रेत के टीले मे हरियाली का जंगल 20 हेक्टेयर में मिश्रित प्रजातियों का वृक्षारोपण, 99 प्रतिशत पौधे स्वस्थ
अलताफ़ हुसैन
रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय ) अरपा,लीलगर,नदी, शिवनाथ महानदी से लगे त्रिवेणी संगम से नदी तट पर हरियाली की ब्यार बहाना तथा वृक्षारोपण जैसी चुनौतियों को स्वीकार कर उसका अविश्वसनीय काया कल्प करना अत्यंत दुर्लभ एवं कठिन कार्य है परंतु इस चुनौती को स्वीकार कर वन अनुसंधान विस्तार वन विभाग के कसडोल इकाई के कर्मठ जुझारू वन कर्मियों ने कथित रेतीले टीले क्षेत्र मे वृक्षारोपण कार्य कर वो अविश्वसनीय कार्य कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नही की होगी यह तो वही उक्ति चरितार्थ लगती है कि सागर मरुस्थल मे रेत का कल्पनिक किला का निर्माण करना जो सागर के बहते एक थपेड़े मे सब कुछ समतल हो जाना लगता है परंतु कठिन परिश्रम,कार्यों के प्रति जीवटता एवं चुनौतियों को स्वीकार कर दृढ़ इच्छा शक्ति से कुछ नया कर गुजरने की अद्भुत क्षमता किसी के भी व्यक्तित्व को निखार देता है ऐसे दुर्लभ कार्य करने वाले वन अनुसंधान विस्तार वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के तहसील लवन,जिला बलौदाबाजार के उप वन पाल रूपधर नेटी, एवं पवन कुमार साहू वन रक्षक का बहुत बढ़ा योगदान रहा जो आज भी अपने कर्म के प्रति समर्पित भाव से कसडोल इकाई के अंतर्गत ग्राम सुनसुनिया में लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्र में मिश्रित प्रजातियों के पौधे वर्ष 2023 अगस्त मे दो भूभाग क्रमशः, 1727/1मे 16.760हेक्टेयर, एवं 1483/1 मे कुल 3.240 हेक्टेयर भू भाग मे 3गुणित 3 मीटर के अंतराल मे लगाए गए थे।
जो मिश्रित प्रजाति के लगभग 22,000 पौधों का सिंचित प्लांटेशन किया गया था नदी तट रोपण अगस्त मे करने की यह वजह बताई जाती है कि वर्षा ऋतु मे रेतीली जगह होने से भूमि मे नमी बनी रहती है परंतु जैसे ही परिवर्तित ऋतु होने से महीन बारीक रेतीली कण मिट्टी वायु के परिवर्तित अवस्था मे उनका लगातार संपर्क होने वाली प्रक्रिया से वह अत्यंत कठोर अवस्था मे आ जाता है वन अनुसंधान वन विभाग के युवा एस डी ओ तरुण तिवारी बताते है कि जितनी शीघ्रता से यह जल अवशोषित करता है उतनी ही जल्दी उपरोक्त प्रतिक्रिया से वह कठोर स्थिति मे पहुँच जाता है अब सवाल यह उठता है कि ऐसी अवस्था में कठोर मृदा की सख्त जमीन मे सिंचाई कैसा किया जाए इस के बारे मे वे आगे बताते है कि ग्रीष्म ऋतु मे रोपण पौधों मे थाला गाला बना कर सिंचाई व्यवस्था की जाती रही साथ ही उनके दवा खाद, उपचार, निंदाई,गुड़ाई,कर सुरक्षा की जाती रही जिसका परिणाम होने के कारण यहां गर्मी के मौसम में सिंचाई की समस्या के साथ-साथ दीमक और आम के पौधों में कीट लगने की चुनौती भी सामने आती थी जिसका विभाग के वन कर्मी पूरी मुस्तैदी से वृक्षारोपण की सुरक्षा करते रहे । वन विभाग द्वारा समय-समय पर सिंचाई, कीटनाशक एवं आवश्यक छिड़काव कर पौधों की देखरेख की जा रही है।
उप वनपाल रूपधर नेटी, कसडोल के अनुसार विभाग द्वारा कराए गए इस वृक्षारोपण में वर्तमान में करीब 99 प्रतिशत पौधे स्वस्थ हैं। कई पौधे अब लगभग 10 से 11 फीट की ऊंचाई तक पहुंच चुके हैं। पौधों की सुरक्षा और नियमित देखरेख पर विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है।
वन अनुसंधान एवं विस्तार, वन मंडल रायपुर से जुड़े वनरक्षक पवन कुमार साहू ने भी वृक्षारोपण स्थल की देखरेख और विभागीय कार्यों की जानकारी दी। उनके अनुसार रेतीली भूमि में पौधों को बचाए रखने के लिए गर्मी के दिनों में सिंचाई पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। सुखी नदी से पानी टैंकर अथवा अन्य कीट नाशक, दवाई, केजयवल्टी पौधों सहित अन्य अति उपयोगी सामाग्री का यहाँ तक पहुंचाना बहुत दुरूह कार्य है दीमक और कीट प्रकोप की स्थिति में कीटनाशक का उपयोग एवं आवश्यक छिड़काव किया जाता है।जिसका प्रतिफल है कि छोटे पौधों मे सीताफल सहित अन्य फल निकल रहे है पवन कुमार साहू आगे बताते है कि यहाँ अधकांश फलदार एवं औषधि युक्त पौधे रोपे गए है जिनमे मुख्यतः आम, आँवला, करंज, कचनार, बेल, बहड़ा, ईमाली, हर्रा, महुआ,बोहार, सीताफल, नीम, कटहल, एवं वानिकी प्रजाति मे शिशु काला सिरस, खमहार, जैसी प्रजाति लगातार ग्रोथ कर रहे है वन रक्षक पवन साहू कहते है कि
ईमानदारी से किए जाने वाले कार्य समय आने पर उसका फल मिठा होता है जो प्रत्यक्ष दिखाई पड़ रहा ह वन अनुसंधान एवं विस्तार कसडोल इकाई वन विभाग के
उप वनपाल रूपधर नेटी ने बताया कि उन्होंने अक्टूबर 2013 में सेवा प्रारंभ की थी। विभागीय सेवा के दौरान पौधरोपण एवं उसकी देखरेख से जुड़े वानिकी कार्यों में भी जिम्मेदारी निभाई है। तथा वहीं वनरक्षक के रूप में वर्ष 2011 से कार्यरत रहे और 21 जुलाई 2025 को उप वनपाल के पद पर पदोन्नत हुए। उन्होंने बताया कि वृक्षारोपण क्षेत्र मे लगभग तीन जिला का बॉर्डर है जिनमे बिलासपुर जिला मात्र एक किलोमीटर, जांजगीर जिला पांच किलोमीटर, तथा जहाँ हम खड़े है वह बलौदाबाजार ग्राम चंगोरी कड़काड़ी नाला है जो तीनों जिलों को जोड़ता है उप वन पाल रूपधर नेटी आगे बताते है कि दूसरे भूभाग वृक्षारोपण प्लांटेशन के समीप प्रति वर्ष सबरी मंदिर का शिवरीनारायण माघ पुन्नी मेला जनवरी फरवरी मे वृहद आयोजन ग्राम पंचायत के मध्यम से किया जाता है जहाँ तीनों जिले के श्रद्धालु बड़ी संख्या मे उपस्थित होकर अपनी मनोकामना पूरी करते है देखा जाए तो यह एक धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व स्थान है जहाँ की हरियाली सब को आकर्षित उत्साहित करती है
वनअनुसंधान एवं विस्तार विभाग के डी एफ ओ खेस मैडम सहित अधिकारियों-कर्मचारियों का कहना है कि पौधरोपण के बाद उस की नियमित देखरेख ही पौधों के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसी वजह से पौधों की सिंचाई, सुरक्षा तथा कीट नियंत्रण पर लगातार ध्यान दिया जाता रहा है। वर्तमान में अधिकांश पौधों की अच्छी वृद्धि होने से वृक्षारोपण स्थल हराभरा नजर आने लगा है। वन अनुसंधान विस्तार वन विभाग कें
रेंजर संतोष तंवर को इस इकाई में कार्यभार संभाले लगभग पांच-छह माह हुए हैं। उनके मार्गदर्शन में भी पौधरोपण क्षेत्र की निगरानी एवं रखरखाव का कार्य जारी है।











































