नीलगिरी के साए मे पनपता पचेड़ा नर्सरी की हरियाली
अलताफ़ हुसैन
रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) यह उक्ति सार्वजनिक है कि जहां नीलगिरी पौधा रोपण क्षेत्र होता है वहां आस पास क्षेत्रों में अन्य प्रजाति के पौधे कभी सफल नही होते इसका मूल कारण यह माना जाता है कि नीलगिरी पौधे जिस रोपण क्षेत्र अथवा स्थल में उगाते है वहां के भूगर्भ जल स्त्रोत को वह अत्यधिक जल ग्रहण अवशोषित कर जल स्तर को पाताल लोक पहुंचा देता है इसकी वजह से अन्य प्रजाति के प्राकृतिक एवं रोपित पौधे को पर्याप्त मात्रा मे जल श्रोत जैसी अति आवश्यक खुराक उन्हे न मिलने की वजह से पौधों का मुक्त रूप से ग्रोथ नही हो पाता एवं समय पूर्व रोपित पौधे,अविकसित,टेढ़े मेढे,विकृत,रोग ग्रस्त जैसी हालत मे मरणासन्न स्थिति मे पहुँच जाते है परंतु उक्त मिथक को सिरे से खारिज करते हुए रायपुर अनुसंधान संस्थान का सामाजिक वानिकी वन विभाग द्वारा संचालित पचेड़ा नर्सरी उन समस्त भ्रामक विचारणीय पहलू को विराम लगा देता है जहाँ तीन हजार से अधिक नीलगिरी प्लांटेशन के मध्य में स्थित नर्सरी जिनकी आयु विगत सत्ताईस वर्षो की हो चुकी है वहाँ स्थापित नर्सरी लंबे समय से सफलता पूर्वक संचालित हो रहा है राजधानी रायपुर शहर से लगभग सत्रह किलोमीटर दूर अंतिम क्षेत्र स्थित सामाजिक वानिकी वन विभाग द्वारा एक सौ पच्चीस एकड़ क्षेत्र के पचेड़ा ग्राम जहाँ रोपित नीलगिरी वन भूमि क्षेत्र के मध्य भाग में लगभग चार एकड़ भू भाग पर वर्ष 2019 से पौधशाला (नर्सरी) का संचालन विभाग द्वारा किया जा रहा है जहाँ सीमित स्थान, साधन, एवं संसाधन के विपरीत भिन्न भिन्न प्रजाति के असीमित पौधशाला कार्य रोपण व्यवस्था विगत सात वर्षों से सफलता पूर्वक संचालित किया जा रहा है उक्तशय की जानकारी प्राकृतिक, पर्यावरण एवं प्रकृति प्रेमी युवा उत्साही, फॉरेस्ट गार्ड, जो विभाग के लिए कुछ नया करने एवं सीखने की ललक, जज़्बा रखते हुए ग्राम पचेड़ा नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर ने बताई कि
वन अनुसंधान विस्तार सामाजिक वानिकी वन विभाग के डी एफ ओ लोक नाथ पटेल साहब के दिशा निर्देश पर जो एक कुशल, दक्ष, प्रशासनिक आई.एफ.एस. अधिकारी है जो संवेदनशील रहते हुए मातहतों के प्रति सख्त परंतु कार्यों के प्रति किसी प्रकार का समझौता नही रखते है उनके निर्देशानुसार कर्मयोगी,परिपक्व,अनुभवी,एस डी ओ तरुण तिवारी जी के निरंतर मार्ग दर्शन प्रयास से संपादित कार्यों की मॉनिटरिंग,एवं समीक्षात्मक दृष्टि कोण रखते हुए विभाग में कुछ नया करने की ललक, योजनाओं को धरातल मे लाने की जद्दोजहद, और प्रयास पर विश्वास रखते हुए उनके नेतृत्व मे वन विभाग के नव नियुक्त युवा परिक्षेत्राधिकारी डॉ नामित शाह के उचित व्यवस्था के साथ ही एस डी ओ तरुण तिवारी जी के द्वारा पचेड़ा नर्सरी के विस्तार एवं आधुनिक सोच स्तर के साथ कार्यों में अधिक से अधिक रोपण कार्यों को संपादित करवाते रहते है यही वजह है कि पचेड़ा पौधशाला की ख्याति लगातार आसपास ग्राम क्षेत्र मे दिन दुनी रात चौगुनी अधिक बढ़ गई है तथा स्थानीय स्तर के अलावा बाहरी ग्राम क्षेत्रों से भी विभागीय योजना के तहत पौधे लेने कुरुद्,धमतरी, सहित अन्य क्षेत्रों से ग्राम पचेड़ा नर्सरी पहुँच रहे है चार एकड़ भू भाग स्थित नर्सरी में प्रतिदिन आसपास ग्रामीणों को रोजगार सहित वानिकी कार्यों का अच्छा खासा अनुभव मिल गया है वे अब मनरेगा के तहत कार्यों का संपादन कर रहे है इस संदर्भ मे ग्राम पचेड़ा के नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर ने बताया कि वर्षा ऋतु के वर्तमान समय मे नर्सरी में आसपास ग्रामीण क्षेत्रों से जिसमे ग्राम पचेड़ा,ग्राम मुनगी,चंद्रखुरी, से अधिक संख्या मे श्रमिक कार्य करने आते रहते है कार्य अनुसार इनकी संख्या क्षमता, कम ज्यादा होते रहती है वर्तमान वर्षा ऋतु मे माह जुलाई से दिसंबर अंत तक निशुल्क पौधे वितरण किया जाता है यही वजह है कि स्थानीय निजी,संस्थान, ग्राम,पंचायत ,स्कूल,शासकीय संस्थान, कृषक हितग्रही, के जन प्रतिनिधि, सहित अनेक प्राकृतिक पर्यावरण प्रेमी लिखित पत्र देकर डी एफ ओ साहब के आदेश निर्देश पर निशुल्क पौधे वितरण किया जा रहा है
पचेड़ा नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर ने बताया कि हमारे यहां अट्ठारह हजार टाल पौधा, कुल 58000 तैयार पौधे उपलब्ध है एवं 40,000 मिश्रित प्रजाति के,फलदार,फुलदार,सायादार, अधिक ऑक्सिजन प्रसारित करने वाले एवं र्औषधीय गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध है जिनमे मुख्यतः,नीम,हर्रा,बेहड़ा, अर्जुन,जामुन,आंवला,मूनगा,पीपल,गुलमुहर,अमरूद,कटहल, आम,इमली, सीताफल, पपीता,खमहा र, शहतुत, बेल, करंज, कचनार, शिशु, सागौन, महोमनी, दश्मत, टिकोम, दूब, मोंगरा,पीपल, बरगद, जैसे भिन्न भिन्न प्रजाति के पौधे उपलब्ध, है जिनकी सबसे अधिक मांग की जाती है और पौधों की मांग के अनुसार विभाग के लिए प्रस्ताव भेज दिया जाता है ग्राम पचेड़ा नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर आगे बताते है कि आधुनिक रूप से नर्सरी का विस्तार होना चाहिए इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है वृहद भू भाग होने तथा तीन हजार से अधिक नीलगिरी जैसे रोपण क्षेत्र होने के बावजूद यहाँ प्राकृतिक रूप से सौ फीट के गहरे अंतराल मे माकूल पानी स्त्रोत की व्यवस्था है पानी सिंचाई की समस्या कभी नही आई परंतु नर्सरी विस्तार होने पर दो, तीन नलकूप खनन किया जाए तो भीषण गर्मी मे सीमेंटिकृत टंकी का उपयोग कर जल संचय सिंचाई कार्य सहजता से किया जा सकता है इस संदर्भ मे विभाग के एस डी ओ तरुण तिवारी साहब का कथन है कि पचेड़ा नर्सरी को हाईटेक नर्सरी के रूप मे डेवलप किया जा सकता है जिसमे मुख्यतः शिड उपचार हेतु प्लेटफार्म निर्माण करना,ग्रीन नेट हाउस,मिनीपॉली हाउस, साथ ही आवश्यकता अनुसार लो टनल का निर्मित भी उपयोग किया जा सकता है जो संभावित है। ये पारदर्शी प्लास्टिक या कांच से ढंके होते हैं जो निर्धारित तापमान, नमी और रोशनी को नियंत्रित करके बीजों को जल्दी और सुरक्षित रूप से अंकुरित करने में मदद करते हैं ऐसी व्यवस्था लागू कर आधुनिक नर्सरी डेवलप मेंट किया जा सकता है जिसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर कार्य योजना की रूप रेखा तैयार की जाएगी जहाँ पर पौधे तैयार करना, सागौन रूट शूट तैयार करना, विचारणीय है जैविक खाद निर्माण के संदर्भ मे
नर्सरी प्रभारी प्रेमन चंद्राकर ने बताया कि दस बाई बारह के गड्ढे में गोबर खाद, सूखे पत्ते, अपशिष्ट घास फुस, निरंतर जल छिड़काव कर वर्ष मे दो बार वर्मी कंपोस्ट खाद का निर्माण किया जाता है जो नर्सरी के लिए पर्याप्त होता है जिस प्रकार ग्राम पचेड़ा नर्सरी मे दिन ब दिन पौधों की निरंतर मांग बढ़ रही है उसे देखते हुए वन विभाग को भी पचेड़ा नर्सरी के विस्तार पर गहन विचार मंथन कर योजनाबद्ध तरीके से इसका विस्तार करने की आवश्यकता दिखाई दे रही है यही नही राजस्व भूमि मे विभाग द्वारा लगाए जाने वाले प्लांटेशन भी नर्सरी के पौधे वैकल्पिक व्यवस्था का साधन बन सकता है इसका साक्षात उदाहरण ग्राम असौन्दा,मोह्दी, के मुख्य मार्ग से ग्राम जावा का दस हेक्टेयर राजस्व भूमि मे लगभग 11,000 मिश्रित प्रजाति के फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पौधे वर्ष जुलाई 2023-2024 मे सिंचित प्लांटेशन वन अनुसंधान विस्तार वन विभाग द्वारा संपादित किया गया था जो अन्य ग्राम क्षेत्रों के लिए नाज़ीर बन रही है वहाँ के तीन गुणित तीन के अंतरल मे रोपित प्लांटेशन पौधे तीन वर्ष मे युवा अवस्था मे पहुँच कर लह लहाते हुए मस्ती में झुमते हुए शीर्ष पर आपस मे स्पर्श कर झूमते हुए देखने से ऐसा प्रतीत होता है जैसे किशोर अवस्था के बालक परस्पर खेल क्रीड़ा मे तल्लीन रहते हुए पंद्रह फीट की ऊँचाई मे पहुँच कर एक दूसरे को छु छुवाला करते हुए अठाखेलियाँ कर रहे हो एवं ग्राम पंचायत सकरी के आश्रित ग्राम जावा क्षेत्र प्लांटेशन मे हरियाली की ब्यार बहा रहे हो यहां आश्चर्य का विषय है कि प्रेमन चंद्राकर जैसा पद में छोटा सा फॉरेस्ट गार्ड ही है जिसने कम आयु मे जुलाई 2023-24 मे प्लांटेशन अपनी उपस्थिति में रहते हुए करवाया था आज वहां का प्लांटेशन देख कर किसी भी पर्यावरण प्रेमी का मन मोह लेगा उसने आगे बताया कि प्रति वर्ष तत्कालिक अधिकारियों के आदेश एवं निर्देश पर जिनमे श्री आर. डी.निर्मलकर,एस डी ओ. जे. जे.आचार्य. साहब के निर्देश, एवं मार्ग दर्शन मे समय समय पर केज्युवल्टी, उपचार,सुरक्षा देखरेख संपादित करवाया उसने आगे बताया कि वानिकी कार्यों के अनुभव का ज्ञान समस्त आदरणीय अधिकारियों के नेतृत्व, एवं मार्ग दर्शन से प्राप्त किया
जबकि शिक्षा के बारे मे प्रेमन चंद्राकर ने बी एस सी. एक वर्ष तक आयुर्वेदिक फार्मेसी का अनुभव एवं स्नातक, पूरी की ऐसे वरिष्ठ अनुभवी अधिकारियों के सानिध्य मे रहते हुए वानिकी कार्य मे दक्षता हासिल की है जिसका परिणाम आज जावा का कथित प्लांटेशन पूरी तरह शत प्रतिशत पौधे स्वस्थ्य पूर्वक ग्रोथ कर रहे है जिनमे मुख्यतः जामुन, बादाम, आम, इमली,सीताफल, शहतुत,आआंवला, बोहरा, नीम, कचनार, करंज, बहेड़ा,महुआ, शिशु, महोगनी, कुसुम,कालासिरसा, अंजन, शीशम, जैसे फलदार, इमारती काष्ठ वाले फल फूल दार पौधे अपनी पूरी युवा अवस्था में लहरा रहे है जो विभाग के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है
यह अवस्था तब निर्मित होती है जब मानव प्राकृतिक, पर्यावरण, एवं रोपित पौधों प्लांटेशन के प्रति स्नेह, सुरक्षा देखरेख पूर्ण इमानदारी, लगनता से विभागीय व्यवस्था के तालमेल बिठा कर इनकी सेवा करे तभी भविष्य मे ग्राम जावा का कथित मिश्रित प्रजाति वाला प्लांटेशन एक परिपक्व वन क्षेत्र के रूप मे विस्तारीत दिखता है जिसका श्रेय उपर बैठे अधिकारी भी वन कर्मी की भूरि भूरि प्रशंसा करने से नही हिचकिचते सामाजिक वानिकी के युवा फॉरेस्ट गार्ड प्रेमन चंद्राकर सेवानिवृत वरिष्ठ अधिकारियों के सान्निध्य मे रह कर एक जुनून, की तरह वानिकी कार्यों का अनुभव लिया और आज भी वह कुछ नया सीखने का जज्बा, और ललक दिखाई देती है जो विभाग के प्रति सीखने समझने, एवं समर्पण भाव को दर्शता है





