मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

कोडार काष्ठागार का साग- वान बना भ्रष्टाचारियों का भगवान

 कोडार काष्ठागार का  साग- वान 

बना भ्रष्टाचारियों का भगवान 


अल्ताफ हुसैन 

रायपुर(फॉरेस्ट क्राइम  न्यूज़)छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम एक स्व पोषित संस्था है जो स्वयं द्वारा उत्पादित सागौन प्लांटेशन रोपण कर वन विकास निगम की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर संपूर्ण  व्यवस्था का संचालन करता है इसके लिए छ्ग के भिन्न भिन्न वन क्षेत्रों में वृहद स्तर पर रोपित सागौन प्लांटेशन कर जिसकी आयु लगभग ग्यारह वर्षीय,बाल अवस्था इक्कीस वर्षीय किशोर अवस्था, इकतीस वर्षीय स्वास्थ युवा अवस्था एवं इक चालीस वर्षीय परिपक्व स्थिति में पहुँचने तक प्रति वर्ष माह नवंबर दिसंबर से लेकर अप्रेल मई कभी कभी वर्षा ऋतु के पूर्व काल तक थीनिंग कर सागौन का पातन कर अलग अलग  केटेगिरी बल्ली,डेंगरी,  परिपक्व गोला, के रूप  में  स्थानीय काष्ठागार में संग्रहित किया जाता है तद् पश्चात प्रति माह निर्धारित तिथि पर काष्ठागार मे नीलाम के मध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर निगम को सुव्यवस्थित करता है  इसके एवज में वन विकास निगम राज्य शासन को भी प्रति वर्ष अर्जित आय से लाभांश राशि प्रदान करता है परंतु लगातार राज्य शासन को दिए जाना वाला लाभांश राशि का ग्राफ  लगातार निम्न स्तर पर पहुँच चुका है  छ्ग राज्य वन विकास निगम के पूर्व प्रबन्ध संचालक (एम डी) जो पी सी सी एफ रेंज के आई.एफ.एस.अधिकारी होते है जिनमे एक श्री एस सी जैना साहब के समय छ्ग राज्य शासन को मिलने वाला लाभांश राशिआज की तुलना में बहुत अधिक हुआ करता था परंतु आज उसका एक हिस्सा  लाभांश राशि भी राज्य शासन को नही मिल पा रहा है इसका मूल कारण वविनि  सिस्टम में भ्रष्टाचार के दीमक ने इतना अधिक गहरी खाई की तरह जड़ तक  पैठ बना ली है कि आर्थिक रूप से वन विकास निगम को भीतर ही भीतर पूरी तरह खोखला कर रख दिया है उपर से निचले स्तर के अधिकारी कर्मचारी नित नए नए उपाय से किसी भी प्रकार से वन विकास निगम की लुटिया डुबोने मे कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है इसका परिणाम यह होता है कि बड़े बड़े उजागर होने वाले गबन भ्रष्टाचार, घोटाले, अनीयमिताएं पूरी तरह से इस प्रकार दबा दिया जाता है कि कोई भी भ्रष्टाचार,फर्जीवाडा, गबन, धोटाले, अनीयमिताएं, मात्र जैसे इनके लिए  खेल का एक हिस्सा हो एवं कार्य वाही के नाम पर लिखा-पढ़ी सब बनावटी कागजी घोड़े दौड़ते रहते है  शनैः शनैः भविष्य मे आरोपित अधिकारी, कर्मचारी पूरी तरह साफ सुथरा बच जाते है एक तरह से वन विकास निगम में भ्रष्टाचार की चमड़ी इतनी मोटी हो चुकी है कि मोटी खाल, चमड़ी वाले घड़ियाल की आँख, भी वविनि की भ्रष्ट कार्यशैली देख कर शरमा जाए


 वर्ष 2020 के पश्चात  ऐसे बहुत से गभीर मामले कोडार काष्ठागार के उजागर हुए है जिसमें   अब तक हजारों घन मीटर सागौन की ढुलमूल  मेजरमेंट व्यवस्था के कारण अफरा-तफरी कर गड़बड़ घोटाला, गबन  भ्रष्टाचार  की भेंट चढ़ चुकी है और फिर भी किसी वरिष्ठ अधिकारी ने इस पर न्याय पूर्ण जांच करनें की ज़हमत भी नही उठाई और पूरी की पूरी मिलने वाली करोड़ों की राशि गबन कर डकार तक नही लिया गया  यदि ईमानदारी से उपर बैठे वरिष्ठ अधिकारी इस पर  कार्यवाही करते तो बहुत से वन विकास निगम कर्मी  की  नौकरी तो जाती ही साथ ही लाल बंगले की सैर करते सो अलग साथ ही उनसे रिकवरी अलग वसूला जाता परंतु  समस्त व्यवस्था 'सैय्या भयो कोतवाल तो अब डर काहे का" वाली उक्ति को चरितार्थ करते हुए जब संपूर्ण व्यवस्था भ्रष्टाचार में लीन हो तब उन पर कौन डंडा चलाए ? गड़बड़ कर मेजरमेंट की घोटाले की वजह से इस वित्तीय वर्ष 2026 में फिर एक नया गड़बड़,घोटाला हो सकता है वन विकास निगम अंतर्गत बार नयापारा  परियोजना मंडल के अब चाहे सिरपुर आरंग, बार रायकेरा, रवान परिक्षेत्रों से सागौन कटाई से लेकर काष्ठागार पहुँचने तक तो एक बड़ा खेल होता ही है  परंतु काष्ठागार में काष्ठ उतारने से लेकर थप्पी जमाने का भी बहुत बड़ा खेल होता दिखाई दे रहा है जिसमें श्रमिकों को दिये जाने वाले भुगतान पर यह आंकडा लाखों,नही बल्कि करोड़ों में पहुँचने का अंदेशा है हाल ही प्रातःकाल  फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ के पत्रकार पिथौरा प्रवास मे थे तथा वे जब प्रातः काल कोडार काष्ठागार मे पहुंचे जहाँ कुछ श्रमिक लोड ट्रक से सागौन उतार कर सीधे थप्पी जमा रहे थे आश्चर्य का विषय यह था कि न ही कोई वहाँ मेजरमेंट करने वाला वन विकास निगम का अधिकारी,कर्मचारी था और न ही रेंजर मौजूद था सिर्फ मजदूर ही सीधे सागौन काष्ठ उतार कर थप्पी जमा रहे थे 


गौर तलब यह है कि जंगल से आनें वाली काष्ठ मेजरमेंट पश्चात काले रंग पेंट से नंबर, इत्यादि अंकित कर काष्ठागार भेजा जाता है जिसे काष्ठागार प्रभारी, रेंजर या नियुक्त मेजरमेंट कर्मी द्वारा पचास नग का नाप जोख  देख कर उसका मिलान करता है पश्चात उसे किस श्रेणि में रखना है वह उस श्रेणि थप्पी में रखा जाता  है जो कोर्डवर्डअनुसार होता है जैसे सी 1अथवा सी 2 या ए बी सी कोर्ड नम्बर मे जमा किया जाता है परंतु यहाँ ऐसी कोई प्रक्रिया दिखाई नही दी गई और सीधे सीधे थप्पी जमा दिया गया यानी बल्ली,डेंगरी गोला सागौन  सब एक ही स्थान में रखा जा रहा था जबकि सेवा निवृत पूर्व अधिकारी से जब जानकारी ली गई तो मालूम हुआ है कि एक एक काष्ठ को दिये गए नम्बर से मिलान कर ही उसका संचय किया जाता है इसके पूर्व काष्ठों को फैला कर सुखाया जाता है ताकि उसका अनुमानित घन मीटर लिखा जा सके जिसके लिए बकायदा छ्ग राज्य वन विकास निगम लोडिंग अन लोडिंग सहित काष्ठ  फैलाई से लेकर उसकी लंबाई, गोलाई,घनमीटर मेजरमेंट  तक इसके लिए लाखों की बड़ी राशि जारी करता है परंतु इस प्रकार की ढुलमूल कार्यशैली से संभवतःगड़बड़ी होना तय है साथ ही बहुत बड़े राजस्व का नुकसान होना निश्चित है जो मेजरमेंट की अस्पष्ट गलत  नीतियों की वजह से कई घन मीटर सागौन के अनेक काष्ठ  विगत कुछ वर्षों में लगातार गड़बड़ी स्पष्ट देखने में आ चुका है जबकि वन नियम यह कहता है कि काष्ठागार मे काष्ठ पहुँचते रोजनामचा पंजी में गेट पर अंकित किया जाता है ही कष्ठों को पहले फैलाया जाता है ताकि उसकी नमी सुखता सहित उसके घन मीटर का उचित मुल्यांकन किया जाए क्योंकि सुखता में दो पाइंट छोड़ दिया जाता है जैसे पंद्रह मीटर है तो उसे चौदह मीटर अस्सी पॉइंट बताया जाएगा पश्चात उसके  श्रेणि का सही मूल्यांकन पचास एवं चालीस की थप्पी बनाया जाता है


जिसके एवज मे श्रमिकों को प्रति ट्रक  सागौन काष्ठों की फैलाई, सुखता करना फिर मेजरमेंट कर्मी द्वारा उसके घनत्व, आकर, प्रकार, लंबाई, गोलाई कर उसे उचित श्रेणि क्रम में जमाना होता है इन समस्त व्यवस्था हेतु श्रमिकों का पारिश्रमिक मूल्य छ्ग राज्य वन विकास निगम तय करता है जैसे इसकी अनुमानित दर सागौन बल्ली तीन से पांच  रुपये नग डेंगरी काष्ठ पांच से दस, पंद्रह रुपये और घनत्वदार सागौन बारह सौ से पंद्रह सौ रुपये घन मीटर निर्धारित अनुमानित माना जाए तो उस हिसाब से पचासों लाख का श्रमिक भुगतान वन विकास निगम सिर्फ बार नयापारा परियोजना मंडल को ही प्रदाय करता है उस हिसाब से संपूर्ण प्रदेश के काष्ठागार मे श्रमिकों का भुगतान का आंकडा करोड़ों रुपये पहुँच जाए तो अतिशियोक्ति नही  है परंतु काष्ठागार  श्रमिकों द्वारा जिस प्रकार से सुविधाजनक सरलीकरण शार्टकट अपना रहे है उससे वन विकास निगम के अधिकारी, कर्मचारी द्वारा आँख में सुरमा डाल  कर संपूर्ण व्यवस्था को नज़र अंदाज़ कर  निगम कर्मी द्वारा भेजे गए    व्हाट्स एप फोटो देख पर ही गोसवरा व बिल बाऊचर लिखकर मंडल कार्यालय में प्रस्तुत कर रहे है जिसमें कितने घन मीटर कार्य कितनी श्रमिक संख्या द्वारा  संपादित किया गया इन सबका कोई पुरसाने हाल नही क्योंकि  इसकी मॉनिटरिंग करनें बार परियोजना मंडल के डी एम. से लेकर एस डी ओ यहाँ तक रेंजर तक कई कई  दिनों तक लापता रहते है वहाँ काला पीला क्या हो रहा सब बराबर हो जाता है. 


 रेंजर को फोन लगाने पर रिसीव नही करते ऐसा प्रतीत होता है जैसे उन्होंने भैय्या के भरोसे में गय्या पाल रखा है मगर वो भैय्या जो  कोडार  काष्ठागार डिपो प्रभारी ईश्वर केवर्त भी ट्रेनिंग से आने के पश्चात लुका छिपी का खेल खेल रहे है वहां उपस्थिति सेवानिवृत पांच वर्षों से संविदा का लाभ लेने वाले भगवती सोनी से पूछने पर उनके जल्दी घर जाने की बात बताते है जबकि यह भी जानकारी मिली है कि वे मोबाइल में कैमरा लगा कर किसी भी आम व्यक्ति से मिलने साफ मना कर रखे है  उनके इस प्रकार की कार्य शैली से वन विकास निगम की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाला कोडार काष्ठागार का समुचित, सुचारु संचालन कैसे संभव होगा ? बताते चले कि लाखों का पारिश्रमिक भुगतान के पीछे सभी का कमीशन तय है जिसमें गैंग लीडर से लेकर प्रभारी,रेंजर एवं उपर बैठे अधिकारीयों का प्रतिशत बंधा हुआ है  जब बैठे ठाले कमीशन आ रहा है तो फिर काष्ठागार में झांकने की क्या आवश्यक ?  रेंजर भी कभी अपने कार्यालय में नही बैठते संपूर्ण कार्य घर से संपादित कर मंडल         कार्यालय या मुख्यालय में बिल बाउचर निपटाने मे लगे रहते है यह  बड़े शर्म की बात है कि वन विकास निगम के बहुत से कार्यालय है ही नही और जो है वह खुलते ही नही  वही नाके मे भी  ताला बंदी रहता है इन  परिस्थिति में निगम कर्मी क्या करते है और उनको कौन सा भुगतान किया जाता है समझ से परे है. बहारहाल, यही नही काष्ठागार मे नीलाम पश्चात नीलाम कर्ता की गाड़ी लोड से लेकर चार बल्ली लगाने तक की राशि वसूली जाती है जो सीधे  काष्ठागार प्रभारी प्रति दिन पांच से दस हजार रुपये की पृथक आय अर्जित कर ली जाती है इस प्रकार अधिकारियों रेंजर की लगातार  मॉनिटरिंग न करने से भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला, की संभावना प्रबल हो जाती है और कोडार काष्ठागार का यह ग्रीन गोल्ड कहे जाने वाला सागवान (सागौन) भ्रष्टाचारियों के लिए भगवान साबित हो रहा है इस पर तत्काल उपर बैठे अधिकारी द्वारा एक्शन नही लिया गया तो वह दिन दूर नही जब बचा खुचा वन विकास निगम का बंटाधार होना  लगभग तय माना जा रहा है. 

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