बुधवार, 29 जुलाई 2026

वन मण्डल राजनांद गांव बागनदी के रेंजर द्वारा श्रमिक भुगतान में लापर वाही मुख्य मंत्री हेल्प लाइन मे शिकायत दर्ज

 वन मण्डल राजनांदगांव बागनदी के रेंजर द्वारा श्रमिक भुगतान में लापरवाही श्रमिकों ने मुख्य मंत्री हेल्प लाइन मे शिकायत दर्ज



रायपुर/राजनांदगांव (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) राजनांदगांव वन मण्डल बाग नदी अंतर्गत छुरिया नर्सरी में राज्य कैम्पा मद के तहत बहुत से श्रमिकों द्वारा कार्य संपन्न किया गया था जिसका मजदूरी भुगतान बागनदी रेंजर हरि सूरजबली सिन्हा द्वारा नहीं किया गया त्रस्त  होकर श्रमिकों ने  इसकी शिकायत छग के मुख्यमन्त्री विष्णु देव साय हेल्प लाइन से ऑन लाइन  की गई  है 




शिकायत मे मुख्यमन्त्री हेल्प लाइन में पीड़ित श्रमिकों ने शिकायत दर्ज करते हुए लिखा कि बागनदी छुरिया नर्सरी के कार्यरत श्रमिकों का भुगतान वन क्षेत्रपाल रेंजर हरि सूरज बली सिन्हा द्वारा लंबे समय से नही किया जा रहा है तथा उन्हे केवल अश्वासन दिया जा रहा था जबकि संपूर्ण कार्य कैंपा मद की राशि से संपदित किया जाता है तथा उनके खातों मे त्वरित सीधे भुगतान  डालने की व्यवस्था रहती है परंतु श्रमिकों की राशि को लंबित कर रखा गया है जिसकी वजह से श्रमिक बहुत ज्यादा आक्रोशित हो गए तथा मुख्य मंत्री हेल्प लाइन मे   शिकायत दर्ज कर दी जबकि पीड़ित श्रमिकों ने रेंजर पर यह भी आरोप लगाया है कि माह जुलाई मे ही उनके द्वारा भुगतान राशि को किसी अन्य खातों में भेज दिया गया है साथ ही श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि पौधा परिवहन भुगतान भी काफी समय से लंबित है श्रमिकों ने रेंजर हरि  सूरज बली सिन्हा के कार्य शैली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार एवं फर्जी तरीके से बिल बाउचर,बना कर शासकीय राशि  गबन करने का आरोप लगा रहे है श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि यदि ऐसा नही तो उनके द्वारा प्रस्तुत बिल बाउचार एवं अन्य कार्यों की विभागीय जांच सक्षम अधिकारी से सुक्षमता से करवा कर स्थिति स्पष्ट कर किये गए भुगतान राशि किसी अन्य मद, व्यक्तियों के नाम पर राशि ट्रांसफर कैसे कर दिया गया इस पर त्वरित कार्यवाही कर श्रमिकों को न्याय दिलाने की मांग की गई उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में शिकायत कर यह भी मांग की गई है यथा शीघ्र मजदूरी भुगतान कराने तथा राजनांद गांव वन मण्डल अंतर्गत  परिक्षेत्र  बागनदी अधिकारी रेंजर पर कठोर से कठोर कार्यवाही करने की भी मांग की गई है।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

छग राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग से पत्रकारों ने भेट कर उन्हे पर्यावरण संरक्षण के रूप मे बांस पौधा भेंट कर उन्हे बधाई दी

 छग राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग से पत्रकारों ने भेट कर उन्हे पर्यावरण संरक्षण के रूप मे बांस पौधा भेंट कर उन्हे बधाई दी  


रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) छग राज्य हज कमेटी के युवा अध्यक्ष मिर्ज़ा एजाज़ बेग से मासिक मिशन पॉलिटिक्स समाचार पत्रिका के संपादक अल्ताफ हुसैन एवं वेब वर्ल्ड  समाचार पत्र के पत्रकार मज़हर इकबाल ने सौजन्य भेट कर उन्हे हज कमेटी अध्यक्ष नियुक्त होने पर प्राकृतिक एवं पर्यावरण से संदर्भित  बांस पौधा गमला के रूप मे भेंट किया जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए सभी वर्ग धर्म जाति, संस्थान सामाजिक कार्य कर्ताओं के युवाओं एवं पर्यावरण प्रेमियों को पौधा रोपण करने की अपील  की है उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सभी को पर्यावरण एव्ं प्राकृतिक,विस्तार के साथ ही  प्रदूषण से लड़ने के लिए जन जगरुकता लाने दृढ संकल्पित है इसके लिए उन्होंने  सभी व्यक्तियों को अपने परिजन विशेष कर एक पेड़ मां के नाम लगाने की अपील की है जिसके प्रदेश भर मे  सार्थक परिणाम परिलक्षित हो रहे है हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग ने आगे कहा कि शीघ्र ही पौधा रोपण कार्यक्रम वृहद स्तर पर करने की बात भी कही है

मंगलवार, 14 जुलाई 2026

तीस वर्षों से बांस खेती से मिल रहा वन विभाग को राजस्व.

 तीस वर्षों से बांस खेती से मिल रहा वन विभाग को राजस्व.

बांस प्लांटस से ग्रामीणों के आर्थिक समृद्धि रहन सहन एवं जीवन मे सुधार

 


अलताफ़ हुसैन 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) महासमुंद वन मंडल अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र के बिहाझर में वर्ष 1993 से 1996 तक रिक्त पड़त भाटा भूमि में 175 हेक्टेयर भू भाग में तीस वर्ष के तत्कालिक उत्साही, कर्मठवान, लगन शील,जुझारू  प्रवृत्ति के जीवट  रेंजर आर के साहू द्वारा अपने सहयोगी वन कर्मचारियों के साथ उपस्थित रहते हुए  असिंचित 2500*175 बांस भिर्रा रोपण कार्य संपन्न करवाया था उस समय यह अनुमान नही था कि भावी समय वन विभाग के लिए यह राजस्व देने वाला कुबेर का खजाना साबित होगा क्योंकि वन विभाग परंपरागत वन वासियों एवं वन आदिवासियों के सहयोग से वन प्रबन्धन समिति और वन सुरक्षा समिति का गठन कर उनके द्वारा वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सहित रोजगार सृजन का एक सशक्त मध्यम बन चुका था इसके लिए वन विभाग बकायदा आर्थिक रोजगार सहयोग के साथ कच्चा माल बांस के रूप में प्रदाय करती थी जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके बांस निर्मित वस्तुओं में जिनमे मुख्यतःटोकरियाँ (सुपा), चटाइयाँ, बर्तन, पंखे, टोपियाँ और झाड़ू सहित 


सजावटी सामान, बांस के खिलौने, फर्नीचर और संगीत वाद्ययंत्र इत्यादि का निर्माण कर वन वासियों की आजीविका का सशक्त माध्यम बनती थी यह वन प्रबन्धन समिति में वन विभाग के सदस्य के रूप में कार्य करती थी तथा विभागीय अधिकारी उक्त क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित रहते थे इसके एवज में वे वनों के संरक्षण, संवर्धन, सहित पेड़ पौधों का पुनर्जनन  प्रबन्धन के लिए सहयोग करते थे इसके एवज में वन विभाग  जलाऊ लकड़ी, घास और लघु वनोपज जैसे- पत्ते, फल, गोंद  का अधिकार देती थी।जिसमें बाग बाहरा परिक्षेत्र मे वन  प्रबंधन समिति सिर्री, और बखमा ग्राम द्वारा प्रथम विक्रय में ही अडतीस लाख रुपये का लाभांश राशि प्राप्त किया जो एक उपलब्धि मानी जाती थी जो एक रिकार्ड रहा  वर्तमान गरियाबंद रेंजर राजेंद्र कुमार साहू इस सबके पीछे सभी का योगदान बताया उन्होंने बताया कॉलेज समय मे वे प्रारंभ से ही प्रकृति व पर्यावरण प्रेमी रहे तथा उनका लगाव वन क्षेत्र एवं वन्य प्राणियों के प्रति काफी संवेदनशील था 
वर्ष 1984 में दुर्ग सामाजिक वानिकी में सहायक परिक्षेत्राधिकारी के रूप में चयन हुआ त्तथा तीन वर्ष पश्चात विभागीय ट्रेनिग पूरी की वर्ष, 2016 में वे नगरी काष्ठागार में रहे तथा तीन वर्ष पश्चात महासमुंद वन मण्डल अंतर्गत बाग बाहरा में अपनी विभागीय सेवा दी


गरियाबंद परिक्षेत्राधिकारी आर के साहू आगे बताते है कि जिसने वन विभाग में सेवा दे दिया वह दूसरे विभाग में कार्य नही कर सकता क्योंकि यहाँ सभी विभागीय अधिकारियों का सहयोग तो मिलता ही है साथ ही स्थानीय  ग्रामीणों का भी पूर्ण सहयोग प्राप्त होता है बल्कि यहाँ सभी वर्ग आयु के लोग का विचार सकरात्मक रहता है जिससे सभी को कार्य संपादन में स्फुर्ति और जज्बात जुड़ जाते है रेंजर आर के साहू आगे बताते है कि तत्कालीन बागबाहरा परिक्षेत्र में रह्ते हुए आम लोगों में वन और उनके जंगल से प्राप्त  लकड़ियों के प्रति काफी जन जगरूकता आई थी तथा वे वनों के विकास मे जागरूक हो चुके थे यही वजह थी कि वर्ष 1993 से वर्ष 1996 तक रोपण कुल 175 हेक्टेयर वृहद भूभाग में बांस रोपण प्लांटेशन में किया गया था जिसमें 2500 *175 भिर्रा में एक से लगभग देढ़ लाख की पातन  कर विभाग को आपूर्ति हेतु दिया जाता था जिसका लाभ आज पर्यन्त विभाग द्वारा उठाया जाता रहा है यह समस्त कार्य  सबके सहयोग से संपादित होता रहा तथा परिपक्व  होने पर यही बांस भिर्रा देख कर प्लांटेशन की विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और आम जन इस  की भूरि भूरि प्रशंसा किये बगैर नही थकते थे एक प्रकार से संपूर्ण क्षेत्र बांस कानन के रूप में पहचाने जाने लगा उसकी यादे संजोए गरियाबंद  परिक्षेत्राधिकारी  आर. के. साहू बताते है कि लगभग, 29 से 30 वर्ष होने जा रहा है जहाँ के सभी साइज के समान्य बांस से लेकर  बंबू बांस कथित प्लांटेशन से आज तक उत्पाद हो रहा है तथा विभाग को प्रति वर्ष लाखों का राजस्व आज भी प्राप्त हो रहा है उन्होंने बताया बांस की संपूर्ण खेती की गई थी उसे बिहाझर नर्सरी से ला कर रोपे गए थे मजे की बात यह भी है कि संपूर्ण प्लांटेशन असिंचित था यानी प्राकृतिक वर्षा, अनुकूल वातावरण, में इसका रोपण किया गया था असिंचित बांस रोपण वर्षा ऋतु जून जुलाई से अगस्त के मध्य की जाती है गरियाबंद रेंजर आर. के. साहू बांस खेती के बारे में आगे बताते है कि 4×4 या 5×5 मीटर की दूरी पर 30-45 गड्ढे  बना कर1000 बांस पौधे वर्मी कंपोस्ट खाद के साथ कीटनाशक, काली मिट्टी डाल कर बांस करील पौधे रोपे  जाते है जहाँ एक दो वर्ष नमी की आवश्यकता पढ़ती है 


नदी नाले पोखर, कृषि के मेढ़,इसके लिए उपयुक्त क्षेत्र माना जाता है इसकी सुरक्षा के साथ  नमी बरकरार रखने के लिए एक दो वर्ष सिंचाई आवश्यक होता है यही नही खरपत वार से बचाने साथ ही निंदाई गुड़ाई भी आवश्यक होता है उन्होंने बताया कि इसकी कटाई चार से पांच वर्ष में प्रारंभ शुरू हो जाता है इससे विभाग को प्रति वर्ष राजस्व प्राप्त होता रहता है गरियाबंद परिक्षेत्राधिकारी आर.के.साहू आगे बताते है कि वन विभाग चाहे तो लधु उद्यमी, कृषकों एवं प्राइवेट संस्थानों को बांस रोपण के लिए प्रोत्साहित कर सकती है क्योंकि अपनी सेवा काल में बहुत से रोपण और प्लांटेशन किया है जिसका अच्छा प्रतिसाद भी मिला है परंतु जिस प्रकार महासमुंद वन मंडल अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र का बांस प्लांटेशन मेरे द्वारा संपादित किया गया है वह आज भी विभाग को राजस्व प्रदान कर रहा है जो मेरे विभाग और मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है.

रविवार, 12 जुलाई 2026

शासन की क्रांतिकारी डिजिटल सेवा आम जनता का बन रहा मौलिक व्यवस्था का सेतु

 शासन की क्रांतिकारी डिजिटल सेवा आम जनता का बन रहा मौलिक व्यवस्था का सेतु  


अलताफ़ हुसैन

 रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) देश और समाज में समान्य नागरिक संहिता के तहत अनेक नियमानुसार भिन्न भिन्न  विधिक मौलिक व्यवस्था लागू किये गए है जो प्रत्येक नागरिक के लिए जीवन से लेकर मृत्यु उपरांत तक आवश्यक है इसके लिए प्रत्येक मानव जीवन के लिए शासन स्तर पर अनेक लिखित संवैधनिक प्रमाण पत्र जारी किये जाते है जो स्थानीय नागरिकता को स्पष्ट कर यह दर्शाता  है कि व्यक्ति किस क्षेत्र राज्य प्रांत देश का मूल नागरिक है इसके अलावा भी अनेक प्रपत्र जिसमे जीवन से लेकर मृत्यु तक शादी, से लेकर तलाक़ तक तथा राशन कार्ड, आय,से लेकर जमीन संबंधी बंटवारे,नामंतरण तक,समस्त शासकीय सुविधाएं मिलने का प्रमुख आधार शासकीय विभाग से जारी सील, मुहर, डिजीटल  क्यु. आर.कोड.हस्ताक्षरीत युक्त प्रमाण पत्र उसका मूल दस्तावेज माना जाता है जो प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्यत होता है जो आम व्यक्ति के भारत देश,के राज्य, प्रांत, शहर एवं सामाजिक व्यवस्था  का मूल नागरिक  होने की प्रमाणिकता को दर्शाता है परंतु  अपरिहार्य कारणों से वर्षों पुराने पत्र के घुमने, जीर्ण शिर्ण या कटने,फटने, अथवा अन्य   परीस्थितकीय वश जलने, या नष्टिकरण होने की दशा मे  नागरिकों को अनेक कठिन अवस्था से गुजरना पड़ता था इसका निराकरण करते हुए छग प्रदेश के यशस्वी मुख्यमन्त्री श्री विष्णु देव साय जी ने समस्त विभागों को पेपर लेस व्यवस्था की आधुनिक डिजिटल क्रांतिकारी  युग की शूरूआत कर राज्य भर मे सेवा सेतु पोर्टल प्रारंभ कर के आम जन को सहज नवीन आधुनिक सुविधा जनक सरली कृत व्यवस्था  प्रदान कर दी है जिससे आम व्यक्ति दफ्तरों में धक्के खाने की बजाए अब सीधे घर बैठे अथवा  800 से अधिक लोक सेवा केंद्र, 1000 से अधिक च्वाइस सेंटर,  या प्रदेश भर मे पंद्रह हजार कॉमन  सर्विस सेंटरों के माध्यम से उपरोक्त समस्त सुविधाओ का लाभ उठाया जा सकता है 


     उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की  डिजिटल संचार युग की प्रारंभिक अवस्था बड़े महानगरों, नगरों, शहरी क्षेत्रों के साथ ही सुदूर आँचल के  वन ग्रामीण क्षेत्रों में भी जारी किया गया जहाँ छोटे छोटे प्रमाण   पत्र बनवाने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण सीमित अवगमन संसाधन व्यवस्था के बीच  उनके कीमती समय का दुरूपयोग अधिक होता था जिसके निराकरण हेतु देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय  नरेंद्र मोदी की पहल पर शहर महानगरों सहित सर्व प्रथम  सुदूर आंचलिक  ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवा सेतु पोर्टल जो तत्कालिक समय किसी अन्य नाम से संचालित था उस का आधुनिकीकरण कर ऐसे अनेक प्रमाण पत्रों की  समस्याओं से ग्रामीणों को निजात दिलवाने मे महती भूमिका का निर्वहन किया गया परिणमतः  इसके सार गर्भित परिणाम सामने आने लगे ग्रामीणों को थकान भरी लंबी दूरी के साथ समय की बचत और ग्राम पंचायतो में लगे कम्प्युटर पर बैठे बैठे  एक क्लिक करते ही संपूर्ण डाटा अपडेट होने लगा वह भी कम समय में सेकडों,हजारों किलोमीटर दूर बैठे ग्रामीणों को राजधानी मुख्यालय मे उनका नाम पता, ग्राम, ब्लॉक क्षेत्र,जिला सहित मूल फोटो,डिजिटल युक्त हस्ताक्षर, आँख, फिंगर प्रिंट सहित केंद्र द्वारा जारी आधार संख्या के साथ संपूर्ण शासकीय, निजी कृषि भूमि, मकान, नामंतरण, ग्राम पंचायतों की शासकीय योजनाओं के दस्तावेज,मे अंकित व्यक्ति की मूल दस्तावेज शासकीय  डाटा में सुरक्षित होने लगे जिसे उपयोग कर्ता व्यक्ति, हितग्राही देश के किसी भी राज्य के हिस्से मे रह कर एक क्लिक पर कही भी देख सकता है तथा प्रमाण पत्रों, एवं अन्य दस्तावेजों की चोरी  फर्जीवाडा, भी नही किया जा सकता यही नही केंद्र द्वारा  ग्राम पंचायत स्तर पर विकास के लिए चौदहवें,पंद्रहवें वित से जारी राशि उससे होने वाले निर्माण एवं शासकीय योजनाओं के कार्य शैली   व्यवस्था जिस में सामुदायिक भवन,सड़क निर्माण, तालाब गहरीकारण, से लेकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली, यहां तक कृषि रोजगार ग्यारंटी की देयक  राशि भुगतान, कृषि ऋण, महतारी वन्दन योजना,विधवा पेंशन, विवाह पंजीयन, आय प्रमाण पत्र,जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र,जैसे हजारों प्रमाण पत्रों का त्वरित निराकरण,शहरी,  ग्राम,   जिला पंचायतों के विकास परक निर्माण कार्यों में अब साफ सुथरी तथा शासकीय योजनागत देयक भुगतान में पारदर्शिता दिखाई देने लगी है जो कागजी लिखा पढ़ी से हट कर शासन  आधुनिक  डिजिटल व्यवस्था पर मुहर लगा दी है जिससे मूल व्यक्ति और उसकी पहचान अलग से बन रही है


 राज्य शासन द्वारा  डिजिटल सेवा सेतु पोर्टल मे डिजिटल हस्ताक्षर, के मध्यम से अपनी पहचान, प्रमाण पत्र को सत्यापित करने का सशक्त माध्यम बन चुका है इससे किसी प्रकार के डिजिटल प्रमाण पत्रों, और दस्तावेजों मे  फर्जीवाडा अथवा छेड़छाड़  होने की संभावना नगण्य हो जाता है  तथा आवेदक, हितग्राही देश के किसी हिस्से में जाकर उसका उपयोग सहजता से कर सकता है इसके लिए  शासन स्तर पर जारी प्रमाण पत्र मे डिजिटल, हस्ताक्षर, युक्त मूल छाया चित्र के साथ शासन द्वारा क्यु.आर.कोर्ड. जारी होता है जो पृथक व्यक्ति के नाम से आवेदक के नाम का दुरूपयोग भी नही किया जा  सकता क्योंकि छग शासन के समस्त मुख्य मूल विभाग को डिजिटल ऑन लाइन अपडेट कर दिया गया है जिसकी वजह से विभागीय, लेन देन, कार्यों मे पारदर्शिता आई है तथा शेष कुछ विभाग को अब भी अपडेट कार्य जारी है छग सरकार द्रुत गति से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को अनेक डिजिटल  प्लेटफार्म साइड का विस्तार कर चुकी है जिनमे मुख्यतः भुइंया वेबसाइट जो जमीन भू राजस्व के निराकरण हेतु प्रदर्शित है नागरिक सेवाएं एवं प्रमाण पत्र हेतु सेवा सेतु साइट उपलब्ध कराई गई है जिसमें आय, निवास, जाति, पेंशन जैसी मूलभूत  सेकडों प्रमाण पत्रों का निराकरण किया जा रहा है बिजली बिल, कनेक्शन एवं उसके निराकरण हेतु सीजी एस पी डी सी के साइट पर उनके वेब साइट निर्मित किये गए है इसके अलावा  सिंगल विंडो नाम से अलग वेब साइट निर्मित है जो व्यापार, उद्योग, एवं निवेश जैसे हिग्रहियों के लिए बनाई गई है यहाँ तक सरकारी परीक्षा हेतु  छात्रों के लिए सीजी पी एस सी की वेब साइट उपलब्ध किया गया है ताकि छात्रों की परीक्षाओ मे पारदर्शिता बनी रहे इसके अलावा भी शासकीय विभागों के अनेक डिजिटल   वेबसाइट निर्मित किये गए है जो छग वासियों के  सुविधा  एवं कार्यों मे वहुपयोगी साबित हो रहे है  

 शहरी एवं नगरीय क्षेत्रों मे भी इसका व्यापक विस्तार किया गया है सेवा सेतु डिजिटल प्लेट फार्म  छग सरकार ने बहु आयामी जन कल्याणकारी उद्देश्य के चलते  निर्मित की है जिसका उद्देश्य  जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, राशन कार्ड, सहित पेंशन जैसी 400 से अधिक सुविधाएं शामिल की गई हैं इस संदर्भ में राजधानी रायपुर के नगर निगम सहित कुछ  चवाइस सेटर स्थल का मुआयाना किया गया  जहाँ कुछ आवेदक आय एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे थे उनसे चर्चा करने पर बताया गया की पहले यह  डिजिटल व्यवस्था ई डिस्ट्रिक नाम से जारी थी परंतु ई सेवा सेतु नाम से प्रमाण पत्र बनवाने पर बहुत से  हितग्रही को परेशानी का सबब बन रहा है इसकी वजह जानने पर राजातालाब नुरानी मस्जिद के समीप  स्थित चवाइस सेंटर पर कुछ व्यक्तियों ने बताया कि आय प्रमाण पत्र को छोड़ कर मृत्यु प्रमाण पत्र जन्म प्रमाण पत्र या निवास प्रमाण पत्र बनवाने हेतु समस्त डाक्युमेंट  जमा करने के बावजूद नगर निगम मे आवेदकों को बुलवा कर अलग से राशि की मांग कर उन्हे परेशान किया जाता है इससे पारदर्षिता कहाँ रही वही एक व्यक्ति ने मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने पर छ माह समय लगने की बात कही और आज भी उसे मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त नही बन पाया यह भी  बताया गया कि नगर निगम रायपुर मे आवेदकों को पुनः बुलाने और डिजिटल प्रक्रिया के नाम से पुनः राशि की मांग कर आवेदकों को परेशान किया जाना कहां तक उचित है उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की है कि प्रमाण पत्रों की ऐसी जटिल व्यवस्था पर सुधार लाने की अवश्यक्ता बताई गई जबकि राज्य सरकार यह चाहती है कि  इसका समुचित लाभ निश्चित रूप से सभी आयु वर्ग, धर्म जाति, के आम लोग उठा सके इसके लिए वह पूर्णतः कटिबद्ध है तथा सबका साथ सबका विकास जैसे स्लोगन को सार्थक करने मे अपनी पूर्ण  ऊर्जा लगाने दृढ़ संकल्पित है शहरी क्षेत्रों मे डिजिटल सेवा सेतु पोर्टल के सुधार और व्यवस्था के लिए कुछ समय लग सकता है परंतु आम जन के छोटे छोटे प्रमाण पत्रों को बनवाने के लिए पारदर्शी एवं नीतिगत व्यवस्था लागू करेगी ऐसा सरकार पर लोगों द्वारा विश्वास व्यक्त किया जा रहा है