*बस्तर विजन 2031*
*नए सपनों की उडान के साथ नया आयाम स्थापित करेगा*
अलताफ़ हुसैन
रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) वैश्विक मान चित्र मे छत्तीसगढ़ प्रदेश का सिरमौर कहे जाने वाला बस्तर किसी परिचय का मोहताज नही है आकुत् वन संपदा के साथ गौण गर्भा धरती मे लोह खनिज, बाक्साइट, तांबा सहित अनेक खनिज प्रचुर मात्रा में यहाँ मौजूद है यहाँ कि मनोहारी प्राकृतिक हरीतिमा चादर ओढे क्षेत्र को अत्यधिक आकर्षक बनाती है तो वही दूसरी ओर ऊँचे ऊँचे पर्वत माला की सेकडों फीट की ऊँचाई से वर्षा ऋतु की कल कल करती मधुर धवनि की जलधारा मानों प्रकृति की अपने खास अंदाज में स्वागत कर रही हो ऐसे विहंगम दृश्य देख कर सहसा सैलानियों, पर्यटकों, का मन रोमांचित हो उठता है उस पर बस्तर क्षेत्र में वर्षों से निवासरत वन वासियों, वन आदिवासियों की पारंपरिक धर्म,अध्यात्म संस्कृति का अनूठा ताल मेल यहाँ की आब ओ हवा को अलहदा बनाती है परंतु छ्ग राज्य निर्माण के साथ ही इस शांत,शालीन वातावरण बस्तर अबूझमाड के फिजा में कुछ राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों ने आशांति फैलाना प्रारंभ कर दिया जो बस्तर के माहौल मे कभी नाना प्रकार के रंग बिरंगी फल फूल, पतियों,चार महुआ के गमक से महका करता था वहाँ पर नक्सलियों की बन्दूक की गोली और बारुद की गंध ने सांस घोटु वातावरण में धुआं धुआँ होने लगा और बस्तर को पूरी तरह से अराजकता और आशांति का माहौल बना दिया लगातार निर्दोष, निरीह वन वासियों वनादिवासियों के रक्त से हरित बस्तर लाल मय हो गया तब केंद्र की डबल इंजन भाजपा सरकार के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी सरकार ने अमीर धरती के गरीब लोगों को विकास और उन्नति के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए योजना बद्ध तरीके से विजन 2031 तक समृद्धि और विकसित बस्तर के लिए कमर कस ली
बस्तर 2031 विजन का अगुवाई केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन एवं छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में द्रुत गति से बस्तर क्षेत्र का चहुंमुखी विकास किया जा रहा है इसके लिए माओवादियों का समूल नष्ट कर शांति स्थापित करना था जिसके लिए केंद्रीय बल के सहयोग से बस्तर के अनेक वन क्षेत्रों मे सघन अभियान चलाया गया तथा कुछ माह मे अनेक दुर्दांत नक्सलियों का सफाया किया गया जिनपर केंद्र और राज्य शासन ने लाखों का इनाम घोषित कर रखा था परिणामतः बंदूक छोड़ने एवं राज्य के द्वारा समर्पण की घोषणा का असर नक्सलवादियों पर हुआ तथा अलग अलग चरणों में बस्तर के शीर्ष माओवादियों से लेकर निचले स्तर के सैकडों माओवादी लोगो ने हिंसा का रास्ता छोड़ कर आत्म समर्पण किया वर्तमान में लगभग बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है फिर भी केंद्रीय बल द्वारा अनेक सघन वन क्षेत्रों में बिछाए गए माइंस,गोले बारुद , और हथियार की नियमित जांच जारी है जहाँ बड़ी संख्या में असलाह राजसात किया गया
*आवागमन के लिए पक्की सड़क*
विजन 2031 बस्तर क्षेत्र मे सर्व प्रथम आवगमन सुविधा बहाल करने की योजना बनाई गई है जो भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा एक 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है जो सीधे छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को आपस में जोड़ेगा अब बस्तर से दक्षिण राज्य में कुछ घंटों में आसानी से पहुंचा जा सकता है इसके लिए पक्की सड़कों के साथ साथ हवाई पत्तन भी विकसित किया गया है ताकि व्यापार उद्योग को बढ़ावा मिल सके नवीन सड़क मार्ग बहाल करने के लिए अवरुद्ध पहाडों, असमतल क्षेत्रों को काट कर निर्माण किया गया जो सीधे ओडिसा, दक्षिण राज्य को जोड़ेगा तथा आम जन द्वारा व्यापार उद्योग कार्यों को सरलता एवं सुगमता के साथ किया जा सकेगा इस संदर्भ में कुछ माह पूर्व आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी का कथन है कि बस्तर के आदिवासियों की औसतन आमदनी का लक्ष्य छ गुणा अधिक बढाना है इसके लिए व्यापार उद्योग के लिए निर्बाध गति से सुलभ अवगमन आवश्यक है जो पूर्णतः की जा चुकी है
*केंद्रीय योजनाओं का लाभ*
केंद्रीय योजनाओं का लाभ देने के उद्देश्य पुरा करने के लिए केंदीय बल के पचास से अधिक कैंपो को प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किये गए है जिसमें स्थानीय निवासियों सहित वाम पंथी धारा से जुड़े समर्पित नक्सलवादियों को आवास,रोजगार, विकास,उन्नति की मुख्य धरा से जुड़ने का मुहिम चलाया जा रहा है जिनमे ग्रामीणों सहित समर्पित माओवादियों को बैंकिंग, कम्युटर नेट वर्किंग सुविधा, कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, एवं शासकीय रूप से आधार कार्ड जैसी सुविधाएं सीधे ग्राम क्षेत्रों मे पहुंचाई जाएगी यही नही नियद नेल्लानार योजना के तहत 31 व्यक्तिगत योजनाएं जैसे आयुष्मान कार्ड, पी एम आवास योजना, वृद्धा पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा उसी प्रकार 14 सामुदायिक योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगारों को आत्म निर्भर बनाने के लिए दुग्ध डेयरी जैसी योजना जारी की गई है जिसके तहत एक गाय एक भैंस दिया जाएगा इसके विस्तार के लिए राज्य शासन राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड के साथ समझौता एमओ यू भी की है
*पर्यटन और संस्कृति*
पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नवीन परियोजनाओ में छ्ग के मुख्य मंत्री विष्णु देव साय जी के कुशल मार्ग दर्शन में एवं वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में वन विभाग द्वारा सुकमा जिले के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र का निर्माण कराया गया है जो आज आत्मनिर्भरता का एक वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है।सुकमा नगर से महज 1 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल, जो कभी उपेक्षित और जर्जर था, अब प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक बदलाव का संगम बन चुका है। वन विभाग ने जर्जर हो गयी संरचनाओं को पुनर्जीवित कर यहाँ एक आकर्षक टापू और पर्यटन केंद्र विकसित किया है, जो न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के पर्यटकों को भी अपनी ओर खींच रहा है। इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का 'तुंगल नेचर कैफे' है, जिसे 'आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह' की 10 जांबाज महिलाएँ संचालित कर रही हैं। वन मंत्री केदार कश्यप की सोच के अनुरूप, समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के इस अभियान में उन 5 महिलाओं को शामिल किया गया है जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़ आत्मसमर्पण किया है, साथ ही 5 ऐसी महिलाएँ भी हैं जो स्वयं नक्सल हिंसा की पीड़ित रही हैं। इन महिलाओं को जगदलपुर और सुकमा के प्रतिष्ठित संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण दिलाकर पेशेवर रूप से काम करने के लिए तैयार किया गया है। इसके अलावा चित्रकोट का जल प्रपात वैश्विक मानचित्र में विख्यात है वही कांगेर घाटी स्थित तीरथगढ़ जल प्रपात अपनी प्राकृतिक कलात्मक चट्टान से अनूठी लहरदार जल धारा के लिए पहचानी जाती है जो नयनाभिराम के साथ ही वीडियों ग्राफी और फोटो ग्राफी के लिए उपयुक्त मानी जाती है बस्तर विजन 2031 में अनेक स्थल का चयन कर इन पांच वर्षों में बहुत से पर्यटन स्थल विकसित किये जाएंगे जिससे देश सहित विदेशी सैलानियों को आकर्षित किया जाएगा राज्य सरकार का पर्यटन को बढ़ाने के पीछे मूल उद्देश्य वन क्षेत्रों मे निवासरत महिला, पुरुष, वन वासियों वन आदिवासियों को उनके आय का श्रोत बढ़ाना है ताकि बिचौलिए एवं ठेकेदार के अधीन रहकर वनोपज मात्र पर निर्भरता न रहे बल्कि वे शासन द्वारा रोजगार मूलक कार्य करते हुए आत्मसमान के साथ स्वावलंबी की ओर अग्रसर रहे ताकि उनका आय में दिन दुनी रात चौगुनी वृद्धि हो सके
धार्मिक,एवं सांस्कृतिक महत्व में भी बस्तर पिछडा नही है यहाँ पर दंतेश्वरी माता सबसे प्राचीन मंदिरों मे से एक है जहाँ महाराज प्रवीर चन्द्र भंजदेव के पूर्व कालिक राजाओं का उपासना स्थल का केंद्र बिंदु रहा है जहाँ बस्तरिया आदिवासी उन्हे भगवान तुल्य मानते है वही बुढा देव सबसे अधिक पूजे जाने वाले आराध्य देवता है जिनकी सब घरों में आस्था के साथ पूजा जाता है बस्तर जगदलपुर का दशहरा विश्व प्रसिद्ध है जहाँ प्रति वर्ष देश विदेश के लाखों पर्यटक इसे देखने यहां आते है जो साझा संस्कृति की पहचान है
*विजन 2031 तक लगेंगे बड़े उद्योग*
विजन 2031 बस्तर में अनेक उद्योग लगा कर अमीर धरती के किसान पुत्रों को सामाजिक,आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से आधुनिक वैज्ञानिक सोच उन्नतशील विकास के साथ मुख्य धारा से जुड़ाव हेतु राज्य शासन दृढ़ संकल्पित है जिससे भावी युवा पीढी मे उन्नत कृषि के साथ अत्याधुनिक उद्योग को बढ़ावा देना प्रमुख लक्ष्य रखा गया है ताकि ऐसे उत्पादित कंपनियों के साथ स्व रोजगार हेतु लघु उद्योग निर्माण कर भारत देश के उन्नति, प्रगति मे सहभागिता सुनिश्चित किया जा सके केवल सीमेंट, लौह उत्पादन, प्लास्टिक इत्यादि तक सीमित नही रहना बल्कि स्वस्थ्य की ओर भी बेहतर उपाय प्रदान करने पर विचार किया जा रहा है स्वस्थ्य, उत्पादान, फार्मेसी, मैनुफैक्चर, निर्माण, के अलावा व्यापार के लिए खुला बाजार निर्मित करने सरकार हर संभव प्रयास करेगी जिसका गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन का लाभ स्थानीय लोगो के साथ आस पास राज्यों के व्यापारियों के लिए भी खुला बाजार उपलब्ध कराया जाएगा
अमूमन लघु और मंझोले करोबारी अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करते है परंतु कुछ माह पूर्व छ्ग शासन एवं राज्य उद्योग विभाग द्वारा बैंगलूरु, बस्तर,इनवेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम किया गया था जिसमें यह बताया गया था कि छग मे कंपनियों के उत्पादन एवं कम खर्च में अधिक लाभ प्रदेश मे मिलेगा तब यहाँ की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मे अमूलचुल् सुधार होगा एक प्रकार से राज्य शासन एवं पूंजी निवेशक कंपनियों के परस्पर गठजोड़ से राज्य सरकार क्षेत्र मे उद्योग का एक नए युग का सूत्रपात करने जा रहा है जिसमे पूर्ववत प्राप्त होने वाली सीमेंट, प्लास्टिक सहित अन्य निर्माण लौह उत्पादन से इतर ऐसे रोजगार मूलक उत्पादन, स्वस्थ्य सेवा, फूड पार्क, क्षेत्र एवं अन्य कंपनियों को प्राथमिकता से स्थानीय लोगो को मिलने लगेगा जिससे भावी छ्ग राज्य एक नवीन उत्पादक उद्योग के रूप में विकसित होगा इस संदर्भ में छ ग स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के (एम. डी.) प्रबन्ध संचालक विश्वेश झा (आई.एफ.एस.) से भी चर्चा की गई जो सदैव नवीन योजनाओं के साथ ही कुछ नया करने की सोच के साथ नया अध्याय रचते आ रहे है
उन्होंने बताया कि विदेश जापान में भी इनवेस्टर मीट कार्यक्रम में सम्मिलित होकर जापानी कंपनियों के साथ बैठकें की गईं。 आईटी, टेक्सटाइल्स, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में निवेश पर चर्चा किया गया था उन्हे राज्य भर के चिंहित जिलों में उद्योग लगाने आमंत्रित किया गया था राज्य शासन द्वारा दी जाने वाली सुविधा के संदर्भ में बताया आगे बताया गया था जिसमें वृहद स्तर पर रिक्त भूमि क्षेत्र है जिस पर अनेक उद्योग का परिचालन किया जा सकता है इसके लिए समस्त प्रकार के प्रौद्योगिकी, स्वस्थ्य सेवाएं, एवं मैंन्यूफैक्चरिंग उत्पादक कंपनियों सहित निवेशकों को छ्ग प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आमन्त्रित किया और उनसे अन्य नवीन उद्योग परियोजनाओं पर चर्चा की एम. डी.श्री विश्वेश झा ने आगे बताया कि इलेक्ट्रानिक अथवा वैज्ञानिक टेकनिक से नव निर्माण उत्पादनों को प्राथमिकता के साथ छ्ग प्रदेश मे अनेक कंपनियों को आमंत्रित किया गया है जैसे मोबाइल, टीवी उत्पादन एसी, इलेक्ट्रीकल, आईटी, टेक्सटाइल्स, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में निवेश के साथ ही उत्पाद सामाग्री के कल पुर्जों, फूड पार्क का निर्माण भी शामिल किया गया है उन्होंने इलेक्ट्रानिक उत्पाद के बारे मे आगे बताया कि आज जो स्थानीय बाजार मे बड़ी टी वी अथवा अन्य इलेक्ट्रिक वस्तुओं का बाजार मूल्य लगभग एक लाख रुपये होती है उसका स्थानीय छ्ग प्रदेश मे उत्पादन से चालीस से पचास हजार मे सहजता से उपलब्ध हो जाएगी छग स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के एम डी.विश्वेश झा आगे बताते है कि रोजमर्रा मे उपयोग् होने वाली वस्तु जैसे कपड़ा उत्पादन एवं रेडिमेट कपड़ों के लिए पृथक उद्योग निर्माण करने की जरूरत है उन्हे भी माननीय मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा आमंत्रित किया गया है
संभवतः हम भले इक्किसवी सदी में चांद और सूरज की दूरी नापने मे सफल रहे है परंतु बस्तर आज भी धर्म संस्कृति के मामले मे भले आगे हो परंतु विकास, उद्योग के मामले मे वह आज भी लालटेन युग में जी रहा है कुछ अपवाद स्थल छोड़ दिया जाए तो यहाँ के सघन वन क्षेत्रों के निवासी बगैर बिजली, सड़क, स्वस्थ्य, शिक्षा, उद्योग, व्यापार जैसी मूलभूत, अधोसंरचना, सुविधा, एवं समस्या के मामले में कोसो दूर है उपर से नक्सल वाद ने उनके विकास के मार्ग पर कील ठोक दी जो दशकों तक थमा रहा अब वर्तमान केंद्र की सरकार एवं छत्तीसगढ़ की सरकार ने नक्सलवाद का समूल नष्ट कर बाधित मार्ग अवरोधक को दूर कर उन्नति,विकास, प्रगति, का मार्ग प्रशस्त कर दिया इसमें सब का साथ सब का विकास की तर्ज़ पर नए उद्योग, कृषि, स्वस्थ्य, शिक्षा, व्यापार, के द्वार खोल दिये है निश्चित रूप से केंद्र और भाजपा शासित छ्ग राज्य का ड्रीम प्रोजेक्ट बस्तर विजन, 2031इन पांच वर्षों तक शिक्षा स्वास्थ्य, व्यापार,उद्योग, रोजगार, जैसे एक नए सपनों की उडान के साथ एक नया आयाम स्थापित करेगा









































