शनिवार, 22 जून 2024

सैटेलाइट,ड्रोन कैमरा एप के मध्यम से मुख्यालय मे देख सकेंगे वनों और वन्य प्राणियों की स्थिति

सैटेलाइट ड्रोन कैमरा एप के मध्यम से मुख्यालय मे देख सकेंगे वनों और वन्य प्राणियों की स्थिति(


अल्ताफ हुसैन द्वारा

(छ्ग वनोदय) आधुनिक राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब उन्नत तकनीक  विकसित विचार धारा के साथ नई उमंग को अंगीकार कर नवीनतम तकनीक का सही मूल्यांकन करते हुए उसका उपयोग कर एक नई इबारत के साथ नया इतिहास भी लिखा जा सकता है जिसकी शुरुआत  फोर जी फाइव जी  इंटरनेट ऑन लाइन जैसे संसाधन का आधूनिक  तकनिक का उपयोग अब आम व खास व्यक्ति से लेकर प्रत्येक शासकीय अर्द्ध शासकीय स्वायत सेवा संस्थान से  लेकर हर क्षेत्र मे बड़े जोर शोर से उपयोग किया जा रहा है जो मानव जगत के लिए बहुउपयोगी है इंटरनेट का आधुनिकीकरण उपयोग टी वी कमप्युटर्,लेपटॉप के स्क्रीन और मोबाइल के,  मध्यम से विश्व के किसी भी कोने मे परस्पर एक दूसरे व्यक्ति से आचार विचार, बातचीत कर, उन्हे देखा सुना एवं पढ़ा जा सकता है तब भला ऐसे इंटरनेट, आधुनिक संसाधन के उपयोग से छग प्रदेश का वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अछुता कैसे कैसे रह सकता है जिसकी शुरुआत विगत कुछ वर्षों से ही सही मगर उक्त संसाधनों का उपयोग बड़ी तेजी से विकसित हो रहा है जिसका परिणाम यह आने लगा है कि वर्तमान मे अब यहाँ मुख्यालय मे बैठे वरिष्ठ उच्च अधिकारी से लेकर बहुत से वन मंडल कार्यालय मे बैठे बैठे मीलों दूर संपादित होने वाले समस्त विकास कार्यों से लेकर प्रदेश के वन क्षेत्रों मे  विचरण एवं आवागमन करते  हाथी जैसे वन्य प्राणियों की लोकेशन के हिसाब से सटीक स्थिति, वनों मे लगने वाले दावनाल  की स्थिति जो जीपीएस  सहित ड्रोन कैमरा एवं अन्य इंटरनेट टीवी लेपटॉप, मोबाइल स्क्रीन के मध्यम से ही देख और बता सकेंगे जिससे बहुत सी भावी भयावह स्थिति की रोकथाम मे भी त्वरित कार्यवाही हो सकेगी साथ ही वन क्षेत्रों के वनों मे सुधार आएगी 



       यह अद्भुत, एवं अविश्वसनीय एप के निर्माण मे सहयोग किया है उत्साहित युवा, कर्मठ शील, जुझारू प्रवृत्ति सामाजिक समरस्ता के पैकर, कर्तव्य निष्ठ, कर्म को धर्म मानने वाले योगी, वन विभाग को नई दशा और दिशा देने वाले अथक प्रयास करने वाले जुझारू, साहसी अधिकारी वरुण जैन है जो 2017बैच के आई एफ एस  अधिकारी है रेंज ट्रेनिंग उनका परसगाँव मे हुआ 23 फरवरी 2023 मे वे गरियाबंद उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व प्रोजेक्ट मे उप निदेशक के पद पर विगत दो वर्षों से  गरियाबंद क्षेत्र मे अपनी सेवाए दे रहे है उनसे वन विभाग पर केंद्रित छत्तीसगढ़ वनोदय पत्रिका से विशेष चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि हम आधुनिक सैटेलाइट एवं ड्रोन कैमरा के मध्यम से वन्य प्राणी विशेष कर हाथी की निगरानी के लिए आटोमैटिक इंफोर्मेशन (A I) एवं एफएसआई.एस.तथा नोएडा बेस्ड स्टार्टअप कंपनी कल्पतरु के साथ साझेदारी कर यह हाथी मूवमेंट एप लॉन्च किया गया है जो ऑन लाइन अपडेट किया जाएगा इस एप के मध्यम से पूर्व अनुमान हो जाएगा कि क्षेत्र मे किस दिशा मे हाथी विचरण कर रहे है यही नही गरियाबंद उदंती सीतानादी के उप निदेशक वरुण जैन ने आगे बताया कि हाथी दल के लगातार कॉरिडोर क्षेत्र से हट कर किस विपरीत दिशा मे उनका मूवमेंट होगा वह भी जानकारी हमे  मिलती रहेगी इस हाथी ऐप के मध्यम से दस किलोमीटर पूर्व से हाथी दल की जानकारी मिल जाएगी तथा सभी हाथी मित्र दल के ग्रामीणों को मोबाइल नंबर से कॉल से या फिर एस.एम.एस. व्हाट्सएप के मध्यम से त्वरित जानकारी प्राप्त हो जाएगी ताकि समस्त मित्र दल आसपास के ग्रामीणों को अलर्ट कर सकेंगे गरियाबंद उदंती सीतानदी  अभ्यारण्य के उप निदेशक वरुण जैन आगे बताते है कि डेढ़ वर्षों से इस एप के मध्यम से अब तक गरियाबाद जिले मे किसी प्रकार की जान माल की क्षति नही हुई है उन्होंने आगे बताया कि इस हाथी मूवमेंट एप मे तीन माह अर्थात 90 दिन की जानकारी ज्ञात हो पाएगी उन्होंने आगे बताया चन्दा हाथी दल क्षेत्र मे विचरण कर रहा है या अन्य दल यहाँ सक्रिय है वह समय पर जनकारी प्राप्त होते रहती है श्री वरुण जैन आगे बताते है कि प्रदेश मे लगभग बीस दल सक्रिय है जिनकी संख्या  चार सौ से उपर बताई जा रही है हाथी दल का आगमन के संदर्भ मे उप निदेशक श्री जैन का कथन है कि हाथी दल का मूवमेंट तभी रहता है जब क्षेत्र मे खानपान,पेयजल,एवं आहार की माकूल व्यवस्था रहती है तभी वे प्रदेश के वन क्षेत्रों मे विचरण करते है उनके आहार के संदर्भ मे वे बताते है कि वृक्षों की कोमल पत्तियाँ, फल, फूल, तेंदु, कडली,दाल,बांस, माहुल पत्ता,इनके प्रिय भोजन है जिसकी तलाश मे वे संपूर्ण प्रदेश के वन क्षेत्रों का भ्रमण करते रहते है उपरोक्त सुविधा न मिलने पर अपनी क्षुधा शांति के लिए वे वन ग्राम क्षेत्र मे उपज फसल धान, घरों मे संग्रहित अनाज को चट करने आते है तब ऐसी परिस्थितियों मे  जान माल का खतरा बढ़ जाता है श्री जैन आगे बताते है कि ग्रामीण क्षेत्र मे हाथी मूवमेंट होने की स्थिति मे वन कर्मचरियों तथा मित्र दल के द्वारा गज वाहन से पूर्व मे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों मे मुनादी कर सचेत किया जाता है यही नही ग्रामीणों मे हाथी सुरक्षा बचाव के लिए जन जगरूकता लाने भिन्न भिन्न आयोजन, नाटक, टीवी,फीचर्स, पोस्टर, खेल प्रतियोगीता के मध्यम से सचेत होने निर्देशित किया जाता है  उप निदेशक वरुण जैन आगे बताते है कि आधुनिक एप 13 जिलों मे हाथी एलर्ट एप बनाया गया है जहाँ  जिस क्षेत्र मे हाथियों की लगातार धमक बराबर बनी रहती है इसके लिए खानपान, हेतु कदली वन, बांस के वन, हरे भरे पेड़ पौधे भविष्य मे तालाब  विचरण क्षेत्र मे कॉरिडोर बनाया जाएगा ताकि उनके विचरण क्षेत्र मे कोई असुविधा न हो हाथी अलर्ट एप को तैयार करने मे लगभग डेढ़ वर्ष का समय लग गया है उसे प्रदेश भर मे इसी माह मे लॉन्च किया जाएगा हाथी अलर्ट एप के अलावा उदंती सीतानदी उप निदेशक वरुण जैन यही पर नही रुके बल्कि उन्होंने अन्य पोर्टल रिमोर्ट फेंसिंग पोर्टल भी विभागीय स्तर पर बनाए गए है जिसमे प्रदेश के वन क्षेत्रों की वस्तविक  स्थिति पर भी लगातार निगरानी की जा सकती है जहाँ हरियाली के अलावा मैदानी पड़त भाटा बंजर भूमि की स्थिति से अवगत हुआ जा सकता है मैदानी पडत भाटा बंजर भूमि को चयनित कर वहाँ भिन्न भिन्न प्रजाति के पेड़ पौधों का प्लांटेशन् किया जा सकता है  या वन ग्राम क्षेत्रों के आसपास भूमि पर सहजता से प्लांटेशन किया जा सकता है जहाँ वन कर्मी या मैदानी अमला द्वारा कार्यों मे किसी प्रकार की कोई भी कोताही नही बरत सबता है यदि बीस हजार पौधे रोपे गए है तो मुख्यालय या वन मंडल कार्यालय मे यहाँ बैठे बैठे एप, मॉनिटरिंग मध्यम से उसकी संपूर्ण जानकारी मिल जाएगी कि कितने लक्षित पौधों का रोपण किया गया है या नही.  यहाँ तक सैटेलाइट के मध्यम से कितने प्लांटेशन  क्षेत्र मे कितने गड्ढे खोदे गए है उसकी भी सटीक जानकारी यहाँ बैठे बैठे गिन लिया  जा सकेगा  श्री जैन बताते है कि इस प्रकार के सैटेलाइट एप निर्माण के पीछे की एक वजह यह भी जरूरी है कि काष्ठ तस्करों द्वारा वनों के चोरी छिपे विदोहन, कार्यों मे पारदर्शिता एवं अवैध अतिक्रमण मे यह एप कारगर साबित होगा उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि इसी प्रकार की घटना मे गरियाबंद वन मंडल अंतर्गत साढ़े छ सौ हेक्टेयर वन भूमि मे पांच अवैध बस्ती निर्माण कर अतिक्रमण किया गया था जहाँ बेशकीमती इमारती काष्ठ का दोहन कर वन क्षेत्र के भीतर बस्ती निर्माण कर लिया गया था जिसे पुलिस प्रशासन और वन विभाग के सहयोग से मुक्त कराया गया  जहाँ काफी विरोध और विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी जिसे हमने लाठी डंडे खाकर भी उसे मुक्त कराया गया आज साढ़े छ सौ हेक्टेयर वन भूमि पर खनकी निर्माण, साथ ही हरे भरे पौधे भी रोपण किया गया है ताकि हरियाली सहित क्षेत्र मे जल संरक्षण किया जा सके ताकि क्षेत्र के वनों का जल स्तर बराबर बना रहे और हरियाली भी बनी रहे उप निदेशक वरुण जैन से जब सामाजिक समरसता और सौहाद्रता के संदर्भ मे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि हाथी मित्र दल मे अधिकांश वन ग्रामों के ग्रामीणों सरपंच उप सरपंच को लिया गया है जो वनों के मूल निवासी है हाथियों के आगमन से लेकर आसपास ग्राम क्षेत्रों मे मुनादी से लेकर सुरक्षा मे इनका पूर्ण सहयोग रहता है विभाग भी तीज त्योहार मे इनके साथ मिल कर मनाते है सांस्कृतिक, आयोजनों और समय समय पर खेल आयोजन कर उन्हे प्रोत्साहन राशि दी जाती है इसी माह जुन मे उदंती सीतानदी सेंचुरी प्रबन्धन द्वारा क्रिकेट ट्राफी प्रतियोगीता का आयोजन किया गया जिसमे आसपास ग्रामीणों के खिलाडियों को लिया गया है ताकि परस्पर  समरसता, सौहाद्रता, स्थापित कर वनों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा मे उनकी सहभागिता स्थापित कर सुनिश्चित किया जा सके 

शुक्रवार, 21 जून 2024

भ्रष्ट कार्य प्रणाली के चलते ग्राम पंचायत भलेरा के सरपंच सचिव को बर्खास्त करने का आदेश

 भ्रष्ट कार्य प्रणाली के चलते ग्राम पंचायत भलेरा के सरपंच सचिव को बर्खास्त करने का आदेश


रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)  ग्राम भलेरा के सरपंच मीना साहू और सचिव सोमनाथ साहू को ग्राम भलेरा मे लगातार भ्रष्टचार करने एवं 14 वें 15 वें वित्त की राशि को मनमाने ढंग से दुरूपयोग कर अनियमितता किए जाने पर दोनों के विरुद्ध  जिला अधिकारी ने आदेश जारी किया है तथा सात दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन अभिमत सहित अधिकारी को अवगत करने की बात कही गई है जांच ग्राम भलेरा मे आज किए जाने की बात के भी आदेश जारी हुआ है 


 उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत भलेरा की महिला सरपंच मीना साहू है जिनका सरपंच पति चंद कुमार साहू उसकी अनुपस्थिति मे संपूर्ण कार्य का संपादन करता रहा है वही ग्राम गोविंदा के सचिव गोवर्धन साहू जो ग्राम भलेरा सरपंच का रिश्तेदार है उसके द्वारा मूल ग्राम गोविंदा के कार्यों को करने के बजाए भलेरा ग्राम के संपूर्ण कार्यों का निष्पादन करता था जबकि  मूल सचिव सोमनाथ साहू से केवल वित्तीय राशि लेनदेन और बिल बाउचार कार्यों का सही हस्ताक्षर का उपयोग कर भ्रष्ट कार्यों को अंजाम देते आ रहा था


      यही वजह है कि ग्राम सभा के सदस्यों को भी किसी प्रकार के कार्यों की जानकारी नही मिल पा रही थी और एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार को गोवर्धन साहू सचिव गोविंदा भलेरा सरपंच पति चंद कुमान साहू द्वारा लाखों की 14 वें और 15 वें वित्त मद की राशि का गबन कर डकार लिया गया है जिससे व्यथित हो कर उप सरपंच भूनेश साहू की शिकायत मिलने पर जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने भलेरा सरपंच मीना साहू एवं सचिव सोमनाथ साहू को बर्खास्त (Dismis) करते हुए आरंग जनपद के अधिकारी को सात दिवस के भीतर जांच प्रस्तुत करने का आदेश पत्र प्रेषित किया है 


       गौर तलब है कि भलेरा सरपंच पति चंद्र कुमार साहू पर पूर्व मे भी आबंटित सहकारी सोसाइटी के चावल तेल की हेरा फेरी के आरोप  भी लग चुके है वही गोविंदा सचिव गोवर्धन साहू  मूल ग्राम गोविंदा के कार्य को छोड़ कर भलेरा ग्राम के समस्त कार्यों का संपादन करता रहा है जिसकी अनेको दफा शिकायत की गई है 


उसके बावजूद  गोवर्घन  साहू भलेरा  ग्राम के    पंचायत  कार्यों   मे  हस्तक्षेप करते रहा साथ ही  भलेरा   पंचायत  के स्थानीय मूल सचिव सोमनाथ साहू से बिल बाउचर मे सही हस्ताक्षर कर कार्यों मे अनियमितता करते रहा है बताया जाता है कि गोवर्धन साहू लंबे भ्रष्ट कार्यों मे संलिप्तता के चलते आकुत् संपति अर्जित कर ली है आरंग मे जमीन सहित चल अचल संपति अर्जित कर रखी है साइकल पर चलने वाला गोवर्धन साहू के पास इतनी संपति कहाँ से आई यह जांच का विषय और केंद्र बिंदु है जबकि उप सरपंच भुनेश साहू ने सीधे आरोप लगाया है कि मनरेगा की राशि, तालाब लीज, बाजार लीज,मुरुम उत्खनन, पेड़ कटाई बगैर ग्राम सभा के अनुमोदन लिए राशि गबन करर्ने की बात कही जा रही है 

     यदि जांच सही पाई जाने पर नियम कानून की दृष्टि कोण से वैधानिक रूप से सरपंच पति मीना साहू, चंद्र कुमार साहू, एवं सचिव सहयोगी ग्राम भलेरा सचिव सोमनाथ साहू, गोविंदा सचिव गोवर्धन साहू की संपति राजसात कर शासकीय राशि की भरपाई की जाएगी साथ ही उन्हे जेल भी जानी पढ़ सकती है 

गुरुवार, 20 जून 2024

के.सी. वेणुगोपाल से मिले अमितेश शुक्ल, छत्तीसगढ़ लोकसभा चुनाव में हार को लेकर हुआ मंथन*

 *Big Breaking news:

-के.सी. वेणुगोपाल से मिले अमितेश शुक्ल, छत्तीसगढ़ लोकसभा चुनाव में हार को लेकर हुआ मंथन*




रायपुर:- सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि छत्तीसगढ़ के प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अमितेश शुक्ल ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान AICC के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ के परिणामों में कांग्रेस की हार को लेकर विस्तृत चर्चा की। उनकी बात को वेणुगोपाल जी ने ध्यान से सुना।

शनिवार, 15 जून 2024

मुख्य मंत्री से मिलकर वन विभाग में हो रहे सीधी भर्ती पर रोक लगाने की मांग*

 *मुख्य मंत्री से मिलकर वन विभाग में हो रहे सीधी भर्ती पर  रोक लगाने की मांग*

रायपुर / छत्तीसगढ़ में सबसे बड़े राजस्व वाले वन विभाग में इन दिनों वन रक्षक के 1484 पदों पर तथा वाहन चालक के 144 पदों पर सीधी भर्ती किये जाने हेतु प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने विग्यापन जारी करवाया है! जबकी भाजपा के सारे नेता छ. ग. दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के मंच में जाकर नियमितीकरण करने वादा किया था और जन घोषणा पत्र में सामिल भी किया था उक्त सभी नेता आज उप मुख्य मंत्री, वन मंत्री, वित्त मंत्री और शिक्षा मंत्री है! वन विभाग में 6500 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी व श्रमिक कार्यरत है सीधी भर्ती करने पर इनके भविष्य पर कुठाराघात होगा!  संगठन के पदाधिकारियों ने छाया विधायक श्रीमति अल्का चन्द्राकर के सांथ माननीय मुख्य मंत्री जी से मुलाकात कर सीधी भर्ती पर तत्काल रोक लगाये जाने का मांग किया है, और उक्त रिक्त पदों पर दैनिक वेतन भोगियोॆ को नियमितीकरण की बात भी रखा गया है जिस पर माननीय मुख्य मंत्री जी ने भर्ती पर रोक लगाने का आश्वासन भी दिया है! वही दुसरी ओर संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रामकुमार सिन्हा, प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद वर्मा, जिला सचिव अजय गुप्ता, वन विकास निगम के अध्यक्ष जनक लाल साहु , फेडरेशन के कोषाध्यक्ष विजय पटेल, अमित ठाकुर, शोमनाथ साहु, ने माननीय वित्त मंत्री जी से मिलकर भी भर्ती पर रोक लगाने का निवेदन किया है तो उन्होने भी आश्वासन दिया कि आपके वन मंत्री जी से मिलिये बिल्कुल प्रयास करते है भर्ती रूक जाये! विभाग के मुख्या वन बल प्रमुख से मिलकर निवेदन किया गया तो प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा की भर्ती मैं रोक नही सकता आप लोग मुख्य मंत्री और वन मंत्री जी से मिलिये अगर वहां से निर्देश दिया जायेगा तो हम भर्ती रोक देंगें, 


उन्ही शब्दों को लेकर संगठन के पदाधिकारी ने माननीय वन मंत्री जी से पुन: मुलाकात कर भर्ती पर रोक लगाने व नियमितीकरण किये जाने का निवेदन किया गया है जिस पर माननीय वन मंत्री जी ने भर्ती पर रोक लगाने संबंधी सहमती ब्यक्त किया है!  नियमितीकरण के मामले को एकाएक दर किनार कर सीधी भर्ती हेतु विग्यापन जारी करने पर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है तथा तनाव का माहोल बना हुआ है,  दैनिक वेतन भोगी इस बार अपने अधिकार को पाने के लिये आर पार की लड़ाई के मुड में नजर आ रहे है!

 

मोदी की गारंटी पत्र 100 दिन से भी ज्यादा हो गया है किन्तु कमेटी का रिजल्ट जीरो बटे सन्नाटा है, भाजपा के वादा को लेकर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियो के परिवार भी कहने में नही चुक रहे है जाओं भाजपा को और वोट दों तुम्हे नियमितीकरण करने के बजाय सीधी भर्ती कर रहा है, येसे ही सभी सरकार झुठ बोलते रहते है और तुम लोग समझ नही पाते जैसे शब्दो से दैनिक वेतन भोगियों को उनके परिवार के लोग कोसते जा रहे है जिसके कारण दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों एवं श्रमिक लोग पिड़ीत होकर आर पार की जंगी हड़ताल करने के मुड में है! 

संगठन के पदाधिकारियों ने माननीय मुख्य मंत्री जी, वन मंत्री और वित्त मंत्री जी से आग्रह कर रहे है कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी व श्रमिकों के हित में नियमितीकरण का फैसला जल्द लें और जब तब दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण नही हो जाता है तब तक के लिये सीधी भर्ती पर रोक लगाया जायें!

शुक्रवार, 24 मई 2024

बार अभ्यारणय के विस्तार और वन्य प्राणियों के रहवास की कवायद

 बार अभ्यारणय के विस्तार और वन्य प्राणियों के रहवास की कवायद

अल्ताफ हुसैन

(छत्तीसगढ़ वनोदय) 

रायपुर छग प्रदेश का सदियों से प्राकृतिक नैसर्गिक वातावरण मे सर्वधिक  लोकप्रिय वन अभ्यारण्य  क्षेत्र बार नवापारा का नाम प्रमुखता से आता है जहां प्रकृति ने गगन चुंबी ऊँचे पहाड़,वर्षों से साल और सागौन के अलावा भिन्न भिन्न प्रजाति के फलदार, फुल्दार, औषधि युक्त बेश कीमती वृक्ष मे संपूर्ण वायु की गमक से वातावरण को भीनी भीनी सुगंध के साथ पर्यटकों का मन अल्हादित् कर देता है मानों प्रकृति आवगमन करते पर्यटको के मुख मंडल पर आस पास के प्रकृति पेड़ पौधों की महीन सूक्षम ओस की बूंदे की अदृश्य अमृत कण से आगंतुकों के रुखसार पर मानो ठंडकता एवं भीनी सुगंध के साथ उनका स्वागत कर रही हो परंतु सदियों से जिस बार नवापारा अभ्यारणय की प्रकृति ने वन्य प्राणी, जीव जंतु का लालन पालन किया था और आज भी कर रही है उसका विदोहन मानव जगत ने उसकी वैभवता, आत्म सम्मान, और अस्तित्व पर कुठाराघात कर उसके वास्तविक इतिहास पर काला अध्याय अंकित कर दिया है प्राकृतिक वातावरण के यथार्थ को यथावत बनाए रखने के उद्देश्य से बार नवापारा अभ्यरण्य मे कभी अमूल चूल परिवर्तन नही किया गया केवल कच्ची मुरुमी सड़के विकास के नाम पर बनती, बिगड़ती, और संवरती रही है वर्षो पूर्व कुछ बार क्षेत्र के स्थानों पर चैन लिंक एवं कटिले तारों  को लकड़ी के खंबे से घेरा गया था जिस पर समय के दीमक ने खोखला करते हुए लोहे के कटिले तारों को जंग लगा कर उसकी सुरक्षा को चट कर दिया एक प्रकार से वन्य प्राणियों के संरक्षण और सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो गया है जबकि पूर्व और वर्तमान अधिकारियों ने शाकाहारी वन्य प्राणीयों के चारागाह का समुचित 35 से उपर घास प्रजाति की भिन्न भिन्न किसमें उत्पादन फसल निर्माण कर उनके चारा खान पान की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है इसके अलावा अन्य कोई भी विकास कार्य नही किए गए है जबकि शाकाहरी काले हिरण सहित कोटरी, एवं अन्य वन्य प्राणियों की संख्या मे विगत कई वर्षों से इसकी संख्या मे भी लगातार वृद्धि और इजाफा  हो रहा है परंतु स्थानों का अभाव एवं मुक्त विचरण क्षेत्र मे भारी कमी देखने मिल रही है इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि बार नवापारा अभ्यारणय मे पूर्व मे लगभग ईक्किस् वन ग्राम क्षेत्र को  संपूर्ण बार अभ्यारणय  को मानव समाज ने चारो ओर से घेर रख था जिसकी वजह से मानव दखल होने से मुक्त वातावरण मे वन्य प्राणी विचरण नही कर पाते 

यही वजह है की बीस वर्ष पूर्व  जब पूर्व की भाजपा सरकार के मुख्य मंत्री डॉ रमन सिंह और वन मंत्री विक्रम उसेन्डी के कार्यकाल मे पिथौरा के आगे श्री राम नगर का निर्माण कर तीन वन ग्रामों का व्यव्स्थापन वन विभाग द्वारा कराय गया था तत्कालिक रेंजर उदय सिंह ठाकुर के द्वारा तीन  बार वन ग्रामों का व्यवस्थापन  किया जाना उस समय बहुत बड़ी चुनौती पूर्ण कार्य था जिसके 18 वन ग्राम क्षेत्र अब भी बार अभ्यारण्य के गोद मे  मौजूद है 


इस संदर्भ मे बलौदाबाजार के वन मंडलाधिकारी मयंक अग्रवाल ने बार अभ्यारण के  उन्नयन और विस्तार हेतु पहल की है  तथा बार अधीक्षक आनंद कुदरिया से व्यापक दिशा निर्देश दिए गए है बलौदा बाजार वन मंडल अंतर्गत युवा आई एफ एस.अधिकारी मयंक अग्रवाल के बलौदा बाजार वन मंडल के कार्य कालीन क्षेत्र के तहत ऐसे बहुत से समय भी आया था जब प्राकृतिक आपदा, परस्पर भिडंत मे घटना दुर्घटना के शिकार कई वन्य प्राणी असामयिक काल ग्रास बन गए तब उनके सुरक्षा रहवास की दृष्टि कोण से चिंता व्यक्त करते हुए हुए उन्होंने बार आभ्यारणय के कोठारी ग्राम के लगभग दस किलो मीटर के एक हिस्से मे कोर जोन निर्माण करवाया  गया जहाँ सिर्फ और सिर्फ वन्य प्राणी का एक छत्र राज्य है ताकि वन्य प्राणी सुरक्षित और स्वच्छन्द विचरण कर सके बलौदा बाजार वन मंडलाधिकारी मयंक अग्रवाल आगे बताते है


कि बार अभ्यारणय के कोर ज़ोन निर्माण से इसका यह परिणाम सामने आया है कि क्षेत्र मे लगातार वन्य प्राणियों मे वृद्धि देखी जा रही है वही उनके लगातार वृद्धि से बार क्षेत्र का भूभाग  रकबा भी छोटा पड़ने लगा है जहाँ उन्होंने बार अधीक्षक आनंद कुदरिया को यह महती जिम्मेदारी सौपी है बताते चले कि बार अधीक्षक आनंद कुदरिया का सेवा काल का एक लंबा अनुभव रहा है मानव निर्मित जंगल सफारी निर्माण से लेकर उसके उन्नयन विस्तार मे उनकी महती भूमिका रही है आज जंगल सफारी जू एशिया का नंबर वन जू के रूप मे इतिहास के पन्नो मे दर्ज हो  चुका है  जिनमे तत्कालिक अधिकारियों के साथ आनंद कुदरिया का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है जो आज भी उनकी उपलब्धि के रूप मे जाना जाता है बार नवापारा अभ्यारणय मे व्यापक विस्तार, उन्नयन कार्य और व्यवस्थापन हेतु उनके अनुभव का लाभ लेते हुए यह पहल कर बहुत सी  कागजी कार्यवाही किया जा चुका है

बार अधीक्षक आनंद कुदारीया से इस संदर्भ मे चर्चा करने पर वे बताते है कि बार अभ्यारणय के भौतिकी मान से कुल क्षेत्रफल काफी सकरा हुआ है जहाँ मुक्त वातावरण मे वन्य प्राणियों का विचरण दुरूह और कठिन हो गया है इसके स्वच्छन्द विचरण के लिए वन विभाग से तीन वन ग्राम क्षेत्र बार, अकलतरा, बोहरी, को अन्यन्त्र  व्यवस्थपन प्रक्रिया प्रयास किया जाना बताया गया है  जबकि यह सबसे बड़ा चुनौती पूर्ण कार्य है बार अधीक्षक आनंद कुदरिया बताते है कि बार अभ्यारण्य क्षेत्र सदियों से अपने गर्भ मे कई एतिहासिक प्राकृतिक वन संपदा, वनस्पति, वन्य प्राणियों को अपने आप मे समेटे हुए है परंतु नैसर्गिक प्राकृतिक वातावरण मे कब तक उनके भरोसे रखा जाएगा अब क्षेत्र मे अनियंत्रित होते मानव दखल गाड़ी मोटर साइकिल की चीं चिलप्पो,शोर शराबा के कान फोडू आवाज़ से  वन्य प्राणियों की सुरक्षा व्यवस्था प्रकृति वन क्षेत्र भी अपनी आभा खोते जा रहे है ऐसे मे वर्षों से बार के आसपास वन ग्राम वनवासीयो को व्यवस्थपन की आवश्यकता महसूस की जा रही है इसके। लिए मूल वन विभाग को कार्य योजना बनाकर प्रस्तुत किया गया है बार अधीक्षक आनद कुदरिया का कथन है कि कोई भी कार्य प्रारंभ किया जाए तो भविष्य मे इसके सार्थक परिणाम आज नही तो कल सामने आएंगे ही सो उन्होंने बताया कि यह बार अभ्यारणय का विस्तार ऊन्नयन  और व्यवस्थापन अपने समय पर अवश्य होगा उन्होंने बताया कि बार अभ्यारणय मे वन्य प्राणियों की लगातार वृद्धि होते वन्य प्राणियों के स्वच्छन्द नैसर्गिक वातावरण के विस्तार की अति आवश्यकता देखी जा रही है वे आगे बताते है कि वही बार अभ्यारणय के रवान परिक्षेत्र मे  वन विकास निगम द्वारा वर्षों से सागौन रोपण कर विरलन कार्य से आर्थिक व्यवस्था का दोहन किया जा रहा है जिसके सागौन विरलन के साथ ही अन्य पेड़ पौधे और प्राकृतिक वनों का विदोहन भी कर लिया जाता है जिससे कक्ष क्रमांक 117,118,71,44 जैसे बहुत से क्षेत्र जहाँ खुल कर वनों का विदोहन लगातार हुआ है जहाँ बहुत से वन क्षेत्र की स्थिति सपाट मैदान मे तब्दील हो चुके है आस पास  ग्राम वन वासी द्वारा  काश्त कारी करने से बहुत से वन क्षेत्र जंगल कम खेत खालिहान ज्यादा नज़र आते है ऐसे मे वन्य प्राणियों के रहवास की बहुत बड़ी समस्या बढ़ते जा रहा है खुले क्षेत्र मिलने से शिकार की आशंका प्रबल हो जाती है 


  उल्लेखनीय है कि बार नवा पारा अभ्यारणय मे लगभग तीन वर्ष पूर्व श्याम मृग काले हिरण जिसकी नब्बे की संख्या मे तत्कालिक समय दिल्ली और बिलासपुर जू से स्थानीय बार अभ्यारण्य मे लाया गया था अति संवेदन शील काले हिरण होने के कारण इसकी विशेष सेवा सुश्रुषा की गई थी इसके लिए बार के शांत चित वातावरण मे एक पृथक ग्राम रामपुर क्षेत्र के भूभाग परिक्षेत्र मे बाडा निर्माण कर उन्हे सुरक्षित रखा गया था यही नही उनके खान पान की व्यवस्था हेतु कई हेक्टेयर भू भाग मे लाखों रूपये की लागत मे मुलायम सुपाच्य लगभग तीस प्रजाति के हरे घास ग्रीन लैंड क्षेत्र मे रोपण किया गया यह रोपण बार के अन्य अलग क्षेत्र मे तीन से चार स्थल मे रोपण किया गया जिसका लाभ शुद्ध शाकाहारी वन्य प्राणियों को लगातार प्राप्त हो रहा है बताया जाता है कि वर्तमान मे श्याम मृग की संख्या मे लगातार वृद्धि बताई जा रही है पर्यटकों से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि जब तक काले मृग के दर्शन नही  होते तब तक अभ्यारणय विचरण का आनंद नही आता है जबकि हमारे छग वनोदय पत्रिका के हवाले मे प्रकाशित समाचार मे तत्कालीन रेंजर कृषालु चंद्राकर ने वर्ष भर पूर्व बार के रामपुर वन ग्राम क्षेत्र भूभाग मे नब्बे काले हिरण को छोड़ने की बात कही थी जिनकी संख्या वर्तमान मे एक सौ पचास बताई गई थी तथा तीस काले हिरण को बाड़े मे सुरक्षित स्थान मे रखा गया था जिससेे उनकी संख्या लगातार वृद्धि हुई है असम और अन्य स्थलों से लाए गए पांच  वन भैंसे जिसमे एक नर और चार मादा  के संरक्षण संवर्धन के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे है बार से तीन किलोमीटर की दूरी पर कोठारी मार्ग के वृहद भूभाग को कोर ज़ोन निर्माण किया गया है जहाँ बहुत से वन्य प्राणियों को बड़ी सहजता से विचरण करते देखा जा सकता है यह क्षेत्र मानव रहित आम जन के लिए प्रतिबंधित है वन्य प्राणियों के रहवास के लिए बहुत सी योजनाओं को लाए जाने की बात भी कही जा रही है इस संदर्भ मे उदंती सीतान्दीऔर वन्य प्राणी के मुख्य वन संरक्षक विश्वेश  कुमार झा से चर्चा करने पर बताया कि बार नवापरा अभ्यारणय मे वन्य प्राणियों को लेकर बहुत सी योजनाएं बनाई गई है उनके विस्तार संरक्षण संवर्धन की असीम संभावनए है 


असम से लाए गए वनभैंसा को सतत निगरानी और देख रेख मे रखा गया है उनकी सेवा सुश्रुषा खान पान, रख रखाव,की समुचित व्यवस्था की गई है धूप गर्मी पानी से बचाव हेतु अनुकूल वातावरण हवा पानी,इत्यादि की व्यवस्था की गई है प्रतिदिन खानपान मे पौष्टिक युक्त भोजन दिया जाता है क्योकि वन भैंसा राजकीय पशु भी है तथा विलुप्त प्रजाति के कागार मे है इसलिए किसी भी प्रकार का रिस्क नही लिया जाता है लगभग आधा दर्जन वन कर्मी लगातार निगरानी करते है परस्पर द्वंद होने और चोटिल होने पर डॉक्टरों की गहन देखरेख मे रहते है उनका नियमित उपचार परीक्षण किया जाता है सी सी एफ वन्य प्राणी विश्वेश कुमार झा आगे बताते है कि एक वर्ष मे उपर हो चुके वन भैंसों के बार नवापारा अभ्यारणय मे रहने के बावजूद वे अनुकूल वातावरण मे ढल नही पाए है यही वजह है कि इनकी वंश वृद्धि भी नही हो पा रही है इसके अलावा गौर जैसे भैंसे प्रजाति के बलशाली वन्य प्राणियों की उपस्थिति मे इनका भिडंत संभावित है इसलिए इन्हे पृथक बाड़ा बना कर कोर जोन मे रखा गया है सीसीएफ वन्य प्राणी विश्वेश कुमार झा आगे बताते है कि असम से लाए गए वन भैंसा कोई आम भैंसा नही जिसे मुक्त वातावरण मे खुला छोड़ दिया जाए उसके पेयजल से लेकर खानपान तक सुविधा अनुसार दिया जाता है जिसमे करोड़ों रुपये व्यय होते है सीसीएफ वन्य प्राणी विश्वेश झा आगे बताते है कि आवश्यकता अनुसार जब वह प्राकृतिक घास ग्रहण करेगा तब ही बजट अनुसार उनके रुचि कर घास का उत्पादन जैसे ग्रास लैंड बनाया जाएगा वही एक ही क्षेत्र मे तालाब,या टंकी निर्माण कर पेयजल विचरण की समस्या दूर की जाएगी क्योंकि वर्तमान मे दूषित पेयजल से उनके स्वस्थ्य पर  विपरीत असर पड सकता है इसलिए स्वच्छ और स्वस्थ्य पेय जल दिया जा रहा है चारा समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा सी सी एफ वन्य प्राणी विश्वेश झा आगे बताते है कि बार मे हाथी कॉरिडोर क्षेत्र है यहाँ बड़ी संख्या मे हाथियों का आवागमन होता है नए वन्य प्राणियों के हिसाब से तार फैनसिंग लगाई जाएगी ताकि वे मुक्त वातावरण मे सुरक्षित रह सके उनका मत है कि कोई भी वन्य प्राणी चारा, दाना पानी और खुले वातावरण मे सुविधा उपलब्ध रहेगी तो वे स्वमेव क्षेत्र को अपना वास बना लेते है सी सी एफ वन्य प्राणी विश्वेश झा आगे बताते है कि अन्य जू और अभ्यारणय से वन्य प्राणियों की आदान प्रदान किया जाता है  यहाँ से भी ऐसी व्यवस्था की जाएगी ताकि पर्यटक वन्य प्राणियों को मुक्त विचरण करता देख प्रफुल्लित होकर गद गद हो सके वही कोठारी रेंज के परिक्षेत्राधिकारी
जीवन लाल साहू लगातार कोठारी क्षेत्र मे एक्टिव रहते है तथा वन भैंसों की सतत निगरानी करते है परिक्षेत्राधिकारी जीवन लाल साहू बताते है कि वन भैंसों के स्वस्थ्य और खान पान पर विशेष ध्यान दिया जाता है भीगे हुए चना के छिलके घास, भीगी दाल, फल्ली दाना, दलिया, फुड, खल्ली, जैसे चीना बादाम, डाइट के अनुसार दिए जाते है लगातार डॉक्टरो की निगरानी रहती है साथ ही चार वन कर्मी लगातार क्षेत्र मे निगरानी करते है भीषण ग्रीषम  मे नहाने के अलावा चारा दाना, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की गई है कोठारी रेंजर जीवन लाल साहू आगे बताते है कि वंश वृद्धि के लिए अभी तक प्राकृतिक सहवास की स्थिति निर्मित नही हुई है फिर भी प्राकृतिक अनुसार स्थिति निर्मित होने पर इसका कुनबा बढ़ सकता है  जबकि सी सी एफ वन्य प्राणी विश्वेश झा ने हाल ही बताया था कि राज्य के उदंती सीतानदी हिस्से मे प्रवासी वन्य भैंसे के आगमन पर उनका क्लोन लिया जाएगा परिस्थिति अनुसार इनके कुनबे मे बढ़ोतरी के प्रयास किए जाएंगे वही प्रवासी शेर भी सिरपुर शक्ति घाट क्षेत्र मे विचरण कर रहा है यदि वह मौसम अनुकूल यहाँ बार क्षेत्र मे स्थायी तौर पर रहता है तो अन्य जू या अभ्यारणय से मादा शेर लाकर शेर का संरक्षण किया जाएगा उनका कथन है कि पूरे देश मे शेर की संख्या मे भारी गिरावट आई है विलुप्त प्रजाति के शेर के संरक्षण संवर्धन मे यथोचित कार्य किए जाएंगे इसके लिए वनों और अभ्यारण्य क्षेत्र को मानव रहित मुक्त क्षेत्र बनाना आवश्यक हो गया है यह तभी संभव है जब वर्षो से वन क्षेत्रों मे बसे वन ग्रामों आसपास की बसाहटो  को अन्यत्र व्यवस्थापन कर वन क्षेत्रों का विस्तार किया जाए तभी वनों और वन्य प्राणियों का संरक्षण संवर्धन संभव हो सकेगा 

सोमवार, 22 अप्रैल 2024

जंगल सफारी मे शेर और चीते के खुराक मे वन कर्मियों का डाका तोंद के साथ जेब भी बड़ा रहे

 जंगल सफारी मे शेर और चीते के खुराक मे वन कर्मियों का डाका तोंद के साथ जेब भी बड़ा रहे 

   


अलताफ़ हुसैन

  रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) एशिया का सबसे बडा मानव निर्मित जंगल सफारी अपने प्रारंभिक् निर्माण कार्य से ही लेकर सदा भ्रष्टाचार के साथ उसका नाता विवादों से जुड़ाव रहा है अब चाहे चारो ओर दीवार निर्माण कार्य से लेकर वानिकी कार्य हो या फिर लोहे की जालीनुमा फैसिंग कार्य हो मुरुम उत्खनन हो या पृथक शौचालय कक्ष निर्माण से लेकर वन्य प्राणियों के बाड़ा आहता निर्माण ही क्यों न हो करोडों अरबों की राशि केवल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा कर ही उसका बंटाधार होता रहा फिर भी यह सिलसिला अभी भी थमने का नाम नही ले रहा है आए दिन भ्रष्टाचार के नए नए किस्से सामने आते रहे है अब ताजा भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला का मामला जो सामने आ रहा है वह काफी हैरान करने वाला है क्योंकि यह भ्रष्ट कृत्य निर्माण या वानिकी कार्य को लेजर नही बल्कि शेर चीता और अन्य मांसाहारी प्राणियों को जंगल सफारी प्रबंधन से मिलने वाले बकरे का ताजा मटन और मुर्गी मटन के खुराक को लेकर  संपूर्ण आसपास क्षेत्र मे खासा चर्चा बना हुआ है जिसमे उन्हे दिए जाने वाले खुराक मे बड़े स्तर पर डाका डाला जा रहा है वह भी हजारो रुपये मे नही बल्कि लाखों का खेल हो रहा है      


गौरतलब हो कि पूर्व मे जंगल सफारी से छन कर गाहे- बगाहे  बाहर समाचार   मिलते रहे है कि शेर चीते, और मांसहारी वन्य प्राणियों को दी जाने वाली माँस मटन मुर्गी मछली के खुराक मे स्थानीय वन कर्मी, कांटा मार कर अपने पेट की क्षुधा शांत कर अपनी तोंद बड़ा रहे है साथ ही अपने जेब के खीसे का वजन भी बढ़ा रहे है परंतु इससे उपर जाकर भ्रष्टाचार का खेल-खेल कर लाखों का वारा न्यारा किया जा रहा है वताया जाता है कि बकरे के मांस के अन्य अवशेष का खाद्य समाग्री प्रतिदिन सफारी प्रागण के हिस्से मे निर्माण कर संध्या पश्चात  पार्टी  के साथ ही शाराब, माँस का कबाब  सेवन करते हुए सदैव आम चर्चा होती रही है परंतु कांटा मारने तक बात सही है लेकिन लाखों का खेल होने की जानकारी बाहर निकली तब जिसने भी सुना आश्चर्य चकित हो गया इस डाका जनी मे हजार दो हजार का गाला नही बल्कि लाखों का खेल हो रहा है अति विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है की इस भ्रष्टाचार के कार्यक्रम मे डॉ राकेश वर्मा और रेंजर के सहयोग से बहुत बड़ा खेल प्रायोजित हो रहा है ये वही राकेश वर्मा है जिनके कुछ दिन पूर्व कार्यालयीन समय मे विदेश भ्रमण मे रहते हुए सफारी के दो से  तीन  चौसिंगा वन्य प्राणी मृत हुए थे लेकिन उन पर आज तक विधिवत विभागीय कोई कार्यवाही नही हुई बहरहाल जंगल सफारी के सभी मांसाहारी वन्य प्राणियों के लिए प्रति वर्ष निविदा अनुसार बकरे का ताजा मटन लगभग ढाई सौ किलो प्रतिदिन वन्य प्राणियों को खुराक के रूप मे दिया जाना सुनिश्चित है  परंतु प्रतिदिन जंगल सफारी मे दोपहर पश्चात स्वस्थ तंदरुस्त बकरा के स्थान पर निःशक्त, बीमारू, झकडी बकरी काट कर उन्हे परोस दिया जाता है जिससे शेर चीता, एवं अन्य मांसाहार वन्य प्राणियों के स्वस्थ्य पर विपरीत प्रभाव पढ़ सकता है जिसका उदाहरण पिछले बहुत से वन्य प्राणियों की अकाल मृत्यु को लिया जा सकता है मगर फिर भी डाइट के मामले मे जंगल सफारी कर्मियों द्वारा दिए जाने वाले खुराक मे कटौती कर केवल अपनी जेब गरम करने का अवसर तलाश करते रहते है


अब जो जानकारी बाहर आ रही है कि पूरे सफारी मे सात नग शेर है जिनमे प्रत्येक शेर कि खुराक लगभग पांच किलो मटन देने का नियम है जिनमे चार से पांच शेर तथा दो सफेद बंगाल टायगर जिन्हे चिकन दिया जाता है परंतु संध्या पश्चात एक ही टाइम उन्हे कम मात्रा मे माँस की खुराक दी जाती है वही चीता को एक से दो किलो और विदेशी कुत्तों को एक पाव से आधा किलो किमा दिया जाता है मगर मच्छ को एक किलो मछली तथा अन्य वन्य प्राणियों को इसी प्रकार  कम मात्रा मे खुराक दी जा रही है 

 उस हिसाब से समस्त खुराक  सौ किलो मटन मे निपटा दिया जाता है जबकि ज्ञात हुआ है कि जंगल सफारी के रख रखाव सुरक्षा, खानपान के लिए राज्य शासन द्वारा पृथक बजट जारी करता है जबकि यह भी बताया जाता है की सेंट्रल जू अथारीटी नई दिल्ली से भी करोड़ों  का बजट जारी होता है मगर कहते है दीया तले अंधेरा वाली उक्ति यहाँ चरितार्थ होते दिखाई बढ़ती है इतना बड़ा राशि होने के बावजूद समस्त राशि निर्माण एवं अन्य कार्यों मे वहन कर दिया जाता है पूर्व तत्कालिक जंगल सफारी (अधीक्षक) डायरेक्टर और बहुत से रेंजर वन कर्मी यदि पारदर्शी से कार्यों का निष्पादन करते तो आम लोगों का यह कथन है कि जंगल सफारी मे चांदी की पतली दीवार खड़ी हो सकती थी इस बात का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि छोटे से फॉरेस्ट गार्ड वन कर्मी भी नवा रायपुर के पॉश इलाके मे लाखों का मकाम ले  कर रखे है और चार पहिया गाड़ी मे चलते है 



  उसके बावजूद वर्तमान मे सफारी प्रबन्धन के डॉ राकेश वर्मा एवं तत्कालिक रेंजर ठाकुर की मिलीभगत  के चलते लगभग देड सौ किलो मटन की लाखों की राशि का खेल हो जाता है जानकार बताते है कि उन्हे मोबाइल स्क्रीन पर फोटो के स्वस्थ बकरे की फोटो दिखाई जाती है जिसकी कीमत एक बकरे की कीमत ही बीस से पच्चीस हजार रूपए  बताया जाता है जब उन्हे सफारी मे लाया जाता है तब दिखाए गए स्वस्थ बकरे के फोटो के स्थान पर बीमारू, मरियल बकरी काट कर शेर,सिंह,चीता,को खुराक दे दी जाती है जिसमे ए पी एस (अमानत राशि) की राशि सहित कम वजन होने की बात कह कर बैंक ड्राफ्ट सह वन मंडल अधिकारी के मध्यम से लाखों की राशि ले ली जाती है अब यह राशि कमीशन खोरी या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती है या परस्पर बंदर बांट हो जाती है यह तो ज्ञात नही परंतु यह सिलसिला  वर्षों से जंगल सफारी मे यह खेल- खेला जा रहा है जंगल सफारी मे गड़बड़ घोटाला, भ्रष्टाचार, और  अनीयमिताएं हर कदम पर विधमान है



 टिकट काउंटर मे टिकट ब्लेक से लेकर दैनिक वेतन भोगी कर्मियों की फर्जी ऑन लाइन तक की सैकडों पेमेंट जिन्हे विश्वासनीय  व्यक्तियों को कुछ राशि दे कर और आधार कार्ड के मध्यम से उगाही की जाती है यही वजह है कि चार पहिया वाहन से आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर चले जाते है जिनमे एक मनीष यादव नामक दैवेभो. कर्मी वर्षों से उसका लाभ उठा रहा है इसी प्रकार ऐसे बहुत से दैनिक वेतन भोगी अनियमित कर्मचारी वन कर्मियों की मिली भगत के चलते लाखों की राशि आहरण कर रहे है यही नही कुछ कर्मियों को देर सबेरा कार्य मे उपस्थित होने के बावजूद अनुपस्थिति दर्शा कर  उनकी राशि भी काट ली जाती है जिसकी वजह से कई बार सफारी कर्मचारी आंदोलम कर चुके है वर्तमान डी एफ ओ ने जब जंगल सफारी के नवा रायपुर से संचालन की बात कही तब बहुत से वन कर्मी उसका विरोध कर रहे थे उन्हे मालूम था कि नंदन वन, जंगल सफारी के यहाँ संचालन से काला पिला करने मे बहुत कठिनाई होगी इस लिए सफारी का संचालन पूर्व निर्धारित स्थान रायपुर से करने पर अड़े हुए थे. 

सोमवार, 15 अप्रैल 2024

रवान मे फिर शेर ने एक भैंस का शिकार किया

 रवान मे फिर शेर ने एक भैंस का शिकार किया



अल्ताफ हुसैन

रायपुर बार नवापारा  अभ्यारणय के रवान क्षेत्र मे इन दिनों प्रवासी बाघ ने अपना डेरा जमाया हुआ है तथा लगातार पालतू मवेशियों का शिकार कर रहा है ज्ञात हुआ है कि कल रवान क्षेत्र मे एक भैंस का शिकार कर दिया जिससे आस पास क्षेत्र मे दहशत व्याप्त है इसके रोकथाम के लिए वन अमला और वन विकास निगम द्वारा लगातार बैठक का दौर कर रहा है




     घटना कल की बताई जा रही है जहाँ शेर ने रवान क्षेत्र मे एक पालतू मवेशी भैंस का शिकार करना बताया जा रहा है प्रत्यक्ष दर्शियों का मत है कि शेर इतने बड़े मवेशी का अकेले शिकार नही कर सकता मगर दो से अधिक अन्य चीता मिल कर उसका शिकार किए जाने की अशंका व्यक्त की जा रही है  मगर जिस तरह शेर क्षेत्र मे सक्रिय है वहाँ चीते की बात नगण्य मानी जा रही है 

      जबकि लगातार एक माह से प्रवासी बाघ क्षेत्र मे शिकार कर रहा है उसके ट्रैक के लिए प्रशिक्षित कुमकी हाथी भी मंगवाया गया है जो सघन वन क्षेत्र मे उसकी टोह लिया जाएगा वही वन विकास निगम के डी एम. बच्चन साहब पूरे अमले के साथ रवान रेस्ट हाउस मे बैठक ले कर दिशा निर्देश दिए है तथा आसपास ग्राम मे मुनादी कराई गई है वही बार नवापारा अभ्यारणय के अधीक्षक आनंद कुदरिया ने लोगो से वनों की तरफ न जाने अपील की है वही प्रशिक्षित कुमकी हाथी भी रवान के लिए रवाना किया गया है जहाँ वन अमला और निगम कर्मचारी बाघ पर नज़र रखेगे  जब की यह भी ज्ञात हुआ है कि एक और जंगली हाथी क्षेत्र मे पहुंच चुका है उसकी टोह् भी ली जा रही है 

     

मंगलवार, 9 अप्रैल 2024

माना परिवृत् मे कृष्ण कुंज निर्माण से प्रकृति का विस्तार

 माना परिवृत् मे कृष्ण कुंज निर्माण से प्रकृति का विस्तार 


अलताफ़ हुसैन द्वारा

रायपुर   प्रभु श्री कृष्ण भगवान अर्थात नटखट नंद बाल गोपाल का बाल्य काल  प्राकृतिक की गोद मे व्यतीत हुआ है बांसुरी की धुन पर गौ माता के चराई  का समय हो या बाल सखा के साथ अमोद प्रमोद या दही खाने की प्रबल लालसा मे नटखट नंद किशोर की सभी माताओं द्वारा की जाने वाली शिकायर पर डांट खाने की चंचल चपल लीलाएं सभी बृज वासियों का मन  मोह लेती थी फिर यमुना तीर के कानन मे कदम के पेड़ मे गोपियों संग   हंसी ठिठोली  क्यों न हो उनकी बांसुरी की धुन पर सभी प्राणियों को मंत्र मुग्ध कर सम्मोहित कर देती थी यहाँ तक प्राकृतिक भी उनके बांसुरी की धुन पर वायु के तरंगित ताल मे पेड़,पौधे,और पत्ते झूम उठती थी मानो उनके लय पर नृत्य कर रही हो परंतु बदलते काल चक्र के साथ वर्तमान  मे लगातार हरे भरे पेड़ पौधों और नैसर्गिक प्रकृति का हास हुआ है हरे भरे पेड़ पौधों की अनवरत कटाई से अब सारा प्रकृति वातावरण सपाट चटीयल मैदानी क्षेत्र मे परिवर्तित हो चुका है





 इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी संपूर्ण मानव समाज की बनती है जिनके लगातार वनों के विदोहन् से पृथ्वी आज संकट के कागार पर खड़ा हो चुका है यही वजह है कि छ्ग प्रदेश का वन जलवायु परिवर्तन  विभाग ऐसे क्षेत्रों में हरियाली प्रसार  के उद्देश्य से नए नए अविष्कार कर  प्रकृति एवं हरियाली के अस्तित्व को अक्षुण्य बनाए रखने नित नए प्रयोग के साथ कवायद कर रहा है ताकि सर्वहारा वर्ग के जान माल, और प्रदूषण से लड़ा जा सके इसके लिए प्रदेश सरकार ने प्रभु श्री राम के अवतारित स्वरूप मे प्रभु श्री कृष्ण भगवान के नाम पर आस्था व्यक्त करते हुए संपूर्ण प्रदेश मे कृष्ण कुंज (वाटिका) का निर्माण किया गया है ताकि संपूर्ण मानव पशु पक्षी को कुछ पल राहत और सुकून का क्षण मिल सके पेड़ पौधों के मध्य हरे भरे वातावरण निर्मित करने के लिए वन विभाग ने एक एकड से लेकर अधिकतम पांच एकड़ राजस्व भूभाग मे कृष्ण कुंज को सुव्यवस्थित कर फलदार, फूलदार सायादार,औषधि युक्त धार्मिक आस्था से जुड़े रहने वाले पौधों का रोपण कर संपूर्ण प्रदेश भर मे हरित क्रांति ला दी है 


छग के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उक्त महत्वांकाक्षी योजना के तहत ग्राम पंचायत माना के निकट माना बस्ती इंदिरा निकुंज में वन विभाग रायपुर रेंज के तहत कृष्ण कुंज का निर्माण किया गया यह माना रोपणी के समीप लगभग 1.50 एकड़ भूमि पर निर्माण कराया गया है जिसकी अलग ही छटा क्षेत्र मे बिखेर रही है माना स्थित रोपाणी के समक्ष  कृष्ण कुंज में कुल 35 प्रकार से उपर फलदार औषधियुक्त पौधे जिनमे आंवला,अंजीर,जामुन,बेल, संतरा,आम,चीकू,कटहल,नींबू,करौंदा,सीताफल,अमरूद,बेर, हर्र, बेहड़ा,महुआ,इमली,तेंदू,

काजू, रबर, सहित शहतूत,रामफल,बरगद,

पीपल,नीम,कदम,प्लाश,चंदन,गुलर,चार,अशोक,अनार, बादाम, चंपा, आदि को सम्मिलित किया गया यह पहला अवसर था कि रबर के पौधे भी लगाय गाए है इस संदर्भ मे नर्सरी प्रभारी तेजा साहू बताते है कि रबर के पौधों से ऑक्सिजन प्रचुर मात्र मे निकलता है साथ ही सर्वाधिक प्रदूषण को अवशोषित करता है ताकि आम जन के स्वस्थ्य की सुरक्षा हो सके इसी प्रकार के बहुत से फलदार, औषधि युक्त पौधे जो ऑक्सिजन सहित स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बहु उपयोगी है जिसे प्रमुखता से रोपण किया गया है श्री तेजा साहू ने बताया कि इंदिरा निकुंज स्थित कृष्ण कुंज मे लगभग 720 से उपर पौधे रोपित कर कृष्ण कुंज वाटिका का रोपण निर्माण किया गया जो सभी दृष्टि कोण से महत्व पूर्ण है


इसमें फलदार  औषधि युक्त पौधों को तरजीह दिया गया है जो फल देने के साथ स्वस्थ्य के दृष्टि से बहुत उपयोगी माना जा रहा है माना नर्सरी और कृष्ण कुंज के प्रभारी श्री तेजा साहू ने आगे बताया कि सभी पौधे भिन्न भिन्न बाहरी प्रदेश से आयात किए गए है इसके लिए अन्य नर्सरी के मध्यम से काँटेक्ट कर चयनित पौधे मंगाए गए है और बाहरी प्रदेश से उच्च क्वालिटी के पौधों को मंगाया गया है इसकी वजह यह है कि सभी फलदार फुल्दार पौधों के टेक्निकल उपज कि जानकारी और मिट्टी मृदा कि गुणवत्ता खाद देने कि प्रक्रिया सहित नियमित सिचाई जैसे कृत्य की संपूर्ण जानकारी हासिल किया गया है जिसके नियमित देखरेखा व्यवस्था, उपचार से सभी पौधे स्वस्थ हो कर ग्रोथ कर रहे है  


 कृष्णकुंज, वाटिका के रोपण निर्माण के उद्देश्य और विस्तार के संबंध में रायपुर रेंज के परिक्षेत्राधिकारी सतीश मिश्रा बताते है कि  विलूप्त होते फलदार,औषधियुक्त पौधों को संरक्षण,संवर्धन कर उसके अस्तित्व को अक्षुण्य बनाए रखना विभाग की प्राथमिकता है यही वजह है कि नगर निगम,ग्राम जनपद पंचायतों के माध्यम से कृष्णकूंज का निर्माण किया जा रहा है इसकी वजह से प्रदेश भर में बड़ी संख्या में हरियाली प्रसार किया गया है रेंजर सतीश मिश्रा ने आगे बताया कि कृष्णकुंज स्थापना से बढ़ते प्रदूषण के विरुद्ध एक अभियान है जिससे स्वच्छ वातावरण निर्मित कर परस्पर सामाजिक स्वस्थ्य समरसता स्थापित करना मुख्य उद्देश्य  है ताकि मुक्त स्वच्छ वातावरण में आम जन को स्वास्थ्य वर्धक वातावरण सहजता से कृष्णकूंज वाटिका के रूप में इसका लाभ आम जन को मिल सके रायपुर परिक्षेत्राधिकारी सतीश मिश्रा आगे बताते है कि पौधों का रोपण करना कोई मायने नही रखता बल्कि उसकी सुरक्षा, देखभाल और उपचार करना सबसे बड़ा मायने रखता है जो तीन वर्षों की अवधि मे लगातार वन कर्मी इस पर नज़र जमाए हुए है और नियमित पौधों पर ,निंदाई,गूडाई,सिंचाई उपचार किया जा रहा है  जिनके पौधे सतत बढ़त बनाए हुए है श्री सतीश मिश्रा आगे बताते है कि सुरक्षा के दृष्टि से चारों ओर आकर्षक तार फैसिंग की गई है ताकि मवेशी जानवरों के चराई से कृष्ण कुंज सुरक्षित रखा जा सके उन्होंने आगे बताया कि मुख्य मार्ग के समक्ष बाउंड्री वॉल और आकर्षक पारंपरिक आदिवासी वाद्य यंत्र (साज) तुरही की आकृति मुख्य प्रवेश द्वार पर अंकित किया गया है जो बेहद आकर्षक दृष्टि गोचर होता है वही दीवार पर प्रभू श्री कृष्ण की विभिन्न भावभंगिमा युक्त जीवंत शैल चित्र उकेरे गए है जो कृष्ण कुंज को आकर्षण के साथ ही श्रद्धा और आस्था के भाव जागृत करता है


परिक्षेत्राधिकारी श्री सतीश मिश्रा योजना के क्रियानव्यन के बारे मे जानकारी देते हुए बताते है कि रायपुर वन मंडल के तत्कालिक वरिष्ठ डीएफओ तथा वर्तमान सी सी एफ उदंती सीतानदी प्रभारी श्री विश्वेश कुमार झा का कृष्ण कुंज निर्माण के पीछे बहुत बड़ा योगदान रहा जिनके मार्ग दर्शन मे रायपुर वन मंडल क्षेत्र के अंतर्गत मे लगभग एक दर्जन कृष्ण कुंज का निर्माण रोपण बहुत ही सफलता पूर्वक किया गया जो एक वर्ष मे ग्रोथ कर बढ़त बनाए हुए है तथा हरीतिमा युक्त वातावरण निर्मित कर रहे है रायपुर वन मंडल के उप वन मंडलाधिकारी विश्वनाथ मुखर्जी इस संदर्भ मे बताते है कि छोटे छोटे भुभाग मे कृष्ण कुंज निर्माण से वनों का विस्तार हुआ है तथा प्रदूषण से लड़ने ऐसे हरियाली क्षेत्र ऑक्सीजन का काम कर रहे है इसके लिए चयनित पेड़ पौधों का रोपण प्रमुखता है साथ ही विलुप्त प्रजाति के पौधे का संरक्षित करना है अतएव अन्य प्रदेश से पौधे मंगाए गए है जिनके रोपण से उपरार्ध अक्षांश से सीधे पढ़ने वाली भूमध्य सूर्य रेखा की किरणें से  वार्मिंग ग्लोबल से लड़ने मे सहायक सिद्ध होगा ही 


साथ ही आम जन पशु पक्षियों के स्वास्थय वातावरण के लिए भी लाभ प्रद होगा वही इंदिरा निकुंज नर्सरी एवं कृष्ण कुंज के सहायक प्रभारी भूपेंद्र यादव पूरी सक्रियता से एक एक पौधों की देखरेख उपचार पर नियंत्रित किए हुए है उनका कथन है कि कृष्ण कुंज वाटिका मे पौधे लगातार बढ़ रहे है अब दूर से ही कृष्ण कुंज क्षेत्र वन सदृश्य दिखाई पड़ रहा है नर्सरी एवं कृष्ण कुंज को विशाल लोहे की जाली नुमा सुरक्षा घेरा लगाया गया है यही नही कृष्ण कुंज के मुख्य द्वार के मध्य मे प्रभु श्री कृष्ण भगवान की मूर्ति स्थापित की गई है जो कृष्ण कुंज की वैभवत मे चार चाँद लगा रही है 

माना नर्सरी एवं कृष्ण कुंज के सहायक प्रभारी भूपेंद्र यादव आगे बताते है कि संभवतः यह प्रथम अवसर कृष्ण कुंज होगा जहां भगवान श्री कृष्ण की साक्षात मूर्ति स्थापित किया गया है इसके पीछे भविष्य मे आने वाले पर्यटक क्षेत्र को स्वच्छता बनाने मे सहयोग रखेगे साथ ही किसी भी पेड़ पौधों की क्षति न पहुंचाएंगे क्योंकि बहुत से पेड़ पौधे धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है जिसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों मे मिलता है ताकि कोई भी व्यक्ति कृष्ण कुंज की पवित्रता को पानी की बोतल शीशी एवं पाउच फेक कर मंदिर् नुमा कृष्ण कुंज को अपवित्रता करने का दुस्साहस न कर सके

 कृष्ण कुंज के उक्त प्रारंभिक कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बिसौहा सिन्हा,श्रीमती किरण सिन्हा, विनय गेंद्रे,प्रकाश बांधे,दीपक देवांगन,श्रीमती उषा सोनी, रमेश सोनी,सहित  वन विभाग के आला वन मंडलाधिकारी विश्वेश कुमार झा,संयुक्त वन मंडलाधिकारी विश्वनाथ मुखर्जी, परिक्षेत्राधिकारी सतीश कुमार मिश्रा,सहायक परिक्षेत्राधिकारी तेजा सिंह साहू, सहायक प्रभारी भूपेंद्र यादव सहित बहुत से वन कर्मचारी स्थानीय गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित हुए थे

मंगलवार, 2 अप्रैल 2024

वन विकास निगम के रवान परिक्षेत्र दावानाल की चपेट मे

 वन विकास निगम के रवान परिक्षेत्र दावानाल की चपेट मे 



रायपुर  छ्ग राज्य वन विकास निगम के बार नवापारा परियोजना मंडल स्थित रवान परिक्षेत्र मे कक्ष क्रमांक 117/118 मे सघन वन क्षेत्र मे दावानाल लगने से कई छोटे बड़े पेड़ आग की चपेट मे आ गए और लगभग दो सौ मीटर अधिक क्षेत्र मे दूर से क्षेत्र मे आग की लपट उठती दिखाई पड़ रही थी जिस वक्त दावानाल की लपटे दूर से दिखा रही थी तब तक कोई वन विकास निगम कर्मचारी  नही था जब फॉरेस्ट क्राईम समाचार पत्र के पत्रकार वीडियो ले रहे थे उसके पश्चात चौकीदार पहुंचा तब तक भीषण आग तेजी से फैल चुकी थी चौकीदार से पूछने पर बताया की तेंदुपत्ता और महुआ बिनने वाले लोग प्रायः बीड़ी का शुट्टा मारते है और सुखे पत्तों मे फेक देते है जिसकी वजह से क्षेत्र के वनों मे बड़ी हानि होती है इसके पश्चात आनन फानन मे कुछ वन विकास निगम वन कर्मी पहुंचे और आग के इर्द गिर्द लाइनिंग खीच कर बनाए 

   गौर तलब है कि कक्ष क्रमांक 117/ एवं 118 में वर्षिकि विरलन कार्य संपादित हुआ है जिसमे बहुत से क्षेत्र में सगौन  काष्ठ की थप्पी लगी हुई है आशंका व्यक्त की जा रही है की कुछ  जलाऊ चट्टे दावानाल  की चपेट मे आकर भस्म हो गए है सागौन थप्पी मे आग लगी या नही यह ज्ञात नही हो पाया है 

शुक्रवार, 29 मार्च 2024

वन विकास निगम या महा विनाश निगम गडबड़, घोटाला,भ्रष्टाचार का अडडा बना

 वन विकास निगम या हा विनाश निगम  

गडबड़, घोटाला,भ्रष्टाचार का अडडा बना



अलताफ़ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) विगत दिनों छ्ग राज्य वन विकास निगम के बार नवापार परियोजना मंडल के अंतर्गत रवान के कक्ष क्रमांक 116 के टीपी 02 मे माह 07-05-2023  वित्तीय वर्ष 2022-2023 मे भौतिक विदोहन  कार्य किया गया था जिसमे लगभग 95 अर्थात सौ घन मीटर का पातन किया जाना सुनिश्चित था परंतु रवान के डिप्टी रेंजर लोकेश साहू ने वरिष्ठ अधिकारियों के बगैर अतिरिक्त आदेश पत्र के 95 घन मीटर के स्थान पर दो सौ तीस से उपर घन मीटर अर्थात लक्ष्य से 130 घन मीटर अतिरिक्त विरलन कर दिया गया जब तक मामला उपर पहुंचे उस पर लीपा पोती कर ठंडे बस्ते मे डाल दिया गया क्योंकि गोशवारा और अन्य प्रमाणको,दस्तावेज मे कुछ हस्त लिखित स्थान से मामले को दबाने का प्रयास किया गया अब सवाल यह उठता है कि क्या परिक्षेत्राधिकारी रवान को इसका भान था? बार डिप्टी डी. एम. चित्रा मैडम को इसकी भनक थी ? यदि थी तो इस अधिक विरलन को रोका क्यो नही गया?  क्या इसके पीछे वन विकास निगम के अन्य अधिकारियों की मिली भगत थी ? जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही है यदि इतने बड़े पैमाने पर कटाई का हो जाना उस पर लोकेश साहू डिप्टी रेंजर वन विकास निगम के किसी कर्मचारियों पर  कार्यवाही नही किया जाना एक सोची समझी साजिश के तहत लक्ष से अधिक विरलन किया गया है परिणामतः उसी डिप्टी लोकेश साहू एवं अन्य कर्मियों को रवान परिक्षेत्र मे वित्तीय वर्ष 2023-2024 के सागौन विरलन का दायित्व सौंप दिया गया जिसमे हाल ही कक्ष क्रमांक 117/ 118 मे बड़ी संख्या मे पातान किए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है क्योंकि कक्ष क्रमांक 117/के विरलन कार्य मे सागौन की  टॉप A/क्वालिटी की कुल संख्या 261 सहित अन्य मिश्रित प्रजाति की संख्या 295 दर्शाई गई है जिनका कुल योग 556 दर्शाया गया है वही भीतर खोखले वृक्ष की संख्या अधिक है परंतु 100परिपक्व सागौन जो स्वस्थय एवं  लंबाई गुणित ऊँचाई, एवं गोलाई से अधिक मानक की दिखाई दे रही है यही नही बहुत से काष्ठों मे माकिंग, एवं हैमर भी नही दिखाई दे रहा है इससे स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि इस वर्ष2023-2024 मे भी विरलन कार्य मे दाल मे कुछ काला है जबकि उससे दो गुणा अधिक सागौन एवं जलाऊ काष्ठ  चट्टे की संख्या दिखाई दे रही है  वही फलदार पौधे की संख्या 54 है जिसका मूल्यांकन, अनुमति किया जाना मूल वन विभाग से  आवश्यक हो जाता है बता दे कि छ्ग राज्य वन विकास निगम छ्ग शसन से लीज भूमि (किराएदारी) पर सागौन प्लांटेशान कर वनों का विदोहन कर निगम संचालित करती है इसके एवज मे वर्षिकि लाभांश राशि देती है परंतु मूल सागौन की आड़ मे प्रकृति वनों का दोहन कर एक प्रकार से वर्षों से अमानत मे खयानत करती आ रही है


और छ्ग राज्य वन विकास निगम  मूल विभाग से किसी प्रकार की गणना मूल्यांकन,अनुमति अथवा एन ओ सी नही ली जाती है तथा मनमाने तरीका से मूल सागौन के अलावा प्राकृतिक रूप से वनों की शोभा बढाने वाले सभी मिश्रित प्रजाति के वृक्षों का विरलन कर छ्ग वन विकास निगम द्वारा आर्थिक लाभ वर्षो से उठाया जा रहा है तथा मूल वन को नष्ट किया जा रहा है  ज्ञात हुआ है कि लोकसभा चुनाव पश्चात बार नवापारा अभ्यारणय का विस्तार प्रस्तावित है जिसमे तीन ग्राम को व्यवस्थापन किया जान साथ ही वन विकास निगम को बार परियोजना मंडल से पृथक अन्यन्त्र  किए जाने की चर्चा हो रही है इसका लाभ उठाते हुए निगम कर्मचारी यथा संभव रवान परिक्षेत्र से लक्ष्य से अधिक सागौन सहित अन्य काष्ठों का पातन कर पूरा लाभ उठाने का प्रयास किया जा रहा है ऐसी चर्चा जोरों पर है यदि आर टी आई मे प्रगति प्रतिवेदन निकासी पंजी निकाला जाए तो बहुत से कटाई के प्रकरण  सामने आएंगे जिसमे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा क्योंकि 95 घन मीटर से अधिक दो सौ तैतीस  घन मीटर अर्थात सौ घन मीटर से अधिक एक सौ तैतीस घन मीटर अधिक का विरलन करना कोई भूल चूक त्रुटि वश नही हो सकता वह डी एम एवं डिप्टी डी.एम. परिक्षेत्राधिकारी बार नवापारा परियोजना मंडल की जानकारी  के बगैर संभव नही है परंतु इतना संवेदन शील मामला होने के बावजूद छ्ग राज्य वन विकास निगम के आला अधिकारी के सिर मे जूं तक नही रेंगी और ना ही डिप्टी रेंजर लोकेश साहू एवं अन्य संलिप्त अधिकारी पर कोई विभागीय कार्यवाही नही हुई बल्कि उसे ही बार परियोजना मंडल के रवान परिक्षेत्र मे कक्ष क्रमांक 117/118/ वित्तीय वर्ष 2023/2024 के पातन कार्य का उत्तर दायित्व सौंप दिया गया स्वभाविक है उसके द्वारा पुनः क्षेत्र मे गड़बड़ घोटाला करने मे किसी प्रकार का गुरेज नही करेगा तथा भ्रष्टाचार का यह खेल अनवरत जारी रहेगा  हालांकि सौ घन मीटर के स्थान पर एक सौ तैतीस घन मीटर अतिरिक्त सागौन विरलन  काष्ठ का वन विकास निगम ने कोडार काष्ठागार मे क्या किया यह भी लगातार सवाल उठाया जा रहा है क्योंकि गणना और लगभग 13 ट्रैक्टर परिवहन कर 133 घन मीटर क्षमता से अधिक सागौन काष्ठ उसकी भी नीलामी गत चालू वित्त वर्ष मे की गई होगी फिर उसकी अर्जित आय की राशि कहाँ गया यह विचारणीय पहलू है ? 


आरंग पारिक्षेत्र के रेंजर युवराज देवांगन द्वारा जनवरी माह 2024 मे राष्ट्रीय वृक्ष साल काटने के उद्देश्य से लोहारडीह ग्राम के एक व्यक्ति को पकड़ा जिसका  बाजार मूल्य लगभग  80 हजार से एक लाख बताया गया था परंतु आरंग रेंजर युवराज देवांगन् ने मात्र दस हजार रू. फाइन लगा कर उसे छोड़ दिया गया यही नही इस संदर्भ मे भी कोई वैधानिक कार्यवाही नही की गई बताते चले कि छ्ग राज्य वन विकास निगम मे लगभग नौ परियोजना मंडल है जहां बार और पानाबरस परियोजना मंडल के काष्ठागार मे वार्षिकी बारह माह यानी प्रति माह नीलामी निविदा बुलाई जाती है जिसमे नागपुर, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से बिचौलिए ठेकेदार बड़ी मात्रा मे उपस्थिति होते है तथा तीन से सात करोड की नीलामी होती है जो औसतन पांच करोड़ रुपये  प्रति माह मानी जाती है उस हिसाब से बारह माह मे एक परियोजना मंडल बार मे ही पचास से साठ करोड़ रुपये आय अर्जित करती है यही स्थिति पानाबरस परियोजना मंडल की भी है उक्त हिसाब से दो ही परियोजना मंडल मे लगभग सौ करोड़ से लेकर एक सौ बीस करोड़ तक आय प्राप्त करती है उस हिसाब से सात अन्य परियोजना मंडल जिनमे कोटा पंडरीया,अंतागढ़ जगदलपुर जैसे काष्ठागार मे छोटे बड़े नीलामी से दो सौ करोड़ से उपर अतिरिक्त आय बड़ी सहजता से मिला जाता है लगभग कुल तीन सौ  करोड़ उपर वन विकास निगम की वार्षीकि आय आना आंका जा रहा है जिसमे आई पी डी योजना, सहित रेलवे एवं अन्य शासकीय सैक्टर मे पथ रोपण पलांटेशन से अतिरिक्त आय प्राप्त हो जाता है जिसका भुगतान नगद कैश मिलता है फिर भी तीन सौ करोड़ से उपर  वार्षिकि आय वाले छ्ग राज्य वन विकास निगम बजट का रोना रोते रहता है एक जानकारी मे अनुमानित व्यय जिसमे सौ करोड़ रुपये  आठ सौ से हजार दैनिक वेतनभोगी,रेग्युलर,अनुकंपा कर्मचरियो को वेतन मान देय प्रदाय करता है वही रोपण प्लांटेशन  सहित अन्य विभागीय कार्य मे सौ करोड़ वहन किया जाता होगा शेष  सौ करोड़ से उपर की राशि जाती कहां है? या सिर्फ कमीशन खोरी, और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है ?  जो अब भी आम जन के लिए विचारणीय पहलू है वही सवा दो करोड़ की लाभांश राशि राज्य शासन को भेंट की जाती है जो...उंट के मुँह मे ज़ीरा... के समान लगता है जबकि निजी संस्थान का कथन है कि यदि वन विकास निगम निजी हाथों मे दे दिया जाए तो उससे चार गुणा अधिक राज्य शासन को लाभांश राशि प्रदान कर सकते है मगर यहाँ तो गड़बड़ घोटाला, भ्रष्टाचार, कमीशन खोरी जैसे खून का ऐसा मुँह लगा हुआ है कि वरिष्ठ से कनिष्ठ, और फॉरेस्ट गार्ड तक के वन कर्मी भ्रष्टाचार मे आकंठ डूबे हुए है यही वजह है कि छ्ग राज्य वन विकास निगम  मे कभी भी ट्रांसफर, तबादले अन्य स्थानों पर नही होते या विशेष परिस्थितियों मे  ही भेजे जाते है जबकि देखा यह जा रहा हौ कि 15 से 35 वर्षों से एक ही स्थान मे निगम  कर्मी अपना जीवन यापन कर चुके है इसका मूल कारण है कि पैतृक ग्राम क्षेत्र के वनों को वे भली भांति समझते है तथा सभी गड़बड़ घोटाले भ्राष्टचार करने मे आसानी और सहजता महसूस होती है यही वजह है कि वन विकास निगम मुख्यालय मे कुंडली मार कर बैठे भोजराज जैन बहुत से कार्यों का निष्पदन यही कर देते है यदि किसी कर्मचारियों का प्रमोशन, या क्रमोन्नति, ट्रांसफर, होता है तो वे उपर रुपये देकर अपने गृह ग्राम क्षेत्र मे अपनी मन माफिक नियुक्ति करवा कर अपना जीवन यापन बड़े मजे से करते है इसके दुष्परिणाम यह होता है कि बहुत से कर्मचारी वानिकी एवं अन्य कार्यों से अनभिज्ञ एवं शून्य रहते है उनके कार्य शैली की क्षमता सुस्त एवं नगण्य हो जाती है फिल्ड के करीब रहने से रोपित सागौन प्लांटेशन की देख रेखा सुरक्षा नही हो पाती, लगातार चोरी बढ़ जाती है जिसका ताजा तरीन उदाहरण स्थानीय क्षेत्र मे रहने के कारण लोकेश साहू जैसे डिप्टी कर्मचारी भ्राष्टाचार करने मे कोई गुरेज नही करते और सघन वनों का सफाया बड़ी आसानी से करते रहते है मजे की बात यह है कि ऐसे संवेदनशील टार्गेट से अधिक कटाई पर विभाग का डंडा भी नही चलता इसका आशय यह है कि.....सैंय्या भयो कोतवाल...तो अब डर  काहे का....वाली उक्ति चरितार्थ होते नजर आती है 


क्योंकि वन  विकास निगम मे बड़े से बड़ा भ्रष्टाचार हो या घृणित कार्य मे लिप्त कर्मी हो उन्हे पूरे सम्मान के साथ सेवा कार्य मे रखा जाता है जैसे बड़े बड़े घोटाले हुए मगर ले दे कर मामला सुलटा लिया जाता है एक साक्षात उदाहरण जागृत देवांगन् को ही ले लिया जाए जो होटल मे वेश्याओं के  साथ रंगे हाथों पकडा गया तीन माह जेल की हवा खाई विभागीय छिछालेदर होने पर साल भर कार्य से पृथक रखा गया परंतु उसे पुनः वन विकास निगम  बार परियोजना मंडल कार्यालय मे बहाल कर दिया गया सवाल उठता है कि गंभीर अपराध मे संलिप्त जागृत देवांगन् को किस आधार पर  उसे महिमा मंडित कर बहाल किया गया उसकी नियुक्ति को लेकर भी बहुत से सवाल उठाया जा रहा है कि  उस के कृत्य को छुपाने जागृत देवांगन् पर विभाग किसी प्रकार की कार्यवाही नही की जा रही है



 उसी के समान बिलासपुर कोटा पंडरीया के श्री हरि पर भी नौकरी लगाने के नाम पर दैहिक शोषण का आरोप लग चुका है रायपुर मे भी ऐसे ही एक कर्मचारी का नाम आ चुका है पाना बरस के  राहुल शुक्ला द्वारा भी नौकरी लगाने के नाम पर लाखों रुपये गबन कर चुका है जिसके नाम की प्राथमिक रिपोर्ट बिलासपुर मे दर्ज है कथन आशय यह है कि सारे जरायम  पेशा कर्मचारियों का पनाहगाह छग राज्य वन विकास निगम बन गया है?इन पर कभी ठोस कार्यवाही होगी अथवा नही ? यदि इसी प्रकार की ढुल मूल नीति रही तो बहुत से निगम कर्मचारी इसी प्रकार के छोटे बड़े अपराध मे संलिप्त रहते हुए बेखौफ कार्यों का निष्पादन करते रहेंगे यही वजह है कि रेगुलर  और अनुकंपा नियुक्ति कर्मचारी मनमाने तरीके से कार्यों को अंजाम दे रहे है वही आधे से अधिक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी  जिनमे कई तो सेवा निवृत हो चुके है और कई आज भी वर्षों से अपने नियमितिकारण की राह देख रहे है परंतु वन विकास निगम इस ओर कोई सार्थक कदम नही उठा पाया कुछ कर्मियों का कथन है कि अरबों रुपये की आय यही अनियमित दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी ही देते है इसके एवज मे छ्ग वन विकास निगम  को भ्रष्टाचार और गड़बड़ घोटाला करने मे फुर्सत ही नही है और तुर्रा इस बात का है कि उन्हे वेतन देने मे राशि नही तो फिर अरबों की राशि आती है तो फिर जाती कहाँ है यह सवाल प्रत्येक दैनिक  वेतन भोगी कर्मचरियों के समक्ष सुरसा की भाँति मुह फाड़े पूछ रहा है?इसका जवाब वन विकास निगम को देना तो बनता है. 

रविवार, 17 मार्च 2024

हरे पेड़ के काष्ठ से निकलते धुंएँ का काला भट्टा

 हरे पेड़ के काष्ठ से निकलते धुंएँ का काला भट्टा


अलताफ हुसैन 

फॉरेस्ट क्राइम  न्यूज़

रायपुर वन मंडल रायपुर के अंतर्गत क्षेत्र भर मे बाबुल,कहुवा,बेर,अर्जुन सहित अनेक मिश्रित प्रजाति के परिपक्व हरे भरे पेड़ पौधों का विनाश काष्ठ तस्करों द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है तथा ऐसे परिपक्व इमारती कष्ठों का उपयोग किसी फार्निचर या जन उपयोगी सामाग्री निर्माण के लिए नही बल्कि कुछ निजी आर्थिक  लाभ उठाने के लिए उपयोग किया जा रहा है क्षेत्र मे जलाऊ चट्टा के नाम पर बेचे जाने वाले आड़े तिरछे लकड़ी की आड़ मे परिपक्व   बड़े बोल्ड काष्ठों को धुँवा धूसरित कर काले कोयला के भट्टे मे झोंक दिया जा रहा है इसके एवज मे दो चार हजार रुपये देकर पानी के मोल कौडियों मे ट्रैक्टर से भरे काष्ठों का निर्बाध गति से परिवहन हो रहा है मजे की बात यह है कि रायपुर वन मंडल क्षेत्र मे लगभग आधा दर्जन भट्टे अवैध रूप से संचालित हो रहे है मगर रायपुर वन मंडल के अधिकारी, कर्मचारी मौन रूप धारण कर आँख बंद कर तमाशा देख रहे है जिसकी वजह से रायपुर वन मंडल अंतर्गत काष्ठ तस्करों द्वारा हरे भरे पेडों का लगातार विरलन कर धुंआ उगलते काले कोयला भट्टी का यह अवैध कारोबार बड़ी तेजी से क्षेत्र मे फल फूल रहा है 

        इस संदर्भ मे फॉरेस्ट क्रइम न्यूज़ ने रायपुर क्षेत्र मे चार से छ स्थानों पर कोयला भट्टी मे जाकर पडताल किया गया जहा आसपास ग्रामीणों से ज्ञात करने पर कुछ लोगों से जानकारी ली तब बताया गया कि  कोयला भट्टा संचालको ने अब तक  किसी प्रकार का वन विभाग से लाइसेंस नही लिया गया है और न ही लगातार निकलते लकड़ी के धुआँ के गुबार की रोक थाम के लिए पर्यावरण विभाग से  कोई एनओसी नही लिया गया यही नही अवैध रुप से काष्ठों  का लेखा जोखा भी नही है क्योंकि क्षेत्र से काष्ठ तस्करों द्वारा सैकड़ों ट्रैक्टर ट्राली अवैध काष्ठों का परिवहन बदस्तुर् जारी है मगर उनके पास भी कटाई का कोई लाइसेंस अथवा वन विभाग से टी. पी. जारी नही किया गया तब ऐसी परिस्थिति मे टनों से ट्रैक्टर ट्राली से अवैध काष्ठ का परिवहन  कोयला भट्टी मे कहाँ से पहुँच रहा है और लगातार रात दिन सभी मिश्रित प्रजाति के काष्ठ स्वाहा कैसे किया जा रहा है इस संदर्भ मे बताया जाता है कि कोयला निर्माण पश्चात ईधन के रूप मे किलो कि दर पर स्थानीय बाजार सहित अन्य क्षेत्र मे विक्रय किया जाता है जिसकी आया लाखों मे बताई गई है जबकि बताते है कि कोयला व्यवसायी काष्ठ माफियाओं से  सांठ गांठ कर कम दर पर जलाऊ चट्टा और परिपक्व बट्टा के मिले जूले काष्ठ कि तस्करी कर भट्टी मे कोयला निर्माण कर लाखों रुपये का व्यवसाय कर रहे है वर्तमान  मे इसका खुदरा बिक्री 40 से 50 रुपये प्रति किलो भट्टे का कोयला बिक रहा है तथा  वन क्षेत्रों का दोहन कर वन विभाग के राजस्व की क्षति पहुंच कर वनों को खोखला कर रहे है ग्राम फरफौद, सेजा, बोहरही मेला, तिल्दा,बैकुठ, सहित बहुत से क्षेत्र मे बगैर वन विभाग से लाइसेंस, और पर्यावरण विभाग से एन ओ सी लिए बगैर काटे गए लकड़ी पहुंचकर अवैध कोयला भट्टा संचालित हो रहा है इसके अवैध कोयला संचालन के पीछे वही कुछ भट्टा व्यपारी रसुख दारों से सेवाएं ले रहे है जिनमे आसपास के सफेद पोश छुट भैय्या नेता, विभाग के कर्मी और चैनल के पत्रकार से मिल कर उनका परिचय होने की बात बता कर पहुँच बता रहे है एक प्रकार से उनके संरक्षण मे गोरे लोगो का काला धंधे का  व्यापार चल रहा है 

    बताते चले  कि राज्य शासन लाखों करोड़ों रुपये कि लागत लगा कर प्रदेश को हरा भरा बनाने प्लांटेशान करता है ताकि हरियाली  बढ़ा कर  प्रदूषण से लोगों को राहत दे परंतु ऐसे हरित क्रति के दुश्मन अपने निजी अर्थ व्यवस्था का लाभ उठाने हरियाली को नेस्त नाबूत करने तुले हुए है ऐसे मे प्रदेश मे हरियाली की परिकल्पना करना भी बेमायनी होगी

शुक्रवार, 8 मार्च 2024

हाड़ाबांध के ग्रामीण किसान वृक्ष मित्र योजना से बदल रहे तकदीर

 हाड़ाबांध के ग्रामीण किसान वृक्ष मित्र योजना से बदल रहे तकदीर  


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (छ्ग वनोदय पत्रिका)  घटते वन बढ़ते प्रदूषण असंतुलित जलवायु वातावरण एवं परिवर्तित होते  ऋतु की मार से ग्लोबल वार्मिंग ने  विश्व मे होने वाली प्राकृतिक आपदा संकट और सुरक्षा के दृष्टिकोण से छ्ग  प्रदेश का वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग नाना प्रकार के जतन कर हरियाली लाने का प्रयास कर रहा है इसके लिए प्रदेश भर के रिक्त पड़त भाटा बंजर भूमि मे हरे भरे पेड़ पौधों का प्लांटेशन कर हरियर छ्ग योजना के तहत हरित क्रांति लाने सदैव प्रयास रत रहा है वही पूर्ववर्ती सरकार जल संरक्षण के उद्देश्य से  वन क्षेत्रों मे नरवा जैसी योजनाओं के मध्यम से वर्षा ऋतु के व्यर्थ जल को स्टॉप डेम,चेक डेम का निर्माण कर जल संकलित कर वनों एवं कृषकों के फसल मे नमी युक्त वातावरण निर्मित करने का प्रयास किया था वहीं आम जन के स्वास्थ की चिंता करते हुए प्रदूषण मुक्त माहौल के दृष्टिकोण  से ग्रामीण क्षेत्र के रिक्त भू खंडों नगर परिषद,पालिकाओं पंचायतों के आसपास क्षेत्र मे धार्मिक आस्था से जुड़े पेड़ पौधों का निर्माण कर आकर्षक हरियाली युक्त खुशनुमा कृष्ण कुंज का निर्माण कर स्वच्छ, एवं स्वस्थ्य वर्धक वातावरण निर्मित किया गया इसी शृंखला मे पूर्ववर्ती सरकार ने वन क्षेत्रों का रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्य मंत्री वृक्ष संपदा योजना का शुभारंभ किया गया था जो वर्तमान मुख्य मंत्री श्री विष्णु देव साय ने उक्त योजना किसान वृक्ष मित्र योजना के नाम से प्रारंभ किया गया जो प्रदेश भर के किसानो के लिए वरदान साबित हो रहा है साथ ही इसके आशातीत सफलतम परिणाम भी परिलक्षित हो रहे है 


  वित्तीय वर्ष 2022-2023 मे उक्त किसान वृक्ष मित्र योजना के प्रारंभिक चरण मे लाभार्थी कृषक काफी असमंजस की स्थिति मे थे कि खेत खलिहानो मे किसान वृक्ष मित्र योजना से किस प्रकार लाभान्वित होंगे परंतु वन विभाग के प्रशिक्षित सिद्ध हस्त अनुभवी वन कर्मीयों द्वारा किसान वृक्ष मित्र योजना और इसके भविष्य मे होने वाले लाभ को प्रशिक्षण के मध्यम से कृषको को समझाया तब बहुत से हितग्राही कृषक अपने खेतों मे बहुत से इमारती वृक्ष,सगौन, बांस, चंदन,इत्यादि का रोपण किया जिसके एक ही वर्ष मे  सार्थक परिणाम सामने आने लगे है इस संदर्भ मे महासमुंद के युवा उर्जावान वन मंडलाधिकारी पंकज राजपूत बताते है कि किसान वृक्ष मित्र योजना का लाभ उन कृषकों को प्राप्त होगा जो अपनी निजी भूमि का सही मुल्यांकन कर शासन की उक्त योजना का लाभ उठा रहे है तथा टेशू कल्चर सगौन रोपण सहित बांस, चंदन नीलगिरी जैसे भिन्न भिन्न प्रजाति के पौधों का रोपण कर लाभान्वित हो रहे है रोपण एक वर्ष मे अच्छा ग्रोथ कर रहे है महासमुंद डी.एफ.ओ.पंकज राजपुत आगे बताते है कि किसान वृक्ष मित्र योजना का समुचित लाभ हितग्राही कृषक आने वाले पांच,से दस पंद्रह वर्ष पश्चात भविष्य निधि के रूप मे उठा सकेंगे महासमुंद डीएफओ. राजपूत आगे बताते है इसके लिए वन एवं जलवायु,परिवर्तन विभाग सभी प्रकार के वित्तीय सहयोग सामाग्री  सुविधाए उपलब्ध करा रही है जिसमे बीज से  लेकर पेड़ पौधे,रोपण यहाँ तक उपचार निंदाई गुड़ाई कार्य तक दो वर्षों तक वितीय सहयोग सीधे बैंक खाते के मध्यम से हितग्राहियों को प्रदान कर रही है केवल उन्हे स्वयं की भूमि एवं रोपित पौधों की, सिंचाई, सुरक्षा देखरेख  इत्यादि की ही सुविधा उपलब्ध करानी है इसमें वन विभाग को क्या लाभ मिलेगा पूछने पर महासमुंद डी.एफ.ओ.पंकज राजपूत  बताते है कि आने वाले पांच,से दस,पंद्रह वर्षों पश्चात कृषकों को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा इसके लिए, सगौन, बांस सहित अन्य रोपित उपज के लिए वन विभाग बाजार भी उपलब्ध कराएगी जिसके लिए समर्थन मूल्य में काष्ठ क्रय कर विभाग अंतर लाभांश का अंश लाभ पश्चात शत प्रतिशत राशि तत्कालिक बाजार मूल्य का लाभ हितग्राहियों को उनके सीधे बैंक खाते मे डाली जाएगी बताया जा रहा है कि इसके लिए कुछ कंपनी से एम ओ यू भी किया जा चुका है  महासमुंद वन मंडलाधिकारि पंकज राजपूत आगे बताते है कि वन विभाग की मंशा यह है कि वनों का रकबा और क्षेत्रफल मे इजाफा हो वन क्षेत्र का अस्तित्व विस्तारित हो उन्होंने बताया वन मंडल महासमुंद सहित प्रदेश भर मे जगह जगह किये जा रहे प्लांटेशन,नगर वन, कृष्ण कुंज, बिगड़े वनों का सुधार किसान वृक्ष मित्र योजना इसी का एक उदाहरण प्रारूप है जिससे वन क्षेत्र मे वृद्धि एवं हरियाली के साथ प्रदूषण मुक्त जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग से लड़कर परिवर्तित होते असंतुलित वातावरण को संतुलन किया जा सके


वही महासमुंद के अनुभवी एस.डी.ओ. वाहिद खान साहब बताते है कि महासमुंद वन मंडल क्षेत्र जो सर्वाधिक प्रदेश का सबसे बड़ा वन मंडल क्षेत्र है जहां पर किसान वृक्ष मित्र योजना का बेहतर परिणाम सामने आए है इसे देखते हुए वन मुख्यालय के अंतर्गत संपूर्ण प्रदेश मुख्यालय मे विगत एक वर्षों मे योजना लाभ का लक्ष्य लगभग तीन लाख चार सौ तिरसठ पेड़ लगाए गए है जिसकी वर्तमान स्थित अस्सी प्रतिशत अर्थात संतोष जनक है यह स्थिति मई 2024 मे और वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की गई है महासमुंद उप वनमंडलाधिकारी वहिद खान आगे बताते है कि सभी सागौन,एवं अन्य पौधे अनुसंधान विस्तार लैब मे टेशू कल्चर के मध्यम से आधुनिक पद्धति से उगाए गए पौधे है जिसका ग्रोथ  समान्य प्राकृतिक पौधों की तुलना मे बड़ी तेजी के साथ कम समय मे बढ़त बनाए रखता है यही वजह है कि रोपित पौधे वर्तमान समय मे जीवित और स्वस्थ्य स्थिति मे है और लगातार ग्रोथ कर रहे है इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि इसकी ऊँचाई दस से बारह फिट ऊँची पहुँच चुकी है  महासमुंद् उपवन  मंडलाधिकारी वहीद खान  आगे बताते है कि किसान वृक्ष मित्र योजना का लाभ आस पास के ग्रामीण लगातार उठा रहे है वित्तीय वर्ष 2023-2024 मे आम हितग्राही स्वमेव विभाग कर्मियों से संपर्क कर किसान वृक्ष मित्र योजना का लाभ उठाने पंजीयन करवा रहे है वन मंडल महासमुंद क्षेत्र मे इसका ग्राफ लगातार बढ़ रहा है बागबाहरा परिक्षेत्र अंतर्गत खल्लारी परिवृत के हाड़ा बंध के बहुत से ग्रामीण शासन के इस किसान वृक्ष मित्र योजना से लाभांवित हो रहे है


इस संदर्भ मे बाग़बाहरा परक्षेत्र के संवेदन शील ऊर्जवान कर्तव्य निष्ठ, समर्पित,समभाव,जीवट एवं जुझारू प्रवृत्ति के परिक्षेत्राधिकारी लोक नाथ ध्रुव बताते है कि बागबाहरा परक्षेत्र के खल्लारी परिवृत् हाड़ाबंध ग्रमीणों कि तकदीर बदल रही है वहां की मिट्टी काफी उपजाऊ है बांस, नीलगिरी, के पौधे लगातार ग्रोथ कर रहे है वही चंदन की स्थिति तनिक नाजुक है संभवतः वहाँ की मिट्टी जलवायु, वातावरण उसके अनुकूल नही होना बताया जा रहा है बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी लोक नाथ ध्रुव बताते है कि बागबाहरा खल्लारी परिवृत् के हाड़ाबंध ग्राम क्षेत्र मे 155 हितग्राही उक्त योजना का लाभ उठा रहे है कुल 3.13 हेक्टेयर में लक्ष्य प्राप्ति है वही बहुत से कृषक हितग्राही योजना का  लाभ उठाने प्रयासरत है किसान वृक्ष मित्र योजना के बागबाहरा, खल्लारी परिवृत मे सफलतम रोपण के संदर्भ मे परिक्षेत्राधिकारी श्री ध्रुव बताते है कि उपजाऊ मिट्टी एवं पहाड़ी क्षेत्र मे ढलानी क्षेत्र होने के कारण खेत मे बारह मासी  नमी बनी रहती है जिसके बेहतर परिणाम परिलक्षित हो रहे है तथा सभी रोपित पौधे स्वस्थ्य एवं ग्रोथ कर रहे है 


बागबाहरा रेंजर लोकनाथ ध्रुव बताते है कि वन विभाग का लक्ष्य वन क्षेत्रों को हरा भरा बनाना है इसके लिए जन भागीदारी सुनिश्चित कर खेत खलिहान  जो फसल पश्चात पूरी तरह सपाट चटियल  मैदानी क्षेत्र नज़र आता है छ्ग राज्य शासन ऐसी किसान वृक्ष मित्र योजना का सफल क्रियान्वयन लागू कर सपाट होते खेत खलियानो मे हरियाली विस्तार के साथ आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे  परिक्षेत्राधिकारी श्री ध्रुव आगे बताते है 



कि किसान वृक्ष मित्र योजना का सफल क्रियान्वयन के पीछे महासमुंद डी एफ ओ पंकज राजपूत, उप वन मंडलाधिकारि वहिद खान का बहुत बड़ा योगदान रहा है जो समय समय पर वन कर्मचारियों और हितग्राहियों के खेतो मे जाकर दिशा निर्देश देकर मॉनिटरिंग करते रहे है वही मैदानी अमलो मे  खल्लारी परिवृत के काष्ठागार प्रभारी डिप्टी नरेंद्र चंद्राकर,पूरी तनम्यता से लगातार हाड़ाबंध के कृषकों से संपर्क कर योजना को सफल बनाने मे पूर्ण योगदान दिया