अवैध सागौन कटाई पर वन विभाग एवं वन विकास निगम की संयुक्त कार्रवाई, 200 नग सागौन चिरान जब्ती
वन विकास निगम और रेग्युलर फॉरेस्ट की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर की कार्रवाई, अवैध कटाई और तस्करी पर सख्ती के संकेत
बारनवापारा/कछारडीह। वन संपदा की सुरक्षा और अवैध लकड़ी कटाई पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से वन विकास निगम के बारनवापारा परियोजना मंडल अंतर्गत ग्राम कछारडीह में वन विकास निगम तथा रेग्युलर फॉरेस्ट की संयुक्त टीम द्वारा कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्राम कछारडीह सागौन बहुल क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर टीम ने कार्रवाई करते हुए 200 नग सागौन से संबंधित मामले में कार्य वाही की।
बताया गया है कि ग्राम कछारडीह निवासी लगभग 55 वर्षीय संतु राम यादव, जिन्हें स्थानीय स्तर पर भाजपा नेता बताया गया है, के विरुद्ध लंबे समय से सागौन की अवैध कटाई किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित विभागीय जांच एवं विधिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।
अधिकारियों के मार्गदर्शन में संयुक्त कार्रवाई
इस कार्रवाई में रेग्युलर फॉरेस्ट के डीएफओ श्री तन्नेटी के मार्गदर्शन तथा वन विकास निगम के डीएफओ चंद्रकांत टिकरिया और एसडीओ महेश खटकर के निर्देशन की जानकारी दी गई । वहीं, रवान परिक्षेत्र के वन परिक्षेत्राधिकारी एच.आर. पैकरा के नेतृत्व में दोनों विभागों की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। तथा आरोपी के विरुद्ध वन अधिनियम की धारा 1927 के तहत कार्य वाही की गई
वन क्षेत्रों में सागौन जैसे मूल्यवान वृक्षों की अवैध कटाई से वन संपदा को नुकसान पहुंचता है। ऐसी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए वन विकास निगम और रेग्युलर फॉरेस्ट के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संयुक्त कार्रवाई से वन क्षेत्रों की निगरानी और अवैध लकड़ी के कारोबार पर नियंत्रण के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।
लगातार जारी रहेगी कार्रवाई : रामसेवक पैकरा
वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा ने कहा कि वन संपदा की सुरक्षा के लिए इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहनी चाहिए। अवैध कटाई और लकड़ी की तस्करी से जुड़े मामलों में विभाग को सतर्क रहकर प्रभावी कदम उठाने होंगे। उन्होंने वन संपदा की रक्षा के लिए निरंतर निगरानी और कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
अवैध कटाई और तस्करी पर सख्ती की तैयारी
वन विकास निगम के प्रबंध संचालक अमरनाथ प्रसाद ने बढ़ती लकड़ी चोरी और तस्करी की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने तथा प्रभावी कानूनी प्रावधानों की दिशा में कार्य करने की बात कही। उनका कहना है कि वन संपदा की सुरक्षा के लिए नियमों का प्रभावी पालन और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण आवश्यक है।
वन संपदा की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ के वन राज्य की प्राकृतिक धरोहर और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं। सागौन जैसे बहुमूल्य वृक्षों का संरक्षण न केवल वन विभाग, बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। कछारडीह में हुई इस संयुक्त कार्यवाही के बाद क्षेत्र में वन सुरक्षा, निगरानी और अवैध कटाई पर नियंत्रण को लेकर विभागीय सक्रियता बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब यह देखना होगा कि विभागीय जांच में मामले से जुड़े तथ्यों की क्या पुष्टि होती है और वन संपदा की सुरक्षा के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।




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