रविवार, 13 दिसंबर 2020

धूल और गड्ढों से वार्ड वासी परेशान स्मार्ट सिटी रोड के नाम पर स्तरहीन सड़क निर्माण की शिकायत की जाएगी -श्रीमती लता सुनील चौधरी

 धूल और गड्ढों से वार्ड वासी परेशान स्मार्ट सिटी रोड के नाम पर स्तरहीन  सड़क निर्माण की शिकायत की जाएगी -श्रीमती लता सुनील चौधरी 



रायपुर राजधानी में लगभग सभी वार्डों में स्मार्ट सिटी योजनान्तर्गत अनेक विकास कार्य हो रहे है मगर राजधानी के वार्डों में नल जल योजना सहित अन्य मार्गों में सड़क नाली निर्माण से वार्ड वासी भी खासे परेशान हो रहे है जिसे लेकर पंडित रवि शंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 35 के पूर्व पार्षद श्रीमती लता सुनील चौधरी ने किए जा रहे घटिया,गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्यों एवं धूल से परेशान वार्ड वासियों को हो रही स्वास्थ्यगत तकलीफ को लेकर नाराजगी व्यक्त करते हुए इसकी शिकायत ऊपर तक करने की बात कही है पर्व पार्षद लता सुनील चौधरी ने  आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि बांठिया नर्सिंग होम के समीप सड़क निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे की वजह से आसपास के रहवासी परेशान हो रहे है तथा उनके

घर  आने जाने का रास्ता ही बंद कर दिया गया है उसी प्रकार संपूर्ण रवि शंकर शुक्ल वार्ड में नल जल योजना के तहत किए गए गड्ढे में पाइप बिछाकर उस पर भी बजरी गिट्टी,मुरमी मिट्टी तथा कहीं कहीं सीमेंटीकरण कर लीपापोती कार्य किया जा रहा  है तथा अब तक एक ही कार्य को बारबार कर जनता के राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है ऐसे स्तरहीन कार्यों की वजह से उड़ती धूल से वार्ड वासी काफी परेशान हो रहे है तथा उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है सड़क निर्माण को लेकर  उन्होंने निर्माण एजेंसी, कंपनी,ठेकेदार,एव स्मार्ट सिटी के अधिकारियों की मिली भगत से भ्रष्टाचार होने की आशंका भी व्यक्त की है वही सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा श्रेय लेने की होड़ में शीघ्र सड़क निर्माण कर घटिया स्तर हीन सड़क निर्माण का आरोप लगाया है उन्होंने कहा कि



     पं रविशंकर शुक्ल वार्ड में डॉक्टर बाँठिया नर्सिंग होम के पास स्मार्ट सिटी रोड का हाल यह है कि पिछले दो दिनो से रानी सती मंदिर गली में निवासरात लोगों के आने जाने का रास्ता गढ्ढा खोद कर बंद कर दिया गया है तथा आनन फानन में आधी अधूरी सड़क का ही लोकार्पण कर दिया गया।तथा  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  को दिखावा और संतुष्ट करने के लिए जल्दी कार्य करने के चक्कर मे घटिया निर्माण किया गया है । आधी सड़क के नीचे लोहे के जाली लगाकर कांक्रीटीकरण किया गया है जबकि आधी में सिर्फ़ डामरीकरण कर मार्ग में लीपापोती की गई  है । उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी के पैसे का लगातार दुरुपयोग किया जा रहा है । आम जनता पिछले कई दिनो से परेशान है । जनता की समस्या का ध्यान रखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय दिल्ली में इसकी लिखित शिकायत कर स्तरहीन सड़क निर्माण को पुनः खनन करवाकर जाँच की माँग की जाएगी 



सोमवार, 7 दिसंबर 2020

पंचायती राज में चयनित गौठान समिति सदस्यों से गौठान निर्माण में लग रहा ग्रहण...उधारी मे कब तक ग्राम विकास की उम्मीद

  पंचायती राज में चयनित गौठान समिति सदस्यों से गौठान निर्माण में लग रहा ग्रहण...उधारी मे कब तक ग्राम विकास की उम्मीद


 




 

अलताफ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छग प्रदेश के पंचायती राज में वैसे तो राज्य सरकार अनेक जनकल्याणकारी रोजगार मूलक योजनाओं की घोषणा कर उसके वास्तविक धरा पर सफल  क्रियान्वयन हेतु प्रयास रत दिखाई दे रही है परन्तु ग्राम पंचायतों के सरपंच पंचगण के समक्ष भी अनेक विपत्ति एवं विसंगतियां उनके समक्ष  सुरसा की भांति मुंह फाडे भी खड़ी है जिससे राज्य शासन द्वारा लागू विभिन्न योजनाओं पर पलीता लगता दिखाई पड़ रहा है   वही प्रदेश के ग्राम पंचायतों के सरपंच,पंचगण राज्य शासन की खोखली जन कल्याणकारी  नीतिगत घोषणा एव कार्य शैली से क्षुब्ध नज़र आ रहे है



  छत्तीसगढ़ प्रदेश की सर्वाधिक चर्चित योजना नरवा,गरवा, घुरूवा,बाड़ी के सफल क्रियान्वयन हेतु राज्य शासन द्वारा घोषणा किए जाने के पश्चात विगत वर्ष 2019 से इसका निर्माण कार्य द्रुत गति से जारी है कोरोना संक्रमण जैसे महामारी दौर में भी ग्राम पंचायतों के पंच सरपंच द्वारा मनरेगा के तहत ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराते हुए  इसका निर्माण किया इसके एवज में राज्य सरकार आर्थिकी अल्पता के चलते इन्हें माकूल राशि उपलब्ध नही कराई गई जिसकी वजह से गौठनों में कार्यरत अनेक श्रमिकों के भुगतान और निर्माण सामग्री के भुगतान में विलंब होता गया परिणामतः अनेक ग्राम प्रधान सरपंचों ने यह बात स्वीकारी कि उन्हें गौठान में निर्माण कार्य संपादन हेतु ब्याज से राशि लेनी पड़ी तथा अब तक राज्य शासन द्वारा पंचायती राज में छुटपुट राशि जारी करने  को छोड़ कर कई बड़े भुगतान लंबित है एक प्रकार से ग्राम पंचायतों का विकास उधारी में चलने की बात कही जा रही है इस संदर्भ में अनेक सरपंचों ने यह भी कहा कि दीपावली जैसे त्योहार में कुछ ने राशि ब्याज में लेकर श्रमिक भुगतान किया तो किसी ने श्रमिकों का भुगतान न कर पाने के कारण मुंह छुपा कर दीपावली त्योहार मनाया कथनाशय यह है कि किसी भी योजना के सफल क्रियान्वयन में  राशि उसकी रीढ़ मानी जाती मगर प्रदेश भर के सरपंच राज्य शासन से मिलने वाली राशि से वंचित होने पर भविष्य में गौठान और नरवा गरवा घुरूवा बाड़ी जैसी योजनाओं के सफल होने पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे है



तथा राज्य शासन के  निर्णायक नीति को विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के ग्रामीणों में  राज्य शासन के ऐसी ढुलमुल नीति को लेकर विरोध के स्वर भी मुखर हो रहे है वही ऐसे नीतियों पर भी ग्राम सरपंच आक्रोशित नजर आए जिसमे उनके अधिकारों का हनन हो रहा है  इस संदर्भ में  आरंग विकासखण्ड अंतर्गत  ग्राम पंचायत गौरभाट के सरपंच प्रतिनिधि चिम्मन लाल साहू ने बताया कि लंबे समय से राज्य शासन द्वारा राशि नही भेजी जा रही है जिसके चलते विकास कार्य ठप्प पड़ा हुआ है यहां तक गौठान निर्माण कार्य भी पेंडिंग है जिसे वे अब हाथ भी लगाना नही चाहते उन्होंने इसकी वजह गलत तरीके से गौठान समिति सदस्यों का चयन किया जाना बताया उन्होंने आगे बताया कि ग्राम गौरभाटा में  गौठान समिति के चयन हेतु जिला सीईओ तथा विकासखण्ड सीईओ के माध्यम से एक पत्र जारी कर गौठान समिति के गठन हेतु नाम चयन कर भेजे जाने का पत्र जारी किया गया था परन्तु जब उनके द्वारा ग्राम सभा प्रतिनिधि एवं महिला समुहों द्वारा बारह सदस्यों की सूची प्रेषित की गई तब प्रभारी मंत्री द्वारा प्रेषित नामो के स्थान पर अपने समर्थक,प्रशंसकों ,के नामों का चयन कर ग्राम गौठान अध्यक्ष से लेकर सदस्यों की चयनित सूची जारी कर दिया गया उन्होंने सवाल किया है कि यदि स्वयं ही ग्राम गौठान समिति सदस्यों का चयन करना था तो जिला सीईओ द्वारा पत्र सर्क्युलर जारी कर चयन प्रक्रिया का ढोंग और सारी औपचारिकता क्यो की गई ? 



इससे ग्राम पंचायत के सरपंच इत्यादि के अधिकार ,वर्चस्व,औचित्य, स्वयं  समाप्त हो जाते है ? उन्होंने बताया कि  गौठान समिति सदस्यों के गलत चयन प्रक्रिया की वजह से ग्राम में टकराव सहित असंतोष व्याप्त है इस संदर्भ में ग्राम गौरभाटा के सरपंच प्रतिनिधि चिम्मन लाल साहू ने बताया कि चयनित सदस्यों द्वारा ग्राम पंचायत प्रतिनिधि सहित पँचगणों को गौठान में प्रवेश  करने निषेध कर दिया गया इससे दीपावली के पूर्व दोनो पक्षों में जमकर हाथापाई हुई तथा प्रभारी मंत्री द्वारा चयनित गौठान सदस्यों द्वारा पुलिस में शिकायत  भी दर्ज किया गया एक प्रकार से सरपंच प्रतिनिधि ने आरोप लगाया है कि शासन के गलत निर्णय की वजह से ग्राम पंचायतों में मनमुटाव तथा परस्पर विद्वेष की भावना पनप रही है  तथा ग्राम सरपंच पंच का अस्तित्व लगभग शून्य हो गया है वही ग्राम निसदा के सरपंच देवकुमार साहू ने बताया कि गौठान समिति चयन प्रक्रिया गलत तरीके से हुई है जिसकी वजह से उन्हें भी बड़ी कठिनाइयों से गुजरना पड़ रहा है सरपंच देवकुमार साहू  ने बताया कि परस्पर वैचारिक मतभेद टकराव की स्थिति को टालने के उद्देश्य से  चयनित गौठान सदस्यों का ग्राम पंचायत सभा मे प्रवेश प्रतिबंध कर दिया गया है तथा न ही हमारे पंचगण सदस्य गौठान में प्रवेश करते है देवकुमार साहू ने बताया कि जब शासन द्वारा ग्राम पंचायतों के माध्यम से गौठान निर्माण करवाया गया तो उसके देखरेख सुरक्षा और विकास का अधिकार भी ग्राम पंचायतों के हाथ होना चाहिए तथा ग्राम गौठान के समिति सदस्यों के चयन करने का अधिकार भी ग्राम पंचायतों का ही बनता है न कि शासन में बैठे प्रतिनिधि की यह जवाबदेही बनती है कि गौठान समिति सदस्यों के नाम की सूची मंगवाकर अपने मंशानुरूप चयन प्रक्रिया की जाए सरपंच देवकुमार ने यह भी बताया कि राज्य शासन से मिलने वाली राशि का बड़ा टोंटा है तथा अब तक अनेक निर्माण कार्यों के भुगतान लंबित है  राशि न मिलने का दुखड़ा सुनाए भी तो किसे सुनाए ? क्योंकि न जिले स्तर पर कोई सुनवाई है और न ही विकासखंड स्तर पर कोई कार्यवाही हो रही है ग्राम निसदा सरपंच देवकुमार साहू  ने कहा  कि यदि राज्य शासन स्वयं ही ग्राम गौठान निर्माण अपने चयनित सदस्यों से करवाना चाहती है तो प्रदेश भर के ग्राम पंचायतों के सरपंचों को गौठान निर्माण दायित्वों से पृथक कर दे ताकि हमारा उसपर कोई हस्तक्षेप न रहे तथा संपूर्ण आय व्यय का लेखा जोखा गौठान समिति सदस्यों से लिया जाए ताकि इसे लेकर टकराव की स्थिति निर्मित न हो ग्राम पंचायतों में विकास राशि न मिलने जैसी स्थित आसपास के अन्य ग्राम पंचायतों में भी सामने आ रही है ग्राम भलेरा के एक सदस्य ने बताया कि लंबे समय से ग्राम में निर्माण कार्य संपादित हो रहा है लेकिन शासन से अब तक राशि जारी नही हुआ है  ग्राम तामासिवनी के सरपंच प्रतिनिधि हेमलाल जांगड़े ने भी शासन द्वारा विभिन्न मदों से मिलने वाली राशि पर हो रही देरी पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि इसकी वजह से निर्माण कार्यों में विलंब हो रहा है और शासन है कि ग्राम विकास के नाम पर राशि ही जारी नही कर रही इसे कैसे ग्राम विकास समझा जाए ? यही व्यथा ग्राम गनौद के सरपंच प्रतिनिधि डागेश्वर साहू  ने भी स्वीकारी है तथा कहा है कब तक उधारी में ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर निर्माण कार्य करते रहे जबकि एक ओर राज्य शासन  सोशल साइट समाचारों  के माध्यम से यह भी कहती है कि सरकारी खजाना पूरी तरह से लबरेज है तो फिर ग्राम विकास के नाम पर राशि क्यों जारी नही की जा रही ?अनेक ग्राम के ग्रामीणों द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि चंद अपवाद मॉडल गौठान को छोड़ दे जिन पर शासन के मंत्रियों के प्रतिनिधियों की विशेष कृपा दृष्टि है  तो  प्रदेश के अधिकांश अनेक ग्राम पंचायतों में राज्य शासन के  महत्वाकांक्षी योजना  नरवा गरवा घुरूवा,बाड़ी जैसी योजनाएं  मात्र कपोलकल्पित सी और फिसड्डी साबित  हो रही है तथा राशि के आबंटन  में हो रही कोताही तथा मनमाने रूप से चयनित सदस्यों के हस्तक्षेप के चलते कहीं भी विकास गति बढ़ती दिखाई नही दे रही है ग्रामीणों का कथन यह भी है कि राज्य शासन की यह योजना राशि के अभाव के चलते कहीं भविष्य में दम तोड़ती हुई  नज़र न आए  ? 

विधिक माप विज्ञान महासमुंद जिला के चयनित क्षेत्रों में शिविर के माध्यम से माप उपकरणों की सघन जांच

 विधिक माप विज्ञान महासमुंद जिला के चयनित क्षेत्रों में शिविर के माध्यम से माप उपकरणों की सघन जांच 





महासमुंद संवाददाता द्वारा

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) महासमुंद जिले के अंतर्गत विधिक माप विज्ञान महासमुंद  के द्वारा जिले भर में चयनित क्षेत्रों में शिविरों का माध्यम से उपकरणों की सघन जांच एव सत्यापन कार्य किया जा रहा है जिसमे अनेक असत्यापित उपकरण के मामले भी सामने आ रहे है इस संदर्भ में विधि माप विज्ञान महासमुंद जिला  अधिकारी श्री महेंद्र कुमार ने बताया  कि सराईपाली परिक्षेत्र में चयनित क्षेत्रों में शिविर लगाकर सघन जांच की गई जिसमें राइस मिल ट्रेडर्स, किराना दुकान,फल सब्जी दुकानों के नापतौल उपकरणों की जांच निरन्तर की जा रही है एवं सिंघोडा,बलौदा में शिविरों का आयोजन कर समस्त व्यापारी बंधुओं के नाप तौल उपकरणों का सत्यापन एवं मुद्रांकन किया जा चुका है  विधिक माप विज्ञान अधिकारी महासमुंद ने बताया कि सराईपाली में ट्रेडर्स,छड़ विक्रेता,एवं राइस मिलों की जांच की गई जिसमे अनेक असत्यापित उपकरणों के विरुद्ध नियमानुसार दो हजार रुपये से लेकर दस हजार रुुपाए तक की दंडात्मक कार्यवाही भी की गई है  उन्होंने बताया कि यह कार्यवाही सराईपाली क्षेत्र में सतत जारी रहेगी 

रविवार, 6 दिसंबर 2020

वन विकास निगम का हिटलरी फरमान.. पानाबरस मंडल कार्यालय से कुर्सियों को वापस मुख्यालय मंगाया ... कार्यालय के पचास फीसदी कर्मचारी क्षतिग्रगस्त कुर्सियों में कर रहे है काम

 वन विकास निगम का हिटलरी फरमान.. पानाबरस मंडल कार्यालय से कुर्सियों को वापस मुख्यालय मंगाया ... कार्यालय के पचास फीसदी कर्मचारी क्षतिग्रगस्त कुर्सियों में कर रहे है काम 


अलताफ हुसैन 

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)कुर्सी पाने या उसको गंवाने का दर्द यदि कोई बता सकता है वह या तो कोई राजनीतिज्ञ इसका दर्द बखान कर सकता है या फिर कोई विभाग का अधिकारी,कर्मचारी ही इसकी पीड़ा बता सकता है वह भी तब जब उसके नीचे से कुर्सी खिसक गई हो चौकिए ! नही, यहां किसी अधिकारी,कर्मचारी के द्वारा भ्रष्टाचार गड़बड़,घोटाला अथवा कार्यालयीन विरोधी कार्यों के लिए किसी की कुर्सी नही गई बल्कि पूर्व में वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा किए गए 


गड़बड़,घोटाला,भ्रष्टाचार करके क्रय की गई कुर्सी के इधर से उधर कर वापस मुख्यालय में मंगवाने की वजह से कई अधिकारी कर्मचारी की कुर्सी चली गई अब स्थिति यह हो गई कि सारे कर्मचारी इस बात को लेकर चिंतित है कि कार्यालयीन कार्यों का संपादन किस कुर्सी में बैठ कर किया जाएगा यह उनके समक्ष सवाल खड़ा है फिलहाल, विकल्प के तौर पर वर्षों से कार्यालय में धूल खाती,टूटी फूटी पुरानी पड़ी कुर्सियों कुछ की ही मरम्मत करवा कर कार्य किया जा रहा है किस्सा कुर्सी का तो बहुत सुने गए है परन्तु ऐसा किस्सा जिसमे अधिकारियों ,कर्मचारियों के नीचे से कुर्सी जाने का प्रकरण सुना ही नही गया होगा मामला छग राज्य वन विकास निगम पानाबरस परियोजना मण्डल कार्यालय राजनांदगांव का है जहाँ नव निर्मित नवीन कार्यालय भवन में विगत वर्ष छग वन विकास निगम मुख्यालय नवा रायपुर अटल नगर से लगभग पन्द्रह से बीस रिवाल्विंग कुर्सियां भेजी गई थी जिसका उपयोग पानाबरस कर्मचारीगण कर रहे थे बताया जाता है कि जब कुर्सियां राजनांदगांव परियोजना मण्डल कार्यालय भेजी गई थी तब न ही उसका लिखित में कोई चालान भेजा गया था और न ही कुर्सियां टेबल की संख्या दर्ज कर कोई लिखित प्रमाणक कॉपी प्रदान की गई थी केवल मौखिक रूप से ही टेबल कुर्सी यहां भेज दिया गया था जबकि इसके पूर्व यह भी ज्ञात हुआ था कि मुख्यालय नवा रायपुर से राजनांदगांव पाना बरस परियोजना मंडल कार्यालय में कुर्सियां भेजने के पूर्व वन विकास निगम के मुख्यालय में साल भर तक धूल खाती पड़ी हुई थी न ही इसका कोई मूलरूप से सदुपयोग हुआ था और न ही किसी अन्य कार्यों में इसकी उपयोगिता सिद्ध हुई थी अब कर्मचारियों के मस्तिष्क में यह सवाल कौंध रहा है कि जब कुर्सियों की मुख्यालय कार्यालय में कोई महत्वता अथवा उपयोगिता ही नही थी तो फिर वन विकास निगम मुख्यालय द्वारा इतनी बड़ी संख्या में अतिरिक्त कुर्सियों का क्रय क्यों किया गया ?


कुर्सी क्रय के मामले में बहुत बड़ा गडवद झाला बताया गया है गौरतलब है कि वर्ष 2017-2018 में जब छग वन विकास निगम मुख्यालय कार्यालय नवा रायपुर अटल नगर में हस्तांतरित हुआ था तब तत्कालिक अध्यक्ष श्री निवासराव मद्दी एवं सेवानिवृत्त हो चुके एम डी. राजेश गोवर्धन द्वारा कार्यालयीन उपयोग हेतु बड़ी संख्या मे नए फर्नीचर जिनमे तथा कथित कुर्सियां भी शामिल है का क्रय किया गया था जिसे फॉरेस्ट क्राइम समाचार पत्र द्वारा प्रमुखता से समाचार का प्रकाशन कर यह आशंका व्यक्त किया गया था कि वन विकास निगम में लाखों के फर्नीचर खरीदी में बड़ेपैमाने पर गड़बड़ घोटाला को अंजाम दिया गया है परन्तु तात्कालिक समय इस संदर्भ में कोई भी कार्यवाही नही की गई क्योंकि तात्कालिक भाजपा काल मे भ्रष्टाचार,गड़बड़ घोटाला,अपने चरम में था तथा नीचे से ऊपर तक वरिष्ठ अधिकारीयों से लेकर अफसर भ्रष्ट कार्यों में संलिप्त थे यहां तक वन विकास निगम में प्रमुख वित्त लेखाधिकारी (.सी.एस.) कंपनी सिकरेट्री की नियुक्ति भी नही की गई थी जिसके लिए मात्र औपचारिकता निभाते हुए वन विकास निगम लिमिटेड ने सीधी भर्ती हेतु छत्‍तीसगढ़ व्‍यावसायिक परीक्षा मंडल रायपुर के द्वारा कंपनी सेक्रेटरी (CS) के पद पर प्रतियोगी परीक्षा के माध्‍यम से सीधी भर्ती करने हेतु 2019 में विज्ञापन जारी किया गया था परन्तु संभवतः यह भर्ती भी अब तक नही हो पाई होगी इसके चलते ही समस्त वित्तीय पॉवर एम डी.के अधिकार में था जिसका मनमाना वित्तीय लाभ एम. डी.तथा वरिष्ठ वित्तीय लेखापाल बी आर जैन जैसे वित्त अधिकारियों की मिली भगत के चलते राजस्व का खुलकर दोहन किया जाता रहा है तथा इसका भरपूर लाभ तात्कालिक छग राज्य वन विकास निगम अध्यक्ष श्री निवासराव मद्दी जैसे नेता भी उठाते रहे यदि इस संदर्भ में आज भी सरकारी जांच एजेंसी से जांच कराई जाती है तो एक बहुत बड़े आर्थिक,गड़बड़ी,भ्रष्टाचार,और घोटाले, का भंडाफोड़ हो सकता है बताते चले कि छग वन विकास निगम आर्थिज रूप से स्व पोषित संस्था है जो एक कंपनी की भांति स्वयं उत्पाद कर लाभ अर्जित कर निगम का संचालन करती है तथा इसका लाभांश वार्षिकी राशि राज्य सरकार को प्रदान करती है परन्तु विगत कुछ वर्षों से राज्य सरकार को दिए जाने वाली लाभांश राशि का ग्राफ भी निरन्तर गिरता जा रहा है जिसकी वजह वन विकास निगम में विगत कुछ वर्षों हो रहे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार,गड़बड़ घोटाले सहित अनियमितताओं को माना जा रहा है जबकि निगम में सीएस (कंपनी सिक्रेटरी) वित्तीय अधिकारी की नियुक्ति को लेकर अनेको बार फॉरेस्ट क्राइम द्वारा समाचार के माध्यम से आवाज़ उठाई गई परन्तु एम डी राजेश गोवर्धन द्वारा केवल औपचारिकता पूर्ण प्रक्रिया अपनाते हुए वन विकास निगम के वेब साइट में विज्ञापन जारी कर कार्यों की इतिश्री मान ली गई तथा संभवतः अब तक सी.एस. (कंपनी सिकरेट्री) की नियुक्ति छग वन विकास निगम में नही की गई जो अब भी वन विकास निगम के वित्तीय व्यवस्था के मामले में सन्देह उत्पन्न कर रहा है क्योंकि लगातार भ्रष्टाचार गड़बड़ घोटालों के चलते अनेक अधिकारी वैतनिक आय से कई गुना अधिक आय अर्जित कर चुके है जिसमे वरिष्ठ लेखापाल के रूप में भी भोजराज जैन का नाम प्रमुखता से आता है इनके साथ आर जी एम के अतिरिक्त प्रभार के रूप में डॉ सोमदास मैडम जिनके पास दोहरा तिहरा प्रभार था उपरोक्त तथा कथित अधिकारियों के सन्दर्भ में यह चर्चा आम है कि इन्होंने अनेक स्थलों में चल अचल संपति अपने रिश्तेदारों के नाम पर अर्जित कर रखी है एम डी राजेश गोवर्धन ने भी अनेक चल अचल संपति अर्जित कर रखी है जो इनके भ्रष्ट कार्यशैली के चलते इनके अतिरिक्त आय को दर्शाता है जबकि सोमदास मैडम के द्वारा अभी छुट्टी में जाना बताया जा रहा है परन्तु यह भी चर्चा जोरों पर है कि सोमदास मैडम अपनी पदस्थी अन्य स्थान में न करवा ले क्योंकि तिकड़ी के रूप में इन लोगों ने निगम के आर्थिक ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है तथा सब धीरे धीरे भ्रष्टाचार कर के वन विकास निगम को भ्रष्टाचार के काजल की काली कोठरी बनाकर यहां से दूर भागना चाह रहे है यही कारण है कि अकूत संपति अर्जित कर सब निगम से नौ दो ग्यारह हो गए है अब यहां जो नए पदस्थ एम डी और अन्य कर्मचारी आ रहे है वे केवल इनके बड़े बड़े गड्ढे ही भरते रहेंगे वही ज्ञात तो यह भी हुआ है कि वरिष्ठ लेखापाल, भोजराज जैन अब भी बहुत से पिछले बिल बाउचर में हस्ताक्षर लेने पूर्व एम डी राजेश गोवर्धन के नए भवन में आते है जबकि इस दरमियान दो एम डी की बिदाई हो चुकी है फिर भी वित्तीय बिल पत्रों में हस्ताक्षर अब भी सेवानिवृत्त आई एफ़ एस अधिकारी राजेश गोवर्धन से करवाने का खेल कुछ समझ मे नही आ रहा है जो अनेक सन्देह को उत्पन्न करता है बहरहाल,फर्नीचर क्रय के बाद से कभी मुख्यालय में तो कभी राजनांदगांव परियोजना मंडल में धक्का खाती कुर्सियों को अंततः मुख्यालय मौखिक आदेश में मंगवाया गया जिससे कार्यालय कर्मचारी हतप्रभ के साथ आश्चर्य चकित भी है कि सहसा स्टाफ के बैठने की कुर्सी वापस मुख्यालय ने क्यो मंगवाया ? समस्त कुर्सी बड़ा टेबल शनिवार दिनांक पांच नवंबर 2020 को दोपहर पानाबरस परियोजना मंडल कार्यालय के ट्रक से भेजी गई लगभग पन्द्रह कुर्सियां तथा एक बड़ा कॉन्फ्रेंस हॉल हेतु भारी भरकम टेबल दिनांक 06 रविवार को सुबह मुख्यालय में उतारा गया चर्चा इस बात को लेकर भी हो रही है कि जब कुर्सी मुख्यालय में ही रखना था तो लाने ले जाने हेतु लोडिंग अनलोडिंग आवागमन हेतु ट्रक उसके ईंधन में हजारों रुपये फूंकने की क्या आवश्यकता थी ? इससे स्पष्ट ज्ञात होता है कि कुर्सी फर्नीचर खरीदी में बड़ा गड़बड़ झाला हुआ है तथा उसके आवागमन में भी भ्रष्टाचार करने की संभावना तलाशी जा रही है अब पानाबरस कार्यालय के कर्मचारी इस बात को लेकर चिंतित है कि वे कार्यालयीन कार्यों का संपादन किस पर बैठकर और कैसे करेंगे ? वहीं यह भी ज्ञात हुआ है कि मुख्यालय भेजने के पूर्व पानाबरस कार्यालय में डेढ़ दर्जन से ऊपर कुर्सियां रखी हुई थी मगर अनेक सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारी एक एक कुर्सी ले जाकर अपने घर की शोभा बढ़ा रहे है वही आशंका यह भी व्यक्त की जा रही है कि लाखों रुपये में क्रय की गई शेष कुर्सी भी धीरे धीरे कहीं किसी बड़े अधिकारी के घर की शोभा न बन जाए वही करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले पानाबरस परियोजना मंडल कार्यालय राजनांदगांव के पचास फीसदी कर्मचारी फिलहाल पूर्व की टूटी फूटी क्षतिग्रस्त कुर्सियों को रिपेयर करवाकर काम चला रहे है अब देखना होगा वन विकास निगम प्रबंधन इस ओर क्या कदम उठाता है या कर्मचारियों को टूटी फूटी कुर्सी में ही अपना कार्यालयीन कार्य संपादित करना पड़ेगा ?

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

विधायक धनेंद्र साहू ने ग्राम भलेरा के नवीन सोसायटी का भूमि पूजन कर शुभारंभ किया





 विधायक धनेंद्र साहू ने ग्राम भलेरा के नवीन सोसायटी का भूमि पूजन कर शुभारंभ किया 


रायपुर ग्राम भलेरा में नवीन सोसायटी का शुभारंभ भूमि पूजन के साथ क्षेत्रीय विधायक धनेंद्र साहू,कलेक्टर एस डी एम.और तहसीलदार  के गरिमामयी उपस्थित में संपन्न हुआ तथा  साथ साथ ग्राम भलेरा में नव निर्मित गौठान के बाड़ी चारागाह,का निरिक्षण कर भूमि पूजन किया  इस गरिमामयी कार्यक्रम में उपस्थित कृषक,ग्रामीणों को विधायक धनेंद्र साहू ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि अभनपुर विधान सभा क्षेत्र के लगभग 30 धान उपार्जन केंद्र में एक दिसंबर से शासन द्वारा धान  खरीदी प्रारंभ किया गया है तथा राज्य सरकार की योजना का लाभ प्रदेश सहित विधान सभा क्षेत्र के किसान भाइयों को मिल रहा है जो बड़े ही हर्ष की बात है उन्होंने आगे कहा कि अन्नदाता किसान का पसीना सूखने के पूर्व ही राज्य शासन द्वारा अपने चुनावी घोषणा के मुताबिक धान को समर्थन मूल्य में खरीद रहा है ताकि किसान यहां वहां न भटके और उसकी परिश्रम का लाभ उसे मिले  ग्राम भलेरा में नव निर्मित नवीन सोसायटी  धान क्रय केंद्र का शुभारंभ करने के पूर्व धान के संरक्षित स्थल चबूतरा का निरीक्षण कर शीघ्र चबूतरा निर्माण के निर्देश  सरपंच सहित नवीन सोसायटी अधिकारी कर्मचारियों को दिए तथा शीघ्र चबूतरा निर्माण कर क्रय किए गए धान के सुरक्षा उपाय के निर्देश दिए इस अवसर पर ग्राम भलेरा के सरपंच मीना चन्द्र कुमार साहू ने कहा कि ग्राम में विकास कार्य द्रुत गति से किया जा रहा है तथा ग्राम में अल्प अवधि में नवीन सोसायटी का निर्माण करना इसका साक्षात उदाहरण है   ग्राम भलेरा सरपंच श्रीमती मीना चन्द्र कुमार साहू ने कहा कि गौठान निर्माण भी लगभग अपने अंतिम चरण में है संभवतः दिसंबर के अंत अथवा जनवरी तक गौठान निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा वही अभनपुर  क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक माननीय धनेंद्र साहू ने गौठान निरीक्षण कर गौठान में किए जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा व्यक्त करते हुए बाड़ी, चारागाह का भूमि पूजन किया तथा गौधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी तथा बर्मी कंपोस्ट खाद निर्माण को लेकर सरपंच श्रीमती मीना चंद्र कुमार साहू एव पंचगण के द्वारा किए जा रहे कार्यों को लेकर अपनी प्रशंसा जाहिर की  उन्होंने आशा व्यक्त किया कि नवीन सोसायटी निर्माण तथा धान उपार्जन केंद्र निर्मित होने से इसका लाभ आसपास के ग्राम कृषकों को प्राप्त होगा नवीन सोसायटी केंद्र में चबूतरा निर्माण तथा गौठान भूमि में बाड़ी के भूमि पूजन के समय प्रशासनिक अधिकारी गण सर्व श्री कलेक्टर साहब एस डी एम. साहब सहित तहसीलदार साहब तथा  ग्राम के गणमान्य नागरिक कृषक महिला पुरुष बड़ी संख्या मे उपस्थित हुए। जिनमे सरपंच मीना चंद्र कुमार साहू, उप सरपंच भुनेश साहू, पंचगण दीपक साहू, हेम बाई साहू, सुनीता साहू, धनेश्वरी तारक, पूर्णिमा साहू, शांति साहू, रामनारायण साहू, पवन साहू,ग्राम सचिव चंद्राकर जी बिसहत साहू,कुंजलाल साहू, रवि शंकर साखरे, टीकम साहू, संतराम साहू, भाउराम, साहू,पुनितराम साहू विशेष रूप से उपस्थित थे 

बुधवार, 2 दिसंबर 2020

नवापारा परिवृत में दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को दीपावली भुगतान नही.... छूटभैया नेता पर भयादोहन कर आर्थिक लाभ उठाने का आरोप

 नवापारा परिवृत में दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को दीपावली भुगतान नही.... छूटभैया नेता पर भयादोहन कर आर्थिक लाभ उठाने का आरोप






अलताफ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) वन विभाग में कार्यरत लगभग आधा दर्जन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों चौकीदारों को विगत डेढ़ माह से वेतन भुगतान नही हुआ है जिसकी वजह से श्रमिकों के समक्ष खाने पीने के लाले पढ़े हुए है बताया जाता है कि क्षेत्र में एक राजनीति क्षेत्र से संलग्न  व्यक्ति द्वारा  कर्मचारियों के विरुद्ध  द्वेष पूर्ण भावना से लिखित शिकायत कर पांच छ चौकीदार,कर्मचारियों का वेतन रुकवाने का आरोप भी पीड़ित दैनिक वेतन भोगीयों श्रमिकों द्वारा लगाया जा रहा है 

  वेतन संबन्धी विसंगतियों को लेकर समस्त चौकीदारों श्रमिकों ने ग्राम डोमा निवासी एक  तथा कथित राजनीतिक व्यक्ति के विरुद्ध पत्र लिख कर,प्रदेश वन मंत्री मोहम्मद अकबर, विभाग के मुखिया वन बल प्रमुख श्री राकेश चतुर्वेदी,सी सी एफ़ सहित वन मण्डलाधिकारी को अवगत कराया है जिसकी प्रति फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़ को प्रेषित कर अवगत होते हुए  बताया कि हेमलाल साहू जो कि  वन विभाग  रायपुर मंडल कार्यालय अंतर्गत में न तो कार्यरत है और न ही वह किसी प्रकार के पद में है परन्तु विगत कई वर्षों से  नवापारा परिवृत  क्षेत्र के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों सहित क्षेत्र के अधिकारियों पर अपने आप को देश के प्रधान मंत्री का समर्थक बता कर तथा समस्त केंद्र सरकार से जारी कैम्पा मद से संपादित होने वाले कार्यों का बजट लाने की बात कह कर श्रमिकों सहित वन अधिकारी, कर्मचारियों का भयादोहन कर आर्थिक शोषण करने की बात भी सामने आ रही है  लगाए गए आरोप में अब  कितनी सत्यता है यह तो ज्ञात नही परन्तु  सोशल मीडिया पर ही तथाकथित  हेमलाल साहू द्वारा लिखित  एक लेटर हेड जिसमे भाजपा का कमल लोगो अंकित कर देश के प्रधानमंत्री माननीय  नरेंद्र मोदी का समर्थक लिखा हुआ है समर्थक होना अच्छी बात है परन्तु उसकी आड़ में विभागीय कर्मचारियों का भयादोहन करना कहां तक उचित है उसके द्वारा सोशल मीडिया में प्रेषित किए गए पत्र मे लाखों की राशि से रायपुर वन मण्डल के अंतर्गत संपादित वृक्षारोपण कार्य, निर्माण कार्य का स्पष्ट उल्लेख करते हुए   रायपुर वन मण्डल क्षेत्र के भिन्न भिन्न क्षेत्रों ग्रामों के नाम सहित पौधा रोपण कार्यों की जानकारी वाला पत्र  दिल्ली पी एम,एवं अन्य  पते पर प्रेषित किए जाने के सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आए है अब इसमें कितनी सत्यता है यह तो ज्ञात नही परन्तु बताया गया है कि उसके द्वारा रायपुर वन मंडल कार्यालय सहित नवापारा परिवृत में काफी दखल है तथा उसके द्वारा अपने शिकायत पत्र में स्पष्ट उल्लेख करते हुए पीड़ित पक्ष ने  कतिपय लोगों के नाम जिनमे मुख्यतः  तिरिथ साहू,गेंदलाल साहू जो विभाग में कार्यरत नही है उनको फर्जी बाउचर के माध्यम से भुगतान  करवाए जाने के आरोप है जबकि पत्र में केवल दो नाम उल्लेखित है आशंका व्यक्त की जा रही है कि कथित प्रधान मंत्री समर्थक द्वारा अन्य नाम से भी फर्जी वाउचर के नाम से भुगतान करवाया गया होगा जो जांच में सामने आ सकता है वही सोशल मीडिया पर डाले गए पत्र में हेमलाल साहू पर यह भी आरोप लगाया गया  है कि माननीय प्रधानमंत्री का समर्थक बता कर स्वयं  प्रदेश के 36 वन मण्डल कार्यालयों के निरीक्षण करने की पात्रता बताता है वही  शिकायत पत्र में यह बात भी लिखी गई है कि ग्राम डोमा एवं आसपास के वृक्षारोपण,प्लांटेशन क्षेत्रों  में आगजनी करने  के आरोप भी पीड़ित पक्ष द्वारा उस पर लगाए गए है यही नही प्रति सप्ताह क्षेत्र में भ्रमण कर श्रमिकों को डराना धमकाने  जैसे कृत्य की बात भी कही जा रही है जबकि सर्वाधिक संगीन आरोप यह भी लगाया गया है कि हेमलाल साहू की पत्नी राजेश्वरी साहू जो स्वयं दैनिक वेतन भोगी है उसके द्वारा भी ग्राम क्षेत्र के आसपास निवासरत बेरोजगार युवकों से वन विभाग में कार्य दिलवाने के नाम पर रुपये लिए जाने की बात लिखी गई है इससे यह तो स्पष्ट होता है कि हेमलाल साहू नामक कथित  समर्थक ग्राम डोमा सहित नवापारा परिवृत में सक्रियता के साथ भयादोहन कर आर्थिक लाभ अर्जित कर रहा है जबकि पीड़ित कर्मचारी जो लगभग 10 वर्षों से ऊपर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत है उनका विगत माह का वेतन हेमलाल साहू के लिखने पर रोक दिया गया अब सवाल यह उठता है कि दीपावली पूर्व माह अक्टूबर से ही जब मुख्यालय से यह आदेश जारी किया जा चुका है   दीपावली में समस्त दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का पारिश्रमिक भुगतान कर दिया जाए तो जब सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का भुगतान किया गया परन्तु  पीड़ित श्रमिको का भुगतान ही क्यों रोक दिया गया ? परिवृत के रेंजर अथवा प्रभारी द्वारा इनके भुगतान में विलंब क्यो किया गया ? इससे यह भान होता है कि या तो परिक्षेत्राधिकारी अथवा प्रभारी भी हेमलाल साहू के राजनीतिक कद से प्रभावित होकर उनसे भय खाते है तथा वे वन विभाग की नही बल्कि कथित समर्थक हेमलाल साहू की नौकरी करते है तभी उनके कथनानुसार उनके राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित होकर मुख्यालय के आदेश की धज्जियां और अवहेलना कर उनके कहे अनुसार चल रहे है  और उनके शिकायत पर श्रमिकों का पारिश्रमिक भुगतान रोक दिया गया  ऐसा लगता है कि नवापारा परिवृत वन विभाग को वन विभाग अधिकारी, कर्मचारी नही बल्कि हेमलाल साहू जैसे छूट भैया नेता संचालन कर रहे है और कर्मचारी ऐसे  नेताओं की जी हुजूरी में लगे हुए है जबकि पीड़ित पक्षों का कथन है कि वे विगत दस वर्षों से दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के रूप में वन विभाग में कार्यरत है तथा उनके द्वारा आरोप है कि हेमलाल साहू द्वारा कई वर्षों से तथाकथित नेतागिरी की आड़ में फर्जी मानवदिवस अंकित करवा तथा वाउचर बनवाकर अपने कृपा पात्र लोगों को लाभ दिलवा रहा है यही नही उसकी पत्नी राजेश्वरी साहू जो स्वयं विभाग में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी है उसके द्वारा विभाग की गोपनीय जानकारी भंग कर अपने पति के माध्यम से सूचना के अधिकार लगवाकर या स्वयं हेमलाल साहू द्वारा विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के साथ गलबहियां दोस्ती बनाकर अनेक महत्वपूर्ण जानकारी निकलवा मैदानी और विभागीय कर्मचारियों से आर्थिक लाभ उठाता है पीड़ितों का कथन है कि शीघ्र हेमलाल साहू पर एफ़ आई आर दर्ज करने की बात भी कही जा रही है जबकि पीड़ित पक्ष का कहना है कि जो व्यक्ति कभी वन विभाग में कार्य नही किया वही हमारे ऊपर दोषारोपण कर हमें फर्जी कर्मचारी बता लिखित में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष पत्र लिख कर उन्हें गुमराह कर हमारे विरुद्ध जाकर वेतन को रुकवाया है उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत पत्र लिख कर दी है और  इसकी पड़ताल कर दोषीयों पर कार्यवाही करने की मांग की है यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि यदि इसकी सूक्ष्मता से जांच की जाती है तो अनेक फर्जीवाड़ा का पर्दाफाश होगा तथा इसमे कई अधिकारी पर गाज गिर सकती है तथा दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है

मंगलवार, 1 दिसंबर 2020

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दैनिक वेतनभोगी मंतोष का कौन बनेगा करोड़पति में हुआ चयन3 दिसंबर को होगा प्रसार 3 दिसंबर को होगा प्रसारण

 छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दैनिक वेतनभोगी मंतोष का कौन बनेगा करोड़पति में हुआ चयन

3 दिसंबर को होगा प्रसार 3 दिसंबर को होगा प्रसारण 



तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी अखबार

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर जिले के तिफरा नगर में एक छोटा सा होटल का संचालन करने वाले गरीब परिवार का युवा आज सदी के महानायक अमिताभ बच्चन द्वारा सोनी टीवी में प्रसारित कौन बनेगा करोड़पति के 12 वे सीजन में हॉट सीट पर अमिताभ बच्चन के सवालों का जवाब देंगे । यह युवक कोई और नहीं बल्कि तिफरा जोन कमिश्नर कार्यालय के सामने झुग्गी झोपड़ी में होटल संचालन करने वाले मंतोष कश्यप हैं जो आज दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रुप में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में भृत्य के पद पर कार्यरत हैं । 

 बिलासपुर शहर से लगे तिफरा  नगर के विद्युत नगर निवासी मंतोष कश्यप के जीवनी पर प्रकाश डाले तो वे बचपन से ही संघर्ष करते आ रहे हैं ।जब ये छ सात साल के बाल्यावस्था में थे तब  इनके पिता  केजूराम कश्यप का निधन हो गया था और मां नानबाई कश्यप का साल भर पूर्व निधन हो गया इनकी माता दिवंगत नानबाई ने अपने दो पुत्र और एक पुत्री का लालन - पालन झुग्गी झोपड़ी में रहते हुए किया और आज ग्रेजुएशन तक शिक्षित मंतोष कश्यप ने सोनी टीवी में प्रसारित होने वाले कौन बनेगा करोड़पति में पिछले छ सालों के प्रयास के बाद अब उनका चयन हुआ   आने वाले 03 दिसम्बर 2020 को सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर बैठकर सवालों का जवाब देते नजर आयेंगे । इनके इस कार्यक्रम में चयन होने से तिफरा नगरवासियों का ही नहीं बल्कि हाईकोर्ट में जश्न का माहौल बना हुआ है । निश्चित रुप से मंतोष कश्यप ने जिस संघर्ष के साथ इस मुकाम को पाया हैं उससे आज के युवाओं को प्रेरित होना चाहिए और मंतोष जैसे गरीब परिवार का युवक अपनी बलभूते

और प्रतिभा से यह मुकाम हासिल किया हैं जो आज की पीढ़ी के लिए अनुकरणीय मिसाल है 


 धरम ने जताया हर्ष

वहीं इस संबंध में सर्वव्यापी ने क्षेत्रीय विधायक व छत्तीसगढ़ विधानसभा के  नेता प्रतिपक्ष  धरम लाल कौशिक को इसकी जानकारी देने पर इन्होंने मंतोष कश्यप  द्वारा  कौन बनेगा करोड़पति में चयन होने पर हर्ष जताया हैं और कहा कि यह हमारे विधानसभा क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी बात हैं ।


 जिले को किया  गौरान्वित सारांश

वहीं बिलासपुर कलेक्टर डॉ.सारांश मित्तर ने सर्वव्यापी से चर्चा करते हुए कहा कि तिफरा नगर के मंतोष कश्यप ने कौन बनेगा करोड़पति में चयन होने से जिले को गौराविन्त किया गया हैं ,जो हमारे लिए हर्ष की बात हैं ।

शुक्रवार, 7 अगस्त 2009

अलबेले कलाकार थे भगवान दादा

भगवान दादा ऐसे अलबेला सितारे थे, जिनसे महानायक अमिताभ बच्चन सहित आज की पीढ़ी तक के कई कलाकार प्रभावित और प्रेरित हुए। इन कलाकारों के अभिनय और खास तौर पर डांस के स्टेप्स में भगवान दादा की छाप साफ नजर आई।
भगवान दादा का जीवन और फिल्मी करियर जबरदस्त उतार चढ़ाव से भरा रहा लेकिन यह कलाकार सिनेमा के इतिहास में अपनी खास जगह रखता है। एक मिल के श्रमिक के घर एक अगस्त 1913 को पैदा हुए भगवान दादा यानी भगवान आभाजी पालव की आंखों में बचपन से फिल्मों के रूपहले परदे का सम्मोहन था। उन्होंने अपने जीवन की शुरूआत श्रमिक के रूप में की लेकिन फिल्मों के आकर्षण ने उन्हें उनके पसंदीदा स्थल तक पहुंचा दिया। भगवान मूक फिल्मों के दौर में ही सिनेमा की दुनिया में आ गए। उन्होंने शुरूआत में छोटी-छोटी भूमिकाएं की। बोलती फिल्मों का दौर शुरू होने के साथ उनके करियर में नया मोड़ आया। भगवान दादा के लिए 1940 का दशक काफी अच्छा रहा। इस दशक में उन्होंने कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं की। इन फिल्मों में बेवफा आशिक, दोस्ती, तुम्हारी कसम, शौकीन आदि शामिल हैं। अभिनय के साथ ही उन्हें फिल्मों के निर्माण निर्देशन में भी दिलचस्पी थी। उन्होंने जागृति मिक्स और भगवान आटर््स प्रोडक्शन के बैनर तले कई फिल्में बनाई जो समाज के एक वर्ग में विशेष रूप से लोकप्रिय हुई। इन फिल्मों में मतलबी, लालच, मतवाले, बदला आदि प्रमुख है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी अधिकतर फिल्में कम बजट की तथा एक्शन फिल्में होती थी।
भगवान दादा की फिल्मों में गहरी समझ तथा प्रतिभा को देखते हुए राजकपूर ने उन्हें सामाजिक फिल्में बनाने की राय दी। भगवान ने उनके मशवरे को ध्यान में रखते हुए अलबेला फिल्म बनाई। इसमें भगवान के अलावा गीता बाली की प्रमुख भूमिका थी। इस फिल्म के संगीतकार सी रामचंद्र थे और उन्होंने ही इसमें चितलकर के नाम से पा‌र्श्व गायन भी किया। अलबेला फिल्म अपने दौर में सुपर हिट रही और कई स्थानों पर इसने जुबिली मनाई। इस फिल्म के संगीत का जादू सिने प्रेमियों के सर चढ़ कर बोला। इसका एक गीत शोला जो भड़के दिल मेरा धड़के.. आज भी खूब पसंद किया जाता है। अलबेला के बाद भगवान दादा ने झमेला और लाबेला बनाई लेकिन दोनों ही फिल्में नाकाम रहीं और उनके बुरे दिन शुरू हो गए। कर्ज से बेहाल भगवान दादा को बाद में अपना बंगला और गाडि़यां बेचनी पड़ीं और रहने के लिए चाल की शरण लेनी पड़ी।
कभी सितारों से अपने इशारों पर काम कराने वाले भगवान दादा का करियर एक बार जो फिसला तो फिर फिसलता ही गया। आर्थिक तंगी का यह हाल था कि उन्हें आजीविका के लिए चरित्र भूमिकाएं और बाद में छोटी-मोटी भूमिकाएं करनी पड़ी। बदलते समय के साथ उनके मायानगरी के अधिकतर सहयोगी उनसे दूर होने लगे। सी रामचंद्र, ओम प्रकाश, राजिन्दर किशन जैसे कुछ ही मित्र थे जो उनके बुरे वक्त में उनसे मिलने चाल में भी जाया करते थे। हिन्दी सिनेमा में अभिनय और नृत्य की नई इबारत लिखने वाला यह कलाकार चार फरवरी 2002 को 89 साल की उम्र में अपना दर्द समेटे हुए बेहद खामोशी से इस दुनिया को विदा कह गया।

अलबेले कलाकार थे भगवान दादा

हिन्दी फिल्मों में नृत्य की एक विशेष शैली की शुरूआत करने वाले भगवान दादा ऐसे अलबेला सितारे थे, जिनसे महानायक अमिताभ बच्चन सहित आज की पीढ़ी तक के कई कलाकार प्रभावित और प्रेरित हुए। इन कलाकारों के अभिनय और खास तौर पर डांस के स्टेप्स में भगवान दादा की छाप साफ नजर आई।
भगवान दादा का जीवन और फिल्मी करियर जबरदस्त उतार चढ़ाव से भरा रहा लेकिन यह कलाकार सिनेमा के इतिहास में अपनी खास जगह रखता है। एक मिल के श्रमिक के घर एक अगस्त 1913 को पैदा हुए भगवान दादा यानी भगवान आभाजी पालव की आंखों में बचपन से फिल्मों के रूपहले परदे का सम्मोहन था। उन्होंने अपने जीवन की शुरूआत श्रमिक के रूप में की लेकिन फिल्मों के आकर्षण ने उन्हें उनके पसंदीदा स्थल तक पहुंचा दिया। भगवान मूक फिल्मों के दौर में ही सिनेमा की दुनिया में आ गए। उन्होंने शुरूआत में छोटी-छोटी भूमिकाएं की। बोलती फिल्मों का दौर शुरू होने के साथ उनके करियर में नया मोड़ आया। भगवान दादा के लिए 1940 का दशक काफी अच्छा रहा। इस दशक में उन्होंने कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं की। इन फिल्मों में बेवफा आशिक, दोस्ती, तुम्हारी कसम, शौकीन आदि शामिल हैं। अभिनय के साथ ही उन्हें फिल्मों के निर्माण निर्देशन में भी दिलचस्पी थी। उन्होंने जागृति मिक्स और भगवान आटर््स प्रोडक्शन के बैनर तले कई फिल्में बनाई जो समाज के एक वर्ग में विशेष रूप से लोकप्रिय हुई। इन फिल्मों में मतलबी, लालच, मतवाले, बदला आदि प्रमुख है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी अधिकतर फिल्में कम बजट की तथा एक्शन फिल्में होती थी।
भगवान दादा की फिल्मों में गहरी समझ तथा प्रतिभा को देखते हुए राजकपूर ने उन्हें सामाजिक फिल्में बनाने की राय दी। भगवान ने उनके मशवरे को ध्यान में रखते हुए अलबेला फिल्म बनाई। इसमें भगवान के अलावा गीता बाली की प्रमुख भूमिका थी। इस फिल्म के संगीतकार सी रामचंद्र थे और उन्होंने ही इसमें चितलकर के नाम से पा‌र्श्व गायन भी किया। अलबेला फिल्म अपने दौर में सुपर हिट रही और कई स्थानों पर इसने जुबिली मनाई। इस फिल्म के संगीत का जादू सिने प्रेमियों के सर चढ़ कर बोला। इसका एक गीत शोला जो भड़के दिल मेरा धड़के.. आज भी खूब पसंद किया जाता है। अलबेला के बाद भगवान दादा ने झमेला और लाबेला बनाई लेकिन दोनों ही फिल्में नाकाम रहीं और उनके बुरे दिन शुरू हो गए। कर्ज से बेहाल भगवान दादा को बाद में अपना बंगला और गाडि़यां बेचनी पड़ीं और रहने के लिए चाल की शरण लेनी पड़ी।
कभी सितारों से अपने इशारों पर काम कराने वाले भगवान दादा का करियर एक बार जो फिसला तो फिर फिसलता ही गया। आर्थिक तंगी का यह हाल था कि उन्हें आजीविका के लिए चरित्र भूमिकाएं और बाद में छोटी-मोटी भूमिकाएं करनी पड़ी। बदलते समय के साथ उनके मायानगरी के अधिकतर सहयोगी उनसे दूर होने लगे। सी रामचंद्र, ओम प्रकाश, राजिन्दर किशन जैसे कुछ ही मित्र थे जो उनके बुरे वक्त में उनसे मिलने चाल में भी जाया करते थे। हिन्दी सिनेमा में अभिनय और नृत्य की नई इबारत लिखने वाला यह कलाकार चार फरवरी 2002 को 89 साल की उम्र में अपना दर्द समेटे हुए बेहद खामोशी से इस दुनिया को विदा कह गया।

बुधवार, 5 अगस्त 2009

mahgi daal aur sasta chaval

दाल रोटी खाओ ...परभू के गुण गाओ ..ये गीत सुन के हर गरीब आदमी खुश होता था की चलो हम कम से कम इस देश में रहते हुए दाल रोटी नसीब तो हो ही जाती है मगर अब तो दिन -ब- दिन सुरसा की भांति बढ रही महगाई ने तो अब लोगों की दाल भी पतली कर रखी है एक गरीब आदमी दिन भर की हाड़ तोड़ मेहनत के बाद कम से कम दाल रोटी का जुगाड़ तो कर ही लेता था मगर जिस दिन से दाल का भाव ९०....से १०० रूपये तक पहुँची है ये आम आदमी के पहुँच से दूर हो हो गई है वही हमारी सरकार ने अत्यन्त गरीब आदमी के लिए १ रूपये चांवल और मात्र गरीब के लिए दो किलो दाल तो कर दिया मगर वही आम आदमी के लिए दाल का भाव एकदम आसमान छूने से उसका बजट भी गडबडा दिया है इसके पीछे भी कई तर्क वितर्क पेश किए जा रहे है की गरीब और मजदूर तबका जो दिन भर की मेहनत के पश्चात् शम्म के मौसम में ५० से १०० रूपये मात्र दारू पिने में व्यय कर देता है मगर वह दाल खरीदने में ५० रूपये खर्च नही कर सकता ?क्यों ? वही अन्य लोगों का तर्क है की शासन ने गरीब परिवार के लिए यह सुविधा दी है जो काफी सराहनीय है परन्तु इसका साइड इफेक्ट अलग हो रहा है ....जो कम गार व्यक्ति था उसे जब मात्र १-२ रूपये मूल्य पर चावल और मुफ्त में नमक तथा २ रूपये में गेहूं मिल जाएगा तो वह कमाने ही क्यों जाएगा इस से लोगों में आलस्य पैदा हो रही है तथा अपने कार्यों के प्रति उदासीन हो गए है
वहीं दूसरा तर्क यह प्रस्तुत किया जाता है की एक और शासन ने गरीब वर्ग के उत्थान के लिए जन कल्याण कारी योजनाये बना इ है वह सराहनीय है परन्तु इसके साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए की इसका परभाव कहाँ तक कहाँ तक कारगर है एक और तो गरीब मजदूर तबके के उत्थान के लिए सरकार कतिबद्छ है वही सरकार इस आयोजन कों सफल बनाने में ऍम आदमी कों निशाना बना रही है यही कारन है की आज की दिन ब दिन बढ रही महंगाई जिसमे दाल भी एक महत्व पूर्ण आहार है कों ठीक कई गुना बड़ा कर शासन के नाक के नीछे बेचीं जा रही है वहीं व्यापारियों का तर्क यह है की अन्य परदेशों से आयातित दालों का उत्पादन कम हुआ है जिसकी वजह से दालों के रेट में कई गुना इजाफा हुआ है
अब सरकार कों चाहिए की इस तरह दिन ब दिन बढ रही महंगाई कों मद्दे नज़र रखते हुए कम से कम दालों के रेट में अंकुश लगाये ताकि आम आदमी इसका उपयोग सही दंग से कर सके ताकि देश के ऐसे आम तबका कम से कम आर्थिक रूप से टूटने से बच जाए ..जहाँ गरीबों कों १ रूपये चावल और दो रूपये में गेंहू पर्दान किया जा रहा है उसी तरह ऍम आदमी का बजट का ख्याल रखते हुए कुछ रियायत पर्दान की जानी चाहिय और रहा गरीबों का चावल और गेहूं तो उसका वितरण प्रणाली में व्यापक सुधर की आवश्यकता है क्युकी यदि इस तरह का वितरण पर्नाली जारी रहा तो वाकई में एक दिन परदेश की आध्ही जनता आलस्य हो जायेगी और काम धाम से किसी कों कोई वास्ता नही रहेगा इस और शासन का ध्यान आकर्षित किए जाने की आवश्यकता है.......

मंगलवार, 4 अगस्त 2009

kya doctor bhagvaan hote hai?????

toshi:
Kya doctor Bhagwan hoten hain????????? shayad nahi kyonki maine jo fill kiya usase to aisa laga ki we bhagwan nahi shaitan hoten hain. mere papa ka aaj 11 baje ek truck accident hua jisme unke hath ki haddi ke do tukde ho gaye, 04 pasliyan tut gayi aur pair fracture ho gaya unhe RKC Raipur ke samne ke Agrawal Nursing Home me bharti karaya gaya janha ek juniar doctor ne unki patti ki aur we senior doctor ka 06 ghante tak intjar karte rahe papa dard se tadapte rahe aur aaj rat ko 9 baje unhe agrawal nursing home se discharge kar diya yah kah kar ki hamare yanha Orthopedic surgon nahi aate?????? bad me unhe Khemka Hospital me bharti kiya gaya aur 08:30 baje unka ilaj shuru ho paya. Dhanya hai Agrawal Nursiong Home ke doctor aur vanha ka management...........bhagwan na kare kal aap ko ya kisi bhi ko aisi taklif se gujrana pade isliye apne pure circle ke logon ko scrap karke aur blog ke dwara bataiye ki doctor bhagwan nahi hote we sadharan insan se bhi gayebite janwar hote hain...............pade http://patrakaronkiaawaz.blogspot.com/