सीमित साधन में असीमित संभावनाएं तलाश करता वन अनुसंधान विस्तार का मुरा नर्सरी
अलताफ़ हुसैन
रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) प्रदेश में ऐसे अनेक पौधशाला अर्थात नर्सरी मौजूद है जहाँ बीजों से अंकुरित कर उसकी सुरक्षा देखभाल,विकास उन्नति करते हुए नन्हे पौधों का उपचार कर स्वस्थ पौधे विकसित करना एवं उसका विक्रय करना मुख्य उद्देश्य माना जाता है यही नन्हे पौधशाला वाली नर्सरी वाली स्थिति मानव समाज में तीन से पांच वर्षीय बच्चों के उपर भी लागू होता है जिसमें अबोध बच्चों के, शरीरिक, मानसिक,बौद्धिक शैक्षणिक विकास हेतु ए. बी. सी. डी. एवं क. खा. ग. घ. जैसेअक्षर एवं छाया चित्र ज्ञान का पठन,पाठन करवा कर नर्सरी शब्द को परिभाषित करता है उसी प्रकार बीज से रूट शूट एवं अन्य पृथक पौधों की कलम को एक साथ जोड़ कर ग्राफ्टिंग विधि से उपचार कर नए पौधों का रोपण एवं उन्नत किस्म के फल, फूल, औषधि का नव निर्माण उपज कर उसका सर्वाईव करना उसी नर्सरी का मुख्य कार्य होता है जिसे हम आज छत्तीसगढ़ वन एवं परिवर्तन विभाग के वन अनुसंधान विस्तार वन मंडल के रूप में पहचानते है जो विगम कुछ वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ (पूर्व मध्य प्रदेश काल) में सामाजिक वानिकी रोपण कार्य के प्रमुख स्त्रोत के रूप रूप से पहचाना जाता था तत्कालिक सामाजिक वानिकी प्रभाग'द्वारा संपूर्ण छ्ग प्रदेश में रोपण प्रबन्धन की मुख्य इकाई मानी जाती थी । यह प्रभाग वन क्षेत्रों के बाहर, जैसे कि बंजर भूमि, सड़कों, नदी, पोखर, नहरों के किनारे , सामुदायिक जमीनों पर वृक्षारोपण और वनीकरण के कार्यों के लिए जिम्मेदार था। परंतु बदलते परिवेश में वृक्षारोपण, प्लांटेशन एवं नर्सरी में बीज, रूट शूट सहित ग्राफ्टेड नवीन उत्पादित पौधों का आधुनिकरण तकनीक से उपज लेकर सीमित संसाधन से असीमित संभावनाओं को चरितार्थ कर वनअनुसंधान विस्तार वन मंडल द्वारा एक नया इतिहास रच कर अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कर रहा है
वन अनुसंधान विस्तार रायपुर डिविजन के डीएफओ लोकनाथ पटेल से चर्चा करने में उन्होंने बताया की रायपुर डिविजन के अंतर्गत वन अनुसंधान विस्तार के इकाई द्वारा ऐसे बहुत से प्लांटेशन लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर रहे है जिनमें मुख्यतः राजिम नवापरा कसडोल कुरुद,में नदी के समीप वृक्षारोपण इकाई चंद्रखुरी असौदा के मध्य प्लांटेशन सहित ग्राम छतौद सहित बहुत से क्षेत्र है जहाँ छ्ग राज्य वन अनुसंधान विस्तार केंद्र द्वारा प्लांटेशन किया जा चुका है तथा वे आज भी स्वस्थ्य पौधे लगातार ग्रोथ कर रहे है मजे की बात यह है कि कथित प्लांटेशन क्षेत्रों में जहाँ भी वन अनुसंधान विस्तार वन मंडल द्वारा प्लांटेशन कराए गए वे सब ओरेंज, खुश्क पथरीली मुरुमी भूमि रहे है जहाँ के आश्चर्य जनक परिणाम सामने आए है श्री लोकनाथ पटेल बताते है कि नर्सरी के मध्यम से अनेक विलुप्त प्रजाति पौधों का संरक्षण संवर्धन कर अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के नर्सरी में किया जाता है इसके लिए बाकायदा विधान सभा मुख्यालय एवं गोढी नर्सरी में विलुप्त प्रजाति के पौधों का पुनःरुत्पादन हेतु लैब भी मौजूद है जहाँ वैज्ञानिक तरीके से ऐसे विलुप्त पौधों का निर्धारित तापमान में उपज की जाती है पश्चात नर्सरी में जैविक खाद उपचारित कर नियमित सिंचाई से उसके प्राकृतिक रूप से सर्वाईव कराया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप उन्नत किस्म के स्वस्थ्य आकर्षक पौधे प्राप्त होता है जिसे भिन्न भिन्न क्षेत्रो में मांग अनुसार विक्रय या वितरण किया जाता है वन अनुसंधान विस्तार के डीएफओ. लोकनाथ पटेल आगे बताते है कि पूर्व छत्तीसगढ़ में संपूर्ण वानिकी कार्यों का संपादन सामाजिक वानिकी( वर्तमान में अब वन अनुसंधान विस्तार संस्थान) के मध्यम से ही किये जाते थे परंतु छ्ग वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने अब यह कार्य मूल रूप से कर रहा है जिसकी वजह से वनों का लगातार विस्तार भौतिक रकबा में बढ़ोतरी देखी जा रही है
छ्ग राज्य वन अनुसंधान प्रशिक्षण विस्तार केंद्र के युवा ऊर्जावान, कर्मठ,लगन शील एस डी ओ तरुण तिवारी नित नवीन योजनाओं के मध्यम से अनेक कार्य योजनाएं तैयार कर विभाग की नई दिशा तय कर रहे है इसके तहत कुरुद् क्षेत्र में नवीन कार्यालय भवन सहित नए प्लांटेशन करने की तैयारी भी की जा रही है संभवतः वर्षा ऋतु के पूर्व मई जून मे बहुत से क्षेत्रों में भूमि तैयारी व्यवस्था भी प्रारंभ हो जाएगी एस डी ओ तरुण तिवारी आगे बताते है कि हमारे बहुत से प्लांटेशन बेहतर स्थिति मे है इसका उदाहरण देखना है तो मुरा ग्राम मुख्य सड़क मार्ग स्थित वन अनुसंधान विस्तार वन मंडल का पचास हेक्टेयर क्षेत्र मे लगभग दस हेक्टेयर भूभाग क्षेत्र स्थित अट्ठाइस वर्षीय सागौन प्लांटेशन देख सकते है जिसकी अनुभूति किसी वन क्षेत्रों मे भ्रमण समतुल्य भान कराता है इन्होंने आगे बताया जहाँ अलग अलग क्षेत्रों में भिन्न भिन्न प्रजाति के मिश्रित पौधों की तैयारी नर्सरी में की जाती है जिसमें मुख्यतः पांच हेक्टेयर में आँवला बीस हेक्टेयर भूभाग में मिश्रित प्रजाति की किस्में मौजूद है पांच हेक्टेयर में ख्महार, एवं दस हेक्टेयर भूभाग में सागौन बीज से उत्पाद कर रूट शूट से तैयार किए जाएंगे उन्होंने बताया कि बीज गोढी जोरा उधान क्षेत्र नर्सरी में शिड तैय्यार किया जाता है इसकी आयु के संदर्भ में एस डी ओ तरुण तिवारी बताते है कि सागौन का फल बगैर टिंटमेंट के उत्पाद नही किया जा सकता उसे बहुत से प्रोसेस से गुजरना पढ़ता है उन्होंने सागौन के बेहतर स्वस्थ्य बीज की पहचन उसके कष्ठों में उभरे वलय धारी लहर से उसकी सटीक आयु सुनिश्चित कर आंकलन किया जाता है सागौन में यह प्राकृतिक प्रक्रिया एक वर्ष पश्चात उसके काष्ठों में वलय बनना प्रारंभ हो जाता है
अट्ठाइस वर्षीय सागौन प्लांटेशन के संदर्भ में चर्चा करने पर अनुसंधान विस्तार वन मंडल के उप वन क्षेत्र पाल तेजा सिंह साहू बताते है कि ग्राम मुरा का कथित सागौन प्लांटेशन विभाग के लिए बहुत बढ़ी उपलब्धि है यही नही वर्ष 1920-2021 का ग्राम छतौद का मिश्रित प्लांटेशन भी शत प्रतिशत स्थिति में सक्सेस है वहाँ जाने पर जब हमने उसकी स्थिति देखी गई तो विश्वास नही हुआ कि ये वही मिश्रित प्लांटेशन है जिसे हमारे सामनें पांच वर्ष पूर्व किया गया था हाल फिलहाल जब उसका मुआयना किया गया तो सभी पौधे लगभग बारह से चौदह फीट की ऊँचाई में अपना कद पार कर लहलहते हुए मस्ती में झूम रहे थे अप्रेल, मई की पैंतालिस डिग्री के झुलसा देने वाले तीव्र तापमान में भी उनकी हरियाली में कोई परिवर्तन नही दिखा इसकी वजह पूछने पर अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के नर्सरी प्रभारी वन क्षेत्र पाल तेजा सिंह साहू बताते है कि नियमित देख रेखा सुरक्षा एवं समय पर उपचार, केज्युवल्टी, सिंचाई इसका शत प्रतिशत सर्वाईव करना मूल कारण है ग्राम छतौद के अंतिम क्षेत्र के ओरेंज भूमि में दो भागों में पच्चीस हेक्टेयर भू भाग मे वर्ष 2020-2021 में 27500 मिश्रित प्रजाति के पौधे जिनमें मुख्यतः सागौन, नीम, बेहड़ा, आँवला, शिशु, बांस,इमली, कचनार, सहित अन्य पौधों का रोपण किया गया था जिसमें स्थानीय छतौद ग्रामवासी जिला पंचायत सदस्य स्वाति वर्मा के विशेष सहयोग प्राप्त मिलता रहा उन्होंने बताया नए पुराने सरपंच सदस्य सहित ग्राम क्षेत्र में कोटवार के मध्यम से मुनादी भी कराई जाती थी विशेष कर होली के समय विशेष निगरानी की जाती थी छतौद प्लांटेशन के बारे मे उन्होंने आगे बताया कि एक बोर खनन किया गया था जिसके लिए विद्युत सौर ऊर्जा से लिया जाता था वर्तमान मे एक चौकीदार रात दिन निगरानी करता है इसका मुख्य कारण यह भी है कि चारो ओर लगाए गए फैनसिंग तार की चोरी एवं पौधों की नियमित सुरक्षा होती रहे
श्रमिकों के संदर्भ में पूछने पर अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के वनपाल गणेश राम वर्मा बताते है कि मुरा, माठ, ग्राम के श्रमिकों को लगातार रोजगार उपलब्ध कराया जाता है यदि कार्य अधिक होने पर मोहरेंगा ग्राम से अतिरिक्त श्रमिकों को बुलाया जाता है जिन्हे कलेक्टर मनरेंगा दर से भुगतान किया जाता है वन पाल गणेश राम वर्मा आगे बताते है कि स्थानीय नर्सरी में दस हेक्टेयर भू भाग मे पौधों की तैयारी की जा रही है जिसमें मुख्यतः नीम, टीकोमा, जामुन, गुलमुहर,इमली, कचनार, सागौन, बांस, अमरूद, लेमन ग्रास, कटहल, सितफल, शहतूत, दश्मत, पेल्टाफार्म, सिंदूरी, पीपल, अर्जुन, हर्रा,बेहड़ा, बादाम, काइत, बुहार का पेड़, नींबू, अनार, जैसी मिश्रित पौधे लगाने का लक्ष्य है जिसमें चालीस हजार पौधों का वितरण करना है तथा आगामी वर्ष के लिए अट्ठारह हजार पौधे वितरण का लक्ष्य दिया गया है जिसकी तैयारी जोर शोर से जारी है स्थानीय सिंचाई के लिए उन्होंने बताया एक बोर संचालित है जिससे मैनेज किया जाता है टैंकर के मध्यम से प्लांटेशन में सिंचाई की जाती है कुछ टंकियाँ नर्सरी में भी निर्मित है जिसमें पानी संचय किया जाता है वही उन्होंने बताया कि स्थानीय नर्सरी मे तीन चौकीदार है जो सतत निगरानी एवं सुरक्षा में लगे रहते है वही लगभग 22 श्रमिक नियमित वानिकी कार्यों में लगे रहते है यह संख्या समय अनुसार अधिक भी होती है लगातार ग्रीष्म ऋतु व वर्ष ऋतु से श्रमिकों के बचाव के लिए शेड निर्माण का प्रस्ताव दिया गया है
अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के मूरा नर्सरी के प्रभारी सूर्यकांत भू आर्य एवं उनके सहयोगी विजयासन प्रसाद साहू बीज उधानिकी क्षेत्रों प्रभारी ने बताया कि स्थानीय नर्सरी में लगातार बीज सहित रूट शूट एवं अन्य प्रजाति के पौधों का लगातार तैयारी चल रही है क्योंकि दो माह बाद वर्षा ऋतु प्रारंभ हो जाएगा उसी समय बहुत से सामाजिक शैक्षणिक एवं उद्योगिक घरानों द्वारा पौधा रोपण की मांग की जाएगी इसके लिए द्रुत गति से बीज पौधा रोपण कार्य जारी है ताकि निर्धारित अवधि में मांग पूरी की जा सके इसके लिए स्वस्थ्य पौधों की आपूर्ति हेतु उनका भौमिक आहार खाद आवश्यक होता है जो केवल जैविक खाद के मध्यम से ही प्राप्त संभव है मुरा नर्सरी प्रभारी सूर्यकांत भू आर्य बताते है कि इसके लिए हमने नई तकनीक का प्रयोग कर रहे है टंकी में वर्मी कंपोस्ट खाद निर्माण करने की बजाए हमने दस हेक्टेयर के अधिकांश क्षेत्रों में सागौन सूखे पत्तो के उपर कुट्टी बना कर गोबर सना कर , पीसी हल्दी का छिडकाव, गाजर घास, काली उपजाऊ मिट्टी, सूखे पैरा के अवशेष, कृषि अवयव के अवशेष, स्वस्थ केचुआ खाद, का समिश्रण कर उसे ढंक कर बराबार पानी डालते हुए नमी बनाए रखा जाएगा ताकि खुले क्षेत्रों में केंचुआ के लगातार उथल पुथल करने से देढ़ से दो माह में ही चाय पत्ती समान उर्वरा युक्त खाद प्राप्त होगा
मुरा नर्सरी प्रभारी सूर्य कांत भू आर्य इसका खुलासा करते हुए आगे बताते है कि इसके दो लाभ यह मिलेगा कि सागौन पेड़ के खुले क्षेत्र में जब वर्मी कंपोस्ट खाद निर्माण से उसके जड़ मे स्वमेव खाद अवशोषित करने से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाएगी तथा सागौन सहित अन्य पौधे अपनी दोगुनी रफ़्तार से ऊर्जा प्राप्त कर ग्रोथ करने लगेंगे और यह सत्य भी है अपने उत्पाद को अधिक से अधिक उपजाऊ बनाने के लिए कृषक नाना प्रकार के उपाय करते है यही नई सोच कुछ नया करने का जज्बा ने मुरा नर्सरी प्रभारी सूर्यकांत भू आर्य ने भी किया क्योंकि किसी ने सही कहा कि आवश्यकता ही अविष्कार कि जननी है जिसे उसने कर दिखाया


















































