मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक पद पर तेरह वर्षों से रवि महमल्ला अंगद के पांव की तरह जमा कर बैठा
अल्ताफ हुसैन
रायपुर (फॉरेस्ट काइम न्यूज़) छग वन एवं परिवर्तन विभाग जहाँ पर्यावरण एवं प्रकृति के लिए वरदान समझा जाता है तो वहीं कुछ लोगों की भ्रष्ट कार्य शैली की वजह से अभिशाप भी बन जाता है तथा आम जन के समक्ष उसकी स्वच्छ छबि मे दाग लगने के साथ ही कई सवाल भी उठने लगते है जैसा की वर्तमान में पूरे विभाग में बहुत से ऐसे वन कर्मी है जो वर्षों से एक ही स्थान पर मलाई दार जगह पर जमे रहकर वन विभाग के नियम कानून की धनिया बो रहे है जब कि वन अधिनियम यह कहता है कि कोई भी ओहदे दार वन कर्मी एक ही कार्य स्थल क्षेत्र में तीन वर्षों से अधिक समय तक एक ही स्थान पर जमा नही रह सकता त्तथा तीन वर्षों के पश्चात विभागीय स्तर पर उसे अन्यंत्र तबादला किया जाता है जिसका अक्षरशः अनुपालन करना प्रत्येक वन कर्मी अधिकारी का नैतिक दायित्व एवं कर्तव्य बनता है परंतु यहां कुछ ऐसे भी दीमक रूपी वन कर्मी है जो वन विभाग के आर्थिक जड़ को भीतर ही भीतर खोखला कर रहे है वे वर्षों से एक ही स्थान पर अंगद की पांव की तरह जमें हुए है जिसे कोई भी वरिष्ठ अधिकारी उनके जमा पांव को टस से मस नही कर सकता इसकी वजह यह भी बताई जाती है कि पदोन्नति या ट्रांसफर होने पर एक बहुत बड़ा खेल लेनदेन का हो जाता है जिसकी वजह से बहुत से वरिष्ठ एवं कनिष्ठ प्रतिभाशाली वन कर्मी अधिकारीयों का क्रमोंन्नति नही हो पाती तथा ऐसे मलाईदार कर्मी मौज उड़ाते रहते है ताजातरीन मामला मुख्य वन संरक्षक रायपुर वन वृत से जुड़ा हुआ है जहाँ एक ही व्यक्ति विगत तेरह वर्षों से मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय में एक ही स्थान पर जमा हुआ है आश्चर्य की बात यह है कि दो बार पदोन्नति होने के बावजूद भी उसे अब तक उसके पद से हटाया नही गया बताया जाता है की कथित वन कर्मी इस तेरह वर्षों में एक ही पद मे रहते हुए उसने अब तक लाखों, करोङों की आकुत् संपत्ति एकत्रित कर ली है
यह संपूर्ण हैरान करने वाला मामला रायपुर मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला की है जो विगत तेरह वर्षों से मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत कार्यालय में जमा हुआ है यह संपूर्ण जानकारी का खुलासा तब हुआ जब किसी ने सूचना के अधिका लगा कर जानकारी प्राप्त की हमें मिले पत्र के अनुसार निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला 26/12/2013 में पदस्थ हुआ जो वर्ष 2026 को तेरह वर्ष पूर्ण होने जा रहा है जबकि इन तेरह वर्षों में उसे दो बार पदोन्नति मिली जिसे उसनें ठुकरा कर यथावत उसी स्थान एवं पद पर काबिज रहा जबकि शासन के वन अधिनियम यह कहता है कि कोई भी कर्मचारी तीन वर्षों तक उसी स्थान एवं पद में बना नही रह सकता इससे ज्ञात होता है कि मलाई दार स्थान में रहते हुए रवि प्रकाश महमल्ला ने अपने पद प्रतिष्ठा सब को दांव पर लगा कर उसी स्थान में रहना उचित समझा इस संदर्भ में यह भी बताया जाता है कि कोई भी वन कर्मी पदोन्नति के लिए रात दिन पापड़ बेलते रहते है कि किसी भी तरह से उनका प्रमोशन हो जाए परंतु मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला उसी स्थान और पद की लालसा ने उसे दूर नही करने दी वन कर्मचारियों के मध्य उसके तेरह वर्षों तक एक ही स्थान पर जमा रहने के पीछे बहुत सी बातों की चर्चा, एवं कयास सरेआम की जा रही है कि यहाँ पांच वन मंडल कार्यालयों से रोजाना सैकडों वन कर्मी आते है
जिनसे बहुत बड़ी धन राशि लेनदेन की सैटिंग उसी के मध्यम से होती है यही वजह है कि निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला उक्त पद को छोड़ना नही चाहता यह भी चर्चा आम है कि प्रति माह उपर पहुंचाने के बाद अपने लिए न्यूनतम वह दो से चार लाख रुपये बड़ी सहजता से कलेक्शन कर लेता है तथा उसकी पचास हजार की सैलरी यथावत रहती है सूचना के अधिकार में जब आवेदक ने उसके चल अचल संबंधी से जानकारी मांगी तब वह स्वयं जन सूचना अधिकारी बन कर बगैर सत्यापित कर आवेदक को गोलमोल जानकारी देकर गुमराह करने का प्रयास किया गया पुनः मुख्य वन संरक्षक में जानकारी मांगी गई तब जन सूचना अधिकारी ने तीन पृष्ठीय स्यापित प्रति प्रदान की गई जिसमें भी उसके द्वारा कमल विहार में एक पलाट होने की जानकारी दी जबकि नए नियम के अनुसार सभी विभाग के कर्मचारी एवं उनके परिवार के नाम कितनी संपति है लिखित में ऑन लाइन जानकारी देना अनिवार्यतः है परंतु ऐसे इंकम टैक्स की चोरी करने वाले कर्मचारी ऐसी महात्वपूर्ण जानकारी को विलोपित कर देते है
जबकि ज्ञात हुआ है कि मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला के पास चल संपत्ति में नगद के अलावा अचल संपत्ति में प्लाट चार पहिया गाड़ी, दो पहिया गाड़ी,स्वर्ण रजत के अलावा अनेक विलुप्त बेनामी संपत्ति अपने, रिश्तेदार, परिजन के नाम अर्जित कर रखी है जिसका आवेदक द्वारा मांगे गए सूचना के अधिकार में उसके द्वारा संपूर्ण जानकारी नही दी गई केवल गुमराह करने के उद्देश्य से सतही तौर पर जानकारी दी यही नही आवेदक ने प्रदेश के मुख्य मंत्री को भी शिकायत की गई तब भी उस पर कोई कार्यवाही नही की गई है अब आवेदक संपूर्ण जानकारी न मिलने पर ई. डी. एवं ई ओ डब्ल्यू को पत्र लिख कर न्यायालय के शरण में जाने की बात कह रहा है यही नही राशि कलेक्शन के लिए निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला द्वारा अवकाश के दिन में सर्किल में घूम घूम कर राशि कलेक्शन करता है जहाँ मुर्गा दारू सहित अनेक कार्य में जुटा रहता है यही नही हाल ही में ड्रायव्हर सीधी भर्ती में गुणा भाग कर अपने किसी ग्राम क्षेत्र के रिश्तेदार भतीजे को भी गरियाबंद, वन मंडल कार्यालय में फीट करवा दिया इसका परिणाम यह हुआ कि छ माह में ही वहाँ के एस डी ओ मनोज चंद्राकर को कार्यालयीन अवधि समाप्त होने के बाद ड्रायवर शासकीय गाड़ी का दुरूपयोग करते हुए रायपुर छोड़ने गया था जहां वापसी में गरियाबंद वन मंडल की शासकीय वाहन की किसी अन्य वाहन से जबरदस्त टक्कर हुई जिसमें गाड़ी की क्षति तो हुई ही साथ ही नव चालक ड्रायवर के घुटने में गंभीर चोट आई अब सवाल यह उठता है कि छ मासी नव पदस्थ ड्रायव्हर जिसने शासकीय वाहन को क्षति ग्रस्त कर लाखों की चोट पहुंचाई थी उसका भुगतान शासन करेगी या एस डी ओ मनोज चंद्राकर करेंगे? क्योंकि ड्रायवर से पूछ ने पर बताया कि उन्हे रायपुर आवास छोड़ने के पश्चात शासकीय वाहन लेकर वह वापस गरियाबंद आ रहा था तभी दुर्घटना हुई थी
बताते चले कि गरियाबंद एस डी ओ मनोज चंद्राकर वही है जिन्होंने बागबाहरा 2017- 2018 में रेंजर रहते हुए अनेंक भ्रष्टाचार के नए आयाम स्थापित किये है वहाँ उन्होंने वनोपज सहकारी समितियो के लाखों नही बल्कि करोड़ों रुपये राशि का आहरण कर घोटाले,गबन कर अंजाम दिया था तथा वही बागबाहरा क्षेत्र मे गिट्टी क्रेशर फैक्ट्री खड़ी की थी जिसकी गूंज तत्कालिक बागबाहरा विधायक ने विधान सभा में सवाल भी उठाया था जिसे उन्होंने ले दे कर मामले को सुल्टा लिया था यही नही गरियाबाद वन मंडल के आखरी हिस्से में दस से बारह करोड़ों का अक्सिजोन तैयार करवाया था जिसमें भी भ्रष्टाचार का लंबा खेल किया गया था यदि विभाग इसकी सुक्षमता से जांच करती है तो इनके बहुत बड़े बड़े घोटाले, भ्रष्टाचार, गड़बड़ झाला की तथ्य एवं सत्य परक फेहरिस्त खुल सकती है जिसमे बहुत बड़ा खुलासा हो सकता है इसकी भी जानकारी सूचना के अधिकार में मांगी जाएगी इन सब कर्म कांड की लीपा पोती करने में रायपुर मुख्य वन संरक्षक वृत रायपूर के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला का पूर्ण सहयोग प्राप्त है बताया जाता है कि निज सहायक रवि महमल्ला का दौरा लगातार अवकाश के दिनों में गरियाबंद सहित सर्किल में रहता है
उसी प्रकार मनोज चंद्राकर भी जब भी रायपुर प्रवास में रहते है तो कार्य न होने पर विधान सभा स्थित मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में अवश्य जाते है एवं सारा गुणा भाग तय किया जाता है क्योंकि वे नाम के लिए मैनपुर एस डी ओ है बाकी समस्त कार्य वे यही गरियाबंद में बैठ कर करते है तथा किस योजना में कितना भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला करनें की युक्ति तैयार करते है क्योंकि उन्हें भी वर्ष 2019 -2020 से सात आठ वर्षों से एक ही वन मंडल कार्यालय में जमी हुए है संभवतः यही से वे रिटायर भी हो सकते है यदि विभाग उनके अंदर में वहाँ गरियाबंद में कितनी समितियां है उसका ही अवलोकन कर जांच किया जाए तो सारी सत्यता सामने आ जाएगी वैसे ही निज सहायक रवि महमल्ला जैसे दो चार और हो जाएं तो वन विभाग का बंटा धार होना तय है यही नही वह इतना अधिक चर्चित हो चुका है कि इसके भ्रष्टचार की आंच अब उपर बैठे वरिष्ठ अधिकारियों पर भी आनी शुरू हो गई है.




















































