गोल्डन काष्ठ) काष्ठों की स्थानीय रायपुर डिविजन एवं कोरबा डिविजन के संयुक्त टीम द्वारा अभनपुर मिल के व्यवस्थापक द्वारा करोड़ों की प्रतिबंधित काष्ठ को कौड़ियों के दाम दो से दस रुपये प्रति किलों की दर मे कई टन माल का अवैध रूप से क्रय कर लिया गया था जिस पर रायपुर उड़न दस्ता द्वारा अभनपुर स्थित शर्मा सॉ आरामिल संचालक ममन चंद शर्मा के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही करते हुए वन मंडल रायपुर के उड़न दस्ता, एवं कोरबा वन मंडल के वन कर्मियों की उपस्थिति में क्रेता विक्रेता दोनों के उपर वन अधिनियम के  विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध कर कार्यवाही किया गया था


जिसमे यह बताया गया था कि दो ट्रक सेकडों वर्ष पुराने सरई (साल)इमारती कष्ठों का वन मंडल कोरबा के वन कर्मियों द्वारा राजसात कर कोरबा ले जाना बताया गया फिर ऐसी क्या वजह हुई कि कुछ सप्ताह मे ही सी सी एफ रायपुर द्वारा पुनः जांच प्रक्रिया करवाई गई  जो अब तक जारी है उक्त पुनःरिक्षण जांच की चर्चा आम जन, और विभागीय वन कर्मी के मध्य बहुत जोरों शोर से हो रही है उक्त सी सी एफ द्वारा दुबारा जांच कार्यवाही को लेकर अनेक  क्यास निकाले जा रहे है इस संदर्भ मे यह भी खबर उड़ रही थी  कि रायपुर उड़न दस्ता टीम के द्वारा अभनपुर का अति चर्चित आरामिल जांच कार्यवाही को लेकर कुछ अधिकारियों पर उनके संदेहास्पद कार्य शैली को लेकर शंका व्यक्त की जा रही थी इसकी सत्यता ज्ञात करने के उद्देश्य से  आरा मिल जाकर पुनः जांच की गई साथ ही यह भी चर्चा है कि कुछ अधिकारियों की टीम द्वारा कुछ अधिकारी से पूछताछ की गई थी अब इसमें कितनी सत्यता है इसकी पुष्टि फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ नही करता है परंतु  सीसीएफ स्तर पर अभनपुर आरा मिल मे कथित कोरबा से तस्करी कर  लाई गई सराई (साल) काष्ठ पर रायपुर वन मण्डल उड़न दस्ता द्वारा की जा चुकी कार्यवाही होने के बाद यह पुनः जांच प्रक्रिया क्यों और किस वजह से की गई वह अनेक संदेह और सवालों को खड़ा करता है एक वजह यह भी बताया जाता है कि राजनैतिक दबाव की वजह से दोबारा अभनपुर आरामिल मे ऐसी कार्यवाही की गई जिसकी पूरी चर्चा  विभाग और बाहर होने लगी लोग सवाल उठाने लगे की जब उच्च स्तरीय कार्यवाही करना ही था तब दोबारा जांच क्यों ? इस संदर्भ मे अंदर  खाने मे इस बात की चर्चा भी बड़े जोरों से गर्म है कि कोरबा वन मण्डल द्वारा दो ट्रक सरई काष्ठ राज सात कर ले जाया गया था परंतु सीसीएफ टीम के सघन जांच मे अभनपुर के शर्मा  सॉ आरा मिल मे उतनी ही सरई (साल) इमारती काष्ठ पुनः पाई गई है जिसकी कीमत भी करोड़ों रुपए आंकी जा रही है क्योंकि यह सराइ(साल) काष्ठ भी उसी का हिस्सा माना जा रहा है जिसे जप्त कर राजसात कर कोरबा ले जाया जा चुका है ? अब सवाल खड़ा होता है कि  जब संपूर्ण कार्यवाही होने के बाद सरई (साल)काष्ठ राजसात कर मूल कोरबा पहुंचाया जा चुका है तब रायपुर वन मंडल के अभनपुर स्थित शर्मा सॉ आरा मिल मे सराइ (साल) का दो ट्रक से अधिक काष्ठ  किसका है ?


ज्ञात करने जब अभनपुर जा कर इसकी पतासाजी की गई तो ज्ञात हुआ कि वहां सीसीएफ वन कर्मी टीम द्वारा पुनः रिक्षण से प्राप्त सरई (साल) काष्ठ किसी भी वन मण्डल से टी. पी. अथवा जारी वैध दस्तावेज प्राप्त नही हुआ जो कई सवालों को खड़ा करता है कि जब यहां प्राप्त सरई (साल) का दस्तावेज यहां नही तो कोरबा ले जाया गया सरई  साल किसका ? और यदि उसका दस्तावेज सही तो अभनपुर शर्मा सॉ मिल मे वर्तमान मिले सरई साल का दस्तावेज किस वन मंडल से क्रय कर लाया गया वह भी शर्मा सॉ मील मे यहां नही मिला  दोनों स्थिति मे वन कर्मियों एवं सॉ मील मालिक की कार्य शैली पर संदेह और बढ़ जाता है हालांकि कोरबा से सरई (साल) काष्ठ लाने वाले  ठेकेदार ने किस युक्ति से बगैर नीलाम काष्ठागार या विभागीय लिखा पढ़ी दस्तावेज के बगैर से फर्जी टी पी चालान के मध्यम से रायपुर अभनपुर सॉ मिल लाकर परिवहन किया गया था वह तो वन विभाग की टीम द्वारा कार्यवाही कर उतना काष्ठ वापस कोरबा ले गई अब यहाँ सीसीएफ टीम ने पुनः रिक्षण कर उतना ही मात्रा से अधिक काष्ठ का पाया जाना वह दोनों रायपुर, कोरबा वन मंडल वन कर्मियों को शक और कार्यवाही के कटघरे मे ला कर खड़े कर दिया है  यहाँ तक सरई (साल) काष्ठ लाकर तस्करी करने वाले व्यक्ति मिल मालिक का  फंसना तो तय है लेकिन दोनों वन मंडल कार्यालय के वन कर्मियों पर भी विभागीय कार्यवाही, निलंबन की तलवार  लटकी हुई है जबकि इस संदर्भ मे कोई शक-ओ- शुबह  नही कि रायपुर वन मण्डल के उड़न दस्ता टीम ने रात दिन एक कर के इंच घन मीटर नाप जोख उच्च अधिकारीयों के मार्ग दर्शन मे वन अधिनियम के तहत तत्कालिक सराइ (साल) कष्ठों पर त्वरित कार्यवाही कर प्रशंसा अर्जित की है इसके पूर्व भी खैर प्रकरण की अगुवाई कर वाह वाही बटोरी है परंतु उनकी गलती यह है कि वे कोरबा सरई साल काष्ठ की कार्यवाही के समय पूरे मिल का बारीकी से निरीक्षण न करते हुए केवल लाए गए कष्ठों की तरजीह दी तथा अन्य कष्ठों पर ध्यान नही दिया वही कोरबा वन मंडल के वन कर्मियों के बीच से कथित ठेकेदार द्वारा इतने टोल नाका सब को पार कर राजधानी रायपुर तक काष्ठ कैसे पहुंच गया वह भी फर्जी टी पी, बगैर विभागीय दस्तावेज, और चालान के माध्यम से जो बगैर किसी वन कर्मी के मिली भगत के असंभव है रायपुर सीसीएफ ऑफिस टीम द्वारा पुनःरिक्षण अभनपुर आरा मिल परिसर के क्षेत्र मे इतनी बड़ी मात्रा मे सराई (साल) काष्ठ का मिलना अचंभित और हैरान करने वाली बात है 



बहुत से स्थानीय आरा सॉ मिलार्स से चर्चा करने पर यह बात छन का सामने आ रही है कि जिस प्रकार बड़ी मात्रा मे सरई साल काष्ठ सहित अन्य प्रजाति के इमारती कष्ठों का बगैर दस्तावेज के जखीरा बरामद हुआ है उससे यह बात स्पष्ट है कि आरामिल तो बंद होना तय है साथ ही उसका लाइसेंस भी रद्द होना तय  माना जा रहा है   जबकि  कुछ वन अधिनियम कानूनी विद जानकार यह भी कहते है कि अभनपुर वन मालिक द्वारा कुछ किलोमीटर की दूरी पर अमोरा  स्थित क्षेत्र के स्वयं के निजी भूमि मे आरामिल का लाइसेंस नए नाम पता के साथ स्थानांतरण करवा सकता है वह भी उस स्थिति मे जब हाल ही पकड़े गए काष्ठ मूल्यांकन का शासकीय दर से फाइन अदा करने के बाद वह भी सीसीएफ द्वारा उच्च स्तरीय जांच पर यदि चाहे तभी संभव हो सकता है नही तो रायपुर कोरबा वन कर्मियों पर कार्यवाही तो होगी ही साथ मिल मालिक को लंबी जेल यात्रा भी तय है यह भी चर्चा है कि मिल मालिक नाम मात्र काष्ठ छोड़ कर रात्रि में वह बेशकीमती काष्ठ का परीवहन गुपचुप तरीके से पिछले दरवाजे से कर सकता है तथा विभागीय कार्यों को भी प्रभावित कर सकता है जिस पर विभाग पैनी नज़र या एक सिपाही उसकी सुरक्षा मे रात दिन नियुक्त कर निगरानी बनाए रखना आवश्यक है परंतु विभाग केवल जांच की आंच मे वन कर्मियों को उलझा चुका है जबकि रायपुर उड़न दस्ता टीम ने आरा मिल के मशीन को वन अधिनियम के अनुसार विभागीय सील लगाकर  लॉक कर दिया गया जो अनेक कही अनकही  सवालों के जवाब गर्त में अब भी छुपा हुआ है अब देखना यह है कि भविष्य मे अभनपुर आरा मिल के इस बहुचर्चित सरई (साल) प्रकरण मे ओर क्या कार्यवाही होती है सब के सिर पर  तलवार लटकी हुई उसकी जद मे अब वन मंडल   के विभागीय वन कर्मी आते है या फिर मिल मालिक यह देखना होगा ? 

शनिवार, 22 अगस्त 2026

अनुठी पहल वन विभाग के दैनिक वेतन भोगियों के आश्रित परिवार को देगा एक लाख रुपया अनुकम्पा अनुदान

 

अनुठी पहल
वन विभाग के दैनिक वेतन भोगियों के आश्रित परिवार को देगा एक लाख रुपया अनुकम्पा अनुदान



रायपुर/ (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छत्तीसगढ़ में वर्तमान में भिन्न भिन्न संगठन कार्य कर रहे है लेकिन दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ ने वन विभाग में कार्यरत   कर्मचारियों के हित में कुछ अलग ही पहचान निर्मित की है, छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ पं.क्र.548 लगातार दैनिक वेतनभोगी भोगी कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा का मुद्दा विगत दस वर्षों से निरंतर उठाते आ रहे है!

यह जानकारी देते हुए  संगठन के महामंत्री राजकुमार चौहान  ने  बताया कि छत्तीसगढ़ में यह पहला ऐसा निर्भीक संगठन देखने को मिला जो अपने विशिष्ट कार्यशैली,दृढ़ मजबुत इरादे के साथ संघर्षरत है, वर्ष 2018 में लगातार 22 दिनों तक वर्ष 2022 में लगातार 34 दिनों तक वही वर्ष 2024 में 48 दिनों तक लगातार अनिश्चित कालीन हड़ताल में रहकर  दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, वाहन चालक,कम्प्युटर आपरेटर,  डाटा एन्ट्री आपरेटर, कार्यालय सहायक, तेन्दुपत्ता गोदाम सुरक्षा श्रमिको के लिए मुद्दा उठाया! जिसके लिए आज भी निरंतर संधर्ष जारी है

वर्ष 2018 अनिश्चित कालीन हड़ताल में सफलता :- छत्तीसगढ़ में वर्ष 2008 में नियमितीकरण के बाद किसी भी विभाग में दैनिक वेतन भोगी नही माना जाता था और ना ही दैनिक श्रमिक शासन को विभाग के द्वारा निरंक भेजा जाता था,किन्तु छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ ने इस मुद्दा को लेकर रणनीति के तहत लड़ाई लड़कर दैनिक वेतनभोगी मनवाते हुए पहली बार वृत्त स्तर से वरीयता सूची बना!

वर्ष 2022 की अनिश्चित कालीन हड़ताल की सफलता :- संगठन ने पुन : छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ पं.क्र.548 के बैनर तले वर्ष 2022 में 34 दिनों तक अनिश्चित कालीन हड़ताल किया ,

1. उक्त हड़ताल के परिणाम स्वरूप श्रमायुक्त दर पर कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कुशल,अर्धकुशल, अकुशल श्रमिकों को 4,000 रूपया श्रम सम्मान राशि पारितोषिक भुगतान जारी किया गया.


2. दैनिक वेतन भोगी के निधन हो जाने पर उनके आश्रित पीड़ित परिवार के सदस्य को एकमुश्त 01 लाख रूपया अनुकम्पा अनुदान राशि, का भुगतान जारी करवाया जो संघ की बहुत बड़ी उपलब्धि है!


3. हड़ताली दैनिक वेतन भोगियों को 34 दिन हड़ताल अवधि का वेतन भुगतान आदेश जारी!


4. हड़ताली कर्मचारियों के पुन: वापसी सेवामुक्त किये गये कर्मियों की बहाली!


5. दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया!


वर्ष 2024 की अनिश्चित कालीन हड़ताल के परिणाम :- छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ ने अपनी  लंबित मांगों को लेकर पुन: मैदान में कुदा जिसके परिणाम स्वरूप निम्न मांगे पुरी की गई :-

1. वन विभाग में कुछ वन मंडलों में 24 घंटा ड्युटी लिया जा रहा था जिसे तत्काल बंद कर शासन के नियमानुसार 08 घंटा ड्युटी लिये जाने का निर्देश जारी हुआ!


2. दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों जिनकी सेवा अवधि 02 वर्ष पूर्ण हो गया है उनका स्थायीकरण करने हेतु प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।


3. कार्यभारित तथा आकस्मिकता निधि सेवा नियम लागु किये जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया।


4. वन विभाग में 129 दैनिक वेतनभोगी को कार्य से पृथक किया गया उनकी पुन: वापसी !


5. श्रम सम्मान राशि से वंचितों को श्रम सम्मान देने के लिए जारी हुए निर्देश!


6. हड़ताली कर्मचारियों को हड़ताल अवधि का वेतन भुगतान!


सहित कई ऐसे मुद्दे है जिन्हे सकरात्मक पहल से अधिकारियों से समन्वय बनाकर सफलता हासिल किया गया है।

संगठन के महामंत्री राजकुमार चौहान ने बताया कि
वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी एवं श्रमिक अपने संगठन के प्रति समर्पित है जिसके कारण संगठन पूरी निष्ठा और मजबुती के साथ अपना पक्ष रखता है और पहल भी होता है।  कुछ अवसर परस्त लोग स्वयं तो दिशा से भटक गये है और दूसरों को भटकाने का प्रयास कर रहे है, लेकिन वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी संघ भटकने वाला नही है, बल्कि दुगने उत्साह के साथ संगठन को मजबूत करने जुटा हुआ है तथा बाहरी तत्वों द्वारा जो संघ से बाहर किये गये है उनके द्वारा अवसर परस्ति का लाभ उठाते हुए, बरगलाने, बांटने का कुत्सित प्रयास भी किया जा रहा है परंतु दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के निष्ठावान पदाधिकारी आज भी पूरी ऊर्जा, विश्वास निष्ठा के साथ डटकर वन कर्मियों के आत्म समान के हितों की सुरक्षा एवं अधिकारों की लडाई लड़ रहे है जिसके प्रभाव से  अन्य अवसर वादी द्वारा लुभावने वादे कर सदस्यों को बरगलने,पथ भ्रष्ट करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है जिनका  संगठित सदस्यों पर विपरित प्रभाव नही आने वाला.

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

वन विभाग नियमितीकरण, आकस्मिकता निधि से भुगतान और सेवा की शर्तें तय करने की मांग

 वन विभाग नियमितीकरण, आकस्मिकता निधि से भुगतान और सेवा की शर्तें तय करने की मांग  




          रायपुर:(फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) - श्रम आयुक्त दर वन कर्मचारी संघ के प्रांत प्रमुख हारुन मानिकपुरी ने शासन के मंत्री और अधिकारियों से मुलाकात कर कार्यभारित आकस्मिकता निधि से भुगतान, स्थाईकरण, नियमितीकरण और सेवा की शर्तें तय करने की मांग को लेकर सकारात्मक चर्चा की है वन कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष हारुन मानिकपुरी ने उच्च अधिकारी से  चर्चा करते हुए बताया कि वनविभाग में अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल, उच्च कुशल श्रेणियों के आधार पर दैनिक और मासिक वेतन भोगी श्रमिकों का निर्धारण किया गया है।इन अस्थायी  कर्मियों के कार्यभारित आकस्मिकता निधि,स्थाईकरण, नियमितीकरण और भविष्य की सुरक्षा के लिए हजार बारह सौ लोगों को लाभ पहुंचाने के चक्कर में लगभग पांच हजार से अधिक दैनिक वेतन भोगी श्रमिक भाई-बहनों को लाभ से वंचित  किया जा रहा है जो हिटलर शाही रवैय्ये को दर्शता है श्री हारुन मानिकपुरी के सुझावों,और मांगों को उच्च अधिकारी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि इस संदर्भ मे शासन एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकाती संज्ञान मे लेकर  ठोस नीति तैयार कर विभागीय अधिकारीयों द्वारा हो रही मनमानी ज्यादती  पर रोक लगाते हुए सकारात्मक पहल करे नही तो इस ओर वन कर्मचारी संघ उग्र कदम उठाने बाध्य होगा  इस ओर शासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा  सक्रात्मक पहल करने संघ के पदाधिकारियों कोआश्वस्त किया गया है 

रविवार, 16 अगस्त 2026

छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड व अन्य वक्फ संस्थानों पर डॉ सलीम राज द्वारा किया ध्वजारोहण*

 


* छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड व अन्य वक्फ संस्थानों पर डॉ सलीम राज द्वारा किया ध्वजारोहण*


मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़, रायपुर छ.ग। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर डाॅ.सलीम राज, अध्यक्ष, छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड (केबिनेट मंत्री दर्जा, छ.ग.शासन) ने कार्यालय छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड में ध्वजारोहण किया। गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली तथा छ.ग.शासन, सामान्य प्रषासन विभाग द्वारा जारी दिषा-निर्देष के अनुसार ध्वजारोहण के पूर्व राष्ट्रगीत ’’वंदे मातरम्’’ का गायन किया गया एवं ध्वजारोहण के उपरांत राष्ट्रगान ’’जन गण मन’’ का गायन किया गया तथा  प्रदेश वासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी गई। इस अवसर पर छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिम्मी नाहिद, लेखा अधिकारी पवन कुमार व बोर्ड कार्यालय के समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। 


वक्फ संस्थानों पर किया गया ध्वजारोहण

डाॅ.सलीम राज द्वारा बड़ी ईदगाह-दरगाह हजरत सैयद पहलवान शाह बाबा र.अ., मस्जिदे मोहम्म्दी, मोहम्म्दी पब्लिक स्कूल, लाखे नगर ईदगाहभाठा रायपुर, हजरत फातेहषाह मजार व मस्जिद पुलिस लाईन टिकरापारा रायपुर, दरगाह हजरत सैयद शेर अली आगा बंजारी वाले बाबा रायपुर, अंजुमन उर्दू गल्र्स स्कूल शास्त्री बाजार रायपुर आदि स्थानों में भी ध्वजारोहण किया गया।


 इस अवसर पर सम्बंधित वक्फ संस्थानों के मुतवल्ली, कमेटी के पदाधिकारी, समाज प्रमुख व आम जनमानस व स्कूली बच्चे उपस्थित रहे। डाॅ. सलीम राज द्वारा राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर आपसी एकता, अमन, भाईचारा के साथ यह पर्व मनाने देश को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। इसके अतिरिक्त छ.ग.राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित वक्फ संस्थानों द्वारा भी सम्बंधित संस्था के मुतवल्ली व कमेटी द्वारा ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 






बुधवार, 12 अगस्त 2026

वन महोत्सव कार्यक्रम* बीस वर्षों बाद पीपल वन का ऑक्सीजन नवा रायपुर अन्य प्रदूषित क्षेत्र से लड़ रहा होगा मुख्यमन्त्री साय*

 

वन महोत्सव कार्यक्रम*
बीस वर्षों बाद पीपल वन का ऑक्सीजन  नवा रायपुर अन्य प्रदूषित क्षेत्र से लड़ रहा होगा मुख्यमन्त्री साय


रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)जल जंगल जमीन प्राकृतिक का अभिन्न हिस्सा है सब एक दूसरे के पूरक है धरती को हरा भरा हरियाली युक्त बनाने के लिए अनेक जतन किया जा रहा है इसके लिए शहरी ग्रामीण क्षेत्रों की रिक्त पड़त भाटा भूमि में छग शासन की वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अनेक योजनांतर्गत कार्यक्रम के मध्यम से हरियाली प्रसार करने कटिबद्ध है इसके लिए देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विगत तीन वर्षों से भावनात्मक योजना एक पेड़ मां के नाम से प्रारंभ किया हुआ है जहाँ वृहद स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया जा रहा है इसी कड़ी में छग प्रदेश के मुख्यमन्त्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वन महोत्सय कार्यक्रम सेक्टर 39 नया रायपुर अटल नगर मे वृहद 2800 से तीन हजार पीपल वृक्ष रोपण कार्यक्रम  दिनांक पांच अगस्त 2026  को, ग्राम उपरवारा, भेलवाडीह के रिक्त भूमि पर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग वन विकास निगम, एवं एन आर डी के संयुक्त प्रयास से वन महोत्सव के रूप मे पीपल वृक्ष का रोपण कार्यक्रम संपन्न किया गया जिसमे माननीय  मुख्य मंत्री विष्णु देव साय एवं  छग शासन के मंत्री गण की गरिमामयी उपस्थिति मे  पीपल पेड़ रोपे गए पश्चात मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने उपस्थित नागरिक, विभागीय अधिकारियों एवं सेकडों की संख्या मे स्कूली बच्चों को संक्षिप्त उद्बोधन मे  उपस्थित जन समूह को  वन महोत्सव की बधाई देते हुए कहा



 कि वे पीपल फॉर पीयूपल का शुभारंभ कर  रहे है पीपल पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सिजन देता है तथा यह हिंदू धर्म के अनुसार इसकी बहुत  अधिक मान्यता है पीपल वृक्ष सबसे अधिक आयु वाला वृक्ष है उन्होंने आगे कहा कि पीपल वृक्ष मे माता बहने करवा चौथ जैसी परंपरिक पूजा पाठ  धार्मिक मान्यता का निर्वहन करती है जो पीपल वृक्ष हमारे लिए आस्था और पूज्यनीय माना जाता है मुख्यमंत्री  साय ने आगे कहा कि आस्था और पूज्यनीय होने के कारण इसका पातन करना भी असंभव है  बताते चले कि वन विभाग, वन विकास निगम एवं एन आर डी के संयुक्त  प्रयास से यह अभियान  प्रारंभ किया गया है जो पांच लाख पीपल वृक्ष का रोपण कार्य साथ ही उसका रख रखाव सुरक्षा सहित आने वाले पांच वर्ष मे लगाने का लक्ष्य एवं दायित्व वन विकास निगम के जिम्मे रखा गया है जो वन विकास निगम को केवल रोपण प्रति वर्ष तीन  करोड़ एवं अन्य एजेंसियों के मध्यम से  पांच करोड़ कुल पांच वर्षों के लिए बीस करोड़  एन आर डी ए (नया रायपुर डेवलपमेंट अथारटी) द्वारा जारी किया जा रहा है जिसमे एन आर डी ए पीपल वृक्ष का क्रय अन्य एजेन्सी माध्यमों से करा रही है जिसमे उपरवारा,


खंडवा, अभनपुर,भेलवाडीह, के श्रमिकों का भुगतान वन विकास निगम द्वारा किया जाना भी शामिल है  नवा रायपुर के इस पीपल वृक्ष अभियान मे फिल्हाल दो क्षेत्र सेक्टर 16 एवं सेक्टर 39 मे लगभग पांच हजार से अधिक पीपल वृक्ष  रोपे जा चुके है शेष सड़क मार्ग के विभिन्न हिस्सों मे लगाए जा रहे है इस वर्ष एक लाख पीपल वृक्ष लगाने का टार्गेट है मुख्यमन्त्री विष्णु देव साय ने बताया कि एक पेड़ माँ के नाम तीन वर्षों से जारी है लगभग सात करोड़ मिश्रित पौधों आज तक लगाए गए है उन्होंने उपस्थित जनता से  अहवान किया कि एक पेड़ माँ या अपने परिजन के नाम से पौधे लगाएं ताकि हरियाली का विस्तार हो उन्होंने अपने संबोधन मे यह भी बताया कि देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी प्रति दिन एक पेड़ लगा रहे है जो आम जन के लिए नाजिर है वन महोत्सव के अवसर पर प्रदेश के वन मंत्री ने मुख्य मंत्री सहित उपस्थित समस्त गणमान्य मंत्री गण को स्मृति चिन्ह के रूप मे  पौधा भेंट किया गय इस अवसर पर



वन मंत्री केदार कश्यप ने उपस्थित मंत्रियों का स्वागत करते हुए कहा   मुख्य मंत्री जी की मंशा यह है कि जिस प्रकार माँ की देखभाल प्रति व्यक्ति करता है  वैसे ही रोपे जा रहे वृक्षों की भी देखभाल सुरक्षा करे उन्होंने कहा की पीपल पैधा रोपण संस्कृति और आस्था से जुड़ा हुआ वृक्ष है उसकी सुरक्षा अनिवार्य है वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आज की तारीख बहुत मायने रखती है उन्होंने बताया कि प्रभु श्री राम के मंदिर का शीलन्यास आज ही की तिथि मे हुआ कश्मीर मे 376 भी आज ही के दिन लागू हुआ एवं बड़े पैमाने पर पीपल वृक्षों का रोपण कार्यक्रम आज पांच अगस्त को किया जा रहा है जो हमारे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक पल है इस गरिमामयी वन महोत्सव कार्यक्रम मे सर्व श्री वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री राम सेवक पैकर जी ने  मुख्यमन्त्री एवं वन मंत्री ओ पी चौधरी टंक राम वर्मा उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, ग्रामीण विधायक इंद्रकुमान साहू जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या मे  ग्रामीण  स्थानीय  जन    प्रतिनिधि  , स्कूली बच्चो का आभार व्यक्त करते हुए उपस्थित जन समूह का धन्यवाद ज्ञापित किया

सोमवार, 10 अगस्त 2026

*व्यापार सुगम निवेशकों के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बन रहा कुबेर की कुंजी*

 

*व्यापार सुगम निवेशकों के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बन रहा कुबेर की कुंजी*


अल्ताफ हुसैन

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) धन धान्य से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ की उर्वरा धरती ने अपने गर्भ में प्राकृतिक गौण खनिज का आकुत भंडार समेटे हुए है जिसके विदोहन पश्चात अनेक लोक कल्याणकारी वस्तुओं का निर्माण कर देश के उन्नति, प्रगति और विकास मे सहभागिता सुनिश्चित किया जा सकता है देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी का भारत को विश्व गुरु बनाने की दूर दर्शी सोच को सपना साकार करने कि मुहिम की प्रारंभिक कड़ी कि देश मे आर्थिक तकनीक सामाजिक,पर्यावरणीय हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर  जब हम वर्ष 2047 मे देश के सौ वें आजादी का जश्न माना रहे हो तब प्रत्येक स्तर पर देश महा शक्तिशाली के रूप मे उभर कर सामने आए उसी बहुद्देशीय सपनों को साकार करने छग सरकार कटिबद्ध है तथा कृषि उन्नत क्षेत्र के साथ साथ ही एक भावी विजन का मूल मंत्र लेकर बस्तर सहित वर्ष 2031 तक छग प्रदेश को औद्योगिक क्षेत्र मे मॉडल राज्य के रूप मे विकसित करने का लक्ष्य सुनिश्चित किया हुआ है


इसके प्रारंभिक चरण मे बस्तर सहित प्रदेश के अन्य स्थानों से अवरोध के रूप मे नक्सल वाद का समूल नष्टिकरण सबसे बड़ी चुनौती थी जिसे देश के केंद्रीय गृह मंत्री माननीय अमित शाह के सफल मार्ग दर्शन एवं राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व मे कुछ माह के अंदर नक्सलवाद का लगभग खात्मा कर दिया गया आशंकित विकास डर भय आतंक,के बीच विकास सबसे बड़ा रोड़ा मानी हुई थी परंतु जिस ताबड़तोड़ स्तर पर  सरकार ने स्फुर्ति दिखा कर नक्सल वाद का खात्मा किया वह पूरे देश मे कबीले तारीफ बन गई आज निर्भय होकर  पूंजी निवेशकों के अलावा उद्योगिक घरानों के सुप्रसिद्ध बड़ी कंपनियां छग क्षेत्र मे उद्योग लगाने आतुर है यह कटु सत्य का उदगार  छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) के प्रबन्ध संचालक आई.एफ. एस. अधिकारी विश्वेश कुमार झा ने बताई उन्होंने  छग  राज्य के निरंतर हो रहे विकास, उद्योग नीति पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि हमारे छग राज्य मे सबसे बड़ी चुनौती नक्सलवाद की थी जिसकी वजह से पूर्व शासन काल मे कोई भी निवेशक उद्योग लगाने यहाँ कतराते थे  सर्व प्रथम केंद्रीय रिजर्व बल के सहयोग से उन्हे समूल नष्ट कर देश विदेश मे होने वाले इनवेस्टर  कनेक्ट मीट का आयोजन हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, बैगलूरु,रायपुर, जगदलपुर सहित जापान जैसे सिटी तक मे किया गया तथा  वन टू वन बैठक लेकर उन्हे नक्सलवाद जैसी समस्या से आश्वस्त कर उन्हे उद्योग लगाने आमन्त्रित किया गया जिसमे उद्योग लगाने से लेकर निवेशकों, राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाली सुविधा के बारे मे बताया गया  कुछ माह मे इसके सार गर्भित परिणाम आने लगे तथा बहुत सी कंपनियां यहाँ उद्योग लगाने कार्य प्रारंभ कर चुकी है


*भारत माला सड़क निर्माण*
छग राज्य उद्योग विभाग के एम. डी. विश्वेश कुमार झा बताते है कि उद्योग को सरल, सुगम एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से संपूर्ण प्रदेश मे भारत माला परियोजना के तहत सड़क निर्माण का जाल बिछाया गया ताकि जिसका लाभ जिले मे लगाए जाने वाली  कंपनीयो उद्योगों के उत्पाद, कच्चा माल एवं क्रय विक्रय की अवागमन सुविधा उपलब्ध कराई जा सके राज्य सरकार नए आईडिया से कंपनियों को आकर्षित कर रही है जिनमे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने इसी वर्ष छग राज्य मे इंडस्टेरियला (उद्योग)
2026 एक्ट पारित की है जो देश का पहला एक्ट बन गया है इस एक्ट से प्रभावित  होकर मध्य प्रदेश और अन्य राज्य उक्त कथित उद्योग एक्ट का अनुसरण का रहे है रिस्क एंड ट्रस्ट आधारित बिजनेस परमिशन सिस्टम है, जो एमएसएमई  इकाइयों और निवेशकों को सेल्फ-सर्टिफिकेशन तथा हर साल लाइसेंस के नवीनीकरण की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। ऑन लाइन एकल खिड़की तकनीक  मध्यम से डिजिटल रूप से समयबद्ध ऑटो-अप्रूवल की सुविधा दिया जा रहा है ताकि सही समय पर शासकीय कार्य सहजता और सुगमता से पूरी की जा सके यही नही प्राइवेट भूमि क्रय करने शासन पुरा सहयोग कर रहा है  जोखिम भरे उद्योग को पृथक श्रेणी मे बांटा गया है इसके लिए रिस्क वाले उद्योग को अन्य व्यक्ति द्वारा क्रय लेने पर अनुमति सहित अन्य शासन स्तर की प्रक्रिया को शिथिल बनाया गया ताकि लोन एवं अन्य उद्योग का सफल संचालन निरंतर जारी रहे उद्योग विभाग के एम. डी विश्वेश कुमार झा आगे बताते है कि हमने अलग अलग सैक्टर बनाए है जिसमे पारंपरिक स्थानीय गौण खनिज के उत्पादित सामाग्री लोहा, कोयला, के अलावा टेक्सटाइल, एग्रीकल्चर,जेम्स, को प्राथमिकता दिया गया है इंपोर्टेंट तेरह पार्क बनाए गए है उन्होंने बताया हमने लोकल स्तर पर पूंजी निवेशकों से लोन, फाइनेंस शासकीय उपक्रम मे लोन उपलब्ध है इसके अलावा नॉन बैंकिंग सुविधाएं क्षेत्र मे  आ गई है जिससे  कम ब्याज दर का लाभ उधमी उठा सकते है उन्हे अधिक जोड़ा जा रहा है उन्होंने आगे बताया कि बड़े शहरों मे रिस्क उद्योग का खतरा बढ़ा है जिसमे मुख्यतः अहमदाबाद के बहुत से टेक्सटाइल सेक्टर जो अब गुजरात अहमदाबाद शहर के मध्य आ गए उन्हे वहाँ की सरकार बाहर भेजा जा रहा है ऐसे मे छग सरकार उन्हे आमन्त्रित कर रही है यही नही सुप्रसिद्ध गरम मसाला निर्माता एम. डी.एच. को भी सरगुजा अंबिकापुर मे यूनिट लगाने आमन्त्रित किया गया इसकी वजह उक्त क्षेत्र मे मसालों की फसल अधिक की जाती है जिसका लाभ उन्हे क्षेत्र मे मिलेगा उनका कथन है कि छग सरकार केवल स्टील क्षेत्र तक सीमित नही रहना चाहती बल्कि  जो उत्पाद निर्माण यहाँ नही उन्हे ही यहाँ छग राज्य में आमन्त्रित किया जा रहा है



*प्रदूषण मुक्त व्यापार हरियाली को तरजीह*
छग राज्य के प्रत्येक जिले मे लगाए आने वाले उद्योग  प्रदूषण के रोक थाम के लिए आधुनिक तकनीक से रीसायक्लिंग कर समाप्त किया जाएगा, इसके लिए राज्य सरकार पांच प्रतिशत वृक्षारोपण का दायित्व निभाएगी साथ ही  कंपनी द्वारा पंद्रह प्रतिशत रोपण कर वॉटर से री सायकलिंग ट्रिटमेंट  कर ग्रीन मॉडल को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि आसपास खेती किसानी,अन्य कृषि उत्पादित खाध समाग्री, एवं जन स्वस्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पढ़े भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं उद्योग विभाग के एम.डी. विश्वेश कुमार झा ने बताया कि वे स्वयं वन एवं पर्यावरण, प्राकृतिक से नाता है वृहद स्तर पर प्रदूषण मुक्त ग्रीन जोन निर्माण किये जा रहे है इसका उदाहरण अटल नगर स्थित ग्राम उपरवारा सेक्टर 39 मे औद्योगिक इकाई द्वारा लगभग 2800  पीपल पौधों वन विकास निगम एवं वन विभाग द्वारा लगा कर मुख्य मंत्री एवं शासन के समाननीय मंत्री एवं आम जन की गरिमामयी उपस्थिति मे वृहद स्तर पर वन महोत्सव मनाया गया यही नही सेक्टर 16 मे भी पीपल वन का कार्य द्रुत गति से बड़े पैमाने पर रोपण कार्य किया जा रहा है संभवतः जिसका उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थित मे अगस्त माह मे होना तय है यही नही बस्तर सहित सरगुजा, एवं अन्य राज्यों मे बड़े पैमाने पर प्लांटेशन एवं रोपण कार्य जारी है जिनका मूल उद्देश्य हरियाली के साथ ही शुद्ध ऑक्सिजन का प्रसार एवं आम जन प्रदूषण से मुक्त रहे बता दे कि पीपल पेड़ लंबी आयु और वायु मण्डल मे सर्वाधिक ऑक्सिजन प्रसारित करने वाला पौधा माना जाता है तभी छोटे बड़े उद्योग कंपनी लगाने के पूर्व तेजी से राज्य मे हरियाली के प्रति राज्य शासन सजग और संवेदन शील है तभी भविष्य मे छोटे बड़े कंपनी, उद्योग प्रदूषण  मुक्त व्यापार का परिचालन कर सकेंगे

*सिंगल विंडो सिस्टम* 

लाइसेंस और अनुमति के लिए ऑनलाइन सेवाएं देना प्रमुख है कार्यों मे पारदर्षिता  लाने के उद्देश्य से समस्त बिल कार्य भुगतान तथा वस्तुओं का लेनदेन किया जाएगा इसके लिए शासन पॉवर सप्लाई को तरजीह दे रखी है उन्होंने बताया कि बहुत से इलेक्ट्रानिक सेक्टर जिसमे चिप्स इत्यादि निर्माण मे पॉवर की भूमिका बहुत अधिक सहायक साबित होगा उन्होंने यह भी बताया कि जापान कि सुप्रसिद्ध कंपनी वाणीज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के मध्यम से छग राज्य मे अपना प्लान लाने वाली है इस संदर्भ मे जापान प्रतिनिधियों से लगातार बैठक हो रही है  बहुत से कंपनी शीघ्र ही यहां छग मे निवेश कर रहे है  उन्होंने आगे बताया कि आज दिनांक तक छग राज्य मे लगभग अस्सी हजार लाख करोड़  रुपये का कुल निवेश उधमियों द्वारा किया गया है जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले पांच वर्षों मे छग राज्य उद्योग के क्षेत्र मे  एक नया इतिहास रचते हुए एक नया अध्याय  स्थपित करेगा.

गुरुवार, 6 अगस्त 2026

नीलगिरी के साए मे पनपता पचेड़ा नर्सरी की हरियाली

 नीलगिरी के साए मे पनपता पचेड़ा नर्सरी की हरियाली 


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) यह उक्ति सार्वजनिक है कि जहां नीलगिरी पौधा रोपण क्षेत्र होता है वहां आस पास क्षेत्रों में अन्य प्रजाति के पौधे कभी सफल नही होते इसका मूल कारण यह माना जाता है कि नीलगिरी पौधे जिस रोपण क्षेत्र अथवा स्थल में  उगाते है वहां के भूगर्भ जल स्त्रोत को वह अत्यधिक जल ग्रहण  अवशोषित कर जल स्तर को पाताल लोक पहुंचा देता है इसकी वजह से अन्य प्रजाति के प्राकृतिक एवं रोपित पौधे को पर्याप्त मात्रा मे जल श्रोत जैसी अति आवश्यक खुराक उन्हे न मिलने की वजह से पौधों का मुक्त रूप से ग्रोथ नही हो पाता एवं  समय पूर्व रोपित पौधे,अविकसित,टेढ़े मेढे,विकृत,रोग ग्रस्त जैसी हालत मे  मरणासन्न स्थिति मे पहुँच जाते है परंतु उक्त मिथक को सिरे से खारिज करते हुए रायपुर अनुसंधान संस्थान  का सामाजिक वानिकी वन विभाग द्वारा संचालित पचेड़ा नर्सरी उन समस्त भ्रामक विचारणीय पहलू  को विराम लगा देता है जहाँ तीन हजार से अधिक  नीलगिरी प्लांटेशन के मध्य में स्थित नर्सरी जिनकी आयु विगत सत्ताईस वर्षो की हो  चुकी है वहाँ स्थापित नर्सरी लंबे समय से  सफलता पूर्वक संचालित हो रहा है राजधानी  रायपुर शहर से लगभग सत्रह किलोमीटर दूर  अंतिम क्षेत्र स्थित सामाजिक वानिकी वन विभाग द्वारा एक सौ पच्चीस एकड़ क्षेत्र के पचेड़ा ग्राम जहाँ रोपित  नीलगिरी वन भूमि क्षेत्र के मध्य भाग में लगभग चार एकड़ भू भाग पर वर्ष 2019 से पौधशाला (नर्सरी) का संचालन विभाग द्वारा  किया जा रहा है जहाँ सीमित  स्थान, साधन, एवं संसाधन के विपरीत भिन्न भिन्न प्रजाति के असीमित पौधशाला कार्य रोपण व्यवस्था विगत सात वर्षों से सफलता पूर्वक संचालित किया जा रहा है उक्तशय की जानकारी प्राकृतिक, पर्यावरण एवं प्रकृति प्रेमी  युवा उत्साही, फॉरेस्ट गार्ड, जो विभाग के लिए कुछ नया करने एवं सीखने की ललक, जज़्बा रखते हुए ग्राम पचेड़ा नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर  ने बताई कि 


वन अनुसंधान विस्तार सामाजिक वानिकी वन विभाग के डी एफ ओ लोक नाथ पटेल साहब के दिशा निर्देश पर जो एक  कुशल, दक्ष, प्रशासनिक आई.एफ.एस. अधिकारी है जो  संवेदनशील रहते हुए  मातहतों के प्रति सख्त परंतु कार्यों के प्रति  किसी प्रकार का समझौता नही रखते है उनके निर्देशानुसार  कर्मयोगी,परिपक्व,अनुभवी,एस डी ओ तरुण तिवारी जी के निरंतर मार्ग दर्शन प्रयास से संपादित कार्यों की मॉनिटरिंग,एवं समीक्षात्मक दृष्टि कोण रखते हुए विभाग में  कुछ नया करने की ललक, योजनाओं को धरातल मे लाने की जद्दोजहद, और प्रयास पर विश्वास रखते हुए उनके नेतृत्व मे वन विभाग के नव नियुक्त युवा परिक्षेत्राधिकारी डॉ नामित शाह के उचित  व्यवस्था के साथ ही एस डी ओ तरुण तिवारी जी के द्वारा पचेड़ा नर्सरी के विस्तार एवं आधुनिक सोच स्तर के साथ कार्यों में  अधिक से अधिक रोपण कार्यों को संपादित करवाते रहते है यही वजह है कि पचेड़ा पौधशाला की ख्याति लगातार आसपास ग्राम क्षेत्र मे दिन दुनी रात चौगुनी अधिक बढ़ गई है तथा स्थानीय स्तर के अलावा बाहरी ग्राम क्षेत्रों से भी विभागीय योजना के तहत पौधे लेने  कुरुद्,धमतरी, सहित अन्य क्षेत्रों से ग्राम पचेड़ा नर्सरी पहुँच रहे है  चार एकड़ भू भाग स्थित नर्सरी में प्रतिदिन  आसपास ग्रामीणों को रोजगार सहित वानिकी कार्यों का अच्छा खासा अनुभव मिल गया है वे अब मनरेगा के तहत कार्यों का संपादन कर रहे है इस संदर्भ मे ग्राम पचेड़ा के नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर ने बताया कि वर्षा ऋतु के वर्तमान समय मे नर्सरी में आसपास  ग्रामीण क्षेत्रों से जिसमे ग्राम पचेड़ा,ग्राम मुनगी,चंद्रखुरी, से अधिक संख्या मे श्रमिक कार्य करने आते रहते है कार्य अनुसार इनकी संख्या क्षमता, कम ज्यादा होते रहती है वर्तमान वर्षा ऋतु मे माह जुलाई से दिसंबर अंत तक निशुल्क पौधे वितरण किया जाता है यही वजह है कि स्थानीय निजी,संस्थान, ग्राम,पंचायत ,स्कूल,शासकीय संस्थान, कृषक हितग्रही, के जन प्रतिनिधि, सहित अनेक प्राकृतिक पर्यावरण प्रेमी लिखित पत्र देकर डी एफ ओ साहब के आदेश निर्देश  पर निशुल्क पौधे वितरण किया जा रहा है


पचेड़ा नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर ने बताया  कि हमारे यहां अट्ठारह हजार टाल पौधा, कुल 58000 तैयार पौधे उपलब्ध है एवं 40,000 मिश्रित प्रजाति के,फलदार,फुलदार,सायादार, अधिक ऑक्सिजन प्रसारित करने वाले एवं  र्औषधीय गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध है जिनमे मुख्यतः,नीम,हर्रा,बेहड़ा, अर्जुन,जामुन,आंवला,मूनगा,पीपल,गुलमुहर,अमरूद,कटहल, आम,इमली, सीताफल, पपीता,खमहा र, शहतुत, बेल, करंज, कचनार, शिशु, सागौन, महोमनी, दश्मत, टिकोम, दूब, मोंगरा,पीपल, बरगद, जैसे भिन्न भिन्न प्रजाति के पौधे उपलब्ध, है जिनकी सबसे अधिक मांग की जाती है और पौधों की मांग के अनुसार विभाग के लिए प्रस्ताव भेज दिया जाता है ग्राम पचेड़ा नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर आगे बताते है कि आधुनिक रूप से नर्सरी का विस्तार होना चाहिए इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है वृहद भू भाग होने तथा तीन हजार से अधिक नीलगिरी जैसे  रोपण क्षेत्र होने के बावजूद यहाँ प्राकृतिक रूप से सौ फीट के गहरे अंतराल मे माकूल पानी स्त्रोत की व्यवस्था है पानी सिंचाई की समस्या कभी नही आई परंतु नर्सरी विस्तार होने पर दो, तीन नलकूप खनन किया जाए तो भीषण गर्मी मे सीमेंटिकृत टंकी का उपयोग कर जल संचय  सिंचाई कार्य सहजता से किया जा सकता है इस संदर्भ मे विभाग के एस डी ओ तरुण तिवारी साहब का कथन है कि  पचेड़ा नर्सरी को  हाईटेक नर्सरी के रूप मे डेवलप किया जा सकता है जिसमे मुख्यतः  शिड उपचार हेतु प्लेटफार्म निर्माण करना,ग्रीन नेट हाउस,मिनीपॉली हाउस, साथ ही आवश्यकता अनुसार लो टनल का निर्मित भी उपयोग किया जा सकता है जो संभावित है। ये पारदर्शी प्लास्टिक या कांच से ढंके होते हैं जो निर्धारित तापमान, नमी और रोशनी को नियंत्रित करके बीजों को जल्दी और सुरक्षित रूप से अंकुरित करने में मदद करते हैं ऐसी व्यवस्था लागू कर आधुनिक नर्सरी डेवलप मेंट किया जा सकता है जिसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर कार्य योजना की रूप रेखा तैयार की जाएगी जहाँ पर पौधे तैयार करना, सागौन रूट शूट तैयार करना, विचारणीय  है जैविक खाद निर्माण के संदर्भ मे


नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर ने बताया कि दस बाई बारह के गड्ढे में गोबर खाद, सूखे पत्ते, अपशिष्ट घास फुस, निरंतर जल छिड़काव कर वर्ष मे दो बार वर्मी कंपोस्ट खाद का निर्माण किया जाता है जो नर्सरी के लिए पर्याप्त होता है जिस प्रकार ग्राम पचेड़ा नर्सरी मे दिन ब दिन पौधों की निरंतर मांग बढ़ रही है उसे देखते हुए वन विभाग को भी पचेड़ा नर्सरी के विस्तार पर गहन विचार मंथन कर योजनाबद्ध तरीके से इसका विस्तार करने की आवश्यकता दिखाई  दे रही है यही नही राजस्व भूमि मे विभाग द्वारा लगाए जाने वाले प्लांटेशन भी नर्सरी के पौधे वैकल्पिक व्यवस्था का साधन बन सकता है इसका साक्षात उदाहरण ग्राम असौन्दा,मोह्दी, के मुख्य मार्ग से ग्राम जावा का दस हेक्टेयर राजस्व भूमि मे लगभग 11,000 मिश्रित प्रजाति के फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पौधे वर्ष जुलाई 2023-2024 मे सिंचित प्लांटेशन वन अनुसंधान विस्तार वन विभाग द्वारा संपादित किया गया था जो अन्य ग्राम क्षेत्रों के लिए नाज़ीर बन रही है वहाँ के तीन  गुणित तीन के अंतरल मे रोपित प्लांटेशन पौधे तीन वर्ष मे युवा अवस्था मे पहुँच कर लह लहाते हुए मस्ती में झुमते हुए शीर्ष पर आपस मे स्पर्श कर झूमते हुए देखने से ऐसा प्रतीत होता है जैसे किशोर अवस्था के बालक परस्पर खेल क्रीड़ा मे तल्लीन रहते हुए पंद्रह फीट की ऊँचाई मे पहुँच कर एक दूसरे को छु छुवाला करते हुए अठाखेलियाँ कर रहे हो एवं ग्राम पंचायत सकरी के आश्रित ग्राम जावा क्षेत्र प्लांटेशन मे हरियाली की ब्यार बहा रहे हो यहां आश्चर्य का विषय है कि प्रेमन चंद्राकर जैसा पद में छोटा सा फॉरेस्ट गार्ड ही है जिसने कम आयु मे जुलाई 2023-24 मे प्लांटेशन अपनी उपस्थिति में रहते हुए करवाया था आज वहां का प्लांटेशन देख कर किसी भी पर्यावरण प्रेमी का मन मोह लेगा उसने आगे बताया कि प्रति वर्ष तत्कालिक अधिकारियों के आदेश एवं निर्देश पर जिनमे श्री आर. डी.निर्मलकर,एस डी ओ. जे. जे.आचार्य. साहब  के निर्देश, एवं मार्ग दर्शन मे समय समय पर केज्युवल्टी, उपचार,सुरक्षा देखरेख संपादित करवाया उसने आगे बताया कि वानिकी कार्यों के अनुभव का ज्ञान समस्त आदरणीय अधिकारियों के नेतृत्व, एवं मार्ग दर्शन से प्राप्त किया 


जबकि शिक्षा के बारे मे प्रेमन चंद्राकर ने बी एस सी. एक वर्ष तक आयुर्वेदिक फार्मेसी का अनुभव एवं स्नातक, पूरी की ऐसे वरिष्ठ अनुभवी अधिकारियों के सानिध्य मे रहते हुए वानिकी कार्य मे दक्षता हासिल की है जिसका परिणाम आज जावा का कथित प्लांटेशन पूरी तरह शत प्रतिशत पौधे स्वस्थ्य पूर्वक ग्रोथ कर रहे है जिनमे मुख्यतः जामुन, बादाम, आम, इमली,सीताफल, शहतुत,आआंवला, बोहरा, नीम, कचनार, करंज, बहेड़ा,महुआ, शिशु, महोगनी, कुसुम,कालासिरसा, अंजन, शीशम, जैसे फलदार, इमारती काष्ठ वाले फल फूल दार पौधे अपनी पूरी युवा अवस्था में लहरा रहे है जो विभाग के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है 


यह अवस्था तब निर्मित होती है जब मानव प्राकृतिक, पर्यावरण, एवं रोपित पौधों प्लांटेशन के प्रति स्नेह, सुरक्षा देखरेख पूर्ण इमानदारी, लगनता से विभागीय व्यवस्था के तालमेल बिठा कर इनकी सेवा करे तभी भविष्य मे ग्राम जावा का कथित मिश्रित प्रजाति वाला प्लांटेशन एक परिपक्व वन क्षेत्र के रूप मे विस्तारीत दिखता है जिसका श्रेय उपर बैठे अधिकारी भी वन कर्मी की भूरि भूरि प्रशंसा करने से नही हिचकिचते सामाजिक वानिकी के युवा फॉरेस्ट गार्ड प्रेमन चंद्राकर सेवानिवृत वरिष्ठ अधिकारियों के सान्निध्य मे रह कर एक जुनून, की तरह वानिकी कार्यों का अनुभव लिया और आज भी वह कुछ नया सीखने का जज्बा, और ललक दिखाई देती है जो विभाग के प्रति सीखने समझने, एवं समर्पण भाव को दर्शता है

बुधवार, 29 जुलाई 2026

वन मण्डल राजनांद गांव बागनदी के रेंजर द्वारा श्रमिक भुगतान में लापर वाही मुख्य मंत्री हेल्प लाइन मे शिकायत दर्ज

 वन मण्डल राजनांदगांव बागनदी के रेंजर द्वारा श्रमिक भुगतान में लापरवाही श्रमिकों ने मुख्य मंत्री हेल्प लाइन मे शिकायत दर्ज



रायपुर/राजनांदगांव (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) राजनांदगांव वन मण्डल बाग नदी अंतर्गत छुरिया नर्सरी में राज्य कैम्पा मद के तहत बहुत से श्रमिकों द्वारा कार्य संपन्न किया गया था जिसका मजदूरी भुगतान बागनदी रेंजर हरि सूरजबली सिन्हा द्वारा नहीं किया गया त्रस्त  होकर श्रमिकों ने  इसकी शिकायत छग के मुख्यमन्त्री विष्णु देव साय हेल्प लाइन से ऑन लाइन  की गई  है 




शिकायत मे मुख्यमन्त्री हेल्प लाइन में पीड़ित श्रमिकों ने शिकायत दर्ज करते हुए लिखा कि बागनदी छुरिया नर्सरी के कार्यरत श्रमिकों का भुगतान वन क्षेत्रपाल रेंजर हरि सूरज बली सिन्हा द्वारा लंबे समय से नही किया जा रहा है तथा उन्हे केवल अश्वासन दिया जा रहा था जबकि संपूर्ण कार्य कैंपा मद की राशि से संपदित किया जाता है तथा उनके खातों मे त्वरित सीधे भुगतान  डालने की व्यवस्था रहती है परंतु श्रमिकों की राशि को लंबित कर रखा गया है जिसकी वजह से श्रमिक बहुत ज्यादा आक्रोशित हो गए तथा मुख्य मंत्री हेल्प लाइन मे   शिकायत दर्ज कर दी जबकि पीड़ित श्रमिकों ने रेंजर पर यह भी आरोप लगाया है कि माह जुलाई मे ही उनके द्वारा भुगतान राशि को किसी अन्य खातों में भेज दिया गया है साथ ही श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि पौधा परिवहन भुगतान भी काफी समय से लंबित है श्रमिकों ने रेंजर हरि  सूरज बली सिन्हा के कार्य शैली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार एवं फर्जी तरीके से बिल बाउचर,बना कर शासकीय राशि  गबन करने का आरोप लगा रहे है श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि यदि ऐसा नही तो उनके द्वारा प्रस्तुत बिल बाउचार एवं अन्य कार्यों की विभागीय जांच सक्षम अधिकारी से सुक्षमता से करवा कर स्थिति स्पष्ट कर किये गए भुगतान राशि किसी अन्य मद, व्यक्तियों के नाम पर राशि ट्रांसफर कैसे कर दिया गया इस पर त्वरित कार्यवाही कर श्रमिकों को न्याय दिलाने की मांग की गई उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में शिकायत कर यह भी मांग की गई है यथा शीघ्र मजदूरी भुगतान कराने तथा राजनांद गांव वन मण्डल अंतर्गत  परिक्षेत्र  बागनदी अधिकारी रेंजर पर कठोर से कठोर कार्यवाही करने की भी मांग की गई है।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

छग राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग से पत्रकारों ने भेट कर उन्हे पर्यावरण संरक्षण के रूप मे बांस पौधा भेंट कर उन्हे बधाई दी

 छग राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग से पत्रकारों ने भेट कर उन्हे पर्यावरण संरक्षण के रूप मे बांस पौधा भेंट कर उन्हे बधाई दी  


रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) छग राज्य हज कमेटी के युवा अध्यक्ष मिर्ज़ा एजाज़ बेग से मासिक मिशन पॉलिटिक्स समाचार पत्रिका के संपादक अल्ताफ हुसैन एवं वेब वर्ल्ड  समाचार पत्र के पत्रकार मज़हर इकबाल ने सौजन्य भेट कर उन्हे हज कमेटी अध्यक्ष नियुक्त होने पर प्राकृतिक एवं पर्यावरण से संदर्भित  बांस पौधा गमला के रूप मे भेंट किया जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए सभी वर्ग धर्म जाति, संस्थान सामाजिक कार्य कर्ताओं के युवाओं एवं पर्यावरण प्रेमियों को पौधा रोपण करने की अपील  की है उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सभी को पर्यावरण एव्ं प्राकृतिक,विस्तार के साथ ही  प्रदूषण से लड़ने के लिए जन जगरुकता लाने दृढ संकल्पित है इसके लिए उन्होंने  सभी व्यक्तियों को अपने परिजन विशेष कर एक पेड़ मां के नाम लगाने की अपील की है जिसके प्रदेश भर मे  सार्थक परिणाम परिलक्षित हो रहे है हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग ने आगे कहा कि शीघ्र ही पौधा रोपण कार्यक्रम वृहद स्तर पर करने की बात भी कही है

मंगलवार, 14 जुलाई 2026

तीस वर्षों से बांस खेती से मिल रहा वन विभाग को राजस्व.

 तीस वर्षों से बांस खेती से मिल रहा वन विभाग को राजस्व.

बांस प्लांटस से ग्रामीणों के आर्थिक समृद्धि रहन सहन एवं जीवन मे सुधार

 


अलताफ़ हुसैन 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) महासमुंद वन मंडल अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र के बिहाझर में वर्ष 1993 से 1996 तक रिक्त पड़त भाटा भूमि में 175 हेक्टेयर भू भाग में तीस वर्ष के तत्कालिक उत्साही, कर्मठवान, लगन शील,जुझारू  प्रवृत्ति के जीवट  रेंजर आर के साहू द्वारा अपने सहयोगी वन कर्मचारियों के साथ उपस्थित रहते हुए  असिंचित 2500*175 बांस भिर्रा रोपण कार्य संपन्न करवाया था उस समय यह अनुमान नही था कि भावी समय वन विभाग के लिए यह राजस्व देने वाला कुबेर का खजाना साबित होगा क्योंकि वन विभाग परंपरागत वन वासियों एवं वन आदिवासियों के सहयोग से वन प्रबन्धन समिति और वन सुरक्षा समिति का गठन कर उनके द्वारा वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सहित रोजगार सृजन का एक सशक्त मध्यम बन चुका था इसके लिए वन विभाग बकायदा आर्थिक रोजगार सहयोग के साथ कच्चा माल बांस के रूप में प्रदाय करती थी जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके बांस निर्मित वस्तुओं में जिनमे मुख्यतःटोकरियाँ (सुपा), चटाइयाँ, बर्तन, पंखे, टोपियाँ और झाड़ू सहित 


सजावटी सामान, बांस के खिलौने, फर्नीचर और संगीत वाद्ययंत्र इत्यादि का निर्माण कर वन वासियों की आजीविका का सशक्त माध्यम बनती थी यह वन प्रबन्धन समिति में वन विभाग के सदस्य के रूप में कार्य करती थी तथा विभागीय अधिकारी उक्त क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित रहते थे इसके एवज में वे वनों के संरक्षण, संवर्धन, सहित पेड़ पौधों का पुनर्जनन  प्रबन्धन के लिए सहयोग करते थे इसके एवज में वन विभाग  जलाऊ लकड़ी, घास और लघु वनोपज जैसे- पत्ते, फल, गोंद  का अधिकार देती थी।जिसमें बाग बाहरा परिक्षेत्र मे वन  प्रबंधन समिति सिर्री, और बखमा ग्राम द्वारा प्रथम विक्रय में ही अडतीस लाख रुपये का लाभांश राशि प्राप्त किया जो एक उपलब्धि मानी जाती थी जो एक रिकार्ड रहा  वर्तमान गरियाबंद रेंजर राजेंद्र कुमार साहू इस सबके पीछे सभी का योगदान बताया उन्होंने बताया कॉलेज समय मे वे प्रारंभ से ही प्रकृति व पर्यावरण प्रेमी रहे तथा उनका लगाव वन क्षेत्र एवं वन्य प्राणियों के प्रति काफी संवेदनशील था 
वर्ष 1984 में दुर्ग सामाजिक वानिकी में सहायक परिक्षेत्राधिकारी के रूप में चयन हुआ त्तथा तीन वर्ष पश्चात विभागीय ट्रेनिग पूरी की वर्ष, 2016 में वे नगरी काष्ठागार में रहे तथा तीन वर्ष पश्चात महासमुंद वन मण्डल अंतर्गत बाग बाहरा में अपनी विभागीय सेवा दी


गरियाबंद परिक्षेत्राधिकारी आर के साहू आगे बताते है कि जिसने वन विभाग में सेवा दे दिया वह दूसरे विभाग में कार्य नही कर सकता क्योंकि यहाँ सभी विभागीय अधिकारियों का सहयोग तो मिलता ही है साथ ही स्थानीय  ग्रामीणों का भी पूर्ण सहयोग प्राप्त होता है बल्कि यहाँ सभी वर्ग आयु के लोग का विचार सकरात्मक रहता है जिससे सभी को कार्य संपादन में स्फुर्ति और जज्बात जुड़ जाते है रेंजर आर के साहू आगे बताते है कि तत्कालीन बागबाहरा परिक्षेत्र में रह्ते हुए आम लोगों में वन और उनके जंगल से प्राप्त  लकड़ियों के प्रति काफी जन जगरूकता आई थी तथा वे वनों के विकास मे जागरूक हो चुके थे यही वजह थी कि वर्ष 1993 से वर्ष 1996 तक रोपण कुल 175 हेक्टेयर वृहद भूभाग में बांस रोपण प्लांटेशन में किया गया था जिसमें 2500 *175 भिर्रा में एक से लगभग देढ़ लाख की पातन  कर विभाग को आपूर्ति हेतु दिया जाता था जिसका लाभ आज पर्यन्त विभाग द्वारा उठाया जाता रहा है यह समस्त कार्य  सबके सहयोग से संपादित होता रहा तथा परिपक्व  होने पर यही बांस भिर्रा देख कर प्लांटेशन की विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और आम जन इस  की भूरि भूरि प्रशंसा किये बगैर नही थकते थे एक प्रकार से संपूर्ण क्षेत्र बांस कानन के रूप में पहचाने जाने लगा उसकी यादे संजोए गरियाबंद  परिक्षेत्राधिकारी  आर. के. साहू बताते है कि लगभग, 29 से 30 वर्ष होने जा रहा है जहाँ के सभी साइज के समान्य बांस से लेकर  बंबू बांस कथित प्लांटेशन से आज तक उत्पाद हो रहा है तथा विभाग को प्रति वर्ष लाखों का राजस्व आज भी प्राप्त हो रहा है उन्होंने बताया बांस की संपूर्ण खेती की गई थी उसे बिहाझर नर्सरी से ला कर रोपे गए थे मजे की बात यह भी है कि संपूर्ण प्लांटेशन असिंचित था यानी प्राकृतिक वर्षा, अनुकूल वातावरण, में इसका रोपण किया गया था असिंचित बांस रोपण वर्षा ऋतु जून जुलाई से अगस्त के मध्य की जाती है गरियाबंद रेंजर आर. के. साहू बांस खेती के बारे में आगे बताते है कि 4×4 या 5×5 मीटर की दूरी पर 30-45 गड्ढे  बना कर1000 बांस पौधे वर्मी कंपोस्ट खाद के साथ कीटनाशक, काली मिट्टी डाल कर बांस करील पौधे रोपे  जाते है जहाँ एक दो वर्ष नमी की आवश्यकता पढ़ती है 


नदी नाले पोखर, कृषि के मेढ़,इसके लिए उपयुक्त क्षेत्र माना जाता है इसकी सुरक्षा के साथ  नमी बरकरार रखने के लिए एक दो वर्ष सिंचाई आवश्यक होता है यही नही खरपत वार से बचाने साथ ही निंदाई गुड़ाई भी आवश्यक होता है उन्होंने बताया कि इसकी कटाई चार से पांच वर्ष में प्रारंभ शुरू हो जाता है इससे विभाग को प्रति वर्ष राजस्व प्राप्त होता रहता है गरियाबंद परिक्षेत्राधिकारी आर.के.साहू आगे बताते है कि वन विभाग चाहे तो लधु उद्यमी, कृषकों एवं प्राइवेट संस्थानों को बांस रोपण के लिए प्रोत्साहित कर सकती है क्योंकि अपनी सेवा काल में बहुत से रोपण और प्लांटेशन किया है जिसका अच्छा प्रतिसाद भी मिला है परंतु जिस प्रकार महासमुंद वन मंडल अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र का बांस प्लांटेशन मेरे द्वारा संपादित किया गया है वह आज भी विभाग को राजस्व प्रदान कर रहा है जो मेरे विभाग और मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है.

रविवार, 12 जुलाई 2026

शासन की क्रांतिकारी डिजिटल सेवा आम जनता का बन रहा मौलिक व्यवस्था का सेतु

 शासन की क्रांतिकारी डिजिटल सेवा आम जनता का बन रहा मौलिक व्यवस्था का सेतु  


अलताफ़ हुसैन

 रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) देश और समाज में समान्य नागरिक संहिता के तहत अनेक नियमानुसार भिन्न भिन्न  विधिक मौलिक व्यवस्था लागू किये गए है जो प्रत्येक नागरिक के लिए जीवन से लेकर मृत्यु उपरांत तक आवश्यक है इसके लिए प्रत्येक मानव जीवन के लिए शासन स्तर पर अनेक लिखित संवैधनिक प्रमाण पत्र जारी किये जाते है जो स्थानीय नागरिकता को स्पष्ट कर यह दर्शाता  है कि व्यक्ति किस क्षेत्र राज्य प्रांत देश का मूल नागरिक है इसके अलावा भी अनेक प्रपत्र जिसमे जीवन से लेकर मृत्यु तक शादी, से लेकर तलाक़ तक तथा राशन कार्ड, आय,से लेकर जमीन संबंधी बंटवारे,नामंतरण तक,समस्त शासकीय सुविधाएं मिलने का प्रमुख आधार शासकीय विभाग से जारी सील, मुहर, डिजीटल  क्यु. आर.कोड.हस्ताक्षरीत युक्त प्रमाण पत्र उसका मूल दस्तावेज माना जाता है जो प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्यत होता है जो आम व्यक्ति के भारत देश,के राज्य, प्रांत, शहर एवं सामाजिक व्यवस्था  का मूल नागरिक  होने की प्रमाणिकता को दर्शाता है परंतु  अपरिहार्य कारणों से वर्षों पुराने पत्र के घुमने, जीर्ण शिर्ण या कटने,फटने, अथवा अन्य   परीस्थितकीय वश जलने, या नष्टिकरण होने की दशा मे  नागरिकों को अनेक कठिन अवस्था से गुजरना पड़ता था इसका निराकरण करते हुए छग प्रदेश के यशस्वी मुख्यमन्त्री श्री विष्णु देव साय जी ने समस्त विभागों को पेपर लेस व्यवस्था की आधुनिक डिजिटल क्रांतिकारी  युग की शूरूआत कर राज्य भर मे सेवा सेतु पोर्टल प्रारंभ कर के आम जन को सहज नवीन आधुनिक सुविधा जनक सरली कृत व्यवस्था  प्रदान कर दी है जिससे आम व्यक्ति दफ्तरों में धक्के खाने की बजाए अब सीधे घर बैठे अथवा  800 से अधिक लोक सेवा केंद्र, 1000 से अधिक च्वाइस सेंटर,  या प्रदेश भर मे पंद्रह हजार कॉमन  सर्विस सेंटरों के माध्यम से उपरोक्त समस्त सुविधाओ का लाभ उठाया जा सकता है 


     उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की  डिजिटल संचार युग की प्रारंभिक अवस्था बड़े महानगरों, नगरों, शहरी क्षेत्रों के साथ ही सुदूर आँचल के  वन ग्रामीण क्षेत्रों में भी जारी किया गया जहाँ छोटे छोटे प्रमाण   पत्र बनवाने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण सीमित अवगमन संसाधन व्यवस्था के बीच  उनके कीमती समय का दुरूपयोग अधिक होता था जिसके निराकरण हेतु देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय  नरेंद्र मोदी की पहल पर शहर महानगरों सहित सर्व प्रथम  सुदूर आंचलिक  ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवा सेतु पोर्टल जो तत्कालिक समय किसी अन्य नाम से संचालित था उस का आधुनिकीकरण कर ऐसे अनेक प्रमाण पत्रों की  समस्याओं से ग्रामीणों को निजात दिलवाने मे महती भूमिका का निर्वहन किया गया परिणमतः  इसके सार गर्भित परिणाम सामने आने लगे ग्रामीणों को थकान भरी लंबी दूरी के साथ समय की बचत और ग्राम पंचायतो में लगे कम्प्युटर पर बैठे बैठे  एक क्लिक करते ही संपूर्ण डाटा अपडेट होने लगा वह भी कम समय में सेकडों,हजारों किलोमीटर दूर बैठे ग्रामीणों को राजधानी मुख्यालय मे उनका नाम पता, ग्राम, ब्लॉक क्षेत्र,जिला सहित मूल फोटो,डिजिटल युक्त हस्ताक्षर, आँख, फिंगर प्रिंट सहित केंद्र द्वारा जारी आधार संख्या के साथ संपूर्ण शासकीय, निजी कृषि भूमि, मकान, नामंतरण, ग्राम पंचायतों की शासकीय योजनाओं के दस्तावेज,मे अंकित व्यक्ति की मूल दस्तावेज शासकीय  डाटा में सुरक्षित होने लगे जिसे उपयोग कर्ता व्यक्ति, हितग्राही देश के किसी भी राज्य के हिस्से मे रह कर एक क्लिक पर कही भी देख सकता है तथा प्रमाण पत्रों, एवं अन्य दस्तावेजों की चोरी  फर्जीवाडा, भी नही किया जा सकता यही नही केंद्र द्वारा  ग्राम पंचायत स्तर पर विकास के लिए चौदहवें,पंद्रहवें वित से जारी राशि उससे होने वाले निर्माण एवं शासकीय योजनाओं के कार्य शैली   व्यवस्था जिस में सामुदायिक भवन,सड़क निर्माण, तालाब गहरीकारण, से लेकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली, यहां तक कृषि रोजगार ग्यारंटी की देयक  राशि भुगतान, कृषि ऋण, महतारी वन्दन योजना,विधवा पेंशन, विवाह पंजीयन, आय प्रमाण पत्र,जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र,जैसे हजारों प्रमाण पत्रों का त्वरित निराकरण,शहरी,  ग्राम,   जिला पंचायतों के विकास परक निर्माण कार्यों में अब साफ सुथरी तथा शासकीय योजनागत देयक भुगतान में पारदर्शिता दिखाई देने लगी है जो कागजी लिखा पढ़ी से हट कर शासन  आधुनिक  डिजिटल व्यवस्था पर मुहर लगा दी है जिससे मूल व्यक्ति और उसकी पहचान अलग से बन रही है


 राज्य शासन द्वारा  डिजिटल सेवा सेतु पोर्टल मे डिजिटल हस्ताक्षर, के मध्यम से अपनी पहचान, प्रमाण पत्र को सत्यापित करने का सशक्त माध्यम बन चुका है इससे किसी प्रकार के डिजिटल प्रमाण पत्रों, और दस्तावेजों मे  फर्जीवाडा अथवा छेड़छाड़  होने की संभावना नगण्य हो जाता है  तथा आवेदक, हितग्राही देश के किसी हिस्से में जाकर उसका उपयोग सहजता से कर सकता है इसके लिए  शासन स्तर पर जारी प्रमाण पत्र मे डिजिटल, हस्ताक्षर, युक्त मूल छाया चित्र के साथ शासन द्वारा क्यु.आर.कोर्ड. जारी होता है जो पृथक व्यक्ति के नाम से आवेदक के नाम का दुरूपयोग भी नही किया जा  सकता क्योंकि छग शासन के समस्त मुख्य मूल विभाग को डिजिटल ऑन लाइन अपडेट कर दिया गया है जिसकी वजह से विभागीय, लेन देन, कार्यों मे पारदर्शिता आई है तथा शेष कुछ विभाग को अब भी अपडेट कार्य जारी है छग सरकार द्रुत गति से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को अनेक डिजिटल  प्लेटफार्म साइड का विस्तार कर चुकी है जिनमे मुख्यतः भुइंया वेबसाइट जो जमीन भू राजस्व के निराकरण हेतु प्रदर्शित है नागरिक सेवाएं एवं प्रमाण पत्र हेतु सेवा सेतु साइट उपलब्ध कराई गई है जिसमें आय, निवास, जाति, पेंशन जैसी मूलभूत  सेकडों प्रमाण पत्रों का निराकरण किया जा रहा है बिजली बिल, कनेक्शन एवं उसके निराकरण हेतु सीजी एस पी डी सी के साइट पर उनके वेब साइट निर्मित किये गए है इसके अलावा  सिंगल विंडो नाम से अलग वेब साइट निर्मित है जो व्यापार, उद्योग, एवं निवेश जैसे हिग्रहियों के लिए बनाई गई है यहाँ तक सरकारी परीक्षा हेतु  छात्रों के लिए सीजी पी एस सी की वेब साइट उपलब्ध किया गया है ताकि छात्रों की परीक्षाओ मे पारदर्शिता बनी रहे इसके अलावा भी शासकीय विभागों के अनेक डिजिटल   वेबसाइट निर्मित किये गए है जो छग वासियों के  सुविधा  एवं कार्यों मे वहुपयोगी साबित हो रहे है  

 शहरी एवं नगरीय क्षेत्रों मे भी इसका व्यापक विस्तार किया गया है सेवा सेतु डिजिटल प्लेट फार्म  छग सरकार ने बहु आयामी जन कल्याणकारी उद्देश्य के चलते  निर्मित की है जिसका उद्देश्य  जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, राशन कार्ड, सहित पेंशन जैसी 400 से अधिक सुविधाएं शामिल की गई हैं इस संदर्भ में राजधानी रायपुर के नगर निगम सहित कुछ  चवाइस सेटर स्थल का मुआयाना किया गया  जहाँ कुछ आवेदक आय एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे थे उनसे चर्चा करने पर बताया गया की पहले यह  डिजिटल व्यवस्था ई डिस्ट्रिक नाम से जारी थी परंतु ई सेवा सेतु नाम से प्रमाण पत्र बनवाने पर बहुत से  हितग्रही को परेशानी का सबब बन रहा है इसकी वजह जानने पर राजातालाब नुरानी मस्जिद के समीप  स्थित चवाइस सेंटर पर कुछ व्यक्तियों ने बताया कि आय प्रमाण पत्र को छोड़ कर मृत्यु प्रमाण पत्र जन्म प्रमाण पत्र या निवास प्रमाण पत्र बनवाने हेतु समस्त डाक्युमेंट  जमा करने के बावजूद नगर निगम मे आवेदकों को बुलवा कर अलग से राशि की मांग कर उन्हे परेशान किया जाता है इससे पारदर्षिता कहाँ रही वही एक व्यक्ति ने मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने पर छ माह समय लगने की बात कही और आज भी उसे मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त नही बन पाया यह भी  बताया गया कि नगर निगम रायपुर मे आवेदकों को पुनः बुलाने और डिजिटल प्रक्रिया के नाम से पुनः राशि की मांग कर आवेदकों को परेशान किया जाना कहां तक उचित है उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की है कि प्रमाण पत्रों की ऐसी जटिल व्यवस्था पर सुधार लाने की अवश्यक्ता बताई गई जबकि राज्य सरकार यह चाहती है कि  इसका समुचित लाभ निश्चित रूप से सभी आयु वर्ग, धर्म जाति, के आम लोग उठा सके इसके लिए वह पूर्णतः कटिबद्ध है तथा सबका साथ सबका विकास जैसे स्लोगन को सार्थक करने मे अपनी पूर्ण  ऊर्जा लगाने दृढ़ संकल्पित है शहरी क्षेत्रों मे डिजिटल सेवा सेतु पोर्टल के सुधार और व्यवस्था के लिए कुछ समय लग सकता है परंतु आम जन के छोटे छोटे प्रमाण पत्रों को बनवाने के लिए पारदर्शी एवं नीतिगत व्यवस्था लागू करेगी ऐसा सरकार पर लोगों द्वारा विश्वास व्यक्त किया जा रहा है