अभनपुर नयापारा आरामिल में प्रतिबंधित काष्ठ
दिन रात पहुँच रहे
अलताफ़ हुसैन
रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छत्तीसगढ़ प्रदेश के वन क्षेत्र में बेतहाशा अवैध कटाई किसी से छुपा नही है आए दिन समाचार पत्रों की सुर्खियों में यह बात प्रकाशित होते रहती है कि साल, सागौन,बीजा, खैर, सहित भिन्न भिन्न प्रजाति के कहुआ,जैसे अन्य काष्ठ तस्करी करते वन विभाग की टीम ने पकडा परंतु वर्ष में एकाध बार किए जाने वाली ऐसी कार्यवाही एक प्रकार से ...ऊँट के मुँह मे जीरा...के समान नही लगता है क्योंकि लगातार प्रदेश के निस्तार काष्ठ डिपो में उपरोक्त इमारती काष्ठ की बढ़ रही शासकीय मूल्य दर एवं ऑन लाइन नीलामी ने काष्ठ माफिया, तस्करों एवं आरा मिल,टिम्बर की नींद उडा कर रख दी है परिणामतः काष्ठ तस्करों, दलालों ने किसान अथवा स्थानीय सरपंच की मिलीभगत कर लिखित में कटाई की अनुमति प्राप्त कर लेते है तथा अनुमति पत्र लेकर उसकी आड़ में कृषि, भूमि, क्षेत्र के प्राकृतिक रूप से पैदा,पीपल से लेकर नीम, बेर, इमली, एवं अन्य फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पेडों का पातन कर क्षेत्र के आरा मिल,टिम्बर में पहुँचा दिया जाता है जबकि उपरोक्त फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पेड़ एवं कहुआ तक पेड़ की कटाई बगैर सक्षम वन अधिकारी, एवं एस.डी.एम. की अनुमति पत्र लिए वनोपज धन का पातन नही किया जा सकता यह सीधे सीधे काष्ठों की चोरी एवं तस्करी की श्रेणी मे आता है जिससे काष्ठ तस्कर और दलालों को इसके एवज में अच्छा खासा आर्थिक लाभ मिल जाता है जबकि वन अधिनियम यह कहता है कि छ्ग शासन द्वारा छुट बबूल किस्म के अन्य प्रजाति के वन संपदा काष्ठों का नाम आयु, एवं उसके काश्त कारी भूमि से हटाने का लिखित कारण बता कर उसे सरपंच के द्वारा अनुमोदन कर वन विभाग के सक्षम अधिकारी से लिखित में अनुमति लेना अनिवार्य होता है जिसमें कम से कम तीन से छ माह का समय लगता है परंतु काष्ठ तस्कर एवं दलाल बगैर किसी लिखित प्रक्रिया के सरपंच की अनुमति जैसे वह वन विभाग का स्वामी या अधिकारी हो तथा मनमाने रूप से बबुल,जैसे अन्य काष्ठों की विभाग को अनुमति, सूचना दिये बगैर सरपंच पद का लाभ उठाते हुए खुले आम मन माफिक काष्ठों का विदोहन कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर शासन के राजस्व को चोट पहुंचा रहे है ज्ञात हुआ है कि बहुत से आरा मिलर्स स्वयं के दलाल नियुक्त कर ट्रैक्टर एवं बड़े ट्रकों में चोरी छिपे कृषि क्षेत्रों के काष्ठों का परिवहन कर लगातार हरियाली मय क्षेत्रों का विदोहन तेजी से किया जा रहा है इस संदर्भ में आशंका व्यक्त की जा रही है कि बहुत से छोटे वन कर्मचारियों ने बकायदा होने वाली कटाई के एवज में प्रति गाड़ी के हिसाब से हजारों लाखों रुपये का लेनदेन कर विशेष छुट दे रखी है जिसकी वजह से काष्ठ तस्करों के हौसले और बुलंद है.
इस तारतम्य में अभी लगातार समाचार मिल रहा है कि अभनपूर, राजिम नयापारा के आरा मिल काष्ठों कि बम्फर आमद से आरा मिल लालम लाल और गुलज़ार है जहाँ प्रतिबंधित कहुआ से लेकर भिन्न भिन्न प्रजाति के इमारती काष्ठों का अनवरत परिवहन हो रहा है परंतु इस संदर्भ में वन विभाग का उड़न दस्ता के द्वारा सारगर्भित कार्यवाही नही होना बताया जा रहा है जबकि अति विश्वसनीय सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि अभनपुर जो राजधानी रायपुर को जोड़ने वाला प्रमुख सेंटर क्षेत्र माना जाता है जहाँ एक ओर से, कुरुद, जो धमतरी वन मंडल के मेघा क्षेत्र से सिंगपुर नगरी को जोड़ता है वही धमतरी,वन मंडल के बहुत से वन क्षेत्रों का यह क्षेत्र खुला मार्ग है जहाँ से भारी मात्रा में वन क्षेत्र के काष्ठों का परिवहन निर्बाध गति से किया जाना बताया जा रहा है वही दूसरी ओर से पांडुका गरियाबंद से बड़ी सहजता से भी काष्ठ परिवहन राजिम नयापारा होते हुए अभनपुर हेतु आवगमन उपलब्ध है जिसका दो दर्जन से उपर आरामिल तस्कर भरपूर लाभ उठा रहे है इसकी जब सूत्रों से जानकारी ली तो अधिकांश आरा मिलर्स के कर्ता धर्ता का रटारटाया जवाब था कि स्थानीय आरामिल में उपलब्ध काष्ठ महाराष्ट्र वन क्षेत्र काष्ठागार से नीलामी से ली गई है सवाल उठता है कि लाखों कि महाराष्ट्र क्षेत्र के इमारती काष्ठ नीलामी से लाखों रुपये व्यय कर एक या दो ट्रक ही लिया जा सकता है यहाँ तो कई ट्रक इमारती काष्ठ प्रत्येक आरा मिल मे उपलब्ध है जो कहाँ से यहाँ तक पहुंचा? यह विचारणीय पहलू है अभनपूर, राजिम नयापारा, आरामिल में ऐसी स्थिति एक दो आरा मिल मे ही नही बल्कि दर्जनों आरा मिल में देखी जा सकती है यदि इसकी सूक्षमता से जांच की जाए तो बहुत बड़ा काष्ठ तस्करी का भंडाफोड़ यहाँ हो सकता है
लगातार अभनपुर, राजिम नयापारा आरा मिल क्षेत्रों में हो रही अवैध काष्ठ परिवहन के संदर्भ में नया रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र कुमार महोबिया से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में कथित क्षेत्र में लगातार लाव लश्कर के साथ रात्रि गश्त किया जा रहा है जिस का परिणाम रहा की अभनपुर के दो आरामिल पर कार्यवाही की गई परंतु यह पर्याप्त नही है उन्होंने आगे बताया कि जब तक काष्ठ तस्करों पर बड़ी कार्य वाही नही हो जाती तब तक उसे वे सफलता नही मानते वही जिला उड़न दस्ता प्रभारी सामंत राय से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि आरंग सहित अभनपुर एवं अन्य क्षेत्र में तस्करों पर कार्यवाही की गई है यह कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी लगातार काष्ठ माफियाओं पर कार्यवाही के लिए सतत गश्त की जा रही है शीघ्र ही इसके सार्थक परिणाम सामने आने की उम्मीद व्यक्त की गई है बताते चलें कि कार्यवाही जो भी हो परंतु आरा मिल के खिलाफ फॉरेस्ट काइम न्यूज़ उक्त अवैध काष्ठ तस्करी पर समय समय पर पाठकों को अवगत कराते रहेगा क्योंकि इनके द्वारा काष्ठ लाए जाने वाले श्रोत,,नाम, आरा मिल की व्यवस्था सहित अन्य सैटिंग व्यवस्था लेनदेन इत्यादि का खुलासा किया जाएगा.



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें