गरियाबंद एसडीओ द्वारा निजी कार्य मे शासकीय वाहन का दुरूपयोग दुर्घटना हुई- पर भुगतान कौन करेगा
अल्ताफ हुसैन
रायपुर/गरियाबंद/ (फॉरेस्ट क्राईम न्यूज़) वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मुखिया वन बल प्रमुख ने पूर्व में यह आदेश पारित किया हुआ है कि शासकीय कार्य के अलावा कोई भी अधिकारी कर्मचारी शासन द्वारा प्रदत्त शासकीय वाहन का निज या व्यक्तिगत जीवन मे उपयोग न करें तथा प्रति दिन शासकीय कार्यों में चलने वाली गाड़ी का किलोमीटर सहित डीजल पेट्रोल इत्यादि का संपूर्ण ब्यौरा पंजी में दर्ज करे ताकि वाहन का समुचित रख रखाव एवं व्यवस्था का अनुपालन कर शासकिया वाहन की होने वाली दुरूपयोग,बेतहाशा वृद्धि राशि के व्यय में अंकुश लगा कर उसे बचाए जाने की जिम्मेदारी में समस्त वन कर्मियों की सहभागिता सुनिश्चित किया जाए परंतु बहुत से वरिष्ठ, कनिष्ठ अधिकारी गण ऐसे है जो शासकीय कार्य के अलावा व्यक्तिगत निज उपयोग में भी शासकीय वाहन का खुल कर दुरूपयोग कर अपने जेब से राशि लगाने की बजाए शासन की लाखों की राशि में सेंघ मारी कर रहे है शासकीय वाहन का दुरूपयोग, एवं होने वाली दुर्घटना पर अधिकारी वन प्रबन्धन समिति, निर्माण कार्य, पेड़ पौधों का प्लांटेशन, थीनिंग, जैसे वन विभाग के विकास परक योजनाओं द्वारा जारी शासन के अन्य मद की राशि से लाखों का भुगतान कर अपने कुत्सित कर्मों पर परदा डालने में किसी प्रकार का गुरेज नही करते
ताजातरीन प्रकरण गरियाबंद वन मंडल कार्यालय का है जहाँ के एस डीओ मनोज चंद्राकर जो विगत सात आठ वर्षों से एक ही गरियाबंद वन मंडल में वर्षों से पदस्थ है वर्तमान में भी वे मैनपुर, देवभोग सहित गरियाबंद मे अतिरिक्त एस डी ओ का दोहरा प्रभार संलग्न अधिकारी के रूप में अटैच है वे फरवरी 2026 ,पांच,छ तारीख को वन विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदत्त वाहन क्रमांक सी जी 02- 7214 मे
दोपहर तीन बजे ऐसे ड्रायवर को जिसको तीन चार माह पूर्व सीधी भर्ती में जॉईनिंग किया था उसे लेकर रायपुर आवास छोड़ने साथ ले गए वापसी संध्या सात आठ बजे खाली टाटा सुमो गोल्ड गाड़ी लेकर गरियाबंद वन मंडल के लिए रायपुर से ड्रायवर इंद्रेश साहू धमतरी जिला के गुरूर, पुरुर,खेडिया ग्राम निवासी द्वारा निकला था कि माना रोड स्थित रावत पुरा कॉलेज के पास विपरीत दिशा से इनोवा गाड़ी से जबरदस्त टक्कर हो गई जिसमे सुमो गोल्ड ड्रायवर इंदेश साहू को पैर के घुटने की कटोरी मे गंभीर चोट आई जिसका स्थानीय अस्प्तल में ऑपरेशन किया गया प्रत्यक्ष दर्षियों का कथन है कि दोनों गाड़ी की इतनी जबरदस्त टक्कर थी कि किसी भी व्यक्ति की जान जा सकती थी
यह प्रथम अवसर नही था जब किसी अधिकारी द्वारा निजी व्यक्तिगत कार्यों में शासकीय वाहन का दुरूपयोग किया गया हो ज्ञात हुआ है कि गरियाबंद एस डी ओ मनोज चंद्राकर अपने निजी वाहन का उपयोग कम करते हुए शासकीय वाहन का हमेशा उपयोग करते है राजधानी रायपुर तो जब भी वे आते है सीसीएफ ऑफिस में एक बार अवश्य विभागीय कार्य हेतु जाते ही है यही नही महासमुंद फिंगेश्वर में उनका गहरा लगाव भी बताया जाता है जहाँ भी उनका दौरा निरंतर रहता है उनका क्षेत्र गरियाबंद के मैनपुर, तक रहता है मगर उनका विभागीय एवं निज व्यक्तिगत दौरा लगातार दोनों गाड़ी मे होता रहता है जबकि बाहर जाने के पूर्व डी एफ ओ से अनुमति अनिवार्य रहता है फिर भी शासन द्वारा किलोमीटर के हिसाब से समस्त वन विभाग का वाहन परिचालन दैनंदिनी पंजी पेट्रोल डीजल का अवलोकन करे तो लाखों करोड़ों रुपये का भुगतान उनमे ही खपाते हुआ मिल जाएगा
सवाल उठता है कि गरियाबंद एसडीओ मनोज चंदाकर द्वारा रायपुर निवास आगमन में क्या विभागीय कार्य से गाड़ी लाया गया था यदि हां तो उसे शाम रात को गरियाबंद वन मंडल कार्यालय क्यों वापिस भेज दिया था अब रास्ते मे वाहन का आकस्मिक दुर्घटना ग्रस्त हो गई अब उसका लाखों का सुधार, मरम्मत का भुगतान कौन करेगा वे स्वयम अपनी जेब से करेंगे या वह भी शासन की विभिन्न विकास परक योजनाओं से राशि आहरित कर भरपाई करेंगे ? यह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने बहुत बड़ा सवाल खड़ा हुआ है बताया जाता है की क्षति ग्रस्त वाहन में लगभग दो लाख से उपर का व्यय लगना तय है साथ ही ड्रायवर को प्राथमिक उपचार के लिए भी कोई राशि उनके द्वारा नही दिया गया उसका लगभग एक लाख उपचार मे लग गया है यही नही लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने एवं शासकीय वाहन को क्षति ग्रस्त के जुर्म मे उस पर शासकीय कार्यवाही या सस्पेंड किया जा सकता है दुर्घटना की एफ आई दर्ज हुई या नही अभी स्पष्ट पता नही चल पाया है.





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