मंगलवार, 29 नवंबर 2022

29 व 30 नवंबर को रायपुर में मुक्तिबोध प्रसंग 🔴 जुटेंगे देश के कई नामचीन लेखक और साहित्यकार

 🔴 29 व 30 नवंबर को रायपुर में मुक्तिबोध प्रसंग🔴 जुटेंगे देश के कई नामचीन लेखक और साहित्यकार


रायपुर. छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी  पंड़ित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की अध्ययनशाला के साथ  विश्वविद्यालय के कला भवन में दो दिवसीय 'मुक्तिबोध प्रसंग' का आयोजन कर रही है. इसी महीने 29-30 नवंबर को होने वाले इस आयोजन में देश के कई जाने-माने लेखक और साहित्यकार शामिल होंगे. अलग-अलग सत्रों व विभिन्न विषयों पर केन्द्रित इस आयोजन के उद्घाटन सत्र को प्रसिद्ध कवि लाल्टू व वरिष्ठ आलोचक जयप्रकाश संबोधित करेंगे. उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्विवद्यालय के कुलपति केशरीलाल वर्मा करेंगे. इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण सत्र हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार गजानन माधव मुक्तिबोध और उनके छोटे भाई व मराठी के प्रसिद्ध साहित्यकार शरच्चंद्र माधव मुक्तिबोध के आपसी पारिवारिक, साहित्यिक और वैचारिक संबंधों पर आधारित है. ‘मुक्तिबोध और मुक्तिबोध: गजानन माधव और शरच्चंद्र माधव’ शीर्षक से आयोजित इस सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार श्रीपाद भालचंद्र जोशी, साहित्यकार व पर्यावरणविद् प्रदीप मुक्तिबोध और कवि व आलोचक  प्रफुल्ल शिलेदार अपनी बात रखेंगे. इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार दिवाकर मुक्तिबोध करेंगे.


कार्यक्रम में मुक्तिबोध की 

कविताओं पर विमर्श सत्र ‘आवेग-त्वरित-काल-यात्री’ और उनके रचनात्मक व आलोचनात्मक अवदान पर केंद्रित सत्र ‘अंधेरे में रोशनी मुक्तिबोध’ आयोजित किया जाएगा. इन सत्रों में शामिल वक्ताओं में कवि-कहानीकार बसंत त्रिपाठी, कवि व आलोचक मृत्युंजय, आलोचक अमिताभ राय, कवि मिथलेश शरण चौबे, दर्शनशास्त्री पंकज श्रीवास्तव, युवा आलोचक कामिनी और युवा आलोचक भुवाल सिंह ठाकुर शामिल हैं. इन सत्रों की अध्यक्षता साहित्य व भाषा अध्ययनशाला की प्राध्यापक शैल शर्मा और मधुलता बारा करेंगी.

 

कार्यक्रम के दौरान एक कवि गोष्ठी का आयोजन भी रखा गया है जिसमें लाल्टू, नवल शुक्ल, विजय सिंह, प्रफुल्ल शिलेदार, पथिक तारक, भास्कर चौधुरी, बसंत त्रिपाठी, मिथलेश शरण चौबे और मृत्युंजय कविता पाठ करेंगे. जानकारी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष ईश्वर सिंह दोस्त ने दी है.

बुधवार, 23 नवंबर 2022

गाता रहे मेरा दिल ग्रुप ने नई प्रतिभाओं को तराशा नए पुराने गीतों की धूम रही

गाता रहे मेरा दिल ग्रुप ने नई प्रतिभाओं को तराशा नए पुराने गीतों की धूम रही 

रायपुर गाता रहे मेरा दिल का रंगारंग सुपरहिट गीतों का कार्यक्रम रविवार संध्या छ बजे से मायाराम सुरजन हॉल में प्रारंभ हुआ  जिसमें कुछ कलाकारों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश कलाकार नवोदित थे जिन्हें पहली बार मंच साझा करने का अवसर प्राप्त हुआ इन नवोदित कलाकारों को तराशने का कार्य गाता रहे मेरा दिल म्यूज़िकल ग्रुप के डायरेक्टर  नवाब कादिर,एवं सुप्रसिद्ध मंच संचालक लक्ष्मी नारायण लाहोटी,तिलक पटेल पार्षद ने किया प्रतिदिन की रिहर्सल हेतु चार से पांच घण्टे तक समय सभी कलाकारों ने टिम्बर भवन देवेंद्र नगर में दिया  इस अवसर पर समाज से प्रतिभाओं को बाहर निकालने और तराशने का श्रेय राजीव गांधी वार्ड के युवा मिलनसार,हंसमुख पार्षद तिलक पटेल को जाता है जिन्होंने गुजराती समाज में आज तक की दबी हुई प्रतिभाओं को सामाजिक मुख्यधारा में लाने प्रोत्साहित किया और पहली बार अपने  समाज से इतर उन्हें खुला मंच प्रदान करने विश्वसनीय गाता रहे मेरा दिल म्यूज़िकल ग्रुप को माध्यम बनाया और लगातार पखवाड़े भर तक कलाकारों द्वारा की गई मेहनत रंग लाई और अप्रत्याशित रूप से गीत संगीत का उक्त कार्यक्रम सफलता के नए अय्यम स्थापित कर दिया कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती वंदन गीत मंच संचालक लक्ष्मी नारायण लाहोटी ने सुमधुर भजन से किया गया  पश्चात  कालिका अवतार सिंह खनूजा ने स्टूमेंटल वाद्य यंत्र पर  आंख में पट्टी बांध कर म्यूज़िकल प्रस्तुति दी
जिसे उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा गायकी कार्यक्रम की शुरुआत आर वासु ने.. गुलाबी आंखे जो तेरी देखी की प्रस्तुति दी लक्ष्मी नारायण दामा ने महेंद्र कपूर के गीत ...तुम अगर साथ देने का वादा करो ....गीत के हर अंतरे  पर लोगों ने ताली की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया एकल महिला गीत का खाता छत्तीसगढ़ की प्रख्यात गायिका  पूजा सिंह ने मूंगड़ा मूंगड़ा,,, मैं गुड़ की डली... की प्रस्तुति देकर  महफ़िल में जोश खरोश के साथ गर्माहट ला दिया इसके पश्चात संजय वर्मा  जिन्होंने गत माह कौन बनेगा करोड़पति में पार्टी सिपेट किया था तथा अपनी गायकी शौक के बारे में चर्चा के दौरान महानायक अमिताभ बच्चन ने अपनी शुभकामनाएं गाता रहे मेरा दिल म्यूज़िकल ग्रुप को दी थी उनके द्वारा  ..मेरे सपनों की रानी कब आएगी... गीत को बेहतरीन अंदाज़ में पेश किया वही सिंगर मनीष राव ने... होगा तुमसे प्यारा... कौन गीत को ऊर्जावान तरीके से प्रस्तुत किया ..डायरेक्टर नवाब कादिर और दक्षा पटेल जो नवोदित कलाकार थी के साथ युगल गीत ..हमको मुहब्बत हो गई है तुमसे ..गीत में उत्कृष्ट   तालमेल के साथ प्रस्तुति ने दर्शकों को ताली बजाने विवश कर दिया अगले पायदान में...नवोदित हरसुख पटेल ने.... मैं यट यमला पगला दीवाना,,, ओ रब्बा....जैसे  फ़ास्ट गीत को प्रस्तुत किया और दर्शकों को झूमने विवश कर दिया ...आर वासु ने तेरे हाथों में पहना के चुडिया ...डॉ शशी खिरैय्या ने दिल तो है दिल दिल का एतबार क्या की जे..... और युवा सिंगर अनुराग ठाकुर ने ...कहो न कहो... फ़िल्म मर्डर का अरबियन धुन जैसे आधुनिक गीत को प्रस्तुत किया तिलक पटेल पार्षद राजीव गांधी वार्ड जो संगीत प्रेमी है उन्होंने ... जिसे देख मेरा दिल धड़का .. की प्रस्तुति दी उनके बाद नवाब कादिर  मधु पटेल ने युगल गीत  ,.नैनो में सपना सपनों में सजना...गीत  को नृत्य वाले अंदाज़ में धूम मचाते हुए प्रस्तुत किया जो नवंबर के कड़ाके ठंड में भी लोगों में उत्साह और ऊर्जा का गर्म वातावरण  संचारित कर दिया पिंकी रामटेके ने भी अपने बेहतरीन अंदाज़ में  सर्द माहौल में .. जा रे जा ओ हरजाई,,, जैसे गीत का तड़का लगा कर मनोरंजन पूर्ण माहौल निर्मित कर दिया तो संजय वर्मा जो अपना परफॉर्मेंस को बड़े गर्म जोशी से सहगायिका पूजा के साथ युगल गीत टाइटल सांग गाता रहे मेरा दिल ... गीत को इतनी खूबसूरती से गाया की लोग दर्शक गण  झूम उठे रायगढ़ से पधारे विशिष्ट गायक लक्ष्मी नारायण पांडे ने  जो छत्तीसगढ़ी एलबम के पार्श्र्व गायक है ने बप्पी दा का सुपरहिट गीत..याद आ रहा है तेरा प्यार.. गीत से हॉल को झूमने  पर विवश कर दिया ,,  कार्यक्रम के दौरान डायरेक्टर नवाब कादिर एवं पार्षद तिलक पटेल के विशेष आमंत्रण पर पूर्व ग्रामीण विधायक रहे   देव जी भाई पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर सभी कलाकारों का उत्साह  वर्धन किया जिनका मंच आसंदी से स्वागत कर सम्मान और स्मृति चिन्ह देकर किया गया इस अवसर पर उन्होंने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि गीत संगीत भाषा,धर्म जाति,संप्रदाय को एक मंच पर लाकर सभी के दिलों को जोड़ता है  जिसके लिए  तिलक पटेल और नवाब  कादिर,और मंच संचालक लक्ष्मी नारायण लाहोटी को बधाई देते हुए शुभकामनाएं दी इसके पश्चात डायरेक्टर नवाब कादिर और पूजा सिंह ने ...गोरी तेरे अंग अंग में  ...गीत का ऐसा परफॉर्मेंस दिया कि दर्शक अपने स्थान पर झूमने लगें,, आरती पटेल ने ...तूने ओ रँगीले कैसा जादू किया ,,,एकल गीत बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया दक्षा पटेल ...सात समंदर पार मैं तेरे पीछे पीछे आ गई मैं.....नवाब कादिर पूजा सिंह ड्यूट गीत का... जानू मैं सजनिया...भानु पटेल, ने एकल गीत  गाया, और अतिथि गायक के रूप में सुजीत यादव ने बढ़िया गीत.... चाहिए,,,थोड़ा प्यार..थोड़ा प्यार चाहिए...की बेहतरीन अंदाज़ में प्रस्तुति दी प्रकाश पटेल ने ...दिल जिगर नज़र क्या है गीत को गाया...पिंकी रामटेके  और नवाब कादिर का युगल गीत ..बच के रहना रे बाबा, तुझपे नज़र है.. गीत पर श्रोता  इतने ज्यादा एक्साइट हो गए कि हॉल में सिटी और ताली बजने लगी विशेष अतिथि के रूप से पधारे प्रेस क्लब अध्यक्ष दामू अंबेडारे का स्वागत सम्मान किया गया इस अवसर पर...उनके द्वारा मो रफी का सदाबहार गीत...  तेरी आँखों के सिवा दुनियां में रखा क्या है...को अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया गया ...दुर्गेश पुली ने तेरे वास्ते... मेरा इश्क सूफियाना  गीत ने सब को झूमने मजबूर कर दिया है ...संजय पूजा का युगल गीत... ऐसी दीवानगी देखी नही को दोनों ने साक्षात जिया ,,,मधु पटेल ने ..मेरे ख्वाबों में जो आए ...  हरसुख पटेल और मधु  पटेल ने... कौन दिशा में चला रे बटोहिया...जबरदस्त तरीके से प्रस्तुत किया लक्ष्मी नारायण पांडे ने ...चला जाता हूँ किसी की धुन में...गाया तो मंच संचालक लक्ष्मी नारायण लाहोटी,और शशी खिरैय्या युगल ...सावन का महीना पवन करे शोर की प्रस्तुति दी जबकि आर वासु,, आरती पटेल,,,देखा है पहली बार साजन की आंखों में प्यार ,,,मनीष राव ने ...इश्क न चाहे जिसको यार... जाने जिगर जानेमन तुझको है मेरी कसम ...दो घूंट मुझे भी पिला दे शराबी....तुम अगर साथ देने का..  आंखों में काजल है ....हम तेरे बिन रह नही पाते ...आज रपट जाइयों...ये मुरादों की रात किसे पेश करूँ..जैसे गीतों को श्रोता गण  सुनकर झूम कर ताली बजाकरआनंद उठाते रहे जिसे अतिथि गायक बजरंग बंसल ने बड़ी सहजता के साथ सधे हुए अंदाज़ में प्रस्तुत किया वहीं सुजीत यादव ने   .. तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त...गीत को बड़ी परिपक्वता के साथ प्रस्तुत किया  जिसे सुनकर हॉल  में बैठे पूरे श्रोता झूमने लगे ...वही ...रिमझिम के गीत सावन..और दुनिया हसीनों का मेला,,जैसे गीतों की लगातार प्रस्तुति होती रही और दर्शक भी रात बारह बजे तक गीत संगीत का लुत्फ उठाते रहे मजेदार बात यह रही कि नए प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने सभी म्यूज़िकल ग्रुप के सभी डायरेकर ,मंच संचालक,सिंगर बड़ी संख्या में उपस्थित हुए तथा उन्हें अपना स्नेह आशीर्वाद दिया जिनमे कराओके क्लब के अध्यक्ष सर्व श्री अजय आडवाणी और प्रसिद्ध मंच संचालक रविन्द्र सिंह दत्ता  गीत संगीत के साधक,और उसके प्रति समर्पित ,इमरान अली, श्रीमती आशा केवलानी,डी आर साहू,शेष गिरी राव,, बाबा नवाब,रिज़वान भाई, बबलू पांडे,बजरंग बंसल,संदीप तिवारी ,विक्की सोनी  सहित बहुत से  गणमान्य,डायरेक्टर गण,सम्माननीय नागरिक,श्रोता गण उपस्थित हुए तथा नवोदित प्रतिभाओं को अपना आशीर्वाद दिया गाता रहे मेरा दिल म्यूज़िकल ग्रुप के डायरेक्टर नवाब कादिर ने धुन डायरेक्टर अजय आडवाणी का मंचीय आसंदी से माला और श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया इस अवसर पर सब कला साधकों  ने सफल कार्यक्रम हेतु गाता रहे मेरा दिल म्यूज़िकल ग्रुप को बधाई और शुभकामनाएं दी.कार्यक्रम का सफल संचालन, लक्ष्मी नारायण लाहोटी जी ने किया और देर रात तक दर्शकों को बांधे रखने में वे कामयाब रहे

मंगलवार, 15 नवंबर 2022

मृत दंतैल के दांत और सिंघा के सींग को लेकर उठते सवाल कहां गए तस्करी में राजसात किए गए वन्य प्राणियों के अंग अवशेष

 

मृत दंतैल के दांत और सिंघा के सींग को लेकर उठते सवाल कहां गए तस्करी में राजसात किए गए वन्य प्राणियों के अंग अवशेष 


देवपुर के समीप मृत हाथी और उसके दांत


अलताफ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) बार अभ्यारण्य क्षेत्र से सटे देवपुर के पकरीद गिधपुर  मार्ग विश्राम गृह के करीब स्थित धरती का सबसे विशाल भारी भीमकाय जानवर हाथी की करंट से मृत्यु विगत दिनों हो गई आनन फानन में उच्च अधिकारियों की देख रेख मे उसका पोस्ट मार्टम करवाकर कथित मृत हाथी को दफना भी दिया गया मृत हाथी के दफन के साथ ही उसके पीछे बहुत से सवाल भी छोड़ दिया जिसको लेकर अब संपूर्ण वन विभाग सहित आम वर्ग  में भी मृत गजराज की मौत और उसके दफन को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रही है
      चर्चाओं के बीच  एक बहुत पुरानी कहावत की याद भी ताजा हो रही है कहते है जीवित हाथी लाख का और मर गया तो सवा लाख का ज्ञात हुआ है कि मृत गजराज जो विगत कई माह से या एकाध वर्ष पूर्व से बार नवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र से लेकर देवपुर अर्जुनी,कसडोल,सहित बलौदाबाजार सिरपुर फुसेराडीह,कोडार क्षेत्र में प्रायः विचरण करते देखा गया एक प्रकार से गजराज उपरोक्त क्षेत्र को अपना रहवास क्षेत्र बना चुका था बताते  चले कि बार नवापारा अंतर्गत रवान परिक्षेत्र जो बार अभ्यारण्य  का एक क्षेत्र है तथा वन विकास  निगम के अंतर्गत आता है उसी के  एक कक्ष क्रमांक में इसी वर्ष चिन्हित पौधों के थिनिंग कार्य के समय जो फरवरी माह से लेकर जून जुलाई तक मे वन विकास निगम द्वारा कराया जाता है उसी कक्ष क्रमांक के क्षेत्र से सायकल पर जा रहे एक दैनिक वेतन भोगी श्रमिक को क्षेत्र में कई माह से विचरण कर रहे दंतैल द्वारा कुचल कर मार दिया गया था यही नही गत वर्ष  मोटर सायकिल से जा रहे दो लोगों में से एक की मृत्यु भी हाथी के हमले से हो चुकी है  अनुमान लगाया जा रहा है कि यह वही दंतैल था जो उपरोक्त क्षेत्र में विगत कई माह से विचरण कर रहा था जिसकी चर्चा कथित मृत हाथी के रूप में किया जा रहा है यही नही इसकी क्षेत्र में लगातार मुक्त वातावरण मे विचरण की पुष्टि स्थानीय ग्रामीण वासी पर्यटक एवं परिक्षेत्र के निगम के अधिकारी,कर्मचारी भी कर चुके है फिर भी  वन विभाग द्वारा आसपास के ग्रामीणों की सुरक्षा करने के कोई सार्थक उपाय नही उठा पाया  जबकि मानव हाथी द्वंद के रोकथाम के लिए प्रति वर्ष वन विभाग करोड़ों का बजट जारी करता है जिसमें महासमुंद वन मण्डल को भी बजट जारी किया जाता है  मगर वहाँ केवल औपचारिक बुकलेट,पाम्पलेट  प्रकाशित  तथा अन्य माध्यम से प्रचार प्रसार कर केवल खानापूर्ति कर सारे बजट का वारा न्यारा कर दिया जाता है महासमुंद वन मंडल द्वारा जन जागरूकता के नाम पर हाथी मूवमेंट के हिसाब से मुनादी जैसे कार्य भर किए जाते रहे है परन्तु हाथी जैसे विशाल प्राणी  से वनवासियों की जानमाल सुरक्षा के कोई उपाय नही किए गए जैसे हाथियों के आवागमन मार्ग को कॉरिडोर बनाकर हल्के विद्युत तारों की फेंसिंग की जाए ताकि वह अन्यंत्र प्रवेश कर जान माल को नुकसान न पहुंचा सके क्योंकि वर्ष भर गजदल एक छोर से दूसरे छोर तक यहां तक महारष्ट्र,एमपी,बिहार  बॉर्डर तक आवागमन करते रहते है वह भी उसी मार्ग से जिस मार्ग से वर्ष भर वे इधर से उधर होते रहते है केवल नर दंतैल हाथी ही अपने चयनित स्थल पर  विचरण करता है मगर यहां जानमाल सुरक्षा के बजाए  सब भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है  जिससे आसपास के ग्रामीणों के लिए सदैव  खतरा और दहशत पूर्ण वातावरण में जीवन व्यतीत करने विवश होना पड रहा है अपनी खड़ी फसल बचाने वे खेत के चारों ओर हल्के झटके देने वाले विद्युत प्रवाहित तार लगाते है ताकि फसल बचाया जा सके परन्तु इसके बावजूद वन विभाग द्वारा मानव सुरक्षा हेतु कोई कारगर उपाय न करने की वजह से माह दो माह में हाथियों की जद में आए ग्रामीणों  की मौत के समाचार प्रकशित होते रहते है जबकि वन्य प्राणियों से सुरक्षा और संरक्षण संवर्धन के लिए केंद्र से भी करोड़ों रुपये आते है परंतु वो सब कहाँ जाता है इसका कोई पुरसाने हाल नही है  उल्लेखनीय है कि देवपुर,अर्जुनी परिक्षेत्रों में प्रायः शिकार की घटना आम है जहां जंगली सुअर हिरण कोटरी,बारह सिंगा  के शिकार के समाचार  मिलते रहते है  परंतु शिकार के लिए बिछाए गए तार से हाथी की मृत्यु होना सब सोची समझी साजिश का नतीजा माना जा रहा है कुछ तो मानव अपनी जान की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों के द्वारा गजराज के निर्धारित आवागमन मार्ग में हाई वोल्टेज विद्युत प्रवाह तार का मक्कड़ जाल बिछा दिया गया ताकि हाथी करंट संपर्क में आकर अकाल मृत्यु का निवाला बन सके और ऐसा हुआ भी तभी तो पांच दिन से ऊपर उसकी मृत काया वहां पड़े रही औऱ  सड़ने की स्थिति में पहुंच गई जबकि गजराज को मारने उक्त क्षेत्र मे उच्च दाब लगभग 1100 वॉट का तार बिछाया गया था जबकि 440 वॉट के झटके  से ही अच्छे अच्छे प्राणी का खून पल भर में सुख जाता है फिर कथित क्षेत्र में 
लगातार चारवाहे, आम लोगों का आवागमन होता रहता है फिर भी उसके मृत होने की सूचना समीप स्थित वन विभाग कार्यालय में देना किसी भी ग्रामीण ने उचित नही समझा जबकि करीब ही विभागीय कार्यालय और विश्रामगृह है जिसे मद्देनजर रख कर  वहां भला कोई शिकारी तार बिछाकर वन्य प्राणियों का शिकार करने की हिमाकत और साहस कैसा करेगा ?  यह तब ही संभव है जब तक वन विभाग कर्मियों की शिकारियों से सांठगांठ न हो उसका ही परिणाम कहा जा सकता है अवैध शिकार का यह परिक्षेत्र केंद्र बिंदु बना हुआ है गौर तलब है कि कुछ दिन पूर्व भी एक व्यक्ति की जान ऐसे ही विद्युत पाश की चपेट में आने से हो गई थी 


हाथी दांत 

फिर क्षेत्र के रेंजर सहित वन कर्मी तत्काल एक्शन में क्यों नही आए ? जबकि परिक्षेत्र में बड़ी संख्या में फॉरेस्ट गार्ड रहते है वे ना ही वन क्षेत्रों का औचक भ्रमण करते है  और ना ही  शिकारियों काष्ठ तस्करों पर नकेल कसते है  इसका मतलब स्पष्ट है कि कथित परिक्षेत्र में ग्रामीणों,तस्करों  का एक ही लक्ष्य है कि वन जीवों को शिकार बनाना और उसका मांस भक्षण के साथ सिंग, खाल(चर्म) और कीमती अंग  अवशेष जैसे नाखून, इत्यादि की तस्करी करना जैसा मुख्य उद्देश्य मात्र रह गया है इसमें वन कर्मियों और तस्करों से बराबर सांठ गांठ रहता है जिन पर से विभागीय अधिकारियों का अंकुश पूरी तरह से हट चुका है या फिर इनके संरक्षण में शिकार की घटना को अंजाम दिया जा रहा है बताते चले कि देवपुर के प्रभारी रेंजर पंचराम यादव जो लंबे समय से देवपुर में जमे हुए है उनके ऊपर भी भ्रष्टाचार सहित बहुत से वर्षों पूर्व किए गए घटनाओं में आरोप लग चुके है तथा ज्ञात यह भी हुआ है कि शिकार अवैध संलिप्तता के कारण  वे लाल बंगले की सैर भी कर चुके है फिर भी उन्हें रेंज प्रभार देकर महिमा मंडित किया गया है इस संदर्भ में बताया जाता है कि वर्तमान किसी मंत्री का वरद हस्त प्राप्त होने के कारण वे बिंदास यहां जमे हुए है और देवपुर परिक्षेत्र को चारागाह समझ कर खोखला कर रहे है तथा सर्वाधिक शिकार और अवैध कटाई,विभागीय निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार बांस  करील की चोरी इत्यादि इनके ही कार्यकाल में हुए है ज्ञात तो यह भी हुआ है विभाग में बहुत से अधिकारी किसी न किसी मंत्री का करीबी होने का लाभ उठा रहा है एक प्रकार से ...जब सैय्या भयो कोतवाल तो अब डर काहे का.... वाली उक्ति यहां चरितार्थ होती नजर आ रही है ..कोई केंद्रीय मंत्री का करीबी,तो कोई छग के कोई,विधायक, मंत्री का विद्यार्थी जीवन काल का मित्र तो कोई मुख्यमंत्री के पाटन क्षेत्र का रहवासी होने का लाभ खुलकर उठा रहा है हालांकि किसी विधायक,मंत्री,छात्र सखा,या उनके निवास   क्षेत्र में रहने के कारण कोई विधायक मंत्री उन्हें बचाने नही आएंगे बल्कि संरक्षण देने से विपरीत ऐसे विशिष्ट जनों की बनी बनाई साख पर धब्बा लगेगा साथ ही जनता यह आरोप लगाएगी कि अब मंत्री ही अपने संरक्षण में ऐसे मैदानी अमले के अधिकारियों से अनैतिक कृत्य और भ्रष्ट कार्य करवा रहा है तब उनकी भावी राजनीतिक जीवन पर व्यापक बुरा प्रभाव पड़ सकता है इधर मंत्री विधायकों के नाम की आड़ में अधिकारी पूरी तरह से बेलगाम हो चुके है तथा अपनी मर्जी से वन नियम के इतर अपना जंगल कानून चला रहे है जिसकी वजह से  वनों की सुरक्षा का कोई माई,बाप नही  वन कर्मचारी भी खुले रूप मे अपने अपने क्षेत्रों में आतंक मचाए हुए है वन क्षेत्रों के भीतर होने वाले निर्माण कार्य से लेकर,अवैध,कटाई, शिकार,तस्करी, आम हो चुके है ऐसे भ्रष्ट अधिकारीयों पर अब विभागीय डंडा नही चलता बल्कि उसकी पीठ थपथपाकर उसे संरक्षण प्रदाय किया जाता है अधिक होने पर केवल इधर से उधर कर और मलाईदार जगह में बैठाया जाता है ताकि वह ज्यादा से ज्यादा मलाई दे सके  यही कारण है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के नियुक्ति के कारण वन क्षेत्र में लगातार अवैध कटाई,शिकार,तस्करी के चलते वन्य प्राणियों की मौत की घटना की पुनरावृत्ति होती रहेगी और  गजराज,बारहसिंगा, हिरण,कोटरी,वन भैंसे जैसे शेड्यूल एक श्रेणी के वन्य प्राणियों की अकाल मृत्यु जैसी भयावह हृदय विदारक घटना होते रहेगी और फिर  एकाध,दो ग्रामीण और छोटे वन कर्मी को बलि का बकरा बना कर प्रकरण की इति श्री मान ली जाएगी परन्तु देवपुर परिक्षेत्र के गिधपुर मार्ग मे करंट से मृत गजराज के दफन के साथ ही बहुत से सवाल भी खड़ा कर दिया है जैसे बताया गया है कि दंतैल की मृत्यु चार से पांच दिन पूर्व हो चुकी थी सडांग बदबू के पश्चात ज्ञात हुआ कि हाथी मरा हुआ है इसके पश्चात वहां जेसीबी भी पहुंच गया और उसे गुपचुप तरीके से दफन की तैयारी भी हो चुकी थी परंतु जब पिथौरा के सक्रिय  पत्रकारो को इसकी भनक लगी तब वे मौका स्थल पहुंच कर एक मात्र फोटो,और वीडियो क्लिप शूट कर सोशल मीडिया में समाचार वायरल किया तब संपूर्ण वन विभाग में हड़कंप मच गया 


पकड़े गए बारह सिंगा के सींग

और आनन फानन में वरिष्ठ अधिकारी मौका स्थल पर पहुंचे यदि समाचार बाहर नही आता तो संभवतः जेसीबी मशीन जो पहले ही पहुंच चुकी थी  समाचार  वायरल होने के पहले ही उसे दफना दिया जाता और किसी को कानों कान खबर नही लगती और एक बहुत बड़ी घटना को गुपचुप तरीके से निपटा दिया जाता सवाल उठता है कि  विश्राम गृह के समीप  गिदपुरी मार्ग में चार पांच दिन से ऊपर मृत दंतैल जो पूरी तरह फूल कर अकड़ चुका था उसके शव का किस तरह डॉक्टरो ने पोस्ट मार्टम किया ? क्योंकि सडांग बदबू की वजह से वहां खड़ा होना दुरूह था  फिर तीन से चार डॉक्टरों ने संपूर्ण पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियो ग्राफी,फोटो ग्राफ मीडिया में क्यो नही भेजा ? मीडिया कर्मियों को समाचार कव्हरेज करने क्यों रोका गया ? यह सवाल विभागीय कर्मियों सहित आम नागरिकों के मन में कौतूहल और चर्चा का विषय बन चुका है कि पत्रकारों को भी पोस्टमार्टम होने के पूर्व एवं पोस्टमार्टम होने के  पश्चात मौका स्थल में जाकर फोटो लेने और समाचार संकलन करने  रोक दिया गया जबकि किसी विशिष्ट जन की मृत्यु और दाह संस्कार प्रक्रिया में पूरे मीडिया बिरादरी को कव्हरेज करने बुलाया जाता है मगर यहां ऐसा कुछ भी नही किया गया जबकि गजराज जो भगवान गणेश स्वरूप  पूजा जाता है फिर भी पोस्टमार्टम के और दफन होने के पूर्व के फोटो वीडियो  सार्वजनिक नही किया गया


बारह सिंगा का अंतराष्ट्रीय मूल्य 

  इससे मृत दंतैल के संपूर्ण  विभागीय कार्यवाही को लेकर बहुत से सवाल खड़े हो गए है यह स्थिति प्रदेश के एक अन्य वन क्षेत्र में घटित हो चुकी है जहां गजराज का कंकाल भर बचा था  और दांत गायब हो चुके थे जिसकी वजह से एक पीसीसीएफ रैंक के अधिकारी को लूप लाइन में जाना पड़ा था  आखिर दंतैल जिसके दांत की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों करोड़ों की है कहीं पोस्टमार्टम की आड़ में कीमती दांत तो नही निकाल लिए गए ? बताते चले कि पश्चिम बंगाल में 17 किलो हाथी के दांत पकड़े गए थे, जिनकी अंतरराष्ट्रीय मार्केट में वैल्यू करीब एक करोड़ 70 लाख रुपये है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके एक किलो की वैल्यू 10 लाख रुपये है. यानी अगर हाथी दांत 10 किलो के हैं तो उसके 1 करोड़ रुपये केवल दांत का मूल्य होता है इसलिए भी यह कहावत आज तक कहा जाता है कि जिंदा हाथी की कीमत लाख रुपये है तो मरने के बाद वह सवा लाख का होता है  वही एक अन्य प्रकाशित  समाचार की माने तो दिल्ली मे 28 अप्रेल 2022 को एक 23 वर्षीय महिला से बारहसिंगा के तीन किलो सिंग बरामद किए गए थे जिस की अंतरराष्ट्रीय कीमत  डेढ़ करोड़ बताई गई है उल्लेखनीय है कि लगभग चार माह पूर्व महासमुंद वन वृत के बागबाहरा परिक्षेत्र के लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित हाथी गढ़ के सुकरा गौठान के समीप सात जुलाई को एक बारह सिंगा की मौत हो गई थी जिसे पहले दफना दिया गया पश्चात  ग्राम के आवारा श्वान के नोचकर बाहर निकाले जाने पर उसे खल्लारी वन क्षेत्र में कहीं फेक दिया गया ऐसा परिक्षेत्राधिकारी विकास चन्द्राकर का कथन था घटना के पीछे की कार्यवाही पंचनामा से लेकर पोस्टमार्टम तक का ब्यौरा तथा उसके नष्टीकरण,और लिखित प्रक्रिया, के संदर्भ में रेंजर द्वारा वन अधिनियम में परिवर्तन जैसी गोलमोल बातों को लेकर  विकास चन्द्राकर परिक्षेत्राधिकारी बागबाहरा  की भूमिका भी संदिग्ध बनी हुई है क्योंकि ज्ञात यह भी हुआ है कि बारहसिंगा की रिपोर्ट ऊपर मुख्यालय नही भेजी गई जो संदेह के दायरे में है बताया जाता है कि बारहसिंगा के मृत्यु पश्चात रेंजर विकास चन्द्राकर  पन्द्रह दिवस का  लंबा अवकाश लेकर अंतर्धान हो गए थे 

हाथी दांत का अंतरराष्ट्रीय मुल्यांकन


बारह सिंगा के शव को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया और उसके वास्तविकता जानने के  लिए  सूचना का अधिकार लगाकर संबंधित जानकारी मांगी जाएगी  बहरहाल, महासमुंद और बलौदाबाजार परिक्षेत्रों में अवैध शिकार की घटना बहुत अधिक बड़ी है जिसमे यदाकदा कुछ तस्करों पर विभाग द्वारा वन अधिनियम के तहत कार्यवाही भी की जाती है जिसमे कार्यवाही पश्चात तस्करों से वन्य प्राणियों  की खाल,सींग नाखून दांत,जैसे अवशेष भी बरामद कर  विभाग द्वारा राजसात किया जाता रहा है परंतु तस्करों पर कार्यवाही पश्चात वन्य प्राणियों के ऐसे खाल,दांत,सींग, नाखून,अवशेष जो राजसात किए जाते है वह जाता कहाँ है ? क्योंकि वन विभाग ऐसे  तस्करों पर खाल चमड़े, नाखून,दांत  इत्यादि को लेकर वन्यजीव अवशेष  तस्करी के नाम पर  कार्यवाही तो आज से नही अपितु वर्षों से कर  रही है परंतु राजसात किए गए वस्तुओं का क्या किया गया ? कौन से भंडारण में रखा गया ? इसका आज तक कोई ब्यौरा सार्वजनिक नही किया गया जो वन विभाग के कार्यशैली पर भी संदेह की उंगली उठाता है वही एक पर्यावरण,प्रकृति, वन्यजीव प्राणी प्रेमी द्वारा इसकी शिकायत और जांच की मांग

       7 जुलाई 22 को मृत बारह सिंगा


अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ  *( IUCN)*  में करने की बात कही है बताते चले कि यह अंतरराष्ट्रीय संघ के द्वारा  *(red data book )* रेड डेटा बुक जारी  करती है जिसमे पौधों और जानवरों की प्रजाति  की वैश्विक संरक्षण की स्थिति को दर्शाया जाता है उदाहरण हाथी और हिरण इसकी (red data book) में है,


           देखे वीडियो 

 *(CITES)* संस्था के परिशिष्ट i में जिसमे शामिल वन्य प्रजाति जैसे हाथी हिरन जिन्हें व्यापार से  और अधिक खतरा हो सकता उसपर प्रतिबन्ध लगाती है इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय ही नही अपितु भारत सरकार द्वारा भी वन्य जीवों पर खतरे को।कम करने हेतु *वन्य जीव (संरक्षण ) अधिनियम*),1972 पारित किया है जिसके अंतर्गत वन्य जीवों  के अवैध शिकार तस्करी अवैध व्यापार को  नियंत्रित करने हेतु पूर्णतः प्रतिबंधित किया है इस अधिनियम के तहत सरकार ने कठोर सजा व जुर्माने का प्रावधान भी दिया गया है इस अधिनियम के अनुसूची 1 में बारह सिंगा और हिरण दोनों  शामिल है इसमें शामिल जीवों का शिकार करने पर धारा 2,8,9,11,40,41,43,48,51,61 तथा धारा 62 के तहत कठोर दंड और जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है परंतु तस्करों पर विभागीय कार्यवाही खाना पूर्ति की जाती है और वन्य प्राणियों के बाल से लेकर खाल और अंग अवशेषों की  तस्करी और शिकार आज भी छग प्रदेश के सघन वन क्षेत्रों में अनवरत जारी है

सोमवार, 14 नवंबर 2022

गीत गुंजन के गीतों को सुनकर गर्मी बढ़ी लोग प्यास से इधर उधर भटकने लगे

 गीत गुंजन के गीतों को सुनकर गर्मी बढ़ी लोग प्यास से इधर उधर भटकने लगे 

गीत गुंजन म्यूज़िकल ग्रुप द्वारा मायाराम सुरजन हॉल में  नए पुराने सुपरहिट गीत की श्रृंखला में एक से बढ़कर एक गीत की प्रस्तुति दी गई गीतों में प्रेम,विरह,जज़्बात,सौंदर्य, जैसे केंद्रित विषय पर गीतों की भरमार रही ...हम को हमी से चुरा लो ,,मैं शायर बदनाम... तुम क्या मिले जाने जां....प्यार हमारा अमर रहेगा...परदेसिया ये सच है पिया ...जिसे देख मेरा दिल धड़का...(.देवेश शर्मा)सह संचालक सिंगर ने पूरा माहौल बना दिया श्रोता अपने सीट पर नाचने लगे तेरे मेरे बीच मे कैसा है ये बंधन अंजाना....

राजेन्द्र शर्मा (संरक्षक सिंगर)और नीतू लहरे ने युगल गीत ....हम तुम से मुहब्बत कर के दिन रात सनम रोते है....बादल यूं गरजता है डर कुछ ऐसा लगता है....जहां में कोई प्यार का दीवाना हो गया जहां...(ग़ज़ल) स्व.भूपेंद्र जी,बप्पी दा को श्रद्धांजलि स्वरूप अशोक जी नीतू लहरे ने युगल गीत ... किसी नज़र को तेरा इंतजार आज भी है.....प्रस्तुति पर श्रोताओं का दिल जीत लिया और प्रत्येक अंतरे में श्रोताओं ने खड़े होकर ताली बजाकर दोनों कलाकारो का स्वागत किया पश्चात ज्योति और प्रभात जी ने... तुझ संग प्रीत लगाई सजना....गीत से ...लुटे कोई मन का नज़र ..दिल जाने जिगर तुझपे निसार किया है....मदहोश दिल की धड़कन... तू जब जब मुझको पुकारे मैं दौड़ी चली आई नदिया किनारे..... तेरी इसी अदा पे सनम प्यार आया....मैं न भूलूंगा... कह दूं तुम्हे या चुप रहूं...जैसे सुपर हिट गीत की प्रस्तुति

क्रमशः संगीता अजीत,प्रभात जी पांडे,नीतू लहरे,थापस कांति बोस, अशोक जी,अनामिका गुप्ता,देवेश शर्मा जी,राजेन्द्र शर्मा जी, डायरेक्टर डी. आर.साहू ने बहुत सुंदर अंदाज़ में अपने गीतों की प्रस्तुति दी  समस्त कलाकारों में परिपक्वता नज़र आई सब ने अपनी प्रस्तुति और गाए जाने वाले गीत के साथ पूरा न्याय किया  नवंबर की ठंड और हॉल में लगे ए सी.ने बहुत से श्रोताओं को चाय की तलब बड़ा दी तो वे प्रोग्राम छोड़ कर नव भारत प्रेस की ओर बढ़ गए  जिससे कार्यक्रम हॉल में श्रोताओं की कमी दिखी वही मंचीय आसंदी से कलाकारों के जबरदस्त परफॉर्मेंस और गीतों को सुनकर श्रोताओं ने जोरदार तरीके से ताली बजा बजा कर उनका स्वागत किया लगातार ताली बजाने से श्रोताओं की हथेली पॉइंट पर एक्यूप्रेशर हुआ जिसकी वजह से बहुत से श्रोताओं का शरीर का खून गर्म होकर रगों में दौड़ने लगा और उनकी प्यास बढ़ गई और  दोनों ही वस्तुओं चाय और पानी  का अभाव कार्यक्रम स्थल में  दिखा और श्रोता गण चाय की तलब,और  प्यास की शिद्दत मिटाने यत्रतत्र  भटकने लगे और कई श्रोता प्यास,चाय की तलब मिटाने   हॉल से बाहर चले गए इतना सुंदर ढंग से गीत गुंजन कलाकारों की बेहतरीन प्रस्तुति तब नगण्य सी हो गई जब पानी के अभाव में श्रोता प्यासे भटकते दिखे बेहतरीन कार्यक्रम के साथ नई व्यवस्था प्रारंभ करने के लिए गीत गुंजन म्यूज़िकल ग्रुप बधाई की पात्र है 

शनिवार, 12 नवंबर 2022

स्मृति सभा में लेखकों और साहित्यकारों ने याद किया मैनेजर पांडेय को

 स्मृति सभा में लेखकों और साहित्यकारों ने याद किया मैनेजर पांडेय को



रायपुर. हिंदी आलोचना के महत्वपूर्ण स्तंभ मैनेजर पांडेय के निधन पर रायपुर जन संस्कृति मंच की ओर से उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का मूल्यांकन करते हुए श्रद्धांजलि दी गई. स्थानीय वृंदावन हॉल में संपन्न हुए आयोजन का संचालन करते हुए जसम रायपुर के अध्यक्ष आनंद बहादुर ने कहा कि हिन्दी आलोचना ही नहीं, सम्पूर्ण भारतीय समाज, और भारत सहित दूसरे देशों की साहित्यिक सांस्कृतिक सामाजिक चेतना से मैनेजर पांडे का गहरा सरोकार था. एक तरह से वे समस्त मानवता के प्रवक्ता थे. मैनेजर पांडे के जाने से जो समाज को हानि हुई है उसकी भरपाई मुश्किल है, लेकिन जैसा कि वे कहा करते थे कि आदमी चला जाता है लेकिन पूरा आदमी कभी नहीं जाता.उसकी सोच,उसका लेखन और कार्य उसे कई हिस्सों में जिंदा रखता है. मैनेजर पांडेय भी हमारे बीच ज़िंदा रहने वाले है.


युवा आलोचक भुवाल सिंह ठाकुर ने अपने आत्मीय अनुभव को साझा किया. उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों के बीच उनका आकर्षण इतना जबरदस्त था कि वे हमेशा विद्यार्थियों से बातचीत करते नजर आते थे.


बातचीत में वे इतने सरल और सहज थे कि उनकी महानता छिप जाती थी और कोई कल्पना नहीं कर पाता था कि वे कितने महान लेखक और आलोचक थे. मगर जब कोई छात्र पुस्तकालय पहुंचता तो वहां उनका काम बड़े स्तर पर दिखता था.वे शब्दों की विलासिता से अलग शब्दों के कर्म पर यकीन रखते थे. उनके साहित्य में हमें गांव की चौपाल व वहां मौजूद दिल्लगी की झलक मिलती है. वे कहते थे “जो व्यक्ति लोकल होगा, वही व्यक्ति ग्लोबल होगा. वे पहले ऐसे शख्स थे जो रस, छंद, से अलग एक समाजशास्त्रीय नजर से दुनिया को देखते थे. उनकी किताब 'साहित्य का समाजशास्त्र' इसकी एक बानगी है. 


लेखक और पत्रकार समीर दीवान ने अपने वक्तव्य में कहा कि उनकी एक किताब में मनुस्मृति में जो वर्गवाद है, उसे बतलाया है और वर्णव्यवस्था की तुलना वज्रसूची से की है. उनकी प्रासंगिक बातों को और अधिक मुखरित करने की जरूरत है. उनके विद्यार्थियों को इस ओर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है.


जसम रायपुर के सचिव मोहित जायसवाल ने कहा कि वे विज्ञान के छात्र होने के बावजूद मैनेजर पांडे के व्यक्तित्व की ओर आकर्षित होते रहते थे. और इसी ने उन्हें साहित्य की ओर आने की प्रेरणा दी. मैनेजर पांडे के दिवंगत होने से साहित्य जगत ही नहीं पूरे भारतीय समाज का नुकसान हुआ है. उनका लिखा हुआ समाज व युवा पीढ़ी का निरंतर मार्गदर्शन करता रहेगा. आज के युवाओं को मैनेजर पांडे के व्यक्तित्व और कृतित्व से सीखने की जरूरत है.


मैनेजर पांडेय की छात्रा रही पूनम ने कहा कि मेरे मन में स्मृति का ज्वालामुखी मन में फूट पड़ा है. जहां भी हमारे गुरू का लेक्चर होता था, हम वहां पहुंच जाते थे. उनका व्यवहार विद्यार्थियों के साथ बहुत ही सहज व सरल था. वे कहते थे साहित्य को सिर्फ पढ़ना ब्लकि उसे जीना चाहिए.


प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष वरिष्ठ कवि आलोक वर्मा ने कहा कि मैनेजर पांडेय का जीवन साहित्य के आलोक में संपूर्ण साहित्य की सामाजिकता को लेकर सचेत रहा. वाम चेतना में दो तरह की वैचारिकी देखी जाती है, एक सैद्धांतिक व दूसरा व्यावहारिक. वे व्यावहारिक पक्ष के व्यक्ति थे. वे जेएनयू में रहते हुए छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहे. जब हमारे देश में नक्सलबाड़ी आंदोलन हुआ तो उस दौर के साहित्य को केन्द्र में लाते हुए उन्होंने कई प्रमुख कार्य किए. उनके प्रिय कवि नागार्जुन थे जिनके संग्रह का उन्होंने प्रकाशन किया.अपनी किताब की भूमिका में उन्होंने समाज का संकट, सोवियत संघ के संकट व विदेशी लेखों के अनुवादों को स्थान दिया था. प्रचुर लेखन के बाद भी वे कभी विवादास्पद नहीं हुए. उन्होंने काफी विपुल लेखन किया है. उनकी समग्र रचनावली लाने की जरूरत है. एक बड़ा व्यक्ति जाता है तो बहुत कुछ साथ ले जाता है और बहुत कुछ छोड़ जाता है, उस कृतित्व को हमें सामने लाने की जरूरत है. 


अपने संबोधन में 'छत्तीसगढ़ मित्र' पत्रिका के संपादक तथा आलोचक सुधीर शर्मा ने कहा कि जो काम रामचंद्र शुक्ल पूरा नहीं कर पाए उसे प्रो. मैनेजर पांडेय ने पूरा कर दिखाया. कुछ लोग महापुरुषों को अलग विचारधारा की ओर ले जाने का प्रयास करते हैं. इन महापुरुषों को हमें बचाने का प्रयास करना होगा. उन्होंने माधव राव सप्रे का मूल्यांकन कर राष्ट्रीय रूप से उन्हें स्थापित करने का जो कार्य किया, उसके लिए छत्तीसगढ़ सदैव उनका ऋणी रहेगा. सुधीर शर्मा ने वादा किया कि 'छत्तीसगढ़ मित्र' का एक  विशेषांक प्रो. मैनेजर पांडेय को समर्पित रहेगा.


रायपुर इप्टा के अध्यक्ष मिनहाज असद ने इस बात पर दुख जताया कि प्रो. मैनेजर पांडेय को जितनी कवरेज अंग्रेजी अखबारों ने दी उतनी हिन्दी अखबारों ने नहीं दी.


इप्टा के साथी बालकिशन अय्यर ने अपने उद्बोधन में कहा कि आप प्रो. मैनेजर पांडेय को किस दृष्टि से देखते हैं यह आपकी वैचारिकी पर निर्भर करता है. उनके आर्टिकल्स को पढ़कर आप समझ पाते हैं कि उनमें एनालिसिस और क्रिटिसिज्म की कितनी गहराई होती थी. उनके द्वारा किए गए कार्य को लेकर तमाम अखबारों में बेहतर कवरेज आने चाहिए थे.


रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार रंगकर्मी और अपना मोर्चा डॉट कॉम के संचालक

राजकुमार सोनी ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रो. पांडे सिर्फ साहित्य के आलोचक नहीं थे. उन्होंने उन तमाम विषयों पर भी कलम चलाई जिस पर लोग लिखने से बचते थे. उन्होंने हमेशा बुद्धि और वैज्ञानिक चेतना को संपन्न करने का काम किया. वे सिर्फ कविताओं या कहानियों के ही आलोचक नहीं थे बल्कि हिन्दी समाज के आलोचक थे.उनमें क्या गजब का आकर्षण था कि लोग उनका लेक्चर सुनने के लिए इंतजार करते थे.


अंत में युवा पत्रकार और लेखक अमित चौहान ने प्रो. मैनेजर पांडेय को अखबारों में दिए जा रहे कवरेज के बारे में कहा कि प्रो. पांडे जिस भाषा में जीवनभर लिखते रहे, जिसकी सबसे ज्यादा सेवा की उसमें ही उनको कम याद किया गया. प्रो. पांडे ठीक ही कहते थे कि “भाषा सिर्फ लिखने-पढ़ने से ही मजबूत नहीं होगी, उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है.” उनकी बातें आज के परिदृश्य में सटीक जान पड़ती हैं. हमें उम्मीद है कि उनका लेखन और उनका कृतित्व भाषायी अंधकार को तोड़ने का काम करेगा.


साहित्य और समाज के इस महान युग दृष्टा आलोचक और गुरु को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट के मौन के पश्चात श्रद्धांजलि सभा का समापन हुआ.


कार्यक्रम में मधु वर्मा, वसु गंधर्व, इन्द्र कुमार राठौर, अजुल्का सक्सेना, रामचंद्र सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी मौजूद रहे.

बुधवार, 9 नवंबर 2022

प्रख्यात आलोचक मैनेजर पांडेय की श्रध्दांजलि सभा 11 नवम्बर को



प्रख्यात आलोचक मैनेजर पांडेय की  श्रध्दांजलि सभा 11 नवम्बर को 

रायपुर. हिंदी में मार्क्सवादी आलोचना के प्रमुख हस्ताक्षर और जन संस्कृति मंच के पूर्व अध्यक्ष  डॉक्टर मैनेजर पांडे का विगत दिनों निधन हो गया था. उनकी स्मृति में जन संस्कृति मंच की रायपुर ईकाई ने  11 नवम्बर शुक्रवार की शाम 7 बजे सिविल लाइन स्थित वृंदावन हाल के मीटिंग कक्ष में एक श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन किया है. जिसमे रायपुर ईकाई के अध्यक्ष आनंद बहादुर ने समस्त साहित्यकारों, लेखकों, संस्कृतिकर्मियों और कलाकारों से उपस्थिति का आग्रह किया है.

गुरुवार, 3 नवंबर 2022

बारह सिंगा की मौत,के बाद दफन मृत वन्य प्राणी बन रहे आवारा कुत्तों की खुराक- रेंजर चंद्राकार चला रहे अपना कानून

 बारह सिंगा की मौत,के बाद दफन  मृत वन्य प्राणी बन रहे आवारा कुत्तों की खुराक- रेंजर चंद्राकार चला रहे अपना कानून


(बदहवास जीवित बारहसिंगा डबरी में  7 जुलाई 22 )

अलताफ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) महासमुंद वन वृत अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र इस समय काफी चर्चा में  है इसकी वजह भ्रष्टाचार और गड़बड़ घोटाला नही बल्कि अवैध शिकार और दुर्घटना में हिरण,कोटरी, चीतल,सहित बारह सिंगा के मृत होने के पश्चात उसे खुले वन क्षेत्र में फेकना बताया जा रहा है  मृत शव के सड़ने,गलने के वजह से  फैलते दुर्गंध और संक्रमण  का खतरा वन्य क्षेत्र के भीतर निवासरत वन प्राणियों पर बढ़ रहा है साथ ही मृत वन्य प्राणीयों के शरीर के चर्म, (खाल)सींग इत्यादि की तस्करी की आशंका भी बढ़ गई है जिसमे बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी विकास चंद्राकर सहित विभागीय कर्मचारियों द्वारा क्षेत्र मे जंगल कानून चलाए जाने वाली भूमिका पर  अनेक प्रकार के उठते प्रबल सवाल के साथ उनके कार्यशैली पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है

(पानी के बाहर आते ही मृत बारह सिंगा)


 उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष जुलाई 2022 को छ अथवा सात तारीख के दरमियान एक बारहसिंगा को बागबाहरा परिक्षेत्र से लगभग छ किलोमीटर दूर स्थित ग्राम हाथीगढ़ के समीप स्थित सुकरा गौठान के
 डबरी में  बदहवास घायल अवस्था में   देखा गया पश्चात वह डबरी के समीप पहुंचते ही मृत हो गया अब उसकी मौत कैसे हुई यह जांच का विषय हो सकता है परंतु ग्राम के प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार उसके पेट के समीप लंबा चोट का निशान होना बताया गया अब यह चोट शिकारियों द्वारा पहुंचाया गया या कमार जनजाति के वनवासियों द्वारा शिकार के उद्देश्य से बारह सिंगा को चोटिल किया गया या फिर आवारा कुत्तों की भीड़ ने उसे नोचा खसोटा यह तो ज्ञात नही परंतु मृत बारह सिंगा को औपचारिक  कार्यवाही के पश्चात उसी वन क्षेत्र  में कहीं दफना दिया गया इसकी पुष्टि हेतु जब ग्राम हाथीगढ  पहुंचा गया तब वहां के वन चौकीदार इशालु ने बताया कि दिनांक 6-7 जुलाई 22   के प्रथम सप्ताह  में एक बारह सिंगा बदहवास हालत में गौठान के डबरी के पास पहुंचा(देखे फोटो ) तब तक वह जिवित था परंतु बाहर आते ही वह कैसे मृत अवस्था में पहुंच गया यह जांच का विषय है  जिसके उदर हिस्से में गहरा जख्म था उसने बताया कि अति संवेदन शील प्राणी होने की वजह से उसके मृत होने की बात बताई  गई तथा परिक्षेत्र अधिकारी के दिशा निर्देश पर आसपास सघन वन क्षेत्र में मृत वन्य प्राणी के शव को दफना दिया जाना बताया पश्चात रात्रि में किसी वन्य प्राणी या  आसपास ग्राम के श्वानों के द्वारा उसे पुनः कब्र से बाहर निकाल दिया गया जिसे सूचना पश्चात उक्त शव को बाद में खल्लारी स्थित पहाड़ियों के वन क्षेत्र में किसी एक स्थान पर  ले जाकर डंप कर दिया गया अब उस मृत शरीर के साथ उसके खाल,सींग का क्या हुआ ज्ञात नही परंतु आशंका वक्त की जा रही है कि उसे स्थानीय श्वान द्वारा नोच नोच कर खा लिया गया ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम क्षेत्र के श्वान इतने खूंखार हो गए है कि बकरी इत्यादि को चीर फाड़ कर अपनी खुराक बना लेते है संभावना व्यक्त की जा रही है कि श्वान द्वारा हमले से इस प्रकार की घटना आए दिन क्षेत्र में होती होगी या फिर शिकारी द्वारा शिकार किए जाने का संदेह व्यक्त किया गया जिससे दो माह के अंतराल में तीन से चार शाकाहारी वन्यप्राणी,चीतल,कोटरी, हिरण,बरहसिंगा,असमय काल ग्रास बन गए है


(मृत बारहसिंगा के चोट को इमोजी बनाकर छुपाया गया)

 यही नहीं खल्लारी स्थित साजा ग्राम के वन क्षेत्र में डंप किए गए मृत शव के मांसाहारी वन्य प्राणी द्वारा भक्षण की  प्रतिदिन  फोटो वीडियो ग्राफी के माध्यम से अधिकारियों को अवगत भी कराया जाता है ऐसा वन चौकीदार इशालु  ने बताया पर अब तक कि इसकी पुष्टि या फोटो ग्राफ सामने नही आए जबकि वन नियम में किसी हिंसक वन्य प्राणी जिनमे शेर,चीता इत्यादि के द्वारा शिकार करने की स्थिति मे वन्य प्राणी के क्षत विक्षप्त शव का परीक्षण और पंचनामा   पश्चात उसी स्थल पर छोड़ दिया जाता है तथा बकायदा ट्रैप कैमरा की मदद से उसकी निगरानी की जाती है ताकि कोई मानव द्वारा शव से छेड़ छाड़ न कर सके तथा उस शव का भक्षण खूंखार जानवर द्वारा किया जा सके परंतु ऐसी कोई प्रक्रिया न करते हुए वन चौकीदार के कथन अनुसार किसी स्थान में मृत बारह सिंगा को दफन कर दिया गया जिसकी रिपोर्ट की प्रति आज तक सीसीएफ कार्यालय वन्य प्राणी,एवं रायपुर सीसीएफ कार्यालय में नही भेजी गई ताकि मृत बारह सिंगा के पंचनामा ,पी एम रिपोर्ट,एवं वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति में उस्का दाह संस्कार की वीडियो ग्राफी जैसी प्रक्रिया के पक्के सबूत से जानकारी मिल सके परन्तु बागबाहरा परिक्षेत्र के कर्मियों द्वारा  ऐसी कोई प्रक्रिया अपनाई नही गई  वही  चर्चा इस बात को लेकर जम कर है कि  मृत बारह सिंगा सहित अन्य वन्य प्राणियों के शरीर की खाल और उसके सींग को निकाल कर तस्करी किए जाने की आशंका वयक्त की जा रही है यदि उसकी नियमित वीडियो ग्राफी की गई होगी तो कम से कम मृत बारहसिंगा की हड्डी और सिंग आज भी कथित वन क्षेत्र के डंप किए गए  स्थल पर मौजूद होंगे ? क्योंकि खाल और सींग, हड्डी इत्यादि को तो वह प्राणी खा नही सकते ? अब इस डंप करने जैसी प्रक्रिया और विभागीय कर्मियों द्वारा   की गई कार्यवाही वीडियो ग्राफी एवं पंचनामा पीएम की सूचना न देना बहुत सी आशंकाओं को जन्म दे रहा है इस सब कार्यवाही के पीछे किसका सहयोग और संलिप्तता है यह तो विभागीय  जांच का विषय है  वन विभाग में वन्य प्राणियों के शव  का इस प्रकार नष्टीकरण का संभवतः प्रदेश भर में यह पहला प्रकरण होगा जो मांसाहारी भक्षी वन्य प्राणियों की भूख प्यास की चिंता और क्षुधा को लेकर किसी रेंजर और विभागीय कर्मियों द्वारा शेड्यूल (1) एक के शाकाहारी वन्य प्राणियों जिनके मृत होने पर उनके शव को खुले वन क्षेत्र में फेकने और मांसाहारी वन्य प्राणियों की खुराक के उद्देश्य से किसी वन क्षेत्र स्थल पर डंप कर आवारा श्वानों की खुराक बना देने की आड़ में नष्टिकरण किया जाना एक सोची समझी साजिश ज्ञात होता है क्योंकि हर्राबोर शेड्यूल 1 एक के वन्य प्राणियों के मृत शव को बगैर पी एम. करवा कर   अपने वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति में उसे दफना दिया जाए या खुले वन क्षेत्र के मध्य डंप कर दिए जाने वाला वन अधिनियम या कानून लागू नही किया गया है इस संदर्भ में बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी विकास चन्द्राकर का कथन है कि  घटना दुर्घटना में मृत वन्य प्राणी को जंगल के मध्य जहां मांसाहारी भक्षी जिनमे शेर चीता, खूंखार वन्य प्राणी उक्त मृत वन प्राणी के शव का भक्षण कर अपनी क्षुधा मिटा सकते है इसलिए ऐसे शव को मानव पहुंच से दूर जंगल मे डंप कर दिया जाता है अब  सवाल खड़ा होता है कि बागबाहरा वन क्षेत्र में ऐसे कितने मांसाहारी  भक्षी वन्य प्राणी  जिनमे शेर चीता है जिनके भूख की चिंता परिक्षेत्र अधिकारी विकास चंद्राकर को होने लगी क्योंकि वन्य प्राणीयों की वार्षिकी  गणना में अब तक ऐसे खूंखार वन्य प्राणियों की संख्या नगण्य बताई गई है यदि ऐसे  खूंखार वन्य प्राणी वन क्षेत्रों में विचरण करते है तो सघन वन क्षेत्रों में  निवासरत वन ग्राम के ग्रामीणों के लिए सुरक्षा का दायित्व और जिम्मेदारी विभाग के लिए सर्वाधिक चुनौती होती परंतु ऐसी कोई सुगबुगाहट बागबाहरा परिक्षेत्र के किसी भी वन ग्राम क्षेत्र में परिलक्षित नही  हुआ जहाँ खूंखार वन प्राणी विचरण कर रहे हो और उनके शिकार की घटना के कोई समाचार बाहर आते हो यदि ऐसी कोई घटना की  सूचना प्राप्त होने पर  खूंख्रार वन प्राणी के शिकार करने की स्थिति में मृत वन्य प्राणी के शव को  विभाग द्वारा ट्रैप कैमरा लगा कर शव का चौबीस घंटे या उससे अधिक समय तक निगरानी करता वह भी तब तक  जब तक शव नष्ट न हो जाता वह भी इसलिए ताकि कथित शव को मानव अथवा किसी के द्वारा भक्षण न किया जा सके संभवतः  मृत बारहसिंगा को लेकर  यह भी चर्चा के साथ अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है यदि शिकारियों द्वारा जहरीला तीर या स्थानीय वन क्षेत्र के कुत्तों के हमले से शाकाहारी वन प्राणी मृत होते है तब रेबीज संक्रमण के साथ उनके शरीर में जहर फैलने की आशंका बढ़ जाती है ऐसी परिस्थिति में यदि जहर अथवा श्वान के शिकार से रेबीज ग्रसित मृत वन्य प्राणियों को अन्य मांसाहारी भक्षी प्राणियों को भक्षण हेतु रखा जाता है तो फूड पॉइजनिंग या शरीर मे फैले ज़हर से मांसाहारी वन्य प्राणी के संक्रमित होने की संभावना बढ जाती है  तथा जहर और रेबीज वाले मांस भक्षण से उनकी भी अकाल मृत्यु हो सकती है परंतु यहां सारे नियम कानून को बलाए ताक रख कर विकास चंद्राकर रेंजर बागबाहरा द्वारा अपना जंगल का कानून चला कर असामयिक वन्य प्राणियों के मौत का कारण बन रहे है इस तारतम्य में उनसे मिलने पर बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी विकास चन्द्राकर कोई संतोष जनक जवाब न देकर विभाग से नया सर्कुलर जारी होना बताया और मृत शेडयूल 1 एक हर्राबोर वन्य प्राणी को जंगल के मध्य छोड़ने, फेकने की बात दोहराई ताकि खूंखार मांसाहारी भक्षी वन प्राणी उसका भक्षण कर अपनी क्षुधा शांत कर सके हालांकि इसकी पुष्टि के लिए महासमुंद डी एफ ओ पंकज राजपूत से भी संपर्क कर वास्तविकता जानने का प्रयास किया गया परंतु न जाने कौन से वन चेतना केंद्र में वे अचेतन स्थिति में पहुंच जाते है ज्ञात नही परंतु लगातार छह से सात मर्तबा महासमुंद वन मण्डल  कार्यालय में जाने पर भी वे अनुपस्थित ही रहे और उनसे कोई चर्चा नही हो पाई  जबकि  बागबाहरा परिक्षेत्र में ऐसी घटना के प्रकरण दो,तीन माह के अंदर  तीन से चार शाकाहारी  वन्य प्राणियों के मृत होने और उनके शव को  खल्लरी स्थित पहाड़ के वन क्षेत्र में डंप करने की बात  बताया गया है वही एक समाचार पत्र की माने तो गत वर्ष 14 जून 2021 को ग्राम खोपली में भी ऐसी घटना घटित हो चुकी है जिसमे आवारा कुत्तो द्वारा हिरण को मारा गया  बताया गया और उसके शव को भी रेंजर चन्द्राकर द्वारा क्षेत्र के घने  वन में छोड़ना बताया था  उक्त शव के साथ भी बागबाहरा परिक्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों ने यही प्रक्रिया अपनाई थी (देखे चित्र)


( 14 जून 2022 को मृत हिरण का प्रकशित समाचार पत्र की कटिंग)

उल्लेखनीय  है कि वन अधिनियम के तहत किसी भी शेड्यूल एक के वन्य प्राणियों के चोटिल अथवा घायल होकर मृत अवस्था में मिलना या दुर्घटना या शिकार होने पर उसका सर्व प्रथम पोस्टमार्टम विभागीय डॉ.के माध्यम से कर उसके मृत होने की अवस्था ज्ञात किया जाता है कि उसकी मृत्यु का कारण क्या है पश्चात उसका पंचनामा बनकर उसका बकायदा दाह संस्कार वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया जाता है जबकि यहां मृत बारह सिंगा के शव के साथ ऐसी कोई प्रक्रिया नही अपनाया गया उल्टे यह बताया गया कि ऊपर से जैसा आदेश आया वैसा उस पर कार्यवाही की गई जबकि वन अधिनियम और कानून की जानकारी रखने वाले सीसीएफ वन्य प्राणी,सीसीएफ रायपुर के अनेक उच्च अधिकारियों से डंप करने वाली इस नए कानून के संदर्भ में चर्चा करने पर  लिखित में ऐसा कोई सर्कुलर जारी आज दिनांक तक  नही लाया जाना बताया गया क्योंकि वन अधिनियम 1972 एवं संशोधित वन अधिनियम के संदर्भ में आज दिनांक तक ऐसा कोई नया सर्कुलर संशोधित नियम नही आया है जिसके अनुपालन आज भी मृत वन्य प्राणियों के शव परीक्षण पोस्टमार्टम तथा दाह संस्कार की प्रक्रिया पूर्ववत नियम अनुसार अपनाई जाती है 


(रेंजर विकास चंद्राकर द्वारा समाचार पत्र को दिया गया वक्तव्य)

फिर बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी विकास चंदाकर को कौन से अधिकारी ने नया आदेश जारी कर दिया कि मृत बारह सिंगा के अलावा अन्य मृत वन्य प्राणियों के शव को उन्होंने जंगल के मध्य  में फेकने का फरमान जारी कर दिया अब यदि उच्च अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार ऐसा कोई वन नियम कानून जारी नही करने की स्थिति में चीतल,बारह सिंगा,कोटरी,हिरन आदि की मृत होने तथा वन क्षेत्र के किसी भी क्षेत्र में डंप करने की कार्यवाही करने  की घटना वाली बात कुछ गले नही उतरती और इसके पीछे वन्य प्राणियों के खाल,सींग की तस्करी होने की प्रबल संभावना दिखती है यह भी विभाग के लिए जांच का विषय हो सकता है इसके पीछे कौन कौन लोग संलिप्त है और किसके आदेश से रेंजर विकास चंद्राकर और उनके मातहत नए नियम की आड़ में किसके साथ कूट रचित घटना को अंजाम दिया जा रहा है जो नियम विरुद्ध जाकर वन्य प्राणियों के शव दुर्गति सहित श्वानों का निवाला बना कर कौन सा खेल खेला जा रहा है इसकी बारीकी से जांच करना और  संलिप्त कर्मचारियों पर   कार्यवाही किया जाना आवश्यक है नही तो खूंखार वन प्राणियों की खुराक बनाने की आड़ में कीमती खाल,सींग की तस्करी के साथ शेष मांस को आवारा श्वानों का निवाला बनवा कर  बहुत बड़ा खेल खेलने वाला यह  सिलसिला अनवरत जारी रहेगा.

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2022

जन्म दिन पर विशेष- प्रदेश की राजनीतिक पटल का ध्रुव तारा विकास उपाध्याय

 प्रदेश की राजनीतिक पटल का ध्रुव तारा विकास उपाध्याय 


जन्मदिन पर विशेष

अलताफ हुसैन

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) वैसे तो केवल चुनाव में ही बहुत से नेता ऐसे कार्य कर जाते है जो आम लोग पूरी तरह समझते भी है और अवसर वादी नेता को पहचानते भी है परंतु रायपुर शहर के राजनीतिक क्षितिज पर ऐसे युवा जुझारू एवं हर व्यक्ति के दिल मे राज करने वाले नेता उंगलियों में गिनने लायक ही शेष है जिनमे प्रदेश राजनीति के आसमान पर चमकदार ध्रुव तारा के समान प्रकाश वान होने की अद्भुत क्षमता परिलक्षित हो रही है  उनमे ही एक नाम बड़ी तेजी से उभरता हुआ जन मानस के मन मस्तिष्क में अंकित हो चुका है और वह  नाम है विधायक विकास उपाध्याय का जिन्होंने अपनी राजनीति की शरुआत छात्र संगठन से प्रारंभ किया था  ऐसे बहुत कम व्यक्तित्व होंगे जो जमीनी स्तर से अपनी राजनीति  सफर तय करते हुए शीर्ष पर पहुंचे हो क्योंकि यह सफर बहुत कठिन है जो जनता और पार्टी के प्रति  समन्वय बना कर चले क्योंकि दोनों ही क्षेत्र में आत्म विश्वास की बागडोर बड़ी मजबूती से पकड़ कर चलना जैसे दो धारी तलवार पर चलने के समान है यही वजह है कि अपने समर्थकों के साथ विश्वास की ज़मीन तैयार करने हर छोटे बड़े अमीर गरीब सुख दुख तीज पर्व, और संस्कृति आयोजनों में स्व स्फूर्त भागीदारी के साथ अपनत्व की मिठास से लोगों का स्नेह उन्हें प्राप्त होने लगा कांग्रेस पार्टी द्वारा सौपे गए विभिन्न पद और दायित्वों का समूचा लाभ आम जन तक कैसे पहुंचाए इसके लिए वे अग्रसर रहे पूर्ववर्ती सरकार के योजनाओं के लाभ के लिए उन्होंने सड़क पर उतर कर उनकी मांगों की लड़ाई भी लड़ी क्यूँकि आज के विस्तृत राजनीति में प्रत्येक आम जन मौलिक अधिकारो का लाभ चाहता है जिसे  उन तक पहुंचाने में विकास उपाध्याय एक सेतु बने और आम जन की आवाज़ बनते चले गए लोगो ने उन के मृदु व्यवहार,और आम जन के प्रति समर्पण भाव ने उन्हें एक जन नायक के रूप में उभार दिया अब चाहे कोरोना काल का विध्वंसक समय हो जब लोग अपने घरों में दुबके हुए थे तब वे और उनकी टीम अपने विधान सभा क्षेत्र में जरूरत मंदों को अन्न से लेकर जरूरत की वस्तुएं प्रदान कर मानव जीवन को सार्थक कर रहे थे साफ सफाई कर्मियों का सम्मान कर उनका उत्साह वर्धन कर रहे थे गर्मियों में छाता और पानी देकर उन पुलिस कर्मियों के जज्बे को  सलाम कर रहे थे जो शीत ग्रीष्म और वर्षा ऋतु में अपने  शरीर को सूर्य की तपिश में झुलसाकर वर्षा ऋतु में भीगा कर   यातायात विभागीय कर्तव्यों का निर्वहन कर आम जन के आवागमन को सहज और सुलभ करते है उनके सन्दर्भ में भला कौन सोचता है परंतु विधायक विकास उपाध्याय ने एक विधायक होने के पूर्व संवेदन शीलता का परिचय देते हुए उन्हें छाते और शीतल जल प्रदान किया यह कृत्य किसी भी पाषाण हृदय व्यक्ति के दिल मे उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान से  मस्तक स्वतः झुक जाता है और यही एक सफल जन नायक की पहचान भी है जो केवल विकास उपाध्याय में ही दृष्टि गोचर होता है आज वे लोगो के सर्वाधिक चहेते विधायक के रुप में अपनी पहचान बना चुके है यही नही कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ जन  भी उनके राजनीति समीकरण के कायल हो गए यही वजह है कि वे स्थानीय ही नही वरन राष्ट्रीय स्तर पर उनकी सहभागिता सुनिश्चित करते हुए विभिन्न पदों पर उन्हें सोशोभित कर उनका कद को बढ़ाया है  तथा भिन्न भिन्न राज्यों में संपादित चुनाव में समन्वयक और स्टार प्रचारक के रूप में पार्टी ने महती जिम्मेदारी भी सौंपी ताकि कांग्रेस पार्टी को युवा कांधे से संबल प्राप्त हो रात दिन मेहनत का परिणाम भले ही उत्साह पूर्ण आशा जनक नही रहा लेकिन कहते है मेहनत व्यर्थ नही जाती देर सबेर उसका सार्थक परिणाम मिलेगा आज भी वे देश भर में भाजपा की आंधी में हाशिए पर पड़ी कांग्रेस पार्टी को वरिष्ठों के मार्गदर्शन में मुख पृष्ठ पर लाने अपने समर्थकों के साथ पूरी ऊर्जा के साथ जूझे हुए है इस आशा के साथ कि अस्तांचल में डूब  चुके कांग्रेस रूपी सूरज का पुनः उदय होगा शुरुआत राहुल के भारत जोड़ो यात्रा सहित संगठन में बदलाव से एक आशा की किरण बन चुकी है जो छत्तीसगढ़ प्रदेश में कांग्रेस की धमाकेदार वापसी उसका उदाहरण बन चुका है अब  भावी चुनाव का समय जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे कांग्रेस पार्टी के नेताओं की धड़कन भी बढ़ती जा रही है हालांकि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने अंतिम छोर तक राजीव गांधी  न्याय योजना ,गोबर खरीदी सहित अनेक जन कल्याणकारी विकास परक योजनाओं का वास्तविक धरा पर सफल क्रियान्वयन कर एक प्रकार से अपनी विजय सुनिश्चित करने मैदान तैयार कर चुकी है वही सभी विधायकों द्वारा भी अपने क्षेत्र के विकास में कोई कोर कसर नही छोड़ी है विधायक विकास उपाध्याय द्वारा भी अपने क्षेत्र में सड़क बिजली से लेकर समस्त मौलिक अधिकार का इमानदारी से यथार्थ के ज़मीन में निर्वहन कर अपनी  विजयी मार्ग प्रशस्त कर चुके है सर्वाधिक चर्चित और चुनौती पूर्ण कार्य के रूप में टाटीबंद चौक निर्माण था जो उनके क्षेत्र में होने के कारण उस चुनौती को स्वीकार करते हुए विधायक विकास उपाध्याय द्वारा ओवर ब्रिज का निर्माण  अपने कार्यकाल मे पूर्ण करवाने कोई कसर नही छोड़ा  आज लगभग आधा कार्य पूर्णतः हो चुका है संभवतः चुनाव पूर्व शेष कार्य पूर्ण होने की बात कही जा रही है और जटिल आवागमन भविष्य में सुगम,और सहज हो जाएगा यह तो तय है जन सेवा के ही उद्देश्य से निर्मित टाटी बंध ओवर ब्रिज का निर्माण और उसका श्रेय  कम से कम इतिहास के पन्नो में  विकास उपाध्याय ने अपना नाम अवश्य  दर्ज करवा लिया आज उनके क्षेत्र की जनता उनके कार्यों से प्रसन्न है तथा उन्हें अपना नायक मानती है यह सब  स्नेह और विश्वास की वो मजबूत बागडोर है जो उन्होंने वर्षों से जमीनी स्तर से जुड़ कर कमाई है जिसे खण्डित करना किसी के वश में नही लगातार अपने क्षेत्र में विकास की नई इबारत लिखने वाले विधायक  विकास के जन सेवा,और आम जन के प्रति उनके अधिकारों का लगातार निराकरण करते हुए पृथक छबि निर्मित की है जो भविष्य में अपने नाम को सार्थक करते हुए विधायक विकास ऐतिहासिक नया उप..अध्याय लिखेंगे यह तय है

रविवार, 16 अक्टूबर 2022

18-19 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में रजवार चित्र प्रदर्शनी का आयोजन

 🔴18-19 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में रजवार चित्र प्रदर्शनी का आयोजन🔴



रायपुर. आदिवासी लोक कला अकादमी, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद् द्वारा 18 और 19 अक्तूबर को राजधानी में रजवार चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है. महन्त घासीदास संग्रहालय की कला वीथिका में 18 अक्तूबर को संध्या साढ़े पांच बजे से रात्रि 8 बजे तक और 19 अक्तूबर को सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक प्रदर्शनी आयोजित है. दोनों दिन दस दिवसीय रजवार चित्रकला शिविर में बनाए गए चित्रों को आमलोगों के अवलोकन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा.


गौरतलब हो कि रजवार चित्रकला से जुड़े कलाकार  चित्रकला शिविर में लगातार चित्र बना रहे है. छत्तीसगढ़ की पहचान को रेखांकित करने वाले दस कलाकार पहली बार एक साथ कला वीथिका में एकत्र हुए है. शिविर में जो दस कलाकार शामिल है, वे हैं- बुधनी राजवाड़े, पंडित राम, सहोदरी बाई, रामकरन राम, भगत राम, कुदरराम, अमित कुमार, संदीप कुमार, पार्वती और बेलपती.


यह पहला अवसर होगा जब रजवार चित्रों की प्रदर्शनी कला दीर्घा में आयोजित की जायेगी. राजधानी में रजवार चित्रों की प्रदर्शनी के बाद चित्रों की प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों और प्रदेश के बाहर भी आयोजित की जाएगी.


इन चित्रों की प्रदर्शनी के बारे में

आदिवासी लोककला अकादमी के अध्यक्ष नवल शुक्ल का कहना है कि 

“छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट रजवार चित्रकला शैली को पहचान, प्रोत्साहन और सम्मान देने के लिए राजधानी में चित्रकला शिविर का आयोजन किया जा रहा है. ऐसी गतिविधियां छत्तीसगढ़ के अन्य आदिवासी और लोक कला रूपों पर आगे भी करते रहने की योजना है ताकि प्रदेश के जनजातीय और लोक कला रूपों को समुचित प्रतिष्ठा मिल सके.


क्या है रजवार चित्रकारी


रजवार चित्रकारी भित्ती चित्रकारी की एक विशिष्ट शैली है जो छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में विशेष रूप से प्रचलित है. यह एक ऐसी परंपरा है जो छत्तीसगढ़ की संस्कृति को भित्ती चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करती है. इस भित्ती चित्र के माध्यम से प्रकृति एवं ग्रामीण परिवेश का चित्रण किया जाता है. यह एक पारंपरिक भित्ती चित्र शैली है.

कला प्रेमी कैलाश छाबड़ा ने कलाकारों का सम्मान किया परंतु आयोजको ने धन्यवाद के दो शब्द भी नही कहे

 कला प्रेमी कैलाश छाबड़ा ने कलाकारों का सम्मान किया परंतु आयोजको ने धन्यवाद के  दो शब्द भी नही कहे

रायपुर महान गायक किशोर कुमार के तीसवें पूण्य तिथि के अवसर पर एक गीत संगीत का कार्यक्रम मायाराम सुरजन हॉल में सम्पन्न हुआ जिसमें केवल  किशोर दा के सुपर हिट गीतों की लगातार प्रस्तुति दे कर उन्हें स्वरांजलि दी गई इस अवसर पर सम्मान समारोह का कार्यक्रम भी किया गया जिसमें बहुत से लोगो का सम्मान प्रसिद्ध समाजसेवी,संगीत कला को सदैव प्रोत्साहित करने वाले कैलाश छाबड़ा के द्वारा शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया यह सम्मान उन कलाकारों को प्रदान किया गया जिन्होंने गीत संगीत कला और सिनेमा क्षेत्र में विशेष योगदान दिया तथा संलग्न विद्या में आज भी अपनी सेवा अनवरत दे रहे है

ऐसे फनकारों को सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित करने संगीत प्रेमी एवं समाजसेवी कैलाश छाबड़ा सदैव तत्पर रहते है परन्तु यह बड़े दुख का विषय रहा कि जिस कैलाश छाबड़ा के द्वारा मंचीय आसंदी से जिनका सम्मान किया  गया वही आयोजकों द्वारा एक बार भी  उनके इस सराहनीय पूर्ण  प्रोत्साहन कार्य को लेकर धन्यवाद स्वरूप उनकी  प्रशंसा में दो स्तुति शब्द भी नही कहे जो आयोजको के लिए शर्म करने की बात है और साथ ही निंदनीय है 

अनुराग बसु ने किया सोनी को सम्मानित

 अनुराग बसु ने किया सोनी को सम्मानित


रायपुर. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आर्ट, लिटरेचर एंड फिल्म फेस्टिवल के समापन अवसर पर प्रसिद्ध फिल्मकार अनुराग बसु ने अंचल के पत्रकार और फिल्मकार राजकुमार सोनी को सम्मानित किया.


गौरतलब है कि राजकुमार सोनी ने देश के प्रसिद्ध श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी के जीवन संघर्षों पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म लाल जोहार का निर्माण व निर्देशन किया है. इस फिल्म का प्रदर्शन फिल्म फेस्टिवल में किया गया था. 


लगभग 45 मिनट की इस डाक्यूमेंट्री फिल्म ने पूरे समय दर्शकों को बांधकर रखा. दर्शकों के बीच इसका अच्छा प्रतिसाद देखा गया. फिल्म में नियोगी के आंदोलन से जुड़ी पृष्ठभूमि को बेहद सरल और कलात्मक ढंग से समझाया गया है. जबकि फिल्म में नियोगी की हत्या के बाद उपजे सवाल मन को बेचैन और उद्वेलित करते हैं.जो लोग भी शंकर गुहा नियोगी के कामकाज को जानते-समझते हैं उनके लिए यह फिल्म एक दस्तावेज साबित हुई.


पिछले साल 28 सितंबर को जब नियोगी की शहादत को 30 साल पूरे हुए थे तब यह फिल्म जारी की गई थीं. इस फिल्म का प्रदर्शन छत्तीसगढ़ के अनेक गांवों में किसान और मजदूरों के बीच किया जा चुका है. छत्तीसगढ़ में जहां-जहां भी शंकर गुहा नियोगी का आधार क्षेत्र है वहां-वहां अब भी यह फिल्म दिखाई जा रही है.


फिल्म में भिलाई के रंगकर्मी जय प्रकाश नायर, सुलेमान खान, अप्पला स्वामी, संतोष बंजारा, शंकर राव, राजेंद्र पेठे के अलावा राजहरा के कलाकार कुलदीप नोन्हारे, ईश्वर, गांधीराम और किशन ने काम किया है. बैकग्राउंड म्यूजिक पुष्पेंद्र साहू ने दिया है. फिल्म में कैमरे व सहायक निर्देशन की जिम्मेदारी तत्पुरुष सोनी ने संभाली है.फिल्म की शूटिंग दल्ली राजहरा व भिलाई में की गई हैं. फिल्म के प्रदर्शन के बाद सोनी ने दर्शकों के सवालों के जवाब भी दिए.

सोमवार, 10 अक्टूबर 2022

वन विभाग के अधिकारी पर फर्जी वाड़ा कर करोड़ो का भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ने वाले हेमलाल साहू के विरुद्ध सिविल लाइन मे शिकायत पत्र दी

 वन विभाग के अधिकारी पर फर्जी वाड़ा कर करोड़ो का भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ने वाले हेमलाल साहू के विरुद्ध सिविल लाइन मे शिकायत पत्र दी

रायपुर नमो नमो  संस्था के सव्यं भू अध्यक्ष हेम लाल साहू के विरुद्ध वन विभाग रायपुर परिक्षेत्र के पंद्रह सुरक्षा श्रमिकों ने  हस्ताक्षर कर सिविल लाइन थाना रायपुर मे लिखित मे शिकायत दर्ज करवा हेम लाल साहू के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज कर कार्यवाही की मांग की गई है

      उल्लेखनीय है कि विगत दिनों हेम लाल साहू द्वारा कुछ सुरक्षा श्रमिकों को जो रायपुर वन मंडल अंतर्गत नवापारा परिवृत्त में सुरक्षा श्रमिक के रूप मे विगत कई वर्षों से भिन्न भिन्न वन क्षेत्रों मे कार्यरत है जिनसे हेम लाल साहू द्वारा लगतार उनसे गाली गलौज एवं मारपीट कर पंद्रह दिनों का वेतन दिए जाने दबाव बनाया जाता रहा है  तथा उन्हें  बड़े अधिकारियो से शिकायत का भय दिखा कर नौकरी से निकलवाने की धमकी भी दी जाती थी यही नही उच्च अधिकारी और मंत्री के समक्ष झूठी शिकायत कर नौकरी  से बाहर निकालने पत्र भी लिखता रहता था  जिससे प्रताड़ित होकर आज सुरक्षा श्रमिकों जिनमे खेलुराम साहू, पिता कुशुराम साहू, आनंद साहू पिता स्व. मदन लाल साहू, जगदीश  साहू पिता धनवार साहू, और दुर्गेश पाल, पिता राम साय पाल  सहित लगभग पंद्रह श्रमिकों के द्वारा सिविल लाइन थाना मे शिकायत पत्र लिख कर हेम लाल साहू पर एफ आई आर दर्ज कर विधि युक्त कार्यवाही करने की मांग की गई है 

   गौर तलब है कि नमो नमो संस्था के स्वयं भू अध्यक्ष अध्यक्ष हेम लाल साहू द्वारा एक वायरल वीडियो मे उपरोक्त  समस्त सुरक्षा श्रमिकों को फर्जी रूप से राशि आहरण कर परिक्षेत्र अधिकारी सतीश मिश्रा पर करोडो का गबन किए जाने का मिथ्या एवं भ्रमक आरोप लगा कर रेन्जर को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास किया था उक्त शिकायत वाली कार्यवाही उसी ब्यान के विरुद्ध के रूप मे देखी जा रही है रेन्जर सतीश मिश्रा का स्पष्ट कथन है कि मेरे क्षेत्र मे किसी प्रकर की कोई फर्जीवाडा बर्दाशत नही किया जाएगा जितने सुरक्षा श्रमिक कार्यरत है  वही राशि जारी की जाएगी किसी भी नेता के दबाव मे उनके परीजन दोस्त के नाम से बगैर कार्य संपन्न किए किसी प्रकार का कोई भी फर्जी श्रमिक भुगतान नही किया जाएगा ज्ञात हुआ है कि हेमलाल साहू द्वारा पूर्व में नमो नमो संस्था के पद पर नियुक्त था परंतु असमाजिक गति विधियों मे संलिप्तता के चलते राष्ट्रीय संस्था ने भी उसे बाहर कर दिया फिर भी संस्था के लेटर पैड का अनैतिक उपयोग आज पर्यंत किया जा रहा है सूचना का अधिकार लगा कर तथा अधिकरियो के उपर दबाव बना कर अपने तीन रिश्तेदारों के नाम  की तीस हजार रुपये की बड़ी राशि अपने नाम के खाते में डलवा रहा था जिसका भान होने पर रेन्जर ने उक्त राशि को बंद करवा दिया प्रति रोध के चलते हेम लाल साहू द्वारा काफी  लंबे समय से सूचना का अधिकार लगा कर भ्रष्टाचार, गडबड घोटाले जैसे आरोप लगा कई पदस्थ रेन्जरों को भय दोहन और बदनाम, दुष्प्रचार कर उच्च अधिकरियो को दिग्भ्रमित  कर रहा था जिस की वजह से ऐसे कानूनी लड़ाई की स्थित निर्मित हुई है तथा उसके विरुद्ध शिकायत पत्र सिविल लाइन टी. आई. को सौंपा गया श्रमिकों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए टी आई ने अधीनस्थों को हेमलाल साहू पर कार्यवाही का आदेश दिया है 

शनिवार, 8 अक्टूबर 2022

रायपुर वन मण्डल मे सूचना का अधिकार लगा छुट भैय्या नेता हेमलाल साहू उठा रहा बेजा लाभ

 रायपुर वन मण्डल मे सूचना का अधिकार लगा छुट भैय्या नेता हेमलाल साहू उठा रहा बेजा लाभ 


अलताफ हुसैन

रायपुर सूचना का अधिकार जितना शासकीय कार्यों मे हो रहे आम जनता के पैसों का जमीनी स्तर पर संपन्न किए गए कार्यों का समुचित क्रियानव्यन एवं व्यय व्यवस्था के साथ अधिकारियों द्वारा ईमान दारी कर्तव्य निष्ठा के साथ कार्यों मे पार दर्शिता ज्ञात करने का हथियार माना जाता है तो वही दूसरी और तथा कथित छुट भैय्या नेताओं के लिए यह सूचना का अधिकार ब्लैक मेल कर अवैध वसूली का जरिया भी बनता जा रहा है जिसका साक्षात उदाहरण रायपुर वन मंडल के परिक्षेत्राधिकारी सतीश मिश्रा के उपर करोड़ो की आय अर्जित कर गडबड घोटाला और भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए तथा कथित छुट भैय्या नेता हेम लाल साहू के द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है तथा इसके एवज मे अपने तीन सुरक्षा श्रमिकों का भुगतान अपने खाता मे ट्रांसफर करने की मांग की जा रही है ऐसा ना करने की स्थिति मे सूचना का अधिकार लगा कर मानसिक,आर्थिक,और शारीरिक रूप से प्रताडित कर जान से मारने जैसी मिथ्या भ्रमक रिपोर्ट लिखा कर फंसाने एवं भयदोहन कर अवैध वसूली की बात कह हेम लाल साहू के द्वारा दबाव बनाया जा रहा है जिस की वजह से परिक्षेत्राधिकारी सतीश मिश्रा द्वारा हेम लाल साहू के ऊपर मान हानि का दावा किए जाने की बात कही है 

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हुआ था जिसमे नमो नमो संस्था के स्वयं भू अध्य्क्ष हेम लाल साहू निवासी बोरिया खुर्द रायपुर द्वारा सुरक्षा श्रमिकों, क्रमशः मनोज साहू,खगेश साहू,जगदीश् साहू, खेलुराम साहू, दुर्गेश पाल टीकाराम साहू, रायपुर वन मंडल मे कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मियों की आड़ मे यह आरोप लगाया कि ये फर्जी तरीके से नवा रायपुर परिक्षेत्र मे  कार्य ना करते हुए इनके नाम से फर्जी बिल बाउचर के माध्यम से पारिश्रमिक राशि आहरित की जा रही है जबकि आज लगभग सत्रह सुरक्षा श्रमिक रायपुर वन मण्डल कार्यलय मे उप स्थित हो कर हेम लाल साहू के उक्त मिथ्या,भ्रमक ब्यान की निंदा करते हुए बताया कि समस्त सुरक्षा श्रमिकों से हेम लाल साहू द्वारा सदैव कार्य के एवज मे आधी राशि की मांग की जाती है राशि  न देने की स्थिति मे इस प्रकार आरोप मढ़ कर भय दोहन किया जाता है समस्त उपस्थित सुरक्षा श्रमिकों ने सामवेत स्वर् मे यह भी बताया कि उनका पारिश्रमिक देर सबेर उनके खाते मे नियमित पहुँच जाता है जबकि नवापारा रायपुर के डिप्टी रेन्जर राकेश शुक्ला ने बताया कि बिल बाउचर बनाने अथवा योजना राशि  के देर से आने  की स्थिति मे कुछ विलंब अवश्य होता है परंतु राशि सुरक्षा श्रमिकों के खाते मे डाल दी जाती है इसमे किसी प्रकार का गडबड घोटाला का सवाल ही नही उठता इस संदर्भ मे उपस्थित हुए सभी सुरक्षा श्रमिकों से पूछा गया सबने राशि उनके नाम के खाते मे आने की जानकारी दी जबकि नमो नमो समिति के स्वयं भू अध्य्क्ष हेम लाल साहू के विरुद्ध भी पुलिस थाने मे शिकायत की बात कही गई परंतु वह सदैव अधिकरियो के नाम से सूचना का अधिकार लगा तथा करोड़ों का भ्रष्टाचार का आरोप मढ़कर उनका भय दोहन कर अवैध राशि वसूली किए जाने की बात भी सामने आ रही है   इस संदर्भ में नवा रायपुर परिक्षेत्राधिकरि सतीश मिश्रा ने करोड़ो की राशि के भ्रष्टाचार को सिरे से खारिज करते हुए बताया कि अट्ठारह करोड़ राशि का मेरे क्षेत्र मे कार्य संपादित ही नही हुआ है क्योँकि ऊपर बैठे अधिकरियो को समस्त योजना की जानकारी रहती है तथा समस्त भुगतान आर टी जी एस के माध्यम से होती है फिर भ्रष्टाचार का सवाल ही नही उठता जबकि वह आए दिन योजना के संदर्भ में सूचना का अधिकार के जरिए जानकारी मांगता रहता है  जिसे उसे प्रदाय कर दिया जाता है अब यदि वह उसका भौतिक सत्यापन कर ले कि कार्य स्थल मे योजना का सफल क्रियनवयन हुआ है अथवा नही तब दुध का दुध और पानी का पानी हो जाएगा परंतु वह केवल सूचना के अधिकार का बेजा लाभ उठाने का प्रयास कर विभाग को उलझाने  का कार्य करता है 
यही नही ज्ञात यह भी हुआ है बहुत सी कार्यालयीन  जानकारी टी. पी. मे कार्यरत उसकी पत्नी द्वारा हेम लाल साहू को देती है जिसके आधार पर वह अधिकरियो का भय दोहन कर वसूली किया जाना बताया गया है यही नही फील्ड मे भी तथा कथित नेता के स्वय अपने रिश्ते दार दीपेश साहू भांजा,गेंदलाल साहू भाई, और तीरथ साहू दमाद,  जो बगैर उपस्थिति दर्ज किए वर्षों से पारिश्रमिक भुगतान का लाभ स्वयं के खाते में डलवा कर  रहा था जिसका भान होने पर वर्तमान रेन्जर सतीश मिश्रा द्वारा उक्त भुगतान को रोक दिया गया जिसके बौखलाहट के चलते हेम लाल साहू के द्वारा सूचना का अधिकार और करोड़ों रुपये औसतन अट्ठारह करोड़ का भ्रष्टा चार का आरोप लगा कर मानसिक आर्थिक, एवं सामजिक प्रतिष्ठा को आघात  करने का कुत्सित प्रयास किया जिसके विरुद्ध परिक्षेत्राधिकारी सतीश मिश्रा लिखित मे शिकायत करने की बात कही ज्ञात तो यह भी हुआ है कि नमो नमो संस्था के स्वयं भू अध्य्क्ष हेम लाल साहू से विभाग के समस्त उच्च अधिकारी भी त्रस्त है वह अकारण विभागीय समय पर पहुँच कर कार्य सांपादन मे बाधक बन अंगद की पांव की तरह जम जाता है जिससे शासकीय कार्यो मे बाधा होती है यही नही बहुत से स्थान पर यह कहने से गुरेज नही करता है कि विभाग की समस्त योजना जो करोड़ो की होती है वह स्वयं लिखे पत्र के माध्यम से लाता है अब सवाल उठता है कि जब वह ही ऐसे योजनाओ के प्रोजेक्ट उसके पत्र लेखनी से हो जाते तो वरिष्ठ अधिकरियो का विभाग में रहने का क्या औचित्य ? लेकिन उसकी निम्न स्तरिय सोच पर दया करके उसे कुछ अधिकारी  राशि दे देते है जिसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि वह अधिकरियो के विरुद्ध ही जान से मारने की शिकायत अनेक थानों मे कर चुका है जिसकी वजह से बहुत से अधिकारी त्रस्त हो चुके है तथा उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने बाध्य हो गए है हालांकि इसके पूर्व भी नमो नमो संस्था अध्यक्ष हेम लाल साहू के विरुद्ध फॉरेस्ट क्राइम ने समाचार  प्रकाशित कर चुका है कुछ वर्षो तक शांत रहने के पश्चात उसकी अवैध वसूली की गति विधियां पुनः प्रारंभ हो गई है