मंगलवार, 2 अप्रैल 2024

वन विकास निगम के रवान परिक्षेत्र दावानाल की चपेट मे

 वन विकास निगम के रवान परिक्षेत्र दावानाल की चपेट मे 



रायपुर  छ्ग राज्य वन विकास निगम के बार नवापारा परियोजना मंडल स्थित रवान परिक्षेत्र मे कक्ष क्रमांक 117/118 मे सघन वन क्षेत्र मे दावानाल लगने से कई छोटे बड़े पेड़ आग की चपेट मे आ गए और लगभग दो सौ मीटर अधिक क्षेत्र मे दूर से क्षेत्र मे आग की लपट उठती दिखाई पड़ रही थी जिस वक्त दावानाल की लपटे दूर से दिखा रही थी तब तक कोई वन विकास निगम कर्मचारी  नही था जब फॉरेस्ट क्राईम समाचार पत्र के पत्रकार वीडियो ले रहे थे उसके पश्चात चौकीदार पहुंचा तब तक भीषण आग तेजी से फैल चुकी थी चौकीदार से पूछने पर बताया की तेंदुपत्ता और महुआ बिनने वाले लोग प्रायः बीड़ी का शुट्टा मारते है और सुखे पत्तों मे फेक देते है जिसकी वजह से क्षेत्र के वनों मे बड़ी हानि होती है इसके पश्चात आनन फानन मे कुछ वन विकास निगम वन कर्मी पहुंचे और आग के इर्द गिर्द लाइनिंग खीच कर बनाए 

   गौर तलब है कि कक्ष क्रमांक 117/ एवं 118 में वर्षिकि विरलन कार्य संपादित हुआ है जिसमे बहुत से क्षेत्र में सगौन  काष्ठ की थप्पी लगी हुई है आशंका व्यक्त की जा रही है की कुछ  जलाऊ चट्टे दावानाल  की चपेट मे आकर भस्म हो गए है सागौन थप्पी मे आग लगी या नही यह ज्ञात नही हो पाया है 

शुक्रवार, 29 मार्च 2024

वन विकास निगम या महा विनाश निगम गडबड़, घोटाला,भ्रष्टाचार का अडडा बना

 वन विकास निगम या हा विनाश निगम  

गडबड़, घोटाला,भ्रष्टाचार का अडडा बना



अलताफ़ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) विगत दिनों छ्ग राज्य वन विकास निगम के बार नवापार परियोजना मंडल के अंतर्गत रवान के कक्ष क्रमांक 116 के टीपी 02 मे माह 07-05-2023  वित्तीय वर्ष 2022-2023 मे भौतिक विदोहन  कार्य किया गया था जिसमे लगभग 95 अर्थात सौ घन मीटर का पातन किया जाना सुनिश्चित था परंतु रवान के डिप्टी रेंजर लोकेश साहू ने वरिष्ठ अधिकारियों के बगैर अतिरिक्त आदेश पत्र के 95 घन मीटर के स्थान पर दो सौ तीस से उपर घन मीटर अर्थात लक्ष्य से 130 घन मीटर अतिरिक्त विरलन कर दिया गया जब तक मामला उपर पहुंचे उस पर लीपा पोती कर ठंडे बस्ते मे डाल दिया गया क्योंकि गोशवारा और अन्य प्रमाणको,दस्तावेज मे कुछ हस्त लिखित स्थान से मामले को दबाने का प्रयास किया गया अब सवाल यह उठता है कि क्या परिक्षेत्राधिकारी रवान को इसका भान था? बार डिप्टी डी. एम. चित्रा मैडम को इसकी भनक थी ? यदि थी तो इस अधिक विरलन को रोका क्यो नही गया?  क्या इसके पीछे वन विकास निगम के अन्य अधिकारियों की मिली भगत थी ? जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही है यदि इतने बड़े पैमाने पर कटाई का हो जाना उस पर लोकेश साहू डिप्टी रेंजर वन विकास निगम के किसी कर्मचारियों पर  कार्यवाही नही किया जाना एक सोची समझी साजिश के तहत लक्ष से अधिक विरलन किया गया है परिणामतः उसी डिप्टी लोकेश साहू एवं अन्य कर्मियों को रवान परिक्षेत्र मे वित्तीय वर्ष 2023-2024 के सागौन विरलन का दायित्व सौंप दिया गया जिसमे हाल ही कक्ष क्रमांक 117/ 118 मे बड़ी संख्या मे पातान किए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है क्योंकि कक्ष क्रमांक 117/के विरलन कार्य मे सागौन की  टॉप A/क्वालिटी की कुल संख्या 261 सहित अन्य मिश्रित प्रजाति की संख्या 295 दर्शाई गई है जिनका कुल योग 556 दर्शाया गया है वही भीतर खोखले वृक्ष की संख्या अधिक है परंतु 100परिपक्व सागौन जो स्वस्थय एवं  लंबाई गुणित ऊँचाई, एवं गोलाई से अधिक मानक की दिखाई दे रही है यही नही बहुत से काष्ठों मे माकिंग, एवं हैमर भी नही दिखाई दे रहा है इससे स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि इस वर्ष2023-2024 मे भी विरलन कार्य मे दाल मे कुछ काला है जबकि उससे दो गुणा अधिक सागौन एवं जलाऊ काष्ठ  चट्टे की संख्या दिखाई दे रही है  वही फलदार पौधे की संख्या 54 है जिसका मूल्यांकन, अनुमति किया जाना मूल वन विभाग से  आवश्यक हो जाता है बता दे कि छ्ग राज्य वन विकास निगम छ्ग शसन से लीज भूमि (किराएदारी) पर सागौन प्लांटेशान कर वनों का विदोहन कर निगम संचालित करती है इसके एवज मे वर्षिकि लाभांश राशि देती है परंतु मूल सागौन की आड़ मे प्रकृति वनों का दोहन कर एक प्रकार से वर्षों से अमानत मे खयानत करती आ रही है


और छ्ग राज्य वन विकास निगम  मूल विभाग से किसी प्रकार की गणना मूल्यांकन,अनुमति अथवा एन ओ सी नही ली जाती है तथा मनमाने तरीका से मूल सागौन के अलावा प्राकृतिक रूप से वनों की शोभा बढाने वाले सभी मिश्रित प्रजाति के वृक्षों का विरलन कर छ्ग वन विकास निगम द्वारा आर्थिक लाभ वर्षो से उठाया जा रहा है तथा मूल वन को नष्ट किया जा रहा है  ज्ञात हुआ है कि लोकसभा चुनाव पश्चात बार नवापारा अभ्यारणय का विस्तार प्रस्तावित है जिसमे तीन ग्राम को व्यवस्थापन किया जान साथ ही वन विकास निगम को बार परियोजना मंडल से पृथक अन्यन्त्र  किए जाने की चर्चा हो रही है इसका लाभ उठाते हुए निगम कर्मचारी यथा संभव रवान परिक्षेत्र से लक्ष्य से अधिक सागौन सहित अन्य काष्ठों का पातन कर पूरा लाभ उठाने का प्रयास किया जा रहा है ऐसी चर्चा जोरों पर है यदि आर टी आई मे प्रगति प्रतिवेदन निकासी पंजी निकाला जाए तो बहुत से कटाई के प्रकरण  सामने आएंगे जिसमे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा क्योंकि 95 घन मीटर से अधिक दो सौ तैतीस  घन मीटर अर्थात सौ घन मीटर से अधिक एक सौ तैतीस घन मीटर अधिक का विरलन करना कोई भूल चूक त्रुटि वश नही हो सकता वह डी एम एवं डिप्टी डी.एम. परिक्षेत्राधिकारी बार नवापारा परियोजना मंडल की जानकारी  के बगैर संभव नही है परंतु इतना संवेदन शील मामला होने के बावजूद छ्ग राज्य वन विकास निगम के आला अधिकारी के सिर मे जूं तक नही रेंगी और ना ही डिप्टी रेंजर लोकेश साहू एवं अन्य संलिप्त अधिकारी पर कोई विभागीय कार्यवाही नही हुई बल्कि उसे ही बार परियोजना मंडल के रवान परिक्षेत्र मे कक्ष क्रमांक 117/118/ वित्तीय वर्ष 2023/2024 के पातन कार्य का उत्तर दायित्व सौंप दिया गया स्वभाविक है उसके द्वारा पुनः क्षेत्र मे गड़बड़ घोटाला करने मे किसी प्रकार का गुरेज नही करेगा तथा भ्रष्टाचार का यह खेल अनवरत जारी रहेगा  हालांकि सौ घन मीटर के स्थान पर एक सौ तैतीस घन मीटर अतिरिक्त सागौन विरलन  काष्ठ का वन विकास निगम ने कोडार काष्ठागार मे क्या किया यह भी लगातार सवाल उठाया जा रहा है क्योंकि गणना और लगभग 13 ट्रैक्टर परिवहन कर 133 घन मीटर क्षमता से अधिक सागौन काष्ठ उसकी भी नीलामी गत चालू वित्त वर्ष मे की गई होगी फिर उसकी अर्जित आय की राशि कहाँ गया यह विचारणीय पहलू है ? 


आरंग पारिक्षेत्र के रेंजर युवराज देवांगन द्वारा जनवरी माह 2024 मे राष्ट्रीय वृक्ष साल काटने के उद्देश्य से लोहारडीह ग्राम के एक व्यक्ति को पकड़ा जिसका  बाजार मूल्य लगभग  80 हजार से एक लाख बताया गया था परंतु आरंग रेंजर युवराज देवांगन् ने मात्र दस हजार रू. फाइन लगा कर उसे छोड़ दिया गया यही नही इस संदर्भ मे भी कोई वैधानिक कार्यवाही नही की गई बताते चले कि छ्ग राज्य वन विकास निगम मे लगभग नौ परियोजना मंडल है जहां बार और पानाबरस परियोजना मंडल के काष्ठागार मे वार्षिकी बारह माह यानी प्रति माह नीलामी निविदा बुलाई जाती है जिसमे नागपुर, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से बिचौलिए ठेकेदार बड़ी मात्रा मे उपस्थिति होते है तथा तीन से सात करोड की नीलामी होती है जो औसतन पांच करोड़ रुपये  प्रति माह मानी जाती है उस हिसाब से बारह माह मे एक परियोजना मंडल बार मे ही पचास से साठ करोड़ रुपये आय अर्जित करती है यही स्थिति पानाबरस परियोजना मंडल की भी है उक्त हिसाब से दो ही परियोजना मंडल मे लगभग सौ करोड़ से लेकर एक सौ बीस करोड़ तक आय प्राप्त करती है उस हिसाब से सात अन्य परियोजना मंडल जिनमे कोटा पंडरीया,अंतागढ़ जगदलपुर जैसे काष्ठागार मे छोटे बड़े नीलामी से दो सौ करोड़ से उपर अतिरिक्त आय बड़ी सहजता से मिला जाता है लगभग कुल तीन सौ  करोड़ उपर वन विकास निगम की वार्षीकि आय आना आंका जा रहा है जिसमे आई पी डी योजना, सहित रेलवे एवं अन्य शासकीय सैक्टर मे पथ रोपण पलांटेशन से अतिरिक्त आय प्राप्त हो जाता है जिसका भुगतान नगद कैश मिलता है फिर भी तीन सौ करोड़ से उपर  वार्षिकि आय वाले छ्ग राज्य वन विकास निगम बजट का रोना रोते रहता है एक जानकारी मे अनुमानित व्यय जिसमे सौ करोड़ रुपये  आठ सौ से हजार दैनिक वेतनभोगी,रेग्युलर,अनुकंपा कर्मचरियो को वेतन मान देय प्रदाय करता है वही रोपण प्लांटेशन  सहित अन्य विभागीय कार्य मे सौ करोड़ वहन किया जाता होगा शेष  सौ करोड़ से उपर की राशि जाती कहां है? या सिर्फ कमीशन खोरी, और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है ?  जो अब भी आम जन के लिए विचारणीय पहलू है वही सवा दो करोड़ की लाभांश राशि राज्य शासन को भेंट की जाती है जो...उंट के मुँह मे ज़ीरा... के समान लगता है जबकि निजी संस्थान का कथन है कि यदि वन विकास निगम निजी हाथों मे दे दिया जाए तो उससे चार गुणा अधिक राज्य शासन को लाभांश राशि प्रदान कर सकते है मगर यहाँ तो गड़बड़ घोटाला, भ्रष्टाचार, कमीशन खोरी जैसे खून का ऐसा मुँह लगा हुआ है कि वरिष्ठ से कनिष्ठ, और फॉरेस्ट गार्ड तक के वन कर्मी भ्रष्टाचार मे आकंठ डूबे हुए है यही वजह है कि छ्ग राज्य वन विकास निगम  मे कभी भी ट्रांसफर, तबादले अन्य स्थानों पर नही होते या विशेष परिस्थितियों मे  ही भेजे जाते है जबकि देखा यह जा रहा हौ कि 15 से 35 वर्षों से एक ही स्थान मे निगम  कर्मी अपना जीवन यापन कर चुके है इसका मूल कारण है कि पैतृक ग्राम क्षेत्र के वनों को वे भली भांति समझते है तथा सभी गड़बड़ घोटाले भ्राष्टचार करने मे आसानी और सहजता महसूस होती है यही वजह है कि वन विकास निगम मुख्यालय मे कुंडली मार कर बैठे भोजराज जैन बहुत से कार्यों का निष्पदन यही कर देते है यदि किसी कर्मचारियों का प्रमोशन, या क्रमोन्नति, ट्रांसफर, होता है तो वे उपर रुपये देकर अपने गृह ग्राम क्षेत्र मे अपनी मन माफिक नियुक्ति करवा कर अपना जीवन यापन बड़े मजे से करते है इसके दुष्परिणाम यह होता है कि बहुत से कर्मचारी वानिकी एवं अन्य कार्यों से अनभिज्ञ एवं शून्य रहते है उनके कार्य शैली की क्षमता सुस्त एवं नगण्य हो जाती है फिल्ड के करीब रहने से रोपित सागौन प्लांटेशन की देख रेखा सुरक्षा नही हो पाती, लगातार चोरी बढ़ जाती है जिसका ताजा तरीन उदाहरण स्थानीय क्षेत्र मे रहने के कारण लोकेश साहू जैसे डिप्टी कर्मचारी भ्राष्टाचार करने मे कोई गुरेज नही करते और सघन वनों का सफाया बड़ी आसानी से करते रहते है मजे की बात यह है कि ऐसे संवेदनशील टार्गेट से अधिक कटाई पर विभाग का डंडा भी नही चलता इसका आशय यह है कि.....सैंय्या भयो कोतवाल...तो अब डर  काहे का....वाली उक्ति चरितार्थ होते नजर आती है 


क्योंकि वन  विकास निगम मे बड़े से बड़ा भ्रष्टाचार हो या घृणित कार्य मे लिप्त कर्मी हो उन्हे पूरे सम्मान के साथ सेवा कार्य मे रखा जाता है जैसे बड़े बड़े घोटाले हुए मगर ले दे कर मामला सुलटा लिया जाता है एक साक्षात उदाहरण जागृत देवांगन् को ही ले लिया जाए जो होटल मे वेश्याओं के  साथ रंगे हाथों पकडा गया तीन माह जेल की हवा खाई विभागीय छिछालेदर होने पर साल भर कार्य से पृथक रखा गया परंतु उसे पुनः वन विकास निगम  बार परियोजना मंडल कार्यालय मे बहाल कर दिया गया सवाल उठता है कि गंभीर अपराध मे संलिप्त जागृत देवांगन् को किस आधार पर  उसे महिमा मंडित कर बहाल किया गया उसकी नियुक्ति को लेकर भी बहुत से सवाल उठाया जा रहा है कि  उस के कृत्य को छुपाने जागृत देवांगन् पर विभाग किसी प्रकार की कार्यवाही नही की जा रही है



 उसी के समान बिलासपुर कोटा पंडरीया के श्री हरि पर भी नौकरी लगाने के नाम पर दैहिक शोषण का आरोप लग चुका है रायपुर मे भी ऐसे ही एक कर्मचारी का नाम आ चुका है पाना बरस के  राहुल शुक्ला द्वारा भी नौकरी लगाने के नाम पर लाखों रुपये गबन कर चुका है जिसके नाम की प्राथमिक रिपोर्ट बिलासपुर मे दर्ज है कथन आशय यह है कि सारे जरायम  पेशा कर्मचारियों का पनाहगाह छग राज्य वन विकास निगम बन गया है?इन पर कभी ठोस कार्यवाही होगी अथवा नही ? यदि इसी प्रकार की ढुल मूल नीति रही तो बहुत से निगम कर्मचारी इसी प्रकार के छोटे बड़े अपराध मे संलिप्त रहते हुए बेखौफ कार्यों का निष्पादन करते रहेंगे यही वजह है कि रेगुलर  और अनुकंपा नियुक्ति कर्मचारी मनमाने तरीके से कार्यों को अंजाम दे रहे है वही आधे से अधिक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी  जिनमे कई तो सेवा निवृत हो चुके है और कई आज भी वर्षों से अपने नियमितिकारण की राह देख रहे है परंतु वन विकास निगम इस ओर कोई सार्थक कदम नही उठा पाया कुछ कर्मियों का कथन है कि अरबों रुपये की आय यही अनियमित दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी ही देते है इसके एवज मे छ्ग वन विकास निगम  को भ्रष्टाचार और गड़बड़ घोटाला करने मे फुर्सत ही नही है और तुर्रा इस बात का है कि उन्हे वेतन देने मे राशि नही तो फिर अरबों की राशि आती है तो फिर जाती कहाँ है यह सवाल प्रत्येक दैनिक  वेतन भोगी कर्मचरियों के समक्ष सुरसा की भाँति मुह फाड़े पूछ रहा है?इसका जवाब वन विकास निगम को देना तो बनता है. 

रविवार, 17 मार्च 2024

हरे पेड़ के काष्ठ से निकलते धुंएँ का काला भट्टा

 हरे पेड़ के काष्ठ से निकलते धुंएँ का काला भट्टा


अलताफ हुसैन 

फॉरेस्ट क्राइम  न्यूज़

रायपुर वन मंडल रायपुर के अंतर्गत क्षेत्र भर मे बाबुल,कहुवा,बेर,अर्जुन सहित अनेक मिश्रित प्रजाति के परिपक्व हरे भरे पेड़ पौधों का विनाश काष्ठ तस्करों द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है तथा ऐसे परिपक्व इमारती कष्ठों का उपयोग किसी फार्निचर या जन उपयोगी सामाग्री निर्माण के लिए नही बल्कि कुछ निजी आर्थिक  लाभ उठाने के लिए उपयोग किया जा रहा है क्षेत्र मे जलाऊ चट्टा के नाम पर बेचे जाने वाले आड़े तिरछे लकड़ी की आड़ मे परिपक्व   बड़े बोल्ड काष्ठों को धुँवा धूसरित कर काले कोयला के भट्टे मे झोंक दिया जा रहा है इसके एवज मे दो चार हजार रुपये देकर पानी के मोल कौडियों मे ट्रैक्टर से भरे काष्ठों का निर्बाध गति से परिवहन हो रहा है मजे की बात यह है कि रायपुर वन मंडल क्षेत्र मे लगभग आधा दर्जन भट्टे अवैध रूप से संचालित हो रहे है मगर रायपुर वन मंडल के अधिकारी, कर्मचारी मौन रूप धारण कर आँख बंद कर तमाशा देख रहे है जिसकी वजह से रायपुर वन मंडल अंतर्गत काष्ठ तस्करों द्वारा हरे भरे पेडों का लगातार विरलन कर धुंआ उगलते काले कोयला भट्टी का यह अवैध कारोबार बड़ी तेजी से क्षेत्र मे फल फूल रहा है 

        इस संदर्भ मे फॉरेस्ट क्रइम न्यूज़ ने रायपुर क्षेत्र मे चार से छ स्थानों पर कोयला भट्टी मे जाकर पडताल किया गया जहा आसपास ग्रामीणों से ज्ञात करने पर कुछ लोगों से जानकारी ली तब बताया गया कि  कोयला भट्टा संचालको ने अब तक  किसी प्रकार का वन विभाग से लाइसेंस नही लिया गया है और न ही लगातार निकलते लकड़ी के धुआँ के गुबार की रोक थाम के लिए पर्यावरण विभाग से  कोई एनओसी नही लिया गया यही नही अवैध रुप से काष्ठों  का लेखा जोखा भी नही है क्योंकि क्षेत्र से काष्ठ तस्करों द्वारा सैकड़ों ट्रैक्टर ट्राली अवैध काष्ठों का परिवहन बदस्तुर् जारी है मगर उनके पास भी कटाई का कोई लाइसेंस अथवा वन विभाग से टी. पी. जारी नही किया गया तब ऐसी परिस्थिति मे टनों से ट्रैक्टर ट्राली से अवैध काष्ठ का परिवहन  कोयला भट्टी मे कहाँ से पहुँच रहा है और लगातार रात दिन सभी मिश्रित प्रजाति के काष्ठ स्वाहा कैसे किया जा रहा है इस संदर्भ मे बताया जाता है कि कोयला निर्माण पश्चात ईधन के रूप मे किलो कि दर पर स्थानीय बाजार सहित अन्य क्षेत्र मे विक्रय किया जाता है जिसकी आया लाखों मे बताई गई है जबकि बताते है कि कोयला व्यवसायी काष्ठ माफियाओं से  सांठ गांठ कर कम दर पर जलाऊ चट्टा और परिपक्व बट्टा के मिले जूले काष्ठ कि तस्करी कर भट्टी मे कोयला निर्माण कर लाखों रुपये का व्यवसाय कर रहे है वर्तमान  मे इसका खुदरा बिक्री 40 से 50 रुपये प्रति किलो भट्टे का कोयला बिक रहा है तथा  वन क्षेत्रों का दोहन कर वन विभाग के राजस्व की क्षति पहुंच कर वनों को खोखला कर रहे है ग्राम फरफौद, सेजा, बोहरही मेला, तिल्दा,बैकुठ, सहित बहुत से क्षेत्र मे बगैर वन विभाग से लाइसेंस, और पर्यावरण विभाग से एन ओ सी लिए बगैर काटे गए लकड़ी पहुंचकर अवैध कोयला भट्टा संचालित हो रहा है इसके अवैध कोयला संचालन के पीछे वही कुछ भट्टा व्यपारी रसुख दारों से सेवाएं ले रहे है जिनमे आसपास के सफेद पोश छुट भैय्या नेता, विभाग के कर्मी और चैनल के पत्रकार से मिल कर उनका परिचय होने की बात बता कर पहुँच बता रहे है एक प्रकार से उनके संरक्षण मे गोरे लोगो का काला धंधे का  व्यापार चल रहा है 

    बताते चले  कि राज्य शासन लाखों करोड़ों रुपये कि लागत लगा कर प्रदेश को हरा भरा बनाने प्लांटेशान करता है ताकि हरियाली  बढ़ा कर  प्रदूषण से लोगों को राहत दे परंतु ऐसे हरित क्रति के दुश्मन अपने निजी अर्थ व्यवस्था का लाभ उठाने हरियाली को नेस्त नाबूत करने तुले हुए है ऐसे मे प्रदेश मे हरियाली की परिकल्पना करना भी बेमायनी होगी

शुक्रवार, 8 मार्च 2024

हाड़ाबांध के ग्रामीण किसान वृक्ष मित्र योजना से बदल रहे तकदीर

 हाड़ाबांध के ग्रामीण किसान वृक्ष मित्र योजना से बदल रहे तकदीर  


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (छ्ग वनोदय पत्रिका)  घटते वन बढ़ते प्रदूषण असंतुलित जलवायु वातावरण एवं परिवर्तित होते  ऋतु की मार से ग्लोबल वार्मिंग ने  विश्व मे होने वाली प्राकृतिक आपदा संकट और सुरक्षा के दृष्टिकोण से छ्ग  प्रदेश का वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग नाना प्रकार के जतन कर हरियाली लाने का प्रयास कर रहा है इसके लिए प्रदेश भर के रिक्त पड़त भाटा बंजर भूमि मे हरे भरे पेड़ पौधों का प्लांटेशन कर हरियर छ्ग योजना के तहत हरित क्रांति लाने सदैव प्रयास रत रहा है वही पूर्ववर्ती सरकार जल संरक्षण के उद्देश्य से  वन क्षेत्रों मे नरवा जैसी योजनाओं के मध्यम से वर्षा ऋतु के व्यर्थ जल को स्टॉप डेम,चेक डेम का निर्माण कर जल संकलित कर वनों एवं कृषकों के फसल मे नमी युक्त वातावरण निर्मित करने का प्रयास किया था वहीं आम जन के स्वास्थ की चिंता करते हुए प्रदूषण मुक्त माहौल के दृष्टिकोण  से ग्रामीण क्षेत्र के रिक्त भू खंडों नगर परिषद,पालिकाओं पंचायतों के आसपास क्षेत्र मे धार्मिक आस्था से जुड़े पेड़ पौधों का निर्माण कर आकर्षक हरियाली युक्त खुशनुमा कृष्ण कुंज का निर्माण कर स्वच्छ, एवं स्वस्थ्य वर्धक वातावरण निर्मित किया गया इसी शृंखला मे पूर्ववर्ती सरकार ने वन क्षेत्रों का रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्य मंत्री वृक्ष संपदा योजना का शुभारंभ किया गया था जो वर्तमान मुख्य मंत्री श्री विष्णु देव साय ने उक्त योजना किसान वृक्ष मित्र योजना के नाम से प्रारंभ किया गया जो प्रदेश भर के किसानो के लिए वरदान साबित हो रहा है साथ ही इसके आशातीत सफलतम परिणाम भी परिलक्षित हो रहे है 


  वित्तीय वर्ष 2022-2023 मे उक्त किसान वृक्ष मित्र योजना के प्रारंभिक चरण मे लाभार्थी कृषक काफी असमंजस की स्थिति मे थे कि खेत खलिहानो मे किसान वृक्ष मित्र योजना से किस प्रकार लाभान्वित होंगे परंतु वन विभाग के प्रशिक्षित सिद्ध हस्त अनुभवी वन कर्मीयों द्वारा किसान वृक्ष मित्र योजना और इसके भविष्य मे होने वाले लाभ को प्रशिक्षण के मध्यम से कृषको को समझाया तब बहुत से हितग्राही कृषक अपने खेतों मे बहुत से इमारती वृक्ष,सगौन, बांस, चंदन,इत्यादि का रोपण किया जिसके एक ही वर्ष मे  सार्थक परिणाम सामने आने लगे है इस संदर्भ मे महासमुंद के युवा उर्जावान वन मंडलाधिकारी पंकज राजपूत बताते है कि किसान वृक्ष मित्र योजना का लाभ उन कृषकों को प्राप्त होगा जो अपनी निजी भूमि का सही मुल्यांकन कर शासन की उक्त योजना का लाभ उठा रहे है तथा टेशू कल्चर सगौन रोपण सहित बांस, चंदन नीलगिरी जैसे भिन्न भिन्न प्रजाति के पौधों का रोपण कर लाभान्वित हो रहे है रोपण एक वर्ष मे अच्छा ग्रोथ कर रहे है महासमुंद डी.एफ.ओ.पंकज राजपुत आगे बताते है कि किसान वृक्ष मित्र योजना का समुचित लाभ हितग्राही कृषक आने वाले पांच,से दस पंद्रह वर्ष पश्चात भविष्य निधि के रूप मे उठा सकेंगे महासमुंद डीएफओ. राजपूत आगे बताते है इसके लिए वन एवं जलवायु,परिवर्तन विभाग सभी प्रकार के वित्तीय सहयोग सामाग्री  सुविधाए उपलब्ध करा रही है जिसमे बीज से  लेकर पेड़ पौधे,रोपण यहाँ तक उपचार निंदाई गुड़ाई कार्य तक दो वर्षों तक वितीय सहयोग सीधे बैंक खाते के मध्यम से हितग्राहियों को प्रदान कर रही है केवल उन्हे स्वयं की भूमि एवं रोपित पौधों की, सिंचाई, सुरक्षा देखरेख  इत्यादि की ही सुविधा उपलब्ध करानी है इसमें वन विभाग को क्या लाभ मिलेगा पूछने पर महासमुंद डी.एफ.ओ.पंकज राजपूत  बताते है कि आने वाले पांच,से दस,पंद्रह वर्षों पश्चात कृषकों को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा इसके लिए, सगौन, बांस सहित अन्य रोपित उपज के लिए वन विभाग बाजार भी उपलब्ध कराएगी जिसके लिए समर्थन मूल्य में काष्ठ क्रय कर विभाग अंतर लाभांश का अंश लाभ पश्चात शत प्रतिशत राशि तत्कालिक बाजार मूल्य का लाभ हितग्राहियों को उनके सीधे बैंक खाते मे डाली जाएगी बताया जा रहा है कि इसके लिए कुछ कंपनी से एम ओ यू भी किया जा चुका है  महासमुंद वन मंडलाधिकारि पंकज राजपूत आगे बताते है कि वन विभाग की मंशा यह है कि वनों का रकबा और क्षेत्रफल मे इजाफा हो वन क्षेत्र का अस्तित्व विस्तारित हो उन्होंने बताया वन मंडल महासमुंद सहित प्रदेश भर मे जगह जगह किये जा रहे प्लांटेशन,नगर वन, कृष्ण कुंज, बिगड़े वनों का सुधार किसान वृक्ष मित्र योजना इसी का एक उदाहरण प्रारूप है जिससे वन क्षेत्र मे वृद्धि एवं हरियाली के साथ प्रदूषण मुक्त जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग से लड़कर परिवर्तित होते असंतुलित वातावरण को संतुलन किया जा सके


वही महासमुंद के अनुभवी एस.डी.ओ. वाहिद खान साहब बताते है कि महासमुंद वन मंडल क्षेत्र जो सर्वाधिक प्रदेश का सबसे बड़ा वन मंडल क्षेत्र है जहां पर किसान वृक्ष मित्र योजना का बेहतर परिणाम सामने आए है इसे देखते हुए वन मुख्यालय के अंतर्गत संपूर्ण प्रदेश मुख्यालय मे विगत एक वर्षों मे योजना लाभ का लक्ष्य लगभग तीन लाख चार सौ तिरसठ पेड़ लगाए गए है जिसकी वर्तमान स्थित अस्सी प्रतिशत अर्थात संतोष जनक है यह स्थिति मई 2024 मे और वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की गई है महासमुंद उप वनमंडलाधिकारी वहिद खान आगे बताते है कि सभी सागौन,एवं अन्य पौधे अनुसंधान विस्तार लैब मे टेशू कल्चर के मध्यम से आधुनिक पद्धति से उगाए गए पौधे है जिसका ग्रोथ  समान्य प्राकृतिक पौधों की तुलना मे बड़ी तेजी के साथ कम समय मे बढ़त बनाए रखता है यही वजह है कि रोपित पौधे वर्तमान समय मे जीवित और स्वस्थ्य स्थिति मे है और लगातार ग्रोथ कर रहे है इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि इसकी ऊँचाई दस से बारह फिट ऊँची पहुँच चुकी है  महासमुंद् उपवन  मंडलाधिकारी वहीद खान  आगे बताते है कि किसान वृक्ष मित्र योजना का लाभ आस पास के ग्रामीण लगातार उठा रहे है वित्तीय वर्ष 2023-2024 मे आम हितग्राही स्वमेव विभाग कर्मियों से संपर्क कर किसान वृक्ष मित्र योजना का लाभ उठाने पंजीयन करवा रहे है वन मंडल महासमुंद क्षेत्र मे इसका ग्राफ लगातार बढ़ रहा है बागबाहरा परिक्षेत्र अंतर्गत खल्लारी परिवृत के हाड़ा बंध के बहुत से ग्रामीण शासन के इस किसान वृक्ष मित्र योजना से लाभांवित हो रहे है


इस संदर्भ मे बाग़बाहरा परक्षेत्र के संवेदन शील ऊर्जवान कर्तव्य निष्ठ, समर्पित,समभाव,जीवट एवं जुझारू प्रवृत्ति के परिक्षेत्राधिकारी लोक नाथ ध्रुव बताते है कि बागबाहरा परक्षेत्र के खल्लारी परिवृत् हाड़ाबंध ग्रमीणों कि तकदीर बदल रही है वहां की मिट्टी काफी उपजाऊ है बांस, नीलगिरी, के पौधे लगातार ग्रोथ कर रहे है वही चंदन की स्थिति तनिक नाजुक है संभवतः वहाँ की मिट्टी जलवायु, वातावरण उसके अनुकूल नही होना बताया जा रहा है बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी लोक नाथ ध्रुव बताते है कि बागबाहरा खल्लारी परिवृत् के हाड़ाबंध ग्राम क्षेत्र मे 155 हितग्राही उक्त योजना का लाभ उठा रहे है कुल 3.13 हेक्टेयर में लक्ष्य प्राप्ति है वही बहुत से कृषक हितग्राही योजना का  लाभ उठाने प्रयासरत है किसान वृक्ष मित्र योजना के बागबाहरा, खल्लारी परिवृत मे सफलतम रोपण के संदर्भ मे परिक्षेत्राधिकारी श्री ध्रुव बताते है कि उपजाऊ मिट्टी एवं पहाड़ी क्षेत्र मे ढलानी क्षेत्र होने के कारण खेत मे बारह मासी  नमी बनी रहती है जिसके बेहतर परिणाम परिलक्षित हो रहे है तथा सभी रोपित पौधे स्वस्थ्य एवं ग्रोथ कर रहे है 


बागबाहरा रेंजर लोकनाथ ध्रुव बताते है कि वन विभाग का लक्ष्य वन क्षेत्रों को हरा भरा बनाना है इसके लिए जन भागीदारी सुनिश्चित कर खेत खलिहान  जो फसल पश्चात पूरी तरह सपाट चटियल  मैदानी क्षेत्र नज़र आता है छ्ग राज्य शासन ऐसी किसान वृक्ष मित्र योजना का सफल क्रियान्वयन लागू कर सपाट होते खेत खलियानो मे हरियाली विस्तार के साथ आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे  परिक्षेत्राधिकारी श्री ध्रुव आगे बताते है 



कि किसान वृक्ष मित्र योजना का सफल क्रियान्वयन के पीछे महासमुंद डी एफ ओ पंकज राजपूत, उप वन मंडलाधिकारि वहिद खान का बहुत बड़ा योगदान रहा है जो समय समय पर वन कर्मचारियों और हितग्राहियों के खेतो मे जाकर दिशा निर्देश देकर मॉनिटरिंग करते रहे है वही मैदानी अमलो मे  खल्लारी परिवृत के काष्ठागार प्रभारी डिप्टी नरेंद्र चंद्राकर,पूरी तनम्यता से लगातार हाड़ाबंध के कृषकों से संपर्क कर योजना को सफल बनाने मे पूर्ण योगदान दिया

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2024

सागौन विरलन करना था सौ घन मीटर कर दिया दो सौ तीस घन मीटर बार के डिप्टी का कारनामा

 सागौन विरलन करना था सौ घन मीटर कर दिया दो सौ तीस घन मीटर 

बार के डिप्टी का कारनामा

अलताफ़ हुसैन द्वारा 

रायपुर  यह कटु सत्य है कि एक बार पुनः वन विकास निगम के कर्मचारी द्वारा बड़ी घोर लापरवाही बरती गई अब इसे लापरवाही कह ले या फिर भ्रष्टाचार गड़बड़ घोटाले करने का एक सशक्त सु अवसर माध्यम मान ले क्योंकि गणना और मार्किग के पश्चात सीधे थोड़ी बहुत कमोबेश नही बल्कि दोगुनी मात्रा मे सागौन विरलन कर दिया गया यह सीधे सीधे गढ़बड़ घोटाला कर भ्रष्टाचार करने की मंशा नही तो और क्या है ?  बार नवापारा परियोजन मंडल अंतर्गत  रवान परिक्षेत्र मे कक्ष क्रमांक 116 के टीपी 02 मे माह 07-05-2023  वित्तीय बर्ष 2022-2023 मे भौतिक विदोहन  कार्य किया गया था जिसमे लगभग 95 अर्थात सौ घन मीटर का पातन किया जाना सुनिश्चित था परंतु रवान के डिप्टी रेंजर लोकेश साहू ने वरिष्ठ अधिकारियों के बगैर अतिरिक्त आदेश पत्र के 95 घन मीटर के स्थान पर दो सौ तीस से उपर अर्थात  130 घन मीटर अतिरिक्त   विरलन कर दिया गया इस संदर्भ मे ज्ञात हुआ है की वन विकास निगम पातन कार्य से पूर्व एक अथवा दो वर्ष पूर्व गणना कार्य करती है जिसमे आगामी वित्तीय सत्र मे गणना और मार्किंग कर उतने ही कूप मे मार्किंग कर चालू वितीय वर्ष मे परिपक्व सागौन का विरलन करती है कटाई पश्चात काष्ठों पर गेरुए सफेद रंग मे नंबर मार्किंग कर काष्ठागार मे गणना संख्या अंकित की जाती है तथा वन क्षेत्रों से भेजे गए सागौन काष्ठों को मिलान कर मेजरमेंट किया जाता है परंतु बार स्थित रवान परिक्षेत्रा के डिप्टी  रेंजर लोकेश साहू ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को वास्तविकता का भान कराए बगैर 95 घन मीटर के स्थान पर कुल 230 घन मीटर का सागौन विदोहन् कर दिया  जो लगभग 13 ट्रक ट्राली सागौन परिवहन कर कोडार काष्ठागार भेज दिया गया इस संदर्भ मे जब डिप्टी लोकेश साहू से बड़ी संख्या मे सागौन विरलन किए जाने के तारतम्य मे फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ ने मोबाइल मे चर्चा कर बात चित  की गई तो उन्होंने  गत वर्ष2022-2023 के पांचवे माह मे किए गए सागौन विरलन  के गणना, मार्किंग से अधिक संख्या मे पातन करने के एवज मे कोई जानकारी नही होना बताया जबकि तत्कालिक रेंजर एंब्रोस एक्का भी सेवा निवृत हो गए तब यह ज्ञात हुआ है कि किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा लिखित मे शिकायत बार परियोजना के एस.डी.ओ. चित्रा त्रिपाठी मैडम को दी गई थी जिन्हे उक्त कटाई की पूरी जानकारी थी मगर उन्होंने भी डिप्टी रेंजर लोकेश साहू को कटाई के संदर्भ मे रोकना मुनासिब नही समझा और चुप रहने की बात कही 


वही बार परियोजना के तत्कालिक डी.एफ.ओ. (डी. एम. ) बी रमन सोमावार को भी कक्ष क्रमांक 116 के इस बड़े सागौन कटाई की भनक थी सेवा निवृत होने के पूर्व जाते हुए वे बड़ा खेल खेलना चाहते थे मगर इसके पूर्व ही उनका अन्यंत्र तबादला हो गया और सारी मंशा उनकी धरी की धरी रह गई जबकि इसकी शिकायत बार परियोजना मंडल के वर्तमान डी.एफ.ओ.रौनक गोयल आई. एफ.एस. अधिकारी को भी दी गई परंतु इस संदर्भ मे उनकी ओर से भी कोई वैधानिक कार्यवाही नही की गई केवल औपचारिक जांच   किया जाता रहा ऐसा बताया जा रहा है गौर तलब है कि 95 घन मीटर मे गणना 6890 नग मार्किंग कर यदि सीधे उनके काटे गए ठूंठ की संख्या की गणना  की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा जबकि 95 घन मीटर जिसकी संख्या लगभग 6890 सागौन नग जो 21 वर्षीय था तब विरलन पश्चात 230 घन मीटर की गणना सागौन  नग की संख्या साफ गणना की जा सकती है यानी पूर्व गणना के विरलन पश्चात उससे दो  गुना अधिक कटाई की गई सागौन की संख्या कितनी होगी वह स्पष्ट हो जाएगा ?



   यह तो स्पष्ट हो गया है कि डिप्टी रेंजर लोकेश साहू एक शातिर और अपराधिक दिमाग वाला वन कर्मी है इसके पूर्व भी उसके द्वारा वर्दी की आड़ मे  अनेक अनैतिक कृत्यो को अंजाम दिया जा चुका है कोडार बांध के पीछे हिस्से मे स्थित लोहारडीह परस पानी ग्राम मे  वर्ष 2019-2020 मे कक्ष क्रमांक 850,859,860,मे भी वन क्षेत्रों से प्लाटेंशन रोपण के नाम पर बड़ी संख्या मे भिन्न भिन्न प्रजाति के पेड़ पौधों का दोहन किया गया था उस समय भी काष्ठों की  गड़बड़ी और घोटाला कर  भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया था अब सवाल यह उठता है कि वन क्षेत्रों के वर्षों पुराने पेड़ पौधों की हरियाली का विदोहन् कर वन विकास निगम द्वारा विभागीय हित का लाभ उठाने सागौन प्लांटेशन करना कहाँ तक उचित है?यही नही वन क्षेत्रों मे फलदार औषधि युक्त पौधों की प्रचुरता रहती है परंतु ऐसे पौधों का बिरलान कर दिया जाता है वन विकास निगम चूंकि राज्य शासन से लीज मे ली गई अनुबंध के आधार पर वन क्षेत्र का अधिग्रहण कर मन माने ढंग से वनों का दोहन कर रहा है साथ ही सागौन पलांटेशन कर अपना  आर्थिक हित पृथक रूप से साध रहा है एक प्रकार से आम के आम और गुठली का दाम का दोहरा लाभ उठा रहा है बदले मे वार्षोकी लाभांश के रूप मे राज्य सरकार को :2.26 करोड़ की राशि प्रदान कर अपने कर्तव्यों की इति श्री मान लेता है वही राज्य सरकार और मूल वन विभाग को चाहिए की इस संदर्भ मे कठोर नियम बनाने चाहिए की प्राचीन वन क्षेत्रों के पेड़ पौधे, हरियाली, और पर्यावरण को वन विकास निगम द्वारा क्षति न पहुंचा कर पड़त भाटा भूमि मैदानी क्षेत्र मे सागौन प्लांटेनशन कर हरियाली प्रसार करे न की वन क्षेत्रों का विदोहन् किया जाए बताते चले कि छ्ग शासन और वन विभाग प्रदेश के वन क्षेत्रों का अस्तित्व बचाने नाना प्रकार के जतन कर करोड़ों रुयये लगाती है वही उसका अनुषंगिक धडा वन विकास निगम भीतर ही भीतर वन क्षेत्रों को खोखला करने मे कोई कोर कसर नही छोड़ रहा है जिसका साक्षात उदाहरण बार की यह ताजा घटना है जबकि डिप्टी लोकेश साहू के संबंध मे बहुत से अनियमितता के संदर्भ मे ज्ञान हुआ है उस के द्वारा फर्जी अंक सूची और प्रमाण पत्र के मध्यम से नौकरी प्राप्त करना भी बताया गया है पुराने वन विकास निगम कर्मी यह बताते है कि लोकेश साहू न ही वह  1997से पहले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी था और न ही वन विकास निगम मे कार्यरत था मगर फिर भी सभी कर्मचारियों को लांघते हुए दो स्टार के पद मे पहुँच गया यह करिश्माई जादू कैसा हो गया इसकी विस्तृत रिपोर्ट अगले अंक मे प्रस्तुत किया जाएगा. 

बुधवार, 14 फ़रवरी 2024

कोंडागाँव वन मंडल का कृष्ण कुंज बना आकर्षण का केंद्र

 कोंडागाँव वन मंडल का कृष्ण कुंज बना आकर्षण का केंद्र 


अल्ताफ हुसैन द्वारा 

रायपुर  (छ्ग वनोदय(छ्ग प्रदेश की सर्वाधिक नैसर्गिक वातावरण वाला क्षेत्र जहाँ के ऊँचे ऊँचे  गगन चुंबी पहाड़ मे हरियाली की चादर ओढ़े श्रृगारित पेड़ पौधे जो आदि काल से वर्षों के अपनी ऐतिहासिक वैभव शाली गाथा की साक्षी है नैसर्गिक प्रकृति छटा का ऐसा मनोहारी दृश्य बिखेरता है जो किसी का भी मन मस्तिष्क को आकर्षित कर देता है ग्रीष्म काल मे सूर्य देव की तीक्षण तपिश के  बावजुद् उष्ण कटिबद्ध क्षेत्र मे प्रकृति का प्रभाव  संपूर्ण क्षेत्र मे न के बराबर रहता है धूल धुँआ एवं प्रदूषण रहित क्षेत्र मे बारह मासी नमी युक्त सूक्ष्म कण ओस की बूंदों से संपूर्ण वातावरण मे शीतलता और वाष्पीकरण की धुंधलका से दूरस्थ क्षेत्रों के पहाडों की अलाग ही आभा बिखेरती है  वह क्षेत्र समुद्र तट की ऊँचाई पर स्थित कोंडगांव से संरक्षित वन क्षेत्र के समीप स्थित है जहाँ कोंडागांव  वन  मंडल अंतर्गत  कक्ष क्रमांक पी एफ 449 कोपाबेड़ा  शिव मंदिर के पास 2.50 एकड भूभाग मे कृष्ण कुंज का निर्माण किया गया कोंडगांव परिक्षेत्रा के समीप स्थित कृष्ण कुंज निर्माण के संदर्भ मे तत्कालिक डी.एफ.ओ.उत्तम कुमार गुप्ता बताते है कि इसके निर्माण का मुख्य कारण यह है कि राजस्व भूमि मे कृष्ण कुंज निर्माण से अतिक्रमण से सुरक्षा के साथ धार्मिक आस्था का संचार होगा और क्षेत्र मे निवासरत आम जन के मध्य हरियाली प्रसार कर शुद्ध, स्वच्छ, वातावरण निर्मित करना है यहां स्वच्छ वातावरण मे स्परिवार भ्रमण कर प्रकृति को आत्मसात कर पर्यावरण को संरक्षित, संवर्धन करना है ताकि भावी पीढ़ी इसके महत्व को समझे तत्कालिक डी.एफ.ओ. उत्तम गुप्ता का कथन है कि संपूर्ण छ्ग मे इससे बेहतर आकर्षक कृष्ण कुंज कही और निर्मित नही हुआ है  


 श्री रमेश कुमार जांगड़े (आई.एफ.एस.)       कोंडागाँव वन मंडलाधिकारि
 

वर्तमान कोंडगांव वन मंडलाधिकारी जांगडे साहब .बताते है कि गौण खनिज न्यास मद से कृष्ण कुंज का निर्माण किया गया है जिसकी लागत 41.93 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे यथा संभव उसे आकर्षक निर्माण करने का प्रयास किया गया आज वहां अवगमन करते राहगीर मंत्र मुग्ध होकर कृष्ण कुंज की प्रशंसा करते नही थकते करीब ही श्री शिव मंदिर् होने की वजह से बहुत से भक्त जनों का अनवरत लगा रहता है भविष्य मे उन्हे कृष्ण कुंज परिसर मे सुकुन के कुछ क्षण व्यतीत करने मे आनंद की अनुभूति होगी कोंडागांव डी एफ. ओ. जंगाडे साहब ने बताया इसके निर्माण के पीछे सभी वन कर्मियों ने पूरी मेहनत की है तथा यह कृष्ण कुंज के मध्य मे मुलायम घास से कलाकृतिक रूप से उकेरा गया है  अन्य रिक्त स्थानों मे पारंपरिक धार्मिक आस्थावान पेड़,पौधों के साथ ही फलदार,रंग बिरंगे फूलदार, औषधि युक्त पौधे कृष्ण कुंज को आकर्षक मनमोहक बना रहे है 

एस.डी.ओ. आशीष कोडरीवाल  साहब

वही कोडागाँव वन मंडल के एस.डी.ओ. आशीष कोडरीवाल का कथन है कि पेड़ पौधे रोपण करना मुख्य उद्देश्य मात्र नही है बल्कि उसकी सुरक्षा करना सबसे बड़ी चुनौती है इसके लिए चारो और चैन लिंक से लेकर बाउंड्री वॉल से घेरा गया है ताकि गाय गरुआ और मवेशी से सुरक्षित रखा जा सके कोंडागाँव उपवन मंडलाधिकारी आशीष कोडरीवाल आगे बताते है  कि रोपित पेड़ पौधे वर्ष दो वर्ष पश्चात जब वे युवा हो रहे होते है तब मानव समाज उसके अस्तित्व को समूल नष्ट करने नाना प्रकार के जतन करता है इसके लिए सुरक्षित करने ऐसे धार्मिक आस्था वाले पेड़ पौधे रोपे गए है जिसकी धार्मिक ग्रंथों मे उल्लेख मिलता है जिनमे मुख्यतः कदम से लेकर आँवला तक शामिल है जिनका समय समय पर पूजा अर्चना भी की जाती है इससे आम लोगों मे पेड़ पौधे, प्रकृति, पर्यावरण के प्रति श्रद्धा और जागरूकता बढ़ेगी 

     श्री अनूप कुमार अवधिया आर.ओ . 

कोंडागांव के तत्कालिक एवं वर्तमान रायपुर परिक्षेत्राधिकारी अनूप कुमार अवधिया जिन्होंने आपना संपूर्ण जीवन वानिकी कार्यों को समर्पित किया तथा उनको कार्यों का लंबा अनुभव रहा है वे बताते है कि कृष्ण कुंज निर्माण के पूर्ण भूमि असमतलीय उबड खाबड़ थी जिसे कारण कृष्ण कुंज निर्माण मे बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था छोटे बड़े पेड़ पौधे घास फुस के खरपतवार और उबड़ खाबड़ असमतल  भूमि को समतली कारण करने मे बहुत समय लगा पश्चात  काली,मुरुमी,मिट्टी डाला गया ताकि रोपित पौधे तेजी से ग्रोथ कर सके तत्कालिक कोंडगांव रेंजर  अपने द्वारा निर्मित कृष्ण कुंज निर्माण करने का अनुभव  साझा करते हुए  नवा रायपुर मे पदस्थ परिक्षेत्राधिकारी श्री अनूप अवधिया बताते है कि धार्मिक आस्था और पूजनीय, फलदार, फूल्रदार, सायादार,पांच सौ से अधिक पेड़ पौधों का,जिनमे पीपल,आम, कृष्ण वट,बरगद,इमली, जामुन, गुलर, कदम, शहतूत, तेंदु, चार, गंगा इमली, अनारा, कैथ, नीम, बाबुल,बेल, आंवला,पलाश,अमरूद, सीताफल, का रोपण किया गया है रोपण पश्चात उसकी सुरक्षा अनिवार्यतः हो जाता है 

             कृष्ण कुंज कोंडागांव

इसके लिए रेंजर अनूप अवधिया बताते है कि कृष्ण कुंज के चारो ओर बाउंड्रीवॉल, चैन लिंक फेंसिंग कराया गया है ताकि मवेशी,चराई और पौधे कटाई से रोक जा सके कृष्ण कुंज को आकर्षक बनाने के लिए उगता सूर्य आकृति गोल कुंड और पथ वे पर रश्मि  नुमा आकृति के स्थन पर ऐसे आधुनिक पेवर्स ब्लाक निर्माण कराए गए है जिसे देख कोई भी भ्रमणकारी व्यक्ति वहां के पेड़ पौधों के आकर्षण, वहाँ के आबो हवा, का कायल हो जाएगा वही गोलाकार  सूर्य आकृति के मध्य और पथ वे रश्मि के स्थान पर हरे भरे इस कलाकृति से मुलायम हरे घास लगाए गए है जो देखने पर ही आकर्षक और लुभावना दिखता है ऐसे हरे भरे सुकून के क्षण मे पर्यटक स्वतः को समस्त प्रकार से तलाव मुक्त महसूस करेंगे तत्कालीन कोंडगांव रेंजर अनूप अवधिया बताते है कि मुख्य द्वार को बहुत ही आकर्षक बनाए गाए है वही उसके वॉल पर रंग बिरंगे कलर से भगवान श्री कृष्ण का चित्र उकेरा गया है जहां विभिन्न मुद्राओं मे प्रभु श्री कृष्ण भगवान के जीवन गाथा वर्णित है जिसे देख कर आम जन उनके इतिहास गाथा का वर्णन की जानकरी प्राप्त कर धार्मिक जिज्ञासा का रसपान कर धर्म अध्यात्म संस्कृति का ज्ञान अर्जित कर सकेंगे

      श्री बी. रामा राव वर्तमान परिक्षेत्राधिकारी

तत्कालिक कोंडागांव रेंजर अनूप कुमार अवधिया बताते है कि कृष्ण कुंज निर्माण के पीछे केवल हरियाली प्रसार और नैसर्गिक वातावरण निर्मित करना उद्देश्य ही नही है बल्कि हरे भरे वृक्ष के पीछे ईश्वर का वास होना भी है जिसका मानव समाज के द्वारा धड़ल्ले से हरे भरे पेड़ पौधों का विरलन और पातन कर प्रकृति और पर्यावरण की क्षति पहुंचाई जा रही है जिसके परिणीति के रूप मे ईश्वर का प्रकोप कोरोना जैसे विकराल बीमारी से जूझे है इसलिए पेड़ पौधों और पर्यावरण के संरक्षण संवर्धन की आवश्यकता है यही वजह है प्रभु श्री कृष्ण के नाम पर कृष्ण कुंज का नाम किया गया है ताकि धार्मिक आस्था वाले पेड़ पौधों का संहार करने मे मानव हजार बार सोचे 

 श्री राकेश शुक्ला आर. ए. कोंडगांव

वर्तमान कोंडागाँव रेंजर बी.रामाराव कृष्ण कुंज  मे रोपे गए पेड़ पौधों की पूरी सुरक्षा देखरेख के प्रति संवेदनशील है आर. ए. राकेश शुक्ला कोंडागांव जो मैदानी अमले के मुख्य कर्ता धर्ता होते है वे बताते है कि फॉरेस्ट गार्ड,एवं चौकीदार सहित अन्य वन कर्मियों पर नियमित सुरक्षा का भार सौंप रखा है वे भी प्रति दिन नियमित पानी और रख रखाव कर रहे है  
इस कृष्ण कुंज के संदर्भ मे फॉरेस्ट गार्ड कोंडागांव  गजेंद्र मरकाम गौड़ बताते है कि ग्रीष्म ऋतु  मे पानी व्यवस्था हेतु टैकर द्वारा या अन्य संसाधन से किया जाना बताया गया है वही  देख रेखा सुरक्षा उपचार हेतु छ माह मे केज्युवल्टी कार्य भी किए गए है अभी तक कोई भी पौधे मरणासन्न अवस्था मे नही है और सभी पौधे स्वस्था और ग्रोथ कर रहे है रेंजर बी. रामाराव आगे बताते है कि चार वर्षों के लिए कार्य संपादित किया जाना है इसके लिए संपूर्ण माकुल व्यवस्था है वर्तमान  स्थिति मे पौधे पांच से दस फीट ऊँचाई मे पहुँच चुका है जिसकी वजह से कृष्ण कुंज एक आकर्षक स्वरूप मे परिलक्षित हो रहा है

बुधवार, 7 फ़रवरी 2024

जान जोखिम मे डाल कर बांस विरलन से विभाग को राजस्व देने वाला देवपुर रेंज

 जान जोखिम मे डाल कर बांस विरलन से विभाग को राजस्व  देने वाला देवपुर रेंज 


अल्ताफ हुसैन /सहयोगी मज़हर इकबाल द्वारा

बलौदाबाजार वन मंडल देवपुर रेंज से सीधे  सघन वन क्षेत्र बांस विरलन की रिपोर्ट 


रायपुर (छ्ग वनोदय पत्रिका) छ्ग प्रदेश का सघन वन क्षेत्र बलौदा बाजार वन मंडल के अंतर्गत देवपुर वन परिक्षेत्र की अपनी अलग आभा दिखती है इसका मुख्य कारण यहाँ की गगन चुंबी पहाड़ के उपर सागौन सहित भिन्न भिन्न प्रकार के पेड़ पौधे वनोंषधि के भांति भांति के आकर्षक फल, फूल,पौधे, जड़ी बूटी,पत्तो के साथ यहां के ऊँची पहड़ों की चोटी से शीर्ष  स्थल पर कलकल करती गिरती हुई पानी की जलधारा जो किसी देवधारा से कम परिलक्षित नही होता और स्वतः प्राकृतिक सौंदर्य आभा के साथ ही यहां के मनोरम दृश्य को हृदय स्पर्शी बना कर मर्म मस्तिष्क को प्रफुल्लित  करती है यही नही ऊँचे ऊँचे पहाड़ के चोटी से ढालान की और नीचे उतरते हुए असमतल उबड़  खाबड़ चट्टानों के मध्य अपने सैकड़ों वर्षो से स्निग्ध काले चट्टानी पत्थरों की वैभव शाली इतिहास की गवाही देते हुए यह कहते हुए नही थकती कि प्रकृति ने आदि काल से मानव समाज को अपनी गोद मे लालन पालन किया है उन्हे फल फूल, वनोपज देकर जीवन दायिनी बनी है वन्य जीव जंतुओं को अठखेलिया करते समस्त ऋतुओं मे उनके वास सहवास का साधन बनी रही देवपुर परिक्षेत्र का उक्त देवघाट की नैसर्गिक हरीतिमा युक्त छटा बढाने मे  लहरदार सर्पिणी के समान मुख्य मार्ग से लेकर सघन वन क्षेत्र के मध्य मे ऊँचे ऊँचे हरे भरे बांस के अनगिनत भिर्रा के पेड़ पहाड़ी क्षेत्र को और अधिक आकर्षक,मनोहारी बनाती है  बलौदा बाजार वन मंडल का देवपर परिक्षेत्रा का यह क्षेत्र सर्वाधिक प्राकृतिक बांस उत्पादन क्षेत्र है जहाँ से विभाग संपूर्ण क्षेत्र मे बांस का विरलन कर प्रदेश भर मे बांस खपत अपूर्ति सेकडों वर्षों से कर रहा है जहा स्थानीय ग्रामीणों के अलावा वन विभाग कें लिए आर्थिक स्त्रोत का मुख्य साधन और रीढ़ की हड्डी मानी जाती है 

इस संदर्भ मे बलौदा बाजार के वन मंडलाधिकारी मयंक अग्रवाल बताते है कि देवपुर परिक्षेत्र बांस का प्राकृतिक उत्पादन होता है यहां की गुणवत्ता युक्त बांस संपूर्ण प्रदेश मे उत्तम क्वालिटी मानी जाती है यही वजह है कि प्रदेश भर मे देवपुर परिक्षेत्र के बांस की अच्छी मांग है बलौदा बाजार भावसे अधिकारी मयंक अग्रवाल बताते है कि इसके विरलन् के तीन से चार वर्ष पूर्व परिपक्व बांस क्षेत्र की गणना की जाती है पश्चात अनेक विकट परिस्थियों मे कार्य संपादित किया जाता है उन्होंने आगे बताया कि बांस विरलन की प्रक्रिया भी बड़ी जटिल होती है एक सौ भिर्रा वाले भूभाग क्षेत्र मे सैंपल के रूप मे सौ से उपर परिपक्व  बांस भिर्रा क्षेत्र की गणना की जाती है





  गणना कर बांस लगाकर लाइनिंग कार्य कर उस क्षेत्र को कूप बनाया जाता है जिसका अनुमानित उत्पादन निकालकर उस हिसाब से आगामी वर्ष मे बजट जारी की जाती है जिसका विरलन आगामी वित्तीय वर्ष सितंबर माह से प्रारंभ कर ग्रीष्म ऋतु के पूर्व लगभग पांच से छ माह तक कार्य संपादित कर लिया जाता है 




बलौदाबाजार वन मंडल सोनाखान, देवपुर के एस डी ओ  राकेश चौबे  एक सुलझे हुए, अनुभवी,परिपक्व अधिकारी है उनकी दूर दृष्टि सोच कार्यों को पार दर्शी बनाती है उनका कथन है कि देवपुर परिक्षेत्र मे बांस विरलन बहुत दुरूह कार्य है देवघाट पर्वत शृंखला की चोटी मे बसे प्राकृतिक बांस के वन के विरलन मे स्थानीय मजदूर अल्प मात्रा मे कटाई करते है उदाहरण स्वरूप यदि स्थानीय मजदूर बीस बांस की कटाई दिन भर मे करने की क्षमता है तो बाहरी क्षेत्र से आए मजदूर दिन भर मे दोगुना अर्थात कमोबेश पैतीस से चालीस बांस का विरलन कर देते है जिससे कार्यों मे गति और उसके विरलन आवधि मे कार्य संपादित हो जाता है उप वन मंडलाधिकारी  राकेश चौबे आगे बताये है कि बाहरी क्षेत्र से लाए गए मजदूर पूर्णतः दक्ष और कुशल होते है बस्तर से इनकी पूरी टीम बुलाई जाती है जो पहाड़ के शीर्ष पर अस्थायी बांस और घास फूस की कुटिया बना कर लगभग छ माह का प्रवास करते है  बांस विरलन कार्य मे सप्ताह के एक दिन  स्थानीय हाट बाजार से रसद क्रय कर उपर पहुंचा कर पूरी तन्मयता से प्रातः काल से ही विरलन  कार्य को अंजाम देते है बलौदाबाजार देवपुर एस.डी.ओ.राकेश चौबे आगे बताते है कि दुर्गम और जटिल क्षेत्र होने के कारण बांस विरलन  कार्य मे बहुत सी समस्या आती है सघन वन क्षेत्र मे हिंसक वन्य प्राणियों का खतरा,  मजदूरों के आकस्मिक अस्वस्थता होने की स्थिति मे दवा उपचार का अभाव, लाइट और मोबाइल नही इन परिस्थितियों मे बड़ी जद्दो जहद से दो चार होना पड़ता है मजदूरों के भावी सुरक्षा की क्या व्यवस्था पूछने पर बलौदा बाजार देवपुर उप वन मंडलाधिकारी राकेश चौबे बताते है कि बैटरी चलित झटका मशीन डी.ई.तार से कनेक्ट कर लगाया जाएगा उसकी व्यवस्था की जा रही है देवपूर के युवा, कर्मठ जुझारू परिक्षेत्राधिकारी पुष्पेन्द्र साहू से बांस विरलन  के संदर्भ मे पूछने पर बताते है कि 


बस्तर से बहुत से मजदूरों को बांस विरलन कार्य हेतु बुलाया गया है जिन्हे स्थानीय देवपूर् वन समिति के सानिध्य और मार्गदर्शन मे बांस विरलन  कार्य संपादित हो रहा है इसके एवज मे समिति को वर्षों से प्रति वर्ष राजस्व की शत प्रतिशत लाभांश राशि प्रदाय की जाती है जिसकी राशि से रोजगार, आस्था और ,सामाजिक मूलक, कार्य संपादित होते है देवपूर् परिक्षेत्राधिकारी पुष्पेन्द्र साहू आगे बताते है कि स्थानीय रोजगार के इतर अन्य क्षेत्र के मजदूरो का प्रवास से स्थानीय रोजगार प्रभावित नही होता उन्हे निचले वन क्षेत्र मे विरलन या अन्य पातन कार्य दिया जाता है वही ऊँचाई वाले वन क्षेत्र मे स्थानीय कामगारो मे बहुत बहाने हीला हवाला होता है जिससे कार्य अवरुद्ध होता है ग्रीष्म ऋतु के पूर्व तय सीमा मे बांस विरलन पातन कार्य न होने से लक्ष्य प्रभावित होता है और विभाग लक्ष्य से बिछड़ जाता है उन्होंने बताया कि ग्रीष्म ऋतु के पूर्व बांस विरलन कार्य ना हो पाने से ग्रीष्म ऋतु मे बांस वन क्षेत्र मे परस्पर घर्षण से अग्नि दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है और विभाग को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ सकता है इसलिए तय अवधि मे बांस विरलन अनिवार्य होता है बांस वन क्षेत्र देवपूर् रेंज के मैदानी अमलो मे तैनात रीखीराम साहू वन रक्षक और शोभा सिंह ने बताया कि बस्तर से आए मजदूरों को समय समय पर राशन पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है तथा उन्हे बीस दिन के अंतराल मे मजदूरी भुगतान कर दिया जाता है 




रिखिराम साहू शोभा सिंह जो मैदानी अमले की पूरी व्यवस्था और कार्य संपादित करते है उन्होंने बताया कि छोटे बड़े बांस की निर्धारित प्रति नग की दर से वन विभाग द्वारा तय किया गया है 



उदाहरण स्वरूप ऊँचाई मध्यम वाले बांस की दर उपरोक्त स्तर पर विभाग द्वारा निर्धारित की गई है वन रक्षक द्वय ने बताया कि एक मीटर का टुकडा भी व्यर्थ नही जाता उसे बीस थप्पी का सौ बंडल करने पर 2022 रुपये प्रदाय किया जाता है रिखि राम साहू और शोभा सिंह ने आगे बताया कि वन क्षेत्र की ऊँचाई से नीचे लाने मे बहुत कठिन कार्य लगा है इसके लिए वन क्षेत्र मे ही अस्थायी  पहुँच मार्ग बनाया जाता है जो सड़क मुख्य मार्ग से होते हुए देवपूर्, नवगांव,परिसर मे डंप किया जात है तथा मांग होने पर आपूर्ति के अनुसार उसे गंतव्य स्थान भेजा जाता है 

शनिवार, 3 फ़रवरी 2024

वन विकास निगम मे खुले आम भर्राशाही, लूट सको तो लूट लो

  वन विकास निगम मे खुले आम भर्राशाही, लूट सको तो लूट लो


अल्ताफ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छ्ग राज्य वन विकास निगम जो छ्ग शासन की स्व पोषित संस्था माना जाता है चिन्हित कष्ठागार  से सागौन सहित बेशकीमती इमारती काष्ठों की नीलामी कर उक्त आय से वन विकास निगम का संचालन करता है लेकिन लगातार भ्रष्टाचार,गड़बड़ घोटाला, के चलते वह अब सफेद हाथी बनता जा रहा है छ्ग वन विकास निगम मे काष्ठागार,एवं आईपीडी योजनाओ सहित अन्य लाभ अर्जित करने के नाम पर इसका ग्राफ निम्न स्तर पर पहुँच चुका है इसका सीधा उदाहरण यह है कि प्रति वर्ष मुख्य मंत्री के नाम पर राज्य शासन को देने वाला लाभांश राशि दो से तीन करोड़ तक पहुँच चुका है जबकि प्रारंभिक काल मे  जब एस सी जेना  साहब इसके एम।डी. हुआ करते थे तब राज्य शासन की लाभांश राशि लगभग सताईस  करोड़ रुपये दिए जाते थे केवल पच्चीस वर्ष मे इसकी हालात इतना खस्ता हो चुकी है कि लाभांश राशि का ग्राफ स्तर कई गुणा नीचे पहुँच चुका है इसकी मुख्य वजह यह है कि कई सेवा निवृत अधिकारीयों की लगातार भ्रष्ट कार्य शैली ने इसके आर्थिकी ढांचे पर लोभ और लालच के कुल्हाड़ी से कुठाराघात कर वन विकास निगम के अस्तित्व पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है अब स्थिति यह हो गई है कि  छ्ग राज्य वन विकास निगम के सभी अधिकारी कर्मचारी उस बिल्ली की भांति आँख मुंद कर  दूध मे जमे मलाई पर ऐसा झपट्टा मार कर चट करने का सुअवसर देखते रहते है जैसे उनकी बंद आँख कर मलाई चट करने वाली प्रवृत्ति पर उक्त गतिविधियों  पर कोई देख नही रहा है  परंतु कहते है कि बिल्ली के भाग में छिका फूटे वाली उक्ति चरितार्थ हो जाती है ऐसे बहुत से प्रकरण जनमानस के समक्ष आते रहे है जो छ्ग राज्य वन विकास निगम की कार्य प्रणाली से सभी भली भांति परिचित है जैसे छ्ग राज्य वन विकास निगम के वर्षो से अघोषित एम. डी. के रूप मे संविदा नियुक्त प्रधान वित्त शाखा प्रबन्धक भोजराज जैन जो सेवानिवृत होने के पश्चात अपनी दूसरी पारी मे पांचवी इवनिंग की तैयारी कर चुके है एक प्रकार से वे छ्ग वन विकास निगम मे अंगद की पांव की तरह यहां लंबे समय से जमे हुए है वर्षों से वन विकास निगम को भ्रष्टाचार, गड़बड़  घोटाल,की कालिख  से पोतकर वन विकास निगम में काजल की काली  कोठरी मे परिवर्तित करने मे अपनी महती अहम भूमिका अदा कर चुके है अब चाहे किसी का ट्रांसफर हो,किसी को राशि लेकर नौकरी लगाने से लेकर पदोन्नत करना अब चाहे 1997 से लेकर अब तक अनियमित  कर्मचारी लोकेश साहू और इन जैसे कई कर्मचारियों को जिसकी वरीयता सूची मे नाम ही नही था उन्हे नियमित पोस्ट कर पदोन्नत कर दो स्टार से विभूषित करना भले शिक्षा के नाम पर  फर्जी सर्टिफिकेट लगाया गया हो और बार नवापारा परियोजना मंडल मे एस डी ओ तक पदोन्नत कर प्रभार दे दिया गया जिनमे मोहला परियोजना मंडल के सर्वाधिक चर्चित प्रभारी रेंजर खटकर  जिनके काले कारनामों की सूची सूचना के अधिकार मे पाना बरस परियोजना मंडल कार्यालय राजनांदगाँव से निकाली गई थी वह आज भी फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ के पास मौजूद है यही नही वित्त प्रबन्धक भोजराज जैन द्वारा ऑडिट मे सभी नौ परियोजना मंडल के वित्त शाखा कर्मियों का भय दोहन कर प्रति वर्ष लाखों रुपये की उगाही,आम बात है वन विकास निगम मे किसी भी दुर्घटना मे मृत निगम कर्मियों के परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति  भले ही उसके यहां का कोई सदस्य पूर्व मे शासकीय सेवा मे संलग्न क्यो न हो उन्हे नियम विरुद्ध जाकर अनुकंपा  नियुक्ति दिलाकर वन विकास निगम मे  आधे से अधिक निगम कर्मी अपनी सेवा शान ओ शौकत से कर रहे है उस पर निगम अधिकारियों का रुदाली रोना इस प्रकार से कि निगम मे स्ताफ,कर्मचारियों कि भारी कमी है



जबकि वर्षो से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को जिनमे कई तो सेवा निवृत के कागार मे पहुँच चुके है परंतु उनका नियमितिकरण  आज पर्यंत नही हो पाया वहीं दूसरी ओर अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारी भ्रष्टाचार गड़बड़ घोटाला, जैसे सारे सकल कर्म करे उन्हे बचाने के लिए वित्त प्रबन्धन भोजराज जैन बारह महीने चौबीस घंटे उपलब्ध रहते है तथा उन्हे बचा भी लेते है इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि कोडार डिपो मे पदस्थ अनुकंपा कर्मी जागृति देवांगन  वर्ष 2021मे देह व्यापार मे सलिप्त पाया गया जिसे कुछ माह जेल की हवा खाने  के बाद पुनः नौकरी मे बहाल कर दिया गया बाद मे उसे फिर हटा दिया गया ज्ञात हुआ है कि देह व्यापार मे लिप्त एक महिला फांसी लगा कर इहलीला समाप्त कर दी इस बीच निगम की छिछालेदर न हो उसे कार्यों से कुछ समय तक कार्यों से पृथक कर दिया गया अब चर्चा  जमकर हो रही है कि बार डिविजन देवेंद्र नगर कार्यालय मे सजायाफ्त जागृत देवांगन को फिर नियुक्त कर दिया गया अब यह सब कैसे नियुक्ति हुआ यह सब बेहतर जानते है परंतु नियम  तो यह है कि ऐसे अपराधिक गतिविधियों मे संलिप्त पाए जाने वाले कर्मचारीयों को तत्काल कार्यों से बर्खास्त किया जाता है परंतु सारे नियम कानून को धता बताते हुए अनुकंपा नियुक्त जागृत देवांगन और उस जैसे बहुत से कर्मचारी है जो आज भी डंके की चोट पर छ्ग राज्य वन विकास निगम मे अपनी सेवाएं दे रहे है तथा निगम के अधिकारी भी मुंह कान आँख बंद किए हुए मूक बधिर और सुरदास बने हुए है यही वजह है कि निगम क्षेत्र के वन मे कितनी चोरी हो रही कुछ भी ज्ञात नही हो पाता विश्वस्त सूत्रों से ज्ञान हुआ है कि कोडार काष्ठागार मे राष्ट्रीय कृत परिपक्व दस नग  इमारती बीजा काष्ठ   01जनवरी 2024 को आरंग परिक्षेत्र के रेंजर युवराज साहू और उनकी टीम द्वारा कोडार के समीप लोहारडीह पेंड्रा से  राजसात किया गया था बताया गया है कि उक्त बीजा काष्ठ स्थानीय किसी कृषक के खेत से काटा गया था जिसे वन विकास निगम रेंजर देवराज साहू के मार्ग दर्शन मे जप्ती किया गया था मजे की बात यह है कि एक माह से उपर होने के बावजूद न ही कृषक पर अब तक कोई वैधानिक तौर पर कार्यवाही की गई और न ही (पी.ओ.आर.)  पंचनामा किया गया सवाल उठता है कि बेशकीमती बीजा काष्ठ जप्ती के पश्चात अपने वरिष्ठ अधिकारी आर. जी. एम. डिविजन मैनेजर, डिप्टी डी एम. को इसकी सूचना दी गई अथवा नही? यदि वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई तो अब तक  पंचनामा सहित कटाई करने वाले आरोपी के विरुद्ध कार्यवाही क्यो नही की गई ? बेशकीमती बीजा काष्ठ को आरंग मे क्यों छुपा कर रखा गया ? जबकि विश्वस्त सूत्र से यह भी ज्ञात हुआ है कि पेड्रा,लोहारडीह, के कक्ष क्रमांक 850 से परिपक्व बीजा काष्ठ की कटाई की गई थी परंतु कटाई करने वाले पर कोई  कार्यवाही,हुई और न ही विभागीय कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही की गई  अब,इसे क्या समझा जाए ?काष्ठ तस्कर से मिली भगत के बीजा काष्ठ की कटाई की गई जब ही तो उस और कोई कार्यवाही नही की गई यदि विभागीय कटाई की जाती तो पहले लिखित मे परमिशन लिया जाता फिर हैमर लगा कर मार्किंग की जाती पश्चात कटाई की जाती मगर ऐसा कुछ भी नही किया गया और चोरी छिपे कटाई हो गई ? अब इस संदर्भ मे बार नवापरा परियोजना मंडल के डी.एम. सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस तारतमय मे क्या कार्यवाही करते है देखना होगा? यह मामला तो ताजा तरीन है मगर कोडार कष्ठागार और आठ अन्य परियोजना  मंडल काष्ठागार में भी होने वाली नीलामी अभिलेखों,टीपी मे कई ट्रक काष्ठ परिवहन हो रहे है जिसका कोई पूरसाने हाल नही है और लाखों, करोड़ों का खेला हो जाता है 

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2023

छ्ग वनोदय पत्रिका के नाम पर कतिपय लोग द्वारा वसूली

 छ्ग वनोदय पत्रिका के नाम पर कतिपय लोग द्वारा वसूली


प्रदेश भर मे वन विभाग पर केंद्रित एक मात्र पत्रिका    छ ग वनोदय पत्रिका नाम से लगातार वन विभाग के विकास परक योजनाआ पर  प्रकाशित किया जा रहा है जिसकी वजह से कतिपय अवांछित तत्वों द्वारा बेजा लाभ उठाने के उद्देश्य से अनेक विभागीय अधिकारियों, कर्मचरियो से अवैध रूप से राशि वसूल किया जाने की शिकायत मिल रही है ऐसे अवांछित तत्वों से सावधान रहने की अपील छ ग वनोदय के संपादक, मुद्रक, प्रकाशक अल्ताफ हुसैन ने की है इसके बावजूद किसी भी व्यक्ति द्वारा भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय से राजिस्ट्र्ड पंजीकृत पत्रिका छ ग वनोदय पत्रिका के नाम से कोई व्यक्ति वसूली करते हुए पाया जाता है तब इस स्थिति मे उसके विरुद्ध कॉपी राइट् के अंतर्गत  तत्काल संपादक, मुद्रक प्रकाशक अल्ताफ हुसैन को 7869247588 पर सूचित करे ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध विधि अनुसार कानूनी कार्यवाही किया जाएग 

     गौर तलब है कि छ ग वनोदय पत्रिका भारत सरकार से पंजीकृत किया गया है इसके बावजूद कतिपय अवांछित तत्व द्वारा छग वनोदय के नाम पर वसूली कर समाचार संकलन भी नही किया जा रहा है और अधिकारियों से हजारों की राशि लिया जा रहा है ऐसे बहुत से वन कर्मचारियों द्वारा बताया गया तथा जिसका संपूर्ण दायित्व की जिम्मेदारी राशि प्रदाय करने वाले अधिकारी कर्मचारी की होगी छ ग वनोदय ऐसा किसी भी व्यक्ति संस्था को जवाबदेही नही दिया गया है या पत्रिका संस्थान मे संचालित संवाद दाता नियुक्त किया गया है राशि लेन देन करने वाले ऐसे अधिकारी कर्मचारी अपने स्व विवेक और जिम्मेदारी से लेन देन करे इसकी जिम्मेदारी छ ग वनोदय पत्रिका संस्थान की नही होगी और यदि कोई  छग वनोदय पत्रिका के नाम पर राशि वसूली  करते पाए जाता है जो पूरी तरह गैर कानूनी के श्रेणी मे होगा ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जा सकती है

बुधवार, 27 दिसंबर 2023

चरण दास महंत ने कांग्रेस स्थापना दिवस पर दी बधाई *

 चरण दास महंत ने कांग्रेस स्थापना दिवस पर दी बधाई *



रायपुर, छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कांग्रेस स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को  बधाई शुभकामनाएं देते हुए हा कि हम सबको भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का कार्यकर्ता होने पर गर्व है। कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई थी। कांग्रेस एक दल ही नहीं बल्कि एक विचार और आंदोलन का नाम है।

कांग्रेस एक ऐसी पार्टी जिसका गठन देश की उन्नति प्रगति के लिए हुआ। धीरे-धीरे यह पार्टी आजादी की लड़ाई की आधार बनी। महात्मा गांधी  के नेतृत्व में आजादी की लड़ाई लड़ी गई और देश आजाद हुआ। 


उन्होंने कहा आजादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू जी के नेतृत्व में अखिल भारत की आधारशिला रखी गई. आज यदि देश और पूरी दुनिया में सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित है तो यह हमारे कांग्रेस के महान नेताओं की मेहनत, उनकी सोच और त्याग से संभव हुआ, चाहे वे महात्मा गांधी जी हो, सरदार बल्लभ भाई पटेल जी हो पंडित नेहरू  हो या पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी  राजीव गाँधी ..


हमें श्रीमती सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी एवं श्रीमती प्रियंका गांधी के रूप में कांग्रेस के नेतृत्व पर गर्व है, जिनका संकल्प देशहित में सेवा-भाव से काम करना है। अडिग संकल्प, स्पष्ट दिशा और मजबूत इरादों के साथ वर्तमान परिस्थितियों में कांग्रेस को मदांध सत्ता की चुनौती के सामने खड़ा होना है, ताकि आने वाले समय में हमारी नीतियों, सिद्धांतों और कार्यक्रमों की वजह से समाज के सभी वर्गों का विश्वास और समर्थन प्राप्त हो।


       

शनिवार, 16 दिसंबर 2023

हाईकोर्ट का आदेश रायपुर प्रेस क्लब के चुनाव का रास्ता साफ।

हाईकोर्ट का आदेश रायपुर प्रेस क्लब के चुनाव का रास्ता साफ।
रायपुर। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रायपुर प्रेस क्लब के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। चुनाव की मांग को लेकर प्रेस क्लब के पूर्व उपाध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने हस्तक्षेप याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम भादुड़ी ने पंजीयक फर्म एंड सोसाइटी को चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने पंजीयक फर्म एंड सोसाइटी को निर्देश देते हुए कहा गया है कि मतदाता सूची का परीक्षण कराने के उपरांत रायपुर प्रेस क्लब का चुनाव सम्पन्न कराएं। रायपुर प्रेस क्लब के संविधान के मुताबिक, चुनाव उपरांत पदाधिकारियों का कार्यकाल एक वर्ष का होता है। अंतिम चुनाव जून 2018 में कराए गए थे। जिसके बाद से अब तक चुनाव नहीं हुए हैं। प्रेस क्लब मतदाता सूची के परीक्षण की मांग को लेकर प्रेस क्लब सदस्य डी. बैरागी ने 2019 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने मतदाता सूची परीक्षण के निर्देश रायपुर प्रेस क्लब को दिए थे। चुनाव की मांग को लेकर पूर्व उपाध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने दायर की थी हस्तक्षेप याचिका। रायपुर प्रेस क्लब ने मतदाता सूची परीक्षण के लिए एक कमेटी बनाई थी, लेकिन परीक्षण के काम नहीं हो सका। जिसके बाद 2020 में प्रेस क्लब के एक अन्य सदस्य की ओर से चुनाव की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जल्द से जल्द चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। पंजीयक फर्म एंड सोसाइटी और रायपुर कलेक्टर की ओर से चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई थी, लेकिन इसी बीच डी. बैरागी की ओर से फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी प कि मतदाता सूची के परीक्षण के बगैर चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं? जिसके बाद कोर्ट ने चुनाव पर फिर रोक लगा दी। इसके बाद चुनाव की मांग को लेकर रायपुर प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने पहले रिट पिटीशन और फिर हस्तक्षेप याचिका हाईकोर्ट में दायर की।

सोमवार, 6 नवंबर 2023

बेनर् पोस्टर जलाने से भाजपा की बौखलाहट सामने आ गयी - गोपाल धीवर

 बेनर् पोस्टर जलाने से भाजपा की बौखलाहट सामने आ गयी - गोपाल धीवर


रायपुर सोमवार को भाजपा प्रत्याशी खुशवंत साहेब की चुनाव प्रचार ग्राम गोढ़ी में आयोजित की गयी थी,जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा कांग्रेस के झंडा बैनर तोरण पोस्टर आदि को तोड़फोड़ कर जलाया गया है।यह भाजपा की हार की हताशा और बौखलाहट को प्रमाणित करता है। छत्तीसगढ़ में चारों तरफ़ कांग्रेस की हवा चल रही है, इसलिए मुद्दा विहीन भाजपा पुरी तरह से खिसिया गयी है और आक्रोशित होकर अलोकतांत्रिक कृत्य पर उतर आई है।दुसरी तरफ सेक्टर अध्यक्ष गोपाल धीवर ने कांग्रेस के इतिहास को अवगत कराते हुए अपने बुथ अध्यक्षों प्रभारियों और अन्य समस्त वरिष्ठ,युवा, और महिला पदाधिकारियो कार्यकर्ता को बदलें की कोई भी कार्यवाही नहीं करने की निवेदन की है और साथ ही इस बात को दुहराया है कि,आरंग विधान सभा क्षेत्र के लोकप्रिय कांग्रेस प्रत्याशी एवं केबिनेट मंत्री माननीय डॉ शिवकुमार डहरिया जी भारी बहुमत से चुनाव जीत रहे हैं।



हम शान्ति पसंद लोग हैं, इसलिए हम चुनाव आयोग की आचार संहिता,भारत के संविधान और कुदरत के कानून की मर्यादाओं को आत्मिक आदर करते हैं।

क्योंकि हम गांधी ,अंबेडकर ,इंदिरा,और राजीव गाँधी के आदर्श सिद्धांतों की विरासत वाली विश्व की महान राजनैतिक संगठन कांग्रेस पार्टी की कार्यकर्ता हैं। 


सोमवार, 18 सितंबर 2023

माना स्थित कृष्ण कुंज का शुभारंभ विधायक सत्य नारायण शर्मा ने किया

  माना स्थित कृष्ण कुंज का शुभारंभ विधायक सत्य नारायण शर्मा ने किया

रायपुर छग के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की महत्वांकाक्षी योजना के तहत ग्राम पंचायत माना के निकट माना बस्ती इंदिरा निकुंज में वन विभाग रायपुर रेंज के तहत कृष्ण कुंज का निर्माण किया गया यह माना रोपणी के समीप लगभग 3.50 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण कराया गया जिसका शुभारंभ पूर्व मंत्री और छग शासन के वरिष्ठ कद्दावर विधायक श्री सत्यनारायण शर्मा  के आतिथ्य एवं कर कमलों द्वारा किया गया माना रोपाणी स्थित कृष्ण कुंज में कुल 33 प्रकार के फलदार औषधियुक्त पौधे जिनमे आंवला,अंजीर,जामुन,बेल, संतरा,आम,चीकू,कटहल,नींबू,करौंदा,सीताफल,अमरूद,बेर, हर्र, बेहड़ा,महुआ,इमली,तेंदू,

काजू शहतूत,रामफल,बरगद,

पीपल,नीम,कदम,प्लाश,चंदन,गुलर,चार,अशोक,अनार, बादाम, चंपा,आदि को सम्मिलित किया गया तथा लगभग 720 पौधे रोपित कर कृष्ण कुंज वाटिका का निर्माण किया गया 


 कृष्णकुंज, वाटिका के निर्माण के उद्देश्य और विस्तार के संबंध में वरिष्ठ विधायक सत्य नारायण शर्मा ने छग शासन ने अपने उद्बोधन में कहा की विलूप्त होते फलदार,औषधियुक्त पौधों को संरक्षण,संवर्धन कर उसके अस्तित्व को अक्षुण्य बनाए रखना छग सरकार की प्राथमिकता है यही वजह है कि नगर निगम,ग्राम जनपद पंचायतों के माध्यम से कृष्णकूंज का निर्माण किया जा रहा है इसकी वजह से प्रदेश भर में बड़ी संख्या में हरियाली प्रसार किया गया है विधायक सत्य नारायण शर्मा ने आगे बताया कि कृष्णकुंज स्थापना से बढ़ते प्रदूषण के विरुद्ध एक अभियान है जिससे स्वच्छ वातावरण निर्मित कर परस्पर सामाजिक समरसता स्थापित करना मुख्य उद्देश्य  है ताकि मुक्त स्वच्छ वातावरण में आम जन को स्वास्थ्य वर्धक वातावरण सहजता से कृष्णकूंज वाटिका के रूप में इसका लाभ आम जन को मिल सके

 इस कार्यक्रम में वरिष्ठ विधायक एवं  मुख्य अतिथि श्री सत्य नारायण शर्मा के अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधि बिसौहा सिन्हा,श्रीमती किरण सिन्हा, विनय गेंद्रे,प्रकाश बांधे,दीपक देवांगन,श्रीमती उषा सोनी, रमेश सोनी,सहित  वन विभाग के आला वन मंडलाधिकारी विश्वेश कुमार झा,संयुक्त वन मंडलाधिकारी विश्वनाथ मुखर्जी, परिक्षेत्राधिकारी सतीश कुमार मिश्रा,सहायक परिक्षेत्राधिकारी तेजा सिंह साहू  सहित वन कर्मचारी स्थानीय गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे