तीस वर्षों से बांस खेती से मिल रहा वन विभाग को राजस्व.
अलताफ़ हुसैन
रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) महासमुंद वन मंडल अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र के बिहाझर में वर्ष 1997 को रिक्त पड़त भाटा भूमि में 150 हेक्टेयर भू भाग में तीस वर्ष के तत्कालिक उत्साही, कर्मठवान, लगन शील,जुझारू प्रवृत्ति के जीवट रेंजर आर के साहू द्वारा अपने सहयोगी वन कर्मचारियों के साथ उपस्थित रहते हुए असिंचित बांस रोपण कार्य संपन्न करवाया था उस समय यह अनुमान नही था कि भावी समय वन विभाग के लिए यह राजस्व देने वाला कुबेर का खजाना साबित होगा क्योंकि वन विभाग परंपरागत वन वासियों एवं वन आदिवासियों के सहयोग से वन प्रबन्धन समिति और वन सुरक्षा समिति का गठन कर उनके द्वारा वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सहित रोजगार सृजन का एक सशक्त मध्यम बन चुका था इसके लिए वन विभाग बकायदा आर्थिक रोजगार सहयोग के साथ कच्चा माल बांस के रूप में प्रदाय करती थी जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके बांस निर्मित वस्तुओं में जिनमे मुख्यतःटोकरियाँ (सुपा), चटाइयाँ, बर्तन, पंखे, टोपियाँ और झाड़ू सहित
सजावटी सामान, बांस के खिलौने, फर्नीचर और संगीत वाद्ययंत्र इत्यादि का निर्माण कर वन वासियों की आजीविका का सशक्त माध्यम बनती थी यह वन प्रबन्धन समिति में वन विभाग के सदस्य के रूप में कार्य करती थी तथा विभागीय अधिकारी उक्त क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित रहते थे इसके एवज में वे वनों के संरक्षण, संवर्धन, सहित पेड़ पौधों का पुनर्जनन प्रबन्धन के लिए सहयोग करते थे इसके एवज में वन विभाग जलाऊ लकड़ी, घास और लघु वनोपज जैसे- पत्ते, फल, गोंद का अधिकार देती थी।जिसमें बाग बाहरा परिक्षेत्र मे वन प्रबंधन समिति सिर्री, और बखमा ग्राम द्वारा प्रथम विक्रय में ही अडतीस लाख रुपये का लाभांश राशि प्राप्त किया जो एक उपलब्धि मानी जाती थी जो एक रिकार्ड रहा वर्तमान गरियाबंद रेंजर राजेंद्र कुमार साहू इस सबके पीछे सभी का योगदान बताया उन्होंने बताया कॉलेज समय मे वे प्रारंभ से ही प्रकृति व पर्यावरण प्रेमी रहे तथा उनका लगाव वन क्षेत्र एवं वन्य प्राणियों के प्रति काफी संवेदनशील था वर्ष 1984 में दुर्ग सामाजिक वानिकी में सहायक परिक्षेत्राधिकारी के रूप में चयन हुआ त्तथा तीन वर्ष पश्चात विभागीय ट्रेनिग पूरी की वर्ष, 2016 में वे नगरी काष्ठागार में रहे तथा तीन वर्ष पश्चात महासमुंद वन मण्डल अंतर्गत बाग बाहरा में अपनी विभागीय सेवा दी
गरियाबंद परिक्षेत्राधिकारी आर के साहू आगे बताते है कि जिसने वन विभाग में सेवा दे दिया वह दूसरे विभाग में कार्य नही कर सकता क्योंकि यहाँ सभी विभागीय अधिकारियों का सहयोग तो मिलता ही है साथ ही स्थानीय ग्रामीणों का भी पूर्ण सहयोग प्राप्त होता है बल्कि यहाँ सभी वर्ग आयु के लोग का विचार सकरात्मक रहता है जिससे सभी को कार्य संपादन में स्फुर्ति और जज्बात जुड़ जाते है रेंजर आर के साहू आगे बताते है कि तत्कालीन बागबाहरा परिक्षेत्र में रह्ते हुए आम लोगों में वन और उनके जंगल से प्राप्त लकड़ियों के प्रति काफी जन जगरूकता आई थी तथा वे वनों के विकास मे जागरूक हो चुके थे यही वजह थी कि वर्ष 1997 को 150 हेक्टेयर वृहद भूभाग में बांस रोपण प्लांटेशन में सबका सहयोग रहा तथा परिपक्व होने पर यही बांस भिर्रा देख कर प्लांटेशन की भूरि भूरि प्रशंसा किये बगैर नही थकते थे एक प्रकार से संपूर्ण क्षेत्र बांस कानन के रूप में पहचाने जाने लगा उसकी यादे संजोए गरियाबंद परिक्षेत्राधिकारी आर. के. साहू बताते है की लगभग, 29 से 30 वर्ष होने जा रहा है जहाँ के सभी साइज के समान्य बांस से लेकर बंबू बांस कथित प्लांटेशन से आज तक उत्पाद हो रहा है तथा विभाग को प्रति वर्ष लाखों का राजस्व आज भी प्राप्त हो रहा है उन्होंने बताया बांस की संपूर्ण खेती की गई थी उसे बिहाझर नर्सरी से ला कर रोपे गए थे मजे की बात यह भी है कि संपूर्ण प्लांटेशन असिंचित था यानी प्राकृतिक वर्षा, अनुकूल वातावरण, में इसका रोपण किया गया था असिंचित बांस रोपण वर्षा ऋतु जून जुलाई से अगस्त के मध्य की जाती है गरियाबंद रेंजर आर. के. साहू बांस खेती के बारे में आगे बताते है कि 4×4 या 5×5 मीटर की दूरी पर 30-45 गड्ढे बना कर1000 बांस पौधे वर्मी कंपोस्ट खाद के साथ कीटनाशक, काली मिट्टी डाल कर बांस करील पौधे रोपे जाते है जहाँ एक दो वर्ष नमी की आवश्यकता पढ़ती है
नदी नाले पोखर, कृषि के मेढ़,इसके लिए उपयुक्त क्षेत्र माना जाता है इसकी सुरक्षा के साथ नमी बरकरार रखने के लिए एक दो वर्ष सिंचाई आवश्यक होता है यही नही खरपत वार से बचाने साथ ही निंदाई गुड़ाई भी आवश्यक होता है उन्होंने बताया कि इसकी कटाई चार से पांच वर्ष में प्रारंभ शुरू हो जाता है इससे विभाग को प्रति वर्ष राजस्व प्राप्त होता रहता है गरियाबंद परिक्षेत्राधिकारी आर.के.साहू आगे बताते है कि वन विभाग चाहे तो लधु उद्यमी, कृषकों एवं प्राइवेट संस्थानों को बांस रोपण के लिए प्रोत्साहित कर सकती है क्योंकि अपनी सेवा काल में बहुत से रोपण और प्लांटेशन किया है जिसका अच्छा प्रतिसाद भी मिला है परंतु जिस प्रकार महासमुंद वन मंडल अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र का बांस प्लांटेशन मेरे द्वारा संपादित किया गया है वह आज भी विभाग को राजस्व प्रदान कर रहा है जो मेरे विभाग और मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है.







































