शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

वन विकास निगम के लोहारडीह परिक्षेत्र मे वन कर्मियों की संलिप्तता से लाखों का गौण खनिज पत्थरों का उत्खनन

 वन विकास निगम के लोहारडीह परिक्षेत्र मे वन कर्मियों की संलिप्तता से लाखों का गौण खनिज पत्थरों का उत्खनन 


अल्ताफ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छ्ग राज्य वन विकास निगम  प्रदेश के वन क्षेत्रों की भूमि को लीज पर लेकर सागौन प्लांटेशन से लेकर पातन कार्य कर अनेक वर्षों से व्यवसाय कर रहा है इसके एवज मे राज्य के मुख्य मंत्री के मध्यम से प्रति वर्ष लाखों का लाभांश राशि प्रदाय करती है परंतु वही अनेक परिक्षेत्रों के परिक्षेत्राधिकारी लगातार उक्त लाभ एवं अंतर राशि मे कांटा मार कर शासन एवं छ्ग वन विकास निगम के राजस्व को लाखों करोड़ों का चुना लगा कर भीतर ही भीतर खोखला करने मे कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है और छ्ग वन विकास निगम के मूल अवधारणा को बदल कर वन विनाश निगम के दर्जे पूर्ण स्तर मे ला कर खड़ा कर दिया गया है तथा वन विकास निगम की लुटिया डुबोने मे कोई कोताही बरती  नही जा रही है अब ताजा प्रकरण यह सामने आ रहा है कि बार नवा पारा परियोजना मंडल अंतर्गत  कोडार जलाशय के पिछले हिस्से मे जो ग्राम लोहारडीह के मुनारा क्रमांक 21 कक्ष क्रमांक आर एफ/ 853 के प्लांटेशन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर विस्तृत भूभाग मे पाषाण  पट्टिका जो कई किलो मीटर तक फैला हुआ है तथा आरंग परिक्षेत्र के अंतर्गत आता है कथित वन परिक्षेत्रों मे इन दिनों आसपास स्थित पथरीले गौण खनिज का अवैध उत्खनन बड़े जोर शोर से निर्बाध गति से कतिपय लोगों द्वारा लगातार किया जा रहा है


जबकि वन विकास निगम मे ग्राम लोहारडीह के परिक्षेत्राधिकारी मुरलीधर भोई सहित  डिप्टी रेंजर लोकेश साहू एक अन्य महिला अंकिता साहू, एक अन्य वन कर्मी की ड्यूटी रहती है ऐसी जानकारी मिल रही है परंतु इनके आँख के सामने कथित गौण खनिज पाषाण पट्टिका का दोहन  किया जा रहा है मगर चोरी करने काले तस्करों पर वन कर्मियों द्वारा किसी प्रकार की कोई वैधानिक कार्यवाही नही की जा रही है अब उन गौण खनिज पत्थर  तस्करों पर क्यों कार्यवाही नही की जा रही यह आश्चर्य का विषय है परंतु यह संपूर्ण मामला ज्ञात करने जब कोडार स्थित कक्ष क्रमांक 853 के कुछ दूरी मे वन क्षेत्रों मे जाकर देखा गया तो वहां संपूर्ण मामला पूरी मिली भगत का प्रतीत हुआ बताते चले कि यदि चोरी छुपे यदि कोई व्यक्ति पत्थर उत्खनन करता तो एकाध स्थान मे शिला पट्टिका को तोड़ता मगर कथित क्षेत्र के अलग अलग भू भाग मे अनेक स्थलों मे साइज के तोड़े गए पत्थर दिखाई दिया जो बड़ी मात्रा में डंप किया गया था इस की पुष्टि करते हुए हमने जब स्थानीय ग्रामीणों से पतासाजी की तो बहुत से चौकाने वाली बाते सामने आई बताया गया कि रात्रि के अंतिम पहर पहट के समय चट्टान तोड़ कर निर्धारित मापदंड के आकार के चौकोर पत्थरों को निकाला जाता है इसके लिए बकायदा स्थानीय और बाहरी श्रमिक लगाए जाते है वन क्षेत्रों के निकाले जाने वाले पत्थर के ठेकेदार तस्कर के संदर्भ मे  ग्राम कौवाझर, कोडार,एवं तुमगांव के बताए जाते है जो निजी ट्रैक्टर मे लोड कर महासमुंद और रायपुर मे खपाया जाता है जो भवन के नींव से लेकर आकर्षक दीवार मे महंगे दामों पर खरीद कर लगाए जाते है  उन गौण खनिज पत्थर तस्करों के नाम की स्पष्ट जानकारी नही मिल पाई है परंतु पत्यर खनन कार्य मध्य रात्रि पश्चात से लेकर दिन के दस ग्यारह बजे तक ट्रैक्टर से ढुलाई कर ली जाती है यह ग्रामीणों ने बताया 


         जबकि स्थानीय ग्रामीणों से वन विकास निगम अधिकारी कर्मचारीयों द्वारा कतिपय तस्करों पर क्या वैधानिक कार्यवाही की गई पूछने पर  वे हँसते हुए बताते है कि वे यदि इस ओर कार्यवाही करते तो वन क्षेत्रों से एक वस्तु कोई यहाँ से ले जा नही सकता क्योंकि वन क्षेत्रों मे रात दिन सुरक्षा श्रमिकों की नियुक्ति विभाग द्वारा की जाती है यानी ग्रामीणों को भी वन विकास निगम कर्मियों की कार्य शैली पर पूरी तरह संदेह है स्पष्ट करते चले कि आरंग परक्षेत्राधिकारी मुरलीधर भोई की इस पत्थर तस्करी प्रकरण मे कितनी और क्या भूमिका है यह तो नही कहा जा सकता परंतु डिप्टी लोकेश साहू का फर्जीवाडा, गबन, सागौन तस्करी, से लेकर बहुत से विवादित भ्रष्टा चार मे संलिप्तता वाले प्रकरण का मामला प्रारंभ से रहा है जैसे उनकी नियुक्ति से लेकर रायपुर स्थित भनपुरी के दो चार सॉ मिल मे सागौन सप्लाई की बात भी सामने आ चुकी है वही यह बात भी ग्रामीण दबी जबान से गौण खनिज पत्थरों की उनकी सहभागिता बताई जा रही तभी तो वे उन तस्करों पर किसी प्रकार की कोई वैधानिक कार्यवाही न करते हुए वन क्षेत्रों मे खुले आम चट्टानी पत्थरों का दोहन इन कथित वन कर्मियों की मिली भगत से जारी है अब यह कितनी सत्यता है यह तो वन विकस निगम के विभागीय जांच पर ही सामने आ सकती है


क्योंकि यदि नियमानुसार किसी व्यक्ति द्वारा गौण खनिज चट्टानी पत्थरों का दोहन वैधानिक तरीके से किया जाता तो पहले खनिज विभाग से बकायदा  लाइसेंस अनुमति लेकर पर्यावरण विभाग से एन. ओ.सी. तथा वन विभाग से एन. ओ. सी. लेकर विधिवत परिपत्र जारी कर  खनन करता परंतु किसी प्रकार की शासकीय  अनुमति न ले कर आरंग वन क्षेत्रों से पत्थरों का अवैध उत्खनन करना सीधे विभागीय कर्मचरियों के साथ मिली भगत कर विभाग और शासन के लाखों,करोड़ों, के राजस्व को चोट पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है जो बहुत गंभीर विषय है अब इस संदर्भ पर छ्ग राज्य वन विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारी लगातार वन क्षेत्रों से पत्थरों की चोरी तस्करी मे किन किन संलिप्त कर्मियों के विरुद्ध क्या बड़ी कार्यवाही करते है यह अब देखना होगा ? 


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