वन मंडल रायपुर नर्सरी मे फॉरेस्ट गार्ड लाखों करोडो का असामी,
ग्राम पचेड़ा के सुशासन तिहार में ग्रामीणों ने शिकायत की
अल्ताफ हुसैन
रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छ्ग वन विभाग में भ्राष्टाचार, फर्जीवाडा, गड़बड़ घोटाला, गबन,अनीयमितताएं ,को बड़े शातिराना तरीके से कर विभाग को आर्थिक चोट पहुंचाने वाले बहुत से डकैत यहाँ मिल जाएंगे जो शासकीय सेवाएं तो वन विभाग की करते है परंतु उसका पुरा आर्थिक लाभ अपने खाते में जमा कर उसका भरपूर लाभ उठाना होता है जिसकी बाहर कानों कान खबर तक नही आ पाती परंतु ऐसा लोमहर्षक मामला जब किसी मध्यम से सामने आता है तो आँखे अचरज से फटी की फटी रह जाती है ऐसा ही एक मामला ग्राम पचेड़ा में सुशासन तिहार मे सामने आया है जिसमें स्थानीय ग्रामीण, मजदूरों ने लिखित में शिकायत दे कर संबंधित वन कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग प्रदेश के वन मंत्री सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारीयों से की है
संपूर्ण प्रकरण रायपुर वन मंडल अंतर्गत ग्राम पचेडा नर्सरी का है जहाँ विगत बारह वर्षो से प्रेमन चंद्राकर नामक वन रक्षक वहाँ कार्यरत है जिसके विरुद्ध नर्सरी में वर्षों से कार्य करने वाले कुछ स्थानीय ग्रामीण,श्रमिक सुशासन तिहार में आवेदन दिनांक 11/05/2026 को ग्राम पचेड़ा या आसपास मे आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में सम्मिलित हो कर लिखित आवेदन प्रस्तुत किये है जिनसे चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि वन अनुसंधान विस्तार वन विभाग में प्रेमन चंद्राकर वन रक्षक के पद पर एक ही स्थान नर्सरी मे वर्षों से कार्य करते हुए बिल बाऊचर मे हेराफेरी और बड़े बड़े भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला कर लाखों करोड़ों की चल अचल संपति अर्जित कर ली है बताया यह भी गया है कि पचेडा नर्सरी में तैयार पौधों को अपने निजी नर्सरी में बेच कर फर्जी वितरण दिखा कर लाखों करोङों का घोटाला कर चुका है यह भी बताया जाता है कि शासकीय विभाग में कार्य मे रहते हुए प्रेमन चंद्राकर ने मनरेगा योजना के अंतर्गत तैयार पौधों को अपनी निजी नर्सरी अलग से बना रखी है जो हैरान करने वाली बात है क्योंकि विभागीय शासकीय सेवक या कर्मचारी पद मे रहते हुए व्यक्तिगत, निजी समान विभागीय कार्यों,जैसे नर्सरी, प्लांटेशन नही कर सकता यदि कोई ऐसा कार्य स्वयं करता है अथवा अपने परिवार के मध्यम से करवाता है तो उसे लिखित में विभाग से एन ओ सी लेना अनिवार्य हो जाता है क्योंकि वह स्वयं शासकीय विभाग में कार्यरात होता है यदि एम्पलाइज को संबन्धित कार्य करना है तो उस दशा में शासकीय कार्य से पृथक हो कर मुक्त रूप से कार्य करने वह स्वतंत्र होता है परंतु सभी नियम को ताक में रख कर जिसमें विभाग की नर्सरी के पौधे कथित अलग से निजी नर्सरी का निर्माण कर उस निजी स्थान मे लाकर उसका व्यवसायिक विक्रय कर निज लाभ लेना विभागीय कार्यों के अमानत में खयानत करने जैसा है वह भी जब पांच सौ हजार का नही बल्कि लाखों करोड़ों का लंबा खेल वर्षों से खेला जा रहा हो श्रमिकों ने आगे बताया कि प्रेमन चंद्राकर ने लगभग साठ से सत्तर लाख का निजी भवन पॉश इलाके में बना कर रखा है यही नही दो पहिया वाहन स्वर्ण, रजत, के आभूषण तथा अन्य स्थान में अपने परिजनों के नाम से भूमि लिए जाने का आरोप भी लगा है स्थानीय श्रमिकों एवं ग्राम वासियों ने संयुक्त रूप से आवेदन देकर बताया कि वर्ष, 2017-2018 में मुंनगी डेमों बांस प्लांटेशन मे लगाए जाने वाली सामग्री तार, लोहा, सीमेंट, गिट्टी, छड़, को बेच कर लाखों करोड़ों का घोटाला किया गया है ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि उसी पैसों से प्रेमन चंद्राकर वन रक्षक ने अपना नवीन भवन बनवाया था जिसकी शिकायत उपर भी की गई थी ग्रामीण श्रमिकों का आरोप है कि प्रेमन चंद्राकर द्वारा मँदिर हसौद मे ग्ग्लैक्सि 2 अपर्टमेंट के समीप ए वन नर्सरी के नाम से उनकी निजी नर्सरी निर्माण कर रखी है जहाँ ग्राम पचेडा की विभागीय नर्सरी संचालित होती है जिसमें पौधे रोपण से लेकर पॉलीथीन बैग में सिंचाई कर सुरक्षित स्थान में रखा जाता है ताकि आसपास ग्रामों के वृक्षारोपण कार्यक्रम में विभागीय वितरण किया जा सके परंतु वन रक्षक प्रेमन चंद्राकर अपना निजी अर्थ लाभ उठाने के उद्देशय से शासकीय नर्सरी के पौधे निज संस्थानों और आर्डर लेकर अन्य नर्सरी में बेच कर आर्थिक लाभ कमा रहा है
लगातार बारह् वर्षों से प्रेमन चंद्राकर वन रक्षक द्वारा एक ही स्थान में रहते हुए बड़े बड़े भ्रष्टाचार, घोटाले को अंजाम देना लाजिमी है क्योंकि इस संदर्भ में विभाग के अधिकारी दुधारू गाय को एक खूंटे में बांध कर रखना तथा वर्षों तक दूध मलाई खाते रहना की परंपरा वन विभाग के लिए सीधा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना दिखाई देता है अब भ्रष्टाचार, गड़बड़, घोटाले की ऐसी आंच की जांच की ज़द मे उपर बैठे अधिकारियों पर भी गिरना जरूरी है क्योंकि बगैर उपर बैठे अधिकारियों का उस के सिर पर वरद हस्त प्राप्त न हो तो इतने बड़े खेल मे अकेले कोई कर्मी खेल नही सकता तभी तो वह जब अकेले साठ सत्तर लाख का निजी मकान, एवं अन्य संसाधन वस्तुएँ मिला कर करोड़ों का खेल खेल सकता है तो अन्य अधिकारियों ने कितने करोड़ का घोटाला किए होगे यह बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है? यहाँ प्रेमन चंद्राकर जैसा अकेला वन कर्मी नही जो बारह वर्षों से एक ही स्थान में जमा हो
नंदन वन के लोचन साहू जो तेरह वर्षों से उपर नंदन वन को तहस नहस कर दिया उसके बारे में भी खूब चर्चा है कि वन्य प्राणियों के दाना चारा पानी खा खिला कर नंदन वन को बदतर स्थिति में पहुंचा दिया क्यों ऐसे भ्रष्ट कर्मियों को विभाग द्वारा पाला जाता है या उसे अंयन्त्र तबादले क्यों नही की जाती?अब नंदन वन को शासन फिर करोड़ों रुपये लगाकर उसका जीर्ण उद्धार में जूटी हुई है परंतु क्या लोचन साहू को वहाँ से अनयत्र भेजा जाएगा या भ्रष्टाचार करने के लिए उसे यही रखा जाएगा?
यही स्थिति गरियाबंद के हर दिल अजीज मनोज चंद्राकर जो रेंजर से एस डी ओ बन कर आठ वर्षों से उपर स्थानीय क्षेत्रों में जमे हुए है लेकिन गरिया बंद का मोह माया उनसे छुट ही नही रहा ऐसा लगता है कि वे अब यहाँ से रिटायर गरियाबंद वन मण्डल से ही होंगे जबकि उनकी भ्रष्टाचार की फेहरिस्त इतनी बड़ी है कि ऑक्सिजोन (इको पार्क)जो बारह् से पंद्रह करोड़ में उनके द्वारा ही निर्माण किया गया है जिसकी स्थिति देख कर किसी भी व्यक्ति को हंसी छुट जाएगी खुले आम भ्रष्टाचार का नँगा खेल उन्होंने खेला है,,बस एक नज़र उनके कार्यों पर भी विभाग के आला अधिकारी डाल ले तो सारी सच्चाई..दूध का दूध और पानी का पानी...नज़र आ जाएगा.




















































