शनिवार, 26 जुलाई 2025

छत्तीसगढ़ में पहली बार 72 महिला गायिकाओं द्वारा ऐतिहासिक युगल गीत गायन 'नवगीतिका' का आयोजन

 


छत्तीसगढ़ में पहली बार 72 महिला गायिकाओं द्वारा ऐतिहासिक युगल गीत गायन 'नवगीतिका' का आयोजन


रायपुर, (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए, तराना ग्रुप द्वारा 'नवगीतिका' नामक एक अद्वितीय गायन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम 27 जुलाई, 2025 को अग्रसेन भवन, पुरानी बस्ती, रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित होगा।

'नवगीतिका' छत्तीसगढ़ के संगीत इतिहास में पहली बार एक ऐसा मंच प्रस्तुत करेगा जहाँ 72 महिला गायिकाएं विभिन्न भाषाओं में 36 युगल गीत प्रस्तुत करेंगी। यह आयोजन न केवल संगीतमय प्रतिभा का प्रदर्शन होगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

इस भव्य कार्यक्रम के निर्देशक कैलाश छाबड़ा हैं, जबकि कार्यक्रम के सफल संचालन की जिम्मेदारी मनीषा नटाल संभाल  रही हैं। मंच संचालन की भूमिका सुभाषिनी जॉर्ज निभाएंगी, जो अपनी ओजस्वी वाणी से कार्यक्रम में चार चांद लगाएंगी।

तराना ग्रुप का 'नवगीतिका' कार्यक्रम महिला कलाकारों को एक साथ लाकर उनकी प्रतिभा को सम्मानित करने और उन्हें सशक्त बनाने का एक अनूठा प्रयास है। यह निश्चित रूप से दर्शकों के लिए एक अविस्मरणीय संगीतमय अनुभव होगा और छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।

  निर्देशक कैलाश छाबड़ा ने समस्त मीडिया बंधुओं से निवेदन किया हैं कि वे इस ऐतिहासिक आयोजन को कवर कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएं।

कार्यक्रम विवरण:

 * नाम: 72 नवगीतिकाओं का युगल संगम

 * आज दिनांक: 27 जुलाई, 2025

 * स्थान: अग्रसेन भवन, पुरानी बस्ती, रायपुर, छत्तीसगढ़

*समय - शाम 6 बजे से 11 बजे तक

 * विशेषता: छत्तीसगढ़ में पहली बार 72 महिला गायिकाओं द्वारा विभिन्न भाषाओं में 36 युगल गीत।

 * निर्देशक: कैलाश छाबड़ा

 * आयोजक: मनीषा नटाल

 * एंकर: सुभाषिनी जॉर्ज

सोमवार, 21 जुलाई 2025

रायपुर में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का बैठक संपन्न,

  रायपुर में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का बैठक संपन्न,

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ का प्रदेश स्तरीय बैठक पंडरी रायपुर में संपन्न हुआ,जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और अपने अपने विचार व्यक्त करते हुए सरकार की वादा खिलाफी को लेकर जमकर विरोध दर्ज किया गया उपस्थित कर्मचारियों ने  कहा छ्ग प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में आने के पूर्व मोदी की गारंटी में 100 दिन के भीतर में समिति बनाकर नियमितीकरण करने का वादा किया गया था


परंतु त्तासीन सरकार कुर्सी में बैठते ही दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण,एवं स्थायीकरण के वादा को भूल गया है, जिसके कारण अनियमित,दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में रोष व्याप्त होते जा रहा हैं। 

वर्तमान के वित्त मंत्री व सांसद विजय बघेल जी ने विडियों जारी कर दैनिक वेतनभोगियों का नियमितीकरण, स्थायीकरण किये जाने की बाते कहकर विडियों जारी किया गया था! 



छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ ने आगे बताया दिनांक 11.08.2024 से 27.09.2024 तक 48 दिनों तक अनिश्चित कालीन हड़ताल में रहे, वन मंत्री जी द्वारा अकास्मिक्ता कार्यभारित सेवा नियम लागू  किये जाने तथा स्थायीकरण किये जाने का आश्वासन दिया गया था। किन्तु आज दिवस तक पूरा नही हो पाया है जिसके कारण दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों पुन: हड़ताल में जाने की रूप रेखा तैयार कर रहे है। 

वर्तमान में वन मंत्री वित्त विभाग में जो प्रस्ताव भेजा गया है,उसे वित्त मंत्री द्वारा स्वीकृति प्रदान नही किया गया, फाईल वित्त विभाग में अटका पड़ा है जिसके कारण दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारियों ने रायपुर में प्रदेश व्यापी बैठक रखकर रणनीति बनाया गया है। अगर सरकार समय रहते मांगों को पूरा नहीं करती है तो वित्त मंत्री के  रायपुर व रायगढ़ निवास का घेराव किया जायेगा। कर्मचारी नेताओ ने आगे बताया कि



सरकार के मंत्रियों की मंशा है कि लास्ट में स्थायिकारण करेंगें तब हमें वोट मिलेगा ऐसा विचार बनाकर चला जा रहा है,किन्तु याद रहे कि देर से किया हुआ न्याय भी अन्याय के समान है। उन्होंने बताया कि पूर्व में रमन सरकार के कार्यकाल में ऐसा ही किया गया था,शिक्षा कर्मियों को लास्ट में नियमित किया फिर क्या हुआ सब जानते है! 

ननेताओं ने आगे कहा- हर राजनीति पार्टी अब झुठ बोलकर सत्ता हासिल करते है पर जो कहते है उसे करते नही है यहीं  सब से बड़ी चिंता का विषय है, लेकिन अब वोटर समझदार हो चुके है!

सरकार की दोहरी नीति के संदर्भ मे नेताओं ने कहा-  सरकार नियमितीकरण करेंगें तो सुप्रिम कोर्ट का अवहेलना होगा यही सोंचकर निर्णय नही लिया जा रहा है! हमें स्वीकृत रिक्त पदों में नियमितीकरण न करते हुए हम दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी व श्रमिकों के लिये कैबिनेट में निर्णय लेकर सांख्येत्तर पद स्वीकृत कर नियमितीकरण कर सकते है जिसके लिये सरकार सक्षम हैं। 

लेकिन जिस भी पार्टी की सरकार बनती है,सब अपना रटा रटाया राग अलापकर किनारे हो जाते है!

अब पूरे छत्तीसगढ़ में न्याय की गुहार में जंगी प्रदर्शन की तैयारी में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ की मंशा है,उपस्थित नेता गण ने आगे कहा यदि यहाँ बात नही बनी तो दिल्ली के रामलीला मैदान में हड़ताल में बैठने की तैयारी की जाएगी अब लड़ाई आर पार की रहेगी,लोगों का उम्र निकलते जा रहा है जब 62 वर्ष किया जायेगा तब नियमितीकरण करने से  किसका लाभ मिलेगा? 

शासन का ढ़ेड़ साल बिता चुके है आज तक निर्मित कमेटी  कोई निर्णय नही ले पाई है, हताश दैनिक वेतनभोगी लंबी लड़ाई लड़ने के मुड में  है। 

उपस्थित नेताओं ने कहा प्रदेश के वित्त मंत्री  जो प्रस्ताव वन विभाग की ओर भेजा गया उसे जल्द पारित किया जाए ताकि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को उनका अधिकार मिल सकें और मोदी की गारंटी का मान बना रहे!


छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ के रायपुर जिलाध्यक्ष अरविंद वर्मा को संघ के प्राथमिक सदस्यता से पृथक कर दिया गया है, उनके स्थान अजय गुप्ता को रायपुर जिला का जिलाध्यक्ष, अशोक विश्वकर्मा जिला उपाध्यक्ष, सनत भतपहरी जिला उपाध्यक्ष, कोमल साहु जिला सचिव,खगेश साहु जिला संगठन मंत्री,नरोत्तम सिन्हा जिला संगठन मंत्री, खुबीलाल वर्मा अध्यक्ष राजीव स्मृतिवन,आजूराम पटेल अध्यक्ष माना नर्सरी,राधेश्याम वर्मा अध्यक्ष तिल्दा नेवरा एवं जिला कार्यकारिणी सदस्य मनहरण साहु ,सूर्य प्रकाश,केशर बंजारे,छबिराम,जितेन्द्र साहु,घनश्याम जांगड़े, रायपुर जिला पदाधिकारियों को सर्व सहमती से बनाया गया !

शुक्रवार, 4 जुलाई 2025

वन विभाग में ड्रायवरों की सीधी भर्ती के प्रश्न पत्र लिक होने का अंदेशा

 वन विभाग में ड्रायवरों की सीधी भर्ती के  प्रश्न पत्र लिक होने का अंदेशा 


अलताफ़ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छ्ग वन विभाग के  वो दिन लद गए जब कुछ वर्ष पूर्व कोई भी मैदानी अमला के फॉरेस्ट गार्ड, फॉरेस्टर एवं डिप्टी रेंजर स्तर के वन अधिकारी,कर्म चारी छोटी बड़ी गड़बड़ घोटाला,अनियमितताएं, एवं भ्रष्टाचार कर उच्च स्तर के अधिकारियों के लिए कामधेनु बन कर उनकी इच्छाएं पूर्ण कर  दुधारू गाय की भूमिका का निर्वहन करते थे और सभी प्रकार के मैनेजमेंट कर बड़ी शान शौकत और ठाठ बाठ से रहते थे परंतु अब वह दिन बहुर गए न वो आन बान रही और न ही वो शान रह गई क्योंकि जब से आधुनिक तकनिक ई कुबेर,का भुगतान होनें से  विभागीय कार्य प्रणाली मे अमूलचूल परिवर्तन होने लगा और जो निचले मैदानी अमले के कर्मचारियों से लेकर रेंजर स्तर के अधिकारी तक समस्त काला पीला कर उच्च अधिकारियों की जेब गर्म कर उनके नयन तारा बनते थे अब उनकी पूछ परख नगण्य हो चुकी है सिर्फ वे बिल बाउचर, जैसे कार्य में हस्ताक्षर, करने जैसे आर्थिक व्यवस्थापन की कुंजी बन चुके है जिसकी वजह से वे बहुत सी विकट परिस्थितियों से गुजर रहे है क्योंकि समस्त कार्यों का उच्च स्तरीय केंद्रीय करण कर मुख्यतः डी. एफ.ओ.  उप वन मंडलाधिकारी, एवं तनिक  व्यवस्था का पॉवर रेंजर तक सीमित कर दिया गया है क्योंकि संपूर्ण विभागीय कार्य कम्प्युटर इंटरनेट पर होने लग गया कोई भी कर्मचारी अपनी कलम फसाना नही चाहता और विभागीय कानूनी दांव पेज व्यवस्था की वजह से बहुत से कार्यों से वे दूरी बनाए रखे हुए है यही वजह है कि लगभग राज्य के सभी वन मण्डलाधिकारी और इनके उपर बैठे आला अधिकारी के हाथों मे समस्त, लेन देन, भुगतान, जैसी अर्थ व्यवस्था की संपूर्ण बागडोर ले ली गई है तब से, ही गड़बड़ घोटाला, अनीयमितता, भ्रष्टाचार, का ग्राफ छोटे मोटे लाख दो लाख के नही बल्कि  दसों बीसों लाखों से लेकर करोड़ों का ऊँचा खेल खेला जाने लगा है तथा शासन प्रशासन और आम जन की  नज़र इन निचले स्तर के कर्मचरियों तक महदुद्।रह गई है और ख्वामखाह अधिनस्थ कर्मचारी को बलि का बकरा बना दिया जाता है अब इसी कड़ी में धमाकेदार,ताजा उदाहरण विगत कुछ माह पूर्व रायपुर जिले अंतर्गत  हल्के और भारी वाहन चालकों की सीधी भर्ती प्रकरण का मामला सामने आया है जिसमें लिखित परीक्षा में पेपर लिक होने की बात सामने आ रही है सवाल उठाया जा रहा है कि जब वाहन चालक भर्ती के प्रयोगिक लिखित पेपर लिक हो सकती है तो शंका व्यक्त की जा रही है कि बहुत से प्रति चयनित  अभ्यर्थियों से  लाखों रुपये लेन देन कर  उन्हे चालक पद पर सुशोभित किया जा सकता है  जिसमे गणित का गुण भाग करने वाले गणितज्ञ यह अनुमान लगा रहे है कि प्रति व्यक्ति आठ से दस लाख रुपये लेने वाले ने  लाखों का नही बल्कि करोड़ों का खेल कर दिया है 


                  हमारे विश्वसनीय सूत्रों से यह ज्ञात हुआ है कि रायपुर वन मंडल अंतर्गत 14 भारी और 4 हल्के  वाहन चालकों की चयनित अभ्यर्थी के रूप में चयन किया गया जिसमे    उनके परीक्षा से लेकर चयन प्रक्रिया तक सवाल उठाया जा रहा है हमें प्राप्त दस्तावेज से इस बात का अभास हुआ है कि जब  गोपनीय प्रश्न पत्र हमे मिल सकता है तो अनुमान लगाया जा सकता है कि कितने अन्य अभ्यर्थियों तक उक्त प्रश्न पत्र पहुँच गया होगा इसका अनुमान लगाया जा सकता जबकि ज्ञात हुआ है कि प्रश्न पत्र  कोई विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों ने सैट नही किया बल्कि उपर बैठे वरिष्ठ अधिकारियों ने आर टी ओ या यातायात पुलिस विभाग के सहयोग से प्रश्न पत्र को बड़ी गोपनीय तरीके से सेट कर बनाया गया था तथा यह वन मंडल स्तर के अधिकारियों की निगरानी एवं सुरक्षा में कंम्यूटर अथवा लेपटॉप में रखा गया था उसके बावजूद भी प्रश्न पत्र लीक कैसे हो गया ? यह बहुत बड़ा सवाल है जबकि नियम अनुसार परिक्षा हॉल मे किसी भी प्रकार की अनुचित सामाग्री  जैसे मोबाइल, लेपटॉप इलेक्ट्रानिक, उपकरण इत्यादि ले जाना सख्त वर्जित था तथा समय अवधि में उसे तत्काल जमा कराना था उसके बावजूद फिर भी पेपर कैसे लीक हुआ और बाहर आया कैसे और आज हम तक भी पहुँच गया यह बहुत बड़ा विचारणीय पक्ष है बताया जाता है बहुत से परिक्षार्थि सही उत्तर देकर शत प्रतिशत सभी प्रश्नों का हल सांकेतिक चिन्ह के मध्यम से बगैर काट छाट के पूर्ण कर लिए और वे चयनित भी हो गए  इसका ताजातरीन उदाहरण यह भी माना जा रहा है कि हाल ही बलौदाबाजार वन मण्डल कार्यालय के हलका,भारी वाहन चालकों की सीधी भर्ती में वाहन चालन कौशल परीक्षा  वाहन मशीन ज्ञान, की प्रायोगिक परीक्षा ली गई थी जिन्हे बहुत से अभ्यर्थियों को पूर्णांक से अधिक नम्बर दे दिए गए अब यह कैसे हो गया यह वही बात हुई कि अल्लाह मेहरबान, तो गधा पहलवान.... अर्थात बगैर व्यवस्था और 

सहयोग के यह सब असंभव नही है इसके लिए तत्कालीन डी एफ ओ या उप वन  मण्डल अधिकारी से निचले स्तर के किसी लिंक मध्यम से जोड़ तोड़ कर सेटिंग कार्यक्रम किया गया तथा इसकी भनक तक नही लगी परंतु बाद में इसका खुलासा हुआ  कुछ इसी प्रकार की लिंक और जोडतोड गुणा भाग रायपुर डिविजन में भी हुआ है विभाग के बहुत से कर्मचारियों के मध्य इस बात को लेकर चर्चा गरम है कि हलके भारी वाहन चालकों की सीधी भर्ती चयन प्रक्रिया में बहुत बड़ा खेल दिख रहा है इस संदर्भ में अरण्य भवन के कुछ विभागीय कर्मचारियों ने सूचना के अधिकार के तहत सीधी भर्ती के संदर्भ मे जानकारी मांगी थी परंतु उन्हे गोल मोल जवाब देकर मामले को शांत कर दिया गया परंतु हमें जिस प्रकार विभागीय प्रश्न पत्र की गोपनीय कॉपी प्राप्त हुई है साथ ही चयनित अभ्यर्थियों की सूची भी मिली है उसमें बहुत बड़ा खेल दिखाई दे रहा है जिसका सूक्ष्मता से अवलोकन किया जा रहा है तथा बहुत से संदिग्ध नाम लग रहे है जिसकी पुष्टि पश्चात ही उस नाम को प्रकाशित किया जाएगा गौर तलब है कि वन विभाग मे बहुत से वाहन चालक कर्मचारी दैनिक वेतन भोगी के रूप में अनेक वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे है परंतु वन विभाग उनकी सेवाएं को दर किनारा कर नई सीधी भर्ती के पीछे उनकी क्या मंशा है यह समझ से परे है इस संदर्भ में कुछ विभागीय वाहन चालक कर्मचारी का मत है कि सीधी भर्ती के पीछे उपर बैठे अधिकारियों की मंशा अर्थ व्यवस्था सुदृढ करना है और यदि इमानदारी से प्रक्रिया किया गया था तो हमें सूचना के अधिकार,2005 के तहत जवाब प्रस्तुत क्यों नही दिया गया यह बात भी कही जा रही है कि प्रदेश भर में सेकडों अभ्यर्थियों के बीच यदि कुछ अभ्यर्थियों से प्रति आवेदक से आठ से दस लाख रुपये लिया गया होगा तब भी करोड़ दो करोड़ का गड़बड़ी, और फर्जीवाड़ा तो कर ही दिया गया है 

रविवार, 22 जून 2025

छ्ग वन कर्मचारी संघ जिला शाखा रायपुर के सावन कुमार अध्यक्ष रेखा साहू, उपाध्यक्ष, वसीम खान सचिव बने

 छ्ग वन कर्मचारी संघ जिला शाखा रायपुर के  सावन कुमार अध्यक्ष , रेखा साहू उपाध्यक्ष वसीम खान सचिव बने 


रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) छ्ग वन कर्मचारी संघ जिला शाखा रायपुर के कार्यों को गति लाने के उद्देश्य से  संगठन का विस्तार किया गया 


रायपुर स्थित कर्मचारी संघ कार्यालय पंडरी में 15 जून 2025 को एक समान्य सभा की बैठक आहूत की गई जिसमें  सभी वरिष्ठ एवं कनिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में नए युवा पदाधिकारियों को निर्विरोध मनोनीत किया गया 

जिनमे युवा ऊर्जावान वन कर्मी सावन कुमार साहू,को जिला अध्यक्ष पद पर सर्व सहमति से चयन किया गया  इसके अलावा जिला उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा साहू एवं जिला सचिव पद पर वसीम खान का चयन सर्व सहमति से किया गया इस अवसर पर प्रांतीय महासचिव दीपक तिवारी, प्रांतीय सचिव  संतोष सामंत राय  , संभाग अध्यक्ष आह्फ़ाज़ खान,  पवन पिल्ले ने संयुक्त रूप से बताया कि छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ  के जिला शाखा रायपुर में चयन प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य संगठन को  मजबूत कर वन कर्मियों के हितार्थ गतिविधियों  एवं शासन द्वारा अनियंत्रित नियमावली के विरुद्ध संगठन अधिकारिक उद्देश्यों लक्ष्य ,व्यवहारिक आपूर्ति हेतु  वन कर्मियों को एक जुट लाना है ताकि नैतिक दायित्वों सुझाव, मांगो के मध्यम से वंचित अधिकारों  के लिए  संघर्ष किया जा सके

गुरुवार, 15 मई 2025

वन्य प्राणियों की सुरक्षा या नुमाइश के नाम पर आर्थिक व्यवस्था

 वन्य प्राणियों की सुरक्षा या नुमाइश के नाम पर आर्थिक व्यवस्था

अलताफ़ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम  न्यूज़) छ्ग प्रदेश के वन क्षेत्रों में वन्य प्राणियों की स्थिति बड़ी दयनीय पहुँच चुकी है आए दिन शिकारियों द्वारा भिन्न भिन्न माध्य्मो से उनके शिकार प्रकरण की घटना के मामले समाचार पत्र की सुर्खियां बटोर रही है अब चाहे गरियाबंद मैनपुर,वन क्षेत्र हो या जगदलपुर बस्तर क्षेत्र हो, या फिर धमतरी, बलौदा बाजार,कोरबा, सूरजपुर,अंबिकापुर, या  बार नवापारा अभ्यारणय एवं प्रदेश के किसी भी वन क्षेत्र क्यों न हो आए दिन किसी न किसी शिकार की घटना घटित होते रहती है जब यह समाचार लिखा जा रहा होगा उस समय भी प्रदेश के वन क्षेत्र के किसी हिस्से में कही न कहीं किसी वन्य प्राणी को काल कल्वित कर ने की व्यवस्था शिकारियों द्वारा की जा रही होगी 


*प्राणियों के अस्तित्व का हरण, या मरण*

यही वजह है कि प्रदेश भर में वन्य प्राणियों की सांख्यिकी स्थिति का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है गिनें चुनें दुर्लभ वन्य प्राणी अपनी जी जान के साथ अपने अस्तित्व बचाने जद्दो जहद में भागा भागा यहाँ से वहाँ भटक रहा है इस संदर्भ में एक पुरानी उक्ति का स्मरण हो रहा है,,वन का श्रृंगार वन्य प्राणी होते है  परंतु यह उक्ति मिथ्या साबित हो रही है अर्थात वन्य प्राणियों जो श्रृंगारित आभूषण रूपी माने जाते है उनके रूप अस्तित्व का हरण कर उन्हे मरण अवस्था मे पहुंचाया जा रहा है इस विकृत कार्य में कुछ तो मानव समाज एवं कुछ हिंसक वन्य प्राणियों द्वारा किया जा रहा है एक प्रकार से वन विभाग वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण, संवर्धन वाली बात कपोल कल्पित एवं खोखली साबित हो रही है लगातार वन एवं वन्य प्राणियों के विदोहन  से इनके रहवास क्षेत्र पर उनकी उपस्थिति से मानव समाज उन्हे बेदखल  करने जी तोड प्रयास कर रहा है निर्भय रह कर अरण्य क्षेत्र वन्य प्राणियों का आदि काल से रहवास रहा है  मानव दखला एवं कांक्रिटिकारण, के चलते घटते वन की परिस्थिति किसी से छिपी नही है उस पर राजनीतिक दलों द्वारा वोटों को साधने की मंशा के चलते कोई भी सरकार द्वारा वन वासियों और वन आदिवासियों के पुनर्वास उत्थान  का लाभ देने के चक्कर में अनेक गैर वन वासियों द्वारा वनों के मौलिकता को छिन्न भिन्न कर घर,फार्म हाउस, होटल मोटल जैसे निर्माण के मध्यम से वनों में अतिक्रमण एवं शेष वन क्षेत्र के अनगिनात्  पेड़ पौधों का  विदोहन कर चटियल मैदान के रूप मे परिवर्तित कर उस भूमि पर खेत खलिहान बना दिया गया जिसकी वजह से वनों का रकबा लगातार सिमटता चला जा रहा है इसके दुष्परिणाम यह आया कि आशान्वित मौसम जलवायु परिवर्तन तो हुआ ही साथ ही वन्य प्राणियों के समक्ष दाना, खाना पानी के लिए यत्र तत्र भटकना पड़ा  यही वजह है कि शिकारियों को इनका शिकार करने सहजता से अवसर मिलने लगा भूख प्यास की क्षुधा शांति के लिए उन्हे ग्राम शहर की ओर कुच करना पड़ा जहां मानव समाज, पालतू श्वान सहित अन्य प्राणियों द्वारा इनका शिकार किया जाने लगा घटना दुर्घटना से इनकी अकाल मृत्यु होने लगी घायल और चोटिल होने की अवस्था में उन्हे उपचार हेतु प्रदेश मे स्थित एक मात्र ऐसे मानव निर्मित जंगल सफारी एवं  नंदन वन का सहारा लिया गया जहाँ कुछ तो उपचार में ही दम तोड़ दिया गया तो कुछ तो स्वस्थ्य होने पर उक्त मूक निरह वन्य प्राणियों की नुमाइश कर प्रदेश  वन विभाग द्वारा आर्थिक लाभ उठाने नई योजनाएं बनाने लगा इनके दुर्लभ दर्शन लाभ के एवज में विभाग को लाखों का लाभ प्रति माह मिलने लगा मानव निर्मित जंगल सफारी नंदन वन में अवसर का लाभ उठाने नई नई योजनाओं का क्रियानव्यन किया जाने लगा उनके सुरक्षा, खान पान, उपचार की जगह निर्माण कार्यों को बहुत अधिक तरजीह दी जाने लगी

*खानपान,चारा के नाम पर  गड़बड़ी*


शाकाहारी वन्य प्राणियों को दो टाइम  हरी घास फुस, एवं मांसाहारी वन्य प्राणियों को चिकन, वरह (सुअर), मछली, इत्यादि डाइट दिया जाता है  जिसकी वजह से अरुचि कर भोजन से उनके स्वस्थ्य पर विपरीत प्रभाव दिखने लगता है जबकि बहुत से शाकाहारी वन्य प्राणी जो प्राकृतिक रूप से घास फुस, फल, वनस्पति,का मन माफिक सेवन किया करते थे वही माँसाहारी वन्य प्राणी वनों मे रहने वाले छोटे बड़े प्राणियों का शिकार करके माँस भक्षण करते थे तब उनके स्वस्थ्य पर कोई भी विपरित प्रभाव नही पड़ता था परंतु जब से मानव द्वारा दिए जाने वाले खाद्य वस्तुएँ परोसे जाने लगी तब से वे असमय काल की ओर शनैः शनैः  बढ़ते जा रहे है जंगल सफारी मे विगत दो वर्षों में अब चाहे कौसिंगा हो या फिर बस्तर क्षेत्र से लाए गए टाइगर हो, या हाल ही हिमालयान भालू को जंगल सफारी पहुँचते ही मौत हो गई स्थानीय किसी जिले मे शिकारियों द्वारा निकाले गए भालू के पंजो के नाखून या फिर सफारी के टाइगर के नवजात शावक हो वे सब  गलत खान पान, चारा पानी,एवं गलत उपचार,,या ऋतु परिवर्तन मे जैसे भीषण गर्मी या सर्वाधिक शीत ऋतु की मार में परलोक सिधार गए जंगल सफारी, नंदन वन, के लिए ग्रीष्म ऋतु में वन्य प्राणियों की ठंडक लाने करोड़ों का बजट शासन ने जारी किया गया जंगल सफारी, नंदन वन,बार नवापारा अभ्यारणय में असंख्य पर्यटकों से विभाग को लाखों करोडो रुपये का आर्थिक लाभ देने वाले वन्य प्राणियों की देख रेख, समुचित खानपान, सुरक्षा स्थिति कितनी बेहतर है यह उन्हे दिये जा रहे डाइट, स्वछन्द विचरण करने वाले वन्य प्राणियों को जेल नुमा कैदी के मानिंद रहवास से ही इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि उनकी स्थिति किन परिवेश में निर्वहन हो रही है


यही नही जंगल सफारी के अंदरखाने से यह बात भी छन कर सामने आई है कि पूर्व में हिंसक प्राणियों को बकरे का ताजा मटन दिया जाता था परंतु हाल ही मे बलौदा बाजार गए डी.एफ.ओ. ने तो पूरी व्यवस्था ही बदल दी जाने के पूर्ब उन्होंने वरह (सुअर) माँस जो सस्ता सुलभ मिलता है उसे मांसाहारी वन्य प्राणियों को दिए जाने की निविदा पारित कर नया डाइट चार्ट जारी करवा दिया जिसके चलते कुछ माह पूर्व तीन नन्हे शावक की अकाल मृत्यु हो गई बताते चले पालतू सुअर जो रोगाणु,एवं कीटाणु युक्त खाद्य वस्तु बताया जाता है ग्रीष्म ऋतु मे स्वाइन फ्लू, मुर्गी, चिकन से गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस)जैसे जानलेवा बीमारी के फैलने की आशंका बड़ जाती है यह मानव सहित वन्य प्राणियों के लिए स्वस्थ्य के लिए काफी घाताक होता है जबकि वैसे ही तालाब भराव क्षेत्र मे मच्छरों के काटने से भी मानव सहित जीव जंतु वन्य प्राणियों पर इसके दुष्परिणाम आते है उसी प्रकार मगरमच्छ घड़ियाल को दी जाने वाली बांध से निकाली गई ताजा मछली नही होना भी बताया जाता है वैसे ही चिकन जैसी खाद्य भी तेजी से रोग फैलने वाले  मांसाहारी प्राणियों को दिया जाता है जिसके दुष्परिणाम में अन्य प्राणी संक्रमित हो कर मृत हो सकते है हाल ही प्रकाशित समाचार पत्रों की माने तो उपचार के नाम पर एक्सपायरी दवाई की वजह से अनेक वन्य प्राणी मारे जा चुके है इन सब का जिम्मेदार कौन है ?  जंगल सफारी प्रबंधन को इन सब से कोई लेना देना नही उन्हे तो सिर्फ कार्य लगाने वाले ठेकेदार एवं वन कर्मी जो उन्हे आर्थिक लाभ दे सके एवं उनकी जेब गर्म कर सके उस पर अधिक ध्यान दिया जाता है कुछ जंगल सफारी कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर यह भी बताया है कि जंगल सफारी मे  पांच अलग अलग  बैंक खाते खोले  गए है जिसमे बहुत बड़ा खेल हो रहा है गड़बड़ घोटाला,भ्रष्टाचार के लिए ई कुबेर में सीधे आहरण न करके ठेकेदार, प्राथमिक वन समिति,वन प्रबन्ध समिति, महिला समूह, स्व सहायता समूह, एन.जी.ओ. सेवा समितियों जैसी संस्थाओं से अलग अलग बैंक अकाउंट के मध्यम से गड़बड़ झाला,और घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है   बाहरहाल, वन्य प्राणियों की मौत पर एक ही रटा रटाया शब्द वन कर्मियों का रहता है कि प्रकृति रूप से मृत वन प्रणियों को हम कैसे बचा सकते है? जब वे उनकी सुरक्षा स्वास्थ्य खान पान, उपचार, प्रबन्धन उचित ढंग से नही कर सकते तो उन्हे उनके मूल रहवास वनक्षेत्र मे प्राकृतिक, एवं स्वतंत्र रूप से सुरक्षात्मक दृष्टि कोण से निर्भय होकर जीवन निर्वाहन करने क्यों नही दिया जाता ?  जबकि ग्रीष्म ऋतु में जंगल सफारी के वन्य प्राणी नंदन वन के  पक्षी व्याकुल  स्थिति में बैचेन जीवन बसर कर रहे है जो एक प्रकार से बंधक कारी जीवन एवं वन्य क्रूरता अधिनियम के तहत माना जाता है जबकि छ्ग वन विभाग ने हाल ही कुछ वर्षों पूर्व में लोगों द्वारा तोता, बर्ड,पाले जाने पर वन अधिनियम की तहत पक्षियों को क्रूरता की क्ष्रेणी मे रख उन्हे आम लोगों से रिहा करने का फरमान जारी किया गया था ? तो फिर वन्य प्राणियों को नंदन वन, जंगल सफारी, चिड़िया घर जैसे सुसज्जित क्षेत्र का निर्माण कर आम जन के समक्ष नुमाइश, प्रदर्शन कर आर्थिक लाभ क्यों  ? 

*बारनवापारा अभ्यारण्य, इंदिरा स्मृति वन मोहरेंगा यानी जंगल में मंगल* 


यह स्थिति तो मानव निर्मित जंगल सफारी की तो है ही मगर प्राकृतिक वन क्षेत्र बार नवापारा अभयरणय की स्थिति तो और भी अधिक चिंता जनक बताई जाती है वन्य प्राणियों की सुरक्षा के नाम पर बार वन अभ्यारण्य क्षेत्र में कोई पुख्ता इंतजाम नही है वी.आई.पी.वी.वी.आई.पी.आगमन पर उनकी आवभगत,तिमारदरी में सारे वन कर्मी तैनात रहते है यही वजह है कि वहाँ शिकार स्थानीय ग्राम वासियों के सहयोग से कब किया जाता है ज्ञात ही नही हो पाता इस पर ग्रीष्म ऋतु दावनाल में कितने वन्य प्राणी स्वाह हो जाते है उसका कोई आंकडा भी नही चोरी छुपे शिकार के संदर्भ में बार अभ्यारणय के वन कर्मियों की संलिप्तता भी बताई जाती है जिसका उदाहरण कुछ वर्ष पूर्व वन ग्राम सिनोधा में एक प्रकरण मे बाल, खाल, के साथ अन्य अपराधियों में एक वन कर्मी की भी गिरफ़्तारी हुई थी इससे ज्ञात होता है कि बार नवा पारा अभयारणय में शिकार अब भी निर्बाध गति से जारी है इसकी वजह से वन्य प्राणियों की संख्या नगण्य हो चुकी है बताते चले कि बार नवापारा अभ्यारणय में काले श्याम हिरण जिसे वर्ष 2022-2023 में


अर्थात कृष्ण मृग को दिल्ली ज़ू सहित बिलासपुर के कानन पेंडारी से मंगवाया  गया था जिनकी संख्या उस समय सत्तर बताई गई थी लगभग तीन वर्षों मे उसकी संख्या दो गुना से अधिक वृद्धि हो जानी चाहिए थी परंतु वर्तमान में काले श्याम हिरण कितने है इसकी संख्या कोई भी बार वन कर्मी बताने से बचता है परंतु तुर्रा इस बात का जोर शोर से प्रचारित किया जाता है कि काले हिरण बार  अभ्यारण्यय मे है यानी एक प्रकार से.....जंगल में मोर नाचा...किसी ने न देखा...  वाली उक्ति चरितार्थ होते नज़र आ रही है यही नही तेंदुआ,लोमड़ी, लकडबग्धा,कोटरी,हिरण,गौर, चीता जैसे वन्य प्राणियों की जन संख्या कितनी है अब तक स्पष्ट नही है राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को प्रति वर्षों की संख्या बताना अवश्य होता है फिर भी उनकी संख्या स्पष्ट नही इसका मतलब स्पष्ट है कि बार नवापारा अभयरणय मे वन्य प्राणियों की स्थिति में कहीं न कहीं दाल में कुछ काला है या फिर पूरी दाल ही काली है वन्य प्राणी गौर जो बार अभ्यारणय में बहुतायात में दिखाई देते थे वह भी शावक और कुछ युवा गौर कही कहीं गिनती की संख्या मे यदा कदा परिलक्षित हो जाते है वन्य प्राणियों में इतनी कमी क्यों? जबकि होना यह था कि बढ़ते क्रम में प्रति वर्ष वन्य प्राणियों की संख्यिक गणना कर सुवाच्य शब्दों में बोर्ड में अंकित  कर सार्वजनिक किया जाना चाहिए था ताकि प्रति वर्ष  इनकी संख्या का सही आंकलन  किया जा सके एवं उनके  संवर्धन पर योजनाएं   बनाई जा सके इसके उलट यह हो रहा है कि वन्य प्राणियों की संख्या मे इजाफा होना तो दूर साथ साथ वन क्षेत्र भी चटियल मैदान में तब्दील होते जा रहे है


*मोहरेगा इंदिरा स्मृति वन  उपेक्षित*


खरोरा स्थित इंदिरा स्मृति वन मोहरेंगा में कुछ वर्ष पूर्व हिरण बरदी के बरदी झुंड में विचरण करते आसानी से सड़क से दिखाई दे जाते थे परंतु वर्तमान में उसके दर्शन के लिए नजरें  उत्साह पूर्वक यहाँ वहाँ ढूंढती है वहाँ भी कोटेज एवं पगोडे निर्माण किया जा रहा है ताकि पर्यटकों को पूरी सुख सुविधा देकर प्रोत्साहित किया जा सके भले ही वर्तमान मे वन्य प्राणी के नाम पर कुछ हिरण,जंगली वराह के अलावाअन्य वन्य प्राणी हो या न हो फिर भी  पूर्व में नरवा प्रोजेक्ट के अलावा वर्तमान  मे  कॉटेज,पगोडे का निर्माण कार्य द्रुत गति से अंतिम चरण मे संपादित किया जा रहा है इसके पश्चात पुनः वन्य प्राणियों को रखने नवीन योजनाएं क्रियान्वित्  किया जाएगा और वन्य प्राणियों के दर्शनार्थ फिर से आर्थिक लाभ का मध्यम बना कर निरह वन्य प्राणियों पर बंधक बना दिया जाएगा इस प्रकार विलुप्त वन्य प्राणियों का संरक्षण संवर्धन संभव हो सकेगा ? 

*सिमटते वन  घटते वन्य प्राणी*


लगातार वनों का विदोहन से भले ही हम अपने आप को आशान्वित करते रहे कि प्रदेश का वन क्षेत्र चालीस प्रतिशत है परंतु सही मायनों में इसका रकबा तीस से बतीस प्रतिशत पहुँच गया है जगदलपुर, बस्तर, जशपुर, अंबिकापुर, कोरबा, धमतरी, बलौदा बाजार मोहला, जैसे सघन बाहुल  वन क्षेत्र पूरी तरह उजड़ा चमन बन चुका है लगातार वन कर्मियों और काष्ठ माफियाओं की सांठ गांठ, मिलीभगत से शासन को प्रति वर्ष करोडो, रुपये काष्ठ की क्षति हो जाती है डिपो और काष्ठागार मे  नीलामी का आर्थिक लाभ का एक हिस्सा शासन को जाता है तो दो गुना राशि परस्पर बन्दर बांट हो जाती है  इस मामले मे गरियाबंद काष्ठागार का नाम शीर्ष पर लिया जाता है जहाँ सात, आठ वर्षों से अधिक एक ही स्थान पर गरियाबंद डिविजन में अंगद की पांव की तरह पैर जमाए हुए एस डी ओ का नाम बहुत चर्चा मे है  सेवा काल का प्रारंभिक दौर महासमुंद, बार नवापारा बागबाहरा के बड़े बड़े गड़बड़ी, घोटाला  करने वाले किस्से आज भी लोग चटकारे ले कर बताते है तत्कालिक परिक्षेत्राधिकारी बागबाहरा में रहते हुए वनोंपज सहकारी प्रबन्धन समिति के पचासों लाखों के घोटाले की गूंज विधान सभा मे तत्कालिक विधायक द्वारा उठाया जा चुका है इन सब के बावजुद्  वे गरियाबंद में अजगर के मानिंद शिकार निगल कर सुस्त अवस्था में अब भी जमे हुए है 


उनके किस्से शुरू की जाए तो कई एपिसोड चल सकता है परंतु साल, शीशम, सागौन, अन्य इमारती काष्ठ वाले गरियाबंद वन मंडल इनकी  छत्र छाया में पूरी तरह बर्बाद हो चुका है तथा वर्ष, 2021-2022 मे सड़क   चौडीकरण के नाम पर गरियाबंद ,पांडुका मार्ग पर बड़ी कटाई विभाग द्वारा की गई थी जिसका बहुत से काष्ठ अन्य मिल मे अफरा तफरी की गई थी, सेकडों वर्ष के साल, शीशम, सागौन, इमारती काष्ठ स्थानीय राज्य के अलावा उड़ीसा, जैसे कई राज्यों में खप चुके है फिर भी वे विभाग के लिए कामधेनु बने हुए है यहाँ किसी भी प्रकार का काष्ठ माफिया, या आरामील, में वन अपराध नही होता तभी तो अपवाद स्वरूप दो तीन साल में इक्का दुक्का प्रकरण छोड़ दिया जाए तो कभी भी काष्ठ तस्करों पर कोई कार्यवाही नही होती  इससे स्पष्ट ज्ञात होता है कि सांठ गांठ के चलते यहाँ बहुत बड़ा खेल अब भी हो रहा है इससे बड़ा खेल छ्ग राज्य वन विकास निगम द्वारा प्रति वर्ष थिनिंग के नाम पर भारी संख्या में सागौन एवं अन्य मिश्रित  वन्य प्रजाति पेडों का पातन किया जाता है इस वर्ष भी लगभग 3000 से दस हजार घन मीटर पेडों का पातन बार नवापारा परियोजना मंडल से किया जाना है वही पाना बरस परियोजना मंडल राजनांदगांव से दो वर्ष का पातन 10,000  से 15,000 घन मीटर दो बर्षों का थिनिग किया जाना वर्षिकी गणना प्रतिवेदन में प्रस्तावित किया गया है मगर बार नवापारा परियोजना मंडल में ही आठ से दस हजार  से कई अधिक घन मीटर का पातन कार्य अब  तक हो चुका है मार्किंग पश्चात कटाई फिर नंबर अंकित मेजरमेंट में ही सारे खेल हो जाते है जो सीधे डिपो न पहुँच कर बाहर ही खेल हो जाता है उसी प्रकार डिपो नीलामी में ही एक ही टी पी. चालान में कई ट्रक काष्ठ की गड़बड़ी घोटाला हो जाता है जो काष्ठागार में अब भी बदस्तुर् जारी है तथा विलासपुर  से श्री राम अग्रवाल ट्रांसपोर्ट के पांच ट्रकों से तीन ट्रक सिरपुर, बार क्षेत्र से परिवहन किया जा रहा है शेष दो ट्रक वविनि की ट्रक उपयोग में ली जा रही है 

अब वह ट्रक कब कब कहा जा रहे है यह किसी को ज्ञात नही वही बार अभ्यारण्य के भीतर वन क्षेत्रों से भी काष्ठ परिवहन किये जा रहे है इस प्रकार हजारों, लाखों घन मीटर सिर्फ बार नवापारा अभ्यारण्य से ही काष्ठों का परिवहन वर्षों से हो रहा है अब उस परिस्थिति में वनों और वन्य प्राणियों की क्या स्थिति होगी उजड़े वनों में क्या वन्य प्राणियों की एक सीमित दायरे में अपना जीवन निर्वहन कर सकेंगे?विचारणीय तथ्य है कि जब जंगल से प्राकृतिक  पेड़ पौधे नही होंगे तब वन्य प्राणियों का औचित्य क्या ? इन परिस्थिति में  वन्य प्राणियों के प्रदर्शनी हेतु, जंगल सफारी, नंदन वन, अभ्यारण्य, चिड़िया घर, जैसे छोटे छोटे रहवास  वन क्षेत्र का निर्माण कर वन विभाग सभी वन क्षेत्रों का अपनी आर्थिक स्त्रोत सुदृढ़ता का मार्ग प्रशस्त करेगा या फिर शेष वन क्षेत्रों के काष्ठों का दोहन कर किस प्रकार वनों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा तय करेगा. यह सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है. 

गुरुवार, 10 अप्रैल 2025

छ्ग राज्य मे उद्योग बढ़ाने नए युग की शुरूआत - विष्णु देव साय अलताफ़ हुसैन

 छ्ग राज्य मे उद्योग बढ़ाने  नए युग की शुरूआत  - विष्णु देव साय


  अलताफ हुसैन

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) छ्ग राज्य के गौण खनिज, गर्भ रत्ना धरती, मे समय समय पर देश सहित विदेश के बहुत से पूंजी निवेशक कंपनीयों द्वारा उद्योग लगाने बड़ी बड़ी गगन चुंबी इंडस्ट्रिज  के मध्यम से राजधानी एवं प्रदेश के भिन्न भिन्न जिलों मे रोजगार सहित  अनेक उत्पादन के अवसर खोल दिये जिसके सार्थक एवं आशातीत परिणाम सामने भी आए  लेकिन वर्तमान में भाजपा  शासन के  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल मार्ग दर्शन एवं नेतृत्व में सरकार ने ऐसे नवाचार उद्योग को बढ़ावा देने दूर दर्शी सोच के साथ कटिब्द्धता की ओर अग्रसर होने जा रही है जिससे  उद्योग उत्पादन सहित स्थानीय युवको के रोजगार के मार्ग प्रशस्त होंगे 


इसी तारतम्य हाल ही मे कुछ दिन पूर्व बैगलूरु सिटी मे  होने वाले इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम मे छ्ग शासन के उद्योग मंत्री लखन देवांगन सहित विभाग के बहुत से वरिष्ठ अधिकारी उक्त कार्यक्रम में सम्मिलित हुए सीएम साय, छत्तीसगढ़ की उद्योगनीति पर कारोबारियों से चर्चा कर उन्हे छत्तीसगढ़ मे उद्योगों के विस्तार पर नवीन औद्यौगिक परियोजनाओं पर अपने विचार रखते हुए  उपस्थित कंपनियों के व्यवसायी, एवं कारोबारीयों से उनसे चर्चा कर छ्ग प्रदेश मे आमंत्रित किया उन्होंने उपस्थित कंपनी के उद्योगपतियों व्यवसायियों,एवं करोबारियों से कहा कि छ्ग सरकार  उद्योग स्थापना से  लेकर, बिजली, पेयजल सहित बहुत सी मूलभूत आवश्यकता की सुविधा उपलब्ध कराएगे 
मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि  अमीर धरती के किसान पुत्रों को सामाजिक,आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से आधुनिक वैज्ञानिक सोच उन्नतशील विकास के साथ मुख्य धारा से जुड़ाव हेतु वे दृढ़ संकल्पित है जिससे भावी युवा पीढी मे उन्नत कृषि के साथ अत्याधुनिक उद्योग को बढ़ावा देना प्रमुख लक्ष्य रखा गया है ताकि ऐसे उत्पादित कंपनियों के साथ स्व रोजगार हेतु लघु उद्योग  निर्माण कर भारत देश के उन्नति, प्रगति मे सहभागिता सुनिश्चित किया जा सके श्री विष्णुदेव साय ने आगे बताया कि हम केवल सीमेंट, लौह उत्पादन, प्लास्टिक इत्यादि तक अब सीमित नही रहना चाहते  स्वस्थ्य की ओर भी बेहतर उपाय प्रदान करने पर विचार किया है स्वस्थ्य, उत्पादान, फार्मेसी, मैनुफैक्चर, निर्माण, के अलावा व्यापार के लिए खुला बाजार निर्मित करने सरकार हर संभव प्रयास करेगी जिसका गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन का लाभ  स्थानीय लोगो के  साथ आस पास राज्यों के व्यापारियों के लिए भी खुला बाजार उपलब्ध कराया जाएगा


अमूमन लघु और मंझोले करोबारी  अधिक लाभ  प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करते है परंतु  बैंगलूरु इनवेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि छग मे कंपनियों के उत्पादन एवं कम खर्च में अधिक लाभ  प्रदेश मे मिलेगा तब यहाँ की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मे अमूलचुल् सुधार होगा एक प्रकार से राज्य शासन एवं पूंजी निवेशक कंपनियों के परस्पर गठजोड़ से राज्य सरकार क्षेत्र मे उद्योग का एक नए युग का सूत्रपात करने जा रही है जिसमे पूर्ववत प्राप्त होने वाली सीमेंट, प्लास्टिक सहित अन्य निर्माण लौह उत्पादन से इतर ऐसे रोजगार मूलक उत्पादन, स्वस्थ्य सेवा क्षेत्र एवं अन्य कंपनियों को प्राथमिकता से  स्थानीय लोगो को मिलने लगेगा जिससे भावी छ्ग राज्य एक नवीन उत्पादक उद्योग के रूप में विकसित होगा इस संदर्भ में छ ग स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के (एम. डी.) प्रबन्ध संचालक विश्वेश झा से भी चर्चा की गई जो सदैव नवीन योजनाओं के साथ ही कुछ नया करने की सोच के साथ नया अध्याय रचने की बात कही


छ ग स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड उद्योग भवन में प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार झा  से एक संक्षिप्त मुलाकात मे चर्चा करते हुए  बताया कि राजधानी नवा रायपुर सहित राज्य के अनेक जिलों में वृहद स्तर पर भूमि क्षेत्र है जिस पर अनेक उद्योग का परिचालन किया जा सकता है इसके लिए समस्त प्रकार  के प्रौद्योगिकी, स्वस्थ्य सेवाएं, एवं मैंन्यूफैक्चरिंग उत्पादक कंपनियों सहित निवेशकों को छ्ग प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आमन्त्रित किया और उनसे  अन्य नवीन उद्योग परियोजनाओं पर चर्चा की एम. डी.श्री विश्वेश झा ने आगे बताया कि इलेक्ट्रानिक अथवा वैज्ञानिक टेकनिक से नव  निर्माण उत्पादनों को प्राथमिकता के साथ छ्ग प्रदेश मे अनेक कंपनियों को आमंत्रित किया गया है  जैसे मोबाइल, टीवी उत्पादन एसी, इलेक्ट्रीकल सामाग्री के कल पुर्जों का निर्माण भी शामिल है उन्होंने आगे बताया कि आज जो स्थानीय बाजार मे बड़ी टी वी अथवा अन्य इलेक्ट्रिक वस्तुओं का बाजार मूल्य  लगभग एक लाख रुपये होती है उसका स्थानीय छ्ग प्रदेश मे उत्पादन से चालीस से पचास हजार मे सहजता से उपलब्ध हो जाएगी  छग स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के एम डी.विश्वेश झा आगे बताते है कि रोजमर्रा मे उपयोग् होने वाली वस्तु जैसे कपड़ा उत्पादन एवं रेडिमेट कपड़ों के लिए पृथक उद्योग निर्माण करने की जरूरत है उन्हे भी माननीय मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा आमंत्रित किया गया  



*ग्रीनफील्ड इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर का निर्माण*

इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-22 में ग्रीनफील्ड इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर के अंतर्गत एक अत्याधुनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) की स्थापना की जा रही है। यह सेंटर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काम कर रहे उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए अत्यधिक लाभकारी साबित होगा। यह कॉमन फैसिलिटी सेंटर तकनीकी नवाचार, औद्योगिक सहयोग और रोजगार सृजन का केंद्र बनेगा। यह प्रोजेक्ट, छत्तीसगढ़ को तकनीकी रूप से समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री साय के संकल्प को पूरा करने में मददगार होगा।



*परियोजना नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित*


उन्होंने आगे बताया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में यह परियोजना नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही है। इसके लिए केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा ईएमसी 2.0 योजना के तहत 75 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है। इसकी कुल लागत 108.43 करोड़ रुपये है, जिसमें राज्य सरकार की भागीदारी 33.43 करोड़ रुपये की होगी।


*बैगलूरु कार्यक्रम मे ये थे उपस्थित*

  इस विशेष बैंगलूरु इंवेस्टर कनेक्ट मीट कार्यक्रम में मुख्य मंत्री विष्णु देव साय के अलावा उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन,मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह,सचिव राहुल भगत, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, उद्योग विभाग के इंवेस्टमेंट् कमिश्नर ऋतु सेन, सचिव एस भारतीदासन, उद्योग एवं वाणीज्य विभाग के सचिव सौरभ कुमार, संचालक् प्रभात मलिक एवं सीएसआईडीसी  के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार झा सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे





मंगलवार, 8 अप्रैल 2025

छ्ग वन विकास निगम मुख्यालय मे नव नियुक्त अध्यक्ष राम सेवक पैकरा का स्वागत

 छ्ग वन विकास निगम मुख्यालय मे नव नियुक्त अध्यक्ष राम सेवक पैकरा का स्वागत किया 

रायपुर (छ्ग वनोदय न्यूज़) छ्ग राज्य वन विकास निगम के नव नियुक्त अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री दर्ज प्राप्त एवं पूर्व गृह मंत्री छ्ग शासन श्री राम सेवक पैकरा  अटल नगर नवा रायपुर स्थित वविनि मुख्यालय में समीक्षा करने पहुंचे इस अवसर पर उनके निज सचिव हेमनाथ साहू ने उन्हे पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया इस अवसर पर वन विकास निगम के नव नियुक्त अध्यक्ष श्री पैकरा ने प्रदेश के वन एवं उसके निरंतर विकास, विस्तार पर उतरोत्तर कार्यों की जानकारी ली वे पद ग्रहण 13 को मुख्यालय में करेंगे इस अवसर पर बहुत से वन विकास निगम के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे 

बुधवार, 19 मार्च 2025

पं.रवि शंकर शुक्ल वर्ड के पार्षद आकाश तिवारी का निष्काशन रद्द

 पं.रवि शंकर शुक्ल वर्ड के पार्षद आकाश तिवारी का निष्काशन  रद्द 


आज राजीव भवन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी श्री सचिन पायलट जी की उपस्थिति में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री दीपक बैज जी ने पण्डित रविशंकर शुक्ल वार्ड के पार्षद आकाश तिवारी का निष्कशन रद्द किया और कांग्रेस पार्टी प्रवेश करवाया..!!


इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ,  सहित सर्व श्री चरणदास महंत , उमेश पटेल ताम्रध्वज साहू रविन्द्र चौबे  मलकीत सिंग गेंदू  सहित कांग्रेस पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता पदाधिकारी उपस्थित रहे।।

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025

बकरी चराने वाले ने सुशिक्षित अधिवक्ता को मात देकर पंच बना

 बकरी चराने वाले ने सुशिक्षित अधिवक्ता को मात देकर पंच बना 


रायपुर ((मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) छ्ग प्रदेश मे त्रि स्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव में बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों में पंच सरपंच विजयी हुए दावेदारों की ऐसी बहुत सी लंबी फेहरिस्त है जिसमे उनका राजनीति से कहीं दूर दूर तक नाता नही था फिर भी वे अपने क्षेत्रों से अप्रत्यशित रूप से जीत  हासिल कर  आम लोगों को अचरज और हैरानी में ही नही डाला बल्कि राजनीति के ध्रुव तारा माने जाने वाले दिग्गजों को भी धूल चटा दिया  जिसका एक उदाहरण अभनपुर विकास  खंड अंतर्गत ग्राम भेलवाडीह का नाम भी लिया जा रहा है जिसमे पंच प्रत्याशी के रूप मे गाँव में ही बकरी चराने वाले एक व्यक्ति ने पंच प्रत्याशी के रूप में अपना नाम  दाखिल किया और जब परिणाम  अप्रत्याशित रूप से  सामने आया तो लोगों ने...दांतों तले अपनी उंगली दबाने....विवश होना पड़ा क्योंकि आजकल का कोई भी चुनाव बगैर धन बल  और पहुँच के  जीत हासिल नही किया जा सकता ऐसे मे भेलवाडीह ग्राम मे एक बकरी चराने वाला प्रह्लाद यादव को पंच प्रत्याशी के रूप में सुशिक्षित अधिवक्ता  एवं पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष अनिल अग्रवाल को  53 वोट से मात देते हुए विजय हासिल की जिसकी भेलवाडीह ग्राम सहित अभनपुर के आसपास ग्राम में जम कर चर्चा हो रही है



   ग्राम पंचायत भेलवाड़ीह के पंच, सरपंच पद के लिए बहुत से ग्रामीणों ने नामांकन दाखिल किया था जिसमे ग्रामीण मतदाताओं ने जो स्पष्ट रुझान और निर्देश दिया वह हतप्रभ करने वाला रहा  जिनमे भाग्यशाली विजयी रहे पंच/सरपंच कुछ इस प्रकार है भागीरथी बारले ने जीत हासिल किया जिनमे ,वार्ड क्रमांक एक से जीत हासिल किया रोशन बारले फावड़ा छाप 

वार्ड क्रमांक 2 चंद्रकली बर्मन सीडी छाप में विजय रहे 

वार्ड नंबर 3 से कनिज बाई महिलांग फावड़ा छाप में विजयी रहे 

वार्ड नंबर चार से दुजबाई सिन्हा सीडी छाप में विजय रहे 

पांच नंबर वार्ड से राधेश्याम सिन्हा फावड़ा छाप में 

 6 नंबर वार्ड से ज्योति पटेल सीडी छाप में विजय रहे 

सात नंबर वार्ड से अर्जुन यादव सीडी छाप में  एवं 

आठ नंबर में लक्ष्मीबाई यादव सीडी छाप में  रहे 

9 नंबर वार्ड में प्रहलाद यादव जो फावड़ा छाप में विजयी रहे उन्होंने 53 वोट से एक अधिवक्ता और पूर्व भाजपा के मंडल अध्यक्ष को हराया बताते चले कि  प्रह्लाद यादव ग्राम भेलवाडीह में गाँव की बकरियाँ चराने का कार्य करते है वही 10 नंबर वार्ड में तबस्सुन हलीम खान फावड़ा छाप से विजयी रहे  



11 नंबर पन्ना लाल बारले फावड़ा छाप में जीत हासिल की है 

12 में निर्विरोध नरेंद्र बारले विजय रहे

13 में चंदन कुमार बारले सीडी छाप में  जीत हासिल कर ग्रामीण सत्ता मे  काबिज रहे 

    अभनपुर के भेलवाडीह ग्राम मे तीन मार्च को सरपंच और पंच का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा रहा है जिसके मुख्य अतिथि वर्तमान विधायक इंद्र कुमार साहू एवं पूर्व विधायक नवीन मार्कंडेय होंगे 

शनिवार, 22 फ़रवरी 2025

स्वर्गीय श्यामलाल गोयल मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट का हुआ आगाज

 स्वर्गीय श्यामलाल गोयल मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट का हुआ आगाज



रायपुर - रायपुर के सड्डू में स्थित स्वर्गीय श्यामलाल गोयल मेमोरियल क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया जिसमें बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, नाकोड़ा टीएमटी, इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, एक्सिस बैंक, यूको बैंक, हेक्टर पाइप, कर्नाटका बैंक और इंडियन बैंक की टीमें सम्मिलित हुई। यह दो दिवसीय क्रिकेट मैच का शुभारंभ 22 फरवरी को हुआ और फाइनल मैच के साथ समापन 23 फरवरी को होगा जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में रायपुर उत्तर के विधायक पुरन्दर मिश्रा सम्मिलित होंगे और विजयी टीम को ट्राफी प्रदान करेंगे।




श्री नाकोड़ा इस्पात लिमिटेड के नाकोड़ा ग्रुप स्पोर्ट्स एंड कल्चरल विंग द्वारा प्रति वर्ष स्वर्गीय श्यामलाल गोयल के स्मृति में क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन करती आ रही है और इस टूर्नामेंट में नाकोड़ा ग्रुप के साथ विभिन्न बैंकों की टीम सम्मिलित होती है।

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2025

पंडित रवि शंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 34 मे कई मतदाताओं का नाम गायब

 पंडित रवि शंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 34 मे कई मतदाताओं का नाम गायब 

रायपुर पंच वर्षीय नगरीय निकाय चुनाव मे पंडित रवि शंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 34 में इस बार बहुत से मतदाताओं का सूची मे नाम कट गया या पर्ची इधर से उधर अन्यंत्र अन्य वार्ड चली गई जिसकी वजह से बहुत से मतदाता दिन भर अपनी पर्ची पाने के लिए यहाँ वहाँ भटकते रहे तथा बहुत से मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशी के पक्ष मे मत देने से वंचित रह गए सुबह से बूथ का चक्कर काटने वाले अनेक मतदाताओं ने छ्ग शासन के निर्वाचन आयोग के कार्य प्रणाली पर रोष व्यक्त करते हुए बताया कि गत विधान सभा एवं लोकसभा  चुनाव के समय बकायदा मतदाता सूची मे उनका नाम एवं पर्ची आई थी जिस पर हमने अपने पसंदीदा प्रत्याशी को वोट किया था परंतु नगर निगम चुनाव मे परिसिमन पश्चात बहुत से मतदाताओं का नाम और पर्ची विलुप्त कर दिया गया या फिर अन्यंत्र प्रकाशित हो गया जिसका कही अता पता नही चल पा रहा है तथा आम लोग खासे परेशान होते रहे यहाँ तक कुछ मतदाताओं ने यह भी बताया कि छ्ग निर्वाचन आयोग के एप से भी बहुत से मतदाताओं का नाम अपडेट के अभाव मे विलुप्त कर दिया गया है जबकि वर्षों से वे मतदान करते आ रहे है वही स्थानीय निवासियों ने यह आरोप लगाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जानबुझ कर बहुत से मतदाताओं के नाम और पर्ची को विलुप्त कर दिया गया ताकि किसी एक पार्टी का लाभ मिल सके तथा उसका वर्चस्व बरकरार रहे फिल्हाल पं. रवि शंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 34 मे लगभग आठ सौ से लेकर एक हजार से उपर मतदाता का नाम गायब होने की बात बताया जा रहा है जिसका नुक्सान बहुत से दलीय, निर्दलीय प्रत्याशियों पर पड़ेगा मतदाताओं की पर्ची और मतदान न करने की वजह से मतदान की प्रक्रिया सुस्त रफ़्तर से रही है अपरान्हा पांच बजे तक 55 से साठ प्रतिशत मतदान होने का अनुमान  होना बताया जा रहा है मत दाताओं की सूची से नाम गायब होने की बात अन्य वार्डों मे भी बताई जा रही है 

शुक्रवार, 17 जनवरी 2025

योजनाओं और मंत्रियों का चेहरा चमकाने वाला जन संपर्क विभाग क्यों कर रहा शासन की छबि धूमिल

 योजनाओं और मंत्रियों का चेहरा चमकाने वाला जन संपर्क विभाग क्यों कर रहा शासन की छबि धूमिल


अलताफ़ हुसैन

 रायपुर (फॉरेस्ट क्राईम न्यूज़) रायपुर,,,धनघोर आश्चर्य,,, क्या सोचा जा सकता है कि   छ्तीसगढ़ जन संपर्क विभाग अब कुछ लोगों के लिए धन संधान विभाग बन चुका है  यानी धन कमाने की मशीन बन चुका है सुन कर और पढ़ कर कुछ आश्चर्य तो अवश्य होगा परंतु यह शाश्वत सत्य है  हाल ही मे किसी ने आर टी आई के मध्यम से पूर्व कुछ प्रदर्शित विज्ञापन के  पत्र मांगे गए जिनमे कुछ ऐसा भी  अखबार समाचार पत्र पत्रिकाओं की जानकारी मिले जिसमे लगभग दो करोड़ से उपर की राशि का भुगतान कर इतिहास रचा दिया जो सीधे सीधे सैकडों लघु पत्र पत्रिकाओं के मौलिक अधिकारों का हनन है बताया जाता है कि माह अक्टुबर 2024 से बहुत से निकलने वाले लघु पत्र पत्रिकाओं को जन संपर्क विभाग से मिलने वाला नियमित विज्ञापन पर डाका डाल कर तथा कथित  दो समाचार पत्र पत्रिका को लाखों करोड़ों का विज्ञापन  जारी कर दिया गया अब उन्हे उक्त राशि भुगतान जन संपर्क विभाग ने किया गया या नही यह तो जन संपर्क विभाग ही बात सकता है परंतु  उन दो समाचार पत्र पत्रिकाओं के मामले मे तो जन संपर्क विभाग सही मायनों मे उनके लिए धन कुबेर  बन गया है अब इनका सरकुलेशन स्थानीय अन्य पत्र पत्रिकाओं के सरकुलेशन से अधिक तो नही निकलता होगा फिर भी  उक्त कथित समाचार पत्र पत्रिका को लाखों  करोड़ों का विज्ञापन किस आधार पर जारी किया गया यह जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है जबकि बहुत से स्थानीय पत्रकारों के मध्य जमकर चर्चा इस बात को लेकर भी हो रही है कि स्थानीय अथवा छ्ग प्रदेश के समाचार पत्र पत्रिका को विज्ञापन जारी होता तो छग शासन की योजनाओं का स्थानीय या प्रदेश में प्रचार प्रसार किया जाता परंतु मध्य प्रदेश के ग्वालियर, और दिल्ली से निकलने वाले समाचार पत्र पत्रिका मे  लाखों और करोड़ों रुपये का विज्ञापन जारी करना किसी को भी संदेह पैदा करता है वह भी डीएवीपी दर से कई गुना अधिक राशि से जो प्रसिद्ध समाचार पत्र पत्रिकाओं को भी इतनी राशि जारी नही किया जा सकता जो विज्ञापन नीति और नियम कानून के विपरीत है जो सीधे तौर पर भ्रष्टचार और कमीशन खोरी होने का अंदेशा व्यक्त करता है   बताते चले कि छ्ग जन संपर्क विभाग रायपुर में लगभग तीन सौ से उपर पत्र पत्रिकाओं का जो सूचना और भारत सरकार मंत्रालय से आर. एन. आई. द्वारा पंजीकृत है वह स्थानीय जन संपर्क विभाग रायपुर में  पंजीबद्ध है जिनमे साप्ताहिक, पक्षिक, मासिक समाचार पत्र पत्रिकाओं  को दस हजार या अधिक का विज्ञापन प्रति माह जारी किया जाता है परंतु विज्ञापन नीति न होने के कारण अपनी..ढफली अपना राग...की तर्ज पर यहाँ भी बंदर बांट की तरह,,,अंधा बांटे रेवड़ी,,फिर फिर अपने को देय,,, की कहावत चरितार्थ होते नज़र आती है ऐसे भी पत्र पत्रिकाएँ है जिनका कोई सरक्युलेशन नही मगर उन्हे दस हजार से लेकर एक लाख से उपर का विज्ञापन जारी कर  उन्हे महिमा मंडित किया जा रहा है वही दूसरी ओर अनेक पत्र पत्रिकाए दसों साल से उपर नियमित प्रकाशन को विज्ञापन देने मे लगातार उपेक्षित किया जा रहा  है वहीं कई बगैर आर एन आई. से पंजीकृत वेब पोर्टलों को पचास  हजार के उपर लाखों के विज्ञापन जारी किये जा रहे है 


जिस प्रकार हमें मिले दो रिलीज ऑर्डर पत्र न्यूज़ कोड संख्या 41316/1 में राशि 11457152-00 की (एक करोड़ चौदह लाख संतावन हजार एक सौ बावन रुपये) की राशि तथा दूसरे रिलीज ऑर्डरर की इंग्लिश हिंदी पत्रिका कोड संख्या 12883/1 मे 8823529-00 की राशि शब्दों में (अठियासी लाख तेइस हजार पांच सौ उनतीस रुपये) की राशि कुल 20,280,,681 रुपये जन संपर्क उर्फ धन संधान विभाग द्वारा जारी किया गया जो अपने आप मे एक अविश्वसनीय उदाहरण है यही नही जन संपर्क विभाग में उपर बैठे अधिकारी के बंदर बांट वाला यह कार्यक्रम अब भी अनवरत जारी है लगभग सौ पत्र पत्रिकाओं और बहुत से न्यूज़ पोर्टल को अक्टुबर 2024 से विज्ञापन बंद कर दिया गया लगातार जन संपर्क विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर जब उन्हे विज्ञापन बंद करने की वजह पूछने पर टाल मटोल कर हीला हवाला किया जा रहा है इससे सपष्ट भान होता है कि बहुत से पत्र पत्रिकाओं  एवं वेब पोर्टल की रोकी गई राशि को  खुर्द बुर्द कर कमीशन खोरी का यह मिशन अब भी निर्बाध गति से जारी है अब ऐसे परिस्थितियों मे राज्य शासन मे उपर बैठे मंत्रीयों, जन प्रतिनिधियों और नौकर शाहों अधिकारियों,का स्वच्छ और साफ सूथरा  चेहरा चमकाने हेतु शासन द्वारा करोड़ों के बजट के साथ निर्मित जन संपर्क रूपी ब्यूटी पार्लर मे शासन के ही नुमाइंदे जन कल्याण कारी योजनाओं को पलीता  लगाने उन राशि से अपनी छबि चमकाने दमकाने मे लगे हुए है छ्ग जन संपर्क विभाग की यह सुपर्णखा रूपी विकृत चेहरा निर्मित करने के पीछे कुछ भाजपा  पार्टी के विभीषण  का हाथ होने के संकेत मिल रहे है जिसकी जांच और ऑडिट कराया जाना चाहिए जिसमे बहुत बड़े गड़बड़ घोटाले, और भ्रष्टाचार की परत खुल सकती है वर्तमान मे बहुत से तथा कथित पत्रकार जो दो से तीन पत्रिकाओ का प्रकाशन तथा वेब पोर्टल के मध्यम से हजारों लाखों का विज्ञापन के जरिए प्राप्त कर रहे है उसकी भी विज्ञापन नीति के माप दंड के अनुसार जांच की जाने चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. 

सोमवार, 6 जनवरी 2025

वन कर्मीयों के पास ,बाल, खाल,काष्ठ, तोता, पकड़ने के अलावा कुछ काम नही, ई कुबेर किसी के लिए वरदान, किसी के लिए चुनौती

 वन कर्मीयों के पास ,बाल, खाल,काष्ठ, तोता, पकड़ने के अलावा कुछ काम नही, 

ई कुबेर किसी के लिए वरदान, किसी के लिए चुनौती 

 

अलताफ़ हुसैन

 फॉरेस्ट क्राईम न्यूज़ -रायपुर छत्तीसगढ़ वन विभाग के वह दिन लद गए जब वन कर्मियों के पास कार्य योजनाओं की भरमार  रहती थी रिक्त पड़त भाटा भूमि मे हरियाली प्रसार करने के लिए प्लांटेशन सहित वनों के संरचनाओं मे नित नए निर्माण एवं प्रयोग किया जाता था ताकि छ्ग प्रदेश के बनों का विस्तार निरंतर होता रहे  परंतु विगत एक वर्षों से देखा यह जा रहा है कि  अपवाद स्वरूप प्रदेश के कुछ परिक्षेत्र स्थल पर रिक्त पड़त राजस्व भाटा भूमि में प्लांटेशन कार्य छोड़ दिया जाए तो शेष वन राजस्व भूमि, वन क्षेत्रों मे कोई भी उल्लेखनीय कार्य नही हुए है तथा मैदानी क्षेत्र मे भी अधिकतम नाममात्र पचीस से तीस प्रतिशत कार्य का ही क्रियान्व्यन  हो पाया वह भी विशेष परिस्थितियों मे उक्त प्लांटेशन इसलिए कराए गए क्योंकि  देश के यशस्वी प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी की महत्वाकांक्षी योजना एक पेड़ माँ के नाम से कुछ राजस्व भूमि स्थान मे हरियाली प्रसार एवं पौधा रोपण कर नाम मात्र कार्य संपादित कर अपनी गतिविधि दर्ज कर अपनी पीठ थप थपा सके परंतु वास्ताविकता यह है कि ऐसा रोपण  कार्य लगभग नगण्य  रहा है वर्ष 2024 मे अतिरिक्त हरियाली प्रसार के नाम पर प्रदेश भर के वन मंडल परिक्षेत्रों मे  निःशुल्क पौधे वितरण किया गया रोपे गए पौधों भी...ऊँट के मुह मे जीरा.. जैसे साबित हो रहे है सर्वाधिक आश्चर्य का विषय 2024 मे तब हुआ जब संपूर्ण वर्षा ऋतु काल मे वन विभाग के अधिकांश वन वृतों के राजस्व एवं वन भूमि परिक्षेत्र, में वन कर्मी हाथ पर हाथ धरे हुए ऑफिस की कुर्सी मे जमे रहे किसी भी अधिकारी कर्मचारीयों द्वारा प्लांटेशन या पथ रोपण कार्य मे हाथ नही डाला गया  इसका मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा आर. बी. आई. के मध्यम से सीधे ई कुबेर की राशि संबन्धित कार्य के दुकानदार अथवा ठेकेदार, निविदा कारों के खाते मे आंतरित किया जाने लगा ज्ञातव्य हो कि किसी भी रोपण प्लांटेशन कार्य जैसे वर्षा ऋतु मे नही किया जाना किसी को भी आश्चर्य मे डाल सकता है फिर भी कार्य के नाम पर नर्सरी से आम जन को निशुल्क पौधों का वितरण किया गया जो पूर्व करोङों रुपये की विभाग द्वारा प्रदत्त लागत से वहन किया गया था गौर तलब है कि कोई भी नर्सरी अथवा प्लांटेशन, रोपण कार्य मे पॉलीथीन बैग से लेकर बीज, रसायनिक जैविक खाद क्रय हेतु पहले राशि लगाई जाती थी तद पश्चात उसका भुगतान किया जाता था अब सीधे ऑन लाइन खरीदी से  संपूर्ण बिल का भुगतान दुकानदार को विभाग द्वारा ऑन लाइन कर लिया जाता  परंतु अब भुगतान ठेका प्रणाली या निविदा के मध्यम से ई कुबेर द्वारा होने लगी है जिसकी वजह से सामाग्री  कार्य स्थल पहुँचने तक आधा वर्षा ऋतु काल व्यतीत हो जाता है वही निर्माण संरचना हेतु जैसे ईटा गिट्टी रेती सीमेंट,  इत्यादि का भुगतान भी ठेकेदार निविदा पद्धति के मध्यम से सीधे ई कुबेर के मध्यम से किया जा रहा है जिसकी वजह से मैदानी कार्यों, एवं प्लांटेशन कार्यों मे लेट लतीफ होना स्वभाविक है इस पर मैदानी अमलो पर नए नियम कानून थोप दिया गया एक तो अल्प बजट के अभाव से अधिकारियों एवं मैदानी वन कर्मियों के कार्यों मे अनिश्चितता की स्थिति निर्मित बनी हुई है उपर से नये नियम कानून के तहत शत प्रतिशत प्लांटेशन, पथ रोपण न होने की स्थिति मे संबंधित परिक्षेत्राधिकारी डिप्टी रेंजर सहित मैदानी अमले से संपूर्ण लागत राशि रिकवरी करने की हिटलरी फरमान से स्थिति भयावह निर्मित हो गई है  कोई भी अधिकारी, कर्मचारी, इस परिस्थिति मे नौकरी दांव मे रख कर कोई  रिस्क नही उठाना चाहता जबकि अमुमन देखा यह गया है कि प्लांटेशन, पथ रोपण पश्चात गाय गरुवा एवं मवेशी चराई,प्रकृति आपदा, असमाजिक तत्वों द्वारा पेड़ पौधों की कटाई एवं सुरक्षात्मक घेरो की टूट फूट,चोरी होने से उपरोक्त परिस्थितियों में प्लांटेशन  रोपण शत प्रतिशत रह पाना असंभव है     


जन प्रतिनिधियों की ठेकेदार प्रणाली से वे तो गदगद हो गए शेष बजट मे बैठे अधिकारियों का प्रसेंटेज़ मे बढ़ोतरी की मांग से बजट का ग्राफ और कम स्थिति मे पहुँच गया उस पर प्लाटेशन भी शत प्रतिशत होना सामाग्री खरीदी भी एक नम्बर मे चोखा होना तथा उस पर समस्त प्लांटेशन शत प्रतिशत  न होने पर इसकी रिकवरी रेंजर, डिप्टी रेंजर मैदानी अमले से ही लेना अन्यथा उस पर विभागीय डंडा चलने की बात से सभी कर्मचरियो ने कार्यों से अपना हाथ खिच चुके है जिसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना है उपर बैठे अधिकारी अपने हिस्से का कमीशन भी यहाँ वहाँ से निकाल ही लेंगे तथा इससे सरकार को भी कोई नुक्सान नही होगा क्योंकि केंद्र से या राज्य से मिलने वाली राशि को ई कुबेर के माध्यम बैंक मे जमा राशि से करोडों रुपये का ब्याज बैठे बिठाए देर सबेर उन्हे मिल ही जाएगा वही रेंजर से लेकर मैदानी अमलो के लिए बेहद परीक्षा और चुनौती की घडी है वही राज्य से मिलने वाला बजट के अलावा केंद्र से भी वन्य प्राणियों की सुरक्षा,सफारी, पर्यटन,अभ्यारणय का अलग बजट विभाग को मिलता है परंतु उक्त राशि के बारे मे यह चर्चा आम है कि राशि का क्रियानव्यन...जंगल में मोर नाचा किसने देखा...वाली उक्ति को चरितार्थ करती हुई प्रतीत होती है अब वह राशि कहाँ गया यह चर्चा का विषय है चर्चा इस बात की भी गर्म है कि समस्त राशि राज्य शासन द्वारा महतारी वंदन योजना सहित धान खरीदी, एवं किसानो को दिया जा रहा है जिसमे वन विभाग सहित संपूर्ण अन्य विभाग के बजट मे कटौती कर के  वितरण किया जा रहा है सत्यता क्या है यह तो सरकार ही जाने परंतु इसकी वजह से सभी विभाग के विकास कार्यों मे ब्रेक सा लग गया है एक प्रकार से पूर्ववर्ती सरकार द्वारा जारी महतारी वन्दन योजना एवं किसानों और धान खरीदी राज्य शासन के लिए गले की हड्डी बन गई है यदि राज्य सरकार द्वारा उक्त योजना को बन्द किया जाता है तो वादा खिलाफ़ी के हालात उत्पन्न हो सकते है और भविष्य मे इसके दुरगामी परिणाम सामने आ सकते है हालांकि वही दूसरी वजह यह भी बताई जा रही है कि अल्प बजट मे भी भारी कमीशन खोरी की जा रही है नेताओं और जन प्रतिनिधियों द्वारा अपने विश्वासपात्र लोगों को ठेका, निविदा दिलाया जा रहा है जिसका बिल भुगतान केवल रेंजर के हस्ताक्षर से पास कर निर्धारित तिथि पर ऑन लाइन सबमीट किया जाना अनिवार्य कर दिता गया है देरी से बिल प्रस्तुत करने पर विभागीय कार्यवाही का नियम बन चुका है इन परिस्थितियों में नेता जन प्रतिनिधि अपने हिस्से की कमीशन खोरी अपने व्यक्ति से तो प्राप्त कर लालम लाल होकर बल्ले बल्ले कर रहे है और आम जनता को ई कुबेर ऑन लाइन पारदर्शिता भुगतान के नाम पर  भ्रष्टाचार मुक्त भारत का दंभ भरा जा है एक प्रकार से संपूर्ण   राज्य के बजट राशि को सेंट्रलाईज़ कर दिया गया इससे नेताओं और जन प्रतिनिधियों का कोई नुकसान नही है एक प्रकार से सभी मैदानी अधिकारियों के हाथ काट कर उन्हे पंगु बना दिया गया जिसका प्रभाव सिस्टम पर देर सबेर दिखाई देगा साथ ही वन विभाग के कार्य शैली मे भी ग्रहण लगने के साथ ही कार्यों की पार दर्शित धीरे धीरे समाप्त होते जाएगी  क्योंकि सभी  कार्य योजनाओं मे मंत्री,जन प्रतिनिधियों और नेताओं द्वारा ठेकेदारी प्रथा के मध्यम से अपने लोगों को ही प्रोत्साहित किया जाएगा केवल नाम  मात्र छुट पुट योजनाए के अलावा वन वृतों मे इनके समक्ष कोई कार्य नही होगा तब ऐसी परिस्थितियों मे वनों का विदोहन,विनाश,और चोरी में बढ़ोतरी होगी जिसमें निर्माण या अन्य सामाग्री क्रय  की मीकदार दोगुना मात्रा मे खरीदा जाएगा वह भी एक नही दो से तीन बारा भी उसी सामाग्री को क्रय किया जाएगा उससे भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी होगी वनों का लगातार पातन होगा जिससे वन क्षेत्रों का रकबा घटेगा साथ ही अधिकारी काष्ठ मिलों की चैकिंग, वर्षिकी लाइसेंस,मिलो  मे लगे बिजली की मासिक यूनिट खपत के आधार पर काष्ठ चिराई का मुल्यांकन सहजता से ज्ञात कर मासिक या त्रैमासिक प्रतिवेदन जांच के आधार पर उनके काष्ठों की चिराई,एवं खपत का मूल्यांकन करेंगे साथ ही इनके सामने खाली समय मे वन्य प्राणियों के शिकार किए गए शिकारी के विरुद्ध तोता, बाल, खाल, काष्ठ, पकड़ने के अलावा अब इनके समक्ष कुछ भी शेष विभागीय कार्य नही रह पाएगा.