शनिवार, 13 जून 2026

पर्यावरण दिवस मना लेने से क्या प्रदूषण मुक्त भावी पीढी को बचाया जा सकता है

 पर्यावरण दिवस मना लेने से क्या प्रदूषण मुक्त भावी पीढी को बचाया जा सकता है 

अलताफ़ हुसैन

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय न्यूज़) प्रकृति ने हमें स्वर्ग जैसी धरती मां दी है जिसमें ऊँचे ऊँचे गगन चुंबी पर्वत माला, नदी, सागर, समुद्र, पेड़,पौधे, वन संपदा से इस प्रकार उसका शृंगार और सुसज्जित कर रखा है जो संपूर्ण जगत के वासियों को अब चाहे वह मानव हो या जीव जंतु, सब के लिए वरदान रूपी जीवन दायिनी मानी जाती है जिसमें शुद्ध ऑक्सीजन के साथ जल, वायु, ऋतु परिवर्तन जैसी प्रकृतिक भगौलिक व्यवस्था दे रखी है परंतु उक्त  ईश्वरीय वरदान का विदोहन आर्थिक लाभ एवं निज स्वार्थ सिद्धि के लिए लगातार मानव वर्षों से  कर प्रकृति एवं पर्यावरण के खिलाफ असंतुलिन व्यवस्था निर्मित कर जीव, जंतु, मानव,वायु मंडल,के साथ मौसमी ऋतु प्रकृति व्यवस्था के साथ खिलवाड कर उसका हास एवं क्षति पहुंचाने रात दिन जुटा हुआ है परिणामतः इसका खामियाज़ा वर्तमान पीढी को भुगतना पढ़ रहा है लगातार ग्लोबल वार्मिंग एवं आकाशीय ओजान परत में निरंतर बढ़ रहे छिद्र का वृद्धि होना इस बात का स्पष्ट संकेत दर्शाता है कि पृथ्वी का अंत और वहां के समस्त मानव,जीव जंतु के लिए पल पल खतरा बढ़ते जा रहा है केवल वर्ष में एक बार निर्धारित दिवस तिथियों, पर्व मनाने जैसी कागजी औपचारिकता पूर्ण करने मात्र से क्या हम प्रकृति और पर्यावरण  संरक्षण,सुरक्षा का मानक नैतिक दायिरव  व्यवस्था पर सार  गर्भित कदम उठाना मान ले ? 

        आकाशीय ओजान परत, एवं ग्लोबल वार्मिंग का सीधा संबन्ध धरती में निवासरत मानव जगत एवं जीव जंतु के साथ जल जंगल के सूक्ष्म किटाणुओ से लेकर कीट पतंगों जलचर थलचर, नभचर सरीसृप,पर गहरा  प्रभाव पड़ता है अत्याधुनिक फोर जी, फाइव जी नेट वर्किंग  संचालित तरंगों से  अनेक नभचर, पक्षी असामयिक उनकी इह लीला समाप्त हो रही है इसका मूल कारण लगातार पेड़,पौधों, एवं वनों का लगातार विदोहन,आधुनिक, गाड़ी, मोटर यान,जैसी मशीनरी व्यवस्था का निरंतर उपयोग, एवं उसके निकलने वाली दम घोटु जानलेवा धूल धुसरित, धुंआ,शहरीकरण के नाम पर क्रांकिट के जंगल निर्माण से शुद्ध देने वाला ऑक्सिजन पेड़ पौधों का खात्मा, आधुनिकता की दौड़ में विकसित नवीन यंत्रों का निर्माण एवं विकास उन्नति प्रगति के नाम पर कुकुर मुत्ते की भाँति कान फोडू चिंघाड़ती कल कारखाने,की आवाज़ और अलाउद्दीन के जादुई चिराग की भाँति चिमनियों से उसकी निकलती हुई कार्बन डाई ऑक्साईड की काले धूंए का जिन्न के समान ज़हरीली हवा अदृश्य वायु मण्डल में तैरते सूक्ष्म लौह कण किसी भी स्वस्थ्य, मानव जीव जंतु को व्याधि ग्रस्त करने पर्याप्त है इसका साक्षात उदाहरण चल रहे इक्किस्वी सदी में अनेक ला इलाज बीमारी से आम जन पीड़ित हो चुके है तथा निश्चित औसत आयु से पूर्व ही काल के गाल में समा रहे है

         प्रकृति एवं पर्यावरण को खतरा निकलने वाली कल कारखाने, गाड़ी वाहन से निकलने वाले प्रदूषण के अलावा पेड़ पौधों और वनों का लगातार विदोहन  विनाश भी इसका मुख्य कारण माना  जा रहा है क्योंकि निकलने वाले धूंए  कार्बन डाइऑक्साइड के  अवशोषित करने की क्षमता पेड़ पौधे वन मे होती है परंतु वन्य प्राणियों के रहवास क्षेत्र वन क्षेत्रों को भी मानव ने अतिक्रमण करना प्रारंभ कर दिया है स्वयं की  सुविधा एवं प्राकृतिक जंगल में पिकनिक मनाने होटल, मोटल, फार्म हाउस, का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है काष्ठ माफिया इमारती काष्ठों का लगातार पातन कर रहे है वन क्षेत्रों के आसपास ग्रामीण वन वासी कृषि फसल उपज बढ़ाने की लालसा में भूमि अतिक्रमण कर वनों के पेड़ पौधों का विदोहन और धीरे धीरे कृषि भूमि का रकबा का दायरा बढ़ाया जा रहा है जिसकी वजह से वन क्षेत्रों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है बचे खुचे वन्य प्राणी अवसाद मे आकर यत्र तत्र पलायन कर भटक रहे है और दुर्घटना सहित उनका शिकार अलग हो रहा है जब वन, पेड़ पौधे, हरियाली ही नही रहेगी तो स्वभाविक है प्रकृति पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव तो पड़ना लाजिमी है 

       विश्व पर्यावरण दिवस विगत अनेक वर्षों से बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है तथा प्रदूषण से लड़ने एकजुटता के साथ संकल्प लिया जाता है परंतु कथित मानव द्वारा वर्षों से मनाया जाने वाला पर्यावरण  दिवस अब.....ढाक के वही तीन पात... वाली कहावत को चरितार्थ करते नज़र आती है  न प्रदूषण के विरुद्ध कोई वैकल्पिक व्यवस्था नियम बनते है और न ही छपास रोगी लोगों द्वारा फोटो खिंचवा कर पेड़ पौधे रोपण वाले स्थान की सुरक्षा व्यवस्था की जाती है नतीजतन आगामी वर्ष में पर्यावरण दिवस में फिर से वही अखबारी छपास कार्यक्रम में उत्साह वर्धन के साथ बड़ी शिद्दत से शिरकत करते है इसका परिणाम यह होता है कि परिवर्तित ऋतु चक्र के कारण अनेक स्थानों पर बेतहाशा वर्षा तो कहीं पर खंड वर्षा, कही जल स्त्रोत रसातल मे पहुँच रहे है तो कहीं पर असंतुलन की वजह से भगौलिक परिस्थिति मे हलचल की वजह से भूकंप का सामना करना पढ़ रहा है यह आपदाएं स्पष्ट संकेत देता है कि पृथ्वी और आकाश आज सुरक्षित नही रहा है 



         सवाल उठता है कि क्या सिर्फ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की मौलिक जिम्मेदारी बनती है कि प्रति वर्ष करोड़ों रुपये व्यय करके आम जनता को निशुल्क पौधे वितरण कर हरियाली लाने को प्रोत्साहित करती है असंतुलित पर्यावरण के प्रकोप उसके निराकरण के उद्देश्य से  प्राकृतिक एवं पर्यावरण प्रेमियों की पहल से मूल वन विभाग का नाम वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग कर उनको नैतिक जवाबदेही सुनिश्चित की गई है तथा वह अपने मौलिक दायित्वों का निर्वहन बखूबी कर भी रहा है  परंतु आम जनता की पर्यावर्णीय सुरक्षा एवं सहभागिता नाम मात्र रह गई है पर्यावरण दिवस के उपलब्ध पर बड़े बड़े अखबारों के फ्रंट पेज में हरियाली प्रसार का ढिंढोरा पिटने वाले संस्थानों, समूह,दल द्वारा फोटो खिचवाने तक औपचारिकता भर रहती है और आगामी वर्ष देखा जाए तो रोपे जाने वाले पौधों का नामो निशान नही दिखता इस संदर्भ में जन जगरूकता लाने के बहुद्देशीय कार्य करने के लिए भारत देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आम जन को....एक पेड़ मां के नाम...जैसी बहुआयामी योजना लागू की है इसका उद्देश्य था कि आम लोग अपनी जीवन दायिनी मां के नाम  से जन जागरूक हो कर प्रकृति हरियाली और पर्यावरण की ओर आकर्षित होकर रोपे गए  पेड़ पौधों की  सुरक्षा, व्यवस्था मे योगदान करे परंतु केवल यह योजना भी सामाजिक कार्यक्रमों एवं स्कूली बच्चों, द्वारा लगाए जाने तक सीमित रह गया जबकि उद्योग घरानों द्वारा सामाजिक उत्तर दायित्व , (सी.एस.आर.)के तहत उद्योगों द्वारा कार्बन उत्सर्जन कम करने विस्तृत क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पेड़ पौधों एवं प्लांटेशन सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों जिसमें वन विभाग, एवं वन विकास निगम के मध्यम से कराया जाता है ताकि प्रदूषण नियंत्रण रखा जा सके जो कि हद तक किया भी जाता है परंतु आने वाली कोई भी सरकार ऐसे प्लांटेशन स्थलों का चयन कर किसी भी कार्पोरेट घरानों निजी फार्म हाउस,भू माफियाओं को  प्रदान कर क्षेत्र को पेड़  पौधे विहीन कर देती है राजधानी रायपुर स्थित वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो राजधानी मे जून जुलाई में होने वाले निशुल्क पौधे वितरण, विभाग द्वारा कराए जाने वाले पौधा वृक्षारोपण, प्लांटेशन के लिए भूमि स्थल ही नही है ऐसी स्थिति में पर्यावरण सुरक्षा से कैसा लड़ा जा सकता है नतिजतन, क्षेत्र भयंकर ग्रीष्म एवं अनेक प्राकृतिक आपदाओं से जूझेगा यह तय है वही कॉर्पोरेट घरानों का यह भी उत्तर दायित्व बनता है कि कृषि क्षेत्र और प्रदूषित क्षेत्रों मे बड़ी उड़न पंखे जैसे उपकरण लगाना साथ ही धुंआ क्षेत्रों मे कृतिम बारिश की व्यवस्था भी आवश्यक है परंतु  ऐसी प्रक्रिया छ्ग प्रदेश में नज़र नही आती वही औद्योगिक कचरो  का सुरक्षित निष्पादन,प्रबंधन करना।भी उनका दायित्व बनता है परंतु ज़हरीले धूल धुंए में मिश्रित अनेक लौह कण से आम नागरिक जीव जंतु प्रभावित होकर श्वास दमा टीबी, कैंसर, क्षय रोग जैसे जटिल गंभीर रोग से ग्रसित हो रहे है जिसका स्थायी समाधान अब तक सुनिश्चित नही किया गया प्रकृति,और पर्यावरण की सुरक्षा और समाधान के लिए शासन और प्रशासन को कड़े नियम निर्धारित करना चाहिए जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपने रहवास क्षेत्र नवीन निर्मित भवन अनुज्ञा मे कम से कम एक पेड़ लगवाए साथ ही रोपे गए पेड़ पौधों की सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए अधिकतम मुख्य मार्ग,शासकीय रिक्त पड़त भाटा भूमि क्षेत्र मे प्रशासन प्रत्येक पांच से दस फीट की दूरी पर पेड़ पौधे और हरियाली को बढ़ावा दे इसकी सुरक्षा व्यवस्था स्थानीय ग्राम पंचायत को सौपा जाना चाहिए लापरवाही की स्थिति में अर्थदंड के अलावा उनसे उतने पेड़ पौधों लगाने आदेश जारी करना चाहिए , शहरी क्षेत्र के अधीन कल कारखाने,फैक्ट्रियों को कचरा प्रबन्धन का दायित्व, धूल धुंए फैक्ट्रियों को कृतिम वर्षा या आसपास क्षेत्र में टैंकरों के मध्यम से पानी छिड़काव्, चिमनी के समीप एवं कृषि क्षेत्र जैसे खेत खलियानों मे बडा उड़ावनीपंखे, लगवाए जाएं तभी किसी भी क्षेत्र के रहवासी प्रदूषण मुक्त सुरक्षित रह सकेंगे  नही तो वह दिन दूर नही जब लगातार बढ़ते प्रदूषण,अदृश्य वायु मंडल मे तैर रही लौह,कण,रासायनिक ज़हरीली धूल धुंए से मिश्रित वायु मण्डल प्रकृति,एवं पर्यावरण को प्रदूषित कर संपूर्ण क्षेत्र, देश दुनिया को शनैः शनैः बर्बादी की कगार मे ला कर खड़े कर देगी जिसमें असंतुलित ऋतु, जलवायु तो हम वर्तमान में देख और समझ रहे है परंतु आने वाले कुछ वर्षों पश्चात लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का प्रभाव इतना अधिक होगा कि प्रत्येक व्यक्ति सांस लेने के लिए हजारों रुपये देकर शुद्ध ऑक्सीजन सिलेंडर   खरीद कर पीठ पर लाद कर चलता हुआ नज़र आएगा.

मंगलवार, 9 जून 2026

*बस्तर विजन 2031* *नए सपनों की उडान के साथ नया आयाम स्थापित करेगा

 

*बस्तर विजन 2031*
*नए सपनों की उडान के साथ नया आयाम स्थापित करेगा*


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) वैश्विक मान चित्र मे छत्तीसगढ़ प्रदेश का  सिरमौर कहे जाने वाला बस्तर किसी परिचय का मोहताज नही है आकुत् वन संपदा के साथ गौण गर्भा धरती मे लोह खनिज, बाक्साइट, तांबा सहित अनेक खनिज प्रचुर मात्रा में यहाँ मौजूद है यहाँ कि मनोहारी  प्राकृतिक हरीतिमा चादर ओढे क्षेत्र को अत्यधिक आकर्षक बनाती है तो वही दूसरी ओर ऊँचे ऊँचे पर्वत माला की सेकडों फीट की ऊँचाई से वर्षा ऋतु की कल कल करती मधुर धवनि की जलधारा मानों प्रकृति की अपने खास अंदाज में स्वागत कर रही हो ऐसे विहंगम दृश्य देख कर सहसा सैलानियों, पर्यटकों, का मन रोमांचित हो उठता है उस पर बस्तर क्षेत्र में वर्षों से निवासरत वन वासियों, वन आदिवासियों की पारंपरिक धर्म,अध्यात्म संस्कृति का अनूठा ताल मेल यहाँ की आब ओ हवा को अलहदा बनाती है परंतु छ्ग राज्य निर्माण के साथ ही इस शांत,शालीन वातावरण  बस्तर अबूझमाड के फिजा में कुछ राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों ने आशांति फैलाना प्रारंभ कर दिया जो बस्तर के माहौल मे कभी नाना प्रकार के रंग बिरंगी फल फूल, पतियों,चार महुआ के गमक से महका करता था वहाँ पर नक्सलियों की बन्दूक की गोली और बारुद की गंध ने सांस घोटु  वातावरण में धुआं धुआँ होने लगा और बस्तर को पूरी तरह से अराजकता  और आशांति का माहौल बना दिया  लगातार निर्दोष, निरीह वन वासियों वनादिवासियों के रक्त से हरित बस्तर लाल मय हो गया तब केंद्र की डबल इंजन भाजपा सरकार के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय  श्री नरेंद्र मोदी सरकार ने अमीर धरती के गरीब लोगों को विकास और उन्नति के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए योजना बद्ध तरीके से विजन 2031 तक समृद्धि और विकसित बस्तर के लिए कमर कस ली


           बस्तर 2031 विजन का अगुवाई केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन एवं छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में द्रुत गति से बस्तर क्षेत्र का चहुंमुखी विकास किया जा रहा है इसके लिए माओवादियों का समूल नष्ट कर शांति स्थापित करना था जिसके लिए केंद्रीय बल के सहयोग से बस्तर के अनेक वन क्षेत्रों मे सघन अभियान चलाया गया तथा कुछ माह मे अनेक दुर्दांत नक्सलियों का सफाया किया गया जिनपर केंद्र और राज्य शासन ने लाखों का इनाम घोषित कर रखा था परिणामतः बंदूक छोड़ने एवं राज्य के द्वारा समर्पण की घोषणा का असर नक्सलवादियों पर हुआ तथा अलग अलग चरणों में बस्तर के शीर्ष माओवादियों से लेकर निचले स्तर के सैकडों माओवादी लोगो ने हिंसा का रास्ता छोड़ कर आत्म समर्पण किया वर्तमान में लगभग बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है फिर भी केंद्रीय बल द्वारा अनेक सघन वन क्षेत्रों में बिछाए गए माइंस,गोले बारुद , और हथियार की नियमित जांच जारी है जहाँ बड़ी संख्या में असलाह राजसात किया गया


*आवागमन के लिए पक्की सड़क*

   विजन 2031 बस्तर क्षेत्र मे सर्व प्रथम आवगमन सुविधा बहाल करने की योजना बनाई गई है जो  भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा एक 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है जो सीधे छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को आपस में जोड़ेगा अब बस्तर से दक्षिण राज्य में कुछ घंटों में आसानी से पहुंचा जा सकता है इसके लिए पक्की सड़कों के साथ साथ हवाई पत्तन भी विकसित किया गया  है ताकि व्यापार उद्योग को बढ़ावा मिल सके नवीन सड़क मार्ग  बहाल करने के लिए अवरुद्ध पहाडों, असमतल क्षेत्रों को काट कर निर्माण किया गया जो सीधे ओडिसा, दक्षिण राज्य को जोड़ेगा तथा आम जन द्वारा व्यापार उद्योग कार्यों को सरलता एवं सुगमता के साथ  किया जा सकेगा इस संदर्भ में कुछ माह पूर्व आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी का कथन है कि बस्तर के आदिवासियों की औसतन आमदनी का लक्ष्य छ गुणा अधिक बढाना है इसके लिए व्यापार उद्योग के लिए  निर्बाध गति से सुलभ अवगमन आवश्यक है जो पूर्णतः की जा चुकी है  
     *केंद्रीय योजनाओं का लाभ*
केंद्रीय योजनाओं का लाभ देने के उद्देश्य पुरा करने के लिए केंदीय बल के पचास से अधिक कैंपो को प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किये गए है जिसमें स्थानीय निवासियों सहित वाम पंथी धारा से जुड़े समर्पित नक्सलवादियों को आवास,रोजगार, विकास,उन्नति की मुख्य धरा से जुड़ने का मुहिम चलाया जा रहा है जिनमे ग्रामीणों सहित समर्पित माओवादियों को बैंकिंग, कम्युटर नेट वर्किंग सुविधा, कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, एवं शासकीय रूप से आधार कार्ड जैसी सुविधाएं सीधे ग्राम क्षेत्रों मे पहुंचाई जाएगी यही नही नियद नेल्लानार योजना के तहत 31 व्यक्तिगत योजनाएं जैसे आयुष्मान कार्ड, पी एम आवास योजना, वृद्धा पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा उसी प्रकार 14 सामुदायिक योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगारों को आत्म निर्भर बनाने के लिए दुग्ध डेयरी जैसी योजना जारी की गई है जिसके तहत एक गाय एक भैंस दिया जाएगा इसके विस्तार के लिए राज्य शासन राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड के साथ समझौता एमओ यू भी की है


*पर्यटन और संस्कृति*

पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नवीन परियोजनाओ में छ्ग के मुख्य मंत्री विष्णु देव साय जी के कुशल मार्ग दर्शन में एवं वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में वन विभाग द्वारा सुकमा जिले के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र का निर्माण कराया गया है जो आज आत्मनिर्भरता का एक वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है।सुकमा नगर से महज 1 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल, जो कभी उपेक्षित और जर्जर था, अब प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक बदलाव का संगम बन चुका है। वन विभाग ने जर्जर हो गयी संरचनाओं को पुनर्जीवित कर यहाँ एक आकर्षक टापू और पर्यटन केंद्र विकसित किया है, जो न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के पर्यटकों को भी अपनी ओर खींच रहा है। इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का 'तुंगल नेचर कैफे' है, जिसे 'आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह' की 10 जांबाज महिलाएँ संचालित कर रही हैं। वन मंत्री  केदार कश्यप की सोच के अनुरूप, समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के इस अभियान में उन 5 महिलाओं को शामिल किया गया है जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़ आत्मसमर्पण किया है, साथ ही 5 ऐसी महिलाएँ भी हैं जो स्वयं नक्सल हिंसा की पीड़ित रही हैं। इन महिलाओं को जगदलपुर और सुकमा के प्रतिष्ठित संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण दिलाकर पेशेवर रूप से काम करने के लिए तैयार किया गया है। इसके अलावा चित्रकोट का जल प्रपात वैश्विक मानचित्र में विख्यात है वही कांगेर घाटी स्थित तीरथगढ़ जल प्रपात अपनी प्राकृतिक कलात्मक चट्टान से अनूठी लहरदार जल धारा के लिए पहचानी जाती है जो नयनाभिराम के साथ ही वीडियों ग्राफी और फोटो ग्राफी के लिए उपयुक्त मानी जाती है बस्तर विजन 2031 में अनेक स्थल का चयन कर  इन पांच वर्षों में  बहुत से पर्यटन स्थल विकसित किये जाएंगे जिससे देश सहित विदेशी सैलानियों को आकर्षित किया जाएगा राज्य सरकार का पर्यटन को बढ़ाने के पीछे मूल उद्देश्य वन क्षेत्रों मे निवासरत महिला, पुरुष, वन वासियों वन आदिवासियों को उनके आय का श्रोत बढ़ाना है ताकि बिचौलिए एवं ठेकेदार के अधीन रहकर वनोपज मात्र पर निर्भरता न रहे बल्कि वे शासन द्वारा रोजगार मूलक कार्य करते हुए आत्मसमान के साथ स्वावलंबी की ओर अग्रसर रहे ताकि उनका आय में दिन दुनी रात चौगुनी वृद्धि हो सके


धार्मिक,एवं सांस्कृतिक महत्व में भी बस्तर पिछडा नही है यहाँ पर दंतेश्वरी माता सबसे प्राचीन मंदिरों मे से एक है जहाँ महाराज प्रवीर चन्द्र भंजदेव के पूर्व कालिक राजाओं का उपासना स्थल का केंद्र बिंदु रहा है जहाँ बस्तरिया आदिवासी उन्हे भगवान तुल्य मानते है वही बुढा देव सबसे अधिक पूजे जाने वाले आराध्य देवता है जिनकी सब घरों में आस्था के साथ पूजा जाता है बस्तर जगदलपुर का दशहरा विश्व प्रसिद्ध है जहाँ प्रति वर्ष देश विदेश के लाखों पर्यटक इसे देखने यहां आते है जो साझा संस्कृति की पहचान है


*विजन 2031 तक लगेंगे बड़े उद्योग*

      विजन 2031 बस्तर में अनेक उद्योग लगा कर अमीर धरती के किसान पुत्रों को सामाजिक,आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से आधुनिक वैज्ञानिक सोच उन्नतशील विकास के साथ मुख्य धारा से जुड़ाव हेतु राज्य शासन दृढ़ संकल्पित है जिससे भावी युवा पीढी मे उन्नत कृषि के साथ अत्याधुनिक उद्योग को बढ़ावा देना प्रमुख लक्ष्य रखा गया है ताकि ऐसे उत्पादित कंपनियों के साथ स्व रोजगार हेतु लघु उद्योग  निर्माण कर भारत देश के उन्नति, प्रगति मे सहभागिता सुनिश्चित किया जा सके  केवल सीमेंट, लौह उत्पादन, प्लास्टिक इत्यादि तक  सीमित नही रहना बल्कि स्वस्थ्य की ओर भी बेहतर उपाय प्रदान करने पर विचार किया जा रहा है स्वस्थ्य, उत्पादान, फार्मेसी, मैनुफैक्चर, निर्माण, के अलावा व्यापार के लिए खुला बाजार निर्मित करने सरकार हर संभव प्रयास करेगी जिसका गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन का लाभ  स्थानीय लोगो के साथ आस पास राज्यों के व्यापारियों के लिए भी खुला बाजार उपलब्ध कराया जाएगा


           अमूमन लघु और मंझोले करोबारी  अधिक लाभ  प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करते है परंतु कुछ माह पूर्व छ्ग शासन एवं राज्य उद्योग विभाग द्वारा  बैंगलूरु, बस्तर,इनवेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम किया गया था जिसमें यह बताया गया था कि छग मे कंपनियों के उत्पादन एवं कम खर्च में अधिक लाभ  प्रदेश मे मिलेगा तब यहाँ की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मे अमूलचुल् सुधार होगा एक प्रकार से राज्य शासन एवं पूंजी निवेशक कंपनियों के परस्पर गठजोड़ से राज्य सरकार क्षेत्र मे उद्योग का एक नए युग का सूत्रपात करने जा रहा है जिसमे पूर्ववत प्राप्त होने वाली सीमेंट, प्लास्टिक सहित अन्य निर्माण लौह उत्पादन से इतर ऐसे रोजगार मूलक उत्पादन, स्वस्थ्य सेवा, फूड पार्क, क्षेत्र एवं अन्य कंपनियों को प्राथमिकता से  स्थानीय लोगो को मिलने लगेगा जिससे भावी छ्ग राज्य एक नवीन उत्पादक उद्योग के रूप में विकसित होगा इस संदर्भ में छ ग स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के (एम. डी.) प्रबन्ध संचालक विश्वेश झा (आई.एफ.एस.) से भी चर्चा की गई जो सदैव नवीन योजनाओं के साथ ही कुछ नया करने की सोच के साथ नया अध्याय रचते आ रहे है




           उन्होंने बताया कि विदेश जापान में भी इनवेस्टर मीट कार्यक्रम में सम्मिलित होकर  जापानी कंपनियों के साथ बैठकें की गईं。 आईटी, टेक्सटाइल्स, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में निवेश पर चर्चा किया गया था उन्हे राज्य भर के चिंहित जिलों में उद्योग लगाने आमंत्रित किया गया था राज्य शासन द्वारा दी जाने वाली सुविधा के संदर्भ में बताया आगे बताया गया था जिसमें वृहद स्तर पर रिक्त भूमि क्षेत्र है जिस पर अनेक उद्योग का परिचालन किया जा सकता है इसके लिए समस्त प्रकार  के प्रौद्योगिकी, स्वस्थ्य सेवाएं, एवं मैंन्यूफैक्चरिंग उत्पादक कंपनियों सहित निवेशकों को छ्ग प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आमन्त्रित किया और उनसे  अन्य नवीन उद्योग परियोजनाओं पर चर्चा की एम. डी.श्री विश्वेश झा ने आगे बताया कि इलेक्ट्रानिक अथवा वैज्ञानिक टेकनिक से नव  निर्माण उत्पादनों को प्राथमिकता के साथ छ्ग प्रदेश मे अनेक कंपनियों को आमंत्रित किया गया है  जैसे मोबाइल, टीवी उत्पादन एसी, इलेक्ट्रीकल, आईटी, टेक्सटाइल्स, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में निवेश के साथ ही उत्पाद सामाग्री के कल पुर्जों, फूड पार्क का निर्माण भी शामिल किया गया है उन्होंने इलेक्ट्रानिक उत्पाद के बारे मे आगे बताया कि आज जो स्थानीय बाजार मे बड़ी टी वी अथवा अन्य इलेक्ट्रिक वस्तुओं का बाजार मूल्य  लगभग एक लाख रुपये होती है उसका स्थानीय छ्ग प्रदेश मे उत्पादन से चालीस से पचास हजार मे सहजता से उपलब्ध हो जाएगी  छग स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के एम डी.विश्वेश झा आगे बताते है कि रोजमर्रा मे उपयोग् होने वाली वस्तु जैसे कपड़ा उत्पादन एवं रेडिमेट कपड़ों के लिए पृथक उद्योग निर्माण करने की जरूरत है उन्हे भी माननीय मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा आमंत्रित किया गया है

  संभवतः  हम भले इक्किसवी सदी में चांद और सूरज की दूरी नापने मे सफल रहे है परंतु बस्तर आज भी धर्म संस्कृति के मामले मे भले आगे हो परंतु विकास, उद्योग के मामले मे वह आज भी  लालटेन युग में जी रहा है कुछ अपवाद स्थल छोड़ दिया जाए तो यहाँ के सघन वन क्षेत्रों के निवासी बगैर बिजली, सड़क, स्वस्थ्य, शिक्षा, उद्योग, व्यापार जैसी मूलभूत, अधोसंरचना, सुविधा, एवं समस्या के मामले में  कोसो दूर है   उपर से नक्सल वाद ने उनके विकास के मार्ग पर  कील ठोक दी जो दशकों तक थमा रहा अब वर्तमान केंद्र की सरकार एवं छत्तीसगढ़ की सरकार ने नक्सलवाद का समूल नष्ट कर बाधित मार्ग अवरोधक को दूर कर  उन्नति,विकास, प्रगति, का मार्ग प्रशस्त कर दिया इसमें सब का साथ सब का विकास की तर्ज़ पर नए उद्योग, कृषि, स्वस्थ्य, शिक्षा, व्यापार, के द्वार खोल दिये है निश्चित रूप से केंद्र और भाजपा शासित छ्ग राज्य का ड्रीम प्रोजेक्ट बस्तर विजन, 2031इन पांच वर्षों तक शिक्षा स्वास्थ्य, व्यापार,उद्योग, रोजगार, जैसे एक नए सपनों की उडान के साथ एक नया आयाम स्थापित करेगा

सोमवार, 8 जून 2026

कवर्धा परियोजना मंडल में नवाचार नीलगिरी प्लांटेशन से बदली तस्वीर

 कवर्धा परियोजना मंडल में  नवाचार नीलगिरी प्लांटेशन से बदली तस्वीर


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय न्यूज़)  छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम एक स्व पोषित संस्था है जो विगत पचास वर्षों से एक  ही तर्ज पर कुछ स्थलों में सागौन रोपण, प्लांटेशन, नर्सरी में रुट सूट तैयार करने से लेकर दस बीस तीस चालीस वर्षीय से उपर परिपक्व सागौन का थिनिग कर उसका व्यवसायिक करण से छ्ग राज्य वन विकास निगम अपना एवं अपने विभागीय कर्मचारियों का जीवन यापन कर  राज्य सरकार को प्रति वर्ष लाभांश राशि भी दे रहा है यह क्रम  वर्षों से चला आ रह है परंतु छ्ग राज्य के अनुभवी अधिकारी लकीर का फकीर बने रहने की बजाए नवीन योजनाओं के मध्यम से एक नई सोच नई व्यवस्था को अंगीकार कर   छ्ग राज्य वन विकास निगम राजस्व को नई दिशा तय करने की ठान ली है इसकी शुरुआत विगत कुछ वर्षों पूर्व से प्रारंभ  बांस शिल्प निर्मित वस्तुओं का उत्पाद का व्यवसायिक कार्य किया गया था वह कितना सफल था यह तो बताया नही जा सकता परंतु वर्तमान में रायपुर मुख्यालय ने हाईड्रोपोनिक स्पॉट का हरित योजना का कार्य प्रारंभ किया गया जिसमें अब घरों के,हॉल,बड़े कमरों, छतों एवं अनुपयोगी प्लाट में बगैर मिट्टी, कम पानी मे घुलन शील पदर्थ से साल भर आसानी से खेती कार्य किया जा सकता है जो आमजन कृषकों के लिए छोटे स्तर पर साग सब्जी, फल जैसे उपज के लिए अब मील का पत्थर साबित हो सकता है कुछ यही नई व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से(कवर्धा) कबीरधाम जिले के पंडारिया क्षेत्र के करीब पांच किलोमीटर दूर  स्थित वन क्षेत्र में माह अगस्त वर्ष 2025 में लगभग 15,000 नीलगिरी पौधों का सफल प्लांटेशन किया गया जिसके आठ दस माह के अंतराल में अब सार्थक परिणाम आने लगे है 


  छ्ग राज्य वन विकास निगम के डिविजनल मैनेजर सुनील कुमार बच्चन साहब से जब चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि कबीरधाम (कवर्धा) परियोजना मंडल अंतर्गत नगर परिषद पंडारिया के कक्ष क्रमांक पी. एफ.498 बीट बदौरा टू के सर्किल कुकदुर टू ग्रास भूमि 6.45 नेट भूमि 6 हेक्टेयर मे स्थित वन ग्राम क्षेत्र में  होने की वजह से कुछ व्यक्तियों द्वारा क्रांति बांध जलाशय  के तराई क्षेत्र में अतिक्रमण कर लिया गया था जिसे छ्ग राज्य वन विकास निगम द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल कोर्ट (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकारण ) में याचिका दायर की गई उन्होंने आगे बताया कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद अंततः उन्हे बेदखली का नोटिस जारी किया गया पश्चात कोर्ट अधिकारियों एवं पुलिस की उपस्थिति में उन्हे बे दखल किया गया था यह विभाग के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी कवर्धा डी.एम.श्री सुनील कुमार बच्चन ने आगे बताया कथित अतिक्रमण कारीयों द्वारा  वन क्षेत्र के बड़े भूभाग में काश्तकारी खेती प्रारंभ कर लिया गया था ऐसे में टकराव की स्थिति बनी रहती वर्ष 2010 में दिल्ली स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल कोर्ट में लगातार न्यायिक प्रक्रिया चलती रही तथा बेदखली,की कार्यवाही कर सीमांकन सुनिश्चित किया गया कबीरधाम परियोजना  मंडल के डी.एम.श्री बच्चन आगे बताते है कि हमने पंडारिया स्थित कथित वन क्षेत्र में वर्ष 2025 अगस्त में छ हेक्टेयर भू भाग में घलेंद्र कुमार मेहर  तत्कालिक पंडारिया रेंजर के उपस्थिति में सागौन रोपण के बजाय नीलगिरी प्लांटेशन कार्य संपादित किया जिसके आज की तिथि में मात्र आठ से दस माह के अंतराल में पौधे न्यूनतम चार फीट एवं अधिकतम आठ से दस फीट की ऊँचाई मे सर्वाईव कर रहे है


                जब इस संदर्भ में कबीरधाम परियोजना मंडल के एस डी ओ पीतांबर साहू से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि छ्ग राज्य वन विकास निगम का नीलगिरी प्लांटेशन आसपास परियोजना मण्डल के मध्य खुले रूप से चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि अमूमन वन विकास निगम सदैव शासन द्वारा प्रदत्त वन भूमि क्षेत्रों में सागौन प्लांटेशन किये जाने के रूप में चिंहित किया जाता रहा है परंतु इस बार हमने सागौन जैसे इमारती काष्ठों का रोपण करने के बजाए लीक से हट कर नीलगिरी प्लांटेशन करने का बीडा उठता और प्लांटेशन लगभग सफल भी हुआ है (कवर्धा) कबीरधाम  एस.डी.ओ.(डीडीएम) पीतांबर साहू आगे बताते है कि वन क्षेत्र में नीलगिरी प्लांटेशन कराने की एक वजह यह भी थी क्योंकि करीब ही क्रांति जलाशय बांध होने से इसका माकुल जल श्रोत प्राप्त होगा नीलगिरी के संदर्भ मे यह कथन है कि नदी, नाले, तालाब, पोखर, बांध,जलाशय वाले जल मग्न क्षेत्र इसके लिए बहुत उपयोगी साबित होते है यही वजह है कि नीलगिरी प्लांटेशन बांध के तराई ढलानी क्षेत्र में लगाया गया है जिसका अल्प काल में उसका साक्षात परिणाम परिलक्षित हो रहा है 




 वन विकास निगम कवर्धा परियोजना मंडल  पंडारिया क्षेत्र के  युवा साहसी कार्यों के प्रति समर्पित वर्तमान  रेंज अधिकारी जागेश गौड़ जिन्होंने वविनि के अनेक परियोजना मण्डल में दीर्ध कालिक रेंजर पद मे रहते हुए अपने मार्ग दर्शन मे अनेक प्लांटेशन कार्य  करवा कर अनेक उपलब्धि अपने नाम मे कर रखी है उनसे चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि कक्ष क्रमांक पी. एफ. 498 मे वन क्षेत्र क्लोन क्रमांक 316 नीलगिरी प्लांटेशन बहुत कम समय में लगातार ग्रोथ कर रहा है उन्होंने इसकी वजह बताई कि करीब में ही क्रांति बांध है जिसकी जलश्रोत और नमी लगातार पौधों को प्राप्त हो रहा है इसके कारण इस रोहणी नक्षत्र के प्रचण्ड गर्मी में नीलगिरी पौधे अपनी हरियाली और ग्रोथ को कायम रखे हुए है वविनि कवर्धा परियोजना मंडल के पंडारिया परिक्षेत्राधिकारी जागेश गौड़ से स्थानीय नीलगिरी रोपण के संदर्भ मे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वन विकास निगम अब सागौन विक्रय तक सीमित नही रह गया है परिवर्तित समय और काल चक्र के हिसाब से कुंठित एवं एक ही ढर्रे पर लकीर का फकीर रहने की बजाय अपना व्यवसायिक दृष्टि कोण मे विस्तारित सोच रखना प्रारंभ कर दिया है तभी तो विगत कुछ वर्षों पूर्व से पहले बांस शिल्प उसके बाद  हैड्रोपोनिक हरित उत्पाद के प्रति नवीन योजनाओं को अंगीकार कर रही है अब यहाँ नीलगिरी रोपण किया गया है  जो मात्र प्रति चार वर्षों तक उसका व्यवसायिक करण से चार गुणा लाभ वन विकास निगम को मिल सकता है रेंजर जागेश गौड़ उत्साह पूर्वक बताते है कि वर्तमान में इमारती काष्ठ सागौन निर्मित उत्पाद जिसे कुर्सी, टेबल पलंग,अब आम जन के लिए  बीते युग की बात होते जा रही है क्योंकि बढ़ती महंगाई यह सब आम जन के पहुँच के बाहर हो चुकी है इसके लिए हमें व्यवसायिक डेवलेपमेंट की सोच रखनी होगी नीलगिरी से हमें चौदह वर्षों में तीन से चार बार उसका काष्ठ जिससे प्लायवुड, पेपर, तैयार हो रहे है तथा प्रत्येक नव निर्माण भवन में इसका उपयोग किया जा रहा है इसलिए अधिक मात्रा में नीलगिरी पौधों का रोपण आवश्यक है उन्होंने आगे कहा कि वन विकास निगम में प्रत्येक परियोजना मंडल क्षेत्र में अधिक से अधिक नर्सरी निर्माण किया जाए ताकि इसका अधिक से अधिक लाभ निगम को मिले 


इसके साथ ही व्यापक प्रचार प्रसार करना चाहिए ताकि डिपो काष्ठागार के मध्यम से जैसे सागौन की नीलामी सिस्टम से किया जाता था वैसे ही नीलगिरी काष्ठों की नीलामी भी किया जा सकता है पंडारिया परिक्षेत्राधिकारी जागेश गौड़ आगे बताते है कि इसके लिए वन विकास निगम पंचायत, निजी भूमि सहग्रहिता कर नीलगिरी रोपण एवं प्लांटेशन कर चौदह वर्षों के लिए व्यवसायिक उपयोग कर सकती है जिसमे समस्त रोपण से लेकर मैंटनेंस करने का दायित्व वन विकास निगम वहन करें पश्चात इसके  एवज में उन्हे तीस प्रतिशत लाभांश राशि उन्हे दे उक्त चौदह वर्षों में प्रति तीन से चार वर्षों में उसका व्यवसायिक काष्ठो का लाभ निगम को प्राप्त होगा जैसा हरियाणा में रोपण के पूर्व ही प्लायवुड व्यवसायी संपूर्ण नीलगिरी रोपण प्लांटेशन को अनुबंधित कर लेते है यदि इसी तर्ज पर वन विकास निगम भी कार्य करे तो उसका लाभ कम समय मे प्राप्त हो सकता है जिससे तीन हिस्से का लाभ निगम तथा एक हिस्सा  भूमि धारक को दिया जाए तो हमें वन क्षेत्र भूमि की आवश्यकता भी नही पड़ेगी तथा सागौन काष्ठों के साथ नीलगिरी पौधों के काष्ठों से अच्छा लाभ मिल सकेगा

शनिवार, 6 जून 2026

श्रम सम्मान राशि को लेकर इन्द्रवती कोषालय अधिकारी ने मंचाया हड़कंप, विक्त विभाग के निर्देशों को तोड़ मरोड़कर अपने हिसाब से नाप दिया

 श्रम सम्मान राशि को लेकर इन्द्रवती कोषालय अधिकारी ने मंचाया हड़कंप,   विक्त विभाग के निर्देशों को तोड़ मरोड़कर अपने हिसाब से नाप दिय



रायपुर / छत्तीसगढ़ में महानदी भवन मंत्रालय से लगे हुए सचिवालय इन्द्रावती भवन में वरीष्ठ कोषालय अधिकारी का गेम चेंजर प्लान से पुरे छत्तीसगढ़ में सरकार के खिलाफ आक्रोश का माहोल बन गया है। छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ के प्रान्ताध्यक्ष व छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी फैडरेशन के प्रदेश संयोजक रामकुमार सिन्हा ने बताया कि कोषालय अधिकारी नियुक्ति आदेश को लेकर जो पत्र लेख किया है वह पूर्णत: गलत है। 


वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने अपने पत्र क्रमांक 223/व.को.अधि./स्था./2026 नवा रायपुर दिनाक 05.06.2026 के माध्यम से पत्र जारी कर दिया है कि  बिना नियुक्ति आदेश के श्रम सम्मान के देयकों को कोषालय में प्रस्तुत नही करने बाबत! यह कोषालय अधिकारी या तो सरकार को गिराने के लिये कमर कस लिया है या फिर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी / श्रमिकों को तड़पाने के लिये कमर कस लिया है। 



जबकी वित्त विभाग ने स्पष्ट रूप से आदेश जारी किया है कि 

श्रम विभाग द्वारा निर्धारित दर में दैनिक / मासिक वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों को श्रम सम्मान राशि दिये जाने हेतु दिशा-निर्देश।


छत्तीसगढ़ शासन द्वारा श्रम विभाग द्वारा निर्धारित दर में दैनिक / मासिक वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों को रूपए 4000/- मासिक की दर से श्रम सम्मान राशि दिये जाने का निर्णय लिया गया है। यह श्रम सम्मान राशि श्रम विभाग द्वारा निर्धारित दर पर दैनिक / मासिक वेतन पर शासकीय विभागों में कार्य करने वाले अकुशल, अर्धकुशल, कुशल एवं उच्च कुशल दर के कर्मचारियों को प्राप्त वेतन के अतिरिक्त देय होगी।




उक्त श्रम सम्मान राशि के भुगतान हेतु निम्नानुसार दिशा-निर्देश जारी किये जाते हैं:-


1. श्रम सम्मान राशि दिनांक 01 अगस्त, 2023 से देय होगी।


2. भुगतान की जाने वाली श्रम सम्मान राशि संबंधित विभाग के बजट शीर्ष के उद्देश्य शीर्ष #18 - पारितोषिक के अंतर्गत विकलनीय होगी।


3. वित्तीय वर्ष 2023-24 में सभी योजनाओं हेतु उपरोक्त उद्देश्य शीर्ष नहीं खोला जा सका है अतः इस वित्तीय वर्ष में श्रम सम्मान राशि का भुगतान किये जाने हेतु विभागाध्यक्ष स्तर पर उद्देश्य शीर्ष #18- पारितोषिक खोला गया है।


4. प्रत्येक अधीनस्थ कार्यालय द्वारा ऐसे अकुशल, अर्धकुशल, कुशल एवं उच्च कुशल दर पर कार्यरत कर्मचारियों का विवरण प्रतिमाह अपने विभागाध्यक्ष को उपलब्ध करायेंगे। विभागाध्यक्ष कार्यालय द्वारा इसका देयक तैयार कर कोषालय के माध्यम से सीधे संबंधित कर्मचारियों के खाते में अंतरित की जावेगी।

5. आगामी वित्तीय वर्ष हेतु प्रत्येक विभाग सभी योजना शीर्ष में आवश्यक होने पर उक्त उद्देश्य शीर्ष अंतर्गत बजट प्रावधान कराया जाना सुनिश्चित करेंगे।

6. सभी विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ कार्यालयों में उक्त श्रेणी में रखे गये कर्मचारियों के संबंध में प्रथमतः यह सुनिश्चित करेंगे कि वे विभाग में स्वीकृत किसी भी नियमित / कलेक्टर दर के पद के विरूद्ध कार्य पर रखे गये हैं अथवा आकस्मिक श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं तो उनकी आवश्यकता/औचित्य का युक्ति-युक्त परीक्षण कर लिया जावें।

7. यह श्रम सम्मान राशि कैलेण्डर माह की समाप्ति पर देय होगी तथा माह की अनुपस्थिति की अवधि के समानुपातिक सम्मान राशि में उस माह कमी की जाएगी।

8. सभी विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ कार्यालयों में उक्त श्रेणी में कार्यरत कर्मचारियों का सम्पूर्ण विवरण एवं उन पर होने वाले व्यय के अभिलेख का श्रेणीवार विवरण पृथक-पृथक संधारित करेंगे।

विभाग के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों का विवरण एवं उन पर किये जाने वाले व्यय की त्रैमासिक जानकारी संचालक, कोष एवं लेखा को उपलब्ध करायेंगे।

10. त्रैमास के कर्मचारियों की संख्या एवं उन पर होने वाले व्यय पर यदि कमी अथवा वृद्धि होती है तो उसका स्पष्ट कारण एवं औचित्य का उल्लेख आगामी त्रैमास के विवरण में किया जाए।



वित्त के निर्देश स्पष्ट कर रहा है कि किन किन श्रेणी के कर्मचारियों को श्रम सम्मान राशि देना है,  इसमें कहीं पर भी ऐसा लेख नही किया गया है या आदेशित नही किया गया है कि नियुक्ति पत्र वालों को ही 4,000 रूपया श्रम सम्मान राशि का भुगतान होगा। वरीष्ठ कोषालय अधिकारी के इन पत्रों का संगठन खंडन करता है और पुर जोर विरोध भी करता है, नियुक्त पत्र का बहाना करके श्रम सम्मान से वंचित करना चाहते है जो कि उचित नही है। 

कोषालय अधिकारी भले यह लेख करते कि बिना कार्य आदेश के 4000 श्रम सम्मान राशि नही दिया जायेगा , तो यह बात समझ में आता क्योकि रायपुर में कुछ विभागों में देखने को मिल रहा है कि बिना कार्य आदेश जारी किये सीधा बीटीआर में चढ़ाकर ले जाते है और भुगतान करा रहे हैं। 

मंत्रीयों व अधिकारियों के द्वारा लगातार अनाप शनाप अपने बंगले में निवास में दैनिक वेतनभोगी रखते जा रहे है और उसे 4,000 रूपया प्रतिमाह श्रम सम्मान राशि दिला रहे हैं।  और यहा पर 10 से 15 साल कार्य कर चुके दैनिक वेतनभोगी को श्रम सम्मान राशि से वंचित कर दे रहे है जो कि सरासर अन्याय है। 



अगर वरिष्ठ कोषालय अधिकारी को आपत्ति दर्ज करना है तो इन विषयों पर करें ताकी सबके सांथ न्याय हो सकें।  साल भर से नये नये श्रमिकों को कार्य पर रखकर जिन्हे 4,000 श्रम सम्मान दिया जा  रहा है उस पर रोक लगायें और जो वरीष्ठ है जिन्हे भुगतान नही किया जा रहा है उसे भुगतान करने हेतु निर्देशित करें!


वन विभाग में तो रोज नये नये रख रहे है और 4,000 श्रम सम्नान राशि दे रहे है, जो कि गलत है एक दायरा निर्धारण कर श्रम सम्मान राशि का भुगतान करायें। 

समस्त विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी सांथियों के चिन्ता करने की बात नही है वरिष्ठ कोषालय अधिकारी के द्वारा जारी किये गये पत्र का पुर जोर विरोध किया  जायेगा समय आने पर इन्द्रवती भवन सचिवालय का घेराव भी किया जायेगा।

गुरुवार, 4 जून 2026

वन विकास निगम पाना बरस परियोजना मंडल के वरिष्ठ लेखापाल नवाब अहमद के सेवा निवृत होने पर हितैषियों ने बधाई दी

 वन विकास निगम पाना बरस परियोजना मंडल के वरिष्ठ लेखापाल नवाब अहमद के सेवा निवृत होने पर हितैषियों ने बधाई दी 


रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़)  छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम पाना बरस परियोजना मंडल अंतर्गत  मोहला परिक्षेत्र के वरिष्ठ लेखापाल श्री नवाब अहमद साहब ने अपने उनचालिस वर्ष तक दीर्ध कालीन शासकीय सेवा देते हुए 30 माई 2026 को अपनी शासकीय दायित्वों का परित्याग करने हुए सेवा निवृत हुए उनके सेवा निवृत होने पर बहुत से निगम कर्मी भाव पूर्ण विदाई देते हुए बताया कि वे अजीवन ईमानदारी  समर्पण सेवा भाव, कर्तव्य निष्ठा, के साथ कर्म योगी साबित रहे यही वजह रही कि अनेकों बाधाएं आने पर भी वे सदैव विपतियों के समक्ष डटे रहे तथा नैतिकता पूर्ण विजयी पताका लहराते रहे विपरीत परिस्थियों मे सत्यता के साथ डटे रहना उनका मूल मंत्र रहा जो भावी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायी  है उनके लंबे सफल कार्यकाल के सेवा निवृत होने पर उनके हितैषियों ने दिर्धायु एवं स्वस्थ्य जीवन उज्जवल भविष्य  की शुभकामनाएं प्रेषित की है 

बुधवार, 3 जून 2026

नए पी. सी. सी. एफ.वन बल प्रमुख अरुण पांडे को अखिल दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी कल्याण संघ ने बधाई दी

  नए पी. सी. सी. एफ.वन बल प्रमुख अरुण पांडे को अखिल दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी कल्याण संघ ने बधाई दी 


रायपुर छत्तीसगढ़ अखिल दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी कल्याण संघ  की ओर से भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी श्री अरुण पांडे जी को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं वन बल प्रमुख (HoFF) के गरिमामयी पद पर नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई और  शुभकामनाएं दी 

 इस अवसर पर अध्यक्ष  अरविंद वर्मा एवं सदस्य तुलसी डोंगरे , जनक लाल साहू , कमल नारायण साहू , ललित बाग, हेमंत भारती और कल्याण  की ओर से पुष्प गुच्छ भेंट कर उन्हे बधाई दी तथा आशा व्यक्त करते हुए 

 वन बल प्रमुख के नेतृत्व में राज्य के वन विभाग और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रगति की उम्मीद जताई  जिसे वन बल प्रमुख अरुण पांडे ने  उनके सक्रात्मक कार्यों पर सहयोग देने का अश्वासन दिया