शनिवार, 9 मई 2026

सीमित साधन में असीमित संभावनाएं तलाश करता वन अनुसंधान विस्तार का मुरा नर्सरी

 सीमित साधन में असीमित संभावनाएं तलाश करता वन अनुसंधान विस्तार का मुरा नर्सरी




  अलताफ़ हुसैन



रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) प्रदेश में ऐसे अनेक पौधशाला अर्थात नर्सरी  मौजूद है जहाँ बीजों से अंकुरित कर उसकी सुरक्षा देखभाल,विकास उन्नति करते हुए नन्हे पौधों का उपचार कर स्वस्थ पौधे विकसित करना एवं उसका विक्रय करना मुख्य उद्देश्य माना जाता है यही नन्हे पौधशाला वाली नर्सरी वाली स्थिति मानव समाज में तीन से पांच वर्षीय बच्चों के उपर भी लागू होता है जिसमें अबोध बच्चों के, शरीरिक, मानसिक,बौद्धिक शैक्षणिक विकास हेतु ए. बी. सी. डी. एवं क. खा. ग. घ. जैसेअक्षर एवं छाया चित्र ज्ञान का पठन,पाठन करवा कर नर्सरी शब्द को परिभाषित करता है उसी प्रकार बीज से रूट शूट एवं अन्य पृथक पौधों की कलम को एक साथ जोड़ कर ग्राफ्टिंग विधि से उपचार कर नए पौधों का रोपण एवं उन्नत किस्म के फल, फूल, औषधि का नव निर्माण उपज कर उसका सर्वाईव करना उसी नर्सरी का मुख्य कार्य होता है जिसे हम आज छत्तीसगढ़ वन एवं परिवर्तन विभाग के वन अनुसंधान विस्तार वन मंडल के रूप में पहचानते है जो विगम कुछ वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ (पूर्व मध्य प्रदेश काल) में सामाजिक वानिकी रोपण कार्य के प्रमुख स्त्रोत के रूप रूप से  पहचाना जाता था तत्कालिक सामाजिक वानिकी प्रभाग'द्वारा संपूर्ण छ्ग प्रदेश में रोपण प्रबन्धन की मुख्य इकाई मानी जाती थी । यह प्रभाग वन क्षेत्रों के बाहर, जैसे कि बंजर भूमि, सड़कों, नदी, पोखर, नहरों के किनारे , सामुदायिक जमीनों पर वृक्षारोपण और वनीकरण के कार्यों के लिए जिम्मेदार था। परंतु बदलते परिवेश में वृक्षारोपण, प्लांटेशन एवं नर्सरी में बीज, रूट शूट सहित ग्राफ्टेड नवीन उत्पादित पौधों का आधुनिकरण तकनीक से उपज लेकर सीमित संसाधन से असीमित संभावनाओं को चरितार्थ कर वनअनुसंधान विस्तार वन मंडल द्वारा एक नया इतिहास रच कर अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कर रहा है


यही वजह है कि शासकीय योजनाओं में पौधे वितरण के अलावा मांग और मंशा अनुरूप क्रय विक्रय कर समस्त चिंहित क्षेत्रों में हरियाली प्रसार करना इसका मुख्य उद्देश्य हो चुका है ग्रामीण क्षेत्रों के पडत भाटा की बंजर भूमि सहित अन्य भूमि में ऐसे अनेक क्षेत्र है जहाँ के वन एवं अनुसंधान विस्तार वन मंडल द्वारा रोपे गए अनेक प्लांटेशन अपनी हरित आभा से आम जन को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब रहा है 

         वन अनुसंधान विस्तार रायपुर डिविजन के डीएफओ लोकनाथ पटेल से चर्चा करने में उन्होंने बताया की रायपुर डिविजन के अंतर्गत वन अनुसंधान विस्तार के इकाई  द्वारा ऐसे बहुत से प्लांटेशन लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर रहे है  जिनमें मुख्यतः राजिम नवापरा कसडोल कुरुद,में नदी के समीप वृक्षारोपण इकाई चंद्रखुरी असौदा के मध्य प्लांटेशन सहित ग्राम छतौद सहित बहुत से क्षेत्र है जहाँ छ्ग राज्य वन अनुसंधान विस्तार केंद्र द्वारा प्लांटेशन किया जा चुका है तथा वे आज भी स्वस्थ्य पौधे लगातार ग्रोथ कर रहे है मजे की बात यह है कि कथित प्लांटेशन क्षेत्रों में जहाँ भी वन अनुसंधान विस्तार वन मंडल द्वारा प्लांटेशन कराए गए वे सब ओरेंज, खुश्क पथरीली मुरुमी भूमि रहे है जहाँ के आश्चर्य जनक परिणाम सामने आए है श्री लोकनाथ पटेल बताते है कि नर्सरी के मध्यम से अनेक विलुप्त प्रजाति पौधों का संरक्षण संवर्धन कर अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के नर्सरी में किया जाता है इसके लिए बाकायदा विधान सभा मुख्यालय एवं गोढी नर्सरी में विलुप्त प्रजाति के पौधों का पुनःरुत्पादन हेतु लैब भी मौजूद है जहाँ वैज्ञानिक तरीके से ऐसे विलुप्त पौधों का निर्धारित तापमान में उपज की जाती है पश्चात नर्सरी में जैविक खाद  उपचारित कर नियमित सिंचाई से उसके प्राकृतिक रूप से सर्वाईव कराया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप उन्नत किस्म के स्वस्थ्य आकर्षक पौधे प्राप्त होता है जिसे भिन्न भिन्न क्षेत्रो में मांग अनुसार विक्रय या वितरण किया जाता है वन अनुसंधान विस्तार के डीएफओ. लोकनाथ पटेल आगे बताते है कि पूर्व छत्तीसगढ़ में संपूर्ण वानिकी कार्यों का संपादन सामाजिक वानिकी( वर्तमान में अब वन अनुसंधान विस्तार संस्थान) के मध्यम से ही किये जाते थे परंतु छ्ग वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने अब यह कार्य मूल रूप से कर रहा है जिसकी वजह से वनों का लगातार विस्तार भौतिक रकबा में बढ़ोतरी देखी जा रही  है 


           छ्ग राज्य वन अनुसंधान प्रशिक्षण विस्तार केंद्र के युवा ऊर्जावान, कर्मठ,लगन शील एस डी ओ तरुण तिवारी नित नवीन योजनाओं के मध्यम से अनेक कार्य योजनाएं तैयार कर विभाग की नई दिशा तय कर रहे है  इसके तहत कुरुद्  क्षेत्र में  नवीन कार्यालय भवन सहित नए प्लांटेशन करने की तैयारी भी की जा रही है संभवतः वर्षा ऋतु के पूर्व मई जून मे बहुत से क्षेत्रों में भूमि तैयारी व्यवस्था भी प्रारंभ हो जाएगी एस डी ओ तरुण तिवारी आगे बताते है कि हमारे बहुत से प्लांटेशन बेहतर स्थिति मे है इसका उदाहरण देखना है तो मुरा ग्राम मुख्य सड़क मार्ग स्थित वन अनुसंधान विस्तार वन मंडल का पचास हेक्टेयर क्षेत्र मे लगभग दस हेक्टेयर भूभाग क्षेत्र स्थित अट्ठाइस वर्षीय सागौन प्लांटेशन देख सकते है  जिसकी अनुभूति किसी वन क्षेत्रों मे भ्रमण समतुल्य भान कराता है इन्होंने आगे बताया जहाँ अलग अलग क्षेत्रों में भिन्न भिन्न प्रजाति के मिश्रित पौधों की तैयारी नर्सरी में की जाती है जिसमें मुख्यतः पांच हेक्टेयर में आँवला बीस हेक्टेयर भूभाग में मिश्रित प्रजाति की किस्में मौजूद है पांच हेक्टेयर में ख्महार, एवं दस हेक्टेयर भूभाग में सागौन बीज से उत्पाद कर रूट शूट से तैयार किए जाएंगे उन्होंने बताया कि बीज गोढी जोरा उधान क्षेत्र   नर्सरी में शिड तैय्यार किया जाता है इसकी आयु के संदर्भ में एस डी ओ तरुण तिवारी  बताते है कि  सागौन का फल बगैर टिंटमेंट के उत्पाद नही किया जा सकता उसे बहुत से प्रोसेस से गुजरना पढ़ता है उन्होंने सागौन के बेहतर स्वस्थ्य बीज  की पहचन उसके कष्ठों में उभरे वलय धारी लहर से उसकी सटीक आयु सुनिश्चित कर आंकलन किया जाता है सागौन में यह प्राकृतिक प्रक्रिया एक वर्ष पश्चात उसके काष्ठों में वलय बनना प्रारंभ हो जाता है 

        अट्ठाइस वर्षीय सागौन प्लांटेशन के संदर्भ में चर्चा करने पर अनुसंधान विस्तार वन मंडल के उप वन क्षेत्र पाल  तेजा सिंह साहू बताते है कि ग्राम मुरा का कथित सागौन प्लांटेशन विभाग के लिए बहुत बढ़ी उपलब्धि है यही नही वर्ष 1920-2021 का ग्राम छतौद का मिश्रित प्लांटेशन भी शत प्रतिशत स्थिति में सक्सेस है वहाँ जाने पर जब हमने उसकी स्थिति देखी गई तो विश्वास नही हुआ कि ये वही मिश्रित प्लांटेशन है जिसे हमारे सामनें पांच वर्ष पूर्व किया गया था हाल फिलहाल जब उसका मुआयना किया गया तो सभी पौधे लगभग बारह से चौदह फीट की ऊँचाई में अपना कद पार कर लहलहते हुए मस्ती में झूम रहे थे अप्रेल, मई की पैंतालिस डिग्री के झुलसा देने वाले तीव्र तापमान में भी उनकी हरियाली में कोई परिवर्तन नही दिखा इसकी वजह पूछने पर अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के नर्सरी प्रभारी वन क्षेत्र पाल तेजा सिंह साहू बताते है कि नियमित देख रेखा सुरक्षा एवं समय पर उपचार, केज्युवल्टी, सिंचाई इसका शत प्रतिशत सर्वाईव करना मूल कारण है ग्राम छतौद के अंतिम क्षेत्र के ओरेंज भूमि में दो भागों में पच्चीस हेक्टेयर भू भाग मे वर्ष 2020-2021 में 27500 मिश्रित प्रजाति के पौधे जिनमें मुख्यतः सागौन, नीम, बेहड़ा, आँवला, शिशु, बांस,इमली, कचनार, सहित अन्य पौधों का रोपण किया गया था जिसमें स्थानीय छतौद ग्रामवासी जिला पंचायत सदस्य स्वाति वर्मा के विशेष सहयोग प्राप्त मिलता रहा उन्होंने बताया नए पुराने सरपंच सदस्य सहित ग्राम क्षेत्र में कोटवार के मध्यम से मुनादी भी कराई जाती थी विशेष कर होली के समय विशेष निगरानी की जाती थी छतौद  प्लांटेशन के बारे मे उन्होंने आगे बताया कि एक बोर खनन किया गया था जिसके लिए विद्युत सौर ऊर्जा से लिया जाता था वर्तमान मे एक चौकीदार रात दिन निगरानी करता है इसका मुख्य कारण यह भी है कि चारो ओर लगाए गए फैनसिंग तार की चोरी एवं पौधों की नियमित सुरक्षा होती रहे 

             श्रमिकों के संदर्भ में पूछने पर अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के वनपाल गणेश राम वर्मा बताते है कि मुरा, माठ, ग्राम के श्रमिकों को लगातार रोजगार उपलब्ध कराया जाता है यदि कार्य अधिक होने पर मोहरेंगा ग्राम से अतिरिक्त श्रमिकों को बुलाया जाता है जिन्हे कलेक्टर मनरेंगा दर से भुगतान किया जाता है वन पाल गणेश राम वर्मा आगे बताते है कि स्थानीय नर्सरी में दस हेक्टेयर भू भाग मे पौधों की तैयारी की जा रही है जिसमें मुख्यतः नीम, टीकोमा, जामुन, गुलमुहर,इमली, कचनार, सागौन, बांस, अमरूद, लेमन ग्रास, कटहल, सितफल, शहतूत, दश्मत, पेल्टाफार्म, सिंदूरी, पीपल, अर्जुन, हर्रा,बेहड़ा, बादाम, काइत, बुहार का पेड़, नींबू, अनार, जैसी मिश्रित पौधे लगाने का लक्ष्य है जिसमें चालीस हजार पौधों का वितरण करना है तथा आगामी वर्ष के लिए अट्ठारह हजार पौधे वितरण का लक्ष्य दिया गया है जिसकी तैयारी जोर शोर से जारी है स्थानीय सिंचाई के लिए उन्होंने बताया एक बोर संचालित है जिससे मैनेज किया जाता है टैंकर के मध्यम से प्लांटेशन में सिंचाई की जाती है कुछ टंकियाँ नर्सरी में भी निर्मित है जिसमें पानी संचय किया जाता है वही उन्होंने बताया कि स्थानीय नर्सरी मे तीन चौकीदार है जो सतत निगरानी एवं सुरक्षा में लगे रहते है वही लगभग 22 श्रमिक नियमित वानिकी कार्यों में लगे रहते है यह संख्या समय अनुसार अधिक भी होती है लगातार ग्रीष्म ऋतु व वर्ष ऋतु से श्रमिकों के बचाव के लिए शेड निर्माण का प्रस्ताव दिया गया है


 
       
 अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के मूरा नर्सरी के प्रभारी सूर्यकांत भू आर्य एवं उनके सहयोगी विजयासन प्रसाद साहू बीज उधानिकी क्षेत्रों प्रभारी ने बताया कि स्थानीय नर्सरी में लगातार बीज सहित रूट शूट एवं अन्य प्रजाति के पौधों का लगातार तैयारी चल रही है क्योंकि दो माह बाद वर्षा ऋतु प्रारंभ हो जाएगा उसी समय बहुत से सामाजिक शैक्षणिक एवं उद्योगिक  घरानों द्वारा पौधा रोपण  की मांग की जाएगी इसके लिए द्रुत गति से बीज पौधा रोपण कार्य जारी है ताकि निर्धारित अवधि में मांग पूरी की जा सके इसके लिए स्वस्थ्य पौधों की आपूर्ति हेतु उनका भौमिक आहार खाद आवश्यक होता है जो केवल जैविक खाद के मध्यम से ही प्राप्त संभव है  मुरा नर्सरी प्रभारी सूर्यकांत भू आर्य  बताते है कि इसके लिए हमने नई तकनीक का प्रयोग कर रहे है टंकी में वर्मी कंपोस्ट खाद निर्माण करने की बजाए हमने दस हेक्टेयर के अधिकांश क्षेत्रों में सागौन सूखे पत्तो के उपर कुट्टी बना कर गोबर सना कर , पीसी हल्दी का छिडकाव, गाजर  घास, काली उपजाऊ मिट्टी,  सूखे पैरा के अवशेष, कृषि अवयव के अवशेष, स्वस्थ केचुआ खाद, का समिश्रण कर उसे ढंक कर बराबार पानी डालते हुए नमी बनाए रखा जाएगा ताकि खुले क्षेत्रों में केंचुआ के लगातार उथल पुथल करने से देढ़ से दो माह में ही चाय पत्ती समान उर्वरा युक्त खाद प्राप्त होगा 


          मुरा नर्सरी प्रभारी सूर्य कांत भू आर्य  इसका खुलासा करते हुए आगे बताते है कि इसके दो लाभ यह मिलेगा कि सागौन पेड़ के खुले क्षेत्र में जब वर्मी कंपोस्ट खाद निर्माण से उसके जड़ मे स्वमेव खाद अवशोषित करने से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाएगी तथा सागौन सहित अन्य पौधे अपनी दोगुनी रफ़्तार से ऊर्जा प्राप्त कर ग्रोथ करने लगेंगे और यह सत्य भी है अपने उत्पाद को अधिक से अधिक उपजाऊ बनाने के लिए कृषक नाना प्रकार के उपाय करते है यही नई सोच कुछ नया करने का जज्बा ने मुरा नर्सरी प्रभारी सूर्यकांत भू आर्य ने भी किया क्योंकि किसी ने सही कहा कि आवश्यकता ही अविष्कार कि जननी है जिसे उसने कर दिखाया

बुधवार, 6 मई 2026

अब बगैर मिट्टी और कम पानी से घर मे लगाएं साग,सब्जी, नर्सरी- छग राज्य वन विकास निगम की अभिनव पहल

 अब बगैर मिट्टी और कम पानी से घर मे लगाएं साग,सब्जी, नर्सरी-छग राज्य वन विकास निगम की अभिनव पहल


रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय ) भारत सहित विश्व स्तर में लगातार घटते वन, बढ़ते प्रदूषण एवं ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बहुत सी चिंता जनक समस्याएं धीरे धीरे हमारी ओर बढ़ती जा रही है जिनमे मिट्टी,जल, वायु, स्वस्थ्य, सहित बहुत सी अत्यधिक उपयोगी अवस्थाएँ शामिल है जिसके लिए नाना प्रकार के जतन भी किए जाते है जिनमें मुख्यतः जगह जगह वृक्षरोपण जो हमारे स्वास्थ्य के लिए शुद्ध स्वच्छ ऑक्सिजन प्रदान करते है वही खेती किसानी और फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए रसायनिक खाद की जगह जैविक खाद का उपयोग कर स्वस्थ्य खाद्य पदार्थ की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है पर यह सब खुले क्षेत्र में की जाने वाली खेती व्यवस्था अब बीते समय की बात होने जा रही है वह भी थोड़ी मिट्टी, और दस प्रतिशत जल से ही ऐसी खेती संभव है जिसका लाभ प्रत्येक घर परिवार वाले इंडोर प्लांट नर्सरी कर सकते है यकिन नही आता परंतु यह सत्य है... जानन चाहेंगे  कि नई तकनीक में स्वस्थ्य जलवायु एवं खेती आपके घरों के भीतर पहुँच रही है यह आश्चर्य जनक किंतु सत्य जैसा अविश्वसनीय कार्य का बीडा छग राज्य वन विकास निगम ने कर दिखाया जो आपके घर को  स्वच्छ वायु तो प्रदान करेगी ही साथ ही आपको खाद्य पदर्थ के रूप मे साग सब्जी का उत्पादन भी किया जा सकेगा उसके साथ ही आर्थिक सुदृढ़ता का मार्ग भी प्रशस्त करेगा 


 इसकी जनकारी छ्ग राज्य वन विकास निगम बार नवापारा परियोजना मण्डल के डिवीजन मैनेजर ( डीएफओ) चंद्र कांत टिकरिया ने हर्ष व्यक्त करते  हुए बताया कि आधुनिक विधि से घर के भीतर ही बेहतर फसल लिया जा सकता है इस विधि के उपयोग से जल एवं मृदा (मिट्टी)  का संरक्षण भी निश्चित हो सकेगा जिसे केवल कम जल में पोषक तत्वों को मिला कर साग सब्जी की खेती संभव है उन्होंने बताया कि छ्ग वन विकस निगम के माननीय अध्यक्ष रामसेवक जी पैकरा के कुशल मार्ग दर्शन एवं प्रबन्ध संचालक (आई एफ एस)प्रेम कुमार  जी के नेतृत्व में यह नव अभिनव हाइड्रोपोनिक पॉट्स  की शुरुआत की गई है जो शहर की पर्यावरण  हरियाली को बढ़ावा देने के  उद्देश्य से नई तकनीक वाली उक्त योजना घर की दहलीज को लांघते हुए  घर के भीतर इंडोर प्लांट नर्सरी के रूप में  पहुँच गई  है  बशर्त आपके पास पर्याप्त मकान के अंदर हवादार कमरे ,बड़े लॉन,खुली बाड़ी,या छत के लिए समुचित उपयोगी स्थान हो तो घर के भीतर सजावटी पेड़ पौधों के साथ बहुत सी खाद्य समाग्री की फसल लिया जा सकता है उन्होंने आगे बताया छ्ग राज्य वन विकास निगम द्वारा सजावटी एवं आकर्षक पौधों की पहल के तहत नागरिकों को स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, पीस लीली, एरेका पाम, एवं स्पाइडर प्लांट जैसे विभिन्न  इंडोर पौधे उपलब्ध कराए जा रहे है


जो घरों, ऑफिस,कार्यालय मे सजा कर रखे पौधे न केवल आकर्षक खुबसुरती के साथ हरियाली बढाएगी बल्कि शुद्ध  स्वच्छ वायु ऑक्सिजन से वातावरण को महकाएगी भी बार परियोजना मण्डल के डी. एम. चंद्रकांत टिकरिया ने आगे बताया कि कथित पौधे घरों कार्यालयों की सजावट का एक हिस्सा है परंतु छ्ग राज्य वन विकास निगम  हाईड्रोपोनिक पॉट्स भी उपलब्ध कराए जा रहे है जिसमें बिना मिट्टी के पौधा उगाना संभव है यह कम पानी में पौधों की बेहतर वृद्धि एवं सुविधा जनक रख रखाव के लिए जानी जाती है वे आगे बताते है इस पहल के अंतर्गत स्थापित इंडोर प्लांट नर्सरी एवं हाइड्रोपोनिक पॉट्स ने कम समय में सकरात्मक परिणाम दिए है शहरी क्षेत्रों में सीमित स्थान के बावजूद बहुत से घरों कार्यालय, ऑफिस मे इन्हे अपनाया है जिसमें वातावरण मे ताजगी स्वच्छता का अनुभव प्राप्त हुआ है जिसे देख कर इसकी मांग बढ़ती जा रही है उन्होंने बताया हाइड्रोपोनिक पॉट्स के मध्यम से लोगो को बिना मिट्टी से पौधे रोपण की नई तकनीक का ज्ञान  प्राप्त हुआ है जिससे समय एवं पानी दोनों की बचत हो रही है 


 हाइड्रोपोनिक पॉट्स विधि से प्रेरित होकर कई युवाओं, एवं महिलाओं ने छोटे स्तर पर नर्सरी एवं पौधों का व्यवसाय की शुरुआत की है जिससे स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित हो रहे है उन्होंने बताया कि यह पहल से न केवल पर्यावरण   संरक्षण में सहायक सिद्ध होगा बल्कि लोगों को हरियाली के प्रति जागरुकता कर आत्मनिर्भरता  की दिशा में प्रेरित करेगा


छग राज्य वन विकास निगम बार परियोजना मण्डल की एस डी ओ चित्रा त्रिपाठी मैडम से चर्चा करने पर बताया कि नवाचार हाईड्रोपोनिया पॅट्स की उपलब्धता एक  मील का पत्थर साबित हो रहा है साथ ही कृषक वर्ग महिला वर्ग पर्यावरण प्रेमी इस प्राकृतिक ज्ञान की ओर आकर्षित होकर नवीन तकनीक का व्यवसायिक दृष्टि कोण से  अतिरिक्त आर्थिक लाभ उठा रहे है इस संदर्भ में चित्रा त्रिपाठी मैडम आगे बताती है कि लगातार बढ़ती जन संख्या वनों एवं पेड़ पौधों का हास प्रदूषण एवं लगातार बढ़ रहे क्रांकिटिकारण के जंगल के बीच में प्रत्येक मानव के  रहवास के भीतर में ऐसे हाइड्रोपोनिक पॉटस ने प्राकृतिक पेड़,पौधों की सजावट के साथ स्वास्थ्य पूर्ण वातावरण निर्मित करने का यह एक मात्र वैकल्पिक व्यवस्था है


जिसे बहुत पसंद किया जा रहा है बार नवपारा परियोजना मंडल एस डी ओ  चित्रा त्रिपाठी आगे बताती है घर, छत, बाड़ी, जैसी पर्याप्त स्थान होने पर नेट ग्रीन हाउस में भी साग सब्जी एवं अन्य खाद्य वस्तुओं, जैसे धनिया, टमाटर् ,लौकी,जैसी अन्य मौसमी फल फूल से लेकर आकर्षक सजावटी पौधो का फसल लिया जा सकता है जिसकी शुरुआत हो चुकी है तथा आम लोग पोषक तत्व घुलनशील एवं कम मात्रा में दस प्रतिशत जल से उपरोक्त खेती का लाभ उठा रहे है ऑफिस घर, कार्यालय में लगाने वाले  हाइड्रोपोनियो पॉट्स के पौधों की दृष्टिकोण से वास्तु दोष से निजात मिलती है तथा सुख समृद्धि बढ़ने की बात भी कही जा रही है साथ ही जल पर्यावरण सहित प्रदूषण से लडा जा सकता है  इच्छुक व्यक्ति हाइड्रोपोनिक पॉटस प्राप्त करना चाहते है तो वे सीधे ऑन लाइन साइट छ्ग राज्य वन विकास निगम नवा रायपुर अटल नगर, मुख्यालय एवं बार परियोजना मंडल देवेंद्र नगर रायपुर में प्रमुख रूप से संपर्क कर ऑर्डर कर सकते है. 

गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

वन विकास निगम बार परियोजना मंडल का रवान रेस्ट हाउस अतीत से वर्तमान तक का सफर

  वन विकास निगम बार परियोजना मंडल का रवान रेस्ट हाउस अतीत से वर्तमान तक का सफर





 अलताफ़ हुसैन

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) बार नवापारा अभ्यारण्य  युगों यूगों से  यहां चट्टान की भांति खड़ा हुआ है बार अभ्यारणय के अस्तित्व का इतिहास कब का है यह सही ज्ञात नही परंतु स्वतंत्रता के समय प्राचीन भवनो में अंकित वर्ष 1947 से 1948 में संभवतः प्रथम बार सघन वन क्षेत्रों के मध्य अंग्रेजों ने कुछ चयनित इतिहासिक भवन बनवाया था जो आज भी 75 वर्षों के अविस्मरणीय अध्याय का पन्ना बना हुआ है परंतु आधुनिक युग में कुछ अमूल चूल परिवर्तन कर  वर्तमान में उक्त भवनों के कुछ स्थलों को नवीन आकार प्रकार देकर नव स्वरूप  का साक्षी भी बना हुआ है ,,, ज़ाहिर है कि तत्कालिक भवन आज़ादी के पूर्व प्राकृतिक सौंदर्यता ने गोरे विदेशियों को सघन बार वन अभ्यारण्य की ओर आकर्षित किया होगा जिसकी प्राकृतिक हरीतिमा युक्त मनमोहक आभा स्वच्छन्द एवं स्वतंत्र विचरण करते,खूंखार शेर भालू,चीता,गौर,हिरन, बायसन, वन भैंसा,और इन जैसे अनेक जलचर,नभचर,  सरिसृप,वन्य प्राणियों ने जो वनों के अभिन्न अंग मानें जाते है पर्यटन हेतु आम जन को आकर्षित किया जो प्राकृतिक सौंदर्य को बहुत करीब से देखने समझने और यहां के शांत स्वच्छ वातावरण को महसूस करने के उद्देश्य से ही अंचल के मध्य भूभाग में आज़ादी के पूर्व ही अपने सुखद पल व्यतित करने हेतु  विश्राम भवन एवं गिने चुने अवासीय मकान का निर्माण किया गया था परंतु परिवर्तित होते काल चक्र ने तथाकथित भवन जीर्ण शिर्ण अवस्था में पहुँच गए  जिसका स्वरूप एवं जीर्णउद्धार कर बार अभ्यारणय के ऐतिहासिक भवन को यथावत रखनें वन विभाग कामयाब रहा है  इस संदर्भ में ज्ञात हुआ है कि वर्ष 1940 से 43 के मध्य अंग्रेज ऑफिसर के चाकरी हेतु लाए गए मूल,वनवासी, आदिवासियों को यहां बसाया गया इसकी वजह वन अफसरों को वन में कार्य हेतु कर्मियों की आवश्यकता पड़ती थी जिसकी पूर्ति हेतु  बार नवापारा क्षेत्र में मुट्ठी भर आदिवासी,वनवासी,गोंड, बिंझावर,कंवर,जनजाति के लोगों को बसाया गया जो यहां के मूल  निवासी थे  इतिहास के पन्ने पलटने पर तथा वन विभाग के अंकित दस्तावेजों  को खंगालने से यह भी ज्ञात हुआ कि मनीराम नामक वन कर्मी द्वारा अंग्रेज अफसरों द्वारा कराए  जाने वाले सागौन प्लांटेशन को देख कर उसके द्वारा बार क्षेत्र के अंचल  में वृह्द भूभाग में सागौन प्लांटेशन कराया गया था जो आज भी मनीराम प्लांटेंशन के रूप दर्ज है आज़ादी पश्चात पूर्ण रूपेण वन से संबंधित विभाग अस्तित्व में आया और यहां अंग्रेज अफसरों के साथ भारतीय अधिकारियों का आवागमन बढ़ गया इसकी सुरक्षा और व्यवस्था के नए नए जतन, किए गए बताया जाता है छत्तीसगढ़ अविभाजित मध्य प्रदेश राज्य के अधीन था तब ही  सन 1973-से 76 के मध्य वन विकास निगम के हवाले किया गया था जहां की सोंधी मिट्टी की खुशबू और स्वच्छ वातावरण जिसमे मिश्रित प्रजाति के साथ सागौन जैसी बेशकीमती इमारती काष्ठों वाले वृक्षों की प्रचुरता थी उसका दोहन कर वन विकास निगम उसका व्यवसायिक उपयोग करने लगा  पश्चात  अंचल में निवासरत वन्यप्राणी परिवार का शिकार कुछ ज्यादा बड़ा


तब बार नयापारा की सुध पूर्ववर्ती मध्य प्रदेश के अधीन वन विभाग ने लेते हुए वर्ष 1976 मे इसे आरक्षित करते हुए   संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर  दिया पश्चात धीरे धीरे  अभ्यारण्य के रूप में बार विकसित किया गया  अंचल में बसे ग्राम बार और नवापारा को मिला कर इसका नाम  बार नवापारा अभ्यारण्य के रूप में हुआ आज भी छग राज्य वन विकास निगम के एक बहुत बड़ा भूभाग वन विकास निगम के अधीन है जिसमे 1974-76  में  सागौन वृक्षा रोपण जो छग वन विकास निगम की आर्थिक रीढ़ की हड्डी  बनी हुई है बार नवापारा अंचल मे उनका लगभग 121 कंपार्टमेंट है जिसका कुल क्षेत्र फल 352.471 हेक्टेयर में है जिसमे मिश्रित प्रजाति सहित सागौन बांस भिर्रा, अन्य प्रजाति के वृक्ष संपदा छग वन विकास निगम के प्रमुख आय का स्त्रोत बना हुआ है जिसका वार्षिकी विरलन कर इनके  सेवारत कर्मियों के समूचे परिवार का पालन पोषण होता है बदले में वन विकास निगम राज्य सरकार को भी लाभांश राशि देती  है वर्तमान में यह क्षेत्र बलौदाबाजार वन मंडल के अंतर्गत आरक्षित सामान्य वन क्षेत्र 244.66.वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जिसे  सहेजा गया है 


शेष छग राज्य वन विकास निगम के हिस्से में चला गया परंतु कुछ वर्षों से बार अभ्यारणय के विस्तार करते हुए वन विकास निगम का एक बहुत बड़ा भूभाग अपने अधीन करनें की कवायद वन विभाग कर रही है जिसकी चपेट में  वन विकास निगम की आर्थिक रीढ़ की हड्डी तो टूटेगी ही साथ ही बहुत से वन विकास निगम कर्मियों के रोजगार और नौकरी पर भी गाज गिर सकती है बहरहाल, वन विकास निगम के रायतुम, रवान क्षेत्र में ऐसे ही ऐतिहासिक भवन मौजुद है जिसका जीर्ण उद्धार एक वर्ष पूर्व किया गया है इस संदर्भ में परिक्षेत्राधिकारी हरिराम पैकरा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि बार नवा पारा अभ्यारणय  के मुख्य मार्ग पर ऐतिहासिक रेस्ट हाउस आजादी के पूर्व का बना हुआ था परंतु उसकी स्थिति बीस वर्षों से इतनी अधिक जर्जर अवस्था में थी कि अधिकारियों के रुकने ठहरने हेतु बार अभ्यारणय के रेस्ट हाउस जाना पड़ता था गत वर्ष तत्कालिक डी.एम. आनंद कुदरिया के प्रयास, एवं मार्ग दर्शन पर इस ऐतिहासिक रेस्ट हाउस भवन का जीर्ण उद्धार किया गया उसकी छत पर आधुनिक आकर्षक टीन शेड,छत निर्माण किया गया यही नही उपर की लकड़ी का नव निर्माण कर मजबूती दी गई है संपूर्ण हॉल में आधुनिक डाइनिंग फर्नीचर लगाए गए है जिसमें आठ दस व्यक्ति आराम से भोजन ग्रहण कर सकते है वही दो रूम में आराम दायक  बेड, बाहर लॉन में कुर्सी सहित अन्य सुविधाए निर्मित की गई है रेस्ट हाउस के मुख्य द्वार पर पारदर्शी  कांच लगवाया गया है ताकि भीतर से ही प्राकृतिक दृश्य का अवलोकन किया जा सके वन विकास निगम रवान परिक्षेत्रधिकारी हरि राम पैकरा आगे बताते है कि रेस्ट हाउस के बगल में लगे किचन सहित अन्य कमरे का भी जीर्ण उद्धार किया गया है प्राचीन कवेलू को हटा कर मजबूत लकड़ी के राफ्टर  लगाकर आधुनिक टिन को मजबूत स्वरूप दिया गया खिड़की दरवाजे सहित टाइल्स रंग रोगन कार्य कराया गया संपूर्ण परिसर के आसपास मे रंग बिरंगे पेड़,पौधे, सहित प्राचीन वर्षों पुराने पेड़ उक्त परिसर की शोभा बढ़ा कर रेस्ट हाउस को आकर्षक स्वरूप मे चार चाँद लगा रहे है


वविनि बार परियोजना मंडल के तत्कालिक  एस डी ओ ऋषि शर्मा ने बताया कि बेहतर फर्नीचार, लेट बाथ रूम को आधुनिक आकार दिया गया है किचन को आधुनिक स्तर से बनाया गया पेयजल हेतु बोर निर्मित किया गया है उन्होंने आगे बताया कि मुख्य द्वारा के दोनों ओर बांस भिर्रा सहित प्राचीन पेड़ जो आज भी कथित भवन के साक्षी बने हुए है छोटे बड़े क्यारियों में आकर्षक फूल के पौधे लगे हुए है जो देख रेख के अभाव में अव्यवस्थित स्थिति मे है जिस पर शीघ्र व्यवस्थित किया जाएगा उन्होंने बताया कि समस्त जीर्ण उद्धार कार्य परिक्षेत्राधिकारी हरि राम पैकरा ने हमारे मार्ग दर्शन में संपादित किया है वन विकास निगम रवान कार्यालय भी जर्जर अवस्था में था जिसका जीर्णोद्धार भी  उसी समय करवाया गया जिसे आज देख कर ज्ञात होता है कि वन विकास निगम का कार्यालय यहाँ अब भी सुचारु रूप से संचालित हो रहा है 



  उल्लेखनीय पहलू यह है कि बार परियोजना मंडल के ऐतिहासिक भवन का जीर्णोद्धार तो कई वर्षों के पश्चात यदा कदा हो तो गया परंतु वन विकास निगम के ऐसे बहुत से भवन है जिनका अब तक कोई पुरसाने हाल नही है जैसे रायतुम नाका  के समीप गिनती के कुछ मकान भूत बंगला बन चुका है बताया जाता है छ्ग राज्य बनने के समय यहाँ सागौन टीपी काटने से लेकर बहुत से कार्य संपन्न होते थे जो डिपो के रूप में चिंहित था वही आरंग के पास एक अन्य लघु नर्सरी एवं भवन में भी काष्ठागार डिपो हुआ करता था वहाँ की स्थिति भी बड़ी दयनीय है सिरपुर मे तो  बकायदा नाका मे ही वविनि कार्यालय का संचालन हो रहा है जबकि वन विकास निगम के पास भवन की कोई कमी नही है फिर भी वन विकास निगम कर्मी समस्त कार्य अपने घर से करके फील्ड में तफरीह करने आते है एवं आवश्यक होने पर नाके में कार्य पूर्ण कर चले जाते है यही नही बार नवापारा परियोजना मंडल का देवेंद्र नगर स्थित कार्यालय जो संपूर्ण परियोजना मण्डल का केंद्र बिंदु माना जाता है वहाँ की     स्थित भी चिंता जनक है कार्यालय आज भी जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुँच चुका है उसे तत्कालिक एम.डी. राजेश गोवर्धन साहब से लेकर ओ.पी. यादव साहब तक ने मंडल कार्यालय की स्थित में नव निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ  की थी परंतु नतीजा सिफर ही रहा अब देखना होगा कि अस्त व्यस्त करोड़ों की वन विकास निगम की अचल  प्रापर्टी संपदा  को भविष्य में नवीनिकारण कर उसे सहेजा जाएगा या पूर्व की भाँति एक ही ढर्रे पर काम चलाते हुए उसे बिसरा दिया जाएगा. 

बुधवार, 22 अप्रैल 2026

मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक पद पर तेरह वर्षों से रवि महमल्ला अंगद के पांव की तरह जमा कर बैठा

 मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक पद पर तेरह वर्षों से रवि महमल्ला अंगद के पांव की तरह जमा कर बैठा 

अल्ताफ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट काइम न्यूज़) छग वन एवं परिवर्तन विभाग जहाँ पर्यावरण एवं प्रकृति के लिए वरदान समझा जाता है तो वहीं कुछ लोगों की भ्रष्ट  कार्य शैली की वजह से अभिशाप भी बन जाता है तथा आम जन के समक्ष उसकी स्वच्छ छबि मे दाग लगने के साथ ही कई  सवाल भी उठने लगते है जैसा की वर्तमान में पूरे विभाग में बहुत से ऐसे वन कर्मी है जो वर्षों से एक ही स्थान पर मलाई दार जगह पर जमे रहकर वन विभाग के नियम कानून की धनिया बो रहे है जब कि वन अधिनियम यह  कहता है कि कोई भी ओहदे दार वन कर्मी एक ही कार्य स्थल क्षेत्र में तीन वर्षों से अधिक समय तक एक ही स्थान पर जमा नही रह सकता त्तथा तीन वर्षों के पश्चात विभागीय स्तर पर उसे अन्यंत्र तबादला किया जाता है जिसका अक्षरशः अनुपालन करना प्रत्येक वन कर्मी अधिकारी का नैतिक दायित्व एवं कर्तव्य बनता है परंतु यहां कुछ ऐसे भी दीमक रूपी वन कर्मी है जो वन विभाग के आर्थिक जड़ को भीतर ही भीतर खोखला कर रहे है वे वर्षों से एक ही स्थान पर अंगद की पांव की तरह जमें हुए है जिसे कोई भी वरिष्ठ अधिकारी उनके जमा पांव को टस से मस नही कर सकता इसकी वजह यह भी बताई जाती है कि पदोन्नति या ट्रांसफर  होने पर एक बहुत बड़ा खेल लेनदेन का  हो जाता  है जिसकी वजह से बहुत से वरिष्ठ एवं कनिष्ठ  प्रतिभाशाली वन कर्मी अधिकारीयों का क्रमोंन्नति नही हो पाती तथा ऐसे मलाईदार कर्मी मौज उड़ाते रहते है ताजातरीन मामला मुख्य वन संरक्षक रायपुर वन वृत से जुड़ा हुआ है जहाँ एक ही व्यक्ति विगत तेरह वर्षों से मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय में एक ही स्थान पर  जमा हुआ है आश्चर्य की बात यह है कि दो बार पदोन्नति होने के बावजूद भी उसे अब तक उसके पद से  हटाया नही गया  बताया जाता है की कथित वन कर्मी इस तेरह वर्षों में एक ही पद मे रहते हुए उसने अब तक लाखों, करोङों की आकुत् संपत्ति एकत्रित कर ली है

 यह संपूर्ण हैरान करने वाला मामला रायपुर मुख्य वन  संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक रवि प्रकाश  महमल्ला की है जो विगत तेरह वर्षों से मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत कार्यालय में जमा हुआ है यह संपूर्ण जानकारी का खुलासा तब हुआ जब किसी ने सूचना के अधिका लगा कर जानकारी प्राप्त की हमें मिले पत्र के अनुसार निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला 26/12/2013 में पदस्थ हुआ जो वर्ष 2026 को तेरह वर्ष पूर्ण होने जा रहा है जबकि इन तेरह वर्षों में उसे दो बार पदोन्नति मिली जिसे उसनें ठुकरा कर यथावत उसी स्थान एवं पद  पर काबिज रहा जबकि शासन के वन अधिनियम यह कहता है कि कोई भी कर्मचारी तीन वर्षों तक उसी स्थान एवं पद में बना नही रह सकता इससे ज्ञात होता है कि मलाई दार  स्थान में रहते हुए रवि प्रकाश महमल्ला ने अपने पद प्रतिष्ठा सब को दांव पर लगा कर उसी स्थान में रहना उचित समझा इस संदर्भ में यह भी बताया जाता है कि कोई भी वन कर्मी पदोन्नति के लिए रात दिन पापड़ बेलते रहते है कि किसी भी तरह से उनका प्रमोशन हो जाए परंतु मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला उसी स्थान और पद की लालसा ने उसे दूर नही करने दी वन कर्मचारियों के मध्य उसके तेरह वर्षों तक एक ही स्थान पर जमा रहने के पीछे बहुत सी बातों की चर्चा, एवं कयास सरेआम की जा रही है कि यहाँ पांच वन मंडल कार्यालयों से रोजाना सैकडों वन कर्मी आते है


जिनसे बहुत बड़ी धन राशि लेनदेन की सैटिंग उसी के मध्यम से होती है यही वजह है कि निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला उक्त पद को छोड़ना नही चाहता यह भी चर्चा आम है कि प्रति माह उपर पहुंचाने के बाद अपने लिए न्यूनतम वह दो से चार लाख रुपये बड़ी सहजता से कलेक्शन कर लेता है तथा उसकी पचास हजार की सैलरी यथावत रहती है सूचना के अधिकार में जब आवेदक ने उसके चल अचल संबंधी से जानकारी मांगी तब वह स्वयं जन सूचना अधिकारी बन कर बगैर सत्यापित कर आवेदक को गोलमोल जानकारी देकर गुमराह करने का प्रयास किया गया पुनः मुख्य वन संरक्षक में जानकारी मांगी गई तब जन सूचना अधिकारी ने तीन पृष्ठीय स्यापित प्रति प्रदान की गई जिसमें भी उसके द्वारा कमल विहार में एक पलाट होने की जानकारी दी जबकि नए नियम के अनुसार सभी विभाग के कर्मचारी एवं उनके परिवार के नाम कितनी संपति है लिखित में ऑन लाइन जानकारी देना अनिवार्यतः है परंतु ऐसे इंकम टैक्स की चोरी करने वाले कर्मचारी ऐसी महात्वपूर्ण जानकारी को विलोपित कर देते है


जबकि ज्ञात हुआ है कि मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला के पास चल  संपत्ति में नगद  के अलावा अचल संपत्ति में प्लाट चार पहिया गाड़ी, दो पहिया गाड़ी,स्वर्ण रजत के अलावा अनेक विलुप्त बेनामी संपत्ति अपने, रिश्तेदार, परिजन के नाम अर्जित कर रखी है जिसका आवेदक द्वारा मांगे गए सूचना के अधिकार में उसके द्वारा संपूर्ण जानकारी नही दी गई केवल गुमराह करने के उद्देश्य से सतही तौर पर जानकारी दी यही नही आवेदक ने प्रदेश के मुख्य मंत्री को भी शिकायत की गई तब भी उस पर कोई कार्यवाही नही की गई है अब आवेदक संपूर्ण जानकारी न मिलने पर ई. डी. एवं ई ओ डब्ल्यू को पत्र लिख कर न्यायालय के शरण में जाने की बात कह रहा है यही नही राशि कलेक्शन के लिए निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला द्वारा अवकाश के दिन में सर्किल में घूम घूम कर राशि कलेक्शन करता है जहाँ मुर्गा दारू सहित अनेक कार्य में जुटा रहता है यही नही हाल ही में  ड्रायव्हर सीधी भर्ती में गुणा भाग कर अपने किसी ग्राम क्षेत्र के रिश्तेदार भतीजे को भी गरियाबंद, वन मंडल कार्यालय में फीट करवा दिया इसका परिणाम यह हुआ कि छ माह में ही वहाँ के एस डी ओ मनोज चंद्राकर को कार्यालयीन अवधि समाप्त होने के बाद  ड्रायवर शासकीय गाड़ी का दुरूपयोग करते हुए रायपुर छोड़ने गया था जहां वापसी में  गरियाबंद वन मंडल की शासकीय वाहन की किसी अन्य वाहन से जबरदस्त टक्कर हुई जिसमें गाड़ी की क्षति तो हुई ही साथ ही नव चालक ड्रायवर के घुटने में गंभीर चोट आई अब सवाल यह उठता है कि छ मासी नव पदस्थ ड्रायव्हर जिसने शासकीय वाहन को क्षति ग्रस्त कर लाखों की चोट पहुंचाई थी उसका भुगतान शासन करेगी या एस डी ओ मनोज चंद्राकर करेंगे? क्योंकि ड्रायवर से पूछ ने पर बताया कि उन्हे रायपुर आवास छोड़ने के पश्चात शासकीय वाहन लेकर वह वापस गरियाबंद  आ रहा था तभी दुर्घटना हुई थी 


 बताते चले कि गरियाबंद एस डी ओ मनोज चंद्राकर वही है  जिन्होंने बागबाहरा 2017- 2018 में रेंजर रहते हुए अनेंक भ्रष्टाचार के नए आयाम स्थापित किये है वहाँ उन्होंने वनोपज सहकारी समितियो के लाखों नही बल्कि करोड़ों रुपये राशि का आहरण कर घोटाले,गबन कर अंजाम दिया था तथा वही बागबाहरा  क्षेत्र मे गिट्टी क्रेशर फैक्ट्री खड़ी की थी जिसकी गूंज तत्कालिक बागबाहरा  विधायक ने विधान सभा में सवाल  भी उठाया था जिसे उन्होंने ले दे कर मामले को सुल्टा लिया था यही नही गरियाबाद वन मंडल के आखरी हिस्से में दस से बारह करोड़ों का अक्सिजोन तैयार करवाया था जिसमें भी भ्रष्टाचार का लंबा खेल किया गया था यदि विभाग इसकी सुक्षमता से जांच करती है  तो इनके बहुत बड़े बड़े घोटाले, भ्रष्टाचार, गड़बड़ झाला की तथ्य एवं सत्य परक फेहरिस्त खुल  सकती है जिसमे बहुत बड़ा खुलासा हो सकता है इसकी भी जानकारी सूचना के अधिकार में मांगी जाएगी इन सब कर्म कांड की लीपा पोती करने में रायपुर मुख्य वन संरक्षक वृत  रायपूर के निज सहायक रवि प्रकाश महमल्ला का पूर्ण सहयोग प्राप्त है बताया जाता है कि निज सहायक रवि महमल्ला का दौरा लगातार  अवकाश के दिनों में गरियाबंद  सहित सर्किल में रहता है


उसी प्रकार मनोज चंद्राकर भी जब भी रायपुर प्रवास में रहते है तो कार्य न होने पर विधान सभा स्थित मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में अवश्य जाते है एवं सारा गुणा भाग तय किया जाता है क्योंकि वे नाम के लिए मैनपुर एस डी ओ है बाकी समस्त कार्य वे यही गरियाबंद में बैठ कर करते है तथा किस योजना में कितना भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला करनें की युक्ति तैयार करते है क्योंकि उन्हें भी वर्ष 2019 -2020 से सात आठ वर्षों से एक ही वन मंडल कार्यालय में जमी हुए है संभवतः यही से वे रिटायर भी हो सकते है यदि विभाग उनके अंदर में वहाँ गरियाबंद में कितनी समितियां है उसका ही अवलोकन कर जांच किया जाए तो सारी सत्यता सामने आ जाएगी वैसे ही निज सहायक रवि महमल्ला जैसे दो चार और हो जाएं तो वन विभाग का बंटा धार होना तय है यही नही वह इतना अधिक चर्चित हो चुका है कि इसके भ्रष्टचार की आंच अब उपर बैठे वरिष्ठ अधिकारियों पर भी आनी शुरू हो गई है. 

मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

रायकेरा रोपणी के पचास साल हरियाली बनी बेमिसाल

 रायकेरा रोपणी के पचास साल 

हरियाली बनी बेमिसाल


आलताफ़ हुसैन



रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)  

इस बार इंतज़ाम तो सर्दी का हो गया

क्या हाल पेड़ कटते ही बस्ती का हो गया


उपरोक्त पंक्तियां नोमान शौक का है जिसमे उन्होंने दो पंक्तियों में ही कितनी गूढ़ रहस्य बात कह दी जिसमे उन्होंने पेड़ पौधे हरियाली और मानव व्यवस्था की वो चुनौती पूर्ण व्याख्या कर दी कि पर्यावरण एवं प्रकृति के अस्तित्व के साथ मानव के मौलिक ढांचा पर प्रहार करते ही यक्ष सवाल खड़ा कर दिया है कि वनों, पेड़,पौधों का रिश्ता मानव समाज में आज से नही बल्कि जन्म जन्मांतर से समूल जड़ की गहराई तक जुड़ा हुआ है पेड़ पौधों की उपस्थिति मात्र से  वातावरण में  शुद्ध, स्वच्छ ऑक्सिजन प्राप्त तो मिलता ही है परंतु उनके आसपास भगौलिक रिक्तता होनें की दशा में बसा बसाया  बस्तियाँ भी उजाड़ और वीरान सी प्रतीत होती है  यही बजह है कि पेड़,पौधे हरियाली प्रसार, विस्तार के लिए छग प्रदेश का वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ उनके आनुवंशिक् धडा वन विकास निगम अनेक क्षेत्रों में लुप्त प्रायः सागौन के अस्तित्व को अक्षुण्य बनाए रखने वृहद स्तर पर रोपणी, नर्सरी का निर्माण कर स्थानीय प्रदेश सहित बाहरी प्रदेशों के क्षेत्रों में पेड़ पौधों विशेष कर सागौन रूट शूट का उत्पादन कर असंतुलित जलवायु को नियंत्रित करने का पुनीत कार्य कर रहा है साथ ही वन विकास निगम अपनी आर्थिक स्थिति को  सुदृढ़ करता ही है साथ ही हरियाली प्रसार करने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन भी बखूबी निभा रहा है जिनमें बार नवपारा परियोजना मंडल अंतर्गत सिरपुर के समीप पचास वर्षों से सर्वाधिक प्राचीन रायकेरा रोपणी नर्सरी की अपनी एक पृथक पहचान एवं मिसाल बन चुकी है जहाँ प्रति वर्ष लाखों की संख्या में सागौन  बीजारोपण कर रूट शूट तैय्यार कर उसका विक्रय एवं निर्यात निर्बाध गति से की जा रही है 


       श्रीपुर अर्थात सिरपुर जो मुख्यालय रायपुर जिला से लगभग अस्सी किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जहाँ प्राचीन कालीन अनेक हिंदू देवी देवताओं के मंदीर, बौद्ध विहार सहित पारंपरिक पौराणिक, धार्मिक सांस्कृतिक का मिला जुला रमणिक स्थल है वहाँ से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर वर्ष 1976 में वन क्षेत्रों के मध्य नाले और पोखर के ऊँचाई पर रायकेरा नर्सरी की स्थापना अविभाजित मध्य प्रदेश के समय की गई थी जिसे हरे भरे वन से सटे ग्राम क्षेत्र के समीप ही निर्माण किया गया था वर्तमान 2026 में रायकेर रोपणी अपने संपूर्ण पचास वर्षों के गोल्डन जुबली वर्ष के बे मिसाल पायदान मे पदार्पण कर हरित उत्सव वर्ष मना रहा है भले ही छ्ग वन विकास निगम जिसकी रायकेरा नर्सरी सागौन पौधों की ही नही बल्कि वन विकास निगम कर्मियों, एवं वहाँ वर्षों से आसपास ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों की भी पालनहारी जननी है  क्योंकि वसुंधरा के गर्भ में सागौन बीजारोपण कर अंकुरित नन्हे नन्हे हरित गुलाबी कोमल पत्तों में जब सूर्य देवता अपनी पहली नारंगी आभा की दिव्य  किरण से उनिंदा कुमल्हाते हुए भोर में जब सागौन बीज के कोमल पत्ते इठलाकर अंगड़ाई लेते हुए गर्भा धरती से पुलकित होते है तब ऐसा प्रतीत होता है जैसे सूर्य देवता उनके दीर्धायु होने का आशीर्वाद देकर धरती पर आगमन पर उनका सुस्वागतम कर रहे हो यह देव तुल्य आशीर्वाद इनकी मानव रूपी आयु के समान होता है उल्लेखनीय है कि सागौन पेड़ की सामान्य आयु 50 से 100 वर्ष के बीच होती है, लेकिन अच्छी स्थिति में ये 200 वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।  जबकि प्राकृतिक वनों में यह 50से 80 वर्ष या उससे अधिक अवस्था में परिपक्व होता है। जो आज भी बार अभ्यारण का मणिराम पलांटेशन उसका साक्षात उदाहरण है 

 रायकेरा रोपणी अपने प्रारंभिक वर्ष 1976 के पश्चात अनेक राज्यों में यहाँ के रूट शूट से रोपण किया जा चुका है जिनमें मुख्यतः केरल, महाराष्ट्र तमिलनाडु, मध्य प्रदेश सहित महाराष्ट्र तक यहाँ के पौधे आज भी आपनी आभा और चमक बिखेर रहे है वर्ष2025- 2026 में लगभग अठारह लाख रूट शूट पौधे रोपणी में तैयार किये गए थे जिसका स्थानीय प्रदेश सहित भिन्न भिन्न राज्यों में विक्रय, वितरण किया जा चूका है


यह जानकारी छ्ग राज्य वन विकास निगम बार नवापारा परियोजना मंडल  के ऊर्जावान डिवीजनल मैनेजर (डी. एफ.ओ.) चंद्र कांत टीकरीया एक संक्षिप्त चर्चा मे कही वे आगे बताते है कि वित्तीय वर्ष,2026-2027 में भी अट्ठारह लाख सागौन रूट शूट तैयार करनें का विशाल लक्ष्य है उन्होंने बताया इसकी प्रारंभिक प्रक्रिया चालू कर दी गई है बार परियोजना मंडल के डी एम चंद्र कांत टीकरिया  बताते है कि सागौन शिड तैयार करनें में अनेक जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिसकी अवधि लगभग एक वर्ष तक की होती है उन्होंने बताया सर्व प्रथम  इसका बीज क्रय करने के लिए स्थानीय क्षेत्रों के अलावा कवर्धा मध्य प्रदेश के देवास महाराष्ट्र के भंडारा  जिले सहित अन्य राज्यों से सौ या उनसे अधिक वर्षीय स्वस्थ्य सागौन पेड़ से संकलित किये बीज  क्रय कर रखे जाते है पश्चात चालीस से पैतालिस प्रतिशत डिग्री तापमान पर इसे सुखाया जाता है ताकि बाहरी अवरण स्वमेव छोड़ अंदर की नमी को समाप्त कर सके यह प्रक्रिया करने से प्राप्त बीज को नमी या भिगोकर तीव्र तापमान में उलट पलट करते  हुए  सुखाया जाता है बारंबार प्रत्येक दो से तीन घंटे में यह प्रक्रिया अनवरत जारी रहती है जिसकी वजह से सागौन बीज मे पचीस से तीस प्रतिशत वजन में कमी आ जाती है छ्ग राज्य वन विकास निगम बार नवापारा परियोजना मंडल के डी एम चंद्र कांत टीकरिया आगे बताते है कि लगातार बीज प्रोसेसिग की  प्रक्रिया की वजह से इसका बाहरी आवरण छिलका, हट जाता है एवं सुखाई, बाह्य अवरण गुठली निकलने की वजह से बीज लगभग  पचास प्रतिशत से भी कम प्राप्त होता है  इस बीच नमी भी दी जाती है ताकि सागौन गुठली का बाहरी अवरण ग्रीष्म तापमान से हट कर मूल बीज चिरौजी पूरी तरह से शुष्क हो सके जिसमें इसके रोपण में तेजी से वृद्धि होती है यह प्रक्रिया लगातार पांच से सात सप्ताह तक किया जाना उन्होंने बताया है 


  सागौन रोपण सहित अन्य जानकारी लेने जब

छत्तीसगढ़ वन विकास निगम बार नवा पारा परियोजना मंडल के उप वन मण्डलाधिकारी चित्रा त्रिपाठी से ली गई तो उन्होंने बताया कि रायकेरा रोपणी आज इस वर्ष अपनी पचासवीं वर्ष मना रहा है जो वहाँ के श्रमिकों के लिए रोजगार सृजन का सशक्त मध्यम माना जाता है क्योंकि यहाँ बारह मासी रोजगार उपलब्ध होता है एक प्रकार से उन श्रमिकों के लिए रोपणी किसी बैंक से कम नही है जहाँ प्रति दिन उनके बैंक खाता में पारिश्रमिक कलेक्टर दर पर डाले जाते है छ्ग वन विकास निगम बार परियोजना मंडल की डीडीएम चित्रा त्रिपाठी  आगे बताती है कि रोपणी में रायकेरा, सुकुल बाय, खमतराई, मरौद् क्षेत्र के श्रमिको को आवश्यकता अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाता है उन्होंने बताया रायकेर रोपणी में  बीस या उससे अधिक श्रमिको को प्रतिदिन रोजगार प्राप्त होता है यह संख्या अवश्यक्तानुसार कम अथवा ज्यादा भी होता है उन्होंने बताया कि गुणवत्ता परक वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण भी स्थानीय रोपण  क्षेत्र के छायादार अथवा नर्सरी प्रांगण में किया जाता है जिसमें गोबर खाद काली मिट्टी के साथ सुखे पत्ते, कटे हुए पैरा ,कृषि अवयव की संतुलित मात्रा एवं स्वस्थ्य केंचुआ का मिश्रण किया जाता है डेढ़ से दो माह मे लगातार नमी बरकरार रखने पर गुणवत्ता पूर्ण वर्मी कमपोस्ट चाय की पत्ती के समान मिलता है जो रोपणी के लिए अत्यधिक लाभदायक होता है इसके मिश्रण से सागौन बीज के नव पुल्कित पौधे उत्पादन सहित तेजी से सर्वाइव करता है वविनि बार परियोजना मण्डल की डीडीएम  मैडम चित्रा त्रिपाठी ने आगे बताया कि  सागौन रोपण के साथ साथ बेहतर उपचार से उत्कृष्ट सागौन पौधे प्राप्त होते है इसे लिए नवजात शिशु रूपी  सागौन पौधों के लिए लगातार महिला व पुरुष श्रमिक पूरी ईमानदारी से अपने  कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे है


वानिकी कार्यों निंदाई गुड़ाई उपचार सहित समस्त सिंचाई कार्य का दायित्व महिलाएं कंधा से कंधा मिलाकर चल रही है मैडम त्रिपाठी जी ने आगे बताया कि महिला सशक्तिकारण की मिसाल यदि देखना हो तो यहां रायकेरा नर्सरी में देखा जा सकता है जहाँ छ्ग शासन के मुख्यमन्त्री विष्णु देव साय के मंशा अनुरूप वानिकी कार्यों से संदर्भित सभी कार्यों का निष्पादन आज से नही बरसों बरस से करते आ रही है जो रायकेरा रोपणी के लिए एक उपलब्धि भी है एवं एक प्रेरणादायी भी है 


 सागौन बीज के प्रोसेसिंग का साक्षात प्रक्रिया ज्ञात करने जब रायकेरा नर्सरी सिरपुर पहुंचा गया तब वहाँ खुशमिजाज, कर्तव्यपरायण, हंसमुख, मिलनसार, कर्मठ, व्यक्तित्व के धनी रायकेरा परिक्षेत्र अधिकारी हरि राम पैकरा से मुलाकात कर उनसे सागौन रोपण के संदर्भ में जब जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि बीज प्रोसेसिस अगस्त से नवंबर माह तक वेदर में किया जाता है पश्चात अप्रेल मई की कड़ाके की ग्रीष्म ऋतु में बीज को उथल पुथल किया जाता है जिससेे उसकी बाह्य आंतरिक, आवरण जिसमें छिलका, गुठली निकल कर आंतरिक  बीज की चिरौंजी पूरी तरह से सख्त होने के पश्चात चालीस या उससे अधिक डिग्री तापमान पर  मदर ट्री बेड में डाल दिया जाता है परिक्षेत्राधिकारी हरि राम पैकरा बताते है कि भूमि तैयारी नवंबर  से चालू हो जाता है जिसमें प्लाउ नागर से एक फीट गहराई तक पांच से अधिक बार जुताई किया जाता है जिसकी वजह से मृदा उपजाऊ हो जाता है रेंजर हरि राम पैकरा आगे बताते है कि उपचार के रूप में  जैविक बर्मी कम्पोस्ट एस.एस.पी. सुपर फास्ट खाद दस किलो मिक्स कर डाला जाता है वह इस वजह से भी किया जाता है ताकि मृदा के सूक्ष्म जीवाणु का नाश होता है 
तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है वे बताते है कि रायाकेरा नर्सरी बार परियोजना के सिरपुर स्थित कक्ष क्रमांक 81 वन क्षेत्र में निर्मित है तथा जहां लगभग 63 हेक्टेयर क्षेत्र में 0. 25 मीटर ऊँचाई 1 मीटर ऊँचाई तथा 10 मीटर लंबाई में बैड तैयार किया जाता है जिसमे सौ लाइन नाली खीची जाती है इसमें दस सेंटी मीटर अंतरल में सौ नाली में पचास से पचपन बीज एक लाइन में रोपा जाता है  रायकेरा  रेंजर हरिराम पैकरा आगे बताते  है कि काली मिट्टी युक्त उक्त नाली में वर्मी कंपोस्ट जैविक खाद से बीज को ढँक दिया जाता है तथा उस के उपर पैरा, कृषि अवयव से ढंक दिया जाता है ताकि पानी सिंचाई से बीज की क्षति न हो तथा सिंचाई जल से बीज को बहा कर न ले जाए इसकी देखरेख मॉनिटरिंग तब तक की जाती है जब तक सागौन बीज के महीन पौधे बाहर न निकल जाए 


पैरा तकनीक के संदर्भ में पूछे जाने पर समीप बैठे नर्सरी प्रभारी ललित रात्रे का कथन है कि पैरा रहने की वजह से रोपण क्षेत्र में बराबर नमी बनी रहती है तथा सुरक्षा के साथ तापमान नियंत्रित रहता है इसके लिए नियमित सिंचाई आधुनिक स्प्रिंकलर विधि से की जाती है यह प्रक्रिया टंकी मे बड़ा मोनो ब्लॉक मशीन से किया जाता है रायकेरा रोपणी प्रभारी ललित रात्रे आगे बताते है कि इस दौरान पैरा आवरण को साफ कर दिया जाता है जिनमे पचपन बीज में से दस से बारह पौधे प्रति नाली में निकल जाते है  अधिकतम इक्कीस दिन बाद वर्षा ऋतु के समय निंदाई गुडाइ कर कीट नाशक डी. ए. पी. मिलाकर डाला जाता है ताकि सागौन पौधे सर्वाईव कर सके रायकेरा नर्सरी प्रभारी ललित रात्रे ने सागौन देने या वितरण के संदर्भ में बताया कि मांग के अनुसार ढाई से तीन फीट ऊँचाई होने पर रूट शूट काट कर स्टैंडर्ड तरीके से मिट्टी मे एक इंच उपर तथा चार से आठ इंच अंदर मिट्टी में दबा कर रोपण किया जाता है अब सवाल यह उठता है कि वन विकास निगम कर्मियों द्वारा छ से आठ माह के अथक परिश्रम के पश्चात रोपणी के निकले पौधे उनके रूट शूट स्थानीय छत्तीसगढ़ राज्य सहित अन्य राज्यों में मांग के अनुकूल सभी स्थल में सागौन रूट शूट रोपे जाएंगे तथा बीतते समय एवं काल चक्र में ये बाल अवस्था से लेकर किशोर, युवा एवं परिपक्व भी होंगे जिनसे राहगीरों सहित क्षेत्र में शुद्ध जलवायु एवं वातावरण निर्मित कर आम जन के स्वस्थ्य को अमरत्व प्रदान कर आम जीव जंतु, वन्य प्राणियों सहित मानव जीवन को संचालित करेंगे परंतु प्रकृति की उक्त अनमोल उपहार के बदले में हम मानव समाज उन्हे क्या देंगे ?  


उक्त सवाल का जवाब हमें स्वमेव तलाश करना होगा क्योंकि सिमटते वनों का दायरा  बेतहाशा प्रदूषण,आधुनिक मशीनरी प्रबन्धन, लगातार पेड़ पौधों का विनाश,बढ़ती आधुनिक सुख सुविधा के नाम पर क्रांकिटिकारण, जो हमे शनैः शनैः गर्त की ओर धकेल रही है इस संदर्भ में हिंदुस्तान के सुप्रसिद्ध उर्दू के शायर स्व. सुलेमान ईरानी की सुप्रसिद्ध रचना की चंद पंक्तिया याद आ रही है जो अक्षरशः विलुप्त होते पेड़ पौधे और उन जैसे  सागौन के लहलहाते पेड़ जैसे अपनी वेदना का इजहार उक्त पंक्तियों के मध्यम से व्यक्त कर कह रहा हो कि-

सारे राह एक सिक्का हूं संभालो मुझको

वक्त पर काम ही आऊंगा संभालो मुझको

एक पेड़ हूँ देता हूँ घनी छाँव तुम्हे

कही मिल जुल के अपनों से न कटा लो मुझको ,,, कहीं मिल जुल के अपनों से न कटा लो मुझको.......... कहीं मिल जल के.अपनों......... 


बुधवार, 15 अप्रैल 2026

बंदूक छोड़ हाथों में थामी विकास की डोर: वन विभाग सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र में आत्मसमर्पित महिला नक्सली लिख रही है नई कहानी

 बंदूक छोड़ हाथों में थामी विकास की डोर: 

वन विभाग सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र में आत्मसमर्पित महिला नक्सली लिख रही है नई कहानी

रायपुर/सुकमा (छत्तीसगढ़ वनोदय न्यूज़)  जिले में वन विभाग की एक अभिनव पहल ने विकास और पुनर्वास की नई इबारत लिख दी है। प्रदेश के वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)  अरुण कुमार पाण्डेय के कुशल नेतृत्व में वन विभाग सुकमा जिले के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज आत्मनिर्भरता का एक वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है।

सुकमा नगर से महज 1 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल, जो कभी उपेक्षित और जर्जर था, अब प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक बदलाव का संगम बन चुका है। वन विभाग ने जर्जर हो गयी संरचनाओं को पुनर्जीवित कर यहाँ एक आकर्षक टापू और पर्यटन केंद्र विकसित किया है, जो न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के पर्यटकों को भी अपनी ओर खींच रहा है।


इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का 'तुंगल नेचर कैफे' है, जिसे 'आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह' की 10 जांबाज महिलाएँ संचालित कर रही हैं। वन मंत्री  केदार कश्यप की सोच के अनुरूप, समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के इस अभियान में उन 5 महिलाओं को शामिल किया गया है जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़ आत्मसमर्पण किया है, साथ ही 5 ऐसी महिलाएँ भी हैं जो स्वयं नक्सल हिंसा की पीड़ित रही हैं। इन महिलाओं को जगदलपुर और सुकमा के प्रतिष्ठित संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण दिलाकर पेशेवर रूप से काम करने के लिए तैयार किया गया है। 

आज कुहराम रामे, मुचाकी सोमे, मडकम पोंजे, माड़वी बुदरी और कलमु पायके जैसे नाम, जो कभी संघर्षों के बीच थे, अब मुस्कान के साथ पर्यटकों की मेजबानी कर रहे हैं। उनके साथ मडकम रामे, पोडियम सरोज, अनीता मुचाकी, ललिता यादव और पुनेम भरत कंधे से कंधा मिलाकर स्वावलंबन की राह पर चल रहे हैं।

इस ​पर्यटन केंद्र की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर 2025 को इसके शुभारंभ के बाद से मात्र तीन महीनों में यानी 30 मार्च 2026 तक यहाँ 8,889 पर्यटक पहुँच चुके हैं। इस छोटी सी अवधि में केंद्र ने लगभग ₹2.92 लाख की आय अर्जित की है। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल कैफे के स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं, बल्कि तुंगल डैम में कयाक, पैडल बोट और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी लुत्फ उठा रहे हैं।

माननीय वन मंत्री  केदार कश्यप व ​प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)  अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशन में बने इस परियोजना ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही अवसर और विश्वास प्रदान किया जाए, तो बंदूक की जगह सम्मानजनक रोजगार लेकर जीवन को पूरी तरह बदला जा सकता है। तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज केवल सैर-सपाटे की जगह नहीं, बल्कि उन महिलाओं के साहस और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है, जो बस्तर की बदलती और सुनहरी तस्वीर पेश कर रहा है। यह केंद्र संदेश दे रहा है कि प्रकृति संरक्षण और मानव विकास को एक साथ जोड़कर समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

आरंग परिवृत् के ग्राम भलेरा में क्षतिपूर्ति वनी करण के साथ पर्यावरण का संतुलन

 आरंग परिवृत् के ग्राम भलेरा में क्षतिपूर्ति वनी करण  के साथ पर्यावरण का संतुलन 

अलताफ़ हुसैन 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)संपूर्ण मानव जगत में वनों के प्रति जन चेतन सामाजिक समरसता, एवं परस्पर उत्तरदायित्व  स्थापित कर  आमजन को एक स्वस्थ्य पूर्ण जीवन शैली एवं निरोग वातावरण  निर्मित करने का सरल आसान व्यवस्था  ऐसे बंजर चटियाल रिक्त पड़त ओरेंज  भूमि क्षेत्र में सिर्फ और सिर्फ वन रूपी पेड़ पौधों का अधिक से अधिक सफल रोपण कर संपूर्ण वैश्विक स्तर पर  परिवर्तित हो रहे स्वस्थ, ऋतु जलवायु को नियंत्रित किया जा सकता है यदि इस संदर्भ में समय रहते आम लोगों में जन जागरुकता नही लाई गई तो वह दिन दूर नही जब प्रत्येक क्षेत्र में दम घोटु प्रदूषण के प्रभाव में अनेक  ला इलाज गंभीर बीमारी से प्रत्येक व्यक्ति ग्रसित हो सकता है जिसकी प्रारंभिक पहल विगत कुछ वर्ष पूर्व हमनें करोना महामारी के रूप में देख चुके  है इस भावी गंभीर समस्याओं, प्रदूषण,परिवर्तित जलवायु  को लेकर  हमने रायपुर वन मंडल के वरिष्ठ आई एफ एस  अधिकारी श्री लोकनाथ पटेल से चर्चा की तब उन्होंने बताया कि प्रदूषण, परिवर्तित जलवायु रायपुर ही नही बल्कि संपूर्ण देश, प्रदेश, स्थानीय स्तर में लगातार बढ़ रहा है जिसका मूल वजह उद्योगिक कल कारखाने, मानव द्वारा निर्मित  अत्याधुनिक नवीन भौतिक   संसाधनों का निरंतर उपयोग उनसे निकलने वाली दम घोटु धुएं प्रदूषण लगातार प्रत्येक क्षेत्र में सूक्ष्म कणों के रूप मे श्वास नली के मध्यम से धमनियों को प्रहार कर जन जीवन को क्षति ग्रस्त कर रही है इसका एक मात्र  उपाय संरक्षित वनों के पेड़ पौधे उनकी हरियाली को अधिक से अधिक रोपण कर सहेजा जा सके  ताकि वे अदृश्य वायु मे तैर रही घातक लौह कणों नदी पहाडों के भूगर्भ जल की सूक्ष्म मिश्रित हानिकारक तत्व अवयव की अविरल जलधारा को स्वच्छ  एवं स्वस्थ्य ऑक्सिजन निर्माण  कर विसर्जित कर मानव, जीव जंतु का जीवन तभी सुरक्षित किया जा सकता है


  रायपुर वन मंडलाधिकारी  लोकनाथ पटेल  से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग यथा नाम तथा गुण को चरितार्थ करते हुए मूल  उद्देश्य एवं अपने नाम के अनुरूप कार्य संपादित कर रहा है इसके लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अनेक योजनाएं जिसमें वन क्षेत्रों में नदी, नाले, पोखर, से वर्षा ऋतु के ढलानी बहाव  जल को  संचय कर संरक्षित करनें का कार्य कर रहा है जिसके सार्थक परिणाम यह आने लगे कि अब वन क्षेत्रों के पेड पौधे सहित आस्पास  ग्रामीण के निचले क्षेत्रों की फसलों को सहज सरल जल वायु का लाभ  मिल रहा है उन्होंने आगे बताया कि यही नही जलवायु परिवर्तन, के चक्र को नियंत्रित कर उसके निराकरण  के लिए हमारे देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने जन जागरुकता लाने के बहुउद्देशीय योजना"एक पेड़ माँ के नाम"से पूरे भारत देश में शुरुआत की  ताकि मातृत्व स्वरूप  वनों एवं उनके पेड़ पौधे, के प्रति लोगों में ममत्व के भाव के साथ जागरूकता बढे तथा अधिक से अधिक आम जन इस अभियान में सहभागिता सुनिश्चित करें    रायपुर वन मंडलाधिकारी लोक नाथ पटेल आगे बताते है कि वनों के विस्तार उसके संरक्षण, संवर्धन के महात्वाकांक्षि उद्देश्य  का  युद्ध स्तर पर  सी सी एफ अधिकारी एस मणिवासगन  रायपुर के विशेष आदेश का अक्षरशः पालन करते हुए अनेक वन क्षेत्र सहित ब्लॉक स्तर पर कार्य जारी है जिसमें रायपुर वन मंडल अंतर्गत आरंग परिवृत के ग्राम पंचायत भलेरा के 18 हेक्टेयर आरक्षित ऑरेन्ज भूमि में लगभग 18 हजार मिश्रित पौधों का सफल रोपण कार्य वित्तीय वर्ष 2025-2026 जुलाई में संपादित किया गया जो दस माह के अल्प आवधि काल में 99 प्रतिशत सफल रूप से सर्वाइव  करते हुए लगभग आठ से दस फीट की ऊँचाई में ग्रोथ कर रहा है उन्होंने इसका संपूर्ण श्रेय मातहत अधिकारियों एवं मैदानी अमलों के कर्मचारियों को दी है 


  इसी तरतमय में रायपुर वन वृत के उप वन मंडलाधिकारी आनंद कुदरया से चर्चा मे उन्होंने  बताया कि आरंग परिवृत् के ग्राम पंचायत भलेरा का ऑरेन्ज भूमि में शत प्रतिशत रिजल्ट आना अपने आप मे बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि विभागीय कर्तव्य निष्ठा अधिकारी,कर्मचारियों ने पूरी निष्ठा ईमानदारी, लगन से आठ माह में लगातार सुरक्षा देख रेखा और सिंचाई के लिए जुटे रहते है  उन्होंने बताया कि भीषण अप्रेल  माह में हरियाली के साथ पौधे सर्वाइव करने के पीछे सतत अधिकारियों की मॉनिटरिंग तथा नियमित उपचार एवं निंदाई गुडाइ प्रमुख है रायपुर उप वन मंडलाधिकारी आनंद कुदरया आगे बताते है कि संपूर्ण कार्य कैंपा मद वनीकरण से क्षतिपूर्ति वृक्षरोपण कार्य  किया गया है जिसमें वन क्षति पूर्ति वनीकरण   के तहत रायपुर वन मंडल अंतर्गत वन क्षेत्रों में किये जाने वाले निर्माण, नाले, सड़क, में हुए  क्षति ग्रस्त  उन पेड़ पौधों के एवज में एक पेड़ की जगह दस पौधे का सफल रोपण किया गया  है जो किये आज दिनांक तक लगभग अट्ठारह हजार पौधे पूरी तरह से स्वस्थ तरीके से ग्रोथ कर रहे है 


 किसी भी रोपण क्षेत्र की सफलता का मुख्य भूमिका (रीढ़ ) परिक्षेत्राधिकारी का होता है जिसके मजबूत कंधों में भूमि व्यवस्था से लेकर रोपण सुरक्षा उपचार केज्युवल्टी, तथा सतत मॉनिटरिंग से युवा अवस्था पहुंचने तक अनिवार्य रहता है वैसे भी कथित भलेरा रोपण क्षेत्र दस वर्षों के लिए रायपुर वन मंडल अंतर्गत अनुबंधित करार किया हुआ है इस महती दायित्व का बखूबी निर्वहन  रायपुर वन मंडल के युवा, ऊर्जा वान परिक्षेत्राधिकारी चंद्र प्रकाश महोबिया कर रहे है पर्यावरण एवं प्रकृति प्रेमी होने की वजह से सप्ताह में दो से तीन बार प्लांटेशन,रोपण क्षेत्र फील्ड का मॉनिटरिंग कर दिशा निर्देश देकर समस्त व्यवस्था मुहैय्या कराते है ताकि रोपण पूरी तरह से सर्वाइव कर सके इस संदर्भ में रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र प्रकाश महोबिया बताते है कि सुरक्षात्मक दृष्टि कोण से भलेरा ग्राम के 18 हेक्टेयर भूभाग प्लांटेशन् को चारो ओर से  मजबूत, चैनलिंक, जालीदार फैसिंग कर घेरा बंदी  किया गया है ताकि मवेशी चराई एवं असमाजिक,शरारती तत्वों से प्लांटेशन को सुरक्षित रखा जा सके क्योंकि प्लांटेशन वन विभाग के जेरे निगरानी में दस वर्ष अवधि के लिए अनुबंधित है उन्होंने बताया इसके लिए दो चौकीदार रखे गए है जो अलग शिफ्टों मे रात दिन की ड्यूटी लगाई जाती है इनके अलावा प्रति दिन कार्यों की समीक्षा  जैसे निंदाई गुडाइ, बारह घंटे सिंचाई के अनुसार छ से अधिक सुरक्षा श्रमिक प्रति दिन  कार्यरत रहते है रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र प्रकाश महोबिया आगे बताते है कि भलेरा ग्राम के श्रमिकों को  रोजगार उपलब्ध हो रहा है स्थानीय श्रमिकों की उपस्थित से शरारती तत्व भी प्लांटेशन क्षेत्र में किसी प्रकार की असमाजिक गतिविधियां, नशा शराब, जुआँ, पौधों की कटाई इत्यादि से  सुरक्षित हो चुका है रायपुर रेंजर चंद्र प्रकाश महोबिया आगे बताते है कि संपूर्ण कार्य कैंपा मद से सी एस आर के तहत क्षति पूर्ति वृक्षारोपण किया जा रहा है उन्होंने बताया कि वन भूमि या राजस्व भूमि में औद्योगिक घरानों द्वारा केबल या पोल खंबे, सड़क मार्ग निर्माण के दौरान पेड़,वन की क्षति होने पर आसपास क्षेत्र के रिक्त पड़त बन्जर भूमि के स्थान को कलेक्टर एवं आर आई के मध्यम से लिखा पढ़ी कर अधिग्रहित कर उक्त स्थान में क्षतिपूर्ति प्लांटेशन वृक्षारोपण कार्य संपादित किया जाता है इसका संपूर्ण व्यय औध्योगिक घराने से शासन के मध्यम से प्राप्त होता है 


  आरंग परिवृत के मुख्य सहायक प्रभारी संतोष सामंत राय है जो प्राकृतिक एवं पर्यावरण प्रेमी है उनके खून में ही वन के प्रति अगाध निष्ठा, प्रेम बसा हुआ है इसका मूल कारण उनके पिता स्वय वन विभाग में कार्य करते हुए अपनी सेवाएं देकर समर्पित रहे है जो पेड़ पौधे, वनों के प्रति समानता,  व्यवहार, उनके भी रग रग में रचा बसा हुआ है आरंग परिक्षेत्र सहायक के नेतृत्व में संतोष सामंत राय  बताते है कि क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण  कार्य बहुत बड़ी चुनौती है जिसे हमारी आरंग टीम ने जिसमें मुख्यतः  भलेरा प्लांटेशन प्रभारी अभिजित भट्टाचार्य, सावन कुमार साहू, दौलत राम साहू, दिलीप परमार,पंकज वर्मा, जैसे जांबाज सिपाही इनके साथ सुरक्षा श्रमिक ,मनहरण ,झम्मन का सहयोग बराबर मिल रहा है वे सब चुनौती स्वीकार करते हुए संपूर्ण व्यवस्था में पुरा सहयोग करते हुए पूरे विश्वास के साथ कार्यों का सफल संपादन कर रहे है वे बताते है एक वर्ष पूर्ण होने के पूर्व प्लांटेशन  की स्थिति प्रशंसनीय है
इसकी मूल वजह बताते हुए आरंग परिवृत के सहायक प्रभारी संतोष सामंत राय बताते है कि वृक्षारोपण क्षेत्र में सर्वाधिक सिंचाई,जल और सुरक्षा की आवश्यकता होती है जिसकी हमने प्रमुखता से व्यवस्था किया   पश्चात छ सौ फीट की गहराई  मे बोर उत्खनन करवाया गया जिसमें प्रचुर मात्रा में जल का श्रोत फुट पड़ा ऐसा भान होता है जैसे राजा भागीरथी की कठोर तपस्या  के मानिंद हमें भी स्वर्ग से मां गंगा की जल धारा  यहाँ  फुट पड़ी हो जो आज भी प्लांटेशन क्षेत्र की क्षुधा,प्यास को तृप्त कर रही है यही नही रोपण क्षेत्र के मध्य में वहाँ एक तीस बाई तीस  फीट का गहरा  वाटर टैंक निर्माण किया गया जिसमे दस से बारह फीट जल आज की तिथि में संचय किया हुआ उपलब्ध है आरंग परिवृत के सहायक प्रभारी संतोष सामंत राय आगे बताते है कि संपूर्ण क्षेत्र के सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम निर्माण किया गया है जिसमे कर्मचारी लगातार बारह घंटे सिंचाई कर रोपण क्षेत्र में नमी बनाए हुए है 



उन्होंने बताया कि इसमें करंज, ग्राफ्टेड जामुन, आँवला,आम, मौल श्री, अर्जुन,मोहोगनी पेल्टाफार्म, बरगद, पीपल, केसिया, समिया, बेहड़ा, दुबिया, कचनार्, मिलिया मोहगनी,  जैसे फलदार, फुलदार, औषधि युक्त मिश्रित प्रजाति के पौधे रोपे गए है आरंग प्रभारी एस सामंत राय आगे बताते है  कि ग्राम भलेरा सरपंच और ग्रामीणों का पूर्ण सहयोग मिल रहा है साथ ही ग्राम क्षेत्र में कोटवार के मध्यम से मुनादि भी कराई जाती है ताकि ग्रामीणों में जन जागरूकता लाने प्लांटेशन क्षेत्र के आसपास  ज्वलनशील पदर्थ, बीड़ी सिगरेट न फेक सकें  उन्होंने आगे बताया कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से कोई कोताही बरती नही जा रही है चैन लिंक फैनसिंग के अलावा मुनारा निर्माण कराया गया ताकि गाय गरुआ मवेशी चराई को प्रतिबंधित किया गया है किसी आमजन के द्वारा रोपण के आसपास अतिक्रमण करने का कुत्सित प्रयास भी नही किया जा सकता है


अग्नि सुरक्षा को लेकर बहुत ज्यादा संवेदनशील है सूखे घास फुस, खरपतवार की सफाई की गई उन्होंने बताया समय समय पर जैविक खाद, एन. पी. के. प्रोटीन डाल कर केमिकल छिड़काव् से मृदा को उर्वरा युक्त बनाया जाता है ताकि कीट सूक्ष्म जीवाणु का नाश हो तथा स्वस्थ्य पौधों का ग्रोथ हो सके यही बजह है कि रोपण क्षेत्र मे 99 प्रतिशत पौधे स्वस्थ्य होकर सर्वाइव कर रहे है एक प्रतिशत इसलिए कमी क्योंकि फूल और पत्तियाँ निकलने पर वानरों की टोली पौधों को क्षति ग्रस्त कर हानि पहुंचाते है जिन्हे गुलेल से भगाया जाता है रायपुर वन मंडल के आरंग परिवृत के समस्त वन कर्मी पूरी शिद्दत से क्षेत्र में अवलोकन  कर निगरानी कर रहे है संभवतः वर्षा ऋतु की प्रथम फुहार से संपूर्ण रोपण क्षेत्र की  हरियाली, उसके निरंतर ग्रोथ, और वन कर्मियों की मॉनिटरिंग, उपचार,रख रखाव, सुरक्षा से जिस तन्मयता से वन कर्मी इमानदारी पूर्वक कार्यों को संपादित कर रहे उसे देख कर यह ज्ञात होता है कि एक वर्ष पूर्ण होने के पूर्व इसकी एक अलग वन क्षेत्र सदृश्य दशा निर्मित होगी और अन्य क्षेत्र के वन कर्मचारियों के रोपण क्षेत्र के मामले में उनके लिए साक्षात उदाहरण बन कर नई दिशा तय करेगी. 

गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

नगर निगम रायपुर में जन्म मृत्यु का खेल

 नगर निगम रायपुर में जन्म मृत्यु  का खेल 


रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) नगर निगम रायपुर में जन्म और मृत्यु  प्रमाण पत्र लेने का अजब खेल हो रहा है जहाँ देरी होने पर जन्म लेने वाले से लेकर मृत्यु होने तक वाले व्यक्ति के परिवार से बगैर लेन देन किये जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नही किया जाता जिसकी वजह से पीड़ित परिवार के लोगों के समक्ष बहुत बढ़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है इस संदर्भ में व्हाट हाउस में बकायदा एक सिंडिकेट चल रहा है जहाँ निगम कर्मी से लेकर बगैर चढ़ावा के कोई भी समस्या का निदान हो पाना मुश्किल है बहुत से जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने आए पीड़ित  परिवार से जब बात किया गया तो उन्होंने बताया कि सभी डाक्युमेंट पूर्ण होने के  बाद भी निगम कर्मचारी कोई न कोई कमी, नुक्स निकाल कर एक दिन के कार्य को कई दिनों तक घुमाया जाता है वही कुछ दलाल नुमा लोग नगर निगम व्हाइट हाउस में जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र ऑफिस के समनें  अस्थायी रूप से पृथक काउंटर बना कर दुकान दारी चला रहे है जहाँ काला कोट पहने  वकील भी मंडराते रहते है जहाँ दिन भर में पांच से दस हजार रुपये प्रति दिन इंकम हो रही है पीड़ित कुछ व्यक्तियों ने यह भी बताया कि उनके द्वारा जमा करने पर निगम कर्मचारी बगैर देखे पढ़े आवेदन जमा कर लेते है यह भी बताया गया प्रति आवेदन पांच सौ रुपये नगर निगम कर्मी लेते है जिसमें पचीस से पचास आवेदन प्रति दिन जमा होते है 



जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के इस गोरख धंधे वाले खेल से अब आम जनता में भारी आक्रोश बदता जा रहा है उनका कहना है कि नगर निगम रायपुर में आम जनता की सुविधा के लिए बनाया गया है न की लोगों की जेब खाली करने और नाना प्रकार से नियम कानून दिखा कर भय और प्रताड़ित करने के लिए नही आम लोगों में यह भी चर्चा है कि सभी विभाग में बहुत से वसुलीबाज कर्मचारी मौजूद है जो प्रति दिन राशि एकत्रित कर उपर बैठे अधिकारियों की जेब गर्म करते है