सोमवार, 25 अप्रैल 2022

हज़रत शेर अली आगा आस्ताने में 26 वां रोज़ा को अफ्तार का कार्यक्रम

 हज़रत शेर अली आगा आस्ताने में 26 वां रोज़ा को अफ्तार का कार्यक्रम



रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स)प्रति वर्ष के अनुसार इस वर्ष भी रमजानुल मुबारक के पुरनूर मौके पर कुतुब ए  मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ हज़रत सय्यद शेर अली आगा रहमतुल्लाह अलैह औलिया चौक मोतीबाग स्थित बंजारी वाले वाले बाबा के आस्ताने में 26 वां रोजे में रोज़ा अफ्तारी का एहतमाम किया गया है



 जिसमे तमाम मुस्लेमीन रोजेदारों से पुरखुलूस गुजारिश की है कि ज्यादा से ज्यादा तादाद में शिरकत फ़रमाकर बाबा साहब के फैज ओ बरकात से मालामाल हो  यह जानकारी हज़रत शेर आली आगा रहमतुल्लाह अलैह  के सज्जादा नशीन जनाब नईम रिज़वी अशरफी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर  दी है 

बुधवार, 13 अप्रैल 2022

सेवा निवृत्त न्यायाधीश गुलाम मिन्हाजुद्दीन छग राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष निर्वाचित

 सेवा निवृत्त न्यायाधीश गुलाम मिन्हाजुद्दीन छग राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष निर्वाचित



रायपुर आदिम जाति तथा अनुसूचित विकास विभाग के द्वारा मनोनीत सदस्यों ने आज छग राज्य वक्फ बोर्ड कार्यालय के सभागार मे बैठक आहूत कर वक्फ बोर्ड अध्यक्ष निर्वाचन की प्रक्रिया पूर्ण की जिसमें अधिवक्ता फैसल रिजवी द्वारा सेवा निवृत्त न्यायाधीश जनाब गुलाम मिन्हाजूद्दीन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के नाम का प्रस्ताव रखा   जिसे उपस्थित सदस्यों ने एक मतेन छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के चेयरमैन/सभापति हेतु सेवनिवृत न्यायाधीश श्री गुलाम मिन्हाजुद्दीन के नाम पर अपनी सहमती प्रदान  कर निर्वाचित किया  उक्त महती बैठक में सम्माननोय सदस्य श्री फैसल रिज़वी अधिवक्ता,श्री इमरान मेमन पूर्व विधायक सुश्री,इफ्फत आरा भप्रसे फिरोज़ खान,साजिद मेमन,एवं कार्यालयीन अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे

कांसाबेल परिक्षेत्र - गोबर से सिर्फ वर्मीकम्पोस्ट खाद ही नही धूपबत्ती एवं कलात्मक सामग्री का निर्माण हो रहा है

 कांसाबेल परिक्षेत्र - गोबर से सिर्फ वर्मीकम्पोस्ट खाद ही नही धूपबत्ती एवं कलात्मक सामग्री का निर्माण हो रहा है


रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) छत्तीसगढ़ प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है यहां अधिकांश कृषक  कृषि कार्य मे ही पारंगत है यहां तक प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल स्वयं कृषक पुत्र है तथा कृषकों के धरती से जुड़ी भावनाओं को वे भली भांति समझते है महसूस करते है तभी तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो  सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ सरकार की सर्वाधिक महत्वाकांक्षी योजना नरवा,गरुवा, घुरूवा, बाड़ी योजना के वास्तविक धरा में लाने प्रमुखता से दिशा निर्देश दिए गए क्योंकि उक्त योजना का लाभ कृषक हित में ही किया गया है नरवा अर्थात ऐसे वन क्षेत्रों के नाला नुमा,ढलानी जल मार्ग जो वर्षा जल अनिश्चितता के बहाव में बह जाता था उसका लाभ किसी को भी नही मिल पाता ऐसे पर्वतीय,ऊबड़खाबड़,ढलानी क्षेत्र के  नाला अथवा जल मार्ग में स्टेप डेम,अथवा चेक डेम संरचना कर व्यर्थ होते जल को संरक्षित करने का शासन द्वारा पहल की गई नरवा प्रोजेक्ट के लिए राज्य शासन द्वारा कैम्पा मद से करोड़ों रुपये जारी किए है जिसका लाभ यह हुआ कि वनक्षेत्रों सहित अन्य जल मार्गों में जल संचयन होने से उक्त वन क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र में नरवा प्रोजेक्ट जनहित कारी साबित हुई.दूसरी गरुवा योजना जिसके तहत आवारा पशु एवं पशु पालकों के द्वारा छोड़े गए पशु जिनके द्वारा अंधेरे मुख्य मार्ग में बैठने से रात्रि में अनेक घटनाएं दुर्घटनाएं होती थी वन क्षेत्रों के वनों में मवेशियों द्वारा आवर्ती चराई से क्षति एवं खड़ी फसलों की चराई रोकने उनकी सुरक्षा हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत के माध्यम से गौठान का निर्माण कर उसकी सुरक्षा सहित गौठान के माध्यम से गोबर खरीदी कर जैविक वर्मी कम्पोस्ट खाद सहित अन्य लाभकारी योजनाओं का क्रियान्वयन समय समय पर किया जा रहा है जिसका लाभ ग्रामीण एवं कृषकों के हित मे अधिक मानी जा रही है है वही घुरूवा यानी कचरा या अपशिष्ट पदार्थों का संग्रहण कर सूखा,गिला कचरे का निष्पादन तथा उससे भी खाद निर्माण कर अतिरिक्त आय का स्त्रोत निर्माण किया जाना सुनिश्चित है शहरों नगरों में यह कार्य नगर निगम के माध्यम से कचरा कलेक्शन किया जा रहा है


परन्तु ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत के माध्यम से बकायदा  चार लाख रुपये की लागत से अतिरिक्त अपशिष्ट प्रबंधन (शेड)कक्ष का निर्माण किया गया है साथ ही ग्राम पंचायत के माध्यम  से सफाई उपकरण सहित कचरा निष्पादन हेतु रिक्शा ठेला इत्यादि प्रदाय कर स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है  इसके अलावा बाड़ी योजना का लाभ  गौठान में बाड़ी योजना के तहत कृषकों को लाभान्वित  करने के उद्देश्य से मौसमी साग,सब्जी,फल,एवं वानिकी पौधों के उत्पाद ताकि एक स्वस्थ दुदृढ़ भारत का निर्माण हो सके या ऐसे हितग्राही कृषक जो पांच डिसमिल भूमि के स्वामी है तथा आर्थिक आभाव के कारण वे उसका लाभ नही उठा पा रहे हैं ऐसे कृषकों को वन विभाग, शाकंभरी बोर्ड,उद्यानिकी विभाग सहित शासन के अन्य विभाग शाक सब्जी ,पेड़ पौधे सहित वर्मी कॉम्पोस्ट खाद निशुल्क प्रदान कर उसके आर्थिक सुदृढ़ता एवं समाज की मुख्य धारा से जोड़ने छग सरकार दृढ़ संकल्पित है  इसी महत्वाकांक्षी योजना की कड़ी में गोबर खरीदी के साथ उससे वर्मीकम्पोस्ट खाद निर्माण अनेक ग्रामीण महिला  स्व सहायता समूह को संलग्न कर उनके अतिरिक्त आय का साधन निर्मित  किया गया है परन्तु गौधन से  खाद उत्पाद तो सभी गौठनों मे दिखाई पड़ जाता है लेकिन  गोबर से आकर्षक जन उपयोगी सामग्री निर्माण केवल और केवल जशपुर वन मंडल अंतर्गत कांसाबेल में ही दृष्टि गोचर होता है जहां की महिला स्व सहायता समूह की दस महिलाओं ने गोबर से भिन्न भिन्न जनोपयोगी सामग्रियों का निर्माण कर एक अविश्वसनीय कार्य को विश्वसनीय बना कर  बे मिसाल उदाहरण प्रस्तुत की है

गौधन (गोबर)से कुछ नया निर्माण के पीछे की अविष्कारक जशपुर वन मंडल अंतर्गत कांसाबेल परिक्षेत्र की परिक्षेत्राधिकारी मैडम अनिता साहू केशरवानी है जिनकी आधुनिक दूर दृष्टि सोच ने वन क्षेत्र की महिला स्व सहायता समूह के लिए शुभ लाभ के साथ  रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त कर उनके आर्थिक  द्वारा खोल दिए जशपुर वन मंडल के कांसाबेल परिक्षेत्राधिकारी मैडम अनिता केशरवानी ने गौधन (गोबर) से नए सामग्री निर्माण के संबंध में बताया कि छग सरकार की सोच गौठान में स्थानीय निवासियों से दो रुपये में गोबर क्रय कर  महिला स्व सहायता समूह को संलग्न कर वर्मी कॉम्पोस्ट जैविक खाद निर्माण के साथ उसके पैकेजिंग कर प्रदेश भर के कृषि क्षेत्र में जैविक खाद को बढ़ावा देना साथ ही ग्रामीणों को भी आर्थिक लाभ पहुंचाना मुख्य मकसद था जशपुर वन मंडल अंतर्गत कांसाबेल परिक्षेत्र की रेंजर अनिता केशरवानी मैडम  आगे बताती है कि राज्य सरकार की महती गौधन योजना का लाभ संपूर्ण प्रदेश के ग्रामीण वर्ग उठा रहा है तथा सभी वर्मी कॉम्पोस्ट खाद का निर्माण कर रहे है तब मन मे विचार आया कि क्यों न ग्रामीणों के स्वरोजगार एवं आर्थिक मजबूती के लिए कुछ नया कार्य किया जाए सोशल मीडिया और नेट पर खोज करने पर और बहुत विचार करने पर गौधन(गोबर)से क्यों न सामग्री निर्माण किया जाए इसके लिए जशपुर वन मण्डलाधिकारी कृष्णा जाघव साहब से चर्चा कर इस ओर कार्य को अमलीजामा पहनाने की सोची तथा इसके निर्माण हेतु स्वानंद गौ विज्ञान केंद्र नागपुर से एक प्रशिक्षित टीम जशपुर वन मंडल अंतर्गत सुदूर सघन वन क्षेत्र कांसाबेल परिक्षेत्र पहुंची यहां रहते  विभाग के माध्यम से तीन दिनों के कार्यशाला का आयोजन किया गया तथा कांसाबेल, पोंगरो,लमडांड



ग्राम क्षेत्र की लगभग 30 महिलाओं ने बड़ी तल्लीनता और बारीकी से गोबर द्वारा सामग्री निर्माण का  प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा धूप बत्ती निर्माण में महारत हासिल की कांसाबेल परिक्षेत्राधिकारी मैडम अनिता केशरवानी ने आगे बताया कि वन परिक्षेत्र  वन ग्राम में होने से कांसाबेल के द्वारा आवर्ती चराई के रोकथाम की दृष्टिगत गौठान निर्माण कर वहां गोबर खरीदी सहित वर्मीकम्पोस्ट खाद निर्माण कर शासकीय योजना का अक्षरशः पालन किया जा रहा था परन्तु इसके अतिरिक्त गौधन से नया और क्या निर्माण किया जाए कि गोबर की महत्वता और बढ़ जाए  क्योंकि प्रायः देखा जाता रहा है कि गाय गरुवा को प्रारंभ से ही छत्तीसगढ़ के ग्रामीण गौ माता समझ कर पूजते रहे उसके   गोबर के उपले (छेना) से लेकर कुटिया में लिपाई,छपाई,तक कि जाती है भोजन निर्माण सहित बच्चों की सिंकाई,एवं मच्छर भगाने के उपयोग में  आज भी गोबर जलाया जाता है इस संदर्भ में यहां प्रचलित है कि गौधन उपयोग से घर परिवार व्यधि मुक्त होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा और धन धान्य से संपन्न रहता है



 इसलिए भी गौधन की महत्वता और उसके नवीन उत्पाद एवं उपयोग के लिए जशपुर वन मंडल अंतर्गत कांसाबेल वन परिक्षेत्र में महिला स्व सहायता समूह को गौधन (गोबर )से धूप बत्ती, आकर्षक कलात्मक दीया, सबरानी कप, धुप बत्ती स्टैंड,मोबाइल स्टैंड , मोमेंटो, शुभ लाभ, मूर्तियां एवं अन्य घरेलू सामग्री निर्माण हेतु  नागपुर शहर के  प्रशिक्षित टीम के द्वारा लगातार तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्य शाला का आयोजन कर समूह की महिलाओं को दक्ष किया गया गोबर से सामग्री निर्माण कर कौशल उन्नयन  माध्यम से कांसाबेल परिक्षेत्र की स्व सहायता समूह आत्म निर्भर हो कर  इसे स्वरोजगार का साधन सृजन कर लिया है अब संतोषी महिला  स्व सहायता द्वारा  मधुबन गौ धूप बत्ती के नाम से इसका निर्माण और पैकेजिंग की जा रही है जिसका बेहतर प्रतिसाद स्थानीय स्तर पर प्राप्त हो रहा है



 कांसाबेल परिक्षेत्राधिकारी मैडम अनिता केशरवानी आगे बताती है कि संतोषी महिला स्व सहायता समूह द्वारा निर्मित मधुबनी गौ धूपबत्ती एवं उनके द्वारा निर्मित स्टैंड को काफी पसंद किया जा रहा है तथा गौधन प्रकृति उत्पाद की लगातार बढ़ती मांग को  ध्यान में रखते हुए वन विभाग संतोषी स्व सहायता समूह को पांच लाख का ऋण  चक्रीय निधि से प्रदाय किया गया ताकि गौधन से निर्मित सामग्री उत्पाद में धन की कमी न आए तथा मांग की पूर्ति सहजता पूर्वक की जा सके कांसाबेल  परिक्षेत्राधिकारी अनिता केशरवानी मैडम ने आगे बताया कि धूप बत्ती पांच अलग अलग फ्लेवर में निर्माण किया जा रहा है जिसमे हवन,चंदन,गुगुल, सबरानी, लोभान,इत्यादि शामिल है इसके फ्लेवर सुगंध में किसी रसायनिक पदार्थ का उपयोग नही किया जाता बल्कि नैसर्गिक लकड़ी,पत्तों, एवं, गोंद का उपयोग किया जाता है जो संपूर्ण वातावरण को महका देता है धूपबत्ती का एक पैकेट जिसमे  15 नग और स्टैंड का  मूल्य  30 रुपये रखा गया है जो हाथों हाथ खरीदा जा रहा है 


बताया गया है कि वर्तमान समय मे संतोषी महिला स्व सहायता समूह द्वार लगभग दस हजार रूपये की शुद्ध आय की प्राप्ति हुई है जिससे समूह की महिलाएं काफी उत्साहित है संतोषी महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष बताती है कि धूप बत्ती निर्माण पूर्णतः रसायन से मुक्त उत्पाद  है तथा इसमें सुगंध हेतु प्रकृति से प्राप्त चंदन,लोभान,व पत्तों के महीन बुरादे एवं सूखे गोबर को पीसकर छानकर उसके पावडर चूर्ण से  धूपबत्ती का निर्माण किया जाता है



 बेहतर सुगंध और लंबे समय तक जलने वाले मधुबन गौ उत्पाद धूप बत्ती की ख्याति और मांग निरन्तर बढ़ती जा रही है  धूपबत्ती की ख्याति और मांग का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि धूपबत्ती के लगभग पांच हजार पैकेट निर्माण किए जाने की तैयारी की जा रही है कांसाबेल परिक्षेत्राधिकारी अनिता केशरवानी मैडम का कथन है कि शीघ्र ही विभाग के माध्यम से ऑन लाइन बिक्री हेतु प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है जिसे संपूर्ण देश मे इसके विक्रय हेतु प्रयास किए जा रहे है कांसाबेल परिक्षेत्राधिकारी अनिता साहू मैडम  आगे बताती है कि गोबर से केवल मधुबनी गौ उत्पाद धुपबत्ती ही नही बल्कि बहुत सी कलात्मक वस्तुएं भी निर्माण किए जा रहे है जिनमें मुख्यतः कलात्मक दीए, धार्मिक चिन्ह, शुभ लाभ,मूतियाँ इत्यादि निर्माण किए जा रहे है इसके निर्माण हेतु गोबर सहित अन्य आर्गेनिक वस्तुएं मिक्स की जाती है जिससे कि इसके जुड़ाव और मजबूती प्रदान करता है जैसा कि हाल ही के बजट प्रस्तुति के समय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा गोबर से निर्मित सूटकेस का उपयोग कर प्रदेश वासियों को यह सन्देश देने का प्रयास किया  था कि गौधन से निर्मित उत्पाद के उपयोग से एक तो धन धान्य और लक्ष्मी की कृपा सदैव बरसती रहेगी तथा उपयोग पश्चात टूटफूट होने पर इसके नष्टीकरण से पर्यावरण सुरक्षित एवं  संरक्षित रहेगा इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए गोबर से निर्मित अनेक उत्पादों का निर्माण सांचे में ढालकर निर्माण किया जा रहा है पश्चात इसे प्राकृतिक रंग से पेंट कर आकर्षक बनाई जाती है जिसे आम जन देखते ही पसंद कर रहे है और क्रय कर अपने घरों की शोभा बढ़ा रहे है



 सबसे मजेदार बात यह है कि गौधन से निर्मित वस्तुएं बहुत ही हल्की फुल्की एवं सस्ते दाम में उपलब्ध हो जाती है जो एक आदमी के पहुंच में होता है कांसाबेल वन परिक्षेत्र के महिला स्व सहायता समूह द्वारा गोबर से निर्मित सामग्री और लगातार उसकी बढ़ती मांग को देखते हुए किए जा रहे कार्यों की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है यदि इसी तरह इसकी मांग बरकरार रही तो आने वाले समय मे प्रदेश भर की महिला स्व सहायता समूह द्वारा इसके प्रशिक्षण एवं नव उत्पाद में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर एक नए  आर्थिकी क्रांति युग का सूत्रपात कर सकती है जिसका उदाहरण कांसाबेल परिक्षेत्र के महिला स्व सहायता समूह ने परिक्षेत्राधिकारी अनिता केशरवानी मैडम के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रारंभ भी कर दी गई है जो प्रशंसनीय,एवं सराहनीय है

शनिवार, 9 अप्रैल 2022

आयुर्वेद ग्राम दुगली के वन धन उत्पाद से छत्तीसगढ़ का हर्बल बना संजीवनी

 आयुर्वेद ग्राम दुगली के वन धन उत्पाद से छत्तीसगढ़ का हर्बल बना संजीवनी 


रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) वन  धन  का अर्थ प्रदेश भर में अच्छादित संपूर्ण वन क्षेत्रों में पाए जाने वाले वनोपज सहित  जैव विविधताओं, का आकूत भंडार होना है जो वन्य जीवों सहित पर्यावरण और प्रकृति के द्वारा होने वाले परिवर्तन में उसके विरुद्ध जैविक संरचनाओं के विविध नैसर्गिक पदार्थ उपलब्ध कराते है तथा प्रकृति सहित मानव जीवन को बचाने अपनी अहम भूमिका निभाते है यह सब प्रकृति की प्रक्रिया होती है जिसका ऋण मानव तो क्या कोई  भी करोड़ों की संपति देकर भी चुका नही सकता पर इस धरती पर विस्तृत भूभाग में अच्छादित वन से प्राप्त होने वाले वनोपज के रूप में मानव को ऐसे बहुत से आयुर्वेद औषधि प्रदान कर रखा है जो समस्त जीव जंतु  प्राणी सहित मानव के लिए किसी संजीवनी से कम नही  अर्थात वन एवं उनमें उगने वाले पेड़ पौधे से मिलने वाले वनोपज हमे पर्यावरण संतुलन के साथ ही हमारे स्वास्थ्य जीवन के प्रति कितने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है इसका भान मनुष्य को तब होता है जब मानव के द्वारा निर्मित वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ उत्पादित विदेशी रसायनिक औषधियां असफल हो जाते है तब वहां प्रकृति खजाने के वनोपज एवं उससे निर्मित वनोत्पाद  मानव स्वास्थ्य के लिए किसी संजीवनी का कार्य प्रारंभ करता है जो किसी अमरत्व प्रदान करने से कम नही एक प्रकार से देखा जाए तो सही मायनों में वन धन यही है ऐसे वनोपज जो मानव को आर्थिक लाभ के साथ  जीवन स्वास्थ्य के लिए संजीवनी एवं उनको अमरता  प्रदान करने वाली वन  धन को सहेजने के उद्देध्य से ही प्रदेश का वन एवं जलवायू  विभाग द्वारा वन धन केंद्र स्थापित कर वनों से प्राप्त होने वाली  वनोपज के समर्थन मूल्य  तय कर वनवासी वनादिवासियो से क्रय कर आज उनके आर्थिकी,सामाजिकी उत्थान के रूप में संबल प्रदान कर रहा है तथा आज ऐसे वन वासी, वनादिवासी कृषक  कृषि सहित वनोपज संग्रहण के साथ उसके देशी उत्पाद में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर आत्मलंबी बन रहे है 



 धमतरी वन मण्डल अंतर्गत आयुर्वेद ग्राम दुगली का नाम आज देश के नक्शे में आयुर्वेद उत्पादक ग्राम  के नाम से प्रसिद्ध हो चुका है यहां के प्रसंस्करण केंद्र में उत्पाद सामग्री आज देशभर में विक्रय किए जा रहे है आयुर्वेद ग्राम दुगली के 2009 से प्रोसेस यूनिट में तीखुर से लेकर शहद तथा वनोपज के अनेक  जीवनदायिनी उत्पाद निर्माण किए जा रहे है जो उसके लगातार लोकप्रियता के नए मापदंड तय कर रहा है इसका मिसाल तब देखने मिलता है जब ग्राम दुगली के उत्पाद एवं प्रदेश के अन्य वन प्रबंधन समितियों,महिला स्व सहायता समूह के द्वारा उत्पादित निर्मित वनौषधि, खाद्य सामाग्री,प्रदेश भर में छत्तीसगढ़ हर्बल के नाम पर वनौषधि विक्रय केंद्र संजीवनी के माध्यम से विक्रय की जा रही है तथा वन धन का सही उपयोग किया जा रहा है धमतरी वन मंडल अंतर्गत आयुर्वेद ग्राम दुगली के सन्दर्भ में एसडीओ टी आर वर्मा ने बताया कि  आयुर्वेद ग्राम दुगली में  वर्ष 2002 से धमतरी वन मंडल अंतर्गत दस युवा लड़कियों की एक छोटी से कोशिश जो महिलाओं द्वारा   पहली महिला स्व सहायता समुह के रूप में गठित की गई थी धमतरी वन मंडल का उद्देश्य पिछड़े और विकास से कोसों दूर वनवासियों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के माध्यम से उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने तथा आत्मनिर्भर बनाने हेतु  निर्माण किया गया था



सघन  वन क्षेत्र में मिलने वाले तीखुर शहद नीम,आंवला, इमली सहित अन्य वनोपज के माध्यम से लघु व्यवसायिक दृष्टिकोण से जागृति महिला स्व सहायता समूह का गठन कर उनके द्वारा कार्य प्रारंभ किया गया इसके लिए धमतरी वन मंडल के तहत दस लाख का प्राथमिकी (लोन) ऋण लेकर एक छोटी सी शुरुआत की गई थी जागृति महिला स्व सहायता समूह के निरन्तर मेहनत,लगन, एवं विशुद्ध देशी वनोपज वन धन  से निर्मित उत्पाद को स्थानीय स्तर पर काफी पसंद किया गया जिनमे शहद से लेकर आंवला, नीम, इमली, दोनापत्तल,तीखुर,केतकी रस्सी,बैचांदी, एवं अन्य उत्पाद शामिल थे  जिसके सार्थक परिणाम सामने आए तथा आयुर्वेद ग्राम दुगली दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करने लगा जब यहां के देशी  वनोपज उत्पाद विस्तार के साथ और अधिक बढ़ने लगा तब इसके अन्य प्रोसेसिंग यूनिट भी बढ़ाए गए तथा नए नए यूनिट लगाए गए बिरगुड़ी रेंज के परिक्षेत्राधिकारी श्री दीपक कुमार गावड़े का कथन है कि वनों से प्राप्त वनोपज के सही  उत्पाद एवं निर्माण से  ग्राम दुगली  की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई है साथ ही वनोपज की अल्पता होने पर बहुत से औषधियों का उत्पाद महिला स्व सहायता समूह के मांग अनुसार कोलियारी नर्सरी में किया जाता है जिससे इन्हें औषधियों की कमी नही पड़ती तथा उनके ही द्वारा वर्मी कॉम्पोस्ट खाद से लेकर बहुत से वानिकी पौधों का उत्पाद भी महिला स्व सहायता समूह के द्वारा की जा रही है इस संदर्भ में दुगली आयुर्वेद ग्राम के परिक्षेत्राधिकारी नदीम कृष्ण बरिहा ने बताया कि यहां प्रसंस्करण केंद्र में महिला समूह पूरी तन्मयता,और निष्ठा ईमानदारी  से वनोपज औषधियों सहित अन्य निर्माण कार्य भी करती है जो अपने कार्यों में पारंगत है चाहे वह तीखुर साफ सफाई से लेकर पिसाई,सुखाई,एवं पैकेजिंग समस्त कार्यों अपने हिसाब से करती है  दुगली परिक्षेत्राधिकारी नदीम कृष्ण बरिहा ने आगे बताया कि स्थानीय समस्त  महिला स्व सहायता समूह आंवला दोना पत्तल  शहद नीम उत्पाद साबुन के अलावा अन्य उत्पाद का निर्वहन बड़ी कुशलता से करती है तथा वे आज क्षेत्र  दुगली का नाम रौशन कर रही है प्रसंस्करण केंद्र दुगली के प्रभारी मधुकर जी एवं कार्यपालक प्रतिनिधि वेद प्रकाश देवांगन से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि एच. डब्ल्यू. एफ.पी.के तहत ऐसे गैर काष्ठ वन  उत्पाद का संकलन ग्रीष्म ऋतु में किया जाता है जिनमे जंगली शहद, इमली, आम, तेंदू पत्ता, साल के पत्ते, महुआ के बीज, नीम के बीज, करंज के बीज, महुआ के फूल और तेज़पत्ता इत्यादि शामिल हैं इसका संकलन करने से वार्षिकी टारगेट लगभग पूर्ण किया जाता है जिनमे तीन माह तीखुर बैचांदी सहित अन्य उत्पाद संपादित किए जाते है जिनमे उसके साफ सफाई के अलावा उसकी पिसाई इत्यादि शामिल है इसके पश्चात तीखुर पावडर को सूर्य की रौशनी में सुखाया जाता है जिसे बाद में आकर्षक पैकिंग इत्यादि की जाती है जो उपवास में काफी गुणकारी माना जाता है यही नही अन्य वनोंपज उत्पाद को भी छ माह एवं वार्षिकी स्तर पर उत्पाद एवं आकर्षक पैकेजिंग की जाती है जिसे स्थानीय स्तर पर एवं प्रदेश के रायपुर सहित अन्य स्थलों में विक्रय हेतु भेजा जाता है रायपुर में इसे बी मार्ट में आयुर्वेद उत्पाद को वितरक के माध्यम से संग्रहित कर अन्य स्थलों पर इसका विक्रय मांग अनुरूप किया जाता है एक प्रकार से रायपुर स्थित बी.मार्ट  मुख्य डिस्ट्रीब्यूटर है जहां से उत्पाद मांग एवं क्षमता अनुसार  भेजी जाती है



कार्यपालक प्रतिनिधि वेद प्रकाश देवांगन ने आगे  बताया कि  (NTFP)नॉन टिम्बर फॉरेस्ट प्रोडक्ट के तहत प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले ऐसे उत्पाद हैं जो एक विशेष मौसम पर निर्भर होते हैं। वनों में निवासरत वनवासी एवं मूल जनजातियाँ मार्च-जून महीने के दौरान जो  वनो के उपज अर्थात वन धन  संग्रहण काल का होता है उसके  समर्थन  मूल्य विक्रय से ही वनवासियों के कुल वार्षिक आय का 50/प्रतिशत से अधिक आय वनोपज के बिक्री कर अर्जित कर लिया जाता  हैं। इससे ऐसे वनवासियों,आदिवासियों को उनके द्वारा संग्रहित वनोपज का राज्य शासन के द्वारा  निर्धारित समर्थन मूल्य  की दर से वनोपज सहकारी संघ मर्यादित द्वारा खरीदी किया जाता है जिससे वनवासियों,वनादिवासियों को वनोपज का सही लाभ प्राप्त हो जाता है साथ ही वर्षों से बिचौलिए एवं ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण से इनकी  सुरक्षा भी हो जाती है अब पूर्व की भांति से वनों में वर्षो से निवासरत कमार,सहित जनजाति, वनवासियों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है तथा प्रदेश के वनोपज सहकारी संघ के निर्धारित दर पर ही अपने कच्चे वनोपज का विक्रय करते है  वही सहकारी संघ की दूरी या विशेष परिस्थितियों में  सीधे तौर पर भी समीप स्थित विभाग अथवा आयुर्वेद ग्राम दुगली के द्वारा वनोपज क्रय कर लिया जाता है दुगली प्रोसेसिंग सेंटर के कार्यपालक प्रतिनिधि वेद प्रकाश देवांगन ने आगे बताया कि वर्तमान प्रोसेसिंग सेंटर से लगभग 30 महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं संलग्न है जो वनोपज उत्पाद, से क्रय तक उसके साफ सफाई सहित अन्य 25 से ऊपर प्रकार के वन उत्पाद से बड़ी स्वच्छता एवं सावधानी पूर्वक सामग्री निर्माण करती है जैसे आयुर्वेद ग्राम दुगली मे आंवला के तीन से चार  प्रकार के वेरायटी निर्माण किए जाते जिनमे आंवला जूस ,आंवला नमकीन  कैंडी, आंवला लच्छा आदि शामिल है  उसी प्रकार अन्य नौ प्रकार के चूर्ण अर्जुन तुलसी चूर्ण,अश्वगंधा, शतावर,कालमेघ,त्रिफला चूर्ण ,तीखुर पावडर, जैसे अनेक  वनोपज उत्पाद  शामिल किया गया इसमें शहद प्रोसेसिंग की एक अलग यूनिट इकाई लगाई गई है जो पहले वनों से लाए गए शहद को  50 से साठ डिग्री फेरन हीट  तापमान में उसे कीटाणु रहित किया जाता है पश्चात इसमें लगे छाते को पृथक कर बड़ी सावधानी पूर्वक अन्य प्रोसेसिंग के बाद शहद की पैकेजिंग की जाती है दुगली प्रोसेसिंग यूनिट के कार्यपालक प्रतिनिधि वेद प्रकाश देवांगन आगे बताते है कि हमारे दुगली आयुर्वेद ग्राम के औषधि, चूर्ण, तेल,खाद्य वस्तुओं, सहित अन्य जनोपयोगी उत्पाद को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य मंत्रालय(ट्राइफेड) भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट मालकांगनी तेल निर्माण को लेकर गत वर्ष 2021में वन धन विभाग को द्वितीय पुरुस्कार दिया गया जो धमतरी वन मंडल अन्तर्गत हमारे आयूर्वेद ग्राम दुगली के विकास,उन्नति, प्रगति के क्षेत्र में नए अध्याय के रूप में अंकित हुआ  है वर्तमान कोरोना काल मे आई भयावह विपदा को ध्यान में रखकर धमतरी वन मंडल अंतर्गत कोलियारी नर्सरी में 26 हजार से ऊपर एलोवेरा  पौधों का उत्पाद किया गया था जो स्थानीय आयुर्वेद ग्राम दुगली महिला स्व सहायता समूह के द्वारा संपादित किया गया था  उनके द्वारा ही एलोवेरा के पौधे की बडे पत्ते का उपयोग कर विभिन्न उत्पाद किए जा रहे है जिनमें एलोवेरा जूस,बॉडी जेल,शैम्पू, साबुन ,हैंडवॉश, निर्माण किए गए जिसका स्थानीय स्तर से अधिक शहरों  के बाजारों में अच्छा प्रतिसाद मिला है इसके लिए बी.मार्ट के माध्यम से  विक्रय हेतु बड़ा बाजार तैयार हो चुका है 



श्री देवांगन ने आगे बताया कि धमतरी जिला यूनियन अंतर्गत तीन अन्य प्रोसेसिंग यूनिट सफलता पूर्वक संचालित की जा रही है जिनमे मुख्यतः ग्राम सांकरा,केरेगांव,एवं बिरगुड़ी में  भी वनोपज से औषधि युक्त सामग्री निर्माण की जा रही है ग्राम सांकरा  सफेद मूसली के लड्डू जो बलवर्धक माना गया है उसका उत्पाद किया जाता है बिरगुड़ी रेंज में हर्बल हवन सामग्री उत्पादन होता है तथा केरे गांव में धूपबत्ती सहित अन्य जनोपयोगी सामग्री का सफल संचालन स्थानीय महिला स्व सहायता समूह ,वन प्रबंधन समितियां संचालित कर रही है   वही वनोपज से औषधि एवं अन्य प्रकृति उत्पाद के प्रोत्साहन को लेकर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा अनुषांगिक धड़े को तैयार किए हुए है वैसे प्रदेश भर मे वन विभाग द्वारा ऐसे  छोटे बड़े, स्व सहायता समूह ,वन प्रबंधन समितियों के आर्थिक उत्थान हेतु  सदैव सहयोग एवं लोन प्रक्रिया में महती भूमिका का निर्वहन करता ही है परंतु इसके अलावा भी औषधि पादप बोर्ड,वनोपज सहकारी संघ,वन धन केंद्र जैसी सहयोगी संस्थान भी वनवासियों, को औषधि की खेती और उसके उत्पाद हेतु कृषकों हितग्राहियों को लोन प्रदाय करती है तथा उसमे सब्सिडी देने का प्रावधान भी मौजूद है 




इस सिलसिले मे नवा रायपुर अटल नगर स्थित वन धन भवन केंद्र मुख्यालय के वरिष्ठ कार्यकारी संचालक श्री अमरनाथ प्रसाद साहब से कुछ माह पूर्व की गई चर्चा का स्मरण हो रहा है जब दुर्ग पाटन स्थित नए प्रोसेसिंग यूनिट का आधारशिला प्रदेश के  मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के द्वारा रखी जा रही थी तब वन धन भवन मुख्यालय में हुई संक्षिप्त भेंट में उन्होंने बताया था कि पाटन के बृहद भूभाग में वनोपज एवं शुद्ध देशी औषधियों के आधुनिक प्रोसेसिंग सेंटर निर्माण किया जाएगा इसके रॉ मटेरियल, स्वयं वन विभाग उपलब्ध कराएगी वन धन केंद्र  के  कार्यकारी संचालक श्री अमरनाथ प्रसाद साहब ने आगे बताया कि ऐसे प्रयास किए जा रहे है कि प्रोसेसिंग सेंटर को निजी हाथों महिला स्वयं सहायता समूह समाजिक संस्थान अथवा किसी हर्बल उत्पाद कंपनी के साथ अनुबंध समझौता कर गठ बंधन  किया जाएगा जिसकी लाभांश राशि राज्य शासन को प्राप्त होगी वही सुप्रसिद्ध आयुर्वेद कंपनी, संस्थानों के साथ अनुबंध गठबंधन से स्थानीय छत्तीसगढ़ हर्बल की पृथक पहचान निर्मित होगी  अथवा उसके बैनर तले छत्तीसगढ़ वनोपज एवं औषधियों का विक्रय भी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर ढंग से हो सकेगा उत्तरोत्तर विकास की राह में अग्रसर वन धन के सहयोग से संचालित छत्तीसगढ़ हर्बल के उत्पाद संजीवनी के माध्यम से एक विशाल बाजार तथा लोगों को आयुर्वेद की ओर आकर्षित करने का  दायित्व पर खरा उतारने वन धन के प्रबंधक श्री  संजय शुक्ला साहब की दूरदृष्टि और अनुभव  की प्रशंसा करना अनिवार्य हो जाता है कि आज उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश भर में वन विभाग के अधीन  संचालित अनेक महिला स्व सहायता समूह ,वन प्रबंधन समितियां ,एवं वन सुरक्षा समितियों के समाजिक और  आर्थिक विकास हेतु वनोपज से लाभ के उद्देश्य से उनके पारंपरिक ज्ञान का सदुपयोग करते हुए औषधियों सहित अन्य वस्तुओं का उपरोक्त समूहों के माध्यम से  निर्माण उनके आर्थिक सामाजिक उत्थान के न केवल सेतु बने बल्कि उनके द्वारा निर्मित उत्पाद एवं छत्तीसगढ़ हर्बल को नई पहचान निर्मित करने उसके विक्रय हेतु संजीवनी केंद्र का आधुनिक,आकर्षक ,शॉप निर्माण करवाया जो आम लोगों के कौतूहल के साथ आकर्षण का केंद्र बिंदु भी बना  मानव के स्वास्थ्य निराकारण वाली वनोत्पाद औषधियां,खाद्य पदार्थ से लेकर तेल साबुन शैम्पू तक एक ही छत के नीचे उपलब्ध करा कर वन धन के नाम एवं उसके महत्व को परिभाषित कर भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बन गए है



  इसके लिए वन धन केंद्र के डायरेक्टर श्री संजय शुक्ला साहब ने भिन्न भिन्न योजनाओं के माध्यम से अपने अधीनस्थ अधिकारीयो को  जंगलों में निवासरत वन वासियों और वनादिवासियों के बीच पहुंचाकर उन्हें जागरूक करना विभिन्न क्षेत्रों में वनोपज एवं उसके उत्पाद से उन्हें होने वाले लाभ से अवगत कराना भी किसी चुनौती से कम नही था फिर भी उन्होंने अपने अधिकारियों को उनके ही क्षेत्रों में कार्यशाला लगाकर वन वासियों के निरन्तर चहुमुंखी विकास के पथ में अग्रसर करते रहे इसके लिए बाकायदा वन धन के मुख्यालय में अधिकारी आनँद बाबू जैसे दक्ष अधिकारी के देखरेख में बस्तर सहित अनेक अन्य पिछड़े और अविकसित क्षेत्रों में कार्यशाला का आयोजन कर भिन्न भिन्न वनोपज वस्तुएं,औषधियां, खाद्य वस्तुएं इत्यादि का सफल प्रशिक्षण द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वावलंबी और आत्म निर्भरता का नया अध्याय विकसित कर दिया  वन धन विकास केंद्र के द्वारा समय समय पर पिछड़े और अविकसित क्षेत्रों में ऐसे  विशाल कार्यशाला का आयोजन कर वनोपज से मिलने वाली वस्तुएं, औषधियों के  प्रचार प्रसार गतिशीलता प्रदान करने का ही परिणाम रहा कि आज छत्तीसगढ़ हर्बल  के निर्मित औषधियों का बहुत बड़ा  बाजार खुला हुआ और विकसित है जो छत्तीसगढ़ हर्बल के संजीवनी नाम से प्रत्येक नगर शहर,महानगर में दृष्टिगोचर हो रहे है जिसका अच्छा प्रतिसाद भी अब मिल रहा है अब लोगों का रुझान बकायदा वनोपज उत्पाद सामग्री की ओर बढ़ रहा है लोग साबुन तेल से लेकर खाद्य वस्तुओं आचार पापड़ से लेकर विशुद्ध देशी औषधियों का क्रय कर रहे है यही नही औषधि पादप बोर्ड विभाग तो बकायदा पारंपरिक वैधराज  की सेवाएं भी ले रहे है तथा उनके मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ हर्बल के संजीवनी से औषधियां प्राप्त की जा रही है एक प्रकार से देशी औषधियों का विशाल बाजार प्रदेश में विभाग के द्वारा संचालित हो रहा है तथा इसका प्रतिसाद भी पहले से बेहतर मिल रहा है अब लोगों में जागरूकता आ रही है कि आदि काल मे ऋषि मुनियों और तपस्वियों ने जिस तपस्या के साथ मानव स्वस्थ हित की सुरक्षा के लिए देशी वनोपज   से असंख्य औषधियों की खोज की थी वह नई 21 सदी के आधुनिक सोच ने बिसरा दिया था परन्तु ईश्वरीय प्रकोप कोरोना के आने के पश्चात वनौषधि  गिलोय,चिरायता से लेकर अन्य वनोपज के अनवरत उपयोग से जिस तरह चमत्कारिक रूप से उंसके परिणाम सामने आए वह विस्मृत कारी कर देने वाला रहा  तथा प्राकृतिक औषधियों के  समक्ष मानव नतमस्तक हो गया  मानव का रुझान पुनः प्राचीन देशी औषधियों के प्रति  बढ़ रहा है बेशक, मानव आधुनिक दवाओं का उपयोग न करे ऐसा नही कहते मगर आम व्यक्ति जिसकी आय इतनी कम है कि वह महंगी और पहुंच से बाहर विदेशी अंग्रेजी दवाइयों का उपयोग कर सके उसके लिए   प्रकृति द्वारा प्रदत्त अमूल्य औषधियां भी ईश्वरी देन है जो आज भी उतनी ही प्रभावशाली और असरकारक है जितनी सतयुग मे  प्रभु राम के भ्राता श्री लक्ष्मण के लंका युद्ध के दौरान हुए प्रहार से मृतप्रायः अचेतना के लिए श्री पवन पुत्र हनुमान जी के द्वारा लाए गए संपूर्ण पहाड़ से जगमग करते आयुर्वेद औषधियों की पत्तियां किसी संजीवनी से कम नही थी  वैसे भी छत्तीसगढ़ प्रदेश की पावन धरा  वनवास काल में प्रभु श्री राम के वन गमन के दौरान हुए चरण स्पर्श से ही यह धरा धन धन्य से परिपूर्ण हो चुका है यहां का प्रत्येक कण सोना  और प्रत्येक पत्ता औषधि है केवल आवश्यकता है अब उन पत्तो और बूटा के शोध की जो ईश्वरीय संरचना  का अमृतपान कराने पर्याप्त है जिसके अवगुण तलाशने और तराशने वन विभाग प्राचीन रीत पद्धति के साथ आधुनिक शोध कर नए उत्पाद पर जोर दे रही है प्रकृति द्वारा प्रदत्त औषधियों के प्रति लोगों का लगातार रुझान और मांग को देखते हुए वन विभाग  नए वित्त वर्ष में छत्तीसगढ़ हर्बल और उसके उत्पाद शुल्क में आठ से दस  प्रतिशत  वृद्धि पर विचार कर रहा है जो शीघ्र ही विभागीय बैठक पश्चात इसके मूल्य वृद्धि पर मुहर लग सकती है 

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

तपकरा परिक्षेत्र में खरपतवार लेंटाना वेस्ट से बेस्ट सामग्री निर्माण कर स्वावलंबी बन रही वन प्रबंधन समितियां

 तपकरा परिक्षेत्र में खरपतवार लेंटाना वेस्ट से बेस्ट सामग्री निर्माण कर स्वावलंबी बन रही वन प्रबंधन समितियां

छत्तीसगढ़ वनोदय 

छत्तीसगढ़ के नाम से ही यह भान हो जाता है कि प्रदेश में अवश्य ही छत्तीस राज्यों का (गढ़)रहा होगा जहां अपनी अपनी रियासत में राजा राज करते रहे हैं इन्ही रियासतों में प्रदेश के अंतिम सिरे में जशपुर क्षेत्र का राज्य भी काफी सुप्रसिद्ध, रहा है अंतिम छोर इसलिए कि यहां पर झारखंड राज्य का सीमा लगती है तो दूसरी ओर उड़ीसा बॉर्डर भी है पूर्वकाल में यहां डोम वंशी राजाओं का राज रहा था तत्कालीन जशपुर राज क्षेत्र काफी विस्तृत,एवं समृद्ध शाली रहा था भगौलिक परिस्थिति भी अनुकूल, मनोहारी और आकर्षक रहा है यहां चारों ओर समानांतर ऊंचाई लिए पर्वतीय क्षेत्र तथा उनसे गिरते अनेक झील चाहे वह राजपुरी झील,रानी दाह ,गुल्लू,दंगारी झील हो या फिर बादलखोल वाइल्ड लाइफ ही क्यों न हो संपूर्ण क्षेत्र रमणीय एवं मनमोहक है जशपुर की धरती और मिट्टी में उर्वरता एवं समृद्ध जैव-विविधता, पर्याप्त गौण खनिज , बेहतर  जल स्त्रोत के साधन , शांत वातावरण और ईमानदार, मेहनती, शांतिप्रिय निवासी यहां की थाती है जशपुर वन मंडल अंतर्गत तपकरा परिक्षेत्र  जो साल,सागौन जैसे इमारती काष्ठों वाले पेड़ों के विशाल  वन क्षेत्र से घिरे होने के बावजूद यहां पर गजदल की आमद सदैव बनी रहती है यहां के निवासियों में यह भय सदैव बना रहता है कि कब यहां हाथियों का आगमन हो जाए और उनके परेशानियों,एवं कठिनाइयों  का दौर प्रारंभ हो जाए इसके लिए जशपुर वन मंडल द्वारा जनजागरण सहित अनेक उपाय कर आम लोगों को हाथी मानव द्वंद एवं बचाव सुरक्षा के लिए उन्हें जागरुक करते रहते  है  एक प्रकार से तपकरा वन परिक्षेत्र के निवासी हाथी दल के खतरे के साथ डर और भय के साए में अपना जीवन व्यतीत करने विवश है


फिर भी इस  दहशत भरे वातावरण में प्रदेश वन विभाग के जनहित,कल्याणकारी योजनाओं को वास्विकता की धरा पर पूर्ण  ईमानदारी से उतारने एवं लोगो के सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था सुदृढ करने के उद्देश्य से युवा, जुझारु,निडर,कर्तव्य निष्ठ  परिक्षेत्राधिकारी अभिनव केशरवानी द्वारा स्थानीय तपकरा परिक्षेत्र के निवासियों के लिए रोजगार सृजन के नए नए अवसर तलाश कर उनके आर्थिक सुदृढ़ता का मार्ग प्रशस्त कर रहे है जिससे स्थानीय तपकरा परिक्षेत्र के निवासियों में दहशत भरे माहौल में एक नई सोच के साथ नई ऊर्जा का संचार हुआ है 



 जशपुर वन मंडल अंतर्गत तपकरा परिक्षेत्र में इस समय वन विभाग के जन विकास  उन्मुखी कार्यों को लेकर यदि  सर्वाधिक चर्चा का विषय है तो वह है  खरपतवार पौधे लेंटाना से फर्नीचर एवं अन्य प्रकार की सामग्रियों का निर्माण कराना है जिससे तपकरा के तीन स्वयं सहायता वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से खरपतवार लेंटाना से कुर्सी, टेबल, सोफासेट,दर्पण हैंगर,मोबाइल स्टैंड,फ्लावर पॉट,पेन स्टैंड,चाय ट्रे,टोकनी,घरेलू छोटा मंदिर,छोटा स्टूल सहित अनेक सामग्रियों का बड़ी दक्षता के साथ निर्माण कर वहां के वन प्रबंधन समिति स्व सहायता समूह के पुरुष/महिला   स्वावलंबन एवं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बड़ा रहे है इस कार्य हेतु तीन स्वयं सहायता समूह जिनमे मुख्यतः आराध्य स्वयं सहायता समूह, बलुआ बहार वन प्रबंधन समिति एवं अंकिरा वन प्रबंधन समिति इस कार्य को संपादित कर प्रति माह पांच से दस हजार रुपये का स्थानीय विक्रय कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे है यही नही स्थानीय कुशल कारीगर स्वयं व्यक्तिगत रूप से भी वन क्षेत्रों से खरपतवार  लेंटाना की साइज़ वाली टहनी काटकर  भिन्न भिन्न आकार प्रदान कर उपरोक्त मानव जीवन मे उपयोगी सामग्री का निर्माण कर निज उपयोग भी कर रहे है लेंटाना पौधे के संदर्भ में बताया जाता है कि यह एक जंगली खरपतवार पौधा है जो प्रायः वन क्षेत्रों सहित अनेक स्थलों पर दृष्टिगोचर हो जाते है यह पुष्प गुच्छ धारित पौधा होता है  जिसमे अनेक प्रकार के छोटे छोटे रंग बिरंगे फूल गुच्छ लगते है जो बड़े आकर्षक होते है  पूर्व में इसका मानव जीवन मे कोई लाभ अथवा महत्व नही  था परन्तु इसके गुणवत्ता के बारे में यह प्रचलित था कि इसका उपयोग  औषधि,फर्नीचर,विधुत,सहित अन्य ब्रिकेट्स  के रूप में भी किया जा सकता  है इस संदर्भ में तपकरा परिक्षेत्र के परिक्षेत्राधिकारी अभिनव केशरवानी का कथन है कि संभवतः लेंटाना विदेशी खरपतवार है जिसे अंग्रेज एवेन्यू प्लांट के रूप में भारत लाए थे जो धीरे धीरे जंगल मे बढ़ गया अब इसके उन्मूलन हेतु विभाग राशि व्यय करती परन्तु यह पुनः स्थापित हो जाते तब हमने वेस्ट से बेस्ट बनाने का निर्णय लिया तथा तात्कालिक डीएफओ जाघव श्रीकृष्ण साहब से चर्चा कर एक कार्य योजना बनाया चूंकि योजना जनहितकारी एवं लाभ पहुंचाने वाली थी जिसे उन्होंने हरी झंडी दे दी अल्प राशि से हमने महिला स्व सहायता वन प्रबंधन समिति को इसके निर्माण में संलग्न किया तथा दस दिनों तक लगातार दक्ष,एवं प्रशिक्षित कारीगरों के द्वारा तपकरा में रहकर समिति के महिला/पुरुष को प्रशिक्षण दिया गया पश्चात हमने इस पर कार्य प्रारंभ किया जिसके सारगर्भित अनुकूल परिणाम सामने आए


तब हमने अनुपयोगी,खरपतवार, लेंटाना जैसे वेस्ट से बेस्ट सामग्री का निर्माण प्रारंभ किया तथा भिन्न भिन्न मानव उपयोगी  आवश्यक सामग्रियों  का निर्माण किया जिसे स्थानीय नागरिकों सहित  प्रदर्शित हाट बाजारों मेला आयोजनों में इसके स्टॉल लगाए गए जिसका  अच्छा प्रतिसाद मिला लेंटाना से निर्मित सामग्रियों के विक्रय से वन प्रबंध समितियों, स्वयं सहायता समूह को  प्रति माह पांच से दस हजार रुपये का लाभ प्राप्त हुआ जो तपकरा परिक्षेत्र के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी तथा स्थानीय लोगों के रोजगार के मार्ग में यह योजना  मील का पत्थर साबित हुई और कम दाम में खरीददारों को भी बेहतर और टिकाऊ सामग्री मिलने लगी जिससे इसकी चर्चा संपूर्ण जशपुर वन मंडल में होने लगी  तपकरा परिक्षेत्र के रेंजर अभिनव केशरवानी का कथन है कि आज वन प्रबंधन समितियों एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए वेस्ट लेंटाना से बेस्ट आय का साधन बन गया है यहां के ग्रामीण अब सामाजिक और आर्थिक सुदृढ़ता  की ओर अपने  कदम बढ़ा रहे है जिन्हें देखकर मन गदगद हो जाता क्योंकि तपकरा परिक्षेत्राधिकारी अभिनव केशरवानी की नियुक्ति हुए लगभग तीन वर्ष ही हुए है तथा प्राकृतिक और पर्यावरण से प्रेम होने की वजह से उन्होंने राजकीय वन सेवा से वनों के संरक्षण संवर्धन,एवं इसके निरन्तर विकास,विस्तार के उद्देश्य से ही वन सेवा जॉब का चयन किया  यह भी बड़े ही अचरज का विषय रहा कि उनकी पहली पोस्टिंग भी वर्ष 2019  फरवरी माह में जशपुर वन मंडल अंतर्गत तपकरा परिक्षेत्र में हुई जो एक हाथी प्रभावित क्षेत्र माना जाता है यहां वर्ष भर गजदल की आमद ओ रफ्त रहती है अनेक घटनाएँ,दुर्घटनाएं गजदल,और मानव के मध्य होने वाले द्वंद की वजह से होती रहती है जहां का प्रत्येक निवासी दहशत के साए में अपना जीवन निर्वहन करते रहा है उन्हें सदैव भय बना रहता था कि कब किस दिशा से हाथियों का दल आ कर संपूर्ण क्षेत्र को तहस नहस कर दे ऐसे में उनकी प्रथम पोस्टिंग ही बड़ी रोमांचकारी कहा जा सकता है जहां प्रतिदिन  ग्रामीणों एवं गजदल के मध्य होने वाले  द्वन्द से जानमाल की सुरक्षा का दायित्व और साथ ही अप्रवासी वन्यप्राणी हाथियों की सुरक्षा दोनों में समन्वय बनाकर चलना बड़ा दुरूह कार्य था फिर भी वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देश के साथ ग्रामीणों में जन जागरूकता का पाठ पढ़ाना नए उपायों के साथ उनके खेत,फसल,जानमाल की सुरक्षा में ही काफी समय व्यतीत हो जाता




 तपकरा परिक्षेत्र अधिकारी अभिनव केशरवानी ने आगे बताया कि गजदल के आक्रमकता से लोगों को सचेत और सजग करने के उद्देश्य से तपकरा परिक्षेत्र के अनेक ग्राम पंचायतों समाज सेवी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं, आंगन बाड़ी, हाट ,बाजारों, वॉल पेंटिंग,जिला प्रशासन के जन चौपाल सहित 365 दिन गश्ती दल और समय समय पर ग्रामीणों से परिचर्चा तथा टीवी में चलचित्र के माध्यम से जन जागरूकता लाने का सतत प्रयास किया जाता रहा  जिससे लोग शनैः शनैः काफी जागरूक हुए रेंजर अभिनव केशरवानी आगे बताते है कि हाथियों की लगातार चहल पहल तथा मानव जीवन मे दखल से  ऐसे दहशत भरे वातावरण में आसपास के ग्रामीणों के रोजगार में काफी प्रभाव पड़ा उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी तब जशपुर वन मंडल अंतर्गत तपकरा परिक्षेत्र में उनके रोजगार एवं आर्थिक विकास हेतु नए प्रयास किए गए तात्कालिक अधिकारी डीएफओ जाघव श्री कृष्ण साहब से चर्चा कर लेंटाना जैसे वेस्ट से बेस्ट सामग्री उत्पाद निर्माण के बारे में चर्चा कर उसे अमलीजामा पहनाया गया पूर्व प्रशिक्षित एवं दक्ष लोगों  से स्थानीय निवासियों को कार्यशाला लगाकर प्रशिक्षण दिया गया तथा ऐसा कार्य जो कभी छग प्रदेश के किसी भी वन मंडल अंतर्गत नही हुआ हमने लेंटाना से  ऐसे जनोपयोगी  सामग्रियों का निर्माण प्रारंभ किया  जिसके आशातीत परिणाम परिलक्षित होने लगे परिक्षेत्राधिकारी अभिनव केशरवानी ने आगे बताया कि लेंटाना जो पूर्व में अनुपयोगी खरपतवार के रूप में जाना पहचाना जाता था अब वही लेंटाना बांस का वैकल्पिक रूप के रूप में देखा जाने लगा है वन प्रबंध समिति एवं स्व सहायता समूह के द्वारा किए जाने वाले  घरेलू  आवश्यक उपयोगी उत्पाद ने आम जन के आचार विचार और सोच में परिवर्तन ला दिया और अब  इसकी उपयोगिता और महत्वता का आभास होने पर इसके संरक्षण पर विचार  की बात कही जा थी है 



लेंटाना के सामग्री निर्माण के संबध में श्री केशरवानी बताते है कि वनों से संग्रहण पश्चात दस दिनों के भीतर ही इसका सामग्री अथवा वस्तुएं  निर्माण करना अति आवश्यक हो जाता है  यदि इसका उपयोग नियत और निर्धारित समय पर नही किया गया तो यह बर्बाद हो जाता है सामग्री निर्माण के पूर्व ही इसे जिस साइज में सामग्री निर्माण करना होता है  इसे वनों से भिन्न भिन्न साइज में काट कर लाया जाता है पश्चात ऊपरी सतह छिल कर  वांच्छित स्वरूप मे आकर दिया जाता है सामग्री निर्माण में मुख्यतः  हंसिया,हथौड़ी कील,रेतमल,आरी,कटर,फेविकोल, टचवुड इत्यादि प्रमुख औजार है जिसकी सहायता से टेबल,कुर्सी सोफासेट,मोबाइल ट्रे सहित अनेक प्रकार की वस्तुओं का निर्माण किया जाता है  लेंटाना फर्नीचर अथवा सामग्री निर्माण को लेकर सर्वाधिक आश्चर्य का विषय यह है कि निर्मित सामग्री वस्तुओं  में दीमक इत्यादि कभी नही लगते तथा यदि इसे सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह लगभग बीस वर्षों तक टिकाऊ एवं मजबूत रहता है एक प्रकार से इसे सागौन का मिश्रित स्वरूप भी माना जाता है  यही नही  खरपतवार रूपी उक्त लेंटाना पौधों के अवशेष भी उपयोगी होते है इसके अपशिष्ट छिलके चुरा तत्वों से भी कोलब्रिक्स निर्माण किया जा सकता है साथ ही इसके छिलके जलाने से मच्छर भी भाग जाते है  लेंटाना वेस्ट से बेस्ट कार्य जिसके द्वारा फर्नीचर एवं अन्य बहु जन उपयोगी सामग्री वस्तुएं निर्माण की सराहना और प्रशंसा वर्तमान डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय साहब  ने भी की है तथा इसके विस्तार और उन्नयन हेतु सभी प्रकार के सहयोग का आश्वासन भी दिया है उनका कथन है कि लेंटाना रोजगार सृजन का एक सशक्त माध्यम है जिसमे भविष्य में लागत कम एवं बेहतर आय का स्रोत सृजन किया जा सकता है  इससे वन मंडल जशपुर के अंतर्गत तपकरा परिक्षेत्र के अधिक से अधिक संख्या में ग्रामीण जन इस विभागीय योजना से  संलग्न होकर लाभ अर्जित करना चाहते है यही वजह है कि अनेक लोग प्रशिक्षित होकर स्वयं का व्यवसाय भी लेंटाना फर्नीचर,सामग्री,वस्तुएं  निर्माण कर उसका विक्रय कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे है ऐसे आर्थिक क्रांतिकारी परिवर्तन के लिए रेंजर अभिनव केशरवानी साहब  अपने वरिष्ठ अधिकारी जशपुर वन मंडल के पूर्व डीएफओ जाघव श्रीकृष्ण साहब वर्तमान डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय साहब तथा एसडीओ नवीन निराला साहब (कुनकुरी)  एवं  रेंजर कांसाबेल श्रीमती अनिता साहू केशरवानी का  सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद देना नही भूलते तथा कहते है कि जिन्होंने समय समय पर इसके निर्माण,विस्तार हेतु मार्गदर्शन देते रहे उपरोक्त अधिकारियों के सहयोग से ही एक असंभव कार्य  के संभव करने की प्रेरणा मिलता रहा  तपकरा परिक्षेत्राधिकारी  अभिनव केशरवानी साहब का कथन है कि स्थानीय लोगो को लेंटाना सामग्री हेतु अधिक से अधिक प्रोत्साहित कर उन्हें रोजगार में संलग्न करने वे सदैव प्रयासरत है तथा बंबू से कुर्सी टेबल एवं अन्य निर्माण सामग्री तो बहुत देखे है परन्तु लेंटाना से फर्नीचर सहित अन्य सामग्रियों का निर्माण देखना किसी विस्मयकारी से कम नही है  उनका कथन है कि यह छत्तीसगढ़ प्रदेश वन विभाग का इकलौता ऐसा प्रोजेक्ट है जो लेंटाना  वेस्ट से बेस्ट सामग्र,वस्तुएं निर्माण कर अतिरिक्त आय का साधन बनाया जा सकता है बस, इसके विक्रय हेतु बेहतर प्लेटफार्म की आवश्यकता है जिसके लिए भी प्रयास किए जा रहे है फिलहाल अभी स्थानीय स्तर पर इसका विक्रय किया गया  है उन्होंने आगे बताया कि उक्त योजना का क्रियान्वयन  प्रदेश के अन्य वन मंडलों में भी हो यह उनकी हार्दिक इच्छा है क्योंकि लेंटाना पौधों की खरपतवार प्रदेश भर में फैली है तथा यह बड़ी सहजता से प्राप्त हो जाता है  आगे कोई असुविधा न हो इसके सामग्री निर्माण और इस के विस्तार और  परीक्षण के संबंध में वे कहते है यदि प्रदेश के विभिन्न वन मंडलों में वेस्ट लेंटाना से बेस्ट वस्तुएं, निर्माण के इच्छुक वन मंडल आवश्यकता पड़ने पर हमारे यहां के प्रशिक्षित प्रबंधन समिति के सदस्यों को प्रदेश के अन्य वन मंडलों में जाकर प्रशिक्षण देने हेतु तैयार हो चुके  है जिन्हें प्रशिक्षण अथवा लेंटाना निर्मित सामग्री निर्माण की अभिरुचि हो वे तपकरा वन मंडल से सहयोग ले सकते है तथा अपने परिक्षेत्रों में वेस्ट लेंटाना से बेस्ट सामग्री वस्तुओं का निर्माण करवा ग्रामीणों,वन प्रबंधन समितियों के साथ विभाग को भी अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम निर्मित कर  रोजगरउन्मुखी कार्यों को गति प्रदान कर सकते है

मंगलवार, 29 मार्च 2022

उद्यानिकी विभाग की बाड़ी योजना से कृषकों के आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

 उद्यानिकी विभाग की बाड़ी योजना से कृषकों के आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम 


छग राज्य का उद्यानिकी,एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग द्वारा विगत कई वर्षों से कृषि एवं वानिकी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक प्रयोगों के साथ ही उन्नत,फसल के लगातार पैदावार स्थानीय कृषकों के आर्थिक सामाजिक विकास की नई इबारत लिख रहा है इसके लिए राज्य शासन एवं कृषि विभाग के माध्यम और समन्वय स्थापित कर कृषकों को अनुदान राशि प्रदाय कर  उन्हें प्रोत्साहित करने के साथ ही सुराजी गांव योजना के तहत हमर बाड़ी योजना एवं उद्यान इत्यादि विकसित करने भी शासन द्वारा अनेक योजनाए लागू की गई है इसके अंतर्गत  उन्हें उद्यानिकी विभाग के माध्यम से राज्य शासन बकायदा अनुदान राशि प्रदाय कर उन्नत फसल के रूप में पौष्टिक खाद्य वस्तुएं साग सब्जी फल आहार का उत्पाद हेतु प्रोत्साहित कर  उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने दृढ़ संकल्पित है  बाड़ी योजना के तहत दो डिसमिल भूमि मे मुख्यतः  कंद मूल ,प्याज,आलू,,पत्ता गोभी ,भाटा,फूल गोभी टमाटर ,मिर्ची एवं फल फूल की पैदावार तथा उसके तीन ओर की शेष भूमि पर वानिकी पौधों का रोपण में नीम, गुलमोहर,पेल्टा फार्म जैसे  पौधों के साथ फलदार आम,जाम, जामुन, इत्यादि पौधों का रोपण के  फसल उत्पाद और पैदावर  क्षेत्र को कव्हर करने निशुल्क पौधे वितरण की महती जिम्मेदारी भी उद्यानिकी विभाग द्वारा बखूबी  निभाकर कृषकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है 



  प्रदेश के लघु एवं सीमांत कृषकों  को पेड़ पौधों की निशुल्क वितरण और उसके रोपण से  एक प्रकार से  यह देखा जा रहा है कि हरियाली विस्तार में लघु कृषकों की महती नैतिक दायित्वों को सुनिश्चित किया  गया हो ताकि रोपण क्षेत्र के चारो ओर के क्षेत्र में रोपित फल दार पौधों की शीतलता से शाक सब्जी कंद मूल इत्यादि की भरपूर फसल ली जा सके एक प्रकार से उद्यानिकी विभाग  स्थानीय प्रदेश के कृषकों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान  हेतु अपनी  जिम्मेदारी का निर्वाहन कर उन्हें आत्म निर्भरता की ओर एक कदम बढ़ाने प्रयासरत है इसके साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण उनके बेहतर,सुखमय जीवन हेतु भी राज्य शासन की अनेक स्वर्णिम योजनाओं के द्वारा सुखद अवसर लाकर उन्हें स्वावलंबी,और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उन्हें अनेक योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित कर रहा है कृषकों के लिए उत्तरोत्तर आर्थिक,सामाजिक, गतिविधियों की सुदृढ़ता का सशक्त माध्यम बन उद्यानिकी विभाग अपना पृथक स्थान निर्मित कर चुका है इसके लिए ऐसे कृषकों भूमिहीनों व्यक्तियों को कम से कम दो डिसमिल से लेकर पांच एकड़ भूमि में कंदमूल आलू,प्याज,शाक सब्जी फलदार पौधे जैसे



 केला,लीची,नाशपती,अनानाश,  पपीता जैसे पौष्टिक आहार वाले फलदार उत्पाद को भी प्रोत्साहित कर निचले दबे कुचले तबके के कृषकों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ उनकी सहभागिता सुनिश्चित कर  सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रहा है  स्थानीय श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग बाकायदा अनेक चिन्हित क्षेत्र की भूमि पर नर्सरी निर्माण कर मनरेगा के तहत उन्हें कार्य भी उपलब्ध करा रहा है उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी के नर्सरीयों  में जहां फलदार फूलदार,छायादार पौधों का जन्म स्थली केंद्र बन स्थानीय श्रमिकों के लगातार रोजगार उपलब्ध करा रहा है   वही उपजाऊ भूमि पर नए तकनीक प्रयोग के माध्यम से नई किस्म के फलों को विकसित कर कृषि जगत में एक हरित क्रांति की शुरुआत भी प्रारंभ की जा चुकी  है जो अपने आप मे एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है वैसे तो  छग प्रदेश भर में  उद्यानिकी एव प्रक्षेत्र वानिकी विभाग के अनेक नर्सरी सफलता पूर्वक संचालित हो रहे है जो जलवायु,वातावरण के हिसाब से वहां की मिट्टी और तापमान को ध्यान में रख फसल की नई उन्नत किस्मों के सफल खेती की जा रही है परन्तु  रायपुर जिले के आरंग जनपद विकासखण्ड के अंतर्गत पारागांव नर्सरी एक ऐसी नर्सरी के रूप में ख्याति प्राप्त हो चुका है जहां  सभी प्रकार के फूलदार फलदार और सायादार पौधों का रोपण कर आधुनिक तकनीक से उत्पाद  किया जा रहा है जहां फूलों और फलों के नवीन  उन्नत प्रजाति के पौधों को विकसित कर कृषकों को फसल लेने प्रोत्साहित भी किया जा रहा है इस संदर्भ में समय समय पर अधिकारियों के द्वारा मॉनिटरिंग  कर नर्सरी का जायजा लिया जाता है तथा  कृषकों हितग्राहियों के मांग और मंशा अनुरूप पौधों का रोपण,एवं उत्पाद कर वितरण भी किया जाता है  जिससे आरंग विकासखण्ड के ग्रामीण कृषक शासन द्वारा जारी योजनाओं का लाभ उठा कर काफी प्रसन्न है तथा शासन की प्रत्येक मूल योजनाओं से लाभान्वित हो रहे है



 इसी क्रम में जब पारागांव स्थित नर्सरी में जानकारी लेने छग वनोदय पत्रिका टीम पहुंची तब वहां शाकंभरी बोर्ड के अध्यक्ष राम कुमार पटेल भी स्थानीय कृषकों से समीक्षा बैठक ले रहे थे जहां स्थानीय कृषक पूर्ण उत्साह से उपस्थित होकर संपादित किए गए कृषि कार्यों उसमे होने वाली असुविधा, के संदर्भ में जानकारी देकर विभागीय योजनाओं के लाभ से रूबरू हुए इस दौरान शाकंभरी बोर्ड के अध्यक्ष श्री राम कुमार पटेल ने उन्हें राज्य शासन द्वारा दिए जा रहे योजनाओं के लाभ से अवगत कराते हुए  आनुदान राशि से किस प्रकार आर्थिक सुदृढ़ता की ओर कदम उठाना है तथा आत्म निर्भर बनना है उसे विस्तार पूर्वक बताकर उन्हें अवगत कराया इस दरमियान असामयिक होने वाली वर्षा एवं फसल के नुकसान की ओर ध्यानाकर्षण कर फसलीय चक्र के संदर्भ में उन्हें साग सब्जियों में पडने वाले  कीट प्रकोप की जानकारी मिली तब उन्होंने समय समय पर जैविक खाद का उपयोग करने सलाह देकर उन्हें प्रोत्साहित किया शाकंभरी बोर्ड अध्यक्ष श्री राम कुमार पटेल ने छग प्रदेश की  पारंपरिक संस्कृति से जुड़ी मेहंदी पौधों के रोपण एवं उसके उत्पाद को लेकर भी कृषकों को जागरूक किया



  वही छग वनोदय से बात करते हुए  अध्यक्ष श्री राम कुमार पटेल ने  कहा कि  छग प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार ने तीन वर्षों के अल्प कार्यकाल में वन वासी वनादिवासियों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए बहुत सारी योजनाओं के माध्यम से कार्य किए है जिसमे कोरोना काल का विकट भयावह काल  भी शामिल है उसके बावजूद शासकीय योजनाओं को धरातल पर लाने पूरी कोशिश की गई जिसके सार्थक परिणाम परिलक्षित हो रहे है किसान स्वावलंबी बन आत्मनर्भरता की ओर बढ़ रहे है उन्होंने बताया अब तक प्रदेश भर में 29 जिलों का सघन दौरा कर कृषकों से मिलकर  शासकीय योजनाओं के लाभ से उन्हें अवगत कराया गया तथा कृषकों के ऋतु संबधी होने वाली क्षति को भी ध्यान से सुन वस्तुस्थिति से  माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को  अवगत कराने के उद्देश्य से रिपोर्ट भेजने की जानकारी भी   दी समीक्षा बैठक में शाकंभरी बोर्ड के अध्यक्ष  श्री राम कुमार पटेल ने उपस्थित कृषकों से अन्य नए कृषकों को राज्य शासन से मिल रहे योजना के लाभ से अवगत कराए जाने की  बात पर भी जोर दिया इस दरमियान उन्होंने चर्चा करते हुए बताया कि किसान चौपाल के माध्यम से बहुत सी बातें सुनी तथा होने वाली असुविधा, कमियों तथा उसके  निराकरण  भविष्य में किए जाने की बात पर जोर दिया उन्होंने भूपेश सरकार के तीन वर्षों की कार्यकाल में वन वासियों वन आदिवासियों के हितार्थ बहुत से कदम उठाए है जिनमे नरवा गरुवा घुरूवा,बाड़ी  योजना प्रमुख है वही बाड़ी योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु राज्य द्वारा प्रदत्त योजना का लाभ प्रत्येक कृषक भाइयों को ज्यादा से ज्यादा मिले यही प्रयास शाकंभरी बोर्ड का है 



 शासकीय उद्यानिकी रोपणी के अधीक्षक श्री विनोद ठाकुर ने बताया कि यहां फलदार,फूलदार पौधों का उत्पाद किया जाता है तथा उसे कृषकों एवं ग्राम पंचायतों गौठनों में मांग अनुसार वितरण किया जाता है समस्त कार्य मनरेगा के तहत संपादित होते है गत वर्ष 60 हजार पौधों का वितरण उद्यानिकी विभाग द्वारा किया जाना बताया गया महिला स्व सहायता समूहों को भी सहायता प्रदान की जा रही है   श्री विनोद ठाकुर ने आगे बताया कि वर्तमान में लगभग साठ हजार पौधे उपलब्ध है विभागीय योजना अंतर्गत नए वित्त वर्ष में  एक लाख तीस हजार पौधे तैयार किए गए है जिनमे आम अमरूद,कटहल फल फूल वाले पौधे सम्मिलित है जो राज्य शासन की योजना के तहत कृषकों को निशुल्क प्रदाय कर उन्हें लाभान्वित किया जाता है अधीक्षक श्री विनोद ठाकुर ने आगे बताया की आरंग उद्यानिकी नर्सरी में  आम के आधुनिक प्रजाति के एक सौ बीस मदर प्लांट है  जिनमे लंगड़ा, बैगन फल्ली,दशहरी, जैसे स्वादिष्ट आम के पौधे रोपण किए गए है उन्होंने बताया कि गत वर्ष एक लाख बीस हजार रुपये की नगद राशि नीलामी से उद्यान को लाभ प्राप्त हुआ था जिसे उद्यान की व्यवस्था इत्यादि में लगाए गए है वही नर्सरी अधीक्षक श्री विनोद  ठाकुर ने आगे बताया कि आम अमरूद,नींबू,आंवला,सीताफल,कटहल,सहित वानिकी पौधे गुलमोहर,शीशम नीम,मौल श्री पेल्टाफार्म,आदि पौधों का उत्पाद कर स्थानीय श्रमिकों को महात्मा गांधी रोजगार ग्यारंटी के तहत कार्य दिया जाता है जिससे आसपास ग्राम के श्रमिक लाभान्वित हो रहे है




तथा गौठान,ग्राम पंचायतों सहित मांग अनुसार पौधों का निशुल्क वितरण सरपंच एवं जनपद सचिव के मांग अनुरूप पौधे निशुल्क वितरण किया जाता है रोजगार ग्यारंटी के तहत स्थानीय मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराए जाते है जिनमे सप्ताह दो सप्ताह में अन्य मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से श्रमिकों की संख्या को घटाया बढ़ाया  जाता है इसके पीछे श्री ठाकुर ने सभी को रोजगार उपलब्ध कराने की मंशा व्यक्त किया  प्रति दिन स्थानीय एवं आसपास के  बीस से पच्चीस मजदूर श्रमिक कार्य संपादित करते है तथा उन्हें मजदूर जॉब कार्ड के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जाता है जिसकी 194 रु कलेक्टर दर पर राशि उनके बैंक खातों में प्रत्येक  दूसरे तीसरे सप्ताह में पहुंच जाती है  राज्य शासन के महत्वाकांक्षी योजना नरवा गरुवा,घुरूवा बाड़ी के सफल क्रियान्वयन हेतु उद्यानिकी विभाग बड़ी तत्परता से प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक उक्त योजना का लाभ पहुंचाने कटिबद्ध है तथा शासन  के मंशा अनुरूप संपूर्ण ऊर्जा के साथ लघु सीमांत,स्थानीय कृषक उद्यानिकी विभाग के बाड़ी योजना से लाभान्वित हो आत्मनर्भरता कि ओर अपने कदम बढ़ा रहे है जिसके सार्थक परिणाम शनैः शनैः परिलक्षित हो रहे है

प्रकृति के कैनवास पर हरियाली का रंग

 प्रकृति के कैनवास पर हरियाली का रंग


छत्तीसगढ़ वनोदय

छग प्रदेश के बिगड़े वनों के सुधार की दृष्टिकोण से प्रदेश का वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग  बहुत सी योजनाओं को वास्तविक धरा पर अमल पर लाते हुए उसके संरक्षण संवर्धन में अपनी संपूर्ण ऊर्जा लगा कर वनों के अस्तित्व को बचाने लगातार कार्य कर रहा है जिससे बिगड़े वन क्षेत्र की प्राकृतिक वैभवता, यथावत बनी हुई है इस महत्वपूर्ण कार्य में मूल विभाग ही नही अपितु  विभाग के अनुषांगिक धड़ा छग राज्य वन विकास निगम की भी महती भूमिका देखी जा सकती है जिसके द्वारा बिगड़े वन क्षेत्र के आड़े तिरछे बीमारू पेड़ पौधों का थिनिंग कर खुले और शेष भूमि पर सागौन प्लांटेशन कर वनों की प्राकृतिक आभा पर चार चांद लगा रहे है वह भी इसलिए कि वन विकास निगम के साथ भावी पीढ़ी और विभाग को राजस्व की प्राप्ति हो सके साथ ही शासन को भी लाभांश प्राप्त हो सके इसके लिए छग राज्य वन विकास निगम का मैदानी अमला पूरी चुस्ती दुरुस्ती के साथ प्लांटेशन क्षेत्रों में चाक चौबंद के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था,देखरेख में लगे हुए है जिसके दूरगामी परिणाम भी अब दिखाई पड़ रहे है  ऐसे बिगड़े वन क्षेत्र में लगाए गए सागौन प्लांटेशन डेढ़ से दो वर्षों के अल्प काल  के अंतराल मे ही लगभग दस से बारह फीट की ऊंचाई तक सर्वाइव कर चुके है जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है 

  

  छग राज्य वन विकास निगम के रायपुर स्थित बारनवापारा परियोजना मंडल कार्यालय  अंतर्गत लगभग पचास किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोडार बांध के पीछे सघन वन क्षेत्र जो घाटी और पहाड़ों की ऊंचाई से  लगभग पांच सौ परिवारों के बसाहट ग्राम परसापानी को घेरा हुआ है तथा  लोहारडीह ग्राम पंचायत उस का आश्रित ग्राम है के कक्ष क्रमांक 850,859,860, में वित्तीय वर्ष 2019-2020 में  ऐसे आड़े तिरछे,बिगड़े बीमारू वन क्षेत्र की थिनिंग कर लगभग 16,30,एवं31, हेक्टेयर भूभाग में सागौन रोपण कार्य संपादित करवाया गया था जिसके लगातार उच्च अधिकारियों की मॉनिटरिंग और मैदानी अमले की चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था से अब संपूर्ण क्षेत्र सागौन पौधों के साथ प्राकृतिक के कैनवास पर हरियाली का रंग बिखेरता प्रतीत हो रहा है  हरियाली की सौगात देने के पीछे छग राज्य वन विकास निगम के प्रबन्ध संचालक श्री पी.सी.पांडे की दूरदृष्टि सोच ने कार्यों में पारदर्शिता लाना प्रारंभ कर दिया जो कर्मचारी केवल प्लांटेशन पश्चात  निश्चित हो जाते थे वही प्रबंध संचालक पी.सी.. पांडे  के कुशल कसावट भरे प्रशासनिक  व्यवस्था के समक्ष दण्डवत होकर कार्यों के प्रति ईमानदारी,कर्तव्य निष्ठा,और जूझने वाली प्रवृति में आ गए  यही नही अपने अधीनस्थ डिविजनल मैनेजर के पद पर पदस्थ आई एफ एस अधिकारियों को दिशा निर्देश देकर कराए गए प्लान्टेशनों कि समय समय पर मॉनिटरिंग इत्यादि भी करवाते रहते है  जिसके सुखद परिणाम यह सामने आने लगा है कि दो वर्षों के अल्प काल मे ही ऐसे कराए गए सागौन प्लांटेशन  पांच वर्ष अवधि वाले प्लांटेशन के रूप में विकसित नज़र आ रहे है जो छग राज्य वन विकास निगम की एक बहुत बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है वरना पूर्व में देखा यह जा रहा था कि...आगे पाठ पीछे सपाट...वाली उक्ति विभाग में चरितार्थ होती दिखाई पड़ती थी  यह स्थिति जब से प्रदेश भर के नौ डिवीजनों में आई.एफ.एस. अधिकारीयों  की नियुक्ति नही हुई थी तब तक ..... ढाक के वही तीन पात..की तर्ज़ पर कार्य संचालित हो रहा था परन्तु जैसे ही छग राज्य वन विकास निगम  में प्रबन्ध संचालक श्री पी.सी.पांडे प्रबंधक के  पद पर आसीन हुए तब से   ही उन्होंने सर्वप्रथम छग राज्य वन विकास निगम के पूर्व कर्मचारियों जो पात्र न होते हुए भी डिवीजन मैनेजर के गरिमामयी पद पर पदस्थ रहते हुए वन विकास निगम की नैय्या को बीच भंवर में डुबाने  पूरा सामान तैयार कर लिया था उन्हें पृथक कर   उनके नियुक्ति के साथ ही सर्वप्रथम नाव में होने वाले छिद्र को दुरुस्त कर ने की दूरदृष्टि के तहत सर्वप्रथम समस्त परियोजना मंडलों में आई एफ एस अधिकारियों जैसे  कुशल प्रशासनिक ज्ञाता के जिम्मेदार हाथों में जिलों की कमान सौंपी तथा उसके दो वर्ष में ही दूरगामी परिणाम परिलक्षित होने लगे इसका एक छोटा सा साक्षात उदाहरण के रूप में कोडार बांध के पीछे स्थित ग्राम परसापानी के कक्ष क्रमांक 850,859,860 के वृह्द पैमाने पर किए गए सागौन प्लांटेशन को लिया जा सकता है जो मात्र दो वर्षों में दस से बारह फीट ऊंचाई को छू कर लहलहाते हुए वनों की शोभा बढ़ा रहे है



  सागौन रोपण के और उसके सफल प्लांटेशन  होने के पीछे यदि किसी का हाथ होता है तो वह है उस क्षेत्र की अनुकूल मिट्टी, जलवायु  तथा उसकी सुरक्षा सर्वाधिक मायने रखती है इसके लिए एक परिपक्व अनुभवी अधिकारी ही इन सब बातों का ध्यान रखता है और यदि कुशल अनुभव की बात चलती है तो स्वतः ही छग वन विकास निगम का एक चेहरा समकक्ष आ जाता है और वह किसी और का नही बल्कि रायकेरा नर्सरी के पूर्व प्रभारी एवं वर्तमान में रवान क्षेत्र के परिक्षेत्राधिकारी श्री  एम्ब्रोस एक्का का है जिनका संपूर्ण जीवन काल रायकेरा नर्सरी की सेवा में व्यतित हुआ था जब से रायकेरा नर्सरी अस्तित्व में आया तब से ही उन्होंने अनुभवी और जिम्मेदार अधिकारियों का सान्निध्य मिला उनके मार्ग दर्शन और नेतृत्व में उन्होंने सागौन पौधों का सफल रोपण एवं उत्पाद किया चाहे वह रूट शूट के माध्यम से हो अथवा बीजारोपण के माध्यम से ही क्यों न हो रायकेरा नर्सरी में  उन्होंने लाखों की संख्या में प्रत्येक वित्त वर्ष सागौन का उत्पाद किया तथा उनके उत्पाद राज्य के अलावा अन्य राज्यों में रोपण किए गए उनकी कर्तव्य निष्ठा एवं कार्यों की महीन ज्ञान की वजह से ही तत्कालीन   प्रबंधक एस सी जैना साहब उनकी पीठ थपथपाने से कभी नही हिचकते यही स्थिति चाहे  एन भावसार साहब हो बड़े अशोक वर्मा साहब हो चौहान साहब हो एम ए फारूकी साहब  श्रीवास्तव साहब ही क्यों न हो  अथवा समकालीन कोई भी अधिकारी हो  सब अधिकारियों ने उनके कार्यों को  सराहा था जब वे दो वर्ष पूर्व वित्तीय वर्ष 2019-20 मे रायकेरा प्रभार से पृथक हुए तब उनको कोडार डिपो सहित रायकेरा नर्सरी का दोहरा प्रभार दिया गया था उसी कार्यकाल में कोडार के समीप स्थित परसापनी के कथित कक्ष क्रमांक में सागौन प्लांटेशन की महती जिम्मेदारी सौंपी गई थी उनके ही कार्यकाल में जब उन्होंने वहां के अनुकूल वातावरण और मिट्टी को उपजाऊ देखा तब उनके ही मार्ग दर्शन में  लगभग 16 हेक्टेयर भूभाग में सागौन का सफल वर्षाधारित प्लांटेशन का संपादन करवाया जो आज क्षेत्र में जंगल सदृश्य नज़र आ रहा है अपने उक्त प्लांटेशन को लेकर उन्होंने सर्व प्रथम इसके मवेशियों की चराई रोकने सख्त दिशा निर्देश दिए जिसके आज अनुकूल परिणाम नज़र आ रहे है 



        इस संदर्भ में कोडार डिपो प्रभारी डिप्टी रेंजर श्री लोकेश साहू से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में थिनिग कार्य संपादित किया गया था जिसमें आड़े तिरछे,बीमारू,पेड़ों को मार्किंग कर विदोहन किया गया था पश्चात वर्ष 2020 में प्लांटेशन कार्य संपादित किया गया जिसमें कक्ष क्रमांक 859 के लगभग 16हेक्टेयर भूभाग में जिसे ग्रामीणों द्वारा अतिक्रमण किया गया था उसे मुक्त करवाकर वहां लगभग 37 हजार सागौन पौधे रूट शूट पद्धति के पौधों  से  दो बाई दो की दूरी में रोपण कार्य किया गया जो वर्षाधारित रोपण था जिसके आश्चर्य जनक परिणाम सामने आए तथा बेहतर वातावरण,अनुकूल मिट्टी,जलवायु,में रोपित सागौन प्लांटेशन जादुई तरीके से बढ़त लिए हुए आज बहुत कम समय मे दस से बारह फीट की ऊंचाई को छू रहे है डिप्टी रेंजर लोकेश साहू ने आगे बताया कि समय समय पर तात्कालिक डी. एम.शशिकुमार आई.एफ.एस. अधिकारी का दौरा होता था  तथा उन्होंने स्वयं इसकी ऊंचाई और मापदंड देखकर काफी प्रसन्न हुए  थे उन्होंने आगे बताया कि प्लांटेशन क्षेत्र में चौकीदारों द्वारा लगातार उपस्थित रहकर देखरेख एवं सुरक्षा की जाती है ताकि मवेशी चराई से प्लान्टेशनों को  सुरक्षित कर सहेजा जा रहा है   डिप्टी रेंजर लोकेश साहू ने आगे बताया कि प्लांटेशन रोपण समय आसपास के ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार ग्यारंटी के तहत रोजगार उपलब्ध कराया गया तथा उसका भुगतान सीधे उनके खातों में समायोजन कराया गया यही नही एक बार पुनः रोपण कार्य भी करावाया गया था  जिसके तहत जो पौधे सर्वाइव नही कर रहे थे तथा जो मृत प्रायः स्थिति में पहुंच गए थे उसके स्थान पर स्वस्थ्य पौधों का रोपण किया गया जो अनुकूल वातावरण में बढ़त लिए हुए है डिप्टी रेंजर लोकेश साहू ने आगे बताया कि वन क्षेत्र के उपरोक्त कथित कक्ष क्रमांक में सागौन रोपण प्लांटेशन एक बहुत बड़ी चुनौती थी क्योंकि क्षेत्र में ग्रामीणों द्वारा अतिक्रमण कर वन क्षेत्र को घेर लिया गया था तथा ग्रामीणों का भारी विरोध का सामना करना पड़ा था इसके लिए मंत्री संतरी सहित ऊपर तक शिकायते की गई थी



फिर भी वन क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करवाकर सागौन प्लांटेशन कक्ष क्रमांक 859 के 15-16 हेक्टेयर भूमि में 37,500 पौधे,कक्ष क्रमांक 850 के 31 हेक्टेयर भूभाग में 75,000 सागौन पौधे,एवं कक्ष क्रमांक 860 के 30 हेक्टेयर भूभाग में 62,500 सागौन पौधों का सफल रोपण कार्य करवाया गया जो छग वन विकास निगम के लिए एक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है वही सहायक परिक्षेत्र अधिकारी श्री लोकेश साहू ने बताया कि समस्त कार्य प्रारंभ से लेकर संपादित किए जाने तक उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व मिलता रहा है जिसके सुखद परिणाम अब सामने दिखाई दे रहे है वर्तमान परिक्षेत्राधिकारी श्री घोंघरे साहब का कथन है कि जिस ऊंचाई पर आज सागौन प्लांटेशन पहुंच गया है  वह विस्मयकारी करने वाला है अब वह बेहतर स्थिति में सर्वाइव कर रहा है  पतझड़ की स्थिति के पश्चात नए कोमल पत्ते के फुटने पर वह तेजी से बढ़त लेगा गर्मियों में पतझड़ में थोड़ी इसकी स्थिति दयनीय बनती है फिर भी प्लांटेशन क्षेत्रों में चौकीदार तैनात है तथा वे चराई इत्यादि से उसकी सुरक्षा बड़े चाक चौबंद के साथ करते है



 आने वाले वर्षा ऋतु तक यह लगभग दस से पन्द्रह फीट ऊंचाई का होगा जो प्रकृति नियम के अनुसार सागौन के कथित प्लांटेशन के बेहतर प्रतिसाद मान कर चल रहे है जिस प्रकार से कोडार डिपो के समीप स्थित ग्राम परसापानी में वर्ष 2019-20 में कराए गए प्लान्टेशन कि भांति प्रदेश भर के प्लांटेशनों पर संबंधित अधिकारी, मैदानी कर्मचारी ईमानदारी पूर्वंक अपने कार्यों के प्रति समर्पित रहकर उसके रोपण से लेकर सुरक्षा व्यवस्था के ऊपर तनिक  भी नज़र रखे तो छग राज्य वन विकास निगम की एक अलग पहचान निर्मित हो सकती है बस,आवश्यकता है कि मैदानी कर्मचारियों के ऊपर आर्थिक मांग ,व्यवस्था एवं मैनेज जैसे  दबाव को कम कर दिया जाए तथा उसके उपचार, सुरक्षा,देखरेख आदि की मिलने वाली राशि को सही ढंग से प्लांटेशनों पर व्यय किया जाए तो छग राज्य वन विकास निगम की तकदीर और तस्वीर कुछ अलग ही दृष्टिगोचर होगी जैसा कि कोडार के कथित प्लांटेशन के संदर्भ में लिखा जा रहा है वैसा ही  प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में कराए गए प्लांटेशनों की स्तुति लिखी जा सकती है बस, आवश्यकता है एक ईमानदार कोशिश की जो अपने कर्तव्यों की निष्ठा पूर्वक पहल कर सके.

सोमवार, 28 मार्च 2022

अभनपुर जनपद का ग्राम तामासिवनी- विकास की ओर बढ़ते कदम

 अभनपुर जनपद का ग्राम तामासिवनी- विकास की ओर बढ़ते कदम


रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)अभनपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत तामासिवनी जो आरंग एवं अभनपुर जनपद पंचायत का मध्य भाग है यहां की सरपंच दीपिका हेमलाल जांगड़े जिन्होंने अपने तीन साल के अल्प कार्य काल मे ही ग्राम तामासिवनी में विकास की नई इबारत लिख दी है यहां की महिला सरपंच दीपिका हेमलाल जांगड़े  एक दूरदर्शी एवं सुशिक्षित महिला है जिन्होंने अनेक पंचायती राज की नई  योजनाओं  का सफल  क्रियान्वयन कर ग्राम को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य किया है अब चाहे ग्राम में सी.सी. रोड हो अथवा नाली,पानी,बिजली,सड़क की समस्या या फिर ग्राम  गौठान का कार्य ही क्यों न हो अपनी पूरी ऊर्जा के साथ उन्होंने अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा दिखाते हुए अपने किए गए वादे के अनुसार शासन द्वारा जारी कार्यों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास कर रही है कोरोना काल जैसे विकट परिस्थियों में भी उन्होंने अपने ग्राम वासियों के साथ नही छोड़ा तथा उन्हें मनरेगा के तहत रोजगार ग्यारंटी के तहत रोजगार उपलब्ध करवाया बल्कि मुफ्त राशन वितरण में भी अपनी महती भूमिका अदा की इस संदर्भ में श्रीमती दीपिका हेमलाल जांगड़े का कथन है कि ग्राम तामासिवनी का प्रत्येक व्यक्ति मेरा परिवार है तथा उन्होंने मेरा चयन कर मुझे सेवा का सुअवसर दिया मैं उनके अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करूंगी यही मेरी प्राथमिकता है सरपंच दीपिका हेमलाल जांगड़े आगे कहती है कि जो कार्य वर्षों से लंबित है तथा जिसके लिए लाखों का व्यय बताया जाता था आज उक्त कार्यों का निर्माण बहुत कम राशि मे करवाकर एक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि ग्राम पंचायत तामा सिवनी दो जनपद को जोड़ने वाली ग्राम पंचायत है तथा  मध्य में बसा हुआ है यहां पर चारों ओर के ग्रामीणों का आवागमन अनवरत जारी रहता है यही वजह है कि ग्राम के मुख्य मार्ग पर स्थित साप्ताहिक बाजार में सर्वाधिक व्यापारियों का आवागमन होता है तथा उन्हें यहां व्यापार करने बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था अतएव सुचारू ढंग से  सुव्यवस्थित बाजार संचालन हेतु ग्राम में ही दो एकड़ भूभाग अधिग्रहित कर समतली कर्ण करवाया जा रहा है  ताकि आने  वाले व्यापारी भाइयों और आसपास के ग्राहकों को क्रय विक्रय में किसी प्रकार की कोई बाधा उत्प्न्न न हो और व्यापार सुगम सरल ढंग से व्यवस्थित होकर किया जा  सके तामासिवनी ग्राम सरपंच श्रीमती  दीपिका हेमलाल जांगड़े आगे बताती है कि अब तक इस संदर्भ में किसी प्रकार से कोई ठोस पहल नही की गई थी तथा बाजार व्यवस्थापन की मांग लगभग तीन दशक से की जा रही थी परन्तु पूर्व वर्ती अनेक पदस्थ माननीय सरपंच महोदयो द्वारा इस ओर कोई सार्थक जनहितकारी पहल नही की गई केवल आश्वासन एवं लाखों का बजट का आभाव बताकर बाजार व्यवस्थान को टालते रहे परन्तु सरपंच दीपिका  हेमलाल हेमलाल जांगड़े द्वारा अप्रत्याशित कार्य को भी परोक्ष रूप से सत्य कर दिखाया जिसकी समस्त ग्रामवासी मुक्त कंठ से प्रशंसा कर रहे है ग्रामवासी उत्साहित होकर कहते है कि पहले बाजार मुख्य मार्ग में होने से बड़ी असुविधाओं का सामना करना पड़ता था लेकिन एक सुशिक्षित  महिला सरपंच ने ग्राम विकास के इतिहास में विकास की एक कील ठोंक दी जो बड़े ही गर्व का विषय है वही ग्राम पंचायत तामासिवनी तालाब जो लगभग आधा दशक से साफ नही किया गया था आज उस तालाब की सफाई ग्रामवासियों  के सहयोग से उसके सूखे दलदली मिट्टी को निकाला जा रहा है जो विरोधियों एवं विध्न संतोषी लोगो को रास नही आ रहा है तथा  अनर्गल प्रचार कर ग्राम पंचायत और सरपंच की छबि बिगाड़ने पर तुले है विरोधियों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि बगैर रॉयल्टी और पीट पास कटवाए तालाब की सफाई करवा कर सुखी दलदली मिट्टी उत्खनन कर उसका विक्रय किया जा रहा है इस संदर्भ में सरपंच प्रतिनिधि हेमलाल जांगड़े का कथन है कि ग्राम वासियों की मांग अनुसार  तथा उनके आदेश एवं जन भावनाओं का  सम्मान का पालन करते हुए सरपंच एवं पंच द्वारा अनुमोदन पश्चात सबसे पुराने तालाब का गहरीकरण एवं निस्तारी हेतु सुगम व्यवस्था की जा रही है जिसकी सुखी दलदली मिट्टी को अन्यंत्र फेका जा रहा है  अब यदि किसी को ऐसा लगता है कि उसका दोहन कर आय अर्जित की जा रही है तो हम सुखी दलदली मिट्टी को अन्यंत्र फेकने की बजाए उसके घर मे ही डलवा देते है जिन्होंने ग्राम पंचायत पर आरोप मढ़ा है सबसे प्राचीन तालाब का सफाई कार्यक्रम ग्राम तामासिवनी के ग्रामीणों के सहयोग और उनके दिशा निर्देश के अनुरूप हो रहा है जो ग्राम पंचायत की शांति भंग करने वाले विध्न संतोषी तत्वों के गाल में एक करारा तमाचा है तथा ऐसे अनर्गल आरोप लगा कर  ग्राम तामासिवनी की शांतिप्रिय एवं जागरूक जनता को बरगला नही सकती  वही तामासिवनी  ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम में समस्त ग्रामीणों को रोजगार,शिक्षा, राशन,सहित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है तथा समस्त विकास पूर्ण योजनाओं में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है जो अन्य ग्राम पंचायतों के लिए एक बे मिसाल उदाहरण बनता जा रहा है

कोलियारी रोपणी में चाय पत्ती समान उत्कृष्ट वर्मी कम्पोस्ट खाद का निर्माण

 कोलियारी रोपणी में चाय पत्ती  समान उत्कृष्ट वर्मी कम्पोस्ट खाद का निर्माण




छत्तीसगढ़ वनोदय 

धमतरी वन मंडल के  वन क्षेत्र  तो प्राकृतिक वनोपज,वन औषधियों सहित आकूत गौण खनिज संपदाओं से परिपूर्ण क्षेत्र के रूप में जाना जाता है जिसके चारों ओर ऊंचे ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र से घिरे होने के साथ ही यहां के  सघन वन क्षेत्र एवं मनोरम दृश्य भी लोगों को अनायास अपनी ओर आकर्षित करते है धर्म अध्यात्म के रूप में भी धमतरी वन मंडल काफी प्रख्यात रहा है इसकी वजह से ही क्षेत्र के (सिंह -आवा- )सिहावा क्षेत्र के आसपास स्थित पर्वत क्षेत्र ऋषि मुनियों की तपो भूमि के रूप में विख्यात है तथा उन्ही ऋषि मुनियों के नाम पर उपरोक्त क्षेत्र के अनेक पर्वत क्षेत्रों का नाम भी पड़ा जो  आज भी उनके तपो भूमि स्थल  के इतिहास का साक्षी है



साथ ही धमतरी वन मंडल मुख्यालय से मात्र 35 किलोमीटर की दूरी पर नगरी भी है जो प्राचीन काल से ही बहुत सी ऐतिहासिक कालीन  किवदंतियों को अपने आँचल के गर्त में समेटे हुए है फिर  आज भी उसकी उन्नति और विकास में कोई विशेष अंतर दिखाई दे ऐसा कुछ नज़र नही आता आज भी लालटेन युग की भांति संध्या पश्चात वहां की चहल पहल नगण्य हो जाती है यहां तक आवागमन के साधन भी नही होते जिससे धमतरी तक पहुंचा जा सके वर्तमान में यह आवश्यकता आमजन अब अपनी दो पहिया और चार पहिया वाहनों से ही पूर्ण करते है कथन आशय यह है कि विकास के नाम पर आज भी यह क्षेत्र बहुत पीछे चल रहा है किंतु धमतरी मुख्यालय से लगभग पच्चीस किलोमीटर और नगरी पंचायत  से ही दस किलोमीटर पूर्व आयुर्वेद ग्राम दुगली से लगे  मुख्य मार्ग में  स्थित क्षेत्र कोलियारी कहलाता है जहां पर  धमतरी वन मण्डल द्वारा रोपणी  का  सफल संचालन वर्ष 2003-04 से अनवरत किया जा रहा है यहां तात्कालिक अधिकारियों के द्वारा अनेक मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल  रोपण कर एक छोटा सा प्रायोगिक रोपणी तैयार कर प्रारंभ किया था जो  धमतरी  वन विभाग की आर्थिक रीढ़ को सुदृढ किया था पर  समय समय पर यहां अनेक फलदार,फूलदार, वन औषधि पौधे एवं वानिकी पौधों सहित अन्य पौधों का उत्पाद व जन्म समय समय पर होता  रहा है जिससे विभाग को आर्थिक लाभ तो प्राप्त होता ही है साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को भी रोजगार उपलब्ध हो रहा है जिससे उनकी आजीविका व्यवस्थित ढंग से व्यतित हो रही है एक प्रकार से विकासविहीन क्षेत्र में भी स्थानीय ग्रामीणों एवं वन वासियों के आय का मुख्य स्रोत के रूप में धमतरी वन मंडल अपनी पृथक पहचान निर्मित किए हुए है धमतरी वन मंडल के आर्थिक स्त्रोत के उन्नत विकास और उसके  विस्तार में बहुत से वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने अपने स्तर पर ईमानदारी से कार्य किए थे जिसका प्रतिफल है कि लगभग दो दशकों से कोलियारी रोपणी उत्तरोत्तर वृद्धि करते हुए नए अय्याम स्थापित किए है कोलियारी रोपणी के विस्तार में जिन अधिकारियों ने अपने पसीने से सींच कर उसकी पहचान निर्मित की थी उन मे वर्तमान सहायक वन मण्डलाधिकारी  श्री टी आर वर्मा भी किसी समय अपनी सेवाएं उपरोक्त क्षेत्र में देकर अपने कर्तव्यों का अनुपालन किया था 



धमतरी वन मंडल के एसडीओ श्री टी. आर वर्मा जिनके बारे में यह प्रचलित है कि उन्होंने कभी भी अपने  कार्यों के प्रति विमुख न होते हुए  अपने जीवन मे  सर्वाधिक 1270 प्रकरण  अवैध शिकार, काष्ठ माफियाओं के विरुद्ध दर्ज किया जिनमे लगभग 700 अपराधियों को जेल के सींखचों के पीछे भिजवाया यह  उपलब्धि उनके ही नाम दर्ज है और आज भी वे वन अपराध से जुड़े अनेक प्रकरण पर कार्यवाहीकरने  से कभी नही कतराते इसके लिए समय समय पर बहुत से  ऊंची पहुंच वाले राजनीतिक दबाव का सामना भी करना पड़ा परन्तु उन सब की परवाह किए बगैर वे अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव ईमानदार एवं निष्ठावान रहे यही कारण है कि उनकी गिनती एक कड़क कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में होती है  उनकी चाल अब भी सिंहावलोकन करते हुए प्रतीत होती है तथा वे जहां भी पदस्थ रहे वहां के काष्ठ माफिया एवं चोर केवल उनके नाम से ही  थरथर कांपते है वजह श्री टी.आर वर्मा के  दूर दर्शी सोच एवं कड़क प्रशासनिक व्यवस्था के सुनियोजित ढंग से चोरों को पकड़ने एक कुशल रणनीतिज्ञ की भूमिका निभाते रहे है और उसमें वे काफी सफल भी रहे है  जिससे कोई भी अपराधी उनके चंगुल से बच नही सकता और ऐसे माफियाओं और चोरों के विरुद्ध वन अधिनियम के तहत कार्यवाही का एक कीर्तिमान  रिकार्ड दर्ज किया  एसडीओ श्री टी.आर.वर्मा के इन्ही कार्यों को देखते हुए उन्हें विभाग एवं अनेक सामाजिक संस्थाओं द्वारा कई प्रशस्ति पत्र  देकर उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है उनके द्वारा बताया गया कि तत्कालिक  सेवा काल के दौर में उपरोक्त क्षेत्रों के भिन्न भिन्न परिक्षेत्रों में रहते हुए अनेक विकासपूर्ण कार्य करवाए थे जिनमें कुछ परिक्षेत्रों में प्लांटेशन सहित वर्मीकम्पोस्ट टँकी का निर्माण भी उनके सेवा कार्यकाल में संपादित किए गए थे जो आज विभाग के आय का मुख्य स्रोत के रूप में एक पृथक पहचान निर्मित किए हुए है एसडीओ टी.आर.वर्मा का कथन है कि वर्तमान में कोलियारी रोपणी बहुत से वानिकी पौधे, औषधीय उत्पाद के पौधे, एवं जैविक वर्मीकम्पोस्ट खाद निर्माण का केंद्र बिंदु बना हुआ है यह सब डीएफओ श्री मयंक पांडे साहब की दूरदर्शी सोच  और उनके कुशल  दिशा निर्देश में  ही संपादित  किया जा रहा है वर्मी कॉम्पोस्ट खाद के संदर्भ में उनका कथन है कि  जैविक  वर्मी कॉम्पोस्ट खाद की गुणवत्ता का प्रदेश भर के वन मंडल कार्यालय के अधिकारियों द्वारा प्रशंसा व्यक्त की गई है तथा कोलियारी नर्सरी से ही खाद की मांग की जाती है जो धमतरी वन मण्डल के लिए बड़े गर्व का विषय है इसके अलावा भी रोपणी में वनौषधियों की प्रचुर मात्रा में उत्पाद स्थानीय महिला वन प्रबंधन समिति के द्वारा मांग अनुसार किया जा रहा है एक प्रकार से रोपणी का संचालन वन प्रबंधन समितियों के द्वारा किया जा रहा है जो अपने कर्मों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन कर रही है 



सघन वन क्षेत्र धमतरी वन मंडल के बिरगुड़ी रेंज अंतर्गत कोलियारी नर्सरी जहां के परिक्षेत्राधिकारी दीपक कुमार गावड़े है जो कार्यों के प्रति  निष्ठावान,संवेदनशील,धीर गंभीर एवं जुझारु प्रवृत्ति के ऊर्जावान अधिकारी है  तथा नित नई सोच नई उमंग के साथ किस तरह  बिरगुड़ी वन परिक्षेत्र के संरक्षण संवर्धन के साथ स्थानीय  ग्रामीण वन वासियों के  रोजगरउन्मुखी कार्यों से क्षेत्र का विकास सुनिश्चित किया जाए इस पर सदैव मंथन करते रहते है आज बिरगुड़ी रेंज की  महती जिम्मेदारी उन्ही के मजबूत कांधों पर टिकी हुई है उनसे जब कोलियारी रोपणी के सबंध में चर्चा की तो उन्होंने बडे सधे हुए गंभीर अंदाज में बताया कि वर्तमान में कोलियारी नर्सरी में औषधीय पौधों का उत्पाद किया जा रहा है जिसमे  एलोविरा, पौधों की फसल प्रमुख है वही अन्य औषधीय पौधों के संदर्भ में गुड़मार,शतावर,अश्वगंधा,गिलोय,सर्पगन्धा,हल्दू मुंडी,सहित अनेक पौधों का उत्पाद यहां किया जाना बताया साथ ही बड़े वृह्द भूभाग में फलदार पौधों में आम,जाम,जामुन,नींबू,काजू बादाम,चीकू कटहल सहित वानिकी पौधों में शीशम,बीजा,साल,सागौन,सिरसा, शर्मीली,छुईमुईआदि पौधों का जन्म स्थली कोलियारी रोपणी  बन चुका है 

यहां के पौधे ग्राम पंचायतों ,समाजसेवी संस्थानों,हाट बाजार,स्कूल इत्यादि में निशुल्क प्रदाय किए जाते है साथ ही मांग अनुसार अन्य राज्यों में भी  विक्रय  किए जाते है  बिरगुड़ी परिक्षेत्राधिकारी श्री दीपक गावड़े ने आगे बताया कि रोपणी में पौधा रोपण का कार्य स्थानीय और आसपास के ग्रामीण श्रमिकों के द्वारा संपादित किया जाता है जिन्हें कलेक्टर दर पर भुगतान उनके खाता में  किया जाता है यह सब कार्य राष्ट्रीय रोजगार योजना के मनरेगा के तहत किया जाता है निशुल्क पौधे वितरण के सबंध में उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों के मांग के अनुसार पौधा तैयार किया जाता है तथा वर्षा पूर्व उसका निशुल्क वितरण किया जाता है अब तक लाखों पौधों का निःशुल्क वितरण गत वर्ष 2020-21में किया जा चुका है प्रकृति से प्रेम और जनजागरूकता के वजह से वन क्षेत्र के रकबा में भी विस्तार हुआ है वर्तमान में बिरगुड़ी रेंज के कोलियारी रोपणी में 23 हजार एलोविरा पौधों का सफल रोपण किया गया है जिससे स्थानीय आयुर्वेद ग्राम दुगली में इसके प्रोसेस यूनिट के माध्यम से अनेक देशी  उत्पाद जैसे साबुन, जेल,बॉडी वॉश, शैम्पू सहित पेय पदार्थों का निर्माण किए जा रहे है एलोविरा के केवल दुगली आयुर्वेद ग्राम के प्रोसेस सेंटर में देने के पीछे परिक्षेत्राधिकारी दीपक कुमार गावड़े का कथन है कि एलोवेरा सहित अन्य औषधियों का उत्पाद वन धन केंद्र द्वारा मांग अनुसार रोपणी में रोपण कर उन्हें दिया जाता है  जिसे वे प्रोसेसिंग कर अन्य देशी उत्पाद,औषधियों  का निर्माण कर बाजार में विक्रय करते है जिससे आम व्यक्ति से लेकर विभाग को भी इसके उपयोगिता का भान होता है तथा विभागीय आय के साथ साथ आम लोगों को भी प्राचीन देशी वनोपज औषधियों के उपयोग  से व्याधि ग्रसित व्यक्ति स्वास्थ्य लाभ भी उठा रहा है यही वजह है कि औषधि युक्त पौधों का उत्पाद एवं अन्य उत्पाद के अलग बेड तैयार कर आधुनिक एवं पारंपरिक फसल समय समय पर लेकर उसके निशुल्क वितरण एवं औषधीय पौधों के रॉ मटेरियल के रूप में जन स्वास्थ्य के प्रति भी कोलियारी रोपणी अपना दायित्व बखूबी निर्वहन कर रहा है 

वही सहायक परिक्षेत्राधिकारी एवं रोपणी प्रभारी टी.एस. ध्रुव जो रोपणी की बड़ी जिम्मेदारी का निर्वहन बड़ी कुशलता एवं चाक चौबंद के साथ श्रमिकों एवं विभाग के मध्य परस्पर तालमेल और समन्वय के साथ कर रहे है उन्होंने बताया कि पूर्व में रोपणी का क्षेत्र सीमित स्थान तक सिमटा हुआ था परन्तु शनैः शनैः इसका विस्तार किया गया है अब यहां औषधि वानिकी फलफूल उत्पाद के साथ साथ वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से वर्मी कॉम्पोस्ट खाद का भी वृह्द स्तर पर उत्पाद किया जा रहा है जो राज्य शासन के द्वारा चलाए जा रहे  नरवा,गरुवा,घुरूवा, बाड़ी,योजना जैसे जनहित योजना जिसका सफल निष्पादन ग्रामीण क्षेत्रों के गौठान में किया जा रहा है उक्त योजना के अंतर्गत गौठानों में निर्मित वर्मी कॉम्पोस्ट खाद से भी बेहतर क्वालिटी के खाद  कोलियारी रोपणी में निर्माण किए जा रहे है सहायक परिक्षेत्राधिकारी टी.एस. ध्रुव आगे बताते है कि स्थानीय उपयोग सहित कृषकों को भी मांग अनुरूप खाद विक्रय किया जाता जिसका उपयोग पश्चात कृषकों का कथन है कि कोलियारी रोपणी के जैविक वर्मी कॉम्पोस्ट खाद की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि खाद के ज़मीन में पड़ते ही मिट्टी की उर्वरा क्षमता बढ़ जाती है 

तथा उन्नत फसल भी होती है जिससे दोगुने फसल के लाभ से कृषक लाभान्वित हो रहे है एक प्रकार से कृषकों का मत है कि जिस प्रकार चायपत्ती होती है उसी प्रकार के वर्मी कॉम्पोस्ट जैविक खाद  कोलियारी रोपणी में परिलक्षित होती है एक प्रकार से वे केओलियारी रोपणी के द्वारा निर्मित वर्मी कॉम्पोस्ट खाद  की तुलना चाय पत्ती से भी की जा रही है उसका साक्षात दर्शन करने में जब उसे हाथ मे उठाकर देखा गया तो वास्तव में जैविक वर्मी कॉम्पोस्ट खाद किसी चाय की पत्ती से कम दृष्टिगोचर नही हुई  डिप्टी रेंजर एवं नर्सरी प्रभारी टी.एस. ध्रुव आगे बताते है कि कोलियारी रोपणी में 150 प्रदर्शन बेड है जिनकी  6 मीटर लंबा एक मीटर  चौड़ा टँकी निर्मित किया गया है  वर्मी कॉम्पोस्ट खाद के निर्माण में लगभग सत्तर फीसदी गोबर डाला जाता है साथ ही पैरा या पैराली कुट्टी बनाकर सुखी पत्तियां इकट्ठी की जाती है सब को मिश्रण कर केंचुओं को डाला जाता है जिसमे नमी बनाए रखने के लिए गीला गोबर से कव्हर किया जाता है पश्चात केंचुओं के द्वारा भीतर ही भीतर उथल प्रक्रिया करते रहते है तथा आवश्यकता पड़ने पर टंकी में डाले गए सामग्री खाद को ऊपर नीचे भी किया जाता है जिसके डेढ़ से दो माह के भीतर उत्तम क्वालिटी का वर्मी कॉम्पोस्ट खाद निर्मित हो जाता है डिप्टी रेंजर थम्मन सिंह ध्रुव बताते है कि इसका विक्रय एवं मांग भिन्न भिन्न वन मंडल में वृक्षारोपण कार्यक्रम,रायपुर गरियाबंद,सूरजपुर,अंबिकापुर, कोरबा,इत्यादि में सप्लाय किया गया वही स्थानीय कृषकों को भी मांग अनुसार खाद विक्रय किया जाता है डिप्टी टी.एस. ध्रुव आगे बताते है कि अभी रोपणी को और विस्तृत किया जा रहा है आधुनिक पद्धति के उत्पाद पर अधिक ध्यान आकर्षित कर नए डोम एवं शेड तैयार किए जा रहे है वर्तमान में लगभग 250 बेड है जिनमे औषधीय प्रदर्शन प्लांट,फली हाउस,नेट हाउस ,लेबर शेड,पोटिंग मिश्रण शेड,एवं उपचार के लिए पृथक प्लेट फार्म निर्माण द्रुत गति से किया जा रहा है इनमें अधिकांश शेड में आधुनिक पद्धति से पौधे रोपण किए जाएंगे 


इसके लिए पौधों को सामान्य तापमान में रखने हेतु शीतल  विधुत उपकरण भी लगाए जाएंगे आधुनिक पद्धति और उत्पाद हेतु स्थानीय श्रमिकों को कार्यशाला लगाकर प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा  शिशु रूपी पौधों को ऋतु वातावरण अनुकूल एवं सर्वाइव,उंसके ग्रोथ तथा नमी की स्थिति के संदर्भ में प्रशिक्षित सहित अन्य जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी जिस प्रकार बिरगुड़ी रेंज के कोलियारी रोपणी  में आधुनिक पद्धति से उत्पाद एवं फसल हेतु नए नए शेड उपकरण इत्यादि उपलब्ध की जा रही है उससे ज्ञात होता है कि भावी समय धमतरी वन मंडल का कोलियारी रोपणी अपने कालाजयी इतिहास रचने और  लिखने पूर्णत प्रतिबद्ध है  तथा शीघ्र ही अपनी नई सोच कार्यो के प्रति समर्पित भावना लगन और निष्ठा से धमतरी वन मंडल के बिरगुड़ी रेंज अंतर्गत कोलियारी रोपणी का भविष्य काफी उज्ज्वल एवं चमकदार दिखाई पड़ रहा है जिसके दूरगामी परिणाम  वर्तमान से ही सुखद संकेत दे रहे है