शनिवार, 27 जुलाई 2024

छ्ग प्रदेश का अव्वल दर्जे का बागबाहरा खुर्द नर्सरी

 छ्ग प्रदेश का अव्वल दर्जे का बागबाहरा खुर्द नर्सरी


अलताफ़ हुसैन द्वारा 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)  नर्सरी अर्थात वह स्थान जहाँ बीज, से पेड़-पौधों को अंकुरित कर उसके विकास और ग्रोथ के लिए जलवायु, मिट्टी, आधुनिक,खाद, से उनके सघन देखरेख करना एवं लाखों की संख्या मे अबोध शिशु की भाँति उन पौधों का लालन,पालन करने की जगह ही नर्सरी कहलाता है वैसे तो छग वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मे अनेक भिन्न भिन्न 29 से अधिक वन मंडल कार्यालय स्थलों मे एक से बढ़कर एक आधुनिक नर्सरी का सफल संचालन एवं संपादित हो रहा है जिनमे हाइटेक नर्सरी के अलावा ग्रीन हाउस, जिसमे समान्य तापमान के साथ नर्सरी भी संचालित है परंतु महासमुंद वन मंडल क्षेत्रफल के हिसाब से सर्वाधिक बड़ा बागबाहरा परिक्षेत्र अपनी अनेक जैव विविधता,विस्तृत संसाधन,वन क्षेत्र के चारो ओर धार्मिक आस्था का केंद्र होने से इसकी पृथक पहचान निर्मित किए हुए है जो बागबाहरा परिक्षेत्र कार्यालय से मात्र पांच किलोमीटर के दूरी पर बागबाहरा खुर्द नर्सरी का सफल संचालन, एवं संपादान विगत कुछ वर्षों से किया जा रहा है जहाँ की नर्सरी के पौधे संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश मे बहुत ज्यादा लोकप्रिय माने जाते है एक प्रकार से बागबाहरा खुर्द नर्सरी छोटे भू भाग मे बड़ा धमाका के साथ बड़ा कार्य कर रहा है यह कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति वाली बात नही है        


  इस संदर्भ मे महासमुंद वन मण्डलाधिकारी पंकज राजपूत से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश मे बागबाहरा खुर्द जैसी ऐसी नर्सरी देखने को नही मिलेगा जहाँ पर दस से पंद्रह फीट ऊँचाई वाले भिन्न भिन्न प्रजाति के स्वस्थ्य पूर्ण पौधे दृष्टिगोचर होते हुए एक ही स्थान में नही दिखाई देंगे एक प्रकार से बागबाह्ररा खुर्द  नर्सरी के पौधे संपूर्ण प्रदेश के नर्सरी मे एक अलग ही पहचान निर्मित किए हुए है महासमुंद वन मंडलाधिकारी पंकज राजपूत आगे बताते है कि वर्ष 2017-2018 से उक्त नर्सरी का प्रारंभ तत्कालिक अधिकारियों द्वारा  किया गया था परंतु पांच छ वर्षों मे ही यहाँ के पौधे प्रदेश भर के वन क्षेत्रों, सहित पथ रोपण, खेत खलिहान, शाला कॉलेज परिसर, हाट बाजार, नगर पालिका, ग्राम पंचायतों के बंजर भूमि मैदानी भाग मे लहलहा रहे है और प्राकृतिक हरियाली का संदेश दे रहे है महासमुंद डीएफओ पंकज राजपूत आगे बताते है कि इस वर्ष बागबाहरा खुर्द नर्सरी मे त्रिवर्षीय पौधों का रोपण वर्ष 2021-2022 मे लगभग 5 हेक्टेयर भूमि मे एक लाख मिश्रित प्रजाति के पौधों का रोपण मनरेगा के तहत किया गया था जहा पर आसपास के तीस से उपर श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया तथा समय अनुसार श्रमिकों की संख्या मे कम ज्यादा किया जाता रहा है बागबाहरा खुर्द के उक्त नर्सरी मे त्रिवर्षीय नर्सरी निर्माण के पीछे महासमुंद वन मंडलाधिकारी पंकज राजपूत का कथन है कि छोटे मंझोले पौधों के  वितरण रोपण  स्थल मे बहुत सी समस्या खड़ी हो जाती है पश्चात रोपण से उनके ग्रोथ मे समय लगता है तथा प्रकृति आपदा जैसे असमय  की हवा, तूफान, या आम जन के रोपण की सुरक्षा मे कोताही अथवा चूक की वजह से पशुओं की चराई से उनके क्षतिग्रस्त होने पर इनके अस्तित्व पर खतरा मंडराता रहता है  इससे अनेक पौधे बढ़ने से  पूर्व ही ज़मींदोज होकर समाप्त हो जाते है इससे प्रकृति, एवं पर्यावरण का विस्तार नही हो पाता और प्रति वर्ष पर्यावरण, हरियाली प्रसार के लिए शासन द्वारा करोडो रुपये लगाकर विभाग द्वारा आम जन को निःशुक्ल पौधे वितरण कर  रोपे जाने वाले लाखों पौधे असुरक्षा, देखरेख के अभाव मे खरपतवार के मानिंद प्रायः लुप्त हो जाते है उन्होंने बताया बागबाहरा खुर्द नर्सरी का यह त्रैवार्षिकी नर्सरी जिसकी औसतन ऊँचाई दस से पंद्रह फीट पौधे स्वस्थ्य पूर्ण ऊँचाई लिए हुए है जो हमारे महासमुंद वन मंडल के अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्रा के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है तथा  निः शुल्क वितरण वाले ऐसे ऊँचाई वाले स्वस्थ्य पौधे के रोपण से भी यहां का आब ओ हवा वातावरण हरीतिमा युक्त  निर्मित होगा श्री पंकज राजपूत आगे बताते है कि सर्वहारा वर्ग जिनमे ग्रामीण, ग्राम पंचायत के सदस्य, जन प्रतिनिधि, स्कूल कॉलेज के प्रतिनिधि, एवं सामाजिक सस्थानो द्वारा निः शुल्क पौधे लेकर एक पौधा मां के नाम योजना का भरपूर लाभ उठा रहे है जिस तरह सुबह से संध्या तक से बाग बाहरा नर्सरी मे पौधा लेने के लिए मेला समान आम जन की भीड़ लगी रहती है उसे देखते हुए शीघ्र ही नर्सरी के पौधे समाप्त न हो जाए ऐसा प्रतीत होता दिखाई पड़ रहा है मगर इसके बावजूद भी नर्सरी मे नव पुलकित पौधों का रोपण जारी है जो चार से पांच फीट पौधे ग्रोथ कर चुके है श्री राजपूत ने आगे बताया कि संपूर्ण बीज का चयन वे स्वयं उनके द्वारा किया जाता है


 वही उपवन मंडलाधिकारी वहिद खान बताते है कि नर्सरी का निरंतर मॉनिटरिंग की जाती है तथा किसी भी प्रकार की कमोबेश होने पर तत्काल उन कमियों को दूर किया जाता है किसी भी नर्सरी का सर्वाधिक आवश्यकता पर्याप्त जल माना जाता है इसके लिए बागबाहरा खुर्द नर्सरी लक्की माना जाता है यहां का जल स्त्रोत इतना अधिक है कि 47 डिग्री सेल्सियस भीषण गर्मी मे भी जल की कमी नही हो पाती और संपूर्ण नर्सरी की भरपूर जल पिपासा उसी ट्यूब वेल के मध्यम से आपूर्ति की जाती है कहने को पांच हेक्टेयर भू भाग नर्सरी मे तीन ट्यूब वेल लगाएं गए है जो एक बड़े टंकी मे संग्रहित किया जाता है उसमे ही पाइप के मध्यम से  सड़क के अगल बगल दोनों स्थानों के नर्सरी मे जल सप्लाई से सिंचाई की जाती है महासमुंद उप वन मण्डलाधिकारी वहिद खान आगे बताते है कि नर्सरी मे लगे पौधे अब सघन वन सदृश्य दिखाई पड़ रहे है तथा लगातार मांग के अनुरूप पौधों का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है हमारे यहाँ सभी मिश्रित प्रजाति के पौधे यहाँ उपलब्ध है उनका दावा है कि जो पौधे प्रदेश भर के नर्सरी में कहीं नही मिल सकता वह बागबाहरा खुर्द नर्सरी मे बड़ी सहजता से प्राप्त हो सकता है  महासमुंद एसडीओ वाहिद खान का कथन है कि लगातार पौधे समाप्त होने की स्थिति मे मदर बेड मे पुनः रोपण कार्य बारहमासी द्रुत गति से जारी रहता है एक फीट की ऊँचाई आने तक उन्हे काले प्लास्टिक बैग मे काली  मिट्टी और दवा खाद मे उपचारित कर उसका रोपण किया जाता है पश्चात पृथक बेड मे पॉलीथीन बैग वाले पौधों को रख कर नियमित सुरक्षा देखरेख मे प्रतिदिन सिंचाई की जाती है दो से तीन माह पश्चात किशोर से युवा अवस्था मे पौधे ग्रोथ करने लगते है तथा अन्यंत्र स्थल मे उनका रोपण किया जा सकता है 


 इसके लिए परिक्षेत्राधिकारी समय समय पर मॉनिटरिंग कर नर्सरी की व्यवस्था पर नज़र जमाए रखते है बागबाहरा खुर्द नर्सरी मे वर्ष 2021-2022 मे रोपे गए पौधे इस वर्ष 2024 मे समय सीमा पर त्रि वर्षीय पौधों की हरियाली देख कर  बागबाहरा परिक्षेत्र के परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव काफी अल्हादित और गदगद है तथा दस से पंद्रह फीट ऊँचाई वाले पौधे देख कर समस्त क्षेत्र से जबरदस्त मांग बड़ी है बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव बताते है कि नर्सरी का लालन पालन करने मे एक शिशु की भाँति देखरेख करना पड़ता है समय पर मदर बेड से शिफ्टिंग करना निंदाई गुड़ाई, दवा,खाद, उपचार, जिनमे यूरिया, डी.ए.पी. खाद काली मिट्टी, रेती, गोबर खाद, का मिश्रण कर पॉलीथीन बैग में पौधा प्रति रोपण कर हस्तांतरित किया जाता है 


तथा नियमित सिंचाई व्यवस्थ किया जाता है इसके लिए आस पास के तीन ग्राम के श्रमिकों द्वारा नियमित वानिकी कार्य संपादित किया जाता है जिसका एवज मे उन्हे कलेक्टर दर पर 243 रुपये का पारिश्रमिक  भुगतान मनरेगा के तहत प्रदाय किया जाता है बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव आगे बताते है कि सिंचाई व्यवस्था हेतु  टंकी नुमा साढे सात मीटर मे तलघर निर्मित किया गया है जहाँ तीन  बोर का पर्याप्त जल संग्रहित किया जाता है पश्चात टिल्लू पंप के मध्यम से सभी वानिकी नर्सरी क्षेत्र मे  पाइप लाइन से सिंचाई की जाती है बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव ने आगे बताया कि पांच हेक्टेयर  क्षेत्र मे अनेक नर्सरी मे परंपरागत वानिकी वाले पौधों का रोपण किया गया है


 परंतु खास बात यह है कि बागबाहरा खुर्द नर्सरी मे विलुप्त हो रहे अनेक प्रजाति के पौधों का रोपण जिनमे फलदार, फुलदार, सायादार, औषधि युक्त पौधे रोपे गए है  इनमें मुख्यतः आम, जाम, जामुन,चार, कुलियार,आँवला, बादाम, काजू,अनार, कुसुम,मदार, कुल्लू, मूंगा, रीठा, हर्रा, बेहड़ा,नीम, इमली, गंगा इमली, कटहल, नींबू,अर्जुन,पपीता, रक्त चंदन, सफेद चंदन,स्पेथोडीया,अकोल,बरगद, पीपल, प्रमुख रूप से उपलब्ध है


 बागबाहरा रेंजर लोकनाथ  ध्रुव आगे बताते है कि यहाँ नर्सरी मे वे पौधे जो कही अन्य नर्सरी मे नही मिलते वे यहां सहजता से उपलब्ध मिल जाते है उन्होंने बताया कि एक प्रकार से पांच हेक्टेयर छोटे भूभाग स्थान पर यहां बड़ा धमाका है इसके लिए भविष्य मे और विस्तार किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है यहाँ की समुचित व्यवस्था का प्रभार डिप्टी रेंजर मोती लाल साहू द्वारा किया जाता है साथ ही वन रक्षक तुलेश्वर् यादव का महत्व पूर्ण योगदान है जिनके देख रेखा मे नन्हे कोमल पौधे आकार लेकर फल फूल रहे है जो बागबाहरा पारिक्षेत्र के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है

गुरुवार, 18 जुलाई 2024

पाना बरस के मोहला जिला कार्यालय बनने से अव्यवस्था बड़ी-कर्मचारी हो रहे परेशान

 पाना बरस के मोहला जिला कार्यालय बनने से अव्यवस्था बड़ी-कर्मचारी हो रहे परेशान

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छ्ग प्रदेश मे बहुत से जिला निर्माण के परिसिमन पश्चात नवीन कार्यालय बनाए जाने से बहुत सी जटिल समस्याओं का सामना कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है जिसका सीधा अपवाद राजनांदगांव कार्यालय स्थित  वन विकास निगम पाना बरस परियोजना मंडल का स्पष्ट उदाहरण दिखाई पड़ रहा है जहाँ के कर्मचारी सहसा नवीन जिला मोहला मानपुर मे कार्यालय स्थानांतरण से उनके समक्ष राजनांदगांव से मोहला स्थित कार्यालय तक आवगमन की समस्या तो बनी ही हुई है वही आवास निवास की समस्या भी खड़ी हो गई है वर्तमान पाना बरस परियोजना मंडल कार्यालया राजनांदगांव के कर्मचारियों का कथन है कि वर्ष 2022 से जब प्रथम मोहला मानपुर कार्यालय का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था तभी वन विकास निगम के नवीन जिला कार्यालय मोहला मे भवन का निर्माण किया जाना जरूरी था परंतु तत्कालिक समय इसका निर्माण न कर इसी माह जुलाई 2024 मे आनन फानन कार्यालय निर्माण की हिटलरी फरमान से अनेक समस्या का सामना निगम कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है इसके लिए वन मंत्री से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित मे आवेदन दिया जा चुका है जबकि बता दें कि वन विकास निगम के नवीन जिला मोहला कार्यालय भवन  एक पुराने जर्जर गोदाम मे संचालित किया जा रहा है जहाँ की छत वर्षा मे टपक रही है 

      उल्लेखनीय है कि वन विकास निगम पाना बरस परि योजना मंडल के नवीन जिला कार्यालय मोहला मे संचालित की जा रही है वहां किसी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नही है कर्मचारी प्रति दिन अपने संसाधन से आवागमन कर रहे है जिन कर्मचारी के पास साधन नही है उसे राजनांदगांव  वापसी हेतु संध्या छ बजे के पश्चात कोई भी बस अथवा संसाधन की सुविधा उपलब्ध भी नही है वही किराए का मकान भी नही मिल रहा है ऐसे मे पचहत्तर  किलो मीटर का प्रतिदिन आवागमन करना बड़ा दुरूह हो गया है वन विकास निगम कर्मचारियों ने बताया कि पारिवारिक व्यवस्था भी छिन्न भिन्न हो गई है परिवार को यहाँ शिफ्ट नही किया जा सकता क्योंकि उनके शैक्षणिक कार्यों मे बाधा उत्पन्न हो रही है  साथ ही आवागमन जैसी बाधाओं से भी कार्यालयीन कार्यों मे सुचारु ढंग से कार्य नही हो पा रही है परंतु हिटलरी फरमान के चलते बगैर किसी सुविधा के  पानाबरस परियोजना मंडल कर्मचारियों को झोंक दिया गया इसके लिए भले ही कितनी भी विपदाओं से कार्य प्रभावित होता रहे

       इस संदर्भ मे वन विकास निगम कर्मचारियों का कथन है कि वविनि. छ्ग प्रदेश के बहुत से परियोजना मंडल कार्यालय मेआज भी लंबी दूरी वाले क्षेत्र से ही कार्य सुचारु  रूप से कार्यालय संचालित हो रहे है उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया बार परि योजनामंडल आज भी रायपुर स्थित देवेंद्र नगर से संचालित किया जा रहा है जबकि उसे महासमुंद जिला मे रहना चाहिए था सूरजपूर, बलाराम पुर को अंबिकापुर से संचालित किया जा रहा है अंतागढ, भानुप्रताप पुर को कांकेर  से संचालित किया जा रहा है फिर राजनांद गांव परि योजनमंडल के साथ ही दोयम दर्जे का सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? नवीन मोहला जिले मे इतनी अव्यवस्था होने के बावजूद भी राजनांद गांव  पानाबरस परीयोजना मंडल कार्यालय को ऐसे निर्जन स्थल मे जहां कोई सुविधा उपलब्ध नही है उसे क्यों शिफ्ट किया जा रहा है? इसके पीछे  किसी खास षडयंत्र की बु आना माना जा रहा है जबकि दबी ज़ुबान मे यह बात भी कही जा रही है कि राजनांद गांव स्थित 65 लाख का सर्व सुविधा युक्त निगम  भवन मे आई पी डी योजना कार्यालय बनाए जाने की सुगबुगाहट सूत्रों ने दावा किया है जहाँ दल्ली राजहरा एवं भिलाई जैसे  संयंत्र की योजनाओं का क्रियानव्यन किया जाएगा जबकि आई पी डी योजना कार्यालय एवं पाना बरस परियोजना मंडल का एक साथ सफल संचालन राजनांद गांव से भी किया जा सकता है परंतु उपर बैठे उच्च अधिकारी नवीन मोहला मानपुर जिला मे शिफ्ट करवा कर नए भवन इत्यादि का निर्माण करवा कर भ्रष्टाचार को अंजाम देंगे गौर तालाब है कि सर्वाधिक राजस्व देने वाला बार नवापारा परियोजना मंडल कार्यालय की बड़ी दयनीय स्थिति मे पहुँच चुकी है आज भी वहाँ के कार्यालय बड़ी चिंताजनक बनी हुई है उस पर आज तक कोई भी नवीन निर्माण भवन नही किया गया जबकि बहुत से पूर्व प्रबन्ध संचालकों ने भी इसके नवीन भवन निर्माण की बात कही गई थी परंतु सिर्फ बार परियोजना मंडल कार्यालय की यह योजना केवल कागजों के धरातल मे सिमट कर दम तोड़ चुकी है. 

सोमवार, 8 जुलाई 2024

भू जल, संरक्षण मृदा उपचार के लिए खैरागढ़ वन मंडल का बेहतर प्रयोग

 भू जल, संरक्षण मृदा उपचार के लिए खैरागढ़ वन मंडल का बेहतर प्रयोग 

अलताफ़ हुसैन की कलम से 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)  वन विभाग का मूल नाम के अनुरूप व्यापक बदलाव के  साथ अब वन विभाग का परिवर्तित नाम वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग कर दिया गया वन विभाग के पीछे जलवायु परिवर्तन करने की मंशा के पीछे बहुत बड़ा कारण भी अब दिखाई देने लगा है भारत देश ही नही बल्कि वैश्विक परिदृश्य मे लगातार बढ़ रहे धूल, धुंए, रसायनिक तत्वों के घुलनशील वायु की वजह से जल,जमीन,एवं प्राकृतिक, पर्यावरण, पूरी तरह से प्रदूषित हुआ है परिणामतः आकाशीय ओजान परत मे बड़ा छिद्र होने से पैरा बैंगनी के तिक्षण किरणों का दुष्प्रभाव  सीधे सारे मानव जीवन, सहित जलचर,नभचर, पशु पक्षी यहाँ तक पेड़,पौधे,वन, रहन सहन, एवं जलवायु, वातावरण मे व्यापक परिवर्तन हुआ है समान्य वर्षा के असंतुलित बेमौसम चक्र , ठंड की न मिलने वाली शीतलता का अहसास  लगभग विलुप्ततः के मुहाने मे  आकर खड़ी हो चुकी है ग्रीष्म ऋतु का यह हाल हो गया है कि जहाँ सदैव बारहमासी पुष्प की गमक से समान्य से मध्यम वातवरण महका करता था 


 वहाँ ग्रीष्म ऋतु की तीक्षण तपिश की चुभन अब आम जन को बड़ी सहजता से बारहमाह महसूस की जाती है वर्षा ऋतु परिवर्तन के बदलाव मे काश्त कारों ने अपने अनाज के खेती किसानी हेतु रोपित किए जाने वाले फसल काल चक्र मे व्यापक बदलाव कर दिया गया है उस पर भी खंड वर्षा से माकूल खेती किसानी नही हो पाती और आकाल दुकाल के प्राकृतिक आपदा का खामियाजा उन्हे भुगतना पड़ता है परिणामतः कई किसान कर्ज न देने की वजह से अकाल मृत्यु का निवाला बन जाते है या फिर डायन महंगाई के सामने दो जून के लिए आम जनता को अन्न व्यवस्था करने के लिए संघर्ष करते जूझना पड़ता है 


मानव समाज के लिए यह विडंबना शनैः शनैः सुरसा की भाँति मुह खोल कर खड़ी होते जा रही है इसका मूल कारण वनों का अनवरत विदोहन और हास होना माना जा रहा है इस संदर्भ मे एक वन विभाग के अनुभवी सेवानिवृत अधिकारी का कथन है कि आज हम पेयजल के लिए बंद बोतल पानी पैसे दे कर पी रहे है जो जल की अल्पता की प्रारंभिक शुरुआत हो चुकी है भविष्य मे वह दिन दूर नही जब हम जिस प्रकार बंद बोतल पानी क्रय कर पी रहे है वैसे ही वनों के लगातार विदोहन से ऑक्सिजन खरीद कर जीवन निर्वहन करना पड़ेगा  इसका साक्षात उदाहरण कुछ वर्ष पूर्व कोरोना काल मे पीड़ित मानव समाज ऑक्सिजन  के लिए तिल तिल कर के सांस के एक दम लेने के लिए मर रहा था वैसे ही वह समय भी आएगा जब ऑक्सिजन के लिए हम पीठ मे सांस लेने के लिए सिलेंडर लाद कर जीवन व्यतीत करने विवश होना पड़ेगा तब ही संपूर्ण मानव समाज को पेड़ पौधे, और वनों की महत्वता समझ आएगी यही वजह है कि वन विभाग ने उस मूल महती कारणों को ध्यान मे रखते हुए अपने मूल वन विभाग  नाम के साथ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को जोड़ कर वनों की हरियाली एवं जलवायू क्षेत्र मे द्रुत गति से जन कल्याणकारी  कार्य योजना बना कर संपूर्ण मानव समाज के लिए हितकारी  कार्य कर रहा है इस संदर्भ मे आम जन की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए उन्हे निःशुल्क लाखों पौधे वितरण कर धरती मे हरित क्रांति लाने प्रयासरत है ताकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र मे हरे भरे पेड़ पौधों के मध्यम से हरियाली, जलवायु संरक्षण कर स्वच्छ,एवं स्वस्थ्य पूर्ण वातावरण निर्मित किया जा सके 


  छ्ग प्रदेश का पूर्व मे दुर्ग जिले के अंतर्गत छोटी सी रियासत खैरागढ़ नाम से ही रजवाडा होने का आभास करवाता है वर्ष2021- 2022 मे खैरागढ़ नव निर्मित जिला के रूप अस्तित्व मे आया जहाँ चारों ओर सघन वन क्षेत्र के बावजूद भोगौलिक स्थिति मे ऊँचे नीचे पहाड़ और असमतल भूमि  से यहाँ का जल स्तर कभी एक स्थान पर समान्य रूप से टिक नही पाता और न ही संग्रहित हो पाता है कथन आशय यह है  कि  भू जल की भूगौलिक स्थिति उतनी सही नही मानी जाती जैसा क्षेत्र की व्यवस्था के अनुकूल होना चाहिए इसके लिए नव निर्मित खैरागढ़ वन मंडल के वर्तमान  वन मंडलाधिकारी आलोक कुमार तिवारी (भावसे) जो हमेशा कार्यों के प्रति निष्ठावान, एवं समर्पित रहे है तथा नवीन प्रयोग के साथ  जहाँ जहाँ सेवा काल मे जिस क्षेत्र मे रहे वहाँ जन कल्याणकारी योजनाओं से वे इतिहास रचने का प्रयास करते रहे है 
उनसे वनों की भैतिकी जलवायु हरियाली के संरक्षण, संवर्धन, को लेकर उनसे खैरागढ वन क्षेत्र को लेकर चर्चा की गई तो उन्होंने भू जल संरक्षण के लिए नवीनतम तकनीक  कार्यों की जानकारी प्रदान की उन्होंने बताया खैरागढ़ के वन खंड  लछना कक्ष क्रमांक 262  टेमरी कूप मे 267 से 180 हेकटेयर  क्षेत्र मे भू जल संग्रहण संरक्षण प्रबन्धन के अतिव्यापी कार्य किये गए है  भू मृदा की लगातार अवांछनीय परत के  वजह से जल संरक्षण मे बहुत सी कठिनाई आती थी और वर्षा जल का समुचित संरक्षण एवं संग्रहण नही हो पाता जिसके लिए मानव जीवन सहित पशु पक्षी वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की बड़ी समस्या तो बनती ही है साथ ही वनों के पेड़ पौधों का असमय हरियाली भी विलुप्त हो जाती है तथा बहुत से वनों के पौधे बीमार और निःशक्त प्रतीत होते है असमय खोखले अस्वस्थ पेड़ हवा के हल्के झोंके के बहाव मे ज़मीदोज हो जाते है साथ ही खेती किसानी  मे भी इसके दुष्प्रभाव परिलक्षित होते है


खैरागढ़ वन मंडलाधिकारी आलोक तिवारी भू मृदा के संदर्भ मे आगे बताते है कि भू मृदा भाग मे छ प्रकार के मृदा पाए जाते है इसको तकनीक सहायता से छिलाई कर समतल स्वरूप मे लाया जाता है जिससे वर्षा के जल कटाव की स्थिति बाधित होती है और जल संरक्षित होकर भू गर्भ मे अवशोषित होते रहता है डी एफ ओ खैरागढ़ आलोक कुमार तिवारी आगे बताते है कि भू मृदा  पृथ्वी के ऊपरी सतह पर मोटे, मध्यम और बारीक कार्बनिक तथा अकार्बनिक मिश्रित कणों से बनता है जो 'मृदा' मिट्टी कहलाता हैं। मृदा की ऊपरी सतह पर से मिट्टी हटाने पर प्राय:जो परत प्राप्त होती है उसे शैल चट्टान कहते है। कभी कभी थोड़ी गहराई पर ही चट्टान मिल जाती है। 'मृदा विज्ञान'  भौतिक भूगोल की एक प्रमुख शाखा है जिसमें मृदा के निर्माण, उसकी विशेषताओं एवं धरातल पर उसके वितरण का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता हैं। पृथ्वी की ऊपरी सतह के कणों को मृदा मिट्टी कहा जाता हैं वैसे तो छः प्रकार के मृदा पाए जाते हैं


जलोढ़ मृदा. काली मिट्टी/रेगुर मृदा.लाल मिट्टी और पीली मृदा तथा पर्वा या राकर.लैटेराइट,मृदा .मरुस्थली मृदा.वन मृदा होती है खैरागढ़ मे स्थित चार रेंज क्षेत्र मे 300 किलोमीटर से लेकर 80 किलो मीटर तक भिन्न भिन्न व्यापक भू मृदा कार्य कराए  गए है जिसमे 30 सेमी.से लेकर 40 सेमी. एवं कहीं कहीं 1मीटर से उपर भी मृदा उत्खनन कार्य संपादित किए गए है उन्होंने आगे बताया कि चार परिक्षेत्र रेंज मे इस दो माह मई जून तक संपादित होने कार्य हेतु आसपास ग्राम क्षेत्र के 300 से अधिक ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मूलक कार्य उपलब्ध कराया गया 




        खैरागढ़ वन मंडलाधिकारी आलोक कुमार तिवारी ने आगे बताया कि भू मृदा जल संरक्षण हेतु आधुनिक नेटवर्किंग  तकनीक गूगल का प्रयोग भी किया गया टेमरी परिक्षेत्र मे समुद्र की ऊँचाई 495 मीटर से 655 मीटर नाप कर पिरामिड नुमा (ए फ्रेम)  खिचकर औसत ढाल का निर्माण किया गया जिसकी ऊँचाई 842 मीटर चिल्फी घाटी के समान है इसमें कुछ नई एवं पुरानी प्राचीन पद्धति का प्रयोग भी किया गया जैसे चेक बोल्डर को करीने से बिछा कर लोहे के जाली से निर्माण कर गली और नाली का निर्माण किया गया जहाँ तालाब नुमा स्थल मे वर्षा जल संग्रहित किया जा सके 
उसी प्रकार मिट्टी एवं गिट्टी आदि से सुरक्षा की दृष्टिकोण से भू मृदा कार्य संपादित कर तीन से चार फीट गहराई वाली वुड गली नाले का निर्माण किया गया है ताकि तालाब पोखर मे वर्षा जल चिर काल तक संग्रहित रह सके तथा इसका लाभ वनों के पेड़ पौधों मे लंबे समय तक नमी बनी रह सके वही वनक्षेत्र के रिक्त मैदानी भू भाग मे आयाताकार, त्रिभुजाकर,चंद्राकार,गोलाकार, तीन से चार फीट गड्ढों का निर्माण कर जल संरक्षण कार्य किए गए है जहाँ वर्षा पश्चात जल संरक्षित हो रहा है  अगस्त 2024 के  रिमझिम सावन माह मे खैरागढ़ डीएफओ  आलोक कुमार तिवारी साहब स्वयं छाता लेकर वन क्षेत्रों मे नव निर्मित भू मृदा संपादित कार्यो का पुनः निरक्षण कर सुध ली तथा एक एक कार्यों का बड़ी बारीकी से निरक्षण कर  संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि प्राचीन पेड़ के आसपास भी यही प्रक्रिया अपनाई गई है इसका परिणाम यह आने लगा है कि वन्य प्राणियों को  पेयजल की समस्या से निजात मिलने लगी है   साथ ही आस पास के वन ग्राम क्षेत्र मे भी खेती, किसानी, फसल के लिए लाभ प्राप्त हो रहा है 


       खैरागढ़ डी.एफ.ओ.आलोक कुमार तिवारी  बताते है कि भू मृदा वन भूमि जो लेट्राइट पथरीली या अतिसंवेदन शील क्षेत्र है वहाँ संरचना उन्नयन कार्य किए गए है जिनमे कक्ष क्रमांक 262  वनखंड लछ्ना जिसका क्षेत्रफल 267.180 हेक्टेयर है दक्षिण मलौद उप वृत सांकरी एवं उपचार क्षेत्र टेमरी मे आता है जहैं गैबियन संरचना, एल.बी. सी.डी. चेकडेम्, पत्थर के कंटूर बंड, संरचनाओ का पुनःरुत्पादन कार्य किया गया उन्होंने बताया कुल 14 ग्रीड मे सर्वेक्षण पश्चात पुनरुत्पादन की ग्रिड वैल्यू 6 प्राप्त हुई 

जिसकी  प्रति हेक्टेयर वैल्यू 64 है तथा कुल रकबा 267.180 हेक्टेयर कार्य किए गए है उन्होंने बताया कुल तीन एरिया का चयन कर उपचारित किया गया जिनमे रीज एरिया मे 5 से 7 हेक्टेयर क्षेत्रफल मे उपचार किया गया , हेड एरिया चोटी के प्रारंभिक समतली ढलानी क्षेत्र मे  रिल्स का निर्माण कर  अर्दन गली के मध्यम से उपचार किया गया , वही रिचार्ज जोन  एरिया,  यह क्षेत्र 04 ब्लॉक मे विभाजित कर  जिसका ढलानी क्षेत्र 20 से 22 प्रतिशत क्षेत्र होता है  ऐसे रिचार्ज जोन मे एस.सी.टी., सी.सी.टी. , एल बी.सी.डी. , बी.डबत्यु. सी.डी. , तकनीक के मध्यम से किया गया 




 खैरागढ़ वन मंडलाधिकारी  आलोक कुमार तिवारी  बताते है कि वर्षा पश्चात उपरोक्त कार्यों से आशातीत सफल परिणाम सामने आए है जगह जगह जल का संग्रहण परिलक्षित हो रहा है इसी जुलाई माह मे 12 हजार पौधों का रोपण स्थानीय रिक्त भू भाग मे स्कूली छात्र छात्राएं, जन प्रतिनिधि की गरिमामयी उपस्थिति मे एक पौधा माँ के  नाम कार्यक्रम के मध्यम से फलदार, फूलदार, सायादार, मिश्रित प्रजाति के पौधे लगाया गया है 
इसके अलावा वन के रिक्त भू भाग मे भी लाखों की संख्या मे वन क्षेत्र के पाए जाने वाले बीजों का क्रय कर बीजा रोपण संपूर्ण खैरागढ़ परियोजना क्षेत्र मे किया जाएगा  जो वर्षा ऋतु मे ही नैसर्गिक, प्राकृतिक रूप से आकार लेंगे उन्होंने बताया कि इस संपूर्ण कार्य मे वन एवं जलवायु विभाग के कर्मठ जुझारू अधिकारी, कर्मचारी, कम समय मे कार्य संपादित किए है उसके लिए उन्होंने सराहना करते हुए सभी को बधाई दी जिनमे मुख्यतः सर्व श्री, मोना महेश्वरी एस डी ओ खैरागढ़, अमृत लाल खूंटे, एस.डी.ओ.  गंडई ,  रमेश टंडन परिक्षेत्राधिकारी खैरागढ़ , अशोक वैष्णव परिक्षेत्राधिकारी छुई खदान, , सलीम क़ुरैशी परिक्षेत्राधिकारी गंडई / साल्हेवारा परिक्षेत्र   एन.आर.एम.इंजीनियर  छबिलाल साहू एवं शेख शफी वन रक्षक परिक्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा

गुरुवार, 4 जुलाई 2024

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए- छ्ग मुस्लिम महासभा

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए- छ्ग मुस्लिम महासभा


अल्ताफ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छ्ग प्रदेश सहित देश भर मे लगातार हो रही गौ तस्करी की आड़ मे मॉबलीचिंग के विरोध मे छ्ग मुस्लिम समाज द्वारा मुस्लिम महासभा  का आयोजन बैजनाथ पारा स्थित मुस्लिम हॉल मे किया गया जिसमे समाज के मस्जिद कमेटी के मुत्वली दरगाह के सदर खादिम,अंजुमनों के सदर वकील, पत्रकार, सहित बहुत से बुद्धि जीवी  वर्ग उपस्थिति होकर समाज के प्रति जागरूकता लाने अपने विचार व्यक्त किए इस अवसर पर राहिल राउफी ने कहा कि , शांति के टापू कहे जाने वाले छ्ग धान के कटोरे मे भी अब असमाजिक तत्व द्वारा आशांति फैलाने का प्रयास किया जा रहा है जिसकी रोकथाम के लिए हम यहाँ सद्भावना हेतु चर्चा के लिए यहाँ सब उपस्थित हुए है उन्होंने कहा कि बहु संख्यकों समुदाय की भावना को ध्यान मे रखते हुए भारत देश मे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए, साथ ही बहुत से बुचड खानों को तत्काल बंद करना चाहिए रहित राउफी ने आगे बताया कि छ्ग के बहुत से स्थानों पर बुलडोजर नीति परंपरा भी जारी किया गया है इस पर भी रोक लगाने पर चर्चा की जानी चाहिए गंडाइ छुई खदान से पधारे विचारक ने कहा कि सारे मुस्लिम एक जगह इकट्ठे होकर सामाजिक मुख्य धारा पे जूड़ कर प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकते है उन्होंने  भी गौ तस्करी बंद होने की बात कही है और अल कबीर जैसे बुचड खाने कंपनी बंद होना चाहिए उस नाम को बदल कर स्वयं अपना नाम रखना चाहिए अल कबीर और अन्य मुस्लिम नाम से कत्ल खाने रखे जाने से इससे अन्य धर्म के अनुयायीयों मे मुस्लिम समाज की  विकृत तस्वीर सामने आती है जिसका पुरजोर विरोध किए जाने की बात कही गई



 तनवीर अहमद साहब राज्ञनादगांव ने कहा गौ तस्करी कोई केवल मुस्लिम समाज के लोग ही करोबार नही करते है बल्कि अन्य द्वारा भी तस्करी की जाती है उन्होंने भी अल कबीर जैसे बुचड खाने पर प्रतिबंध लगाने पर जोर दिया   रायगढ़ से करीम भाई ने समरसता पर जोर देते हुए कहा हम अलग फिरको से न बांटे और एक इस्लामी परचम के तले एक हों तभी सब प्रेम इत्तेफाक से रह कर सामाजिक उन्नति और मुख्य धारा से जुड़ सकते है अनवर् हुसैन स्थानीय पार्षद ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मुस्लिम समाज संगठित होकर संविधान के दायरे मे न्याय की लडाई लड  सकता है शकील साजिद ने कहा गौ तस्करी बंद होना चाहिए सभी बुचड खाने को पूरी तरह बंद होना चाहिए उन्होंने कहा देश अखंड भारत होना चाहिए जहां अफगानिस्तान से लेकर सभी राज्य इसके अधीन हो तभी राष्ट्र निर्माण मे सहभागी बन सकते है  शहीद भाई हाई कोर्ट के वकील ने कहा मुसलमानों के अलावा सभी अन्य धर्म व्यक्ति संविधान कानून के खिलाफ कर्य करता है उसके लिए सब आवाज़ बुलंद करो कानूनी प्रक्रिया के तहत ही कार्य करें रायपुर जामा मास्जिद के सदर ने कहा कानुनी लडाई मे वकीलो की सहभागिता सुनिश्चित होना चाहिए ना इत्तेफाक होकर   सब संविधान के दायरे मे एक होना चाहिए दिल्ली से आए स्कॉलर  जनाब फाज़िल अहमद ने कहा राजनिति मे सहभागिता बहुत जरूरी है 


नबी ए करीम (स.अ.व.)फरमाते है की संख्या मायने नही रखता हौसले मायने रखता है उन्होंने आगे कहा एकजुटता से रहे तो

 मूसलमान एक बहुत बढ़ी ताकत बन सकता है मै सबका अव्हान करता हूँ जिस दिन दिल्ली मे अपने अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर पचास हजार से एक लाख मुसलमान खड़े हो जाए उस दिन कोई लीचिंग करने,आँख दिखाने की हिम्मत भी नही कर सकता उन्होंने कहा देश भी मे केवल मुस्लिम समाज ही अपनी लडाई न लड़े बल्कि पिछड़े दलित, आदिवासी की लडाई भी कांधा से कांधा मिलाकर साथ मे लड़े ईद मिलादउन्न नबी के सदर नौमान् अकरम ने   कहा

वकीलो की पृथक कोर कमेटी, बनाया जाना चाहिए ताकि संविधान की कानूनी लडाई  आगे लडी जा सके प्रदेश के सभी मस्जिदों मे सी सी टी वी कैमरा लगाएं नव जवानों को उनका किरदार बनाए नशे से दूर रहने की अपील भी की गई आरंग मर्डर केस के लिए 

हाई कोर्ट से लडाई लड़ने पर जोर दिया साथ ही  सीबी आई की मांग करने की बात भी कही गई इस मुस्लिम महा सभा के विशेष अवसर पर प्रदेश भर से जिसमे गरियाबंद धमतरी, राजनांदगांव,रायगढ़, कोरबा, महासमुंद, सहित

दूर दूर से मुस्लिम समाज के लोगों ने शिरकत की

रविवार, 23 जून 2024

आज़ाद अभिनय कार्यशाला नासिक में संपन्न हुआ

 आज़ाद अभिनय कार्यशाला 

नासिक में संपन्न हुआ


(फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)  रायपुर गम्मत नाचा की अपनी विशेष शैली है जो हास परिहास, हंसी ठिठोली,और  नाचा गम्मत् के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक,,एवं आर्थिक कुरीतियों  पर कटाक्ष करते हुए सीधे दर्शको के मर्म मस्तिष्क पर प्रहार करता है और उन्हे सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व्यवस्था पर हो रहे परिवर्तन, भ्रष्टाचार से आम जन को जागृत करने का प्रयास करता है 



इन्ही विषय को लेकर छ्ग रायपुर से गम्मत नाचा थिएटर के निसार अली एवं उनके इप्टा  सहयोगी द्वारा आजद  अभिनय कार्यशाला का आयोजन नासिक मे संपन्न हुआ इस अवसर पर मुंबई, पुणे, और नासिक के प्रतिभागी हस्ताक्षरों ने नाचा  गम्मत शिविर के शैली मे मराठी भाषा मे गड़बड़,,गपसप एवं धूर्त शिकारी, का मंचन पुणे, नासिक के विभिन्न स्थानों मे किया गया



 जहाँ इंडस्ट्रीयल क्षेत्र के प्रबुद्ध नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने नाचा गम्मात कार्यक्रम का भरपूर आनंद उठाया इस अवसर पर  बड़ी संख्या मे दर्शक उपस्थित रहे उनके इस प्रयास की भूरि भूरि प्रशंसा की इस अवसर पर इप्टा नासिक के रंगकर्मी तलहा विशेष रूप से उपस्थित थे दोनों ही नाचा गम्मत के मुख्य कलाकार रायपुर से निसार अली तथा नासिक से नागेश धुर्वे ने अभिनय को जिया जिनकी अदाकारी देखकर उपस्थित सभी दर्शक तालियों की गाड़गड़ाहट से उनका अभिवादन किया 

शनिवार, 22 जून 2024

सैटेलाइट,ड्रोन कैमरा एप के मध्यम से मुख्यालय मे देख सकेंगे वनों और वन्य प्राणियों की स्थिति

सैटेलाइट ड्रोन कैमरा एप के मध्यम से मुख्यालय मे देख सकेंगे वनों और वन्य प्राणियों की स्थिति(


अल्ताफ हुसैन द्वारा

(छ्ग वनोदय) आधुनिक राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब उन्नत तकनीक  विकसित विचार धारा के साथ नई उमंग को अंगीकार कर नवीनतम तकनीक का सही मूल्यांकन करते हुए उसका उपयोग कर एक नई इबारत के साथ नया इतिहास भी लिखा जा सकता है जिसकी शुरुआत  फोर जी फाइव जी  इंटरनेट ऑन लाइन जैसे संसाधन का आधूनिक  तकनिक का उपयोग अब आम व खास व्यक्ति से लेकर प्रत्येक शासकीय अर्द्ध शासकीय स्वायत सेवा संस्थान से  लेकर हर क्षेत्र मे बड़े जोर शोर से उपयोग किया जा रहा है जो मानव जगत के लिए बहुउपयोगी है इंटरनेट का आधुनिकीकरण उपयोग टी वी कमप्युटर्,लेपटॉप के स्क्रीन और मोबाइल के,  मध्यम से विश्व के किसी भी कोने मे परस्पर एक दूसरे व्यक्ति से आचार विचार, बातचीत कर, उन्हे देखा सुना एवं पढ़ा जा सकता है तब भला ऐसे इंटरनेट, आधुनिक संसाधन के उपयोग से छग प्रदेश का वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अछुता कैसे कैसे रह सकता है जिसकी शुरुआत विगत कुछ वर्षों से ही सही मगर उक्त संसाधनों का उपयोग बड़ी तेजी से विकसित हो रहा है जिसका परिणाम यह आने लगा है कि वर्तमान मे अब यहाँ मुख्यालय मे बैठे वरिष्ठ उच्च अधिकारी से लेकर बहुत से वन मंडल कार्यालय मे बैठे बैठे मीलों दूर संपादित होने वाले समस्त विकास कार्यों से लेकर प्रदेश के वन क्षेत्रों मे  विचरण एवं आवागमन करते  हाथी जैसे वन्य प्राणियों की लोकेशन के हिसाब से सटीक स्थिति, वनों मे लगने वाले दावनाल  की स्थिति जो जीपीएस  सहित ड्रोन कैमरा एवं अन्य इंटरनेट टीवी लेपटॉप, मोबाइल स्क्रीन के मध्यम से ही देख और बता सकेंगे जिससे बहुत सी भावी भयावह स्थिति की रोकथाम मे भी त्वरित कार्यवाही हो सकेगी साथ ही वन क्षेत्रों के वनों मे सुधार आएगी 



       यह अद्भुत, एवं अविश्वसनीय एप के निर्माण मे सहयोग किया है उत्साहित युवा, कर्मठ शील, जुझारू प्रवृत्ति सामाजिक समरस्ता के पैकर, कर्तव्य निष्ठ, कर्म को धर्म मानने वाले योगी, वन विभाग को नई दशा और दिशा देने वाले अथक प्रयास करने वाले जुझारू, साहसी अधिकारी वरुण जैन है जो 2017बैच के आई एफ एस  अधिकारी है रेंज ट्रेनिंग उनका परसगाँव मे हुआ 23 फरवरी 2023 मे वे गरियाबंद उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व प्रोजेक्ट मे उप निदेशक के पद पर विगत दो वर्षों से  गरियाबंद क्षेत्र मे अपनी सेवाए दे रहे है उनसे वन विभाग पर केंद्रित छत्तीसगढ़ वनोदय पत्रिका से विशेष चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि हम आधुनिक सैटेलाइट एवं ड्रोन कैमरा के मध्यम से वन्य प्राणी विशेष कर हाथी की निगरानी के लिए आटोमैटिक इंफोर्मेशन (A I) एवं एफएसआई.एस.तथा नोएडा बेस्ड स्टार्टअप कंपनी कल्पतरु के साथ साझेदारी कर यह हाथी मूवमेंट एप लॉन्च किया गया है जो ऑन लाइन अपडेट किया जाएगा इस एप के मध्यम से पूर्व अनुमान हो जाएगा कि क्षेत्र मे किस दिशा मे हाथी विचरण कर रहे है यही नही गरियाबंद उदंती सीतानादी के उप निदेशक वरुण जैन ने आगे बताया कि हाथी दल के लगातार कॉरिडोर क्षेत्र से हट कर किस विपरीत दिशा मे उनका मूवमेंट होगा वह भी जानकारी हमे  मिलती रहेगी इस हाथी ऐप के मध्यम से दस किलोमीटर पूर्व से हाथी दल की जानकारी मिल जाएगी तथा सभी हाथी मित्र दल के ग्रामीणों को मोबाइल नंबर से कॉल से या फिर एस.एम.एस. व्हाट्सएप के मध्यम से त्वरित जानकारी प्राप्त हो जाएगी ताकि समस्त मित्र दल आसपास के ग्रामीणों को अलर्ट कर सकेंगे गरियाबंद उदंती सीतानदी  अभ्यारण्य के उप निदेशक वरुण जैन आगे बताते है कि डेढ़ वर्षों से इस एप के मध्यम से अब तक गरियाबाद जिले मे किसी प्रकार की जान माल की क्षति नही हुई है उन्होंने आगे बताया कि इस हाथी मूवमेंट एप मे तीन माह अर्थात 90 दिन की जानकारी ज्ञात हो पाएगी उन्होंने आगे बताया चन्दा हाथी दल क्षेत्र मे विचरण कर रहा है या अन्य दल यहाँ सक्रिय है वह समय पर जनकारी प्राप्त होते रहती है श्री वरुण जैन आगे बताते है कि प्रदेश मे लगभग बीस दल सक्रिय है जिनकी संख्या  चार सौ से उपर बताई जा रही है हाथी दल का आगमन के संदर्भ मे उप निदेशक श्री जैन का कथन है कि हाथी दल का मूवमेंट तभी रहता है जब क्षेत्र मे खानपान,पेयजल,एवं आहार की माकूल व्यवस्था रहती है तभी वे प्रदेश के वन क्षेत्रों मे विचरण करते है उनके आहार के संदर्भ मे वे बताते है कि वृक्षों की कोमल पत्तियाँ, फल, फूल, तेंदु, कडली,दाल,बांस, माहुल पत्ता,इनके प्रिय भोजन है जिसकी तलाश मे वे संपूर्ण प्रदेश के वन क्षेत्रों का भ्रमण करते रहते है उपरोक्त सुविधा न मिलने पर अपनी क्षुधा शांति के लिए वे वन ग्राम क्षेत्र मे उपज फसल धान, घरों मे संग्रहित अनाज को चट करने आते है तब ऐसी परिस्थितियों मे  जान माल का खतरा बढ़ जाता है श्री जैन आगे बताते है कि ग्रामीण क्षेत्र मे हाथी मूवमेंट होने की स्थिति मे वन कर्मचरियों तथा मित्र दल के द्वारा गज वाहन से पूर्व मे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों मे मुनादी कर सचेत किया जाता है यही नही ग्रामीणों मे हाथी सुरक्षा बचाव के लिए जन जगरूकता लाने भिन्न भिन्न आयोजन, नाटक, टीवी,फीचर्स, पोस्टर, खेल प्रतियोगीता के मध्यम से सचेत होने निर्देशित किया जाता है  उप निदेशक वरुण जैन आगे बताते है कि आधुनिक एप 13 जिलों मे हाथी एलर्ट एप बनाया गया है जहाँ  जिस क्षेत्र मे हाथियों की लगातार धमक बराबर बनी रहती है इसके लिए खानपान, हेतु कदली वन, बांस के वन, हरे भरे पेड़ पौधे भविष्य मे तालाब  विचरण क्षेत्र मे कॉरिडोर बनाया जाएगा ताकि उनके विचरण क्षेत्र मे कोई असुविधा न हो हाथी अलर्ट एप को तैयार करने मे लगभग डेढ़ वर्ष का समय लग गया है उसे प्रदेश भर मे इसी माह मे लॉन्च किया जाएगा हाथी अलर्ट एप के अलावा उदंती सीतानदी उप निदेशक वरुण जैन यही पर नही रुके बल्कि उन्होंने अन्य पोर्टल रिमोर्ट फेंसिंग पोर्टल भी विभागीय स्तर पर बनाए गए है जिसमे प्रदेश के वन क्षेत्रों की वस्तविक  स्थिति पर भी लगातार निगरानी की जा सकती है जहाँ हरियाली के अलावा मैदानी पड़त भाटा बंजर भूमि की स्थिति से अवगत हुआ जा सकता है मैदानी पडत भाटा बंजर भूमि को चयनित कर वहाँ भिन्न भिन्न प्रजाति के पेड़ पौधों का प्लांटेशन् किया जा सकता है  या वन ग्राम क्षेत्रों के आसपास भूमि पर सहजता से प्लांटेशन किया जा सकता है जहाँ वन कर्मी या मैदानी अमला द्वारा कार्यों मे किसी प्रकार की कोई भी कोताही नही बरत सबता है यदि बीस हजार पौधे रोपे गए है तो मुख्यालय या वन मंडल कार्यालय मे यहाँ बैठे बैठे एप, मॉनिटरिंग मध्यम से उसकी संपूर्ण जानकारी मिल जाएगी कि कितने लक्षित पौधों का रोपण किया गया है या नही.  यहाँ तक सैटेलाइट के मध्यम से कितने प्लांटेशन  क्षेत्र मे कितने गड्ढे खोदे गए है उसकी भी सटीक जानकारी यहाँ बैठे बैठे गिन लिया  जा सकेगा  श्री जैन बताते है कि इस प्रकार के सैटेलाइट एप निर्माण के पीछे की एक वजह यह भी जरूरी है कि काष्ठ तस्करों द्वारा वनों के चोरी छिपे विदोहन, कार्यों मे पारदर्शिता एवं अवैध अतिक्रमण मे यह एप कारगर साबित होगा उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि इसी प्रकार की घटना मे गरियाबंद वन मंडल अंतर्गत साढ़े छ सौ हेक्टेयर वन भूमि मे पांच अवैध बस्ती निर्माण कर अतिक्रमण किया गया था जहाँ बेशकीमती इमारती काष्ठ का दोहन कर वन क्षेत्र के भीतर बस्ती निर्माण कर लिया गया था जिसे पुलिस प्रशासन और वन विभाग के सहयोग से मुक्त कराया गया  जहाँ काफी विरोध और विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी जिसे हमने लाठी डंडे खाकर भी उसे मुक्त कराया गया आज साढ़े छ सौ हेक्टेयर वन भूमि पर खनकी निर्माण, साथ ही हरे भरे पौधे भी रोपण किया गया है ताकि हरियाली सहित क्षेत्र मे जल संरक्षण किया जा सके ताकि क्षेत्र के वनों का जल स्तर बराबर बना रहे और हरियाली भी बनी रहे उप निदेशक वरुण जैन से जब सामाजिक समरसता और सौहाद्रता के संदर्भ मे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि हाथी मित्र दल मे अधिकांश वन ग्रामों के ग्रामीणों सरपंच उप सरपंच को लिया गया है जो वनों के मूल निवासी है हाथियों के आगमन से लेकर आसपास ग्राम क्षेत्रों मे मुनादी से लेकर सुरक्षा मे इनका पूर्ण सहयोग रहता है विभाग भी तीज त्योहार मे इनके साथ मिल कर मनाते है सांस्कृतिक, आयोजनों और समय समय पर खेल आयोजन कर उन्हे प्रोत्साहन राशि दी जाती है इसी माह जुन मे उदंती सीतानदी सेंचुरी प्रबन्धन द्वारा क्रिकेट ट्राफी प्रतियोगीता का आयोजन किया गया जिसमे आसपास ग्रामीणों के खिलाडियों को लिया गया है ताकि परस्पर  समरसता, सौहाद्रता, स्थापित कर वनों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा मे उनकी सहभागिता स्थापित कर सुनिश्चित किया जा सके 

शुक्रवार, 21 जून 2024

भ्रष्ट कार्य प्रणाली के चलते ग्राम पंचायत भलेरा के सरपंच सचिव को बर्खास्त करने का आदेश

 भ्रष्ट कार्य प्रणाली के चलते ग्राम पंचायत भलेरा के सरपंच सचिव को बर्खास्त करने का आदेश


रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)  ग्राम भलेरा के सरपंच मीना साहू और सचिव सोमनाथ साहू को ग्राम भलेरा मे लगातार भ्रष्टचार करने एवं 14 वें 15 वें वित्त की राशि को मनमाने ढंग से दुरूपयोग कर अनियमितता किए जाने पर दोनों के विरुद्ध  जिला अधिकारी ने आदेश जारी किया है तथा सात दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन अभिमत सहित अधिकारी को अवगत करने की बात कही गई है जांच ग्राम भलेरा मे आज किए जाने की बात के भी आदेश जारी हुआ है 


 उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत भलेरा की महिला सरपंच मीना साहू है जिनका सरपंच पति चंद कुमार साहू उसकी अनुपस्थिति मे संपूर्ण कार्य का संपादन करता रहा है वही ग्राम गोविंदा के सचिव गोवर्धन साहू जो ग्राम भलेरा सरपंच का रिश्तेदार है उसके द्वारा मूल ग्राम गोविंदा के कार्यों को करने के बजाए भलेरा ग्राम के संपूर्ण कार्यों का निष्पादन करता था जबकि  मूल सचिव सोमनाथ साहू से केवल वित्तीय राशि लेनदेन और बिल बाउचार कार्यों का सही हस्ताक्षर का उपयोग कर भ्रष्ट कार्यों को अंजाम देते आ रहा था


      यही वजह है कि ग्राम सभा के सदस्यों को भी किसी प्रकार के कार्यों की जानकारी नही मिल पा रही थी और एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार को गोवर्धन साहू सचिव गोविंदा भलेरा सरपंच पति चंद कुमान साहू द्वारा लाखों की 14 वें और 15 वें वित्त मद की राशि का गबन कर डकार लिया गया है जिससे व्यथित हो कर उप सरपंच भूनेश साहू की शिकायत मिलने पर जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने भलेरा सरपंच मीना साहू एवं सचिव सोमनाथ साहू को बर्खास्त (Dismis) करते हुए आरंग जनपद के अधिकारी को सात दिवस के भीतर जांच प्रस्तुत करने का आदेश पत्र प्रेषित किया है 


       गौर तलब है कि भलेरा सरपंच पति चंद्र कुमार साहू पर पूर्व मे भी आबंटित सहकारी सोसाइटी के चावल तेल की हेरा फेरी के आरोप  भी लग चुके है वही गोविंदा सचिव गोवर्धन साहू  मूल ग्राम गोविंदा के कार्य को छोड़ कर भलेरा ग्राम के समस्त कार्यों का संपादन करता रहा है जिसकी अनेको दफा शिकायत की गई है 


उसके बावजूद  गोवर्घन  साहू भलेरा  ग्राम के    पंचायत  कार्यों   मे  हस्तक्षेप करते रहा साथ ही  भलेरा   पंचायत  के स्थानीय मूल सचिव सोमनाथ साहू से बिल बाउचर मे सही हस्ताक्षर कर कार्यों मे अनियमितता करते रहा है बताया जाता है कि गोवर्धन साहू लंबे भ्रष्ट कार्यों मे संलिप्तता के चलते आकुत् संपति अर्जित कर ली है आरंग मे जमीन सहित चल अचल संपति अर्जित कर रखी है साइकल पर चलने वाला गोवर्धन साहू के पास इतनी संपति कहाँ से आई यह जांच का विषय और केंद्र बिंदु है जबकि उप सरपंच भुनेश साहू ने सीधे आरोप लगाया है कि मनरेगा की राशि, तालाब लीज, बाजार लीज,मुरुम उत्खनन, पेड़ कटाई बगैर ग्राम सभा के अनुमोदन लिए राशि गबन करर्ने की बात कही जा रही है 

     यदि जांच सही पाई जाने पर नियम कानून की दृष्टि कोण से वैधानिक रूप से सरपंच पति मीना साहू, चंद्र कुमार साहू, एवं सचिव सहयोगी ग्राम भलेरा सचिव सोमनाथ साहू, गोविंदा सचिव गोवर्धन साहू की संपति राजसात कर शासकीय राशि की भरपाई की जाएगी साथ ही उन्हे जेल भी जानी पढ़ सकती है 

गुरुवार, 20 जून 2024

के.सी. वेणुगोपाल से मिले अमितेश शुक्ल, छत्तीसगढ़ लोकसभा चुनाव में हार को लेकर हुआ मंथन*

 *Big Breaking news:

-के.सी. वेणुगोपाल से मिले अमितेश शुक्ल, छत्तीसगढ़ लोकसभा चुनाव में हार को लेकर हुआ मंथन*




रायपुर:- सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि छत्तीसगढ़ के प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अमितेश शुक्ल ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान AICC के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ के परिणामों में कांग्रेस की हार को लेकर विस्तृत चर्चा की। उनकी बात को वेणुगोपाल जी ने ध्यान से सुना।

शनिवार, 15 जून 2024

मुख्य मंत्री से मिलकर वन विभाग में हो रहे सीधी भर्ती पर रोक लगाने की मांग*

 *मुख्य मंत्री से मिलकर वन विभाग में हो रहे सीधी भर्ती पर  रोक लगाने की मांग*

रायपुर / छत्तीसगढ़ में सबसे बड़े राजस्व वाले वन विभाग में इन दिनों वन रक्षक के 1484 पदों पर तथा वाहन चालक के 144 पदों पर सीधी भर्ती किये जाने हेतु प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने विग्यापन जारी करवाया है! जबकी भाजपा के सारे नेता छ. ग. दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ के मंच में जाकर नियमितीकरण करने वादा किया था और जन घोषणा पत्र में सामिल भी किया था उक्त सभी नेता आज उप मुख्य मंत्री, वन मंत्री, वित्त मंत्री और शिक्षा मंत्री है! वन विभाग में 6500 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी व श्रमिक कार्यरत है सीधी भर्ती करने पर इनके भविष्य पर कुठाराघात होगा!  संगठन के पदाधिकारियों ने छाया विधायक श्रीमति अल्का चन्द्राकर के सांथ माननीय मुख्य मंत्री जी से मुलाकात कर सीधी भर्ती पर तत्काल रोक लगाये जाने का मांग किया है, और उक्त रिक्त पदों पर दैनिक वेतन भोगियोॆ को नियमितीकरण की बात भी रखा गया है जिस पर माननीय मुख्य मंत्री जी ने भर्ती पर रोक लगाने का आश्वासन भी दिया है! वही दुसरी ओर संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रामकुमार सिन्हा, प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद वर्मा, जिला सचिव अजय गुप्ता, वन विकास निगम के अध्यक्ष जनक लाल साहु , फेडरेशन के कोषाध्यक्ष विजय पटेल, अमित ठाकुर, शोमनाथ साहु, ने माननीय वित्त मंत्री जी से मिलकर भी भर्ती पर रोक लगाने का निवेदन किया है तो उन्होने भी आश्वासन दिया कि आपके वन मंत्री जी से मिलिये बिल्कुल प्रयास करते है भर्ती रूक जाये! विभाग के मुख्या वन बल प्रमुख से मिलकर निवेदन किया गया तो प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा की भर्ती मैं रोक नही सकता आप लोग मुख्य मंत्री और वन मंत्री जी से मिलिये अगर वहां से निर्देश दिया जायेगा तो हम भर्ती रोक देंगें, 


उन्ही शब्दों को लेकर संगठन के पदाधिकारी ने माननीय वन मंत्री जी से पुन: मुलाकात कर भर्ती पर रोक लगाने व नियमितीकरण किये जाने का निवेदन किया गया है जिस पर माननीय वन मंत्री जी ने भर्ती पर रोक लगाने संबंधी सहमती ब्यक्त किया है!  नियमितीकरण के मामले को एकाएक दर किनार कर सीधी भर्ती हेतु विग्यापन जारी करने पर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है तथा तनाव का माहोल बना हुआ है,  दैनिक वेतन भोगी इस बार अपने अधिकार को पाने के लिये आर पार की लड़ाई के मुड में नजर आ रहे है!

 

मोदी की गारंटी पत्र 100 दिन से भी ज्यादा हो गया है किन्तु कमेटी का रिजल्ट जीरो बटे सन्नाटा है, भाजपा के वादा को लेकर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियो के परिवार भी कहने में नही चुक रहे है जाओं भाजपा को और वोट दों तुम्हे नियमितीकरण करने के बजाय सीधी भर्ती कर रहा है, येसे ही सभी सरकार झुठ बोलते रहते है और तुम लोग समझ नही पाते जैसे शब्दो से दैनिक वेतन भोगियों को उनके परिवार के लोग कोसते जा रहे है जिसके कारण दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों एवं श्रमिक लोग पिड़ीत होकर आर पार की जंगी हड़ताल करने के मुड में है! 

संगठन के पदाधिकारियों ने माननीय मुख्य मंत्री जी, वन मंत्री और वित्त मंत्री जी से आग्रह कर रहे है कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी व श्रमिकों के हित में नियमितीकरण का फैसला जल्द लें और जब तब दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण नही हो जाता है तब तक के लिये सीधी भर्ती पर रोक लगाया जायें!

शुक्रवार, 24 मई 2024

बार अभ्यारणय के विस्तार और वन्य प्राणियों के रहवास की कवायद

 बार अभ्यारणय के विस्तार और वन्य प्राणियों के रहवास की कवायद

अल्ताफ हुसैन

(छत्तीसगढ़ वनोदय) 

रायपुर छग प्रदेश का सदियों से प्राकृतिक नैसर्गिक वातावरण मे सर्वधिक  लोकप्रिय वन अभ्यारण्य  क्षेत्र बार नवापारा का नाम प्रमुखता से आता है जहां प्रकृति ने गगन चुंबी ऊँचे पहाड़,वर्षों से साल और सागौन के अलावा भिन्न भिन्न प्रजाति के फलदार, फुल्दार, औषधि युक्त बेश कीमती वृक्ष मे संपूर्ण वायु की गमक से वातावरण को भीनी भीनी सुगंध के साथ पर्यटकों का मन अल्हादित् कर देता है मानों प्रकृति आवगमन करते पर्यटको के मुख मंडल पर आस पास के प्रकृति पेड़ पौधों की महीन सूक्षम ओस की बूंदे की अदृश्य अमृत कण से आगंतुकों के रुखसार पर मानो ठंडकता एवं भीनी सुगंध के साथ उनका स्वागत कर रही हो परंतु सदियों से जिस बार नवापारा अभ्यारणय की प्रकृति ने वन्य प्राणी, जीव जंतु का लालन पालन किया था और आज भी कर रही है उसका विदोहन मानव जगत ने उसकी वैभवता, आत्म सम्मान, और अस्तित्व पर कुठाराघात कर उसके वास्तविक इतिहास पर काला अध्याय अंकित कर दिया है प्राकृतिक वातावरण के यथार्थ को यथावत बनाए रखने के उद्देश्य से बार नवापारा अभ्यरण्य मे कभी अमूल चूल परिवर्तन नही किया गया केवल कच्ची मुरुमी सड़के विकास के नाम पर बनती, बिगड़ती, और संवरती रही है वर्षो पूर्व कुछ बार क्षेत्र के स्थानों पर चैन लिंक एवं कटिले तारों  को लकड़ी के खंबे से घेरा गया था जिस पर समय के दीमक ने खोखला करते हुए लोहे के कटिले तारों को जंग लगा कर उसकी सुरक्षा को चट कर दिया एक प्रकार से वन्य प्राणियों के संरक्षण और सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो गया है जबकि पूर्व और वर्तमान अधिकारियों ने शाकाहारी वन्य प्राणीयों के चारागाह का समुचित 35 से उपर घास प्रजाति की भिन्न भिन्न किसमें उत्पादन फसल निर्माण कर उनके चारा खान पान की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है इसके अलावा अन्य कोई भी विकास कार्य नही किए गए है जबकि शाकाहरी काले हिरण सहित कोटरी, एवं अन्य वन्य प्राणियों की संख्या मे विगत कई वर्षों से इसकी संख्या मे भी लगातार वृद्धि और इजाफा  हो रहा है परंतु स्थानों का अभाव एवं मुक्त विचरण क्षेत्र मे भारी कमी देखने मिल रही है इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि बार नवापारा अभ्यारणय मे पूर्व मे लगभग ईक्किस् वन ग्राम क्षेत्र को  संपूर्ण बार अभ्यारणय  को मानव समाज ने चारो ओर से घेर रख था जिसकी वजह से मानव दखल होने से मुक्त वातावरण मे वन्य प्राणी विचरण नही कर पाते 

यही वजह है की बीस वर्ष पूर्व  जब पूर्व की भाजपा सरकार के मुख्य मंत्री डॉ रमन सिंह और वन मंत्री विक्रम उसेन्डी के कार्यकाल मे पिथौरा के आगे श्री राम नगर का निर्माण कर तीन वन ग्रामों का व्यव्स्थापन वन विभाग द्वारा कराय गया था तत्कालिक रेंजर उदय सिंह ठाकुर के द्वारा तीन  बार वन ग्रामों का व्यवस्थापन  किया जाना उस समय बहुत बड़ी चुनौती पूर्ण कार्य था जिसके 18 वन ग्राम क्षेत्र अब भी बार अभ्यारण्य के गोद मे  मौजूद है 


इस संदर्भ मे बलौदाबाजार के वन मंडलाधिकारी मयंक अग्रवाल ने बार अभ्यारण के  उन्नयन और विस्तार हेतु पहल की है  तथा बार अधीक्षक आनंद कुदरिया से व्यापक दिशा निर्देश दिए गए है बलौदा बाजार वन मंडल अंतर्गत युवा आई एफ एस.अधिकारी मयंक अग्रवाल के बलौदा बाजार वन मंडल के कार्य कालीन क्षेत्र के तहत ऐसे बहुत से समय भी आया था जब प्राकृतिक आपदा, परस्पर भिडंत मे घटना दुर्घटना के शिकार कई वन्य प्राणी असामयिक काल ग्रास बन गए तब उनके सुरक्षा रहवास की दृष्टि कोण से चिंता व्यक्त करते हुए हुए उन्होंने बार आभ्यारणय के कोठारी ग्राम के लगभग दस किलो मीटर के एक हिस्से मे कोर जोन निर्माण करवाया  गया जहाँ सिर्फ और सिर्फ वन्य प्राणी का एक छत्र राज्य है ताकि वन्य प्राणी सुरक्षित और स्वच्छन्द विचरण कर सके बलौदा बाजार वन मंडलाधिकारी मयंक अग्रवाल आगे बताते है


कि बार अभ्यारणय के कोर ज़ोन निर्माण से इसका यह परिणाम सामने आया है कि क्षेत्र मे लगातार वन्य प्राणियों मे वृद्धि देखी जा रही है वही उनके लगातार वृद्धि से बार क्षेत्र का भूभाग  रकबा भी छोटा पड़ने लगा है जहाँ उन्होंने बार अधीक्षक आनंद कुदरिया को यह महती जिम्मेदारी सौपी है बताते चले कि बार अधीक्षक आनंद कुदरिया का सेवा काल का एक लंबा अनुभव रहा है मानव निर्मित जंगल सफारी निर्माण से लेकर उसके उन्नयन विस्तार मे उनकी महती भूमिका रही है आज जंगल सफारी जू एशिया का नंबर वन जू के रूप मे इतिहास के पन्नो मे दर्ज हो  चुका है  जिनमे तत्कालिक अधिकारियों के साथ आनंद कुदरिया का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है जो आज भी उनकी उपलब्धि के रूप मे जाना जाता है बार नवापारा अभ्यारणय मे व्यापक विस्तार, उन्नयन कार्य और व्यवस्थापन हेतु उनके अनुभव का लाभ लेते हुए यह पहल कर बहुत सी  कागजी कार्यवाही किया जा चुका है

बार अधीक्षक आनंद कुदारीया से इस संदर्भ मे चर्चा करने पर वे बताते है कि बार अभ्यारणय के भौतिकी मान से कुल क्षेत्रफल काफी सकरा हुआ है जहाँ मुक्त वातावरण मे वन्य प्राणियों का विचरण दुरूह और कठिन हो गया है इसके स्वच्छन्द विचरण के लिए वन विभाग से तीन वन ग्राम क्षेत्र बार, अकलतरा, बोहरी, को अन्यन्त्र  व्यवस्थपन प्रक्रिया प्रयास किया जाना बताया गया है  जबकि यह सबसे बड़ा चुनौती पूर्ण कार्य है बार अधीक्षक आनंद कुदरिया बताते है कि बार अभ्यारण्य क्षेत्र सदियों से अपने गर्भ मे कई एतिहासिक प्राकृतिक वन संपदा, वनस्पति, वन्य प्राणियों को अपने आप मे समेटे हुए है परंतु नैसर्गिक प्राकृतिक वातावरण मे कब तक उनके भरोसे रखा जाएगा अब क्षेत्र मे अनियंत्रित होते मानव दखल गाड़ी मोटर साइकिल की चीं चिलप्पो,शोर शराबा के कान फोडू आवाज़ से  वन्य प्राणियों की सुरक्षा व्यवस्था प्रकृति वन क्षेत्र भी अपनी आभा खोते जा रहे है ऐसे मे वर्षों से बार के आसपास वन ग्राम वनवासीयो को व्यवस्थपन की आवश्यकता महसूस की जा रही है इसके। लिए मूल वन विभाग को कार्य योजना बनाकर प्रस्तुत किया गया है बार अधीक्षक आनद कुदरिया का कथन है कि कोई भी कार्य प्रारंभ किया जाए तो भविष्य मे इसके सार्थक परिणाम आज नही तो कल सामने आएंगे ही सो उन्होंने बताया कि यह बार अभ्यारणय का विस्तार ऊन्नयन  और व्यवस्थापन अपने समय पर अवश्य होगा उन्होंने बताया कि बार अभ्यारणय मे वन्य प्राणियों की लगातार वृद्धि होते वन्य प्राणियों के स्वच्छन्द नैसर्गिक वातावरण के विस्तार की अति आवश्यकता देखी जा रही है वे आगे बताते है कि वही बार अभ्यारणय के रवान परिक्षेत्र मे  वन विकास निगम द्वारा वर्षों से सागौन रोपण कर विरलन कार्य से आर्थिक व्यवस्था का दोहन किया जा रहा है जिसके सागौन विरलन के साथ ही अन्य पेड़ पौधे और प्राकृतिक वनों का विदोहन भी कर लिया जाता है जिससे कक्ष क्रमांक 117,118,71,44 जैसे बहुत से क्षेत्र जहाँ खुल कर वनों का विदोहन लगातार हुआ है जहाँ बहुत से वन क्षेत्र की स्थिति सपाट मैदान मे तब्दील हो चुके है आस पास  ग्राम वन वासी द्वारा  काश्त कारी करने से बहुत से वन क्षेत्र जंगल कम खेत खालिहान ज्यादा नज़र आते है ऐसे मे वन्य प्राणियों के रहवास की बहुत बड़ी समस्या बढ़ते जा रहा है खुले क्षेत्र मिलने से शिकार की आशंका प्रबल हो जाती है 


  उल्लेखनीय है कि बार नवा पारा अभ्यारणय मे लगभग तीन वर्ष पूर्व श्याम मृग काले हिरण जिसकी नब्बे की संख्या मे तत्कालिक समय दिल्ली और बिलासपुर जू से स्थानीय बार अभ्यारण्य मे लाया गया था अति संवेदन शील काले हिरण होने के कारण इसकी विशेष सेवा सुश्रुषा की गई थी इसके लिए बार के शांत चित वातावरण मे एक पृथक ग्राम रामपुर क्षेत्र के भूभाग परिक्षेत्र मे बाडा निर्माण कर उन्हे सुरक्षित रखा गया था यही नही उनके खान पान की व्यवस्था हेतु कई हेक्टेयर भू भाग मे लाखों रूपये की लागत मे मुलायम सुपाच्य लगभग तीस प्रजाति के हरे घास ग्रीन लैंड क्षेत्र मे रोपण किया गया यह रोपण बार के अन्य अलग क्षेत्र मे तीन से चार स्थल मे रोपण किया गया जिसका लाभ शुद्ध शाकाहारी वन्य प्राणियों को लगातार प्राप्त हो रहा है बताया जाता है कि वर्तमान मे श्याम मृग की संख्या मे लगातार वृद्धि बताई जा रही है पर्यटकों से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि जब तक काले मृग के दर्शन नही  होते तब तक अभ्यारणय विचरण का आनंद नही आता है जबकि हमारे छग वनोदय पत्रिका के हवाले मे प्रकाशित समाचार मे तत्कालीन रेंजर कृषालु चंद्राकर ने वर्ष भर पूर्व बार के रामपुर वन ग्राम क्षेत्र भूभाग मे नब्बे काले हिरण को छोड़ने की बात कही थी जिनकी संख्या वर्तमान मे एक सौ पचास बताई गई थी तथा तीस काले हिरण को बाड़े मे सुरक्षित स्थान मे रखा गया था जिससेे उनकी संख्या लगातार वृद्धि हुई है असम और अन्य स्थलों से लाए गए पांच  वन भैंसे जिसमे एक नर और चार मादा  के संरक्षण संवर्धन के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे है बार से तीन किलोमीटर की दूरी पर कोठारी मार्ग के वृहद भूभाग को कोर ज़ोन निर्माण किया गया है जहाँ बहुत से वन्य प्राणियों को बड़ी सहजता से विचरण करते देखा जा सकता है यह क्षेत्र मानव रहित आम जन के लिए प्रतिबंधित है वन्य प्राणियों के रहवास के लिए बहुत सी योजनाओं को लाए जाने की बात भी कही जा रही है इस संदर्भ मे उदंती सीतान्दीऔर वन्य प्राणी के मुख्य वन संरक्षक विश्वेश  कुमार झा से चर्चा करने पर बताया कि बार नवापरा अभ्यारणय मे वन्य प्राणियों को लेकर बहुत सी योजनाएं बनाई गई है उनके विस्तार संरक्षण संवर्धन की असीम संभावनए है 


असम से लाए गए वनभैंसा को सतत निगरानी और देख रेख मे रखा गया है उनकी सेवा सुश्रुषा खान पान, रख रखाव,की समुचित व्यवस्था की गई है धूप गर्मी पानी से बचाव हेतु अनुकूल वातावरण हवा पानी,इत्यादि की व्यवस्था की गई है प्रतिदिन खानपान मे पौष्टिक युक्त भोजन दिया जाता है क्योकि वन भैंसा राजकीय पशु भी है तथा विलुप्त प्रजाति के कागार मे है इसलिए किसी भी प्रकार का रिस्क नही लिया जाता है लगभग आधा दर्जन वन कर्मी लगातार निगरानी करते है परस्पर द्वंद होने और चोटिल होने पर डॉक्टरों की गहन देखरेख मे रहते है उनका नियमित उपचार परीक्षण किया जाता है सी सी एफ वन्य प्राणी विश्वेश कुमार झा आगे बताते है कि एक वर्ष मे उपर हो चुके वन भैंसों के बार नवापारा अभ्यारणय मे रहने के बावजूद वे अनुकूल वातावरण मे ढल नही पाए है यही वजह है कि इनकी वंश वृद्धि भी नही हो पा रही है इसके अलावा गौर जैसे भैंसे प्रजाति के बलशाली वन्य प्राणियों की उपस्थिति मे इनका भिडंत संभावित है इसलिए इन्हे पृथक बाड़ा बना कर कोर जोन मे रखा गया है सीसीएफ वन्य प्राणी विश्वेश कुमार झा आगे बताते है कि असम से लाए गए वन भैंसा कोई आम भैंसा नही जिसे मुक्त वातावरण मे खुला छोड़ दिया जाए उसके पेयजल से लेकर खानपान तक सुविधा अनुसार दिया जाता है जिसमे करोड़ों रुपये व्यय होते है सीसीएफ वन्य प्राणी विश्वेश झा आगे बताते है कि आवश्यकता अनुसार जब वह प्राकृतिक घास ग्रहण करेगा तब ही बजट अनुसार उनके रुचि कर घास का उत्पादन जैसे ग्रास लैंड बनाया जाएगा वही एक ही क्षेत्र मे तालाब,या टंकी निर्माण कर पेयजल विचरण की समस्या दूर की जाएगी क्योंकि वर्तमान मे दूषित पेयजल से उनके स्वस्थ्य पर  विपरीत असर पड सकता है इसलिए स्वच्छ और स्वस्थ्य पेय जल दिया जा रहा है चारा समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा सी सी एफ वन्य प्राणी विश्वेश झा आगे बताते है कि बार मे हाथी कॉरिडोर क्षेत्र है यहाँ बड़ी संख्या मे हाथियों का आवागमन होता है नए वन्य प्राणियों के हिसाब से तार फैनसिंग लगाई जाएगी ताकि वे मुक्त वातावरण मे सुरक्षित रह सके उनका मत है कि कोई भी वन्य प्राणी चारा, दाना पानी और खुले वातावरण मे सुविधा उपलब्ध रहेगी तो वे स्वमेव क्षेत्र को अपना वास बना लेते है सी सी एफ वन्य प्राणी विश्वेश झा आगे बताते है कि अन्य जू और अभ्यारणय से वन्य प्राणियों की आदान प्रदान किया जाता है  यहाँ से भी ऐसी व्यवस्था की जाएगी ताकि पर्यटक वन्य प्राणियों को मुक्त विचरण करता देख प्रफुल्लित होकर गद गद हो सके वही कोठारी रेंज के परिक्षेत्राधिकारी
जीवन लाल साहू लगातार कोठारी क्षेत्र मे एक्टिव रहते है तथा वन भैंसों की सतत निगरानी करते है परिक्षेत्राधिकारी जीवन लाल साहू बताते है कि वन भैंसों के स्वस्थ्य और खान पान पर विशेष ध्यान दिया जाता है भीगे हुए चना के छिलके घास, भीगी दाल, फल्ली दाना, दलिया, फुड, खल्ली, जैसे चीना बादाम, डाइट के अनुसार दिए जाते है लगातार डॉक्टरो की निगरानी रहती है साथ ही चार वन कर्मी लगातार क्षेत्र मे निगरानी करते है भीषण ग्रीषम  मे नहाने के अलावा चारा दाना, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की गई है कोठारी रेंजर जीवन लाल साहू आगे बताते है कि वंश वृद्धि के लिए अभी तक प्राकृतिक सहवास की स्थिति निर्मित नही हुई है फिर भी प्राकृतिक अनुसार स्थिति निर्मित होने पर इसका कुनबा बढ़ सकता है  जबकि सी सी एफ वन्य प्राणी विश्वेश झा ने हाल ही बताया था कि राज्य के उदंती सीतानदी हिस्से मे प्रवासी वन्य भैंसे के आगमन पर उनका क्लोन लिया जाएगा परिस्थिति अनुसार इनके कुनबे मे बढ़ोतरी के प्रयास किए जाएंगे वही प्रवासी शेर भी सिरपुर शक्ति घाट क्षेत्र मे विचरण कर रहा है यदि वह मौसम अनुकूल यहाँ बार क्षेत्र मे स्थायी तौर पर रहता है तो अन्य जू या अभ्यारणय से मादा शेर लाकर शेर का संरक्षण किया जाएगा उनका कथन है कि पूरे देश मे शेर की संख्या मे भारी गिरावट आई है विलुप्त प्रजाति के शेर के संरक्षण संवर्धन मे यथोचित कार्य किए जाएंगे इसके लिए वनों और अभ्यारण्य क्षेत्र को मानव रहित मुक्त क्षेत्र बनाना आवश्यक हो गया है यह तभी संभव है जब वर्षो से वन क्षेत्रों मे बसे वन ग्रामों आसपास की बसाहटो  को अन्यत्र व्यवस्थापन कर वन क्षेत्रों का विस्तार किया जाए तभी वनों और वन्य प्राणियों का संरक्षण संवर्धन संभव हो सकेगा 

सोमवार, 22 अप्रैल 2024

जंगल सफारी मे शेर और चीते के खुराक मे वन कर्मियों का डाका तोंद के साथ जेब भी बड़ा रहे

 जंगल सफारी मे शेर और चीते के खुराक मे वन कर्मियों का डाका तोंद के साथ जेब भी बड़ा रहे 

   


अलताफ़ हुसैन

  रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) एशिया का सबसे बडा मानव निर्मित जंगल सफारी अपने प्रारंभिक् निर्माण कार्य से ही लेकर सदा भ्रष्टाचार के साथ उसका नाता विवादों से जुड़ाव रहा है अब चाहे चारो ओर दीवार निर्माण कार्य से लेकर वानिकी कार्य हो या फिर लोहे की जालीनुमा फैसिंग कार्य हो मुरुम उत्खनन हो या पृथक शौचालय कक्ष निर्माण से लेकर वन्य प्राणियों के बाड़ा आहता निर्माण ही क्यों न हो करोडों अरबों की राशि केवल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा कर ही उसका बंटाधार होता रहा फिर भी यह सिलसिला अभी भी थमने का नाम नही ले रहा है आए दिन भ्रष्टाचार के नए नए किस्से सामने आते रहे है अब ताजा भ्रष्टाचार, गड़बड़ घोटाला का मामला जो सामने आ रहा है वह काफी हैरान करने वाला है क्योंकि यह भ्रष्ट कृत्य निर्माण या वानिकी कार्य को लेजर नही बल्कि शेर चीता और अन्य मांसाहारी प्राणियों को जंगल सफारी प्रबंधन से मिलने वाले बकरे का ताजा मटन और मुर्गी मटन के खुराक को लेकर  संपूर्ण आसपास क्षेत्र मे खासा चर्चा बना हुआ है जिसमे उन्हे दिए जाने वाले खुराक मे बड़े स्तर पर डाका डाला जा रहा है वह भी हजारो रुपये मे नही बल्कि लाखों का खेल हो रहा है      


गौरतलब हो कि पूर्व मे जंगल सफारी से छन कर गाहे- बगाहे  बाहर समाचार   मिलते रहे है कि शेर चीते, और मांसहारी वन्य प्राणियों को दी जाने वाली माँस मटन मुर्गी मछली के खुराक मे स्थानीय वन कर्मी, कांटा मार कर अपने पेट की क्षुधा शांत कर अपनी तोंद बड़ा रहे है साथ ही अपने जेब के खीसे का वजन भी बढ़ा रहे है परंतु इससे उपर जाकर भ्रष्टाचार का खेल-खेल कर लाखों का वारा न्यारा किया जा रहा है वताया जाता है कि बकरे के मांस के अन्य अवशेष का खाद्य समाग्री प्रतिदिन सफारी प्रागण के हिस्से मे निर्माण कर संध्या पश्चात  पार्टी  के साथ ही शाराब, माँस का कबाब  सेवन करते हुए सदैव आम चर्चा होती रही है परंतु कांटा मारने तक बात सही है लेकिन लाखों का खेल होने की जानकारी बाहर निकली तब जिसने भी सुना आश्चर्य चकित हो गया इस डाका जनी मे हजार दो हजार का गाला नही बल्कि लाखों का खेल हो रहा है अति विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है की इस भ्रष्टाचार के कार्यक्रम मे डॉ राकेश वर्मा और रेंजर के सहयोग से बहुत बड़ा खेल प्रायोजित हो रहा है ये वही राकेश वर्मा है जिनके कुछ दिन पूर्व कार्यालयीन समय मे विदेश भ्रमण मे रहते हुए सफारी के दो से  तीन  चौसिंगा वन्य प्राणी मृत हुए थे लेकिन उन पर आज तक विधिवत विभागीय कोई कार्यवाही नही हुई बहरहाल जंगल सफारी के सभी मांसाहारी वन्य प्राणियों के लिए प्रति वर्ष निविदा अनुसार बकरे का ताजा मटन लगभग ढाई सौ किलो प्रतिदिन वन्य प्राणियों को खुराक के रूप मे दिया जाना सुनिश्चित है  परंतु प्रतिदिन जंगल सफारी मे दोपहर पश्चात स्वस्थ तंदरुस्त बकरा के स्थान पर निःशक्त, बीमारू, झकडी बकरी काट कर उन्हे परोस दिया जाता है जिससे शेर चीता, एवं अन्य मांसाहार वन्य प्राणियों के स्वस्थ्य पर विपरीत प्रभाव पढ़ सकता है जिसका उदाहरण पिछले बहुत से वन्य प्राणियों की अकाल मृत्यु को लिया जा सकता है मगर फिर भी डाइट के मामले मे जंगल सफारी कर्मियों द्वारा दिए जाने वाले खुराक मे कटौती कर केवल अपनी जेब गरम करने का अवसर तलाश करते रहते है


अब जो जानकारी बाहर आ रही है कि पूरे सफारी मे सात नग शेर है जिनमे प्रत्येक शेर कि खुराक लगभग पांच किलो मटन देने का नियम है जिनमे चार से पांच शेर तथा दो सफेद बंगाल टायगर जिन्हे चिकन दिया जाता है परंतु संध्या पश्चात एक ही टाइम उन्हे कम मात्रा मे माँस की खुराक दी जाती है वही चीता को एक से दो किलो और विदेशी कुत्तों को एक पाव से आधा किलो किमा दिया जाता है मगर मच्छ को एक किलो मछली तथा अन्य वन्य प्राणियों को इसी प्रकार  कम मात्रा मे खुराक दी जा रही है 

 उस हिसाब से समस्त खुराक  सौ किलो मटन मे निपटा दिया जाता है जबकि ज्ञात हुआ है कि जंगल सफारी के रख रखाव सुरक्षा, खानपान के लिए राज्य शासन द्वारा पृथक बजट जारी करता है जबकि यह भी बताया जाता है की सेंट्रल जू अथारीटी नई दिल्ली से भी करोड़ों  का बजट जारी होता है मगर कहते है दीया तले अंधेरा वाली उक्ति यहाँ चरितार्थ होते दिखाई बढ़ती है इतना बड़ा राशि होने के बावजूद समस्त राशि निर्माण एवं अन्य कार्यों मे वहन कर दिया जाता है पूर्व तत्कालिक जंगल सफारी (अधीक्षक) डायरेक्टर और बहुत से रेंजर वन कर्मी यदि पारदर्शी से कार्यों का निष्पादन करते तो आम लोगों का यह कथन है कि जंगल सफारी मे चांदी की पतली दीवार खड़ी हो सकती थी इस बात का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि छोटे से फॉरेस्ट गार्ड वन कर्मी भी नवा रायपुर के पॉश इलाके मे लाखों का मकाम ले  कर रखे है और चार पहिया गाड़ी मे चलते है 



  उसके बावजूद वर्तमान मे सफारी प्रबन्धन के डॉ राकेश वर्मा एवं तत्कालिक रेंजर ठाकुर की मिलीभगत  के चलते लगभग देड सौ किलो मटन की लाखों की राशि का खेल हो जाता है जानकार बताते है कि उन्हे मोबाइल स्क्रीन पर फोटो के स्वस्थ बकरे की फोटो दिखाई जाती है जिसकी कीमत एक बकरे की कीमत ही बीस से पच्चीस हजार रूपए  बताया जाता है जब उन्हे सफारी मे लाया जाता है तब दिखाए गए स्वस्थ बकरे के फोटो के स्थान पर बीमारू, मरियल बकरी काट कर शेर,सिंह,चीता,को खुराक दे दी जाती है जिसमे ए पी एस (अमानत राशि) की राशि सहित कम वजन होने की बात कह कर बैंक ड्राफ्ट सह वन मंडल अधिकारी के मध्यम से लाखों की राशि ले ली जाती है अब यह राशि कमीशन खोरी या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती है या परस्पर बंदर बांट हो जाती है यह तो ज्ञात नही परंतु यह सिलसिला  वर्षों से जंगल सफारी मे यह खेल- खेला जा रहा है जंगल सफारी मे गड़बड़ घोटाला, भ्रष्टाचार, और  अनीयमिताएं हर कदम पर विधमान है



 टिकट काउंटर मे टिकट ब्लेक से लेकर दैनिक वेतन भोगी कर्मियों की फर्जी ऑन लाइन तक की सैकडों पेमेंट जिन्हे विश्वासनीय  व्यक्तियों को कुछ राशि दे कर और आधार कार्ड के मध्यम से उगाही की जाती है यही वजह है कि चार पहिया वाहन से आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर चले जाते है जिनमे एक मनीष यादव नामक दैवेभो. कर्मी वर्षों से उसका लाभ उठा रहा है इसी प्रकार ऐसे बहुत से दैनिक वेतन भोगी अनियमित कर्मचारी वन कर्मियों की मिली भगत के चलते लाखों की राशि आहरण कर रहे है यही नही कुछ कर्मियों को देर सबेरा कार्य मे उपस्थित होने के बावजूद अनुपस्थिति दर्शा कर  उनकी राशि भी काट ली जाती है जिसकी वजह से कई बार सफारी कर्मचारी आंदोलम कर चुके है वर्तमान डी एफ ओ ने जब जंगल सफारी के नवा रायपुर से संचालन की बात कही तब बहुत से वन कर्मी उसका विरोध कर रहे थे उन्हे मालूम था कि नंदन वन, जंगल सफारी के यहाँ संचालन से काला पिला करने मे बहुत कठिनाई होगी इस लिए सफारी का संचालन पूर्व निर्धारित स्थान रायपुर से करने पर अड़े हुए थे.