सोमवार, 8 जून 2026

कवर्धा परियोजना मंडल में नवाचार नीलगिरी प्लांटेशन से बदली तस्वीर

 कवर्धा परियोजना मंडल में  नवाचार नीलगिरी प्लांटेशन से बदली तस्वीर


अलताफ़ हुसैन

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय न्यूज़)  छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम एक स्व पोषित संस्था है जो विगत पचास वर्षों से एक  ही तर्ज पर कुछ स्थलों में सागौन रोपण, प्लांटेशन, नर्सरी में रुट सूट तैयार करने से लेकर दस बीस तीस चालीस वर्षीय से उपर परिपक्व सागौन का थिनिग कर उसका व्यवसायिक करण से छ्ग राज्य वन विकास निगम अपना एवं अपने विभागीय कर्मचारियों का जीवन यापन कर  राज्य सरकार को प्रति वर्ष लाभांश राशि भी दे रहा है यह क्रम  वर्षों से चला आ रह है परंतु छ्ग राज्य के अनुभवी अधिकारी लकीर का फकीर बने रहने की बजाए नवीन योजनाओं के मध्यम से एक नई सोच नई व्यवस्था को अंगीकार कर   छ्ग राज्य वन विकास निगम राजस्व को नई दिशा तय करने की ठान ली है इसकी शुरुआत विगत कुछ वर्षों पूर्व से प्रारंभ  बांस शिल्प निर्मित वस्तुओं का उत्पाद का व्यवसायिक कार्य किया गया था वह कितना सफल था यह तो बताया नही जा सकता परंतु वर्तमान में रायपुर मुख्यालय ने हाईड्रोपोनिक स्पॉट का हरित योजना का कार्य प्रारंभ किया गया जिसमें अब घरों के,हॉल,बड़े कमरों, छतों एवं अनुपयोगी प्लाट में बगैर मिट्टी, कम पानी मे घुलन शील पदर्थ से साल भर आसानी से खेती कार्य किया जा सकता है जो आमजन कृषकों के लिए छोटे स्तर पर साग सब्जी, फल जैसे उपज के लिए अब मील का पत्थर साबित हो सकता है कुछ यही नई व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से(कवर्धा) कबीरधाम जिले के पंडारिया क्षेत्र के करीब पांच किलोमीटर दूर  स्थित वन क्षेत्र में माह अगस्त वर्ष 2025 में लगभग 15,000 नीलगिरी पौधों का सफल प्लांटेशन किया गया जिसके आठ दस माह के अंतराल में अब सार्थक परिणाम आने लगे है 


  छ्ग राज्य वन विकास निगम के डिविजनल मैनेजर सुनील कुमार बच्चन साहब से जब चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि कबीरधाम (कवर्धा) परियोजना मंडल अंतर्गत नगर परिषद पंडारिया के कक्ष क्रमांक पी. एफ.498 बीट बदौरा टू के सर्किल कुकदुर टू ग्रास भूमि 6.45 नेट भूमि 6 हेक्टेयर मे स्थित वन ग्राम क्षेत्र में  होने की वजह से कुछ व्यक्तियों द्वारा क्रांति बांध जलाशय  के तराई क्षेत्र में अतिक्रमण कर लिया गया था जिसे छ्ग राज्य वन विकास निगम द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल कोर्ट (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकारण ) में याचिका दायर की गई उन्होंने आगे बताया कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद अंततः उन्हे बेदखली का नोटिस जारी किया गया पश्चात कोर्ट अधिकारियों एवं पुलिस की उपस्थिति में उन्हे बे दखल किया गया था यह विभाग के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी कवर्धा डी.एम.श्री सुनील कुमार बच्चन ने आगे बताया कथित अतिक्रमण कारीयों द्वारा  वन क्षेत्र के बड़े भूभाग में काश्तकारी खेती प्रारंभ कर लिया गया था ऐसे में टकराव की स्थिति बनी रहती वर्ष 2010 में दिल्ली स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल कोर्ट में लगातार न्यायिक प्रक्रिया चलती रही तथा बेदखली,की कार्यवाही कर सीमांकन सुनिश्चित किया गया कबीरधाम परियोजना  मंडल के डी.एम.श्री बच्चन आगे बताते है कि हमने पंडारिया स्थित कथित वन क्षेत्र में वर्ष 2025 अगस्त में छ हेक्टेयर भू भाग में घलेंद्र कुमार मेहर  तत्कालिक पंडारिया रेंजर के उपस्थिति में सागौन रोपण के बजाय नीलगिरी प्लांटेशन कार्य संपादित किया जिसके आज की तिथि में मात्र आठ से दस माह के अंतराल में पौधे न्यूनतम चार फीट एवं अधिकतम आठ से दस फीट की ऊँचाई मे सर्वाईव कर रहे है


                जब इस संदर्भ में कबीरधाम परियोजना मंडल के एस डी ओ पीतांबर साहू से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि छ्ग राज्य वन विकास निगम का नीलगिरी प्लांटेशन आसपास परियोजना मण्डल के मध्य खुले रूप से चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि अमूमन वन विकास निगम सदैव शासन द्वारा प्रदत्त वन भूमि क्षेत्रों में सागौन प्लांटेशन किये जाने के रूप में चिंहित किया जाता रहा है परंतु इस बार हमने सागौन जैसे इमारती काष्ठों का रोपण करने के बजाए लीक से हट कर नीलगिरी प्लांटेशन करने का बीडा उठता और प्लांटेशन लगभग सफल भी हुआ है (कवर्धा) कबीरधाम  एस.डी.ओ.(डीडीएम) पीतांबर साहू आगे बताते है कि वन क्षेत्र में नीलगिरी प्लांटेशन कराने की एक वजह यह भी थी क्योंकि करीब ही क्रांति जलाशय बांध होने से इसका माकुल जल श्रोत प्राप्त होगा नीलगिरी के संदर्भ मे यह कथन है कि नदी, नाले, तालाब, पोखर, बांध,जलाशय वाले जल मग्न क्षेत्र इसके लिए बहुत उपयोगी साबित होते है यही वजह है कि नीलगिरी प्लांटेशन बांध के तराई ढलानी क्षेत्र में लगाया गया है जिसका अल्प काल में उसका साक्षात परिणाम परिलक्षित हो रहा है 




 वन विकास निगम कवर्धा परियोजना मंडल  पंडारिया क्षेत्र के  युवा साहसी कार्यों के प्रति समर्पित वर्तमान  रेंज अधिकारी जागेश गौड़ जिन्होंने वविनि के अनेक परियोजना मण्डल में दीर्ध कालिक रेंजर पद मे रहते हुए अपने मार्ग दर्शन मे अनेक प्लांटेशन कार्य  करवा कर अनेक उपलब्धि अपने नाम मे कर रखी है उनसे चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि कक्ष क्रमांक पी. एफ. 498 मे वन क्षेत्र क्लोन क्रमांक 316 नीलगिरी प्लांटेशन बहुत कम समय में लगातार ग्रोथ कर रहा है उन्होंने इसकी वजह बताई कि करीब में ही क्रांति बांध है जिसकी जलश्रोत और नमी लगातार पौधों को प्राप्त हो रहा है इसके कारण इस रोहणी नक्षत्र के प्रचण्ड गर्मी में नीलगिरी पौधे अपनी हरियाली और ग्रोथ को कायम रखे हुए है वविनि कवर्धा परियोजना मंडल के पंडारिया परिक्षेत्राधिकारी जागेश गौड़ से स्थानीय नीलगिरी रोपण के संदर्भ मे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वन विकास निगम अब सागौन विक्रय तक सीमित नही रह गया है परिवर्तित समय और काल चक्र के हिसाब से कुंठित एवं एक ही ढर्रे पर लकीर का फकीर रहने की बजाय अपना व्यवसायिक दृष्टि कोण मे विस्तारित सोच रखना प्रारंभ कर दिया है तभी तो विगत कुछ वर्षों पूर्व से पहले बांस शिल्प उसके बाद  हैड्रोपोनिक हरित उत्पाद के प्रति नवीन योजनाओं को अंगीकार कर रही है अब यहाँ नीलगिरी रोपण किया गया है  जो मात्र प्रति चार वर्षों तक उसका व्यवसायिक करण से चार गुणा लाभ वन विकास निगम को मिल सकता है रेंजर जागेश गौड़ उत्साह पूर्वक बताते है कि वर्तमान में इमारती काष्ठ सागौन निर्मित उत्पाद जिसे कुर्सी, टेबल पलंग,अब आम जन के लिए  बीते युग की बात होते जा रही है क्योंकि बढ़ती महंगाई यह सब आम जन के पहुँच के बाहर हो चुकी है इसके लिए हमें व्यवसायिक डेवलेपमेंट की सोच रखनी होगी नीलगिरी से हमें चौदह वर्षों में तीन से चार बार उसका काष्ठ जिससे प्लायवुड, पेपर, तैयार हो रहे है तथा प्रत्येक नव निर्माण भवन में इसका उपयोग किया जा रहा है इसलिए अधिक मात्रा में नीलगिरी पौधों का रोपण आवश्यक है उन्होंने आगे कहा कि वन विकास निगम में प्रत्येक परियोजना मंडल क्षेत्र में अधिक से अधिक नर्सरी निर्माण किया जाए ताकि इसका अधिक से अधिक लाभ निगम को मिले 


इसके साथ ही व्यापक प्रचार प्रसार करना चाहिए ताकि डिपो काष्ठागार के मध्यम से जैसे सागौन की नीलामी सिस्टम से किया जाता था वैसे ही नीलगिरी काष्ठों की नीलामी भी किया जा सकता है पंडारिया परिक्षेत्राधिकारी जागेश गौड़ आगे बताते है कि इसके लिए वन विकास निगम पंचायत, निजी भूमि सहग्रहिता कर नीलगिरी रोपण एवं प्लांटेशन कर चौदह वर्षों के लिए व्यवसायिक उपयोग कर सकती है जिसमे समस्त रोपण से लेकर मैंटनेंस करने का दायित्व वन विकास निगम वहन करें पश्चात इसके  एवज में उन्हे तीस प्रतिशत लाभांश राशि उन्हे दे उक्त चौदह वर्षों में प्रति तीन से चार वर्षों में उसका व्यवसायिक काष्ठो का लाभ निगम को प्राप्त होगा जैसा हरियाणा में रोपण के पूर्व ही प्लायवुड व्यवसायी संपूर्ण नीलगिरी रोपण प्लांटेशन को अनुबंधित कर लेते है यदि इसी तर्ज पर वन विकास निगम भी कार्य करे तो उसका लाभ कम समय मे प्राप्त हो सकता है जिससे तीन हिस्से का लाभ निगम तथा एक हिस्सा  भूमि धारक को दिया जाए तो हमें वन क्षेत्र भूमि की आवश्यकता भी नही पड़ेगी तथा सागौन काष्ठों के साथ नीलगिरी पौधों के काष्ठों से अच्छा लाभ मिल सकेगा

शनिवार, 6 जून 2026

श्रम सम्मान राशि को लेकर इन्द्रवती कोषालय अधिकारी ने मंचाया हड़कंप, विक्त विभाग के निर्देशों को तोड़ मरोड़कर अपने हिसाब से नाप दिया

 श्रम सम्मान राशि को लेकर इन्द्रवती कोषालय अधिकारी ने मंचाया हड़कंप,   विक्त विभाग के निर्देशों को तोड़ मरोड़कर अपने हिसाब से नाप दिय



रायपुर / छत्तीसगढ़ में महानदी भवन मंत्रालय से लगे हुए सचिवालय इन्द्रावती भवन में वरीष्ठ कोषालय अधिकारी का गेम चेंजर प्लान से पुरे छत्तीसगढ़ में सरकार के खिलाफ आक्रोश का माहोल बन गया है। छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ के प्रान्ताध्यक्ष व छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी फैडरेशन के प्रदेश संयोजक रामकुमार सिन्हा ने बताया कि कोषालय अधिकारी नियुक्ति आदेश को लेकर जो पत्र लेख किया है वह पूर्णत: गलत है। 


वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने अपने पत्र क्रमांक 223/व.को.अधि./स्था./2026 नवा रायपुर दिनाक 05.06.2026 के माध्यम से पत्र जारी कर दिया है कि  बिना नियुक्ति आदेश के श्रम सम्मान के देयकों को कोषालय में प्रस्तुत नही करने बाबत! यह कोषालय अधिकारी या तो सरकार को गिराने के लिये कमर कस लिया है या फिर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी / श्रमिकों को तड़पाने के लिये कमर कस लिया है। 



जबकी वित्त विभाग ने स्पष्ट रूप से आदेश जारी किया है कि 

श्रम विभाग द्वारा निर्धारित दर में दैनिक / मासिक वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों को श्रम सम्मान राशि दिये जाने हेतु दिशा-निर्देश।


छत्तीसगढ़ शासन द्वारा श्रम विभाग द्वारा निर्धारित दर में दैनिक / मासिक वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों को रूपए 4000/- मासिक की दर से श्रम सम्मान राशि दिये जाने का निर्णय लिया गया है। यह श्रम सम्मान राशि श्रम विभाग द्वारा निर्धारित दर पर दैनिक / मासिक वेतन पर शासकीय विभागों में कार्य करने वाले अकुशल, अर्धकुशल, कुशल एवं उच्च कुशल दर के कर्मचारियों को प्राप्त वेतन के अतिरिक्त देय होगी।




उक्त श्रम सम्मान राशि के भुगतान हेतु निम्नानुसार दिशा-निर्देश जारी किये जाते हैं:-


1. श्रम सम्मान राशि दिनांक 01 अगस्त, 2023 से देय होगी।


2. भुगतान की जाने वाली श्रम सम्मान राशि संबंधित विभाग के बजट शीर्ष के उद्देश्य शीर्ष #18 - पारितोषिक के अंतर्गत विकलनीय होगी।


3. वित्तीय वर्ष 2023-24 में सभी योजनाओं हेतु उपरोक्त उद्देश्य शीर्ष नहीं खोला जा सका है अतः इस वित्तीय वर्ष में श्रम सम्मान राशि का भुगतान किये जाने हेतु विभागाध्यक्ष स्तर पर उद्देश्य शीर्ष #18- पारितोषिक खोला गया है।


4. प्रत्येक अधीनस्थ कार्यालय द्वारा ऐसे अकुशल, अर्धकुशल, कुशल एवं उच्च कुशल दर पर कार्यरत कर्मचारियों का विवरण प्रतिमाह अपने विभागाध्यक्ष को उपलब्ध करायेंगे। विभागाध्यक्ष कार्यालय द्वारा इसका देयक तैयार कर कोषालय के माध्यम से सीधे संबंधित कर्मचारियों के खाते में अंतरित की जावेगी।

5. आगामी वित्तीय वर्ष हेतु प्रत्येक विभाग सभी योजना शीर्ष में आवश्यक होने पर उक्त उद्देश्य शीर्ष अंतर्गत बजट प्रावधान कराया जाना सुनिश्चित करेंगे।

6. सभी विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ कार्यालयों में उक्त श्रेणी में रखे गये कर्मचारियों के संबंध में प्रथमतः यह सुनिश्चित करेंगे कि वे विभाग में स्वीकृत किसी भी नियमित / कलेक्टर दर के पद के विरूद्ध कार्य पर रखे गये हैं अथवा आकस्मिक श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं तो उनकी आवश्यकता/औचित्य का युक्ति-युक्त परीक्षण कर लिया जावें।

7. यह श्रम सम्मान राशि कैलेण्डर माह की समाप्ति पर देय होगी तथा माह की अनुपस्थिति की अवधि के समानुपातिक सम्मान राशि में उस माह कमी की जाएगी।

8. सभी विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ कार्यालयों में उक्त श्रेणी में कार्यरत कर्मचारियों का सम्पूर्ण विवरण एवं उन पर होने वाले व्यय के अभिलेख का श्रेणीवार विवरण पृथक-पृथक संधारित करेंगे।

विभाग के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों का विवरण एवं उन पर किये जाने वाले व्यय की त्रैमासिक जानकारी संचालक, कोष एवं लेखा को उपलब्ध करायेंगे।

10. त्रैमास के कर्मचारियों की संख्या एवं उन पर होने वाले व्यय पर यदि कमी अथवा वृद्धि होती है तो उसका स्पष्ट कारण एवं औचित्य का उल्लेख आगामी त्रैमास के विवरण में किया जाए।



वित्त के निर्देश स्पष्ट कर रहा है कि किन किन श्रेणी के कर्मचारियों को श्रम सम्मान राशि देना है,  इसमें कहीं पर भी ऐसा लेख नही किया गया है या आदेशित नही किया गया है कि नियुक्ति पत्र वालों को ही 4,000 रूपया श्रम सम्मान राशि का भुगतान होगा। वरीष्ठ कोषालय अधिकारी के इन पत्रों का संगठन खंडन करता है और पुर जोर विरोध भी करता है, नियुक्त पत्र का बहाना करके श्रम सम्मान से वंचित करना चाहते है जो कि उचित नही है। 

कोषालय अधिकारी भले यह लेख करते कि बिना कार्य आदेश के 4000 श्रम सम्मान राशि नही दिया जायेगा , तो यह बात समझ में आता क्योकि रायपुर में कुछ विभागों में देखने को मिल रहा है कि बिना कार्य आदेश जारी किये सीधा बीटीआर में चढ़ाकर ले जाते है और भुगतान करा रहे हैं। 

मंत्रीयों व अधिकारियों के द्वारा लगातार अनाप शनाप अपने बंगले में निवास में दैनिक वेतनभोगी रखते जा रहे है और उसे 4,000 रूपया प्रतिमाह श्रम सम्मान राशि दिला रहे हैं।  और यहा पर 10 से 15 साल कार्य कर चुके दैनिक वेतनभोगी को श्रम सम्मान राशि से वंचित कर दे रहे है जो कि सरासर अन्याय है। 



अगर वरिष्ठ कोषालय अधिकारी को आपत्ति दर्ज करना है तो इन विषयों पर करें ताकी सबके सांथ न्याय हो सकें।  साल भर से नये नये श्रमिकों को कार्य पर रखकर जिन्हे 4,000 श्रम सम्मान दिया जा  रहा है उस पर रोक लगायें और जो वरीष्ठ है जिन्हे भुगतान नही किया जा रहा है उसे भुगतान करने हेतु निर्देशित करें!


वन विभाग में तो रोज नये नये रख रहे है और 4,000 श्रम सम्नान राशि दे रहे है, जो कि गलत है एक दायरा निर्धारण कर श्रम सम्मान राशि का भुगतान करायें। 

समस्त विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी सांथियों के चिन्ता करने की बात नही है वरिष्ठ कोषालय अधिकारी के द्वारा जारी किये गये पत्र का पुर जोर विरोध किया  जायेगा समय आने पर इन्द्रवती भवन सचिवालय का घेराव भी किया जायेगा।

गुरुवार, 4 जून 2026

वन विकास निगम पाना बरस परियोजना मंडल के वरिष्ठ लेखापाल नवाब अहमद के सेवा निवृत होने पर हितैषियों ने बधाई दी

 वन विकास निगम पाना बरस परियोजना मंडल के वरिष्ठ लेखापाल नवाब अहमद के सेवा निवृत होने पर हितैषियों ने बधाई दी 


रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़)  छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम पाना बरस परियोजना मंडल अंतर्गत  मोहला परिक्षेत्र के वरिष्ठ लेखापाल श्री नवाब अहमद साहब ने अपने उनचालिस वर्ष तक दीर्ध कालीन शासकीय सेवा देते हुए 30 माई 2026 को अपनी शासकीय दायित्वों का परित्याग करने हुए सेवा निवृत हुए उनके सेवा निवृत होने पर बहुत से निगम कर्मी भाव पूर्ण विदाई देते हुए बताया कि वे अजीवन ईमानदारी  समर्पण सेवा भाव, कर्तव्य निष्ठा, के साथ कर्म योगी साबित रहे यही वजह रही कि अनेकों बाधाएं आने पर भी वे सदैव विपतियों के समक्ष डटे रहे तथा नैतिकता पूर्ण विजयी पताका लहराते रहे विपरीत परिस्थियों मे सत्यता के साथ डटे रहना उनका मूल मंत्र रहा जो भावी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायी  है उनके लंबे सफल कार्यकाल के सेवा निवृत होने पर उनके हितैषियों ने दिर्धायु एवं स्वस्थ्य जीवन उज्जवल भविष्य  की शुभकामनाएं प्रेषित की है 

बुधवार, 3 जून 2026

नए पी. सी. सी. एफ.वन बल प्रमुख अरुण पांडे को अखिल दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी कल्याण संघ ने बधाई दी

  नए पी. सी. सी. एफ.वन बल प्रमुख अरुण पांडे को अखिल दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी कल्याण संघ ने बधाई दी 


रायपुर छत्तीसगढ़ अखिल दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी कल्याण संघ  की ओर से भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी श्री अरुण पांडे जी को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं वन बल प्रमुख (HoFF) के गरिमामयी पद पर नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई और  शुभकामनाएं दी 

 इस अवसर पर अध्यक्ष  अरविंद वर्मा एवं सदस्य तुलसी डोंगरे , जनक लाल साहू , कमल नारायण साहू , ललित बाग, हेमंत भारती और कल्याण  की ओर से पुष्प गुच्छ भेंट कर उन्हे बधाई दी तथा आशा व्यक्त करते हुए 

 वन बल प्रमुख के नेतृत्व में राज्य के वन विभाग और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रगति की उम्मीद जताई  जिसे वन बल प्रमुख अरुण पांडे ने  उनके सक्रात्मक कार्यों पर सहयोग देने का अश्वासन दिया 

शनिवार, 30 मई 2026

प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने नंदनवन जू, जंगल सफारी पर्यटकों को दी नई सौगात

 प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने नंदनवन जू, जंगल सफारी पर्यटकों को दी नई सौगात 


अलताफ हुसैन

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) छ्ग प्रदेश का वह ऐतिहासिक दिन जब देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने प्रदेश भर की जनता के लिए पर्यटन स्थल के रूप में नया रायपुर अटल नगर स्थित मानव निर्मित जंगल सफारी का गरिमामयी उपस्थिति मे एक नवंबर 2016 को उद्घाटन कर वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में ऐतिहासिक क्षण के सुनहरे पन्ने मे दर्ज कर दिया था जिसका कवरेज देश विदेश की सुप्रसिद्ध मीडिया संस्थानों ने किया यहाँ तक देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा पिंजरे में कैद शेर की तस्वीर क्लिक करते नज़र आए थे उक्त छाया चित्र खूब वायरल हुआ था जिसका परिणाम यह हुआ कि पर्यावरण एवं वन्य प्राणी प्रेमियों सहित पर्यटक  बड़ी संख्या में जंगल सफारी नवा रायपुर की ओर रुख करने लगे एशिया का मानव निर्मित जंगल सफारी, नंदन वन जु इन दस वर्षों में लगातार अनेक नवीन योजनाओं और कार्यक्रम के मध्यम से पर्यटकों का लगातार आकर्षण का केंद्र बिंदु बना हुआ है 

           इस श्रृंखला में नवा रायपुर स्थित नंदन वन पक्षी विहार जु एवं जंगल सफारी में पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए देशी विदेशी अनेक नवीन प्रजाति के वन्य प्राणियों के दर्शन हेतु विभाग द्वारा समय समय पर अमूलचुल् परिवर्तन किये जाते रहे है ताकि पर्यटक नए वन्य प्राणियों के मध्य उत्साह पूर्वक सह परिवार जैव विविधता से परिपूर्ण नंदन वन जू एवं जंगल सफारी  वन भ्रमण कर अधिक लाभ उठा सके  इन दस वर्षों में नंदन वन पक्षी विहार जू जंगल सफारी में अनेक देशी विदेशी पक्षियों का आकर्षण देखने  मिल जाता है जिसमें रंग बिरंगे तोता, मैना, तितर जंगली मुर्गी,सहित अनेक प्रवासी पक्षी यहाँ परिवर्तित मौसम में इनकी लगातार आमद बनी रहती है तथा संपूर्ण पक्षियों के मधुर कलरव से क्षेत्र गुँजयमान रहता है जिन्हे पर्यटक प्राकृतिक रूप से उनका दर्शन कर प्रफुल्लित होते रहते है जंगल सफारी में नवीन योजनाओं के तहत अनेक नई नस्ल के आकर्षक विदेशी वन्य प्राणियों जिनमे मुख्यतः ज़ेब्रा जैसे खूबसूरत वन्य प्राणी लाकर जंगल सफारी को पर्यटकों के लिए नई सौगात देने का प्रयास किया जाता रहा है जिस प्रकार जंगल सफारी में ज़ेब्रा लाया गया उसी प्रकार  चिंपाजी को यहाँ लानें विशेष योजना बनी हुई है वही हाथी घोड़ा, ऊँट विदेशी डॉग जैसे बहुत से वन्य प्राणी लानें विचार किया जा रहा है जंगल सफारी में यहाँ अब तक हिंसक एवं शाकाहारी  शेर,भालू,बाघ,चीता,हिरणनील गाय, कोटरी, सहित अनेक प्रजाति के वन्य प्राणियों का रहवास बना हुआ है जिन्हे खुले आबो हवा प्राकृतिक मुक्त वातावरण में बड़ी सहजता से विचरण करते दर्शन किया जा सकता है 


             नंदन वन पक्षी विहार जू एवं जंगल सफारी जो लगभग 320 हेक्टेयर,लगभग 800 एकड़ भूमि क्षेत्र में निर्मित है वहाँ अनेक बाड़े निर्माण किये गए है ताकि मौसम अनुकूल प्रकृति वातावरण निर्मित किया जा सके इसके अलावा जलचर, प्राणियों मगर घड़ियाल,के लिए अतिरिक्त माकुल व्यवस्था प्रबन्धन द्वारा की गई है तितली विहार, जहाँ रंग बिरंगे फूलों पौधों का निर्माण किया गया है ताकि उन्हे यहाँ प्राकृतिक हरा भरा  माहौल मिल सके तथा आहार के रूप में फूलों का रस पान कर सके वही जहरीले एवं साधारण सर्प का बाडा जिसे स्नेक पार्क भी बनाएं गया है जिसमें सभी प्रजाति ज़हरीले, साधारण सर्प को रखा जाना भी बताया गया है जो पर्यटकों को आकर्षित और रोमांचित करता है 

         पर्यटन को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के बहुउद्देशिय योजनाओं के मध्यम से वन विभाग एवं प्रबन्धन द्वारा समय समय पर बहुत सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रही है पर्यटकों की सुविधा को ध्यान मे रखते हुए  नवाचार के रूप में इस बार इलेक्ट्रिक वाहनों, जलाशय क्षेत्र में बोटिंग सुविधा के लिए नवीन व्यवस्था उपलब्ध की गई है जैसे ही पर्यटक जंगल सफारी में प्रवेश करते है उन्हे बैटरी चलित इलेक्ट्रिक वाहन से सफारी  नौका विहार तक पहुंचाया जाता है जहाँ इलेक्ट्रिक वाहन बस इत्यादि से संपूर्ण क्षेत्र का भ्रमण कराया जाता है पर्यटकों को कम समय मे अधिक से अधिक पर्यटन को विकसित करने एवं व्यवस्था एवं  सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए छ्ग प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के लोकप्रिय मंत्री केदार कश्यप  की दूर दर्शी सोच एवं   कुशल मार्ग दर्शन मे नंदन वन जू और जंगल सफारी के लिए पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पर्दूषण रहित इलेक्ट्रिक वाहन, एवं बोटिंग सुविधा का अत्याधुनिक व्यवस्था की गई है जिससे पर्यटकों को कम समय मे अधिक से अधिक भ्रमण का लाभ  प्राप्त हो सके इसके लिए वन विभाग एवं नंदन वन जू,एवं जंगल सफारी प्रबन्धन द्वारा पर्यटन सहित आवागमन व्यवस्था, वन्य प्राणियों के खानपान, को ध्यान में रखते हुए प्रवेश शुल्क से लेकर भ्रमण तक में वृद्धि करने पर विचार कर रहा है संभवतः भ्रमण शुल्क जून माह 2026  के प्रथम सप्ताह से दोगुनी होने की बात कही जा रही है  

   


  प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने नवाचार प्रणली के तहत तथा देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ईधन बचत संकल्प को ध्यान मे रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहन एवं नौका विहार बोटिंग का विकल्प के रूप में चयन किया इसके लिए वन विभाग के भारी भरकम अधिक व्यय बजट करने के बजाए इलेक्ट्रिक वाहन बोटिंग को तरजीह दिया तथा विभाग द्वारा सीधे वाहन निर्माता कंपनी से आर्थिक साझा कर नवीन व्यवस्था कायम की गई जिसका सीधा लाभ पर्यटकों को मिलेगा इस संदर्भ में ज्ञात  हुआ है कि वर्तमान में सात इलेक्ट्रिक बस  एवं पांच जिप्सी लिया गया है जिसकी संख्या भविष्य में अधिक बढ़ाई जा सकती है लिए गए बस और जिप्सी के बारे मे बताया जाता है कि यह वातावरण में शांत कम प्रदूषण एवं अत्यधिक शोर शराबा कोलाहल से ध्वनि रहित परिपूर्ण है इसके परिचालन से वन्य प्राणियों में खौफ भय गुस्सा उत्तेजना की अनुभूति नही होगी तथा वे निश्च्छल, शांत प्रकृति वातावरण मे  निर्भय होकर विचरण करते दृष्टि गोचर रहेंगे तथा पर्यटकों को भी सहजता से इनका दर्शन लाभ मिल सकेगा वही बोटिंग के लिए अत्याधुनिक बोट लिया गया है जिसमें सह परिवार     सहित सुविधाजनक स्थिति में निर्भय होकर जल विहार का आनंद उठा सकेंगे इसके अलावा पॉटन बोट, बांस रॉफ्टस एवं कायक व वॉटर बाइसिकल जैसी सुविधा उपलब्ध की गई है जिसमें सुरक्षा कवच के साथ जल क्रीड़ा का आनंद लिया जा सकता है 


परिवारिक माहौल में नवा रायपुर स्थित नंदन वन जू एवं जंगल सफ़ारी पर्यटन क्षेत्र भ्रमण के दौरान मोबाइल द्वारा बहुत से अविस्मरणीय पल को सेल्फी के मध्यम से सहेजा जाना आम बात है लेकिन उक्त पल,अवधि, दिन को सदैव अक्षुण्य बनाए रखने के उद्देश्य से प्रबन्धन एवं विभाग द्वारा ऐसे शॉप का निर्माण की है जिसमें प्रदेश की कला, संस्कृति,पर आधारित अनूठी हस्त शिल्प कलात्मक वस्तुयें विक्रय हेतु रखी गई है जिसे पर्यटकों द्वारा क्रय कर स्मृति चिन्ह के रूप में इसे वर्षों तक सहेजा जा सकता है यही नही पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित नवीन योजनाओं के पहल से स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवक युवतियों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा साथ ही महिलाएं भी आत्म निर्भर होकर सम्मान जनक जीवन व्यतीत कर सकेंगे इसके लिए बहुत सी निज कंपनिया इस ओर करोड़ों रुपये का निवेश करने दिलचस्पी दिखाई है जो भविष्य मे पर्यटन स्थल के लिए मील का पत्थर साबित होगा 

    पर्यटकों को दी जाने वाली इलेक्ट्रिक वाहन सुविधा के विशेष अवसर पर प्रदेश के वन मंत्री श्री केदार कश्यप द्वारा नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी झण्डी दिखा कर अपने संक्षिप्त उद्बोधन मे कहा कि प्रदेश के मुख्य मंत्री विष्णु देव साय जी के कुशल नेतृत्व में तथा देश मे आए ईधन संकट के बीच मे देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ईधन बचत के अवहान एवं दिशा निर्देश का अक्षरशः पालन करते हुए हमने इलेक्ट्रिक वाहन का चयन कर सीधे कंपनी से आर्थिक साझेदारी की है जिसके उपयोग से पर्यावरण सुरक्षित एवं संतुलित रहेगा साथ ही प्रदूषण से निजात मिलेगी तथा आमजन के स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव नही पढ़ेगा वन मंत्री केदार कश्यप ने आगे कहा कि हमें छत्तीसगढ़ प्रदेश को पर्यटन के मामले मे वैश्विक मानचित्र के रूप मे विकसित करना है जिसकी शुरुआत नवाचार के रूप मे इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रय कर विभाग एवं कंपनी से सीधे आर्थिक साझेदारी करना हमारे लिए एक नई दिशा की ओर पहला कदम बढ़ाना साबित हुआ है साथ ही स्थानीय बेरोजगारों के लिए नव सृजन के रूप में रोजगार व्यवस्था का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है 


  इस विशेष अवसर पर  वन मंत्री केदार कश्यप के अलावा अभनपुर विधायक इंद्रकुमार साहू,  सहित अनेक जन प्रतिनिधि तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री अरुण कुमार पांडेय, प्रबन्ध संचालक छ्ग राज्य लघु वनोपज संघ, श्री अनिल कुमार साहू, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना, मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी श्री गुरुनाथन एन. संचालक  जंगल सफारी श्री थ्रेजस शेखर सहित बड़ी संख्या में वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे

बुधवार, 27 मई 2026

छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ पं.क्र.548 मजबुत संगठन के रूप में उभरी अनोखी पहल से अपनी छाप छोड़ी है।

 छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ पं.क्र.548

 मजबुत संगठन के रूप में उभरी अनोखी पहल से अपनी छाप छोड़ी 


  रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय ) छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ  ने संगठन के महत्व को आत्मसात किया है  प्रान्ताध्यक्ष रामकुमार सिन्हा ने बताया की संगठन के सिद्धांत उनके मूलभूत नियम और दिशा निर्देश हैं जो किसी संस्था, व्यवसाय या प्रशासनिक ढांचे के निर्माण, संचालन और प्रबंधन में मदद करते हैं। ये सिद्धांत कार्यकुशलता बढ़ाते हैं, कर्मचारियों के बीच तालमेल सुनिश्चित करते हैं और लक्ष्यों को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


संगठन के प्रमुख सिद्धांतों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है:- *उद्देश्यों की एकता (Unity of Objectives):* संगठन के प्रत्येक सदस्य और विभाग को संस्था के सामान्य लक्ष्यों के प्रति स्पष्ट होना चाहिए। सभी प्रयास निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में केंद्रित होने चाहिए।


*कार्य का विभाजन और विशिष्टीकरण (Division of Work):-* संपूर्ण कार्य को छोटे-छोटे भागों में विभाजित किया जाना चाहिए। जब कर्मचारी अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार एक ही प्रकार का कार्य बार-बार करते हैं, तो इससे विशिष्टीकरण और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।


*अधिकार और उत्तरदायित्व (Authority and Responsibility):-* निर्णय लेने का अधिकार और काम के प्रति जवाबदेही के बीच संतुलन होना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी को कोई जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो उसे उस कार्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त अधिकार भी मिलने चाहिए।


*आदेश की एकता (Unity of Command):-* इस सिद्धांत के अनुसार, एक कर्मचारी को केवल एक ही उच्च अधिकारी से निर्देश प्राप्त होने चाहिए। इससे भ्रम, टकराव और दोहरे आदेशों की समस्या से बचा जा सकता है।


*समन्वय का सिद्धांत (Principle of Coordination):-* जेम्स डी. मूने के अनुसार यह संगठन का सबसे प्रमुख सिद्धांत है। यह सुनिश्चित करता है कि संगठन के सभी विभागों और कर्मचारियों के कार्यों में परस्पर तालमेल हो, ताकि कार्यों में दोहराव न हो और उद्देश्य आसानी से पूरे हो सकें।


*नियंत्रण का दायरा (Span of Control):-* एक वरिष्ठ अधिकारी के सीधे नियंत्रण में कर्मचारियों की एक उचित संख्या होनी चाहिए। संख्या इतनी अधिक न हो कि अधिकारी प्रभावी ढंग से पर्यवेक्षण (Supervision) न कर सके।


*पदसोपान (Hierarchy):-* संगठन में शीर्ष से लेकर निम्न स्तर तक अधिकारियों की एक स्पष्ट श्रृंखला होनी चाहिए। यह ऊपर से नीचे की ओर अधिकार और संचार के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करता है।


*संगठन के एक दशक में प्राप्त उपलब्धियां :-*


(1) वन विभाग में वर्ष 2008 में नियमितीकरण के पश्चात दैनिक वेतनभोगी भोगी मानना बंद कर दिया था, शासन प्रशासन में दैनिक वेतन भोगी एवं दैनिक श्रमिकों की जानकारी हमेशा निरंक जाता था यह प्रथा वर्ष 2013 तक चला!


(2) छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ ने वन विभाग में प्रचलित रहे विभागीय दर जिसके आधार पर वेतन भुगतान किया जाता था उसका विरोध किया,और श्रमायुक्त दर पर वेतन भुगतान करने के लिये विभाग से आदेश जारी करवाया। 


(3) वन विभाग में श्रमायुक्त दर पर वेतन भुगतान कराने के बाद लगातार दैनिक वेतनभोगी मानने के लिये जंग छेड़ दिया लगातार हड़ताल कर विभाग में दैनिक वेतन भोगी मानने के लिये  शासन स्तर पर जानकारी भिजवाया। 


(4) संगठन के पहल से वन विभाग ने दैनिक वेतनभोगी मानकर पहली बार वृत्त पर वरीयता सूची तैयार किया!


(5) वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ ने लगातार 34 दिनो तक अनिश्चित कालीन हड़ताल में रहे, प्रमुख सचिव वन विभाग एवं सचिव वन विभाग,प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन बल से चर्चा उपरांत दैनिक वेतनभोगी के निधन पर 01:00 लाख रूपया अनुकम्पा अनुदान पर सहमती बनी और आज भुगतान हो रहा है। 


(6) छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के द्वारा सौपे गये प्रस्ताव पर मुख्य मंत्री, व उप मुख्य मंत्री के अनुमोदन पश्चात समस्त शासकीय विभागों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी को 4,000 रूपया श्रम सम्मान देने की घोषणा की यह संगठन की अनुठी पहल रहा!


(7) छत्तीसगढ़ में पहली बार संगठन के पहल से दैनिक वेतनभोगी एवं श्रमिकों को हड़ताल अवधि का वेतन भुगतान वर्ष 2022 में 34 दिन का हुआ तथा वर्ष 2024 में 48 दिनो का भुगतान हुआ है। 


(8) वर्ष 2024 में निरंतर 48 दिनों तक अनिश्चित कालीन हड़ताल के परिणाम स्वरूप स्थायीकरण एवं आकस्मिकता कार्यभारित का प्रस्ताव शासन स्तर पर गया। 


छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ पं.क्र.548 निरंतर अपनी कामयाबी की ओर बढ़ रहा है, वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी,वाहन चालक, कार्यालय सहायक, कम्प्युटर आपरेटर,डाटा एन्ट्री आपरेटर,दैनिक श्रमिक चट्टानी ईरादा के सांथ संगठन में जुड़े हुए है और संगठन को मजबुती प्रदान किये हैं। 




*संगठन एकता शायरी, संगठन पर कविता*


टकराने की मत करना कोशिश संगठन मेरे साथ है!

अकेला समझने की मत करना कोशिश मेरी हिम्मत मेरे पास है!!


डराना अब किसी के बसकी बात मेरी जान मेरे साथ है!


संगठन की ताकत से आज वो बहुत बड़ा हो गया!

जिसने उसे वहां पहुंचाया आज उसी को बर्बाद करने तैयार हो गया!!


जरा संभल जा क्यों अपनी कब्र खोदने को तैयार हो गया।


जिस परिवार में अच्छा संगठन हो वो परिवार खुशनुमा होता है, घायल कोई करना चाहे तो एक होकर वार करता है!!


संगठन ही एक ऐसा परिवार है जहां पर अपनो का प्यार मिलता है। 


प्रेषक

रामकुमार सिन्हा

प्रान्ताध्यक्ष 

छत्तीसगढ़ दै.वे.भो.वन कर्मचारी संघ पं.क्र.548

गुरुवार, 14 मई 2026

वन मंडल रायपुर नर्सरी मे फॉरेस्ट गार्ड लाखों करोडो का असामी, ग्राम पचेड़ा के सुशासन तिहार में ग्रामीणों ने शिकायत की

 वन मंडल रायपुर नर्सरी मे फॉरेस्ट गार्ड लाखों करोडो का असामी, 

ग्राम पचेड़ा के सुशासन तिहार में ग्रामीणों ने शिकायत की 

अल्ताफ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छ्ग वन विभाग में भ्राष्टाचार, फर्जीवाडा, गड़बड़ घोटाला, गबन,अनीयमितताएं ,को बड़े शातिराना तरीके से कर विभाग को आर्थिक चोट पहुंचाने वाले बहुत से डकैत यहाँ मिल जाएंगे जो शासकीय सेवाएं तो वन विभाग की करते है परंतु उसका पुरा आर्थिक लाभ अपने खाते में जमा कर उसका भरपूर लाभ उठाते रहते है जिसकी बाहर कानों कान खबर तक नही आ पाती परंतु ऐसा लोमहर्षक मामला जब किसी मध्यम से सामने आता है तो आँखे अचरज से फटी की फटी रह जाती है ऐसा ही एक मामला ग्राम पचेड़ा का शासन तिहार मे सामने आया है जिसमें स्थानीय ग्रामीण, मजदूरों ने लिखित में शिकायत दे कर संबंधित वन कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग प्रदेश के वन मंत्री सहित वरिष्ठ विभागीय  अधिकारीयों से की है 



      संपूर्ण प्रकरण रायपुर वन मंडल अंतर्गत ग्राम पचेडा नर्सरी का है जहाँ विगत बारह वर्षो से प्रेमन चंद्राकर नामक वन रक्षक वहाँ कार्यरत है जिसके विरुद्ध नर्सरी में वर्षों से कार्य करने वाले कुछ स्थानीय ग्रामीण,श्रमिक  सुशासन तिहार में आवेदन दिनांक 11/05/2026 को ग्राम पचेड़ा या आसपास मे आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में सम्मिलित हो कर लिखित आवेदन प्रस्तुत किये है जिनसे चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि वन अनुसंधान विस्तार वन विभाग में प्रेमन चंद्राकर वन रक्षक के पद पर एक ही स्थान नर्सरी मे वर्षों से कार्य करते हुए बिल बाऊचर मे हेराफेरी और बड़े बड़े भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला कर लाखों करोड़ों की चल अचल संपति अर्जित कर ली है बताया यह भी गया है कि पचेडा नर्सरी में तैयार पौधों को अपने अलग से निर्मित  निजी नर्सरी में बेच कर फर्जी वितरण दिखा कर लाखों करोङों का घोटाला कर चुका है यह भी बताया जाता है कि शासकीय विभाग में कार्य मे रहते हुए प्रेमन चंद्राकर ने मनरेगा योजना के अंतर्गत तैयार पौधों को अपनी निजी नर्सरी अलग से बना रखी है जो हैरान करने वाली बात है क्योंकि विभागीय शासकीय सेवक या कर्मचारी पद मे रहते हुए व्यक्तिगत, निजी समान विभागीय कार्यों,जैसे नर्सरी, प्लांटेशन  वानिकी कार्य, का व्यवसाय नही कर सकता यदि कोई विभागीय कर्मी ऐसा कार्य स्वयं करता है अथवा अपने परिवार के मध्यम से करवाता है तो उसे विभाग को लिखित में आवेदन दे कर एन ओ सी  लेना अनिवार्य हो जाता है क्योंकि वह स्वयं शासकीय विभाग में कार्यरात होता है यदि एम्पलाइज को संबन्धित कार्य करना है तो उस दशा में शासकीय कार्य से पृथक हो कर मुक्त रूप से कार्य करने वह स्वतंत्र होता है परंतु सभी नियम को ताक में रख कर जिसमें विभाग की नर्सरी के पौधे कथित अलग से निजी नर्सरी का निर्माण  कर विभाग के पौधे या अन्य  समाग्री वस्तुएँ  अन्य स्थान  मे लाकर उसका व्यवसायिक विक्रय कर निज लाभ लेना विभागीय कार्यों के अमानत में खयानत करने जैसा है साथ ही रिकवरी कर, कार्यों से पृथक कर जेल भी भेजा जा सकता है जब की यह  मामला पांच सौ हजार का नही बल्कि लाखों करोड़ों का लंबा खेल  वर्षों से खेला जा रहा हो श्रमिकों ने आगे बताया कि प्रेमन चंद्राकर ने लगभग साठ से सत्तर लाख का निजी भवन पॉश इलाके में बना कर रखा है यही नही दो पहिया वाहन स्वर्ण, रजत, के आभूषण तथा अन्य स्थान में अपने परिजनों के नाम से भूमि लिए जाने का आरोप भी लगा है स्थानीय श्रमिकों एवं ग्राम वासियों ने संयुक्त रूप से आवेदन देकर बताया कि वर्ष, 2017-2018 में मुंनगी डेमों बांस प्लांटेशन मे लगाए जाने वाली सामग्री तार, लोहा, सीमेंट, गिट्टी, छड़, को बेच कर लाखों करोड़ों का घोटाला किया गया है ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि उसी पैसों से प्रेमन चंद्राकर वन रक्षक ने अपना नवीन भवन बनवाया था जिसकी शिकायत उपर भी की गई थी ग्रामीण श्रमिकों का आरोप है कि प्रेमन चंद्राकर द्वारा मँदिर हसौद  मे ग्ग्लैक्सि 2 अपर्टमेंट  के समीप ए वन नर्सरी के नाम से  उनकी निजी नर्सरी निर्माण कर रखी है जहाँ ग्राम पचेडा की विभागीय नर्सरी संचालित होती है जिसमें पौधे रोपण से लेकर पॉलीथीन बैग में सिंचाई कर  वहां सुरक्षित स्थान में रखा जाता है ताकि आसपास ग्रामों के वृक्षारोपण कार्यक्रम में विभागीय वितरण  किया जा सके परंतु वन रक्षक प्रेमन चंद्राकर  अपना निजी अर्थ लाभ उठाने के उद्देशय से शासकीय नर्सरी के पौधे अपने कथित नर्सरी के मध्यम से निज संस्थानों और आर्डर लेकर अन्य नर्सरी में बेच कर आर्थिक लाभ कमा रहा है 


लगातार बारह् वर्षों से  प्रेमन चंद्राकर वन रक्षक द्वारा एक ही स्थान में  बने  रहते हुए बड़े बड़े भ्रष्टाचार, घोटाले को अंजाम देना  लाजिमी है क्योंकि इस संदर्भ में विभाग के अधिकारी दुधारू गाय को एक खूंटे में बांध कर रखना तथा वर्षों तक दूध मलाई खाते रहना की परंपरा वन विभाग के लिए सीधा भ्रष्टाचार को  बढ़ावा देना दिखाई देता है अब भ्रष्टाचार, गड़बड़, घोटाले की ऐसी आंच की जांच की गई तो इसके ज़द मे उपर बैठे अधिकारियों पर भी गाज गिरना जरूरी है क्योंकि बगैर उपर बैठे अधिकारियों का उस के सिर पर वरद हस्त प्राप्त न हो तो इतने बड़े खेल मे अकेले कोई कर्मी बड़ा खेल खेल नही सकता तभी तो वह जब अकेले साठ सत्तर लाख का निजी मकान, एवं अन्य  भौतिक संसाधन  वस्तुएँ मिला कर करोड़ों का खेल खेल सकता है तो अन्य संलग्न अधिकारियों ने कितने करोड़ का घोटाला किए होगे यह बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है? यहाँ प्रेमन चंद्राकर जैसा अकेला वन कर्मी नही जो बारह वर्षों से एक ही स्थान में जमा हो


नंदन वन के लोचन साहू जो तेरह वर्षों से उपर नंदन वन को तहस नहस कर रख दिया उसके बारे में भी खूब चर्चा है कि इंट्री फीस  गड़बड़ी  से लेकर  वन्य प्राणियों के दाना चारा पानी तक खा खिला कर नंदन वन को बदतर स्थिति में पहुंचा दिया क्यों ऐसे भ्रष्ट वन कर्मियों को विभाग द्वारा पाला जाता है या उसे अंयन्त्र तबादले क्यों नही की जाती?अब नंदन वन को शासन फिर करोड़ों रुपये लगाकर उसका जीर्ण उद्धार में जूटी हुई है परंतु क्या लोचन साहू को वहाँ से अनयत्र भेजा जाएगा या भ्रष्टाचार करने के लिए उसे यही रखा जाएगा? 


यही स्थिति गरियाबंद के हर दिल अजीज मनोज चंद्राकर जो रेंजर से एस डी ओ बन कर आठ वर्षों से उपर गरियाबन्द वन मंडल के स्थानीय क्षेत्रों में जमे हुए है लेकिन गरिया बंद का मायावी मोह माया उनसे छुट ही नही रहा  ऐसा लगता है कि वे अब यहाँ से रिटायर गरियाबंद वन मण्डल से ही होंगे और यहां भी और मकान बनाएंगे या बना भी लिए होंगे सवाल उठता है कि क्या वन विभाग में ऐसा नियम है ? कि कोई अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान में जमा रहे ? और विभाग को दीमक की तरह खोखला कर दे यह उपर बैठे अधिकारियों की मिली भगत के असंभव है? यदि है तो तीन वर्षों में तबादला नीति जैसा ढकोसला  बंद होना चाहिए जबकि गरियाबन्द एस डी ओ  मनोज चंद्राकर उनकी भ्रष्टाचार की फेहरिस्त इतनी बड़ी है कि पैर से लेकर सिर तक वे डूबे हुए है इसका जीता जागता प्रमाण गरियाबंद ऑक्सिजोन (इको पार्क)जो बारह् से पंद्रह करोड़ में हाल कुछ वर्ष पूर्व उनके द्वारा ही निर्माण करवाया गया था जिसकी स्थिति (चित्र देखें) देख कर किसी भी व्यक्ति को हंसी छुट जाएगी  खुले आम भ्रष्टाचार का नँगा खेल उन्होंने खेला है,,बस एक नज़र उनके संपादित कार्यों पर भी विभाग के आला अधिकारी डाल ले तो सारी सच्चाई..दूध का दूध और पानी का पानी...नज़र आ जाएगा. 

बुधवार, 13 मई 2026

बगिया का फूल छ्ग का सिरमौर बन प्रदेश में लिख रहा विकास की नई इबारत



 बगिया का फूल छ्ग का सिरमौर बन प्रदेश में लिख रहा विकास की नई इबारत 

संदर्भ - मुख्यमन्त्री विष्णुदेव साय पर केंद्रित लेख 


                            

                                संकलन  /लेख



                                 अलताफ़ हुसैन

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) सही मायनों में भारत महानगरों,शहरों के , क्रांकिट के जंगल में नही  बल्कि दुरस्था ग्राम क्षेत्रों के लहलहाते फसलों में कार्य करते आम जनता के मन में बसता है जहाँ की सोंधी मिट्टी, लहलहाते खेत,ऊँचे पहाड़, मदमस्त कर देने वाली वनों की चलने वाली ठंडी पुरवाई,में जब गगन चुंबी पेड़ पौधे झूमते है तब ऐसा प्रतीत होता है जैसे एक एक पत्ता मदमस्त होकर भारत देश की स्तुति गान कर रहे हो यह दृश्य भारत में बसने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी दृष्टिगोचर होता है वहाँ पर निवासरत एक आम व्यक्ति जब साधन, संपन्नता के अभाव में असाधारण कार्य की जद्दो जहद का बीडा उठाता है तब उसका जीवन बहुत दुरूह एवं संघर्ष पूर्ण हो जाता है परंतु देश मे ऐसे भी जौहरी  मौजूद है जिनकी पारखी नज़रें उपेक्षित ग्रामीण क्षेत्रों मे पड़े  हीरे की चमक को पहचान जाते है तथा उसको तराश कर समुचित स्थान मे रखते है

उपरोक्त कथन छ्ग राज्य के उस कोहिनूर हीरा के संदर्भ मे कही जा रही है जो छ्ग प्रदेश के छोटे से ग्रामीण क्षेत्र बगिया का साधारण कृषक पुत्र है जो कभी स्वप्न में भी नही सोचा होगा कि वह छत्तीसगढ़ राज्य का सर्वोच्च पद मुख्यमन्त्री के रूप में बैठेगा परंतु उस हीरे की चमक को एक ही नज़र मे देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने मंत्री मंडल के कार्यकाल में कथित हीरे को परखाऔर प्रथम दृष्टि में साधारण सा दिखने वाले असाधारण व्यक्तित्व को पहचाना और उन्हे 13 दिसंबर 2023 को प्रदेश की मुख्यमन्त्री के रूप में ताजपोशी की घोषणा कर दी तत्कालीक छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमन्त्री पद के बहुत से  ऐसे भी दावेदार थे जो साधन संपन्न क्षेत्रों से आते थे परंतु देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने गुरु द्रोणाचार्य की भाँति    उस एकलव्य से उसका  अंगूठा मांगने की बजाय  हाथ मे तीर धनुष थमा कर एक और अर्जुन खड़ा कर दिया यहाँ बात छत्तीसगढ़ के सहज,सरल, मिलनसार,मुख मे चिर परिचित गंभीर परंतु दृढ़ संकल्पित मुस्कान, ललाट मे सूर्य की तेज लिए, सर्व हारा,जन हितैषी एवं कर्तव्य निष्ठा,व्यक्तित्व के धनी माननीय मुख्यमन्त्री श्री विष्णु देव साय के संदर्भ मे कही जा रही है जिन्होंने बाल्य काल से ही शोषित वर्गों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास उन्नति की मुख्यधरा से जोड़ने का जज़्बा रहा यही वजह है कि युवा होते हुए उन्होंने ग्रामीण राजनीति मे उतर गए क्योंकि  जशपुर जिले का एक प्रसिद्ध और छोटा सा गांव बगिया में उनका जन्म साधारण कृषक परिवार के घर में 21 फरवरी 1964 को हुआ था उनके पिता स्वर्गीय राम प्रसाद साय और माता जसमनी देवी ने बहुत स्नेह से उनका लालन पालन किया उनकी प्राथमिक शिक्षा कुनकुरी के लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से हायर सेकेंडरी तक शिक्षा प्राप्त की पश्चात उनका विवाह 1991 में कौशल्या साय से संपन्न हुआ जिनसे , एक बेटा और दो बेटियां हुई युवा काल में ही वे  कृषि के अलावा स्थानीय राजनीति मे सक्रिय हो गए थे वर्ष 1989 में वे पंचायत स्तर ग्राम पंचायत बगिया में साधारण पंच के रूप से अपनी राजनैतिक की शुरुआत की आगामी पंचायत चुनाव वर्ष 1990 में उन्होंने समर्पित सेवा भाव से ग्राम बगिया क्षेत्र में ऐसा कार्य किया कि सभी ग्रामवासी उनके मुरीद हो गए  कहा जाता है कि पूत के पांव पालना मे नज़र आ जाता है वैसा ही राजयोग का प्रबल योग गति ने  धीमे कदम से राजनीति में रखते हुए श्री विष्णुदेव साय के एक वर्ष के अल्प कालिक कार्य काल में पहले पंच के रूप मे रहे पश्चात एक वर्ष में ही वे निर्विरोध सरपंच चुने गए इस दरमियान वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(आर एस एस) में एक साधारण कार्यकर्ता के रूप मे लगातार जुड़े रहे तत्कालिक दौर में क्षेत्र के  कद्दावर नेता दिलीप सिंह जुदेव और उनके परिवार से लगातार संपर्क रहा तथा राजनीति सहित विभिन्न मुद्दों पर उनसे राय मशवरा लेते रहे शनैः शनैःअपना राजनीति कद भी बढ़ाते रहे  ग्रामीण पंचायत राजनीति से सरपंच पद की प्रारंभिक राजयोग की शुरुआत ने उन्हे स्थानीय शहरी क्षेत्रों की राजनीति से सीधे केंद्र सरकार की राजनीति में ले जाकर बिठाया वे इस दरमियान विभिन्न महत्वपूर्ण पदों मे आसीन होकर अपने क्षेत्रों का सफलता पूर्वक प्रतिनिधित्व किया कथित कार्यकाल में वे वर्ष 1990 से 1998 तक मध्यप्रदेश के तपकरा विधान सभा मे सदस्य रहे  इसके पश्चात वर्ष 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार चार बार रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए और क्षेत्र के जनहित मुद्दों को समय समय पर उठाते रहे  साथ में उसका निराकरण भी करते रहे वे जमीनी स्तर से जुड़े आदिवासी नेता थे तथा सब के सुख दुख मे सदैव साथ खड़े रहना उनका मूल कर्तव्य था इसकी वजह से उनका जनाधार लगातार बढ़ता गया फिर वर्ष  2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में इस्पात, खान, श्रम और रोजगार राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली उसी कार्यकाल के दौर में माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के संपर्क में रहते हुए उनसे लगातार मुलाकात होती रही तभी उनकी पारखी नज़रों ने छत्तीसगढ़ के कोहिनूर हीरा कहे जाने वाले वर्तमान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को परखा तथा उन्हे प्रदेश की बागडोर सौंपी 


            छग के यशस्वी मुख्य मंत्री विष्णुदेव साय जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व दोनों मे समानता नजर आती है वे पूर्व मुख्यमन्त्री डॉ रमन सिंह से कार्यशैली से काफी प्रभावित रहे तथा उनके ही कार्य काल की तर्ज पर बहुत सी शासकीय योजनाओं का क्रियानव्यन इस बार भी दोहरा रहे है जो आज भी पूरी तरह सफलता का कुंजी साबित हो रहा है उन्होंने छ्ग की समस्त योजनाओं में सभी वर्गों का विशेष ध्यान रखते हुए कार्य कर रहे है जिनमें मुख्यतः मातृ सशक्तिकारण की दिशा में महतारी वंदन योजना, कृषको के उत्थान के लिए कृषक उन्नत योजना, जिसमें बीज खाद की उपलब्धता से लेकर ऋण प्रदान करना फसलों की समर्थंन मूल्य 3100 की निर्धारित दर पर क्रय करना, श्रमिक वर्ग के बच्चों के लिए नोनी सशक्तिकारण योजनाएं समाहित की गई है जिसका प्रत्येक वर्ग के लोगो को उनके खाते में सीधा लाभ मिल रहा है दीन दयाल उपाध्याय भूमि कृषिहीन कल्याण योजना के तहत भूमिहीन कृषक मजदूर को प्रति वर्ष दस हजार  रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है यही नही मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना जिसमें मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन समान राशि  श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और मेधावी छात्रों को ₹1 लाख से ₹2 लाख तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है जिसमें छात्राओं को स्कूटी भी दी जाती है 

 महिलाओं के स्वस्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस एलपीजी कनेक्शन प्रदान किया गया है इसके अलावा  मोबाइल वेटरिनरी यूनिट (पशु चिकित्सा)एवं खेल प्रोत्साहन योजना सहित आज प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक अदद मकान निर्माण करने की लालसा रहती है जो आम जनता के लिए बहुत बड़ी समस्या और चुनौती बन चुका है जिसके निराकरण हेतु प्रत्येक व्यक्ति के अपना घर अपना आवास निर्माण पीएम आवास योजना के नाम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों मे लागू किया है जिसकी वजह से बहुत से नागरिकों का अपना स्वयं का मकान का सपना साकार हो गया है इसके अलावा भी बहुत सी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल की गई है जिनमें शिक्षा के क्षेत्र में  स्वामी आत्मानंद स्कूलों का नव निर्माण एवं पुनरुत्थान किया गया है गरीब बच्चों के शिक्षा पर अधिक जोर दिया गया है  केंद्र सरकार द्वारा स्वस्थ के क्षेत्र में जारी आयुष्मान कार्ड सहित हमर अस्प्तल में प्रारंभिक् मुफ्त इलाज की व्यवस्था छ्ग की साय सरकार कर रही है जिसका लाभ आम जन को मिल रहा है 

      छ्ग के मुख्यमन्त्री  विष्णु देव साय का एक ही विजन चल रहा है सब का साथ सबका विकास इस समस्त योजना के तहत प्रदेश को विकास एवं उन्नति की ओर ले जाने के साथ विकसित छ्ग को प्रथम पंक्ति में लाना प्रमुखता है  नवाचार उद्योग के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करना भी प्रमुखता मे शुमार है  बस्तर जैसे नक्सल वाद क्षेत्रों का समूल नष्ट कर एक नई इबारत लिखी गई अब उन क्षेत्रों में नई विजन के तहत बहुत से उद्योग घरानों ने नवीन  मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद जैसे फूड से लेकर कपड़े, स्वस्थ्य, दवाइयां इलेक्ट्रानिक कंपनी  टी वी , सीमेंट, लोहा जैसी स्थानीय,देशी एवं विदेशी सुप्रसिद्ध निर्माण, कंपनियों को आमंत्रित किया गया है जिसका सारगर्भित परिणाम सामने आने लगे है इच्छुक कंपनी, उद्योगपतियों के लिए छ्ग शासन उद्योग लगाने नियम अनुसार कम राशि में उन्हे  भूमि सहित, पानी बिजली, सड़क जैसी सुविधा भी उपलब्ध करा रही है 

   छत्तीसगढ़ सरकार अंजोर 2047 के विजन पर रूपरेखा तैयार कर चल रही है जिसमें विकसित भारत का विकसित छत्तीसगढ़ राज्य की परिकल्पना को तैयार कर रही है  इसका मुख्य उद्देश्य राज्य को एक पिछड़े क्षेत्र से निकालकर अगले 25 वर्षों में अत्यधिक समृद्ध और आत्मनिर्भर मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करना है मुख्य लक्ष्य हर व्यक्ति को रोजगार, शिक्षा, स्वस्थ्य, उद्योग, व्यापार, को तरजीह देकर विकसित छत्तीसगढ़ राज्य को हीरे के समान चमकदार बनाना है जिसकी चमक देश ही नही अपितु विश्व के मानस पटल पर चमकेगा यह तभी संभव है जब प्रदेश का मुखिया श्री विष्णु देव साय जैसे हीरक गुण वाले मुख्यमन्त्री ही छत्तीसगढ़ गढ़ राज्य उसकी कांति मय आभा को नवीन योजनाओं के मध्यम से उसके स्वरूप को हीरक मय बना दे  तभी वह हीरक छत्तीसगढ़ भी कहलाएगा.

सोमवार, 11 मई 2026

साय सरकार का सुशासन तिहार पहुँच रहा जनता के द्वार

 साय सरकार का सुशासन तिहार पहुँच रहा जनता के द्वार



                                अलताफ़ हुसैन    

 




  रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) छ्ग प्रदेश  की                 भारतीय जनता पार्टी सरकार आम जनता की हितो की सुरक्षा के दृष्टि कोण से अनेक जन कल्याणकारी, विकास परक सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन समय समय पर करती रही है परंतु अनेक व्यस्तता के चलते उसका लाभ बहुत से आमजन कममात्रा मे उठा पाते है परिणामतः जो मांग, समस्याए, योजनाओं  से वंचित हो जाते है या उनकी लंबित मांगों, ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत संस्याएँ, सुविधाओं सहित अवसीय शिक्षा स्वस्थ्य जैसे आवेदन, लंबित रहते है उसका  निपटारा करने राज्य सरकार सदैव कटिबद्ध है यही वजह है कि  1 मई 2026 से दस जून 2026 तक प्रदेश के सभी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार ग्राम सुराज के मध्यम से सुशासन तिहार के रूप में मनाया जा रहा है जिसमें राज्य के यशस्वी मुख्यमन्त्री माननीय विष्णु देव साय जी स्वयं  42 डिग्री से उपर तापमान के भीष्ण गर्मी में अपने विभाग के समस्त आला अधिकारियों के साथ पूरे लाव लश्कर लेकर सहसा अथवा चिंहित ग्राम क्षेत्र में उपस्थित हो चौपाल या जन दर्शन शिविर लगा कर उनकी उचित मांग और आवेदन का निराकरण कर त्वरित आदेश पारित कर रहे है इस संदर्भ में माननीय मुख्यमन्त्री श्री विष्णु देव साय ने कड़े शब्दों में संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दे रखा है कि सभी प्राप्त आवेदन का निपटारा एक माह के भीतर में हर संभव पुरा किया जाए  यही नही उन्होंने प्रदेश के समस्त जन प्रतिनिधि विधायक मंत्रीगण को भी अपने अपने क्षेत्रों में सुशासन तिहार में सम्मिलित हो कर आसपास के ग्राम पंचायतों की समस्याएँ,मांग पूर्ण आवेदन का निराकरण करने उनके संबंधित क्षेत्र में एक समुचित स्थान और तिथि समय का निर्धारण कर उनके समस्याओं से निजात दिलाया जाए


  इसी तरतमय में कबीरधाम जिले के पंडारिया मे 8 मई 2026 को नगर पालिका परिषद पंडारिया मे सुशासन तिहार अंतर्गत जन समस्या निवारण शिविर का वृहद स्तर पर आयोजन किया गया जिसमें  आसपास की लगभग बीस गाँव से हजारों की संख्या में ग्रामीण अपनी समस्या का निराकरण करने के उद्देश्य से वहाँ पहुंचे जिनका आवेदन स्थानीय पंडारिया विधायक भावना बेहरा ने लिया तथा उन्हे आश्वस्त किया कि उनकी समस्याएँ, यथा संभव निपटाया जाएगा इस अवसर पर भारी संख्या में आसपास के ग्रामीण,जनपद पंचायत के पदाधिकारी, स्थानीय जन प्रतिनिधि सहित विभागीय अधिकारी कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में शिरकत की


 जिन्हे स्टाल पहुँच कर बहुत से आवेदन कर्ताओ ने  आवेदन जमा किया  उनमे बहुत सी समस्याओं एवं उचित मांगों का तत्काल निराकरण भी कर दिया गया तथा शेष आवेदन की शीघ्र कार्यवाही करने के आदेश दिया इस विशेष अवसर पर पंडारिया विधायक भावना बेहरा ने उपस्थित जन समूह को अपने संक्षिप्त उदबोधन में कहा कि सुशासन तिहार आम जनता के मौलिक समस्याओं के निराकरण का तिहार है जिसके तहत सरकार अब आप तक पहुँच रही है आपकी जो भी समस्या मांग, चाहे वह शिक्षा स्वस्थ्य, राशन,ऋण पुस्तिका,आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था की देरी की वजह से मांगे, लंबित है उसका शासकीय स्तर पर त्वरित निराकरण किया जाएगा उन्होंने आगे कहा प्रदेश के मुख्यमन्त्री श्री विष्णु देव साय ने यह राज्य व्यापी अभिनव पहल प्रारंभ की है हालांकि इसी तर्ज पर पूर्व रमन सरकार ने भी की थी जिसका लाभ प्रत्येक राज्य के नागरिकों को प्राप्त हुआ था उसी प्रकार साय सरकार भी प्रदेश के अंतिम क्षेत्र के व्यक्ति को इसका लाभ प्रदान करने आपके द्वार पहुँच रही है उन्होंने आगे कहा इस बार की डबल इंजन की भाजपा सरकार भी समस्त मांगे, सममस्याओं, का निराकरण करने दृढ़ संकल्पित है विधायक भावना बेहरा ने जनता से कहा कि अब आपको सरकार तक अपनी समस्या लेकर राजधानी रायपुर तक पहुंचना न पड़े बल्कि सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि आपकी समस्या, सुनने आपके द्वार तक पहुँच रही है साथ ही उसका निवारण भी कर रही है इस जन समस्या निवारण शिविर का मूल उद्देश्य समस्त प्रकार की शासकीय योजनाएं सुविधा का अधिक से अधिक लाभ आम जनता को प्राप्त हो एवं साथ ही प्रशासनिक पारदर्शिता की विश्वसनीयता भी बनी रहे  जिसका सीधा लाभ  सभी आयु वर्ग तक पहुंचे इस लिए 1मई 2026 से 10 जून 2026 तक लगातार प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में शिविर लगाया जा रहा है जिसका सीधा लाभ प्रत्येक नागरिकों को उठाना चाहिए     


इस विशेष अवसर पर पंडारिया विधायक भावना बेहरा ने बहुत से विकलांग व्यक्तियों को ट्रायसिकल वितरण किया जिसे पाकर उनके चेहरे खिल उठे एक  ट्राईसिकल प्राप्त  हितग्राही से पूछने पर मुस्कुराते हुए बताया कि  अब मै भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक आ जा सकूँगा इसके अलावा अनेक लोगों को राशन कार्ड,कृषकों को ऋण पुस्तिका, सहित आवास स्वस्थ्य से संबन्धित आवेदन लिए तथा उसके निराकरण भी त्वरित निदान किया गया कुछ आवेदकों के आवेदन पर अश्वासन दिया गया वही कुछ आवेदक ऐसे भी थे जिनके भूमि विवाद, कृषि, आवास, भूमि,सीमांकन ,  नामांतरण, बिजली,पानी, एवं पेंशन संबधी आवेदन दिये थे जिनका शीघ्र निराकरण किया तथा शेष आवेदन को जल्द कार्यवाही की बात कही यही नही मंच की आसंदी से दसवीं बारहवीं में मैरिट लिस्ट मे टॉप पर उत्तीर्ण छात्राओं को भी  सम्मानित किया गया 

            पंडारिया नगर परिषद हॉल मे सुबह दस बजे से प्रारंभ हुए सुशासन तिहार के जन समस्या निवारण शिविर में वन विभाग, स्वस्थ्य विभाग, पी डब्ल्यू, पी एच ई. महिला बाल विकास, सहित बहुत से विभागीय स्टाल लगाए गए थे जिनमें बहुत से अधिकारी कर्मचारी गण संध्या पांच बजे तक डटे रहे सुशासन तिहार के उक्त समस्या निवारण शिविर में आए सभी आवेदकों के लिए पेयजल सहित बैठने पानी की माकुल व्यवस्था की गई थी लोगों ने शिविर में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया एवं आपने आवेदन का त्वरित निपटान पाकर खुशी से झुम उठे वही बहुत से जनता अपनी समस्या मांग को पूरी होने का अश्वासन लेकर भी उत्साहित दिखे

शनिवार, 9 मई 2026

सीमित साधन में असीमित संभावनाएं तलाश करता वन अनुसंधान विस्तार का मुरा नर्सरी

 सीमित साधन में असीमित संभावनाएं तलाश करता वन अनुसंधान विस्तार का मुरा नर्सरी




  अलताफ़ हुसैन



रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) प्रदेश में ऐसे अनेक पौधशाला अर्थात नर्सरी  मौजूद है जहाँ बीजों से अंकुरित कर उसकी सुरक्षा देखभाल,विकास उन्नति करते हुए नन्हे पौधों का उपचार कर स्वस्थ पौधे विकसित करना एवं उसका विक्रय करना मुख्य उद्देश्य माना जाता है यही नन्हे पौधशाला वाली नर्सरी वाली स्थिति मानव समाज में तीन से पांच वर्षीय बच्चों के उपर भी लागू होता है जिसमें अबोध बच्चों के, शरीरिक, मानसिक,बौद्धिक शैक्षणिक विकास हेतु ए. बी. सी. डी. एवं क. खा. ग. घ. जैसेअक्षर एवं छाया चित्र ज्ञान का पठन,पाठन करवा कर नर्सरी शब्द को परिभाषित करता है उसी प्रकार बीज से रूट शूट एवं अन्य पृथक पौधों की कलम को एक साथ जोड़ कर ग्राफ्टिंग विधि से उपचार कर नए पौधों का रोपण एवं उन्नत किस्म के फल, फूल, औषधि का नव निर्माण उपज कर उसका सर्वाईव करना उसी नर्सरी का मुख्य कार्य होता है जिसे हम आज छत्तीसगढ़ वन एवं परिवर्तन विभाग के वन अनुसंधान विस्तार वन मंडल के रूप में पहचानते है जो विगम कुछ वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ (पूर्व मध्य प्रदेश काल) में सामाजिक वानिकी रोपण कार्य के प्रमुख स्त्रोत के  रूप में  पहचाना जाता था तत्कालिक सामाजिक वानिकी प्रभाग'द्वारा संपूर्ण छ्ग प्रदेश में रोपण प्रबन्धन की मुख्य इकाई मानी जाती थी । यह प्रभाग वन क्षेत्रों के बाहर, जैसे कि बंजर भूमि, सड़कों, नदी, पोखर, नहरों के किनारे , सामुदायिक जमीनों पर वृक्षारोपण और वनीकरण के कार्यों के लिए जिम्मेदार था। परंतु बदलते परिवेश में वृक्षारोपण, प्लांटेशन एवं नर्सरी में बीज, रूट शूट सहित ग्राफ्टेड नवीन उत्पादित पौधों का आधुनिकरण तकनीक से उपज लेकर सीमित संसाधन से असीमित संभावनाओं को चरितार्थ कर वनअनुसंधान विस्तार वन मंडल द्वारा एक नया इतिहास रच कर अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कर रहा है


यही वजह है कि शासकीय योजनाओं में पौधे वितरण के अलावा मांग और मंशा अनुरूप क्रय विक्रय कर समस्त चिंहित क्षेत्रों में हरियाली प्रसार करना इसका मुख्य उद्देश्य हो चुका है ग्रामीण क्षेत्रों के पडत भाटा की बंजर भूमि सहित अन्य भूमि में ऐसे अनेक क्षेत्र है जहाँ के वन एवं अनुसंधान विस्तार वन मंडल द्वारा रोपे गए अनेक प्लांटेशन अपनी हरित आभा से आम जन को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब रहा है 

         वन अनुसंधान विस्तार रायपुर डिविजन के डीएफओ लोकनाथ पटेल से चर्चा करने में उन्होंने बताया की रायपुर डिविजन के अंतर्गत वन अनुसंधान विस्तार के इकाई  द्वारा ऐसे बहुत से प्लांटेशन लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर रहे है  जिनमें मुख्यतः राजिम नवापरा कसडोल कुरुद,में नदी के समीप वृक्षारोपण इकाई चंद्रखुरी असौदा के मध्य प्लांटेशन सहित ग्राम छतौद सहित बहुत से क्षेत्र है जहाँ छ्ग राज्य वन अनुसंधान विस्तार केंद्र द्वारा प्लांटेशन किया जा चुका है तथा वे आज भी स्वस्थ्य पौधे लगातार ग्रोथ कर रहे है मजे की बात यह है कि कथित प्लांटेशन क्षेत्रों में जहाँ भी वन अनुसंधान विस्तार वन मंडल द्वारा प्लांटेशन कराए गए वे सब ओरेंज, खुश्क पथरीली मुरुमी भूमि रहे है जहाँ के आश्चर्य जनक परिणाम सामने आए है श्री लोकनाथ पटेल बताते है कि नर्सरी के मध्यम से अनेक विलुप्त प्रजाति पौधों का संरक्षण संवर्धन कर अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के नर्सरी में किया जाता है इसके लिए बाकायदा विधान सभा मुख्यालय एवं गोढी नर्सरी में विलुप्त प्रजाति के पौधों का पुनःरुत्पादन हेतु लैब भी मौजूद है जहाँ वैज्ञानिक तरीके से ऐसे विलुप्त पौधों का निर्धारित तापमान में उपज की जाती है पश्चात नर्सरी में जैविक खाद  उपचारित कर नियमित सिंचाई से उसके प्राकृतिक रूप से सर्वाईव कराया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप उन्नत किस्म के स्वस्थ्य आकर्षक पौधे प्राप्त होता है जिसे भिन्न भिन्न क्षेत्रो में मांग अनुसार विक्रय या वितरण किया जाता है वन अनुसंधान विस्तार के डीएफओ. लोकनाथ पटेल आगे बताते है कि पूर्व छत्तीसगढ़ में संपूर्ण वानिकी कार्यों का संपादन सामाजिक वानिकी( वर्तमान में अब वन अनुसंधान विस्तार संस्थान) के मध्यम से ही किये जाते थे परंतु छ्ग वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने अब यह कार्य मूल रूप से कर रहा है जिसकी वजह से वनों का लगातार विस्तार भौतिक रकबा में बढ़ोतरी देखी जा रही  है 


           छ्ग राज्य वन अनुसंधान प्रशिक्षण विस्तार केंद्र के युवा ऊर्जावान, कर्मठ,लगन शील एस डी ओ तरुण तिवारी नित नवीन योजनाओं के मध्यम से अनेक कार्य योजनाएं तैयार कर विभाग की नई दिशा तय कर रहे है  इसके तहत कुरुद्  क्षेत्र में  नवीन कार्यालय भवन सहित नए प्लांटेशन करने की तैयारी भी की जा रही है संभवतः वर्षा ऋतु के पूर्व मई जून मे बहुत से क्षेत्रों में भूमि तैयारी व्यवस्था भी प्रारंभ हो जाएगी एस डी ओ तरुण तिवारी आगे बताते है कि हमारे बहुत से प्लांटेशन बेहतर स्थिति मे है इसका उदाहरण देखना है तो मुरा ग्राम मुख्य सड़क मार्ग स्थित वन अनुसंधान विस्तार वन मंडल का पचास हेक्टेयर क्षेत्र मे लगभग दस हेक्टेयर भूभाग क्षेत्र स्थित अट्ठाइस वर्षीय सागौन प्लांटेशन देख सकते है  जिसकी अनुभूति किसी वन क्षेत्रों मे भ्रमण समतुल्य भान कराता है इन्होंने आगे बताया जहाँ अलग अलग क्षेत्रों में भिन्न भिन्न प्रजाति के मिश्रित पौधों की तैयारी नर्सरी में की जाती है जिसमें मुख्यतः पांच हेक्टेयर में आँवला बीस हेक्टेयर भूभाग में मिश्रित प्रजाति की किस्में मौजूद है पांच हेक्टेयर में ख्महार, एवं दस हेक्टेयर भूभाग में सागौन बीज से उत्पाद कर रूट शूट से तैयार किए जाएंगे उन्होंने बताया कि बीज गोढी जोरा उधान क्षेत्र   नर्सरी में शिड तैय्यार किया जाता है इसकी आयु के संदर्भ में एस डी ओ तरुण तिवारी  बताते है कि  सागौन का फल बगैर टिंटमेंट के उत्पाद नही किया जा सकता उसे बहुत से प्रोसेस से गुजरना पढ़ता है उन्होंने सागौन के बेहतर स्वस्थ्य बीज  की पहचन उसके कष्ठों में उभरे वलय धारी लहर से उसकी सटीक आयु सुनिश्चित कर आंकलन किया जाता है सागौन में यह प्राकृतिक प्रक्रिया एक वर्ष पश्चात उसके काष्ठों में वलय बनना प्रारंभ हो जाता है 

        अट्ठाइस वर्षीय सागौन प्लांटेशन के संदर्भ में चर्चा करने पर अनुसंधान विस्तार वन मंडल के उप वन क्षेत्र पाल  तेजा सिंह साहू बताते है कि ग्राम मुरा का कथित सागौन प्लांटेशन विभाग के लिए बहुत बढ़ी उपलब्धि है यही नही वर्ष 20-2021 का ग्राम छतौद का मिश्रित प्लांटेशन भी शत प्रतिशत स्थिति में सक्सेस है वहाँ जाने पर जब हमने उसकी स्थिति देखी गई तो विश्वास नही हुआ कि ये वही मिश्रित प्लांटेशन है जिसे हमारे सामनें पांच वर्ष पूर्व किया गया था हाल फिलहाल जब उसका मुआयना किया गया तो सभी पौधे लगभग बारह से चौदह फीट की ऊँचाई में अपना कद पार कर लहलहते हुए मस्ती में झूम रहे थे अप्रेल, मई की पैंतालिस डिग्री के झुलसा देने वाले तीव्र तापमान में भी उनकी हरियाली में कोई परिवर्तन नही दिखा इसकी वजह पूछने पर अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के नर्सरी प्रभारी वन क्षेत्र पाल तेजा सिंह साहू बताते है कि नियमित देख रेखा सुरक्षा एवं समय पर उपचार, केज्युवल्टी, सिंचाई इसका शत प्रतिशत सर्वाईव करना मूल कारण है ग्राम छतौद के अंतिम क्षेत्र के ओरेंज भूमि में दो भागों में पच्चीस हेक्टेयर भू भाग मे वर्ष 2020-2021 में 27500 मिश्रित प्रजाति के पौधे जिनमें मुख्यतः सागौन, नीम, बेहड़ा, आँवला, शिशु, बांस,इमली, कचनार, सहित अन्य पौधों का रोपण किया गया था जिसमें स्थानीय छतौद ग्रामवासी जिला पंचायत सदस्य स्वाति वर्मा के विशेष सहयोग प्राप्त मिलता रहा उन्होंने बताया नए पुराने सरपंच सदस्य सहित ग्राम क्षेत्र में कोटवार के मध्यम से मुनादी भी कराई जाती थी विशेष कर होली के समय विशेष निगरानी की जाती थी छतौद  प्लांटेशन के बारे मे उन्होंने आगे बताया कि एक बोर खनन किया गया था जिसके लिए विद्युत सौर ऊर्जा से लिया जाता था वर्तमान मे एक चौकीदार रात दिन निगरानी करता है इसका मुख्य कारण यह भी है कि चारो ओर लगाए गए फैनसिंग तार की चोरी एवं पौधों की नियमित सुरक्षा होती रहे 

             श्रमिकों के संदर्भ में पूछने पर अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के वनपाल गणेश राम वर्मा बताते है कि मुरा, माठ, ग्राम के श्रमिकों को लगातार रोजगार उपलब्ध कराया जाता है यदि कार्य अधिक होने पर मोहरेंगा ग्राम से अतिरिक्त श्रमिकों को बुलाया जाता है जिन्हे कलेक्टर मनरेंगा दर से भुगतान किया जाता है वन पाल गणेश राम वर्मा आगे बताते है कि स्थानीय नर्सरी में दस हेक्टेयर भू भाग मे पौधों की तैयारी की जा रही है जिसमें मुख्यतः नीम, टीकोमा, जामुन, गुलमुहर,इमली, कचनार, सागौन, बांस, अमरूद, लेमन ग्रास, कटहल, सितफल, शहतूत, दश्मत, पेल्टाफार्म, सिंदूरी, पीपल, अर्जुन, हर्रा,बेहड़ा, बादाम, काइत, बुहार का पेड़, नींबू, अनार, जैसी मिश्रित पौधे लगाने का लक्ष्य है जिसमें चालीस हजार पौधों का वितरण करना है तथा आगामी वर्ष के लिए अट्ठारह हजार पौधे वितरण का लक्ष्य दिया गया है जिसकी तैयारी जोर शोर से जारी है स्थानीय सिंचाई के लिए उन्होंने बताया एक बोर संचालित है जिससे मैनेज किया जाता है टैंकर के मध्यम से प्लांटेशन में सिंचाई की जाती है कुछ टंकियाँ नर्सरी में भी निर्मित है जिसमें पानी संचय किया जाता है वही उन्होंने बताया कि स्थानीय नर्सरी मे तीन चौकीदार है जो सतत निगरानी एवं सुरक्षा में लगे रहते है वही लगभग 22 श्रमिक नियमित वानिकी कार्यों में लगे रहते है यह संख्या समय अनुसार अधिक भी होती है लगातार ग्रीष्म ऋतु व वर्ष ऋतु से श्रमिकों के बचाव के लिए शेड निर्माण का प्रस्ताव दिया गया है


 
       
 अनुसंधान विस्तार वन मण्डल के मूरा नर्सरी के प्रभारी सूर्यकांत भू आर्य एवं उनके सहयोगी विजयासन प्रसाद साहू बीज उधानिकी क्षेत्रों प्रभारी ने बताया कि स्थानीय नर्सरी में लगातार बीज सहित रूट शूट एवं अन्य प्रजाति के पौधों का लगातार तैयारी चल रही है क्योंकि दो माह बाद वर्षा ऋतु प्रारंभ हो जाएगा उसी समय बहुत से सामाजिक शैक्षणिक एवं उद्योगिक  घरानों द्वारा पौधा रोपण  की मांग की जाएगी इसके लिए द्रुत गति से बीज पौधा रोपण कार्य जारी है ताकि निर्धारित अवधि में मांग पूरी की जा सके

 इसके लिए स्वस्थ्य पौधों की आपूर्ति हेतु उनका भौमिक आहार खाद आवश्यक होता है जो केवल जैविक खाद के मध्यम से ही प्राप्त संभव है  मुरा नर्सरी प्रभारी सूर्यकांत भू आर्य  बताते है कि इसके लिए हमने नई तकनीक का प्रयोग कर रहे है टंकी में वर्मी कंपोस्ट खाद निर्माण करने की बजाए हमने दस हेक्टेयर के अधिकांश क्षेत्रों में सागौन सूखे पत्तो के उपर कुट्टी बना कर गोबर सना कर , पीसी हल्दी का छिडकाव, गाजर  घास, काली उपजाऊ मिट्टी,  सूखे पैरा के अवशेष, कृषि अवयव के अवशेष, स्वस्थ केचुआ खाद, का समिश्रण कर उसे ढंक कर बराबार पानी डालते हुए नमी बनाए रखा जाएगा ताकि खुले क्षेत्रों में केंचुआ के लगातार उथल पुथल करने से देढ़ से दो माह में ही चाय पत्ती समान उर्वरा युक्त खाद प्राप्त होगा 


          मुरा नर्सरी प्रभारी सूर्य कांत भू आर्य  इसका खुलासा करते हुए आगे बताते है कि इसके दो लाभ यह मिलेगा कि सागौन पेड़ के खुले क्षेत्र में जब वर्मी कंपोस्ट खाद निर्माण से उसके जड़ मे स्वमेव खाद अवशोषित करने से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाएगी तथा सागौन सहित अन्य पौधे अपनी दोगुनी रफ़्तार से ऊर्जा प्राप्त कर ग्रोथ करने लगेंगे और यह सत्य भी है अपने उत्पाद को अधिक से अधिक उपजाऊ बनाने के लिए कृषक नाना प्रकार के उपाय करते है यही नई सोच कुछ नया करने का जज्बा ने मुरा नर्सरी प्रभारी सूर्यकांत भू आर्य ने भी किया क्योंकि किसी ने सही कहा कि आवश्यकता ही अविष्कार कि जननी है जिसे उसने कर दिखाया