ऐतिहासिक वन संपदा का रक्षक वीर कर्म योगी आशीष खुमरी
अलताफ़ हुसैन
रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) महानदी के तट पर बसा सिरपुर (प्राचीन नाम श्रीपुर) भारत की एक महान धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक तपोभूमि है। प्राचीन काल में दक्षिण कोसल की राजधानी रहा यह ऐतिहासिक स्थल, सर्वधर्म समभाव हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का दुनिया का सबसे अनूठा और जीवंत उदाहरण है। प्राचीन काल मे धर्म, अध्यात्म, तपोभूमि स्थल के अलावा धार्मिक संस्कृति का केंद्र बिंदु माना जाता है ये वह प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है जहाँ लगभग 5वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच अपने चरमोत्कर्ष पर रहते हुए ।सोमवंशी राजाओं के शासनकाल में अद्भुत कला, विज्ञान और अध्यात्म का वैश्विक केंद्र बना विशेषकर पांडुवंशी राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन के 57 वर्षों के स्वर्णिम शासनकाल में यहाँ सैकड़ों मंदिरों,जिनमे लक्ष्मण मंदिर,सूरंग टीला और गंधेश्वर महादेव , तालाबों महानदी तट की जलधाराओं के समीप आसपास क्षेत्र मे बसे बौद्ध एवं जैन धर्म की साधना भूमि विहारों का निर्माण हुआ। 12वीं शताब्दी के बाद यह समृद्ध शाली शहर किन्ही अज्ञात कारणों या प्राकृतिक आपदाओं की वजह से यह इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में कहीं खो कर घने जंगलों के नीचे दब कर रह गया जो 19 वी बीसवीं सदी के उत्खनन पश्चात अवशेष प्राप्त होने प्रारंभ हुए जहाँ उपरोक्त धार्मिक,मंदिर् उनके अवशेष, संस्कृति, बौद्ध विहारों के इतिहास का साक्षी बने वही इन्ही से सटे वन क्षेत्र के आज भी गौरवशाली इतिहास उन तथ्यों की गवाही अब भी दे रहे है जिनके संरक्षण संवर्धन का दायित्व वन विभाग का अनुषंगिक धड़ा छ्ग राज्य वन विकास निगम विगत पचास वर्षों से नियमित रूप से कर रहा है जहाँ विगत अनेक वर्षों से धाकड़ परिक्षेत्राधिकारियों की निगरानी उनकी सुरक्षा एवं रिक्त वन भूमि क्षेत्रों मे सागौन प्लांटेशन का रोपण कर अपनी एवं निगम की हजारो आश्रित निगम कर्मचारियों की आर्थिक, सामाजिक व्यवस्था से जीविकोपार्जन कर संचालन कर रहा है
उसकी हरीतिमा मे आज भी कोई कमी नज़र नही दिखाई देती वल्कि सिरपुर के वन विकास निगम के कर्मयोगी कर्मचारी अपने कर्म स्थल की सुरक्षा उसका अस्तित्व बचाने अपना सर्वस्व न्यौछावर करने से पीछे नही हटते उन्ही कर्मठ,कर्मयोगी, संवेदनशील जांबाज़ व्यक्तित्व का नाम जिस तेजी से उभर कर सामने आता है वह है श्री आशीष कुमार खुमरी का जो वर्तमान मे वन विकास निगम मे सिरपुर परिक्षेत्र के परिक्षेत्राधिकारी (पीआरओ) है उनसे मिलने का अवसर बहुत कम हुआ लेकिन जब सिरपुर मे पहुँच कर उनसे चर्चा की गई तो उनके व्यक्तित्व एवं कर्म के प्रति समर्पण भाव किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है उन्होंने अपनी सेवाकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि उनकी अनुकंपा नियुक्ति वर्ष 1999बिरकोनी कष्ठागार मे फील्ड मैन के रूप मे हुई थी तथा वर्ष 2017 मे डिप्टी रेंजर एवं वर्ष 2022मे (परिक्षेत्राधिकारी) परियोजना रीजनल ऑफिसर के रूप मे नियुक्त हुए तथा लगभग सत्ताइस वर्षों के लंबे कार्यकाल मे उन्होंने अनेक वन क्षेत्र जिनमे मुख्यतः कुहरी, छताल, रायकेरा,बार, जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों मे सेकडों लोगों पर अवैध शिकार एवं अतिक्रमण के प्रकरण में वन अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए एक इतिहास रचा है सिरपुर परिक्षेत्राधिकारी आशीष ख़ुमरी से जब यह पूछा गया क्या ऐसी अपराधिक प्रकरण मामले मे कार्यवाही करते समय जान माल का खतरा की चिंता नही होती पूछने पर वे आगे बताते है कि सर्वाधिक वन क्षेत्रों मे अतिक्रमण और अवैध शिकार प्रकरण कार्यवाही से हमेशा जान जोखिम रहता है परंतु अपने विभाग के प्रति समर्पित सेवा भाव सर्व प्रथम है यही वजह है कि वन क्षेत्रों एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए हमे तनख्वाह मिलती है जो हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है इसी तारतम्य मे रेंजर खुमरी साहब आगे बताते है कि कोडार डिपो से लगा हुआ ग्राम पिरदा के पीछे स्थित कक्ष क्रमांक 822 मे दो से ढाई एकड़ भूभाग को कतिपय लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया था जहाँ उनके द्वारा मुझ पर प्राण घातक हमला किया गया था हमले मे मेरे माथे और आँख के मध्य गंभीर चोटें आई थी मेरी वर्दी भी फाड़ दिया गया था पुलिस प्रकरण दर्ज होने के पश्चात मै और मेरी टीम ने वहाँ सात दिन सात रात तक लगातार रहते हुए फैसिंग कार्य करवा कर वन क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करवाया इसी प्रकार आरंग रेंज मे पचास हेक्टेयर से 67 हेक्टेयर कुहरी ग्राम छताल मे 35 लोग, 73 प्लस लोगों को रायकेर रेंज मे 23 लोगों पर बार अभ्यारण्य मे पांच पर अतिक्रमण एवं अवैध शिकार प्रकरण पर कार्यवाही करते हुए पकड़े गए इन समस्त वन अधिनियम के तहत की जाने वाली वैधानिक कार्यवाही की थी परंतु सबसे बड़ी अचरज का विषय बताते चले कि वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार, अतिक्रमण गतिविधियों के रोकथाम के लिए कोई भी सुविधा उपलब्ध नही है न ही उक्त परिक्षेत्र मे कोई चार पहिया वाहन, न कोई अतिरिक्त उड़न दस्ता की टीम और न ही उचित कार्यालय लगाने के लिए कोई ऑफिस बनाया गया है इन समस्त अव्यवस्था एवं बगैर संसाधन के अभाव मे उनके द्वारा इतने सारे गंभीर शिकार, अवैध कटाई, ,अतिक्रमणकारी जैसी अपराधिक कार्यवाही किया जो बहुत ज्यादा प्रशंसनीय है उनके शौर्यवीर साहसिक कार्यों की प्रशंसा वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर वन विभाग के जानकारों द्वारा मुक्त कंठ से की जाती है
वे केवल वन विकास निगम के बार परियोजना मंडल के सिरपुर परीक्षेत्र के विकास सुरक्षा उन्नति तक सीमित नही है बल्कि वे जनहित समस्याओं पर भी उनकी पैनी नजर रहती है वन विकास निगम परिक्षेत्राधिकारी आशीष खुमरी बताते है के धंसकुंड जल प्रपात सिरपुर मे कक्ष क्रमांक 175 एवं 176 सर्किल चुरही बीट अमलोर सिरपुर परक्षेत्र के क्रमशःरोपण वर्ष 2023-2024 मे 16 हेक्टेयर वन भूमि क्षेत्र पर दो मीटर दो के अंतराल मे लगभग चालीस हजार सागौन पौधों का सफल रोपण किया गया था साथ ही कक्ष क्रमांक 175 मे 13 हेक्टेयर मे बत्तीस हजार पांच सौ सागौन पौधों का रोपण किया गया था जो आज लगभग चार से छ फीट से अधिक ऊँचाई पर ग्रोथ कर रहे है सिरपुर रेंजर आशीष खुमरी आगे बताते है कि सागौन पौधों की नियमित सुरक्षा, उपचार देखरेखा की जाती है इसके लिए सुरक्षा श्रमिक तैनात किए गए है यही वजह है कि सभी पौधे स्वस्थ और ग्रोथ कर रहे है तथा सभी शत प्रतिशत स्थिति मे है इसकी वजह उन्होंने यह भी बताया कि सागौन उपचार की प्रथम वर्ष दो बार करते है साथ ही मृत या आपदा ग्रस्त से पीड़ित सागौन मूलतः अलग हो जाते है उनको केज्युवल्टी की जाती है साथ ही मृत या बीमारी की वजह से ग्रोथ न करने वाले पौधों का उपचार निंदाई गूढाई थाला गाला बना कर कीट नाशक खाद से उपचारित किया जाता है जो निर्धारित समय पर लगातार ग्रोथ करते रहते है गाय मवेशी चराई की रोकथाम के लिए ज्यादा से ज्यादा श्रामीको की नियुक्ति की जाती है यही नही बड़े अधिकारी आर जी एम साहब,बार नवा पारा परियोजना मंडल के अनुभवी डी एम साहेब चन्द्रकांत टीकारिहा जी जो कार्यों के प्रति अति संवेदन शील अधिकारी है तथा शत प्रतिशत कार्यों का रिजल्ट देखना चाहते है उनसे लेकर डिप्टी डिविजनल मैनेजर चित्रा त्रिपाठी मैडम जिनको वानिकी कार्यों का लंबा अनुभव के साथ ही प्लांटेशन के प्रति अति संवेदन शील रहती है तथा वे लगातार समय समय पर मॉनिटरिंग करते रहती है तथा प्लांटेशन रोपण क्षेत्र मे कमी आने पर दिशा निर्देश दे कर मार्ग दर्शन भी करते रहने की वजह से प्लांटेशन मे किसी प्रकार की कोताही बरती नही जा सकती और आज वह बहुत अच्छी स्थिति मे बढ़त बनाए हुए है
सिरपुर रेंजर आशीष खुमरी इस बात से व्यथित हो कर बताते है कि संपूर्ण प्लांटेशन कार्य संपादित करने अंदरूनी एवं बाहरी वन ग्राम क्षेत्रों से बहुत से श्रमिकों का आवागमन होता है जहाँ कक्ष क्रमांक 175,176 के समीप धुर्वा गुफा बोरिद मार्ग है जिसकी लंबाई तकरीबन पांच किलोमीटर जो कक्ष क्रमांक 173 तक है वहाँ के मार्ग मे इतने अधिक गड्ढे और असमतल मार्ग जर्जर अवस्था मे है कि वहाँ आसपास के ग्राम वनवासीयों का चलना एवं अवगमन मे बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है विशेषकर वर्षा ऋतु मे बहुत से ग्रामीण चोटिल हो चुके है फिर भी इस ओर कोई ध्यान नही दिया जाता न वन विभाग, न वन विकास निगम और न ही शासन प्रशासन के जन प्रतिनिधि केवल अश्वासन से मूलभूत समस्या का निदान किसी ने नही किया है इसकी मूल वजह यह भी बताते है कि वन क्षेत्र तीन जिलों को जोड़ता है एक और बलौदा बाजार जिला दूसरा ओर से महासमुंद जिला एवं तीसरा स्थानीय छ्ताल से अमलोर मार्ग सिरपूर को जोड़ता है उन्होंने यह भी बताया कि इनकी लंबाई क्रमशः दो से पांच और सात किलोमीटर का ही वन मार्ग है तथा वर्ष 2025-2026 सुशासन त्योहार मे लगातार ग्रामीणों द्वारा अनेक आवेदन दिया जा चुका है परंतु किसी प्रकार की अब तक कोई सार्थक पहल नही हुई और न ही सड़क निर्माण किया गया कथित वन मार्ग न बन पाने की वजह से वर्षों पुराने वन विकास निगम मे कार्यरत गणेश भोई नामक वन विकास निगम कर्मी ने अत्यधिक व्यथित और क्षुब्ध होकर नौकरी छोड़ दिय उसको अश्वसन देने के बजाए निगम ने ही कार्य वाही कर कार्य से पृथक कर दिया गया वही अनेक गर्भवती महिलाओं का गर्भपात होना भी बताया गया इन सब परिस्थिति का लाभ सभी काष्ठ माफियाओं को मिलता है वे चोरी छुपे कथित क्षेत्र मे सागौन कटाई धड़ल्ले से कर निकाल ले जाते है फिर भी हमारे निगम कर्मचारीयों की तत्परता से तकरीबन पैतीस लोगों पर अवैध कटाई के मामले मे कार्यवाही किया जा चुका है
सिरपुर रेंजर आशीष खुमरी आगे बताते है कि जबकि हमारे परिक्षेत्र मे माता चांदादाई का ऐतिहासिक मंदीर है वही पर धंसकुंड वॉटर फॉल है जो प्राचीन स्थल है तथा रामणिक पर्यटन स्थल के रूप मे वन विकास निगम द्वारा विकसित किया जा सकता है वहाँ प्रतिदिन सेकडों की संख्या मे उक्त धंसकुंड फॉल एवं चांदादाई मंदिर के दर्शन के लिए आते है एक प्रकार से यह क्षेत्र धार्मिक एवं पर्यटन के रूप मे विकसित कर वन विकास निगम को अतिरिक आर्थिक लाभ का साधन बनाया जा सकता है इस संदर्भ मे बार नवापारा अभ्यारण्य के अधिक्षक श्री कृशानु चंद्राकर से चर्चा करने पर उन्होंने भी इस ओर वन विकास निगम द्वारा पर्यटन स्थल की सहमति जताई है साथ वन विकास निगम सिरपुर के रेंजर आशीष खुमरी ने यह भी कहा सैकड़ों पर्यटक धंसकुंड फॉल देखने आते है यदि प्रवेश द्वार निर्माण कर टिकट ही लिया जाए तो निगम को लाखों का राजस्व प्राप्त हो सकता है साथ ही पुरातत्व विभाग कथित क्षेत्र का सर्वे करवाए तो बहुत सी ऐतिहासिक महत्वपूर्ण अवशेषों का खुलासा भी हो सकता है जहाँ इस ओर वन विभाग सहित अन्य विभाग पर्यटन एवं अभ्यारण्या को बढ़ावा देकर राजस्व मे बढ़ोतरी कर रही है वही वन विकास निगम इस मामले मे काफी पिछडा हुआ नजर आ रहा है





कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें