बुधवार, 22 अप्रैल 2026

मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक पद पर तेरह वर्षों से रवि महमल्ला अंगद के पांव की तरह जमा कर बैठा

 मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक पद पर तेरह वर्षों से रवि महमल्ला अंगद के पांव की तरह जमा कर बैठा 

अल्ताफ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट काइम न्यूज़) छग वन एवं परिवर्तन विभाग जहाँ पर्यावरण एवं प्रकृति के लिए वरदान समझा जाता है तो वहीं कुछ लोगों की भ्रष्ट  कार्य शैली की वजह से अभिशाप भी बन जाता है तथा आम जन के समक्ष उसकी स्वच्छ छबि मे दाग लगने के साथ ही कई  सवाल भी उठने लगते है जैसा की वर्तमान में पूरे विभाग में बहुत से ऐसे वन कर्मी है जो वर्षों से एक ही स्थान पर मलाई दार जगह पर जमे रहकर वन विभाग के नियम कानून की धनिया बो रहे है जब कि वन अधिनियम यह  कहता है कि कोई भी ओहदे दार वन कर्मी एक ही कार्य स्थल क्षेत्र में तीन वर्षों से अधिक समय तक एक ही स्थान पर जमा नही रह सकता त्तथा तीन वर्षों के पश्चात विभागीय स्तर पर उसे अन्यंत्र तबादला किया जाता है जिसका अक्षरशः अनुपालन करना प्रत्येक वन कर्मी अधिकारी का नैतिक दायित्व एवं कर्तव्य बनता है परंतु यहां कुछ ऐसे भी दीमक रूपी वन कर्मी है जो वन विभाग के आर्थिक जड़ को भीतर ही भीतर खोखला कर रहे है वे वर्षों से एक ही स्थान पर अंगद की पांव की तरह जमें हुए है जिसे कोई भी वरिष्ठ अधिकारी उनके जमा पांव को टस से मस नही कर सकता इसकी वजह यह भी बताई जाती है कि पदोन्नति या ट्रांसफर  होने पर एक बहुत बड़ा खेल लेनदेन का  हो जाता  है जिसकी वजह से बहुत से वरिष्ठ एवं कनिष्ठ  प्रतिभाशाली वन कर्मी अधिकारीयों का क्रमोंन्नति नही हो पाती तथा ऐसे मलाईदार कर्मी मौज उड़ाते रहते है ताजातरीन मामला मुख्य वन संरक्षक रायपुर वन वृत से जुड़ा हुआ है जहाँ एक ही व्यक्ति विगत तेरह वर्षों से मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय में एक ही स्थान पर  जमा हुआ है आश्चर्य की बात यह है कि दो बार पदोन्नति होने के बावजूद भी उसे अब तक उसके पद से  हटाया नही गया  बताया जाता है की कथित वन कर्मी इस तेरह वर्षों में एक ही पद मे रहते हुए उसने अब तक लाखों, करोङों की आकुत् संपत्ति एकत्रित कर ली है

 यह संपूर्ण हैरान करने वाला मामला रायपुर मुख्य वन  संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक रवि प्रकाश  महमल्ला की है जो विगत तेरह वर्षों से मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत कार्यालय में जमा हुआ है यह संपूर्ण जानकारी का खुलासा तब हुआ जब किसी ने सूचना के अधिका लगा कर जानकारी प्राप्त की हमें मिले पत्र के अनुसार निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला 26/12/2013 में पदस्थ हुआ जो वर्ष 2026 को तेरह वर्ष पूर्ण होने जा रहा है जबकि इन तेरह वर्षों में उसे दो बार पदोन्नति मिली जिसे उसनें ठुकरा कर यथावत उसी स्थान एवं पद  पर काबिज रहा जबकि शासन के वन अधिनियम यह कहता है कि कोई भी कर्मचारी तीन वर्षों तक उसी स्थान एवं पद में बना नही रह सकता इससे ज्ञात होता है कि मलाई दार  स्थान में रहते हुए रवि प्रकाश महमल्ला ने अपने पद प्रतिष्ठा सब को दांव पर लगा कर उसी स्थान में रहना उचित समझा इस संदर्भ में यह भी बताया जाता है कि कोई भी वन कर्मी पदोन्नति के लिए रात दिन पापड़ बेलते रहते है कि किसी भी तरह से उनका प्रमोशन हो जाए परंतु मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला उसी स्थान और पद की लालसा ने उसे दूर नही करने दी वन कर्मचारियों के मध्य उसके तेरह वर्षों तक एक ही स्थान पर जमा रहने के पीछे बहुत सी बातों की चर्चा, एवं कयास सरेआम की जा रही है कि यहाँ पांच वन मंडल कार्यालयों से रोजाना सैकडों वन कर्मी आते है


जिनसे बहुत बड़ी धन राशि लेनदेन की सैटिंग उसी के मध्यम से होती है यही वजह है कि निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला उक्त पद को छोड़ना नही चाहता यह भी चर्चा आम है कि प्रति माह उपर पहुंचाने के बाद अपने लिए न्यूनतम वह दो से चार लाख रुपये बड़ी सहजता से कलेक्शन कर लेता है तथा उसकी पचास हजार की सैलरी यथावत रहती है सूचना के अधिकार में जब आवेदक ने उसके चल अचल संबंधी से जानकारी मांगी तब वह स्वयं जन सूचना अधिकारी बन कर बगैर सत्यापित कर आवेदक को गोलमोल जानकारी देकर गुमराह करने का प्रयास किया गया पुनः मुख्य वन संरक्षक में जानकारी मांगी गई तब जन सूचना अधिकारी ने तीन पृष्ठीय स्यापित प्रति प्रदान की गई जिसमें भी उसके द्वारा कमल विहार में एक पलाट होने की जानकारी दी जबकि नए नियम के अनुसार सभी विभाग के कर्मचारी एवं उनके परिवार के नाम कितनी संपति है लिखित में ऑन लाइन जानकारी देना अनिवार्यतः है परंतु ऐसे इंकम टैक्स की चोरी करने वाले कर्मचारी ऐसी महात्वपूर्ण जानकारी को विलोपित कर देते है


जबकि ज्ञात हुआ है कि मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला के पास चल  संपत्ति में नगद  के अलावा अचल संपत्ति में प्लाट चार पहिया गाड़ी, दो पहिया गाड़ी,स्वर्ण रजत के अलावा अनेक विलुप्त बेनामी संपत्ति अपने, रिश्तेदार, परिजन के नाम अर्जित कर रखी है जिसका आवेदक द्वारा मांगे गए सूचना के अधिकार में उसके द्वारा संपूर्ण जानकारी नही दी गई केवल गुमराह करने के उद्देश्य से सतही तौर पर जानकारी दी यही नही आवेदक ने प्रदेश के मुख्य मंत्री को भी शिकायत की गई तब भी उस पर कोई कार्यवाही नही की गई है अब आवेदक संपूर्ण जानकारी न मिलने पर ई. डी. एवं ई ओ डब्ल्यू को पत्र लिख कर न्यायालय के शरण में जाने की बात कह रहा है यही नही राशि कलेक्शन के लिए निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला द्वारा अवकाश के दिन में सर्किल में घूम घूम कर राशि कलेक्शन करता है जहाँ मुर्गा दारू सहित अनेक कार्य में जुटा रहता है यही नही हाल ही में  ड्रायव्हर सीधी भर्ती में गुणा भाग कर अपने किसी ग्राम क्षेत्र के रिश्तेदार भतीजे को भी गरियाबंद, वन मंडल कार्यालय में फीट करवा दिया इसका परिणाम यह हुआ कि छ माह में ही वहाँ के एस डी ओ मनोज चंद्राकर को कार्यालयीन अवधि समाप्त होने के बाद  ड्रायवर शासकीय गाड़ी का दुरूपयोग करते हुए रायपुर छोड़ने गया था जहां वापसी में  गरियाबंद वन मंडल की शासकीय वाहन की किसी अन्य वाहन से जबरदस्त टक्कर हुई जिसमें गाड़ी की क्षति तो हुई ही साथ ही नव चालक ड्रायवर के घुटने में गंभीर चोट आई अब सवाल यह उठता है कि छ मासी नव पदस्थ ड्रायव्हर जिसने शासकीय वाहन को क्षति ग्रस्त कर लाखों की चोट पहुंचाई थी उसका भुगतान शासन करेगी या एस डी ओ मनोज चंद्राकर करेंगे? क्योंकि ड्रायवर से पूछ ने पर बताया कि उन्हे रायपुर आवास छोड़ने के पश्चात शासकीय वाहन लेकर वह वापस गरियाबंद  आ रहा था तभी दुर्घटना हुई थी 


 बताते चले कि गरियाबंद एस डी ओ मनोज चंद्राकर वही है  जिन्होंने बागबाहरा 2017- 2018 में रेंजर रहते हुए अनेंक भ्रष्टाचार के नए आयाम स्थापित किये है वहाँ उन्होंने वनोपज सहकारी समितियो के लाखों नही बल्कि करोड़ों रुपये राशि का आहरण कर घोटाले,गबन कर अंजाम दिया था तथा वही बागबाहरा  क्षेत्र मे गिट्टी क्रेशर फैक्ट्री खड़ी की थी जिसकी गूंज तत्कालिक बागबाहरा  विधायक ने विधान सभा में सवाल  भी उठाया था जिसे उन्होंने ले दे कर मामले को सुल्टा लिया था यही नही गरियाबाद वन मंडल के आखरी हिस्से में दस से बारह करोड़ों का अक्सिजोन तैयार करवाया था जिसमें भी भ्रष्टाचार का लंबा खेल किया गया था यदि विभाग इसकी सुक्षमता से जांच करती है  तो इनके बहुत बड़े बड़े घोटाले, भ्रष्टाचार, गड़बड़ झाला की तथ्य एवं सत्य परक फेहरिस्त खुल  सकती है जिसमे बहुत बड़ा खुलासा हो सकता है इसकी भी जानकारी सूचना के अधिकार में मांगी जाएगी इन सब कर्म कांड की लीपा पोती करने में रायपुर मुख्य वन संरक्षक वृत  रायपूर के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला का पूर्ण सहयोग प्राप्त है बताया जाता है कि निज सहायक रवि महमल्ला का दौरा लगातार  अवकाश के दिनों में गरियाबंद  सहित सर्किल में रहता है


उसी प्रकार मनोज चंद्राकर भी जब भी रायपुर प्रवास में रहते है तो कार्य न होने पर विधान सभा स्थित मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में अवश्य जाते है एवं सारा गुणा भाग तय किया जाता है क्योंकि वे नाम के लिए मैनपुर एस डी ओ है बाकी समस्त कार्य वे यही गरियाबंद में बैठ कर करते है तथा किस योजना में कितना भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला करनें की युक्ति तैयार करते है क्योंकि उन्हें भी वर्ष 2019 -2020 से सात आठ वर्षों से एक ही वन मंडल कार्यालय में जमी हुए है संभवतः यही से वे रिटायर भी हो सकते है यदि विभाग उनके अंदर में वहाँ गरियाबंद में कितनी समितियां है उसका ही अवलोकन कर जांच किया जाए तो सारी सत्यता सामने आ जाएगी वैसे ही निज सहायक रवि महमल्ला जैसे दो चार और हो जाएं तो वन विभाग का बंटा धार होना तय है यही नही वह इतना अधिक चर्चित हो चुका है कि इसके भ्रष्टचार की आंच अब उपर बैठे वरिष्ठ अधिकारियों पर भी आनी शुरू हो गई है. 

मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

रायकेरा रोपणी के पचास साल हरियाली बनी बेमिसाल

 रायकेरा रोपणी के पचास साल 

हरियाली बनी बेमिसाल


आलताफ़ हुसैन



रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)  

इस बार इंतज़ाम तो सर्दी का हो गया

क्या हाल पेड़ कटते ही बस्ती का हो गया


उपरोक्त पंक्तियां नोमान शौक का है जिसमे उन्होंने दो पंक्तियों में ही कितनी गूढ़ रहस्य बात कह दी जिसमे उन्होंने पेड़ पौधे हरियाली और मानव व्यवस्था की वो चुनौती पूर्ण व्याख्या कर दी कि पर्यावरण एवं प्रकृति के अस्तित्व के साथ मानव के मौलिक ढांचा पर प्रहार करते ही यक्ष सवाल खड़ा कर दिया है कि वनों, पेड़,पौधों का रिश्ता मानव समाज में आज से नही बल्कि जन्म जन्मांतर से समूल जड़ की गहराई तक जुड़ा हुआ है पेड़ पौधों की उपस्थिति मात्र से  वातावरण में  शुद्ध, स्वच्छ ऑक्सिजन प्राप्त तो मिलता ही है परंतु उनके आसपास भगौलिक रिक्तता होनें की दशा में बसा बसाया  बस्तियाँ भी उजाड़ और वीरान सी प्रतीत होती है  यही बजह है कि पेड़,पौधे हरियाली प्रसार, विस्तार के लिए छग प्रदेश का वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ उनके आनुवंशिक् धडा वन विकास निगम अनेक क्षेत्रों में लुप्त प्रायः सागौन के अस्तित्व को अक्षुण्य बनाए रखने वृहद स्तर पर रोपणी, नर्सरी का निर्माण कर स्थानीय प्रदेश सहित बाहरी प्रदेशों के क्षेत्रों में पेड़ पौधों विशेष कर सागौन रूट शूट का उत्पादन कर असंतुलित जलवायु को नियंत्रित करने का पुनीत कार्य कर रहा है साथ ही वन विकास निगम अपनी आर्थिक स्थिति को  सुदृढ़ करता ही है साथ ही हरियाली प्रसार करने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन भी बखूबी निभा रहा है जिनमें बार नवपारा परियोजना मंडल अंतर्गत सिरपुर के समीप पचास वर्षों से सर्वाधिक प्राचीन रायकेरा रोपणी नर्सरी की अपनी एक पृथक पहचान एवं मिसाल बन चुकी है जहाँ प्रति वर्ष लाखों की संख्या में सागौन  बीजारोपण कर रूट शूट तैय्यार कर उसका विक्रय एवं निर्यात निर्बाध गति से की जा रही है 


       श्रीपुर अर्थात सिरपुर जो मुख्यालय रायपुर जिला से लगभग अस्सी किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जहाँ प्राचीन कालीन अनेक हिंदू देवी देवताओं के मंदीर, बौद्ध विहार सहित पारंपरिक पौराणिक, धार्मिक सांस्कृतिक का मिला जुला रमणिक स्थल है वहाँ से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर वर्ष 1976 में वन क्षेत्रों के मध्य नाले और पोखर के ऊँचाई पर रायकेरा नर्सरी की स्थापना अविभाजित मध्य प्रदेश के समय की गई थी जिसे हरे भरे वन से सटे ग्राम क्षेत्र के समीप ही निर्माण किया गया था वर्तमान 2026 में रायकेर रोपणी अपने संपूर्ण पचास वर्षों के गोल्डन जुबली वर्ष के बे मिसाल पायदान मे पदार्पण कर हरित उत्सव वर्ष मना रहा है भले ही छ्ग वन विकास निगम जिसकी रायकेरा नर्सरी सागौन पौधों की ही नही बल्कि वन विकास निगम कर्मियों, एवं वहाँ वर्षों से आसपास ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों की भी पालनहारी जननी है  क्योंकि वसुंधरा के गर्भ में सागौन बीजारोपण कर अंकुरित नन्हे नन्हे हरित गुलाबी कोमल पत्तों में जब सूर्य देवता अपनी पहली नारंगी आभा की दिव्य  किरण से उनिंदा कुमल्हाते हुए भोर में जब सागौन बीज के कोमल पत्ते इठलाकर अंगड़ाई लेते हुए गर्भा धरती से पुलकित होते है तब ऐसा प्रतीत होता है जैसे सूर्य देवता उनके दीर्धायु होने का आशीर्वाद देकर धरती पर आगमन पर उनका सुस्वागतम कर रहे हो यह देव तुल्य आशीर्वाद इनकी मानव रूपी आयु के समान होता है उल्लेखनीय है कि सागौन पेड़ की सामान्य आयु 50 से 100 वर्ष के बीच होती है, लेकिन अच्छी स्थिति में ये 200 वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।  जबकि प्राकृतिक वनों में यह 50से 80 वर्ष या उससे अधिक अवस्था में परिपक्व होता है। जो आज भी बार अभ्यारण का मणिराम पलांटेशन उसका साक्षात उदाहरण है 

 रायकेरा रोपणी अपने प्रारंभिक वर्ष 1976 के पश्चात अनेक राज्यों में यहाँ के रूट शूट से रोपण किया जा चुका है जिनमें मुख्यतः केरल, महाराष्ट्र तमिलनाडु, मध्य प्रदेश सहित महाराष्ट्र तक यहाँ के पौधे आज भी आपनी आभा और चमक बिखेर रहे है वर्ष2025- 2026 में लगभग अठारह लाख रूट शूट पौधे रोपणी में तैयार किये गए थे जिसका स्थानीय प्रदेश सहित भिन्न भिन्न राज्यों में विक्रय, वितरण किया जा चूका है


यह जानकारी छ्ग राज्य वन विकास निगम बार नवापारा परियोजना मंडल  के ऊर्जावान डिवीजनल मैनेजर (डी. एफ.ओ.) चंद्र कांत टीकरीया एक संक्षिप्त चर्चा मे कही वे आगे बताते है कि वित्तीय वर्ष,2026-2027 में भी अट्ठारह लाख सागौन रूट शूट तैयार करनें का विशाल लक्ष्य है उन्होंने बताया इसकी प्रारंभिक प्रक्रिया चालू कर दी गई है बार परियोजना मंडल के डी एम चंद्र कांत टीकरिया  बताते है कि सागौन शिड तैयार करनें में अनेक जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिसकी अवधि लगभग एक वर्ष तक की होती है उन्होंने बताया सर्व प्रथम  इसका बीज क्रय करने के लिए स्थानीय क्षेत्रों के अलावा कवर्धा मध्य प्रदेश के देवास महाराष्ट्र के भंडारा  जिले सहित अन्य राज्यों से सौ या उनसे अधिक वर्षीय स्वस्थ्य सागौन पेड़ से संकलित किये बीज  क्रय कर रखे जाते है पश्चात चालीस से पैतालिस प्रतिशत डिग्री तापमान पर इसे सुखाया जाता है ताकि बाहरी अवरण स्वमेव छोड़ अंदर की नमी को समाप्त कर सके यह प्रक्रिया करने से प्राप्त बीज को नमी या भिगोकर तीव्र तापमान में उलट पलट करते  हुए  सुखाया जाता है बारंबार प्रत्येक दो से तीन घंटे में यह प्रक्रिया अनवरत जारी रहती है जिसकी वजह से सागौन बीज मे पचीस से तीस प्रतिशत वजन में कमी आ जाती है छ्ग राज्य वन विकास निगम बार नवापारा परियोजना मंडल के डी एम चंद्र कांत टीकरिया आगे बताते है कि लगातार बीज प्रोसेसिग की  प्रक्रिया की वजह से इसका बाहरी आवरण छिलका, हट जाता है एवं सुखाई, बाह्य अवरण गुठली निकलने की वजह से बीज लगभग  पचास प्रतिशत से भी कम प्राप्त होता है  इस बीच नमी भी दी जाती है ताकि सागौन गुठली का बाहरी अवरण ग्रीष्म तापमान से हट कर मूल बीज चिरौजी पूरी तरह से शुष्क हो सके जिसमें इसके रोपण में तेजी से वृद्धि होती है यह प्रक्रिया लगातार पांच से सात सप्ताह तक किया जाना उन्होंने बताया है 


  सागौन रोपण सहित अन्य जानकारी लेने जब

छत्तीसगढ़ वन विकास निगम बार नवा पारा परियोजना मंडल के उप वन मण्डलाधिकारी चित्रा त्रिपाठी से ली गई तो उन्होंने बताया कि रायकेरा रोपणी आज इस वर्ष अपनी पचासवीं वर्ष मना रहा है जो वहाँ के श्रमिकों के लिए रोजगार सृजन का सशक्त मध्यम माना जाता है क्योंकि यहाँ बारह मासी रोजगार उपलब्ध होता है एक प्रकार से उन श्रमिकों के लिए रोपणी किसी बैंक से कम नही है जहाँ प्रति दिन उनके बैंक खाता में पारिश्रमिक कलेक्टर दर पर डाले जाते है छ्ग वन विकास निगम बार परियोजना मंडल की डीडीएम चित्रा त्रिपाठी  आगे बताती है कि रोपणी में रायकेरा, सुकुल बाय, खमतराई, मरौद् क्षेत्र के श्रमिको को आवश्यकता अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाता है उन्होंने बताया रायकेर रोपणी में  बीस या उससे अधिक श्रमिको को प्रतिदिन रोजगार प्राप्त होता है यह संख्या अवश्यक्तानुसार कम अथवा ज्यादा भी होता है उन्होंने बताया कि गुणवत्ता परक वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण भी स्थानीय रोपण  क्षेत्र के छायादार अथवा नर्सरी प्रांगण में किया जाता है जिसमें गोबर खाद काली मिट्टी के साथ सुखे पत्ते, कटे हुए पैरा ,कृषि अवयव की संतुलित मात्रा एवं स्वस्थ्य केंचुआ का मिश्रण किया जाता है डेढ़ से दो माह मे लगातार नमी बरकरार रखने पर गुणवत्ता पूर्ण वर्मी कमपोस्ट चाय की पत्ती के समान मिलता है जो रोपणी के लिए अत्यधिक लाभदायक होता है इसके मिश्रण से सागौन बीज के नव पुल्कित पौधे उत्पादन सहित तेजी से सर्वाइव करता है वविनि बार परियोजना मण्डल की डीडीएम  मैडम चित्रा त्रिपाठी ने आगे बताया कि  सागौन रोपण के साथ साथ बेहतर उपचार से उत्कृष्ट सागौन पौधे प्राप्त होते है इसे लिए नवजात शिशु रूपी  सागौन पौधों के लिए लगातार महिला व पुरुष श्रमिक पूरी ईमानदारी से अपने  कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे है


वानिकी कार्यों निंदाई गुड़ाई उपचार सहित समस्त सिंचाई कार्य का दायित्व महिलाएं कंधा से कंधा मिलाकर चल रही है मैडम त्रिपाठी जी ने आगे बताया कि महिला सशक्तिकारण की मिसाल यदि देखना हो तो यहां रायकेरा नर्सरी में देखा जा सकता है जहाँ छ्ग शासन के मुख्यमन्त्री विष्णु देव साय के मंशा अनुरूप वानिकी कार्यों से संदर्भित सभी कार्यों का निष्पादन आज से नही बरसों बरस से करते आ रही है जो रायकेरा रोपणी के लिए एक उपलब्धि भी है एवं एक प्रेरणादायी भी है 


 सागौन बीज के प्रोसेसिंग का साक्षात प्रक्रिया ज्ञात करने जब रायकेरा नर्सरी सिरपुर पहुंचा गया तब वहाँ खुशमिजाज, कर्तव्यपरायण, हंसमुख, मिलनसार, कर्मठ, व्यक्तित्व के धनी रायकेरा परिक्षेत्र अधिकारी हरि राम पैकरा से मुलाकात कर उनसे सागौन रोपण के संदर्भ में जब जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि बीज प्रोसेसिस अगस्त से नवंबर माह तक वेदर में किया जाता है पश्चात अप्रेल मई की कड़ाके की ग्रीष्म ऋतु में बीज को उथल पुथल किया जाता है जिससेे उसकी बाह्य आंतरिक, आवरण जिसमें छिलका, गुठली निकल कर आंतरिक  बीज की चिरौंजी पूरी तरह से सख्त होने के पश्चात चालीस या उससे अधिक डिग्री तापमान पर  मदर ट्री बेड में डाल दिया जाता है परिक्षेत्राधिकारी हरि राम पैकरा बताते है कि भूमि तैयारी नवंबर  से चालू हो जाता है जिसमें प्लाउ नागर से एक फीट गहराई तक पांच से अधिक बार जुताई किया जाता है जिसकी वजह से मृदा उपजाऊ हो जाता है रेंजर हरि राम पैकरा आगे बताते है कि उपचार के रूप में  जैविक बर्मी कम्पोस्ट एस.एस.पी. सुपर फास्ट खाद दस किलो मिक्स कर डाला जाता है वह इस वजह से भी किया जाता है ताकि मृदा के सूक्ष्म जीवाणु का नाश होता है 
तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है वे बताते है कि रायाकेरा नर्सरी बार परियोजना के सिरपुर स्थित कक्ष क्रमांक 81 वन क्षेत्र में निर्मित है तथा जहां लगभग 63 हेक्टेयर क्षेत्र में 0. 25 मीटर ऊँचाई 1 मीटर ऊँचाई तथा 10 मीटर लंबाई में बैड तैयार किया जाता है जिसमे सौ लाइन नाली खीची जाती है इसमें दस सेंटी मीटर अंतरल में सौ नाली में पचास से पचपन बीज एक लाइन में रोपा जाता है  रायकेरा  रेंजर हरिराम पैकरा आगे बताते  है कि काली मिट्टी युक्त उक्त नाली में वर्मी कंपोस्ट जैविक खाद से बीज को ढँक दिया जाता है तथा उस के उपर पैरा, कृषि अवयव से ढंक दिया जाता है ताकि पानी सिंचाई से बीज की क्षति न हो तथा सिंचाई जल से बीज को बहा कर न ले जाए इसकी देखरेख मॉनिटरिंग तब तक की जाती है जब तक सागौन बीज के महीन पौधे बाहर न निकल जाए 


पैरा तकनीक के संदर्भ में पूछे जाने पर समीप बैठे नर्सरी प्रभारी ललित रात्रे का कथन है कि पैरा रहने की वजह से रोपण क्षेत्र में बराबर नमी बनी रहती है तथा सुरक्षा के साथ तापमान नियंत्रित रहता है इसके लिए नियमित सिंचाई आधुनिक स्प्रिंकलर विधि से की जाती है यह प्रक्रिया टंकी मे बड़ा मोनो ब्लॉक मशीन से किया जाता है रायकेरा रोपणी प्रभारी ललित रात्रे आगे बताते है कि इस दौरान पैरा आवरण को साफ कर दिया जाता है जिनमे पचपन बीज में से दस से बारह पौधे प्रति नाली में निकल जाते है  अधिकतम इक्कीस दिन बाद वर्षा ऋतु के समय निंदाई गुडाइ कर कीट नाशक डी. ए. पी. मिलाकर डाला जाता है ताकि सागौन पौधे सर्वाईव कर सके रायकेरा नर्सरी प्रभारी ललित रात्रे ने सागौन देने या वितरण के संदर्भ में बताया कि मांग के अनुसार ढाई से तीन फीट ऊँचाई होने पर रूट शूट काट कर स्टैंडर्ड तरीके से मिट्टी मे एक इंच उपर तथा चार से आठ इंच अंदर मिट्टी में दबा कर रोपण किया जाता है अब सवाल यह उठता है कि वन विकास निगम कर्मियों द्वारा छ से आठ माह के अथक परिश्रम के पश्चात रोपणी के निकले पौधे उनके रूट शूट स्थानीय छत्तीसगढ़ राज्य सहित अन्य राज्यों में मांग के अनुकूल सभी स्थल में सागौन रूट शूट रोपे जाएंगे तथा बीतते समय एवं काल चक्र में ये बाल अवस्था से लेकर किशोर, युवा एवं परिपक्व भी होंगे जिनसे राहगीरों सहित क्षेत्र में शुद्ध जलवायु एवं वातावरण निर्मित कर आम जन के स्वस्थ्य को अमरत्व प्रदान कर आम जीव जंतु, वन्य प्राणियों सहित मानव जीवन को संचालित करेंगे परंतु प्रकृति की उक्त अनमोल उपहार के बदले में हम मानव समाज उन्हे क्या देंगे ?  


उक्त सवाल का जवाब हमें स्वमेव तलाश करना होगा क्योंकि सिमटते वनों का दायरा  बेतहाशा प्रदूषण,आधुनिक मशीनरी प्रबन्धन, लगातार पेड़ पौधों का विनाश,बढ़ती आधुनिक सुख सुविधा के नाम पर क्रांकिटिकारण, जो हमे शनैः शनैः गर्त की ओर धकेल रही है इस संदर्भ में हिंदुस्तान के सुप्रसिद्ध उर्दू के शायर स्व. सुलेमान ईरानी की सुप्रसिद्ध रचना की चंद पंक्तिया याद आ रही है जो अक्षरशः विलुप्त होते पेड़ पौधे और उन जैसे  सागौन के लहलहाते पेड़ जैसे अपनी वेदना का इजहार उक्त पंक्तियों के मध्यम से व्यक्त कर कह रहा हो कि-

सारे राह एक सिक्का हूं संभालो मुझको

वक्त पर काम ही आऊंगा संभालो मुझको

एक पेड़ हूँ देता हूँ घनी छाँव तुम्हे

कही मिल जुल के अपनों से न कटा लो मुझको ,,, कहीं मिल जुल के अपनों से न कटा लो मुझको.......... कहीं मिल जल के.अपनों......... 


बुधवार, 15 अप्रैल 2026

बंदूक छोड़ हाथों में थामी विकास की डोर: वन विभाग सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र में आत्मसमर्पित महिला नक्सली लिख रही है नई कहानी

 बंदूक छोड़ हाथों में थामी विकास की डोर: 

वन विभाग सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र में आत्मसमर्पित महिला नक्सली लिख रही है नई कहानी

रायपुर/सुकमा (छत्तीसगढ़ वनोदय न्यूज़)  जिले में वन विभाग की एक अभिनव पहल ने विकास और पुनर्वास की नई इबारत लिख दी है। प्रदेश के वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)  अरुण कुमार पाण्डेय के कुशल नेतृत्व में वन विभाग सुकमा जिले के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज आत्मनिर्भरता का एक वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है।

सुकमा नगर से महज 1 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल, जो कभी उपेक्षित और जर्जर था, अब प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक बदलाव का संगम बन चुका है। वन विभाग ने जर्जर हो गयी संरचनाओं को पुनर्जीवित कर यहाँ एक आकर्षक टापू और पर्यटन केंद्र विकसित किया है, जो न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के पर्यटकों को भी अपनी ओर खींच रहा है।


इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का 'तुंगल नेचर कैफे' है, जिसे 'आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह' की 10 जांबाज महिलाएँ संचालित कर रही हैं। वन मंत्री  केदार कश्यप की सोच के अनुरूप, समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के इस अभियान में उन 5 महिलाओं को शामिल किया गया है जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़ आत्मसमर्पण किया है, साथ ही 5 ऐसी महिलाएँ भी हैं जो स्वयं नक्सल हिंसा की पीड़ित रही हैं। इन महिलाओं को जगदलपुर और सुकमा के प्रतिष्ठित संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण दिलाकर पेशेवर रूप से काम करने के लिए तैयार किया गया है। 

आज कुहराम रामे, मुचाकी सोमे, मडकम पोंजे, माड़वी बुदरी और कलमु पायके जैसे नाम, जो कभी संघर्षों के बीच थे, अब मुस्कान के साथ पर्यटकों की मेजबानी कर रहे हैं। उनके साथ मडकम रामे, पोडियम सरोज, अनीता मुचाकी, ललिता यादव और पुनेम भरत कंधे से कंधा मिलाकर स्वावलंबन की राह पर चल रहे हैं।

इस ​पर्यटन केंद्र की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर 2025 को इसके शुभारंभ के बाद से मात्र तीन महीनों में यानी 30 मार्च 2026 तक यहाँ 8,889 पर्यटक पहुँच चुके हैं। इस छोटी सी अवधि में केंद्र ने लगभग ₹2.92 लाख की आय अर्जित की है। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल कैफे के स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं, बल्कि तुंगल डैम में कयाक, पैडल बोट और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी लुत्फ उठा रहे हैं।

माननीय वन मंत्री  केदार कश्यप व ​प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)  अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशन में बने इस परियोजना ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही अवसर और विश्वास प्रदान किया जाए, तो बंदूक की जगह सम्मानजनक रोजगार लेकर जीवन को पूरी तरह बदला जा सकता है। तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज केवल सैर-सपाटे की जगह नहीं, बल्कि उन महिलाओं के साहस और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है, जो बस्तर की बदलती और सुनहरी तस्वीर पेश कर रहा है। यह केंद्र संदेश दे रहा है कि प्रकृति संरक्षण और मानव विकास को एक साथ जोड़कर समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

आरंग परिवृत् के ग्राम भलेरा में क्षतिपूर्ति वनी करण के साथ पर्यावरण का संतुलन

 आरंग परिवृत् के ग्राम भलेरा में क्षतिपूर्ति वनी करण  के साथ पर्यावरण का संतुलन 

अलताफ़ हुसैन 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)संपूर्ण मानव जगत में वनों के प्रति जन चेतन सामाजिक समरसता, एवं परस्पर उत्तरदायित्व  स्थापित कर  आमजन को एक स्वस्थ्य पूर्ण जीवन शैली एवं निरोग वातावरण  निर्मित करने का सरल आसान व्यवस्था  ऐसे बंजर चटियाल रिक्त पड़त ओरेंज  भूमि क्षेत्र में सिर्फ और सिर्फ वन रूपी पेड़ पौधों का अधिक से अधिक सफल रोपण कर संपूर्ण वैश्विक स्तर पर  परिवर्तित हो रहे स्वस्थ, ऋतु जलवायु को नियंत्रित किया जा सकता है यदि इस संदर्भ में समय रहते आम लोगों में जन जागरुकता नही लाई गई तो वह दिन दूर नही जब प्रत्येक क्षेत्र में दम घोटु प्रदूषण के प्रभाव में अनेक  ला इलाज गंभीर बीमारी से प्रत्येक व्यक्ति ग्रसित हो सकता है जिसकी प्रारंभिक पहल विगत कुछ वर्ष पूर्व हमनें करोना महामारी के रूप में देख चुके  है इस भावी गंभीर समस्याओं, प्रदूषण,परिवर्तित जलवायु  को लेकर  हमने रायपुर वन मंडल के वरिष्ठ आई एफ एस  अधिकारी श्री लोकनाथ पटेल से चर्चा की तब उन्होंने बताया कि प्रदूषण, परिवर्तित जलवायु रायपुर ही नही बल्कि संपूर्ण देश, प्रदेश, स्थानीय स्तर में लगातार बढ़ रहा है जिसका मूल वजह उद्योगिक कल कारखाने, मानव द्वारा निर्मित  अत्याधुनिक नवीन भौतिक   संसाधनों का निरंतर उपयोग उनसे निकलने वाली दम घोटु धुएं प्रदूषण लगातार प्रत्येक क्षेत्र में सूक्ष्म कणों के रूप मे श्वास नली के मध्यम से धमनियों को प्रहार कर जन जीवन को क्षति ग्रस्त कर रही है इसका एक मात्र  उपाय संरक्षित वनों के पेड़ पौधे उनकी हरियाली को अधिक से अधिक रोपण कर सहेजा जा सके  ताकि वे अदृश्य वायु मे तैर रही घातक लौह कणों नदी पहाडों के भूगर्भ जल की सूक्ष्म मिश्रित हानिकारक तत्व अवयव की अविरल जलधारा को स्वच्छ  एवं स्वस्थ्य ऑक्सिजन निर्माण  कर विसर्जित कर मानव, जीव जंतु का जीवन तभी सुरक्षित किया जा सकता है


  रायपुर वन मंडलाधिकारी  लोकनाथ पटेल  से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग यथा नाम तथा गुण को चरितार्थ करते हुए मूल  उद्देश्य एवं अपने नाम के अनुरूप कार्य संपादित कर रहा है इसके लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अनेक योजनाएं जिसमें वन क्षेत्रों में नदी, नाले, पोखर, से वर्षा ऋतु के ढलानी बहाव  जल को  संचय कर संरक्षित करनें का कार्य कर रहा है जिसके सार्थक परिणाम यह आने लगे कि अब वन क्षेत्रों के पेड पौधे सहित आस्पास  ग्रामीण के निचले क्षेत्रों की फसलों को सहज सरल जल वायु का लाभ  मिल रहा है उन्होंने आगे बताया कि यही नही जलवायु परिवर्तन, के चक्र को नियंत्रित कर उसके निराकरण  के लिए हमारे देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने जन जागरुकता लाने के बहुउद्देशीय योजना"एक पेड़ माँ के नाम"से पूरे भारत देश में शुरुआत की  ताकि मातृत्व स्वरूप  वनों एवं उनके पेड़ पौधे, के प्रति लोगों में ममत्व के भाव के साथ जागरूकता बढे तथा अधिक से अधिक आम जन इस अभियान में सहभागिता सुनिश्चित करें    रायपुर वन मंडलाधिकारी लोक नाथ पटेल आगे बताते है कि वनों के विस्तार उसके संरक्षण, संवर्धन के महात्वाकांक्षि उद्देश्य  का  युद्ध स्तर पर  सी सी एफ अधिकारी एस मणिवासगन  रायपुर के विशेष आदेश का अक्षरशः पालन करते हुए अनेक वन क्षेत्र सहित ब्लॉक स्तर पर कार्य जारी है जिसमें रायपुर वन मंडल अंतर्गत आरंग परिवृत के ग्राम पंचायत भलेरा के 18 हेक्टेयर आरक्षित ऑरेन्ज भूमि में लगभग 18 हजार मिश्रित पौधों का सफल रोपण कार्य वित्तीय वर्ष 2025-2026 जुलाई में संपादित किया गया जो दस माह के अल्प आवधि काल में 99 प्रतिशत सफल रूप से सर्वाइव  करते हुए लगभग आठ से दस फीट की ऊँचाई में ग्रोथ कर रहा है उन्होंने इसका संपूर्ण श्रेय मातहत अधिकारियों एवं मैदानी अमलों के कर्मचारियों को दी है 


  इसी तरतमय में रायपुर वन वृत के उप वन मंडलाधिकारी आनंद कुदरया से चर्चा मे उन्होंने  बताया कि आरंग परिवृत् के ग्राम पंचायत भलेरा का ऑरेन्ज भूमि में शत प्रतिशत रिजल्ट आना अपने आप मे बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि विभागीय कर्तव्य निष्ठा अधिकारी,कर्मचारियों ने पूरी निष्ठा ईमानदारी, लगन से आठ माह में लगातार सुरक्षा देख रेखा और सिंचाई के लिए जुटे रहते है  उन्होंने बताया कि भीषण अप्रेल  माह में हरियाली के साथ पौधे सर्वाइव करने के पीछे सतत अधिकारियों की मॉनिटरिंग तथा नियमित उपचार एवं निंदाई गुडाइ प्रमुख है रायपुर उप वन मंडलाधिकारी आनंद कुदरया आगे बताते है कि संपूर्ण कार्य कैंपा मद वनीकरण से क्षतिपूर्ति वृक्षरोपण कार्य  किया गया है जिसमें वन क्षति पूर्ति वनीकरण   के तहत रायपुर वन मंडल अंतर्गत वन क्षेत्रों में किये जाने वाले निर्माण, नाले, सड़क, में हुए  क्षति ग्रस्त  उन पेड़ पौधों के एवज में एक पेड़ की जगह दस पौधे का सफल रोपण किया गया  है जो किये आज दिनांक तक लगभग अट्ठारह हजार पौधे पूरी तरह से स्वस्थ तरीके से ग्रोथ कर रहे है 


 किसी भी रोपण क्षेत्र की सफलता का मुख्य भूमिका (रीढ़ ) परिक्षेत्राधिकारी का होता है जिसके मजबूत कंधों में भूमि व्यवस्था से लेकर रोपण सुरक्षा उपचार केज्युवल्टी, तथा सतत मॉनिटरिंग से युवा अवस्था पहुंचने तक अनिवार्य रहता है वैसे भी कथित भलेरा रोपण क्षेत्र दस वर्षों के लिए रायपुर वन मंडल अंतर्गत अनुबंधित करार किया हुआ है इस महती दायित्व का बखूबी निर्वहन  रायपुर वन मंडल के युवा, ऊर्जा वान परिक्षेत्राधिकारी चंद्र प्रकाश महोबिया कर रहे है पर्यावरण एवं प्रकृति प्रेमी होने की वजह से सप्ताह में दो से तीन बार प्लांटेशन,रोपण क्षेत्र फील्ड का मॉनिटरिंग कर दिशा निर्देश देकर समस्त व्यवस्था मुहैय्या कराते है ताकि रोपण पूरी तरह से सर्वाइव कर सके इस संदर्भ में रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र प्रकाश महोबिया बताते है कि सुरक्षात्मक दृष्टि कोण से भलेरा ग्राम के 18 हेक्टेयर भूभाग प्लांटेशन् को चारो ओर से  मजबूत, चैनलिंक, जालीदार फैसिंग कर घेरा बंदी  किया गया है ताकि मवेशी चराई एवं असमाजिक,शरारती तत्वों से प्लांटेशन को सुरक्षित रखा जा सके क्योंकि प्लांटेशन वन विभाग के जेरे निगरानी में दस वर्ष अवधि के लिए अनुबंधित है उन्होंने बताया इसके लिए दो चौकीदार रखे गए है जो अलग शिफ्टों मे रात दिन की ड्यूटी लगाई जाती है इनके अलावा प्रति दिन कार्यों की समीक्षा  जैसे निंदाई गुडाइ, बारह घंटे सिंचाई के अनुसार छ से अधिक सुरक्षा श्रमिक प्रति दिन  कार्यरत रहते है रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र प्रकाश महोबिया आगे बताते है कि भलेरा ग्राम के श्रमिकों को  रोजगार उपलब्ध हो रहा है स्थानीय श्रमिकों की उपस्थित से शरारती तत्व भी प्लांटेशन क्षेत्र में किसी प्रकार की असमाजिक गतिविधियां, नशा शराब, जुआँ, पौधों की कटाई इत्यादि से  सुरक्षित हो चुका है रायपुर रेंजर चंद्र प्रकाश महोबिया आगे बताते है कि संपूर्ण कार्य कैंपा मद से सी एस आर के तहत क्षति पूर्ति वृक्षारोपण किया जा रहा है उन्होंने बताया कि वन भूमि या राजस्व भूमि में औद्योगिक घरानों द्वारा केबल या पोल खंबे, सड़क मार्ग निर्माण के दौरान पेड़,वन की क्षति होने पर आसपास क्षेत्र के रिक्त पड़त बन्जर भूमि के स्थान को कलेक्टर एवं आर आई के मध्यम से लिखा पढ़ी कर अधिग्रहित कर उक्त स्थान में क्षतिपूर्ति प्लांटेशन वृक्षारोपण कार्य संपादित किया जाता है इसका संपूर्ण व्यय औध्योगिक घराने से शासन के मध्यम से प्राप्त होता है 


  आरंग परिवृत के मुख्य सहायक प्रभारी संतोष सामंत राय है जो प्राकृतिक एवं पर्यावरण प्रेमी है उनके खून में ही वन के प्रति अगाध निष्ठा, प्रेम बसा हुआ है इसका मूल कारण उनके पिता स्वय वन विभाग में कार्य करते हुए अपनी सेवाएं देकर समर्पित रहे है जो पेड़ पौधे, वनों के प्रति समानता,  व्यवहार, उनके भी रग रग में रचा बसा हुआ है आरंग परिक्षेत्र सहायक के नेतृत्व में संतोष सामंत राय  बताते है कि क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण  कार्य बहुत बड़ी चुनौती है जिसे हमारी आरंग टीम ने जिसमें मुख्यतः  भलेरा प्लांटेशन प्रभारी अभिजित भट्टाचार्य, सावन कुमार साहू, दौलत राम साहू, दिलीप परमार,पंकज वर्मा, जैसे जांबाज सिपाही इनके साथ सुरक्षा श्रमिक ,मनहरण ,झम्मन का सहयोग बराबर मिल रहा है वे सब चुनौती स्वीकार करते हुए संपूर्ण व्यवस्था में पुरा सहयोग करते हुए पूरे विश्वास के साथ कार्यों का सफल संपादन कर रहे है वे बताते है एक वर्ष पूर्ण होने के पूर्व प्लांटेशन  की स्थिति प्रशंसनीय है
इसकी मूल वजह बताते हुए आरंग परिवृत के सहायक प्रभारी संतोष सामंत राय बताते है कि वृक्षारोपण क्षेत्र में सर्वाधिक सिंचाई,जल और सुरक्षा की आवश्यकता होती है जिसकी हमने प्रमुखता से व्यवस्था किया   पश्चात छ सौ फीट की गहराई  मे बोर उत्खनन करवाया गया जिसमें प्रचुर मात्रा में जल का श्रोत फुट पड़ा ऐसा भान होता है जैसे राजा भागीरथी की कठोर तपस्या  के मानिंद हमें भी स्वर्ग से मां गंगा की जल धारा  यहाँ  फुट पड़ी हो जो आज भी प्लांटेशन क्षेत्र की क्षुधा,प्यास को तृप्त कर रही है यही नही रोपण क्षेत्र के मध्य में वहाँ एक तीस बाई तीस  फीट का गहरा  वाटर टैंक निर्माण किया गया जिसमे दस से बारह फीट जल आज की तिथि में संचय किया हुआ उपलब्ध है आरंग परिवृत के सहायक प्रभारी संतोष सामंत राय आगे बताते है कि संपूर्ण क्षेत्र के सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम निर्माण किया गया है जिसमे कर्मचारी लगातार बारह घंटे सिंचाई कर रोपण क्षेत्र में नमी बनाए हुए है 



उन्होंने बताया कि इसमें करंज, ग्राफ्टेड जामुन, आँवला,आम, मौल श्री, अर्जुन,मोहोगनी पेल्टाफार्म, बरगद, पीपल, केसिया, समिया, बेहड़ा, दुबिया, कचनार्, मिलिया मोहगनी,  जैसे फलदार, फुलदार, औषधि युक्त मिश्रित प्रजाति के पौधे रोपे गए है आरंग प्रभारी एस सामंत राय आगे बताते है  कि ग्राम भलेरा सरपंच और ग्रामीणों का पूर्ण सहयोग मिल रहा है साथ ही ग्राम क्षेत्र में कोटवार के मध्यम से मुनादि भी कराई जाती है ताकि ग्रामीणों में जन जागरूकता लाने प्लांटेशन क्षेत्र के आसपास  ज्वलनशील पदर्थ, बीड़ी सिगरेट न फेक सकें  उन्होंने आगे बताया कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से कोई कोताही बरती नही जा रही है चैन लिंक फैनसिंग के अलावा मुनारा निर्माण कराया गया ताकि गाय गरुआ मवेशी चराई को प्रतिबंधित किया गया है किसी आमजन के द्वारा रोपण के आसपास अतिक्रमण करने का कुत्सित प्रयास भी नही किया जा सकता है


अग्नि सुरक्षा को लेकर बहुत ज्यादा संवेदनशील है सूखे घास फुस, खरपतवार की सफाई की गई उन्होंने बताया समय समय पर जैविक खाद, एन. पी. के. प्रोटीन डाल कर केमिकल छिड़काव् से मृदा को उर्वरा युक्त बनाया जाता है ताकि कीट सूक्ष्म जीवाणु का नाश हो तथा स्वस्थ्य पौधों का ग्रोथ हो सके यही बजह है कि रोपण क्षेत्र मे 99 प्रतिशत पौधे स्वस्थ्य होकर सर्वाइव कर रहे है एक प्रतिशत इसलिए कमी क्योंकि फूल और पत्तियाँ निकलने पर वानरों की टोली पौधों को क्षति ग्रस्त कर हानि पहुंचाते है जिन्हे गुलेल से भगाया जाता है रायपुर वन मंडल के आरंग परिवृत के समस्त वन कर्मी पूरी शिद्दत से क्षेत्र में अवलोकन  कर निगरानी कर रहे है संभवतः वर्षा ऋतु की प्रथम फुहार से संपूर्ण रोपण क्षेत्र की  हरियाली, उसके निरंतर ग्रोथ, और वन कर्मियों की मॉनिटरिंग, उपचार,रख रखाव, सुरक्षा से जिस तन्मयता से वन कर्मी इमानदारी पूर्वक कार्यों को संपादित कर रहे उसे देख कर यह ज्ञात होता है कि एक वर्ष पूर्ण होने के पूर्व इसकी एक अलग वन क्षेत्र सदृश्य दशा निर्मित होगी और अन्य क्षेत्र के वन कर्मचारियों के रोपण क्षेत्र के मामले में उनके लिए साक्षात उदाहरण बन कर नई दिशा तय करेगी. 

गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

नगर निगम रायपुर में जन्म मृत्यु का खेल

 नगर निगम रायपुर में जन्म मृत्यु  का खेल 


रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) नगर निगम रायपुर में जन्म और मृत्यु  प्रमाण पत्र लेने का अजब खेल हो रहा है जहाँ देरी होने पर जन्म लेने वाले से लेकर मृत्यु होने तक वाले व्यक्ति के परिवार से बगैर लेन देन किये जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नही किया जाता जिसकी वजह से पीड़ित परिवार के लोगों के समक्ष बहुत बढ़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है इस संदर्भ में व्हाट हाउस में बकायदा एक सिंडिकेट चल रहा है जहाँ निगम कर्मी से लेकर बगैर चढ़ावा के कोई भी समस्या का निदान हो पाना मुश्किल है बहुत से जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने आए पीड़ित  परिवार से जब बात किया गया तो उन्होंने बताया कि सभी डाक्युमेंट पूर्ण होने के  बाद भी निगम कर्मचारी कोई न कोई कमी, नुक्स निकाल कर एक दिन के कार्य को कई दिनों तक घुमाया जाता है वही कुछ दलाल नुमा लोग नगर निगम व्हाइट हाउस में जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र ऑफिस के समनें  अस्थायी रूप से पृथक काउंटर बना कर दुकान दारी चला रहे है जहाँ काला कोट पहने  वकील भी मंडराते रहते है जहाँ दिन भर में पांच से दस हजार रुपये प्रति दिन इंकम हो रही है पीड़ित कुछ व्यक्तियों ने यह भी बताया कि उनके द्वारा जमा करने पर निगम कर्मचारी बगैर देखे पढ़े आवेदन जमा कर लेते है यह भी बताया गया प्रति आवेदन पांच सौ रुपये नगर निगम कर्मी लेते है जिसमें पचीस से पचास आवेदन प्रति दिन जमा होते है 



जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के इस गोरख धंधे वाले खेल से अब आम जनता में भारी आक्रोश बदता जा रहा है उनका कहना है कि नगर निगम रायपुर में आम जनता की सुविधा के लिए बनाया गया है न की लोगों की जेब खाली करने और नाना प्रकार से नियम कानून दिखा कर भय और प्रताड़ित करने के लिए नही आम लोगों में यह भी चर्चा है कि सभी विभाग में बहुत से वसुलीबाज कर्मचारी मौजूद है जो प्रति दिन राशि एकत्रित कर उपर बैठे अधिकारियों की जेब गर्म करते है  

रविवार, 5 अप्रैल 2026

पत्रकार महासंघ ने शशंक खरे, रमीज अशरफी, अलताफ़ हुसैन,ललित यादव सहित पत्रकारों का सम्मान किया

 पत्रकार महासंघ ने शशंक खरे, रमीज अशरफी, अलताफ़ हुसैन,ललित यादव सहित पत्रकारों का सम्मान किया


रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) राजधानी रायपुर में  पत्रकार महासंघ छत्तीसगढ़ शाखा द्वारा अपने पांचवे स्थापना दिवस के अवसर पर पत्रकार सम्मान समारोह का  एक दिवसीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन समता कालोनी स्थित मैट कॉलेज के सभागार में रविवार को किया गया जिसमे प्रदेश भर से बड़ी संख्या में पत्रकार साथी एवं उनके परिवार जन हर्षोल्लास के साथ शामिल हुए 


   रविवार को समता कालोनी मैट कॉलेज  सभागार में आयोजित पत्रकार महासंघ के स्थापना दिवस एवं पत्रकार, परिवार सम्मान समारोह  में जगदलपुर बस्तर, गरियाबंद, धमतरी सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पत्रकार बंधु शामिल हुए  ग्यारह बजे से प्रारंभ हुए कार्यक्रम में अनेक वक्ताओं ने अपने विचार उपस्थित श्रोताओं के समक्ष साझा किये जिनमे प्रमुख रूप से श्री सच्चिदानंद उपासने ने पत्रकारिता में आने वाली अनेक परिस्थिकिय बाधाओं  का उल्लेख किया वही पत्रकार महासंघ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष सुनिल यादव ने प्रारंभिक पत्रकारिता की शुरुआत पर अनेक बाधाओं एवं विषम परिस्थितियों से अवगत कराते हुए एक परिवार की भाँति पत्रकार महासंघ के आगे बढ़ने की बात कही सामाजिक स्तर पर राजनांद गाँव में ग्रामीण क्षेत्र में गाय छेरी चराई से लेकर लधु उद्योग के मध्यम से महिलाओं को आत्म निर्भरता तक संपूर्ण भारत मे महिला सशक्ति करण  योजनाएं आज लागू की गई है वह सब उनकी ही देन है अपनी विशिष्ठ पहचान बनाने वाली पद्मश्री श्रीमती फूलवासन बाई यादव ने अपने  ओजस्वी विचार से महिलाओं को सम्मान पूर्वक आत्म निर्भर बनाने के लिए प्रेरित किया छ्ग प्रदेश के मुख्य मंत्री के निज सचिव डॉ तुलसी कौशिक ने पत्रकारिता पर अपने विचार व्यक्त किया साथ ही जन सेवा भाव के तहत उन्होंने किसी भी व्याधि ग्रस्त व्यक्ति उनसे संपर्क कर उपचार कराने की बात कही उन्होंने बताया कि मुख्यमन्त्री श्री विष्णु देव साय जी ने सख्त आदेश दिया है कि सभी वर्ग धर्म जाति के व्यक्ति इस परिस्थितियों मे राज्य सरकार उनके साथ खड़ा है  हाई कोर्ट के जज श्री रामटेके ने भी अपने विचार व्यक्त किए इस अवसर पर सामाजिक सरोकार से संलग्न विभूतियों,  विधाओं को पुष्प गुच्छ शॉल स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया इसके पश्चात पत्रकार महासंघ छत्तीसगढ़ के नव नियुक्त पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम संपन्न किया गया जिसमे सभी जिले से आए पत्रकार साथियों ने समवेत स्वर में निष्ठा पूर्वक शपथ ग्रहण का पाठ किया


  पत्रकारिता क्षेत्र में ऐसे पत्रकारों को जिन्होंने लंबे समय से अपना जीवन का अविस्मरणीय योगदान दिया उन्हे भी मुख्य अतिथि श्री सच्चिदानंद उपासने,पद्मश्री फूलवासन बाई यादव, श्री रामटेके एवं पत्रकार महा संघ के अध्यक्ष सुनिल यादव एवं उपस्थित अतिथियों के करकमलो द्वारा  पत्रकारों को   स्मृति चिन्ह, एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया गया जिनमे मुख्यतः शशांक खरे जिनकी लेखनी में गजब का धार है  वे विगत पच्चीस से उपर भिन्न भिन्न समाचार पत्र पत्रिकाओं में पत्रकारिता करते हुए वर्तमान में दिव्य छत्तीसगढ़ पत्रिका का सफल संपादन कर रहे है वही रमीज अशरफी देश बंधु अमृत संदेश में लंबा अनुभव लेने के पश्चात पंद्रह वर्षों से अधिक सियासत टाइम्स का प्रकाशन एवं संपादन कर रहे है जिन्होंने लगभग पचीस वर्षों से पत्रकारिता के मध्यम से सामाजिक स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित की वही अल्ताफ हुसैन जो लगभग वर्ष 1997 से नव भारत सहित अन्य समाचार पत्र पत्रिकाओं मे कार्य अनुभव प्राप्त कर अनेक वर्षों से पत्रकारिता करते हुए मिशन पॉलिटिक्स मैग्ज़िन में फॉरेस्ट विषय सहित सम-सामयिक विषय पर अनवरत  लेखन  कर रहे है उन्हे भी स्मृति चिन्ह प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया पत्रकार ललित कुमार यादव विगत पचीस वर्षों से छ्ग पंचयिका  पत्रिका के मध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं को समाहित कर एक उपलब्धि स्थापित की है इनके अलावा अन्य पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया जिनमे निहारिका श्रीवास्तव, निशा भारती, सुधा बाघ, स्नेह लता पटेल, मोहित मारकर, मिथलेश वर्मा,प्रदीप साहू, राज्जाक खान, सहित बहुत से पत्रकार बंधु शामिल हुए

सोमवार, 23 मार्च 2026

वन विकास निगम द्वारा पांच माह पूर्व कराए गए पथ रोपण पूरी तरह से बर्बाद

 वन विकास निगम द्वारा पांच माह पूर्व कराए गए पथ रोपण पूरी तरह से बर्बाद 



अलताफ़ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)छग प्रदेश का वन विभाग, एवं उसके अनुवांषिक धड़ा वन विकास निगम सहित बहुत से संबंधित विभाग प्रदेश भर के रिक्त पड़त भाटा भूमि,  क्षेत्र में हरियाली प्रचार प्रसार करनें के महत्वाकांक्षी उद्देश्य को योजनाओं के मध्यम से  रोपण प्लांटेशन कर  हरियाली की चटकमय कांति युक्त आभा बिखेरने दृढ़ संकल्पित रहते है परंतु वन कर्मियों की लापरवाही,सुरक्षा,व्यवस्था,देखरेख उपचार, निंदाई गुड़ाई, के अभाव में ऐसे  रोपण प्लांटेशन क्षेत्र कुछ दिनों में ही दम तोड़ते हुए   पुनः चटियल मैदान के रूप में परिलक्षित होने लगता है इसका साक्षात उदाहरण नवा रायपुर अटल नगर में पांच माह पूर्व संपादित कराए गए पथ रोपण कार्य  पूरी तरह से तबाह और बर्बाद नज़र आ रहा है 


        नवा रायपुर अटल नगर में वर्ष 2025 के अंत माह नवंबर में दीपावली राज्योत्सव के समय सेक्टर 27 व,29 , इंग्लिश स्कूल के मीडियन मार्ग मंत्रालय मोड के एकांगी मार्ग सहित  डिप्टी सी. एम. अरुण साव वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी  बंगला के आसपास क्षेत्र,  तुता धरना स्थल, राज्योत्सव सतनाम चौक, रेल्वे ट्रैक मे छ्ग राज्य वन विकास निगम के मध्यम से भिन्न भिन्न क्षेत्रों में वृहद स्तर पर मिश्रित प्रजाति के पौधों का पथ रोपण कार्य संपादित कराए गए थे परंतु पांच माह व्यतीत होते ही सुरक्षा व्यवस्था देखरेख उपचार, केज्युवल्टी के अभाव में साठ प्रतिशत रोपण क्षेत्र पूरी तरह से तबाह एवं बर्बाद नज़र आ रहे है केवल मंत्री, बंगले के आसपास एवं कुछ स्थान को अलग दृष्टिकोण से आंकलन किया जाए तो बाकी रोपण क्षेत्र के सुखी लकड़ी की टहनी,डंगाल, ही दिख रहे है बाकी सभी क्षेत्र शुष्क एवं समतल नज़र आ रहा है इस संदर्भ में वन विकास निगम नवा रायपुर अटल नगर क्षेत्र के रेंजर चंद्राणी बांदे, एवं निशांत ठाकुर से संपर्क करने का प्रयास किया गया परंतु दोनों ही रेंजर क्षेत्र में नज़र नही आए एवं न ही कोई वन विकास निगम के वन कर्मी कथित क्षेत्र में दिखाई दिया स्पष्ट करते चले कि लाखों,करोडो नही बल्कि अरबों रुपये का व्यवसाय करने वाला छग राज्य वन विकास निगम नवा रायपुर मुख्यालय मुख्य मार्ग से मात्र दो तीन किलोमीटर मे ही स्थित है परंतु अधिकांश वन विकास निगम कर्मी  प्लांटेशन कार्य क्षेत्र से सदैव नदारत रहते है यह स्थिति यही की नही बल्कि पूरे छग प्रदेश के वन विकास निगम फिल्ड की है न कभी डिविजन स्तर में उपर बैठे अधिकारी फील्ड की मॉनिटरिंग करते है और न ही भ्रष्ट आचरण पर वैधानिक कोई कार्यवाही करते है 


उनका मूल धर्म केवल "सबसे बड़ा रुपैय्या" रह गया है समुचित कार्यवाही न होने की वजह से मैदानी अमले के अधिकारी कर्मचारी मनमाने रूप से भ्रष्टाचार, फर्जीवाडा, गबन, घोटाले,अनीयमिताओं,को मुक्त रूप पर अंजाम देने में नही हिचकिचाते है फिर मैदानी अमला भी उपर बैठे अधिकारियों से क्यों डरें या हिचकिचाएं ? जब उन्हे प्रसेंटेज कट मिला जाता हो फिर तो मैदानी अमले की स्थिति"सैंय्या भई कोतवाल तो अब डर काहे का" वाली बन जाती है तब उपर बैठे सब अधिकारी दूध मलाई चट कर बिल्ली की भाँति आँख बंद कर बैठ जाते है उन्हे लगता है जैसे उन्हे कोई नही देख रहा परंतु दुनिया खुली आँखों से उन्हे देख कर सब समझती है उसका मुख्य कारण यह भी माना जा रहा है कि डिविजन कार्यालय को छोड़ कर फील्ड में कहीं भी कार्यालय का स्थायी ठौर ठिकाना न के बराबर है  समस्त वन विकास निगम कर्मी अपने आवास से ही लिखा पढ़ी कार्य संपादित कर डिविजन कार्यालय में बिल बाउचार् जमा करने आते है जहाँ रोपण फील्ड अथवा प्लांटेशन के संदर्भ मे जानकारी मालूम करने पर यत्र तत्र भटकना पड़ता है नवा रायपुर अटल नगर की जनकारी लेने पर  दोनों रेंज अधिकारी सहित डी एम. एवं डी.डी.एम. भी उपस्थित नही मिले तथा उनसे भी इस कार्य के संदर्भ में विस्तृत चर्चा एवं जानकारी प्राप्त नही हो सकी 

सूत्रों से जब नवा रायपुर अटल नगर के कथित पथ रोपण कार्य के संदर्भ में जानकारी एकत्र की गई तो ज्ञात हुआ है कि  संपूर्ण रोपण कार्य का बजट लाखों मे नही बल्कि करोड़ों का है फिर भी पौधों की ऊँचाई दो से चार फीट के ही लगाए गए है वह भी किस नर्सरी से पौधे क्रय किये गए जिस पर भी कमीशन खोरी एवं भ्रष्टाचार की बू आ रही है क्योंकि किसी भी प्लांटेशन की रोपे गए पौधों की ऊँचाई लगभग चार से छ फीट होना अनिवार्यतः होता है परंतु नवा रायपुर मे न्युन्तम दो फीट से अधिक चार फीट के पौधे क्रय किये गए इससे स्पष्ट होता है कि जिस नर्सरी से क्रय किये गए पौधों चाहे वविनि  के उत्पादित नर्सरी से क्यों न क्रय किए गए हो उसका बिल देखकर ही सत्यता ज्ञात होगा क्योंकि जिस प्रकार पौधे रोपे गए है उसे देख कर कमीशन खोरी एवं भ्रष्टाचार होने की बू अलग नज़र आ रही है यदि ईमानदारी से चार में छ आठ फीट ऊँचाई वाले पौधे क्रय किए जाते तो उसका पांच माह में ग्रोथ कुछ और ही नजर आता यदि मान भी लिया जाए कि छोटे बड़े ऊँचाई वाले पौधे  कमीशन खोरी कर क्रय किये भी गए तो उनकी सुरक्षा देख रेखा निंदाई गुड़ाई नियमित सिचाई, पर ध्यान दिया जाता तो भी रोपण क्षेत्र हरियाली युक्त नज़र आती क्योंकि वन विकास निगम के ऐसे भ्रष्ट रेंजर जिनका मूल उद्देश्य अपनी जेब गर्म करना भर रह गया है यही वजह है कि रोपण पश्चात क्षेत्र में होने वाली विभागीय प्रक्रिया जिसमे सिंचाई से लेकर सुरक्षा, निंदाई गुड़ाई, गाला थाला,दवा छिड़काव्,उपचार केज्युवल्टी, तक जैसे महत्वपूर्ण कार्य संपादित किये जाते है परंतु  इस ओर व वि नि के रेंजर सहित सह कर्मी कोई तवज्जो नही देते नजर आए है परिणामतः  देखरेख सुरक्षा, उपचार के अभाव में कुछ माह मे ही रोपण क्षेत्र मरणास्न्न स्थिति में पहुँच चुका है जबकि व वि. नि. एवं अनुबंध एजेन्सी के अनुसार वविनि को तीन से चार किस्त पार्ट मे राशि जारी करती है जिसमे  प्रथम राशि लगभग आधी जो लाखों से लेकर करोड़ों रुपये भी हो सकते है उसके पश्चात तीस प्रतिशत एवं अंत मे दस प्रतिशत राशि मैंटनेंस हेतु जारी की जाती है परंतु प्रारंभिक् राशि मे ही बंदरबाट का खेल हो जाता है  जिससे रोपण क्षेत्र की स्थिति बढ़ी दयनीय हो जाती है केवल वी आई पी क्षेत्र पर कार्य किया गया है जैसे मंत्री बंगला के आसपास क्षेत्र को छोड़ दिया जाए तो नवा रायपुर अटल नगर के पथ रोपण कार्यों के निष्पादन मे फर्जी बिल बाउचर से लाखों का खेल हो चुका होगा यदि दस श्रामिक से कार्य संपादित किया गया होगा तो उसे पचास श्रमिक दर्शा कर एक ट्रैक्टर की जगह दस ट्रैकटर ट्राली सिंचाई,अंकित कर बिल बाउचर के मध्यम से लाखों रुपये स्वाहा हो चुका होगा  व वि नि कर्मियों के भ्रष्ट अर्थ लाभ वाले आचरण ने कथित पथ रोपण क्षेत्र पूरी तरह से फेल और बर्बाद हो चूका है इसकी विस्तृत जानकारी लेने वन विकास निगम मुख्यालय से लेकर संबन्धित विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर अटल नगर नवा रायपुर स्थित पथ रोपण कार्य का बजट से लेकर किस मद एवं  पौधे  क्रय किए गए है जिसकी संपूर्ण जानकारी ली जाएगी तथा अगले अंक में विस्तृत रिपोर्ट का प्रकाशन किया जाएगा

गुरुवार, 12 मार्च 2026

वन क्षेत्र आरंग का सागौन प्लांटेशन ऑक्सिजन देकर बन रहा जीवन दायिनी -

 वन क्षेत्र आरंग का सागौन प्लांटेशन ऑक्सिजन देकर बन रहा जीवन दायिनी -


पर्यटन स्थल के रूप मे यह क्षेत्र विकसित हो सकता है  


अलताफ़ हुसैन 

रायपुर(छत्तीसगढ़ वनोदय) प्रकृति ने विशाल धरती पर पेड़ पौधे की भगौलिक संरचना कर उसके मनभावन हरीतिमा चादर ओढ़ा कर वनों का जो अविश्वसनीय, अतुलनीय हरित श्रृंगार किया है उसके दिव्य आभा युक्त व्यवस्था देख कर कोई भी प्रकृति एवं पर्यावरण प्रेमी मंत्र मुग्ध होकर उसकी  मुक्त कंठ से प्रशंसा किए बगैर नही रह सकता  ईश्वरीय संरचना की बेमिसाल कृति का बेहतरीन नमुना जो संपूर्ण मानव जगत, जीव जंतु, जलचर नभचर,सरीसृप, कीट,मकोड़े, इत्यादि  को  हरियाली से श्रृंगारित कर वन के रूप में संपूर्ण जगत के गोशे गोशे में पृथवी को वरदान प्रदत्त किया है जिसकी वजह से सम्पूर्ण जीवन चक्र के बनते बिगड़ते भगौलिक जलवायु संरचना को संतुलित कर रखा हुआ है परंतु मानव समाज निज स्वार्थ सिद्धि लाभ उठाने के लिए हरियाली का लगातार विदोहन,कर  धरती एवं उस पर आत्मनिर्भरता पूर्ण आश्रित जीवन शैली को अस्त व्यस्त करते हुए जिनमे अब चाहे वह मानव जीवन हो जीव जंतु, हो या सूक्षम कीट पतंगे क्यों न हो सब पर परिवर्तित प्रकृतिक वातावरण, जलवायु स्वास्थ्य गत कारणों पर विपरीत प्रभाव डाल चुका है  परिणामतः गलोबल वार्मिंग के लगातार बढ़ते प्रभाव से वनों एवं हरियाली की सूर्य के समान चमकदार आभा  लगातार छिन्न भिन्न होकर विलुप्त होती जा रही है वनों एवं प्राकृतिक पेड़ पौधों  हरियाली के दोहन बढ़ते कल कारखानों की निकलने वाले दम घोटु  प्रदूषण से अनेक व्याधियों ने अपना घर बना चुके जो घटते वन लुप्त होती हरियाली इसके मुख्य कारक माने जाते है परंतु मानव इस भावी विपतियों से बे खबर इस ओर सारगर्भित स्वस्थ्य उपाय करने के बजाए अपने आर्थिक आय स्त्रोत बढ़ाने, की कामना सहित अपने मौलिक संसाधन ऐश ओ इशरत जैसी व्यवस्था पर अधिक बल दे रहा है जिससे वायु जल मंडल में दूषित प्रभाव मे वृद्धि हो रही है तथा अनेको नाना प्रकार के गंभीर रोग, बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है जिसका  विगत वर्षों में  उदाहरण कोरोना जैसे जानलेवा महामारी से साक्षात्कार संपूर्ण विश्व ने भोगा है  परंतु इन सब के बावजुद् वन रूपी हरियाली लहलहाते पेड़ पौधों के अस्तित्व को बचाने एवं अक्षुणय बनाए रखने संपूर्ण जगत के जीव जंतु का जीवन दायिनी कहलाने वाले पेड़ पौधों को अमरत्व प्रदान करने के बहुउद्देशीय पुनीत कार्य छत्तीसगढ़ प्रदेश का वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के दूर दर्शी सोच रखने वाले अधिकारी, वन कर्मचारी एवं मैदानी अमलो  के जांबाज सिपाही प्रमुखता से रात दिन जुटे रहते है नित नवीन योजनाओं के मध्यम से पड़त भाटा, बंजर भूमि में प्लांटेशन के मध्यम से हरियाली की चादर फैला कर ओरेंज भूमि का काया कल्प करते रहते  है ताकि प्रकृति के असंतुलिन ऋतु परिवर्तन को संतुलित कर शुद्ध, स्वस्थ्य, जलवायु  वातावरण निर्मित किया जा सके तथा मानव जीवन सहित जीव जंतुओं को खुली हवा मे विचरण कर  स्वास्थ जीवन के साथ वनों के हरियाली क्षेत्रों में  अठखेलिया करते वन्य प्राणी दृष्टि गोचन होता रहे रिक्त पड़त भूमि में भिन्न भिन्न प्रजाति के प्लांटेशन लगा कर प्रदेश का वन विभाग न ही हरियाली की सौगात दे रहा है बल्कि परिवर्तन हो रहे जलवायु से बढ़ रही वैश्विक गंभीर जानलेवा बीमारीयो, एवं प्रदूषण को संतुलिन कर प्राकृतिक, एवं पर्यावरण प्रेमियों के लिए जीवनदायीनी साबित हो रहा है


रायपुर वन मंडल अंतर्गत आरंग परिवृत  से करीब चालीस किलोमीटर दूर ग्राम मोहमेला से मात्र तीन से पांच किलोमीटर की दूरी स्थित चिखली ग्राम के कक्ष क्रमांक 81 में वन विभाग के कर्मठ मैदानी अमले ने वित्तीय वर्ष 1999- 2000 में अर्थात 25 वर्षों पूर्व से अधिक हजारों की संख्या मे सागौन प्लांटेशन किया था जिसमे शत प्रतिशत  सागौन आज की तिथि में फल फूल रहे है बल्कि वन विभाग के राजस्व के रूप में जहां लाखों, करोड़ों की राशि का हरा सोना बन चुके है वही इसके साथ ही अब वे सागौन प्लांटेशन पेड़ आसपास बसे अनेकों ग्राम क्षेत्रों के जीवन को ऑक्सिजन देकर जीवन दायिनी बन चुके है यही नही प्रकृति के स्वरूप ,में हरीतिमा अस्मिता की चादर ओढ़ा कर  सुनहरी मनमोहक हरियाली आभा  बिखेर कर आम लोगों को अपनी ओर चित आकर्षित भी कर रहे है 



          इस संदर्भ में बताया जाता है कि रायपुर वन मंडल अंतर्गत आरंग परिवृत् से चालीस किलोमीटर दूर स्थित मोह मेला ग्राम से लगे हुए चिखली ग्राम मे महानदी तट के समीप वित्तीय वर्ष 1999-2000 में तत्कालिक वन अधिकारियों द्वारा कक्ष क्रमांक 81 के, 85 हेक्टेयर में दो भागों में सागौन सहित भिन्न भिन्न मिश्रित प्रजाति का प्लांटेशन वृहद भूभाग में किया गया था जिसकी वर्तमान आयु लगभग 26 वर्षीय हो चुकी है कथित सागौन प्लांटेशन के संदर्भ में वरिष्ठ आई एफ.एस



रायपुर वन मंडलाधिकारी लोकनाथ पटेल बताते है कि हमारे तत्कालिक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों,मैदानी अमलों के कर्मचारियों की मेहनत का प्रतिफल स्वरूप कथित सागौन  प्लांटेशन हमें विरासत में उपहार स्वरूप प्राप्त हुआ है जिनकी थाती को बचाए रखना हमारा मौलिक कर्तव्य बनता है इसके लिए वन मंडल अधिकारी, मैदानी अमले के कर्मचारी निष्ठा पूर्वक कटिबद्धता हेतु दृढ़ संकल्पित है  रायपुर वन मंडल अधिकारी लोकनाथ पटेल आगे बताते है कि  इसके अलावा समय अनुसार पृथक  वर्ष 2012-2013 में  केज्युवल्टी कार्य भी संपादित किए जाते रहे है जिसकी वजह से प्लांटेशन क्षेत्र मे शत प्रतिशत पौधे सुरक्षित एवं ग्रोथ कर रहे है वे आगे बताते है कि इसी तारतमय में वितीय वर्ष  2026-27 में लगभग 55 (पचपन) हेक्टेयर  भूभाग के 18 हेक्टेयर भूमि में केज्युवल्टी सागौन सहित मिश्रित प्रजाति के पौधों का पुनःरुत्पादन  कर प्लांटेशन किया जाएगा  जिसकी दृत गति से तैयारी की जा रही है  रायपुर वन मंडलाधिकारी श्री पटेल  आगे बताते है कि प्रकृति आपदा, गाय, बकरी मवेशियों की चराई एवं आसपास के ग्रामीणों द्वारा लगातार आवागमन के चलते  एक बहुत बड़ा भूभाग समतलीकरण के रूप मे परिवर्तित हो चुका था जिसकी कायाकल्प करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी  उन्होंने आगे बताया कि इसी संदर्भ में अठारह हेक्टेयर भूमि के खरपतवार,सहित  व्यवधानिक पेड़, पौधों को साफ कर समतलीकरण किया जाएगा तद् पश्चात वृक्षारोपण करने की तैयारी की जाएगी इस सिलसिले मे रायपुर वन मंडल के उप वन मंडलाधिकारी आनंद कुदरिया का कथन है कि क्षेत्र को हरीतिमा युक्त बनाने हेतु समस्त औपचरिकताएं पूर्ण कर हजारों की संख्या में सागौन सहित अन्य मिश्रित पौधों का रोपण वर्ष 2026 मे किया जाएगा इसके लिए भूमि व्यवस्था की जा रही है तथा रोपण पश्चात केज्युवल्टी, सहित उपचार दवा खाद, सुरक्षा, व्यवस्था पर  समय समय पर विशेष ध्यान  दिया जाएगा वे आगे बताते है कि इसके लिए रोपण क्षेत्र में आधुनिक मशीन से खरपतवार को साफ कर, उबड़ खाबड़ स्थल का समतलीकरण कर भूमि व्यवस्थापन कार्य जारी किया जा चुका है यही नही मजदूरों के मध्यम से तीन गुणित तीन के गड्ढो को खोदकर तीन फीट के अंतराल में सागौन सहित अन्य प्रजाति जिसमे सागौन,महुआ,बांस,बरगद, कुसुम,  नीम, करंज,सहित फलदार, फुलदार,  छायादार एवं औषधि गुण वाले  पौधों का रोपण कार्य द्रुत गति से किया जाएगा  उन्होंने संभावना व्यक्त की है कि वित्तीय वर्ष 2026 मार्च पश्चात जून जुलाई तक प्लांटेशन कर लिया जाएगा इसके लिए वे लगातार मॉनिटरिंग करते रहते है 


  इस संदर्भ में युवा जुझारू, कर्तव्य निष्ठा रायपुर  परिक्षेत्राधिकारी चंद्र कुमार महोबिया से जब चर्चा कि गई तो उन्होंने बताया कि सागौन प्लांटेशन रायपुर वन मंडल के लिए बड़े गर्व का विषय है जिसकी वर्तमान आयु लगभग छब्बीस वर्षों की हो चुकी है तथा यह 85 हेक्टेयर मे दो भागों मे फैला है जिसके एक क्षेत्र 55 हेक्टेयर क्षेत्र में 18  हेन्टेयर भू भाग में मिश्रित वृक्षारोपण का कार्य संपादित किया जाएगा रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र कुमार महोबिया आगे बताते है कि सागौन की वर्तमान स्थिति बहुत अच्छी है तथा लगातार ऊँचाई में सतत ग्रोथ कर रहे है वही इस बात पर भी उन्होंने जोर दिया है कि समय अनुसार इसका विरलन न होने से इसकी गोलाई अपेक्षाकृत कम है  रेंज अधिकारी महोबिया ने बताया कि यह क्षेत्र वन भूमि क्षेत्र होने के कारण चारों ओर लगभग 32 प्रवधानित मुनारा मे लगभग समस्त मुनारा निर्माण किया जा चुका है ओर इसके साथ ही पौधों की सुरक्षतामक दृष्टिकोण से फेसिंग एवं गेट बनाये जाएंगे ताकि गाय गरुआ एवं मवेशी चराई से रोक थाम किया जा सके वही सुरक्षा हेतु चौकीदारों की नियुक्ति बढ़ाई जाएगी सिंचाई व्यवस्था के संदर्भ में उनका मत है कि ग्रीष्म ऋतु में टैंकर के मध्यम से समुचित व्यवस्था की जाएगी बताते चले कि श्री चंद्र कुमार महोबिया सीजी पी एस सी पास कर वर्ष दो हजार अठारह उन्नीस में वन विकास निगम में जॉइनिंग  की थी तथा दो वर्ष पश्चात 2021-2022 मे रेग्युलर वन विभाग में सेवा से जुड़े निगम के प्लांटेशन के दो वर्ष का लाभ उन्हे प्राप्त हुआ तथा अपने वन विभाग के कार्य काल में उन्होंने बहुत से प्लांटेशन रोपण का लाभ अपने मार्ग दर्शन में संपादित कराया है जो आज भी उल्लेखनीय माने जाते है 


 रायपुर वन मण्डल अंतर्गत आरंग परिवृत् के प्रभारी अधिकारी एस.के.सामंतराय जो जमीनी स्तर के जुड़े अधिकारी है जिसकी वजह से वे कर्म पर अधिक तरजीह देते है इसलिए उनके अधीनस्थ कर्मी उन्हे कर्मयोगी के नाम पर ज्यादा जानते है तथा वे भी किसी भी कर्म क्षेत्र को चुनौती के  रूप में स्वीकार करते है यही कारण है कि उन्हे वन विभाग रायपुर का जिला उड़न दस्ता का अतिरिक्त प्रभार भी मिला हुआ है उनके बारे मे बताया जाता है कि काष्ठ तस्करों के लिए उन्होंने रात दिन उन पर वन अधिनियम के तहत  ताबड़तोड़ कार्यवाही कर उनके नाक मे दम कर रखा है जुझारू पन उनके आदत मे शुमार है इसलिए वह संपूर्ण सौपे गए दायित्वों का निर्वहन  बड़ी इमानदारी एवं निष्ठा पूर्वक निभाते है जिसकी वजह से उनकी कार्य शैली उन्हे अन्य लोगों से अलहदा बनाती है


रायपुर से लगभग सत्तर किलो मीटर दूरी फील्ड चिखली ग्राम का अट्ठारह हेक्टेयर भूमि का सागौन प्लांटेशन का दायित्व उन्ही के कंधों पर है तथा वे लगातार प्लांटेशन पहुँच कर संपूर्ण कार्यों को अपने निगरानी मे संपादित करवा रहे है वे बताते है कि लगने वाले वृक्षारोपण के पौधे भिन्न भिन्न प्रकार के मिश्रित पौधों का चयन कर फलदार, फुलदार, सायादर्, औषधि गुणवाले पौधों का रोपण वन मण्डल  अधिकारी लोकनाथ पटेल साहब के आदेश एवं  उप वन मंडल अधिकारी आनंद कुदरिया साहब के मार्ग दर्शन एवं परिक्षेत्राधिकारी चंद्र कुमार महोबिया साहब के नेतृत्व मे वृक्षा रोपण कार्य संपादित किया जाएगा जिसकी तैयारी पूरी कर ली गई है रोपण क्षेत्र में पौधों की सुरक्षा पर बहुत ध्यान देने की आवश्यकता की जाएगी उसके लिए फेंसिंग के साथ ही लगभग बत्तीस मुनारे निर्माण किये जाएंगे ताकि वन क्षेत्रों का अतिक्रमण न किया जा सके आरंग क्षेत्र के प्रभारी श्री एस. के. सामंत राय आगे बताते है कि वन क्षेत्र के मध्य में रेत माफिया सक्रिय है जो  लगातार ट्रको से रेत उत्खनन कर सड़क एवं वन भूमि क्षेत्र मार्ग को क्षति पहुंचाई जा रही है इसके लिए  विभाग को  अवगत कराकर रेत उत्खनन को बंद करने की मांग की जाएगी ताकि हरित क्षेत्र को धूल, प्रदूषण, उत्खनन इत्यादि से प्लांटेशन क्षेत्र को होने वाली क्षति से बचाया जा सके आरंग प्रभारी एस. के. सामंत राय आगे बताते है कि शीघ्र 85 हेक्टेयर भूमि का नाप झोंक कर रिपोर्ट वन विभाग,पर्यावरण विभाग एवं कलेक्टर को भेजी जाएगी 


ग्राम चिखली सागौन प्लांटेशन प्रभारी दौलत राम साहू है उन्होंने संपादित किये जाने वाले वृक्षारोपण क्षेत्र के बारे में बताया कि लगातार क्षेत्र में रोपण कार्यों स्थानीय श्रमिकों के मध्यम से रोजगार ग्यारंटी के तहत कराया जा रहा है रोपण कार्य हेतु स्थानीय एवं असपास ग्राम क्षेत्र के श्रमिकों को लगातार रोजगार उपलब्ध दिया जा रहा है उत्साहित युवा दौलत राम साहू फॉरेस्ट गार्ड बताते है रोपण कार्य की गति तेज स्तर पर की जा रही है ताकि जून जुलाई तक पूर्ण हो सके वही उनका सहयोग आरंग परिवृत के युवा सावन कुमार साहू फॉरेस्ट गार्ड काफी सक्रिय है वे लंबे समय से आरंग परिवृत् के क्षेत्र में बहुत से प्लांटेशन करवा चुके है जिनमे अब पूर्व में संपादित  चार पांच हेक्टेयर क्षेत्र में कृष्ण कुंज हो या समोदा के आगे नदी किनारे प्लांटेशन हो सभी क्षेत्र के प्लांटेशन आज भी सफल एवं सुरक्षित है वे भी ग्राम चिखली प्रभारी दौलत राम साहू के साथ में बड़ी सक्रियता से हो रहे वृक्षारोपण कार्यों को शिद्दत से संपादित करने में जूटे हुए है 


गौर तलब है कि ग्राम चिखली का कथित सागौन एवं मिश्रित प्लांटेशन के शत प्रतिशत सफल होने का मुख्य वजह उसके समीप महानदी की जलधारा  है जिसकी नमी लगातार कई किलोमीटर तक अवशोषित करती रहती है इसी नमी से प्लांटेशन क्षेत्र वन का रूप धारण कर चुका है यदि आम जन सागौन प्लांटेशन क्षेत्र के मध्य से गुजरता है तो  ऐसा प्रतीत होता है जैसे सिरपुर,बार नवापार के सघन जंगल में पर्यटक भ्रमण कर रहे हो इसकी मनोहारी दृश्य ही इतनी आकर्षित है कि मध्य से गुजरती महानदी कि जलधारा दूसरे छोर ऐतिहासिक प्राचीन  मंदिर किसी भी पर्यटक को श्रद्धा से शीश नवाने विवश कर देता है वन विभाग इस संदर्भ में रुचि दिखाए तो इसे पर्यटन के रूप में विकसित कर सकता है क्योंकि सिरपुर, बार नवापारा अभ्यारण के मध्य महानदी का फासला मात्र है  यदि इस की दूरी कम करने ओवर ब्रिज निर्माण किया जाए तो बहुत से पर्यटक इस ओर भी आकर्षित हो सकते है तथा विभाग को भविष्य मे अच्छा राजस्व मिलने की प्रबल उम्मीद बन  सकती है 

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन ने महामंडले

 



वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन ने महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि से भेटकर आशीर्वाद लिया 



अर्जुन तिवारी 

रायपुर, (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन एवं सर्व युवा ब्राह्मण परिषद के प्रमुख पदाधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल ने बुधवार  को रात्रि मेगनेटो सिगनेचर होम्स क्लब हाउस, रायपुर में उपस्थित होकर परम पूज्य निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री कैलाशानंद गिरि जी महराज के दिव्य दर्शन एवं पावन आशीर्वाद का सौभाग्य प्राप्त किया इस अवसर पर नि रंजन पीठाधीश्वर श्री कैलाशानंद गिरि जी महराज ने भेट के दौरान ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों को सनातन धर्म पर ज्ञान एवं मार्गदर्शन प्रदान किया. 

प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द ओझा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गुणनिधि मिश्रा, महासचिव द्वय अजय अवस्थी, डॉ सुनील कुमार ओझा एवं प्रदेश सचिव राम तिवारी विशेष रूप से उपस्थित थे.

इस आध्यात्मिक और परम पावन कार्यक्रम के आयोजक परम भक्त सुशील ओझा और परिवार थे.


गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

गरियाबंद एसडीओ द्वारा निजी कार्य मे शासकीय वाहन का दुरूपयोग दुर्घटना हुई- पर भुगतान कौन करेगा

 गरियाबंद एसडीओ द्वारा निजी कार्य मे शासकीय वाहन का दुरूपयोग दुर्घटना हुई- पर भुगतान कौन करेगा  


अल्ताफ हुसैन

रायपुर/गरियाबंद/ (फॉरेस्ट क्राईम न्यूज़) वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मुखिया  वन बल प्रमुख ने पूर्व में यह आदेश पारित किया हुआ है कि शासकीय कार्य के अलावा कोई भी अधिकारी कर्मचारी शासन द्वारा प्रदत्त शासकीय वाहन का निज या व्यक्तिगत जीवन मे उपयोग न करें तथा प्रति दिन शासकीय कार्यों में चलने वाली गाड़ी का किलोमीटर सहित डीजल पेट्रोल इत्यादि का संपूर्ण ब्यौरा पंजी में दर्ज करे ताकि वाहन का समुचित रख रखाव एवं व्यवस्था का अनुपालन कर शासकिया वाहन की होने वाली दुरूपयोग,बेतहाशा वृद्धि राशि  के व्यय में अंकुश लगा कर उसे बचाए जाने की जिम्मेदारी में समस्त वन कर्मियों की सहभागिता सुनिश्चित किया जाए  परंतु  बहुत से वरिष्ठ, कनिष्ठ अधिकारी गण  ऐसे है जो शासकीय कार्य के अलावा व्यक्तिगत निज उपयोग में भी शासकीय वाहन का खुल कर दुरूपयोग कर अपने जेब से राशि लगाने की बजाए शासन की लाखों की राशि में सेंघ मारी कर रहे है शासकीय वाहन का दुरूपयोग, एवं होने वाली दुर्घटना पर अधिकारी वन प्रबन्धन समिति, निर्माण कार्य, पेड़ पौधों का प्लांटेशन, थीनिंग, जैसे वन विभाग के विकास परक योजनाओं द्वारा जारी शासन के अन्य मद की राशि से लाखों का भुगतान कर अपने कुत्सित कर्मों पर परदा डालने में किसी प्रकार का गुरेज नही करते 



          ताजातरीन प्रकरण गरियाबंद वन मंडल कार्यालय का है जहाँ के एस डीओ मनोज चंद्राकर जो विगत सात आठ वर्षों से एक ही गरियाबंद वन मंडल में वर्षों से पदस्थ है वर्तमान में भी वे मैनपुर, देवभोग सहित गरियाबंद मे अतिरिक्त एस डी ओ का दोहरा प्रभार संलग्न अधिकारी के रूप में अटैच है वे फरवरी 2026 ,पांच,छ तारीख को वन विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदत्त वाहन क्रमांक सी जी 02- 7214 मे


दोपहर तीन बजे ऐसे ड्रायवर को  जिसको तीन चार माह पूर्व सीधी भर्ती में जॉईनिंग किया था उसे लेकर  रायपुर आवास छोड़ने साथ ले गए वापसी संध्या सात आठ बजे खाली टाटा  सुमो गोल्ड गाड़ी लेकर गरियाबंद वन मंडल के लिए रायपुर से  ड्रायवर इंद्रेश साहू धमतरी जिला के गुरूर, पुरुर,खेडिया ग्राम निवासी द्वारा  निकला था कि माना रोड स्थित   रावत पुरा कॉलेज के पास विपरीत दिशा से इनोवा गाड़ी से जबरदस्त टक्कर हो गई जिसमे सुमो गोल्ड ड्रायवर इंदेश साहू को पैर के घुटने की कटोरी मे गंभीर चोट आई जिसका स्थानीय अस्प्तल में ऑपरेशन किया गया प्रत्यक्ष दर्षियों का कथन है कि दोनों गाड़ी की इतनी जबरदस्त टक्कर थी  कि किसी भी व्यक्ति की जान जा सकती थी  



    यह प्रथम अवसर नही था जब किसी  अधिकारी द्वारा निजी व्यक्तिगत  कार्यों में शासकीय वाहन का दुरूपयोग किया गया हो ज्ञात हुआ है कि गरियाबंद एस डी ओ मनोज चंद्राकर अपने निजी वाहन का उपयोग कम करते हुए शासकीय वाहन का हमेशा उपयोग करते है राजधानी रायपुर तो जब भी वे आते है सीसीएफ ऑफिस में एक बार अवश्य विभागीय कार्य हेतु जाते ही है यही नही महासमुंद फिंगेश्वर में उनका गहरा लगाव भी बताया जाता है जहाँ भी उनका दौरा निरंतर रहता है उनका क्षेत्र गरियाबंद के मैनपुर, तक रहता है मगर उनका विभागीय एवं निज व्यक्तिगत दौरा लगातार दोनों गाड़ी मे होता रहता है जबकि बाहर जाने के पूर्व डी एफ ओ से अनुमति अनिवार्य रहता है फिर भी शासन द्वारा किलोमीटर के हिसाब से समस्त वन विभाग का वाहन परिचालन दैनंदिनी पंजी पेट्रोल डीजल का अवलोकन करे तो लाखों करोड़ों रुपये का भुगतान उनमे ही खपाते हुआ मिल जाएगा 


                सवाल उठता है कि गरियाबंद एसडीओ मनोज चंदाकर द्वारा रायपुर निवास आगमन में क्या विभागीय कार्य से गाड़ी लाया गया था यदि हां तो उसे शाम रात को गरियाबंद वन मंडल कार्यालय क्यों वापिस भेज दिया था अब रास्ते मे वाहन का आकस्मिक दुर्घटना ग्रस्त हो गई अब उसका लाखों का सुधार, मरम्मत का भुगतान कौन करेगा वे स्वयम अपनी जेब से करेंगे या वह भी शासन की विभिन्न विकास परक योजनाओं से राशि आहरित कर भरपाई करेंगे ? यह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने बहुत बड़ा सवाल खड़ा हुआ है बताया जाता है की क्षति ग्रस्त वाहन में लगभग दो लाख से उपर का व्यय लगना तय है साथ ही ड्रायवर को प्राथमिक उपचार के लिए भी कोई राशि उनके द्वारा नही दिया गया उसका लगभग एक लाख उपचार मे लग गया है यही नही लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने एवं शासकीय वाहन को क्षति ग्रस्त के जुर्म मे उस पर शासकीय कार्यवाही या सस्पेंड किया जा सकता है दुर्घटना की  एफ आई दर्ज हुई या नही अभी स्पष्ट पता नही चल पाया है.