वन विकास निगम का डिप्टी रेंजर लोकेश साहू वर्षों से फर्जी नौकरी कर रवान क्षेत्र को कर रहा खोखला
अलताफ़ हुसैन
रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम एवं संपूर्ण प्रदेश के समान्य वन मंडल कार्यालयों में ऐसे बहुत से वन कर्मचारी है जो किसी न किसी तरह से फर्जीवाडा प्रमाण पत्रों के मध्यम से शासकीय नियुक्ति प्राप्त कर वर्षों से शासन के राजस्व को चुना लगा रहे है मजे की बात यह है कि वरिष्ठ अधिकारी भी इन सब बातों से अनभिज्ञ नही है फिर भी ऐसे वन कर्मचारियों पर किसी प्रकार की कोई भी वैधानिक कार्यवाही नही की जा रही है तथा मजे से ऐसे वन कर्मी शासन के समस्त योजनाओं का भरपूर लाभ उठा रहे है इसका ताजातरीन उदाहरण छ्ग राज्य वन विकास निगम के बार नयापारा परियोजना मंडल अंतर्गत रवान परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर लोकेश साहू जो नाम के लिए तो छ्ग राज्य वन विकास निगम मे डिप्टी रेंजर का कार्य करता है परंतु काष्ठ माफिया एवं तस्करो के मध्य वह जैसे फिल्म पुष्पा का हीरों चंदन तस्कर पुष्पा राज है वैसे ही बार नयापारा परियोजना मंडल स्थित रवान वनक्षेत्र स्थित सागौन का यह पुष्पा है जो विस्तृत भू भाग मे फैले वन क्षेत्र सागौन काष्ठ का वह रक्षक नही बल्कि भक्षक बना बैठा हुआ है जिसे आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में लोग उसे वर्दी वाला सागौन तस्कर लोकेश के नाम से पहचानते है
आसपास के चौकीदार सुरक्षा कर्मीयों से पातासाजी करने पर उन्होंने बताया कि सागौन के बहुत से कक्ष क्रमांक क्षेत्र मे सागौन के मेजरमेंट में धांधली गड़बड़ झाला कर रायपुर के भनपुरी सहित बहुत से क्षेत्र में सागौन काष्ठ की अफरातफरी कर चुका है यही नही विगत कुछ वर्ष पूर्व मेजरमेंट के समय गलती से लगभग तीन सौ से उपर घन मीटर सागौन कोडार काष्ठागार पहुँच गया भौतिक सत्यापन में तात्कलिक उप वन मंडल प्रबंधक ने काष्ठ भौतिक सत्यापन मे अंतर पाए जाने पर उनके द्वारा सत्यापन करने से साफ इंकार कर दिया गया जिसमे तीन सौ से उपर घन मीटर का अंतर बताया गया इस तारतम्य में मंडल प्रबन्धक के द्वारा पत्र क्र. /व.वि.नि./राजस्व/2022/2696/ जो 03/11/2022/ को उप मंडल प्रबन्धक को लिखा गया था जो उपरोक्त तीन सौ से उपर घन मीटर सागौन की मैजेरमेंट करते समय धांधली,हेराफेरी उजागर हुआ था जिसका आरोप भी लोकेश साहू द्वारा ही किया जाना बताया गया था अब सवाल यह उठता है कि उक्त अंतर के तीन सौ से उपर घन मीटर सागौन का क्या हुआ ?
उल्लेखनीय है कि वन विकास निगम के बहुत से वन कर्मचारी यह कहते नही थकते कि ऐसा कटाई, गड़बड़ घोटाला जैसे गंभीर आरोप होने पर उसे कब से नौकरी से निकाल देना चाहिए था परंतु मुख्यालय वन विकास निगम के एक पूर्व सेवा निवृत लेखा प्रबन्धक की विशेष कृपा दृष्टि से वे बचते आ रहे थे परंतु वर्तमान परिस्थिति में उन्हे कौन बचा रहा यह आगे खुलासा होगा परंतु गंभीर चर्चा इस बात को लेकर है कि लोकेश साहू डिप्टी रेंजर पर फर्जी तरीके से स्कूल सार्टिफेकेट के मध्यम अल्प आयु से ही वविनि से नियमितीकरण का लाभ उठाते हुए शासन को धोख़ा घड़ी कर समस्त शासन की सुविधा जनक योजना का लाभ अब तक उठा रहा है हमे मिले पत्र से यह भी ज्ञात हुआ है कि वर्ष, 2023 में भी अवर सचिव छग शासन के पत्र क्रमांक/ 2917/दिनंक /14/09/2023/वन एवं जल वायु परिवर्तन विभाग ने बार नयापारा परियोजना मंडल को पत्र क्रमांक /क्षे.म.प्र./2023/1360/ के दिनंक 06/12/2023/को मंडल प्रबन्धक के नाम पत्र जारी करते हुए स्पष्ट उल्लेख किया है कि वन विकास निगम मे फर्जी तरीके से नियमितीकारण का लाभ उठाते हुए नौकरी कर रहे डिप्टी रेंजर लोकेश साहू के विरुद्ध एफ. आई.आर. दर्ज कराते हुए कार्यवाही की जाए जिस पर आज पर्यंत कोई कार्यवाही नही की गई जो उपर बैठे अधिकारियों की कार्य शैली पर सवाल खड़ा करता है तत्कालिक आर जी एम बार नया पारा परि. मंडल के पत्र मे लिखा गया है कि डिप्टी रेंजर लोकेश साहू जिसका जन्म तिथि19/05/1978/ थी तो वह वन विकास निगम मे वर्ष, 1995 से कार्यरत होना बताया गया तब उनकी उम्र 18 वर्ष से कम के थे अर्थात वे नाबालिग थे ऐसी परिस्थिति मे यह कानूनन अपराध है यही नही दैनिक वेतन भोगी के रूप लोकेश साहू नियमित छात्र के रूप में दसवी बारहवीं तथा स्नातक तक की उपाधि प्राप्त की तब दैनिक वेतन भोगी के रूप में था तो वह कोई नियमित छात्र कैसे हो सकता है? इससे स्पष्ट होता है कि डिप्टी लोकेश साहू दैनिक वेतन भोगी के रूप मे कार्यरत नही रहे होंगे तथा उपस्थिति संबंधी भी कोई आभिलेख नही होना बताया गया था यही नही जांच कर्ता अधिकारी से भी स्पष्टी करण मांगा गया था परंतु इस संदर्भ में क्या कार्यवाही हुई यह ज्ञात नही परंतु डिप्टी लोकेश साहू पर कार्यवाही करना तो दूर आज भी वह वन विकास निगम में एक ही परिक्षेत्रा में वनों का विदोहन कर उसे दीमक की तरह खोखला कर रहा है एवं अधिकारी भी आँख बंद कर चुप्पी साधे बैठे है खबर यह भी छनकर आ रही है कि उसे कवर्धा क्षेत्र में एक माह से ट्रांसफर कर दिया गया है फिर भी वह बार नयापारा परियोजना क्षेत्र के रवान परिक्षेत्र में अब भी यथावत स्थिति में बैठा है अब यह सब देख कर इस बात का सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है कि धन के बल पर मुख्यालय से लेकर आर.जी.एम. सहित डी एफ.ओ. (डी.एम.)एवं एस. डी.ओ. का मुंह बंद कर रखा है
यह स्थिति वन विकास निगम की ही नही बल्कि वन जलवायु परिवर्तन विभाग के अन्य परिक्षेत्रों में भी देखा गया है छ्ग राज्य वन अनुसंधान संस्थान के मुख्यालय से यह खबर तेजी से निकल कर आ रही है की एक अन्य महिला कर्मी अनुकंपा नियुक्ति सहायक ग्रेड 3 के पद पर परिवार से झूठ बोल कर फर्जी तरीके से सहमति बना कर नौकरी ले ली है जिसका विरोध उसके ही परिवार जन लिखा पढ़ी और संबन्धित विभाग से पत्राचार कर रहे है उसी भवन के उपरी हिस्से मे सीसीएफ आफिस विधान सभा में एक वन कर्मी विगत चौदह,पन्द्रह वर्षों से आसमान में रवि के तेज के समान चमक रहा है यहाँ तक विभागीय पदोंन्नति होने के बाद भी वह उसी पद स्थान में वर्षों से काबिज है बताया जाता है कि समस्त विभागीय गुणा भाग के मामले में वह सिद्धस्त है यही कारण है कि अनेक सी सी एफ आते गए और चले गए मगर कथित बंदा वन कर्मी अब भी सीसीएफ ऑफिस मे एक स्थान पर ढोल धमाका पीट कर बल्ले बल्ले कर रहा है रायपुर वन मंडल रायपुर अंतर्गत खरोरा के समीप मोहरेंगा वाइल्ड लाइफ प्रभारी ने तो बकायदा तीन लोगों को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी लगा दिया है जिसमे एक कर्मी उसकी स्वयं की बहन भांजा को साथ ही पेंशन एवं लड़के को अनुकंपा भी मिल गई है उसके बावजूद परिवार वाद के मोह में तीन से अधिक लोगों को वेतन विभाग से मिल रहा है यह संख्या अधिक भी हो सकती है यदि इसकी जांच की जाए यह तो रायपुर वन मंडल के कुछ स्थान के उदाहरण है यदि पूरे प्रदेश में सूक्ष्मता से देखा जाए तो बहुत से फर्जी नियुक्ति सहित फर्जी नौकरी के बहुत से प्रकरण सामने आ सकते है









































