भारत माला परियोजना
क्षतिपूर्ति के साथ पर्यावरण का संतुलन
अलताफ़ हुसैन
रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)संपूर्ण मानव जगत में वनों के प्रति जन चेतन सामाजिक समरसता, एवं परस्पर उत्तरदायित्व स्थापित कर आमजन को एक स्वस्थ्य पूर्ण जीवन शैली एवं निरोग वातावरण निर्मित करने का सरल आसान व्यवस्था ऐसे बंजर चटियाल रिक्त पड़त ओरेंज भूमि क्षेत्र में सिर्फ और सिर्फ वन रूपी पेड़ पौधों का अधिक से अधिक सफल रोपण कर संपूर्ण वैश्विक स्तर पर परिवर्तित हो रहे स्वस्थ, ऋतु जलवायु को नियंत्रित किया जा सकता है यदि इस संदर्भ में समय रहते आम लोगों में जन जागरुकता नही लाई गई तो वह दिन दूर नही जब प्रत्येक क्षेत्र में दम घोटु प्रदूषण के प्रभाव में अनेक ला इलाज गंभीर बीमारी से प्रत्येक व्यक्ति ग्रसित हो सकता है जिसकी प्रारंभिक पहल विगत कुछ वर्ष पूर्व करोना महामारी के रूप में देख चुके है इस भावी गंभीर समस्याओं, प्रदूषण,परिवर्तित जलवायु को लेकर हमने रायपुर वन मंडल के वरिष्ठ आई एफ एस अधिकारी श्री लोकनाथ पटेल से चर्चा की तब उन्होंने बताया कि प्रदूषण, परिवर्तित जलवायु रायपुर ही नही बल्कि संपूर्ण देश, प्रदेश, स्थानीय स्तर में लगातार बढ़ रहा है जिसका मूल वजह उद्योगिक कल कारखाने, मानव द्वारा निर्मित अत्याधुनिक नवीन भौतिक संसाधनों का निरंतर उपयोग उनसे निकलने वाली दम घोटु धुएं प्रदूषण लगातार प्रत्येक क्षेत्र में सूक्ष्म कणों के रूप मे श्वास नली के मध्यम से धमनियों को प्रहार कर जन जीवन को क्षति ग्रस्त कर रही है इसका एक मात्र उपाय संरक्षित वनों के पेड़ पौधे उनकी हरियाली को अधिक से अधिक रोपण कर सहेजा जा सके ताकि वे अदृश्य वायु मे तैर रही घातक लौह कणों नदी पहाडों के भूगर्भ जल की सूक्ष्म मिश्रित हानिकारक तत्व अवयव की अविरल जलधारा को स्वच्छ एवं स्वस्थ्य ऑक्सिजन निर्माण कर विसर्जित कर मानव, जीव जंतु का जीवन तभी सुरक्षित किया जा सके
रायपुर वन मंडलाधिकारी लोकनाथ पटेल से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग यथा नाम तथा गुण को चरितार्थ करते हुए मूल उद्देश्य एवं अपने नाम के अनुरूप कार्य संपादित कर रहा है इसके लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अनेक योजनाएं जिसमें वन क्षेत्रों में वर्षा ऋतु के ढलानी बहाव जल को संचय कर संरक्षित करनें का कार्य कर रहा है जिसके सार्थक परिणाम यह आने लगे कि अब वन क्षेत्रों के पेड पौधे सहित आस्पास ग्रामीण के निचले क्षेत्रों की फसलों को सहज सरल जल वायु का लाभ मिल रहा है उन्होंने आगे बताया कि यही नही जलवायु परिवर्तन, के चक्र को नियंत्रित कर उसके निराकरण के लिए हमारे देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने जन जागरुकता लाने के बहुउद्देशीय योजना"एक पेड़ माँ के नाम"से पूरे भारत देश में शुरुआत की ताकि मातृत्व स्वरूप वनों एवं उनके पेड़ पौधे, के प्रति लोगों में ममत्व के भाव के साथ जागरूकता बढे तथा अधिक से अधिक आम जन इस अभियान में सहभागिता सुनिश्चित करें रायपुर वन मंडलाधिकारी लोक नाथ पटेल आगे बताते है कि वनों के विस्तार उसके संरक्षण, संवर्धन के महात्वाकांक्षि उद्देश्य का युद्ध स्तर पर सी सी एफ अधिकारी एस मणिवासगन रायपुर के विशेष आदेश का अक्षरशः पालन करते हुए अनेक वन क्षेत्र सहित ब्लॉक स्तर पर कार्य जारी है जिसमें रायपुर वन मंडल अंतर्गत आरंग परिवृत के ग्राम पंचायत भलेरा के 18 हेक्टेयर आरक्षित ऑरेन्ज भूमि में लगभग 18 हजार मिश्रित पौधों का सफल रोपण कार्य वित्तीय वर्ष 2025-2026 जुलाई में संपादित किया गया जो आठ माह के अल्प आवधि काल में 99 प्रतिशत सफल रूप से सर्वाइव करते हुए लगभग आठ से दस फीट की ऊँचाई में ग्रोथ कर रहा है उन्होंने इसका संपूर्ण श्रेय मातहत अधिकारियों एवं मैदानी अमलों के कर्मचारियों को दी है
इसी तरतमय में रायपुर वन वृत के उप वन मंडलाधिकारी आनंद कुदरया से चर्चा मे उन्होंने बताया कि आरंग परिवृत् के ग्राम पंचायत भलेरा का ऑरेन्ज भूमि में शत प्रतिशत रिजल्ट आना अपने आप मे बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि विभागीय कर्तव्य निष्ठा अधिकारी,कर्मचारियों ने पूरी निष्ठा ईमानदारी, लगन से आठ माह में लगातार सुरक्षा देख रेखा और सिंचाई के लिए जुटे रहते है उन्होंने बताया कि भीषण अप्रेल माह में हरियाली के साथ पौधे सर्वाइव करने के पीछे सतत अधिकारियों की मॉनिटरिंग तथा नियमित उपचार एवं निंदाई गुडाइ प्रमुख है रायपुर उप वन मंडलाधिकारी आनंद कुदरया आगे बताते है कि संपूर्ण कार्य कैंपा मद से क्षतिपूर्ति वृक्षरोपण कार्य किया गया है जिसमें भारत माला परियोजना के तहत रायपुर वन मंडल अंतर्गत सड़क निर्माण में हुए क्षति ग्रस्त उन पेड़ पौधों के एवज में एक पेड़ की जगह दस पौधे का सफला रोपण किया गया है जो आज दिनांक तक लगभग अट्ठारह हजार पौधे पूरी तरह से स्वस्थ तरीके से ग्रोथ कर रहे है
किसी भी रोपण क्षेत्र की सफलता का मुख्य भूमिका (रीढ़ ) परिक्षेत्राधिकारी का होता है जिसके मजबूत कंधों में भूमि व्यवस्था से लेकर रोपण सुरक्षा उपचार केज्युवल्टी, तथा सतत मॉनिटरिंग से युवा अवस्था पहुंचे तक अनिवार्य रहता है वैसे भी कथित भलेरा रोपण क्षेत्र दस वर्षों के लिए रायपुर वन मंडल अंतर्गत अनुबंधित करार किया हुआ है इस महती दायित्व का बखूबी निर्वहन रायपुर वन मंडल के युवा परिक्षेत्राधिकारी चंद्र प्रकाश महोबिया कर रहे है पर्यावरण एवं प्रकृति प्रेमी होने की वजह से सप्ताह में दो से तीन बार प्लांटेशन,रोपण क्षेत्र फील्ड का मॉनिटरिंग कर दिशा निर्देश देकर समस्त व्यवस्था मुहैय्या कराते है ताकि रोपण पूरी तरह से सर्वाइव कर सके इस संदर्भ में रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र प्रकाश महोबिया बताते है कि सुरक्षात्मक दृष्टि कोण से भलेरा ग्राम के 18 हेक्टेयर भूभाग प्लांटेशन् को चारो ओर से मजबूत, चैनलिंक, जालीदार फैसिंग कर घेरा बंदी किया गया है ताकि मवेशी चराई एवं असमाजिक,शरारती तत्वों से प्लांटेशन को सुरक्षित रखा जा सके क्योंकि प्लांटेशन वन विभाग के जेरे निगरानी में दस वर्ष अवधि के लिए अनुबंधित है उन्होंने बताया इसके लिए दो चौकीदार रखे गए है जो अलग शिफ्टों मे रात दिन की ड्यूटी लगाई जाती है इनके अलावा प्रति दिन कार्यों की समीक्षा जैसे निंदाई गुडाइ, बारह घंटे सिंचाई के अनुसार छ से अधिक सुरक्षा श्रमिक प्रति दिन कार्यरत रहते है रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र प्रकाश महोबिया आगे बताते है कि भलेरा ग्राम के श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है स्थानीय श्रमिकों की उपस्थित से शरारती तत्व भी प्लांटेशन क्षेत्र में किसी प्रकार की असमाजिक गतिविधियां, नशा शराब, जुआँ, पौधों की कटाई इत्यादि से सुरक्षित हो चुका है रायपुर रेंजर चंद्र प्रकाश महोबिया आगे बताते है कि संपूर्ण कार्य कैंपा मद से सी एस आर के तहत क्षति पूर्ति वृक्षारोपण किया जा रहा है उन्होंने बताया कि वन भूमि या राजस्व भूमि में औद्योगिक घरानों द्वारा केबल या पोल खंबे, सड़क मार्ग निर्माण के दौरान पेड़,वन की क्षति होने पर आसपास क्षेत्र के रिक्त पड़त बन्जर भूमि के स्थान को कलेक्टर एवं आर आई के मध्यम से लिखा पढ़ी कर अधिग्रहित कर उक्त स्थान में क्षतिपूर्ति प्लांटेशन वृक्षारोपण कार्य संपादित किया जाता है इसका संपूर्ण व्यय औध्योगिक घराने से शासन के मध्यम से प्राप्त होता है
आरंग परिवृत के मुख्य प्रभारी संतोष सामंत राय है जो प्राकृतिक एवं पर्यावरण प्रेमी है उनके खून में ही वन के प्रति अगाध निष्ठा है इसका मूल कारण उनके पिता स्वय वन विभाग में कार्य करते हुए अपनी सेवाएं देकर समर्पित रहे है जो उनके भी रग रग में रचा बसा हुआ है वे बताते है कि क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण कार्य बहुत बड़ी चुनौती है जिसे हमारी आरंग टीम ने जिसमें मुख्यतः सहायक प्रभारी अभिजित भट्टाचार्य, सावन कुमार साहू, दौलत राम साहू, जैसे जांबाज सिपाही स्वीकार करते हुए मात्र एक वर्ष पूर्ण होने के पूर्व इसकी स्थिति प्रशंसनीय है इसकी मूल वजह बताते हुए आरंग मुख्य प्रभारी संतोष सामंत राय बताते है कि वृक्षारोपण क्षेत्र में सर्वाधिक सिंचाई,जल और सुरक्षा की आवश्यकता होती है जिसकी हमने प्रमुखता से व्यवस्था किया पश्चात छ सौ फीट की गहराई मे बोर उत्खनन करवाया गया जिसमें प्रचुर मात्रा में जल का श्रोत फुट पड़ा ऐसा भान होता है जैसे राजा भागीरथी की कठोर तपस्या के मानिंद हमें भी स्वर्ग से मां गंगा की जल धारा यहाँ फुट पड़ी हो जो आज भी प्लांटेशन क्षेत्र की क्षुधा,प्यास को तृप्त कर रही है यही नही रोपण क्षेत्र के मध्य में वहाँ एक तीस बाई तीस फीट का गहरा वाटर टैंक निर्माण किया गया जिसमे दस से बारह फीट जल आज की तिथि में संचय किया हुआ उपलब्ध है आरंग परिवृत के प्रभारी संतोष सामंत राय आगे बताते है कि संपूर्ण क्षेत्र के सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम निर्माण किया गया है जिसमे कर्मचारी लगातार बारह घंटे सिंचाई कर रोपण क्षेत्र में नमी बनाए हुए है
उन्होंने बताया कि इसमें करंज, ग्राफ्टेड जामुन, आँवला,आम, मौल श्री, अर्जुन,मोहोगनी पेल्टाफार्म, बरगद, पीपल, केसिया, समिया, बेहड़ा, दुबिया, कचनार्, मिलिया जैसे फलदार, फुलदार, औषधि युक्त मिश्रित प्रजाति के पौधे रोपे गए है आरंग प्रभारी एस सामंत राय आगे बताते है कि ग्राम भलेरा सरपंच और ग्रामीणों का पूर्ण सहयोग मिल रहा है साथ ही ग्राम क्षेत्र में कोटवार के मध्यम से मुनादि भी कराई जाती है ताकि ग्रामीणों में जन जागरूकता लाने प्लांटेशन क्षेत्र के आसपास ज्वलनशील पदर्थ, बीड़ी सिगरेट न फेके उन्होंने बताया कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से कोई कोताही बरती नही जा रही है चैन लिंक फैनसिंग के अलावा मुनारा निर्माण कराया गया ताकि गाय गरुआ मवेशी चराई को प्रतिबंधित किया गया है किसी आमजन के द्वारा रोपण के आसपास अतिक्रमण करने का कुत्सित प्रयास भी नही किया जा सकता
अग्नि सुरक्षा को लेकर बहुत ज्यादा संवेदनशील है सूखे घास फुस, खरपतवार की सफाई की गई उन्होंने बताया समय समय पर जैविक खाद, एन. पी. के. प्रोटीन डाल कर केमिकल छिड़काव् से मृदा को उर्वरा युक्त बनाया जाता है ताकि कीट सूक्ष्म जीवाणु का नाश हो तथा स्वस्थ्य पौधों का ग्रोथ हो सके यही बजह है कि रोपण क्षेत्र मे 99 प्रतिशत पौधे स्वस्थ्य होकर सर्वाइव कर रहे है एक प्रतिशत इसलिए कमी क्योंकि फूल और पत्तियाँ निकालने पर वानरों की टोली पौधों को क्षति ग्रस्त कर हानि पहुंचाते है जिन्हे गुलेल से भगाया जाता है रायपुर वन मंडल के आरंग परिवृत के समस्त वन कर्मी पूरी शिद्दत से क्षेत्र में अवलोकन कर निगरानी कर रहे है संभवतः वर्षा ऋतु की प्रथम फुहार से संपूर्ण रोपण क्षेत्र की हरियाली, उसके निरंतर ग्रोथ, और वन कर्मियों की मॉनिटरिंग, उपचार,रख रखाव, सुरक्षा से जिस तन्मयता से वन कर्मी इमानदारी पूर्वक कार्यों को संपादित कर रहे उसे देख कर यह ज्ञात होता है कि एक वर्ष पूर्ण होने के पूर्व इसकी एक अलग वन क्षेत्र सदृश्य दशा निर्मित करेगी और अन्य क्षेत्र के वन कर्मचारियों के रोपण क्षेत्र के मामले में उनके लिए साक्षात उदाहरण बन कर नई दिशा तय करेगी.



















































