शनिवार, 10 जनवरी 2026

अभनपुर नयापारा आरामिल में प्रतिबंधित काष्ठ दिन रात पहुँच रहे

 अभनपुर नयापारा आरामिल में प्रतिबंधित काष्ठ 

  दिन रात पहुँच रहे


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छत्तीसगढ़ प्रदेश के वन क्षेत्र में बेतहाशा अवैध कटाई किसी से छुपा नही है आए दिन समाचार पत्रों की सुर्खियों में यह बात प्रकाशित होते रहती है कि साल, सागौन,बीजा, खैर, सहित भिन्न भिन्न प्रजाति के कहुआ,जैसे अन्य काष्ठ तस्करी करते वन विभाग की टीम ने पकडा परंतु वर्ष में एकाध बार किए जाने वाली ऐसी कार्यवाही एक प्रकार से ...ऊँट के मुँह मे जीरा...के समान नही लगता है क्योंकि लगातार प्रदेश के निस्तार  काष्ठ डिपो में उपरोक्त इमारती काष्ठ की बढ़ रही शासकीय मूल्य दर एवं ऑन लाइन नीलामी ने काष्ठ माफिया, तस्करों एवं आरा मिल,टिम्बर की नींद उडा कर रख दी है परिणामतः  काष्ठ तस्करों, दलालों ने किसान अथवा स्थानीय सरपंच की मिलीभगत कर लिखित में कटाई की अनुमति प्राप्त कर लेते है तथा अनुमति पत्र लेकर उसकी आड़ में कृषि, भूमि, क्षेत्र के प्राकृतिक रूप से पैदा,पीपल से लेकर नीम, बेर, इमली, एवं अन्य फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पेडों का पातन कर क्षेत्र के आरा मिल,टिम्बर में पहुँचा दिया जाता है जबकि उपरोक्त फलदार, फूलदार, औषधि युक्त पेड़ एवं कहुआ तक पेड़ की कटाई बगैर सक्षम वन अधिकारी, एवं एस.डी.एम. की अनुमति पत्र लिए वनोपज धन का  पातन नही किया जा सकता यह सीधे सीधे काष्ठों की चोरी एवं तस्करी की श्रेणी  मे आता है जिससे  काष्ठ तस्कर और दलालों को इसके एवज में अच्छा खासा आर्थिक लाभ मिल जाता है जबकि वन अधिनियम यह कहता है कि छ्ग शासन द्वारा छुट बबूल किस्म के अन्य प्रजाति के वन संपदा काष्ठों का नाम आयु, एवं उसके काश्त कारी भूमि से हटाने का लिखित कारण बता  कर उसे सरपंच के द्वारा अनुमोदन कर वन विभाग के सक्षम अधिकारी से लिखित में अनुमति लेना अनिवार्य होता है जिसमें कम से कम तीन से छ माह का समय लगता है परंतु काष्ठ तस्कर एवं दलाल बगैर किसी लिखित प्रक्रिया के सरपंच की अनुमति जैसे वह वन विभाग का स्वामी या अधिकारी हो तथा मनमाने रूप से बबुल,जैसे अन्य काष्ठों की विभाग  को अनुमति, सूचना दिये बगैर सरपंच पद का लाभ उठाते हुए  खुले आम मन माफिक काष्ठों का विदोहन कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर शासन के राजस्व को चोट पहुंचा रहे है ज्ञात हुआ है कि बहुत से आरा मिलर्स स्वयं के दलाल नियुक्त कर ट्रैक्टर एवं बड़े ट्रकों में चोरी छिपे कृषि क्षेत्रों के काष्ठों का परिवहन कर लगातार हरियाली मय क्षेत्रों का विदोहन तेजी से किया जा रहा है इस संदर्भ में आशंका व्यक्त की जा रही  है कि बहुत से छोटे वन कर्मचारियों ने बकायदा होने वाली कटाई के एवज में प्रति गाड़ी के हिसाब से हजारों लाखों रुपये का लेनदेन कर विशेष छुट दे रखी है जिसकी वजह से काष्ठ तस्करों के हौसले और बुलंद है. 


इस तारतम्य में अभी लगातार समाचार मिल रहा है कि अभनपूर, राजिम नयापारा के आरा मिल काष्ठों कि बम्फर आमद से आरा मिल लालम लाल और गुलज़ार है जहाँ प्रतिबंधित कहुआ से लेकर भिन्न भिन्न प्रजाति के इमारती काष्ठों का अनवरत परिवहन हो रहा है परंतु इस संदर्भ में वन विभाग का उड़न दस्ता के द्वारा सारगर्भित कार्यवाही नही होना बताया जा रहा है जबकि अति विश्वसनीय सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि अभनपुर जो राजधानी रायपुर को जोड़ने वाला प्रमुख सेंटर क्षेत्र माना जाता है जहाँ एक ओर से, कुरुद, जो धमतरी वन मंडल के मेघा क्षेत्र से सिंगपुर नगरी को जोड़ता है वही धमतरी,वन मंडल के बहुत से वन क्षेत्रों का यह क्षेत्र खुला मार्ग है जहाँ से भारी मात्रा में वन क्षेत्र के काष्ठों का परिवहन निर्बाध गति से किया जाना बताया जा रहा है वही दूसरी ओर से पांडुका गरियाबंद से  बड़ी सहजता से भी काष्ठ परिवहन राजिम नयापारा  होते हुए अभनपुर हेतु आवगमन उपलब्ध  है जिसका दो दर्जन से उपर आरामिल तस्कर भरपूर लाभ उठा रहे है  इसकी जब सूत्रों से जानकारी ली तो अधिकांश आरा मिलर्स के कर्ता धर्ता का रटारटाया जवाब था कि   स्थानीय आरामिल  में उपलब्ध काष्ठ  महाराष्ट्र  वन क्षेत्र काष्ठागार से नीलामी से ली गई है  सवाल उठता है कि लाखों कि महाराष्ट्र क्षेत्र के इमारती काष्ठ नीलामी से लाखों रुपये व्यय कर एक या दो ट्रक ही लिया जा सकता है यहाँ तो कई ट्रक इमारती काष्ठ प्रत्येक आरा मिल मे उपलब्ध है जो कहाँ से यहाँ तक पहुंचा? यह विचारणीय पहलू है अभनपूर, राजिम  नयापारा, आरामिल में ऐसी स्थिति एक दो आरा मिल मे ही नही बल्कि दर्जनों आरा मिल में देखी जा सकती है यदि इसकी सूक्षमता से जांच की जाए तो बहुत बड़ा काष्ठ तस्करी का भंडाफोड़ यहाँ हो सकता है 


  लगातार अभनपुर, राजिम नयापारा आरा मिल क्षेत्रों में हो रही अवैध काष्ठ परिवहन के संदर्भ में नया रायपुर परिक्षेत्राधिकारी चंद्र कुमार महोबिया से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में कथित क्षेत्र में लगातार लाव लश्कर के  साथ रात्रि गश्त किया जा रहा है  जिस का परिणाम रहा की अभनपुर के दो आरामिल पर कार्यवाही की गई परंतु यह पर्याप्त नही है उन्होंने आगे बताया कि जब तक  काष्ठ तस्करों पर बड़ी कार्य वाही नही हो जाती तब तक उसे वे सफलता नही मानते वही जिला उड़न दस्ता प्रभारी सामंत  राय  से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि आरंग सहित अभनपुर एवं अन्य क्षेत्र में  तस्करों पर कार्यवाही की गई है यह कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी लगातार काष्ठ माफियाओं पर कार्यवाही के लिए सतत गश्त की जा रही है शीघ्र ही इसके सार्थक परिणाम सामने आने की उम्मीद व्यक्त की गई है बताते चलें  कि कार्यवाही जो भी हो परंतु आरा मिल के खिलाफ फॉरेस्ट काइम  न्यूज़ उक्त अवैध  काष्ठ तस्करी पर  समय समय पर पाठकों को अवगत कराते रहेगा क्योंकि  इनके द्वारा काष्ठ लाए जाने वाले श्रोत,,नाम, आरा मिल की व्यवस्था सहित अन्य सैटिंग व्यवस्था लेनदेन इत्यादि का खुलासा किया जाएगा.

बुधवार, 31 दिसंबर 2025

वन विकास निगम का डिप्टी रेंजर लोकेश साहू वर्षों से फर्जी नौकरी कर रवान क्षेत्र को कर रहा खोखला

 वन विकास निगम का डिप्टी रेंजर लोकेश साहू वर्षों से फर्जी नौकरी कर रवान क्षेत्र को कर रहा खोखला


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम एवं संपूर्ण प्रदेश के समान्य वन मंडल कार्यालयों में ऐसे बहुत से वन कर्मचारी है जो किसी न किसी तरह से फर्जीवाडा  प्रमाण पत्रों के मध्यम से शासकीय नियुक्ति प्राप्त कर वर्षों से शासन के राजस्व को चुना लगा रहे है मजे की बात यह है कि वरिष्ठ अधिकारी भी इन सब बातों से अनभिज्ञ नही है फिर भी ऐसे वन कर्मचारियों पर किसी प्रकार की कोई भी वैधानिक कार्यवाही नही की जा रही है तथा मजे से ऐसे वन कर्मी शासन के समस्त योजनाओं का भरपूर लाभ उठा रहे है  इसका ताजातरीन उदाहरण छ्ग राज्य वन विकास निगम के बार नयापारा परियोजना मंडल अंतर्गत रवान परिक्षेत्र के  डिप्टी रेंजर लोकेश साहू जो नाम के लिए तो छ्ग राज्य वन विकास निगम मे डिप्टी रेंजर का कार्य करता है परंतु काष्ठ माफिया एवं तस्करो के मध्य वह जैसे फिल्म पुष्पा का हीरों चंदन तस्कर पुष्पा राज है वैसे ही बार नयापारा परियोजना मंडल स्थित रवान वनक्षेत्र स्थित सागौन का यह पुष्पा  है जो विस्तृत भू भाग मे फैले वन क्षेत्र सागौन काष्ठ  का वह रक्षक नही बल्कि भक्षक बना बैठा हुआ है जिसे आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में लोग उसे वर्दी वाला सागौन तस्कर लोकेश के नाम से पहचानते है


आसपास के चौकीदार सुरक्षा कर्मीयों से पातासाजी करने पर उन्होंने बताया कि सागौन के बहुत से कक्ष क्रमांक क्षेत्र मे सागौन के मेजरमेंट में धांधली गड़बड़ झाला कर रायपुर के भनपुरी सहित बहुत से  क्षेत्र में सागौन काष्ठ की अफरातफरी कर चुका है यही नही विगत कुछ वर्ष पूर्व मेजरमेंट के समय गलती से लगभग तीन सौ से उपर घन मीटर सागौन कोडार काष्ठागार पहुँच गया भौतिक सत्यापन में तात्कलिक उप वन मंडल प्रबंधक ने काष्ठ  भौतिक सत्यापन मे अंतर पाए जाने पर उनके द्वारा सत्यापन करने से  साफ इंकार कर दिया गया जिसमे तीन सौ से उपर घन मीटर का अंतर बताया गया इस तारतम्य में मंडल प्रबन्धक के द्वारा पत्र क्र. /व.वि.नि./राजस्व/2022/2696/ जो 03/11/2022/ को उप मंडल प्रबन्धक को लिखा गया था जो उपरोक्त तीन सौ से उपर घन मीटर सागौन की मैजेरमेंट करते समय धांधली,हेराफेरी उजागर  हुआ था जिसका आरोप भी लोकेश साहू द्वारा ही किया जाना बताया गया था अब सवाल यह उठता है कि उक्त अंतर के तीन सौ से उपर घन मीटर सागौन का क्या हुआ ?


 इस की कोई खबर नही? क्या कथित अंतर हुई सागौन को मिली भगत कर खुर्दबुर्द कर प्राप्त राशि को परस्पर  बन्दर बांट कर लिया गया यह भी जांच का विषय है यदि इसकी जानकारी ली जाए तो बहुत से अधिकारी एवं वविनि के कर्मचारीयों की नौकरी खतरे में पढ़ सकती है बताते चले कि सागौन थीनिंग कार्य होने के कुछ वर्ष पूर्व ऐसे सागौन को  जो बीमारू, व्याधि ग्रस्त आड़े तिरछे, खोखले,अथवा बल्ली नुमा जो पेड़ पौधों वनों के ग्रोथ में बाधा उरपन्न करते है साथ ही बीस तीस एवं चालीस वर्षीय ,स्वस्थ्य परिपक्व अवरोधक सागौन को चिंहित कर कितने कक्ष क्रमांक के कितने हेक्टेयर में कितनी की संख्या में पातन किया जाना है वह सुनिश्चित किया जाता है उसका पांच वर्ष पूर्व अवलोकन कर संख्या, घन मीटर निर्धारित की जाती है पश्रत गोशवारा  में अंकित कर वर्ष अनुसार मार्किंग कर जनवरी फरवरी से पातन कार्य प्रारंभ किया जाता है परंतु यहाँ ठीक विपरित चोर मचाए शोर....की स्थिति निर्मित रहती है यहाँ बीमारू व्याधि ग्रस्त खोखला,  सागौन के साथ  चिंहित स्वस्थ सागौन एवं अन्य बेशकीमती साल, बीज, जैसे अन्य बेशकीमती पेडों का पातन भी कर लिया जाता है जो पूर्व चिंहित सुनिश्चित निर्धारित काष्ठ संख्यिक दर  से कई गुना अधिक पातन होता है इन सब के पीछे वविनि के डिप्टी रेंजर लोकेश साहू का बहुत बड़ा खेल, एवं योगदान बताया जाता है क्योंकि वन विकास निगम के उपर बैठे अधिकारियों का मुँह इसी राशि एवं इस प्रकार की गड़बड़ी घोटाले एवं अनीयमिताएं कर खामोश करवा लेता है उच्च अधिकारी भी आँख बंद कर उसके फर्जी गड़बड़ी घोटाले को देख कर भी अनदेखा कर कृपा बरसा रहे है  जिसकी वजह से आज वह वर्षों से बार नया पारा परियोजना मंडल में सांप की तरह कुंडली मार कर पदस्थ कथित वनक्षेत्र को पूरी तरह से खोखला कर चुका है फिर भी अब तक उपर बैठे कोई भी अधिकारियों ने उस पर अन्यंत्र भेजने या गड़बड़ी रोकने का दुस्साहस नही कर सका  इसका सीधा आशय यह माना जा रहा है कि वह अधिकारियों की मिलीभगत  और शह पर समस्त कर्म कांड को अंजाम दिया जा रहा है इसकी वजह यह भी माना  जा रहा है कि दुधारू गाय की तरह दूध देने वाली गाय को कोई भी भगाना नही चाहता इस वजह से वह व. वि.नि.के अधिकारीयों की आँख का तारा बना बैठा है जबकि इसके उपर और भी बहुत गंभीर आरोप लगा हुआ है 


उल्लेखनीय है कि वन विकास निगम के बहुत से वन कर्मचारी यह कहते नही थकते कि ऐसा कटाई, गड़बड़ घोटाला जैसे गंभीर आरोप होने पर उसे कब से नौकरी से निकाल देना चाहिए था परंतु मुख्यालय वन विकास निगम के एक पूर्व सेवा निवृत लेखा प्रबन्धक की विशेष कृपा दृष्टि से वे बचते आ रहे थे परंतु वर्तमान परिस्थिति में उन्हे कौन बचा रहा यह आगे खुलासा होगा परंतु गंभीर चर्चा इस बात को लेकर है कि लोकेश साहू डिप्टी रेंजर पर फर्जी तरीके से स्कूल सार्टिफेकेट के मध्यम अल्प आयु से ही वविनि से नियमितीकरण का लाभ  उठाते हुए शासन को धोख़ा घड़ी कर समस्त शासन की सुविधा जनक योजना का लाभ अब तक उठा रहा है हमे मिले पत्र से यह भी ज्ञात हुआ है कि वर्ष, 2023 में भी  अवर सचिव छग शासन के पत्र क्रमांक/ 2917/दिनंक /14/09/2023/वन एवं जल वायु परिवर्तन  विभाग ने बार नयापारा परियोजना मंडल को पत्र क्रमांक /क्षे.म.प्र./2023/1360/ के दिनंक 06/12/2023/को मंडल प्रबन्धक के नाम पत्र जारी करते हुए स्पष्ट उल्लेख किया है कि वन विकास निगम मे फर्जी तरीके से नियमितीकारण का लाभ उठाते हुए नौकरी कर रहे डिप्टी रेंजर लोकेश साहू के विरुद्ध एफ. आई.आर. दर्ज कराते हुए कार्यवाही की जाए जिस पर आज पर्यंत कोई कार्यवाही नही की गई जो उपर बैठे अधिकारियों की कार्य शैली पर सवाल खड़ा करता है तत्कालिक आर जी एम बार नया पारा परि. मंडल के पत्र मे लिखा गया है कि डिप्टी रेंजर लोकेश साहू जिसका जन्म तिथि19/05/1978/ थी तो वह वन विकास निगम मे वर्ष, 1995 से कार्यरत होना बताया गया तब उनकी उम्र 18 वर्ष से कम के थे अर्थात वे नाबालिग थे  ऐसी परिस्थिति मे यह कानूनन अपराध है यही नही दैनिक वेतन भोगी के रूप लोकेश साहू  नियमित छात्र  के रूप में दसवी बारहवीं  तथा स्नातक तक की उपाधि प्राप्त की तब दैनिक वेतन भोगी के रूप में था तो वह कोई नियमित छात्र कैसे हो सकता है? इससे स्पष्ट होता है कि डिप्टी लोकेश साहू दैनिक वेतन भोगी के रूप मे कार्यरत नही रहे होंगे तथा  उपस्थिति संबंधी भी कोई आभिलेख नही होना बताया गया था यही नही जांच कर्ता अधिकारी से भी स्पष्टी करण मांगा गया था परंतु इस संदर्भ में क्या कार्यवाही हुई यह ज्ञात नही परंतु डिप्टी लोकेश साहू पर कार्यवाही करना तो दूर आज भी वह वन विकास निगम में एक ही परिक्षेत्रा में वनों का विदोहन कर उसे दीमक की तरह खोखला कर रहा है एवं अधिकारी भी आँख बंद कर चुप्पी साधे बैठे है खबर यह भी छनकर आ रही है कि उसे कवर्धा क्षेत्र में एक माह से ट्रांसफर कर दिया गया है फिर भी वह बार नयापारा परियोजना क्षेत्र के रवान परिक्षेत्र में अब भी यथावत स्थिति में बैठा है अब यह सब देख कर इस बात का सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है कि धन के बल पर मुख्यालय से लेकर आर.जी.एम. सहित डी एफ.ओ. (डी.एम.)एवं एस. डी.ओ. का मुंह बंद कर रखा है 


 यह स्थिति वन विकास निगम की ही नही बल्कि वन जलवायु परिवर्तन विभाग के अन्य परिक्षेत्रों में भी देखा गया है  छ्ग राज्य वन अनुसंधान संस्थान के मुख्यालय से यह खबर तेजी से निकल कर आ रही है की एक अन्य महिला कर्मी  अनुकंपा नियुक्ति सहायक ग्रेड 3 के पद पर परिवार से झूठ बोल कर फर्जी तरीके से सहमति बना कर नौकरी ले ली है जिसका विरोध उसके ही परिवार जन लिखा पढ़ी और संबन्धित विभाग से पत्राचार कर रहे है उसी भवन के उपरी हिस्से मे  सीसीएफ आफिस विधान सभा में एक वन कर्मी विगत चौदह,पन्द्रह वर्षों से आसमान में  रवि के तेज के समान चमक रहा है यहाँ तक विभागीय पदोंन्नति होने के बाद भी वह उसी पद स्थान में वर्षों से  काबिज है बताया जाता है कि समस्त विभागीय गुणा भाग के मामले में वह सिद्धस्त है यही कारण है कि अनेक सी सी एफ आते गए और चले गए मगर कथित बंदा वन कर्मी अब  भी सीसीएफ ऑफिस मे  एक स्थान पर ढोल धमाका पीट कर बल्ले बल्ले कर रहा है रायपुर वन मंडल रायपुर अंतर्गत खरोरा के समीप मोहरेंगा वाइल्ड लाइफ प्रभारी ने तो बकायदा तीन लोगों को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी लगा दिया है जिसमे एक कर्मी उसकी स्वयं की बहन भांजा को साथ ही पेंशन एवं लड़के को अनुकंपा भी मिल गई है उसके बावजूद परिवार वाद के मोह में तीन से अधिक लोगों को वेतन विभाग से मिल रहा है यह संख्या अधिक भी हो सकती है यदि इसकी जांच की जाए यह तो रायपुर वन मंडल के कुछ स्थान के उदाहरण है यदि पूरे प्रदेश में सूक्ष्मता से देखा जाए तो बहुत से  फर्जी नियुक्ति सहित फर्जी नौकरी के बहुत से प्रकरण सामने आ सकते है 

मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

छ.ग. वन कर्मचारी संघ, जिला कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न

 छ.ग. वन कर्मचारी संघ, जिला कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न


रायपुर।(छत्त्तीसगढ़ वनोदय न्यूज़) वन कर्मचारी संघ, जिला शाखा रायपुर द्वारा जिला अध्यक्ष एवं जिला कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह  रेंजर्स एसोसिएशन हॉल, पंडरी, रायपुर में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

इस गरिमामय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री मणिवासगन एस. (भा.व.से.), मुख्य वन संरक्षक, रायपुर रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीया श्रीमती सतोविषा समाजदार (भा.व.से.), मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी), रायपुर द्वारा की गई।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय वन कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सतीश मिश्रा एवं रायपुर परिक्षेत्र अधिकारी श्री दीपक तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। वहीं प्रांतीय निकाय से श्री संतोष सामंत राय की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने संगठन को सशक्त बनाने पर अपने विचार व्यक्त किए।


इस अवसर पर छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संगठन के जिला अध्यक्ष श्री सावन कुमार साहू एवं जिला कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों को विधिवत शपथ दिलाई गई। सभी नवनियुक्त सदस्यों ने संगठन की गरिमा, कर्मचारियों के हितों की रक्षा तथा वन एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति निष्ठा से कार्य करने का संकल्प लिया। तत्पश्चात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मनिवासागन एस ने  नव निर्वाचित अध्यक्ष एवं सभी कार्यकारिणी सदस्यों कों बधाई देते हुए कहा की सभी कर्मचारी विभाग के कार्यों कों निष्ठा से निभाते हुए मिलकर कार्य करें, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री सतोविषा समाजदार ने भी सभी नव निर्वाचित सदस्यों कों बधाई दी। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, संगठन के पदाधिकारी, सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। समारोह का वातावरण अनुशासन, एकजुटता एवं संगठनात्मक प्रतिबद्धता से परिपूर्ण रहा।

अंत में जिला अध्यक्ष श्री सावन कुमार साहू ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों एवं उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए संगठन को और अधिक सशक्त बनाने हेतु सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।

शनिवार, 6 दिसंबर 2025

फ्रैंड्स म्युजिकल् ग्रुप की संगीतमयी प्रस्तुति पर श्रोता झूमे

 फ्रैंड्स म्युजिकल् ग्रुप की संगीतमयी प्रस्तुति पर श्रोता झूमे


रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) फ्रैंड्स म्युजिकल ग्रुप एवं एवन साउंडस के संयुक्त सहभागिता निभाते हुए कुमार शानु एवं उदित नारायण के सदाबहार फिल्मी गीतों की प्रस्तुति दी गई जिसमें एक से बढ़कर एक कलाकारों ने मदमस्त कर देने वाले गीतों की बेहतरीन अंदाज मे मंच पर साझा किया जिसमें कुछ कलाकार ऐसे भी थे जिन्होंने अपना जीवन कला, गीत, संगीत को समर्पित किया हुआ है जिनमे  राजेश नायक जी का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है वे संगीत की दुनिया में उनका एक अलग पहचान बनी हुई है उन्हे संभवतः श्रोताओं द्वारा पहली बार मंच में. ...दिल है कि  मानता नही...की प्रस्तुति देख आश्चर्य चकित हुए बिना नही रह सके क्योंकि इतनी सटीक अंदाज में उनकी प्रस्तुति सुन कर मन प्रफुल्लित हुए बिना नही रह सका वही फ्रैंड्स म्युजिकाल ग्रुप के डायरेक्टर विजय निहाल ने सभी कलाकारों को चुन कर लिया  उन्होंने...मस्ताना मौसम है रंगीन नजारा ये ...टाइटल  सॉन्ग की प्रस्तुति दी  एक अच्छे कार्य क्रम के लिए  अच्छे सधे हुए कलाकार की आवश्यकता होती जिसके लिए उन्होंने समन्दर से मोतियों का चयन किया वही प्रवीण यदु ने.., तेरी उम्मीद तेरा इंतजार करता हूं.ृ .कृष्णा यादव , इस प्यार से मेरी तरफ ना देखो फहीम खान ,  तुम्हे अपना बनाने की कसम खाई है...बसंत दीप, मुझको किया हुआ है कमलेश सिन्हा,दिल जाने जिगर तुझपे निसार किया है  राजेन्द्र जगत,...दिल कहता है चल उनसे मिल, गोल्डन साहू , जादू तेरी नजर  जैसे गीत को श्रोताओं ने बहुत पसंद किया फीमेल वॉयस मे मधु यादव जागृति, मीनाक्षी ,अनुष्का ने  सभी गीतों पर अच्छा तालमेल बिठाकर  श्रोताओं की ताली बटोरने में  कामयाब  रही वही संचिता भट्टाचार्य की कोमल आवाज़ ने लोगों के कानों में मिश्री घोल दी बताते चले कि इसके पूर्व भी उन्होंने कुमार शानु के साथ भी गीत साझा किया है यकिनन ऐसे साधक कलाकर जब मंच में हो तो वह कार्यक्रम सफल होने की ग्यारंटी मानी जाती है यही नही सभी अन्य कलाकर प्रवीण यदु, बसंत दीप सहित अन्य कलाकार ने भी अपनी प्रस्तुति से सब का मन मोह लिया यहाँ तक नवोदित युवा कलाकार भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया कार्यक्रम के अंत मे उपस्थित बहुत से सम्मानित डायरेक्टर समाज सेवी, पार्षद गण का सम्मान किया गया जिनमे,मुख्यतः लक्ष्मी नारायण लाहोटी, गाता रहे मेरा दिल म्युजिकल् ग्रुप के डायरेक्टर वरिष्ठ पत्रकार नवाब कादिर पार्षद तिलक पटेल,श्री दुबे जी, पार्षद गोवर्धन शर्मा, रविंद्र दत्ता सहित अनेक विशिष्ट जन का शाल दे कर सम्मान किया गया इस विशेष गीत संगीत कार्यक्रम को सफल बनाने पर सभी श्रोता गण एवं विशिष्ट जन का फ्रैंड्स म्युजिकल ग्रुप के डायरेक्टर विजय निहाल ने हृदय से आभार व्यक्त किया कार्य क्रम का संचालन लक्ष्य टारगेट ने अपने विशेष अंदाज मे किया

शनिवार, 29 नवंबर 2025

ग्राम केशला को विकास की मुख्य धारा मे जोड़ना मुख्य लक्ष्य - उप सरपंच लोमश देवांगन

  ग्राम केशला को विकास की मुख्य धारा मे जोड़ना मुख्य लक्ष्य - उप  सरपंच लोमश देवांगन 


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) देश की सवा सौ करोड़ से उपर की जनसंख्या है जो देश के प्रति अपनी सच्ची सेवा, श्रद्धा ,एवं जन सेवा का भाव रखते हुए सामाजिक कल्याण एवं उत्थान मे अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर एक नया इतिहास रचने का साहस रखते है उनमे से आधुनिक नव युग के युवा कर्मठ, जुझारू, संवेदन शील, कर्तव्य निष्ठा अथक कर्म योगी जैसे व्यक्तित्व भी है जो बिना व्यवस्था, संसाधन से इतर सामाजिक, जन कल्याणकारी  सरोकार के  मध्यम से ग्रामीण क्षेत्र से ही अपनी पृथक पहचान निर्मित कर रहे है उनमे से ही एक नाम लोमश कुमार देवांगन का भी है जो खरोरा स्थित केसला ग्राम पंचायत के वर्तमान कार्यकाल में उप सरपंच पद के रूप में पदस्थ है मात्र 34 वर्ष की  आयु मे उप सरपंच जैसे ग्रामीण क्षेत्र की राजनीति के रूप में सक्रिय होने के पीछे का कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि इसके पूर्व ग्रामीण चुनाव में भी वे सरपंच उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुके है परंतु कहते है न कि हार के बाद जो जीत मिलती है उसका एक अलग आनंद, प्राप्त होता है जिसका उदाहरण उप सरपंच के रूप में खरोरा स्थित केसला ग्राम मे रूप में सामने आया उन्होंने आगे बताया वैसे भी पिता श्री महेश कुमार देवांगन को प्रारंभ से ही जन सेवा के कार्य करते आम जन के सुख दुख में लोगों का सहयोग करना वे बाल्यकाल से देखते आ रहे है जिसका मेरे बाल मन में एक अमिट छबि  बनी हुई थी वही से मन जन सेवा का भाव ने जन्म लिया और मैंने राजनीति को अपना कर्म क्षेत्र बनाया उसका परिणाम यह निकला कि आज मै ग्राम केसला का उप सरपंच पद पर जन सेवा में लगा हुआ हूँ 




 उनसे आगे  सवाल पूछने पर कि - जन सेवा तो आप अन्य क्षेत्र में भी जाकर कर सकते थे परंतु  राजनीति ही क्यों चुना ? पूछे जाने वर वे कहते है -समाज मे जन सेवा पुलिस, आर्मी, पत्रकार, एवं अन्य क्षेत्र में सभी जन सेवा किया जा सकता  है फिर भी किसी न किसी तरह उपर बैठे, वरिष्ठ अधिकारी के दबाव में मुक्त रूप से कार्य अवरोधित होता है परिणामतः सेवा का दायित्व वहां नगण्य हो जाता है वही राजनीति में स्वच्छंद हो कर सेवाभाव किया जा सकता है जिसमे किसी का रोक टोक नही होता चाहे आप किसी पद में रहे या न रहे  केसला उप सरपंच लोमश कुमार देवांगन आगे बताते है कि बचपन में हरिशंकर परसाई जी की एक कविता ने उन्हे बहुत ज्यादा प्रभावित किया रचना में कवि बताते है कि... समाज की गंदगी साफ करने के लिए कीचड़, रूपी दलदल में पहले उतरना पढ़ता है तभी वह गंदगी साफ किया जा सकता है... सो मैंने भी चहुँ ओर  मे व्याप्त गंदगी को साफ करने  दलदली रूपी समाज मे उतर गया हूँ अब चाहे इसका जो भी परिणाम सामने आए आम जन के व्यथा और समस्या का निराकरण करना मूल उद्देश्य बन चुका है खरोरा स्थित ग्राम केसला के उप सरपंच लोमश कुमार देवांगन आगे बताते है कि राजनीति ही नही किसी भी कार्य क्षेत्र में रहकर स्वच्छ विचार धारा से जन समाज कल्याण किया जा सकता है यही वजह है कि वे राजनीति के अलावा बीजेपी पार्टी एवं आर. एस.एस.संगठन से जुड़ाव है जिसमें  शैक्षणिक,शरीरिक, एवं बौद्धिक, मूल मंत्र के साथ देश के विकास में अपना अमूल्य योगदान देकर हमारे पूर्वजो के सोपानों को विश्व गुरु बनाने मुख्य धारा से जुड़ कर दृढ़ संकल्पित हूँ वे अपने मार्ग दर्शक एवं प्रेरणा स्त्रोत भारत देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र दास मोदी जी एवं स्व. अटल बिहारी बाजपेयी जी से बहुत अधिक प्रभावित हूँ तथा उन्हे अपना आदर्श, एवं मार्ग दर्धक मानते है उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं शैली ने उनके मर्म मस्तिष्क पर एकअमिट छबि बनी हुई है लोमश देवांगन आगे बताते है मेरे उप सरपंच के अल्प कार्यकाल  मे बहुत सी जन हित कल्याण कारी योजनाओ का क्रियान्व्यन किया जाना प्रस्तावित है  जिसमें मुख्यतः ऑन लाइन बच्चो को आधुनिक शिक्षा जिसमे कोरोना काल में संचालित किया गया था वैसे ही, स्कूल, में कॉम्प्युटर से शिक्षा का स्तर बढ़ाना है आम जन को सुलभ सड़क, बिजली की पूर्ण व्यवस्था,मुख्य चौक मुहल्लों, में कैमरा लगवाना, सोलर पैनल लाइट से क्षेत्र को जगमगाना, पेयजल की सुचारु व्यवस्था, शासन की समस्त प्रमुख योजनाओ में जिसमे आवास विहीन व्यक्ति को प्रधान मंत्री आवास योजना की पात्रता दिलाना प्रमुख है जिनमे बहुत से पात्र व्यक्ति आज उक्त योजना का लाभ उठा भी रहे है इसके लिए केसला ग्राम के सरपंच माया वन्शे का भरपूर सहयोग मिलता है कार्यों की पारदर्षिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक तीन माह मे ग्राम सभा की बैठक बुला कर शासकीय योजनाओं सहित समस्त मद की राशि का विस्तृत ब्यौरा दिया जाता है उन्होंने आगे बताया कि निराश्रित सहित  कच्चे मकान वाले पात्र व्यक्तियों सहित अन्य समस्त योजनाओं का लाभ स्थानीय ग्रामीणों को दिया जा रहा है स्थानीय ग्रामीणों को रोजगारोन्मुखी कार्यों के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि आपको आश्चर्य होगा कि मेरे क्षेत्र के सभी महिला पुरुष आत्मनिर्भर है पत्येक घर में  बीस वर्षों से संपूर्ण भारत देश में पहने जाने वाले महिला परिधान (पेटीकोट) का सिलाई कर एक इतिहास रचा दिया है  शासन की लखपति दीदी योजना के नाम को यही के स्थानीय लोग सार्थक किये हुए है केसला उपसरपंच लोमश देवांगन आगे बताते है कि संपूर्ण देश में यहाँ कि सिलाई की हुई पेटीकोट बिक्री हेतु जाती है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ है प्रत्येक घर में किए जाने वाले कार्यों को देखते हुए अनेक संस्थानों ने उन्हे स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया यही नही आत्मनिर्भर बनने एवं शासन की महत्वाकांक्षी योजना लखपति दीदी की उक्त योजना की गाथा का उल्लेख देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने भाषण मे किया है जिसकी वजह से खरोरा स्थित ग्राम केसला का नाम गर्व से लिया जाता है प्रस्तावित योजना मे ग्राम केसला उप सरपंच लोमश देवांगन का कथन है कि हमारे ग्राम के भाई बहनों के लिए शीघ्र ही महतारी सदन का निर्माण किया जाने की योजना है जो प्रस्तावित है जहाँ दीदी बहनी एवं सामाजिक बैठक सहित अन्य सांस्कृतिक, धार्मिक,कार्यक्रम का आयोजन किया जा सके सुशिक्षित, व्यवहारिक, उप सरपंच लोमश देवांगन की केसला ग्राम क्षेत्र में कम उम्र में ही अपनी विशिष्ट पहचान निर्मित कर चुके है प्रति दिन एक निर्धारित समय में ग्रामीणों की समस्याओं का शांत चित मन से निराकरण करते है कहा जाता है कि...पूत के पांव पालनें में दिखाई दे जाते है....इसका  उदाहरण युवा उप सरपंच लोमश देवांगन पर सटीक बैठता है उनकी लगातार जनसेवा, एवं समर्पित सेवा भाव   देखकर अनेक ग्रामीण एवं समर्थक राजनीति क्षेत्र का ध्रुव तारा का उपमा दे रहे है तथा उनके  उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे है 

सोमवार, 27 अक्टूबर 2025

भारत माला की हरियाली कोमा खान में बिखरी

 भारत माला की हरियाली कोमा खान में बिखरी

अलताफ़ हुसैन 

रायपुर, (छत्तीसगढ़ वनोदय) महासमुंद वन मंडल मुख्यालय से  लगभग 32 किलोमीटर दूर स्थित बागबाहरा परिक्षेत्र से महज पन्द्रह किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोमाखान परिवृत क्षेत्र में वैसे तो गगन चुंबी पर्वत माला के मध्य छोटी,बड़ी कल-कल  करते नदी,नाले, के प्रवाहित होती जल धाराएं  वर्षों से हरियाली युक्त सघन वन क्षेत्र मे दूरस्थ प्रकृतिक वातावारण  की एकअलग छटा बिखेर रही है जो अनायास आम लोगों का चित आकर्षित करती है जिसकी वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग समुचित देखरेखा व्यवस्था तथा बिगड़े वनों के सुधार हेतु समय समय पर पुनरुत्पादन कर प्राकृतिक वनों का स्वरूप यथावत स्थापित करने कटिबद्धता प्रदर्शित करती है इसी श्रृखला में कोमाखान परिवृत से मात्र चार किलोमीटर के फासले पर  दरबेकेरा वन ग्राम के समीप स्थित कक्ष क्रमंक 469 के रिक्त पड़त भाटा वन भूमि  जिसका क्षेत्रफल 14. 270 हेक्टेयर है जिसमें कुल रोपण क्षेत्रफल 5.534.हेक्टेयर में वर्ष, 2025 जुलाई को 5534 नग भिन्न भिन्न प्रजाति के फलदार, फूलदार, सायादार, औषधि गुण वाले पौधों का सफल रोपण किया गया जो मात्र चार माह की अल्प अवधि में  जबरदस्त ग्रोथ कर रहा  है प्लांटेशन के संदर्भ में बागबाहरा के कर्मयोगी, समर्पित,निष्ठावान,

लगनशील, कर्तव्यपरायण, व्यक्तित्व के धनी परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि यहॉं ग्राम दरबेकेरा में किए गए मिश्रित प्रजाति के प्लांटेशन ओरेंज भूमि में कराया गया है यह वन भूमि क्षेत्र है रिक्त पड़त नारंगी भूमि होनें की वजह से अतिक्रमणकरियों की इस क्षेत्र पर बहुत दिनों से नज़र गड़ी हुई थी गत वर्ष कार्य योजना बना कर प्लांटेशन् हेतु विभाग को दिया गया परिणामतः राज्य कैंपा मद से क्षति पूर्ति सिंचित  मिश्रित वृक्षारोपण कार्य संपादित कराया गया जिसके लिए कठोर बंजर भूमि में  वर्षा ऋतु के पूर्व गड्ढे इत्यादि कार्य करवाए गए  उक्त कार्य हेतु आस पास  ग्राम क्षेत्र से श्रमिकों को मंगवाया गया इसकी एक वजह यह भी थी कि दरबेकेरा वन ग्राम की जनसंख्या बहुत कम थी जिसकी वजह से दस बीस किलोमीटर दूर स्थित श्रमिकों को बुलवाया गया इसके अलावा दरबेकेरा में पखडंडी  रूपी सड़क मार्ग उपर से वर्ष ऋतु एवं जलभराव की स्थिति में आवागमन दुर्लभ होना ही था साथ में अन्य रोपण एवं निर्माण सामाग्री लाने ले जाने अत्यंत जर्जर पखडंडी मार्ग में चलना दुरूह अवस्था में  पहुँच जाता था फिर भी परिस्थिकीय अनुसार प्लांटेशन कराना अत्यंत आवश्यक था जिसे प्रकृति आपदा सहित व्यवस्था से लड़ते हुए कार्य संपादित कराया गया  इसके बावजुद हमारे वन सहकर्मियों ने रात दिन एक कर  औरेंज भूमि में कार्य को संपादित किया बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी श्री लोकनाथ ध्रुव आगे बताते है कि प्लांटेशन् कार्य भारत माला सड़क परियोजना के निर्माण अंतर्गत क्षतिपूर्ति प्लांटेशन के रूप में तत्कालीन महासमुंद के डी.एफ.ओ.पंकज राजपूत एवं  वर्तमान महासमुंद वन मंडलाधिकारी  मयंक पांडे के मार्ग दर्शन एवं नेतृत्व में संपादित कराया गया गौर तलब है महासमुंद वन मंडलाधिकारी आई.एफ. एस.श्री मयंक पांडे एक प्रशासनिक अनुभवी, एवं गंभीर अधिकारी के रूप में पहचाने जाते है वे मैदानी कार्यों से किसी प्रकार का समझौता नही करते यही वजह है कि उन्होंने धमतरी वन मंडल सहित अनेक वन मंडल कार्यालयों में अपनी सफल सेवाएं देकर एक पृथक पह्चान निर्मित की है 


जिसकी वजह से आज भी अधिकारी कर्मचारी उन्हे सम्मान के साथ याद करते है उनके यहाँ आने से महासमुंद वन मंडल क्षेत्रों में एक अलग उत्साह देखा जा रहा है स्थानीय अधिकारी कर्मचरियों में नवीन परियोजनाओं पर उल्लेखनीय कार्य किये जाएंगे ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है वही कार्यों की संपूर्ण व्यवस्था एवं मॉनिटरिंग वर्तमान उप वन मंडलाधिकारी गोविंद सिंह साहेब बेहतर जानते है क्योंकि अपने पूर्व सेवा काल में रेंजर सहित अन्य पदों में कार्य करते हुए उन्हे बलौदा बाजार वन मंडल अंतर्गत कसडोल के सोनाखान परिक्षेत्र का  अच्छा लंबा अनुभव  प्राप्त है उनके द्वारा पलांटेशन सहित फेंसिंग, एवं अनेक वन क्षेत्रों में संपन्न कराए गए निर्माण कार्यों की पूर्ण जानकारी है यही वजह है कि महासमुंद वन मण्डल कार्यालय में आते ही संपूर्ण कार्यों का अवलोकन कर वे दिशा निर्देश देते रहते है जिससे कोमाखान दरबेकेरा के कक्ष क्रमांक 469 का कथित प्लांटेशन  बड़ी तेजी से ग्रोथ कर रहा है जिसकी ऊँचाई लगभग चार से दस फीट पहूच गई है  परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव की जीवट कार्य शैली की बात की जाएं तो वे कार्यों के प्रति काफी संवेदनशील रहे है वे कार्यों के प्रति समर्पित सेवा भाव से सौंपे गए विभागीय दायित्वों का जब तक निर्वहन नही कर लेते  तब तक उन्हे संतुष्टि नही मिलती उनके संदर्भ में यह भी बताया जाता है कि कार्य अवधि समाप्त होने के बावजूद वे अपने सहयोगी (स्टाफ) वन कर्मियों के साथ बैठ कर समस्त कार्यों का निष्पादन  पूर्ण करा कर ही दम लेते है इसके लिए भले रात्रि दस बजे या बारह क्यों न बज जाए उनकी कार्य करने की क्षमता, जुझारूपान उनके विभागीय कार्य शैली को अलहदा बनाता है 


दरबेकेरा पलांटेशन का पुरा श्रेय वे अपने सहयोगी वन कर्मी कोमाखान  डिप्टी रेंजर दुलार सिन्हा जी एवं फॉरेस्ट बीट गार्ड खेमराज साहू एवं समस्त वन सहकर्मी सहयोगीयों को  देते है उनका कथन है कि मै तो केवल जाकर मॉनिटरिंग कर रहा था परंतु सही मायनों में ये जमीनी योद्धा है जो रात दिन एक कर श्रमिकों से कार्य संपादित करवाते है जमीन व्यवस्था से लेकर पौधा रोपण, तक कार्य धूप, गर्मी, वर्षा मे संपन्न कराते है इस संदर्भ में जब कोमखान स्थित डिप्टी साहेब दुलार सिन्हा जी से चर्चा की गई तो उन्होंने प्लांटेशन क्षेत्र में ले जाकर अवलोकन कराया जहाँ आज की तिथि में पौधे लगातार ग्रोथ कर रहे है उन्होंने बताया कि  वन्य प्राणियों एवं पालतू मवेशी चराई रोकने के लिए प्लांटेशन को चारो ओर से मजबूत मोटे तारों से घेरा बंदी एवं मुख्य लोहे का मजबूत गेट लगाया गया है ताकि प्लांटेशन  शत प्रतिशत सुरक्षित, एवं ग्रोथ करता रहे  सिंचित प्लांटेशन के संदर्भ में डिप्टी कोमाखान दुलार सिंह सिन्हा बताते है कि इसके लिए पाइप इत्यादि बिछाए गए है क्योंकि वर्तमान में  वर्षा ऋतु चल रहा है उसके पश्चात,शीत ऋतु में भी सिंचाई की आवश्यकता लगभग होती है फरवरी मार्च आगामी सत्र से ही सिंचाई प्रारंभ होगा इसके लिए बहुत से चयनित स्थान पर बोर खनन कराए गए है जिनमें पंप, वाल्व, पाइप इत्यादि से स्प्रिंकलर से  सिंचाई का उपयोग किया जाएगा यह विधि अमुमन आवासीय, औद्योगिक और कृषि कार्यों के लिए किया  जाता है जो प्लांटेशन क्षेत्र के लिए बहुत लाभकारी एवं कारगर साबित होगा डिप्टी दुलार सिन्हा आगे बताते है कि दरबेकेरा के 14270 वन भूमि क्षेत्र में लगभग साढ़े पांच हजार मिश्रित प्रजाति के पौधों का रोपण किया गया है जिनमे मुख्यतः सागौन दो हजार पौधे, नीम एक हजार, बेल, सात सौ, आँवला पंद्रह सौ, महुआ सात सौ, जामुन दो सौ, शिशु एक सौ चौबीस, करंज एक सौ पचास नग शामिल किए गए है जो चार माह में तेजी से बढ़त बनाए हुए है फलदार फूल दार औषधि युक्त पौधों की प्रचुरता के संदर्भ में पूछे जाने पर कोमाखान  फॉरेस्ट के युवा साहसी बीट गार्ड खेमराज साहू बताते है कि क्षेत्र में भालू की मात्रा लगभग पंद्रह से आधिक होने के कारण वे खाद्य वस्तुएँ प्राप्ति हेतु यत्र तत्र भटकते है फलदार, फुलदार,पौधों के रोपण से उन्हे भविष्य में खाद्य वस्तुएँ फल फूल बड़ी सहजता से प्राप्त होगा

वही जोंक नदी की सहायक कांदाजड़ी नाला के वन क्षेत्र से प्रवाहित होते पानी भी उन्हे बड़ी सुलभता से प्राप्त होगा जिसकी वजह से वे ग्रामीण क्षेत्र की ओर पलायन भी नही करेंगे उन्होंने आगे बताया कि दरबेकेरा वन ग्राम प्रबन्ध समिति द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जाती है वही प्लांटेशन क्षेत्र में चौकीदार नियुक्त किया गया है ताकि सुरक्षा बनी रहे बीट गार्ड खेमराज साहू ने बताया 


कि प्लांटेशन क्षेत्र में प्रारंभिक् स्तर पर गाला थाला निर्माण कर डी. ए. पी. दवा खाद,यूरिया, से उपचार किया जा चुका है वहीं केज्युवल्टी निंदाई गुड़ाई भी किया गया है अब वहाँ प्लांटेशनन क्षेत्र में प्रतिदिन सुरक्षा देखरेख की जा रही है उल्लेखनीय है कि यह प्लांटेशन कार्य भारत माला सड़क निर्माण परियोजना के तहत मार्ग मे अवरोधित  क्षतिग्रस्त पेड़ पौधों की क्षति पूर्ति के रूप में कैंपा मद से वर्ष 2024-2025- से लेकर वर्ष 2033-2034 तक आठ से दस वर्षों के लिए समान्य वन मंडल महासमुंद  अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र के कोमाखान परिवृत क्षेत्र मे प्लांटेशन का रोपण किया गया है जो राष्ट्रीय राज मार्ग भारत माला सड़क उन्नयन योजना के साथ वन विभाग से अनुबंध कर कैंपा मद से क्षति पूर्ति राशि प्रदान कर रिक्त वन भूमि में रोपण कार्य संपादित कर  वनों के स्वरूप को सुधार किया जा रहा है जो आने वाले आठ दस वर्षों पश्चात कोमाखान का उक्त क्षेत्र हरियाली के मामले मे एक  अलग ही छटा बिखेरेगी  जिससे वन का रकबा भी बढ़ेगा. 

सोमवार, 13 अक्टूबर 2025

किशोर द के सुपर हिट प्रेम विरह, तकरार, रुमानी, गीतों को सुन कर श्रोता भी कह उठे...गाता रहे मेरा दिल

 किशोर द के सुपर हिट प्रेम विरह, तकरार, रुमानी, गीतों को सुन कर श्रोता भी कह उठे...गाता रहे मेरा दिल



  अलताफ़ हुसैन 

  समीक्षक/ विश्लेषण

एक रास्ता है जिंदगी,,,सांसों मे गर्मी है ,,कल की हंसी मुलाकात के लिए,,,,, और खातून की खिदमत मे सलाम अपुन का... अरे दिवानों मुझे पहचानो,,,,मै हूँ डॉन ,,,जैसे सदाबहार गीतों के गुल दस्तों के साथ रविवार 12 अक्टुबर की शाम छ बजे से मायाराम सुरजन हॉल गुलज़ार हुआ जिसमे किशोर कुमार की पुण्य तिथि पर विशेष रूप से ...गाता रहे मेरा दिल...म्युजिकल् ग्रुप ने उनके द्वारा गाए सदा बहार नग़्मों की प्रस्तुति देकर उन्हे श्रद्धा सुमन अर्पित किया रायपुर सहित बाहर से पधारे स्थानीय कलाकारों ने अपनी बेहतरीन  आवाज़ और अंदाज़ के साथ एक शनदार प्रस्तुति दिया  जिसमे एक से बढ़कर एक आवाज़ के जादूगरो ने ऐसा गीतो का समां बांधा की खचाखच भरे हॉल किशोर मय हो गया तथा प्रत्येक  गीतो पर श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट की आवाज़ से गायक कलाकर दुगने उत्साह के साथ अपने परफॉरमेंस देते गए पचास गीतों के इस फेहरिस्त से लबरेज़ गुलदस्ते में श्रोता  अपनी सीट से टस से मस नही हुए मुंबई से पधारे राजेश पटेल यहाँ आकर माहौल को ऐसा खुशनुमा निर्मित कर दिया कि उनके प्रत्येक गीत पर श्रोताओं ने दिल खोल कर स्वागत किया इसके बाद लगातार...आँखों मे काजल है,,, लावरिस का गीत,,अपनी तो जैसे तैसे जनाबे आली,,,,अब चाहे मां रूठे या बाबा मैंने,,,,, तुमसे बड़ कर दुनिया में,,,,जैसे गीतों का यह कारवां धीरे धीरे बढ़ता चला गया इस दरमियान लगभग बारह गीतों की विशेष प्रस्तुति गाता रहे मेरा दिल के डायरेक्टर नवाब कादिर ने प्रत्येक प्रस्तुत  गीतो में ऐसा ऊर्जा का संचार भर दिया कि सभी प्रस्तोता गायक दोगुना उत्साह से अपनी प्रस्तुति देने लगे...गाता रहे मेरा दिल के डायरेक्टर नवाब कादिर का गीतों का चयन इतना लाजवाब होता है कि वे लीक से हट कर कुछ नया परफॉर्मेंस देनें का प्रयास करते है यही नही डेढ़ से दो माह तक सभी गायकों से भरपूर अभ्यास करवाते है एवं स्वयं गीतों का रिहर्सल भी करते है तभी तो अपने गीतों में जीवन जीने की अद्भुत विशेषता झलकती है ठंडे या सुस्त वातावरण प्रोग्राम में अपनी अद्भुत गायन शैली एवं अंदाज़ से प्रस्तुति दे कर धूमधाम, ताबड़तोड़, खुशनुमा माहौल निर्मित कर देते है उनके इसी गीत संगीत प्रेम की वजह से उनके स्वस्थ मन और काया को ऊर्जावित करती है उन्हे ही नही बल्कि श्रोता गण  भी तीन से चार घंटे के लिए दुनिया के समस्त झंझावत से किनारा करके गीत संगीत में ऐसे तल्लीन हो जाते है जैसे दुनिया मे अन्य कार्य की कोई आवश्यकता ही नही रह गई हो इसलिए सब की संतुष्ट देनें के पुण्य कार्यो के लिए वे पूरी गीत संगीत के तप की साधना कर अपने प्रतिभागी चयनित गायक और गीत की प्रस्तुति मंच पर दिलवाते है यही वजह है कि....गाता रहे मेरा दिल... कार्यक्रम का श्रोता बड़ी बेसब्री से इंतज़ार करते  है इस बार के कार्यक्रम में उन्होंने सहयोगी गायकों से प्रेम, विरह, तकरार, रूमान, फास्ट सॉन्ग सहित सोलो गीतों को क्रमशः प्रस्तुत करवाया लगभग चार  घंटे अवधि  वाले कार्यक्रम में कोई भी ऐसा श्रोता नही था जिसने उठ कर घर जाने का विचार किया हो वे  सीट में जड़वत हो कर सभी गीत को मंत्र मुग्ध हो कर आनंद उठाते रहे वहीं...गाता रहे मेरा दिल...के संरक्षक तिलक पटेल की आवाज़ और सुर में बहुत अधिक सुधार आ चुका है  या ये कह लें कि प्रस्तुत गीतों के पीछे उन्होंने कसरत से मेहनत किया और प्रत्येक शब्दों को रटने का भरपूर प्रयास किया फिर भी उर्दू शब्द में उनकी कुछ कमी नज़र आती है  वरिष्ठ गायिकाओं में अनुभा जी एवं पूजा मैडम को बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए उन्हे स्मृति चिन्ह दे कर सम्मानित किया गया वही निलिमा मैडम एवं उर्मिला मैडम ने अपनी सुमधुर  सुरीले गीतों से ऐसा ताल मेल बिठाया जिसे सुनकर श्रोता झूमने लग गए  गायको में विश्वजीत जी एवं विनोद देवांगन की आवाज़ में संजीदगी के साथ ऐसा अल्हड़ पन था कि हर गीत पर श्रोता वाह वाह कह उठे   शहज़ाद खान ने सोलो एवं फास्ट गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को झूमने विवश कर दिया वही विशन पटेल अख्तर शरीफ ने अपनी आवाज से न्याय किया और वे पूरी मेहनत कर श्रोताओं की  अपेक्षा में खरे उतरने मे कामयाब रहे 

     गाता रहे मेरा दिल म्युजिकल् ग्रुप की इस  किशोर द की पुण्य तिथि पर विशेष पेशकश का आयोजन किया जाना वाकई में बेहद सुखद एवं अविस्मरणीय पल रहा जो  कार्यक्रम के सफल होने की ओर इंगित करता है  इसकी खास वजह यह भी है कि एक ही ढर्रे पर केंद्रित गीतों की प्रस्तुति श्रोताओं में उबाऊपन ला देता है इस वजह से चयन कर्ताओं ने उन गीतों का ही चयन किया जो श्रोताओं की अपेक्षा में नयापन ला सके जबकि अमूमन देखा यही जाता है कि गीत संगीत के कार्यक्रम में उन्ही गीतों को समाहित किया जाता है जो लोगो की जुबान में रचे बसे हो जिसकी वजह से सुर ताल आवाज़ की निरसता श्रोताओं को बोझिल बना देती है तथा श्रोता भी औपचारिकता निभा कर कार्यक्रम की इति श्री मान लेते है परंतु...गाता रहे मेरा दिल...के डायरेक्टर नवाब कादिर गीत संगीत के मामले में कोई समझौता नही करते वे प्रस्तुत गीतों की जम कर कलाकारों से रियाज़ तो करवाते ही है उसके साथ ही संगीत ट्रैक पर भी पैनी नज़र रखते है यही कारण इस दफा स्पेशल ट्रैक बनवाये ताकि श्रोता और गायक दोनों सुन कर झूम जाए और इस प्रयोग पर वे कहीं हद तक सफल भी हुए इसका उदाहरण यह है कि जितने भी श्रोताओं ने उक्त कार्यक्रम को सुना देख उसकी भूरि भूरि प्रशंसा किये बगैर नही थक रहे है .जो उनकी सफलता का माप दंड माना जा सकता है जिसके लिए वे इस का श्रेय अपने म्युजिकल् ग्रुप....गाता रहे मेरा दिल...की पूरी टीम को देते है.सबसे बड़ी बात यह है कि पचास गानों कि लंबी फेहरिस्त को अंजाम तक पहुँचने मे मंच के खेवैया, सेतु साहू का विशेष योगदान रहा जिन्होंने एक या दो सारगर्भित् शेरों शायरी बोलकर सीधे गायकों को मंच पर आमंत्रित करते गए जो समय से आधे घंटे पूर्व तक कार्यक्रम समापन की ओर पहुँच गया था.. 

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

बिहार चुनाव सब के लिए चुनौती बड़ी

 

              बिहार चुनाव  सब के लिए चुनौती बड़ी



अर्जुन तिवारी

 रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) बिहार चुनाव में इस बार सीट शेयरिंग में सभी मुख्य राजनीतिक पार्टियों का पसीना छूटने लगा है एक ओर भाजपा इस बार भी नीतीश कुमार के चेहरे को सामने रख कर चुनाव पिच में कूदने की घोषणा कर चुके है वही दूसरी ओर संगठन में शामिल चिराग पासवान को मनाने में खूब पसीना बहाने मजबूर दिखाई दे रहा है चिराग पासवान की पहले 4 से 5 सीट देकर लाली पाप थमाने वाले भाजपा को इस समय अपने पार्टी को अधिक से अधिक टिकट मांग रखकर सबको चौका दिया है पिछले चुनाव में पासवान की पार्टी जितने भी सीट मिले थे उसमें सभी सीटों में जीत कर आया था उसी के चलते पासवान अधिक सीट की मांग कर रहे है ताकि पार्टी में बिहार के लिए सर्वाधिक दबाव बना सके वहीं दूसरी ओर कल की टी वी डीवीडी में बीजेपी प्रवक्ता नीतीश कुमार ही संगठन में अगले मुख्य मंत्री होने की बात करके सबको चौका दिया है जबकि केंद्रीय स्तर पर ऐसा सर्वाधिक घोषणा अभी नहीं किया गया है वही हाल कांग्रेस पार्टी की है लालू के लाल तेजस्वी यादव न अपने आपको बिहार के अगले मुख्य मंत्री खुद को घोषणा करके कांग्रेस पार्टी को बेकपुट में लाकर खड़ा कर दिया है जब की कांग्रेस पार्टी जीत के आधार पर मुख्य मंत्री बनाए जाने की बात करते आ रहे है मजेदार बात ये भी है कि इस बार के बिहार चुनाव में लालू पुत्र अलग अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके है तेजप्रताप के द्वारा अलग पार्टी बना लेने के बाद तेजस्वी यादव को पसीना पहने में कोई कसर नहीं छोड़ा है अब देखना ये है कि इस बार की बिहार चुनाव में किसका पताका फहराता है और कौन मुख्य मंत्री के आसान में बिराजमान होते है भाजपा इस बार महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए दस दस हजार अपनी रोजगार शुरू करने के लिए रकम देकर चाणक्य नीति खेल जरूर खेल है पर विजय श्री मिल जाए ये कहना परिस्थिति को देखते  हुए कठिन ही लगता है वही बिहार चुनाव घोषणा होते ही राहुल गांधी का बाहर रहना किसी के गले नहीं उतर रहा है

रविवार, 5 अक्टूबर 2025

स्व. श्री मांगे राम शर्मा की पुण्यतिथि पर "निशुल्क परामर्श एवं चिकित्सा शिविर" का आयोजन



स्व. श्री मांगे राम शर्मा की पुण्यतिथि पर "निशुल्क परामर्श एवं चिकित्सा शिविर" का आयोजन  



रायपुर, आज रविवार दिनांक 5 अक्टूबर, 2025 को प्रांतीय कार्यालय, प्रोफेसर कालोनी, रायपुर में वर्ल्ड ब्राह्मण फ़ेडरेशन एवं सर्व युवा ब्राह्मण परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द ओझा और महिला अध्यक्ष नमिता शर्मा की अध्यक्षता में प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गयी जिसमें सर्वसम्मति से वर्ल्ड ब्राह्मण फ़ेडरेशन के संस्थापक एवं पूर्व चेयरमैन स्व. श्री मांगे राम शर्मा जी की पुण्यतिथि पर "निशुल्क परामर्श एवं चिकित्सा शिविर" का आयोजन 6 अक्टूबर, 2025 को एस.के. केयर हास्पिटल, पचपेड़ी नाका, रायपुर में  प्रातः 9 से 3 बजे तक एवं 12 अक्टूबर, 2025 को छत्रपति शिवाजी उ.मा. विद्यालय, प्रोफेसर कालोनी, रायपुर में प्रातः 9 से 12 बजे तक "निशुल्क परामर्श एवं चिकित्सा शिविर" आयोजित करने का निर्णय किया गया. इस शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परामर्श एवं ब्लडप्रेशर, शुगर, हिमोग्लोबिन, फैटी लिवर आदि की जांच निशुल्क की जाएगी. चिकित्सा जांच एस.के. केयर हास्पिटल के सहयोग से संपन्न की जाएगी.

इस बैठक में प्रमुख रूप प्रदेश महासचिव डाॅ सुनील ओझा, प्रदेश सलाहकार द्वय रज्जन अग्निहोत्री, त्रिभुवन तिवारी, संभागीय अध्यक्ष नितिन झा, महिला महासचिव सुमन मिश्रा, उपाध्यक्ष बबीता मिश्रा, प्रदेश सचिव द्वय वीणा मिश्रा, रामब्रत तिवारी, सांस्कृतिक प्रभारी प्रीति मिश्रा, मीडिया प्रभारी सुमन पाण्डेय, संभीगीय सह सचिव उमेश शर्मा आदि पदाधिकारी उपस्थित थे. बैठक का संचालन नमिता शर्मा एवं धन्यवाद ज्ञापन रज्जन अग्निहोत्री ने किया.


गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

जंगल का शेर सफारी में बीमार और भी वन्य प्राणियों की हो चुकी मौत

 जंगल का शेर सफारी में बीमार और भी वन्य प्राणियों की हो चुकी मौत


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छ्ग प्रदेश के नवा रायपुर मे मानव निर्मित जंगल सफारी वैसे तो पूरे भारत देश, सहित विदेश में  काफी लोकप्रिय हो चुका है लगातार विलुप्त होते वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं संवर्धन कार्य हेतु छ्ग वन विभाग रात दिन जुटा रहता है इश्वरी संरचना की बे मिसाल सजीव तस्वीर से रूबरू होने इनके दर्शन मात्र हेतु जन मानस विशेष रूप से यहाँ पहुँचते है तथा भिन्न भिन्न जीव जंतु वन्य प्राणियों की छ सौ प्रजाति से साक्षात्कर होकर ईश्वरी संरचना की भूरि भूरि प्रशंसा व्यक्त करते है परंतु जब से वन्य प्राणियों का  संपर्क मानव से लगातार होने लगा तब से इनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने लग गया है  वन क्षेत्रों मे मुक्त एवं स्वच्छ वातावरण में रहने वाले वन्य प्राणियों की स्थिति बड़ी दयनीय अवस्था में पहुँचते जा रही है इनके दाना पानी जो नैसर्गिक हुआ करती थी अब वह रसायनिक,हाई ब्रिड के रुप में परिवर्तित हो चुका है प्राकृतिक रूप से मिलने वाले फल,फूल बीज, माँस सब वहीं से प्राप्त हो जाता था परंतु  जंगल सफारी एवं अन्य मानव निर्मित क्षेत्र में वन कर्मचारी उनके स्वस्थ्य की चिंता करते हुए एंटीबायटिक दवाओं एवं अन्य वस्तुओं का मिश्रण कर उन्हे धीमा जहर दे रहे है जिसकी वजह से अनेक वन्य प्राणी असमय काल के गाल में समा चुके है इसका जीता जागता उदाहरण नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी में देखने मिल रहा है जहां  बंगाल टाईगर विगम कुछ दिनों से गंभीर रूप से अस्वस्थ है तथा उसकी इह लीला कभी भी समाप्त हो सकती है ऐसा बताया जाता हौ



      जंगल सफारी जू के अति विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि बंगाल टायगर जो सफारी का प्रमुख आकर्षण का केंद्र बिंदु है विगत कुछ दिनों से बुरी तरह से अस्वस्थ चल रहा है प्रत्यक्षदर्शीयों का कथन है कि उसने कुछ दिनों से खाना पीना सब छोड़ चुका है उसे ग्लुकोज  ड्रीप्  लगा कर  उसे क्वारनटाईन मे रख कर उसे बचाने की जद्दोजहद की जा रही है तथा वह अचेतन, मरणासन्न स्थिति में पड़ा हुआ है लगातार डॉक्टर उसका इलाज कर रहे है परंतु  स्थानीय कर्मियों का कथन है कि वह कभी भी दम तोड़ सकता है जबकि यह भी ज्ञात हुआ है की  वन्य प्राणियों के खान पान में भारी लापरवाही बरती जाती है किस समय कौन से हिंसक प्राणियों को कौन सा माँस दिया जान है कोई ध्यान नही दिया जाता सफारी में दो  डॉ रहने के बाट उनके द्वारा सप्ताह या महीने में कोई परीक्षण नही किया जाता  इसका खामियाज़ा यह हुआ कि  शेर के ईलाज हेतु  गुजरात के जाम नगर स्थित अंबानी के वनतारा सफारी मे भेजा गया है  ईश्वर की कृपा रही तो वह भविष्य में  व्यधि। ग्रस्त  शेर के दर्शन स्थानीय जंगल सफारी में होंगे  नहीं तो फिर नया शेर आयातित   कर उसकी भरपाई करने योजना बनाई जाएगी   यही वजह है कि वर्ष भर पूर्व में  शेर के शावक सहित अन्य वन्य प्राणियो की मौत हो चुकी है  ज्ञात तो यह भी हुआ है कुछ दिन पूर्व एक काला हिरण की मौत होना  भी बताया गया जिसे जग जाहिर नही किया गया इस संदर्भ में सच्चाई ज्ञात करने जब जंगल सफारी के एस डी ओ शिव डहरिया से पूछा गया तो उन्होंने  किसी भी काला हिरण की मौत न होने की बात कही पश्चात   उन्होंने  किसी भी वन्य प्राणी की मृत्यु होना स्वभाविक,प्रकृति के अनुकूल होने की बात भी कही जबकि करोड़ों का राजस्व देने वाले वन्य प्राणियों को कारावास की स्थिति में पहुंचाने वाले मानव समाज ही है एवं उनकी सेवा सुश्रुषा करने का बीडा वन कर्मियों की ही बनती है फिर उनके खान पान से लेकर वन्य प्राणियों के स्वस्थ्य की चिंता कैसे नही होनी चाहिए परंतु यहाँ ठीक विपरीत स्थिति चल रहा है  ..यहाँ वन्य प्राणियों को चारा नसीब नही...एवं वन्य कर्मी मटन और मछली खा रहे है....ये वही खुराक है जिसे वन्य प्राणियों को परोसा जाता है प्रति वर्ष निकाली गई निविदा के मुताबिक वन्य प्राणियों को दी जाने वाली मटन की मात्रा कम दी जाती है वही  विजय पाटिल डिप्टी द्वारा यहाँ हर चार दिन में मछली मारा जाता है बताते चले की कुछ वर्ष पूर्व शेर के शावक को मछली खिला  दिया गया था जिसकी गले मे कांटा  फंसने  की वजह से बाद  में उसकी मृत्यु भी हो गई थी वही उद बिलाव घड़ियाल, मगर इत्यादि  के लिए मछली मंगवाई जाती है  लेकिन  निविदा कारों से  न लेकर  किस व्यवस्था के तहत  मछली स्थानीय  खंडवा जलाशय से निकाल कर लाखों का खेल कर लिया जाता है विश्वस्त सूत्र यह भी बताते है कि  यदि मछली का टेंडर कुछ लोग से किया गया  तो उन्हे स्थानीय  मछली मारने  का भुगतान किस मद से किया जाता है?  वही जंगल सफारी क्षेत्र में स्थित खंडवा जलाशय से मछली निकालने का फरमान डी एफ ओ द्वारा जारी किया गया वही सी सी एफ वन्य प्राणी के आफिस से मिले सूचना के अधिकार पत्र के अनुसार मछली मारने जैसा   कोई लेटर जारी नही किया गया इस प्रकार के अलग अलग विरोधाभासी पत्र प्राप्त होने  से  यह ज्ञात होता है कि वास्तविकता पर पर्दा डाल कर गड़बड़ी  कर भ्रष्टाचार  का नया इतिहास रचा जा रहा है  इस संदर्भ में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत। किसी भी प्रतिबंधित क्षेत्र, जैसे कि जू या सफारी, में मछली पकड़ना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के उल्लंघन के तहत एक दंडनीय अपराध है। यह गतिविधि जलीय,एवं वन्यजीवों के प्रजनन और उनके आवास को बाधित कर सकती है, और ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।  इन क्षेत्रों में मछली पकड़ने की अनुमति आमतौर पर विभाग को भी नहीं होती है, और ऐसा करने पर कार्रवाई की जा सकती है। 


 उल्लेखनीय है कि जंगल सफारी के सर्वाधिक चर्चित वन कर्मी कन्नौजे का आता है जिनके द्वारा वन प्राणियों के रसद आबंटन की महती जिम्मेदारी है परंतु वे उस पर भी कांटा मार देते है इनके संदर्भ में यह भी बताया जाता है कि गरियाबंद  डिविजन के धवल पूर रेंज के कक्ष क्रमांक 85*  में बहुत से भ्रष्ट कार्यों को अंजाम दिया था जहाँ प्लांटेशन न करते हुए पूरी की पूरी राशि हजम कर दिया गया जिसकी चर्चा आज भी चटकारे लेकर बताई जाती है वही एक अन्य सफारी वन कर्मी तो  बकायदा मछली जो टनों से निकाली गई थी जंगल सफारी के  वन  चौकीदार  चंद्रिका  सिन्हा के  सहयोग से पिछले  रास्ते निकाल कर किसे कब और कहाँ दी गई यह अब भी अबूझ पहेली बनी हुई है  इसकी संपूर्ण जांच की आवश्यकता है यही नही  श्रमिकों के भुगतान,निर्माण एवं अन्य मदों के बिल बाउचर की राशि में गड़बड़ी निकलेगी वह भी जांच का विषय है क्योंकि अब तो सीधे ऑन लाइन कार्य संपादित किया जाता है जिसमें ओवर राईटिंग करने का कोई खेल नही  कर सकता अब सारा खेल ठेकेदार उनसे लेकर भुगतान किये जाने वाले श्रमिकों के आधार कार्ड का सुक्षमता से निरीक्षण से सारा सच सामने आ जाएगा यही नही ठेकेदारों, एवं समिति, एन.जी.ओ.द्वारा संपादित कार्यों की समीक्षा भी मुख्य जांच का विषय है यदि ऐसा किया जाता है तो एक बहुत बड़े फर्जीवाड़ा होने का खुलासा होने की संभावना बताई जाती है

सोमवार, 29 सितंबर 2025

औद्योगिक विकास क्षेत्र मे वैश्विक भागीदारी निभाने छ्ग ने कदम बढ़ाया

 औद्योगिक विकास क्षेत्र मे वैश्विक भागीदारी निभाने छ्ग ने कदम बढ़ाया


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) छत्तीसगढ़  25 वर्ष पूर्व जब अविभाजित म.प्र.राज्य मे था तब तक यह पिछड़े  क्षेत्र के रूप में जाना जाता था फिर जब छ्ग राज्य स्थापना दिवस वर्ष 2000 में किया गया तब तक अथवा इसके पूर्व उद्योग के क्षेत्र में कोई  उल्लेखनीय उपलब्धि नही मानी जाती थी गिने चुने उंगलियों में कुछ  औद्योगिक घरानों का दबदबा और नाम पूरे प्रदेश में लिया जाता था परंतु जब से देश भर में भाजपा सरकार के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच, एवं विकास परक नीतियों ने छ्ग प्रदेश ही नही अपितु संपूर्ण  देश के नवाचार उद्योग क्षेत्र को बढ़ावा देने में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला कर खड़ा कर दिया है नित नवीन  तकनीक  परियोजनाओं एवं स्वदेशी आधुनिक उद्योगों को ऊंचाई  देने के लिए बहुत से औधोगिक घरानों को हर क्षेत्र में आमंत्रित किया जा रहा है  जिसका प्रतिफल यह मिल रहा है कि छ्ग राज्य निर्माण पश्चात 25 वर्षीय युवा छत्तीसगढ़ प्रदेश की वर्तमान  विष्णु देव साय सरकार ने मात्र  डेढ़ से दो वर्ष के  अल्प कालिक कार्यकाल में  साय साय करते हुए दो सौ से उपर  कंपनियां एवं निवेशकों को हरि झंडी दे दी  है जिसमें समस्त सेक्टर में भिन्न भिन्न उत्पाद वस्तुओं का निर्माण, सहित बाजार उपलब्ध किया जाएगा यही नही स्थानीय निवेशकों के अलावा विदेशी जापानी कंपनी भी छग प्रदेश में अपने उत्पाद निर्माण करने में इच्छा जताई है जिनमें कमोबेश सात सौ से उपर कंपनी एवं पूंजी निवेशक अब भी कतार बद्ध में है  यह उदगार (सी एस आई डी सी) छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के प्रबन्ध संचालक विश्वेश  झा से खास चर्चा में बताई 


छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के प्रबन्ध संचालक विश्वेश झा ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने औद्योगिक विकास एवं निवेश क्षेत्र मे इस ओर बहुत से सफल कार्यक्रम के मध्यम से कंपनियों को आमंत्रित किया गया था परंतु बहुत सी अव्यवस्थाओं, एवं आसुविधाओं की वजह से कंपनी अपने हाथ पीछे खिचने लगे इसका परिणाम यह हुआ की प्रदेश जहाँ से प्रारंभ हुआ था वहीं वापस आकर खड़ा दिखाई दिया परंतु वर्तमान की विष्णु देव साय सरकार ने नवीन नीति गत योजना के तहत अनेक कंपनियों, पूंजी निवेशकों को आकर्षक सुविधा उपलब्ध कराने का वादा किया जिसका परिणाम यह हुआ की बैंगलुरु, सहित जापान, एवं बस्तर जैसे नक्सला पिछड़े क्षेत्रों में कंपनियों एवं पूंजी निवेशकों ने अभिरुचि व्यक्त करते हुए उद्योग लगाने सहमत हो गए उद्योगों एवं पूंजी निवेशकों को सुविधा उपलब्ध कराने के संदर्भ में पूछे जाने पर उद्योग निगम के एम.डी. विश्वेश झा ने आगे बताया कि किसी भी कंपनी एवं उद्योग निर्माण हेतु भूमि की आवश्यकता पड़ती है जिसे सरकार मुहैया उपलब्ध करानें दृढ़ संकल्पित है इसके लिए  उद्योग विभाग सहित सरकार की उद्योगिक  नीति के तहत अल्प राशि में भूमि वितरण करेगी इसके साथ ही किसी भी कंपनी के उत्पाद निर्माण मे आयातित मटेरियल रॉ मटेरियल के आवागमन की सुविधा हेतु बेहतर सड़क मार्ग निर्माण किया जा रहा है साथ ही उद्योग संचालन हेतु बिजली जल व्यवस्थाओं की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता प्रमुख है जो सरकार बिना व्यवधान के सुविधाएं उपलब्ध कराएगी 


स्थानीय छ्ग निवासियों एवं लधुत्तम,छोटे, मंझोले, उद्योगों, की क्या भूमिका पूछे जाने पर छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक विश्वेश झा आगे बताते है कि उन्हे भी उद्योग नीति के तहत भूमि स्थल से लेकर उपरोक्त समस्त प्रकार की बिजली, पानी, मार्ग, सुविधाएं सरकार प्रदान करेगी इसके लिए किसी बिचोलिये की अवशायक्त नही छ्ग सरकार ने उक्त योजना का लाभ उठाने हेतु ऑन लाइन की व्यवस्था कर दी है जो कोई भी उद्योग लगाने वाले व्यक्ति सीधे  छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के पोर्टल से जानकारी प्राप्त कर सकता है एम. डी.विश्वेश झा आगे बताते है कि किसी भी उद्योग लगाने हेतु स्थानीय व्यक्ति जो छ्ग का मूल निवासी है वह अन्य कंपनी के साथ उप निवेशक सहित सहभागिता सुनिश्चत कर उद्योग को, स्ट्रैबल,एवं ग्रोथ कर सकता है यही नही मैन्यु फैक्चरिंग से लेकर तकनीक, सहायक, कंप्युटर ऑपरेटर सहित दक्ष विधाओं में निपुण कुशल, अकुशल, कर्मचारीयों के कार्य हेतु रोजगार सृजन छ्ग उद्योग नीति में प्रमुखता से अंकित किया गया है ताकि कोई भी युवा बेरोजगार न रहे श्री झा आगे बताते है कि अब तक दो सौ ऊपर उद्योग निवेशक कंपनियों मे जिनमे प्रमुख रूप से , गारर्मेंट,स्टील,इलेक्ट्रनिक, एल्युमिनियम,  औषधि, हॉस्पिटल,होटल, मोटल,जिनमें ताज होटल, विलसन जैसे होटल भी शामिल है जो राज्य के लिए उपलब्धि मानी जा रही है वही आई.टी. सेमी कंडक्टर, हेतु सुविधाऐं दी जा रही है चिप इत्यादि के लिए बहुत बड़ा बाजार है फार्मा  निर्माण क्षेत्र में लोकल ग्रुप का सरलीकरण किया गया है ताकि निवेशक आकर्षित हो वही फूड इंडस्ट्रिज , जो जापान से आई है वह इस क्षेत्र को बढ़ावा देगी, उन्होंने आगे बताया कि अब तक छ्ग के मूल पूंजी निवेश 100 करोड़ रुपये तक लगभग पहुँच चुकी है रायपुर, सहित पाटन क्षेत्र, छोटे एवं लघु मंझोले उद्योग बस्तर में लगाने की योजना तेजी से कार्य कर रही है जहाँ राइस मिल, फूड इनवेस्टर ने रुचि दिखाई है इन्हे समस्त सुविधाए भविष्य में दी जाएगी उद्योग में सबसे बड़ा कार्य यह है कि लैंड ग्रहण, उपयोग, हेतु ऑन लाइन किया गया है 

जिसकी एन. ओ. सी. जिले के कलेक्टर द्वारा जन सुनवाई के मध्यम से संपूर्ण औपचारिकता करने के पश्चात दी जाएगी इसके लिए स्थानीय उधमियों एवं निवासियों में जागरुकता जरूरी है अधिक से अधिक शासन की योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए हालांकि अब तक 32% लोगों ने उद्योग लगाने जुड़ चुके है साथ ही बाहर के उधमी भी लगातार जुड़ रहे है जिसकी मुख्य वजह छ्ग प्रदेश को छ राज्य की सीमाएं जुड़ी हुई है यहाँ के निर्मित उत्पाद हेतु कथित राज्यों के बाजार में व्यापार खुला हुआ है जिसका लाभ भविष्य में नज़र आएगा वर्तमान में अनेक स्थानीय सहित विदेश की कंपनियों से लगातार मीटिंग चल रही है जिसमे अब तक 200 प्लास उद्योग लगाने सहमति बन चुकी है वही 700 सौ उद्योग से निरंतर मीटिंग चल रही है जो छग सरकार के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के कुशन मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में औद्योगिक विकास क्षेत्र में वैश्विक स्तर तक  पहुचाने में बहुत बड़ी भूमिका  साबित होगी  उन्होंने मात्र एक से दो वर्ष के अल्प कालीन कार्यकाल में उद्योगिक क्षेत्र में यह  उल्लेखनीय कार्य कर दिखाया  जो छग प्रदेश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है

शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

रुक्कू खान की अध्यक्षता में दुर्गा पूजा, गणेश पर्व, एवं गौरी गौर विसर्जन दशकों से मनाया जा रहा

 रुक्कू खान की अध्यक्षता में दुर्गा पूजा, गणेश पर्व, एवं  गौरी गौर विसर्जन दशकों से मनाया जा रहा 


अर्जुन तिवारी

 रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) प्रति वर्ष की तरह इस बार भी चौबे कॉलोनी में मां दुर्गा विराजित। की गई है और आज हर्ष उल्लास के साथ पंचमी मनाया गया दशकों से सर्व धर्म संभव के रूप में मां दुर्गा को विराजित किया जाता है 



दशकों से इस दुर्गा समिति में रुक्कू खान ही अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहते है जिसकी पूरी कालोनियों भूरि भूरि प्रशंसा की जाती है चौबे कॉलोनी दुर्गा समिति दशकों से  धार्मिक पर्व मनाते आ रहा है  समिति के युवा और  मां दुर्गा की भक्ति में समर्पित धनंजय तिवारी ने आज बताया कि चौबे कॉलोनी दुर्गा समिति गठन एक दशक पहले किया गया था जिसके अध्यक्ष रुक्कू खान को ही बनाया जाता है और रुक्कू खान अपना कार्य पूरे भक्ति भाव से करते आ रहे है टिक्कू खान मां दुर्गा की आरती में भी समिति के सदस्यों के साथ प्रतिदिन भाग लेते है आगे धनंजय तिवारी ने बताया कि हमारे समितियों के द्वारा हर धार्मिक कार्यों को प्रति वर्ष मानते आ रहे है हमारे समिति द्वारा गणेश उत्सव के समय गणेश जी की भी स्थापना किया जाता है और दिवाली के समय गौरी गौर विसर्जनएवं में भी हर्ष उल्लास से दशकों से भाग लेते आ रहे है 


इस समिति की एक विशेषता ये है कि हर सामाजिक पर्व जैसे गणेश उत्सव और दीपावली के गौरी गौर विसर्जन में समिति के अध्यक्ष रुक्कू खान को ही बनाया जाता है   जिसे रुक्कू खान भी हर्ष उल्लास के साथ स्वीकार कर  पूरी भक्ति एवं निष्ठा के साथ सामाजिक  समरसता, एकता की एक साक्षात उदाहरण प्रस्तुत कर रहे है जिसकी चारो ओर प्रशंसा की जा रही है

बुधवार, 24 सितंबर 2025

वन्य प्राणियों का जंगल राज या पुष्पा राज.... शिकार हुए वन्य प्राणियों के अवयव की तस्करी बढ़ी

 वन्य प्राणियों का जंगल राज या  पुष्पा राज.... 

शिकार हुए वन्य प्राणियों के अवयव की तस्करी बढ़ी

अलताफ़ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट काईम न्यूज़) छ्ग प्रदेश के वन क्षेत्रों में आए दिन बेशकीमती काष्ठ तस्करी का विभाग द्वारा पकड़ना एवं किसी न किसी वन्य प्राणीयों के शिकार होने के समाचार,पत्र पत्रिकाओं के पन्ने एवं सोशल मीडिया के साइट कॉर्नर में सुर्खियां बटोर रहे है इसे देख कर ऐसा ज्ञात होता है कि वनों में वन्य प्राणियों का जंगल राज नही बल्कि चंदन तस्करी पर आधारित ब्लॉक बस्टर फिल्म के नायक पुष्पा राज के जैसा राज यहाँ भी चल रहा है जहाँ पर छग प्रदेश के बेशकीमती साल, सागौन, की जड़ें खोखली होते जा रही है लगातार तेजी से निर्मित होते क्रांकीट के जंगल ने मानों लहलहाती हरियाली लुप्त प्रायः स्थिति में होती जा रही है गगन चुंबी पेड़ पौधों की दैदीपयमान होती प्रकृति आभा को वन क्षेत्रों के चेहरों से मानों  बड़ी निर्दयता पूर्वक कुठाराधात कर के वनों की हरीतिमा युक्त चेहरे को नोच-नोच कर उसको बे नकाब कर दिया है जिसकी वजह से वनों का अस्तित्व नग्न अवस्था मे पहुँच गया है वनांचल क्षेत्र का रकबा इतना अधिक सिकुड़ता जा रहा है कि वन्य प्राणी अन्यंत्र पलायन करने विवश हो गए है  मानव समाज की लगातार उपस्थित से वन्य प्राणियों के रहवास क्षेत्रों में अतिक्रमण तथा गाडी मोटर वाहन की प्रेशर हॉर्न  से चिंघाड़ती चीं चिल्लपो, शोर शराबे की कानफोडू आवाज उनके आमद ओ रफ्त के संसाधनों से वन्य प्राणियों का जीवन दुरूह एवं भयभीत कर चुका है


कंदमूल,दाना चारा पानी की चाह में वे शहर, नगर, गांव,की ओर अन्यंत्र रुख कर जाते है परिणामतः भिन्न भिन्न अस्त्र शास्त्र, बारूद,विधुत, यूरिया खाद इत्यादि व्यवस्थाओं से उनका शिकार हो जाता है परंतु विभाग को उनके शिकार होने के पश्चात  जब जानकारी मिलती है तब तक शिकारी उनके अंग, भंग, अवयव को छिन्न भिन्न कर  आर्थिक लाभ उठाने के अवसर तलाश करते नज़र आते है तथा विभाग अपनी मौलिक जिम्मेदारी से बे खबर कार्यालय एवं मुख्यालय में मस्त रहते है  कथन आशय यह है कि वन्य प्राणियों,एवं वनों के संरक्षण, एवं संवर्धन के उद्देश्य में वर्ष में एक बार हम भले ही पर्यावरण  दिवस एवं वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह,या पखवाड़ा मना कर जन जागरूकता का ढिंढोरा पिटते हुए दंभ भरते है और यह कहते हुए नही थकते कि..ऑल इज वेल..ये कह कर संपूर्ण प्राकृतिक प्रेमियों को संतावना देकर हम अपनी पीठ भले ही थप थपावा लें परंतु क्या सही मायनों में  वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पूर्ण निष्ठा एवं ईमानदारी से पालन कर रहे है ? यह पहलू हमें उस समय बहुत अधिक व्यथित करता है जब घटते वनों के बीच किसी वन्य प्राणियों के मारने शिकार होने अथवा दुर्घटना का समाचार पढ़ने को मिलता है 


हाल फिल्हाल की घटना पर एक नज़र डालें तो  पखवाडे भर में पिथौरा वन परिक्षेत्र वन ग्राम गिरना मे एक हिरण के शिकार की मौत हुई थी वही बार नयापारा  अभ्यारणय क्षेत्र में मृत अवस्था में हिरण प्राप्त हुआ था रायपुर सहित अन्य क्षेत्र में जंगली वराह का शिकार या फिर हाल ही में बागबाहरा के वन ग्राम  परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 179 मे आँवरा डबरी के समीप विधुत तरंगित तार से भालू का शिकार किया जा चुका है  यही नही बागबाहरा परिक्षेत्र में छ माह पूर्व बायसन, सहित नर चीता के अलावा दो तीन वर्ष पूर्व प्राकृतिक वन कोठारी  के समीप वन क्षेत्र में दंतेल हाथी के करंट से मृत्यु सहित  हाल मे बलौदाबाजार वन मंडल अंतर्गत अर्जुनी के समीप मादा गर्भवती  गौर, (बायसन) के निर्दयता पूर्वक अंग भंग करना, खरोरा के करीब ग्राम मे जंगली वराह का शिकार सहित अंबिकापुर वन परिक्षेत्र में सड़ी गली अवस्था मे दंतेल हाथी,जैसे अनेक प्रकरण होते रहे है यही नही  मानव निर्मित जंगल सफारी जैसे सुरक्षित क्षेत्र में भी शेर के शावक  खूबसूरत वन्य प्राणी जेब्रा जैसे अनेकानेक वन्य प्राणियों की मौत हो चुकी है इनमे से कुछ वन्य प्राणी वाहन चलित हादसे के शिकार हो जाते है या फिर कुछ तो मानव समाज के रसस्वादन के लिए शिकार हो जाते है जिनमे से बहुत कुछ शिकारी तो पकड़े भी गए परंतु कितने अपराधियों को शिकार करने की सज़ा मिलती है ? कुछ लचीले रटे  रटाये कानूनी धाराओं में  उन्हे दो चार दिन में ही जमानत मिल जाती है जबकि बताया यह जाता रहा है कि मानव समाज द्वारा किसी वन्य प्राणियों का शिकार अथवा ह्त्या  करना किसी मानव हत्त्या से कम नही है इसके बावजूद लचीले कानूनी न्याय प्रक्रिया के चलते शिकारी बाइज्जत बरी हो जाते है जिसका परिणाम यह होता है कि वे फिर बेखौप होकर शिकार की पूनरावृत्ति करने लगते है यह समस्त व्यवस्था को देख कर क्या ऐसा भान नही होता  कि शेड्यूल 1के वन्य प्राणियों की लगातार हो रहे शिकार के पीछे सुनियोजित तरीके से  कार्य किया जा रहा है


क्योंकि अब तक जितने भी  वन्य प्राणियों का शिकार हुआ है उसमें अधिकतम वन्य प्राणियों के नाखून, दांत, जबड़ा, खाल बाल,इत्यादि को निकाल लिया जाता है कहने को तो वन विभाग अपराधी की गिरफ़्तारी से लेकर  सभी  कानूनी प्रक्रिया पूरी करती है  साथ ही जब्त किये जाने वाले माँस, एवं उसके अन्य अवयव रखे जाते है परंतु वर्षों से अपराधियों से शिकार किए गए वन्य प्राणियों से जब्त किए गए वे बेशकीमती अंग अवयव कहां जाते है जिनमें सिंग से लेकर नाखून, दांत,खाल,तक जब्त किए जाते रहे है ? यह अब आम जन के समक्ष एक बहुत बड़ा कौतूहल भरा सवाल खड़ा करता है ? 


क्योंकि बहुत से जागरूक नागरिक बार बार कथित जब्ती के दांत, बाल, खाल, सींग, नाखून, जैसे प्राणियों के अवयव पर सवाल पूछते हुए यह कहते हुए नही थकते  कि वर्षों से जब्त वन्य प्राणियों के अवयव का अब तक तो विशाल भंडारण लग गया होगा ?  न तो कभी इसकी नीलामी होती है एवं न ही इसको कभी डिस्पोज प्रक्रिया के समाचार पत्र में प्रकाशित किया जाता रहा है ? जबकि इस सवाल पर कुछ विभागीय अधिकारियों से चर्चा करने पर यह बताया गया कि जब तक कानूनी, एवं न्यायलायीन प्रक्रिया न हो तब तक शिकार अवशेष को सुरक्षित रखा जाता है पश्चात उसके जबड़े, दांत,सींग, हड्डी, बाल, खाल, इत्यादि को यह निर्णय कि अवशेषों का क्या करना है, मामले की परिस्थितियों, कानूनी आवश्यकताओं, वैज्ञानिक दृष्टि कोण और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के नियमों पर निर्भर करता है कि इसको नष्टीकरण लकड़ी के ईधन से जला कर या विधुत दाह से या जमीन में दफना कर किस विधि से नष्टिकरण किया जाता है यह नियम एवं आदेशों पर निर्भर करता है परंतु वन विभाग की ऐसी कोई प्रतिक्रिया अब तक स्पष्ट नही हो पाई है,
यदि ऐसी प्रक्रिया किया भी गया होगा तो स्थिति...जंगल में मोर नाचा...किसी ने न देखा... वाले गीत  को सार्थकता  जैसी प्रतीत होती है केवल किसी भी वन अधिकारी द्वारा उसका अग्नि दहन से ही नष्ट किया जाना ही बताया जाता है जबकि नियम अनुसार होना यह चाहिए कि नष्टिकरण से पूर्व  समाचार पत्र, अथवा वीडियों ग्राफी के मध्यम से सार्वजनिक तौर पर आम सूचना प्रदाय किया जाना तथा उसका निष्पदन अनिवार्य रहता है परंतु छ्ग प्रदेश में ऐसी कोई भी सींग, बाल, खाल, हड्डी इत्यादि की नष्टिकरण प्रक्रिया वर्षों से सार्वजनिक नही दिखी  न ही किसी समाचार पत्र के पत्रकार प्रतिनिधि के समक्ष पोस्ट मार्टम या वीडियो ग्राफ़ी  दाह संस्कार में उपस्थिति नही दिखा केवल स्वयं के वरिष्ठ अधिकारी एवं स्थानीय ग्रामीण से लिखित में सही हस्ताक्षर लेकर प्रकरण की इति श्री मान लिया जाता है यदि ऐसी कोई नष्टिकरण प्रक्रिया विगत दो पांच वर्षों पूर्व की गई है तो आधुनिक वीडियों ग्राफी, समाचार पत्र,की कटिंग अब भी सर्वजनिक किया जाना चाहिए ? संभवतः जिसका भी कोई स्पष्ट प्रमणीकरण उपलब्ध नही होगा
इसी तारतमय में जब कि  पुलिस विभाग भी वर्ष में कम से कम एक बार जब कोई नशीले मादक पदर्थ, गांजा, शराब का निष्पादन करती है तो बाकायदा उसे समाचार पत्र में प्रकाशित कराती है जिसकी वजह से आम जन के समक्ष पारदर्शिता बनी रहती है जबकि वन विभाग में वर्षों  से किसी प्रकार की ऐसी कोई प्रक्रिया आम जन के सामने नज़र नही आई जो मृत वन्य प्राणी के माँस के साथ उसके अवयव बाल खाल, सींग,दांत इत्यादि का दहन, दफन, या डिस्पोज किया गया होगा या नही अब तक स्पष्ट नही है ? जो जन मानस के समक्ष अनेक संदेह और आशंकाओं को जन्म देता है स्पष्ट करते चले कि वन्य प्राणियों के उक्त अवयव का अंतर्राष्ट्रीय बाजार में करोडो का व्यापार होता है जिसमें  दांत, सींग,हड्डियों से सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुएँ, औषधि निर्माण,चमड़े से कोट, जैकेट, बटन, जूता,एवं चर्म (चमड़े) खाल में भूसा भर कर सजीव (बुत) स्टेचू निर्माण करना सिंग को दीवारों में सजावट इत्यादि कार्य  उपयोग में लिए जाते  है जिसके अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों अरबों का व्यापार होता है अर्थात वन्य प्राणी जिंदा तो लाख का मृत हुआ तो सवा लाख का हो जाता है या यह भी कह लिया जाए वन्य प्राणियों के शिकार के पीछे...आम के आम.. और गुठली के दाम.. वाली उक्ति अक्षरशः सत्य साबित होती दिखाई देती है

इस संदर्भ में कुछ आदतन शिकारियों को टटोला गया तो उनका मत है कि रात्रि में बहुत से वन क्षेत्रों में हिरण, कोटरी, नीलगाय, का शिकार आसानी से कर लिया जाता है पश्चात वन्य प्राणी का शिकार कर तुरंत बाल खाल, सींग एवं अन्य अवशेष को बोरे में रख कर  या तो बेच दिया जाता है या फिर उसे दफन कर दिया जाता है इसे देखकर ऐसा ज्ञात होता है कि प्रदेश में कोई संगठित गिरोह सक्रिय है जो आवश्यकता अनुसार जिस वन्य प्राणी के अवयव की दरकार होती है उसी वन्य प्राणीयों का शिकार कर उस मांग के अनुसार पूर्ति की जाती है जैसे मैत्री बाग में सफेद स्वस्थ्य शेर भोजन उपरांत सुबह उसकी मृत्यु बताया जाता है डॉ. द्वारा उसके द्वारा अधिक भोजन खाने से किडनी क्षति ग्रस्त होना बताया गया अब कर्मचारी उसे कौन सा माँस खिला रहे है जिसकी वजह से उसकी मृत्यु  हो गई? वही यह भी बताया जा रहा है कि नंदन वन में  डी एफ ओ जंगल सफारी एवं डॉ. जय किशोर जडिया आगे पीछे पक्षी विहार पहुंचे मगर बगैर  विभाग के लिखित आदेश अनुमति के अड़तीस पक्षी चुपचाप लेकर जंगल सफारी में रख दिया गया जबकि डॉ जाडिया पक्षी के डॉ नही बल्कि वन्य प्राणी  हिरण,भालू शेर जैसे  शेड्यूल वन के शाकाहारी हिंसक जानवरों के डॉ. है फिर भी वे बगैर विभाग के अनुमति या डी एफ ओ से लिखित पत्र लिए बगैर अपनी जिम्मेदारी पर शिफ्ट किया जो अनेक संदेह को जन्म देता है? इस संदर्भ में यह बात कही जा रही है कि नंदन वन को  रायपुर डिविजन को सौंप देना चाहिए. विचारणीय पहलू यह भी है कि वन्य प्राणियों की लगातार शिकार प्रकरण से वन क्षेत्रों के अस्तित्व पर भी सवाल उठने लगा है लगातार वन क्षेत्रों की कटाई,विदोहन, से वन क्षेत्र सिमटाता जा रहा है मूल वन्य प्राणियों के जंगल राज को अब मानव जैसे पुष्पा राज अनेक काष्ठ माफियाओं की नज़र लग गई है  हाल ही दिनों में सिरपुर वविनि परिक्षेत्र में लगभग 65 हरे भरे पेडों की कटाई के जुर्म में 35 लोगों को विभाग ने पकड़ कर नयायालय में प्रस्तुत किया जहाँ सब को जेल भेज दिया गया अब इतने कर्मचारियों के रहने के बावजूद भी इतनी अधिक मात्रा में काष्ठ कैसे निकल गया जानकार सूत्र बताते है कि अनेक वर्षों से वन विकास निगम , एवं वन विभाग रेग्युलर वन कर्मियों की मिलीभगत से सिरपुर महानदी का बहाव बलौदा बाजार, कसडोल, की ओर निकलता है जहाँ प्रति वर्ष कई सौ घन मीटर सागौन की तस्करी हो जाती है तथा इसकी गाज छोटे वन कर्मियों पर गिरता है विचारणीय पहलू यह है की वर्षों से पुराने सुशोभित इमारती काष्ठों की तस्करी एवं काष्ठ माफियाओं के  कारण  बहुत से जंगल अपना अस्तित्व खोते जा रहे है बड़ी मात्र में इसका विदोहन कर अन्य राज्यों में खपाया जा रहा है गरियाबंद अचानकमार, नदी और सड़क मार्ग से उड़ीसा, महाराष्ट्र, दिल्ली कलकत्ता तक स्थानीय काष्ठों की खेप फर्जी टी. पी. और चालान के मध्यम से निकली जा रही है इस कृत्य के लिए  बड़े काष्ठ माफियाओं से सांठ गांठ कर बहुत से विभागीय पुष्पा राज एक तरफा आर्थिक लाभ उठा रहे है  तथा इसकी भनक तक नही लग पाती काष्ठागार से लेकर डिपो तक भंडारण में बड़ी हेराफेरी होती रहती है यहाँ तक मालिक मकबूजा में की गई कटाई में लाखों के सागौन को प्राप्त कर सांठ गांठ मिलीभगत करके राजकीय व्यापार मद के नाम  विभाग से अतिरिक्त मद की  मांग कर मात्र कुछ हजारों रुपये में उपभोक्ताओं से सागौन एवं इमारती काष्ठ का आंकलन कर लंबी प्रक्रिया के पश्चात चंद रुपये थमा दिया जाता है 


जबकि लंबाई, गोलाई, श्रेणि,नग,घन मीटर,एवं दर में सारा गुणा भाग कर इसकी आड़ में कम राशि देकर लाखों का खेल हो जाता है एवं उपभोगताओ से इमारती काष्ठ कौड़ियों के दाम पर लेकर लाखों की हेरा फेरी कर लिया जाता है अब ऐसे इमारती काष्ठ किस किस सॉ  मिलर्स के पास पहुँचता है यह बताने की आवश्यकता नही...मुफ्त का चंदन.. घिस मेरे नंदन ... वाली उक्ति यहाँ चरितार्थ होती नजर आती है अब भले ही चंदन लाल हो या सादा पीला हो..खुशबु  तो दोनों से ही निकलती है आज जैसे चंदन मे न ही वो दमक है न ही गमक है वन विभाग में ई कुबेर का हव्वा,ठेकेदारी प्रथा, रिकवरी का भूत से सब कोई दहशत में है परियोजनाओ के नाम पर एक पेड़ मां के नाम, एवं क्षति पूर्ति,बिगड़े वन सुधार वह भी कैंपा मद, औद्योगिक वृक्षारोपण,  पर कब तक वन एवं वानिकी कार्य संपन्न किया जाएगा यह सवालो के दायरे में चर्चा का विषय है जबकि विगत दो वर्षों से प्रदेश में कहीं भी वन क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्लांटेशन नही हुआ काष्ठों और वन्य प्राणियों के आसरे पर ही वन विभाग कब तक टिका रहेगा यह विभाग के समक्ष चुनौती बन कर यक्ष प्रश्न बन चुका है.