गुरुवार, 6 अप्रैल 2023

प्रभु श्री राम के ननिहाल में कृष्ण कुंज (वाटिका)का निर्माण

 प्रभु श्री राम के ननिहाल में कृष्ण कुंज (वाटिका)का निर्माण 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभु श्री राम का ननिहाल माना जाता है उन्होंने अपने चौदह वर्ष का वनवास काल का बड़ा समय यही छग के वनक्षेत्रों में गमन करते हुए व्यतीत किया है इसी छत्तीसगढ़ प्रदेश में शबरी के झूठे बेर भी खाए है यही चंदखुरी में माता कौशल्या का भव्य मंदिर भी विकसित किया गया है प्रदेश के जिस वन क्षेत्रों से  प्रभु श्री राम का गमन हुआ था उन रास्तों में छग शासन ने राम वन गमन पथ पर वृक्षारोपण करके उन्हें आकर्षक स्वरूप प्रदान किया  है यह सब छग शासन वन विभाग के द्वारा राम वन गमन पथ रोपण कार्य संपादित कर हरियाली की सौगात राम भक्तों सहित प्रदेश भर के निवासियों को दिया गया जहां रोपित पौधे अब हरे भरे वृक्ष का आकार लेकर अपनी बढ़त बनाकर क्षेत्र में हरियाली आभा प्रसार कर रहे है अब छग प्रदेश में जहां प्रभु श्री राम वन गमन पथ रोपण,तथा  चंदखुरी में माता कौशल्या का आकर्षक मंदिर की बात किया जाए वहां प्रभु श्री कृष्ण का उल्लेख न हो यह असंभव है क्योंकि दोनों भगवान का अवतरित स्वरूप भी तो एक ही है फर्क केवल यह है कि प्रभु श्री राम  काल खंड में रामायण लिखी गई और प्रभु श्री कृष्ण काल खंड में महाभारत की रचना हुई परंतु कलयुग के आज  में किसी अन्याय,अधर्म के विरुद्ध कोई इतिहास बनाना नही बल्कि  कलयुग में पृथ्वी पर प्रकृति और पर्यावरण का जो लगातार हास्,विदोहन हुआ है वह भी प्रकृति पर किसी अन्याय अत्याचार  से कमतर नही है जो पर्यावरण प्रकृति के अस्तित्व के संरक्षण संवर्धन कर एक इतिहास लिखना है


यह पुनीत कार्य छग वन विभाग नित नई नई योजनाओं के माध्यम से कर रहा है क्योंकि देखा यह जा रहा है कि लगातार हरे भरे वृक्षों का विदोहन कर मानव स्वयं के जीवन को धर्म संकट में डालता जा रहा है  लगातार घटते वन क्षेत्र के मध्य बढ़ते प्रदूषण और मानव का लगातार जहरीली हवाओं से संपर्क के कारण मानव का जीवन शनैः शनैः असमय मृत्यु की ओर बढ़ रहा है   केवल ईश्वरीय रूपी पेड़ पौधों, प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण संवर्धन के साथ ही मानव जीवन की सुरक्षा की जा सकती है असंतुलित जलवायु एवं परिवर्तित होते  वातावरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से धार्मिक आस्था और भगवान के नाम का सहारा लेते हुए पेड़ पौधों का रोपण करना वन विभाग का मुख्य लक्ष्य बन चुका है 



इससे धार्मिक आस्था के साथ भगवान के लीला काल से जुड़ी पेड़ पौधों का संरक्षण के साथ ही उजड़े पड़त बंजर भाटा भूमि में हरियाली की बयार बहा कर मानव जीवन और परिवर्तित होते जलवायु को संतुलित किया जा सके तथा संपूर्ण पृथ्वी के प्रकृति,पर्यावरण, जलवायु,जीव जंतु और समूल मानव जीवन की सुरक्षा की जा सके इसके लिए प्रदेश की कॉग्रेस सरकार वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ मिलकर पेड़ पौधों से आच्छादित प्रकृति,पर्यावरण के सुरक्षा हेतु ईश्वरीय धर्म आस्था का सहारा लेते हुए जन जागरूकता सहित जन भागीदारी के साथ अनेक योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कर यथार्थ की धरा पर उतारा है जिसके दूरगामी परिणाम अब शनैः शनैः परिलक्षित हो रहे है इसी क्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश के भिन्न भिन्न क्षेत्रों में जो प्रभु श्री राम का ननिहाल के रूप में जाना जाता है वहां के पूर्व काल के वृन्दावन सदृश्य क्षेत्र जो अब पठारी,बंजर स्थल के स्वरूप में पहुंच चुके है जहां लगातार पेड़ पौधों के विदोहन के कारण बहुत से क्षेत्र चटियल भूभाग बन चुके है ऐसे क्षेत्रों का चयन कर उक्त स्थल मे प्रभु श्री कृष्ण के बाल रास लीला जैसे प्रतीकात्मक पेड़ पौधों का रोपण कर कृष्ण कुंज  (वाटिका)का निर्माण द्रुत गति से किया जा रहा है जो प्रदेश भर के ग्राम पंचायतों,नगरीय,शहरी क्षेत्र  में पड़त भाटा भूमि को चिन्हित कर दो,तीन और पांच एकड़ के वृहद भूभाग में धार्मिक एवं संस्कृति से जुड़े पेड़ पौधों का  सफल रोपण किया गया है जो हरियाली प्रसार में क्रांतिकारी पहल के रूप में देखा जा रहा है वन विभाग को छोटे स्तर पर किए गए रोपण और उसके मिल रहे  



  सफलता और परिणाम ने महत्वाकांक्षी योजना कृष्ण कुंज(वाटिका) अब आम जन के लिए धार्मिक आस्था के साथ द्वापर युग का अहसास करा रहा है तथा अब आम जन भी उन पौधों की सुरक्षा के साथ स्कूल मजविद्यालय के छात्र छात्राओं के शोध करने का क्षेत्र भी निर्मित हो रहा है यही नही बढ़त बनाए पैदुओं के हरियाली क्षेत्र ऊवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है तथा लोग हरित प्रकृति वातावरण में सेल्फी लेकर यादगार पल को अपने कैमरे में कैद कर रहे है ऐसे मनोहारी दृश्य  का साक्षात उदाहरण नवा रायपुर वन परिक्षेत्र के आरंग के समोदा,चंदखुरी, अभनपुर,के बड़े उरला क्षेत्र  में दिख रहा है अभनपुर के बड़े उरला क्षेत्र में लगभग पांच एकड़ भूभाग में बारह सौ आस्थावान  पौधों का सफल रोपण किया गया है जो एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है इस संदर्भ में जब रायपुर वन मण्डलाधिकारी विश्वेश झा साहब से चर्चा की गई तब उन्होंने बताया कि कृष्ण कुंज का रोपण करने के पीछे मुख्य उद्देश्य पारंपरिक धार्मिक विरासत को सहेजना है तात्कालिक युग में प्रभु श्री कृष्ण कदम के पेड़ पर चढ़कर बंसूरी वादन किया करते थे जिससे गोपियाँ सहित गाय भी उनकी बांसुरी की लय पर मदमस्त हो जाते थे इसलिए प्रमुखता के साथ कदम,आंवला,नीम,पीपल बेल,जामुन,आम,जाम जैसे फलदार छायादार पौधों का रोपण किया गया है जो प्रदेश के बहुत से क्षेत्र से विलुप्त हो रहे थे ऐसे पौधों का संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से दो से पांच, हेक्टेयर तक छोटे छोटे स्थलों का चयन कर रोपण किया गया है जो सफल रोपण माना जा रहा है  


रायपुर डीएफओ विश्वेश झा ने आगे बताया रायपुर वन मंडल अंतर्गत लगभग दस चयनित स्थल क्षेत्र में कृष्णकुंज

(वाटिका) का निर्माण किया गया है वे अच्छी दशा में ग्रोथ कर रहे है जिनमे अभनपुर का बड़ा उरला क्षेत्र के ऑरेंज भूमि जो ड्राई एरिया कहलाता है वहां का कृष्ण कुंज की हरियाली इस तपती गर्मी में भी देखते ही बनती है बताते चले कि रायपुर वन मण्डलाधिकारी विश्वेश झा 2007 बैच के अधिकारी है तथा भावसे की नई जमात में वे सर्वाधिक सफल,झुझारू, कर्तव्यनिष्ठ,ईमानदार,कार्यों के प्रति निष्ठावान,प्रतिभाशाली अधिकारी के रूप में पहचाने जाते है छोटे से बड़े कर्मियों के प्रति बगैर दुर्भावना एवं समान भावना के साथ कार्यों को अंजाम देते है अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के सौंपे गए दायित्वों में किसी प्रकार का समझौता नही करते निर्माण कार्य हो अथवा रोपण कार्य हो बीच बीच मे स्वयं मॉनिटरिंग करने के अलावा अनुभवी एसडीओ विश्वनाथ मुखर्जी सहित परिक्षेत्राधिकारी  सतीश मिश्रा की निगरानी एवं उपस्थित में संपादित किया जाता है लगातार कार्यों की समीक्षा अवलोकन से कार्य मे भी कसावट एवं परिणाम गुणवत्ता युक्त आते है जो   मैदानी कर्मियों के प्रशंसा एवम, पीठ थपथपा कर, उन्हें प्रोत्साहित करने का सबब भी बनता है रायपुर वृत के अभनपुर सहित दस स्थलों में  कृष्ण कुंज योजना के सफल क्रियान्वयन विगत वर्षों में राम वन गमन पथ के रोपण सहित नरवा परियोजनाओं सुरक्षा की दृष्टिकोण से वन क्षेत्रों में तार फेंसिंग के साथ उनके संरक्षण ने वन मण्डलाधिकारी विश्वेश झा का कद और बढ़ाया है  रायपुर वन मंडल कार्यालय में अपने सेवा काल मे अनेक लोकहित, जन कल्याणकारी वनों के संरक्षण,संवर्धन में अनेक  कार्यों की फेहरिस्त उनके नाम दर्ज हो चुकी है  जिससे रायपुर वृत की दशा और दिशा में काफी परिवर्तन देखा जा रहा है मैदानी अमला भी उनके कार्यशैली,कुशाल,कसावट  प्रशासनिक व्यवस्था  से काफी प्रभावित है तथा  मुक्त कंठ से उनकी प्रशंसा किए बगैर नही थकते वही  अनुभवी एस.डी.ओ. विश्वनाथ मुखर्जी भी उनके सहयोगी के रुप में जाने जाते है जिनके लंबे अनुभव का लाभ उन्हें और मैदानी कर्मचारियों को समय समय पर  मिलता रहता है जबकि वे भी कार्यों की गुणवत्ता,व्यवस्था,की बराबर मॉनिटरिंग हेतु  


वन क्षेत्रों का भ्रमण करते रहते है तथा सही दिशा निर्देश और मार्गदर्शन देकर कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते है योजना के रोपण अथवा निर्माण कार्यों के सफल क्रियान्वयन हेतु मुख्य सूत्रधार क्षेत्र का परिक्षेत्राधिकारी होता है जो अपने लंबे अनुभव तथा कार्यशैली से अपनी छवि,व्यक्तित्व, विकसित करता है वैसे भी नवा रायपुर रेंजर सतीश मिश्रा एक सुलझे हुए, परिपक्व,सदैव सहकर्मियों के हितार्थ खड़े रहने वाले अनुभवी अधिकारी के रूप में जाने जाते है तथा लगातार छग प्रदेश कर्मचारी संघ, के अलावा अखिल भारतीय वन अधिकारी संघ में पांच वर्षों से राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व निभा रहे है रायपुर रेंजर सतीश मिश्रा की राष्ट्रीय स्तर की  राजनीति में उनकी अच्छी खासी दखल है 
मजेदार बात यह है कि छग प्रदेश कर्मचारी संघ के छ बार अध्यक्ष लगातार निर्विरोध चुने गए तथा 18 वर्षों तक कार्य करते रहे वन रक्षक पद से कांकेर वन मंडल से वर्ष 1984 उत्पादन से दैनिक वेतन भोगी कर्मी के रूप में अपनी सेवा प्रारंभ करने वाले श्री सतीश मिश्रा का वर्ष 1989 में स्थायीकरण हुआ वे लगातार अपने सहयोगी,वन कर्मियों की मांग के लिए सदैव आवाज़ उठाते रहे है जहां एक ओर सहयोगी वन कर्मियों के अधिकार के लिए आवाज़ बुलंद करते रहे है वही दूसर ओर मैदानी क्षेत्र में संपादित  रोपण,निर्माण, अथवा योजनान्तर्गत  कार्यों के प्रति सदैव कठोर रहते है







 यही वजह है कि अभनपुर के प्रभारी गिरीश रजक, चंदखुरी के प्रभारी शिव चन्द्राकर, आरंग के डिप्टी लोकनाथ ध्रुव,अपने अपने क्षेत्र में सदैव क्रियाशील रहते है तथा वे भी मोबाइल के अलावा कार्य स्थल कृष्णकुज वृक्षारोपण  निर्माण में पूरी तत्परता से कार्यों को अंजाम दिया है उपरोक्त विभागीय कर्मचारियों की वजह से रायपुर वन मंडल परिक्षेत्र में लगभग दस कृष्णकूंज वृक्षारोपण कार्य संपादित हुआ है आज भी वे सदैव उन्हें मॉनिटरिंग कर जायजा लेते देखा जा सकता है  जिसके परिणाम स्वरूप सभी स्थलों के कृष्ण कुंज आज आम जन के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बने हुए है नवा रायपुर परिक्षेत्राधिकारी सतीश मिश्रा ने बताया कि तीनो ही स्थलों में  लोहे और तारों की फेंसिंग कराई गई है ताकि गाय गरुआ,जानवरो की चराई से रोपण क्षेत्र सुरक्षित रह सके उन्होंने बताया कृष्ण कुंज प्रभु श्री कृष्ण के बाल्य काल के नटखट बाल क्रीड़ा, से संलग्न अवस्था,एवं पारंपरिक,पेड़ पौधों से जोड़ा गया है तथा उन्ही पेड़,पौधों का रोपण किया गया जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है  जिनमे,कदम,बेल,पीपल,जाम आम,जामुन के नाम उल्लेखित है


कृष्णकुंज को आकर्षक स्वरूप बनाने के उद्देश्य से श्री कृष्ण भगवान की  विभिन्न मुद्राओं के चित्र उकेरे गए है जो चित्ताकर्षक लगते है तथा आस्था से शीश नवाने देखा जा सकता है  नवा रायपुर परिक्षेत्राधिकारी  सतीश मिश्रा आगे बताते है कि पांच स्थल के कृष्ण कुंज निर्माण में लगभग पन्द्रह लाख से ऊपर लागत लग गया है  जो नवा रायपुर अटल नगर में उनके कार्यकाल में जितने भी,उल्लेखित पथ रोपण,ब्लॉक रोपण, कार्य संपादित हुए है उनमे अभनपुर,आरंग,एवं, चंदखुरी का कृष्ण कुंज (वाटिका)भी एक है वही रायपुर परिक्षेत्र में तेली बांधा चौक के समीप निर्मित  कृष्ण कुंज में लगभग 1200 से उपर मिश्रित प्रजाति के पौधों का रोपण किया गया है इस संदर्भ में रायपुर के परिक्षेत्राधिकारी साधे लाल बंजारे ने बताया कि राजधानी रायपुर  शहर के मध्य एक मात्र कृष्णकुंज तेलीबांधा चौक के रिक्त भूमि पर माननीय मुख्य मंत्री एवं शासन के विधायक मंत्री सहित वन विभाग के उच्च अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ था वही प्रभारी डिप्टी दीपक तिवारी ने बताया कि शहर के मध्य निर्मित कृष्ण कुंज शहर वासियों को सौगात है इसके निर्माण से आसपास उठते धूल और प्रदूषण से लड़ने प्रकृति रूप से एक हथियार मिल गया है  और समस्त मानव के स्वास्थ्य गत दृष्टिकोण से भी यह शुद्ध ऑक्सीजन देने कारगर साबित होगा प्रारंभिक चरण में इसकी संपूर्ण देखरेख,सुरक्षा के उपाय किए गए है चारों ओर तार फेंसिंग से कव्हर किए गए है ताकि पेड़ पौधों को किसी भी हानि से बचाया जा सके प्रभारी दीपक तिवारी ने आगे बताया है कि इस प्रकार के कृष्ण कुंज (वाटिका) खरोरा सहित अन्य स्थलों में निर्माण किए गए है जिसके रोपण से भविष्य में हरियाली की ओर क्रन्तिकारी परिवर्तन दिखाई देगा और समस्त मानव जीवन के लिए हितकारी साबित होगा वही डीएफओ विश्वेश झा साहब का कथन है कि कृष्ण कुंज निर्माण दो एकड़ भुभाग से लेकर पांच हेक्टेयर ऑरेंज, पड़त भाटा, बंजर भूमि का चयन कर  रोपण करने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है जिससे दो प्रकार के लाभ होंगे एक ऐसे पड़त बंजर भूमि स्थलों को अतिक्रमण से बचाया जा सकेगा वही दूसरी ओर लगातार घट रहे वन और हरियाली से बढ़ते प्रदूषण की मार सीधे मानव जीवन पर असर छोड़ रही है लगातार प्रदूषण से ओजोन परत का छिद्र बढ़ रहा है गैलिशियर पिघल रहे है जलवायु परिवर्तन हो रही है हमारा उद्देश्य ऐसे छोटे छोटे कृष्ण कुंज निर्माण कर भावी पीढ़ी को शुद्ध ऑक्सीजन, स्वच्छ वातावरण देकर उन्हें हरियाली का सुखद अनुभव करवाना है ताकि आम जन बेहतर माहौल में परिवार के स्वस्थ्यपूर्ण जीवन की परिकल्पना को साकार कर सके 

हनुमान जन्मोत्सव के पावन पर्व पर लाहोटी निवास में विशाल भंडारा भजन कार्यक्रम

 हनुमान जन्मोत्सव के पावन पर्व पर लाहोटी निवास में विशाल भंडारा भजन कार्यक्रम



रायपुर आज राजधानी रायपुर में प्रभु श्री राम भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया चारो ओर हनुमान चालीसा के 

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

जय कपीस तहूँ लोक उजागर

राम दूत अतुलित बल धामा

अंजनी पूत्र पवनसुत नामा 

जाप साउंड में गूंज रहे थे तथा महावीर हनुमान जी के भक्त और श्रद्धालु उनके  जन्म दिवस को हर्षोउल्लास के साथ मनाते हुए जगह जगह आम भंडारा प्रसादी का आयोजन किया था जहां सभी स्थलों में हनुमान भक्तों ने लाइन लगकर प्रसादी भंडारे का लाभ उठाया वही सुप्रसिद्ध समाज सेवी एवं हनुमान भक्त लक्ष्मी नारायण लाहोटी ने महामाया मंदिर के समीप स्थित अपने निवास स्थल के समक्ष विशाल भंडारे का आयोजन किया जिसमें प्रातःकाल ईश्वरीय आराधना और पूजा कर्मकांड के पश्चात बारह बजे से भंडारे प्रसादी वितरण का कार्य प्रारंभ हुआ देखते ही देखते लंबी लाइन लग गई तथा हनुमान भक्तो ने श्रद्धा पूर्वक भंडारे प्रसाद को ग्रहण किया इस अवसर पर समाजसेवी लक्ष्मी नारायण लाहोटी ने बताया कि वे एवं उनका परिवार विगत तीन वर्षों से लगातार हनुमान जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम और श्रद्धा के साथ मना रहे है तथा पांच हजार से ऊपर श्रद्धालु भंडारा प्रसादी का लाभ उठा रहे है उन्होंने बताया यह आयोजन उनकी धर्म पत्नी  श्रीमती कृष्णा लाहोटी के प्रोत्साहन और मार्गदर्शन में स्व. बाला राम.लाहोटी एवं माता स्व.जिया बाई लाहोटी के स्मृति को अक्षुण्य बनाए रखने आयोजन किया जाता है



 इस विशेष अवसर पर पुरानी बस्ती महामाया मंदिर के समक्ष लाहोटी निवास में कराओके जगत से जुड़ी बहुत सी प्रतिभाएं गायक डायरेक्टर,  उपस्थित होकर कराओके सिस्टम में भजन की प्रस्तुति दी जिसे सुनकर हनुमान भक्त लगातार झूमते रहे इधर समाजसेवी लक्ष्मी नारायण लाहोटी मुख्य द्वार पर आगन्तुकों का स्वागत तिलक लगाकर बूंदी प्रसाद देकर करते रहे इस अवसर पर बहुत से गणमान्य नागरिक,कला साहित्य जगत से जुड़ी हस्तियां अपनी गरिमामयी उपस्थिति देकर प्रसादी,भजन आयोजन को प्रभु श्री राम और श्री हनुमान मय से सराबोर कर दिया कार्यक्रम अनवरत संध्या सात बजे तक चलता रहा 

शनिवार, 25 मार्च 2023

रवि शंकर शुक्ल वार्ड में दो बोर उत्खनन की सौगात से वार्ड वासियों ने पार्षद आकाश तिवारी का आभार जताया

 रवि शंकर शुक्ल वार्ड में दो बोर उत्खनन की सौगात से वार्ड वासियों ने पार्षद आकाश तिवारी का आभार जताया

अलताफ हुसैन द्वारा

रायपुर आसन्न ग्रीष्म ऋतु एवं विकराल पेयजल की समस्या  को ध्यान में रखते हुए पंडित रवि शंकर शुक्ल वार्ड के पार्षद एवं एम आई सी सदस्य आकाश तिवारी ने धोबी पारा और नूरानी चौक में बोर उत्खनन का शुभारंभ नरियल फोड़ कर किया इस अवसर पर रवि शंकर शुक्ल वार्ड के नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे जिन्होंने बताया कि वार्ड में ग्रीष्म ऋतु में विकराल पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती थी जिसके लिए पानी टैंकर सहित अन्य वैकल्पिक साधनों से पूर्ति की जाती थी 

परंतु वार्ड के युवा जुझारू एवं संवेदन शील पार्षद ने वार्ड वासियों की समस्या के त्वरित निराकरण के लिए दो प्रमुख स्थलों पर बोर खनन का कार्य शुभारंभ कर के भावी समस्या के निराकरण के लिए जनहितकारी पहल की है जिसके लिए समस्त वार्ड वासियों ने वार्ड पार्षद आकाश तिवारी के उल्लेखनीय कार्य हेतु उनका आभार व्यक्त किया है 

रविवार, 19 मार्च 2023

वविनि के बार परि. मंडल के डी. एम. द्वारा हिटलर शाही रवैय्ये से दो वन कर्मी हार्ट अटैक के शिकार तो कई डिप्रेशन में

  वविनि के बार परि. मंडल के डी. एम. द्वारा हिटलर शाही रवैय्ये से दो वन कर्मी हार्ट अटैक के शिकार तो कई डिप्रेशन में 

अलताफ हुसैन

रायपुर छग राज्य का सागौन काष्ठ से  सर्वाधिक राजस्व आय देने वाला बार परियोजना मंडल के वन विकास निगम कर्मचारी इस समय काफी दबाव और मानसिक प्रताड़ना की अवस्था से गुजर रहे है इसके लिए कार्यों की आपूर्ति बल्कि बार नवापारा परियोजना मंडल के प्रबंधक  रमन बी. सोमावार  के तुगलकी फरमान से त्रस्त है जिसकी शिकायत  सेवानिवृत्त प्रबंध संचालक एम. डी. पी.सी.पांडे से भी की गई परंतु उन्होंने भी कर्मचारियों,एवं अधिकारी द्वारा परस्पर सौहाद्र सहयोग ,समन्वय स्थापित कर कार्य किए जाने का आदेश देकर मामले को शांत करने का प्रयास किया था परंतु उनके सेवा निवृत्त   पश्चात रमन बी सोमावार पुनः अपने पुराने ढर्रे पर चलते हुए ढाक के वही पात वाली उक्ति को चरितार्थ करते हुए अधिकारी कर्मचारियों पर नित नए नए तुगलकी फरमान जारी कर उन्हें शारीरिक मानसिक और आर्थिक रुप से प्रताड़ित कर रहे है जिसकी वजह से वन विकास निगम बार नवापारा परियोजना मंडल के कर्मचारी बेहद खफा और त्रस्त हो चुके है यही नही बार नवापारा परियोजना मंडल के डी.एम. रमन बी. सोमावार के तुगलकी,और हिटलर शाही आदेश और प्रताड़ना के चलते तीन दिन तक बार परियोजना मंडल के वन कर्मचारी कलम बंद सांकेतिक हड़ताल भी कर चुके है इसके बावजूद बार प्रोजेक्ट के डी.एम. बी.रमन सोमावार की प्रताड़ना वाली कार्यशैली में कोई भी परिवर्तन नही हो पाया है 



    गौर तलब हो कि बार प्रोजेक्ट के डीएम  रमन बी. सोमावार रेग्युलर फॉरेस्ट में रेंजर पद पर क्रमोन्नति के तहत  बार प्रोजेक्ट के डी एम पद तक पहुंचे है जबकि तात्कालिक वन परिक्षेत्राधिकारी पद पर रहते हुए लगभग 267 लोगों की फर्जी प्रमाण पत्र में नौकरी करने की बात सामने आई थी जिसमे छग वन विभाग में पांच कर्मियों के नाम जो  विभिन्न पदों पर कार्यरत थे  जिनमें एक नाम रमन बी.सोमावार का भी था परन्तु उक्त प्रकरण में उन्हें विरुद्ध फर्जी जाति प्रमाण पत्र में क्लीन चिट प्राप्त हुई थी अथवा नही यह तो ज्ञात नही परंतु नियमानुसार ऐसे फर्जी जाति प्रमाण पत्र के तहत शासकीय सेवा देने वाले अधिकारी कर्मचारी आज भी उक्त प्रकरण में उलझे हुए जिनमे बहुत से शासकीय अधिकारी सहित पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी,अमित जोगी के नाम  को उदाहरण स्वरूप लिया जा सकता है यदि ऐसे प्रकरण में अब तक उन्हें क्लीन चिट नही मिली तो सवाल यह उठता है कि उनकी लगातार शासकीय सेवा में रहते हुए क्रमोन्नति किस आधार पर की गई यह जांच का विषय हो सकता है यह हम नही कहते बल्कि  आज से दो वर्ष पूर्व 2020 में एक  प्रकाशित समाचार पत्र इसकी पुष्टि करता है क्योंकि आज भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र की वजह से ही जोगी परिवार पूरी तरह से अस्त व्यस्त है ऐसी परिस्थिति मे डी.एम. रमन बी. सोमावार को किस नियम के आधार पर क्रमोन्नति मिली यह आश्चर्य का विषय है जबकि रेग्युलर फॉरेस्ट में वे संलग्न एसडीओ अधिकारी के रूप में भी रहे वही मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में भी अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दी परंतु ऐसा कौन सा अलाउद्दीन का चिराग उनके हाथ लगा कि बगैर जाति प्रमाण पत्र  जांच पड़ताल के उन्हें लगातार क्रमोन्नति मिलती गई तथा  सेवाकाल जीवन का संपूर्ण पद पॉवर का गाज स्थानीय बार परियोजना मंडल के निगम कर्मियों पर गिरा रहे है जिसकी रुदाली  गीत की चर्चा अब प्रदेश भर के वन विकास निगम कर्मीयो के मुख पर आ गई है और प्रदेश के सुदूर वन क्षेत्र में चर्चा के दरमियान उनके हिटलर शाही फरमान को लेकर तरह तरह की बाते सामने आ रही है   चर्चा में यह बात भी सामने आ रही है कि  बार प्रोजेक्ट के डीएम रमन बी सोमावार के कार्यकाल की अवधि छः माह के लगभग ही शेष है और वे इस प्रकार वन कर्मियों को शारीरिक और मानसिक रुप से प्रताड़ित कर अपने हिस्से में आने वाली राशि मे इजाफा करना चाहते है ताकि अधिक से अधिक रूप से धनार्जन किया जा सके तथा अंतिम कार्यकाल के अंतिम पड़ाव में जितना धन अर्जित कर समेटा जा सकता है समेट कर गठरी उठाकर बिदाई कर लिया जाए 

            उल्लेखनीय है कि छग राज्य वन विकास निगम अब केवल अधिकारियों कर्मियों का धन लूटने का चारागाह बन गया है क्योंकि जब छग राज्य मध्य प्रदेश के अधीन था तथा यहां तात्कालिक म प्र. वन विकास निगम के प्रथम मुखिया एस सी जेना साहब द्वारा राज्य को लाभांश राशि 27 करोड़ रुपये प्रदान करते थे   2001 के पश्चात  जब से छग राज्य वन विकास निगम अस्तित्व में आया तब से उक्त लाभांश राशि का ग्राफ गिरते गिरते वित्त वर्ष 2022 में तीन करोड़ 51 लाख के कांटे में अटक गया है अब सवाल उठता है कि स्व पोषित संस्था कॉर्पोरेशन होने में इसके लाभ में उत्तरोत्तर वृद्धि होनी चाहिए या अर्जित आय की राशि और पतन के साथ घटना चाहिए ? इससे यही ज्ञात होता है कि यहां जितने भी अधिकारी आए उन्होंने छग राज्य वन विकास निगम को भीतर ही भीतर नासूर की तरह खोखला करते चले गए और आज भी यह खेल अनवरत खेला जा रहा है यहां भोजराज जैन जैसे भ्रष्टासुर आज भी अंगद की पांव की तरह अपना पैर जमाकर बैठे हुए है और बड़े बड़े गड़बड़ घोटाला,फर्जीवाड़े, और भ्रष्टाचार को अंजाम देकर अधिकारियों को लाभ प्रदान तो कर ही रहे है साथ ही अपना चांदी का घरौंदा भी बना चुके है विचार करने वाली बात है कि प्रारंभिक सेवा  दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में अपनी सेवा देने वाले  भोजराज जैन धन का विशाल एम्पायर कैसे खड़ा कर लिया क्या कभी एसीबी वालों की नज़र ऐसे संविदा नियुक्त भ्रष्ट अधिकारी के ऊपर नही पड़ती ? बताया जाता है कि तीसरी बार संविदा नियुक्त करवा चुके भोजराज जैन की मासिक आय छग राज्य वन विकास निगम के प्रबंधक से भी अधिक है जो निगम में नई भर्ती और नौकरी लगाने के नाम,फर्जी प्रमाण पत्र से नियुक्ति के नाम,ऑडिट के नाम से नौ परियोजना मंडल के प्रत्येक वित्त कर्मियों,परिक्षेत्राधिकारीयों, से ऑडिट के नाम पर और सेटलमेंट कर लाखों की मांग,सहित अनेक गड़बड़ घोटाले,फर्जीवाड़े,भ्रष्टाचार में पर्दा डालने जैसे कार्यों के लिए ही इन्होंने संविदा नियुक्ति ले रखी है और अपने आकाओं को खुश करने के साथ साथ अपने भविष्य को भी सोने,चांदी की परत लगा कर  चमकदार बना चुके है उन्ही के नक्शे कदम पर चलने का प्रयास आरजीएम प्रभात मिश्रा एवं बार परि. मंडल के डिवीजन मैनेजर रमन बी.सोमावार भी कर रहे है परंतु उन्हें ज्ञात नही कि चाहे औद्योगिक या पंचायती प्लांटेशन हो निर्माण अथवा सामग्री क्रय का भ्रष्टाचार, हो  या फिर कूटरचित दस्तावेज हो इन सब मक्कड़ जाल में से निकलने का एक ही मूल मंत्र है वह है धन की चाबी जो केवल भोजराज जैन के मन्त्र से ही ताले खुलती है अतएव डीएम बार रमन बी.सोमवार सचेत हो जाए कि अपना अधिक पैसा अर्जित करने की लालसा के चलते वन विकास निगम कर्मियों पर अपनी खीज निकालने निरीह बेबस कर्मियों के साथ अपना आदेश का व्हाट्सएप व्हाट्सएप खेलने तथा हिटलर शाही रवैय्या को छोड़कर एक समन्वय बना कर चले नही तो सेवानिवृत्त के शेष इस छः माह के भीतर ऐसे उलझन में उलझ जाएंगे कि सेवानिवृत्त पश्चात  टी. ए. डी. ए. मैच्युरिटी फंड के निकालने में चप्पलें घिस जाएगी और रिकवरी जैसे प्रकरण सो अलग ? क्योंकि पुष्ट समाचार से यह भी ज्ञात हुआ है कि लगातार आदेश और काम के दबाव में दो निगम कर्मी जिनमे एंब्रोस एक्का रवान परिक्षेत्राधिकारी को बार्ट अटैक आ चुका है वही दूसरे  कार्यालयीन निगम कर्मी  धुरंदर को भी कार्यों के दबाव के चलते हार्ट अटैक आ चुका है जिससे बहुत से निगम कर्मी मानसिक रूप से अपना संतुलन खोकर अस्वस्थ्य हो चुके है यदि यही परिस्थिति रही तो वह दिन दूर नही जब इनके निगम में रहते हुए अब तक हुए सभी भ्रष्ट कार्यशैली के दस्तावेज परत दर परत खुलना शुरू न हो जाए क्योंकि छग वन विकास निगम के इस भ्रष्टाचार गड़बड़ घोटाला वाली काजल की काली कोठरी में रहकर अपने आप को कोई अधिकारी पाक साफ कैसे बचा सकता है ? यह उन्हें अपने विवेक से सोचना होगा 

गरियाबंद वन मंडल में नरवा परियोजना से बदली तस्वीर

 गरियाबंद वन मंडल में नरवा परियोजना से बदली तस्वीर 



अलताफ हुसैन

रायपुर गरियाबंद/ (छत्तीसगढ़ वनोदय) छत्तीसगढ़ प्रदेश की कॉंग्रेस सरकार ने वनों के  संरक्षण,संवर्धन में अनेक  महत्वांकाक्षी योजनाओं के माध्यम से कार्य किए है जिससे वनवासियों को रोजगार तो सुलभ होता ही है परन्तु इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में इनके सार्थक परिणाम अब परिलक्षित हो रहे है प्रारंभिक 2020-21एवं वर्ष 2021-22 में शासन की जन कल्याणकारी महती नरवा योजना को धरा में उतारते में अनेक शंकाओं को जन्म दे रहा था परन्तु  अब धीरे धीरे इसके सुखद,आशातीत,परिणाम सामने दिखने लगे है इसी क्रम में गरियाबंद  वन मण्डल अंतर्गत नरवा प्रोजेक्ट को लेकर छत्तीसगढ़ वनोदय पत्रिका ने गरियाबंद से मात्र दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित दसपूर वन ग्राम से लगे सघन वनक्षेत्र का भौतिक निरीक्षण किया जहां पर वर्ष 2020-21तथा वर्ष 2021-22 में संपादित विभागीय नरवा कार्यों का साक्षात निरीक्षण किया गया   जहाँ  पर बड़े तालाब उत्खनन पश्चात वहां की दशा और दिशा दोनों ही बदली हुई नजर आई ऊंचे ऊंचे प्रकृति रूप से वैभवशाली पेड़ पैधे और उसके मध्य से बहती जल धारा को इतने सुव्यवस्थित ढंग से बड़े  तालाब और उससे निकाले गए नाला नुमा आड़ी तिरछी प्रवाहित होती जल धारा किसी का भी शांत चित्त मन को आल्हादित करने पर्याप्त है यही नही नाले नुमा क्षेत्र से कलकल करते बहते जलधारा वस्तुतः मानव के साथ वन्यप्राणियों तथा प्राकृतिक रूप से भी वनों की सुंदरता,वैभवता में चार चांद लगा रहा है 

इस संदर्भ में तत्कालीन डीएफओ मयंक अग्रवाल से चर्चा करने पर उन्होंने बताया यह योजना के क्रियान्वयन के पीछे मुख्य उद्देश्य वनों के संरक्षण, जल संरक्षण रहा है जिससे वन क्षेत्रों में बराबर नमी बनी रहे और हरियाली से वन क्षेत्र आच्छादित रहे 



वर्तमान गरियाबंद डीएफओ मणिवासन एस.का कथन है राज्य सरकार जल संरक्षण और उससे कृषकों को मिलने वाली सिंचाई  सुविधा तथा वनों के संरक्षण पर बेहतर कार्य कर रही है अब उसके सार्थक परिणाम सामने दिख रहे है

 वही गरियाबंद एस. डी.ओ. मनोज चंद्राकर जो जमीनी और निर्माण कार्यों का लंबा अनुभव रखते है अपनी  लंबे सेवाकाल में उनका व्यक्तित्व काफी आकर्षक रहा है महासमुंद वन मंडल से लेकर बार ,पिथौरा, सहित अनेक वन मंडलों में अपनी सेवा से सदैव चर्चा में रहे इसकी वजह वे निर्भीक रूप से कार्यों का संपादन करवाते तथा उनकी प्रशासनिक व्यवस्था की कसावट बड़ी मजबूत थी वे कार्यों के प्रति उदासीनता कभी बर्दाश्त नही करते तथा सदैव एक वीर सैनिक योद्धा की भांति कार्यों का निष्पादन पूर्ण तन्मयता से करते यही वजह है कि प्लांटेशन से लेकर निर्माण कार्यों का वे लंबा अनुभव रखते है उन का कथन है कि नरवा परियोजना से आज बहुत से वन क्षेत्र काफी हरीतिमा लिए हुए है वही जिनमे गरियाबंद वन मंडल का वनग्राम दसपूर भी जिनमे एक है जहां हमने कैम्पा मद से 1780 हेक्टेयर  वन भूभाग में कार्य संपादित किए है एसडीओ चंद्राकर साहब आगे कहते है कि नरवा योजना का लाभ स्थानीय और आसपास के कृषकों को भरपूर मिल रहा है तथा वनक्षेत्रों में नमी के साथ साथ वर्षा ऋतु में कृषकों के लिए सिंचाई  के मामले में मिल का पत्थर साबित हो रहा है जिसका दसपूर वनक्षेत्र एक साक्षात उदाहरण है 

गरियाबंद परिक्षेत्र के युवा ऊर्जावान रेंजर पूणेंद्र साहू नरवा प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देश पर ढलानी क्षेत्र में नरवा परियोजना का सफल क्रियान्वयन किया गया है मुख्य मार्ग से प्रवाहित होने वाले अनावश्यक जल को एक बड़े लगभग 15 से बीस फिट गहरे तालाब में संचय किया गया जहां यह प्रयास किया गया कि उसका जल का लाभ वनों के साथ साथ वन्यप्राणियों और आसपास के कृषकों को बराबर मिलता रहे परिक्षेत्राधिकारी पूणेंद्र साहू ने आगे बताया कि बड़े तालाब से मुख्य नाला साढ़े छह किलोमीटर तक निर्माण कराया गया जहां 1 स्टापडेम  के अलावा 6605 कंटूल ट्रेंच,ब्रशवुड 405,लुजबोल्डर से चेकडेम 509,गेबियन,9 आर्दन गली प्लग 136 स्थलों पर निर्माण किया गया जो ग्राम गुजरा क्षेत्र तक निर्मित है



 गरियाबंद रेंजर श्री साहू ने आगे बताया कि दसपूर,गुजरा, कोढो हरदी ग्राम के कृषकों से जब इसका सर्वे किया गया तब उन्होंने बताया कि उनकी कृषि भूमि उपरोक्त निर्मित नाले के समीप से गुजरती है समवेत स्वर में यह स्वीकार किया  कि  जल स्तर बढ़ने से पहले से अधिक कृषि में लाभ मिल रहा उपज भी बेहतर हुई है काफी समय तक क्षेत्र में नमी बनी रहती है एक प्रकार से उनका कथन है कि नरवा निर्माण क्षेत्र से जल स्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है तथा इसका लाभ हम कृषकों को भरपूर मिल रहा है गरियाबंद 



रेंजर पूणेंद्र साहू ने आगे बताया कि बड़ा तालाब सहित अन्य नाले निर्माण पश्चात जब सर्वेक्षण किया गया तब वर्षा ऋतु के अलावा अन्य ऋतुओं में वन क्षेत्र की हरियाली और जमीनी स्तर पर नमी बराबर बनी हुई थी तथा बहुत से नए जनरेशन के पौधे भी प्रकृति रूप से उग रहे थे जिससे हरियाली और वनों में सघनता बढ़ रही थी जिसे देख कर मन गदगद हो गया श्री साहू ने आगे बताया कि नरवा योजना के संपादन में 40 लाख की राशि व्यय हुई है  तथा स्थानीय श्रमिकों को भी रोजगार मुहैया कराया गया था प्रत्येक श्रमिको के मानव दिवस की राशि उनके  खातों में स्थांतरित की जाती थी जिससे कोरोना काल मे उनके आर्थिक सुदृढ़ता का प्रमुख श्रोत बना जिसकी वजह से श्रमिक आज भी ड्राय डे पर रोजगार उपलब्ध कराने पर वन विभाग के प्रति कृतध्नता देना नही भूलते

शनिवार, 11 मार्च 2023

मरवाही वन मंडल में भ्रष्टाचार का ऑडियो वायरल डीएफओ 22 पर्सेंट एसडीओ 5 पर्सेंट बाबू भैया को तीन पर्सेंट राशि तय

 मरवाही वन मंडल में भ्रष्टाचार का ऑडियो वायरल डीएफओ 22 पर्सेंट एसडीओ 5 पर्सेंट बाबू भैया को तीन पर्सेंट राशि तय 


अलताफ हुसैन

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)मरवाही वन मंडल का एक ऑडियो बड़ी तेजी से सोशल मीडिया व्हाट्सएप में  वायरल हो रहा है जिसमे वर्तमान डीएफओ पटेल साहब को श्रमिकों के अधिकार की भुगतान राशि से या फिर यह कह ले कि दोबारा फर्जी बिल बाउचर बनाकर 22 पर्सेंट राशि देने की बात  हो रहा है जिसमे एक वन कर्मचारी जो प्रभारी रेंजर है तथा जिसके सेवा निवृत्त होने में मात्र छः माह ही शेष है उसके और संभवतः दूसरी ओर स्थानीय ठेकेदार परमेश्वर,सावित्री कंस्ट्रक्शन  के मध्य हुए वार्तालाप का ऑडियो होने की आशंका है ऑडियो मरवाही वन मंडल क्षेत्र के आसपास परिक्षेत्र का होना बताया जा रहा है तथा पांच सात दिन से यह ऑडियो तैर रहा है चूंकि मामला भ्रष्टाचार से संबंधित होने के कारण फॉरेस्ट  क्राइम न्यूज़ अपने  नैतिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए ऑडियो के कुछ अंश को समाचार के रूप मे आम जन तक पहुंचा रहा है साथ ही लिंक के नीचे ऑडियो को भी प्रेषित की जा रही है जो वरिष्ठ अधिकारियों के लिए जांच का विषय हो सकता है 


 उसमें कथित प्रभारी रेंजर वन कर्मी डीएफओ पटेल को 22 पर्सेंट राशि दिए जाने की बात कह रहा है यही नही एसडीओ को पांच पर्सेंट और बाबू भैया लोगो को तीन पर्सेंट राशि देने की बात कही जा रही है इस पर वन कर्मी यह कहते हुए बता रहा है कि बैठक में  उसने साहब को  इतनी राशि मे कार्य संभव नही है होना बताया  उसमें पर्सेंट कम करने अनुनय भी किया गया है जिस पर 18 पर्सेंट पर बात तय हुई थी  वही डब्ल्यू बी एम में कटे तीन तीन लाख के भुगतान की बात भी कही जा रही है जिसमे किसी सुंदर पैकरा और गोपाल को चेक दिए जाने की बात कही है जिसकी पुष्टि करते हुए कथित प्रभारी रेंजर वन कर्मी के द्वारा डब्ल्यू बी एम  सड़क निर्माण में नौ लाख का एडी बाउचर  काटे जाने की बात स्वीकार करते हुए श्रमिकों को भुगतान आधा किया जाना बताया जिसमे राकेश नामक सह वन कर्मी की संपूर्ण भूमिका बताई गई है  यही नही छग शासन की महत्वाकांक्षी  नरवा योजना के तहत जालीदार ग्रेबियन तथा अन्य कार्यों में दो करोड़ रुपये की लेनदेन जिसमे किसी मिश्रा साहब के द्वारा दो करोड़ की राशि रोके जाने पर तथा उसपर त्रिपाठी के द्वारा हेरा फेरी होने की बात की गई है  जबकि वर्तमान मरवाही में पदस्थ डीएफओ अधिकारी पटेल साहब द्वारा एक पैसा भी राशि न लेकर ईमानदार अधिकारी के रूप में अपने आप को प्रस्तुत करते है परंतु उक्त ऑडियो में दोनों के द्वारा डीएफओ साहब के  22 पर्सेंट की मांग  वह भी श्रमिक भुगतान की राशि लेने पर दोनों वन कर्मी हंस रहे है चर्चा इस बात को लेकर भी की जा रही है कि पूर्व डीएफओ त्रिपाठी साहब बीस परसेन्ट लेते थे जिससे वन कर्मियों की जान कल्ला (जल)जाती थी परंतु वर्तमान डीएफओ पटेल साहब के द्वारा 22 परसेन्ट लेने पर उनके द्वारा 18 पर्सेंट पर भी जबान हुई थी परन्तु कमीशन खोरी की राशि देने वाले राकेश नामक वन कर्मी  उन्हें  22 परसेन्ट की राशि देने की बात बताता है जिससे वार्तालाप कर्ता द्वारा अधिकारी से मिलने की बात कही जा रही है वही डिप्टी रेंजर का कमीशनखोरी का हिस्सा को देने पर  प्रभारी रेंजर वन कर्मी परेशान हो रहा है वही तत्कालीन अधिकारी त्रिपाठी द्वारा बड़ी राशि गबन की बात ऑडियो में कही जा रही है  इसके अलावा बहुत सी वार्तालाप ऑडियो में कही जा रही है इससे ज्ञात होता है कि मरवाही वन मंडल मे लाखों की राशि का  नही बल्कि करोड़ो रुपये का गड़बड़ घोटाला करते हुए कमीशन खोरी के नाम राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है यही नही बिल बाउचर के एक से दो बार कही भी घूम जाने की बात कह कर दोबारा तिबारा   दूसरा बिल बाउचर प्रस्तुत कर गड़बड़ घोटाला और भ्रष्टाचार किया जाना बताया गया है वन कर्मियों द्वारा कमीशन खोरी हेतु दुबारा बिल बाउचर बनाकर गड़बड़ झाला करने के उक्त वायरल ऑडियों को सुनकर आम जन सहित विभागीय वन कर्मी आश्चर्य चकित है तथा चटकारे लेकर चर्चा कर रहे है  कि वन विभाग की कार्यशैली में ऐसा प्रतीत होता है कि योजनाओं का आधे से ज्यादा राशि कमीशनखोरी,भ्रष्टाचार  की भेंट चढ़ जाती है शेष राशि मैदानी अमलों के द्वारा भ्रष्टाचार गड़बड़झाला घोटाला कर स्वाहा हो जाता है ऐसी परिस्थिति में निर्माण कार्यों सहित अन्य योजनाओं की गुणवत्ता की कसौटी पर खरा उतरने पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है अब देखना होगा कि इस संबंध में ऊपर बैठे अधिकारी क्या कार्यवाही करते है क्योंकि बंदरबांट वाली विभागीय  कार्यप्रणाली में इनकी संलिप्तता से भी इंकार नही किया जा सकता केवल यही हो सकता है कि जांच के नाम पर संपूर्ण प्रकरण पर केवल लीपापोती ही की जा सकती है बताते चले कि हाल ही में दुर्ग वन मंडल के धमधा रेंजर शिवानंद को भ्रष्ट आचरण एवं अनुपात से अधिक चल अचल संपति के रखने के एवज में  माननीय न्यायालय द्वारा  पांच वर्ष की सश्रम सजा एवं दस हजार रुपये का अर्थ दंड दिया गया है जो एक नाजीर के रूप में देखा जा रहा परंतु वन विभाग में कभी भी किसी भ्रष्ट अधिकारी पर कठोर कार्यवाही नही होती केवल निलंबन, जांच,एवं नाम मात्र रिकवरी कर मामला सेटलमेंट कर लिया जाता है और भ्रष्ट अधिकारी शासन की लाखों करोड़ों की राशि डकार कर वैभव शाली जीवन व्यतीत करते है यह सिस्टम की कमजोरी नही तो और क्या है या फिर यूँ कह लें कि भ्रष्टाचार के इस हम्माम में सब के सब नंगे है 

शुक्रवार, 10 मार्च 2023

ऐसी दीवनगी देखी नही कभी... मैंने..... एक कराओके गीत संगीत साधक- सुजीत यादव

 ऐसी दीवनगी देखी नही कभी... मैंने..... एक कराओके गीत संगीत साधक- सुजीत यादव

अलताफ हुसैन द्वारा

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स पत्रिका में प्रकाशित) कहते है जहां चाह है वहां राह है यही वजह है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का परिचय देते हुए वह भी बगैर संसाधन के रहते  कुछ लोग अपना लक्ष्य प्राप्त कर ही लेते है उनमे ही कराओके संगीत जगत से जुड़ा एक नाम सुजीत यादव का भी आता है जो यथा नाम तथा गुण को सार्थक करते हुए  संगीत जगत में अपने नाम एवं लक्ष्य को प्राप्त करते हुए एक एक कदम कराओके गीत संगीत के सफल गायको की श्रेणी मे बढ़ा कर अपने  यशस्वी सु...जीत.. नाम को कारगर और  सार्थक कर दिया तथा अनवरत सफलता का एक मुकाम प्राप्त कर श्रोताओं एवं आलोचकों के सोच के विपरीत उन्हें अचंभित कर प्रशंसा के लिए मुंह खोलने विवश कर दिया कराओके गीत संगीत  जगत में उंगलियों में गिने जाने वाले ऐसे सुर महारथी गायको के बीच जिनके सामने बहुत से गायकों की आवाज़ मद्धम पढ़ जाती है ऐसे गायक सुजीत यादव को उनके कर्णप्रिय गायकी के मध्य किशोर दा की सुमधुर आवाज़ के हूबहू अंदाज़ सुन कर जब उनकी पीठ थपथपाकर प्रस्तुति की प्रशंसा करते है तब उन्हें भी अपने गायकी की पकड़ इम्प्रेशन और सजाकर सटीक प्रस्तुत किए नग्मों के बीच आत्म सम्मान के साथ आत्मीय गर्व का अहसास होता है यह सब उनके बचपन से गायकी के प्रति लगातार लगन,परिश्रम,जीवटता, लक्ष्य प्रप्ति की ललक,का ही परिणाम है जो  कराओके गीत संगीत कला क्षेत्र में अपनी किशोर दा के समकक्ष वाली आवाज़ में  गायकी प्रस्तुत कर अपनी अद्भुत कला का लोहा मनवा दिया है

हालांकि यहां तक पहुंचने में सुजीत यादव को काफी कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा था आर्थिक विपन्नता, के मध्य पारिवारिक जिम्मेदारियों का दोहरा निर्वहन करना साथ ही गायकी के प्रति बेपनाह जुनून का तानाबाना किसी भी कलाकार को जीवन के उहापोह में उलझाने के लिए  पर्याप्त होता है परंतु इन सब के इतर सुजीत यादव ने बाँसटाल स्थित अपने छोटे से  दस बाई पन्द्रह के बंद कमरे में आज से लगभग आठ वर्ष पूर्व बगैर किसी उस्ताद अथवा मास्टर की उपस्थिति में अपने आदर्श और गुरु किशोर कुमार  के गाए फिल्मी गीतों को गुनगुनाना प्रारंभ किया और एकलव्य की भांति.. करत करत अभ्यास के उन्होंने लक्ष्य भेदी गीतों के बाण से सफलता की सीढ़ी चढ़ने का दृढ़ संकल्प लिया अपने गुरु स्व. किशोर दा की गायकी की बारीकियां,सुर के उतार चढ़ाव,भाव भंगिमाओं,और गीतों की सुख दुख,विरह,प्रेम,स्तुति जैसी गीतों की दशा दिशा का समुचित रियाज़ करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते गए और अपनी लगातार रियाज़ वाले अध्ययन  का समुचित मूल्यांकन हेतु उन्होंने आधुनिक तकनीक स्टार मेकर का सहारा लिया और भारत देश के बहुत से सधे हुए सुप्रसिद्ध गायिकाओं के साथ डुएट गीतों को गाया जानकर आश्चर्य होगा कि स्टार मेकर में गाने के लिए वे रायपुर शहर से लगभग आठ से दस किलोमीटर दूर कमल विहार जैसे सुदूर वीरान जगह जाकर गायकी करते और अपनी कला पिपासा शांत करते इसकी मुख्य वजह यह था कि उनका घर कोई सुसज्जित भवन नही था जिसे वे अपनी सह गायिकाओं को मोबाइल से  दर्शन कराते यही वजह रही कि सुनसान वीरान क्षेत्र कमल विहार का चयन कर अब चाहे  ठंड,धूप गर्मी बरसात हो वे वहां पहुंच कर लाइव प्रदर्शन कर अपनी गायकी में धार लाते रहे 
और उनकी उक्त प्रस्तुति के सही मायनों में उसके जज देश भर के जुड़े सोशल  मीडिया के हज़ारों फॉलोवर्स लोग थे जो उनकी गायकी पर अपनी प्रतिक्रिया देते, उनके गीतों को सराहते थे यह वह दौर था जब रायपुर नगर निगम गार्डन कोंपल और डब्ल्यू वी एम.सुर साधना जैसी म्यूजिकल संस्थाओं ने रविवार और राष्ट्रीय पर्व में कराओके गीत संगीत की महफ़िल सजाना प्रारंभ कर दिया था और सुजीत यादव तब तक एक मंझे हुए कलाकार होने के बाद भी एक दर्शक,श्रोता की भांति उस बादलो जैसे घुमड़ते भीड़ में बैठकर गीतों को सुनते परन्तु वे कभी हतोउत्साहित न होते हुए उन्होंने अपनी गायकी की दीवानगी कम नही होने दिया और न ही कभी उन्होंने अपना गायन प्रतिभाशाली गायक  होने का परिचय वहां किसी कलाकार को दिया परन्तु सुजीत यादव ने यह जरूर ठान रखा था कि एक दिन स्वयं के ग्रुप निर्माण करके अपनी गायकी का प्रदर्शन करूंगा क्योंकि प्रत्येक प्रतिभाशाली  गायक कलाकार को एक सुनहरे अवसर की तलाश रहती है वह तलाश भी जल्द पूरी हुई जब इमरान म्यूजिकल ग्रुप को उन्होंने अपने गीतों के ऑडियो वीडियो ऑन लाइन भेजा जिसे सुनकर  सुजीत यादव की गायकी ने उन्हें काफी प्रभावित किया और इमरान अली ने दबी कुचली प्रतिभा का समुचित मूल्यांकन कर उन्हें मंच प्रदान कर बादलों की ओट में छुपे सूर्य की भांति प्रकाशवान कलाकार को तीन बार प्रथम पुरस्कार से नवाजा जो उनकी गायकी के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ मृदुभाषी, संयमित परन्तु आत्मविश्वास से लबरेज सुजीत यादव को इससे आत्मबल मिला थोड़े समय बाद ही सही मगर उन्होंने सुरवाणी म्यूजिकल ग्रुप की स्थापना की प्रथम कार्यक्रम आर्थिक अभाव और सही मार्ग दर्शन न मिलने और बहुत से विसंगतियों के चलते औसत रहा परंतु दूसरे कार्यक्रम में चयनित गीतों और कलाकारों की बेहतरीन प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया और सुजीत यादव ने कम से कम अपनी किशोर दा वाली आवाज़ का लोहा तो मनवा ही लिया गीत संगीत के प्रति ऐसी पराकाष्ठा ,और दीवनगी बहुत कम लोगों में  परिलक्षित होती है शनैः शनैः उन्होंने बहुत से गायको को जीने का प्रयास प्रारंभ कर दिया  जिनमे कुमार शानू, एस. पी.बालासुब्रमण्यम, अभिजीत,मनहर उधास,के नाम शामिल हो रहे है जिन की आवाज़ को भी सुजीत यादव ने जीना प्रारंभ किया है इन गायको के आवाज़ की बानगी भविष्य के कार्यक्रम में देखने और सुनने मिलेगी यह तय है अब सवाल यह है कि क्या कला सिर्फ एक व्यक्ति मे ही होती है जवाब नही.. हो सकता है कला सब के अंदर विध्यमान है  परंतु अपने अंदर की छुपी प्रतिभा को तराशने के लिए स्वयं एक श्रमिक की भांति हथौड़ा लेकर स्वयं को संग तराश की भांति  तराशना पड़ता है तब  जाकर एक अंदर का कलाकार दैदिप्यमान होता है जो सुजीत यादव के अंदर दिखती है जो आज भी  उठते बैठते चलते अपने आदर्श,गुरुदेव,किशोर दा के  गीतों के बोल उनके लबो पर रहते है  सुजीत यादव आज भी संसाधनों के अभाव में भी नगर निगम के गार्डन में एक छोटे से माइक लेकर आते जाते पर्यटकों से बेखबर अपनी ही  धुन में किशोर दा के फिल्मी गीतों को गुनगुनाते हुए अक्सर दिखाई दे जाते है और पर्यटक भी उनकी आकर्षक आवाज़ को सुनकर स्वयं ठिठक जाते है ये उनका गीत संगीत के प्रति दीवानगी,प्रेम,,तपस्या  नही तो और क्या है जो बहुत कम और विरले लोगों में परिलक्षित होता है  

गुरुवार, 2 मार्च 2023

प्रदेश की हरियाली पर काष्ठ माफियाओं की वक्र दृष्टि-वन विभाग की कार्यवाही अब तक नगण्य*

 

*प्रदेश की हरियाली पर काष्ठ माफियाओं की वक्र दृष्टि-वन विभाग की कार्यवाही अब तक नगण्य*


*अलताफ हुसैन* 

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़)विगत दिनों मोहला परिक्षेत्र में सागौन की तस्करी करते हुए बालोद क्षेत्र के कुख्यात काष्ठ माफिया तिगाला सॉ मिल  के ट्रक को पकड़कर लगभग 0.900 घनमीटर अवैध सागौन काष्ठ का परिवहन करते हुए पकड़ा गया जिसमे लगभग सात आरोपी पकड़े गए तथा जिनके ऊपर वन अधिनियम के तहत कार्यवाही की गई इस अवैध सागौन परिवहन करने वालो पर वन विकास निगम  मोहला परिक्षेत्र की परिक्षेत्राधिकारी लेडी सिंघम दीपिका सोनवानी की महती भूमिका बताई जा रही है जिन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ उन्हें अवैध सागौन काष्ठ  परिवहन करते हुए पकड़ा और तिगाला सॉ मिल मालिक एवं सात अन्य  के विरुद्ध पंचनामा बनाया उक्त प्रकरण में यह भी ज्ञात हुआ है कि तिगाला सॉ मिल बालोद के तथाकथित काष्ठ माफिया द्वारा सागौन तस्करी का अवैध कारोबार विगत कई वर्षों से निर्बाध गति से कर रहा था परंतु अब तक वह विभाग की आंखों में धूल झोंककर उनकी नज़रों से बचता आ रहा था परंतु मोहला जांच चौकी में पखवाड़े भर पूर्व जब वह ट्रक में अवैध रूप से बेशकीमती सागौन काष्ठ का अवैध परिवहन कर रहा था तब टीपी में दर्शाए गए काष्ठ घन मीटर में शंका हुई तथा जांच करने पर अवैध सागौन परिवहन का प्रकरण सामने आया इस संदर्भ में सात लोगों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 52 वनोपज परिवहन नियम 2001 धारा 41 (3)(18) छ. ग. वनोपज व्यापार विनियमन 1969 की धारा 5 (1) के अंतर्गत वन अपराध पंजीबद्ध किया है।

उक्त परिवहन कार्यवाही में वन विकास निगम की लेडी सिंघम के नाम से उभरती मोहला परिक्षेत्राधिकारी कुमारी दीपिका सोनवानी की भूमिका महत्वपूर्ण रही जिन्होंने डी एम.प्रणव झा साहब के दिशा निर्देश ,डी डी एम. होमलाल साहू के मार्गदर्शन में  अपने कर्तव्य परायण का निर्वहन निर्भीकता के साथ किया और वन अधिनियम के तहत निर्भीक कार्यवाही कर काष्ठ माफिया के विरुद्ध बिगुल फूंका अवैध सागौन परिवहन के संदर्भ में मोहला परिक्षेत्राधिकारी कुमारी दीपिका सोनवानी से चर्चा करने पर बताया कि सागौन काष्ठों की तस्करी तिगाला सॉ मिल बालोद के द्वारा कई वर्षों से किया जा रहा है  आशंका व्यक्त की जा रही है कि उसके द्वारा अवैध  सागौन परिवहन कर आसपास के अन्य राज्यों में भी सागौन काष्ठ तस्करी कर सप्लाय  किया जाता रहा होगा जिसका खुलासा संपूर्ण जांच पश्चात होगा तस्करी प्रकरण में ट्रक राजसात किए जाने की बात भी कही गई है

  *ऐसे करता था तस्करी*
मोहला परिक्षेत्राधिकारी कुमारी दीपिका सोनवानी ने बताया कि तिगाला सॉ मिल द्वारा काष्ठागार में नीलामी में भाग ले कर काष्ठ क्रय यदि उसे 3 घनमीटर का शासकीय काष्ठागर से टीपी जारी किया जाता था तो वह काष्ठ परिवहन करते समय ट्रक को जंगल के बीच मे खड़ी कर अपने साथ लाए गए मजदूरों के साथ भीतर जंगल मे घुस कर परिपक्व सागौन की कटाई करवा कर उसे ट्रक में रखे काष्ठ के मध्य छुपा कर परिवहन कर लेता था बताया जाता है उसी टीपी के आधार पर कीमती सागौन काष्ठ को तस्करी कर वह उसे गोपनीय स्थल में रखकर,या सॉ मिल में चिरान कर उसका विक्रय करता था जिससे वह अब तक विभाग की नज़रों से बचा हुआ था
*वन कर्मियों की भूमिका पर सवाल*
गौर तलब है कि संपूर्ण वन क्षेत्र में वन चौकीदारों एवं फॉरेस्ट ऑफिसरों की नियुक्ति की जाती है जिनका कार्य ही वनों की देखरेख सुरक्षा का होता है इसके लिए वन चौकीदारों को बड़ा वेतन जारी किया जाता है इसके बावजूद उनकी उपस्थिति में इस प्रकार की अवैध कटाई और परिवहन किया जाना संदेह के दायरे में है वही अवैध काष्ठ तस्करी और परिवहन को रोकने बकायदा उड़न दस्ता औऱ वन क्षेत्रों में वनोंपज  जाच  चौकी भी है इसके बावजूद 
काष्ठ तस्करी का लगातार होना और वनों का विदोहन होना समझ के परे है

बताते चले कि वन विकास निगम के दो बड़े वन क्षेत्र पानाबरस परियोजना मंडल एवं बार परियोजना मंडल  में आड़े तिरछे बीमारू पेड़ों के अलावा परिपक्व सागौन वर्षवार 10,20,30,40,वर्षीय सागौन वृक्षों की मार्किंग कर थिनिंग की जाती है जिससे स्वपोषित संस्था वन विकास निगम का आर्थिक उपयोग कर निगम कंपनी को संचालित किया जाता है इसके एवज में प्रति वर्ष राज्य शासन को लाभांश राशि दी जाती है जो मार्च माह तक शासन को राशि प्रदाय किया जाता है मार्किंग किए गए और लाए गए काष्ठों को कष्ठागार में संचय कर उसकी नीलामी प्रति तीन माह में समाचार पत्र में प्रकाशन पश्चात किया जाता है जिसमे काष्ठागर से नीलामी पश्चात टीपी जारी की जाती है जो ट्रक के अनुपात तीन घनमीटर तक रहता है परंतु तिगाला मिल द्वारा आधुनिक काष्ठ तस्करी की युक्ति अपना कर वर्षों से सागौन काष्ठ तस्करी करने से विभाग अचंभित और हैरान है कि कई वर्षों से की जा रही इस अवैध सागौन काष्ठ परिवहन से वन विकास निगम को कितना बड़ा राजस्व का नुकसान सहन करना पड़ा होगा यह कल्पना से परे है 
*निगम चुस्त..विभाग सुस्त*
अवैध काष्ठ परिवहन के ऊपर कार्यवाही करने के मामले में कोरोना काल के पूर्व वित्तीय वर्ष वन विभाग ने काफी फुर्ती दिखाई थी धमतरी जिले सहित अन्य वन मंडलों में ट्रकों से सागौन,साल, काष्ठ के परिवहन पर वन अधिनियम के तहत कार्यवाही की गई थी. परंतु कोरोना काल के पश्चात यह देखने मे आ रहा है कि विभाग इस ओर पूरी तरह कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है रायपुर वन मंडल के तहत आरंग परिक्षेत्र के ग्राम फ़रफौद से लेकर सिमगा,गरियाबंद के राजिम नवापारा बलौदाबाजार मंडल के तहत सोनाखान,देवपुर, सिमगा, भाटापारा, धमतरी के दुगली,सिंहावा, बिरगुड़ी,महासमुंद के बागबाहरा, तक काष्ठ माफिया पूरी तरह सक्रिय है और अवैध काष्ठ तस्करी से लालम लाल हो रहे है और पूरे वर्षांत तक इस ओर विभाग द्वारा एक भी  प्रकरण 
काष्ठ माफियाओं के विरुद्ध पंजीबद्ध नही किया गया और न ही इस ओर  कोई विभागीय कार्यवही की गई  काष्ठ माफियाओं के हौसले बुलंद है और खुले आम काष्ठ तस्करी जारी है 

सवाल उठता है कि एक ओर छग शासन विभाग के साथ मिलकर प्रदेश को हराभरा बनाने में नई नई योजनाएं,कृष्ण कुंज,मुख्यमंत्री संपदा योजना के माध्यम से  जन भागीदारी सुनिश्चित कर करोड़ों रुपये व्यय कर रहा है  ताकि प्रदेश को हरा भरा बनाया जा सके  वही दूसरी ओर उक्त योजना को पलीता लगाने काष्ठ माफियाओं के द्वारा अवैध काष्ठ तस्करी धड़ल्ले से जारी है इससे क्या मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की हरे भरे छग प्रदेश की परिकल्पना साकार हो पाएगी ?

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2023

वन कर्मियों के संरक्षण मे मिट्ठू के अबोध बच्चों की 3000 रुपये में खुले आम बिकी

 वन कर्मियों के संरक्षण मे मिट्ठू के अबोध बच्चों की 3000 रुपये में खुले आम बिकी






रायपुर इन दिनों प्रदेश भर में पक्षियों विशेषकर अंडे से निकले मिठ्ठू के बच्चों की तस्करी और बिक्री द्रुत गति से जारी है इसकी जानकारी देने पर भी विभाग के कर्मचारी कार्यवाही न कर बिक्री को अनदेखा कर रहे है और एक प्रकार से उन्हें मूक सहमति प्रदान कर संरक्षण प्रदान कर रहे है  जिसकी वजह से इसकी बिक्री खुलेआम राजनांदगांव स्थित बस स्टैंड में की जा रही है मोबाइल से आर्डर देने पर दिए पते पर बच्चे भेजने की जानकारी भी मिल रही है 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अंडे से निकले ताजे मिट्ठू के बच्चों की धड़ल्ले से बिक्री राजनांदगांव के बस स्टैंड के समीप मोनू मिट्ठू वाले नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है जहां सैकड़ों की संख्या में नवजात मिट्ठू के बच्चों का विक्रय किया जाना बताया गया है जिनका मूल्य 3000 हजार रुपये जोड़ी बेचे जाने की भी जानकारी मिल रही है मोबाइल नम्बर +91 98276 19222 पर जो मोनू का है से संपर्क करने पर दिए पते पर किसी भी स्थान पर मिट्ठू के बच्चे पहुंचा देता है इस संदर्भ में जब वायरल वीडियो के आधार पर राजनांदगांव कार्यालय में रायपुर वन मंडल के एक वन कर्मी ने वाइल्ड लाइफ के डिप्टी रेंजर को सूचना दी

 तब उन्होंने इस पर कार्यवाही करने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की अवैध रूप से विक्रय किए जा रहे पक्षी विक्रेता पर कार्यवाही क्यों नही की यह वजह उन्होंने नही बताई वही वाइल्ड लाइफ के फ्लाइंग स्कावड के जीवन भोंडेकर नामक वन कर्मी के मोबाइल नम्बर +917974890008 पर संपर्क कर सूचना दी गई तब उक्त कर्मी द्वारा भी सूचना देने वाले रायपुर वन कर्मी को कहा



 आप अपने रायपुर वन मंडल को देखो .. मैं इस पर कार्यवाही करूँ या नही ये मेरे अधिकार में है .इससे ज्ञात होता है कि राजनांदगांव के वन कर्मियों को इसकी पूरी जानकारी होने के बाद भी कथित मोनू मिट्ठू वाले पर वन अधिनियम के तहत कोई भी वैधानिक कार्यवाही करने की बजाए उसे  संरक्षण प्रदान किए हुए है तथा मोनू मिट्ठू वाला बगैर खौफ के  मिट्ठू के नवजात अबोध बच्चों का विक्रय खुले आम कर रहा है  

 ऊपर देखे वीडियो

शनिवार, 11 फ़रवरी 2023

नफरत को हरा कर ही देश मुश्किल दौर से निकल पाएगा

 🔴 नफरत को हरा कर ही देश  मुश्किल दौर से निकल पाएगा



वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सोनी की कलम से

🟢 घृणा के समय में प्रेम पर साहित्य अकादमी के दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत, देश के जाने-माने साहित्यकार, नामचीन और चर्चित कवियों को सुनने का मिल रहा मौका.

रायपुर। साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद ‘घृणा के समय में प्रेम’ विषय पर दो दिवसीय महत्वपूर्ण आयोजन की शुरुआत शनिवार 11 फरवरी की सुबह सिविल लाइंस के न्यू सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में हुई। देश भर के ख्यातिलब्ध लेखक, कवि व चिंतक इसमें शामिल हुए और मौजूदा दौर के घृणा के माहौल पर चिंता जताते हुए इसके विरुद्ध लगातार काम करने की जरूरत पर बल दिया।

सुबह उद्घाटन के दौरान वैचारिक सत्र में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष ईश्वर सिंह दोस्त ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि आज मनुष्य के विवेक को कुंद करते हुए जिस तरह से नफरत का वातावरण बन रहा है, तब आपसी प्रेम व सौहार्द की मनुष्य के विवेक को सुरक्षित रखने में कैसी भूमिका है, इस पर बात करना बेहद जरूरी है।

आधार वक्तव्य देते हुए संयोजक व वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सोनी ने कहा कि आज बढ़ते घृणा के माहौल में प्रतिवाद बेहद जरूरी है और यह प्रतिवाद प्रेम के अलावा कुछ और नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आपसी संवाद, सहिष्णुता, करुणा और प्रेम जैसे नैतिक मूल्यों को पुख्ता करने में साहित्यकारों व समाज के विभिन्न हिस्सों की क्या सांस्कृतिक भूमिका पर हम सभी को गंभीरता से विचार करने और उसे व्यवहारिक रूप से धरातल पर उतारने की जरूरत है। इस वैचारिक सत्र में युवा कवि अदनान कफील दरवेश ने कहा कि आज जिस संगठित रूप से घृणा फैलाई जा रही है, हमें भी उसी संगठित रूप से प्रेम को फैलाने एकजुट रहना होगा। इसके लिए हमें लगातार काम करना होगा। उन्होंने कहा कि आज घृणा फैलाने के लिए किसी सत्ता प्रतिष्ठान पर ही सवाल नहीं है बल्कि समाज में कई संस्थाएं भी हैं जो संगठित रूप से घृणा फैला रही हैं।

वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक ने इस दौरान कहा कि आज सिर्फ हमारे देश में नहीं नहीं बल्कि दुनिया के कई मुल्कों में ऐसा ही घृणा का माहौल है। हमें उम्मीद रखना चाहिए कि नफरत का यह दौर एक न एक दिन खत्म होगा लेकिन इसके लिए हम सभी को संगठित होकर लम्बा संघर्ष करना होगा। विचारक सियाराम शर्मा ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी की हत्या पर जश्न मनाने वाले लोगों की नफरत को हम समझ सकते हैं। आज जनता को एक भीड़ में बदल दिया गया है। भीड़ की हिंसा को वैधता मिल चुकी है, लोकतंत्र और हमारे नागरिक होने के बोध को अब खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फांसीवाद को एक चुनाव में नही हराया जा सकता, यह संघर्ष लम्बा है। इसके लिए हम सबको एकजुट होकर कार्य करना होगा।



वरिष्ठ साहित्यकार प्रभु नारायण वर्मा ने कहा कि आज देश भर में फैलाई जा रही घृणा दरअसल भय की एक चिलम है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज अगर हमारे देश में सबसे प्रमुख मेक इन इंडिया और वोकल फार लोकल तो नफरत  ही है। आज नाम बदलना ही विकास का सबसे बड़ा सूचक है। 60 साल से भी पहले कभी मुक्तिबोध ने जिसे 'सपने में...' और  'अंधेरे में...' देखा था वह यथार्थ में दिख रहा है।


नफरत के माहौल पर बात करते हुए गला रुंध गया नागर का


आयोजन में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार विष्णु नागर ने जब नफरत के माहौल पर बोलना शुरू किया तो उनका गला भर आया। विष्णु नागर देश भर में हक और इंसानियत की बात करने वालों के अंजाम पर बोल रहे थे और वह बेहद भावुक हो गए। किसी तरह उन्होंने खुद को संभाला और फिर वक्तव्य पूरा किया। विष्णु नागर ने इस बात पर खुशी जताई कि आयोजन में युवाओं की सर्वाधिक भागीदारी है और पूरा हॉल नौजवानों से खचाखच भरा है। उन्होंने कहा कि अब उम्मीद सिर्फ आप नौजवानों से ही है, अगर आप लोगों ने नफरत को पराजित कर दिया तो वाकई में देश अब तक के सबसे मुश्किल दौर से निकल जाएगा। उन्होंने कहा कि वह 75 की इमरजेंसी व 92 का अयोध्या वाला माहौल देख चुके हैं लेकिन आज देश बेहद मुश्किल दौर में है। उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि अब घटियापन की स्थापना हो चुकी है। आज जो जितना घटिया होगा, वह उतना ही उनके काम का होगा।


कहानी व कविता पाठ में युवाओं ने ली दिलचस्पी

वैचारिक सत्र के उपरांत कहानी पाठ का आयोजन किया गया। जिसमें नामचीन कहानीकार राजेंद्र दानी, कैलाश बनवासी, आनंद बहादुर व कामेश्वर पांडेय ने अपनी कहानियों का पाठ किया। इसके बाद अगले सत्र में मौजूदा दौर  के  प्रमुख  हस्ताक्षरों ने कविता पाठ किया। इनमें हरीश चंद्र पांडे, मदन कश्यप, कुंअर रवीन्द्र, नंदकुमार कंसारी, विनोद वर्मा,निधीश त्यागी, अनुपम सिंह और अरबाज खान की संवेदनशील कविताओं ने भी उपस्थित दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। वहीं 'सब कुछ याद रखा जाएगा' लिखने वाले युवा कवि आमिर अज़ीज़ और मॉब लिंचिंग पर 'वास्तविक कानून' जैसी मर्मस्पर्शी कविता लिखने वाले नवीन चौरे की कविताओं को भी युवाओं ने पूरी तन्मयता से सुना।

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2023

11-12 फरवरी को रायपुर में मौजूद रहेंगे देश के नामचीन लेखक और कवि

 


🔴 11-12 फरवरी को रायपुर में मौजूद रहेंगे देश के नामचीन लेखक और कवि 



घृणा के समय में प्रेम विषय पर आयोजित सेमिनार में करेंगे शिरकत⚫




रायपुर. साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद की तरफ से इसी महीने की 11 वह 12 फरवरी को ‘ घृणा के समय में प्रेम ’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दो दिवसीय कविता, कहानी, गायन और विचार गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है.


परिषद का यह आयोजन सिविल लाइंस के न्यू सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में प्रतिदिन सुबह साढ़े दस बजे से प्रारंभ होगा और शाम छह बजे तक चलेगा. इस आयोजन में नामचीन लेखकों और विचारकों के साथ वे कवि भी अपनी हिस्सेदारी दर्ज करेंगे जिन्हें आवाम का रचनाकार माना जाता है और युवाओं का एक बड़ा वर्ग पसंद करता है. 


साहित्य अकादमी के अध्यक्ष ईश्वर सिंह दोस्त ने बताया कि इस कार्यक्रम में समाज में व्याप्त सांप्रदायिकता और वैमनस्यता के माहौल के कारणों व स्रोतों पर बात की जाएगी. आज मनुष्य के विवेक को कुंद करते हुए जिस तरह से नफरत का वातावरण निर्मित किया जा रहा है, तब आपसी प्रेम व सौहार्द्र और मनुष्य के विवेक को सुरक्षित रखने में लेखक, साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों की भूमिका कैसी हो सकती है इस पर  बात की जाएगी.लेखक इस मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे कि आपसी संवाद, सहिष्णुता, करुणा और प्रेम जैसे नैतिक मूल्यों को पुख्ता करने के लिए बेहतर ढंग से क्या किया जा सकता है. 


विभिन्न सत्रों के रूप में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कहानी पाठ, कविता पाठ, परिचर्चा के साथ ही जनसरोकार से जुड़े गीतों और कविताओं पर महत्वपूर्ण ढंग से काम करने वाले इंडियन रोलर बैंड की प्रस्तुति भी होगी.


इस कार्यक्रम में वरिष्ठ और युवा कवि विष्णु नागर, नासिर अहमद सिकंदर, राकेश पाठक, हरीश चंद्र पांडे, मदन कश्यप, कुँअर रवीन्द्र, नंद कुमार कंसारी, विनोद वर्मा, निधीश त्यागी, रजत कृष्ण, अदनान कफील दरवेश, संजय शाम, अंशु मालवीय, अनुपम सिंह, अरबाज खान के साथ ही ' याद रखा जाएगा सब कुछ याद रखा जाएगा ' जैसी जनप्रिय रचना लिखने वाले युवा कवि आमिर अज़ीज़,  मॉब लीचिंग पर ' वास्तविक कानून ' जैसी मर्मस्पर्शी कविता लिखने वाले नवीन चौरे और 'कौन जात हो भाई' जैसी कविता के जरिए अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करने वाले कवि बच्चा लाल उन्मेष कविताओं का पाठ करेंगे.


वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु नागर, प्रभु नारायण वर्मा, सियाराम शर्मा, मदन कश्यप, आशुतोष कुमार, विजेंद्र सोनी, वंदना चौबे सहित अन्य साहित्यकार विमर्श में भाग लेंगे.वहीं नामचीन कहानीकार राजेंद्र दानी, आनंद बहादुर, कैलाश बनवासी, कामेश्वर पांडेय, श्रद्धा थवाईत और राकेश मिश्र कहानी पाठ करेंगे.इस कार्यक्रम का संयोजन छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राजकुमार सोनी कर रहे हैं.

शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

पाशा की सुरीले गीत संगीत भाषा का श्रोताओं ने जमकर लुत्फ उठाया...नए पुराने नग्मों पर थिरके

 पाशा की सुरीले गीत संगीत भाषा का श्रोताओं ने जमकर लुत्फ उठाया...नए पुराने नग्मों पर थिरके 

अलताफ हुसैन

रायपुर (मिशन पॉलिटिक्स न्यूज़) मो.रफी के नग्मों को बेहतर ढंग से निभाने वाले गायक ज़ाहिद पाशा द्वारा प्रजेंट्स.. एक शाम सुरीले गीतों के नाम.. कार्यक्रम के माध्यम से मायाराम सुरजन हॉल गूंजा जिसमे नए पुराने गीतों का बेहतरीन समावेश किया गया और रफी लता आशा,किशोर,कुमार शानू अमित कुमार शब्बीर कुमार,मो अजीज़ के एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीत की प्रस्तुति सधे हुए गायको द्वारा दी गई  इस बार ज़ाहिद पाशा के द्वारा गायकी की गीत संगीतिज्ञ शाला में चुनिंदा गायकों को लेकर सजाई गई थी जो परिपक्व होने के साथ उनके सुर ताल  की जबरदस्त जुगलबन्दी देखने मिली और समस्त हॉल प्रत्येक गीत पर तालियों की गड़गड़ाहट से सभी गायकों  का स्वागत वंदन,अभिनन्दन किया यहां तक बहुत से गीतों की सटीक प्रस्तुति ने कुछ श्रोताओं को थिरकने विवश कर दिया जो एक गीत संगीत कार्यक्रम की सफलता को प्रदर्शित करता है

प्रारंभिक चरण में एक शाम सुरीले गीतों के नाम के आधार स्तंभ ज़ाहिद पाशा के द्वारा रफी साहब का गीत.. चराग दिल का जलाओ...इतने सधे हुए अंदाज़ में गाया कि उपस्थित श्रोता खड़े हो कर ताली बजाने विवश हो गए शेष गिरी राव और श्रीमती जी. कृष्णा राव का युगल गीत.. जब हम जवां होंगे..जाने कहां होंगे.. बेताब गीत को सुनाकर सभी श्रोताओं को बेताब कर दिया क्योंकि गीत इतना अच्छा बन पड़ा था और सभी श्रोताओं ने भी मुक्त कंठ से उनके प्रस्तुति पर अपनी प्रशंसा व्यक्त किया और मुक्त हस्त से ताली की गड़गड़ाहट से दोनों कलाकारों का स्वागत भी किया  चुलबुल कलाकार के रुप में चिन्हित शहज़ादा खान ने वातावरण को खुशनुमा बनाने के उद्देश्य से कुछ कलाकारों की मिमिक्री करने का प्रयास किया परंतु वे सफल नही हो सके पश्चात अपने बेहतरीन गीत  ..बार बार देखो हजार बार देखों ...की प्रस्तुति मंच की आसंदी से न देकर श्रोताओ के बीच पहुंच कर दी और बहुत सटीक ढंग से प्रस्तुति दी जिसे भी श्रोताओं ने  खुलकर उनके साथ नृत्य करते हुए सराहा 
वही शहज़ाद खान और संजू साहू ने आधुनिक डिस्को संगीत में दोनों गायक कदमताल मिलाते हुए,,प्यार बिना चैन कहां रे...गीत को सटीक रूप से प्रस्तुत किया जिसे श्रोताओं ने झूमकर गीतों का लुत्फ उठाया वही पाशा के रफी साहब वाली भाषा मे...चराग दिल का जलाओ बहुत अंधेरा है... गीत पर श्रोता स्तब्ध होकर गीतों को सुनते रहे क्योंकि उनकी आवाज़ और साज में जबरदस्त तालमेल था  शेषगिरी राव और जी कृष्णा राव का युगल गीत... मुत्तु कौड़ी कव्वाड़ी हड़ा....जो बेहद जटिल गीत माना जाता है को हूबहू अंदाज़ में प्रस्तुत करने कामयाब रहे जो अपने आप मे एक उदाहरण है कि व्यक्ति मेहनत करे तो कामयाबी जरूर मिल सकती है जो दोनों युगल ने साबित कर दिया  
वही महेंद्र सिंह ठाकुर की गायकी बड़ी लाजवाब रही उनके द्वारा मुगल ए आज़म का सुप्रसिद्ध प्रेम,विरह वीर रस का समायोजित आंशिक गीत... ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद.. आए मुहब्बत ज़िंदाबाद ...  जो एक हाई रेंज गीत है को इतनी संजीदगी के साथ प्रस्तुत किया कि सभी दर्शक खड़े होकर ताली से उनका अभिवादन किया  नवोदित कलाकार विभूति कर्मकार ने भी क्लासिकल संगीत के गीतों का तड़का लगाकर बीच बीच मे काफी वाहवाही बटोरी फ़िल्म उपकार गीत ...कसमे वादे प्यार वफ़ा... गीत को भी दुर्गेश पुलि ने बेहतरीन ढंग से जिया और खूब तालियां बटोरी क्योंकि यह गीत भी हाई रेंज का होने के साथ ही मानव रिश्तों के महत्व को दर्शाता है मन्नाडे साहब के स्वरबद्ध किए गए गीत को निभाना एक कलाकार के लिए चुनौती होती है जिसे  दुर्गेश पुलि ने उस चुनौती को स्वीकार करते हुए बेहतर ढंग से निभाया वही मनोज मसंद द्वारा रफ्ता रफ्ता देखो आंख मेरी लड़ी है ...लाई भी न गई..निभाई भी न गई... और तू मायके मत जइयो...की सटीक प्रस्तुति दी एक प्रकार से उनकी गायकी में सुधार के साथ निखार आते जा रहा है और ट्रैक पर कम से कम पकड़ बनती जा रही  कुमार शानू की आवाज़ को हूबहू जीने वाले बादशाह की आवाज़ भी लाल दुपट्टे वाली तेरा नाम तो बता जैसे चार गायको को जीने में कामयाब रहे और उनकी प्रस्तुति को भी सराहा गया विजय कोठारी मल्ली जी के द्वारा भी अतिथि गायक के रूप में अपनी बेहतरीन गीतों की प्रस्तुति दिया गया जो काफी पसंद किए गए

दीवाना हुआ बादल..और इन जैसे बहुत से गीतों की प्रस्तुति का सिलसिला देर रात तक अनवरत चलता रहा और श्रोता भी मायाराम सुरजन हॉल में जमे रहे तथा प्रत्येक गीतों का लुत्फ उठाते रहे वही मंच संचालन को लेकर श्रोताओं में एक शिकायत देखी गई रविन्द्र सिंह दत्ता का प्रस्तुति करण काअंदाज़ अलहदा है परंतु जिस प्रकार गीतों के गाए जाने के पीछे की संपूर्ण परेशानी जटिलताएं और उसके व्यवधान पर प्रकाश डालते है उसके उतने समय के चलते लगभग पांच से सात गीतों की प्रस्तुति पर असर पड़ता है जिसकी वजह से बहुत से गायकों के गीतों की प्रस्तुति से वंचित होना पड़ता है इस पर उन्हें ध्यान देने की आवश्यकता है यही कारण है कि उन्हें बहुत से म्यूज़िकल ग्रुप लेने से कतराने लगे है मंचीय सूत्रधारक का कार्य कम सधे हुए शब्दों में शेर ओ शायरी और कलाकार के व्यक्तित्व उसके प्रतिभा का मूल्यांकन का बखान करते हुए उन को मंच सौंपे यह विद्या होनी चाहिए न कि स्वयं भू होकर लंबी बीते हुए गायक,संगीतज्ञों की पर्दे के पीछे की कथा से अवगत कराया जाए  बहरहाल, उनकी आवाज़ और अंदाज़ के सब श्रोता कायल है उनकी उपरोक्त कमी को वे तनिक व्यवस्थित करेंगे तो श्रोताओं की पहली पसंद बन सकते है कृपया कथित बातों को वे अन्यथा न लेते हुए इस पर विचार करें 


बुधवार, 1 फ़रवरी 2023

जब तीन हाथियों से सामना हुआ वन विकास निगम कर्मियों का- एक रोमांच कथा

 जब तीन हाथियों से सामना हुआ वन विकास निगम कर्मियों का- एक रोमांच कथा 

अलताफ हुसैन

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) 18 सितंबर 2021का दिन था आषाढ़ का महीना चल रहा था रुक रुक कर वर्षा हो रही थी हाल ही अस्तित्व में आए नए जिला  मोहला मानपुर का सघन वन क्षेत्र जहां आबादी भी कम थी सूर्यास्त होते ही लोग अपने अपने घरों मे दुबक जाते सघन वन क्षेत्र और माकूल वातावरण होने के कारण यहाँ बिना बुलाए मेहमान की तरह कहीं भी खंड वर्षा होते रहता है  मगर 18 सितंबर 2021 का मौसम तनिक शुष्क था एक तरह से आसमान में दूर कही कहीं काले बादल अपनी मस्ती में हवा के झोंके के साथ आवागमन करते परिलक्षित हो रहे थे  जिससे सूरज की आंख मिचौली चल रही थी आम दिनों की भांति लोग दैनिक दिनचर्या के तहत नियमित काम काज को निपटा रहे थे कभी तेज धूप लोगों को राहत देता तो कभी सर्र सर्र करती  मौसम की ठंडी हवा का झोंका गालों में पड़ते ही  पूरे शरीर मे ठिठुरन की एक सिहरन सी उठ जाती संध्या के साढ़े पांच बज रहे थे ऐसे में वन विकास निगम के मोहला परिक्षेत्र के अधिकारी द्वय जागेश गौड़ और होमलाल साहू कार्यालयीन कार्यों का निपटारा कर के काष्ठागर स्थित अपने शासकीय आवास की ओर धीरे धीरे गपियाते पहुंचे ही थे कि रेंजर जागेश गौड़ के मोबाइल की घण्टी सहसा घनघना उठी रेंज अधिकारी जागेश गौड़ ने मोबाइल में देखा तो कॉल वन विकास निगम राजनांदगांव मुख्यालय से  डी.एम. ए. के.पाठक साहब का था मोहला रेंज ऑफिसर जागेश गौड़ ने साथ चल रहे तात्कालिक  रेंजर होमलाल साहू को हाथों की उंगलियों  से  चुप रहने का इशारा करते हुए कॉल रिसीव करते हुए कहा- यस सर,दूसरी ओर से वन विकास निगम पानाबरस डिवीजन के डी. एम.  पाठक साहब की भारी भरकम आवाज़ आई जागेश,अभी अभी सूचना मिली है कि  वन क्षेत्र के राजाडेरा,मिस्प्रि  वन क्षेत्र में 22  हाथियों का दल विचरण कर रहा है.. तुम तत्काल..  कुछ कर्मियों को ले जाकर उस क्षेत्र में मुनादी करवाओ... और गज दल के मूवमेंट की खबर मुझे दो..सुरक्षा की दृष्टि से सभी ग्रामीण वनवासियों को अपने घरों में रहने की सलाह दो.. ताकि जान,माल के खतरे से आम लोगों को बचाया जा सके और हां.. इसमें  किसी प्रकार की कोई कोताही नही होनी चाहिए...इधर से रेंजर जागेश गौंड ने यस सर कहा , और तात्कालिक रेंजर होमलाल साहू को हाथियों के धमक के बारे में जानकारी दी जिसे सुनकर वो भी हड़बड़ा गए क्योंकि हाथियों का दल पहली बार निगम के वन क्षेत्र में अपनी आमद दी थी इसलिए उनका चौंकना स्वाभाविक था उन्होंने भी बगैर देर किए तत्काल अपने अधीनस्थ सहयोगीयों,राजन,डालेंद्र,रवि शंकर पारकर,गौरी शंकर भारद्वाज,सहित अन्य निगम के वन कर्मियों को दो विभागीय जीप लेकर उपस्थित होने कहा- साथ ही पेट्रोल,मशाल,मोटी रस्सी,एवं अन्य सुरक्षा सामग्री लाने का आदेश दिया तब ड्रायव्हर ने बताया कि एक गाड़ी की लाइट खराब हो चुकी है तथा इंजन भी कभी भी बंद हो जाता है.. इस पर तत्कालीन रेंजर होमलाल साहू ने उन्हें कहा- अभी गाड़ी बनाने का समय नही है तत्काल काष्ठागार स्थित  कार्यालय पहुँचों...

जब वे ये आदेश दे रहे थे तब तक सूर्य भी अस्तांचल में जा चुका था वातावरण हल्के सुरमयी रंग में तब्दील हो रहा था..दूर बादल के टुकड़ों में नारंगी रंग की हल्की आभा फैली हुई थी जो प्राकृतिक वातावरण को मनमोहक बना रहा था फिर भी दोनों रेंज ऑफिसर के पैर बगैर देरी किए अपने विभागीय आवास की ओर बढ़ गए तकरीबन एक घण्टे पश्चात सभी वन विकास निगम कर्मी दो गाड़ियों में ईंधन डलवाकर काष्ठागर आवासीय क्षेत्र के सामने खड़े थे जिनकी संख्या लगभग दस थी जैसे ही दोनों रेंज ऑफिसर अपने आवास से  बाहर आए सब कर्मियों  ने एकसाथ  सैल्यूट मार कर उनके आदेश का इंतज़ार करने लगे रेंज ऑफिसर जागेश गौड़,और होमलाल साहू जिनकी नियुक्ति  ही कुछ वर्ष पूर्व हुई थी जिसमें रेंज ऑफिसर जागेश गौंड एक कद्दावर बलिष्ठ कद काठी एवं निर्भीक साहसी अधिकारी के रूप में जाने जाते है तथा अपने कर्तव्य के प्रति सदैव जागरूक रहना उन के व्यवहार में शामिल है उनके लिए प्रारंभिक सेवाकाल में   हाथियों के आगमन और उनकी मॉनिटरिंग किसी रोमांच से कम नही था वही  तात्कालिक   (डिप्टी डीएम) तात्कालिक रूप डी एम होमलाल साहू एक कर्तव्य परायण अधिकारी के रूप में पहचाने जाते है  उन्हें तनिक भी आभास नही था कि अपने सेवाकाल के दौरान इस प्रकार की कल्पना नही की थी कि कभी हाथियों के दल से सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी मिलेगी फिर भी साहस और रोमांच से भरे कर्तव्य निर्वहन का यह पहला सुअवसर जिसमे हाथियों से सामना होना था कोई भी अधिकारी खोना नही चाहते था 

 रात के आठ बजे सभी वन विकास निगम कर्मी मोहला स्थित काष्ठागार के आवासीय स्थल से दो जीप में सवार होकर रवाना हुए पानी की हल्की फुल्की बूंदा बांदी प्रारंभ हो गयी थी कभी कभार दूरस्थ क्षेत्र में बिजली की गड़गड़ाहट भरे  चकाचौंध रौशनी  की चमक से वनों के अस्पष्ट पेड़ों के ऊंचे झुरमुट दिख जाते जो भयावह और डरावने लग रहे थे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कब हाथियों का दल उनके समक्ष आकर सामने खड़े हो जाए  फिर भी रैनकोट से सुसज्जित अपनी सुरक्षा हेतु सामग्री लिए वे सब हाथियों के मूवमेंट स्थल की ओर बढ़ गए हाथी प्रभावित क्षेत्र के आसपास ग्राम में पहुंच कर सरपंच कोटवार को जानकारी देने का सिलसिला और कहीं कहीं ग्राम में अपनी गाड़ी में लगे छोटे से लाउडस्पीकर पर मुनादी भी करते रहे ताकि आम जन सजग रहे अनेक ग्राम मे सन्नाटे को चीरती हुई निगम कर्मियों की स्पीकर की आवाज़ से क्षेत्र गुंजयमान होने लगा  कि कोई भी व्यक्ति रात्रि में अपने घरों से बाहर न निकले.रात में ...दिशा मैदान को न जाएं और ..हाथी दिखने पर उनके करीब न जाएं.. हाथी दल दिखने पर तत्काल विभाग को सूचना दे... इस प्रकार रात भर आसपास के बहुत से गांव में निगम कर्मी सचेत करने मुनादी करते रहे  जबकि यह प्रथम अवसर था जब हाथियों का दल वन विकास निगम  मोहला के पानाबरस परियोजना मंडल के वन परिक्षेत्र में  दृष्टोगोचर हुआ था जिनकी उपस्थिति से होने वाले किसी भी अप्रिय घटना से सभी निगम कर्मी आशंकित थे जबकि उनके पास विभाग द्वारा प्रदत्त किसी प्रकार सुरक्षा सामग्री की माकूल व्यवस्था भी नही  थी सिवाय पेट्रोल मशाल,रस्सी,से वे कितना हाथियों को काबू कर पाते यह उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी फिर भी एक दूसरे का साथ और साहस के चलते वे अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे

 रात भर अनेक गांव में मुनादी के पश्चात वे सब वापस मोहला जाने पर चर्चा करने लगे डिप्टी डिविजनल मैनेजर महेश खटकर को वापसी की सूचना देकर वे वापसी की सोची क्योंकि अब भोर के चार बज रहे थे रात का अंधियार अब धीरे धीरे फीका होना प्रारंभ हो चुका था आसमान में अब भी बादल होने से भोर की सफेदी उस पर हावी हो रहा था मगर सघन वन क्षेत्र होने से वन मार्ग अब भी रात के स्याह रंग से सराबोर था जागेश गौंड,और होमलाल साहू एक ही गाड़ी में बैठे पाली ग्राम क्षेत्र में अपनी अंतिम सर्च,और मुनादी कर वापस लौटने पर चर्चा करते हुए वन मार्ग में बढ़ रहे थे  पक्के वन मार्ग में  सिंगल लेन सड़क पर उनके पीछे बगैर लाइट वाली गाड़ी भी फर्राटे भरते चल रही थी जिस पर शांत वातावरण में गाड़ियों की आवाज़ से कुछ दूर अशांति का वातावरण निर्मित हो जाता जिससे दोनों गाड़ियों में बैठे वन कर्मी सहज होने का प्रयास करते कि गाड़ियों के शोर से कोई भी वन्यप्राणी कम से कम उनके करीब आने का दुस्साहस नही करेगा जिस स्थल से उन सब का जाना हो रहा था वहां से महाराष्ट्र बॉर्डर  की दूरी भी मात्र 12 किलोमीटर शेष थी आंखे भी कभी कभी नींद से बोझिल होने का प्रयास करती कुछ वन कर्मियों की आंख स्वतः बंद हो चुकी थी और गाड़ी की हिचकोलों में वे मां की गोद मे किसी हिलोर का अहसास करते हुए अचेतन स्थिति में झूम रहे थे इधर दोनों रेंजर भी  बातचीत कर नींद को काफूर करने का प्रयास कर बोझिल और उनींदा आंखों से सभी निश्चित होकर पाली ग्राम क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे सब कुछ सामान्य चल रहा था ड्राइवर भी जल्द से जल्द पाली ग्राम के अपने अंतिम पड़ाव के लक्ष्य की ओर जीप को द्रुत गति से बढ़ा रहा था एक समय ऐसा भी आया कि वन क्षेत्र के धुमावदार रास्ते मे पड़ने वाले नाले की ओर जैसे ही ड्रायव्हर ने गाड़ी की स्टेयरिंग घुमाया वैसे ही उसने जम कर पैर से ब्रेक को दबा दिया गाड़ी भी.. चर्ररर..चर्ररर करते हुए सड़क पर टायर का निशान छोड़ती हुई रुक गई यही स्थिति पीछे आ रही गाड़ी की भी हुई यकायक आगे जीप के ब्रेक लगाने से वह   भी बगैर देरी किए जीप को ब्रेक लगा एक झटके में जीप खड़ी कर दी ब्रेक का जोर से झटका लगने पर सभी निगम कर्मी एक दूसरे के ऊपर गिरते गिरते बचे सभी हतप्रभ हो कर आंखे खोल कर  कौतूहल वश एक दूसरे को सवालिया नज़रों से देखने लगे..दोनों रेंजर एक साथ चीखते लहजे में ड्रायव्हर की ओर मुखातिब हुए  ..क्या हुआ..ब्रेक इतनी जोर से क्यों लगाया ... ड्रायव्हर भय मिश्रित आंखों से बगैर कुछ बोले स्टेयरिंग से हाथ को थोड़ा ऊपर  करके उंगली के इशारे से सड़क की ओर इशारा किया... सब ने आंख घुमा कर  सामने  लाइट में लगभग 15 मीटर की दूरी पर तीन विशाल काय हाथियों  को सड़क से पार होते देखा एक क्षण में सब के कंठ सुख गए..गले की हड्डी ऊपर नीचे होने लगी..दिल की धड़कन तेज गति से धड़कने लगा...जिससे हाथ पांव में कंपन्न होना शुरू हो गया...भय से सब के हाथ पांव फूल गए.. हाथियों को इतने करीब से देखते ही सब की घिग्घी बंध गई किसी के मुंह से कुछ भी नही निकला...ऐसा लगने लगा कि मौत एकदम करीब से जा रही है पीछे  बगैर लाइट की गाड़ी में भी कोई हलचल नही थी उसमे बैठे निगम कर्मियों को यह समझते देर नही लगी कि सामने जरूर कुछ हुआ है तभी किसी कर्मी  ने बाहर झांक कर देखा तो बीच सड़क से तीन हाथी पार होकर सड़क के नीचे खड़े हुए है इधर गाड़ियों की ब्रेक की आवाज़ और गाड़ी की गड़गड़ाहट सुन कर तीनों हाथी भी यथावत स्थिति में जहां के तहां  खड़े हो गए  रेंजर जागेश गौंड,और हेमलाल साहू के माथे पर सुबह की ठंडी हवाओं के बीच मे  पसीने की बूंद उभर आई थी  सब निगम कर्मी सांस रोक कर उन्हें खड़े देखते रहे जो सड़क के करीब नीचे सुपे जैसे कान खड़े कर हमले की मुद्रा में खड़े दिख रहे थे उनमें एक दंतैल के अलावा दो अन्य वयस्क हाथी थे यकायक गाड़ियों और जोर से लगे ब्रेक की आवाज़ से वे तीनों हाथी भी अपने कान खड़े कर लिए तथा अपने पैरों को जमीन में रगड़ने लगे उनकी यह प्रतिक्रिया कोई शुभ  संकेत नही होता इसका मतलब वे गुस्सा होकर  हमला करने की चेतावनी दे रहे हो इधर गाड़ी में बैठे आर.ओ.जागेश गौंड,एवं होमलाल साहू के माथे में पसीने की बूंद उभर आई  ड्रायव्हर के हाथ स्टेयरिंग से चिपक गए और सभी निगम कर्मी सांस रोक कर गाड़ी में जड़वत हो गए,,न कोई हलचल और न ही कोई शब्द किसी के मुंह से निकल पा रहा था सब की आत्मा भय के कारण अंदर से थरथरा रही थी मात्र 15 मीटर की दूरी पर  सामने खड़े तीन हाथी जैसे उन्हें साक्षात यमराज  दिखने लगे थे उन्हें आशंका होने लगी कि कब उत्तेजित होकर तीनों हाथी उन पर हमला कर दे परंतु वे तीनों हाथी भी लाइट की चमक से कुछ समझ नही पा रहे थे तब धीरे से रेंजर जागेश गौंड ने फुसफुसा कर आदेश दिया गाड़ी को पीछे करो... ड्रायव्हर ने पीछे देखा बगैर लाइट वाली गाड़ी एकदम चिपक कर खड़ी थी मगर वह भी पीछे नही हो सकती थी क्योंकि घूमावदार,संकरा मार्ग होने की वजह से गाड़ी पीछे नही किया जा सकता था ड्राइवर ने पीछे न जाने की स्थिति से रेंजर को अवगत कराया  फिर तत्कालीन रेंजर होमलाल साहू ने  ड्रायवहर से कहा - ऐसा करो ..गाड़ी की लाइट उनकी आंखों में मार कर बंद चालू करो और साथ मे सायरन बजाओ ताकि आवाज़ सुन कर वे आगे बढ़ जाएं परन्तु बार बार लाइट बंद चालू करने तथा सायरन बजाने से इसका विपरीत प्रभाव दिखा तीनों हाथी और अधिक उत्तेजित होकर कान खड़े करने लगे उसी समय एक हाथी अपना कदम उनकी जीप की ओर बढ़ाया तब दूसरे हाथी ने उसकी पूंछ को पकड़ कर कुछ संकेत दिया जिससे वह हाथी वही खड़ा हो गया अब निगम कर्मियों के समक्ष समस्या यह थी कि यदि गाड़ी पुल के नीचे करते है तब उन्हें गाड़ी फंसने की आशंका होने लगी क्योंकि मार्ग  गहरा और बहुत जटिल था वही पीछे गाड़ी करते है तो ऐसा महसूस हुआ कि कब किधर से 22 हाथियों का दल जो आसपास वन क्षेत्र में विचरण कर रहे थे कहीं पीछे से न पहुंच जाए और जीप सहित सब को चकनाचूर न कर दे ..अब निगम कर्मियों की स्थिति यह हो गई कि न आगे जा सकते है और न ही पीछे जा सकते थे क्योंकि पूरा गज दल आसपास विचरण कर रहे थे निगम कर्मियों को सब तरफ हाथी के रूप में यमदूत नज़र आ रहे थे सब भय मिश्रित नेत्रों से गाड़ी के बाहर आंखे फाड़ फाड़ कर अंधेरे में देखने का प्रयास करने लगे कहीं पूरा का पूरा हाथियों का कुनबा वहां न आ जाए और जान पर बन आए ? इधर सब को यह भय भी सता  रहा था कि इधर सड़क के नीचे खड़े तीनों हाथियों में से किसी एक ने भी अन्य स्थल में विचरण करते दल को संकेतात्मक चिंघाड़ मार दी  तो सब कुछ समाप्त हो जाएगा  सब निगम कर्मी की स्थिति किसी पिंजरे में फंसे हुए प्राणी  जैसी लग रही थी उनके सामने तीनों हाथी के रूप में साक्षात यमराज दिखाई दे रहा था कुछ निगम कर्मी तो कांपते हाथ को जोड़कर,आंख बंद कर  ईश्वर से प्रार्थना करने लगे थे कि किसी तरह जान बचा लो प्रभु और आई मुसीबत को किसी तरह टाल दो... रेंज अधिकारी जागेश गौंड ने हिम्मत और साहस के साथ ड्रायव्हर को आदेश दिया कि फिर से सायरन बजाओ...सायरन बजाने से तीनों हाथी और उत्तेजित हो कर पांव जमीन में रगड़ने लगे तब एक निगम कर्मी ने साहस दिखाते हुए मशाल जलाकर, पेट्रोल मुंह मे रखकर उनकी ओर फूंकने लगा....आग के उठते लपट देखकर  हाथियों ने एक कदम उनकी ओर बढ़ाया ....इससे सभी निगम कर्मी डर से कांपने लगे मौके की नजाकत को देखते हुए तुरंत तत्कालीन रेंजर होमलाल साहू ने आग फेकने वाले निगम कर्मी को गाड़ी में  बैठने का आदेश दिया जैसे ही वह कर्मी गाड़ी में चढ़ा ड्रायव्हर को आदेश दिया कि गाड़ी स्पीड से निकालो..ड्राइवर ने थोड़ी हिम्मत जुटाई और तुरन्त एक्सीलेटर पर पैर को दबा दिया पीछे खड़ी गाड़ी भी ब्रेक से पैर हटाते हुए एक्सीलेटर पर दबाव बना दिया एक झटके के साथ  आगे चल रही गाड़ी के पीछे अपनी गाड़ी को फर्राटे से पीछे लगा दिया वातावरण गाड़ियों की आवाज़ से गूंज उठा जीप की कर्कश ध्वनि के बढते ही तीनों हाथी वापिस सड़क पर चढ़ने लगे मगर तब तक दोनों गाड़ी ने अपनी रफ्तार पकड़ ली थी और एक फर्राटे के साथ दोनों गाड़ियां उन तीनों हाथी के सामने से सायरन बजाते हुए वहां से आगे बढ़ गए कुछ दूर आगे जाने के बाद पीछे चल रही गाड़ियों में बैठे निगम कर्मियों ने मुड़कर देखा तीनों हाथी सड़क मे पहुँच चूके थे और वे दूर होती गाड़ियों की ओर देख रहै थे वहां से कुछ किलोमीटर आगे आने पर सब ने राहत की सांस ली और ईश्वर को धन्यवाद दिया परंतु आषाढ़ की इस रात में पन्द्रह मिनट का यह भयावह क्षण जिसे वे अभी गुजार कर आ रहे थे उनके जीवन का अविस्मरणीय  क्षण बन गया था वर्तमान मोहला परिक्षेत्राधिकारी जागेश गौंड एवं होमलाल साहू जो वर्तमान में  एस डी ओ बन चुके है 

से जब इस रोमांचक क्षण की कथा का वर्णन सुन रहे थे तब घटनाचक्र का स्मरण मात्र से शरीर मे सिहरन उठ रही थी और रौंगटे खड़े हो रहे थे हाथी दल के अनवरत आवागमन के संदर्भ में जब मोहला परिक्षेत्राधिकारी जागेश गौंड से चर्चा की तब उन्होंने कहा कि वन विभाग को गजदल के आवागमन मार्ग क्षेत्र में कॉरिडोर निर्माण करना चाहिए हालांकि इस सिलसिले में विभाग ने भि कार्ययोजना बना कर विचार करना प्रारंभ कर दिया है उन्होंने आगे कहा- क्योंकि दिन में हाथी वनक्षेत्र में घास फूस,और झाड़ इत्यादि कहा कर अपनी क्षुधा शांत कर लेता है परन्तु स्वाद बदलने खेत खलिहान की उपज की ओर आकर्षित होता है तथा माल के साथ जान का खतरा बढ़ जाता है वही उन्होंने आगे बताया कि झुंड में रहते समय यह अधिक आक्रमक नही होता जितना अकेला हाथी हमलावर होता है इसके लिए हालांकि बहुत से हाथियों में रेडियो कॉलर लगाया गया था जो हट गया है जिससे इनके एक्जिट लोकेशन ज्ञात नही हो पाता वविनि रेंजर जागेश गौंड ने आगे बताया कि महाराष्ट्र में ठीक इसके विपरीत हाथियों के निगरानी हेतु एक्सपर्ट रखे गए है जो सेटेलाइट से पूर्वानुमान लगा कर महाराष्ट्र वन क्षेत्रों में होने वाली हलचल,सूचना के अनुसार तथा गजदल के वर्ष भर में किस ऋतु मे उनका आगमन होना है उसके समयानुसार महाराष्ट्र बॉर्डर तक विस्तृत ग्राम क्षेत्रों में मुनादी करवा दी जाती है ताकि जानमाल से आम जन को  बचाया जा सके परन्तु हमारे यहां किसी प्रकार की आधुनिक पद्धति नही है जिससे अनेक जान माल के क्षति होने की घटनाएं घटित होती रहती है उन्होंने आगे कहा- कि इसके लिए विभाग योजना बनाए छग,मप्र.और महाराष्ट्र राज्य मिलकर हाथी दल के विचरण क्षेत्र का मैप बनाकर कॉरिडोर बनाए तथा हाथियों से आम जन की सुरक्षा के साथ साथ इनके संरक्षण संवर्धन में भी कार्य किए जा सकते है वही वर्त्तमान डिप्टी डीएम होमलाल साहू का कथन है कि वन विभाग की तरह प्रदेश भर में बहुत से निगम के वन क्षेत्र है जहां हमे सुरक्षा हेतु कोई सामग्री नही दी जाती इसके लिए वन विकास निगम,वन विभाग  गजदल से आमजन के जानमाल की सुरक्षा सहित सभी के सुरक्षा हेतु सामग्री होनी चाहिए इसके लिए बाकायदा वन विकास निगम को भी शासन की ओर से बजट जारी होना चाहिए जिसके बगैर किसी भी प्रकार की सुरक्षा संरक्षण,संवर्धन बे मायनी है वही वर्तमान मिस्प्रि रेंजर कुमारी दीपिका केशरवानी का कथन है कि बहुत से वन ग्राम क्षेत्र मे हाथी के हमले से कई ग्रामीण हताहत हुए है तथा मृत्यु तक हो चुकी है जिन्हें उपचार एवं अंतिम संस्कार हेतु प्रारंभिक सहायता राशि दी जाती है परंतु मिलने वाले मुआवजे की राशि प्रदाय करने में काफी विलंब होता है मिस्प्रि रेंजर कुमारी दीपिका केशरवानी आगे बताती है कि पहले ग्रामीण किसी प्रकार का कोई सहयोग नही करते थे  परन्तु जब से हाथियों द्वारा जानमाल की क्षति पहुंचाई गई तब से वे वविनि कर्मियों से पूरा सहयोग करते है वो आगे कहती है कि वविनि कर्मियों को भी सुरक्षा हेतु सभी सामग्री मिलनी चाहिए तथा अन्य आधुनिक उपकरण भी लगाए और दिए जाने चाहिए जैसे टीवी के माध्यम से नाटक और शिक्षा के माध्यम से जन जागरूकता आवश्यक है ताकि गजदल की सही लोकेशन और सही समय में ग्रामीणों को जन जागरूकता लाने  लोकेशन ट्रेस कर ने सेटेलाइट,जीपीएस, जैसे अनेक आधुनिक माध्यम की आवश्यकता है जो अभी तक हमे प्रदाय नही हो सका है