वन विकास निगम बार परियोजना मंडल का रवान रेस्ट हाउस अतीत से वर्तमान तक का सफर
रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) बार नवापारा अभ्यारण्य युगों यूगों से यहां चट्टान की भांति खड़ा हुआ है बार अभ्यारणय के अस्तित्व का इतिहास कब का है यह सही ज्ञात नही परंतु स्वतंत्रता के समय प्राचीन भवनो में अंकित वर्ष 1947 से 1948 में संभवतः प्रथम बार सघन वन क्षेत्रों के मध्य अंग्रेजों ने कुछ चयनित इतिहासिक भवन बनवाया था जो आज भी 75 वर्षों के अविस्मरणीय अध्याय का पन्ना बना हुआ है परंतु आधुनिक युग में कुछ अमूल चूल परिवर्तन कर वर्तमान में उक्त भवनों के कुछ स्थलों को नवीन आकार प्रकार देकर नव स्वरूप का साक्षी भी बना हुआ है ,,, ज़ाहिर है कि तत्कालिक भवन आज़ादी के पूर्व प्राकृतिक सौंदर्यता ने गोरे विदेशियों को सघन बार वन अभ्यारण्य की ओर आकर्षित किया होगा जिसकी प्राकृतिक हरीतिमा युक्त मनमोहक आभा स्वच्छन्द एवं स्वतंत्र विचरण करते,खूंखार शेर भालू,चीता,गौर,हिरन, बायसन, वन भैंसा,और इन जैसे अनेक जलचर,नभचर, सरिसृप,वन्य प्राणियों ने जो वनों के अभिन्न अंग मानें जाते है पर्यटन हेतु आम जन को आकर्षित किया जो प्राकृतिक सौंदर्य को बहुत करीब से देखने समझने और यहां के शांत स्वच्छ वातावरण को महसूस करने के उद्देश्य से ही अंचल के मध्य भूभाग में आज़ादी के पूर्व ही अपने सुखद पल व्यतित करने हेतु विश्राम भवन एवं गिने चुने अवासीय मकान का निर्माण किया गया था परंतु परिवर्तित होते काल चक्र ने तथाकथित भवन जीर्ण शिर्ण अवस्था में पहुँच गए जिसका स्वरूप एवं जीर्णउद्धार कर बार अभ्यारणय के ऐतिहासिक भवन को यथावत रखनें वन विभाग कामयाब रहा है इस संदर्भ में ज्ञात हुआ है कि वर्ष 1940 से 43 के मध्य अंग्रेज ऑफिसर के चाकरी हेतु लाए गए मूल,वनवासी, आदिवासियों को यहां बसाया गया इसकी वजह वन अफसरों को वन में कार्य हेतु कर्मियों की आवश्यकता पड़ती थी जिसकी पूर्ति हेतु बार नवापारा क्षेत्र में मुट्ठी भर आदिवासी,वनवासी,गोंड, बिंझावर,कंवर,जनजाति के लोगों को बसाया गया जो यहां के मूल निवासी थे इतिहास के पन्ने पलटने पर तथा वन विभाग के अंकित दस्तावेजों को खंगालने से यह भी ज्ञात हुआ कि मनीराम नामक वन कर्मी द्वारा अंग्रेज अफसरों द्वारा कराए जाने वाले सागौन प्लांटेशन को देख कर उसके द्वारा बार क्षेत्र के अंचल में वृह्द भूभाग में सागौन प्लांटेशन कराया गया था जो आज भी मनीराम प्लांटेंशन के रूप दर्ज है आज़ादी पश्चात पूर्ण रूपेण वन से संबंधित विभाग अस्तित्व में आया और यहां अंग्रेज अफसरों के साथ भारतीय अधिकारियों का आवागमन बढ़ गया इसकी सुरक्षा और व्यवस्था के नए नए जतन, किए गए बताया जाता है छत्तीसगढ़ अविभाजित मध्य प्रदेश राज्य के अधीन था तब ही सन 1973-से 76 के मध्य वन विकास निगम के हवाले किया गया था जहां की सोंधी मिट्टी की खुशबू और स्वच्छ वातावरण जिसमे मिश्रित प्रजाति के साथ सागौन जैसी बेशकीमती इमारती काष्ठों वाले वृक्षों की प्रचुरता थी उसका दोहन कर वन विकास निगम उसका व्यवसायिक उपयोग करने लगा पश्चात अंचल में निवासरत वन्यप्राणी परिवार का शिकार कुछ ज्यादा बड़ा
तब बार नयापारा की सुध पूर्ववर्ती मध्य प्रदेश के अधीन वन विभाग ने लेते हुए वर्ष 1976 मे इसे आरक्षित करते हुए संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर दिया पश्चात धीरे धीरे अभ्यारण्य के रूप में बार विकसित किया गया अंचल में बसे ग्राम बार और नवापारा को मिला कर इसका नाम बार नवापारा अभ्यारण्य के रूप में हुआ आज भी छग राज्य वन विकास निगम के एक बहुत बड़ा भूभाग वन विकास निगम के अधीन है जिसमे 1974-76 में सागौन वृक्षा रोपण जो छग वन विकास निगम की आर्थिक रीढ़ की हड्डी बनी हुई है बार नवापारा अंचल मे उनका लगभग 121 कंपार्टमेंट है जिसका कुल क्षेत्र फल 352.471 हेक्टेयर में है जिसमे मिश्रित प्रजाति सहित सागौन बांस भिर्रा, अन्य प्रजाति के वृक्ष संपदा छग वन विकास निगम के प्रमुख आय का स्त्रोत बना हुआ है जिसका वार्षिकी विरलन कर इनके सेवारत कर्मियों के समूचे परिवार का पालन पोषण होता है बदले में वन विकास निगम राज्य सरकार को भी लाभांश राशि देती है वर्तमान में यह क्षेत्र बलौदाबाजार वन मंडल के अंतर्गत आरक्षित सामान्य वन क्षेत्र 244.66.वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जिसे सहेजा गया है
शेष छग राज्य वन विकास निगम के हिस्से में चला गया परंतु कुछ वर्षों से बार अभ्यारणय के विस्तार करते हुए वन विकास निगम का एक बहुत बड़ा भूभाग अपने अधीन करनें की कवायद वन विभाग कर रही है जिसकी चपेट में वन विकास निगम की आर्थिक रीढ़ की हड्डी तो टूटेगी ही साथ ही बहुत से वन विकास निगम कर्मियों के रोजगार और नौकरी पर भी गाज गिर सकती है बहरहाल, वन विकास निगम के रायतुम, रवान क्षेत्र में ऐसे ही ऐतिहासिक भवन मौजुद है जिसका जीर्ण उद्धार एक वर्ष पूर्व किया गया है इस संदर्भ में परिक्षेत्राधिकारी हरिराम पैकरा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि बार नवा पारा अभ्यारणय के मुख्य मार्ग पर ऐतिहासिक रेस्ट हाउस आजादी के पूर्व का बना हुआ था परंतु उसकी स्थिति बीस वर्षों से इतनी अधिक जर्जर अवस्था में थी कि अधिकारियों के रुकने ठहरने हेतु बार अभ्यारणय के रेस्ट हाउस जाना पड़ता था गत वर्ष तत्कालिक डी.एम. आनंद कुदरिया के प्रयास, एवं मार्ग दर्शन पर इस ऐतिहासिक रेस्ट हाउस भवन का जीर्ण उद्धार किया गया उसकी छत पर आधुनिक आकर्षक टीन शेड,छत निर्माण किया गया यही नही उपर की लकड़ी का नव निर्माण कर मजबूती दी गई है संपूर्ण हॉल में आधुनिक डाइनिंग फर्नीचर लगाए गए है जिसमें आठ दस व्यक्ति आराम से भोजन ग्रहण कर सकते है वही दो रूम में आराम दायक बेड, बाहर लॉन में कुर्सी सहित अन्य सुविधाए निर्मित की गई है रेस्ट हाउस के मुख्य द्वार पर पारदर्शी कांच लगवाया गया है ताकि भीतर से ही प्राकृतिक दृश्य का अवलोकन किया जा सके वन विकास निगम रवान परिक्षेत्रधिकारी हरि राम पैकरा आगे बताते है कि रेस्ट हाउस के बगल में लगे किचन सहित अन्य कमरे का भी जीर्ण उद्धार किया गया है प्राचीन कवेलू को हटा कर मजबूत लकड़ी के साफ्टर लगाकर आधुनिक टिन का मजबूत स्वरूप दिया गया खिड़की दरवाजे सहित टाइल्स रंग रोगन कार्य कराया गया संपूर्ण परिसर को आकर्षक पेड़,पौधे, सहित अन्य परिसर को आकर्षक स्वरूप दिया गया है
वविनि बार परियोजना मंडल के तत्कालिक एस डी ओ ऋषि शर्मा ने बताया कि बेहतर फर्नीचार, लेट बाथ रूम को आधुनिक आकार दिया गया है किचन को आधुनिक स्तर से बनाया गया पेयजल हेतु बोर निर्मित किया गया है उन्होंने आगे बताया कि मुख्य द्वारा के दोनों ओर बांस भिर्रा सहित प्राचीन पेड़ जो आज भी कथित भवन के साक्षी बने हुए है छोटे बड़े क्यारियों में आकर्षक फूल के पौधे लगे हुए है जो देख रेखा के अभाव में अव्यवस्थित स्थिति मे है परिक्षेत्राधिकारी हरि राम पैकरा ने वन विकास निगम रवान कार्यालय का जीर्णोद्धार करवाया है जिसे देख कर ज्ञात होता है कि वन विकास निगम का कार्यालय यहाँ संचालित हो रहा है
उल्लेखनीय पहलू यह है कि बार परियोजना मंडल के ऐतिहासिक भवन का जीर्णोद्धार तो कई वर्षों के पश्चात हो तो गया परंतु ऐसे बहुत से भवन है जिनका अब तक कोई पुरसाने हाल नही है जैसे रायतुम के समीप गिनती के कुछ मकान भूत बंगला बन चुका है बताया जाता है छ्ग राज्य बनने के समय यहाँ सागौन टीपी काटने से लेकर बहुत से कार्य संपन्न होते थे जो डिपो के रूप में चिंहित था वही आरंग के पास एक अन्य लघु नर्सरी एवं भवन में भी काष्ठागार डिपो हुआ करता था वहाँ की स्थिति भी बड़ी दयनीय है यही नही बार नवापारा परियोजना मंडल का देवेंद्र नगर स्थित कार्यालय जो आज भी जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुँच चुका है उसे तत्कालिक एम.डी. राजेश गोवर्धन साहब से लेकर ओ.पी. यादव साहब तक ने मंडल कार्यालय की स्थित में नव निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ की थी परंतु नतीजा सिफर ही रहा अब देखना होगा कि अस्त व्यस्त करोड़ों की वन विकास निगम की प्रापर्टी संपदा को भविष्य में नवीनिकारण सहेजा जाएगा या पूर्व की भाँति बिसरा दिया जाएगा.






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