मंगलवार, 15 सितंबर 2026

वन,पर्यटन,एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण संवर्धन मे जन भागीदारी बढ़ी- केदार कश्यप

 वन,पर्यटन,एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण संवर्धन मे जन भागीदारी बढ़ी- केदार कश्यप

अलताफ़ हुसैन

रायपुर(छत्तीसगढ़ वनोदय) छ्ग वन विभाग लगातार वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा विलुप्त होती भिन्न भिन्न प्रजाति के पेड़,पौधे, सूक्ष्म जीव जंतु, जैसी जैव विविधता के संतुलन के लिए लगातार बेहतर प्रयास कर वनवासी वनआदिवासीयों के समृद्धशाली संस्कृति विरासत, रोजगार मूलक व्यवस्थाओं की चिन्ता करते हुए  वनों मे स्थित प्राकृतिक क्षेत्रों मे पर्यटन के अवसर तलाश करते   भिन्न भिन्न योजना बद्ध तरीके से उनका चयन एवं चिन्हाकित कर   वनों के संरक्षण संवर्धन हेतु वन विभाग दृढ़ संकल्पित है इसके लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग बहुत से वन क्षेत्रों मे योजनाओं एवं उसके सफलता पूर्वक


क्रियान्वयन के साथ बढ़ती आबादी घटते वन के आंशिक क्षेत्रों के रकबा मे  बढ़ोतरी हुई है बल्कि  लगातार बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग के साथ परिवर्तित जलवायु परिवर्तन जैसी मूल धारणा पर भी शिकंजा कसने मे लगभग   सफलता प्राप्त हुआ है जिसका मुख्य कारण जन  भागीदारी के साथ विभाग द्वारा वृक्षारोपण वानिकी कार्य एवं एक पेड़ मां के नाम जैसी सफल योजनाओं के मध्यम से एक ऐतिहासिक लक्ष्य की ओर अग्रसर है जो विभाग के लिए बहुत बढ़ी उपलब्धि है 


उक्तशय की जानकरी छत्तीसगढ़ प्रदेश के  वन मंत्री केदार कश्यप ने  प्रेस वार्ता में यह बात कही उन्होंने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के वन क्षेत्रों का एक समृद्ध शाली इतिहास रहा है जिसके संरक्षण संवर्धन एवं  विस्तृत विरासत को सहज कर अक्षुषय बनाए रखने की दिशा मे  नवीन योजनाओं के मध्यम से विभाग लगातार कार्य कर रहा है इसी कड़ी मे विगत तीन वर्षों से एक पेड़ मां के नाम जैसी देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के  अह्वान पर  जन भागीदारी के तहत प्रत्येक व्यक्ति को मां जैसी भावनात्मक स्मृति को संजोने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के प्रेरणा दायी योजना का जन भागीदारी के तहत पौधे वितरण जैसी बहु उद्देशीय कार्य जारी है जिसमे वर्षानुसर वर्ष 2024 मे 2.50 करोड़ पौधों के वितरण के  लक्ष्य के साथ एक करोड़ अधिक अर्थात साढ़े तीन करोड़ पौधों का जो 140℅ उपलब्धि प्राप्त किया गया उसी प्रकार वर्ष 2025 मे 1.65 करोड़ पौधे वितरण से अधिक 3.50जो लक्ष्य से 1.90 करोड़ अधिक के साथ 215 ℅ अधिक रहा उसी प्रकार जारी वित्तीय वर्ष 2026 मे 2.73 करोड़ पौधों का वितरण 2 करोड़ 23 लाख 65 हजार पौधों का रोपण एवं वितरण अभियान जारी है जो भविष्य मे इससे अधिक का लक्ष्य प्राप्ति किया जाएगा ऐसी आशा छ्ग के वन मंत्री  ने व्यक्त की है वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आगे बताया कि नवा रायपुर अटल नगर मे शहरी वृक्षारोपण के तहत नवागांव तूता क्षेत्र मे लगभग 80.080 हेक्टेयर भूभाग के वर्ष 2024 मे एक पेड़ मां के नाम योजना का प्रारंभ किया गया था जहाँ लगभग बीस  हजार मिश्रित प्रजाति के पौधे रोपे गए थे जिसमे  मुख्यतः नीम, आंवला, बेहड़ा, सागौन, बीजा, साजा, बांस, जैसी इमारती काष्ठ सहित औषधि गुण वाले पौधे विकसित किए गए है जो आज वृक्ष का स्वरूप मे आकार ले रहे है यहाँ आज भी पाइप लाइन बिछा कर आधुनिक तकनीक ड्रिप पद्धति से सिंचाई कर सुरक्षा देख रेख  एवं उपचार की जा रही है जो पर्यावरण सुरक्षा का सजीव उदाहरण माना जा रहा है उन्होंने आगे बताया कि प्रदेश की गोद मे विकसित प्राकृतिक आभा एवं 

नैसर्गिक पर्यावरणीय छटा को संरक्षित करने की उद्देश्य से अनेक पर्यटन स्थल का उन्नयन करने छत्तीसगढ़  सरकार पूर्ण रूप से कटिबद्ध है इस दिशा मे पूरे राज्य मे लगभग 240 प्राकृतिक पर्यटन स्थल विकसित किए गए है जिनमे पचास से अधिक स्व सहायता समूह द्वारा वन क्षेत्रों के पर्यटन का संचालन किया जा रहा है जिससे वन क्षेत्र के वन वासी एवं वन आदि वासियों  के वन समितियों को रोजगार, एवं आय का सशक्त मध्यम बन चुका है  इनमे बुका, सतरेंगा, कोडार, टाटामारी, एवं घुड़माराम, जैसे इको टूरिजम प्रमुख है इनके अलावा बस्तर लोमनी पार्क सरगुजा संजय वाटिका, कटघोरा बुका विहार, महासमुंद मे कोडार कैंप जलाशय धमतरी सत्कार सरोवर, कांकेर मे दुधावा,सरगुजा मे जलजली, सरगुजा रामगढ़, नारायण पुर इको पार्क वन मन्दिर, मनेंद्र गढ़ स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क जैसे वन क्षेत्रों मे नैसर्गिक वन पर्यटन क्षेत्रों का लगभग प्रस्तावित लक्ष्य दो करोड़ साठ लाख एवं सकल आय दो करोड़ इक्कीस लाख माना गया है जो विकास के साथ ही आदिवासी वर्ग की विरासत भी मानी जा रही है उन्होंने पर्यटन की  विकसित सड़क मार्ग उन्नयन की दिशा के  संदर्भ मे आगे बताया कि  कवर्धा सफारी मॉडल मे 35 किलोमीटर लंबा नया सफारी मार्ग विकसित किया गया चक्रीय निधि से 4×4 सफारी वाहन का संचालन भी किया जा रहा है वही रायपुर से चालीस किलोमीटर के अंतराल स्थित मोहरेंगा प्राकृतिक वन दर्शन केंद्र मे जल  संरक्षण,वन जीव संरक्षण, मार्ग संरचनाओं के विकास के साथ ही , प्राकृतिक भ्रमण, एवं समृद्ध जैव विविधता पर्या वरण शिक्षा का केंद्र बिंदु बनता जा रहा है यहाँ दो सर्व सुविधा युक्त आकर्षक कॉटेज का निर्माण किया गया है जो शहर के भीड़ भाड़ प्रदूषण मुक्त एवं स्वच्छ वातावरण मे परिवारिक माहौल को खुशनुमा बनाता है जो प्रकृति प्रेम और वन संरक्षण के प्रति जन जागरुकता बढ़ाने का सशक्त मध्यम बन रहा है वन मंत्री केदार कश्यप ने पर्यटन के बारे मे आगे जानकारी देते हुए बताया ठेमली आईलैंड धमतरी का यह पर्यटन बहुत अधिक आकर्षक का केंद्र बिंदु है गंगरेल बांध के शांत वातावरण जल के बीच ठेमरी आईलैंड को इको पर्यटन के रूप मे विकसित किया गया है जहाँ प्रकृति संरक्षण के साथ इको फ्रेडली  विकास के साथ औषधीय पौधों का संरक्षण एवं स्थानीय रोजगार के अवसर मिल रहा है इसके अलावा बिलासा ताल वसुंधरा उद्यान बिलासपुर मे प्राकृतिक सौंदर्य और रचनात्मक विकास के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षक बन चुका है यहाँ पारंपरिक चित्रकारी से सजे रंग बिरंगे पुल, जलाशय के समीप आकर्षक हट, और कलात्मक इको फ्रेंडली मार्ग बच्चों के लिए जुरासिक थीम पर डायनासोर जोन सबको अपनी ओर आकर्षित करता है वन मंडल बिलासपुर के कोटा परिक्षेत्र मे वन चेतना केंद्र पटैत के तहत घोंघा जलाशय मे कॉटेज कैंटीन का निर्माण किया गया जहाँ नौका विहार, कयाकिंग जैसी एंडवांचर गतिविधियां संचालित होती है जो लोगों को खूब आकर्षित कर रही है आसपास क्षेत्र मे नजर डाली जाए तो उन्होंने महासमुंद वन मंडल के अंतर्गत जिले के सरायपाली शिशुपाल इको ट्रेल बुढ़ा डोंगर ऐतिहासिक धरोहर साहसिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर बड़ी तेजी से उभरा है पैतालिस लाख रुपये की लागत से कथित इको ट्रेल पर अब तक बाईस हजार से उपर पर्यटक भ्रमण कर चुके है जिसमे अब तक चार लाख बियालिस हजार का शुद्ध आय प्राप्त हुआ है परियोजना के मध्यम से 832 मानव दिवस का रोजगार सृजन हुआ है 15 स्थानीय लोगों को नियमित आजीविका प्राप्त हुई है यहाँ कैन्पिग, नेचर ट्रेल, ट्रैकिंग तीन मीटर ऊँचा घोड़ाधार जल प्रपात तथा प्राचीन दुर्ग, मंदिरों के अवशेष क्षेत्र को प्रकृति और ऐतिहासिक महत्व को बढ़ाता है

 

 बस्तर क्षेत्र मे प्रगति विकास के नए आयाम स्थापित किये जा रहे इस संदर्भ मे वन मंत्री ने बताया की बस्तर सदैव प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ आदिवासी परंपरा का केंद्र बना रहा है जिनकी विरासत को सहेजने के उद्देश्य से  अनेक स्थल का विकास किया गया जिनमे मुख्यतः जन जातीय वाटिका जगदलपुर, डंपिंग ग्राउंड से प्रकृति के आंगन तक,जैसे क्षेत्रों की हरियाली और जैव विविधता पर संरक्षण कर विशेष ध्यान दिया गया एवं पर्यटन के रूप मे विकसित किया गया वही बस्तर जिले के धुड़माराम गाँव अपनी समृद्ध धुर्वा आदिवासी संस्कृति पारंपरिक जीवन शैली, और प्राकृतिक परिवेश के साथ छ्ग के प्रमुख ग्रामीण एवं एको पर्यटन के रूप मे पहचान बना लिया है जहाँ चालीस परिवार और दो सौ पंद्रह लोगो की आबादी निवास करती है यहाँ पर्यटकों को उनके बीच पहुँच का धुर्वा संस्कृति व्याख्या, हस्तशिल्प कला, आदिवासी रहन सहन, एवं पर्यटन विरासत का सीधा साक्षातकार संवाद का अवसर प्राप्त होता है


वन मंत्री ने आगे बताया कि इसके अलावा ढोलकल गणेश ट्रैकिंग का शुभारंभ, तुंगल डैम, जहाँ नक्सल प्रभावित महिलाओं के रोजगार सृजन का मध्यम बना हुआ है वही वन मंदिर, दंतेवाड़ा टेकनार रोड  विश्व धारोहर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, को भी पर्यटन के रूप मे विकसित ख्याति प्राप्ति हुई है उन्होंने वन्य प्राणियों की संरक्षण की दिशा मे बाघों की संख्या मे निरंतर वृद्धि देखी जा रही है होना बताया जिसकी वर्ष 2022 मे 18 बाघ थे जो वर्ष 2026 में इनकी संख्या 35 पहुँच गई है जो अच्छे संकेत माना जा रहा है बार नवापारा अभ्यारण्य मे 77 काले हिरण का पुनर्वास किया गया था जिनकी वर्तमान  संख्या लगभग 200 के करीब पहुँच चुकी है जो वन विभाग द्वारा वन्य प्राणियों की सुरक्षा पूर्ण प्रतिबद्धता, उनके संरक्षण संवर्धन के संकल्प को दोहराता है  बार अभ्यारण्य मे लगातार बढ़ रही काले हिरण की संख्या की प्रशंसा देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने अपने मन की बात कार्यक्रम मे भी की थी वन्य प्राणी जो छत्तीसगढ़ राज्य की धरोहर मानी जाती है उनके संरक्षण एवं पुनर्स्थापन हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे है जिनमे राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, प्रमुख है हाथियों के संरक्षण के लिए जन जागरुकता सामुदायिक भागीदारी और आधुनिक तकनीक से गजसंकेत एवं गज रथ यात्रा के मध्यम से लोगों मे अभियान चलाया जा रहा है गज एप के मध्यम से हाथियों की विचरण, गतिविधियों की जानकारी मोबाइल से प्राप्त कर समय पर चेतावनी पहुंचाई जाती है ताकि प्रभावित होने वाले ग्राम क्षेत्र के ग्रामीण सतर्क रह सके और किसी भी प्रकार की जान माल की क्षति को बचाया जा सके वन मंत्री केदार कध्याप ने बताया मानव हाथी द्वंद मे काफी गिरावट देखी जा रही है वर्ष 2022 मे जहां 76 जन हानि हुई थी  उसकी तुलना मे वर्ष 2026 मे यह घटते हुए मात्र 53 हो गई जो वन विभाग के लिए बहुत बढ़ी उपलब्धि है