रविवार, 20 सितंबर 2026

रेंजर के खुले भ्रष्टाचार की अग्नि में वन विकास निगम का प्लांटेशन स्वाहा

 रेंजर के खुले भ्रष्टाचार की अग्नि में वन विकास निगम का प्लांटेशन स्वाहा

अलताफ़ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम प्रा. लि. द्वारा हरियाली प्रसार करने जैसे महती उद्देश्य एवं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सी एस आर.)के तहत अनेक औद्योगिक घरानों से मिलकर (आई पी डी) योजना के तहत रिक्त पड़त भाटा ओरेंज भूमि पर भिन्न भिन्न प्रजाति के पौधों का प्लांटेशन कर वातावरण को प्रदूषण मुक्त शुद्ध जलवायु एवं  ऑक्सिजन निर्मित कर आम जन के स्वस्थ्य हित जैसे पुनीत कार्य करता है एवं पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और सरकारी नियमों के साथ तीन से पांच  वर्षों के निर्धारित तिथि पूर्ण होने पर संबंधित उद्योगिक घराने या शहरी ग्रामीण क्षेत्र के परिषद, सरपंच या नगर निगम को  हस्तांतरित कर अपने नैतिक दायित्वों,कर्तव्यों का अनुपालन करते रहा है हस्तांतरण पश्चात उन ग्रामीण जनप्रतिनिधि संस्थान, नगर निगम , नगर परिषद का नैतिक दायित्व बनता है कि वह छ्ग वन विकास निगम द्वारा रोपित प्लांटेशन की कम से कम परिपक्व  अवस्था तक उनकी सुरक्षा व्यवस्था देख रेख समुचित माध्यम से करना अनिवार्य हो जाता है परंतु छ्ग वन विकास निगम द्वारा भिन्न भिन्न प्रजाति के रोपित प्लांटेशन को  नियत तिथि वर्ष के कुछ माह पूर्व यदि आगजनी दुर्घटना वश प्लांटेशन पूर्ण रूपेण समूल नष्ट हो जाता है तब  इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है ? वन विकास निगम की या स्वीकृत हस्तांतरित लिए गए संस्थान की ? जिसने लाखों की लागत से कराए गए प्लांटेशन को बगैर हरा भरा हरियाली युक्त अवस्था मे लेने के बजाए जली हुई ठूंठ और कोयले की राख जैसी अवस्था मे स्वीकार कर लिया जाए तो इसे क्या कहा जाएगा ? ऐसी दशा मे सीधा सीधा इस ओर यह संकेत मिलता है कि वन विकास निगम मे रेंजर से लेकर उपर बैठे अधिकारी गण की मिलीभगत से लाखों का प्लांटेशन बगैर व्यवस्था सुरक्षा देखरेखा के  हरियाली की जगह उजड़ा चमन बना दिया गया 

               यह प्राकृतिक एवं पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर देने वाला एक ऐसा ही सनसनीखेज प्रकरण जिसका प्लांटेशन तो छ्ग राज्य वन विकास निगम  बार नवापारा परियोजना मंडल रायपुर डिविजन द्वारा संपादित किया गया था जो रायपुर से मात्र पच्चीस किलोमीटर अंतरल पर स्थित ग्राम पिरदा भीमोरी मार्ग जिला बेमेतरा के दस हेक्टेयर के पड़त भाटा बंजर भूमि मे वर्ष 2023 को 11,000 भिन्न भिन्न मिश्रित प्रजाति पौधों का प्लांटेशन किया गया था जिसकी रोपित वर्ष,2023 प्लांटेशन से लेकर वर्ष 2025 के माह दिसंबर तक नियमित सुरक्षा केजयुवल्टी, उपचार लगातार की जाती रही थी परंतु यह भी ज्ञात हुआ है कि इन दो वर्षों के बीच भीषण गर्मी मे एकाध बार  अग्नि दुर्घटना  का सामना भी हुआ परंतु चाक चौबंद सुरक्षा चौकीदारों की तत्परता से  भयंकर अग्नि घटना से बचा लिया गया  बताया जाता है कि जब से बिलासपुर से नई रेंजर चंद्रानी बांधे ने चार्ज लिया  है तब से वह विभाग मे भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है  बार नवा पारा परियोजना मंडल रायपुर परिक्षेत्र का ऐसा कोई क्षेत्र नही जहाँ उसके भ्रष्टाचार की गाथा सुनने नही मिलती हो अब चाहे नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर 36 का वन महोत्सव हो या सेक्टर,16 स्थित पीपल वन क्षेत्र हो या फिर मंत्री बंगले  से लेकर सेक्टर 21 तक राज्य उत्सव  रेलवे स्टेशन क्षेत्र ही क्यों न हो  रेंजर चंद्रानी बांधे द्वारा भ्रटाचार का एक नया इतिहास रच चुकी है जिसमे श्रमिक भुगतान का प्रकरण सबसे अधिक है बताया जाता है कि जिसमे श्रमिकों के खाते मे ऑन लाइन सीधे बैंक अकाउंट मे डाले जाने की व्यवस्था शासन द्वारा की गई  है उसको दर किनार कर उसके द्वारा नगद  भुगतान किया गया वह भी जिसमे कलेक्टर दर की  बजाय दो सौ रुपये से लेकर ढाई सौ तीन सौ रुपये का भुगतान क्यों न  हो यही नही गत वर्ष पथ रोपण सड़क मार्ग के मीडियन क्षेत्र मे संपादित रोपण पश्चात  की जाने वाले निंदाई गूढाई,थाला गाला,केजयुवल्टी, उपचार की नियमित राशि का भुगतान क्यो न हो सभी कार्यों मे उसके द्वारा भ्रष्टाचार का लंबा खेल खेला गया यदि इस ओर सूक्षमता से जांच की जाए तो एक बहुत बड़ा  गड़बड़ झाला सामने आ सकता है परंतु ऐसा करेगा कौन ...सैंय्या भयो कोतवाल....तो अब डर काहे का... जैसी उक्ति को यहाँ चरितार्थ करते हुए मुक्त रूप से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है  उक्त समस्त व्यवस्था की राशि का उपयोग किया ही नही गया और पूरा वर्ष वैसे ही व्यतीत हो गया यहाँ तक  कार्य क्षेत्र मे अनेक श्रमिकों का भुगतान भी विगत तीन से छ माह का अब तक नही दिया गया जिसकी वजह से श्रमिक नगद भुगतान की आशा मे ठेकेदार जो पूर्व मे वन विकास निगम मे या परिचित  व्यक्तियों के मध्यम  से कार्य  संपादित कराए  जा रहे है तथा कार्यों को नियम  अनुसार कलेक्टर दर की बजाएअल्प राशि मे करने विवश कर दिया गया है जिसमे भी ठेकेदार द्वारा अन्य व्यय जैसे  दूरस्थ ग्राम क्षेत्र मे निवासरत श्रमिक ग्रामीणों को कार्य    क्षेत्र  तक लाने ले जाने यानी आवागमन व्यवस्था का हवाला देकर कलेक्टर दर से भुगतान नही की जा रही है बल्कि उन्हे तीन से साढ़े तीन सौ रुपये का भुगतान किया जा रहा है वही     नगद भुगतान करने के बाद ठेकेदार द्वारा कलेक्टर दर के अनुसार बिल प्रस्तुत किया जाता है


जिसका भरपूर लाभ कथित रेंजर चंद्रानी  बांधे द्वारा  उठाया जा रहा है पांच से छ माह तक भुगतान न मिलने वाले श्रमिक का वीडियो साक्ष्य के रूप मे हमारे पास अब भी उपलब्ध है अपनी इसी भ्रष्टाचार वाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वन विकास निगम की परिक्षेत्राधिकारी चंद्रानी बांधे ने ग्राम पिरदा के वर्ष 2023  प्लांटेशन का सत्यानाश कर दिया फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ ने स्थानीय पिरदा ग्रामीणों से जब चर्चा की तो उन्होंने बताया कि पूर्व मे घास खरपतवार के लिए नागर या कटाई जैसी व्यवस्था से उपचार कर लिया जाता था परंतु जब से रेंजर साहिबा आई है उक्त अंतिम वर्ष के निगम द्वारा जारी प्राप्त राशि का उपयोग  कथित प्लांटेशन मे नही किया गया और न ही चौकीदार नियुक्त किया गया परिणामतः ग्राम पिरदा मे वर्ष 2026 प्रारंभ  होते ही  जनवरी फरवरी मार्च के मध्य प्लांटेशन क्षेत्र मे विकराल अग्नि कांड हो गया जिसमे संपूर्ण प्लांटेशन जल कर स्वाहा हो गया जबकि यह भी ज्ञात हुआ है कि वर्ष 2026 अप्रेल से जून के मध्य पिरदा सरपंच को प्लांटेशन हस्तांतरण करना था सवाल उठता है जब अंतिम वन विकास निगम द्वारा जारी राशि  इसी सुरक्षा व्यवस्था कार्यों मे लगता है तब उन शेष राशि को परिक्षेत्राधिकारी द्वारा क्यों नही लगा कर प्लांटेशन को बचाया गया?


 इससे स्पष्ट होता है कि संपूर्ण राशि रेंजर द्वारा पूरी तरह गबन कर लिया गया जबकि पूछताछ मे ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इसकी शिकायत ग्राम पिरदा के सरपंच (संजू) संजीव परगनिहा द्वारा वन विकास निगम बार नवा पारा परियोजना मंडल के अधिकारयों को प्लांटेशन के जलने की लिखित मे की गई थी तथा इसकी जांच का जिम्मा एस डी ओ द्वारा किया गया था अब कौन से अधिकारी ने इसकी क्या जांच कर क्या  जवाब दिया गया यह तो ज्ञात नही चल पाया है परंतु लाखों रुपये का हरियर छत्तीसगढ़ के तहत प्लांटेशन किया गया था जो पूरी तरह अब जल कर स्वाहा हो गया यहाँ तक अब फैनसिंग, लाने वाले सीमेंट पोल भी निकाल कर ध्वस्त कर दिया गया गाय गरुआ मुक्त रूप से प्लांटेशन मे चराई करते देखे जा सकते है ऐसी स्थिति मे जले ठूंठ से निकालने वाली नए  कोपल की संभावना भी क्षीण हो जाती है इस संदर्भ मे हमने पंचायत सरपंच से मिलने का प्रयास किया था वे हमे उपलब्ध नही हुए वही बार नवापारा परियोजना मंडल के डी एम. टिकरिहा जी से संपर्क कर वस्तुस्थिति ज्ञात करने देवेंद्र नगर स्थित कार्यालय भी पहुंचे थे परंतु वे भी बिलासपुर प्रवास मे थे अब सवाल उठता है हस्तांतरण होने के दो चार माह पूर्व हुए कथित अग्नि कांड जिसमे  लाखों का मिश्रित प्रजाति का पिरदा स्थित प्लांटेशन किया गया था उसकी भरपाई अब कौन करेगा ?

जबकि स्थानीय पिरदा ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि नशा करने वाले असमाजिक तत्वों द्वारा सूखे घास मे बीड़ी सीगरेट फेक कर आग लगाई गई और लाखों रुपये का प्लांटेशन मे घनघोरअग्नि कांड से सब कुछ स्वाहा हो गया यदि जिम्मेदार परिक्षेत्राधिकारी चंद्रानी बांदे समय रहते सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की होती तो इतना बड़ा जघन्य अग्नि कांड नही होता और पिरदा सरपंच को (हैंड वर्क) हस्तांतरण तिथि मार्च से मई जून के मध्य तक इसे बचाया जा सकता था 

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