रविवार, 22 सितंबर 2024

आरंग नदी तट रोपण से पर्यावरण व्यवस्था मे सुधार

 आरंग नदी तट रोपण से पर्यावरण व्यवस्था मे सुधार 


अलताफ़ हुसैन द्वारा

(छत्तीसगढ़ वनोदय)  छत्तीसगढ़ के प्रमुख नदियों मे से एक महानदी जो किसी भाग्य रेखा के समान खींची हुई जल रेखा से कम नही दिखती है यह जब अनेक स्थलों से होते हुए किसी सर्पिणी के समान घुमाव दार अविरल जल धारा  के रूप में चलती है तब ऐसा प्रतीत होता है कि  प्रदेश की प्रकृति, पर्यावरण,एवं वन्य प्राणियों सहित आम जन  जीवन के लिए उनका भविष्य तय कर रही है आसपास एवं वन क्षेत्रों,की नमी,बनाए रखने मानव और प्रत्येक वन्य प्राणियों जलीय पशु पक्षी, के पेयजल की निजात के अलावा भी यह महानदी प्राकृतिक, सौंदर्यता, पर्यावरण व्यवस्था सहित अनेक  संसाधनों की आपूर्ति प्रदान करते हुए सदाबहार वरदान साबित हुई है अनेक प्रकार के लौह, ताम्र, स्वर्ण कण से मिश्रित महीन गौण खनिज के रेतीली एवं कठोर चट्टानी  क्षेत्र मे वर्षा ऋतु पश्चात  यह कल-कल करती हुई  इठलाते हुए जब किसी असमतलीय उबड़ खाबड़ क्षेत्र से गुजरती है 


तब  धूप के चमकते, दमकते, दैदिप्यमान  ओजस्वी जल धारा किसी नव यौवना के अल्हड़पन के समान  मद मस्त  होकर प्रकृति सरगम के सप्त सुर ताल की अदृश्य नाद संपूर्ण वायु मंडल में अलौकिक उदघृत लय को परिभाषित करते हुए शांत वातावरण मे जैसे प्रेम गीत को गुनगुनाते हुए अपने  गंतव्य की ओर अठखेली करते हुए निकली जा रही हो  तो अनायास अवागमन करते लोगों का मन उस ओर स्वतः आकर्षित कर  नदी के ऊँचे पुल के मुहाने मे खड़े होकर प्रकृति की बेजोड़ कृति को अपलक घंटों निहारते स्वयं की जिज्ञासा को रोक नही पाता ईश्वर की ऐसी बे मिसाल मनोहारी अविस्मरणीय कृति  लाभ  से कोई भी वंचित रहना नही चाहता और आधुनिक मोबाइल मे सेल्फी लेकर उस अविस्मरणीय प्राकृतिक पल को कैद कर लेना चाहता है 


    रायपुर वन वृत अंतर्गत आरंग परिवृत् के महानदी तट पर ऐसा नयनाभिराम दृश्य प्रायः देखने मिल जाता है हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से वन विभाग द्वारा आरंग से लगभग  आठ से दस किलोमीटर की दूरी  पर स्थित ग्राम पंचायत अमेठी के आश्रित ग्राम गुदगुदा मे दो अलग अलग भू भागों में क्रमशः 08 हेक्टेयर मे 8800 पौधों तथा दूसरे क्षेत्र में 13 हेक्टेयर भू भाग मे 14 हजार 300 पौधों का वर्ष 2022 मे मिश्रित  प्रजाति का सफल रोपण कर प्लांटेशन  किया गया था जिसमे शिशु नीम, काला सिरसा, पीला बांस, अर्जुन, अकेशिया, बोहार, केजुरीना, पीपल, सहित भिन्न भिन्न प्रजाति के पौधे किए गए जो लगभग आज वर्ष 2024 मे शत प्रतिशत सफल देखा गया है


 इस संदर्भ मे आरंग परिवृत् के डिप्टी प्रभारी संतोष कुमार सामंत राय  से उनके साथ ग्राम पंचायत अमेठी के कथित आश्रित  क्षेत्र  ग्राम गुदगुदा प्लांटेशन पहुँच कर रूबरू प्लांटेशन क्षेत्र का अवलोकान किया गया जहाँ द्वितीय वर्ष मे पौधे आठ से दस फीट ऊँचाई मे ग्रोथ कर रहे थे आरंग डिप्टी प्रभारी  संतोष सामंत राय बताते है कि वन सदृश्य परिलक्षित होने वाला कथित प्लांटेशन का श्रेय रायपुर वृत के वरिष्ठ वन मंडलाधिकारी अधिकारी लोकनाथ पटेल के कुशल निर्देशन मे 


उप वनमंडलाधिकारी विश्व नाथ मुखर्जी के मार्ग दर्शन तथा परिक्षेत्राधिकारी तीरथ राम साहू  के सफल नेतृत्व मे द्वितीय वर्ष का केजयुवल्टी निंदाई गूढाई, उपचार आदि कार्य संपादित किए गए लगातार रोपण क्षेत्र की मॉनिटरिंग स्वयं डिप्टी संतोष सामंत राय एवं उनके मैदानी अमले की टीम पूरी तरह से चाक चौबंद तरीके से कर रही है तथा इसके लिए प्लांटेशन क्षेत्र मे चौकीदारों की नियुक्त किए गए है सुरक्षा की दृष्टि कोण से रोपण क्षेत्र मे चारो और से बारबेट कटिले तारों की फेंसिंग किया गया है ताकि गाय गरुवा मवेशी चराई  से रोपण क्षेत्र की सुरक्षा की जा सके आरंग परिवृत् के डिप्टी प्रभारी संतोष सामंत राय से नदी तट रोपण ही क्यों पूछे जाने पर वे बताते है कि नदी की प्रबल जल प्रवाह की वजह से तट क्षेत्र का लगातार भूस्खलन, क्षरण और मिट्टी का कटाव होते रहता है जिसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्र मे भावी विकट परिस्थिति निर्मित हो सकती है इसके रोकथाम और सुरक्षा के मद्दे नज़र रखते हुए वन जलवायु एवं परिवर्तन विभाग  तट रोपण कार्यों को प्रमुखता से संपादित करता है वही प्राकृतिक रूप से भी वन निर्मित होते रहता है जिससे  नदी का बहाव संतुलित तो रहता ही है साथ ही पेड़ पौधे की वजह से जल के स्त्रोत भी बना रहता है और पर्यावरण संतुलन जलवायु मे वृद्धि बनी रहती है


उन्होंने आगे बताया कि ग्राम गुदगुदा के सरपंच और वहाँ के समस्त ग्रामीणों द्वारा प्लांटेशन क्षेत्र की सुरक्षा और सहयोग करते है आरंग डिप्टी सामंत राय ने आगे बताया कि क्षेत्र के सुप्रसिद्ध समाजसेवी  विनय गुप्ता जो पर्यावरण प्रेमी है ग्रीष्म कालीन मे जल अभाव सूखे एवं जल स्तर कम होने की परिस्थिति मे उनके द्वारा स्वयं की राशि वहन कर टैंकर से सिंचाई व्यवस्था कर सहयोग किया जाता है इसकि वजह यह बताया जाता है कि नदी तट पर रोपण होने की वजह से उसको माकुल सिचाई प्राप्त होती है जबकि अल्प बजट के अभाव मे सिंचाई व्यवस्था तनिक दुरूह हो जाता है तब ऐसे भीषण ग्रीष्म मे नदी नाले पोखर सब सुख जाते है ऐसी परिस्थिति मे विनय गुप्ता जैसे समाज सेवी, एवं ग्रामीणों के सहयोग से प्लांटेशन  के अस्तित्व बचाने विभाग के मैदानी अमला स्वयं को तपा कर देड से दो तीन, माह अपने को झोंक देता है  जिसका परिणाम है कि आरंग तट रोपण क्षेत्र का शत प्रतिशत रिजल्ट सामने आया है


 आरंग परिवृत् डिप्टी संतोष सामंत राय बताते है कि दो भाग मे रोपित ग्राम गुदगुदा का प्लांटेशन को शत प्रतिशत सफल करने मे आरंग परिवृत  के सभी मैदानी अमले का पूर्ण सहयोग मिला है विशेष रूप से (बीएफओ) पंकज वर्मा ने पूरी लगन से द्वितीय वर्ष की निंदाई, गूढाई, संपूर्ण पौधों मे गोल आकार् का गाला थाला,निर्मित कर डी.ए. वी.पी. और जैविक खाद , काली मिट्टी, से उपचार, व्यवस्था, केजयुवल्टी  इत्यादि को बड़ी तन्मयता से संपादित करवाया  जिसकी वजह से असमतलीय ऊँची नीची पहाडी क्षेत्र मे रोपे गए प्लांटेशन  आज वन सदृश्य नज़र आ रहा है 

शुक्रवार, 6 सितंबर 2024

मातृत्व की छाँव मे पनपता एक पेड़ माँ के नाम

 मातृत्व की छाँव मे पनपता एक पेड़ माँ के नाम 

अलताफ़ हुसैन की कलम से

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)  मां अर्थात जनक जननी होती है लाखों दुख,विपदा, आफत, कष्ट सहने के बाद भी वह अपने पूत को अपने स्नेह के आँचल मे समेट कर रखती है यह आदर्श मात्र मानव  समाज मे ही  देखने नहीं मिलता बल्कि धरती मां भी अपने असंख्य सपूतों के लिए भी सदैव वरदान साबित होते आई है जब से नभ, थल, जल की उत्पति ब्रह्मांड मे हुई है तब से ही वसुंधरा को मां स्वरूपा का स्थान प्राप्त हुआ है और मानव जब भी किसी पुण्य कर्म का शुभारंभ करता है तब वह धरती मां के चरणों मे पूजा अर्चना कर नत मस्तक श्रद्धानवत हो कर उसका आशीर्वाद प्राप्त करता है धरती मां को अनेक रूप मे पूजा जाता रहा है अब चाहे हलषष्ठी पूजा जो इसी धरती मां की कोख से संपूर्ण मानव जीवन को अन्न जल देता है या फिर मकान भवन, इमारत की नीव का निर्माण हो सब धरती मां अपने गर्भ मे ही सब को निवास स्थान प्रदान करती है यही नही हरे भरे पेड़ पौधों, की विशाल श्रृंखला का प्राकृतिक निर्माण कर जल जंगल जमीन की, वैभवत मे चार चांद लगा देती है प्राकृतिक के इस मनोहरी दृश्य को सहेजने के उद्देश्य से 5 जून 2024 को भारत देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय  श्री नरेंद्र मोदी जी ने एक पेड़ मां के नाम की देश व्यापी अभियान योजना का प्रारंभ किया 


जो छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश मे हर खास व आम लोगों ने हर्षोल्लास के साथ मनाया छत्तीसगढ़ प्रदेश सहित राजधानी रायपुर मे 11 जुलाई 2024 को प्रमुखता के साथ एक पेड़ मां के नाम से लाखों की संख्या मे मिश्रित प्रजाति के पौधों का सफल रोपण किया गया जो इतिहास के सुनहरे पन्ने मे यह संख्या दर्ज की गई छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्य मंत्री माननीय विष्णु देव साय वन मंत्री केदार कश्यप सहित वरिष्ठ अधिकारी, स्कूली बच्चे, सेना के जवान एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति मे एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम का शुभारंभ नवा रायपुर अटल नगर स्थित जैव विविधता पार्क मे किया गया और पूरे प्रदेश मे अब तक करोड़ों की संख्या मे पौधा रोपण कार्यक्रम मे आमजन ने स्वस्फुर्त होकर सहभागिता सुनिश्चित की रायपुर वन मंडल के अंतर्गत एक  पेड़ मां के नाम की योजना से सफल रोपण से फलीभूत हो कर नवा रायपुर वन मंडल के अधिकारी,कर्मचारी,और मैदानी अमला खासे उत्साहित और गदगद है इस संदर्भ मे  वन मंडलाधिकारी लोकनाथ पटेल बताते है कि इस महा वृक्षा रोपण कार्यक्रम मे रायपुर डिविजन मे ही वन महोत्सव अंतर्गत छ लाख से अधिक पौधों का वृक्षा  रोपण महा अभियान कार्यक्रम संपादित  किया गया जिसमे फलदार, सायादर्, फुलदार, औषधि युक्त पौधों का रोपण किया गया नवा रायपुर जैव विविधता पार्क मे संपूर्ण पौधे 20 हेक्टेयर भू भाग  मे 22 हजार पौधे रोपे गए 


रायपुर वन मंडलाधिकारी  लोकनाथ पटेल आगे बताते है कि वृक्षारोपण महा अभियान संपूर्ण राष्ट्र व्यापी अभियान है जिसमे देश सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश मे हरित क्रांति युग का  सूत्रपात प्रारंभ हुआ है इस हरित महा अभियान के रोपण से प्रदेश के बंजर पड़त भाटा भूमि क्षेत्र मे वन सदृश्य स्थिति भविष्य मे निर्मित होगी साथ ही प्रदूषण मुक्त स्वस्थ्य वातावरण से मानव जीवन सहित पशु, पक्षियों, वन्य प्राणियों जैसे गिलहरी, वानर,सरीसृप इत्यादि को इसका लाभ प्राप्त होगा नवा रायपुर परिक्षेत्राधिकारी तीरथ राम साहू जो पीसीसीजी (पी.एस.सी) 2019 से हल्दवानी में वन सेवा मे ट्रेनिंग पश्चात विगत पांच वर्षों से  छ्ग प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्र मे अपनी सेवाएं दे रहे है उन्हे व्यापक वन एवं वानिकी का अनुभव प्राप्त हो रहा है नवा रायपुर स्थित जैव विविधता पार्क उनके ही मार्ग दर्शन मे संपादित हुआ है उन्होंने एक पेड़ मां के नाम महाअभियान वृक्षारोपण कार्यक्रम के विस्तार एवं उसके संदर्भ मे पूछने पर बताया कि उक्त अभियान से जलवायु हरियाली मे वृद्धि तो होगी ही साथ ही वन क्षेत्रों का रकबा बढ़ेगा क्योंकि लगातार ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ रहे ऋतु परिवर्तन एवं फसल चक्र मे भी आंशिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है


जो संपूर्ण मानव जगत के लिए अच्छे संकेत नही है वन विभाग भिन्न भिन्न योजनाओं के मध्यम से अनेक पडत भाटा भूमि मैदानी क्षेत्र पथ रोपण मार्ग मे पेड़ पौधे, प्लांटेशन कर पर्यावरण और जलवायु को संतुलित करने का यथा संभव प्रयास कर रहा है नवा रायपुर परिक्षेत्राधिकारी तीरथ साहू आगे बताते है कि एक पेड़ मां के नाम से वृक्षारोपण महाअभियान राष्ट्र व्यापी अभियान है जिसमे देश के प्रधान मंत्री  माननीय श्री नरेंद्र मोदी  ने धरती मां और प्रत्येक देश वासीयों की मां का भावनात्मक संदेश दिया है कि वृक्षों और पेड़ पौधों का विदोहन मत करो क्योंकि धरती मे उगा हुआ एक पेड़ मां के सम तुल्य है हमे हरियाली की चादर के साथ, सुकून की ठंडी छाँव की आँचल पसार कर देती है वह हम मानव जगत एवं समस्त प्राणियों की जीवन दायिनी है वह वायु मंडल मे अदृश्य महिन धूल धुसरित, लौह कण को अवशोषित कर शुद्ध वायु ऑक्सिजन प्रदाय करती ही है साथ ही  प्रदूषण मुक्त वातावरण निर्मित करने में कारगर साबित हुई है एक पेड़ मां के नाम यही संदेश देने का प्रयास है


 नवा रायपुर वन मंडल परिक्षेत्राधिकारी तीरथ राम साहू आगे बताते है कि उक्त योजना मे किसी प्रकार की कोताही नही बरती जा रही है क्योंकि कार्यक्रम विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी मे संपादित किया गया था जिनमे मुख्यतः प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, श्री केदार कश्यप, वन मंत्री,विशिष्ट अतिथि अरुण साव जी, विजय शर्मा जी, उप मुख्य मंत्री छ्ग शासन, श्री राम विचार नेताम जी दयाल दास बघेल जी,श्री ओ.पी.चौधरी जी, वित्त मंत्री, श्री टंक राम वर्मा, इंद्र कुमार साहू विधायक अभनपुर वन बल प्रमुख श्री निवास राव सहित सभी वन अधिकारी कर्मचारियों एन. आर.डी.ए. चेयरमैन श्री बजाज, भारतीय सेना के जवान, स्कूली छात्राओं, की उपस्थिति मे भिन्न भिन्न प्रजाति के मिश्रित पौधों का सफल रोपण संपन्न हुआ था जिसकी देख रेखा सुरक्षा व्यवस्था हेतु रात दिन प्लांटेशन  क्षेत्र जैव विविधता पार्क मे  चौकीदारी की नियुक्ति की गई है वही नवा रायपुर वन मण्डल के उप परिक्षेत्राधिकारी  मैडम लीना कश्यप बताती है कि प्रति दिन स्थानीय ग्राम क्षेत्र के महिला पुरुष ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है जिन्हे जैव विविधता पार्क क्षेत्र में पौधे रोपण कार्य के अलावा उसकी सुरक्षा के उपाय, गाला, घाला , दवा खाद उपचार के अलावा प्राकृतिक वर्षा न होने की स्थिति मे नियमित सिंचाई  खरपतवार इत्यादि की सफाई, लगातार की जा रही है डिप्टी रेंजर लीना कश्यप आगे बताती है कि संपूर्ण जैव विविधता पार्क मे आस्थावान धार्मिक पौधों के साथ ही फल दार, सायादार औषधि युक्त, लुप्त प्रायः वानिकी पौधों का रोपण किया गया है जिनमे मुख्यतः बरगद, पीपल, सागौन, कदंब, नीम, हर्रा, बेहड़ा, करंज, आम, जाम,नींबू, जामुन,चार, कटहल, शिशु, आँवला, तथा पेल्टाफार्म जैसे आधुनिक पौधों का सफल रोपण किया गया है डिप्टी लीना मैडम बताती है कि संपूर्ण रोपण क्षेत्र की व्यवस्था और सुरक्षा हेतु चाक चौबंद तरीके से की जा रही है गाय गरुआ मवेशी की सुरक्षा की दृष्टि कोण से चारो ओर तारो की वॉल फैसींग, और मुख्य मार्ग मे गेट लगाया गया है ताकि रोपण क्षेत्र सुरक्षित रह सके नवा रायपुर डिप्टी रेंजर लीना कश्यप बताती है कि रोपण एक पेड़ मां के नाम से किया गया है उसकी यह उक्ति यथा नाम  तथा गुण को चरितार्थ करते हुए एक मां के समान ही लालन पालन करने का संपूर्ण प्रयास किया जा रहा है


 जैसे मानव अपनी एक मां की सुरक्षा देखरेख उनके सपूतों द्वारा की जाती है रोपित किए गए एक एक पेड़ की पूरी सुरक्षा देखरेख उपचार पूरी तंमयता सतर्कता पूर्वक की जा रही है क्योंकि  एक पेड़ मां नाम के लिए संपूर्ण अधिकारी, डीएफओ साहब से लेकर उप वन मण्डलाधिकारी विश्वनाथ मुखर्जी साहब, परिक्षेत्राधिकारी तीरथ साहू साहब सहित मैदानी अमला, लगातार मॉनिटरिंग, सुरक्षा, की दृष्टि से दिशा निर्देश देते रहते है जिसका प्रतिसाद निकट भविष्य मे देखने मिलेगा क्योंकि जो क्षेत्र कभी हरियाली के बिना उजडा हुआ निरस नज़र आता था वहाँ हरा भरा एक पेड़ मां के रूप मे  लहलहाता हुआ प्राकृतिक पर्यावर्णीय ईश्वरीय वरदान हर मानव को मिली सौगात किसी स्वर्ग से कम  साबित नही होगा


 ऐसी हरीतिमा मनमोहक जन्नत  या स्वर्ग जैसी प्रकृति संरचना को देख कर भला कोई कवि या शायर अपने कलम को विराम कैसे दे सकता है वह भी जब एक पेड़ का स्वरूप मां के रूप मे हों तब मुनव्वर राणा की चन्द पंक्तिया याद आ रही है जो  कहते है -चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है

मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है

मंगलवार, 3 सितंबर 2024

नवा रायपुर पी. जामगाँव के मुरुमी क्षेत्र मे मिश्रित प्रजाति के पौधों का सफल रोपण

 नवा रायपुर पी. जामगाँव के

मुरुमी क्षेत्र मे मिश्रित प्रजाति के पौधों का सफल रोपण


रायपुर वन मंडल अंतर्गत नवापारा परिवृत के ग्राम (पी.) जामगाँव  मे वित्तीय वर्ष 2022-2023 मे हरियार छ्ग योजना के तहत 6.5 हेक्टेयर भू भाग राजस्व भूमि मे 7150 , पौधों का मिश्रित प्रजाति का सफल प्लांटेशन विभाग द्वारा किया गया है जिससे क्षेत्र की अलग हरीतिमा युक्त फ़िज़ा परिलक्षित हो रही है तथा आम जन की गुजर जब वहां से करते है तब हरे  भरे शुद्ध वातावरण स्वतः लोगो को आकर्षित करता है क्षेत्र को हरा भरा बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य लगातार परिवर्तित होते ऋतु वातावरण, प्रदूषण और लगातार बढ़ती गर्मी  की अधिकता को संतुलित करना है रायपुर वन मंडल के डी. एफ. ओ. विश्वेश झा साहब का कसा हुआ प्रशासनिक व्यवस्था का दूरगामी परिणाम है कि रायपुर वन मंडल के भिन्न भिन्न क्षेत्रों मे कई वर्षो से उजड़ा चमन क्षेत्र  नज़र आ रहा था अपने सेवा काल मे आते ही उन्होंने लगातार पेड पौधों और प्लांटेशन को अधिक तरजीह दिया यही कारण है कि अब रायपुर के बहुत से असमतलीय भूमि उजाड़ दिखने वाले क्षेत्र  हरियाली से हरा भरा  दिखाई दे रहे है 


तत्कालिक वन मंडलाधिकारी विश्वेश झा के संदर्भ मे अधिनस्थ वन कर्मचारियों का कथन है कि उनके रायपुर वन मंडल क्षेत्र मे सेवा देने और  कार्यों की विशेष अलहदा शैली है जो उनके व्यक्तित्व मे निखार लाता है कनिष्ठ से लेकर वरिष्ठ कर्मचारियों उनके कार्य शैली से खासे प्रभावित रहते है वे कार्यों मे तनिक भी कोताही बर्दाश्त नही करते तथा समय समय पर स्वयं मॉनिटरिंग और उप वन मंडलाधिकारी विश्वनाथ मुखर्जी से करवाते रहते है इससे कार्यों मे पारदर्शित बनी रहती है तथा कार्य भी सुचारु और नियमित ढंग से पूर्ण होता है


एस.डी. ओ.विश्वनाथ मुखर्जी साहब भी एक परिपक्व,अनुभवी अधिकारी के रूप मे जाने जाते है प्लांटेशन और रोपण का अच्छा लंबा अनुभव रहा है गड्ढो से लेकर खाद तथा रोपे जाने वाले पौधों की ऊँचाई, लंबाई, से भली भाँति परिचित है इसके पश्चात होने वाले देखरेख, सुरक्षा पर वन कर्मियों से विशेष ध्यान देने आदेशित करते है परिणामतः साल भर के अंतराल मे ही पौधे ग्रोथ करने लगते है यही कारण है कि पी. जामगांव अपने द्वितीय वर्ष की आयु मे ही सघन वन क्षेत्र के रूप मे परिलक्षित हो रहा है रायपुर वन मंडल के ग्राम पी. जामगांव को जो मुख्य सड़क मार्ग मे सटा हुआ प्लांटेशन है सही मायनों मे उक्त क्षेत्र मे प्लांटेशन साकार और आकार देने का कार्य तत्कालिक नवा रायपुर परिक्षेत्राधिकारी सतीश मिश्रा को जाता है जिन्होंने मुरुमी लैट्रेचर पथरीली क्षेत्र  मे हरियाली की परिकल्पना को साकार करने का बीडा उठाया और अपने मार्ग दर्शन मे संपूर्ण कार्यों को पूर्ण करवाया वर्ष 2022-2023 मे 08 हेक्टेयर भू भाग मे  मिश्रित प्रजाति के पौधों का सफल रोपण पश्चात सर्व प्रथम सुरक्षात्मक दृष्टि कोण से चैन लिंक कार्य करवाये गए ताकि गाय, गरुव, मवेशी, और आम उपद्रवियों से प्लांटेशन की सुरक्षा के मद्दे नज़र रखते हुए गेट निर्माण करवाया  गया ताकि प्लांटेशन सुरक्षित रह सके


यही नही तत्कालिक परिक्षेत्राधिकारी सतीश मिश्रा आगे बताते है कि प्लांटेशन मे बाकायदा चौकीदारों की नियुक्ति भी की गई जिसका परिणाम है कि रोपण क्षेत्र शत प्रतिशत सफल हुआ है 


वही नवा रायपुर वन मंडल के नवापारा परीवृत के वर्तमान परिक्षेत्राधिकारी तीरथ राम साहू बताते है कि ग्राम क्षेत्र पी. जामगांव का उक्त प्लांटेशन बहुत तेजी से ग्रोथ कर रहा है और शनैः शनैः युवा अवस्था को पहुँच चुका है प्लांटेशन पश्चात छ माह और वर्ष मे बकायदा निंदाई, गुड़ाई, उपचार किया जाता है जो तीन वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक के लिए किया जाता है  इसके लिए पौधों के जड़ पर गाला थाला बना कर डी.ए.वी.पी. या जैविक खाद इत्यादि डालकर् संपूर्ण पौधों का उपचार किया जाता है इस प्रक्रिया के लिए किश्तों मे राशि विभाग द्वारा जारी की जाती है जिसमे द्वितीय निंदाई गुड़ाई, मे आधी राशि शेष उपचार मे पाव हिस्सा राशि वहन विभाग द्वारा आपूर्ति की जाती है इसके अलावा ग्रीष्म  ऋतु मे पानी की व्यवस्था टैंकर, अन्य संसाधनों के माध्यम से किया जाता है जिससे इसकी हरियाली बरकरार बनी रहती है तथा पौधे लगातार सर्वाईव करते हुए स्वस्थयता  बनाए रखे हुए है मैदानी क्षेत्र मे अपना पसीना से सींचने वाले वन कर्मियों की महत्व पूर्ण भूमिका रहती है जिनमे फॉरेस्टर (वनपाल) से लेकर फॉरेस्ट गार्ड की भूमिका महती रहती है



नावापरा परिवृत के फॉरेस्टर  गिरीश रजक ने अल्हादित् होते हुए बताते है कि पी. जामगाँव का यह पलांटेशन आसपास के ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बन गया है इसमें पीछे की मेहनत वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर तत्कालिक परिक्षेत्राधिकारी, फॉरेस्ट गार्ड से लेकर वन चौकीदार तक की मेहनत रहती है तभी तो अधिकारियों के मार्ग दर्शन मे हरियाली पूर्ण वातावरण संपादित हो पाता है तत्कालिक नवापारा  परिवृत् के फॉरेस्टार गिरीश रजक आगे बताते है कि वहाँ आज फलदार, फुलदार, सायादार्, औषधि युक्त पौधों का रोपण किया गया है जिनमे मुख्यतः कटहल,आम, जाम, जामुन, अमरुद्, बेल, बादाम, शहतूत, औषधि युक्त पौधों मे हर्रा,बेहड़ा,अशोका,आँवला महुआ, कुसुम, जोहार, कदम, जैसे अनेक प्रजाति के पौधे युवा अवस्था मे पहुँच कर लहलहा रहे है अब यह क्षेत्र वन सदृश्य नज़र आता है वर्तमान नवापारा परिवृत् के डिप्टी झुमुक् लाल देवांगन् बताते है कि पी. जामगांव की स्थिति बेहतर है और पौधे लगभग पांच फीट से उपर पहुँच चुके है वे बताते है कि ग्रीष्म ऋतु लगते ही  लगातार सिंचाई और पानी की व्यवस्था की जाती है इसके लिए  ग्रीषम ऋतु मे पानी की माकुल व्यवस्था की जाती है


नवापारा परिवृत् के डिप्टी झुमुक् देवांगन् बताते है कि कुछ वर्ष देख रेख सुरक्षा,व्यवस्था की दरकार है जिसे विभागीय कर्मचारी पूरी निष्ठा पूर्वक ईमान दरी से निर्वहन कर रहे है यह क्षेत्र स्वतः किसी वन क्षेत्र से इतर  नज़र आएगा हमारी और से सभी व्यवस्था सुरक्षा देखरेख उपचार मे कोई कमी नही की जा रही है नवा रायपुर परिक्षेत्राधिकारी तीरथ राम साहू  बताते है कि पी. जामगाँव मुरुमी क्षेत्र के बावजूद भी वहां पलांटेशन करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी मगर हमारे मैदानी अमले के कर्मचारियों  ने उसे सार्थक कर दिखाया जिसकी वजह से क्षेत्र मे हरियाली नज़र आ रही है

सोमवार, 2 सितंबर 2024

चट्टानी गौण खनिज संपदा,के बीच हरियली की सौगात

 चट्टानी गौण खनिज संपदा,के बीच हरियली की सौगात






रायपुर छत्तीसगढ़ की रत्न गर्भा धरती में आकृत खजाना जिनमे लौह अयस्क, चूना,मैग्नेशियम,सहित अनेक संपदा का भंडार अटा पड़ा हुआ है यही नही  प्राकृतिक की हरियाली युक्त वन संपदा भी इन क्षेत्रों के वैभवशाली मनोहारी परिदृश्य भी  प्रदेश की पृथक पहचान को स्वर्ग  सा महौल निर्मित कर  संपूर्ण वातावरण को खुशनुमा,रमणीक मनमोहक, आकर्षक  निर्मित करता है जिससे चहुओर एक प्राकृतिक नैसर्गिक  वातावरण निर्मित होता है ऐसे स्थिति निर्मित करने के पीछे वन विभाग और उस से संबंधित अनुषागिक धड़ा छ्ग वन विकास निगम अपने कार्य कर्तव्यों के प्रति सदैव कटिबद्ध रहते है जहां छग वन  एवं जल वायु परिवर्तन विभाग अन्य  राष्ट्रीय,कैंपा मद से राजकीय आर्थिकी मद  संसाधनों और योजनाओं के माध्यम से संरचनाओ से बहुत सी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन करता है जबकि इसके इतर छग राज्य वन विकास निगम ऐसी योजनाएं जिनमें वन ग्राम समितियों के माध्यम से वन क्षेत्रों में तालाब ,सड़क,फायर वॉच वनोपज, संधारण,इत्यादि जैसे सामाजिक रोज़गार मूलक योजनाओं का कभी भी सफल  क्रियान्वयन नही करता और न ही राज्य शासन से छ्ग वन विकास निगम को पृथक बजट अथवा कैम्पा मद से कार्य नहीं करता केवल छग वन विकास निगम  औद्योगिक घरानों के द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से  आईपीडी योजना के तहत रिक्त पड़त भाटा भूमि के चयनित स्थलों शहरी क्षेत्रों में रिक्त भूभाग मे प्लांटेंशन पथ रोपण या शासन से वन क्षेत्रों में प्रदत लीज में प्रदाय भूभाग में हजारों लाखों की संख्या में सागौन और इमारती कष्ठों का सफल रोपण करता  है जिसके पश्चात दस,बीस,तीस,चालीस, पचास परिपक्व सालाना वर्षीय सागौन का थिनिंग, विदोहान कर  वन विकास निगम अपनी कंपनी का सुचारू ढंग से क्रियान्वयन करता है एक प्रकार से यह स्व पोषित संस्था के रूप में कार्य करता है प्रशासनिक विभागीय व्यवस्था के साथ राज्य सरकार को भी लीज के रूप में रोपे गए सागौन की आय से प्रति वर्ष लाभांश राशि भी प्रदान करता है छग राज्य वन विकास निगम केवल इंडस्ट्रियल संस्थानों रेल्वे की भूमि सहित शासकीय विभाग नगर निगम सहित अन्य क्षेत्रों में  (एम ओ यू) के आधार पर अनुबंध कर पड़त भाटा मैदानी भूमि में प्लांटेशन कर हरियाली प्रसार करता है जिसके एवज में इंडस्ट्रेलियल(कंपनी ) आई पी डी योजना के तहत छग राज्य वन विकास निगम को राशि प्राप्त करती है तथा मूल कार्य प्रति वर्ष परिपक्व सागौन थिनिंग,जो फरवरी पश्चात कटाई कर काष्ठागार डिपो के माध्यम संचय कर  नीलामी की जाती है जो मूल स्त्रोत का माध्यम होता है  छ्ग वन विकास निगम के लिए यह रीढ़ की हड्डी मानी जाती है इसे अपना मुख्य आय का श्रोत बनाया हुआ है वन क्षेत्रों के रख रखाव, व्यवस्था, वन विकास निगम करती है वन क्षेत्रों मे सागौन प्लांटेशन कर कम से कम तीन अथवा पांच वर्षों की सतत निगरानी में केज्युवलटी, दवा,खाद,उपचार और  सुरक्षा कर उसकी व्यवस्था की जाती है  तथा काष्ठागार मे वार्षिकी नीलामी निविदा प्रकाशन कर आम उपभोगताओं को प्रदाय कर आर्थिक संसाधन संकलित कर छग राज्य वन विकास निगम का सूचारु रूप से क्रियनवयन किया जाता है



    इसी  परिपेक्षा मे वित्तीय वर्ष 2021व 22 को मोहला मानपुर के छ ग. राज्य मे नए जिला के अस्तित्व मे आते ही आयरन युक्त क्षेत्र मोहला, मानपुर, के भिन्न भिन्न ग्राम क्षेत्रों मे सागौन पौधों का सफल प्लांटेशन ग्राम बोदाल, तारमटोल, हिदद्ड, मे किया गया था इस संदर्भ मे राजनांद गाँव पाना बरस परियोजना मंडल के डीविजनल मैनेजर(डी एफ ओ) होम लाल साहू बताते है कि देववाणवी परिक्षेत्र स्थित बोदाल क्षेत्र मे वित्तीय वर्ष 2021-22 मे  सागौन प्लांटेशन का सफल रोपण 16 हेक्टेयर भूभाग मे किया गया था पानाबरस परि योजना मंडल के डी.एम.  होमलाल साहू का कथन है कि ऊँची पहाड़ी चट्टानी क्षेत्र होने के साथ ही लौह अयस्क मैग्निशायम जैसे गौण खनिज प्रचुर मात्रा मे पाया जाता है जहाँ की जलवायु, मिट्टी प्रकृति रूप से पेड़ पौधे शीघ्र ग्रोथ  करने मे वर्षों बरस लग जाता है परंतु हमारे निगम अधिकारी  कर्मचारीयों ने चट्टानी खनिज युक्त क्षेत्र मे तीन वर्ष के लगतार  मॉनिटरिंग देखरेख उपचार इत्यादि कर सफल सागौन प्लांटेशन रोपण कर अविश्वसनिय कार्य कर दिखाया जो बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है वही मोहला परिक्षेत्रा अधिकारी जागेश गौड़  सागौन प्लांटेशन के  शत प्रतिशत सफल होने से अल्हादित और काफी हर्षित है मोहला मुख्यालय से बारह किलो मीटर की दूरी स्थित ग्राम बोदाल, ग्राम तारमटोला, ग्राम हिददड, मे दो स्थलों पर सागौन प्लांटेशन ग्राम बोदाल मे क्रमशः 16 हेक्टेयर पौधे जिसकी संख्या 40 हजार टी. पी. वर्ष 2021-22 मे रोपित किया गया जिसकी तीन वर्ष मे ऊंचाई लगभग दस से बारह फिट हो चुकी है वही तारमटोला मे 18 हेकटेयर भूभाग मे 45 हजार पौधे वर्ष 2023 मे रोपित किए गए



 रेन्जर जगेश गौड़ बताते है कि उक्त प्लांटेशन तीन वर्ष के लिए किया गया है प्लांटेशन क्षेत्र मे मौका स्थल पर जाकर जब इसका अवलोकन किया गया तब वहाँ सभी पौधे स्वस्थ्य और सर्वाईव करते दिखे इस संदर्भ मे मोहला परिक्षेत्राधिकरी जागेश गौड़ बताते है कि ग्राम बोदाल जो वित्तीय वर्ष 2021-22 मे रोपण किया गया था तीन वर्ष मार्च माह मे इसकी अवधि समाप्त हो जाएगी उन्होंने बताया कक्ष क्रमाँक 472 मे विगत तीन वर्षों के कार्य आवधि मे इसके उपचार सहित निंदाई, गुडाई, दवा खाद, जो वर्ष मे दो बार दवा खाद उपचार, लगभग 15 ग्राम प्रथम बीटिंग मे किया जाता है इनकी सुरक्षा देख रेख हेतु बकायदा स्थानीय चौकीदार की नियुक्ती की जाती है इसके अलावा सिंगलिका कार्य किया गया जिसमे सागौन पौधे मे दो शाखा या दो कॉपी निकल आए अतिरिक्त शाखा निकाल दिया जाता है  जिससे सागौन पौधे सीधी अवस्था मे ग्रोथ करते है  समीपस्थ ही ग्राम तारमटोला के संदर्भ मे मोहला परिक्षेत्राधिकरी जागेश गौड़ आगे बताते है कि वर्ष 2023 मे क्षेत्र मे सागौन प्लांटेशन 18 हेकाटेयर भू भाग मे 45 हजार सागौन प्रजाति के पौधे रोपण किया गया है यह दो भू भाग पहाड़ी और ढलानी क्षेत्र मे रोपण किया गया है ताकि वर्षा ऋतु के जल से रोपण क्षेत्र को भरपूर पानी प्राप्त हो सके तथा लंबे समय तक नमी बरकरार रहे उन्होंनेआगे बताया द्वितिय वर्ष मे केज्युव्लटी किया गया है सभी पौधे स्वस्थ्य और ग्रोथ कर रहे है चराई की रोकथाम के लिए स्थानीय चौकीदार नियुक्त किया गया है


 छग राज्य वन विकास निगम के पानाबरस परियोजना मंडल के अन्तर्गत मोहला परिक्षेत्राधिकरी जागेश गौड़ आगे बताते है कि बहुत सी वन भूमि क्षेत्र अतिक्रमण की भेंट चढ़ जाती है जिसके रोकथाम के लिए रिक्त भूमि को वन का स्वरूप बनाए रखने और सुरक्षा अति अवश्यक हो गया है इसके लिए वन विकास निगम के वरिष्ठ पी.सी.सी.एफ.तपेश झा ने ऐसे चयनित वन क्षेत्र मे सागौन रोपण कराने की जो पहल की है वह काबिले तारिफ है प्रशंसनीय है आखिर वन विकास निगम के जल जमीन जंगल को चीर स्थाई बचने मे अपनी महती भूमिका का निर्वाहन पूरी ईमानदारी तन्मयता से कर रहा है

शनिवार, 24 अगस्त 2024

शहीदे आज़म इमाम हुसैन के चालिसवें का जुलूस कल

 शहीदे आज़म इमाम हुसैन के चालिसवें का जुलूस कल



सफदर हुसैन की रिपोर्ट 

रायपुर इराक करबाला की तपती ज़मीन मे तीन दिन के भूखे प्यासे शहीद हुए हज़रत इमाम हुसैन और उनके बहत्तर  साथियों के साथ  छ माह के नन्हे मुजाहिद अली असगर की शहादत की याद मे  चालीसवे का जुलूस हज़रत बाकर्  इमाम बारगाह पंडरी से निकाला जाएगा यह जानकरी अंजुमन के  सदर यावर अली ने बताया कि प्रति वर्ष के अनुसार इस वर्ष भी इमाम हुसैन की याद मे अंजुमने अलमदारे हुसैनी ईरानी जमात रायपुर द्वारा कल दिनाक 26/8/2024 सोमवार को जुलूस निकाला जाएगा  जो पंडरी बस स्टैंड ,खालसा स्कूल ,शास्त्री चौक ,बंजारी बाबा औलिया चौक, नल घर चौक ,से होता हुआ बैरन बाजार स्थित बारगाहे अलविया मे पहुंचेगा जहाँ ईरानी जमात के महिलाएं,बच्चे युवा और बुजुर्ग अंजुमन द्वारा मातमदारी और नौहाख्वानी पेश की जाएगी  जिसमे शायर अहलेबैत जनाब मरहूम हाजी सुलेमान अली ईरानी,अली सज्जाद रुस्वा, फरमान अली , डॉक्टर हाजी मोहसिन अली सुहैल  ,और युवा शायर सरफराज़ अली फ़राज़ का हृदय स्पर्शी नौहा, मरसीया कलाम पेश किए जाएंगे 

जिसे उस्ताद ए नौहा खवां सर्व श्री सलाम हुसैन ,गुलाम अब्बास ,सफदर हुसैन, ज़हीर अब्बास,सरफ़राज़ अली ,समीर हुसैन ,इरफान अली, अज़मत अली, ज़ुबैर अली और दीगर        नौहा ख्वां अपनी दिलसोज़ आवाज़ में कलाम पेश कर शोहदाए करबला को पुरनम आँखों से   श्रद्धांजलि प्रस्तुत करेंगे जुलूस  ए हुसैनी का नेतृत्व जनाब बाबर अली, यावर अली, सरताज अली, नासिर अली करेंगे

सोमवार, 19 अगस्त 2024

वसुंधरा की हरित श्रृंगार करता वन विकास निगम

 वसुंधरा की हरित श्रृंगार करता वन विकास निगम

   

(अलताफ़ हुसैन की कलम से) 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)  प्रदेश भर मे हरियाली की सौगात लाने के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और उसका अनुषांगिक धडा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम प्रा. लि. द्वारा प्रदेश के विभिन्न परियोजना मंडलों मे रिक्त अनेक पड़त भाटा भूमि मे प्लांटेशन कर एक नया ऐतिहासिक इबारत सुनहरे पन्ने मे अंकित कर चुका है क्योंकि ऐसे अनेक पथरीले भूमि पर आज जो हरियाली दृष्टि गोचर हो रही है सही मायनों मे छ्ग राज्य वन विकास निगम के मेहनती, कर्तव्य निष्ठ अधिकारी कर्मचारियों और मैदानी अमलों की कड़ी मेहनत,और लगन का परिणाम कहा जा सकता है विगत वर्ष 2022-2023 एवं 2024 मे रोपण किए गए प्लांटेशन की स्थिति को देख कर कथित क्षेत्र से अवागमन करते राहगीरो का मन अनायास रोपण क्षेत्र की ओर आकर्षित करता है


और अंतरमन से वन सदृश्य प्लांटेशन की हरियाली देख कर मन ही मन मुक्त कंठ से उसकी प्रशंसा किए बगैर नही थकता  रीजनल कार्यालय राजधानी रायपुर  बारनवापारा परियोजना मंडल से मात्र तीस किलो मीटर की दूरी पर स्थित नवीन जिला बेमेतरा के पूर्व  पर स्थित ग्राम पिरदा एवं ग्राम खमतराई मे क्रमशः दस हेक्टेयर पड़त भाटा भूमि मे वर्ष 2023-24 मे लगभग 11000 तथा नौ हेक्टेयर भूमि मे 10,000 के करीब मिश्रित प्रजाति के अधिकृत पौधों का सफल रोपण किया गया  छ्ग वन विकास निगम के मुखिया एवं वरिष्ठ पी सी सी एफ.अधिकारी, प्रबन्ध संचालक तपेश झा के दिशा निर्देश अनुसार ऐसे रिक्त पड़त, भाटा भूभाग मे आई पी डी.योजना के तहत प्रदेश के बहुत से परियोजना मंडलों के क्षेत्रों मे प्लांटेशन संपादित किए गए  इसके अंतर्गत बार परियोजना मंडल के अनुभवी दक्ष कर्मठ  तत्कालिक परिक्षेत्राधिकारी ऋषि शर्मा के कुशला मार्ग दर्शन और नेतृत्व मे रायपुर से तीस किलोमीटर के तहत ग्राम पिरदा, एवं ग्राम खमतराई मे ऐसे दो क्षेत्रों मे प्लांटेशन छ्ग राज्य वन विकास निगम  के बार परियोजना मंडल के तहत  कराए गए है जो द्वितीय वर्ष मे युवा अवस्था मे पहुँच कर लगातार ग्रोथ कर रहे है 


इस संदर्भ मे बार नवापारा परियोजना मंडल के आर.जी.एम. मर्सीबेला मैडम जो आई.एफ.एस. अधिकारी है वर्तमान मे मूलतः वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मे सी.एफ. पद का दायित्व का निर्वहन कर रही है  जबकि इसके पूर्व वे सी. सी. एफ. पद मे रहते हुए मानव निर्मित जंगल सफारी मे संचालक डायरेक्टर के पद पर रही तथा लंबे अवधि तक उक्त पद का बखूबी निर्वहन किया एक प्रकार से मानव निर्मित जंगल सफारी की वैश्विक पहचान और आज उसकी जो चकाचौंध परिलक्षित हो रही है वह सब उनके ही कार्यकाल और दिशा निर्देशन में किए जाने वाली देन है सफेद बंगाल टायगर से लेकर स्नैक पार्क, रंग बिरंगी  तितली पार्क, से लेकर विदेशी डॉग,यहाँ तक वन भैंसा लाए जाने का श्रेय भी उन्ही के कार्य काल मे संपादित किए गए है जिनका लाभ और उनके लंबे सेवा काल का अनुभव अब छ्ग राज्य वन विकास निगम को मिल रहा है

तथा वे  वर्तमान मे वे बार नवापारा परियोजना मंडल, पाना बरस परियोजना मंडल,सहित कवर्धा जैसे अन्य परियोजना मंडल मे आर जी एम. के महती दायित्व पद मे रहते हुए नियमित उपरोक्त क्षेत्रों का सघन दौरा कर प्लांटेशन, काष्ठागार  कार्यों मे पारदर्शित और कसावट लाते हुए वन विकास निगम मे आर्थिक सुदृढ़ता को बल दे रही है उल्लेखनीय है कि छ्ग राज्य वन विकास निगम का मूल कार्यों स्व पोषित संस्था के रूप में प्लांटेशन करना बहुत महत्व पूर्ण कार्य है जिसका शुभारंभ वित्तीय वर्ष मई, जून में प्रारंभ कर लिया जाता है जहां मृदा भूमि परीक्षण सहित उपजाऊ, पथरीली भूमि मे किस प्रकार का प्लांटेशन किया जाना उसका प्राकल्लन की रूप रेखा प्रायोजन किया जाता है पश्चात उसकी तैयारी की जाती है इसके लिए जिससे पड़त भाटा मैदानी भूमि मे व्यवस्था कर दो बाई दो से लेकर तीन बाई तीन के गड्ढे उत्खनन कर पॉलिथिन बेग के पौधों का सफल रोपण किया जाता है जिससे प्रदेश भर के वसुंधरा मे भिन्न भिन्न प्रजाति के हरे भरे रोपित पौधों का हरित श्रृंगार कर हरियाली प्रसार किया जाता है वहीं उक्त ग्राम क्षेत्र पिरदा, एवं ग्राम खमतराई प्लांटेशन के संदर्भ मे बार नवापारा अभ्यारण के वर्तमान अधीक्षक आनंद कुदरिया जो वन विकास निगम बार नवापारा  परियोजना मंडल के डी. एम. (डी.एफ.ओ.) पद का दोहरा प्रभार दायित्व का निर्वहन कर रहे है उनका कथन है कि  छ्ग प्रदेश के अधिकांश प्लांटेशन आई पी डी योजना के तहत किए जाते है जिसमे औद्योगिक घराने के द्वारा (सी एस आर) कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत कंपनियां अपने व्यापार संचालन और अपने हितधारकों के साथ सामाजिक समरस्ता और पर्यावरणीय चिंताओं को एकीकृत करती हैं ताकि प्रदूषण मुक्त स्वच्छ वातावरण निर्मित किया जा सके इसके तहत ही बहुत से  क्षेत्रों मे प्लांटेशन छ्ग राज्य वन निगम से अनुबंध के आधार पर किए जाते है जिसका अवधि तीन वर्ष तक अनुबंधित होता है उपरोक्त अनुबंधित वर्ष तक उसकी, केज्युवल्टी, निंदाई गुड़ाई,देखरेख, सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी का व्यय छ्ग वन विकास निगम के द्वारा वहन करना पड़ता है 


बार परियोजना मंडल के डी.एम.आनंद कुदरिया इसके आगे बताते है कि   प्रति वर्ष केज्युवल्टी निंदाई गुड़ाई के संपादित कार्यों के लिए अनुबंधित किश्तों मे राशि जारी की जाती है जो प्रथम वर्ष रोपण काल अवधि मे साठ प्रतिशत राशि जारी होता है पश्चात द्वितीय वर्ष एवं तृतीय वर्ष मे क्रमशः पच्चीस एवं पंद्रह प्रतिशत, राशि जारी होता है श्री आनंद कुदरिया आगे बताते है कि अनुबंधित अंतिम वर्ष की अवधि मे कॉर्पेरेट धराने कंपनी और वन विकास निगम तीन वर्ष से अधिक वर्ष के लिए अतिरिक्त अवधि के लिए अनुबंध बढ़ा सकती है 

बार नवापारा परियोजना मंडल के वर्तमान डिप्टी डिवीजनल मैनेजर (एस.डी.ओ.) ऋषि शर्मा जो पूर्व मे उक्त योजना के परिक्षेत्राधिकारी थे उनके ही कार्यकाल मे दोनों स्थानों पर प्लांटेशन  किया गया था उनसे पूछने पर वे बताते है कि  ग्राम पिरदा एवं खमतराई ग्राम के आसपास क्षेत्र मे काफी कल कारखाने मौजूद है तथा एक बड़ा भू भाग की रिक्त भूमि पड़ी थी जिसे अनुबंध के आधार पर मिश्रित प्रजाति के पौधों का सफल रोपण किया गया है तथा रोपण क्षेत्र एक वर्ष मे ही वन सदृश्य गोचर हो रहा है रोपण होने से आसपास का वातवरण स्वच्छ सुंदर प्रदूषण मुक्त हो गया है बार नवापारा परियोजना मंडल के एस. डी.ओ. ऋषि शर्म  बताते है कि लगातार वरिष्ठ अधिकारी मॉनिटरिंग कर समय समय पर उसका अवलोकन  कर दिशा निर्देश देते है उसके अनुसार इस वर्ष 2024 मे केज्युवल्टी एवं निंदाई गुड़ाई  संपादित किए गए है और उनकी स्थित स्वस्थ्य एवं बेहतर है साथ ही लगातार बढ़त बनाए हुए है वर्तमान मे इनकी ऊँचाई आठ से दस फीट हो चुकी है तथा वर्षा ऋतु मे प्राकृतिक जल स्त्रोत और वर्षा के महीन बारीक बूंदों के जल से चहुंओर हरियाली बिखेर रही है जो अनायास लोगों के आकर्षण का केंद्र बिंदु बन गया है छ्ग राज्य वन विकास निगम बारनवापारा परियोजना मंडल के एस. डी. ओ. ऋषि शर्म आगे बताते है कि दस हेक्टेयर और नौ हेक्टेयर  भूभाग मे भिन्न भिन्न प्रजाति के पौधों का  सफल रोपण किया गया जिनमे मुख्यतः करंज, शिशु नीम, पेल्टाफाम, गुलमोहर, सहित अनेक सायादार फलदार, औषधि युक्त प्रजाति के पौधों का रोपण किया गया है उक्त रोपण कार्य हेतु स्थानीय ग्राम वासियों को रोजगार मूलक कार्य उपलब्ध कराए गए सभी पौधे जोरा नर्सरी, और बिलासपुर नर्सरी से मंगाएं गए थे  वन विकास निगम बार परियोजना मंडल द्वारा दोनों क्षेत्रों  मे कराए गए प्लांटेशन की सुरक्षा के सवाल पर डिप्टी डी एम. ऋषि शर्मा बताते है कि रोपण क्षेत्र मे फैन्सिंग लगाई गई है तथा गाय गरुआ मवेशी चराई,तथा उपद्रवी तत्वों से सुरक्षा हेतु चौकीदार नियुक्त किए गए  है जो लगातार निगरानी रखे हुए रहते है उन्होंने आगे बताया कि समय समय पर केज्युवल्टी, कर पुनः रोपण किया जा रहा है निंदाई, गुड़ाई, दवा खाद से उपचारित किया गया है जो वर्तमान  मे स्वस्थ्य पूर्ण और बढ़त बनाएं हुए है दो वर्ष पश्चात शत प्रतिशत पौधे जीवित स्थिति मे आनुबंधित फर्म, संस्था, कंपनी, को हस्तांतरित किया जाने की बात भी कही है बार प्रोजेक्ट के डिप्टी, डी.एम.ऋषि शर्मा कहते है कि मानव जीवन को बचाना है तो पेड़,पौधों और वनों की सुरक्षा करना सभी मानव जाती का धर्म और कर्म कर्तव्य है तभी मानव समाज का कल्याण संभव होगा.




सोमवार, 12 अगस्त 2024

छ्ग शासकीय वाहन चालक/ यांत्रिकी कर्मचारी संघ का गठन

 छ्ग शासकीय वाहन चालक/ यांत्रिकी कर्मचारी संघ का गठन 

रायपुर छ्ग शासकीय वाहन चालक/ यांत्रिकी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अनवर  अली ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला शाखा रायपुर वाहन चालक संघ  हेतु कार्यकारिणी  का गठन किया 


जिसमे संभागीय अध्यक्ष सेवा राम उईके  तथा देवानंद सिंह,एवं शशि सपहा को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया 


प्रवीण  बडवाईक को कोषाध्यक्ष पद पर चयन किया गया इनके अलावा संतोष लहरे सहायक कोषाध्यक्ष रूपेश कुमार, निर्मल सिंह कोर्राम, राधे श्याम गोयल, को संयुक्त,सचिव तथा अमृत यादव कार्यालय सचिव, सी. एच. रामू संगठन सचिव, दुर्गेश श्रीवास प्रचार सचिव, संतोष बाघे, उप सचिव, दुर्गा यादव वरिष्ठ सदस्य, विनोद त्रिपाठी प्रवक्ता, मुकेश वैष्णव वरिष्ठ सदस्यों का गठन किया गया छ्ग शासकीय वाहन चालक/यंत्रिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अनवर् अली ने सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए संघ को मजबूत बनाने हितों की रक्षा हेतु एकजुट कार्य करने हेतु अपील करते हुए   उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है

शुक्रवार, 9 अगस्त 2024

वर्ल्ड एलिफेन्ट डे पर हुआ व्याख्यान हाथियों,वन्य प्राणियों के आचार व्यवहार पर बनेगी योजनाएं - सी.सी.एफ.विश्वेश झा

वर्ल्ड एलिफेन्ट डे पर हुआ व्याख्यान हाथियों,वन्य प्राणियों के आचार व्यवहार पर बनेगी योजनाएं - सी.सी.एफ.विश्वेश झा 


अल्ताफ हुसैन की कलम से

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय) वनों का श्रृंगार वन्य प्राणी  होते है उनकी उपस्थिति मात्र से ही वनों की शोभा बढ़ जाती है आम जन वनों की प्रकृति छटा और सुंदर दृश्य देखने अभ्यारणय पहुँचते है सघन वन क्षेत्रों मे लाखों अनेक प्रजाति के पेड़ पौधे की विहंगम हरीतिमा  परिदृश्य गोचर मात्र के अहसास से संपूर्ण प्रकृति, पर्यावरण के साथ स्वमेव लीन हो जाते है  उनके वायु मंडल की भीनी भीनी  वातावरण पुष्प गमक के स्पर्शता से सर्वस्य हृदय को पुलकित और मनभावन बना देता है उनके देखने से ऐसा आभास होता है जैसे प्राकृतिक के विस्तारित कैंनवास मे ईश्वर रूपी कलाकार ने वनों के पेड़ पौधों की पत्तियों,शाखाएं,उसकी टहनी,रूपी कुची से सप्त रंग बिरंगे  परिकल्पना के आकार पर फल, फूल, और मनोहारी दृश्य को आकर्षक रंग से उकेर कर साकार कर दिया हो उस पर कीट पतंग, झींगुर की सिटी सी निकालने वाली तिक्षण आवाज जैसे गहन सन्नाटे की चिर खामोशी की तंद्रा भंग कर वातावरण को अल्हादित और मद मस्त कर देते हुए दूर किसी क्षेत्र से सुरही वाद्य यंत्र की शहनाई के कर्णप्रिय संगीत की धुन  और भाँति भाँति वन्य प्राणियों की नांद से मानों सुमधुर सुर ताल का संगम होने का अहसास करा रही हो उस पर चहकते  चिड़ियों की,,चीं चीं और कोयल, की कु हु कु हु,,,पपीहा,,,की पी हु पी,,हु ,, की संयुक्त चहक महक सरगम की मधुर लहरी मे  मनोहारी संगीत के मध्य वनों के मूल रहवासी  वन्य प्राणियों के द्वारा प्रकृति के रूप मे ईश्वरीय अनमोल वरदान का वन उत्सव के रूप मे मुक्त वातावरण के अभ्यारणय  क्षेत्र मे अल्हादित,आनंदित  की अनुभूति प्राप्त कर दोगुना उत्सव मना रहे हो उस पर पर्यटको द्वारा आवागमन करते समय  रंग बिरंगे भिन्न भिन्न प्रजाति की तितलियाँ पंख पसारे इधर से उधर यहां वहाँ इठलाती हुई उड़ उड़ कर नृत्य कर उत्सव मे रंग जमाने अपनी उपस्थिति और सहभागिता निभा रही हो पहले तो छ्ग प्रदेश के वन क्षेत्रों मे हिंसक शेर चीता की दहाड़, समूचे क्षेत्र मे गरजती थी अब कुछ वर्षों मे इसकी दहाड़ कुछ कम हो गई है उनके स्थान पर स्वच्छन्द विचरण करते हाथियों की चिंघाड़ की गर्जंन भी ऐसे मनोहारी वन क्षेत्र मे सुनाई देने लगी है मानों वन क्षेत्रों मे सदा दिन होने वाले महोत्सव मे प्रकृति ने उन्हे न्यौता दिया गया हो और वे भी विशाल काया के साथ वन क्षेत्र मे हो रहे वन उत्सव मे चिंघाड़ के साथ स्वछंद  रूप से कदम ताल मिला नृत्य कर रहे हो वैसे तो र्तमान  मे प्रदेश भर में छोटे बड़े हाथियों की  जनसंख्या लगभग तीन सौ पचहत्तर होना बताया गया है लेकिन लगातार उनके मूवमेंट से इस बार छ्ग का वन एवं परिवर्तन विभाग वर्ल्ड  एलीफेंट डे के रूप मे वृहद स्तर पर 12 अगस्त को मनाया गया है उक्त आयोजन  वर्ल्ड एलिफेन्ट डे भारत की किसी एक राज्य मे प्रति वर्ष 12 अगस्त को मनाया जाता है यह प्रथम अवसर है जब यह दायित्व छत्तीसगढ़ राज्य वन जलवायु एवं परिवर्तन विभाग को प्राप्त हुआ है  जिसमे केंद्रीय वन, जलवायु एवं परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथ्य मे वक्ता के रूप मे   उपस्थित हुए इनके अलावा छ्ग प्रदेश के मुख्य मंत्री,विष्णु देव साय वन मंत्री केदार कश्यप सहित बहुत से गणमान्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी गण  शिरकत की जिसमे प्रदेश भर के हाथियों के मूवमेंट, उनके रहवास पर विशेष विचार एवं चर्चा की गई


इस संदर्भ मे छ्ग प्रदेश उदंती सीतानदी  वाइल्ड लाइफ सी सी एफ विश्वेश कुमार झा से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि वर्ल्ड एलिफेन्ट डे छत्तीसगढ़ राज्य मे प्रथम बार , 12, अगस्त को नवा रायपुर अटल नगर मे आयोजित किया गया   जिसमे वन्य प्राणी हाथियों की लगातार  प्रदेश भर मे मूवमेंट,पर परिचर्च एवं विचार साझा करते हुए उनके रहवास,सुरक्षा, गत वर्ष की गतिविधियों पर भी चर्चा एवं विचार व्यक्त किए गए सी सी एफ विश्वेश कुमार झा बताते है कि गत वर्ष हाथियों के लगातार गतिविधियों पर राज्य वन विभाग ने क्या कदम उठाए गए है इस पर भी विस्तृत चर्चा की गई जबकि उन्होंने बताया कि बीते वर्ष कुछ अपवाद छोड़ दिया जाए तो हाथी मानव संघर्ष मे बहुत ही कम मौते हुई है इसका मूल कारण वे बताते है कि वन विभाग ने आधुनिक संसाधन सेटेलाइट, इंटरनेट,जीपीएस के मध्यम से उसका उपयोग करते हुए हाथी एप बनाया गया है जिससे उनके गतिविधियों की पल पल की जानकारी मिलते रहती है जिसे ग्रामीण क्षेत्र के सरपंच, जन प्रतिनिधि, पत्रकारों को मोबाइल से जोड़ दिया गया है जिसकी जानकारी समय के पूर्व मिलने से ग्राम वासी सजग हो जाते है इसके अलावा भी सीसीएफ विश्वेश झा आगे बताते है 12 अगस्त 2024 को आयोजित होने वाले  वर्ल्ड एलिफेंट डे के अवसर पर उपस्थित अतिथियों के समक्ष मूवी, ब्रोशर, एवं जन जागरूकता  लाने वाले योजनाओं को बताई जाएगी इसके अलावा विशेष अतिथियों ,हाथी मित्र, वन कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उन्हे स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र दे कर सम्मानित किया गया उन्हों ने हाथियों के रहवास के संदर्भ मे बताया कि दक्षिण भारत केरल जो छ्ग राज्य से भी छोटा राज्य है वहां हजारों की संख्या मे हाथी विचरण करते है परंतु वहां पर हाथियों से मौत न के बराबर होती है इसका मुख्य कारण  हाथी प्रभावित क्षेत्र मे जा कर मानव द्वारा विध्न नही डाला जाता और ना ही हाथी मानव आबादी क्षेत्र मे विचरण करते है वही हाथियों को कथित क्षेत्र मे मित्रवत व्यवहार किया जाता है उनके साथ छेड़ छाड़, या अन्य संसाधनों, फटाके, ढोल,बाजा,अग्नि, लाठी, शोर गुल आवाज़, इत्यादि से उन्हे उत्तेजित नही करते बल्कि उनके व्यवहार के अनुरूप आम जन दूरी बना कर रखते है वहीं दक्ष महावत के मध्यम से उन्हे प्रशिक्षित कर बहुत से रोजगार मूलक कार्य एवं आवागमन के लिए भी उपयोग लिए जाते है जिससे मानव एवं वन्य प्राणी हाथी संयुक्त रूप से परस्पर व्यवहार करते है छ्ग प्रदेश मे अनुमानित लगभग चार सौ हाथी विचरण कर रहे है जिनमे रायगढ़,अंबिकापुर, धरामजय गढ़, बिलासपुर, कोरबा, रायपुर के बलौदा बाजार, महासमुंद से लेकर महाराष्ट्र के गढ़चिरोली तक उनका मूवमेंट रहता है इसी वर्ष नया ठिकाना कांकेर जिला क्षेत्र मे भी हाथियों ने प्रवेश किया है कथन आशय यह है कि जहाँ इन्हे माकुल खान पान अनुकूल वातावरण  मिलने पर यह डेरा डाल देते है लोमरु प्रोजेक्ट मे हाथियों के संरक्षण, संवर्धन हेतु व्यापक कार्य किए गए जो आज भी वहाँ के हाथी सुरक्षित है वैसे ही मुक्त विचरण से छ्ग राज्य की आब ओ हवा उन्हे पसंद आ गई है तथा तीन सौ पचहत्तर हाथी अब भी यहाँ की मुक्त फ़िज़ा मे विचरण कर रहे है  सी सी एफ, विश्वेश कुमार झा आगे बताते है कि प्रदेश भर मे विचरण कर रहे हाथियों के संरक्षण, रहवास, चारागाह,पेयजल की समस्या, आम जन मे सुरक्षा, जैसे जगरूकता, विषयक बिंदु को लेकर एक वर्ष की कार्य योजना बनाई जाएगी और उनके खान पान वाले क्षेत्र जहाँ इनका प्रिय भोजन बांस के कोमल पत्ते, गन्ना, कदली वन, धान की पैदावार उपज कर के उन क्षेत्र को चिंहित कर चयनित स्थलों मे रहवास बनाने की योजना है  जिसका निराकरण आवश्यक है इस विषय पर भी वर्ल्ड एलीफेंट डे पर विशेष चर्चा इसका मुख्य बिंदु रखा गया है सी सी एफ.विश्वेश कुमार झा से आगे चर्चा करने पर वे बताते है कि छग प्रदेश में हाथियों के अलावा वन्य प्राणी शेर पर भी विचार किया जा रहा है बार नवापारा के रवान क्षेत्र मे छ माह से अधिक प्रवासी शेर उसी डायरेक्शन मे विचरण कर रहा है जिस पर विभाग कैमरे लगा कर पूरी नज़र रखे हुए है अब तक उस ने आम जन पर हमला कर जान माल की क्षति नही पहुंचाई है इसके लिए मध्य प्रदेश के सेवानिवृत अधिकारी के मार्ग दर्शन मे उसके मूवमेंट पर अध्यन किया गया है उनका कथन है कि शेर कथित रवान क्षेत्र को अपना रहवास बना लिया है आस पास के ग्रामीणों से भी चर्चा की गई और उन्हे आश्वस्त किया गया है  शेर के लिए शीघ्र अन्य राज्यों से शेरनी लाने की कवायद जारी है  छ्ग राज्य के वातावरण अनुरूप समीप राज्य मध्य प्रदेश, या महाराष्ट्र से शेरनी लाने की बात कही  है जो यहां के वातावरण मे ढल सकती है सी सी एफ. विश्वेश कुमार झा आगे बताते है कि जंगल सफारी मे आगंतुक विशेष  अतिथियों को भ्रमण कराया जाएगा जहाँ की समस्याओं से भी उन्हे अवगत कराया जाएगा उन्होंने बताया कि जंगल सफारी मे वन्य प्राणियों के उपचार गृह बनाना अति आवश्यक हो गया है जहाँ प्रदेश भर के घायल वन्य प्राणियों का सुचारु रूप से उपचार कर संचालन किया जा सके सभी इसके लिए अलग अलग प्रशिक्षित डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी साथ ही आधुनिक एक्स रे मशीन, अन्य उपकरण, लाने की बात कही गई है जहाँ सभी घायल वन्य प्राणियों का सही समय पर उपचार किया जा सके 12 अगस्त को वर्ल्ड एलिफेन्ट डे पर प्रदेश के मुख्य मंत्री, विष्णु देव साय, केंद्रीय मंत्री  भूपेंद्र यादव छ्ग के वन मंत्री केदार कश्यप, वन बल प्रमुख श्री निवास राव सहित उच्च  स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति मे बहुत सी योजनाओं पर अमली जामा पहनाया जाएगा 

शनिवार, 27 जुलाई 2024

छ्ग प्रदेश का अव्वल दर्जे का बागबाहरा खुर्द नर्सरी

 छ्ग प्रदेश का अव्वल दर्जे का बागबाहरा खुर्द नर्सरी


अलताफ़ हुसैन द्वारा 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)  नर्सरी अर्थात वह स्थान जहाँ बीज, से पेड़-पौधों को अंकुरित कर उसके विकास और ग्रोथ के लिए जलवायु, मिट्टी, आधुनिक,खाद, से उनके सघन देखरेख करना एवं लाखों की संख्या मे अबोध शिशु की भाँति उन पौधों का लालन,पालन करने की जगह ही नर्सरी कहलाता है वैसे तो छग वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मे अनेक भिन्न भिन्न 29 से अधिक वन मंडल कार्यालय स्थलों मे एक से बढ़कर एक आधुनिक नर्सरी का सफल संचालन एवं संपादित हो रहा है जिनमे हाइटेक नर्सरी के अलावा ग्रीन हाउस, जिसमे समान्य तापमान के साथ नर्सरी भी संचालित है परंतु महासमुंद वन मंडल क्षेत्रफल के हिसाब से सर्वाधिक बड़ा बागबाहरा परिक्षेत्र अपनी अनेक जैव विविधता,विस्तृत संसाधन,वन क्षेत्र के चारो ओर धार्मिक आस्था का केंद्र होने से इसकी पृथक पहचान निर्मित किए हुए है जो बागबाहरा परिक्षेत्र कार्यालय से मात्र पांच किलोमीटर के दूरी पर बागबाहरा खुर्द नर्सरी का सफल संचालन, एवं संपादान विगत कुछ वर्षों से किया जा रहा है जहाँ की नर्सरी के पौधे संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश मे बहुत ज्यादा लोकप्रिय माने जाते है एक प्रकार से बागबाहरा खुर्द नर्सरी छोटे भू भाग मे बड़ा धमाका के साथ बड़ा कार्य कर रहा है यह कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति वाली बात नही है        


  इस संदर्भ मे महासमुंद वन मण्डलाधिकारी पंकज राजपूत से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश मे बागबाहरा खुर्द जैसी ऐसी नर्सरी देखने को नही मिलेगा जहाँ पर दस से पंद्रह फीट ऊँचाई वाले भिन्न भिन्न प्रजाति के स्वस्थ्य पूर्ण पौधे दृष्टिगोचर होते हुए एक ही स्थान में नही दिखाई देंगे एक प्रकार से बागबाह्ररा खुर्द  नर्सरी के पौधे संपूर्ण प्रदेश के नर्सरी मे एक अलग ही पहचान निर्मित किए हुए है महासमुंद वन मंडलाधिकारी पंकज राजपूत आगे बताते है कि वर्ष 2017-2018 से उक्त नर्सरी का प्रारंभ तत्कालिक अधिकारियों द्वारा  किया गया था परंतु पांच छ वर्षों मे ही यहाँ के पौधे प्रदेश भर के वन क्षेत्रों, सहित पथ रोपण, खेत खलिहान, शाला कॉलेज परिसर, हाट बाजार, नगर पालिका, ग्राम पंचायतों के बंजर भूमि मैदानी भाग मे लहलहा रहे है और प्राकृतिक हरियाली का संदेश दे रहे है महासमुंद डीएफओ पंकज राजपूत आगे बताते है कि इस वर्ष बागबाहरा खुर्द नर्सरी मे त्रिवर्षीय पौधों का रोपण वर्ष 2021-2022 मे लगभग 5 हेक्टेयर भूमि मे एक लाख मिश्रित प्रजाति के पौधों का रोपण मनरेगा के तहत किया गया था जहा पर आसपास के तीस से उपर श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया तथा समय अनुसार श्रमिकों की संख्या मे कम ज्यादा किया जाता रहा है बागबाहरा खुर्द के उक्त नर्सरी मे त्रिवर्षीय नर्सरी निर्माण के पीछे महासमुंद वन मंडलाधिकारी पंकज राजपूत का कथन है कि छोटे मंझोले पौधों के  वितरण रोपण  स्थल मे बहुत सी समस्या खड़ी हो जाती है पश्चात रोपण से उनके ग्रोथ मे समय लगता है तथा प्रकृति आपदा जैसे असमय  की हवा, तूफान, या आम जन के रोपण की सुरक्षा मे कोताही अथवा चूक की वजह से पशुओं की चराई से उनके क्षतिग्रस्त होने पर इनके अस्तित्व पर खतरा मंडराता रहता है  इससे अनेक पौधे बढ़ने से  पूर्व ही ज़मींदोज होकर समाप्त हो जाते है इससे प्रकृति, एवं पर्यावरण का विस्तार नही हो पाता और प्रति वर्ष पर्यावरण, हरियाली प्रसार के लिए शासन द्वारा करोडो रुपये लगाकर विभाग द्वारा आम जन को निःशुक्ल पौधे वितरण कर  रोपे जाने वाले लाखों पौधे असुरक्षा, देखरेख के अभाव मे खरपतवार के मानिंद प्रायः लुप्त हो जाते है उन्होंने बताया बागबाहरा खुर्द नर्सरी का यह त्रैवार्षिकी नर्सरी जिसकी औसतन ऊँचाई दस से पंद्रह फीट पौधे स्वस्थ्य पूर्ण ऊँचाई लिए हुए है जो हमारे महासमुंद वन मंडल के अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्रा के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है तथा  निः शुल्क वितरण वाले ऐसे ऊँचाई वाले स्वस्थ्य पौधे के रोपण से भी यहां का आब ओ हवा वातावरण हरीतिमा युक्त  निर्मित होगा श्री पंकज राजपूत आगे बताते है कि सर्वहारा वर्ग जिनमे ग्रामीण, ग्राम पंचायत के सदस्य, जन प्रतिनिधि, स्कूल कॉलेज के प्रतिनिधि, एवं सामाजिक सस्थानो द्वारा निः शुल्क पौधे लेकर एक पौधा मां के नाम योजना का भरपूर लाभ उठा रहे है जिस तरह सुबह से संध्या तक से बाग बाहरा नर्सरी मे पौधा लेने के लिए मेला समान आम जन की भीड़ लगी रहती है उसे देखते हुए शीघ्र ही नर्सरी के पौधे समाप्त न हो जाए ऐसा प्रतीत होता दिखाई पड़ रहा है मगर इसके बावजूद भी नर्सरी मे नव पुलकित पौधों का रोपण जारी है जो चार से पांच फीट पौधे ग्रोथ कर चुके है श्री राजपूत ने आगे बताया कि संपूर्ण बीज का चयन वे स्वयं उनके द्वारा किया जाता है


 वही उपवन मंडलाधिकारी वहिद खान बताते है कि नर्सरी का निरंतर मॉनिटरिंग की जाती है तथा किसी भी प्रकार की कमोबेश होने पर तत्काल उन कमियों को दूर किया जाता है किसी भी नर्सरी का सर्वाधिक आवश्यकता पर्याप्त जल माना जाता है इसके लिए बागबाहरा खुर्द नर्सरी लक्की माना जाता है यहां का जल स्त्रोत इतना अधिक है कि 47 डिग्री सेल्सियस भीषण गर्मी मे भी जल की कमी नही हो पाती और संपूर्ण नर्सरी की भरपूर जल पिपासा उसी ट्यूब वेल के मध्यम से आपूर्ति की जाती है कहने को पांच हेक्टेयर भू भाग नर्सरी मे तीन ट्यूब वेल लगाएं गए है जो एक बड़े टंकी मे संग्रहित किया जाता है उसमे ही पाइप के मध्यम से  सड़क के अगल बगल दोनों स्थानों के नर्सरी मे जल सप्लाई से सिंचाई की जाती है महासमुंद उप वन मण्डलाधिकारी वहिद खान आगे बताते है कि नर्सरी मे लगे पौधे अब सघन वन सदृश्य दिखाई पड़ रहे है तथा लगातार मांग के अनुरूप पौधों का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है हमारे यहाँ सभी मिश्रित प्रजाति के पौधे यहाँ उपलब्ध है उनका दावा है कि जो पौधे प्रदेश भर के नर्सरी में कहीं नही मिल सकता वह बागबाहरा खुर्द नर्सरी मे बड़ी सहजता से प्राप्त हो सकता है  महासमुंद एसडीओ वाहिद खान का कथन है कि लगातार पौधे समाप्त होने की स्थिति मे मदर बेड मे पुनः रोपण कार्य बारहमासी द्रुत गति से जारी रहता है एक फीट की ऊँचाई आने तक उन्हे काले प्लास्टिक बैग मे काली  मिट्टी और दवा खाद मे उपचारित कर उसका रोपण किया जाता है पश्चात पृथक बेड मे पॉलीथीन बैग वाले पौधों को रख कर नियमित सुरक्षा देखरेख मे प्रतिदिन सिंचाई की जाती है दो से तीन माह पश्चात किशोर से युवा अवस्था मे पौधे ग्रोथ करने लगते है तथा अन्यंत्र स्थल मे उनका रोपण किया जा सकता है 


 इसके लिए परिक्षेत्राधिकारी समय समय पर मॉनिटरिंग कर नर्सरी की व्यवस्था पर नज़र जमाए रखते है बागबाहरा खुर्द नर्सरी मे वर्ष 2021-2022 मे रोपे गए पौधे इस वर्ष 2024 मे समय सीमा पर त्रि वर्षीय पौधों की हरियाली देख कर  बागबाहरा परिक्षेत्र के परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव काफी अल्हादित और गदगद है तथा दस से पंद्रह फीट ऊँचाई वाले पौधे देख कर समस्त क्षेत्र से जबरदस्त मांग बड़ी है बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव बताते है कि नर्सरी का लालन पालन करने मे एक शिशु की भाँति देखरेख करना पड़ता है समय पर मदर बेड से शिफ्टिंग करना निंदाई गुड़ाई, दवा,खाद, उपचार, जिनमे यूरिया, डी.ए.पी. खाद काली मिट्टी, रेती, गोबर खाद, का मिश्रण कर पॉलीथीन बैग में पौधा प्रति रोपण कर हस्तांतरित किया जाता है 


तथा नियमित सिंचाई व्यवस्थ किया जाता है इसके लिए आस पास के तीन ग्राम के श्रमिकों द्वारा नियमित वानिकी कार्य संपादित किया जाता है जिसका एवज मे उन्हे कलेक्टर दर पर 243 रुपये का पारिश्रमिक  भुगतान मनरेगा के तहत प्रदाय किया जाता है बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव आगे बताते है कि सिंचाई व्यवस्था हेतु  टंकी नुमा साढे सात मीटर मे तलघर निर्मित किया गया है जहाँ तीन  बोर का पर्याप्त जल संग्रहित किया जाता है पश्चात टिल्लू पंप के मध्यम से सभी वानिकी नर्सरी क्षेत्र मे  पाइप लाइन से सिंचाई की जाती है बागबाहरा परिक्षेत्राधिकारी लोकनाथ ध्रुव ने आगे बताया कि पांच हेक्टेयर  क्षेत्र मे अनेक नर्सरी मे परंपरागत वानिकी वाले पौधों का रोपण किया गया है


 परंतु खास बात यह है कि बागबाहरा खुर्द नर्सरी मे विलुप्त हो रहे अनेक प्रजाति के पौधों का रोपण जिनमे फलदार, फुलदार, सायादार, औषधि युक्त पौधे रोपे गए है  इनमें मुख्यतः आम, जाम, जामुन,चार, कुलियार,आँवला, बादाम, काजू,अनार, कुसुम,मदार, कुल्लू, मूंगा, रीठा, हर्रा, बेहड़ा,नीम, इमली, गंगा इमली, कटहल, नींबू,अर्जुन,पपीता, रक्त चंदन, सफेद चंदन,स्पेथोडीया,अकोल,बरगद, पीपल, प्रमुख रूप से उपलब्ध है


 बागबाहरा रेंजर लोकनाथ  ध्रुव आगे बताते है कि यहाँ नर्सरी मे वे पौधे जो कही अन्य नर्सरी मे नही मिलते वे यहां सहजता से उपलब्ध मिल जाते है उन्होंने बताया कि एक प्रकार से पांच हेक्टेयर छोटे भूभाग स्थान पर यहां बड़ा धमाका है इसके लिए भविष्य मे और विस्तार किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है यहाँ की समुचित व्यवस्था का प्रभार डिप्टी रेंजर मोती लाल साहू द्वारा किया जाता है साथ ही वन रक्षक तुलेश्वर् यादव का महत्व पूर्ण योगदान है जिनके देख रेखा मे नन्हे कोमल पौधे आकार लेकर फल फूल रहे है जो बागबाहरा पारिक्षेत्र के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है

गुरुवार, 18 जुलाई 2024

पाना बरस के मोहला जिला कार्यालय बनने से अव्यवस्था बड़ी-कर्मचारी हो रहे परेशान

 पाना बरस के मोहला जिला कार्यालय बनने से अव्यवस्था बड़ी-कर्मचारी हो रहे परेशान

रायपुर (फॉरेस्ट क्राइम न्यूज़) छ्ग प्रदेश मे बहुत से जिला निर्माण के परिसिमन पश्चात नवीन कार्यालय बनाए जाने से बहुत सी जटिल समस्याओं का सामना कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है जिसका सीधा अपवाद राजनांदगांव कार्यालय स्थित  वन विकास निगम पाना बरस परियोजना मंडल का स्पष्ट उदाहरण दिखाई पड़ रहा है जहाँ के कर्मचारी सहसा नवीन जिला मोहला मानपुर मे कार्यालय स्थानांतरण से उनके समक्ष राजनांदगांव से मोहला स्थित कार्यालय तक आवगमन की समस्या तो बनी ही हुई है वही आवास निवास की समस्या भी खड़ी हो गई है वर्तमान पाना बरस परियोजना मंडल कार्यालया राजनांदगांव के कर्मचारियों का कथन है कि वर्ष 2022 से जब प्रथम मोहला मानपुर कार्यालय का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था तभी वन विकास निगम के नवीन जिला कार्यालय मोहला मे भवन का निर्माण किया जाना जरूरी था परंतु तत्कालिक समय इसका निर्माण न कर इसी माह जुलाई 2024 मे आनन फानन कार्यालय निर्माण की हिटलरी फरमान से अनेक समस्या का सामना निगम कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है इसके लिए वन मंत्री से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित मे आवेदन दिया जा चुका है जबकि बता दें कि वन विकास निगम के नवीन जिला मोहला कार्यालय भवन  एक पुराने जर्जर गोदाम मे संचालित किया जा रहा है जहाँ की छत वर्षा मे टपक रही है 

      उल्लेखनीय है कि वन विकास निगम पाना बरस परि योजना मंडल के नवीन जिला कार्यालय मोहला मे संचालित की जा रही है वहां किसी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नही है कर्मचारी प्रति दिन अपने संसाधन से आवागमन कर रहे है जिन कर्मचारी के पास साधन नही है उसे राजनांदगांव  वापसी हेतु संध्या छ बजे के पश्चात कोई भी बस अथवा संसाधन की सुविधा उपलब्ध भी नही है वही किराए का मकान भी नही मिल रहा है ऐसे मे पचहत्तर  किलो मीटर का प्रतिदिन आवागमन करना बड़ा दुरूह हो गया है वन विकास निगम कर्मचारियों ने बताया कि पारिवारिक व्यवस्था भी छिन्न भिन्न हो गई है परिवार को यहाँ शिफ्ट नही किया जा सकता क्योंकि उनके शैक्षणिक कार्यों मे बाधा उत्पन्न हो रही है  साथ ही आवागमन जैसी बाधाओं से भी कार्यालयीन कार्यों मे सुचारु ढंग से कार्य नही हो पा रही है परंतु हिटलरी फरमान के चलते बगैर किसी सुविधा के  पानाबरस परियोजना मंडल कर्मचारियों को झोंक दिया गया इसके लिए भले ही कितनी भी विपदाओं से कार्य प्रभावित होता रहे

       इस संदर्भ मे वन विकास निगम कर्मचारियों का कथन है कि वविनि. छ्ग प्रदेश के बहुत से परियोजना मंडल कार्यालय मेआज भी लंबी दूरी वाले क्षेत्र से ही कार्य सुचारु  रूप से कार्यालय संचालित हो रहे है उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया बार परि योजनामंडल आज भी रायपुर स्थित देवेंद्र नगर से संचालित किया जा रहा है जबकि उसे महासमुंद जिला मे रहना चाहिए था सूरजपूर, बलाराम पुर को अंबिकापुर से संचालित किया जा रहा है अंतागढ, भानुप्रताप पुर को कांकेर  से संचालित किया जा रहा है फिर राजनांद गांव परि योजनमंडल के साथ ही दोयम दर्जे का सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? नवीन मोहला जिले मे इतनी अव्यवस्था होने के बावजूद भी राजनांद गांव  पानाबरस परीयोजना मंडल कार्यालय को ऐसे निर्जन स्थल मे जहां कोई सुविधा उपलब्ध नही है उसे क्यों शिफ्ट किया जा रहा है? इसके पीछे  किसी खास षडयंत्र की बु आना माना जा रहा है जबकि दबी ज़ुबान मे यह बात भी कही जा रही है कि राजनांद गांव स्थित 65 लाख का सर्व सुविधा युक्त निगम  भवन मे आई पी डी योजना कार्यालय बनाए जाने की सुगबुगाहट सूत्रों ने दावा किया है जहाँ दल्ली राजहरा एवं भिलाई जैसे  संयंत्र की योजनाओं का क्रियानव्यन किया जाएगा जबकि आई पी डी योजना कार्यालय एवं पाना बरस परियोजना मंडल का एक साथ सफल संचालन राजनांद गांव से भी किया जा सकता है परंतु उपर बैठे उच्च अधिकारी नवीन मोहला मानपुर जिला मे शिफ्ट करवा कर नए भवन इत्यादि का निर्माण करवा कर भ्रष्टाचार को अंजाम देंगे गौर तालाब है कि सर्वाधिक राजस्व देने वाला बार नवापारा परियोजना मंडल कार्यालय की बड़ी दयनीय स्थिति मे पहुँच चुकी है आज भी वहाँ के कार्यालय बड़ी चिंताजनक बनी हुई है उस पर आज तक कोई भी नवीन निर्माण भवन नही किया गया जबकि बहुत से पूर्व प्रबन्ध संचालकों ने भी इसके नवीन भवन निर्माण की बात कही गई थी परंतु सिर्फ बार परियोजना मंडल कार्यालय की यह योजना केवल कागजों के धरातल मे सिमट कर दम तोड़ चुकी है. 

सोमवार, 8 जुलाई 2024

भू जल, संरक्षण मृदा उपचार के लिए खैरागढ़ वन मंडल का बेहतर प्रयोग

 भू जल, संरक्षण मृदा उपचार के लिए खैरागढ़ वन मंडल का बेहतर प्रयोग 

अलताफ़ हुसैन की कलम से 

रायपुर (छत्तीसगढ़ वनोदय)  वन विभाग का मूल नाम के अनुरूप व्यापक बदलाव के  साथ अब वन विभाग का परिवर्तित नाम वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग कर दिया गया वन विभाग के पीछे जलवायु परिवर्तन करने की मंशा के पीछे बहुत बड़ा कारण भी अब दिखाई देने लगा है भारत देश ही नही बल्कि वैश्विक परिदृश्य मे लगातार बढ़ रहे धूल, धुंए, रसायनिक तत्वों के घुलनशील वायु की वजह से जल,जमीन,एवं प्राकृतिक, पर्यावरण, पूरी तरह से प्रदूषित हुआ है परिणामतः आकाशीय ओजान परत मे बड़ा छिद्र होने से पैरा बैंगनी के तिक्षण किरणों का दुष्प्रभाव  सीधे सारे मानव जीवन, सहित जलचर,नभचर, पशु पक्षी यहाँ तक पेड़,पौधे,वन, रहन सहन, एवं जलवायु, वातावरण मे व्यापक परिवर्तन हुआ है समान्य वर्षा के असंतुलित बेमौसम चक्र , ठंड की न मिलने वाली शीतलता का अहसास  लगभग विलुप्ततः के मुहाने मे  आकर खड़ी हो चुकी है ग्रीष्म ऋतु का यह हाल हो गया है कि जहाँ सदैव बारहमासी पुष्प की गमक से समान्य से मध्यम वातवरण महका करता था 


 वहाँ ग्रीष्म ऋतु की तीक्षण तपिश की चुभन अब आम जन को बड़ी सहजता से बारहमाह महसूस की जाती है वर्षा ऋतु परिवर्तन के बदलाव मे काश्त कारों ने अपने अनाज के खेती किसानी हेतु रोपित किए जाने वाले फसल काल चक्र मे व्यापक बदलाव कर दिया गया है उस पर भी खंड वर्षा से माकूल खेती किसानी नही हो पाती और आकाल दुकाल के प्राकृतिक आपदा का खामियाजा उन्हे भुगतना पड़ता है परिणामतः कई किसान कर्ज न देने की वजह से अकाल मृत्यु का निवाला बन जाते है या फिर डायन महंगाई के सामने दो जून के लिए आम जनता को अन्न व्यवस्था करने के लिए संघर्ष करते जूझना पड़ता है 


मानव समाज के लिए यह विडंबना शनैः शनैः सुरसा की भाँति मुह खोल कर खड़ी होते जा रही है इसका मूल कारण वनों का अनवरत विदोहन और हास होना माना जा रहा है इस संदर्भ मे एक वन विभाग के अनुभवी सेवानिवृत अधिकारी का कथन है कि आज हम पेयजल के लिए बंद बोतल पानी पैसे दे कर पी रहे है जो जल की अल्पता की प्रारंभिक शुरुआत हो चुकी है भविष्य मे वह दिन दूर नही जब हम जिस प्रकार बंद बोतल पानी क्रय कर पी रहे है वैसे ही वनों के लगातार विदोहन से ऑक्सिजन खरीद कर जीवन निर्वहन करना पड़ेगा  इसका साक्षात उदाहरण कुछ वर्ष पूर्व कोरोना काल मे पीड़ित मानव समाज ऑक्सिजन  के लिए तिल तिल कर के सांस के एक दम लेने के लिए मर रहा था वैसे ही वह समय भी आएगा जब ऑक्सिजन के लिए हम पीठ मे सांस लेने के लिए सिलेंडर लाद कर जीवन व्यतीत करने विवश होना पड़ेगा तब ही संपूर्ण मानव समाज को पेड़ पौधे, और वनों की महत्वता समझ आएगी यही वजह है कि वन विभाग ने उस मूल महती कारणों को ध्यान मे रखते हुए अपने मूल वन विभाग  नाम के साथ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को जोड़ कर वनों की हरियाली एवं जलवायू क्षेत्र मे द्रुत गति से जन कल्याणकारी  कार्य योजना बना कर संपूर्ण मानव समाज के लिए हितकारी  कार्य कर रहा है इस संदर्भ मे आम जन की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए उन्हे निःशुल्क लाखों पौधे वितरण कर धरती मे हरित क्रांति लाने प्रयासरत है ताकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र मे हरे भरे पेड़ पौधों के मध्यम से हरियाली, जलवायु संरक्षण कर स्वच्छ,एवं स्वस्थ्य पूर्ण वातावरण निर्मित किया जा सके 


  छ्ग प्रदेश का पूर्व मे दुर्ग जिले के अंतर्गत छोटी सी रियासत खैरागढ़ नाम से ही रजवाडा होने का आभास करवाता है वर्ष2021- 2022 मे खैरागढ़ नव निर्मित जिला के रूप अस्तित्व मे आया जहाँ चारों ओर सघन वन क्षेत्र के बावजूद भोगौलिक स्थिति मे ऊँचे नीचे पहाड़ और असमतल भूमि  से यहाँ का जल स्तर कभी एक स्थान पर समान्य रूप से टिक नही पाता और न ही संग्रहित हो पाता है कथन आशय यह है  कि  भू जल की भूगौलिक स्थिति उतनी सही नही मानी जाती जैसा क्षेत्र की व्यवस्था के अनुकूल होना चाहिए इसके लिए नव निर्मित खैरागढ़ वन मंडल के वर्तमान  वन मंडलाधिकारी आलोक कुमार तिवारी (भावसे) जो हमेशा कार्यों के प्रति निष्ठावान, एवं समर्पित रहे है तथा नवीन प्रयोग के साथ  जहाँ जहाँ सेवा काल मे जिस क्षेत्र मे रहे वहाँ जन कल्याणकारी योजनाओं से वे इतिहास रचने का प्रयास करते रहे है 
उनसे वनों की भैतिकी जलवायु हरियाली के संरक्षण, संवर्धन, को लेकर उनसे खैरागढ वन क्षेत्र को लेकर चर्चा की गई तो उन्होंने भू जल संरक्षण के लिए नवीनतम तकनीक  कार्यों की जानकारी प्रदान की उन्होंने बताया खैरागढ़ के वन खंड  लछना कक्ष क्रमांक 262  टेमरी कूप मे 267 से 180 हेकटेयर  क्षेत्र मे भू जल संग्रहण संरक्षण प्रबन्धन के अतिव्यापी कार्य किये गए है  भू मृदा की लगातार अवांछनीय परत के  वजह से जल संरक्षण मे बहुत सी कठिनाई आती थी और वर्षा जल का समुचित संरक्षण एवं संग्रहण नही हो पाता जिसके लिए मानव जीवन सहित पशु पक्षी वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की बड़ी समस्या तो बनती ही है साथ ही वनों के पेड़ पौधों का असमय हरियाली भी विलुप्त हो जाती है तथा बहुत से वनों के पौधे बीमार और निःशक्त प्रतीत होते है असमय खोखले अस्वस्थ पेड़ हवा के हल्के झोंके के बहाव मे ज़मीदोज हो जाते है साथ ही खेती किसानी  मे भी इसके दुष्प्रभाव परिलक्षित होते है


खैरागढ़ वन मंडलाधिकारी आलोक तिवारी भू मृदा के संदर्भ मे आगे बताते है कि भू मृदा भाग मे छ प्रकार के मृदा पाए जाते है इसको तकनीक सहायता से छिलाई कर समतल स्वरूप मे लाया जाता है जिससे वर्षा के जल कटाव की स्थिति बाधित होती है और जल संरक्षित होकर भू गर्भ मे अवशोषित होते रहता है डी एफ ओ खैरागढ़ आलोक कुमार तिवारी आगे बताते है कि भू मृदा  पृथ्वी के ऊपरी सतह पर मोटे, मध्यम और बारीक कार्बनिक तथा अकार्बनिक मिश्रित कणों से बनता है जो 'मृदा' मिट्टी कहलाता हैं। मृदा की ऊपरी सतह पर से मिट्टी हटाने पर प्राय:जो परत प्राप्त होती है उसे शैल चट्टान कहते है। कभी कभी थोड़ी गहराई पर ही चट्टान मिल जाती है। 'मृदा विज्ञान'  भौतिक भूगोल की एक प्रमुख शाखा है जिसमें मृदा के निर्माण, उसकी विशेषताओं एवं धरातल पर उसके वितरण का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता हैं। पृथ्वी की ऊपरी सतह के कणों को मृदा मिट्टी कहा जाता हैं वैसे तो छः प्रकार के मृदा पाए जाते हैं


जलोढ़ मृदा. काली मिट्टी/रेगुर मृदा.लाल मिट्टी और पीली मृदा तथा पर्वा या राकर.लैटेराइट,मृदा .मरुस्थली मृदा.वन मृदा होती है खैरागढ़ मे स्थित चार रेंज क्षेत्र मे 300 किलोमीटर से लेकर 80 किलो मीटर तक भिन्न भिन्न व्यापक भू मृदा कार्य कराए  गए है जिसमे 30 सेमी.से लेकर 40 सेमी. एवं कहीं कहीं 1मीटर से उपर भी मृदा उत्खनन कार्य संपादित किए गए है उन्होंने आगे बताया कि चार परिक्षेत्र रेंज मे इस दो माह मई जून तक संपादित होने कार्य हेतु आसपास ग्राम क्षेत्र के 300 से अधिक ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मूलक कार्य उपलब्ध कराया गया 




        खैरागढ़ वन मंडलाधिकारी आलोक कुमार तिवारी ने आगे बताया कि भू मृदा जल संरक्षण हेतु आधुनिक नेटवर्किंग  तकनीक गूगल का प्रयोग भी किया गया टेमरी परिक्षेत्र मे समुद्र की ऊँचाई 495 मीटर से 655 मीटर नाप कर पिरामिड नुमा (ए फ्रेम)  खिचकर औसत ढाल का निर्माण किया गया जिसकी ऊँचाई 842 मीटर चिल्फी घाटी के समान है इसमें कुछ नई एवं पुरानी प्राचीन पद्धति का प्रयोग भी किया गया जैसे चेक बोल्डर को करीने से बिछा कर लोहे के जाली से निर्माण कर गली और नाली का निर्माण किया गया जहाँ तालाब नुमा स्थल मे वर्षा जल संग्रहित किया जा सके 
उसी प्रकार मिट्टी एवं गिट्टी आदि से सुरक्षा की दृष्टिकोण से भू मृदा कार्य संपादित कर तीन से चार फीट गहराई वाली वुड गली नाले का निर्माण किया गया है ताकि तालाब पोखर मे वर्षा जल चिर काल तक संग्रहित रह सके तथा इसका लाभ वनों के पेड़ पौधों मे लंबे समय तक नमी बनी रह सके वही वनक्षेत्र के रिक्त मैदानी भू भाग मे आयाताकार, त्रिभुजाकर,चंद्राकार,गोलाकार, तीन से चार फीट गड्ढों का निर्माण कर जल संरक्षण कार्य किए गए है जहाँ वर्षा पश्चात जल संरक्षित हो रहा है  अगस्त 2024 के  रिमझिम सावन माह मे खैरागढ़ डीएफओ  आलोक कुमार तिवारी साहब स्वयं छाता लेकर वन क्षेत्रों मे नव निर्मित भू मृदा संपादित कार्यो का पुनः निरक्षण कर सुध ली तथा एक एक कार्यों का बड़ी बारीकी से निरक्षण कर  संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि प्राचीन पेड़ के आसपास भी यही प्रक्रिया अपनाई गई है इसका परिणाम यह आने लगा है कि वन्य प्राणियों को  पेयजल की समस्या से निजात मिलने लगी है   साथ ही आस पास के वन ग्राम क्षेत्र मे भी खेती, किसानी, फसल के लिए लाभ प्राप्त हो रहा है 


       खैरागढ़ डी.एफ.ओ.आलोक कुमार तिवारी  बताते है कि भू मृदा वन भूमि जो लेट्राइट पथरीली या अतिसंवेदन शील क्षेत्र है वहाँ संरचना उन्नयन कार्य किए गए है जिनमे कक्ष क्रमांक 262  वनखंड लछ्ना जिसका क्षेत्रफल 267.180 हेक्टेयर है दक्षिण मलौद उप वृत सांकरी एवं उपचार क्षेत्र टेमरी मे आता है जहैं गैबियन संरचना, एल.बी. सी.डी. चेकडेम्, पत्थर के कंटूर बंड, संरचनाओ का पुनःरुत्पादन कार्य किया गया उन्होंने बताया कुल 14 ग्रीड मे सर्वेक्षण पश्चात पुनरुत्पादन की ग्रिड वैल्यू 6 प्राप्त हुई 

जिसकी  प्रति हेक्टेयर वैल्यू 64 है तथा कुल रकबा 267.180 हेक्टेयर कार्य किए गए है उन्होंने बताया कुल तीन एरिया का चयन कर उपचारित किया गया जिनमे रीज एरिया मे 5 से 7 हेक्टेयर क्षेत्रफल मे उपचार किया गया , हेड एरिया चोटी के प्रारंभिक समतली ढलानी क्षेत्र मे  रिल्स का निर्माण कर  अर्दन गली के मध्यम से उपचार किया गया , वही रिचार्ज जोन  एरिया,  यह क्षेत्र 04 ब्लॉक मे विभाजित कर  जिसका ढलानी क्षेत्र 20 से 22 प्रतिशत क्षेत्र होता है  ऐसे रिचार्ज जोन मे एस.सी.टी., सी.सी.टी. , एल बी.सी.डी. , बी.डबत्यु. सी.डी. , तकनीक के मध्यम से किया गया 




 खैरागढ़ वन मंडलाधिकारी  आलोक कुमार तिवारी  बताते है कि वर्षा पश्चात उपरोक्त कार्यों से आशातीत सफल परिणाम सामने आए है जगह जगह जल का संग्रहण परिलक्षित हो रहा है इसी जुलाई माह मे 12 हजार पौधों का रोपण स्थानीय रिक्त भू भाग मे स्कूली छात्र छात्राएं, जन प्रतिनिधि की गरिमामयी उपस्थिति मे एक पौधा माँ के  नाम कार्यक्रम के मध्यम से फलदार, फूलदार, सायादार, मिश्रित प्रजाति के पौधे लगाया गया है 
इसके अलावा वन के रिक्त भू भाग मे भी लाखों की संख्या मे वन क्षेत्र के पाए जाने वाले बीजों का क्रय कर बीजा रोपण संपूर्ण खैरागढ़ परियोजना क्षेत्र मे किया जाएगा  जो वर्षा ऋतु मे ही नैसर्गिक, प्राकृतिक रूप से आकार लेंगे उन्होंने बताया कि इस संपूर्ण कार्य मे वन एवं जलवायु विभाग के कर्मठ जुझारू अधिकारी, कर्मचारी, कम समय मे कार्य संपादित किए है उसके लिए उन्होंने सराहना करते हुए सभी को बधाई दी जिनमे मुख्यतः सर्व श्री, मोना महेश्वरी एस डी ओ खैरागढ़, अमृत लाल खूंटे, एस.डी.ओ.  गंडई ,  रमेश टंडन परिक्षेत्राधिकारी खैरागढ़ , अशोक वैष्णव परिक्षेत्राधिकारी छुई खदान, , सलीम क़ुरैशी परिक्षेत्राधिकारी गंडई / साल्हेवारा परिक्षेत्र   एन.आर.एम.इंजीनियर  छबिलाल साहू एवं शेख शफी वन रक्षक परिक्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा