गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन ने महामंडले

 



वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन ने महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि से भेटकर आशीर्वाद लिया 



अर्जुन तिवारी 

रायपुर, (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन एवं सर्व युवा ब्राह्मण परिषद के प्रमुख पदाधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल ने बुधवार  को रात्रि मेगनेटो सिगनेचर होम्स क्लब हाउस, रायपुर में उपस्थित होकर परम पूज्य निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री कैलाशानंद गिरि जी महराज के दिव्य दर्शन एवं पावन आशीर्वाद का सौभाग्य प्राप्त किया इस अवसर पर नि रंजन पीठाधीश्वर श्री कैलाशानंद गिरि जी महराज ने भेट के दौरान ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों को सनातन धर्म पर ज्ञान एवं मार्गदर्शन प्रदान किया. 

प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द ओझा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गुणनिधि मिश्रा, महासचिव द्वय अजय अवस्थी, डॉ सुनील कुमार ओझा एवं प्रदेश सचिव राम तिवारी विशेष रूप से उपस्थित थे.

इस आध्यात्मिक और परम पावन कार्यक्रम के आयोजक परम भक्त सुशील ओझा और परिवार थे.


गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

गरियाबंद एसडीओ द्वारा निजी कार्य मे शासकीय वाहन का दुरूपयोग दुर्घटना हुई- पर भुगतान कौन करेगा

 गरियाबंद एसडीओ द्वारा निजी कार्य मे शासकीय वाहन का दुरूपयोग दुर्घटना हुई- पर भुगतान कौन करेगा  


अल्ताफ हुसैन

रायपुर/गरियाबंद/ (फॉरेस्ट क्राईम न्यूज़) वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मुखिया  वन बल प्रमुख ने पूर्व में यह आदेश पारित किया हुआ है कि शासकीय कार्य के अलावा कोई भी अधिकारी कर्मचारी शासन द्वारा प्रदत्त शासकीय वाहन का निज या व्यक्तिगत जीवन मे उपयोग न करें तथा प्रति दिन शासकीय कार्यों में चलने वाली गाड़ी का किलोमीटर सहित डीजल पेट्रोल इत्यादि का संपूर्ण ब्यौरा पंजी में दर्ज करे ताकि वाहन का समुचित रख रखाव एवं व्यवस्था का अनुपालन कर शासकिया वाहन की होने वाली दुरूपयोग,बेतहाशा वृद्धि राशि  के व्यय में अंकुश लगा कर उसे बचाए जाने की जिम्मेदारी में समस्त वन कर्मियों की सहभागिता सुनिश्चित किया जाए  परंतु  बहुत से वरिष्ठ, कनिष्ठ अधिकारी गण  ऐसे है जो शासकीय कार्य के अलावा व्यक्तिगत निज उपयोग में भी शासकीय वाहन का खुल कर दुरूपयोग कर अपने जेब से राशि लगाने की बजाए शासन की लाखों की राशि में सेंघ मारी कर रहे है शासकीय वाहन का दुरूपयोग, एवं होने वाली दुर्घटना पर अधिकारी वन प्रबन्धन समिति, निर्माण कार्य, पेड़ पौधों का प्लांटेशन, थीनिंग, जैसे वन विभाग के विकास परक योजनाओं द्वारा जारी शासन के अन्य मद की राशि से लाखों का भुगतान कर अपने कुत्सित कर्मों पर परदा डालने में किसी प्रकार का गुरेज नही करते 



          ताजातरीन प्रकरण गरियाबंद वन मंडल कार्यालय का है जहाँ के एस डीओ मनोज चंद्राकर जो विगत सात आठ वर्षों से एक ही गरियाबंद वन मंडल में वर्षों से पदस्थ है वर्तमान में भी वे मैनपुर, देवभोग सहित गरियाबंद मे अतिरिक्त एस डी ओ का दोहरा प्रभार संलग्न अधिकारी के रूप में अटैच है वे फरवरी 2026 ,पांच,छ तारीख को वन विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदत्त वाहन क्रमांक सी जी 02- 7214 मे


दोपहर तीन बजे ऐसे ड्रायवर को  जिसको तीन चार माह पूर्व सीधी भर्ती में जॉईनिंग किया था उसे लेकर  रायपुर आवास छोड़ने साथ ले गए वापसी संध्या सात आठ बजे खाली टाटा  सुमो गोल्ड गाड़ी लेकर गरियाबंद वन मंडल के लिए रायपुर से  ड्रायवर इंद्रेश साहू धमतरी जिला के गुरूर, पुरुर,खेडिया ग्राम निवासी द्वारा  निकला था कि माना रोड स्थित   रावत पुरा कॉलेज के पास विपरीत दिशा से इनोवा गाड़ी से जबरदस्त टक्कर हो गई जिसमे सुमो गोल्ड ड्रायवर इंदेश साहू को पैर के घुटने की कटोरी मे गंभीर चोट आई जिसका स्थानीय अस्प्तल में ऑपरेशन किया गया प्रत्यक्ष दर्षियों का कथन है कि दोनों गाड़ी की इतनी जबरदस्त टक्कर थी  कि किसी भी व्यक्ति की जान जा सकती थी  



    यह प्रथम अवसर नही था जब किसी  अधिकारी द्वारा निजी व्यक्तिगत  कार्यों में शासकीय वाहन का दुरूपयोग किया गया हो ज्ञात हुआ है कि गरियाबंद एस डी ओ मनोज चंद्राकर अपने निजी वाहन का उपयोग कम करते हुए शासकीय वाहन का हमेशा उपयोग करते है राजधानी रायपुर तो जब भी वे आते है सीसीएफ ऑफिस में एक बार अवश्य विभागीय कार्य हेतु जाते ही है यही नही महासमुंद फिंगेश्वर में उनका गहरा लगाव भी बताया जाता है जहाँ भी उनका दौरा निरंतर रहता है उनका क्षेत्र गरियाबंद के मैनपुर, तक रहता है मगर उनका विभागीय एवं निज व्यक्तिगत दौरा लगातार दोनों गाड़ी मे होता रहता है जबकि बाहर जाने के पूर्व डी एफ ओ से अनुमति अनिवार्य रहता है फिर भी शासन द्वारा किलोमीटर के हिसाब से समस्त वन विभाग का वाहन परिचालन दैनंदिनी पंजी पेट्रोल डीजल का अवलोकन करे तो लाखों करोड़ों रुपये का भुगतान उनमे ही खपाते हुआ मिल जाएगा 


                सवाल उठता है कि गरियाबंद एसडीओ मनोज चंदाकर द्वारा रायपुर निवास आगमन में क्या विभागीय कार्य से गाड़ी लाया गया था यदि हां तो उसे शाम रात को गरियाबंद वन मंडल कार्यालय क्यों वापिस भेज दिया था अब रास्ते मे वाहन का आकस्मिक दुर्घटना ग्रस्त हो गई अब उसका लाखों का सुधार, मरम्मत का भुगतान कौन करेगा वे स्वयम अपनी जेब से करेंगे या वह भी शासन की विभिन्न विकास परक योजनाओं से राशि आहरित कर भरपाई करेंगे ? यह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने बहुत बड़ा सवाल खड़ा हुआ है बताया जाता है की क्षति ग्रस्त वाहन में लगभग दो लाख से उपर का व्यय लगना तय है साथ ही ड्रायवर को प्राथमिक उपचार के लिए भी कोई राशि उनके द्वारा नही दिया गया उसका लगभग एक लाख उपचार मे लग गया है यही नही लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने एवं शासकीय वाहन को क्षति ग्रस्त के जुर्म मे उस पर शासकीय कार्यवाही या सस्पेंड किया जा सकता है दुर्घटना की  एफ आई दर्ज हुई या नही अभी स्पष्ट पता नही चल पाया है. 

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

UGC द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू नियम निरस्त करने राज्यपाल को वर्ल्ड ब्राह्मण फ़ेडरेशन ने ज्ञापन दिया

 


UGC द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू नियम निरस्त करने राज्यपाल को वर्ल्ड ब्राह्मण फ़ेडरेशन ने ज्ञापन दिया


अर्जुन तिवारी 

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) . विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के अधिकार के तहत सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों के विपरीत जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाला नियम बनाया गया है, जिससे दुर्भावनावश की गई शिकायतों से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों का भविष्य पूर्णत: बर्बाद हो जायेगा. यह नियम संविधान के समानता के अधिकारों व प्राकृतिक नियम के विपरीत है.


वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन छत्तीसगढ़ एवं सर्व युवा ब्राह्मण परिषद छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों ने इस नियम को वापस लेने की मांग करते हुए 9 फरवरी 2026, सोमवार को सायं 4 बजे महामहिम राष्ट्रपति महोदया, माननीय प्रधानमंत्री महोदय एवं महामहिम राज्यपाल महोदय के नाम लोकभवन पहुंचकर ज्ञापन सौंप कर नये नियम पर विरोध दर्ज किया और उसे निरस्त करने की मांग की.

लोक भवन ज्ञापन देने गये प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश अध्यक्ष अरविंद ओझा, महिला अध्यक्ष नमिता शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव सुरेश मिश्रा, सलाहकार रज्जन अग्निहोत्री, प्रदेश महासचिव डॉ. सुनील कुमार ओझा, संभागीय अध्यक्ष नितिन कुमार झा, महिला महासचिव सुमन मिश्रा, सचिव प्रीति मिश्रा, विनिता मिश्रा, विद्या भट्ट, अनिता राव, सुनीता शर्मा, राजकुमार दीक्षित, शैलेष शर्मा, राघवेन्द्र पाठक, अभिषेक त्रिपाठी, रामवृत्त तिवारी, रवि शर्मा, उमेश शर्मा, मदन मोहन उपाध्याय, अभिषेक  पाण्डेय, मनीष पाठक, परवेश तिवारी, चन्द्र प्रकाश आदि प्रमुख पदाधिकरी ऊपस्थित थे

कोडार काष्ठागार का साग- वान बना भ्रष्टाचारियों का भगवान

 कोडार काष्ठागार का  साग- वान 

बना भ्रष्टाचारियों का भगवान 


अल्ताफ हुसैन 

रायपुर(फॉरेस्ट क्राइम  न्यूज़)छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम एक स्व पोषित संस्था है जो स्वयं द्वारा उत्पादित सागौन प्लांटेशन रोपण कर वन विकास निगम की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर संपूर्ण  व्यवस्था का संचालन करता है इसके लिए छ्ग के भिन्न भिन्न वन क्षेत्रों में वृहद स्तर पर रोपित सागौन प्लांटेशन कर जिसकी आयु लगभग ग्यारह वर्षीय,बाल अवस्था इक्कीस वर्षीय किशोर अवस्था, इकतीस वर्षीय स्वास्थ युवा अवस्था एवं इक चालीस वर्षीय परिपक्व स्थिति में पहुँचने तक प्रति वर्ष माह नवंबर दिसंबर से लेकर अप्रेल मई कभी कभी वर्षा ऋतु के पूर्व काल तक थीनिंग कर सागौन का पातन कर अलग अलग  केटेगिरी बल्ली,डेंगरी,  परिपक्व गोला, के रूप  में  स्थानीय काष्ठागार में संग्रहित किया जाता है तद् पश्चात प्रति माह निर्धारित तिथि पर काष्ठागार मे नीलाम के मध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर निगम को सुव्यवस्थित करता है  इसके एवज में वन विकास निगम राज्य शासन को भी प्रति वर्ष अर्जित आय से लाभांश राशि प्रदान करता है परंतु लगातार राज्य शासन को दिए जाना वाला लाभांश राशि का ग्राफ  लगातार निम्न स्तर पर पहुँच चुका है  छ्ग राज्य वन विकास निगम के पूर्व प्रबन्ध संचालक (एम डी) जो पी सी सी एफ रेंज के आई.एफ.एस.अधिकारी होते है जिनमे एक श्री एस सी जैना साहब के समय छ्ग राज्य शासन को मिलने वाला लाभांश राशिआज की तुलना में बहुत अधिक हुआ करता था परंतु आज उसका एक हिस्सा  लाभांश राशि भी राज्य शासन को नही मिल पा रहा है इसका मूल कारण वविनि  सिस्टम में भ्रष्टाचार के दीमक ने इतना अधिक गहरी खाई की तरह जड़ तक  पैठ बना ली है कि आर्थिक रूप से वन विकास निगम को भीतर ही भीतर पूरी तरह खोखला कर रख दिया है उपर से निचले स्तर के अधिकारी कर्मचारी नित नए नए उपाय से किसी भी प्रकार से वन विकास निगम की लुटिया डुबोने मे कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है इसका परिणाम यह होता है कि बड़े बड़े उजागर होने वाले गबन भ्रष्टाचार, घोटाले, अनीयमिताएं पूरी तरह से इस प्रकार दबा दिया जाता है कि कोई भी भ्रष्टाचार,फर्जीवाडा, गबन, धोटाले, अनीयमिताएं, मात्र जैसे इनके लिए  खेल का एक हिस्सा हो एवं कार्य वाही के नाम पर लिखा-पढ़ी सब बनावटी कागजी घोड़े दौड़ते रहते है  शनैः शनैः भविष्य मे आरोपित अधिकारी, कर्मचारी पूरी तरह साफ सुथरा बच जाते है एक तरह से वन विकास निगम में भ्रष्टाचार की चमड़ी इतनी मोटी हो चुकी है कि मोटी खाल, चमड़ी वाले घड़ियाल की आँख, भी वविनि की भ्रष्ट कार्यशैली देख कर शरमा जाए


 वर्ष 2020 के पश्चात  ऐसे बहुत से गभीर मामले कोडार काष्ठागार के उजागर हुए है जिसमें   अब तक हजारों घन मीटर सागौन की ढुलमूल  मेजरमेंट व्यवस्था के कारण अफरा-तफरी कर गड़बड़ घोटाला, गबन  भ्रष्टाचार  की भेंट चढ़ चुकी है और फिर भी किसी वरिष्ठ अधिकारी ने इस पर न्याय पूर्ण जांच करनें की ज़हमत भी नही उठाई और पूरी की पूरी मिलने वाली करोड़ों की राशि गबन कर डकार तक नही लिया गया  यदि ईमानदारी से उपर बैठे वरिष्ठ अधिकारी इस पर  कार्यवाही करते तो बहुत से वन विकास निगम कर्मी  की  नौकरी तो जाती ही साथ ही लाल बंगले की सैर करते सो अलग साथ ही उनसे रिकवरी अलग वसूला जाता परंतु  समस्त व्यवस्था 'सैय्या भयो कोतवाल तो अब डर काहे का" वाली उक्ति को चरितार्थ करते हुए जब संपूर्ण व्यवस्था भ्रष्टाचार में लीन हो तब उन पर कौन डंडा चलाए ? गड़बड़ कर मेजरमेंट की घोटाले की वजह से इस वित्तीय वर्ष 2026 में फिर एक नया गड़बड़,घोटाला हो सकता है वन विकास निगम अंतर्गत बार नयापारा  परियोजना मंडल के अब चाहे सिरपुर आरंग, बार रायकेरा, रवान परिक्षेत्रों से सागौन कटाई से लेकर काष्ठागार पहुँचने तक तो एक बड़ा खेल होता ही है  परंतु काष्ठागार में काष्ठ उतारने से लेकर थप्पी जमाने का भी बहुत बड़ा खेल होता दिखाई दे रहा है जिसमें श्रमिकों को दिये जाने वाले भुगतान पर यह आंकडा लाखों,नही बल्कि करोड़ों में पहुँचने का अंदेशा है हाल ही प्रातःकाल  फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ के पत्रकार पिथौरा प्रवास मे थे तथा वे जब प्रातः काल कोडार काष्ठागार मे पहुंचे जहाँ कुछ श्रमिक लोड ट्रक से सागौन उतार कर सीधे थप्पी जमा रहे थे आश्चर्य का विषय यह था कि न ही कोई वहाँ मेजरमेंट करने वाला वन विकास निगम का अधिकारी,कर्मचारी था और न ही रेंजर मौजूद था सिर्फ मजदूर ही सीधे सागौन काष्ठ उतार कर थप्पी जमा रहे थे 


गौर तलब यह है कि जंगल से आनें वाली काष्ठ मेजरमेंट पश्चात काले रंग पेंट से नंबर, इत्यादि अंकित कर काष्ठागार भेजा जाता है जिसे काष्ठागार प्रभारी, रेंजर या नियुक्त मेजरमेंट कर्मी द्वारा पचास नग का नाप जोख  देख कर उसका मिलान करता है पश्चात उसे किस श्रेणि में रखना है वह उस श्रेणि थप्पी में रखा जाता  है जो कोर्डवर्डअनुसार होता है जैसे सी 1अथवा सी 2 या ए बी सी कोर्ड नम्बर मे जमा किया जाता है परंतु यहाँ ऐसी कोई प्रक्रिया दिखाई नही दी गई और सीधे सीधे थप्पी जमा दिया गया यानी बल्ली,डेंगरी गोला सागौन  सब एक ही स्थान में रखा जा रहा था जबकि सेवा निवृत पूर्व अधिकारी से जब जानकारी ली गई तो मालूम हुआ है कि एक एक काष्ठ को दिये गए नम्बर से मिलान कर ही उसका संचय किया जाता है इसके पूर्व काष्ठों को फैला कर सुखाया जाता है ताकि उसका अनुमानित घन मीटर लिखा जा सके जिसके लिए बकायदा छ्ग राज्य वन विकास निगम लोडिंग अन लोडिंग सहित काष्ठ  फैलाई से लेकर उसकी लंबाई, गोलाई,घनमीटर मेजरमेंट  तक इसके लिए लाखों की बड़ी राशि जारी करता है परंतु इस प्रकार की ढुलमूल कार्यशैली से संभवतःगड़बड़ी होना तय है साथ ही बहुत बड़े राजस्व का नुकसान होना निश्चित है जो मेजरमेंट की अस्पष्ट गलत  नीतियों की वजह से कई घन मीटर सागौन के अनेक काष्ठ  विगत कुछ वर्षों में लगातार गड़बड़ी स्पष्ट देखने में आ चुका है जबकि वन नियम यह कहता है कि काष्ठागार मे काष्ठ पहुँचते रोजनामचा पंजी में गेट पर अंकित किया जाता है ही कष्ठों को पहले फैलाया जाता है ताकि उसकी नमी सुखता सहित उसके घन मीटर का उचित मुल्यांकन किया जाए क्योंकि सुखता में दो पाइंट छोड़ दिया जाता है जैसे पंद्रह मीटर है तो उसे चौदह मीटर अस्सी पॉइंट बताया जाएगा पश्चात उसके  श्रेणि का सही मूल्यांकन पचास एवं चालीस की थप्पी बनाया जाता है


जिसके एवज मे श्रमिकों को प्रति ट्रक  सागौन काष्ठों की फैलाई, सुखता करना फिर मेजरमेंट कर्मी द्वारा उसके घनत्व, आकर, प्रकार, लंबाई, गोलाई कर उसे उचित श्रेणि क्रम में जमाना होता है इन समस्त व्यवस्था हेतु श्रमिकों का पारिश्रमिक मूल्य छ्ग राज्य वन विकास निगम तय करता है जैसे इसकी अनुमानित दर सागौन बल्ली तीन से पांच  रुपये नग डेंगरी काष्ठ पांच से दस, पंद्रह रुपये और घनत्वदार सागौन बारह सौ से पंद्रह सौ रुपये घन मीटर निर्धारित अनुमानित माना जाए तो उस हिसाब से पचासों लाख का श्रमिक भुगतान वन विकास निगम सिर्फ बार नयापारा परियोजना मंडल को ही प्रदाय करता है उस हिसाब से संपूर्ण प्रदेश के काष्ठागार मे श्रमिकों का भुगतान का आंकडा करोड़ों रुपये पहुँच जाए तो अतिशियोक्ति नही  है परंतु काष्ठागार  श्रमिकों द्वारा जिस प्रकार से सुविधाजनक सरलीकरण शार्टकट अपना रहे है उससे वन विकास निगम के अधिकारी, कर्मचारी द्वारा आँख में सुरमा डाल  कर संपूर्ण व्यवस्था को नज़र अंदाज़ कर  निगम कर्मी द्वारा भेजे गए    व्हाट्स एप फोटो देख पर ही गोसवरा व बिल बाऊचर लिखकर मंडल कार्यालय में प्रस्तुत कर रहे है जिसमें कितने घन मीटर कार्य कितनी श्रमिक संख्या द्वारा  संपादित किया गया इन सबका कोई पुरसाने हाल नही क्योंकि  इसकी मॉनिटरिंग करनें बार परियोजना मंडल के डी एम. से लेकर एस डी ओ यहाँ तक रेंजर तक कई कई  दिनों तक लापता रहते है वहाँ काला पीला क्या हो रहा सब बराबर हो जाता है. 


 रेंजर को फोन लगाने पर रिसीव नही करते ऐसा प्रतीत होता है जैसे उन्होंने भैय्या के भरोसे में गय्या पाल रखा है मगर वो भैय्या जो  कोडार  काष्ठागार डिपो प्रभारी ईश्वर केवर्त भी ट्रेनिंग से आने के पश्चात लुका छिपी का खेल खेल रहे है वहां उपस्थिति सेवानिवृत पांच वर्षों से संविदा का लाभ लेने वाले भगवती सोनी से पूछने पर उनके जल्दी घर जाने की बात बताते है जबकि यह भी जानकारी मिली है कि वे मोबाइल में कैमरा लगा कर किसी भी आम व्यक्ति से मिलने साफ मना कर रखे है  उनके इस प्रकार की कार्य शैली से वन विकास निगम की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाला कोडार काष्ठागार का समुचित, सुचारु संचालन कैसे संभव होगा ? बताते चले कि लाखों का पारिश्रमिक भुगतान के पीछे सभी का कमीशन तय है जिसमें गैंग लीडर से लेकर प्रभारी,रेंजर एवं उपर बैठे अधिकारीयों का प्रतिशत बंधा हुआ है  जब बैठे ठाले कमीशन आ रहा है तो फिर काष्ठागार में झांकने की क्या आवश्यक ?  रेंजर भी कभी अपने कार्यालय में नही बैठते संपूर्ण कार्य घर से संपादित कर मंडल         कार्यालय या मुख्यालय में बिल बाउचर निपटाने मे लगे रहते है यह  बड़े शर्म की बात है कि वन विकास निगम के बहुत से कार्यालय है ही नही और जो है वह खुलते ही नही  वही नाके मे भी  ताला बंदी रहता है इन  परिस्थिति में निगम कर्मी क्या करते है और उनको कौन सा भुगतान किया जाता है समझ से परे है. बहारहाल, यही नही काष्ठागार मे नीलाम पश्चात नीलाम कर्ता की गाड़ी लोड से लेकर चार बल्ली लगाने तक की राशि वसूली जाती है जो सीधे  काष्ठागार प्रभारी प्रति दिन पांच से दस हजार रुपये की पृथक आय अर्जित कर ली जाती है इस प्रकार अधिकारियों रेंजर की लगातार  मॉनिटरिंग न करने से भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला, की संभावना प्रबल हो जाती है और कोडार काष्ठागार का यह ग्रीन गोल्ड कहे जाने वाला सागवान (सागौन) भ्रष्टाचारियों के लिए भगवान साबित हो रहा है इस पर तत्काल उपर बैठे अधिकारी द्वारा एक्शन नही लिया गया तो वह दिन दूर नही जब बचा खुचा वन विकास निगम का बंटाधार होना  लगभग तय माना जा रहा है. 

गुरुवार, 29 जनवरी 2026

*डाॅ.सलीम राज ने कार्यालय, छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड व अन्य वक्फ संस्थानों पर किया ध्वजारोहण*

 


*डाॅ.सलीम राज ने कार्यालय, छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड व अन्य वक्फ संस्थानों पर किया ध्वजारोहण*




मिशन पॉलिटिक्स , रायपुर छ.ग। देश के 77 वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर डाॅ.सलीम राज, माननीय अध्यक्ष, छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड (केबिनेट मंत्री दर्जा, छ.ग.शासन) ने कार्यालय छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड में ध्वजारोहण किया, ध्वजारोहण उपरांत राष्ट्रगान का गायन किया गया तथा गणतंत्र दिवस की बधाई दी गई। इस अवसर पर छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड के माननीय सदस्यगण श्री मोहम्मद फिरोज खान, श्री फैसल रिजवी (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्री रियाज हुसैन के साथ छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिम्मी नाहिद, लेखा अधिकारी पवन कुमार व बोर्ड कार्यालय के समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। 


*वक्फ संस्थानों पर भी डाॅ.सलीम राज द्वारा किया गया ध्वजारोहण:-*


डाॅ.सलीम राज द्वारा बड़ी ईदगाह-दरगाह हजरत सैयद पहलवान शाह बाबा र.अ., मस्जिदे मोहम्म्दी, मोहम्म्दी पब्लिक स्कूल, लाखे नगर ईदगाहभाठा रायपुर, मस्जिद हजरत गरीब नवाज कमेटी मुस्लिम हाॅल आर.डी.ए.काॅलोनी संजय नगर रायपुर आदि में भी ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर सम्बंधित वक्फ संस्थानों के मुतवल्ली, कमेटी के पदाधिकारी, समाज प्रमुख व आम जनमानस व स्कूली बच्चे उपस्थित रहे। डाॅ. सलीम राज द्वारा राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर आपसी एकता, अमन, भाईचारा के साथ यह पर्व मनाने देश को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। इसके अतिरिक्त छ.ग.राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित वक्फ संस्थानों द्वारा भी सम्बंधित संस्था के मुतवल्ली व कमेटी द्वारा ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 






वविनि की यह कैसी कार्यवाही - सागौन खजाने की सुरक्षा भ्रष्ट, फर्जी डिप्टी के हाथों में मामला -बारनवपारा परियोजना वन मंडल का - फर्जी डिग्रीधारी डिप्टी लोकेश साहू पर क्यों नही कर रहे कार्यवाही

 वविनि की यह कैसी कार्यवाही - सागौन खजाने की सुरक्षा भ्रष्ट, फर्जी डिप्टी के हाथों में 

मामला -बारनवपारा परियोजना मंडल का

फर्जी डिग्रीधारी डिप्टी लोकेश साहू पर क्यों नही कर रहे कार्यवाही


 अलताफ़ हुसैन की कलम से

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)  बार नयापारा परियोजना मंडल वन विकास निगम रवान परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर लोकेश साहू पर अनेक भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला, अनियमितताएं  के गंभीर आरोप लगने के बाद भी उसे पुनः बार नवापारा परियोजना मंडल के आरंग परिक्षेत्र मे डिप्टी रेंजर के पद का प्रभार देकर वन विकास निगम के आला कमान ने उसे पुनः महिमा मंडित कर खुले स्तर पर भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला, अनियमितता,एवं फर्जीवाड़ा करने का निमंत्रण दे दिया है क्योंकि सेवाकाल प्रारंभ होने के पूर्व से ही उसकी बुनियादी नींव ही फर्जी स्कूल प्रमाण पत्र के दस्तावेज के आधार पर शासकीय सेवा काल में नियमितिकरण से ही प्रारंभ हुआ है अब जिसकी सेवा  काल ही फर्जी तरीके से हुई हो उसकी इतने लंबी अवधि में कितने भ्रष्टाचार,गड़बड़ ,घोटाले,  अनियामिताएं,एवं फर्जीवाड़ा, किया गया होगा उसका अनुमान कोई भी बड़ी सहजता से लगा सकता है क्योंकि प्राचीन कहावत है कि चांवल पकने पर केवल एक चांवल दाना के अन्न को दबा कर पता किया जाता है कि वह पूरी तरह से पका है या नही परंतु यहाँ तो डिप्टी रेंजर लोकेश साहू की भ्रष्ट कार्य प्रणाली से समूचा वन विकास निगम के अधिकारी कर्मचारी भली भाँति जानते और समझते है फिर भी उसको बार नवापारा परियोजना मंडल आरंग परिक्षेत्र में पुनः पदस्थापना कर उसे महिमा मंडित करने के पीछे अधिकारियों की दुधारू गाय वाली मंशा स्पष्ट नजर आ रही है

             दाखिला खारिज  का  छाया पत्र


जबकि फर्जी दस्तावेज की वजह से बारंबार उसकी उच्च स्तरीय अनेक शिकायत होने पर भी मुख्यालय पर बैठे उच्च अधिकारियों के कान मे जूं तक नही रेंगी तथा उसको  खुले वन में चारागाह की भाँति छोड़ दिया गया ताकि भ्रष्टाचार,गड़बड़ घोटलां कर  के अपने आकाओं को खुश कर सके परंतु ऐसे भ्रष्ठ निगम कर्मी पर नकेल कसने के लिए न्यायालय के दरवाजे अभी भी खुले हुए है जिस पर उच्च स्तर पर विभागीय कार्यवाही नही की जाती तब स्वतंत्र रूप से कोई भी व्यक्ति द्वारा विधिक न्यायालयीन कार्यवही करने बाध्य हो सकता है 


 सिरपुर, रायकेरा,वन क्षेत्र छताल - चांदादाई मंदीर के आगे वन क्षेत्र की भारी कटाई

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             स्पष्ट करते चले कि यदि इस प्रकार की न्यायालयीन विधिक कार्यवाही होती है तब इसमें उपर बैठे उच्च अधिकारी से लेकर जांच अधिकारी तत्कालीन डी एम से लेकर एस डी ओ तक पर गाज गिर सकती है जैसा की फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ ने पूर्व समाचार में उन पत्रों का हवाला भी दिया गया था जिसमें वन जलवायु  परिवर्तन विभाग के अवर सचिव द्वारा जारी पत्र क्रमांक/2917/दिनंक/,14/09/2023/ का हवाला देकर  क्षेत्रीय कार्यालय बार नवापारा परि. मंडल ने मंडल प्रबन्धक को लिखित पत्र में क्र.वविनि /2023/1360/दिनंक 06/12/2023  में स्पष्ट निर्देशित किया गया है कि रवान परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर लोकेश कुमार साहू के विरुद्ध एफ. आई. आर. करते हुए कार्यवाही की जाए परंतु उक्त लेखपत्र पर बार परियोजना मंडल के मंडल प्रबन्धक द्वारा क्या कार्यवाही किया गया यह अब तक स्पष्ट ज्ञात नही परंतु यह तो तय है कि यदि इस पर गंभीरता से कार्यवाही की जाती तो डिप्टी रेंजर लोकेश कुमार साहू का निगम से बर्खास्त होना तय माना जा रहा है क्योंकि वन अधिनियम  तो यही कहता है कि कोई भी वन कर्मचारी चाहे वह  वन विकास निगम का ही वन कर्मी क्यों न हो यदि किसी भी गंभीर अपराधिक  प्रकरण होने की दशा में उसे कार्य से पृथक किया जा सकता है परंतु ऐसे वन विकास निगम कर्मी जो अनेक फर्जी प्रमाण पत्र से शासकीय नौकरी प्राप्त कर भ्रष्टाचार, गड़बड़, घोटला,अनियमितता का  गर्द उडा रहा हो ऐसे  प्रकरण में तो  तत्काल कार्य से पृथक किया जा सकता है फिर भी छ्ग राज्य वन विकास निगम में ऐसे बहुत से भ्रष्ट, कुकर्मी निगम कर्मी  मौजूद है जिन्होंने पैसे की बदौलत आज भी नौकरी में न सिर्फ विद्यमान है बल्कि अपने परमोशन का लाभ लेकर वन अधिनियम कानून की धज्जिया उड़ाते हुए ठहाका लगाकर व्यवस्था को ठेंगा दिखा  हंस रहे है उन्ही मे से एक डिप्टी रेंजर लोकेश कुमार साहू भी है जिसे आरंग परिक्षेत्र का प्रभार दे दिया गया 


   प्राचार्य द्वारा सूचना के अधिकार में दी गई सत्यापित  बारहवीं 

    का पत्र
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        बताते चले कि पूर्व में भी एक आई एफ एस अधिकारी के कार्यकाल में आरंग परिक्षेत्र के  कोडार डेम के दूसरे हिस्से में लोहारडीह एवं परसाडीह  के कक्ष क्रमांक  860 जिसे निगम कर्मी कक्ष क्रमांक 859 बताते है में लगभग 15 हेकटेयर  वृहद भूभाग था जिसमे हरे भरे परिपक्व सघन वन क्षेत्र था वर्ष 2019 -2020 को उजाड़ कर पूरी तरह समतल कर दिया गया था जिसका विरोध परसाडीह के मूल वनवासी जिनकी कई पुश्ते द्वारा निवासरत  होते  हुए कृषि कार्य कर जीवन यापन कर रहे है उन्हे उक्त क्षेत्र से अतिक्रमण बता कर बेदखल किया गया था जिसका विरोध का सामना आज भी उनके द्वारा किया जा रहा है उस 859 - 860 क्षेत्र मे लगभग करोड़ों के सागौन सहित अन्य मिश्रित प्रजाति के कष्ठों का विदोहन किया गया था पश्चात वन विकास निगम ने उसी वित्तीय वर्ष को पुनः लाखों करोड़ों की  लागत  लगा कर उसी वन क्षेत्र में पुनः सागौन प्लांटेशन  किया गया था तत्कालिक स्थानीय ग्राम वासियों से पूछने पर उनका कथन था कि  अनेक वर्षों से परिपक्व भिन्न भिन्न प्रजाति के स्वस्थ्य पेडों की कटाई किया जाना यह समझ के परे था यही नही वर्ष 2019-2020 मे वविनि द्वारा लगाए गए  सागौन प्लांटेशन आज पूरी तरह बर्बाद हो चुके है


बार क्षेत्र में बगैर मेजरमेंट हुए काष्ठ का जखीरा


 यह तत्कालिक में आरंग के डिप्टी लोकेश साहू द्वारा संपादित कराए गए थे अब करोड़ों रुपये प्राप्त कर वन के हरियाली को उजडा चमन बना कर काष्ठ पातन करना फिर लाखों करोड़ों की राशि लगा कर सागौन प्लांटेशन कर पांच वर्षीय सागौन से वन विकास निगम को क्या आर्थिक लाभ मिला इसका विश्लेषण अधिकारियों को करना चाहिए क्योंकि प्रति   छ माह या वर्ष में केजयुवल्टी, जैविक,रसायनिक,खाद,डी.ए.पी. सहित सुरक्षा, चौकीदारी मे मंडल द्वारा परिक्षेत्रों के रेंज अधिकारी, कर्मियों में किश्तों में राशि जारी करती है जो तीन से पांच वर्ष की आवधि तक रहता है फिर भी कथित लोहारडीह,परसाडीह, वप्लांटेशन बर्बाद होना भ्रष्ट कार्यों की और सीधा इशारा करता है जबकि वविनि में होता यह है कि वनों को उजाड़ने के बजाए रिक्त पड़त भाटा बंजर भूमि में कार्य योजना बना कर प्लांटेशन किया जाता है फिर भी वन विकास निगम द्वारा कष्ठों की चाह में  हरे भरे लहलहते वनों पर कुल्हाड़ी, और आधुनिक आरी से समूल जड़ पर कुठारा घात करना, फिर सागौन प्लांटेशन  करना यह कौन सी नीति है यह समझ के परे है जबकि नियमावली में वही पेडों का पातन करना है जो बीमारू, अस्वस्थ, या पेडों के ग्रोथ में व्यवधान उत्पन्न कर सागौन के ,ग्यारह,इक्कीस, एकतीस,ईकचालीस वर्षीय आयु के पेड़  हो वैसे पेड़  काटे जाने का प्रावधान है  जबकि वनों में ऐसे भी बहुत से पेड़ है जो स्वयं के बीज धरा पर स्वमेव, अंधड़ तूफान हवा से गिर धाराशाही अवस्था में पहुँच जाते है तथा  नैसर्गिक प्रकृति रूप से विकसित एवं पुलकित हो कर उजड़ते वनों  एवं  प्राकृतिक को संतुलित करते रहते है उन्हे ही निशान बना कर वन विकास निगम वनों के विनाश का मूल कारण बनता जा रहा  है यही स्थिति आरंग परिक्षेत्र के कोडार जलाशय के समीप माँ खल्लारी मन्दिर के समीप हजारों पेडों का पातन गत वित्तीय वर्ष 2025 मई-जून में बड़ी बेरहमी से सागौन सहित भिन्न भिन्न प्रजाति के पेडों का पातन कर लिया गया इसके साथ ही कथित क्षेत्र में प्लांटेशन भी कर दिया गया अब सवाल यह उठता है कि इसके प्लांटेशन  में  वन विकास निगम ने कितनी राशि व्यय की है यह अब ज्ञात करना  बाकी है 



नाका पंजी में दर्ज किए बिना ट्रक पार होता हुआ 

       नाका में नाका बंदी

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      यह भी ज्ञात हुआ है कि डिप्टी लोकेश साहू, सहित अन्य डिप्टी रेंजर की अगुवाई  में  बार नवापारा परियोजना मंडल के सिरपुर, बार, रायतुम , रवान  क्षेत्र में बड़ी तबाही मचाते हुए कटाई कि है जिसमें अनेक भिन्न भिन्न प्रजाति के इमारती काष्ठों का दोहन किया गया है  इस सिलसिले में यह भी ज्ञात हुआ है कि प्रति वर्ष थिनिग के नाम पर चिंहित मार्किंग ग्यारह वर्षीय, इक्किस वर्षीय, इकतीस वर्षीय, एवं इकचालीस वर्षीय सागौन थिनिग का प्रारूप योजना तैयार की जाती है जिसमें प्रति वर्ष  सागौन काष्ठों का निर्धारित लक्ष्य घन मीटर अंकित रहता है उदाहरण स्वरूप जैसे सात हजार से दस हजार घन मीटर पातन का लक्ष्य बार नवापारा  परि योजना मंडल मे है तब उस लक्ष्य प्राप्ति को पूर्ण करने के पश्चात अन्य काष्ठों  का विदोहन कर अतिरिक्त आर्थिक लाभ कमाया जाता है इसके एवज में प्रति वर्ष राज्य शासन के सरकार को लाभांश राशि दी जाती है एक प्रकार से छ्ग राज्य वन विकास निगम वन क्षेत्र में किराये दार की भाँति है जो उपरोक्त लक्ष्य पूर्ण करनें विद्युत की गति से अप्रेल तक पातन कार्य संपादित किए जाते रहेंगे 





माँ खल्लारी आरंग के समीप कटाई एवं प्लांटेशन

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इसी की आड़ में बहुत से वन विकास निगम कर्मी भारी भ्रष्टाचार को अंजाम देकर अपने और अपने आकाओं को खुश कर पर्मोशन,पदोंन्नति, एवं मनचाही स्थान  व्यवस्था का लाभ उठाते है जिसका ताजा उदाहरण डिप्टी रेंजर लोकेश कुमार साहू का है जिसे कवर्धा जिले में ट्रांसफर किया गया था परंतु स्थानीय क्षेत्र एवं बाल गोपाल के शिक्षा, इत्यादि का हवाला देकर कथित बार नवापारा परियोजना मंडल का मोह वे त्याग नही रहे है और वर्षो से यहां जमे हुए है  वन विकास निगम की यह स्थिति यही नही बल्कि संपूर्ण छ्ग प्रदेश के निगम वन कर्मचारियों की है जिसकी वजह से बहुत से वविनि कर्मी अपने अपने क्षेत्र में पचीस से उपर वर्षों से जमे रह कर एक ही स्थान के कूप मंडुक बन गए है,,, शेष अगले अंक में जारी...... 


शनिवार, 10 जनवरी 2026

अभनपुर नयापारा आरामिल में प्रतिबंधित काष्ठ दिन रात पहुँच रहे

 अभनपुर नयापारा आरामिल में प्रतिबंधित काष्ठ 

  दिन रात पहुँच रहे


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छत्तीसगढ़ प्रदेश के वन क्षेत्र में बेतहाशा अवैध कटाई किसी से छुपा नही है आए दिन समाचार पत्रों की सुर्खियों में यह बात प्रकाशित होते रहती है कि साल, सागौन,बीजा, खैर, सहित भिन्न भिन्न प्रजाति के कहुआ,जैसे अन्य काष्ठ तस्करी करते वन विभाग की टीम ने पकडा परंतु वर्ष में एकाध बार किए जाने वाली ऐसी कार्यवाही एक प्रकार से ...ऊँट के मुँह मे जीरा...के समान नही लगता है क्योंकि लगातार प्रदेश के निस्तार  काष्ठ डिपो में उपरोक्त इमारती काष्ठ की बढ़ रही शासकीय मूल्य दर एवं ऑन लाइन नीलामी ने काष्ठ माफिया, तस्करों एवं आरा मिल,टिम्बर की नींद उडा कर रख दी है परिणामतः  काष्ठ तस्करों, दलालों ने किसान अथवा स्थानीय सरपंच की मिलीभगत कर लिखित में कटाई की अनुमति प्राप्त कर लेते है तथा अनुमति पत्र लेकर उसकी आड़ में कृषि, भूमि, क्षेत्र के प्राकृतिक रूप से पैदा,पीपल से लेकर नीम, बेर, इमली, एवं अन्य फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पेडों का पातन कर क्षेत्र के आरा मिल,टिम्बर में पहुँचा दिया जाता है जबकि उपरोक्त फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पेड़ एवं कहुआ तक पेड़ की कटाई बगैर सक्षम वन अधिकारी, एवं एस.डी.एम. की अनुमति पत्र लिए वनोपज धन का  पातन नही किया जा सकता यह सीधे सीधे काष्ठों की चोरी एवं तस्करी की श्रेणी  मे आता है जिससे  काष्ठ तस्कर और दलालों को इसके एवज में अच्छा खासा आर्थिक लाभ मिल जाता है जबकि वन अधिनियम यह कहता है कि छ्ग शासन द्वारा छुट बबूल किस्म के अन्य प्रजाति के वन संपदा काष्ठों का नाम आयु, एवं उसके काश्त कारी भूमि से हटाने का लिखित कारण बता  कर उसे सरपंच के द्वारा अनुमोदन कर वन विभाग के सक्षम अधिकारी से लिखित में अनुमति लेना अनिवार्य होता है जिसमें कम से कम तीन से छ माह का समय लगता है परंतु काष्ठ तस्कर एवं दलाल बगैर किसी लिखित प्रक्रिया के सरपंच की अनुमति जैसे वह वन विभाग का स्वामी या अधिकारी हो तथा मनमाने रूप से बबुल,जैसे अन्य काष्ठों की विभाग  को अनुमति, सूचना दिये बगैर सरपंच पद का लाभ उठाते हुए  खुले आम मन माफिक काष्ठों का विदोहन कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर शासन के राजस्व को चोट पहुंचा रहे है ज्ञात हुआ है कि बहुत से आरा मिलर्स स्वयं के दलाल नियुक्त कर ट्रैक्टर एवं बड़े ट्रकों में चोरी छिपे कृषि क्षेत्रों के काष्ठों का परिवहन कर लगातार हरियाली मय क्षेत्रों का विदोहन तेजी से किया जा रहा है इस संदर्भ में आशंका व्यक्त की जा रही  है कि बहुत से छोटे वन कर्मचारियों ने बकायदा होने वाली कटाई के एवज में प्रति गाड़ी के हिसाब से हजारों लाखों रुपये का लेनदेन कर विशेष छुट दे रखी है जिसकी वजह से काष्ठ तस्करों के हौसले और बुलंद है. 


इस तारतम्य में अभी लगातार समाचार मिल रहा है कि अभनपूर, राजिम नयापारा,सिमगा क्षेत्रों के आरा मिल काष्ठों कि बम्फर आमद से आरा मिल लालम लाल और गुलज़ार है जहाँ प्रतिबंधित कहुआ से लेकर भिन्न भिन्न प्रजाति के आम, नीम, कहुआ, सहित इमारती काष्ठों का अनवरत परिवहन हो रहा है परंतु इस संदर्भ में वन विभाग का उड़न दस्ता के द्वारा सारगर्भित कार्यवाही नही होना बताया जा रहा है जबकि अति विश्वसनीय सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि अभनपुर जो राजधानी रायपुर को जोड़ने वाला प्रमुख सेंटर क्षेत्र माना जाता है जहाँ एक ओर से, कुरुद, जो धमतरी वन मंडल के मेघा क्षेत्र से सिंगपुर नगरी को जोड़ता है वही धमतरी,वन मंडल के बहुत से वन क्षेत्रों का यह क्षेत्र खुला मार्ग है जहाँ से भारी मात्रा में वन क्षेत्र के काष्ठों का परिवहन निर्बाध गति से किया जाना बताया जा रहा है वही दूसरी ओर से पांडुका गरियाबंद से  बड़ी सहजता से भी काष्ठ परिवहन राजिम नयापारा  होते हुए अभनपुर हेतु आवगमन उपलब्ध  है जिसका दो दर्जन से उपर आरामिल तस्कर भरपूर लाभ उठा रहे है  इसकी जब सूत्रों से जानकारी ली तो अधिकांश आरा मिलर्स के कर्ता धर्ता का रटारटाया जवाब था कि   स्थानीय आरामिल  में उपलब्ध काष्ठ  महाराष्ट्र  वन क्षेत्र काष्ठागार से नीलामी से ली गई है  सवाल उठता है कि लाखों कि महाराष्ट्र क्षेत्र के इमारती काष्ठ नीलामी से लाखों रुपये व्यय कर एक या दो ट्रक ही लिया जा सकता है यहाँ तो कई ट्रक इमारती काष्ठ प्रत्येक आरा मिल मे उपलब्ध है जो कहाँ से यहाँ तक पहुंचा? यह विचारणीय पहलू है अभनपूर, राजिम  नयापारा, सिमगा, आरामिल में ऐसी स्थिति एक दो आरा मिल मे ही नही बल्कि दर्जनों आरा मिल में देखी जा सकती है यदि इसकी सूक्षमता से जांच की जाए तो बहुत बड़ा काष्ठ तस्करी का भंडाफोड़ यहाँ हो सकता है 


  लगातार अभनपुर, राजिम नयापारा आरा मिल क्षेत्रों में हो रही अवैध काष्ठ परिवहन के संदर्भ में नया रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र कुमार महोबिया से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में कथित क्षेत्र में लगातार लाव लश्कर के  साथ रात्रि गश्त किया जा रहा है  जिस का परिणाम रहा की अभनपुर के दो आरामिल पर कार्यवाही की गई परंतु यह पर्याप्त नही है उन्होंने आगे बताया कि जब तक  काष्ठ तस्करों पर बड़ी कार्य वाही नही हो जाती तब तक उसे वे सफलता नही मानते वही जिला उड़न दस्ता प्रभारी सामंत  राय  से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि आरंग सहित अभनपुर एवं अन्य क्षेत्र में  तस्करों पर कार्यवाही की गई है यह कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी लगातार काष्ठ माफियाओं पर कार्यवाही के लिए सतत गश्त की जा रही है शीघ्र ही इसके सार्थक परिणाम सामने आने की उम्मीद व्यक्त की गई है बताते चलें  कि कार्यवाही जो भी हो परंतु आरा मिल के खिलाफ फॉरेस्ट काइम  न्यूज़ उक्त अवैध  काष्ठ तस्करी पर  समय समय पर पाठकों को अवगत कराते रहेगा क्योंकि  इनके द्वारा काष्ठ लाए जाने वाले श्रोत,,नाम, आरा मिल की व्यवस्था सहित अन्य सैटिंग व्यवस्था लेनदेन इत्यादि का खुलासा किया जाएगा.